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Nepal Flood 2026: अपनों की तलाश में परिवार, अज्ञात शवों की पहचान के लिए DNA जांच शुरू

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नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र की भयावह तस्वीर सामने ला दी है। तेज बारिश, अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन ने कई इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया है। नेपाल और तिब्बत को मिलाकर इस आपदा में 800 से ज्यादा लोगों की मौत की रिपोर्ट सामने आई है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता हैं। राहत और बचाव दल लगातार प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की तलाश कर रहे हैं।

सबसे ज्यादा चिंता उन परिवारों को लेकर है, जिनके अपने कई दिनों से लापता हैं। दूसरी तरफ बड़ी संख्या में शव मिलने के कारण प्रशासन के सामने उनकी पहचान और अंतिम संस्कार की चुनौती भी खड़ी हो गई है।

नदियों के साथ बहकर दूर तक पहुंचे शव

Nepal Flood की रफ्तार इतनी तेज थी कि कई जगहों पर लोग और सामान पानी के साथ बह गए। कुछ शव घटनास्थल से काफी दूर तक नदियों के जरिए पहुंच गए। चितवन समेत कई इलाकों में लगातार शव बरामद किए जा रहे हैं।

नेपाल सरकार के 30 अगस्त के आधिकारिक अपडेट के अनुसार, 734 शव बरामद किए जा चुके थे और 2,498 लोग लापता थे। हालांकि अलग-अलग रिपोर्टों में नेपाल और तिब्बत को मिलाकर मृतकों और लापता लोगों की संख्या इससे ज्यादा बताई गई है। राहत अभियान जारी रहने के कारण आंकड़ों में बदलाव भी हो सकता है।

पहचान मुश्किल, अज्ञात शवों को दफनाने की तैयारी

इस आपदा के बाद प्रशासन के सामने सबसे बड़ी मुश्किल शवों की पहचान को लेकर है। कई शव लंबे समय तक पानी, कीचड़ और मलबे में रहने के कारण क्षतिग्रस्त हो गए हैं। ऐसे में परिवारों के लिए अपने लोगों की पहचान करना आसान नहीं है।

चितवन के देवघाट क्षेत्र में अज्ञात शवों को दफनाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। प्रशासन ने बड़ी संख्या में कब्रें तैयार कराई हैं। यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि अस्पतालों और शवगृहों में शव रखने की क्षमता लगातार कम पड़ रही थी।

हालांकि प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि दफनाए जाने वाले शवों का रिकॉर्ड सुरक्षित रहे।

DNA से होगी लापता लोगों की पहचान

अज्ञात शवों की पहचान के लिए DNA Sampling और Forensic Investigation पर खास जोर दिया जा रहा है। शवों की तस्वीरें, DNA सैंपल और उपलब्ध पहचान संबंधी जानकारी रिकॉर्ड की जा रही है।

इससे भविष्य में किसी परिवार के अपने लापता सदस्य का पता चलने पर DNA जांच के जरिए पहचान करने में मदद मिल सकती है। भारत की ओर से भी फॉरेंसिक विशेषज्ञ नेपाल की सहायता कर रहे हैं।

हजारों जवान Rescue Operation में जुटे

बाढ़ प्रभावित इलाकों में Nepal Army, Nepal Police और Armed Police Force के जवान राहत एवं बचाव अभियान में लगे हुए हैं। हेलिकॉप्टरों की मदद से दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचने और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम किया जा रहा है।

कई इलाकों में सड़कें टूट गई हैं और पुलों को भी नुकसान पहुंचा है। इसके कारण जमीन के रास्ते राहत पहुंचाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में हेलिकॉप्टर और स्थानीय बचाव दल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

खराब मौसम बना सबसे बड़ी चुनौती

Rescue Operation के दौरान खराब मौसम सबसे बड़ी बाधाओं में से एक बना हुआ है। लगातार बारिश, मलबा और भूस्खलन के कारण कई स्थानों तक पहुंचना मुश्किल है।

कुछ जगहों पर पानी का बहाव इतना तेज है कि बचावकर्मियों को भी जोखिम उठाना पड़ रहा है। प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और बरामद शवों की पहचान करना है।

हर परिवार को अपनों के मिलने का इंतजार

इस प्राकृतिक आपदा के बीच सबसे दर्दनाक तस्वीर उन परिवारों की है, जो अस्पतालों और पहचान केंद्रों के बाहर अपने रिश्तेदारों की जानकारी मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

किसी के पास सिर्फ एक फोटो है तो किसी के पास अपने लापता परिजन से जुड़ी कुछ पुरानी जानकारी। ऐसे में DNA जांच और फॉरेंसिक रिकॉर्ड परिवारों के लिए उम्मीद की एक महत्वपूर्ण कड़ी बने हुए हैं।

नेपाल में राहत और बचाव अभियान अभी जारी है। आने वाले दिनों में जब दुर्गम इलाकों तक टीमें पहुंचेंगी, तब इस आपदा से हुए कुल नुकसान और लापता लोगों की वास्तविक संख्या की तस्वीर और साफ हो सकती है।

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Yukta

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Cabinet

Modi Cabinet में बड़ा फेरबदल संभव! Vaishnaw-Gadkari को लेकर चर्चाएं, नए चेहरों की भी एंट्री

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में एक बार फिर Cabinet Reshuffle को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सत्ता के गलियारों में संभावित फेरबदल को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। चर्चा है कि सरकार में कुछ मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं, कुछ को नई जिम्मेदारी मिल सकती है और कई नए चेहरों को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, अभी तक सरकार की ओर से कैबिनेट में बदलाव को लेकर कोई आधिकारिक सूची या घोषणा सामने नहीं आई है। इसलिए सामने आ रही जानकारियों को फिलहाल संभावनाओं और राजनीतिक चर्चाओं के तौर पर ही देखा जा रहा है। Ashwini Vaishnaw की भूमिका पर सबकी नजर संभावित Modi Cabinet Reshuffle में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव का नाम खास तौर पर चर्चा में है। मौजूदा समय में उनके पास कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि फेरबदल हुआ तो उनकी भूमिका में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। वैष्णव को लेकर कहीं बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा है तो कहीं उनके विभागों में फेरबदल की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इन दावों की पुष्टि तभी होगी जब सरकार की ओर से आधिकारिक फैसला सामने आएगा। Nitin Gadkari के मंत्रालय को लेकर भी अटकलें केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को लेकर भी संभावित बदलाव की चर्चा ने राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा है। कुछ रिपोर्ट्स में उनके मंत्रालय में बदलाव की संभावना जताई गई है। गडकरी लंबे समय से सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय संभाल रहे हैं और देश में हाईवे तथा इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट उनके कार्यकाल में आगे बढ़े हैं। ऐसे में अगर उनके विभाग में बदलाव होता है तो यह कैबिनेट फेरबदल का अहम हिस्सा माना जाएगा। 17 नए चेहरों की चर्चा, लेकिन तस्वीर साफ नहीं कैबिनेट में संभावित बदलाव को लेकर 17 नए चेहरों को शामिल किए जाने की चर्चा भी सामने आई है। हालांकि, अलग-अलग रिपोर्ट्स में नए मंत्रियों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे हैं। यही वजह है कि फिलहाल 17 नए चेहरों वाली बात को अंतिम सूची मानना सही नहीं होगा। कौन-कौन से नेता मोदी सरकार में मंत्री बनेंगे, यह फैसला बीजेपी नेतृत्व और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा। कई मंत्रियों के विभागों में हो सकता है बदलाव मोदी सरकार में कुछ वरिष्ठ मंत्रियों के पास एक से ज्यादा मंत्रालयों की जिम्मेदारी है। ऐसे में संभावित फेरबदल के दौरान विभागों का बंटवारा दोबारा किया जा सकता है। माना जा रहा है कि सरकार प्रशासनिक कामकाज को ज्यादा प्रभावी बनाने के साथ-साथ राजनीतिक और क्षेत्रीय संतुलन पर भी ध्यान दे सकती है। नए चेहरों को मौका देने के साथ कुछ मौजूदा मंत्रियों की जिम्मेदारियों में भी बदलाव संभव है। Performance भी बन सकता है बड़ा आधार कैबिनेट में बदलाव की चर्चाओं के बीच मंत्रियों के कामकाज और उनके मंत्रालयों की Performance पर भी नजर होने की बात सामने आ रही है। मंत्रालयों की उपलब्धियां, लंबित योजनाएं और सरकार की प्राथमिकताओं को लेकर उनकी प्रगति जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हो सकते हैं। अगर फेरबदल होता है तो यह सिर्फ चेहरों को बदलने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकार के अगले चरण की प्राथमिकताओं का संकेत भी दे सकता है। चुनावी राज्यों को लेकर भी रणनीति आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए कैबिनेट में क्षेत्रीय और राजनीतिक संतुलन भी अहम हो सकता है। बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के बीच प्रतिनिधित्व को लेकर भी समीकरण बनाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। खासकर उन राज्यों पर नजर रहेगी जहां आने वाले समय में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में संभावित Cabinet Expansion में नए राजनीतिक चेहरों को जगह मिलने की चर्चा स्वाभाविक रूप से बढ़ गई है। आधिकारिक ऐलान के बाद ही खुलेगा पूरा पत्ता फिलहाल मोदी कैबिनेट में फेरबदल को लेकर चर्चाएं जरूर जोर पकड़ रही हैं, लेकिन Vaishnaw को प्रमोशन, Gadkari के मंत्रालय में बदलाव या 17 नए चेहरों जैसे दावों पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है। इसलिए इन खबरों को अभी संभावित बदलाव के तौर पर ही देखना बेहतर होगा। अगर केंद्र सरकार की ओर से Cabinet Reshuffle का ऐलान होता है, तभी यह साफ होगा कि किस मंत्री की जिम्मेदारी बदली गई और किन नए चेहरों को सरकार में जगह मिली। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Amarjeet Kaur

PM Modi को लेकर Amarjeet Kaur की टिप्पणी पर घमासान, BJP ने जताई कड़ी आपत्ति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर CPI नेता अमरजीत कौर (Amarjeet Kaur) की एक टिप्पणी ने सियासी माहौल गर्म कर दिया है। उनके बयान के सामने आने के बाद BJP ने कड़ा विरोध जताया और इसे लेकर माफी की मांग की। मामला अब सिर्फ बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे लेकर BJP और वामपंथी दलों के बीच जुबानी जंग भी तेज होती दिखाई दे रही है। अमरजीत कौर के बयान पर क्यों मचा विवाद? रिपोर्टों के मुताबिक, अमरजीत कौर ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर तीखी टिप्पणी की। उनके बयान को BJP ने आपत्तिजनक बताते हुए निशाने पर लिया। अमरजीत कौर की टिप्पणी सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में इस पर चर्चा तेज हो गई। BJP ने आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन प्रधानमंत्री के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल उचित नहीं है। BJP ने किया जोरदार पलटवार CPI नेता के बयान पर BJP की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। BJP प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने अमरजीत कौर के बयान की आलोचना करते हुए उनसे माफी मांगने की मांग की। BJP का कहना है कि राजनीतिक मतभेदों को व्यक्तिगत और आपत्तिजनक टिप्पणियों तक नहीं ले जाना चाहिए। पार्टी ने अमरजीत कौर की टिप्पणी को लेकर सार्वजनिक रूप से जवाब देने की बात कही। माफी मांगने से अमरजीत कौर का इनकार विवाद बढ़ने के बाद जब अमरजीत कौर से माफी को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने अपने रुख से पीछे हटने के संकेत नहीं दिए। रिपोर्टों के अनुसार, CPI नेता ने अपने बयान को लेकर सफाई दी और BJP की आपत्ति को खारिज किया। उनका तर्क है कि विपक्षी दलों को सरकार की नीतियों और प्रधानमंत्री के बयानों पर सवाल उठाने का पूरा अधिकार है। इसी बात को लेकर अब दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। बयान से फिर आमने-सामने BJP और Left अमरजीत कौर के बयान ने एक बार फिर BJP और Left parties के बीच राजनीतिक मतभेद को सामने ला दिया है। एक ओर BJP इसे लेकर माफी की मांग कर रही है, तो दूसरी ओर CPI अपने नेता के रुख को लेकर पीछे हटती नजर नहीं आ रही। राजनीति में तीखी बयानबाजी कोई नई बात नहीं है, लेकिन ऐसे बयानों को लेकर अक्सर सियासी विवाद बड़ा रूप ले लेते हैं। फिलहाल इस मामले में भी यही होता दिखाई दे रहा है। आगे क्या? अमरजीत कौर के बयान और BJP की प्रतिक्रिया के बाद यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गरमा सकता है। दोनों पक्षों की ओर से लगातार बयान आने की संभावना है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि विवाद यहीं थमता है या फिर यह बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Silver

Gold-Silver Rate में बड़ा बदलाव! चांदी ₹9,000 और सोना ₹4,500 तक टूटा

सोना (Gold) और चांदी (Silver) खरीदने वालों के लिए इन दिनों बाजार का रुख थोड़ा बदलता नजर आ रहा है। लगातार तेजी के बाद दोनों precious metals की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले दो कारोबारी दिनों में चांदी करीब ₹9,000 प्रति किलो तक सस्ती हुई, जबकि सोने के भाव में भी लगभग ₹4,500 तक की कमी दर्ज की गई। कीमती धातुओं के दाम में आई इस गिरावट के बीच PM Modi की Gold खरीदारी को लेकर की गई अपील भी चर्चा में है। हालांकि, बाजार के जानकारों के मुताबिक सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट को केवल इस अपील से जोड़ना सही नहीं होगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की स्थिति, ब्याज दरों की उम्मीद और वैश्विक तनाव जैसे कई factors कीमतों को प्रभावित करते हैं। Silver Price में तेज गिरावट चांदी में हालिया गिरावट ने निवेशकों को खास तौर पर चौंकाया है। कुछ ही कारोबारी सत्रों में इसकी कीमत में हजारों रुपये की कमी आई है। रिपोर्ट के अनुसार, 1 सितंबर को चांदी करीब ₹6,780 प्रति किलो तक नीचे आई थी। चांदी की कीमत पर घरेलू मांग के साथ-साथ international market का भी असर पड़ता है। इसलिए वैश्विक स्तर पर कीमतों में कमजोरी आने पर भारतीय बाजार में भी इसका असर दिखाई देता है। Gold Price भी हुआ कमजोर चांदी के साथ सोने के भाव में भी गिरावट आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना तीन सप्ताह से ज्यादा के निचले स्तर तक पहुंच गया। रिपोर्टों के अनुसार, Spot Gold करीब 4,321 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता दिखा। बाजार में अमेरिकी interest rates को लेकर बदलती उम्मीदों का भी असर सोने पर पड़ा है। आमतौर पर ब्याज दरें बढ़ने की संभावना बढ़ती है तो सोने जैसी बिना ब्याज वाली asset की मांग पर दबाव आ सकता है। PM Modi की Gold खरीदारी टालने की अपील क्यों? सोने की कीमतों के बीच PM Modi की Gold खरीदारी को लेकर अपील एक बार फिर चर्चा में है। प्रधानमंत्री पहले भी लोगों से गैर-जरूरी सोने की खरीदारी को कुछ समय के लिए टालने की अपील कर चुके हैं। इसके पीछे बड़ी वजह देश का Gold Import Bill और विदेशी मुद्रा पर पड़ने वाला दबाव है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से सोना मंगाकर पूरा करता है। ऐसे में Gold Import बढ़ने पर देश से बड़ी मात्रा में foreign exchange बाहर जाता है। रिपोर्टों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का Gold Import Bill करीब 72 अरब डॉलर रहा। क्या PM Modi की अपील से Gold-Silver सस्ता हुआ? यह सवाल इस समय सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है। लेकिन सोने और चांदी की कीमतों में आई गिरावट को केवल प्रधानमंत्री की अपील का असर मानना सही नहीं होगा। International market में चल रही हलचल, अमेरिकी monetary policy, डॉलर की चाल, महंगाई और पश्चिम एशिया की स्थिति जैसे कई factors कीमती धातुओं के भाव तय करते हैं। हालिया रिपोर्टों में भी सोने की कीमतों पर अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बनी उम्मीदों और पश्चिम एशिया के तनाव के असर का उल्लेख किया गया है। यानी PM Modi की अपील ने Gold को लेकर चर्चा जरूर बढ़ाई है, लेकिन बाजार में कीमतों की गिरावट के पीछे कई आर्थिक और वैश्विक कारण एक साथ काम कर रहे हैं। Jewellery Market पर भी नजर सोने की खरीदारी को लेकर अपील के बीच jewellery industry भी बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। अगर ग्राहक कुछ समय के लिए Gold खरीदने से दूरी बनाते हैं तो इसका असर ज्वैलरी कारोबार पर पड़ सकता है। खासकर त्योहारों और शादी के सीजन में सोने की मांग काफी महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में ज्वैलर्स के लिए आने वाले दिनों में Gold demand एक अहम factor रहने वाला है। आगे कैसी रहेगी Gold-Silver की चाल? अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सोना और चांदी आगे भी सस्ते होंगे या फिर दोबारा तेजी लौटेगी। इसका जवाब कई global factors पर निर्भर करेगा। अमेरिकी interest rate policy, डॉलर की मजबूती, crude oil prices, global inflation और geopolitical tensions आने वाले दिनों में Gold-Silver Price की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए अगर आप सोना या चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो केवल एक दिन की गिरावट देखकर फैसला लेने के बजाय बाजार के ताजा भाव और आगे के trend पर नजर रखना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
OBC

OBC Reservation पर बड़ा फैसला, Supreme Court ने पुराने Order पर रोक नहीं लगाई

OBC क्रीमी लेयर के नियमों को लेकर केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने मार्च 2026 के अपने फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इस फैसले के बाद अब खासतौर पर Civil Services Examination (CSE) 2025 के OBC उम्मीदवारों की सेवा आवंटन प्रक्रिया को लेकर स्थिति पर सबकी नजर है। मामला उस फैसले से जुड़ा है जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि OBC उम्मीदवार को क्रीमी लेयर में रखने का फैसला केवल उसके माता-पिता की Salary या Income देखकर नहीं किया जा सकता। माता-पिता की नौकरी, पद और सामाजिक स्थिति जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखना होगा। मार्च के फैसले में Supreme Court ने क्या कहा था? सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की पीठ ने 11 मार्च 2026 को OBC क्रीमी लेयर से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। अदालत ने माना कि सिर्फ माता-पिता की आय को आधार बनाकर किसी OBC उम्मीदवार को क्रीमी लेयर में डालना उचित नहीं है। यह मामला उन उम्मीदवारों से जुड़ा था, जिनके माता-पिता PSU और निजी क्षेत्र में काम करते थे। अदालत के सामने सवाल था कि क्या ऐसे कर्मचारियों की Salary को सरकारी कर्मचारियों की तरह क्रीमी लेयर तय करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। कोर्ट ने अपने फैसले में क्रीमी लेयर की अवधारणा को सामाजिक उन्नति से जोड़ते हुए कहा कि केवल Income को ही निर्णायक आधार नहीं बनाया जा सकता। CSE 2025 को लेकर क्यों बढ़ी चिंता? केंद्र सरकार की मुख्य चिंता CSE 2025 के परिणाम और Service Allocation को लेकर है। सरकार का कहना है कि मार्च में आया फैसला परीक्षा प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद आया था। ऐसे में अगर इसे पुराने मामलों पर लागू किया जाता है, तो कई उम्मीदवारों की OBC स्थिति और सेवा आवंटन पर असर पड़ सकता है। केंद्र ने इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट से इस फैसले को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है। सरकार का तर्क है कि OBC क्रीमी लेयर तय करने के लिए निजी क्षेत्र में काम करने वाले माता-पिता की Social Status का आकलन करने की एक समान व्यवस्था स्पष्ट नहीं है। Supreme Court ने अभी क्या किया? 1 सितंबर 2026 की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की याचिका पर विचार किया, लेकिन मार्च के फैसले पर Interim Stay देने से इनकार कर दिया। यानी फिलहाल पहले दिए गए फैसले पर रोक नहीं लगी है। मामले में केंद्र की दलीलों और उसके असर पर आगे सुनवाई होगी। इसका सीधा मतलब यह है कि OBC Creamy Layer से जुड़े मार्च के फैसले की स्थिति अभी बरकरार है। हालांकि CSE 2025 और उससे जुड़े Service Allocation पर इसे किस तरह लागू किया जाएगा, इस सवाल पर सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई अहम रहेगी। OBC उम्मीदवारों के लिए क्या है इसका मतलब? OBC आरक्षण का लाभ Non-Creamy Layer वर्ग के उम्मीदवारों को मिलता है। ऐसे में क्रीमी लेयर तय करने का तरीका सीधे तौर पर आरक्षण के लाभ से जुड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के मार्च के फैसले ने यह सवाल महत्वपूर्ण बना दिया है कि क्या किसी उम्मीदवार के माता-पिता की ज्यादा Salary अपने आप उसे क्रीमी लेयर में रखने के लिए पर्याप्त है। अदालत ने फिलहाल इस तरह के आकलन में सिर्फ आय के बजाय दूसरे सामाजिक और सेवा संबंधी पहलुओं को भी देखने की बात कही है। अब आगे की सुनवाई में यह साफ होना महत्वपूर्ण होगा कि मार्च 2026 का फैसला CSE 2025 के मामलों पर किस तरह लागू होगा। फिलहाल केंद्र की Stay की मांग स्वीकार नहीं हुई है और पुराने Supreme Court Order पर रोक नहीं लगी है। नजर अब अगली सुनवाई पर है, क्योंकि इस मामले का असर सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि OBC Creamy Layer के निर्धारण की प्रक्रिया को लेकर आगे की नीति पर भी पड़ सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Hathnikund Barrage

Yamuna में Army Boat डूबी, जवान लापता; Hathnikund Barrage पर Rescue Operation तेज

हरियाणा के यमुनानगर में हथिनीकुंड बैराज (Hathnikund Barrage) के पास मंगलवार को सेना के Training Exercise के दौरान बड़ा हादसा हो गया। यमुना नदी में अभ्यास के दौरान Army की मोटर बोट में तकनीकी खराबी आ गई और देखते ही देखते जवानों को तेज बहाव वाली नदी में उतरना पड़ा। हादसे के बाद जवानों की तलाश के लिए बड़े स्तर पर Search Operation शुरू किया गया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, बोट पर चार जवान सवार थे। इनमें से तीन जवान तैरकर सुरक्षित निकलने में कामयाब रहे, जबकि एक जवान के लापता होने की जानकारी पुलिस और कुछ प्रमुख रिपोर्टों में दी गई है। वहीं, कुछ अन्य रिपोर्टों में दो जवानों के लापता होने की बात कही गई है। ऐसे में लापता जवानों की सही संख्या को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। Technical Fault के बाद बिगड़ा पूरा मामला बताया जा रहा है कि सेना के जवान हथिनीकुंड बैराज के upstream क्षेत्र में नियमित Training और Mock Drill कर रहे थे। इसी दौरान मोटर बोट में तकनीकी समस्या आई। बोट के नियंत्रण में दिक्कत आने के बाद उसमें सवार जवान पानी में उतर गए। यमुना के तेज बहाव ने हालात को मुश्किल बना दिया। रिपोर्टों के अनुसार, तीन जवानों ने करीब 600 मीटर तक तैरकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचने में सफलता हासिल की। इसके बाद स्थानीय पुलिस और सेना की टीमें तुरंत Search Operation में जुट गईं। रातभर चला Search Operation घटना की सूचना मिलते ही सेना के साथ हरियाणा पुलिस और SDRF की टीमें मौके पर पहुंचीं। उत्तर प्रदेश की SDRF टीमों को भी तलाश अभियान में शामिल किया गया है। नदी के तेज बहाव और संभावित downstream क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए कई किलोमीटर तक सर्च किया जा रहा है। हथिनीकुंड बैराज से निकलने वाले पानी के बहाव को कम करने के लिए सिंचाई विभाग से भी मदद ली गई। अधिकारियों का मानना है कि पानी का बहाव नियंत्रित होने से Search and Rescue टीमों को नदी और नहर के हिस्सों में तलाश करने में आसानी होगी। Helicopter से भी निगरानी लापता जवानों की तलाश को तेज करने के लिए हवाई निगरानी का भी सहारा लिया गया है। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, downstream इलाके में Indian Air Force के हेलिकॉप्टरों से भी निगरानी की जा रही है। नदी के संभावित बहाव क्षेत्र में लगातार नजर रखी जा रही है। हादसे ने बढ़ाई चिंता सेना की Training Exercise के दौरान हुए इस हादसे से इलाके में चिंता का माहौल है। फिलहाल सबसे बड़ा फोकस लापता जवानों को तलाशने पर है। सेना, पुलिस, SDRF और प्रशासन की टीमें मिलकर अभियान चला रही हैं। हादसे की शुरुआती वजह मोटर बोट में आई तकनीकी खराबी बताई जा रही है। हालांकि, घटना की पूरी परिस्थितियों और सुरक्षा इंतजामों को लेकर विस्तृत जानकारी जांच के बाद ही सामने आने की उम्मीद है। अभी राहत की बात यह है कि कुछ जवान सुरक्षित बाहर निकल आए हैं। वहीं, लापता जवानों को लेकर Search Operation लगातार जारी है और प्रशासन की टीमें हर संभावित क्षेत्र में तलाश कर रही हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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