बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित लेक्चरर प्रवीण कुमार मिश्रा के खिलाफ की गई शिकायत पर जांच के आदेश दिए गए हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2019 में ट्रांसफर आदेश जारी होने के बावजूद उन्होंने नई शाला में जॉइन नहीं किया और करीब छह साल से पुरानी शाला में ही पदस्थ हैं।
शिकायतकर्ता नीलकमल यादव ने मामले में जिला शिक्षा कार्यालय के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए मिलीभगत का आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
2019 में हुआ था तबादला
शिकायत के मुताबिक, स्कूल शिक्षा विभाग ने 1 अक्टूबर 2019 को स्थानांतरण आदेश जारी किया था। इसमें बिल्हा ब्लॉक के सरकंडा स्थित गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल में पदस्थ गणित के लेक्चरर प्रवीण कुमार मिश्रा का नाम भी शामिल था।
आदेश के तहत उनका तबादला तखतपुर ब्लॉक के घुटकू स्थित हायर सेकेंडरी स्कूल में किया गया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि ट्रांसफर आदेश जारी होने के बावजूद उन्होंने नई शाला में कार्यभार ग्रहण नहीं किया।
इसके बाद नीलकमल यादव ने मामले की शिकायत कलेक्टर से की।
हाईकोर्ट में चुनौती देने का दावा
शिकायत में कहा गया है कि प्रवीण कुमार मिश्रा ने ट्रांसफर आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने संबंधित शिक्षक को विभाग के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करने और विभाग को निर्धारित अवधि में उस पर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे।
शिकायतकर्ता का दावा है कि अदालत की ओर से ट्रांसफर आदेश पर कोई स्थगन आदेश नहीं दिया गया था। इसके बावजूद शिक्षक ने नई शाला में कार्यभार ग्रहण नहीं किया।
छह साल तक पुरानी शाला में रहने का आरोप
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि लेक्चरर ने जिला शिक्षा कार्यालय के अधिकारियों से मिलीभगत कर स्थानांतरण आदेश का पालन नहीं किया और लगातार पुरानी पदस्थापना वाली शाला में सेवाएं देते रहे।
शिकायत में इसे विभागीय आदेश की अवहेलना बताते हुए संबंधित अधिकारियों और शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।

राज्यपाल पुरस्कार को लेकर भी उठे सवाल
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठाया जा रहा है कि जिस शिक्षक पर शासन के स्थानांतरण आदेश का पालन नहीं करने का आरोप है, उन्हें उत्कृष्ट सेवा के लिए राज्यपाल पुरस्कार कैसे दिया गया।
शिक्षा विभाग के जानकार अधिकारियों के मुताबिक, पुरस्कार के लिए नामांकन से पहले संबंधित कर्मचारी की सेवा संबंधी शिकायतों और रिकॉर्ड का परीक्षण किया जाना चाहिए। हालांकि, इस मामले में नामांकन से पहले किस स्तर पर परीक्षण किया गया, इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं।
अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि 2019 के स्थानांतरण आदेश के बाद शिक्षक की वास्तविक पदस्थापना और कार्यभार ग्रहण की स्थिति क्या थी तथा विभागीय रिकॉर्ड में इसे किस तरह दर्ज किया गया।
जांच अधिकारी बोले- जांच जारी है
मामले की जांच कर रहे सीनियर प्राचार्य राघवेंद्र गौरहा ने बताया कि लेक्चरर प्रवीण कुमार मिश्रा के खिलाफ जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि करीब छह साल पहले उनका ट्रांसफर किया गया था, लेकिन शिकायत के अनुसार उन्होंने स्थानांतरण आदेश का पालन नहीं किया।
फिलहाल जांच रिपोर्ट तैयार नहीं हुई है। ऐसे में आरोपों पर अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
छह महीने तक शिकायत लंबित रहने का आरोप
शिकायतकर्ता के मुताबिक, 20 फरवरी 2026 को लेक्चरर के खिलाफ शिकायत की गई थी। इसमें कथित अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए कार्रवाई की मांग की गई थी।
आरोप है कि शिकायत के बाद करीब छह महीने तक मामले में जांच आगे नहीं बढ़ी। इसी अवधि के दौरान संबंधित लेक्चरर का नाम राज्यपाल पुरस्कार के लिए नामित हुआ और उन्हें पुरस्कार भी प्रदान किया गया।
शिकायतकर्ता ने इस पर जिला शिक्षा कार्यालय की कार्यप्रणाली और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
CM ऑनलाइन शिकायत के बाद शुरू हुई कार्रवाई
शिकायतकर्ता का दावा है कि 20 फरवरी 2026 की शिकायत पर लंबे समय तक कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद CM ऑनलाइन में शिकायतकिए जाने पर विभाग सक्रिय हुआ और मामले में जांच की प्रक्रिया शुरू की गई।
अब जांच रिपोर्ट के आधार पर यह तय होगा कि 2019 के स्थानांतरण आदेश का पालन हुआ था या नहीं और यदि आदेश का पालन नहीं हुआ तो इसके लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है।
