भोपाल। अस्पतालों में बच्चे के जन्म या किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद 21 दिन के भीतर इसकी जानकारी सीआरएस (सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम) पोर्टल पर दर्ज कराना अनिवार्य है। इसके बावजूद कई अस्पताल समय पर रिकॉर्ड अपलोड नहीं कर रहे हैं या गलत जानकारी दर्ज कर रहे हैं। इसका खामियाजा लोगों को जन्म और मृत्यु प्रमाण-पत्र बनवाने के दौरान भुगतना पड़ता है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए भोपाल नगर निगम ने कार्रवाई की है। बीते 30 दिनों में पोर्टल पर एंट्री नहीं करने और गलत डेटा दर्ज करने वाले 77 अस्पतालों पर कुल 3.16 लाख रुपए की पेनाल्टी लगाई गई है।
दो साल पुराने मामलों में कोर्ट का आदेश जरूरी
अस्पतालों की लापरवाही के कारण कई बार परिजन प्रमाण-पत्र बनवाने नगर निगम पहुंचते हैं, तब उन्हें पता चलता है कि अस्पताल ने जन्म या मृत्यु का रिकॉर्ड पोर्टल पर दर्ज ही नहीं किया है।
सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को होती है, जो घटना के दो साल बाद प्रमाण-पत्र बनवाने पहुंचते हैं। नए नियम के मुताबिक, दो साल से पुराने मामलों में प्रमाण-पत्र जारी कराने के लिए अब कोर्ट का आदेश लाना अनिवार्य है। ऐसे में अस्पतालों की लापरवाही के कारण लोगों को कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने पड़ते हैं। बच्चों के स्कूल में एडमिशन के दौरान भी जन्म प्रमाण-पत्र नहीं होने से परेशानी होती है।
दो तरह की लापरवाही पर लगाया गया जुर्माना
जन्म-मृत्यु पंजीयन अधिनियम के तहत नगर निगम ने दो श्रेणियों में अस्पतालों पर कार्रवाई की है।
- 51 अस्पतालों पर 1 लाख रुपए का जुर्माना: इन अस्पतालों ने 100 मामलों में जन्म या मृत्यु का रिकॉर्ड सीआरएस पोर्टल पर दर्ज नहीं किया। प्रत्येक मामले में 1,000 रुपए के हिसाब से कुल 1 लाख रुपए की पेनाल्टी लगाई गई।
- 26 अस्पतालों पर 2.16 लाख रुपए का जुर्माना: इन अस्पतालों ने रिकॉर्ड में नाम गलत दर्ज किए थे। इसके लिए कुल 2 लाख 16 हजार रुपए की पेनाल्टी लगाई गई।
इस तरह कुल 77 अस्पतालों पर 3 लाख 16 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है।
2020 से था पेनाल्टी का प्रावधान, अब हुई सख्ती
अस्पतालों पर पेनाल्टी लगाने का नियम वर्ष 2020 से लागू था, लेकिन अधिकारियों की ओर से इस पर सख्ती नहीं की जा रही थी। हाल में नगर निगम के अधिकारियों ने पाया कि अस्पतालों की लापरवाही के कारण लोगों को प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बाद 16 और 18 सितंबर को निर्देश जारी कर कार्रवाई शुरू की गई।
अस्पतालों की जवाबदेही तय करना उद्देश्य: रजिस्ट्रार
नगर निगम की जन्म-मृत्यु शाखा के रजिस्ट्रार सत्यप्रकाश बड़गैया ने कहा कि दो साल पुराने मामलों में प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए कोर्ट का आदेश अनिवार्य है। ऐसे में यदि अस्पताल 21 दिन के भीतर पोर्टल पर एंट्री नहीं करते या रिकॉर्ड में गलतियां करते हैं, तो नागरिकों को बेवजह कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
उन्होंने कहा कि कार्रवाई का उद्देश्य अस्पतालों की जवाबदेही तय करना है, ताकि लोगों को जन्म और मृत्यु प्रमाण-पत्र बनवाने में अनावश्यक परेशानी न हो।

