मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में आज एक नया अध्याय जुड़ जायेगा शनिवार को वर्ली के NSCI डोम (NSCI Dome Worli) में आयोजित Vijay Rally Mumbai में राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने 20 साल बाद एक ही मंच साझा करेंगे । यह रैली महाराष्ट्र सरकार की विवादित तीन-भाषा नीति के खिलाफ जनता की जीत का जश्न मनाने के लिए आयोजित की गई हैं । मराठी अस्मिता (Marathi Pride) को केंद्र में रखते हुए यह आयोजन राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजनीतिक मंच पर 20 साल बाद साथ आए ठाकरे बंधु
साल 2005 के बाद यह पहला मौका होगा जब Shiv Sena UBT प्रमुख उद्धव ठाकरे और MNS अध्यक्ष राज ठाकरे किसी सार्वजनिक मंच पर एक साथ दिखेंगे । आखिरी बार दोनों नेता मालवण उपचुनाव के समय साथ नजर आए थे। 2006 में राज ठाकरे ने शिवसेना छोड़कर अपनी पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) बनाई थी।
क्यों खास है यह विजय रैली?
महाराष्ट्र सरकार ने अप्रैल 2025 में कक्षा 1 से 5 तक हिंदी भाषा को तीसरी अनिवार्य भाषा बनाने का आदेश जारी किया था। इसे मराठी अस्मिता पर हमला बताते हुए शिवसेना (UBT) और मनसे ने जोरदार विरोध किया। ठाणे, मुंबई और पुणे समेत राज्यभर में जगह-जगह Hindi Imposition Protest in Maharashtra के तहत पोस्टर फाड़े गए, जुलूस निकाले गए और पुतले जलाए गए। जन दबाव के चलते सरकार ने आखिरकार 29 जून को आदेश वापस ले लिया और हिंदी को वैकल्पिक भाषा बना दिया।
रैली से पहले ठाणे में जश्न
रैली की पूर्व संध्या पर ठाणे में मनसे और शिवसेना यूबीटी कार्यकर्ताओं ने मिलकर लड्डू बांटे और ढोल-ताशों के साथ जश्न मनाया। ठाणे के प्रसिद्ध एकविरा देवी मंदिर में कोली समाज द्वारा ठाकरे बंधुओं की एकता के लिए विशेष पूजा की गई।
कौन-कौन हो रहा हैं शामिल?
इस ऐतिहासिक रैली में एनसीपी (शरद पवार गुट) के नेता सुप्रिया सुले और जितेंद्र आव्हाड भी शामिल होंगे । कांग्रेस ने मंच साझा नहीं किया लेकिन मराठी भाषा के समर्थन में वैचारिक समर्थन जताया। साथ ही महाराष्ट्र के कला, साहित्य और नाटक जगत के कई प्रमुख नाम भी इस कार्यक्रम में उपस्थित रह सकते हैं ।
राजनीतिक असर: बीएमसी चुनाव पर नजर
2024 के लोकसभा चुनाव में Shiv Sena UBT ने 20 सीटें जीती थीं जबकि MNS का खाता नहीं खुला। आगामी BMC चुनाव 2025 में यह एकता दोनों दलों की राजनीतिक ताकत को पुनः स्थापित करने का प्रयास मानी जा रही है। विशेष रूप से आदित्य ठाकरे का विधानसभा क्षेत्र वर्ली इस रैली का केंद्र रहा।
कोई पार्टी झंडा नहीं, सिर्फ अस्मिता की बात
रैली में किसी भी पार्टी का झंडा, चिन्ह या चुनावी स्लोगन नहीं लगाया गया। केवल मराठी अस्मिता और जनता की जीत के जश्न पर फोकस किया गया, जिससे साफ है कि दोनों ठाकरे भाई जनता के मुद्दों पर एकजुट हो रहे हैं।
आगे क्या?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह एकजुटता बनी रहती है तो आगामी नगरपालिका और विधानसभा चुनावों में महाराष्ट्र की राजनीति में नया समीकरण बन सकता है।
