बिहार में मतदाता सूची के रिविजन के दौरान 11 हजार अज्ञात और 41 लाख संदिग्ध वोटर्स पाए गए। इसमें मृत, स्थानांतरित और फर्जी नाम शामिल हैं, जिससे फर्जी वोटिंग का खतरा गहराया है।
✍️ देश हरपल न्यूज़ डेस्क | पटना
21 जुलाई 2025
चुनाव आयोग की ओर से बिहार में वोटर लिस्ट रिविजन (Special Summary Revision – SSR) के दौरान जो आंकड़े सामने आए हैं, वे लोकतंत्र की नींव को हिलाने वाले हैं। आयोग ने खुलासा किया है कि जांच के दौरान 11 हजार ऐसे मतदाताओं की पहचान हुई है जो ‘अज्ञात’ हैं — यानी उनके पते पर कोई भी व्यक्ति नहीं मिला और न ही पड़ोसियों को उनके बारे में कोई जानकारी है।
सूत्रों के मुताबिक, इन संदिग्ध मतदाताओं के नाम बिहार के बाहर रहने वाले अवैध प्रवासियों से जुड़े हो सकते हैं। अधिकारियों ने इस बात की आशंका जताई है कि ये बांग्लादेशी या रोहिंग्या प्रवासी हो सकते हैं जो पड़ोसी राज्यों से बिहार में फर्जी पहचान के जरिए वोटर ID बनवाने में कामयाब हो गए।
“जब BLO इन मतदाताओं द्वारा दर्ज किए गए पते पर पहुंचे तो न तो वे लोग वहां पाए गए और न ही उनके बारे में किसी को जानकारी थी,” – TOI को एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया।
41.6 लाख वोटर्स भी संदिग्ध
चुनाव आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में लगभग 41.6 लाख वोटर ऐसे पाए गए जो अपने पते पर मौजूद नहीं थे, जिनमें शामिल हैं:
- 🔴 14.3 लाख मृतक मतदाता,
- 🟠 19.7 लाख स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाता,
- 🟡 7.5 लाख डुप्लीकेट नामांकन वाले वोटर्स,
- 🔵 और ये 11,000 अज्ञात मतदाता।
सवाल यह है कि यदि ये सभी नाम अब तक मतदाता सूची में मौजूद थे, तो क्या इनकी आड़ में चुनावों में फर्जी वोटिंग हो रही थी?
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 24 जून 2025 तक इन मृत मतदाताओं के नाम बिहार की वोटर लिस्ट में बने हुए थे। यह न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाता है।
क्या भ्रष्टाचार है इसकी जड़ में?
एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा,
“बहुत संभव है कि जांच के दौरान पारदर्शिता की कमी, और कहीं न कहीं स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार ने इस स्थिति को जन्म दिया हो।”
यह पहली बार नहीं है जब इस तरह के फर्जी वोटिंग के मामले सामने आए हैं। इससे पहले भी कई राज्यों में इस प्रकार के फर्जी नामांकन और डुप्लीकेट वोटर कार्ड की शिकायतें सामने आती रही हैं।
