महाराष्ट्र की राजनीति में Maharashtra Politics Rift एक बार फिर सुर्खियों में है। महायुति गठबंधन की दो मुख्य पार्टियों — शिंदे गुट की शिवसेना (Shiv Sena) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) — के बीच खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। हाल ही में हुई घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि सत्ता में साझेदारी के बावजूद दोनों दलों के बीच विश्वास की कमी लगातार बढ़ रही है।
Cabinet Meeting से शिवसेना मंत्रियों की दूरी – क्या है मामला?
हाल ही में आयोजित महाराष्ट्र कैबिनेट की एक अहम बैठक में शिंदे गुट के कई मंत्री शामिल नहीं हुए।
- इसे राजनीतिक जानकार शिवसेना की नाराजगी का बड़ा संकेत मान रहे हैं।
- बाद में शिवसेना मंत्री सीधे CM देवेंद्र फडनवीस से मिलने पहुंचे, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि नाराजगी वास्तविक है और इसे दिखाने का उद्देश्य भी सोचा-समझा था।
यह बहिष्कार बताता है कि गठबंधन के भीतर संवाद और भरोसा दोनों कमजोर हो रहे हैं।
फडनवीस–शिंदे असहमति पर विपक्ष का वार
शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत ने बड़ा दावा किया है कि:
- फडनवीस और एकनाथ शिंदे के बीच संवाद बेहद कम हो गया है,
- जिसके कारण “गवर्नेंस पैरालाइज्ड” होता दिख रहा है।
राउत ने यह भी आरोप लगाया कि शिंदे अभी भी राजनीतिक दबाव में हैं और भाजपा के बढ़ते प्रभुत्व से असहज महसूस कर रहे हैं।
सुरक्षा कवर में कटौती से बढ़ी दरार
शिंदे गुट के कई नेताओं की Y-Category Security में कटौती किए जाने पर विवाद और गहरा गया।
- शिवसेना इसे राजनीतिक दबाव मान रही है।
- वहीं BJP इसे नियमित “सिक्योरिटी रिव्यू” का हिस्सा बता रही है।
यह मुद्दा महायुति में अविश्वास की एक और परत जोड़ रहा है।
Local Body Elections: Seat-Sharing पर टकराव
निकट भविष्य में होने वाले नगर निगम और नगर परिषद चुनावों के लिए सीट शेयरिंग पर भी जोरदार मतभेद हैं।
- शिंदे गुट अधिक सीटों की मांग कर रहा है।
- BJP कई जगहों पर अकेले चुनाव लड़ने का दावा कर रही है।
थाणे जैसे संवेदनशील क्षेत्र में यह टकराव और गंभीर माना जा रहा है।
विकास और स्थानीय मुद्दों पर भी विवाद
रत्नागिरी जिले में अनधिकृत निर्माण को लेकर विधान परिषद में दोनों दलों में जोरदार बहस हुई।
यह स्पष्ट संकेत है कि विवाद केवल सत्ता और सीटों तक सीमित नहीं — स्थानीय विकास के मुद्दे भी संघर्ष का कारण बन रहे हैं।
गठबंधन में दरार के बावजूद चुनावी रणनीति जारी
नंदगांव नगर परिषद के चुनाव में शिवसेना-BJP ने मिलकर लड़ने का फैसला किया है।
हालांकि यह गठबंधन है, लेकिन राजनीतिक पंडित मानते हैं कि यह सिर्फ मजबूरी का साथ है, न कि स्थायी भरोसे का संकेत।
शिवसेना (शिंदे गुट) और BJP के बीच लगातार सामने आ रहे विवाद यह दिखाते हैं कि:
- गठबंधन की अंदरूनी लड़ाई तेज हो रही है,
- राजनीतिक निर्णयों और प्रशासनिक कामकाज पर इसका असर पड़ रहा है,
- आगामी चुनावी परिस्थितियों में यह खींचतान और भी बढ़ सकती है।
महाराष्ट्र की राजनीति अब एक ऐसे मोड़ पर है जहां Alliance Stability, Political Trust और Power Balance तीनों बड़े सवाल बने हुए हैं।
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