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भोपाल स्थित केरवा गिद्ध प्रजनन केन्द्र से 6 गिद्धों को कल पहली बार प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा गया

Vulture Conservation Mission: केरवा गिद्ध प्रजनन केन्द्र से 6 गिद्ध हुए Natural Habitat में Release, GPS Tracking से होगी 24×7 Monitoring भोपाल के नजदीक स्थित Kerwa Vulture Breeding Centre से पहली बार 6 दुर्लभ गिद्धों को natural habitat में release किया गया है। यह कदम मध्य प्रदेश में vulture conservation mission की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक प्रयास माना जा रहा है। इन सभी गिद्धों को अत्याधुनिक GPS trackers से लैस किया गया है, जिससे उनके मूवमेंट, व्यवहार और सुरक्षा की real-time monitoring की जा सकेगी। गिद्ध केवल एक पक्षी नहीं, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अत्यंत आवश्यक natural scavengers हैं। ये मृत जीवों को खाकर वातावरण को साफ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे zoonotic diseases के फैलने का खतरा भी कम होता है। उनके बिना पर्यावरणीय संतुलन गड़बड़ा सकता है, इसलिए उनका संरक्षण हमारी biodiversity security के लिए अनिवार्य है। गौरतलब है कि गत कुछ वर्षों में भारत में गिद्धों की संख्या में भारी गिरावट देखी गई, जिसका मुख्य कारण रहा एक पशु-औषधि Diclofenac, जो गिद्धों के लिए ज़हर साबित हुई। इसके बाद भारत सरकार और राज्य सरकारों ने इस दवा पर प्रतिबंध लगाते हुए vulture protection programmes पर विशेष ध्यान देना शुरू किया। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा केरवा स्थित इस गिद्ध प्रजनन केंद्र की स्थापना Indian Vulture Conservation Action Plan के अंतर्गत की गई थी। यहां वैज्ञानिक तरीके से गिद्धों को संरक्षित कर उनकी संख्या बढ़ाने का कार्य चल रहा है। अब जब 6 स्वस्थ गिद्धों को प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा गया है, तो यह संकेत है कि संरक्षण के प्रयास अब परिणाम देने लगे हैं। इस अभियान की विशेषता यह है कि इन गिद्धों की गतिविधियों को satellite-based tracking system के जरिए लगातार ट्रैक किया जाएगा। इससे न सिर्फ इनके जीवन के बारे में नए वैज्ञानिक तथ्य मिलेंगे, बल्कि अगर किसी भी प्रकार की खतरे की स्थिति उत्पन्न होती है, तो तुरंत सहायता पहुंचाई जा सकेगी। Desh Harpal इस पहल का स्वागत करता है और सरकार, वन विभाग, वाइल्डलाइफ विशेषज्ञों और सभी सहयोगियों को इस दिशा में निरंतर प्रयास करते रहने के लिए साधुवाद देता है। ऐसे कदम न केवल गिद्धों की वापसी का रास्ता खोलते हैं, बल्कि यह भी साबित करते हैं कि यदि इच्छाशक्ति और वैज्ञानिक दृष्टिकोण साथ हो, तो wildlife conservation सिर्फ एक सपना नहीं, बल्कि सच्चाई बन सकता है। भोपाल स्थित केरवा गिद्ध प्रजनन केन्द्र से 6 गिद्धों को कल पहली बार प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा गया
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Jagdeep Dhankhar, Vice President of India

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति की शक्तियों पर खींची ‘संवैधानिक लक्ष्मण रेखा’, उपराष्ट्रपति ने जताई नाराज़गी

Supreme Court vs President Powers Desh Harpal | 17 अप्रैल 2025By Digital Desk Supreme Court Judgement on Governor and President Powers के तहत सुप्रीम कोर्ट ने 8 अप्रैल को ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसमें राष्ट्रपति और राज्यपाल द्वारा विधेयकों (Bills) को मंजूरी देने की समयसीमा (Time Limit) तय की गई। अदालत ने साफ किया कि राज्य विधानसभा से पास होकर आए बिल को यदि राज्यपाल राष्ट्रपति के पास विचार के लिए भेजते हैं, तो राष्ट्रपति को Article 201 के तहत 3 महीने के भीतर निर्णय लेना अनिवार्य होगा। क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने? Judicial Review, No Pocket Veto, Mandatory Timeline और No Repeated Returns – इन चार बिंदुओं में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति की शक्तियों की स्पष्ट व्याख्या की: राज्यपालों के लिए भी बनी समय सीमा तमिलनाडु मामले में Supreme Court vs Governor Power की बहस में सुप्रीम कोर्ट ने 8 अप्रैल को स्पष्ट कर दिया था कि राज्यपाल के पास भी कोई Absolute Veto Power नहीं है। उन्हें विधानसभा के पास किए गए किसी भी बिल पर अधिकतम एक महीने के भीतर निर्णय देना होगा। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा, “राज्यपाल सिर्फ प्रतीकात्मक पद नहीं हैं, लेकिन वे राज्य सरकार की सलाह से ही निर्णय ले सकते हैं।” उपराष्ट्रपति की नाराज़गी इस फैसले के बाद Vice President Jagdeep Dhankhar ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा: “हम ऐसा सिस्टम नहीं बना सकते जहां अदालतें राष्ट्रपति को निर्देश दें। Article 142 के तहत मिला विशेष अधिकार न्यायपालिका के पास 24×7 available nuclear missile जैसा बन गया है।” उपराष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि अगर संस्थाएं अपनी सीमाएं लांघने लगें तो संविधान के संतुलन को खतरा हो सकता है। “कोई भी संस्था संविधान से ऊपर नहीं है। लोकतंत्र में चुनी हुई सरकार सर्वोच्च होती है,” उन्होंने कहा। क्या है Article 201 और Article 142? कपिल सिब्बल ने की तारीफ पूर्व कानून मंत्री Kapil Sibal ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले की सराहना की। उन्होंने कहा कि अब केंद्र सरकार जानबूझकर राज्य सरकारों के महत्वपूर्ण बिलों को रोके नहीं रख सकेगी। सुप्रीम कोर्ट का ये रुख federal structure और cooperative federalism को मजबूत करता है। तमिलनाडु केस का बैकग्राउंड सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में तमिलनाडु सरकार ने आरोप लगाया कि राज्यपाल R.N. Ravi ने 10 जरूरी बिलों को रोक रखा है। इनमें से कई बिल विधानसभा ने दोबारा पास किए थे, लेकिन राज्यपाल ने उन पर कोई कार्रवाई नहीं की। R.N. Ravi पूर्व IPS अधिकारी रहे हैं और 2021 से तमिलनाडु के राज्यपाल हैं। निष्कर्ष: Supreme Court ने राष्ट्रपति और राज्यपाल की शक्तियों पर ऐतिहासिक टिप्पणी की है, जो संविधान की व्याख्या और लोकतंत्र के संतुलन की दिशा में एक निर्णायक कदम है। हालांकि यह फैसला केंद्र-राज्य संबंधों को नई बहस में डाल सकता है, परंतु इससे transparency, accountability और timely governance को बल मिलेगा।
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SupremeCourtHearingControversy; Supreme Court

वक्फ कानून पर SC से स्टे नहीं, सरकार को 7 दिन का समय , डिनोटिफाई करने और नई नियुक्तियों पर रहेगी रोक

Waqf Act Hearing | Supreme Court Latest Update | Centre Seeks Time नई दिल्लीl देश हरपल रिपोर्ट — Waqf Act को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन अहम सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार ने Supreme Court से जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। Chief Justice of India (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक अगला आदेश नहीं आता, तब तक status quo यानी वर्तमान स्थिति बनी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि केंद्र सरकार जब तक अपना जवाब दाखिल नहीं करती, तब तक Waqf Board में किसी भी प्रकार की नियुक्ति नहीं की जाएगी। साथ ही यह भी साफ किया कि waqf properties को लेकर किसी भी Collector द्वारा कोई नया आदेश पारित नहीं होगा। Chief Justice ने कहा, “जब तक अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक बोर्ड या काउंसिल में कोई नई नियुक्ति नहीं हो सकती। और अगर किसी संपत्ति का पंजीकरण 1995 Waqf Act के तहत हुआ है, तो उन संपत्तियों को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।” CJI ने यह भी कहा कि कार्यपालिका को प्रशासनिक निर्णय लेने का अधिकार है जबकि न्यायपालिका न्यायिक फैसले लेती है। इसी संदर्भ में उन्होंने 2013 Waqf Amendment Act को चुनौती देने वाली याचिका पर कुछ विशेष पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने की अनुमति दी है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारें और संबंधित वक्फ बोर्ड को 7 दिनों के भीतर अपना official response दाखिल करना होगा। इसके बाद याचिकाकर्ताओं को केवल 5 याचिकाएं दाखिल करने की अनुमति होगी। इस पूरे मामले को कोर्ट ने “विशेष प्रकृति” का बताते हुए कहा है कि सुनवाई निष्पक्ष और त्वरित होगी। फिलहाल, वक्फ संपत्तियों की मौजूदा स्थिति यथावत बनी रहेगी और किसी भी तरह का नया प्रशासनिक या कानूनी हस्तक्षेप रोक दिया गया है। Desh Harpal की विशेष रिपोर्ट में हम आने वाले दिनों में केंद्र सरकार और वक्फ बोर्ड के जवाबों की विस्तृत जानकारी भी देंगे। यह मामला न सिर्फ कानूनी बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण बनता जा रहा है।
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MP Board 10th/12th Result 2025

MP Board 10th 12th Result कब आएगा ?

MP Board Result Date 2025: जानिए पूरी जानकारी MP Board 10th 12th Result 2025 का इंतजार कर रहे लाखों छात्रों के लिए राहत की खबर है। WMPBSE MP Board Result Date को लेकर लगातार अपडेट्स आ रहे हैं। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, MP Board Result 2025 की तारीख की घोषणा अगले हफ्ते तक की जा सकती है। जिन छात्रों ने कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं दी हैं, वे अपने MP Board 10th 12th Result 2025 को देखने के लिए ऑफिशियल वेबसाइट mpresults.nic.in पर नजर बनाए रखें। इसके अलावा, छात्रों की सुविधा के लिए Desh Harpal न्यूज पोर्टल पर भी रिजल्ट चेक करने का विकल्प उपलब्ध रहेगा। स्टूडेंट्स को www.deshharpal.com पर जाकर “MP Board Result 2025” लिंक पर क्लिक करना होगा। इसके बाद अपना रोल नंबर और अन्य जरूरी जानकारी भरकर परिणाम देख सकेंगे। कब तक आ सकता है MP Board Result 2025? सूत्रों की मानें तो MPBSE (Madhya Pradesh Board of Secondary Education) द्वारा कक्षा 10वीं और 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन लगभग पूरा हो चुका है। अब रिजल्ट जारी करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि MP Board Result 2025 अप्रैल के अंत तक या फिर मई की शुरुआत में घोषित कर दिया जाएगा। बोर्ड की ओर से हालांकि अभी तक रिजल्ट डेट को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे लगातार mpresults.nic.in और www.deshharpal.com पर अपडेट चेक करते रहें। रिजल्ट चेक करने के लिए क्या करें? Desh Harpal आपके लिए MP Board से जुड़ी हर जरूरी अपडेट सबसे पहले लाता रहेगा। रिजल्ट से जुड़ी किसी भी नई जानकारी के लिए हमारे साथ बने रहें।
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SupremeCourtHearingControversy; Supreme Court

Waqf Act SC Hearing LIVE: संसद ने हिंदुओं पर भी कानून बनाया है… सिब्बल की दलीलों पर सुप्रीम कोर्ट की तीखी प्रतिक्रिया

Desh Harpal Special Report| नई दिल्ली | 16 अप्रैल 2025 Waqf Act SC Hearing LIVE – सुप्रीम कोर्ट में आज Waqf Act को लेकर एक बेहद अहम सुनवाई हुई, जिसमें वकील कपिल सिब्बल ने केंद्र सरकार के हालिया Waqf Act Amendment पर सवाल उठाए। उन्होंने इसे एकतरफा और धर्म विशेष को लक्षित करने वाला बताया। लेकिन कोर्ट ने सिब्बल की दलीलों पर तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा, “Parliament ने केवल मुसलमानों के लिए नहीं, हिंदुओं के लिए भी कानून बनाए हैं।“ क्या है Waqf Act Amendment? केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में Waqf Act 1995 में संशोधन किया गया है। यह संशोधन 5 अप्रैल 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हस्ताक्षर के बाद कानून बना और तुरंत प्रभाव से लागू भी हो गया। संशोधित कानून के तहत Waqf properties के रिकॉर्ड, उनके उपयोग और प्रबंधन को लेकर सख्त प्रावधान किए गए हैं। सरकार का कहना है कि यह बदलाव पारदर्शिता और accountability सुनिश्चित करने के लिए जरूरी था। विरोध और विवाद Waqf Act में बदलाव के बाद देश के कुछ हिस्सों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए। कई जगहों पर violent clashes की खबरें भी आईं। मुस्लिम समुदाय के कुछ संगठनों ने आरोप लगाया कि यह कानून उनकी संपत्ति और धार्मिक अधिकारों को सीमित करता है। कोर्ट में क्या हुआ? आज की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा कि क्या इस कानून से किसी खास धर्म को निशाना बनाया गया है? जब सिब्बल ने इसे “धर्म विशेष को नियंत्रित करने वाला कानून” कहा, तो कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा: “Parliament ने हिंदू धर्म के लिए भी कानून बनाए हैं जैसे Hindu Religious and Charitable Endowments Act। इसलिए यह कहना गलत है कि केवल एक धर्म के खिलाफ कानून बनाया जा रहा है।“ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने कहा कि कानून की वैधता को धर्म के चश्मे से नहीं देखा जा सकता। सरकार का पक्ष केंद्र सरकार की ओर से Solicitor General Tushar Mehta ने कहा कि संशोधन का मकसद किसी धर्म को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि Waqf Boards की जवाबदेही तय करना है। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार Waqf properties के दुरुपयोग की शिकायतें आई हैं, जिन्हें रोकना आवश्यक है। आगे की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को दो सप्ताह के भीतर अपने विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है और मामले की अगली सुनवाई के लिए 2 मई 2025 की तारीख तय की है। Desh Harpal इस संवेदनशील मामले की हर अपडेट आपको LIVE और निष्पक्ष रूप में पहुंचाता रहेगा। Waqf Act से जुड़े सामाजिक, कानूनी और धार्मिक प्रभावों पर हम जल्द ही एक विशेष रिपोर्ट भी लेकर आएंगे।
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Bihar Politics: Tejashwi Yadav ने Mahagathbandhan

Tejashwi Yadav CM Face , सीट शेयरिंग पर खोले पत्ते, Delhi में Congress-RJD की बैठक के बाद सियासत गरमाई

Bihar Politics: Tejashwi Yadav, Rahul gandhi Mahagathbandhan Bihar की राजनीति में एक बार फिर उबाल है। 2025 के विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, Mahagathbandhan के अंदर चल रही खींचतान और रणनीतियों की परतें खुलने लगी हैं। इसी सिलसिले में दिल्ली में Congress और RJD के बीच एक अहम बैठक हुई जिसमें Mallikarjun Kharge, Rahul Gandhi और Tejashwi Yadav जैसे बड़े नेता शामिल हुए। बैठक के बाद जब मीडिया ने Tejashwi Yadav से पूछा कि Mahagathbandhan का CM Face कौन होगा, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया— “बातचीत के बाद सारी चीज़ें सामने आ जाएंगी।” इसके साथ ही उन्होंने जोड़ा कि फॉर्मूला 70 पर चर्चा चल रही है और बहुत जल्द इसका खुलासा होगा। क्या है फॉर्मूला 70? बताया जा रहा है कि ‘फॉर्मूला 70’ का मतलब यह हो सकता है कि RJD 70 से ज़्यादा सीटें अपने पास रखेगा और बाकी सीटों पर Congress, Left पार्टियां, VIP और अन्य सहयोगी दलों के साथ समझौता होगा। लेकिन इसी फॉर्मूले को लेकर अभी भी महागठबंधन के भीतर seat sharing पर रस्साकशी बनी हुई है। Delhi में मंथन, Patna में समीकरण Patna में जहां पार्टी वर्कर्स और जमीनी स्तर पर संगठन एक्टिव हो चुका है, वहीं Delhi में मंथन जारी है। Congress चाहती है कि उसे पिछले चुनाव की तुलना में ज्यादा सीटें मिलें, वहीं RJD का दावा है कि वह सबसे बड़ी पार्टी है और उसी के पास नेतृत्व रहना चाहिए। कुर्बानी कौन देगा? बात सिर्फ सीटों की नहीं, बल्कि leadership की भी है। सूत्रों के मुताबिक Congress यह संकेत दे रही है कि अगर उसे ज़्यादा सीटें नहीं मिलतीं, तो वह campaign में अपने बड़े चेहरों को झोंकने से परहेज़ कर सकती है। वहीं RJD का फोकस Tejashwi Yadav को ही एकमात्र CM Face के तौर पर प्रोजेक्ट करने पर है। Left और VIP का रोल Mahagathbandhan में Left पार्टियां और VIP जैसे दल भी शामिल हैं। इनकी मांगें भी equation को complex बना रही हैं। Left पार्टियां जनाधार के आधार पर अधिक सीटें चाहती हैं, जबकि VIP जैसी छोटी पार्टियां symbolic सीटों से संतुष्ट नहीं हैं। Desh Harpal की Exclusive जानकारी के अनुसार, Mallikarjun Kharge और Rahul Gandhi ने Tejashwi Yadav को भरोसा दिलाया है कि सभी दलों की सहमति से एक common minimum programme और CM Face पर फैसला लिया जाएगा। लेकिन सीट शेयरिंग को लेकर आखिरी निर्णय मई के पहले हफ्ते तक आ सकता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या Bihar में Mahagathbandhan अपने अंदरुनी मतभेद सुलझाकर एक united front के रूप में सामने आएगा या फिर सीटों और leadership की ‘कुर्बानी’ की राजनीति उसे कमजोर कर देगी। Desh Harpal आपके लिए आगे भी इस developing political story पर नजर बनाए रखेगा।
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Bhopal

भोपाल के एक युवा ने ChatGPT से यह सवाल किया कि “यदि भोपाल पर अंग्रेजों का कब्जा नहीं होता और नवाबों का ही शासन होता तो भोपाल कैसा दिखता?”

भोपाल, 15 अप्रैल | देश हरपल ब्यूरो भोपाल के एक युवा द्वारा की गई एक साधारण सी कल्पना आधारित पूछताछ अब चर्चा का विषय बन चुकी है। कुछ दिन पहले इस युवा ने दुनिया के सबसे लोकप्रिय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल ChatGPT से यह सवाल किया कि “यदि भोपाल पर अंग्रेजों का कब्जा नहीं होता और नवाबों का ही शासन बना रहता तो भोपाल कैसा दिखता?” इस सवाल के जवाब में AI ने एक काल्पनिक छवि तैयार की, जिसमें भोपाल को पूरी तरह एक इस्लामिक राजशाही प्रभाव वाले शहर की तरह दिखाया गया है। तस्वीर में ऊँची-ऊँची मीनारें, विशाल गुम्बद वाली मस्जिदें, मुग़ल शैली की इमारतें और हरियाली लिए हरे रंग के गुंबद प्रमुख रूप से दिखाई दे रहे हैं। हालांकि AI द्वारा बनाई गई यह तस्वीर कल्पनाशीलता पर आधारित है, लेकिन इसमें भोपाल की विविध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का अभाव महसूस किया गया। शहर के कई नागरिकों और इतिहास के जानकारों का कहना है कि भोपाल की पहचान केवल नवाबी शासन या मुग़ल वास्तुकला तक सीमित नहीं रही है। भोपाल की वास्तुकला में जहाँ एक ओर ताज-उल-मस्जिद जैसी ऐतिहासिक मस्जिदें हैं, वहीं भारत भवन, भीम बेटका की गुफाएं और आदिवासी संस्कृति की छाप भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। मुद्दा उठता है — क्या AI जैसे प्लेटफॉर्म भारत जैसे सांस्कृतिक रूप से विविध देश की पूरी तस्वीर पेश करने में सक्षम हैं? टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों का मानना है कि AI अपने उत्तरों को प्रशिक्षित डेटा और एल्गोरिदम के आधार पर बनाता है, जिसमें कभी-कभी एकपक्षीय छवि उभर सकती है। ऐसे में यूज़र्स को भी यह समझना होगा कि AI द्वारा दी गई तस्वीरें या जवाब कल्पना आधारित हो सकते हैं, और उनका ऐतिहासिक या सामाजिक संतुलन जरूरी नहीं। देश हरपल इस मुद्दे पर आने वाले दिनों में विशेषज्ञों, इतिहासकारों और तकनीकी विशेषज्ञों की राय के साथ एक विस्तृत चर्चा प्रकाशित करेगा।
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SP MLA Indrajeet Saroj:

SP MLA Indrajeet Saroj: ‘श्राप दे देते भगवान ताकि भस्म हो जाते मुसलमान…’

Controversial Statement Again by SP MLA Indrajeet Saroj: Desh Harpal | 15 अप्रैल 2025 | उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर विवाद की चिंगारी सुलग उठी है। Samajwadi Party के कद्दावर नेता और मौजूदा विधायक इंद्रजीत सरोज ने एक विवादित बयान देकर सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। पहले मंदिरों और हिंदू देवी-देवताओं को लेकर दिये गए उनके पुराने बयान ने खूब तूल पकड़ा था, और अब एक बार फिर उन्होंने अपने उसी बयान को दोहराते हुए कहा है – “अगर भगवान चाहते तो मुसलमानों को श्राप दे देते और वे भस्म हो जाते।” क्या है पूरा मामला? दरअसल, इंद्रजीत सरोज का ये बयान तब आया जब उनसे मीडिया ने उनके पुराने बयान पर प्रतिक्रिया मांगी, जिसमें उन्होंने कहा था कि “अगर भगवान वाकई होते तो वो मंदिरों को तोड़ने वालों को भस्म कर देते।” इस पर सफाई देने के बजाय इंद्रजीत सरोज ने और भी तीखा बयान दे डाला। उन्होंने कहा कि जब मुगलों ने मंदिर तोड़े, तब भगवान ने कुछ नहीं किया, इसका मतलब भगवान नहीं थे या फिर वो सिर्फ किताबों में हैं। उन्होंने ये भी कहा कि “अगर भगवान होते तो मस्जिदों में तो नहीं रहते, फिर मंदिरों में ही क्यों नहीं बचा पाए खुद को?” इस बयान ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है और अब BJP समेत कई हिन्दू संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। सियासी घमासान BJP नेताओं ने इस बयान को Hindu sentiments के खिलाफ बताया है और तुरंत माफी मांगने की मांग की है। वहीं, सोशल मीडिया पर भी इस बयान को लेकर ज़बरदस्त बवाल मचा है। कई users ने इंद्रजीत सरोज को “Hinduphobic” कहा है, तो कुछ ने उन्हें पार्टी से निकालने की मांग की है। Akhilesh Yadav की चुप्पी पर सवाल अब सवाल उठ रहा है कि क्या Samajwadi Party इस बयान से खुद को अलग करेगी या फिर Akhilesh Yadav इस पर चुप्पी साधे रहेंगे? क्योंकि पहले भी पार्टी के कुछ नेताओं के विवादित बयानों पर पार्टी ने कोई ठोस एक्शन नहीं लिया था। Desh Harpal का विश्लेषण ध्यान देने वाली बात यह है कि भारत जैसे विविधताओं वाले देश में धार्मिक भावनाएं बेहद संवेदनशील मुद्दा हैं। किसी भी राजनेता को ऐसा बयान देने से पहले यह सोचना चाहिए कि उसके शब्द समाज पर क्या असर डाल सकते हैं। इंद्रजीत सरोज का यह बयान सिर्फ राजनीतिक विवाद ही नहीं बल्कि समाज में वैमनस्य फैलाने वाला है। Desh Harpal यह मानता है कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी जरूरी है। खासतौर पर उन नेताओं के लिए जो लाखों लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
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“Coca-Cola ने मुसलमानों के लिए की पीली केप वाली कोल्ड ड्रिंक….?

Coca-Cola Special Coldrink Only For One Religion? Here’s The Truth | देश हरपल स्पेशल रिपोर्ट Coca-Cola की एक खास बोतल चर्चा में है — जिसकी कैप है पीले रंग की, और बताया जा रहा है कि यह केवल एक खास धर्म के लिए बनाई गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस दावे ने कई लोगों को चौंका दिया है। दावा ये भी किया जा रहा है कि यह “Special Coldrink” सिर्फ रमज़ान के महीने में बनाई जाती है और इसमें इस्तेमाल होने वाले Ingredients बाकी कोल्ड्रिंक्स से अलग हैं। लेकिन क्या यह सच है? चलिए देश हरपल पर जानते हैं इसकी पूरी सच्चाई। वायरल क्या हुआ? कुछ दिनों से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर Coca-Cola की एक बोतल की तस्वीर वायरल हो रही है जिसकी Yellow Cap है। दावा किया जा रहा है कि ये बोतल सिर्फ मुस्लिम समुदाय के लिए बनाई गई है और इसमें इस्तेमाल किए गए प्रोडक्ट्स को Halal Certified किया गया है। ये Yellow Cap आखिर है क्या? असल में, कोका-कोला कंपनी रमज़ान के मौके पर Middle East और कुछ अन्य मुस्लिम देशों में एक खास पैकेजिंग के साथ अपने प्रोडक्ट्स लॉन्च करती है। ये Yellow Cap उसी कस्टम पैकेजिंग का हिस्सा है। लेकिन इसका मतलब ये कतई नहीं है कि यह सिर्फ एक धर्म विशेष के लिए है। Coca-Cola का क्या कहना है? Coca-Cola Middle East की ओर से स्पष्ट किया गया है कि Yellow Cap Bottles में ऐसा कुछ भी नहीं है जो केवल किसी एक धर्म विशेष के लिए बनाया गया हो। बल्कि, यह Marketing Strategy है, ताकि रमज़ान के दौरान consumers को special feel दिया जा सके। इसके साथ ही ये Cap कुछ खास Instructions को Represent करता है जैसे कि “Halal Certified” होने की जानकारी। Halal Certification क्या होता है? Halal एक Arabic Word है जिसका मतलब होता है “वो जो अनुमति प्राप्त हो”। खाने-पीने के Products के लिए Halal Certification यह बताता है कि उसमें ऐसा कोई Ingredient नहीं है जो इस्लामिक कानून के विरुद्ध हो। भारत सहित कई देशों में Halal और Vegetarian दोनों तरह के Certification आम हैं। क्या भारत में भी यह Yellow Cap Bottle मिलती है? नहीं। यह पैकेजिंग केवल Middle East और कुछ चुनिंदा देशों में ही उपलब्ध है। भारत में फिलहाल ऐसी कोई Coca-Cola Bottle officially Launch नहीं की गई है। अफवाह क्यों फैली? Social Media पर आधी-अधूरी जानकारी के साथ Sensational Claims करना आजकल आम हो गया है। कुछ लोगों ने बिना पुख्ता जानकारी के सिर्फ Cap के रंग को देखकर यह मान लिया कि पूरी Drink एक धर्म विशेष के लिए बनाई गई है, जो कि ग़लत है। Coca-Cola की Yellow Cap वाली Bottle कोई धार्मिक पक्षपात नहीं बल्कि एक खास त्योहार के लिए मार्केटिंग रणनीति है। यह Drink सभी के लिए है, और इसमें ऐसा कुछ नहीं जो किसी एक धर्म के लिए Exclusively बनाया गया हो। Desh Harpal आपसे अपील करता है कि ऐसी अफवाहों से बचें और किसी भी खबर को आगे बढ़ाने से पहले उसकी सत्यता ज़रूर जांचें।
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Robert Vadra

Robert Vadra पहुंचें ED ऑफिस – बोले, “Parliament में Rahul की आवाज़ दबाई जाती है, यहां मेरी…”

दिल्ली: कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के पति और बिज़नेसमैन Robert Vadra आज एक बार फिर प्रवर्तन निदेशालय (ED) के समक्ष पेश हुए। यह पेशी गुरुग्राम के शिकोहपुर जमीन सौदे (Shikohpur Land Deal) को लेकर है, जिसमें Vadra की कंपनी Skylight Hospitality पर अवैध रूप से जमीन खरीदने और बेचने के आरोप हैं। यह मामला हरियाणा के NTC यानी National Tasking Committee की रिपोर्ट और शिकायत के आधार पर उभरा है। क्या है पूरा मामला? दरअसल, Skylight Hospitality ने गुरुग्राम के शिकोहपुर इलाके में 3.5 एकड़ जमीन खरीदी थी। आरोप है कि इस जमीन की कीमत बाज़ार मूल्य से बहुत कम दिखाई गई थी, और बाद में इसे भारी मुनाफे पर DLF जैसी बड़ी रियल एस्टेट कंपनी को बेच दिया गया। इस डील में सरकारी नियमों की अनदेखी और राजनीतिक प्रभाव के इस्तेमाल का आरोप है। ED की तरफ से Vadra को दूसरी बार समन भेजा गया, जिसके बाद आज वे दिल्ली स्थित कार्यालय पहुंचे। उनसे पूछताछ में प्रॉपर्टी डील के दस्तावेज़, लेन-देन की जानकारी, और संबंधित अधिकारियों से संपर्कों के बारे में सवाल किए गए। Vadra का पलटवार – सरकार पर लगाया बड़ा आरोप ED ऑफिस पहुंचने से पहले Robert Vadra ने मीडिया से बात करते हुए कहा – राजनीतिक रंग लेता मामला इस केस ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार selective targeting कर रही है, ताकि विपक्ष को दबाया जा सके। वहीं, भाजपा का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और no one is above the law। आगे क्या? ED इस मामले में दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई करेगी। अगर Vadra जांच में सहयोग नहीं करते हैं या आरोप साबित होते हैं, तो यह मामला लंबा खिंच सकता है और कानूनी पेंच और भी गहरे हो सकते हैं। Desh Harpal इस मामले से जुड़ी हर अपडेट आप तक पहुंचाता रहेगा। बने रहिए हमारे साथ।
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सागर में शराब के पैसे नहीं देने पर बुजुर्ग पर हमला, कंधे में चाकू घोंपकर फरार हुए बदमाश

सागर जिले के मोतीनगर थाना क्षेत्र में शराब पीने के लिए पैसे नहीं देने पर बदमाशों ने एक बुजुर्ग पर जानलेवा हमला कर दिया। आरोपियों ने बुजुर्ग के बाएं कंधे के पास चाकू घोंप दिया, जो शरीर में ही धंस गया। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें घायल बुजुर्ग कंधे में चाकू फंसे होने के बावजूद सड़क पर पैदल चलते नजर आ रहे हैं। जानकारी के अनुसार घटना शुक्रवार देर रात की है। वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हमलावरों की संख्या करीब पांच थी। बदमाशों ने शराब पीने के लिए पैसे मांगे थे। जब बुजुर्ग ने पैसे देने से इनकार किया तो आरोपियों ने हमला कर दिया। घायल बुजुर्ग को लहूलुहान हालत में सड़क पर चलते देख राहगीरों ने मदद की। लोगों ने तुरंत उन्हें शहर के एक निजी अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज जारी है। पीड़ित बड़ी माता मंदिर क्षेत्र का निवासी बताया जा रहा है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मोतीनगर पुलिस अलर्ट हो गई है। थाना प्रभारी जसवंत सिंह ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस टीम अस्पताल पहुंचकर घायल के बयान दर्ज कर रही है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही सभी आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा। इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। प्रदेश और देश की ताजा खबरों के लिए विजिट करें www.deshharpal.com

यूरोप टूर पर गए रायपुर के कारोबारी अजय निहलानी का लिस्बन में निधन, हार्ट अटैक की आशंका

रायपुर के कारोबारी अजय सुंदर निहलानी का पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में निधन हो गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार उनकी मौत हार्ट अटैक से हुई है। वे भारत से गए 40 सदस्यीय दल के साथ एजुकेशनल टूर पर यूरोप गए थे। इस दल में रायपुर से दो लोग शामिल थे। बताया जा रहा है कि यात्रा के दौरान अजय निहलानी की अचानक तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना की खबर मिलते ही रायपुर में परिवार और परिचितों में शोक का माहौल है। परिवार के अनुसार जल्द ही उनका पार्थिव शरीर रायपुर लाया जाएगा। अजय निहलानी के भाई संजय कुमार निहलानी ने बताया कि टूर में उनके साथ मौजूद नीरज बाजपेयी पार्थिव शरीर को भारत लाने के लिए जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर रहे हैं। परिवार ने स्थानीय प्रशासन, भारतीय दूतावास, एयरलाइन प्रतिनिधियों और संबंधित एजेंसियों से सहयोग की अपील की है, ताकि प्रक्रिया जल्द पूरी हो सके और पार्थिव शरीर को रायपुर लाकर अंतिम संस्कार किया जा सके। परिजनों का कहना है कि सभी जरूरी दस्तावेज और औपचारिकताएं पूरी होने के बाद अजय निहलानी का पार्थिव शरीर रायपुर लाया जाएगा। प्रदेश और देश की ताजा खबरों के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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CBI Investigation: ट्विशा शर्मा केस में 3D स्कैनिंग और डमी टेस्ट से खुलेगा मौत का रहस्य, जांच में नया मोड़

भोपाल में ट्विशा शर्मा मौत मामला: 3D तकनीक और डमी टेस्ट से सुलझेगी गुत्थी? भोपाल में चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच अब नए और अत्याधुनिक तरीके से आगे बढ़ रही है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मामले की तह तक पहुंचने के लिए घटनास्थल का 3D स्कैन कराया है और अब 80 किलो वजन वाली डमी के जरिए घटनाक्रम को दोबारा रीक्रिएट करने की तैयारी की है। जांच एजेंसी का मानना है कि केवल बयान और दस्तावेजों के आधार पर नहीं, बल्कि घटनास्थल के वैज्ञानिक पुनर्निर्माण से भी कई अहम सवालों के जवाब मिल सकते हैं। 3D स्कैनिंग से तैयार होगा पूरा घटनाक्रम CBI की टीम ने भोपाल स्थित घर का 3D स्कैन कराया है, जहां ट्विशा शर्मा मृत पाई गई थीं। इस तकनीक के जरिए घर का डिजिटल मॉडल तैयार किया जा रहा है, जिससे घटना के समय की परिस्थितियों को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा। सूत्रों के मुताबिक, एजेंसी घर के हर कमरे, वस्तुओं की स्थिति और घटनास्थल के लेआउट का अध्ययन कर रही है ताकि किसी भी विसंगति की पहचान की जा सके। ‘टनल व्यू’ तकनीक से बनाई जा रही मिनट-दर-मिनट टाइमलाइन CBI ने जांच में “टनल व्यू” नामक आधुनिक तकनीक का भी उपयोग शुरू किया है। इसके तहत CCTV फुटेज, मोबाइल रिकॉर्ड, इंटरनेट गतिविधियां, वाई-फाई लॉग और गवाहों के बयानों को जोड़कर एक डिजिटल टाइमलाइन तैयार की जा रही है। इस प्रक्रिया से यह समझने की कोशिश की जा रही है कि घटना वाले दिन आखिर क्या-क्या हुआ और किस समय कौन-कौन व्यक्ति घर में मौजूद था। 80 किलो की डमी से होगा घटनाक्रम का पुनर्निर्माण CBI अब 80 किलो वजन की डमी का इस्तेमाल कर उस स्थिति को दोबारा तैयार करेगी, जैसा आरोपियों ने अपने बयानों में बताया है। एजेंसी यह जांचना चाहती है कि क्या घटनास्थल पर बताए गए तरीके से शव को नीचे उतारना वास्तव में संभव था या नहीं। इस प्रक्रिया के दौरान आरोपी पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह को भी घटनास्थल पर ले जाया जा सकता है ताकि उनके दावों की सत्यता परखी जा सके। CBI हिरासत में आरोपी मामले में बड़ा घटनाक्रम तब सामने आया जब विशेष अदालत ने पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को CBI की हिरासत में भेज दिया। एजेंसी दोनों से पूछताछ कर रही है और घटनाओं की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद CBI ने संभाली जांच मामले को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच CBI को सौंपी गई। इसके बाद केंद्रीय एजेंसी ने FIR दोबारा दर्ज कर जांच शुरू की और भोपाल पुलिस से सभी दस्तावेज, फोरेंसिक रिपोर्ट और डिजिटल साक्ष्य अपने कब्जे में लिए। क्या है पूरा मामला? ट्विशा शर्मा की मई 2026 में भोपाल स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। इसके बाद परिवार ने दहेज प्रताड़ना और अन्य गंभीर आरोप लगाए। मामला लगातार तूल पकड़ता गया और अंततः जांच CBI को सौंप दी गई।

अवैध शराब पर कार्रवाई में लापरवाही, गोबरा नवापारा थाना प्रभारी दीपेश जायसवाल निलंबित

रायपुर ग्रामीण पुलिस विभाग में बड़ी कार्रवाई करते हुए गोबरा नवापारा थाना प्रभारी निरीक्षक दीपेश जायसवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उन पर क्षेत्र में अवैध शराब कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण नहीं करने और कार्रवाई के दौरान संदिग्ध व्यवहार करने के आरोप लगे हैं। यह आदेश रायपुर ग्रामीण पुलिस अधीक्षक श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा ने जारी किया है। जानकारी के अनुसार गोबरा नवापारा थाना क्षेत्र में लंबे समय से अवैध शराब बिक्री की शिकायतें मिल रही थीं। वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से लगातार कार्रवाई के निर्देश दिए जा रहे थे, लेकिन इसके बावजूद अवैध कारोबार जारी रहने की बात सामने आई। मामला 29 मई को सामने आया, जब ACCU रायपुर की देहात टीम ने गोबरा नवापारा स्थित लल्ला सोनवानी के ढाबे पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान वहां अवैध शराब बिक्री होती मिली। सूचना मिलने पर थाना प्रभारी दीपेश जायसवाल भी मौके पर पहुंचे थे। एसपी कार्यालय से जारी आदेश में कहा गया है कि कार्रवाई के दौरान थाना प्रभारी का व्यवहार संदिग्ध पाया गया। आरोप है कि उन्होंने आरोपी लल्ला सोनवानी से अलग जाकर बातचीत की, जिसके बाद उनकी भूमिका पर सवाल खड़े हुए। पुलिस अधीक्षक ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए दीपेश जायसवाल को निलंबित कर पुलिस अधीक्षक कार्यालय रायपुर ग्रामीण से संबद्ध कर दिया है। मामले की प्राथमिक जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अभिषेक झा को सौंपी गई है। उन्हें सात दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। रायपुर ग्रामीण पुलिस की इस कार्रवाई को अवैध शराब कारोबार के खिलाफ सख्त संदेश माना जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। प्रदेश और देश की ताजा खबरों के लिए विजिट करें www.deshharpal.com

सागर में बदला मौसम का मिजाज, आंधी-बारिश से मिली राहत, तापमान में आई गिरावट

उत्तर-पश्चिम भारत से आ रही गर्म हवाओं और बंगाल की खाड़ी से बढ़ी नमी के असर से सागर के मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिला। शुक्रवार शाम अचानक मौसम बदला और आसमान में घने बादल छा गए। देर रात शहर सहित ग्रामीण इलाकों में तेज हवा और आंधी के साथ बारिश हुई। बंडा क्षेत्र में झमाझम बारिश से लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली। मौसम बदलने के बाद दिन और रात दोनों के तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। दिन का तापमान 4.6 डिग्री सेल्सियस तक नीचे आ गया, जबकि रात का पारा 30 डिग्री से गिरकर 22.3 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। तापमान में कमी आने से लोगों को गर्म हवाओं और उमस से राहत महसूस हुई। शनिवार सुबह भी शहर में बादलों की आवाजाही बनी रही। धूप जरूर निकली, लेकिन सामान्य दिनों की तुलना में उसकी तपिश कम रही। सुबह सागर का अधिकतम तापमान 40.4 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने 2 जून तक के लिए पूर्वानुमान जारी किया है। विभाग के मुताबिक शनिवार को भी आंधी और बारिश की संभावना बनी हुई है। फिलहाल हीटवेव का कोई अलर्ट नहीं है। अगले 48 से 72 घंटों तक मौसम पूरी तरह स्थिर नहीं रहेगा। दिन में गर्मी रहेगी, जबकि शाम के समय बादल छाने और हल्की बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने इस दौरान 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा और आंधी चलने का अनुमान जताया है। प्रदेश और देश की ताजा खबरों के लिए विजिट करें deshharpal.com

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