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"Serious Problem" in Electoral System: Rahul Gandhi Raises Maharashtra Election Issue at Brown University

Brown University :चुनाव प्रणाली में गंभीर समस्या…’, राहुल गांधी ने अमेरिका में उठाया महाराष्ट्र चुनाव का मुद्दा

“Serious Problem” in Electoral System: Rahul Gandhi Raises Maharashtra Election Issue at Brown University कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अमेरिका के ब्राउन यूनिवर्सिटी में छात्रों के साथ बातचीत के दौरान भारत की चुनाव प्रणाली में ‘गंभीर समस्या’ की बात कही। उन्होंने विशेष रूप से महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में मतदाता सूची में अचानक हुए बड़े बदलावों को लेकर चिंता जताई।​ महाराष्ट्र चुनाव पर सवाल राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच लगभग 70 लाख नए मतदाता जोड़े गए, जो हिमाचल प्रदेश की आबादी के बराबर है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव असामान्य है और चुनाव आयोग से पारदर्शिता की मांग की। उनका कहना था कि विपक्ष द्वारा बार-बार अनुरोध करने के बावजूद चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र और हरियाणा की मतदाता सूचियाँ प्रदान नहीं कीं।​ चुनाव आयोग पर आरोप गांधी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग पारदर्शिता में विफल रहा है और विपक्ष को आवश्यक जानकारी नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा कि यह आयोग की जिम्मेदारी है कि वह चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए और सभी पक्षों को आवश्यक जानकारी प्रदान करे।​ अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया मुद्दा ब्राउन यूनिवर्सिटी में छात्रों से बातचीत के दौरान, राहुल गांधी ने कहा, “हमारे लिए यह बहुत साफ था कि चुनाव आयोग समझौता कर चुका है। यह बहुत साफ है कि सिस्टम में कुछ बहुत गड़बड़ है। हमने इसे सार्वजनिक रूप से कहा है, मैंने इसे कई बार कहा है।” राहुल गांधी का यह बयान भारत की चुनाव प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल उठाता है। उनकी मांग है कि चुनाव आयोग सभी राजनीतिक दलों को समान रूप से जानकारी प्रदान करे और चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए।
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rashifal

21 अप्रैल 2025 (सोमवार | Monday) दैनिक राशिफल (Daily Horoscope)

🌞 21 अप्रैल 2025 (सोमवार | Monday) ♈ मेष (Mesh – Aries) – आत्मविश्वास बढ़ेगा, नया काम शुरू करें।♉ वृषभ (Vrishabh – Taurus) – खर्चे बढ़ सकते हैं, सोच-समझकर चलें।♊ मिथुन (Mithun – Gemini) – दोस्ती और नेटवर्किंग से फायदा।♋ कर्क (Kark – Cancer) – सेहत को लेकर सतर्क रहें।♌ सिंह (Singh – Leo) – नए मौके मिलेंगे, मान-सम्मान मिलेगा।♍ कन्या (Kanya – Virgo) – टेंशन से बचें, धैर्य रखें।♎ तुला (Tula – Libra) – रचनात्मक कार्यों में मन लगेगा।♏ वृश्चिक (Vrishchik – Scorpio) – यात्रा लाभ देगी। किस्मत साथ देगी।♐ धनु (Dhanu – Sagittarius) – जिम्मेदारियाँ निभानी होंगी, सफलता मिलेगी।♑ मकर (Makar – Capricorn) – पुराने विवाद सुलझेंगे, अच्छा दिन।♒ कुंभ (Kumbh – Aquarius) – नया काम शुरू हो सकता है।♓ मीन (Meen – Pisces) – पारिवारिक सुख मिलेगा, खर्च संभालें।
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Kesari Chapter 2'

Kesari Chapter 2: The Untold Story of Jallianwala Bagh – जलियांवाला बाग हत्याकांड की अनकही कहानी

Kesari Chapter 2: The Untold Story of Jallianwala Bagh – एक ऐसी फिल्म जो इतिहास के पन्नों से उठाकर बाग हत्याकांड की अनकही कहानी को बड़े पर्दे पर जीवंत करती है। इस फिल्म का निर्देशन करण सिंह त्यागी ने किया है, और इसे धर्मा प्रोडक्शंस, लियो मीडिया कलेक्टिव और केप ऑफ गुड फिल्म्स ने मिलकर प्रोड्यूस किया है। फिल्म 18 अप्रैल 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। 🎬 कहानी की झलक फिल्म की कहानी प्रसिद्ध वकील सी. शंकरण नायर (अक्षय कुमार) के इर्द-गिर्द घूमती है, जिन्हें ब्रिटिश सरकार ने जलियांवाला बाग हत्याकांड की जांच के लिए नियुक्त किया था। जांच के दौरान, नायर को जनरल डायर द्वारा निर्दोष नागरिकों पर किए गए अत्याचारों का पता चलता है। इस सच्चाई को उजागर करने के लिए, नायर ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ एक ऐतिहासिक कानूनी लड़ाई लड़ते हैं 👥 प्रमुख कलाकार फिल्म को समीक्षकों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली है। बॉलीवुड हंगामा ने इसे 3.5/5 की रेटिंग दी है, जबकि पिंकविला ने इसे “must-watch” बताया है। फिल्म की कोर्टरूम ड्रामा, अभिनय और संगीत की सराहना की गई है, हालांकि कुछ ने इसके कुछ हिस्सों को अत्यधिक नाटकीय बताया है। Kesari Chapter 2′ एक ऐसी फिल्म है जो इतिहास के एक काले अध्याय को उजागर करती है। अक्षय कुमार का दमदार अभिनय और फिल्म की गहन कहानी दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है। यदि आप ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित फिल्मों के शौकीन हैं, तो यह फिल्म आपके लिए अवश्य देखने योग्य है।
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Truck Accident & Oil Looting" – भोपाल में सरसों तेल से भरे ट्रक के पलटते ही शुरू हुई लूट, घायल क्लीनर की मौत पर किसी ने ध्यान नहीं दिया

“Truck Accident & Oil Looting” –भोपाल में सरसों तेल से भरे ट्रक के पलटते ही शुरू हुई लूट, घायल क्लीनर की मौत पर किसी ने ध्यान नहीं दिया

– Truck Accident ,Oil Looting ,Bhopal News ,Humanity Lost , Desh Harpal(Desh Harpal News | 20 अप्रैल 2025 | भोपाल) मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक shocking and heartbreaking incident सामने आई है, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। शहर के बिलखिरिया थाना क्षेत्र में शनिवार देर रात एक सरसों के तेल से भरा ट्रक पलट गया। हादसे में ट्रक का क्लीनर गंभीर रूप से घायल हो गया, लेकिन हैरानी की बात ये रही कि मौके पर मौजूद लोगों ने मदद करने की बजाय mustard oil की पेटियां लूटनी शुरू कर दीं। जानकारी के मुताबिक, यह ट्रक राजस्थान से नागपुर की ओर जा रहा था। ड्राइवर को झपकी लगने के चलते ट्रक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पलट गया। ट्रक में mustard oil cartons भरी हुई थीं, जो पलटने के बाद सड़क पर बिखर गईं। हादसे में ड्राइवर और क्लीनर दोनों बुरी तरह घायल हो गए। ड्राइवर ने जैसे-तैसे मदद की गुहार लगाई, लेकिन वहां मौजूद भीड़ ने घायलों की तरफ ध्यान देने की बजाय सारा फोकस तेल की बोतलें और पेटियां उठाने में लगा दिया। कुछ लोगों ने तो अपने स्कूटर, बाइक और ऑटो तक में oil cartons भर लिए और मौके से निकल गए। यह सब उस वक्त हो रहा था जब क्लीनर सड़क पर तड़प रहा था। कई लोगों ने मोबाइल से वीडियो बनाना जरूरी समझा, लेकिन किसी ने एंबुलेंस बुलाना जरूरी नहीं समझा। समय पर इलाज न मिलने की वजह से क्लीनर की मौके पर ही मौत हो गई। इस अमानवीय घटना ने एक बार फिर समाज की संवेदनहीनता को उजागर कर दिया है। सवाल यह उठता है कि क्या किसी की जान से ज्यादा जरूरी पेटियों में भरा सरसों का तेल हो गया है? प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और CCTV फुटेज के आधार पर लूटपाट करने वालों की पहचान की जा रही है। Desh Harpal की राय:ये सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि समाज के नैतिक पतन की तस्वीर है। जरूरत है हम सभी को अपने भीतर झांकने की, सोचने की कि अगर यही हादसा हमारे किसी अपने के साथ होता तो क्या तब भी हम पेटियां उठाने में लगे रहते? 👉 अगर आपके पास इस घटना से जुड़ी कोई जानकारी या वीडियो है, तो कृपया Desh Harpal को भेजें। आपकी पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
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West Bengal Riots, Murshidabad Violence

West Bengal Riots: मुर्शिदाबाद से मालदा तक बेघर हुए हिंदू परिवार, ममता सरकार पर उठे गंभीर सवाल”

(Desh Harpal l विशेष रिपोर्ट): West Bengal Riots, Murshidabad Violence, Hindu Refugees, Detention Camp Allegations West Bengal के Murshidabad जिले में दंगों के बाद हालात इतने बिगड़ गए कि सैकड़ों Hindu Families को जान बचाकर Malda के शरणार्थी शिविरों में पनाह लेनी पड़ी। पर अफसोस की बात यह रही कि जिस सरकार से उन्हें सुरक्षा की उम्मीद थी, उसी के तंत्र ने उन्हें ‘डिटेंशन कैंप’ जैसे माहौल में कैद कर दिया। Murshidabad Riots के दौरान, बड़ी संख्या में दंगाई भीड़ ने हिंदू घरों और दुकानों को निशाना बनाया। जब ये लोग जान बचाकर Malda पहुंचे, तो उन्हें सरकारी कैंपों में रखा गया—जहां उनके साथ मानवीय व्यवहार की जगह उन्हें धमकियों और निगरानी का सामना करना पड़ा। Refugees ने State Human Rights Commission, Mahila Aayog और यहां तक कि राज्यपाल तक को अपनी पीड़ा सुनाई। सबसे चौंकाने वाला हिस्सा ये रहा कि जब मीडिया इस मुद्दे को रिपोर्ट करने पहुंचा, तो उन्हें अंदर जाने से रोक दिया गया। IPS Officer Faisal Raza ने कोर्ट के किसी कथित आदेश का हवाला देकर मीडिया कवरेज पर रोक लगाई, लेकिन जब उनसे आदेश दिखाने की मांग की गई तो वो टालमटोल और धमकियों पर उतर आए। BJP Leader Suvendu Adhikari ने इन शिविरों को ‘Detention Camps’ बताया और कहा, “सरकार ने इन शरणार्थियों को संवेदनशील क्षेत्र में राहत देने की बजाय जेल जैसा ट्रीटमेंट दिया है। करीब 400 लोग अपने घर छोड़कर यहां आए हैं और अब उन्हें कैद की तरह रखा जा रहा है।” Congress ने भी राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया और निष्पक्ष जांच की मांग की। इस बीच सबसे गंभीर सवाल यह है कि – मिडिया की टीम ने जब इन कैंपों की जमीनी सच्चाई जानने की कोशिश की, तो कई स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्हें Forced Silence में रखा गया है। न मीडिया से बात करने की अनुमति है, न ही बाहर किसी को बुलाने की। ये हालात न सिर्फ एक राज्य की विफलता को दिखाते हैं, बल्कि ये भी दर्शाते हैं कि भारत में अपने ही देश में कुछ नागरिक खुद को Refugee जैसा महसूस कर रहे हैं। Note: यह मामला सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं बल्कि मानवता का भी है। देश को इस पर ध्यान देने की सख्त ज़रूरत है। (पांचजन्य से साभार)
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भोपाल स्थित केरवा गिद्ध प्रजनन केन्द्र से 6 गिद्धों को कल पहली बार प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा गया

Vulture Conservation Mission: केरवा गिद्ध प्रजनन केन्द्र से 6 गिद्ध हुए Natural Habitat में Release, GPS Tracking से होगी 24×7 Monitoring भोपाल के नजदीक स्थित Kerwa Vulture Breeding Centre से पहली बार 6 दुर्लभ गिद्धों को natural habitat में release किया गया है। यह कदम मध्य प्रदेश में vulture conservation mission की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक प्रयास माना जा रहा है। इन सभी गिद्धों को अत्याधुनिक GPS trackers से लैस किया गया है, जिससे उनके मूवमेंट, व्यवहार और सुरक्षा की real-time monitoring की जा सकेगी। गिद्ध केवल एक पक्षी नहीं, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अत्यंत आवश्यक natural scavengers हैं। ये मृत जीवों को खाकर वातावरण को साफ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे zoonotic diseases के फैलने का खतरा भी कम होता है। उनके बिना पर्यावरणीय संतुलन गड़बड़ा सकता है, इसलिए उनका संरक्षण हमारी biodiversity security के लिए अनिवार्य है। गौरतलब है कि गत कुछ वर्षों में भारत में गिद्धों की संख्या में भारी गिरावट देखी गई, जिसका मुख्य कारण रहा एक पशु-औषधि Diclofenac, जो गिद्धों के लिए ज़हर साबित हुई। इसके बाद भारत सरकार और राज्य सरकारों ने इस दवा पर प्रतिबंध लगाते हुए vulture protection programmes पर विशेष ध्यान देना शुरू किया। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा केरवा स्थित इस गिद्ध प्रजनन केंद्र की स्थापना Indian Vulture Conservation Action Plan के अंतर्गत की गई थी। यहां वैज्ञानिक तरीके से गिद्धों को संरक्षित कर उनकी संख्या बढ़ाने का कार्य चल रहा है। अब जब 6 स्वस्थ गिद्धों को प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा गया है, तो यह संकेत है कि संरक्षण के प्रयास अब परिणाम देने लगे हैं। इस अभियान की विशेषता यह है कि इन गिद्धों की गतिविधियों को satellite-based tracking system के जरिए लगातार ट्रैक किया जाएगा। इससे न सिर्फ इनके जीवन के बारे में नए वैज्ञानिक तथ्य मिलेंगे, बल्कि अगर किसी भी प्रकार की खतरे की स्थिति उत्पन्न होती है, तो तुरंत सहायता पहुंचाई जा सकेगी। Desh Harpal इस पहल का स्वागत करता है और सरकार, वन विभाग, वाइल्डलाइफ विशेषज्ञों और सभी सहयोगियों को इस दिशा में निरंतर प्रयास करते रहने के लिए साधुवाद देता है। ऐसे कदम न केवल गिद्धों की वापसी का रास्ता खोलते हैं, बल्कि यह भी साबित करते हैं कि यदि इच्छाशक्ति और वैज्ञानिक दृष्टिकोण साथ हो, तो wildlife conservation सिर्फ एक सपना नहीं, बल्कि सच्चाई बन सकता है। भोपाल स्थित केरवा गिद्ध प्रजनन केन्द्र से 6 गिद्धों को कल पहली बार प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा गया
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Jagdeep Dhankhar, Vice President of India

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति की शक्तियों पर खींची ‘संवैधानिक लक्ष्मण रेखा’, उपराष्ट्रपति ने जताई नाराज़गी

Supreme Court vs President Powers Desh Harpal | 17 अप्रैल 2025By Digital Desk Supreme Court Judgement on Governor and President Powers के तहत सुप्रीम कोर्ट ने 8 अप्रैल को ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसमें राष्ट्रपति और राज्यपाल द्वारा विधेयकों (Bills) को मंजूरी देने की समयसीमा (Time Limit) तय की गई। अदालत ने साफ किया कि राज्य विधानसभा से पास होकर आए बिल को यदि राज्यपाल राष्ट्रपति के पास विचार के लिए भेजते हैं, तो राष्ट्रपति को Article 201 के तहत 3 महीने के भीतर निर्णय लेना अनिवार्य होगा। क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने? Judicial Review, No Pocket Veto, Mandatory Timeline और No Repeated Returns – इन चार बिंदुओं में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति की शक्तियों की स्पष्ट व्याख्या की: राज्यपालों के लिए भी बनी समय सीमा तमिलनाडु मामले में Supreme Court vs Governor Power की बहस में सुप्रीम कोर्ट ने 8 अप्रैल को स्पष्ट कर दिया था कि राज्यपाल के पास भी कोई Absolute Veto Power नहीं है। उन्हें विधानसभा के पास किए गए किसी भी बिल पर अधिकतम एक महीने के भीतर निर्णय देना होगा। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा, “राज्यपाल सिर्फ प्रतीकात्मक पद नहीं हैं, लेकिन वे राज्य सरकार की सलाह से ही निर्णय ले सकते हैं।” उपराष्ट्रपति की नाराज़गी इस फैसले के बाद Vice President Jagdeep Dhankhar ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा: “हम ऐसा सिस्टम नहीं बना सकते जहां अदालतें राष्ट्रपति को निर्देश दें। Article 142 के तहत मिला विशेष अधिकार न्यायपालिका के पास 24×7 available nuclear missile जैसा बन गया है।” उपराष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि अगर संस्थाएं अपनी सीमाएं लांघने लगें तो संविधान के संतुलन को खतरा हो सकता है। “कोई भी संस्था संविधान से ऊपर नहीं है। लोकतंत्र में चुनी हुई सरकार सर्वोच्च होती है,” उन्होंने कहा। क्या है Article 201 और Article 142? कपिल सिब्बल ने की तारीफ पूर्व कानून मंत्री Kapil Sibal ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले की सराहना की। उन्होंने कहा कि अब केंद्र सरकार जानबूझकर राज्य सरकारों के महत्वपूर्ण बिलों को रोके नहीं रख सकेगी। सुप्रीम कोर्ट का ये रुख federal structure और cooperative federalism को मजबूत करता है। तमिलनाडु केस का बैकग्राउंड सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में तमिलनाडु सरकार ने आरोप लगाया कि राज्यपाल R.N. Ravi ने 10 जरूरी बिलों को रोक रखा है। इनमें से कई बिल विधानसभा ने दोबारा पास किए थे, लेकिन राज्यपाल ने उन पर कोई कार्रवाई नहीं की। R.N. Ravi पूर्व IPS अधिकारी रहे हैं और 2021 से तमिलनाडु के राज्यपाल हैं। निष्कर्ष: Supreme Court ने राष्ट्रपति और राज्यपाल की शक्तियों पर ऐतिहासिक टिप्पणी की है, जो संविधान की व्याख्या और लोकतंत्र के संतुलन की दिशा में एक निर्णायक कदम है। हालांकि यह फैसला केंद्र-राज्य संबंधों को नई बहस में डाल सकता है, परंतु इससे transparency, accountability और timely governance को बल मिलेगा।
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SupremeCourtHearingControversy; Supreme Court

वक्फ कानून पर SC से स्टे नहीं, सरकार को 7 दिन का समय , डिनोटिफाई करने और नई नियुक्तियों पर रहेगी रोक

Waqf Act Hearing | Supreme Court Latest Update | Centre Seeks Time नई दिल्लीl देश हरपल रिपोर्ट — Waqf Act को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन अहम सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार ने Supreme Court से जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। Chief Justice of India (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक अगला आदेश नहीं आता, तब तक status quo यानी वर्तमान स्थिति बनी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि केंद्र सरकार जब तक अपना जवाब दाखिल नहीं करती, तब तक Waqf Board में किसी भी प्रकार की नियुक्ति नहीं की जाएगी। साथ ही यह भी साफ किया कि waqf properties को लेकर किसी भी Collector द्वारा कोई नया आदेश पारित नहीं होगा। Chief Justice ने कहा, “जब तक अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक बोर्ड या काउंसिल में कोई नई नियुक्ति नहीं हो सकती। और अगर किसी संपत्ति का पंजीकरण 1995 Waqf Act के तहत हुआ है, तो उन संपत्तियों को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।” CJI ने यह भी कहा कि कार्यपालिका को प्रशासनिक निर्णय लेने का अधिकार है जबकि न्यायपालिका न्यायिक फैसले लेती है। इसी संदर्भ में उन्होंने 2013 Waqf Amendment Act को चुनौती देने वाली याचिका पर कुछ विशेष पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने की अनुमति दी है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारें और संबंधित वक्फ बोर्ड को 7 दिनों के भीतर अपना official response दाखिल करना होगा। इसके बाद याचिकाकर्ताओं को केवल 5 याचिकाएं दाखिल करने की अनुमति होगी। इस पूरे मामले को कोर्ट ने “विशेष प्रकृति” का बताते हुए कहा है कि सुनवाई निष्पक्ष और त्वरित होगी। फिलहाल, वक्फ संपत्तियों की मौजूदा स्थिति यथावत बनी रहेगी और किसी भी तरह का नया प्रशासनिक या कानूनी हस्तक्षेप रोक दिया गया है। Desh Harpal की विशेष रिपोर्ट में हम आने वाले दिनों में केंद्र सरकार और वक्फ बोर्ड के जवाबों की विस्तृत जानकारी भी देंगे। यह मामला न सिर्फ कानूनी बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण बनता जा रहा है।
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MP Board 10th/12th Result 2025

MP Board 10th 12th Result कब आएगा ?

MP Board Result Date 2025: जानिए पूरी जानकारी MP Board 10th 12th Result 2025 का इंतजार कर रहे लाखों छात्रों के लिए राहत की खबर है। WMPBSE MP Board Result Date को लेकर लगातार अपडेट्स आ रहे हैं। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, MP Board Result 2025 की तारीख की घोषणा अगले हफ्ते तक की जा सकती है। जिन छात्रों ने कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं दी हैं, वे अपने MP Board 10th 12th Result 2025 को देखने के लिए ऑफिशियल वेबसाइट mpresults.nic.in पर नजर बनाए रखें। इसके अलावा, छात्रों की सुविधा के लिए Desh Harpal न्यूज पोर्टल पर भी रिजल्ट चेक करने का विकल्प उपलब्ध रहेगा। स्टूडेंट्स को www.deshharpal.com पर जाकर “MP Board Result 2025” लिंक पर क्लिक करना होगा। इसके बाद अपना रोल नंबर और अन्य जरूरी जानकारी भरकर परिणाम देख सकेंगे। कब तक आ सकता है MP Board Result 2025? सूत्रों की मानें तो MPBSE (Madhya Pradesh Board of Secondary Education) द्वारा कक्षा 10वीं और 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन लगभग पूरा हो चुका है। अब रिजल्ट जारी करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि MP Board Result 2025 अप्रैल के अंत तक या फिर मई की शुरुआत में घोषित कर दिया जाएगा। बोर्ड की ओर से हालांकि अभी तक रिजल्ट डेट को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे लगातार mpresults.nic.in और www.deshharpal.com पर अपडेट चेक करते रहें। रिजल्ट चेक करने के लिए क्या करें? Desh Harpal आपके लिए MP Board से जुड़ी हर जरूरी अपडेट सबसे पहले लाता रहेगा। रिजल्ट से जुड़ी किसी भी नई जानकारी के लिए हमारे साथ बने रहें।
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Editor's Picks

PNB

PNB में करोड़ों की Fake Currency का खेल! Saharanpur में CCTV ने बढ़ाया शक, 3 Officers पर Action

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की करेंसी चेस्ट से जुड़ा मामला सामने आने के बाद बैंकिंग सिस्टम में हड़कंप मच गया है। जांच के दौरान करोड़ों रुपये के संदिग्ध नकली नोट मिलने की जानकारी सामने आई है। शुरुआती रिपोर्टों में रकम को लेकर अलग-अलग आंकड़े बताए गए हैं, जबकि विस्तृत जांच में करीब ₹7.40 करोड़ की नकली करेंसी मिलने की बात सामने आई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक के तीन अधिकारियों को निलंबित किया गया है। पुलिस ने भी जांच तेज कर दी है। वहीं, RBI की जांच के बाद इस पूरे मामले में कई और तथ्य सामने आने की उम्मीद है। कैसे सामने आया करोड़ों के नकली नोटों का मामला? मामले की शुरुआत उस समय हुई जब RBI को भेजी गई नकदी में करीब ₹4.36 लाख की कमी सामने आई। इतनी बड़ी गड़बड़ी के बाद बैंक में करेंसी चेस्ट का रिकॉर्ड खंगाला गया और विस्तृत जांच शुरू की गई। जांच आगे बढ़ी तो बैंक के अंदर रखी नकदी में बड़ी मात्रा में संदिग्ध नोट मिलने की जानकारी सामने आई। इसके बाद अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई। असली Cash की जगह Fake Notes रखने का शक प्रारंभिक जांच में आशंका है कि करेंसी चेस्ट में मौजूद असली नोटों को निकालकर उनकी जगह नकली नोट रखे गए। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि असली रकम कब निकाली गई और नकली नोट बैंक के Cash Vault तक कैसे पहुंचे। बैंक के Cash Movement Records, लॉगबुक, ऑडिट रिपोर्ट और कर्मचारियों की ड्यूटी से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है। CCTV फुटेज में दिखी संदिग्ध गतिविधि इस पूरे मामले में बैंक का CCTV Footage जांच का अहम हिस्सा बन गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, फुटेज में करेंसी चेस्ट के आसपास एक हाउसकीपिंग कर्मचारी की गतिविधियां दिखाई दी हैं। जांच अधिकारी अब CCTV फुटेज को बैंक के एंट्री-एग्जिट रिकॉर्ड और कैश रिकॉर्ड से मिलाकर देख रहे हैं। इससे यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि करेंसी चेस्ट तक किस-किस कर्मचारी की पहुंच थी। 3 PNB Officers Suspended मामले में बैंक के तीन अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है। इनमें करेंसी चेस्ट और कैश से जुड़े अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं। बैंक ने तीन अधिकारियों को Suspended कर दिया है। हालांकि, निलंबन का मतलब दोष साबित होना नहीं है। अंतिम जिम्मेदारी जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय होगी। SIT के हाथ में जांच, RBI भी कर रहा पड़ताल मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने SIT (Special Investigation Team) गठित की है। टीम बैंक के रिकॉर्ड, CCTV फुटेज और नकदी के लेन-देन की पूरी कड़ी को खंगाल रही है। दूसरी ओर, RBI से जुड़ी जांच भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि नकली नोटों का स्रोत क्या था और वे बैंक की करेंसी चेस्ट तक किस रास्ते से पहुंचे। ₹17 करोड़ या ₹7.40 करोड़? रकम को लेकर क्यों है Confusion इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा नकली नोटों की रकम को लेकर है। कुछ शुरुआती रिपोर्टों में ₹17 करोड़ तक की रकम का उल्लेख किया गया, जबकि बाद की विस्तृत रिपोर्टों में करीब ₹7.40 करोड़ की नकली करेंसी मिलने की बात कही गई है। चूंकि जांच और नोटों की गिनती का काम जारी है, इसलिए अंतिम आंकड़ा आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। बैंकिंग सिस्टम की Security पर उठे सवाल सहारनपुर के PNB मामले ने बैंक की करेंसी चेस्ट की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर इतनी बड़ी मात्रा में संदिग्ध नोट बैंक के सुरक्षित Cash Vault तक कैसे पहुंचे? नियमित जांच और ऑडिट के दौरान इनकी पहचान क्यों नहीं हुई? इन सवालों के जवाब फिलहाल जांच एजेंसियां तलाश रही हैं। आने वाले दिनों में CCTV फुटेज, बैंक रिकॉर्ड और अधिकारियों से पूछताछ के आधार पर पूरे मामले की तस्वीर और साफ हो सकती है। फिलहाल जांच जारी है और नकली नोटों की वास्तविक मात्रा, असली रकम के नुकसान और इस मामले में शामिल लोगों को लेकर अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
SCO Summit

SCO Summit में Pakistan की Edited Photo पर बवाल, PM Modi और Iran President गायब

SCO Summit से जुड़ी एक तस्वीर ने भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से चल रही तल्खी को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के आधिकारिक X अकाउंट से शेयर की गई एक तस्वीर को लेकर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तस्वीर के एडिटेड वर्जन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके साथ खड़े ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन नजर नहीं आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर तस्वीर सामने आने के बाद यूजर्स ने पाकिस्तान सरकार के आधिकारिक अकाउंट पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। खास बात यह है कि जिस कार्यक्रम की तस्वीर साझा की गई, उसमें भारत और ईरान दोनों के शीर्ष नेता मौजूद थे। Original Photo और Edited Version को लेकर सवाल SCO Summit की ग्रुप फोटो में संगठन के कई सदस्य देशों के नेता एक साथ नजर आए थे। इसी तस्वीर का एक अलग वर्जन पाकिस्तान PMO के X हैंडल से पोस्ट किए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस तस्वीर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन दिखाई नहीं देते। इसके बाद सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेज हो गई कि क्या तस्वीर को जानबूझकर एडिट किया गया था। हालांकि, तस्वीर को लेकर पाकिस्तान सरकार की ओर से ऐसी कोई स्पष्ट वजह सामने नहीं आई है कि पोस्ट में मूल तस्वीर के बजाय बदला हुआ फ्रेम क्यों इस्तेमाल किया गया। PM Modi और Pezeshkian की मुलाकात भी रही अहम SCO Summit के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ मुलाकात भी हुई। दोनों नेताओं के बीच भारत-ईरान संबंधों, व्यापार और क्षेत्रीय हालात पर बातचीत हुई। भारत और ईरान के रिश्ते लंबे समय से रणनीतिक और आर्थिक महत्व रखते हैं। ऐसे में दोनों नेताओं की बैठक Summit के दौरान महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रमों में शामिल रही। यही वजह है कि ग्रुप फोटो से दोनों नेताओं के गायब होने वाली तस्वीर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई। Pakistan PM की भी ईरानी राष्ट्रपति से मुलाकात इस मामले का एक और दिलचस्प पहलू सामने आया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी SCO Summit के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात की। दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय मुद्दों पर बातचीत हुई। ऐसे में सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सवाल उठाया कि अगर ईरानी राष्ट्रपति पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से भी मिले थे, तो ग्रुप फोटो के साझा किए गए वर्जन में उनका नजर नहीं आना आखिर क्यों हुआ। India-Pakistan Relations के बीच बढ़ी चर्चा भारत और पाकिस्तान के रिश्ते लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। ऐसे में SCO जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच से सामने आने वाली छोटी-सी तस्वीर भी राजनीतिक और कूटनीतिक नजरिए से महत्वपूर्ण हो जाती है। प्रधानमंत्री मोदी ने Summit में आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट और सामूहिक कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया। भारत लगातार यह रुख रखता रहा है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी तरह का दोहरा रवैया नहीं होना चाहिए। ऐसे माहौल में पाकिस्तान के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से सामने आई कथित Edited Photo ने राजनीतिक बहस को और हवा दे दी। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने उठाए सवाल तस्वीर पोस्ट होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दीं। कई यूजर्स ने Original Group Photo और पाकिस्तान PMO द्वारा साझा तस्वीर की तुलना करते हुए सवाल पूछे। हालांकि, यह भी जरूरी है कि तस्वीर के पीछे की मंशा को लेकर जल्दबाजी में निष्कर्ष न निकाला जाए। पाकिस्तान सरकार की ओर से इस मामले में आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि तस्वीर में बदलाव क्यों किया गया था। SCO Summit ने फिर खींचा दुनिया का ध्यान SCO Summit में भारत, पाकिस्तान, चीन, रूस, ईरान समेत कई देशों के शीर्ष नेता शामिल हुए। बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, आर्थिक सहयोग और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर चर्चा हुई। एक तरफ Summit में भारत का आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश सुर्खियों में रहा, तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मोदी की ईरानी राष्ट्रपति से मुलाकात ने भारत-ईरान संबंधों को लेकर ध्यान खींचा। अब पाकिस्तान PMO की कथित Edited Photo इस पूरे घटनाक्रम में एक नया विवाद बनकर सामने आई है। सोशल मीडिया पर बहस जारी है और लोगों की नजर इस बात पर है कि पाकिस्तान सरकार इस तस्वीर को लेकर कोई आधिकारिक सफाई देती है या नहीं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CJP

Jantar Mantar FIR Case: प्रदर्शनकारियों को SC से राहत, CJP ने Delhi March टाला

जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR को खत्म करने का रास्ता साफ कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर को प्रस्तावित दिल्ली मार्च भी वापस ले लिया। संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वह अब इस मार्च का आयोजन नहीं करेगा। यह पूरा मामला जुलाई में हुए जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान दर्ज FIR को वापस लेना आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में शामिल था। बाद में इसी मुद्दे को लेकर CJP ने 5 सितंबर को इंडिया गेट से नई दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक मार्च निकालने का ऐलान किया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से प्रदर्शनकारियों को राहत सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार और संबंधित राज्यों की ओर से प्रदर्शन से जुड़ी FIR वापस लेने को लेकर आवेदन किया गया था। सुनवाई के दौरान इन मामलों को खत्म करने का रास्ता निकाला गया। रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली में जंतर-मंतर और आसपास हुए प्रदर्शन से संबंधित करीब 13 FIR को आगे नहीं बढ़ाने की बात सामने आई। कुछ ऐसे लोगों के मामले अलग रखे गए हैं, जिनके खिलाफ पहले से गंभीर आपराधिक मामले होने की जानकारी दी गई थी। इस फैसले के बाद आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों को बड़ी कानूनी राहत मिली है। लंबे समय से FIR वापसी की मांग कर रहे संगठन के लिए इसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। 5 सितंबर का Delhi March क्यों किया गया था? CJP ने 24 अगस्त को 5 सितंबर को दिल्ली में शांतिपूर्ण मार्च निकालने का ऐलान किया था। प्रस्तावित मार्च इंडिया गेट से नई दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक होना था। संगठन का आरोप था कि 25 जुलाई को आंदोलन वापस लेने के दौरान सरकार की ओर से किए गए कुछ आश्वासनों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। CJP ने खास तौर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने और आंदोलन से जुड़े अन्य मुद्दों पर सरकार से कार्रवाई की मांग की थी। संगठन ने कहा था कि अगर वादे पूरे नहीं हुए तो वह फिर से सड़कों पर उतरेगा। पहले SC ने मार्च पर रोक लगाने से किया था इनकार इस मामले में घटनाक्रम तेजी से बदला। 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने CJP के 5 सितंबर के प्रस्तावित मार्च पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। अदालत ने कहा था कि फिलहाल ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है जिससे यह माना जाए कि प्रदर्शन के दौरान अनिवार्य रूप से अप्रिय स्थिति पैदा होगी। कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी प्रशासन पर छोड़ी गई थी। लेकिन इसके अगले ही दिन मामला अलग दिशा में चला गया। 1 सितंबर की सुनवाई के दौरान केंद्र के आश्वासन और कोर्ट के आदेश के बाद CJP ने खुद 5 सितंबर के मार्च को वापस लेने की घोषणा कर दी। CJP ने क्यों बदला फैसला? सुप्रीम कोर्ट में CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि केंद्र सरकार के सकारात्मक आश्वासन और अदालत के आदेश को देखते हुए संगठन ने मार्च वापस लेने का फैसला किया है। यानी जिस मुद्दे को लेकर दोबारा सड़क पर उतरने की तैयारी थी, उसमें कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद फिलहाल टकराव की स्थिति टल गई है। CJI ने भी सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के सकारात्मक रवैये और बातचीत के महत्व पर जोर दिया। अदालत की टिप्पणी का संदेश साफ था कि खुले मन से बातचीत हो तो विवाद का समाधान निकाला जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Bhopal

Sealing Action पर Bhopal में बवाल: व्यापारियों और पुलिस में भिड़ंत, शंख-डमरू बजाकर प्रदर्शन

Bhopal में Sealing Action को लेकर व्यापारियों का गुस्सा सड़क पर दिखाई दिया। कार्रवाई के विरोध में जुटे कारोबारियों और पुलिस के बीच मंगलवार को धक्का-मुक्की हो गई। कुछ व्यापारियों ने बैरिकेड्स हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश की, जिसके दौरान कुछ कारोबारी गिर गए। प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने थाली, शंख और डमरू बजाकर सरकार के प्रति अपना विरोध दर्ज कराया। Sealing के खिलाफ व्यापारियों का प्रदर्शन भोपाल में सीलिंग कार्रवाई के विरोध में व्यापारी बड़ी संख्या में एकजुट हुए। कारोबारियों का कहना है कि कार्रवाई से उनके कारोबार पर सीधा असर पड़ रहा है। इसी मुद्दे को लेकर वे प्रशासन और सरकार के सामने अपनी बात रखने के लिए प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर व्यापारियों को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की। इसी बीच कुछ कारोबारी बैरिकेड्स हटाकर आगे बढ़ गए। पुलिस और व्यापारियों के बीच इसी दौरान धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। बैरिकेड्स के पास हुई धक्का-मुक्की प्रदर्शन के दौरान माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया, जब व्यापारियों ने पुलिस के बैरिकेड्स को हटाने की कोशिश की। आगे बढ़ने की कोशिश में कुछ कारोबारी गिर गए। पुलिसकर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की और प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया। हालांकि, कुछ देर बाद स्थिति को संभाल लिया गया। इस घटनाक्रम के बाद मौके पर मौजूद व्यापारियों में प्रशासन की कार्रवाई को लेकर नाराजगी और बढ़ती दिखाई दी। थाली, शंख और डमरू बजाकर सरकार से लगाई गुहार व्यापारियों के विरोध का एक अलग अंदाज भी देखने को मिला। प्रदर्शनकारियों ने थाली, शंख और डमरू बजाकर सरकार की ‘सद्बुद्धि’ के लिए विरोध जताया। व्यापारियों का कहना था कि उनकी समस्याओं को सुना जाए और सीलिंग कार्रवाई को लेकर सरकार उनकी मांगों पर विचार करे। प्रदर्शनकारियों ने अपने विरोध के जरिए सरकार और प्रशासन तक संदेश पहुंचाने की कोशिश की। उनका कहना है कि वे टकराव नहीं, बल्कि बातचीत के जरिए समस्या का समाधान चाहते हैं। व्यापारियों की मांग पर अब नजर भोपाल में Sealing Action को लेकर हुए इस प्रदर्शन ने प्रशासन और कारोबारियों के बीच चल रहे विवाद को एक बार फिर सामने ला दिया है। अब देखने वाली बात होगी कि सरकार और प्रशासन व्यापारियों की मांगों पर क्या रुख अपनाते हैं। फिलहाल प्रदर्शन के दौरान पुलिस और व्यापारियों के बीच हुई धक्का-मुक्की के बाद मामला चर्चा में है। व्यापारियों का विरोध यह संकेत दे रहा है कि सीलिंग कार्रवाई का मुद्दा अभी शांत होने वाला नहीं है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Rahul Gandhi

Bus में नाबालिग से कथित गैंगरेप, 47 KM तक चलता रहा सफर; Rahul Gandhi ने पूछा- Checking क्यों नहीं?

दिल्ली-NCR में चलती स्लीपर बस के अंदर नाबालिग छात्रा के साथ कथित गैंगरेप का मामला सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बस करीब 47 किलोमीटर तक चलती रही, लेकिन रास्ते में किसी चेकपोस्ट पर उसकी जांच नहीं हुई। मामले में बस के ड्राइवर और कंडक्टर को गिरफ्तार किया गया है। घटना सामने आने के बाद कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि जब बस इतने लंबे रूट से होकर गुजरी तो पुलिस और प्रशासन को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? बारिश और अंधेरे के बीच बस में बैठी छात्रा रिपोर्टों के मुताबिक, नाबालिग छात्रा बारिश और अंधेरे के बीच रास्ता भटककर ग्रेटर नोएडा के परी चौक इलाके में पहुंची थी। वह नोएडा में अपने रिश्तेदार के पास जाने की कोशिश कर रही थी। इसी दौरान एक स्लीपर बस वहां पहुंची। आरोप है कि ड्राइवर और कंडक्टर ने छात्रा को मदद का भरोसा देकर बस में बैठाया। इसके बाद बस दिल्ली की तरफ बढ़ गई। पुलिस के अनुसार, परी चौक से कश्मीरी गेट तक का सफर करीब 47 किलोमीटर का था। इसी सफर के दौरान छात्रा के साथ कथित अपराध हुआ। एक दिन पहले भी आरोपियों पर गंभीर आरोप जांच में यह बात भी सामने आई है कि घटना से एक दिन पहले भी ड्राइवर और कंडक्टर पर छात्रा के साथ दुष्कर्म करने का आरोप है। पुलिस इस पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़कर जांच कर रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने बस और उससे जुड़े अन्य सबूतों को कब्जे में लिया है। CCTV फुटेज समेत दूसरे डिजिटल और फॉरेंसिक सबूतों की भी जांच की जा रही है। Driver और Conductor गिरफ्तार पुलिस ने मामले में बस ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि बस किस रास्ते से गुजरी और रास्ते में किन-किन जगहों पर रुकी। बस की जांच भी की जा रही है ताकि घटना से जुड़े जरूरी सबूत जुटाए जा सकें। Bus में पर्दे, CCTV को लेकर भी सवाल स्लीपर बसों में यात्रियों की Privacy के लिए पर्दे लगाए जाते हैं, लेकिन इसी व्यवस्था ने सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। रिपोर्टों में बस में CCTV की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। ऐसे में सवाल है कि लंबी दूरी तक चलने वाली स्लीपर बसों में यात्रियों, खासकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त Monitoring क्यों नहीं होती? Rahul Gandhi ने Police Checking पर उठाए सवाल मामले पर राहुल गांधी ने सरकार और पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक नाबालिग के साथ बस के अंदर इतनी गंभीर घटना हुई और वाहन करीब 47 किलोमीटर तक चलता रहा। उन्होंने सवाल किया कि रास्ते में मौजूद पुलिस व्यवस्था को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली। उन्होंने बसों की Checking और Monitoring को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग की। राहुल गांधी ने इस घटना का संदर्भ देते हुए Nirbhaya Case की याद भी दिलाई और कहा कि वर्षों बाद भी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर वही सवाल सामने आना चिंताजनक है। 47 KM का सफर और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल इस घटना ने दिल्ली-NCR की Public Transport Safety पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। आखिर सड़कों पर चलने वाली बसों की Monitoring किस तरह होती है? क्या संदिग्ध बसों की नियमित Checking होती है? क्या हर स्लीपर बस में CCTV और Emergency Support की पर्याप्त व्यवस्था है? ये सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल रोजाना हजारों लोग करते हैं। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। जांच पूरी होने के बाद ही घटना से जुड़े सभी तथ्यों की तस्वीर साफ होगी। यह मामला सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि Public Transport में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सिस्टम की तैयारियों पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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