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ग्राम सभा के दौरान प्रभारी सचिव से मारपीट: पानी के किराये को लेकर पंचायत भवन में घुसे 4 आरोपी

सागर जिले के सानौधा थाना क्षेत्र के ग्राम पड़रिया में पानी के किराये को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि ग्राम सभा की बैठक के दौरान रोजगार सहायक और प्रभारी सचिव के साथ जमकर मारपीट कर दी गई। घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें आरोपियों द्वारा हमला करते हुए देखा जा सकता है। पानी के पैसे मांगने पहुंचे थे आरोपी पुलिस के अनुसार, ग्राम पड़रिया में पदस्थ रोजगार सहायक और अतिरिक्त सचिव मुकेश कुर्मी ने थाने में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि गांव में पानी की कमी के चलते 17 अप्रैल से पंचायत द्वारा साहब सिंह चौहान के निजी बोर से किराये पर पानी लिया जा रहा था। ग्राम सभा के दौरान हुआ विवाद 5 जून की दोपहर मुकेश पंचायत भवन में ग्राम सभा की बैठक में व्यस्त थे। इसी दौरान साहब सिंह चौहान वहां पहुंचे और पानी के किराये की राशि मांगने लगे। मुकेश ने सरपंच से बात कर भुगतान कराने की बात कही, जिससे साहब सिंह नाराज हो गए। डंडे, लात-घूंसों से की पिटाई आरोप है कि विवाद बढ़ने पर साहब सिंह का भाई गुड्डू उर्फ इमरत सिंह चौहान और उनके बेटे नीतेश व निशांत भी मौके पर पहुंच गए। चारों ने गाली-गलौज शुरू कर दी और विरोध करने पर मुकेश कुर्मी के साथ मारपीट की। पीड़ित के मुताबिक, गुड्डू ने डंडे से हमला किया, जबकि अन्य आरोपियों ने पकड़कर जमीन पर पटक दिया। इसके बाद लात-घूंसों से बेरहमी से पिटाई की गई। सरकारी दस्तावेज भी फाड़े मारपीट के दौरान आरोपियों ने पंचायत भवन में रखे सरकारी रजिस्टर और अन्य दस्तावेज भी फाड़ दिए। घटना के समय मौजूद ग्रामीणों ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया। पुलिस ने दर्ज किया केस पुलिस ने पीड़ित प्रभारी सचिव की शिकायत पर चारों आरोपियों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सचिवों और रोजगार सहायकों में नाराजगी घटना के विरोध में रोजगार सहायकों और पंचायत सचिवों ने सागर एसपी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच और उचित कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया ह अधिक खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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सागर में बड़ा अनाज घोटाला? वेयरहाउस में पहुंचा 90% मिट्टी मिला गेहूं, जांच के आदेश

सागर के गंभीरिया स्थित श्री देव प्रभा वेयर हाउस में मिट्टी मिला अमानक गेहूं पहुंचने का मामला सामने आया है। ट्रक में करीब 600 बोरियां भरकर गेहूं लाया गया था, लेकिन जांच में बोरियों में लगभग 10 प्रतिशत गेहूं और 90 प्रतिशत मिट्टी होने का दावा किया गया है। मामला सामने आने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया। कर्मचारी को हुआ शक, खुली मिलावट की पोल जानकारी के अनुसार, लक्ष्मी नगर स्थित श्री देव प्रभा वेयर हाउस को वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन की सांईखेड़ा ब्रांच ने करीब एक माह पहले अधिग्रहित किया था। यहां विभिन्न उपार्जन केंद्रों से गेहूं लाकर संग्रहित किया जा रहा है। इसी दौरान ट्रक क्रमांक MP 15 ZR 9190 करीब 600 बोरियां लेकर वेयर हाउस पहुंचा। मजदूर जब बोरियां उतार रहे थे, तभी वेयर हाउस की निगरानी कर रहे कर्मचारी को गेहूं की गुणवत्ता पर संदेह हुआ। जांच करने पर बोरियों में बड़ी मात्रा में मिट्टी भरी मिली। सुपरवाइजर ने तुरंत लौटाई खेप वेयरहाउस सुपरवाइजर ने बोरियों में मिलावटी और अमानक गेहूं पाए जाने के बाद पूरी खेप वापस लौटा दी। इसके बाद मामले की जानकारी प्रशासन को दी गई। कलेक्टर प्रतिभा पाल ने दिए जांच के आदेश मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रतिभा पाल ने तत्काल जांच के निर्देश दिए। सोमवार को प्रशासन और खाद्य विभाग की टीम वेयर हाउस पहुंची और गेहूं की गुणवत्ता, खरीद प्रक्रिया, परिवहन और उसके स्रोत की जांच शुरू की। गेहूं कहां से आया, कौन जिम्मेदार? जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि गेहूं कहां से लाया गया, किसके द्वारा खरीदा गया और इसमें इतनी बड़ी मिलावट कैसे हुई। स्थानीय स्टाफ से भी पूछताछ की जा रही है। दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई कलेक्टर प्रतिभा पाल ने कहा कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य और साक्ष्य सामने आएंगे, उनके आधार पर संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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मध्य प्रदेश के संविदा कर्मचारियों को बड़ी राहत: बढ़ेगा वेतन, वित्त विभाग ने जारी किए आदेश

मध्य प्रदेश के एक लाख से अधिक संविदा अधिकारी और कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार ने उनके पारिश्रमिक में 4.46 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि लागू करने का फैसला किया है। वित्त विभाग ने सोमवार को इसके आदेश जारी कर दिए हैं। यह बढ़ोतरी 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी जाएगी। पिछले साल से ज्यादा बढ़ा पारिश्रमिक इस बार संविदा कर्मचारियों को मिलने वाली वृद्धि दर पिछले साल की तुलना में अधिक है। वर्ष 2025 में संविदा कर्मचारियों के पारिश्रमिक में 3.87 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई थी, जबकि इस बार यह बढ़कर 4.46 प्रतिशत हो गई है। CPI के आधार पर तय होती है बढ़ोतरी वित्त विभाग ने यह आदेश सामान्य प्रशासन विभाग की 22 जुलाई 2023 की संविदा नीति के आधार पर जारी किया है। इस नीति के अनुसार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधार पर हर साल संविदा कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि की जाती है। डेढ़ लाख में से सिर्फ एक लाख कर्मचारियों को फायदा प्रदेश में करीब डेढ़ लाख संविदा अधिकारी-कर्मचारी विभिन्न विभागों में कार्यरत हैं, लेकिन नई बढ़ोतरी का लाभ सभी को नहीं मिलेगा। जिन विभागों में अभी तक 2023 की संविदा नीति लागू नहीं हुई है, वहां के कर्मचारियों को इस बढ़ोतरी का फायदा नहीं दिया जाएगा। ऐसे में करीब एक लाख कर्मचारियों को ही इसका लाभ मिल पाएगा। संघ ने उठाई सभी विभागों में लागू करने की मांग संविदा अधिकारी-कर्मचारी संघ ने सरकार से मांग की है कि जिन विभागों में अभी तक नई संविदा नीति लागू नहीं हुई है, वहां भी कर्मचारियों को CPI आधारित पारिश्रमिक वृद्धि का लाभ दिया जाए। संघ का कहना है कि सभी संविदा कर्मचारियों को समान रूप से फायदा मिलना चाहिए। कर्मचारियों में खुशी का माहौल सरकार के इस फैसले के बाद संविदा कर्मचारियों में खुशी का माहौल है। महंगाई के दौर में वेतन वृद्धि को कर्मचारियों ने राहत देने वाला कदम बताया है। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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हाथियों की मौत अब मानी जाएगी संभावित क्राइम सीन: छत्तीसगढ़ वन विभाग की नई पहल

छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण को मजबूत बनाने के लिए वन विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। अब जंगल में किसी हाथी की मौत होने पर उसे सिर्फ सामान्य घटना नहीं माना जाएगा, बल्कि संभावित अपराध स्थल मानकर उसकी वैज्ञानिक जांच की जाएगी। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य हाथियों की संदिग्ध मौतों के पीछे की असली वजह सामने लाना है। रायगढ़ में हुआ विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम इसी उद्देश्य से रायगढ़ में दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें प्रदेशभर से 78 वन अधिकारी और पशु चिकित्सा विशेषज्ञ शामिल हुए। प्रशिक्षण कार्यक्रम वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन और प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरुण कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में आयोजित किया गया। वैज्ञानिक जांच पर दिया गया जोर प्रशिक्षण में हाथियों की मौत के कारणों की वैज्ञानिक जांच, वन्यजीव अपराधों की पहचान और संरक्षण उपायों पर विशेष फोकस किया गया। अधिकारियों को बताया गया कि किसी मृत हाथी के मिलने पर घटनास्थल को सुरक्षित रखना, सबूत जुटाना और विषप्रयोग, शिकार या अन्य संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करना बेहद जरूरी है। प्रदेश में बढ़ रही हाथियों की चुनौती वन विभाग के अनुसार छत्तीसगढ़ में फिलहाल करीब 450 हाथी विचरण कर रहे हैं। रायगढ़, जशपुर, कोरबा और सूरजपुर जिलों में हाथियों की बढ़ती गतिविधियों और मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं को देखते हुए यह प्रशिक्षण बेहद अहम माना जा रहा है। पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच की ट्रेनिंग वन अधिकारियों और पशु चिकित्सकों को हाथियों की शारीरिक संरचना, स्वास्थ्य प्रबंधन और वैज्ञानिक पोस्टमार्टम प्रक्रिया की जानकारी दी गई। साथ ही जैविक नमूनों के संग्रहण, संरक्षण और लैब परीक्षण की आधुनिक तकनीकों पर भी प्रशिक्षण दिया गया। फील्ड में कराया गया प्रैक्टिकल प्रशिक्षण के दूसरे दिन अधिकारियों को मैदानी स्तर पर शव परीक्षण, रक्त और ऊतक नमूने लेने, रोग और विष विज्ञान जांच करने और दुर्गम इलाकों में सुरक्षित जांच प्रक्रिया अपनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने साझा किया अनुभव कार्यक्रम में भारतीय वन्यजीव संस्थान, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान और वन्यजीव फोरेंसिक एवं स्वास्थ्य अध्ययन संस्थान के विशेषज्ञों ने आधुनिक जांच तकनीकों की जानकारी साझा की। इस दौरान वरिष्ठ वन अधिकारी प्रियंका पांडे सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। वन मंत्री बोले- संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार वन्यजीव संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक अनुसंधान के जरिए हाथियों समेत सभी वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। देश और प्रदेश की ताजा खबरों के लिए पढ़ें:www.deshharpal.com
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बिलासपुर में बायोगैस संयंत्रों पर प्रशासन का फोकस, स्वच्छ ऊर्जा और जैविक खेती को मिलेगा बढ़ावा

बिलासपुर जिले में स्वच्छ ऊर्जा, जैविक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रशासन अब बायोगैस संयंत्रों के प्रभावी संचालन पर जोर दे रहा है। इसी क्रम में कलेक्टर Sanjay Agrawal और जिला पंचायत सीईओ Sandeep Agrawal ने तखतपुर जनपद पंचायत के ग्राम गनियारी स्थित बायोगैस (गोबर गैस) संयंत्र का निरीक्षण किया। गैस उत्पादन और जैविक खाद पर हुई चर्चा निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने संयंत्र की कार्यप्रणाली, गैस उत्पादन क्षमता, गोबर की उपलब्धता और जैविक खाद निर्माण को लेकर चर्चा की। कलेक्टर ने कहा कि बायोगैस परियोजनाएं सिर्फ स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को बढ़ावा देने का भी प्रभावी माध्यम हैं। गोबर की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश कलेक्टर ने गौठानों और पशुपालकों के माध्यम से गोबर की नियमित और पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संयंत्र को पूरी क्षमता से चलाने के लिए कच्चे माल की लगातार आपूर्ति जरूरी है। इससे ग्रामीणों को भी अधिक लाभ मिल सकेगा। घरेलू ईंधन की जरूरत होगी पूरी अधिकारियों ने बताया कि बायोगैस संयंत्र से बनने वाली गैस का उपयोग घरेलू ईंधन के रूप में किया जा सकता है। इससे ग्रामीण परिवारों को स्वच्छ और सस्ता ईंधन उपलब्ध होगा। संयंत्र से निकलने वाली स्लरी उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद के रूप में किसानों के लिए उपयोगी साबित हो रही है। जैविक खाद से किसानों को फायदा इससे खेती की लागत कम होगी और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता भी घटेगी। प्रशासन का मानना है कि इससे प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा। तकनीकी व्यवस्थाओं की समीक्षा निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने पाइप लाइन, वाल्व, डाइजेस्टर और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने आवश्यक सुधार कार्य जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। वहीं जिला पंचायत सीईओ ने अधिकारियों को नियमित निगरानी और दैनिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल प्रशासन का मानना है कि बायोगैस संयंत्रों के बेहतर संचालन से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा, अपशिष्ट प्रबंधन और जैविक खेती को नई दिशा मिलेगी। इससे आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था का लक्ष्य भी मजबूत होगा। देश और प्रदेश की ताजा खबरों के लिए पढ़ें:www.deshharpal.com
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बिलासपुर में युवक पर चाकू से जानलेवा हमला, पत्नी ने नकाब हटाकर आरोपी को पहचाना

बिलासपुर के तिफरा इलाके में रविवार रात एक युवक पर चाकू से जानलेवा हमला किया गया। कुंदरापारा में रात करीब 10 बजे हुई इस घटना में नकाबपोश हमलावर ने युवक की पीठ और पेट पर कई वार किए। घटना के दौरान युवक की पत्नी ने साहस दिखाते हुए हमलावर का नकाब खींच लिया, जिससे उसकी पहचान हो गई। आरोपी की पहचान के बाद पुलिस हरकत में आई हमलावर की पहचान भोलू साहू उर्फ दुर्गेश साहू के रूप में हुई है। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया था। सूचना मिलते ही सिरगिट्टी थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी। बाद में पुलिस ने रायपुर से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। फल कारोबारी पर किया हमला जानकारी के मुताबिक, घायल युवक मनीष गोस्वामी (32) तिफरा चौक पर फल की दुकान चलाता है। रविवार रात वह अपनी पत्नी के साथ दुकान के पास खड़ा था। इसी दौरान नकाब पहनकर पहुंचे युवक ने पीछे से मनीष को पकड़ लिया और धारदार चाकू से हमला कर दिया। हमले में मनीष की पीठ और पेट पर गंभीर चोटें आई हैं। पत्नी ने दिखाई हिम्मत हमले के दौरान मनीष की पत्नी ने आरोपी को पकड़ने की कोशिश की और उसका नकाब खींच दिया। तभी पता चला कि हमलावर भोलू साहू है। हालांकि आरोपी मौके से भागने में सफल रहा। घायल मनीष को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है। अवैध संबंध को लेकर था विवाद पुलिस जांच में सामने आया कि घायल युवक का आरोपी के परिवार की एक महिला के साथ संबंध था। बताया जा रहा है कि वह महिला गांव सैदा में मनीष के साथ रह रही थी। इसी बात को लेकर आरोपी काफी नाराज था और मनीष से रंजिश रखता था। पुलिस के मुताबिक, इसी विवाद के चलते उसने हमले की साजिश रची। रायपुर से आरोपी गिरफ्तार मामले की गंभीरता को देखते हुए सिरगिट्टी थाना प्रभारी अभय सिंह बैस के नेतृत्व में विशेष टीम बनाई गई। जांच के दौरान पुलिस को आरोपी के रायपुर में छिपे होने की सूचना मिली। इसके बाद पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसके पास से हमले में इस्तेमाल किया गया चाकू भी बरामद किया है। आरोपी को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। देश और प्रदेश की ताजा खबरों के लिए पढ़ें:www.deshharpal.com
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रायपुर में मूलभूत सुविधाओं को लेकर शिवसेना का प्रदर्शन, नगर निगम को सौंपा ज्ञापन

Shiv Sena ने रायपुर जोन क्रमांक-10 के विभिन्न वार्डों में पेयजल, सड़क, सफाई और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाओं की खराब स्थिति को लेकर नगर निगम प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। संगठन के पदाधिकारियों ने जोन आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर समस्याओं के जल्द समाधान की मांग की। पेयजल संकट से परेशान लोग शिवसेना नेताओं का आरोप है कि जोन-10 के कई वार्डों में नियमित पेयजल आपूर्ति नहीं हो रही है। गर्मी के मौसम में लोगों को पानी के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कई इलाकों में नागरिकों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। खराब सड़कों से हादसों का खतरा ज्ञापन में जर्जर सड़कों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। संगठन का कहना है कि कई सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं, जिससे वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी हो रही है। बरसात के मौसम से पहले मरम्मत नहीं होने पर हालात और खराब होने की आशंका जताई गई है। सफाई व्यवस्था पर उठाए सवाल शिवसेना ने आरोप लगाया कि कई वार्डों में नियमित सफाई नहीं हो रही है। नालियों और सार्वजनिक स्थानों पर कचरा जमा होने से संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। स्थानीय लोग लंबे समय से सफाई व्यवस्था सुधारने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। बंद स्ट्रीट लाइट से बढ़ी दिक्कत संगठन ने बताया कि कई इलाकों में स्ट्रीट लाइट बंद पड़ी हैं या पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं है। इससे रात के समय लोगों को आवागमन में परेशानी और असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है। आंदोलन की चेतावनी शिवसेना ने मांग की है कि सभी वार्डों में नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, खराब सड़कों की मरम्मत कराई जाए, सफाई व्यवस्था दुरुस्त की जाए और बंद स्ट्रीट लाइटों को जल्द चालू किया जाए। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि समस्याओं का समाधान जल्द नहीं हुआ तो जनता के साथ मिलकर चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा। प्रदेश और देश की ताजा खबरों के लिए पढ़ें: www.deshharpal.com
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अमित जोगी के खिलाफ भाजपा नेताओं की शिकायत, सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर बढ़ा विवाद

जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के नेता Amit Jogi के खिलाफ भाजपा नेताओं ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। भाजपा ने उन पर धार्मिक भावनाएं आहत करने, सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट करने और बाद में कथित रूप से झूठी एफआईआर दर्ज कर पुलिस को गुमराह करने का आरोप लगाया है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। भाजपा आईटी सेल ने सौंपा ज्ञापन रविवार को भाजपा आईटी सेल के प्रदेश कार्यालय सहमंत्री शैलेश दीक्षित ने संबंधित थाने में लिखित शिकायत देकर अमित जोगी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। शिकायत में कहा गया कि मामला 27 मई 2026 को बकरीद (ईद-उल-अजहा) के मौके पर किए गए एक सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ा है। पोस्ट पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप भाजपा नेताओं के अनुसार, अमित जोगी ने बकरीद की शुभकामनाएं देते हुए एक पोस्ट साझा किया था, जिसमें बकरी के साथ गाय की तस्वीर भी दिखाई गई थी। आरोप है कि इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई और बहुसंख्यक समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। पोस्ट हटाने और नई तस्वीर डालने का आरोप भाजपा नेताओं का दावा है कि विरोध बढ़ने के बाद अमित जोगी ने करीब दो घंटे के भीतर मूल पोस्ट को हटा दिया। बाद में दूसरी तस्वीर साझा की गई, जिसमें गाय का चित्र नहीं था। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इसके बाद खुद को निर्दोष साबित करने के लिए गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के एक थाने में कथित रूप से झूठी एफआईआर दर्ज कराई गई। तकनीकी जांच की मांग भाजपा नेताओं ने पुलिस से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और सर्वर रिकॉर्ड की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पोस्ट की एडिट हिस्ट्री और वास्तविक तथ्य सामने लाए जाएं। शिकायत में धार्मिक भावनाएं भड़काने, साक्ष्य मिटाने, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और पुलिस को झूठी जानकारी देने जैसी धाराओं में जांच की मांग की गई है। पुलिस ने जांच शुरू की पुलिस अधिकारियों ने शिकायत मिलने की पुष्टि की है। उनका कहना है कि मामले से जुड़े सभी आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। देश और प्रदेश की ताजा खबरों के लिए पढ़ें:www.deshharpal.com
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कांग्रेस विधायक उत्तरी जांगड़े ने CM साय को लिखा पत्र, 2026 के लिए खुली ट्रांसफर नीति लागू करने की मांग

कांग्रेस विधायक Uttari Jangde ने मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai को पत्र लिखकर वर्ष 2026 के लिए खुली, पारदर्शी और समयबद्ध स्थानांतरण नीति जल्द लागू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लाखों शासकीय कर्मचारी और अधिकारी शासन की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन लंबे समय से स्पष्ट ट्रांसफर नीति नहीं होने से कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है। विभिन्न संगठनों से मिल रहे ज्ञापन पत्र में विधायक ने उल्लेख किया कि सारंगढ़ विधानसभा क्षेत्र सहित प्रदेशभर से कर्मचारी संगठन, शिक्षक संघ, स्वास्थ्यकर्मी और अन्य विभागों के कर्मचारी लगातार ज्ञापन सौंप रहे हैं। इन सभी की प्रमुख मांग एक पारदर्शी और न्यायसंगत ट्रांसफर नीति लागू करने की है, ताकि कर्मचारियों को राहत मिल सके। गृह जिले से दूर रहने की परेशानी उत्तरी जांगड़े ने कहा कि कई कर्मचारी वर्षों से अपने गृह जिले से दूर पदस्थ हैं। कई मामलों में पति-पत्नी अलग-अलग जिलों में कार्यरत हैं, जिससे पारिवारिक जीवन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और पारिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर कर्मचारियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। चुनावी साल का दिया हवाला कांग्रेस विधायक ने पत्र में यह भी कहा कि यदि इस वर्ष ट्रांसफर नीति लागू नहीं हुई, तो अगले साल चुनावी तैयारियों के कारण तबादलों की संभावना कम हो जाएगी। ऐसे में कर्मचारियों को उम्मीद है कि वर्ष 2026 में सरकार खुली ट्रांसफर नीति लागू करेगी। सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग विधायक ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि कर्मचारियों के हितों को प्राथमिकता देते हुए जल्द फैसला लिया जाए। उनका कहना है कि पारदर्शी ट्रांसफर नीति लागू होने से कर्मचारियों का शासन पर विश्वास मजबूत होगा और प्रशासनिक व्यवस्था भी बेहतर होगी। प्रदेश और देश की ताजा खबरों के लिए पढ़ें:www.deshharpal.com
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‘तुम प्रेग्नेंट कैसे हो सकती हो?’: ट्विशा से समर्थ के सवाल पर टिकी सीबीआई जांच, प्रेग्नेंसी टर्मिनेट विवाद में नए खुलासे

प्रेग्नेंसी टर्मिनेट विवाद मामले में सीबीआई की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। अब एजेंसी की नजर ट्विशा और समर्थ के बीच हुई बातचीत पर है। जांच के दौरान कुछ ऐसे चैट और बातचीत सामने आई हैं, जिन्होंने इस केस को नया मोड़ दे दिया है। समर्थ ने पूछा- यह बच्चा किसका है? सूत्रों के मुताबिक, समर्थ ने ट्विशा से सवाल किया था कि वह प्रेग्नेंट कैसे हो सकती है और यह बच्चा आखिर किसका है। बताया जा रहा है कि इसी बातचीत के बाद दोनों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया था। सीबीआई अब इन्हीं सवालों और बातचीत को जांच का अहम हिस्सा मान रही है। डिजिटल सबूत खंगाल रही सीबीआई जांच एजेंसी कॉल रिकॉर्ड, चैट्स और अन्य डिजिटल सबूतों की बारीकी से जांच कर रही है। मामले से जुड़े कई लोगों से पूछताछ भी जारी है। अधिकारियों का मानना है कि दोनों के बीच हुई बातचीत से केस के कई अहम पहलुओं का खुलासा हो सकता है। मानसिक दबाव के एंगल पर भी जांच सीबीआई यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या ट्विशा पर किसी तरह का मानसिक दबाव बनाया गया था। प्रेग्नेंसी टर्मिनेट कराने के पीछे किन परिस्थितियों ने भूमिका निभाई, इस पहलू पर भी जांच की जा रही है। सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस यह मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। रिश्तों में भरोसा, जिम्मेदारी और महिलाओं के अधिकारों को लेकर बहस तेज हो गई है। हालांकि परिवार और करीबी लोग फिलहाल खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद सामने आएगी सच्चाई सीबीआई अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और सभी मेडिकल व डिजिटल रिकॉर्ड्स की गहराई से जांच की जा रही है। एजेंसी का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी। अधिक जानकारी के लिए इस मामले से जुड़ी हर बड़ी अपडेट और ताजा खबरें पढ़ने के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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अक्षर पटेल का ऑलराउंड शो, शुभमन गिल की कप्तानी पारी; भारत ने इंग्लैंड को 6 विकेट से हराकर पहला वनडे जीता

बर्मिंघम। ऑलराउंडर अक्षर पटेल के शानदार प्रदर्शन और कप्तान शुभमन गिल की बेहतरीन बल्लेबाजी की बदौलत भारत ने इंग्लैंड को पहले वनडे मुकाबले में 6 विकेट से हराकर सीरीज में विजयी शुरुआत की। एजबेस्टन मैदान पर खेले गए मैच में भारत ने 259 रन के लक्ष्य को 45.2 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 262 रन बनाकर हासिल कर लिया। अक्षर पटेल ने नाबाद 57 रन बनाए, जबकि वॉशिंगटन सुंदर ने भी नाबाद 52 रन की महत्वपूर्ण पारी खेलकर टीम को जीत तक पहुंचाया। कप्तान शुभमन गिल ने 80 रन बनाए, लेकिन मैच के दौरान क्रैम्प्स की समस्या के कारण उन्हें रिटायर्ड हर्ट होकर मैदान छोड़ना पड़ा। शुरुआती झटकों के बाद गिल ने संभाली पारी लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही। रोहित शर्मा 11 रन और विराट कोहली 5 रन बनाकर जल्दी आउट हो गए। इसके बाद कप्तान शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर ने तीसरे विकेट के लिए 101 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी कर टीम की पारी को संभाला। श्रेयस 35 रन बनाकर रनआउट हुए, जबकि केएल राहुल बोल्ड होकर पवेलियन लौट गए। इसके बाद अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर ने जिम्मेदारी संभालते हुए पांचवें विकेट के लिए 102 रन की अविजित साझेदारी की और भारत को शानदार जीत दिलाई। जो रूट और लियाम डॉसन ने इंग्लैंड को संभाला इससे पहले टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड की टीम ने 47.5 ओवर में 258 रन बनाए। इंग्लैंड की शुरुआत मजबूत रही और टीम ने 61 रन तक कोई विकेट नहीं गंवाया, लेकिन इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने जोरदार वापसी करते हुए महज 19 रन के भीतर 5 विकेट झटक दिए। मध्यक्रम में जो रूट ने 76 रन और लियाम डॉसन ने 68 रन की अहम पारी खेली। दोनों बल्लेबाजों ने छठे विकेट के लिए 121 रन की साझेदारी कर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। अक्षर पटेल ने गेंद और बल्ले दोनों से निभाई अहम भूमिका भारतीय गेंदबाजों में अक्षर पटेल सबसे सफल रहे। उन्होंने शानदार गेंदबाजी करते हुए 4 विकेट अपने नाम किए। वहीं प्रसिद्ध कृष्णा और गुरनूर बरार ने 2-2 विकेट हासिल किए। जसप्रीत बुमराह और शिवम दुबे को एक-एक सफलता मिली। गेंद और बल्ले दोनों से बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले अक्षर पटेल ने टीम इंडिया की जीत में सबसे अहम भूमिका निभाई और भारत ने सीरीज की शानदार शुरुआत की। क्रिकेट और खेल जगत की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

CAG रिपोर्ट में जल जीवन मिशन की पोल: छत्तीसगढ़ में 33% नल कनेक्शन गैर-कार्यशील, ‘हर घर जल’ लक्ष्य भी अधूरा

रायपुर। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन (JJM) के क्रियान्वयन को लेकर कई गंभीर खामियों का खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार कमजोर योजना, धीमा क्रियान्वयन, निगरानी की कमी और गलत रिपोर्टिंग के कारण ग्रामीण पेयजल योजनाओं की प्रभावशीलता और दीर्घकालिक स्थिरता प्रभावित हुई है। मार्च 2024 तक की अवधि पर आधारित ‘छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन का प्रदर्शन ऑडिट’ रिपोर्ट मंगलवार को वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने विधानसभा में पेश की। रिपोर्ट सामने आने के बाद राज्य सरकार ने इसके लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया, जबकि उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने दावा किया कि भाजपा सरकार बनने के बाद मिशन के कार्यों में तेजी आई है। योजना निर्माण में गंभीर खामियां CAG की रिपोर्ट के मुताबिक जल जीवन मिशन के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। कई स्थानों पर गांव स्तर की कार्ययोजना तैयार किए बिना ही जिला स्तरीय योजनाएं बना दी गईं, जबकि राज्य स्तरीय कार्ययोजना तैयार ही नहीं की गई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि राज्य स्तर पर जल सुरक्षा योजना नहीं बनाई गई, जिससे जल स्रोतों की दीर्घकालिक उपलब्धता और योजनाओं के रखरखाव की स्पष्ट रणनीति विकसित नहीं हो सकी। 33 प्रतिशत नल कनेक्शन निकले गैर-कार्यशील रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2025 तक 50 लाख ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया था। जनवरी 2025 तक 40.10 लाख फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन (FHTC) लगाए गए। हालांकि, इनमें से 13.31 लाख (करीब 33%) कनेक्शन गैर-कार्यशील पाए गए। इसके पीछे सूख चुके जल स्रोत, अधूरी ओवरहेड टंकियां, बिजली कनेक्शन का अभाव और सोलर पंप स्थापित नहीं होना प्रमुख कारण बताए गए हैं। ‘हर घर जल’ लक्ष्य भी अधूरा राज्य के 19,656 गांवों को मार्च 2024 तक ‘हर घर जल’ प्रमाणित किया जाना था, लेकिन केवल 716 गांव (3.64 प्रतिशत) ही इस लक्ष्य तक पहुंच सके। ऑडिट में ऐसे मामले भी सामने आए, जहां अधूरे कार्यों के बावजूद गांवों को ‘हर घर जल’ प्रमाणित कर दिया गया। किसी भी जिले में 100% कवरेज नहीं मार्च 2024 तक राज्य के 33 में से किसी भी जिले और 146 में से किसी भी विकासखंड में 100 प्रतिशत नल जल कवरेज नहीं था। योजनाओं की प्रगति बेहद धीमी रिपोर्ट के अनुसार जल जीवन मिशन के तहत स्वीकृत 29,153 सिंगल विलेज स्कीम में से मार्च 2024 तक केवल 172 योजनाएं पूरी हो सकीं। इनमें भी सिर्फ 32 ग्राम पंचायतों को योजनाओं का संचालन सौंपा गया। वहीं, स्वीकृत 70 मल्टी विलेज स्कीम में से मार्च 2025 तक एक भी योजना पूरी नहीं हो सकी, जिससे करीब 9.85 लाख घरों तक सतही जल स्रोतों से पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य प्रभावित हुआ। सोलर आधारित योजनाओं में भी अनियमितताएं CAG ने पाया कि कई सोलर आधारित पेयजल योजनाओं में निर्धारित क्षमता से अधिक नल कनेक्शन जोड़ दिए गए। इसके कारण 28,984 परिवारों को निर्धारित मानकों के अनुसार पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। वित्तीय और गुणवत्ता संबंधी कमियां रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य सरकार केंद्र और राज्यांश मिलाकर 6,480.04 करोड़ रुपये की आवश्यक वित्तीय व्यवस्था सुनिश्चित करने में विफल रही। साथ ही मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), जिला खनिज न्यास (DMF), सांसद निधि और CSR जैसी योजनाओं के संसाधनों के समन्वय के लिए भी कोई प्रभावी रणनीति नहीं बनाई गई। जल गुणवत्ता जांच की व्यवस्था कमजोर राज्य की 75 जल परीक्षण प्रयोगशालाओं में से केवल 4 प्रयोगशालाएं ही सभी 13 निर्धारित जल गुणवत्ता मानकों की जांच करने में सक्षम पाई गईं। इसके अलावा 37 प्रतिशत प्रयोगशालाओं को NABL की मान्यता प्राप्त नहीं थी। रिपोर्ट में स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में भी निर्धारित मानकों के अनुसार जल गुणवत्ता जांच नहीं होने की बात कही गई है। CAG की प्रमुख सिफारिशें रिपोर्ट में सरकार को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं, जिनमें शामिल हैं— सरकार ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को ठहराया जिम्मेदार CAG रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि दिसंबर 2023 में भाजपा सरकार बनने के बाद जल जीवन मिशन के कार्यों में तेजी आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली कांग्रेस सरकार मिशन को खराब स्थिति में छोड़कर गई थी, जिसके कारण परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो सकीं। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन की समय-सीमा 2024 से बढ़ाकर 2028 तक कर दी है। मार्च 2026 में स्वीकृत मिशन के दूसरे चरण को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जा सके।

रायपुर में 16 जुलाई को निकलेगी भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा, राज्यपाल और मुख्यमंत्री निभाएंगे ‘छेरा पहरा’ की परंपरा

रायपुर। राजधानी रायपुर के गायत्री नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ की विश्वविख्यात रथयात्रा 16 जुलाई को धार्मिक आस्था, वैदिक परंपराओं और भव्य आयोजन के साथ निकाली जाएगी। वहीं बाहुड़ा यात्रा 24 जुलाई को आयोजित होगी। मंदिर परिसर में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और भगवान जगन्नाथ, बलभद्र तथा माता सुभद्रा के तीनों रथों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। रथयात्रा से पहले 14 जुलाई की शाम 6 बजे भगवान का नेत्रोत्सव आयोजित किया जाएगा। यह पर्व धार्मिक आस्था के साथ-साथ छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सांस्कृतिक एकता, भाईचारे और सनातन परंपरा का भी प्रतीक माना जाता है। भक्त और भगवान के मिलन का महापर्व श्री जगन्नाथ मंदिर सेवा समिति के संस्थापक अध्यक्ष एवं विधायक पुरंदर मिश्रा ने बताया कि रथयात्रा भक्तों और भगवान के प्रत्यक्ष मिलन का महापर्व है। वर्ष में केवल इसी अवसर पर भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मंदिर से बाहर निकलकर श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं। 11 वैदिक पंडित कराएंगे विशेष पूजन रथयात्रा के दिन सुबह 11 वैदिक पंडितों के सान्निध्य में भगवान का विशेष अभिषेक, पूजन और हवन कराया जाएगा। चंदन, केसर, कस्तूरी, कपूर सहित विभिन्न सुगंधित द्रव्यों से भगवान का दिव्य स्नान कराया जाएगा। इसके बाद भगवान को गजामूंग महाप्रसाद अर्पित किया जाएगा। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और मंगल वाद्यों की गूंज के बीच भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा अपने-अपने रथों पर विराजमान होकर नगर भ्रमण के लिए प्रस्थान करेंगे। राज्यपाल और मुख्यमंत्री निभाएंगे ‘छेरा पहरा’ की परंपरा रथयात्रा की सबसे प्रमुख परंपराओं में शामिल ‘छेरा पहरा’ का निर्वहन इस वर्ष भी किया जाएगा। परंपरा के अनुसार राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भगवान के रथ के आगे सोने की झाड़ू से मार्ग की प्रतीकात्मक सफाई करेंगे। यह परंपरा सेवा, समर्पण और विनम्रता का संदेश देती है। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, जनप्रतिनिधि, संत-महात्मा, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। भजन, झांकियों और लोकनृत्य से गूंजेगा शहर रथयात्रा के दौरान महिला मंडलों द्वारा भजन-कीर्तन, आकर्षक सांस्कृतिक झांकियां और पारंपरिक लोकनृत्य प्रस्तुत किए जाएंगे। “जय जगन्नाथ” के जयघोष के साथ मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहेगा। श्रद्धालुओं से की गई विशेष अपील श्री जगन्नाथ मंदिर सेवा समिति ने प्रदेशभर के श्रद्धालुओं से सपरिवार रथयात्रा में शामिल होकर भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने और सनातन संस्कृति की इस गौरवशाली परंपरा का हिस्सा बनने की अपील की है। रायपुर और छत्तीसगढ़ की धार्मिक, सांस्कृतिक और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

CBSE की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, सरकार और बोर्ड से 10 दिन में मांगा जवाब

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की नई थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि “कोई भी भाषा सीखना कभी बेकार नहीं जाता।” हालांकि, नीति को लागू करने में सामने आ रही व्यावहारिक चुनौतियों को देखते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार, CBSE और संबंधित पक्षों से 10 दिन के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी। यह नीति शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू की गई है। इसके तहत छात्रों को दो भारतीय भाषाएं और एक विदेशी भाषा पढ़नी होगी। इससे कई छात्रों को पहले से पढ़ी जा रही भाषाओं में बदलाव करना पड़ सकता है। क्या है विवाद? याचिकाकर्ताओं का कहना है कि CBSE ने पर्याप्त तैयारी के बिना नई भाषा नीति लागू कर दी है। उनके मुताबिक कई स्कूलों में संबंधित भाषाओं के शिक्षक, पाठ्यपुस्तकें और आवश्यक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध नहीं हैं, जिससे छात्रों और शिक्षकों दोनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी से जुड़े अहम सवाल और जवाब 1. मामला क्या है? सुप्रीम कोर्ट में CBSE के उस नियम को चुनौती दी गई है, जिसके तहत 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य किया गया है। इनमें कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है। हालांकि, CBSE ने 6 जून को संशोधित दिशा-निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया था कि इस वर्ष कक्षा 10 के छात्रों को तीसरी भाषा (R3) की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। 2. नए नियम में क्या बदलाव हुआ है? पहले कई छात्र अंग्रेजी के साथ एक भारतीय और एक विदेशी भाषा (जैसे फ्रेंच या जर्मन) पढ़ते थे। नए नियम के अनुसार अब तीन भाषाओं में से कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य है। विदेशी भाषा तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में ही चुनी जा सकेगी। 3. याचिका किसने दायर की? यह याचिका छात्र यशिका भंडारी, अमनदीप कौर और अर्पण रॉय चौधरी की ओर से दायर की गई है। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर, मुकुल रोहतगी और गोपाल शंकरनारायणन ने पैरवी की। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की। 4. याचिकाकर्ताओं की मुख्य आपत्ति क्या है? याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नई व्यवस्था अचानक लागू कर दी गई। कई भारतीय भाषाओं की किताबें उपलब्ध नहीं हैं और अधिकांश स्कूलों में प्रशिक्षित शिक्षक भी नहीं हैं। ऐसे में छात्रों और स्कूलों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। 5. किताबों को लेकर क्या दलील दी गई? सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कहा कि 22 भारतीय भाषाओं में से फिलहाल केवल तीन भाषाओं की पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध हैं। ऐसे में बाकी भाषाओं की पढ़ाई शुरू करना व्यवहारिक रूप से कठिन होगा। 6. शिक्षकों की कमी पर क्या कहा गया? याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि नई भारतीय भाषाएं पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की आवश्यकता होगी, लेकिन इतने कम समय में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति और प्रशिक्षण संभव नहीं है। 7. क्या विदेशी भाषाएं बंद हो जाएंगी? नहीं। छात्र फ्रेंच, जर्मन, जापानी जैसी विदेशी भाषाएं पढ़ सकते हैं, लेकिन इसके साथ उन्हें दो भारतीय भाषाएं भी पढ़नी होंगी। विदेशी भाषा तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में होगी। 8. क्या तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा होगी? नहीं। CBSE ने स्पष्ट किया है कि कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा (R3) का अलग बोर्ड एग्जाम नहीं होगा, ताकि छात्रों पर अतिरिक्त परीक्षा का दबाव न बढ़े। 9. अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार केंद्र सरकार, CBSE और NCERT अपना जवाब दाखिल करेंगे। इसके बाद 29 जुलाई को अदालत इस मामले में आगे की सुनवाई करेगी। नई शिक्षा नीति 2020 क्या है? भारत सरकार ने 29 जुलाई 2020 को नई शिक्षा नीति (NEP 2020) को मंजूरी दी थी। यह 34 वर्षों बाद देश की शिक्षा व्यवस्था में किया गया सबसे बड़ा बदलाव माना जाता है। इससे पहले शिक्षा नीति 1986 में लागू हुई थी, जिसे 1992 में संशोधित किया गया था। नई शिक्षा नीति का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली को 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना, छात्रों में व्यावहारिक ज्ञान और कौशल विकसित करना है। केंद्र सरकार ने इसे चरणबद्ध तरीके से 2030 तक लागू करने का लक्ष्य रखा है। चूंकि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए इसे लागू करने में केंद्र और राज्य सरकारों दोनों की भूमिका होती है। देश, शिक्षा और करियर से जुड़ी ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

बिलासपुर: CM हेल्पलाइन शिकायतों के खराब निराकरण पर PHE के ईई को नोटिस, कलेक्टर ने अधिकारियों को लगाई फटकार

बिलासपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर संचालित सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों के निराकरण की समीक्षा बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं मिलने पर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने पीएचई विभाग के कार्यपालन अभियंता (ईई) रूपेश कुमार धनंजय को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। टीएल (समय-सीमा) बैठक में कलेक्टर ने सभी विभागों के अधिकारियों से कहा कि शिकायतों का केवल औपचारिक निपटारा करने के बजाय उनका गुणवत्तापूर्ण और संतोषजनक समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने समय-सीमा का पालन करने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी। एकल शिक्षकीय स्कूलों में जल्द होंगे अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने एकल शिक्षकीय स्कूलों में तत्काल अतिथि शिक्षक नियुक्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर सेवानिवृत्त शिक्षकों की सेवाएं भी ली जाएं, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। जर्जर स्कूल भवनों में नहीं लगेंगी कक्षाएं कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जर्जर भवनों में किसी भी स्थिति में कक्षाएं संचालित नहीं की जाएं। ऐसे विद्यालयों के लिए वैकल्पिक भवन की व्यवस्था करने और नए भवन या अतिरिक्त कक्षों के निर्माण के प्रस्ताव शीघ्र भेजने को कहा गया। स्वास्थ्य विभाग को भी लगाई फटकार जिला खनिज न्यास (DMF) से जुड़े कार्यों की समीक्षा के दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किए जाने पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई। उन्होंने निर्देश दिए कि स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए डीएमएफ की राशि का प्रभावी और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित किया जाए। बैठक में दिए गए प्रमुख निर्देश कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि शासन की योजनाओं और जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी विभाग समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करें। बिलासपुर और छत्तीसगढ़ की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

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