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14 जून को पहली बार देवरी पहुंचेंगे CM मोहन यादव, केसली में तैयारियां तेज; ड्रोन से होगी निगरानी

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 14 जून को सागर जिले की देवरी विधानसभा के केसली पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री बनने के बाद यह उनका देवरी क्षेत्र का पहला दौरा होगा। प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। कलेक्टर प्रतिभा पाल और एसपी अनुराग सुजानिया ने केसली पहुंचकर कार्यक्रम स्थल, हेलीपैड और आवागमन मार्गों का निरीक्षण किया। देवरी विधानसभा का पहला दौरा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सागर जिले की अन्य विधानसभा सीटों का दौरा कर चुके हैं, लेकिन अब तक देवरी नहीं पहुंचे थे। करीब तीन महीने पहले नरयावली विधानसभा के जेरई में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने जल्द देवरी आने की घोषणा की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री दोबारा नरयावली पहुंचे और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में बोमा निर्माण का भूमिपूजन भी किया, लेकिन देवरी का दौरा नहीं हो सका था। अब 14 जून को उनके केसली आगमन को लेकर स्थानीय स्तर पर उत्साह देखा जा रहा है। गर्मी को देखते हुए विशेष इंतजाम कलेक्टर प्रतिभा पाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कार्यक्रम स्थल, हेलीपैड और पार्किंग क्षेत्र में पेयजल, शौचालय और छायादार स्थानों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि हेलीपैड से कार्यक्रम स्थल तक का मार्ग पूरी तरह सुगम और सुरक्षित होना चाहिए। इसके साथ ही तेज गर्मी को देखते हुए एंबुलेंस, डॉक्टरों की टीम, दवाइयां, ओआरएस और अन्य जरूरी चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध रहेंगी। सुरक्षा व्यवस्था रहेगी चाक-चौबंद कार्यक्रम की सुरक्षा को लेकर एसपी अनुराग सुजानिया ने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। कार्यक्रम स्थल, पार्किंग और हेलीपैड क्षेत्र में जरूरत के अनुसार बैरिकेडिंग की जाएगी। मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहेगा और पूरे कार्यक्रम क्षेत्र की निगरानी ड्रोन तथा सीसीटीवी कैमरों के जरिए की जाएगी। वरिष्ठ अधिकारियों ने किया निरीक्षण निरीक्षण के दौरान देवरी विधायक बृजबिहारी पटेरिया, जिला पंचायत सीईओ विवेक केवी, केसली एसडीएम राजनंदिनी शर्मा, देवरी एसडीएम मुनव्वर खान सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने व्यवस्थाओं की समीक्षा कर समय पर सभी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए। अधिक जानकारी और प्रदेश की ताजा खबरों के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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इंदौर में बेकाबू हुआ नगर निगम का पानी टैंकर, कई वाहनों को मारी टक्कर; 4 घायल

मध्य प्रदेश के इंदौर में गुरुवार दोपहर पटेल ब्रिज पर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब नगर निगम का एक पानी का टैंकर अचानक बेकाबू हो गया। तेज रफ्तार से लोगों और वाहनों की ओर बढ़ रहे टैंकर को देखकर सड़क पर मौजूद लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। हादसे में चार लोग घायल हो गए, जबकि कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। ब्रेक फेल होने से हुआ हादसा प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, टैंकर के ब्रेक फेल होने के कारण चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि अनियंत्रित टैंकर सड़क पर आगे बढ़ते हुए कई कारों और बाइकों से टकराता चला गया। अचानक हुए इस हादसे से इलाके में दहशत का माहौल बन गया। चालक की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जब चालक को स्थिति की गंभीरता का अंदाजा हुआ तो उसने टैंकर को फुटपाथ की ओर मोड़ दिया। इससे टैंकर रुक गया और एक बड़ा हादसा होने से बच गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि टैंकर आगे बढ़ता रहता तो कई और वाहन इसकी चपेट में आ सकते थे। कई वाहन क्षतिग्रस्त, चार लोग घायल हादसे में तीन से चार कारें और दो बाइक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। टक्कर इतनी तेज थी कि वाहनों को काफी नुकसान पहुंचा। घटना में चार लोग घायल हुए हैं। वहीं टैंकर में सवार एक व्यक्ति के भी चोटिल होने की जानकारी सामने आई है। सभी घायलों का उपचार कराया जा रहा है। हादसे के बाद लोगों का फूटा गुस्सा घटना से नाराज लोगों ने टैंकर में तोड़फोड़ कर दी। मौके पर कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति बन गई। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित किया। चालक मौके से फरार हादसे के बाद टैंकर चालक मौके से फरार हो गया। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि खराब स्थिति वाले वाहन को सड़क पर उतारने के कारण यह हादसा हुआ। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है। अधिक जानकारी और ताजा खबरों के लिए विजिट करें: www.deshharpal.com
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रायपुर में आवारा कुत्तों के लिए बने फीडिंग जोन: 70 वार्डों में तय हुई जगहें, अब वहीं खिलाना होगा खाना

आवारा कुत्तों को खाना खिलाने को लेकर अक्सर होने वाले विवादों के बीच रायपुर नगर निगम ने बड़ा फैसला लिया है। हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए निगम ने शहर के सभी 70 वार्डों में स्ट्रीट डॉग्स के लिए फीडिंग जोन निर्धारित कर दिए हैं। इन स्थानों पर सूचना बोर्ड भी लगाए गए हैं, ताकि लोग तय जगहों पर ही कुत्तों को भोजन करा सकें। 70 वार्डों में तय किए गए फीडिंग जोन नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक, शहर के जोन-1 से जोन-10 तक सभी वार्डों में विशेष स्थानों को फीडिंग जोन के रूप में चिन्हित किया गया है। इन जगहों पर पशु प्रेमी बिना किसी विवाद के आवारा कुत्तों को भोजन दे सकेंगे। बाजार, मैदान और खाली प्लॉट बनाए गए फीडिंग जोन निगम ने बाजार, खेल मैदान, तालाब परिसर, सामुदायिक भवन, मुक्तिधाम और खाली प्लॉट जैसी जगहों को फीडिंग जोन के रूप में चयनित किया है। इन स्थानों पर आवश्यक सूचना बोर्ड भी लगाए जा चुके हैं, ताकि लोगों को निर्धारित जगहों की जानकारी मिल सके। विवाद कम करने की पहल नगर निगम का कहना है कि कई क्षेत्रों में आवारा कुत्तों को खाना खिलाने को लेकर पशु प्रेमियों और स्थानीय रहवासियों के बीच विवाद की स्थिति बन जाती थी। ऐसे मामलों की शिकायतें लगातार निगम तक पहुंच रही थीं। फीडिंग जोन बनने से इस तरह के विवादों में कमी आने की उम्मीद है। शिकायत मिलने पर जारी रहेगी कार्रवाई नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि आवारा कुत्तों से संबंधित शिकायतों पर पहले की तरह कार्रवाई जारी रहेगी। यदि किसी क्षेत्र से शिकायत मिलती है तो संबंधित कुत्तों को पकड़कर नियमानुसार जांच और उपचार किया जाएगा। कुत्तों की होगी नसबंदी और टीकाकरण एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों के तहत पकड़े गए कुत्तों की डी-वॉर्मिंग, एंटी रेबीज टीकाकरण और नसबंदी जैसी प्रक्रियाएं कराई जाएंगी। निगम का उद्देश्य कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने के साथ-साथ रेबीज जैसी बीमारियों की रोकथाम भी है। अपने वार्ड का फीडिंग जोन ऐसे जानें नगर निगम के अनुसार सभी 70 वार्डों में फीडिंग जोन की सूची उपलब्ध है। नागरिक अपने क्षेत्र के जोन कार्यालय या सूचना बोर्ड के माध्यम से निर्धारित स्थान की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। शहर में बेहतर प्रबंधन की दिशा में कदम नगर निगम का मानना है कि फीडिंग जोन की व्यवस्था से आवारा कुत्तों के प्रबंधन में आसानी होगी। साथ ही पशु प्रेमियों और आम नागरिकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में भी मदद मिलेगी। रायपुर, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की ताजा खबरों के लिए जुड़े रहें Deshharpal News Portal के साथ। अधिक जानकारी और लेटेस्ट अपडेट्स के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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गुना में चेन स्नैचर को लोगों ने दौड़ाकर पकड़ा: महिला की चेन छीनकर भाग रहा था बदमाश, जमकर हुई धुनाई

गुना। शहर में लगातार बढ़ रही चेन स्नैचिंग की घटनाओं के बीच मंगलवार रात सराफा बाजार में लोगों ने एक बदमाश को रंगेहाथ पकड़ लिया। आरोपी एक महिला के गले से चेन छीनकर भाग रहा था, लेकिन सतर्क लोगों ने उसका पीछा कर उसे दबोच लिया। इसके बाद लोगों ने उसकी जमकर पिटाई की और पुलिस के हवाले कर दिया। घटना के वीडियो भी सामने आए हैं। महिला की चेन झपटकर भागा आरोपी जानकारी के अनुसार, मंगलवार रात एक महिला सराफा बाजार से गुजर रही थी। इसी दौरान वहां पहले से घात लगाए खड़े एक युवक ने अचानक महिला के गले पर झपट्टा मारकर चेन छीन ली और भागने लगा। CCTV में कैद हुई वारदात घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में आरोपी शर्ट-पैंट पहनकर बाइक के पास खड़ा नजर आ रहा है। वह काफी देर तक लोगों की गतिविधियों पर नजर रखता है। जैसे ही महिला वहां से गुजरती है, वह चेन झपटकर भागने लगता है। लोगों ने दौड़ाकर पकड़ा चेन स्नैचिंग की वारदात होते ही आसपास मौजूद लोगों ने शोर मचाया और आरोपी का पीछा शुरू कर दिया। हनुमान गली तक पहुंचते-पहुंचते लोगों ने उसे पकड़ लिया। गुस्साए लोगों ने उसकी जमकर धुनाई कर दी। बाद में सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी को हिरासत में ले लिया। राजस्थान का रहने वाला है आरोपी पुलिस के मुताबिक पकड़े गए आरोपी की पहचान राजस्थान के छीपा बड़ौद निवासी दीपक सुमन के रूप में हुई है। उससे पूछताछ की जा रही है और उसके आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। दो दिन में दूसरी बड़ी वारदात कोतवाली थाना क्षेत्र में दो दिनों के भीतर चेन स्नैचिंग की यह दूसरी बड़ी घटना है। सोमवार रात महावीरपुरा निवासी डॉ. रश्मि दीक्षित अपने बेटे के साथ टहल रही थीं। इसी दौरान बाइक सवार दो बदमाश उनके गले से सोने का मंगलसूत्र छीनकर फरार हो गए थे। डॉक्टर का मंगलसूत्र लूटकर भागे थे बदमाश पीड़िता डॉ. रश्मि दीक्षित ने पुलिस को बताया कि बदमाशों की बाइक पर MP 08 Z लिखा हुआ था, लेकिन नंबर प्लेट क्षतिग्रस्त होने के कारण पूरा नंबर नहीं पढ़ा जा सका। पुलिस इस मामले में भी आरोपियों की तलाश कर रही है। बढ़ रही हैं लूट और चेन स्नैचिंग की घटनाएं गुना में चेन स्नैचिंग और लूट की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इससे पहले 3 जून को मुनिश्री सुधासागर महाराज के आगमन के दौरान भीड़ का फायदा उठाकर बदमाशों ने एक दर्जन से अधिक लोगों की चेन और पर्स पर हाथ साफ कर दिया था। पुलिस बोली- आरोपी पर दर्ज हुआ केस कोतवाली थाना प्रभारी राजकुमार शर्मा ने बताया कि पकड़े गए आरोपी के खिलाफ लूट के प्रयास का मामला दर्ज कर लिया गया है। वहीं डॉक्टर से हुई लूट की घटना की जांच जारी है और आरोपियों की तलाश की जा रही है। प्रदेश और देश की हर बड़ी खबर सबसे पहले पढ़ने के लिए जुड़े रहें Deshharpal News Portal के साथ। अधिक जानकारी और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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PNB में 43 लाख का गोल्ड लोन घोटाला: वैल्यूअर ने नकली सोने पर दिलवाया लोन, 15 लोगों पर FIR

जबलपुर के सदर स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में करोड़ों नहीं, लेकिन लाखों का बड़ा गोल्ड लोन घोटाला सामने आया है। बैंक में जमा करने से पहले सोने की जांच करने वाले अधिकृत वैल्यूअर ने कथित रूप से नकली सोने को असली बताकर करीब 43 लाख रुपए का लोन मंजूर करा दिया। मामले का खुलासा होने के बाद बैंक प्रबंधन ने वैल्यूअर समेत 15 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। वैल्यूअर की जांच में पास हुआ नकली सोना पुलिस के अनुसार, बैंक में गोल्ड लोन लेने पहुंचे लोगों के जेवरों की जांच अधिकृत वैल्यूअर द्वारा की गई थी। जांच के बाद सोने को असली बताकर ग्राहकों को लोन स्वीकृत कर दिया गया। बाद में बैंक अधिकारियों को संदेह हुआ तो जेवरों की दोबारा जांच कराई गई, जिसमें सोना नकली निकला। 13 ग्राहकों को मिला था 38 लाख से ज्यादा का लोन जांच में सामने आया कि 13 अलग-अलग ग्राहकों को नकली सोना गिरवी रखकर कुल 38 लाख 81 हजार 100 रुपए का गोल्ड लोन दिया गया था। ब्याज सहित यह राशि बढ़कर करीब 43 लाख 17 हजार 512 रुपए हो गई। किश्त नहीं चुकाने पर खुला राज दिसंबर 2023 से अक्टूबर 2024 के बीच अलग-अलग समय पर लोगों ने बैंक से गोल्ड लोन लिया था। जब लोन की अवधि पूरी होने के बाद भी किसी ने किश्त जमा नहीं की, तो बैंक ने नोटिस जारी किए। इसके बावजूद कोई ग्राहक बैंक नहीं पहुंचा। इसके बाद बैंक ने गिरवी रखे सोने की दोबारा जांच कराई, जिसमें पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हो गया। बैंक मैनेजर की शिकायत पर दर्ज हुई FIR मामले की शिकायत फरवरी 2026 में बैंक मैनेजर ने कैंट थाना पुलिस से की थी। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि बैंक के अधिकृत वैल्यूअर ने अन्य लोगों के साथ मिलकर नकली सोने के आधार पर लोन दिलवाया था। इसके बाद वैल्यूअर समेत 15 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया। जल्द हो सकती है आरोपियों की गिरफ्तारी कैंट थाना प्रभारी पृष्पेंद्र पटले ने बताया कि पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। मामले की जांच जारी है और फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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ग्वालियर में बैटरी कारोबारी की संदिग्ध मौत, गोदाम के ऑफिस में मिला शव

ग्वालियर के बहोड़ापुर थाना क्षेत्र स्थित ट्रांसपोर्ट नगर में बुधवार तड़के बैटरी कारोबारी शिवम गुप्ता (32) का शव उनके किराए के गोदाम के ऑफिस में मिला। उनके सिर में गोली लगी थी। मौके से 32 बोर की अवैध पिस्टल भी बरामद हुई है। तलाश करते हुए गोदाम पहुंचे परिजन परिजनों के मुताबिक शिवम मंगलवार को रोज की तरह काम पर गए थे, लेकिन देर रात तक घर नहीं लौटे। मोबाइल फोन भी बंद आ रहा था। चिंतित परिजन उनकी तलाश करते हुए ट्रांसपोर्ट नगर स्थित गोदाम पहुंचे। ऑफिस में मिला खून से लथपथ शव रात करीब 3 बजे गोदाम के ऑफिस का दरवाजा खोलते ही परिजनों के होश उड़ गए। शिवम खून से लथपथ हालत में पड़े थे। उनके सिर में गोली लगी हुई थी। पुलिस और एफएसएल टीम ने जुटाए साक्ष्य सूचना मिलते ही पुलिस और एफएसएल टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल से अवैध पिस्टल और मृतक का मोबाइल जब्त कर जांच शुरू कर दी है। इकलौते बेटे की मौत से परिवार सदमे में शिवम अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे और बैटरी कारोबार से जुड़े थे। अचानक हुई उनकी मौत से परिवार गहरे सदमे में है। कॉल डिटेल खंगाल रही पुलिस पुलिस अब मोबाइल की कॉल डिटेल और आखिरी बातचीत की जानकारी जुटा रही है। शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, लेकिन अवैध पिस्टल मिलने के कारण सभी पहलुओं से जांच की जा रही है।
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भोपाल में 17 वर्षीय छात्रा ने लगाई फांसी: कमरे से मिला मोबाइल और गर्भनिरोधक गोलियों का पत्ता, जांच में जुटी पुलिस

भोपाल के बजरिया थाना क्षेत्र में 17 वर्षीय छात्रा ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मौके से मोबाइल फोन और गर्भनिरोधक गोलियों का पत्ता मिलने के बाद पुलिस सभी पहलुओं से जांच कर रही है। भोपाल में छात्रा ने की आत्महत्या राजधानी भोपाल के बजरिया थाना क्षेत्र में 17 वर्षीय छात्रा ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना मंगलवार रात करीब 8:30 बजे की बताई जा रही है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। 12वीं पास करने के बाद घर पर थी छात्रा पुलिस के अनुसार छात्रा ने इसी वर्ष 12वीं कक्षा की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। वह अपने पिता के साथ रहती थी। उसकी मां वर्ष 2017 से परिवार से अलग रह रही है। परिवार में एक छोटा भाई और एक बहन भी हैं। दरवाजा नहीं खुलने पर हुआ खुलासा घटना के समय छात्रा के दोनों छोटे भाई-बहन घर के बाहर खेल रहे थे। रात में जब वे घर लौटे तो उन्होंने बहन को कई बार आवाज लगाई, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। चाचा और पिता को दी सूचना काफी देर तक दरवाजा नहीं खुलने पर बच्चों ने अपने चाचा को सूचना दी। इसके बाद छात्रा के पिता को बुलाया गया। पिता के पहुंचने पर दरवाजे में बने छेद से अंदर झांककर देखा गया। फंदे पर लटकी मिली छात्रा परिजनों ने किसी तरह दरवाजा खोला तो छात्रा कमरे के अंदर फंदे पर लटकी मिली। घटना की जानकारी तुरंत पुलिस को दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और जांच शुरू की। कमरे से मिला मोबाइल फोन घटनास्थल की जांच के दौरान पुलिस को एक मोबाइल फोन मिला है। छात्रा के पिता का कहना है कि उन्होंने बेटी को कभी मोबाइल फोन नहीं दिलाया था और उन्हें इस मोबाइल के बारे में कोई जानकारी नहीं है। गर्भनिरोधक गोलियों का पत्ता भी मिला पुलिस को कमरे से गर्भनिरोधक गोलियों का एक पत्ता भी मिला है। पिता का कहना है कि यह सामान घर में कैसे आया, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। पुलिस सभी पहलुओं से कर रही जांच बजरिया थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस को घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। मोबाइल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट होगी अहम पुलिस अधिकारियों के अनुसार मोबाइल फोन की जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। आत्महत्या के कारणों का पता लगाने के लिए सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है। परिजनों में शोक का माहौल छात्रा की अचानक मौत के बाद परिवार सदमे में है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। Read more updates on www.deshharpal.com
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भोपाल में हैवानियत की हद: बुजुर्ग महिला की हत्या कर कुल्हाड़ी से काटे पैर, चांदी के कड़े लूटकर फरार हुआ आरोपी

भोपाल के नजीराबाद इलाके में 60 वर्षीय महिला की हत्या कर आरोपी ने कुल्हाड़ी से उसके पैर काट दिए और चांदी के कड़े लूट लिए। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। भोपाल में इंसानियत को शर्मसार करने वाली वारदात राजधानी भोपाल के देहात क्षेत्र नजीराबाद में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां 60 वर्षीय महिला की हत्या करने के बाद आरोपी ने उसके दोनों पैर कुल्हाड़ी से काट दिए और चांदी के कड़े निकालकर फरार हो गया। इस सनसनीखेज वारदात के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। बेटे से मिलवाने के बहाने घर से ले गया आरोपी पुलिस के मुताबिक मृतका की पहचान बादाम बाई (60) निवासी ग्राम पथरिया, थाना बैरसिया के रूप में हुई है। 4 जून को गांव का ही परिचित जसवंत गुर्जर महिला को उसके बेटे से मिलवाने के बहाने बाइक पर बैठाकर ले गया था। इसके बाद महिला घर वापस नहीं लौटी। गुमशुदगी के बाद शुरू हुई तलाश परिजनों ने महिला की काफी तलाश की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। आखिरकार 6 जून को बैरसिया थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। परिवार लगातार महिला की खोजबीन में जुटा हुआ था। आरोपी ने खुद दी शव मिलने की सूचना इस मामले का चौंकाने वाला खुलासा 8 जून को हुआ, जब आरोपी जसवंत गुर्जर ने ही मृतका के पति पर्वत सिंह को जंगल में शव पड़े होने की जानकारी दी। सूचना मिलने के बाद पति और बेटा शेषापुरा के जंगल पहुंचे। जंगल में मिला सड़ा-गला शव महुए के पेड़ के नीचे महिला का नग्न शव पड़ा मिला। शव करीब 4 से 5 दिन पुराना बताया जा रहा है। शरीर सड़ चुका था और उसमें कीड़े पड़ चुके थे। घटना स्थल का दृश्य बेहद भयावह था। कुल्हाड़ी से काट दिए दोनों पैर पुलिस के अनुसार महिला के दोनों पैर टखनों के पास से कटे हुए थे। एक हाथ का पंजा भी गायब था। महिला के पैरों में पहने चांदी के कड़े भी नहीं मिले, जिससे लूट की आशंका गहरा गई। गला दबाकर की हत्या प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ने पहले महिला का गला घोंटकर हत्या की। इसके बाद कुल्हाड़ी से उसके पैर काटकर चांदी के कड़े निकाल लिए। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने वारदात कबूल कर ली है। भरोसे का फायदा उठाकर दिया वारदात को अंजाम परिजनों के मुताबिक आरोपी पहले से परिवार का परिचित था। इसी भरोसे में महिला उसके साथ चली गई थी। पुलिस का मानना है कि आरोपी महिला को सुनसान जंगल में ले गया और वहां इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया। हत्या के पीछे की वजह अब भी साफ नहीं पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर हत्या और लूट समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। हालांकि अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि वारदात सिर्फ लूट के लिए की गई या इसके पीछे कोई पुरानी रंजिश भी थी। पुलिस कर रही मामले की जांच थाना प्रभारी दुर्जन सिंह ने बताया कि शेषापुरा जंगल में बुजुर्ग महिला का शव मिलने की सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची थी। जांच में हत्या की पुष्टि हुई है और आरोपी से पूछताछ जारी है। इलाके में फैली दहशत इस निर्मम हत्या के बाद ग्रामीणों में डर और आक्रोश दोनों देखने को मिल रहे हैं। लोग आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। Read more updates on www.deshharpal.com
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ग्वालियर में नर्सिंग छात्रा की संदिग्ध मौत: रातभर उल्टियां होती रहीं, परिजनों ने हॉस्टल प्रबंधन पर लगाए लापरवाही के आरोप

ग्वालियर के आईपीएस कॉलेज में नर्सिंग ट्रेनिंग ले रही 23 वर्षीय छात्रा नीलू प्रजापति की संदिग्ध मौत हो गई। परिजनों ने हॉस्टल प्रबंधन पर इलाज में देरी और लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्वालियर में नर्सिंग छात्रा की संदिग्ध मौत ग्वालियर के आईपीएस कॉलेज में मुख्यमंत्री कौशल संवर्धन योजना के तहत नर्सिंग ट्रेनिंग लेने आई 23 वर्षीय छात्रा नीलू प्रजापति की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस घटना के बाद परिवार में मातम पसरा है, जबकि परिजनों ने हॉस्टल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। देर रात बिगड़ी थी तबीयत जानकारी के अनुसार, नीलू प्रजापति सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात करीब 12 बजे अचानक बीमार हो गई थी। उसे लगातार उल्टियां हो रही थीं। उसके साथ हॉस्टल में रह रही चचेरे भाई की बेटी तनु ने परिवार को फोन कर इसकी जानकारी दी। इलाज में देरी का आरोप मृतका के पिता लक्ष्मण प्रजापति का आरोप है कि बेटी की हालत बिगड़ने के बावजूद कॉलेज और हॉस्टल प्रबंधन ने समय रहते अस्पताल नहीं पहुंचाया। उनका कहना है कि रात में तबीयत खराब होने के बाद सुबह करीब 5 से 6 बजे के बीच नीलू को अस्पताल ले जाया गया, जिससे इलाज में देरी हुई और उसकी जान चली गई। 14 मई को ट्रेनिंग के लिए पहुंची थी छात्रा नीलू केआरजी कॉलेज से नर्सिंग की पढ़ाई कर रही थी। वह 45 दिन की विशेष ट्रेनिंग के लिए 14 मई को आईपीएस कॉलेज पहुंची थी। परिजनों के मुताबिक, कुछ दिन पहले वह घर भी आई थी और अपने खराब जूते बदलवाकर दोबारा ट्रेनिंग के लिए लौटी थी। हॉस्टल प्रबंधन ने आरोपों से किया इनकार हॉस्टल स्टाफ ने परिजनों के आरोपों को गलत बताया है। स्टाफ का कहना है कि छात्रा की तबीयत खराब होने पर उसे तुरंत ORS दिया गया था, जिससे उसकी हालत में कुछ सुधार हुआ था। बाद में दोबारा तबीयत बिगड़ने पर उसे स्कूटी से अस्पताल पहुंचाया गया। एम्बुलेंस का इंतजार नहीं किया हॉस्टल प्रबंधन का दावा है कि एम्बुलेंस का इंतजार करने में अधिक समय लगता, इसलिए स्टाफ छात्रा को तुरंत स्कूटी से अस्पताल लेकर पहुंचा। वहीं परिजन इस दावे से संतुष्ट नहीं हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पर भी विवाद आईपीएस हॉस्टल के ओबीसी डिपार्टमेंट की असिस्टेंट डायरेक्टर कृति दीक्षित ने दावा किया कि नीलू को पहले से थायराइड और पेट दर्द की समस्या थी। हालांकि परिवार ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनकी बेटी पूरी तरह स्वस्थ थी। हॉस्टल की व्यवस्था पर उठे सवाल परिजनों ने हॉस्टल की क्षमता और व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं को ट्रेनिंग के लिए ठहराया गया था। जानकारी के मुताबिक हॉस्टल में करीब 80 छात्राएं और 120 छात्र रह रहे थे। पुलिस हर एंगल से कर रही जांच एडिशनल एसपी सुमन गुर्जर ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू से जांच की जा रही है। हॉस्टल के कमरे की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है और महिला पुलिस अधिकारियों की विशेष टीम बनाई गई है। पैनल पोस्टमार्टम और वीडियोग्राफी होगी पुलिस के मुताबिक छात्रा का पैनल पोस्टमार्टम कराया जाएगा। इस दौरान एसडीएम, तहसीलदार और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद रहेंगे। पूरे पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी ताकि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ हो सके। परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ नीलू प्रजापति एक साधारण परिवार से थी। उसके पिता आउटसोर्स कर्मचारी के रूप में कचरा वाहन चलाते हैं। परिवार में छोटी बहन भी नर्सिंग की पढ़ाई कर रही है, जबकि छोटा भाई आठवीं कक्षा में पढ़ता है। बेटी की अचानक मौत से पूरा परिवार सदमे में है। ट्रेनिंग व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल इस घटना के बाद मुख्यमंत्री कौशल संवर्धन योजना के तहत चल रही ट्रेनिंग व्यवस्थाओं और हॉस्टल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब सभी की नजर पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हुई है। Read more news and updates on www.deshharpal.com
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गुना में लेडी कॉन्स्टेबल ने की आत्महत्या: पुलिस लाइन के सरकारी क्वॉर्टर में फंदे पर लटका मिला शव

गुना के कोतवाली थाने में पदस्थ 29 वर्षीय लेडी कॉन्स्टेबल निशा शर्मा ने मंगलवार दोपहर पुलिस लाइन स्थित अपने सरकारी क्वॉर्टर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। गेट तोड़कर अंदर पहुंची पुलिस सूचना मिलने पर कैंट थाना पुलिस मौके पर पहुंची। काफी देर तक दरवाजा खटखटाने और आवाज देने के बाद भी अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद पुलिस ने गेट तोड़कर कमरे में प्रवेश किया। चादर के फंदे से लटका मिला शव सुबह से कमरे से बाहर नहीं निकली थीं कमरे के अंदर लेडी कॉन्स्टेबल का शव चादर से बने फंदे के सहारे पंखे से लटका मिला। पुलिस ने तुरंत शव को नीचे उतारकर पोस्टमॉर्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। हितिका वासल के मुताबिक, निशा शर्मा मूल रूप से अशोक नगर जिले की रहने वाली थीं और पुलिस लाइन के सरकारी क्वॉर्टर में अकेली रह रही थीं। सुबह घर में काम करने वाली महिला क्वॉर्टर पर पहुंची थी। उसने कई बार दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद वह वापस लौट गई। पड़ोसियों को हुआ शक दोपहर 12 बजे तक भी क्वॉर्टर का दरवाजा नहीं खुला तो पड़ोसियों को संदेह हुआ। उन्होंने तुरंत इसकी सूचना कैंट थाना पुलिस को दी। पुलिस मौके पर पहुंची और दरवाजा तोड़कर अंदर दाखिल हुई। छुट्टी से लौटकर आई थीं ड्यूटी पर प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि निशा शर्मा दो दिन की छुट्टी पर अपने घर अशोक नगर गई हुई थीं। वह सोमवार शाम को ही छुट्टी पूरी कर वापस गुना लौटी थीं। सुसाइड नोट मिला या नहीं, स्पष्ट नहीं पुलिस के मुताबिक घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट मिला है या नहीं, इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है। मृतका के परिजनों को सूचना दे दी गई है। जांच के बाद सामने आएगी वजह पुलिस का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और परिजनों के बयान के बाद ही आत्महत्या के कारणों का खुलासा हो सकेगा। फिलहाल मामले की जांच जारी है। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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अक्षर पटेल का ऑलराउंड शो, शुभमन गिल की कप्तानी पारी; भारत ने इंग्लैंड को 6 विकेट से हराकर पहला वनडे जीता

बर्मिंघम। ऑलराउंडर अक्षर पटेल के शानदार प्रदर्शन और कप्तान शुभमन गिल की बेहतरीन बल्लेबाजी की बदौलत भारत ने इंग्लैंड को पहले वनडे मुकाबले में 6 विकेट से हराकर सीरीज में विजयी शुरुआत की। एजबेस्टन मैदान पर खेले गए मैच में भारत ने 259 रन के लक्ष्य को 45.2 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 262 रन बनाकर हासिल कर लिया। अक्षर पटेल ने नाबाद 57 रन बनाए, जबकि वॉशिंगटन सुंदर ने भी नाबाद 52 रन की महत्वपूर्ण पारी खेलकर टीम को जीत तक पहुंचाया। कप्तान शुभमन गिल ने 80 रन बनाए, लेकिन मैच के दौरान क्रैम्प्स की समस्या के कारण उन्हें रिटायर्ड हर्ट होकर मैदान छोड़ना पड़ा। शुरुआती झटकों के बाद गिल ने संभाली पारी लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही। रोहित शर्मा 11 रन और विराट कोहली 5 रन बनाकर जल्दी आउट हो गए। इसके बाद कप्तान शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर ने तीसरे विकेट के लिए 101 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी कर टीम की पारी को संभाला। श्रेयस 35 रन बनाकर रनआउट हुए, जबकि केएल राहुल बोल्ड होकर पवेलियन लौट गए। इसके बाद अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर ने जिम्मेदारी संभालते हुए पांचवें विकेट के लिए 102 रन की अविजित साझेदारी की और भारत को शानदार जीत दिलाई। जो रूट और लियाम डॉसन ने इंग्लैंड को संभाला इससे पहले टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड की टीम ने 47.5 ओवर में 258 रन बनाए। इंग्लैंड की शुरुआत मजबूत रही और टीम ने 61 रन तक कोई विकेट नहीं गंवाया, लेकिन इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने जोरदार वापसी करते हुए महज 19 रन के भीतर 5 विकेट झटक दिए। मध्यक्रम में जो रूट ने 76 रन और लियाम डॉसन ने 68 रन की अहम पारी खेली। दोनों बल्लेबाजों ने छठे विकेट के लिए 121 रन की साझेदारी कर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। अक्षर पटेल ने गेंद और बल्ले दोनों से निभाई अहम भूमिका भारतीय गेंदबाजों में अक्षर पटेल सबसे सफल रहे। उन्होंने शानदार गेंदबाजी करते हुए 4 विकेट अपने नाम किए। वहीं प्रसिद्ध कृष्णा और गुरनूर बरार ने 2-2 विकेट हासिल किए। जसप्रीत बुमराह और शिवम दुबे को एक-एक सफलता मिली। गेंद और बल्ले दोनों से बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले अक्षर पटेल ने टीम इंडिया की जीत में सबसे अहम भूमिका निभाई और भारत ने सीरीज की शानदार शुरुआत की। क्रिकेट और खेल जगत की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

CAG रिपोर्ट में जल जीवन मिशन की पोल: छत्तीसगढ़ में 33% नल कनेक्शन गैर-कार्यशील, ‘हर घर जल’ लक्ष्य भी अधूरा

रायपुर। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन (JJM) के क्रियान्वयन को लेकर कई गंभीर खामियों का खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार कमजोर योजना, धीमा क्रियान्वयन, निगरानी की कमी और गलत रिपोर्टिंग के कारण ग्रामीण पेयजल योजनाओं की प्रभावशीलता और दीर्घकालिक स्थिरता प्रभावित हुई है। मार्च 2024 तक की अवधि पर आधारित ‘छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन का प्रदर्शन ऑडिट’ रिपोर्ट मंगलवार को वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने विधानसभा में पेश की। रिपोर्ट सामने आने के बाद राज्य सरकार ने इसके लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया, जबकि उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने दावा किया कि भाजपा सरकार बनने के बाद मिशन के कार्यों में तेजी आई है। योजना निर्माण में गंभीर खामियां CAG की रिपोर्ट के मुताबिक जल जीवन मिशन के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। कई स्थानों पर गांव स्तर की कार्ययोजना तैयार किए बिना ही जिला स्तरीय योजनाएं बना दी गईं, जबकि राज्य स्तरीय कार्ययोजना तैयार ही नहीं की गई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि राज्य स्तर पर जल सुरक्षा योजना नहीं बनाई गई, जिससे जल स्रोतों की दीर्घकालिक उपलब्धता और योजनाओं के रखरखाव की स्पष्ट रणनीति विकसित नहीं हो सकी। 33 प्रतिशत नल कनेक्शन निकले गैर-कार्यशील रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2025 तक 50 लाख ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया था। जनवरी 2025 तक 40.10 लाख फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन (FHTC) लगाए गए। हालांकि, इनमें से 13.31 लाख (करीब 33%) कनेक्शन गैर-कार्यशील पाए गए। इसके पीछे सूख चुके जल स्रोत, अधूरी ओवरहेड टंकियां, बिजली कनेक्शन का अभाव और सोलर पंप स्थापित नहीं होना प्रमुख कारण बताए गए हैं। ‘हर घर जल’ लक्ष्य भी अधूरा राज्य के 19,656 गांवों को मार्च 2024 तक ‘हर घर जल’ प्रमाणित किया जाना था, लेकिन केवल 716 गांव (3.64 प्रतिशत) ही इस लक्ष्य तक पहुंच सके। ऑडिट में ऐसे मामले भी सामने आए, जहां अधूरे कार्यों के बावजूद गांवों को ‘हर घर जल’ प्रमाणित कर दिया गया। किसी भी जिले में 100% कवरेज नहीं मार्च 2024 तक राज्य के 33 में से किसी भी जिले और 146 में से किसी भी विकासखंड में 100 प्रतिशत नल जल कवरेज नहीं था। योजनाओं की प्रगति बेहद धीमी रिपोर्ट के अनुसार जल जीवन मिशन के तहत स्वीकृत 29,153 सिंगल विलेज स्कीम में से मार्च 2024 तक केवल 172 योजनाएं पूरी हो सकीं। इनमें भी सिर्फ 32 ग्राम पंचायतों को योजनाओं का संचालन सौंपा गया। वहीं, स्वीकृत 70 मल्टी विलेज स्कीम में से मार्च 2025 तक एक भी योजना पूरी नहीं हो सकी, जिससे करीब 9.85 लाख घरों तक सतही जल स्रोतों से पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य प्रभावित हुआ। सोलर आधारित योजनाओं में भी अनियमितताएं CAG ने पाया कि कई सोलर आधारित पेयजल योजनाओं में निर्धारित क्षमता से अधिक नल कनेक्शन जोड़ दिए गए। इसके कारण 28,984 परिवारों को निर्धारित मानकों के अनुसार पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। वित्तीय और गुणवत्ता संबंधी कमियां रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य सरकार केंद्र और राज्यांश मिलाकर 6,480.04 करोड़ रुपये की आवश्यक वित्तीय व्यवस्था सुनिश्चित करने में विफल रही। साथ ही मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), जिला खनिज न्यास (DMF), सांसद निधि और CSR जैसी योजनाओं के संसाधनों के समन्वय के लिए भी कोई प्रभावी रणनीति नहीं बनाई गई। जल गुणवत्ता जांच की व्यवस्था कमजोर राज्य की 75 जल परीक्षण प्रयोगशालाओं में से केवल 4 प्रयोगशालाएं ही सभी 13 निर्धारित जल गुणवत्ता मानकों की जांच करने में सक्षम पाई गईं। इसके अलावा 37 प्रतिशत प्रयोगशालाओं को NABL की मान्यता प्राप्त नहीं थी। रिपोर्ट में स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में भी निर्धारित मानकों के अनुसार जल गुणवत्ता जांच नहीं होने की बात कही गई है। CAG की प्रमुख सिफारिशें रिपोर्ट में सरकार को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं, जिनमें शामिल हैं— सरकार ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को ठहराया जिम्मेदार CAG रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि दिसंबर 2023 में भाजपा सरकार बनने के बाद जल जीवन मिशन के कार्यों में तेजी आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली कांग्रेस सरकार मिशन को खराब स्थिति में छोड़कर गई थी, जिसके कारण परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो सकीं। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन की समय-सीमा 2024 से बढ़ाकर 2028 तक कर दी है। मार्च 2026 में स्वीकृत मिशन के दूसरे चरण को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जा सके।

रायपुर में 16 जुलाई को निकलेगी भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा, राज्यपाल और मुख्यमंत्री निभाएंगे ‘छेरा पहरा’ की परंपरा

रायपुर। राजधानी रायपुर के गायत्री नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ की विश्वविख्यात रथयात्रा 16 जुलाई को धार्मिक आस्था, वैदिक परंपराओं और भव्य आयोजन के साथ निकाली जाएगी। वहीं बाहुड़ा यात्रा 24 जुलाई को आयोजित होगी। मंदिर परिसर में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और भगवान जगन्नाथ, बलभद्र तथा माता सुभद्रा के तीनों रथों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। रथयात्रा से पहले 14 जुलाई की शाम 6 बजे भगवान का नेत्रोत्सव आयोजित किया जाएगा। यह पर्व धार्मिक आस्था के साथ-साथ छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सांस्कृतिक एकता, भाईचारे और सनातन परंपरा का भी प्रतीक माना जाता है। भक्त और भगवान के मिलन का महापर्व श्री जगन्नाथ मंदिर सेवा समिति के संस्थापक अध्यक्ष एवं विधायक पुरंदर मिश्रा ने बताया कि रथयात्रा भक्तों और भगवान के प्रत्यक्ष मिलन का महापर्व है। वर्ष में केवल इसी अवसर पर भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मंदिर से बाहर निकलकर श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं। 11 वैदिक पंडित कराएंगे विशेष पूजन रथयात्रा के दिन सुबह 11 वैदिक पंडितों के सान्निध्य में भगवान का विशेष अभिषेक, पूजन और हवन कराया जाएगा। चंदन, केसर, कस्तूरी, कपूर सहित विभिन्न सुगंधित द्रव्यों से भगवान का दिव्य स्नान कराया जाएगा। इसके बाद भगवान को गजामूंग महाप्रसाद अर्पित किया जाएगा। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और मंगल वाद्यों की गूंज के बीच भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा अपने-अपने रथों पर विराजमान होकर नगर भ्रमण के लिए प्रस्थान करेंगे। राज्यपाल और मुख्यमंत्री निभाएंगे ‘छेरा पहरा’ की परंपरा रथयात्रा की सबसे प्रमुख परंपराओं में शामिल ‘छेरा पहरा’ का निर्वहन इस वर्ष भी किया जाएगा। परंपरा के अनुसार राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भगवान के रथ के आगे सोने की झाड़ू से मार्ग की प्रतीकात्मक सफाई करेंगे। यह परंपरा सेवा, समर्पण और विनम्रता का संदेश देती है। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, जनप्रतिनिधि, संत-महात्मा, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। भजन, झांकियों और लोकनृत्य से गूंजेगा शहर रथयात्रा के दौरान महिला मंडलों द्वारा भजन-कीर्तन, आकर्षक सांस्कृतिक झांकियां और पारंपरिक लोकनृत्य प्रस्तुत किए जाएंगे। “जय जगन्नाथ” के जयघोष के साथ मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहेगा। श्रद्धालुओं से की गई विशेष अपील श्री जगन्नाथ मंदिर सेवा समिति ने प्रदेशभर के श्रद्धालुओं से सपरिवार रथयात्रा में शामिल होकर भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने और सनातन संस्कृति की इस गौरवशाली परंपरा का हिस्सा बनने की अपील की है। रायपुर और छत्तीसगढ़ की धार्मिक, सांस्कृतिक और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

CBSE की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, सरकार और बोर्ड से 10 दिन में मांगा जवाब

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की नई थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि “कोई भी भाषा सीखना कभी बेकार नहीं जाता।” हालांकि, नीति को लागू करने में सामने आ रही व्यावहारिक चुनौतियों को देखते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार, CBSE और संबंधित पक्षों से 10 दिन के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी। यह नीति शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू की गई है। इसके तहत छात्रों को दो भारतीय भाषाएं और एक विदेशी भाषा पढ़नी होगी। इससे कई छात्रों को पहले से पढ़ी जा रही भाषाओं में बदलाव करना पड़ सकता है। क्या है विवाद? याचिकाकर्ताओं का कहना है कि CBSE ने पर्याप्त तैयारी के बिना नई भाषा नीति लागू कर दी है। उनके मुताबिक कई स्कूलों में संबंधित भाषाओं के शिक्षक, पाठ्यपुस्तकें और आवश्यक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध नहीं हैं, जिससे छात्रों और शिक्षकों दोनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी से जुड़े अहम सवाल और जवाब 1. मामला क्या है? सुप्रीम कोर्ट में CBSE के उस नियम को चुनौती दी गई है, जिसके तहत 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य किया गया है। इनमें कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है। हालांकि, CBSE ने 6 जून को संशोधित दिशा-निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया था कि इस वर्ष कक्षा 10 के छात्रों को तीसरी भाषा (R3) की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। 2. नए नियम में क्या बदलाव हुआ है? पहले कई छात्र अंग्रेजी के साथ एक भारतीय और एक विदेशी भाषा (जैसे फ्रेंच या जर्मन) पढ़ते थे। नए नियम के अनुसार अब तीन भाषाओं में से कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य है। विदेशी भाषा तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में ही चुनी जा सकेगी। 3. याचिका किसने दायर की? यह याचिका छात्र यशिका भंडारी, अमनदीप कौर और अर्पण रॉय चौधरी की ओर से दायर की गई है। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर, मुकुल रोहतगी और गोपाल शंकरनारायणन ने पैरवी की। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की। 4. याचिकाकर्ताओं की मुख्य आपत्ति क्या है? याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नई व्यवस्था अचानक लागू कर दी गई। कई भारतीय भाषाओं की किताबें उपलब्ध नहीं हैं और अधिकांश स्कूलों में प्रशिक्षित शिक्षक भी नहीं हैं। ऐसे में छात्रों और स्कूलों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। 5. किताबों को लेकर क्या दलील दी गई? सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कहा कि 22 भारतीय भाषाओं में से फिलहाल केवल तीन भाषाओं की पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध हैं। ऐसे में बाकी भाषाओं की पढ़ाई शुरू करना व्यवहारिक रूप से कठिन होगा। 6. शिक्षकों की कमी पर क्या कहा गया? याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि नई भारतीय भाषाएं पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की आवश्यकता होगी, लेकिन इतने कम समय में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति और प्रशिक्षण संभव नहीं है। 7. क्या विदेशी भाषाएं बंद हो जाएंगी? नहीं। छात्र फ्रेंच, जर्मन, जापानी जैसी विदेशी भाषाएं पढ़ सकते हैं, लेकिन इसके साथ उन्हें दो भारतीय भाषाएं भी पढ़नी होंगी। विदेशी भाषा तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में होगी। 8. क्या तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा होगी? नहीं। CBSE ने स्पष्ट किया है कि कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा (R3) का अलग बोर्ड एग्जाम नहीं होगा, ताकि छात्रों पर अतिरिक्त परीक्षा का दबाव न बढ़े। 9. अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार केंद्र सरकार, CBSE और NCERT अपना जवाब दाखिल करेंगे। इसके बाद 29 जुलाई को अदालत इस मामले में आगे की सुनवाई करेगी। नई शिक्षा नीति 2020 क्या है? भारत सरकार ने 29 जुलाई 2020 को नई शिक्षा नीति (NEP 2020) को मंजूरी दी थी। यह 34 वर्षों बाद देश की शिक्षा व्यवस्था में किया गया सबसे बड़ा बदलाव माना जाता है। इससे पहले शिक्षा नीति 1986 में लागू हुई थी, जिसे 1992 में संशोधित किया गया था। नई शिक्षा नीति का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली को 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना, छात्रों में व्यावहारिक ज्ञान और कौशल विकसित करना है। केंद्र सरकार ने इसे चरणबद्ध तरीके से 2030 तक लागू करने का लक्ष्य रखा है। चूंकि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए इसे लागू करने में केंद्र और राज्य सरकारों दोनों की भूमिका होती है। देश, शिक्षा और करियर से जुड़ी ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

बिलासपुर: CM हेल्पलाइन शिकायतों के खराब निराकरण पर PHE के ईई को नोटिस, कलेक्टर ने अधिकारियों को लगाई फटकार

बिलासपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर संचालित सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों के निराकरण की समीक्षा बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं मिलने पर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने पीएचई विभाग के कार्यपालन अभियंता (ईई) रूपेश कुमार धनंजय को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। टीएल (समय-सीमा) बैठक में कलेक्टर ने सभी विभागों के अधिकारियों से कहा कि शिकायतों का केवल औपचारिक निपटारा करने के बजाय उनका गुणवत्तापूर्ण और संतोषजनक समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने समय-सीमा का पालन करने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी। एकल शिक्षकीय स्कूलों में जल्द होंगे अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने एकल शिक्षकीय स्कूलों में तत्काल अतिथि शिक्षक नियुक्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर सेवानिवृत्त शिक्षकों की सेवाएं भी ली जाएं, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। जर्जर स्कूल भवनों में नहीं लगेंगी कक्षाएं कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जर्जर भवनों में किसी भी स्थिति में कक्षाएं संचालित नहीं की जाएं। ऐसे विद्यालयों के लिए वैकल्पिक भवन की व्यवस्था करने और नए भवन या अतिरिक्त कक्षों के निर्माण के प्रस्ताव शीघ्र भेजने को कहा गया। स्वास्थ्य विभाग को भी लगाई फटकार जिला खनिज न्यास (DMF) से जुड़े कार्यों की समीक्षा के दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किए जाने पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई। उन्होंने निर्देश दिए कि स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए डीएमएफ की राशि का प्रभावी और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित किया जाए। बैठक में दिए गए प्रमुख निर्देश कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि शासन की योजनाओं और जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी विभाग समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करें। बिलासपुर और छत्तीसगढ़ की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

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