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गुना में दिनदहाड़े जानलेवा हमला: पीड़ित परिवार ने SP ऑफिस पहुंचकर लगाई सुरक्षा की गुहार

गुना शहर के वंदना कॉन्वेंट स्कूल के पास गुरुवार को हुए जानलेवा हमले के मामले में शनिवार को पीड़ित परिवार समाज के लोगों के साथ एसपी ऑफिस पहुंचा। परिवार ने पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और सुरक्षा की मांग की है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और लगातार उनका पीछा कर जान से मारने की धमकियां दे रहे हैं। घटना के बाद से परिवार दहशत में है। पुराने जमीन विवाद से जुड़ा मामला परिजनों के मुताबिक आरोपियों के साथ उनका लंबे समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। बमोरी इलाके में नरेश चौकसे के नाम पर एक प्लॉट की रजिस्ट्री है, जिस पर आरोपी कब्जा करना चाहते थे। बताया गया कि पहले कलेक्टर से शिकायत के बाद प्रशासन ने हस्तक्षेप कर प्लॉट को अतिक्रमण मुक्त कराया था। इसी रंजिश में आरोपियों ने हमला किया। मंदिर से लौट रहे युवक पर हमला पीड़ित परिवार के अनुसार, विंध्याचल कॉलोनी निवासी नरेश चौकसे गुरुवार को मंदिर से दर्शन कर स्कूटर से घर लौट रहे थे। जैसे ही वे वंदना कॉन्वेंट स्कूल की घाटी के पास पहुंचे, वहां पहले से घात लगाए बैठे संतोष किरार, उसका बेटा सूरज और अन्य बदमाशों ने उन्हें घेर लिया। आरोप है कि बदमाशों ने स्कूटर पर लाठी मारकर उन्हें गिराया और फिर लाठी-डंडों व लोहे के पाइप से बेरहमी से हमला किया। जब नरेश ने बचने की कोशिश की तो एक आरोपी ने कट्टा निकालकर धमकाया। घटना का वीडियो भी सामने आया है। हूटर की आवाज सुनकर भागे आरोपी हमले के दौरान सड़क से गुजर रहे एक वाहन के हूटर की आवाज सुनाई दी। बदमाशों को लगा कि पुलिस आ गई है, जिसके बाद वे धमकी देते हुए मौके से फरार हो गए। घटना के दौरान सड़क पर मौजूद लोग तमाशबीन बने रहे। परिवार का आरोप है कि दिनदहाड़े हुए हमले के बावजूद किसी ने बीच-बचाव की कोशिश नहीं की। पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग पीड़ित परिवार ने आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी, सुरक्षा और मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस का कहना है कि आवेदन के आधार पर जांच की जा रही है और आरोपियों की तलाश जारी है। पढ़ें देश और प्रदेश की ताजा खबरें: www.deshharpal.com
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खंडवा-इंदौर हाईवे पर दर्दनाक हादसा, आंधी में गिरे पेड़ से टकराई बाइक; 4 महीने पहले हुई शादी, युवक की मौत

खंडवा-इंदौर हाईवे पर छैगांवमाखन थाना क्षेत्र के ग्राम दोंदवाड़ा के पास शुक्रवार-शनिवार की दरम्यानी रात एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। आंधी के कारण सड़क पर गिरे पेड़ से एक बाइक टकरा गई। हादसे में 22 वर्षीय युवक सावन मालाकार की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसकी पत्नी घायल हो गई। पारिवारिक कार्यक्रम से लौट रहे थे पति-पत्नी जानकारी के मुताबिक, सावन मालाकार अपनी पत्नी के साथ बड़वाह से एक पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होकर खंडवा लौट रहा था। परिजनों ने बताया कि दोनों की शादी महज 4 महीने पहले ही हुई थी। हादसे के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। अंधेरे में दिखाई नहीं दिया पेड़ परिजनों के अनुसार, सावन निवासी गणेश तलाई, खंडवा अपनी बाइक से घर लौट रहा था। इसी दौरान तेज आंधी के कारण हाईवे पर एक पेड़ गिर गया था। रात का अंधेरा होने की वजह से सावन को सड़क पर पड़ा पेड़ दिखाई नहीं दिया और बाइक सीधे उससे जा टकराई। सिर में गंभीर चोट लगने से गई जान टक्कर इतनी जोरदार थी कि सावन बाइक से उछलकर सिर के बल सड़क पर जा गिरा। उसके सिर में गंभीर चोट आई और ज्यादा खून बहने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे में उसकी पत्नी को भी चोटें आई हैं। घायल पत्नी हाईवे पर मांगती रही मदद हादसे के बाद घायल पत्नी अपने पति को उठाने की कोशिश करती रही। उसने राहगीरों से मदद भी मांगी, लेकिन रात का समय होने के कारण हाईवे पर ट्रैफिक बहुत कम था। पति को बचाने की कोशिश में वह खुद भी खून से लथपथ हो गई। पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपा शव शनिवार दोपहर जिला अस्पताल स्थित मेडिकल कॉलेज में सावन के शव का पोस्टमार्टम किया गया। हादसे की खबर मिलते ही परिजन और रिश्तेदार अस्पताल पहुंच गए थे। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया। अधिक खबरों के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन में शामिल होगी JCC(J), अमित जोगी बोले- राजनीति में ‘झेंगुरा’ जैसी जिजीविषा जरूरी

जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने घोषणा की है कि वह नई दिल्ली के जंतर-मंतर में आयोजित होने वाले कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में शामिल होगी। पार्टी का दावा है कि वह देश की पहली मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी है, जिसने CJP के आंदोलन का समर्थन किया है। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग JCC(J) ने कहा कि यह प्रदर्शन राष्ट्रीय परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में किया जा रहा है। आंदोलन के जरिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई जाएगी। पार्टी का कहना है कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही तय होना जरूरी है। अमित जोगी का बड़ा बयान पार्टी अध्यक्ष अमित जोगी ने कहा कि वे कांग्रेस की विचारधारा से जुड़े हैं, लेकिन वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में पारंपरिक दलों के लिए टिके रहना चुनौतीपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा, “आज के भारत में सिर्फ कांग्रेसी होना काफी नहीं है। राजनीति में टिके रहने के लिए कॉकरोच जैसी जिजीविषा भी चाहिए।” ‘झेंगुरा’ बनकर पहुंचेंगे जंतर-मंतर अमित जोगी ने छत्तीसगढ़ी संदर्भ देते हुए कहा कि राज्य में कॉकरोच को ‘झेंगुरा’ कहा जाता है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी 6 जून को जंतर-मंतर में कॉकरोच नहीं, बल्कि गर्व के साथ ‘झेंगुरा’ बनकर पहुंचेगी। छात्रों के मुद्दों पर समर्थन JCC(J) ने स्पष्ट किया कि फिलहाल उसका CJP के साथ जुड़ाव केवल परीक्षा अनियमितताओं और छात्रों के हितों से जुड़े मुद्दों तक सीमित है। हालांकि पार्टी ने भविष्य में समान विचारधारा वाले संगठनों के साथ मिलकर काम करने के संकेत भी दिए हैं। तीसरे राजनीतिक विकल्प की बात अमित जोगी ने कहा कि युवाओं के बीच भाजपा और कांग्रेस से अलग तीसरे राजनीतिक विकल्प की मांग लगातार बढ़ रही है। उन्होंने माना कि राजनीतिक दलों से गलतियां हुई हैं और ऐसे जन आंदोलन आत्ममंथन का मौका देते हैं। उन्होंने कहा कि जनता की भावनाओं को समझना और उनका सम्मान करना जरूरी है। आंदोलन राजनीतिक दलों को आईना दिखाने का काम करते हैं और सुधार के लिए यह जरूरी भी है। अधिक खबरों के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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रायपुर में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के जोनल ऑफिस में भीषण आग, डेढ़ घंटे बाद पाया गया काबू

Central Bank of India के रायपुर स्थित जोनल ऑफिस में शनिवार सुबह भीषण आग लग गई। यह घटना बॉम्बे मार्केट इलाके की है। सुबह करीब 9 बजे बंद पड़े ऑफिस से अचानक धुआं उठता देखकर राहगीरों ने पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने का काम शुरू किया। करीब डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए थे। शॉर्ट सर्किट की आशंका शुरुआती जांच में आग लगने की सही वजह सामने नहीं आई है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि शॉर्ट सर्किट की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल पुलिस और फायर विभाग मामले की जांच कर रहे हैं। महत्वपूर्ण दस्तावेजों को नुकसान की आशंका आग बैंक के जोनल ऑफिस में लगी थी, इसलिए वहां रखे महत्वपूर्ण दस्तावेजों और अन्य सामान के जलने की आशंका जताई जा रही है। बैंक प्रबंधन नुकसान का आकलन करने में जुटा हुआ है। ऑफिस बंद होने से टली बड़ी घटना राहत की बात यह रही कि घटना के समय ऑफिस बंद था। इसी वजह से किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। समय रहते आग पर काबू पा लिया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। सुरक्षा के लिए इलाका किया गया सील एडीसीपी मध्य तारकेश्वर पटेल ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंच गई थी। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आग लगने वाले इलाके को कुछ समय के लिए सील कर दिया गया था। अधिक खबरों के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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ABVP ने ICFAI विश्वविद्यालय के कुलपति को हटाने की मांग की, जांच रिपोर्ट में गंभीर आरोपों का दावा

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने आईसीएफएआई विश्वविद्यालय के कुलपति शिवदयाल पांडे को पद से हटाने की मांग की है। परिषद ने राज्यपाल और कुलाध्यक्ष के नाम ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि जांच समिति की रिपोर्ट में कुलपति के खिलाफ लगे आरोपों को प्रथम दृष्टया सही माना गया है। मानसिक उत्पीड़न और लैंगिक भेदभाव के आरोप ABVP का कहना है कि कुलपति पर मानसिक उत्पीड़न, लैंगिक भेदभाव और प्रशासनिक अधिकारों के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। परिषद के मुताबिक विश्वविद्यालय के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति से मर्यादित और निष्पक्ष व्यवहार की उम्मीद की जाती है। ऐसे आरोप उच्च शिक्षा संस्थानों की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं। जांच समिति की रिपोर्ट में क्या सामने आया परिषद के अनुसार छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग द्वारा गठित जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कुलपति के आचरण को अव्यावसायिक और पद की गरिमा के खिलाफ बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर आरोपों को प्रथम दृष्टया प्रमाणित माना गया है। राज्यपाल से की गई कार्रवाई की मांग ABVP ने राज्यपाल और कुलाध्यक्ष से मांग की है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर कुलपति के खिलाफ तत्काल वैधानिक कार्रवाई की जाए। परिषद ने उन्हें पद से हटाने के साथ ही विश्वविद्यालय में महिला प्राध्यापकों, कर्मचारियों और छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने की भी मांग की है। छात्र नेताओं ने उठाए सवाल प्रदेश सहमंत्री प्रथम राव फूटाने ने कहा कि जब जांच समिति गंभीर आरोपों की पुष्टि कर चुकी है, तो विश्वविद्यालय की गरिमा बनाए रखने के लिए तुरंत कार्रवाई जरूरी है। वहीं जिला संयोजक रूपेश कुर्रे ने कहा कि शिक्षा संस्थान केवल पढ़ाई के केंद्र नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों के भी केंद्र होते हैं। पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर कुम्हारी-पाटन भाग संयोजक डे साहब साहू ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही और महिला सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। अधिक खबरों के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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गुना में पहली बार होगा पंचमुखी पंचकल्याणक गजरथ महोत्सव, 5 इंद्र-5 कुबेर समेत दिखेंगे दुर्लभ दृश्य

गुना में जल्द ही जैन समाज का ऐतिहासिक पंचमुखी पंचकल्याणक गजरथ महोत्सव आयोजित होने जा रहा है। यह भव्य धार्मिक आयोजन मुनि पुंगव सुधासागर महाराज के सानिध्य में होगा। खास बात यह है कि जैन इतिहास में पहली बार ऐसा पंचमुखी पंचकल्याणक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें सभी प्रमुख पात्रों की संख्या पांच-पांच होगी। महोत्सव में 5 कुबेर, 5 यज्ञ नायक, 5 ईशान इंद्र और 5 सनत कुमार इंद्र शामिल होंगे। इसके अलावा भगवान के माता-पिता के रूप में 5 सौभाग्यशाली जोड़े बनाए जाएंगे। आयोजन के दौरान 5 नीलांजना नृत्य, 5 दीक्षाएं और 5 आहार जैसे दुर्लभ दृश्य भी देखने को मिलेंगे। मुनि सुधासागर महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि गुना का यह पंचकल्याणक बेहद अलौकिक और विशेष होगा। उन्होंने कहा कि उनके सानिध्य में अब तक देश में ऐसा आयोजन कहीं नहीं हुआ है। जैसे पंचमुखी रुद्राक्ष का विशेष महत्व होता है, उसी तरह यह पंचमुखी पंचकल्याणक भी ऐतिहासिक साबित होगा। मुनिश्री ने कहा कि यह आयोजन सिर्फ गुना ही नहीं, बल्कि पूरे भारत और विश्व के कल्याण का माध्यम बनेगा। उन्होंने संकेत दिए कि इस दौरान इतनी मूर्तियों को सूर्य मंत्र दिया जाएगा कि संभव है कुछ नई मुनि दीक्षाएं भी हों। उन्होंने श्रद्धालुओं से अभी से मंत्र जाप शुरू करने का आह्वान किया। इस दौरान अंचल के कमलश्री परिवार ने अपना निजी सीमंधर जिनालय मंदिर सकल जैन समाज को समर्पित कर दिया। यह मंदिर अब बजरंगगढ़ कमेटी के अंतर्गत संचालित होगा। मुनिश्री ने परिवार को मंगल आशीर्वाद भी दिया। महोत्सव की तैयारियों के तहत शनिवार सुबह शहर में प्रभातफेरी निकाली गई। यात्रा श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई नसियांजी पहुंची। अधिक खबरों के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने के विरोध में भोपाल में पैदल मार्च आज

राजधानी भोपाल में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने के प्रस्ताव को लेकर विरोध तेज हो गया है। विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनों ने इस फैसले के खिलाफ संयुक्त रूप से पैदल मार्च निकालने का ऐलान किया है। यह पैदल मार्च शुक्रवार शाम 4:30 बजे जहांगीराबाद स्थित जिंसी चौकी से शुरू होगा। इसके बाद प्रदर्शनकारी राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर नाम परिवर्तन का प्रस्ताव वापस लेने की मांग करेंगे। स्वतंत्रता सेनानी का अपमान बताया जमीअत उलेमा मध्यप्रदेश के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारून ने कहा कि मौलाना बरकतउल्ला भोपाली देश के महान स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद और हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि मौलाना बरकतउल्ला ने विदेशों में रहकर भारत की आजादी की लड़ाई को मजबूत किया और देश की पहली निर्वासित सरकार में प्रधानमंत्री की भूमिका निभाई थी। ऐसे व्यक्तित्व के नाम को हटाने का प्रयास स्वतंत्रता संग्राम की विरासत का अपमान है। नए विश्वविद्यालय खोलने की मांग मध्यप्रदेश सर्वधर्म सद्भावना मंच के सचिव हाजी मोहम्मद इमरान हारून ने कहा कि प्रदेश को नए और विश्वस्तरीय विश्वविद्यालयों की जरूरत है, न कि पुराने संस्थानों के नाम बदलने की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार किसी नए नाम से संस्थान स्थापित करना चाहती है तो नए विश्वविद्यालय खोले जाएं, लेकिन ऐतिहासिक पहचान और विरासत से जुड़े संस्थानों के नाम नहीं बदले जाने चाहिए। प्रस्ताव वापस लेने की मांग विरोध कर रहे संगठनों ने सरकार से कार्य परिषद द्वारा पारित नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को तुरंत निरस्त करने की मांग की है। उनका कहना है कि यह फैसला भोपाल की ऐतिहासिक पहचान और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत पर सीधा आघात है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रस्ताव वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। नागरिकों से शामिल होने की अपील आयोजकों ने शहरवासियों, छात्र-छात्राओं और समाज के सभी वर्गों से पैदल मार्च में शामिल होने की अपील की है। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक नाम का मुद्दा नहीं, बल्कि इतिहास और विरासत को बचाने की लड़ाई है। भोपाल और प्रदेश की ताजा खबरों के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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इंदौर में खूंखार कुत्ते का आतंक, 40 से ज्यादा लोगों को काटा, अस्पताल स्टाफ भी घायल

मध्य प्रदेश के इंदौर में शुक्रवार को एक आवारा कुत्ते ने जमकर आतंक मचाया। सांवेर रोड इलाके में कुत्ते ने डॉक्टर, नर्स, मेडिकल स्टूडेंट्स, मरीज, सिक्योरिटी गार्ड और राहगीरों समेत 40 से ज्यादा लोगों को काटकर घायल कर दिया। पीड़ितों में 16 से अधिक लोग अरबिंदो अस्पताल से जुड़े बताए जा रहे हैं। घटना की शुरुआत सुबह करीब 8 बजे अरबिंदो अस्पताल परिसर से हुई। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार कुत्ता पिछले हिस्से से अस्पताल में घुसा और सबसे पहले स्टाफ पर हमला किया। इसके बाद वह सांवेर रोड और आसपास के कई इलाकों में घूमता रहा और लोगों को काटता गया। कई इलाकों में फैला दहशत का माहौल प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कुत्ता अरबिंदो अस्पताल से निकलकर रेवती रेंज, बरदरी गांव, एलएनसीटी कॉलेज, रेनेसा कॉलेज, नरसिंह मुंजी कॉलेज और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच गया। लगातार हो रहे हमलों के कारण इलाके में दहशत फैल गई। ग्रामीणों, छात्रों और कर्मचारियों में भय का माहौल है। कई लोग अकेले बाहर निकलने से बच रहे हैं, जबकि अभिभावकों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। नगर निगम ने चलाया अभियान घटना के बाद शनिवार को नगर निगम की दो टीमें अरबिंदो अस्पताल पहुंचीं और कुत्तों को पकड़ने का अभियान शुरू किया। अधिकारियों ने घेराबंदी कर अब तक 23 कुत्तों को पकड़ा है। हालांकि, वह कुत्ता अब तक पकड़ में नहीं आया है जिसने 40 से ज्यादा लोगों पर हमला किया था। घायलों का अस्पताल में इलाज जारी हमले में घायल लोगों का इलाज अरबिंदो अस्पताल और अन्य चिकित्सा संस्थानों में किया गया। सभी को एंटी रेबीज वैक्सीन और जरूरी उपचार दिया गया। इलाज कराने वालों में डॉ. स्मृति, डॉ. अक्षिता, सचिन राजपूत, अंजनी शर्मा, सीमा, शोभा, परिणीता, कुसुम, प्रणव गुप्ता, गोविंदा, विष्णु, अफसर, राजीव धाकड़ और आर्यन समेत कई लोग शामिल हैं। रोज सामने आ रहे 200 डॉग बाइट केस शहर में डॉग बाइट के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। शासकीय हुकुमचंद पॉलीक्लिनिक (लाल अस्पताल) के प्रभारी डॉ. रुपेंद्र पटेल के मुताबिक, इंदौर में रोजाना करीब 200 लोग डॉग बाइट के इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। स्थानीय लोगों और अस्पताल प्रबंधन ने नगर निगम से मांग की है कि हमला करने वाले कुत्ते को जल्द पकड़कर लोगों को राहत दी जाए। इंदौर और प्रदेश की ताजा खबरों के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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इंदौर में इलेक्ट्रिक वाहन शोरूम में भीषण आग, 20 लोगों का रेस्क्यू

मध्य प्रदेश के इंदौर में शुक्रवार सुबह इलेक्ट्रिक वाहनों के एक शोरूम में भीषण आग लग गई। हादसे के दौरान बिल्डिंग की ऊपरी मंजिलों पर रहने वाले 6 परिवारों के करीब 20 लोग अंदर फंस गए। पुलिस, फायर ब्रिगेड और स्थानीय लोगों की मदद से सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। घटना लसूड़िया इलाके के खालसा चौक के पास सुबह करीब 7 बजे हुई। शुरुआती जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। धुएं से खुली लोगों की नींद आग लगने के समय ऊपर बने फ्लैट्स में लोग सो रहे थे। शोरूम से उठते धुएं और सांस लेने में दिक्कत होने पर उनकी नींद खुली। नीचे देखा तो आग की तेज लपटें उठ रही थीं। शोरूम के पास बनी सीढ़ियां आग की चपेट में आ गई थीं, जिसके कारण लोग नीचे नहीं उतर पा रहे थे। चीख-पुकार सुनकर पड़ोसी बाहर आए और रेस्क्यू शुरू किया। सीढ़ियों और रस्सियों के सहारे बचाई जान स्थानीय लोगों ने पड़ोसी बिल्डिंग की छत से सीढ़ियां जोड़कर रास्ता बनाया। खिड़कियों और एंगल से रस्सियां बांधकर लोगों तक पहुंचाई गईं। कुछ लोग सीढ़ियों के सहारे दूसरी बिल्डिंग की छत तक पहुंचे, जबकि कुछ को रस्सियों के सहारे नीचे उतारा गया। राहत की बात यह रही कि आग फ्लैट्स तक नहीं पहुंची और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हालांकि, शोरूम में खड़े सभी इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन जलकर खाक हो गए। एक घंटे में आग पर पाया काबू फायर ब्रिगेड अधिकारी शोभाराम मालवीय ने बताया कि करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद दो टैंकर पानी की मदद से आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है। शोर सुनकर जागे लोग भानु सिंह और निशा सिंह, जो शिवपुरी के रहने वाले हैं, ने बताया कि वे गहरी नींद में थे। लोगों ने खिड़कियों पर पत्थर फेंककर उन्हें जगाया। इसके बाद वे बालकनी में पहुंचे और बाहर का नजारा देखकर घबरा गए। वहीं बेंगलुरु निवासी चेतन, जो इंदौर में किराए के फ्लैट में रह रहे हैं, ने बताया कि वे भी शोर सुनकर जागे थे। हादसे के बाद कई लोग अपने परिचितों के यहां चले गए। स्थानीय चौकीदार प्रवीण के मुताबिक, दुबई से आई एक फैमिली भी बिल्डिंग में ठहरी हुई थी। सुबह बारिश देखने के लिए उठे लोगों ने धुआं देखा और तुरंत सभी को अलर्ट किया। इंदौर और प्रदेश की ताजा खबरों के लिए पढ़ते रहें
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सागर में जमीनी विवाद में घायल बुजुर्ग की मौत, परिजनों ने शव रखकर किया चक्काजाम

सागर के मोतीनगर थाना क्षेत्र के ग्राम अमावनी में जमीनी विवाद के चलते हुई मारपीट में घायल बुजुर्ग की इलाज के दौरान शुक्रवार को मौत हो गई। घटना के बाद अस्पताल में परिजनों और ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव का पंचनामा बनाया और पोस्टमार्टम की कार्रवाई शुरू कराई। पीएम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। इसके बाद गुस्साए परिजनों ने सागर-खुरई मार्ग पर शव रखकर चक्काजाम कर दिया। चक्काजाम की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने लोगों को समझाइश देकर शांत कराया, जिसके बाद यातायात बहाल हो सका। जमीन कब्जे के विवाद में हुई थी मारपीट मृतक के बेटे आशीष पटेल ने आरोप लगाया है कि आनंद कुमार गुप्ता, शिवराज शुक्ला और यशवंत खटीक उनकी जमीन पर जबरन कब्जा करना चाहते थे। इसी विवाद को लेकर उनके पिता नंदराम पटेल के साथ मारपीट की गई, जिससे उनकी मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, 3 जून को वर्षा पटेल ने मोतीनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि परिवार की करीब 4 एकड़ कृषि भूमि ग्राम अमावनी में स्थित है। परिजनों का आरोप है कि पास में प्लॉटिंग कर रहे कुछ लोगों ने उनकी जमीन पर लगी लकड़ी की बल्लियां उखाड़ना शुरू कर दिया। विरोध करने पर नंदराम पटेल के साथ गाली-गलौज और मारपीट की गई। डंडे, बल्लियों और तलवार से हमला करने का आरोप शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने नंदराम पटेल पर डंडों, बल्लियों और तलवार से हमला किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। परिवार के लोगों ने बीच-बचाव कर उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान शुक्रवार को उनकी मौत हो गई। इस मामले में पुलिस ने पहले हत्या के प्रयास समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया था। आरोपियों में विकास उर्फ यशवंत खटीक, ध्रुव अहिरवार, दिलीप अहिरवार, हुकुमचंद पटेल, विनोद पटेल, दयाराम पटेल, अंकित कोरी, शाहरुख राईन और अन्य शामिल हैं। अब हत्या की धारा बढ़ाएगी पुलिस पुलिस का कहना है कि घायल बुजुर्ग की मौत के बाद मामले में हत्या की धारा जोड़कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं परिजनों ने आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग की है। प्रदेश और सागर की ताजा खबरों के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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अक्षर पटेल का ऑलराउंड शो, शुभमन गिल की कप्तानी पारी; भारत ने इंग्लैंड को 6 विकेट से हराकर पहला वनडे जीता

बर्मिंघम। ऑलराउंडर अक्षर पटेल के शानदार प्रदर्शन और कप्तान शुभमन गिल की बेहतरीन बल्लेबाजी की बदौलत भारत ने इंग्लैंड को पहले वनडे मुकाबले में 6 विकेट से हराकर सीरीज में विजयी शुरुआत की। एजबेस्टन मैदान पर खेले गए मैच में भारत ने 259 रन के लक्ष्य को 45.2 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 262 रन बनाकर हासिल कर लिया। अक्षर पटेल ने नाबाद 57 रन बनाए, जबकि वॉशिंगटन सुंदर ने भी नाबाद 52 रन की महत्वपूर्ण पारी खेलकर टीम को जीत तक पहुंचाया। कप्तान शुभमन गिल ने 80 रन बनाए, लेकिन मैच के दौरान क्रैम्प्स की समस्या के कारण उन्हें रिटायर्ड हर्ट होकर मैदान छोड़ना पड़ा। शुरुआती झटकों के बाद गिल ने संभाली पारी लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही। रोहित शर्मा 11 रन और विराट कोहली 5 रन बनाकर जल्दी आउट हो गए। इसके बाद कप्तान शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर ने तीसरे विकेट के लिए 101 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी कर टीम की पारी को संभाला। श्रेयस 35 रन बनाकर रनआउट हुए, जबकि केएल राहुल बोल्ड होकर पवेलियन लौट गए। इसके बाद अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर ने जिम्मेदारी संभालते हुए पांचवें विकेट के लिए 102 रन की अविजित साझेदारी की और भारत को शानदार जीत दिलाई। जो रूट और लियाम डॉसन ने इंग्लैंड को संभाला इससे पहले टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड की टीम ने 47.5 ओवर में 258 रन बनाए। इंग्लैंड की शुरुआत मजबूत रही और टीम ने 61 रन तक कोई विकेट नहीं गंवाया, लेकिन इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने जोरदार वापसी करते हुए महज 19 रन के भीतर 5 विकेट झटक दिए। मध्यक्रम में जो रूट ने 76 रन और लियाम डॉसन ने 68 रन की अहम पारी खेली। दोनों बल्लेबाजों ने छठे विकेट के लिए 121 रन की साझेदारी कर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। अक्षर पटेल ने गेंद और बल्ले दोनों से निभाई अहम भूमिका भारतीय गेंदबाजों में अक्षर पटेल सबसे सफल रहे। उन्होंने शानदार गेंदबाजी करते हुए 4 विकेट अपने नाम किए। वहीं प्रसिद्ध कृष्णा और गुरनूर बरार ने 2-2 विकेट हासिल किए। जसप्रीत बुमराह और शिवम दुबे को एक-एक सफलता मिली। गेंद और बल्ले दोनों से बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले अक्षर पटेल ने टीम इंडिया की जीत में सबसे अहम भूमिका निभाई और भारत ने सीरीज की शानदार शुरुआत की। क्रिकेट और खेल जगत की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

CAG रिपोर्ट में जल जीवन मिशन की पोल: छत्तीसगढ़ में 33% नल कनेक्शन गैर-कार्यशील, ‘हर घर जल’ लक्ष्य भी अधूरा

रायपुर। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन (JJM) के क्रियान्वयन को लेकर कई गंभीर खामियों का खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार कमजोर योजना, धीमा क्रियान्वयन, निगरानी की कमी और गलत रिपोर्टिंग के कारण ग्रामीण पेयजल योजनाओं की प्रभावशीलता और दीर्घकालिक स्थिरता प्रभावित हुई है। मार्च 2024 तक की अवधि पर आधारित ‘छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन का प्रदर्शन ऑडिट’ रिपोर्ट मंगलवार को वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने विधानसभा में पेश की। रिपोर्ट सामने आने के बाद राज्य सरकार ने इसके लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया, जबकि उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने दावा किया कि भाजपा सरकार बनने के बाद मिशन के कार्यों में तेजी आई है। योजना निर्माण में गंभीर खामियां CAG की रिपोर्ट के मुताबिक जल जीवन मिशन के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। कई स्थानों पर गांव स्तर की कार्ययोजना तैयार किए बिना ही जिला स्तरीय योजनाएं बना दी गईं, जबकि राज्य स्तरीय कार्ययोजना तैयार ही नहीं की गई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि राज्य स्तर पर जल सुरक्षा योजना नहीं बनाई गई, जिससे जल स्रोतों की दीर्घकालिक उपलब्धता और योजनाओं के रखरखाव की स्पष्ट रणनीति विकसित नहीं हो सकी। 33 प्रतिशत नल कनेक्शन निकले गैर-कार्यशील रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2025 तक 50 लाख ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया था। जनवरी 2025 तक 40.10 लाख फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन (FHTC) लगाए गए। हालांकि, इनमें से 13.31 लाख (करीब 33%) कनेक्शन गैर-कार्यशील पाए गए। इसके पीछे सूख चुके जल स्रोत, अधूरी ओवरहेड टंकियां, बिजली कनेक्शन का अभाव और सोलर पंप स्थापित नहीं होना प्रमुख कारण बताए गए हैं। ‘हर घर जल’ लक्ष्य भी अधूरा राज्य के 19,656 गांवों को मार्च 2024 तक ‘हर घर जल’ प्रमाणित किया जाना था, लेकिन केवल 716 गांव (3.64 प्रतिशत) ही इस लक्ष्य तक पहुंच सके। ऑडिट में ऐसे मामले भी सामने आए, जहां अधूरे कार्यों के बावजूद गांवों को ‘हर घर जल’ प्रमाणित कर दिया गया। किसी भी जिले में 100% कवरेज नहीं मार्च 2024 तक राज्य के 33 में से किसी भी जिले और 146 में से किसी भी विकासखंड में 100 प्रतिशत नल जल कवरेज नहीं था। योजनाओं की प्रगति बेहद धीमी रिपोर्ट के अनुसार जल जीवन मिशन के तहत स्वीकृत 29,153 सिंगल विलेज स्कीम में से मार्च 2024 तक केवल 172 योजनाएं पूरी हो सकीं। इनमें भी सिर्फ 32 ग्राम पंचायतों को योजनाओं का संचालन सौंपा गया। वहीं, स्वीकृत 70 मल्टी विलेज स्कीम में से मार्च 2025 तक एक भी योजना पूरी नहीं हो सकी, जिससे करीब 9.85 लाख घरों तक सतही जल स्रोतों से पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य प्रभावित हुआ। सोलर आधारित योजनाओं में भी अनियमितताएं CAG ने पाया कि कई सोलर आधारित पेयजल योजनाओं में निर्धारित क्षमता से अधिक नल कनेक्शन जोड़ दिए गए। इसके कारण 28,984 परिवारों को निर्धारित मानकों के अनुसार पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। वित्तीय और गुणवत्ता संबंधी कमियां रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य सरकार केंद्र और राज्यांश मिलाकर 6,480.04 करोड़ रुपये की आवश्यक वित्तीय व्यवस्था सुनिश्चित करने में विफल रही। साथ ही मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), जिला खनिज न्यास (DMF), सांसद निधि और CSR जैसी योजनाओं के संसाधनों के समन्वय के लिए भी कोई प्रभावी रणनीति नहीं बनाई गई। जल गुणवत्ता जांच की व्यवस्था कमजोर राज्य की 75 जल परीक्षण प्रयोगशालाओं में से केवल 4 प्रयोगशालाएं ही सभी 13 निर्धारित जल गुणवत्ता मानकों की जांच करने में सक्षम पाई गईं। इसके अलावा 37 प्रतिशत प्रयोगशालाओं को NABL की मान्यता प्राप्त नहीं थी। रिपोर्ट में स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में भी निर्धारित मानकों के अनुसार जल गुणवत्ता जांच नहीं होने की बात कही गई है। CAG की प्रमुख सिफारिशें रिपोर्ट में सरकार को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं, जिनमें शामिल हैं— सरकार ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को ठहराया जिम्मेदार CAG रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि दिसंबर 2023 में भाजपा सरकार बनने के बाद जल जीवन मिशन के कार्यों में तेजी आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली कांग्रेस सरकार मिशन को खराब स्थिति में छोड़कर गई थी, जिसके कारण परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो सकीं। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन की समय-सीमा 2024 से बढ़ाकर 2028 तक कर दी है। मार्च 2026 में स्वीकृत मिशन के दूसरे चरण को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जा सके।

रायपुर में 16 जुलाई को निकलेगी भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा, राज्यपाल और मुख्यमंत्री निभाएंगे ‘छेरा पहरा’ की परंपरा

रायपुर। राजधानी रायपुर के गायत्री नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ की विश्वविख्यात रथयात्रा 16 जुलाई को धार्मिक आस्था, वैदिक परंपराओं और भव्य आयोजन के साथ निकाली जाएगी। वहीं बाहुड़ा यात्रा 24 जुलाई को आयोजित होगी। मंदिर परिसर में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और भगवान जगन्नाथ, बलभद्र तथा माता सुभद्रा के तीनों रथों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। रथयात्रा से पहले 14 जुलाई की शाम 6 बजे भगवान का नेत्रोत्सव आयोजित किया जाएगा। यह पर्व धार्मिक आस्था के साथ-साथ छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सांस्कृतिक एकता, भाईचारे और सनातन परंपरा का भी प्रतीक माना जाता है। भक्त और भगवान के मिलन का महापर्व श्री जगन्नाथ मंदिर सेवा समिति के संस्थापक अध्यक्ष एवं विधायक पुरंदर मिश्रा ने बताया कि रथयात्रा भक्तों और भगवान के प्रत्यक्ष मिलन का महापर्व है। वर्ष में केवल इसी अवसर पर भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मंदिर से बाहर निकलकर श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं। 11 वैदिक पंडित कराएंगे विशेष पूजन रथयात्रा के दिन सुबह 11 वैदिक पंडितों के सान्निध्य में भगवान का विशेष अभिषेक, पूजन और हवन कराया जाएगा। चंदन, केसर, कस्तूरी, कपूर सहित विभिन्न सुगंधित द्रव्यों से भगवान का दिव्य स्नान कराया जाएगा। इसके बाद भगवान को गजामूंग महाप्रसाद अर्पित किया जाएगा। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और मंगल वाद्यों की गूंज के बीच भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा अपने-अपने रथों पर विराजमान होकर नगर भ्रमण के लिए प्रस्थान करेंगे। राज्यपाल और मुख्यमंत्री निभाएंगे ‘छेरा पहरा’ की परंपरा रथयात्रा की सबसे प्रमुख परंपराओं में शामिल ‘छेरा पहरा’ का निर्वहन इस वर्ष भी किया जाएगा। परंपरा के अनुसार राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भगवान के रथ के आगे सोने की झाड़ू से मार्ग की प्रतीकात्मक सफाई करेंगे। यह परंपरा सेवा, समर्पण और विनम्रता का संदेश देती है। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, जनप्रतिनिधि, संत-महात्मा, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। भजन, झांकियों और लोकनृत्य से गूंजेगा शहर रथयात्रा के दौरान महिला मंडलों द्वारा भजन-कीर्तन, आकर्षक सांस्कृतिक झांकियां और पारंपरिक लोकनृत्य प्रस्तुत किए जाएंगे। “जय जगन्नाथ” के जयघोष के साथ मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहेगा। श्रद्धालुओं से की गई विशेष अपील श्री जगन्नाथ मंदिर सेवा समिति ने प्रदेशभर के श्रद्धालुओं से सपरिवार रथयात्रा में शामिल होकर भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने और सनातन संस्कृति की इस गौरवशाली परंपरा का हिस्सा बनने की अपील की है। रायपुर और छत्तीसगढ़ की धार्मिक, सांस्कृतिक और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

CBSE की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, सरकार और बोर्ड से 10 दिन में मांगा जवाब

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की नई थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि “कोई भी भाषा सीखना कभी बेकार नहीं जाता।” हालांकि, नीति को लागू करने में सामने आ रही व्यावहारिक चुनौतियों को देखते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार, CBSE और संबंधित पक्षों से 10 दिन के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी। यह नीति शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू की गई है। इसके तहत छात्रों को दो भारतीय भाषाएं और एक विदेशी भाषा पढ़नी होगी। इससे कई छात्रों को पहले से पढ़ी जा रही भाषाओं में बदलाव करना पड़ सकता है। क्या है विवाद? याचिकाकर्ताओं का कहना है कि CBSE ने पर्याप्त तैयारी के बिना नई भाषा नीति लागू कर दी है। उनके मुताबिक कई स्कूलों में संबंधित भाषाओं के शिक्षक, पाठ्यपुस्तकें और आवश्यक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध नहीं हैं, जिससे छात्रों और शिक्षकों दोनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी से जुड़े अहम सवाल और जवाब 1. मामला क्या है? सुप्रीम कोर्ट में CBSE के उस नियम को चुनौती दी गई है, जिसके तहत 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य किया गया है। इनमें कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है। हालांकि, CBSE ने 6 जून को संशोधित दिशा-निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया था कि इस वर्ष कक्षा 10 के छात्रों को तीसरी भाषा (R3) की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। 2. नए नियम में क्या बदलाव हुआ है? पहले कई छात्र अंग्रेजी के साथ एक भारतीय और एक विदेशी भाषा (जैसे फ्रेंच या जर्मन) पढ़ते थे। नए नियम के अनुसार अब तीन भाषाओं में से कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य है। विदेशी भाषा तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में ही चुनी जा सकेगी। 3. याचिका किसने दायर की? यह याचिका छात्र यशिका भंडारी, अमनदीप कौर और अर्पण रॉय चौधरी की ओर से दायर की गई है। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर, मुकुल रोहतगी और गोपाल शंकरनारायणन ने पैरवी की। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की। 4. याचिकाकर्ताओं की मुख्य आपत्ति क्या है? याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नई व्यवस्था अचानक लागू कर दी गई। कई भारतीय भाषाओं की किताबें उपलब्ध नहीं हैं और अधिकांश स्कूलों में प्रशिक्षित शिक्षक भी नहीं हैं। ऐसे में छात्रों और स्कूलों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। 5. किताबों को लेकर क्या दलील दी गई? सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कहा कि 22 भारतीय भाषाओं में से फिलहाल केवल तीन भाषाओं की पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध हैं। ऐसे में बाकी भाषाओं की पढ़ाई शुरू करना व्यवहारिक रूप से कठिन होगा। 6. शिक्षकों की कमी पर क्या कहा गया? याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि नई भारतीय भाषाएं पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की आवश्यकता होगी, लेकिन इतने कम समय में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति और प्रशिक्षण संभव नहीं है। 7. क्या विदेशी भाषाएं बंद हो जाएंगी? नहीं। छात्र फ्रेंच, जर्मन, जापानी जैसी विदेशी भाषाएं पढ़ सकते हैं, लेकिन इसके साथ उन्हें दो भारतीय भाषाएं भी पढ़नी होंगी। विदेशी भाषा तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में होगी। 8. क्या तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा होगी? नहीं। CBSE ने स्पष्ट किया है कि कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा (R3) का अलग बोर्ड एग्जाम नहीं होगा, ताकि छात्रों पर अतिरिक्त परीक्षा का दबाव न बढ़े। 9. अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार केंद्र सरकार, CBSE और NCERT अपना जवाब दाखिल करेंगे। इसके बाद 29 जुलाई को अदालत इस मामले में आगे की सुनवाई करेगी। नई शिक्षा नीति 2020 क्या है? भारत सरकार ने 29 जुलाई 2020 को नई शिक्षा नीति (NEP 2020) को मंजूरी दी थी। यह 34 वर्षों बाद देश की शिक्षा व्यवस्था में किया गया सबसे बड़ा बदलाव माना जाता है। इससे पहले शिक्षा नीति 1986 में लागू हुई थी, जिसे 1992 में संशोधित किया गया था। नई शिक्षा नीति का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली को 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना, छात्रों में व्यावहारिक ज्ञान और कौशल विकसित करना है। केंद्र सरकार ने इसे चरणबद्ध तरीके से 2030 तक लागू करने का लक्ष्य रखा है। चूंकि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए इसे लागू करने में केंद्र और राज्य सरकारों दोनों की भूमिका होती है। देश, शिक्षा और करियर से जुड़ी ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

बिलासपुर: CM हेल्पलाइन शिकायतों के खराब निराकरण पर PHE के ईई को नोटिस, कलेक्टर ने अधिकारियों को लगाई फटकार

बिलासपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर संचालित सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों के निराकरण की समीक्षा बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं मिलने पर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने पीएचई विभाग के कार्यपालन अभियंता (ईई) रूपेश कुमार धनंजय को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। टीएल (समय-सीमा) बैठक में कलेक्टर ने सभी विभागों के अधिकारियों से कहा कि शिकायतों का केवल औपचारिक निपटारा करने के बजाय उनका गुणवत्तापूर्ण और संतोषजनक समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने समय-सीमा का पालन करने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी। एकल शिक्षकीय स्कूलों में जल्द होंगे अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने एकल शिक्षकीय स्कूलों में तत्काल अतिथि शिक्षक नियुक्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर सेवानिवृत्त शिक्षकों की सेवाएं भी ली जाएं, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। जर्जर स्कूल भवनों में नहीं लगेंगी कक्षाएं कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जर्जर भवनों में किसी भी स्थिति में कक्षाएं संचालित नहीं की जाएं। ऐसे विद्यालयों के लिए वैकल्पिक भवन की व्यवस्था करने और नए भवन या अतिरिक्त कक्षों के निर्माण के प्रस्ताव शीघ्र भेजने को कहा गया। स्वास्थ्य विभाग को भी लगाई फटकार जिला खनिज न्यास (DMF) से जुड़े कार्यों की समीक्षा के दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किए जाने पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई। उन्होंने निर्देश दिए कि स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए डीएमएफ की राशि का प्रभावी और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित किया जाए। बैठक में दिए गए प्रमुख निर्देश कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि शासन की योजनाओं और जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी विभाग समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करें। बिलासपुर और छत्तीसगढ़ की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

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