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बिलासपुर रेल हादसा: एक और छात्रा की मौत, अब तक 12 लोगों की जान गई

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेल हादसे में घायल कॉलेज छात्रा महविश परवीन (19) ने एक सप्ताह तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद दम तोड़ दिया। इसके साथ ही इस दर्दनाक हादसे में मृतकों की संख्या 12 पहुंच गई है। हादसे में गंभीर रूप से घायल थी छात्रा महविश बिलासपुर के डीपी विप्र कॉलेज में बीएससी गणित की नियमित छात्रा थी। वह जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा की रहने वाली थी और बिलासपुर में रहकर पढ़ाई करती थी।4 नवंबर को वह रिश्तेदार की शादी में शामिल होकर घर से कोरबा-बिलासपुर मेमू ट्रेन से लौट रही थी। लालखदान स्टेशन के पास यह ट्रेन मालगाड़ी से टकरा गई। महविश ट्रेन के महिला कोच में सवार थी। टक्कर इतनी तेज थी कि उसके दोनों पैर लोहे के एंगल के नीचे दब गए और कई जगह फ्रैक्चर हो गए। झटके के कारण उसकी कॉलर बोन और पसलियों की चार हड्डियां भी टूट गईं। घटना के तुरंत बाद उसे सिम्स लाया गया, जहां से हालत गंभीर होने पर अपोलो अस्पताल रेफर किया गया। एक सप्ताह तक जिंदगी से लड़ती रही, फिर मौत ने छीन ली जिंदगी अपोलो अस्पताल में डॉक्टर लगातार उसका इलाज कर रहे थे, लेकिन उसकी हालत बिगड़ती गई।मंगलवार रात इलाज के दौरान महविश ने अंतिम सांस ली। बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया, जो उसे लेकर अकलतरा रवाना हो गए। दिल की मरीज रह चुकी थी महविश, भाई की शादी में गई थी घर महविश के चाचा मोहम्मद रहमान ने बताया कि बचपन में उसे हृदय संबंधी बीमारी थी और रायपुर के एस्कॉर्ट अस्पताल में उसकी ओपन हार्ट सर्जरी हुई थी। इलाज के बाद वह पूरी तरह स्वस्थ हो चुकी थी।12वीं के बाद उसे बिलासपुर के डीपी विप्र कॉलेज में दाखिला दिलाया गया था।वह अपने चचेरे भाई की शादी के लिए घर गई थी — शादी 2 नवंबर को हुई थी और 4 नवंबर को वह बिलासपुर लौट रही थी, तभी यह हादसा हो गया। मुआवजे के लिए फर्जी दावा करने की कोशिश का खुलासा इस बीच, सोमवार को एक अन्य व्यक्ति पवन गढ़ेवाल को मृत अवस्था में सिम्स लाया गया।साथ आए लोगों ने दावा किया कि वह भी इसी रेल हादसे में घायल था। लेकिन पुलिस जांच में पता चला कि पवन की कोई मेडिकल हिस्ट्री या इलाज का रिकॉर्ड नहीं मिला।सीएसपी गगन कुमार ने बताया कि मुआवजे के लिए उसकी मौत को रेल हादसे से जोड़ने की कोशिश की जा रही थी। रेल हादसे की जांच अब भी जारी है, जबकि मृतकों के परिजनों को मुआवजा और घायलों के इलाज की जिम्मेदारी रेलवे प्रशासन ने ली है। 🔗 अधिक जानकारी और अपडेट के लिए देखें: www.deshharpal.com — सच्ची खबरें, संवेदनशील अंदाज में
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शादी के 9 साल बाद महिला ने की आत्महत्या, मायके वालों का आरोप — “ससुराल वालों ने किया प्रताड़ित

सागर जिले के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के पथरिया जाट गांव में मंगलवार को एक महिला ने अपने ही घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। जब परिजन घर पहुंचे तो महिला का शव फंदे पर झूलता मिला। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची, पंचनामा तैयार कर पोस्टमॉर्टम कराया गया और फिर शव परिजनों को सौंप दिया गया। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मायके वालों का आरोप — ससुराल वालों ने किया अत्याचार घटना की खबर मिलते ही मृतका के मायके पक्ष के लोग पथरिया पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला को लंबे समय से ससुराल पक्ष द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा था।परिजनों ने कंट्रोल रूम पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। 9 साल पहले हुई थी शादी मृतका के पिता ने बताया कि उनकी बेटी की शादी करीब 9 साल पहले हुई थी और उसके दो बच्चे हैं।उन्होंने कहा कि दामाद आए दिन बेटी से मारपीट करता था और बुलेट गाड़ी मायके से लाने की मांग करता था।दहेज और अत्याचार से परेशान होकर बेटी कुछ महीने पहले मायके आ गई थी। पिता ने बताया कि बाद में दामाद के बड़े भाई आए और भरोसा दिलाया कि अब ऐसा कुछ नहीं होगा। इस भरोसे के बाद बेटी को वापस ससुराल भेज दिया गया।लेकिन मंगलवार को पुलिस से सूचना मिली कि बेटी ने फांसी लगाकर जान दे दी है। परिजनों का दावा — “मारपीट कर हत्या की गई” परिजनों ने कहा कि यह आत्महत्या नहीं, हत्या का मामला है।उनका कहना है कि बेटी को मारपीट कर फंदे पर लटकाया गया।ससुराल पक्ष के लोग लगातार उसे प्रताड़ित करते थे। उन्होंने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और कहा है कि सभी पहलुओं पर जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। 🔗 अधिक जानकारी और अपडेट के लिए देखें: www.deshharpal.com— सच्ची खबरें, संवेदनशील अंदाज में
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हॉस्टल से 15 वर्षीय छात्रा की मौत — परिजन कहते हैं — “हादसा नहीं, हत्या”

हत्या जूर गांव के माता शबरी कन्या शिक्षा परिसर में 15 साल की छात्रा पूजा किरेड़े की मौत ने परिवार और इलाके में गहरा सदमा पैदा कर दिया है। परिजनों का आरोप है कि पूजा हॉस्टल की चौथी मंजिल से धक्का देकर गिराई गई थी, जबकि हॉस्टल वार्डन और उसकी बेटी पर पहले से ही प्रताड़ना के आरोप लगे हुए हैं। क्या हुआ: पूजा का एग्जाम था और एक दिन पहले ही उसे हॉस्टल से घर छोड़ा गया था। अगले दिन खबर मिली कि वह हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरी मिली। इलाज के दौरान जब पूजा होश में आई तो उसने परिजनों को बताया — “मुझे किसी ने धक्का दिया है।”आठ दिन इंदौर के इंडेक्स अस्पताल में इलाज के बाद 9 नवंबर को पूजा की मौत हो गई। परिजनों की मांग — हत्या का केस दर्ज किया जाए परिजन कलेक्टर, एसपी और सहायक आयुक्त आदिम जाति कल्याण को ज्ञापन देकर मांग कर चुके हैं कि घटना की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कर हत्या का मामला दर्ज किया जाए।पिता सुंदर सिंह और रिश्तेदारों का कहना है कि पूजा के शरीर पर चोट के भी निशान मिले हैं और वह खुद नहीं मर सकती थी। उनका पूरा संदेह हॉस्टल वार्डन और उसकी बेटी प्राची पर है — जिन्होंने कथित रूप से पूजा को लगातार प्रताड़ित किया था। वार्डन की दलील और जांच वार्डन कोकिला बौरासी का कहना है कि पूजा पर “भूत-प्रेत” का साया था और वह अक्सर बीमार रहती थी। परिजन इस दावे को खारिज करते हैं।कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है।कमेटी का नेतृत्व संयुक्त कलेक्टर निकिता मंडलोई कर रही हैं; उसमें मिट्टी परीक्षण अधिकारी कविता गवली और पिछड़ा वर्ग व अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की इंस्पेक्टर सुनीता मुवेल शामिल हैं।जांच टीम ने हॉस्टल का निरीक्षण किया, स्टाफ व छात्राओं के बयान लिए और परिजनों से भी तफ्तीश की। चौंकाने वाले तथ्य जांच में यह भी पता चला कि वार्डन कोकिला के पास 60% दिव्यांगता का प्रमाण-पत्र है, बावजूद इसके उन्हें वार्डन का पद दिया गया था — जो नियमों के विपरीत बताया जा रहा है।और सबसे बड़ी बात यह कि वार्डन का अधिकांश काम उसकी बेटी प्राची ही संभालती थी, जिसे पीटीआई (स्पोर्ट्स टीचर) के रूप में नियोजित किया गया था।परिजन और छात्राएं बताती हैं कि प्राची अक्सर छात्राओं से मारपीट और मानसिक प्रताड़ना करती थी, और पूजा तथा प्राची के बीच कई बार विवाद हो चुका था। निलंबन और स्थानीय प्रतिक्रिया जनजातीय कार्य आयुक्त ने जांच की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद वार्डन को निलंबित कर इंदौर संभागीय कार्यालय में अटैच कर दिया है।आदिवासी संगठनों ने आरोप लगाया है कि आदिवासी हॉस्टलों में बच्चों के साथ प्रताड़ना की घटनाएं सामान्य हैं और संदिग्ध मौतों को अक्सर हादसा बताकर दबा दिया जाता है।टंट्या मामा आदिवासी संगठन की महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष ममता मोरे ने भी इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। परिजन अब न्याय की उम्मीद में हैं — वे चाहते हैं कि निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो और भविष्य में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपाय किए जाएं। अधिकारिक जांच रिपोर्ट और आगे के कदमों पर हम नजर बनाए रखेंगे। 🔗 अधिक जानकारी और अपडेट के लिए देखें: deshharpal.com— सच्ची खबरें, संवेदनशील अंदाज में
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दिल्ली धमाका: अब जुड़ा कनेक्शन मध्यप्रदेश के महू से, आरोपी डॉक्टर की यूनिवर्सिटी के चेयरमैन पर जांच की नजर

दिल्ली धमाके का एक सिरा अब मध्यप्रदेश के महू से जुड़ता नजर आ रहा है। जांच में खुलासा हुआ है कि धमाके का मुख्य आरोपी डॉ. उमर नबी, जो फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी में पढ़ाता था, उसी यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी मूल रूप से महू का रहने वाला है। बताया जा रहा है कि डॉ. उमर नबी ने अपनी i-20 कार में विस्फोटक रखकर खुद को उड़ा लिया, जबकि उसी यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाले डॉ. मुजम्मिल शकील को विस्फोटक जमा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।इस यूनिवर्सिटी को चलाने वाला अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट भी महू निवासी जवाद अहमद सिद्दीकी ने ही स्थापित किया था। वही ट्रस्ट का अध्यक्ष और यूनिवर्सिटी का कुलाधिपति भी है। यूनिवर्सिटी का बयान: “हर काम कानून के हिसाब से” बुधवार को अल फलाह यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर प्रो. भूपिंदर कौर आनंद ने पहली बार बयान जारी करते हुए कहा— “हमारे दो डॉक्टर (डॉ. मुजम्मिल और शाहीन सईद) हिरासत में हैं। लेकिन यूनिवर्सिटी का उनसे जुड़ी किसी भी अवैध गतिविधि से कोई संबंध नहीं है। यूनिवर्सिटी में न कोई केमिकल और न ही विस्फोटक रखा गया था। हमारी लैब सिर्फ MBBS स्टूडेंट्स की ट्रेनिंग के लिए है और हर काम कानून के हिसाब से किया जाता है।” जवाद का अतीत: इन्वेस्टमेंट कंपनी से लेकर यूनिवर्सिटी तक जांच में पता चला है कि जवाद ने पहले अल फलाह इन्वेस्टमेंट कंपनी के नाम से कारोबार शुरू किया था। उसने लोगों को मुनाफे का लालच देकर निवेश कराया, लेकिन 2001 में आर्थिक गड़बड़ी के बाद वह परिवार समेत दिल्ली भाग गया। इसके बाद फरीदाबाद में कॉलेज शुरू किया, जो आगे चलकर यूनिवर्सिटी बन गया। महू में खाली पड़ा मकान, जांच जारी महू के एडिशनल एसपी रूपेश द्विवेदी ने बताया कि जवाद और उसके परिवार के पुराने रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी गई है।उनके अनुसार, “जवाद करीब 25 साल पहले तक महू के कायस्थ मोहल्ले में रहता था। उसके पिता मोहम्मद हम्माद सिद्दीकी शहर काजी रह चुके हैं। वहीं, उसका सौतेला भाई अफाम हत्या के मामले में जेल जा चुका है।” वर्तमान में जवाद के महू स्थित चार मंजिला मकान पर ताला लगा है। यह मकान उसके पिता के नाम पर है और स्थानीय लोग इसे ‘मौलाना की बिल्डिंग’ के नाम से जानते हैं। आईजी (ग्रामीण) अनुराग सिंह ने कहा— “हमें इस मामले की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली है। संबंधित रिकॉर्ड जुटाकर जांच की जा रही है।” 🔗 Source: Deshharpal News Portal — सच्ची और संवेदनशील खबरों के लिए जुड़ें deshharpal.com
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बिलासपुर में हाईकोर्ट वकील की संदिग्ध मौत: परिजनों और अधिवक्ताओं ने उठाए पुलिस जांच पर सवाल

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हाईकोर्ट के वकील राहुल अग्रवाल की रहस्यमयी मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस इसे आत्महत्या या हादसा बता रही है, लेकिन परिवार और साथी वकील इसे संदिग्ध मान रहे हैं। अब वकीलों ने कलेक्टर और एसएसपी से मिलकर विशेष जांच टीम (Special Investigation Team) बनाने की मांग की है। घटना की रात घर नहीं लौटे राहुल, 22 घंटे बाद नदी में मिला शव जानकारी के अनुसार, 30 वर्षीय वकील राहुल अग्रवाल 10 नवंबर की रात करीब एक बजे अपने साथी वकील के घर से निकले थे, लेकिन घर नहीं पहुंचे। अगले दिन उनकी बाइक पुराने अरपा पुल के पास संदिग्ध हालत में खड़ी मिली। इसके करीब 22 घंटे बाद राहुल की लाश अरपा नदी से बरामद हुई। उनके शरीर पर चोट के निशान पाए गए, जिससे मामला और भी रहस्यमय बन गया। वकीलों ने जताई हत्या की आशंका वकीलों का कहना है कि यह न तो आत्महत्या है और न ही कोई साधारण हादसा। उनके अनुसार, यह किसी “संदेहास्पद या अप्राकृतिक कारण” से हुई मौत है। अधिवक्ताओं ने कहा कि पुलिस की जांच कई सवालों के जवाब नहीं दे पा रही है, जिससे परिवार और कानूनी समुदाय दोनों ही असंतुष्ट हैं। स्पेशल टीम से जांच की मांग अधिवक्ताओं के एक दल ने कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी रजनेश सिंह से मुलाकात कर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि जांच में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और घटनास्थल पर मिले साक्ष्यों का गहराई से विश्लेषण किया जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। घटना से पहले क्या हुआ था राहुल अग्रवाल, जो मूल रूप से भाटापारा के रहने वाले थे, पिछले 7-8 साल से बिलासपुर के मंगला स्थित ग्रीन गार्डन कॉलोनी में रह रहे थे। 6 नवंबर को वे हाईकोर्ट में प्रेक्टिस के लिए गए थे। शाम को नेहरू चौक पर अपने दोस्त मुकेश राठिया से मिले, फिर दोनों सिरगिट्टी स्थित महिंद्रा शोरूम से कार लेकर ट्रांसपोर्ट नगर पहुंचे, जहां उन्होंने पार्टी की। इसके बाद वे मुकेश के मोपका स्थित घर गए, जहां एक और दोस्त अभिषेक आचार्य भी थोड़ी देर के लिए आया। इसके बाद राहुल घर नहीं लौटे, और अगली सुबह उनकी लाश नदी में मिली। 👉 ऐसी और खबरों के लिए विजिट करें: www.deshharpal.com
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गुना पुलिस की बड़ी सफलता: महीनों से लापता दो नाबालिग लड़कियां गुजरात और राजस्थान से बरामद

गुना की कैंट पुलिस ने शानदार काम करते हुए महीनों से लापता दो नाबालिग लड़कियों को सकुशल खोज निकाला है। एक लड़की को गुजरात के पोरबंदर से और दूसरी को राजस्थान के कोटा से बरामद किया गया। कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद दोनों को उनके परिवारों के हवाले कर दिया गया है। फरवरी और जून से थीं लापता पहली 16 वर्षीय किशोरी 23 फरवरी को बिना बताए घर से चली गई थी, जबकि दूसरी 15 साल की लड़की 19 जून से लापता थी। दोनों के परिवारों ने कैंट थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसके बाद पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई थी। ऑपरेशन मुस्कान के तहत मिली सफलता प्रदेशभर में 1 से 30 नवंबर तक “विशेष ऑपरेशन मुस्कान” चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत SP अंकित सोनी ने सभी थाना प्रभारियों को लापता बच्चों की खोज तेज करने के निर्देश दिए थे। ASP मानसिंह ठाकुर और CSP प्रियंका मिश्रा के निर्देशन में कैंट थाना प्रभारी निरीक्षक अनूप कुमार भार्गव और उनकी टीम ने तकनीकी साधनों और मुखबिरों की मदद से दोनों लड़कियों का लोकेशन ट्रेस किया। दो राज्यों में भेजी गईं पुलिस टीमें जांच में पता चला कि एक लड़की गुजरात के पोरबंदर में है जबकि दूसरी राजस्थान के कोटा में। इसके बाद पुलिस की दो टीमें तुरंत दोनों राज्यों के लिए रवाना हुईं और सफलतापूर्वक दोनों नाबालिगों को सुरक्षित गुना लेकर आईं। बाल कल्याण समिति ने किया सुपुर्द गुना पहुंचने के बाद दोनों लड़कियों को बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया। समिति अध्यक्ष नीरू शर्मा ने आवश्यक कार्रवाई पूरी कर उन्हें उनके परिवारों को सौंप दिया। पुलिस टीम की सराहना इस पूरी कार्रवाई में TI अनूप कुमार भार्गव, उप निरीक्षक ज्योति राजपूत, SI अरुंधति राजावत, प्रधान आरक्षक मनोज कलावत, आरक्षक माखन चौधरी, सचिन शर्मा, सूर्यभान जाट, महिला आरक्षक प्रीति राठौड़, रक्षा रघुवंशी, धनकुवर जाटव और साइबर सेल के आरक्षक कुलदीप यादव व भूपेंद्र खटीक की अहम भूमिका रही। 👉 ऐसी और खबरों के लिए विजिट करें: www.deshharpal.com
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ग्वालियर में दोस्त ने ही की दोस्त की पत्थर से हत्या, रेलवे स्टेशन पर मिला शव

ग्वालियर में रविवार की रात एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई। यहां एक युवक की उसके ही जिगरी दोस्त ने सिर पर पत्थर पटककर हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी को शहर छोड़ने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया है। रेलवे स्टेशन पर पड़ा मिला खून से लथपथ शव यह घटना ग्वालियर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 4 के सर्कुलेटिंग एरिया की है। यहां 28 वर्षीय शिवम यादव, निवासी नूरगंज, का शव खून से लथपथ हालत में मिला। उसके सिर पर गहरे घाव थे और पास ही खून से सना पत्थर पड़ा था। शिवम घरों में रंगाई-पुताई का काम करता था। CCTV में दिखा आखिरी वक्त का सच पुलिस को मौके से CCTV फुटेज मिला जिसमें शिवम और उसका दोस्त आकाश जाटव शराब खरीदते नजर आ रहे हैं। फुटेज में दोनों कुछ देर बात करते हैं और फिर सड़क की ओर जाते हैं। इसके बाद आकाश ने पत्थर उठाकर शिवम के सिर पर वार कर दिया। कहासुनी के बाद हत्या की कबूलियत सोमवार रात पुलिस ने आरोपी आकाश को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने बताया कि शिवम शराब पीने के बाद उसे जबरदस्ती घूमने के लिए दबाव डाल रहा था। इसी बात पर गुस्से में आकर उसने पत्थर से हमला कर दिया। पुलिस की सख्त जांच जारी आसपास के लोगों ने बताया कि दोनों काफी देर से झगड़ रहे थे। पुलिस को शक है कि आरोपी की कहानी पूरी सच्चाई नहीं है। जीआरपी थाना नैरोगेज प्रभारी दीप शिखा ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और हत्या के असली कारणों की गहराई से जांच जारी है। 👉 ऐसी और खबरों के लिए विजिट करें: deshharpal.com
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कोरबा: ईसाई पत्नी का जैन पति पर धर्म बदलने का दबाव डालने का आरोप, हाईकोर्ट ने 12 हजार रुपए भरण-पोषण का आदेश बरकरार रखा

कोरबा जिले से एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां प्रेम विवाह करने के बाद ईसाई धर्म की महिला ने अपने जैन पति पर धर्म परिवर्तन का दबाव डालने का आरोप लगाया है। पत्नी का कहना है कि शादी के बाद पति उसे अपने साथ नहीं ले गया और ससुराल वालों ने भी उस पर जैन धर्म अपनाने के लिए दबाव डाला। पत्नी के इनकार के बाद वह मजबूरी में अपने मायके में ही रहने लगी। इसके बाद उसने फैमिली कोर्ट में भरण-पोषण की याचिका दायर की। कोर्ट को बताया गया कि उसे कमर और सीने में गंभीर दर्द रहता है, जिसका इलाज कराने में हर माह 20 से 25 हजार रुपए खर्च होते हैं। वहीं पति एक इंजीनियर है और उसकी मासिक सैलरी करीब 85,940 रुपए है। पत्नी ने कोर्ट से हर माह 45 हजार रुपए भरण-पोषण की मांग की थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैमिली कोर्ट ने पति को हर महीने 12 हजार रुपए गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया। इस आदेश के खिलाफ पति ने हाईकोर्ट में अपील दायर की, जिसमें उसने कहा कि पत्नी शिक्षित है और खुद का खर्च उठा सकती है। लेकिन हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का आदेश सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि पत्नी के पास आय का कोई स्रोत नहीं है, जबकि पति की आमदनी पर्याप्त है। ऐसे में पत्नी को आर्थिक सहायता देना जरूरी है। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद पत्नी को हर महीने 12 हजार रुपए भरण-पोषण मिल सकेगा। 👉 ऐसी ही और खबरों के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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खंडवा में आदिवासी विधवा से अन्याय: शादी का झांसा देकर किया रेप, शिकायत पर भी नहीं हुई कार्रवाई — ज़हर खाकर दी जान देने की कोशिश

खंडवा। मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में एक दर्दनाक घटना सामने आई है। यहां एक 28 वर्षीय आदिवासी विधवा महिला ने रविवार को ज़हर खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की। महिला को गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां वह जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही है। महिला ने आरोप लगाया है कि एक खेत मालिक ने उससे शादी का झांसा देकर रेप किया, और जब उसने न्याय के लिए पुलिस व अधिकारियों से शिकायत की, तो उसकी एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई। इसी अन्याय से दुखी होकर उसने यह कदम उठाया। ससुराल ने निकाला, मायके में रह रही थी महिला पीड़िता ने बताया कि वह विधवा है और उसकी चार बेटियां हैं। बेटा न होने के कारण ससुराल वालों ने उसे झिरन्या क्षेत्र से निकाल दिया था। अब उसकी बेटियां सास-ससुर के पास हैं और वह खुद मायके में रह रही थी। खेत मालिक ने शादी का झांसा देकर किया रेप महिला के मुताबिक, जुलाई में वह जामला गांव के एक खेत में मजदूरी करने गई थी, जहां खेत मालिक सुखलाल भिलाला ने शादी का वादा कर उसके साथ दुष्कर्म किया। 15 दिन तक साथ रखा, फिर पंचायत में हुआ पैसों का सौदा सुखलाल उसे भगाकर ले गया और करीब 15 दिन तक अपने साथ रखा। जब परिजनों को पता चला, तो पंचायत बुलाई गई। वहां तय हुआ कि शादी के बदले सुखलाल 80 हजार रुपए देगा। उसने पहले 25 हजार दिए, लेकिन बाद में कहा कि “वह विधवा है, कबाड़ हो गई है।” तीन महीने तक साथ रखकर फिर भगा दिया महिला का आरोप है कि सुखलाल ने तीन महीने तक उसे पत्नी की तरह रखा और फिर यह कहकर निकाल दिया कि उसने कोई शादी नहीं की। पुलिस और प्रशासन ने नहीं की कार्रवाई पीड़िता ने 24 अक्टूबर को पंधाना थाने में शिकायत की, लेकिन सिर्फ आवेदन लेकर लौटा दिया गया। 4 नवंबर को उसने जनसुनवाई में कलेक्टर और एसपी से भी मुलाकात की, पर कार्रवाई नहीं हुई। न्याय न मिलने पर उठाया आत्मघाती कदम न्याय न मिलने से निराश महिला ने रविवार को ज़हर खा लिया। भाई ने समय रहते देखा और उसे अस्पताल पहुंचाया। फिलहाल उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है। पुलिस बोली—मामले की जानकारी नहीं थी टीआई दिलीप देवड़ा ने कहा कि उन्हें इस आवेदन की जानकारी नहीं थी, अब कार्रवाई की जाएगी। वहीं डीएसपी अनिल सिंह चौहान ने कहा कि अगर पुलिस ने लापरवाही की है तो जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी। 👉 ऐसे और सच्चे समाचार पढ़ें: www.deshharpal.com
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कटनी f ग्रामीणों की जिद पर जीता न्याय: कलेक्टर ने ठेकेदार को दी सड़क की लीज, हाईकोर्ट ने लगाई फटकार

कटनी जिले की बरही तहसील के तीन गांवों — करौंदी खुर्द, कन्नौर और बिचपुरा — के लोगों के लिए राहत भरी खबर आई है। ग्रामीणों की आवाजाही रोकने वाले मामले में अब हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। दरअसल, इन गांवों को जोड़ने वाली एकमात्र सड़क को कटनी कलेक्टर ने एक ठेकेदार तिलकराज ग्रोवर को लीज पर दे दी थी। ठेकेदार ने उस रास्ते पर गिट्टी डंप करना शुरू कर दिया, जिससे ग्रामीणों का आना-जाना पूरी तरह से बंद हो गया। कलेक्टर से कई बार गुहार लगाने के बाद भी जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीणों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। ⚖️ कोर्ट ने जताई नाराजगी मामला हाईकोर्ट पहुंचने के बाद चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने सुनवाई की। कोर्ट ने पहले प्रशासन को सड़क खोलने के आदेश दिए, लेकिन आदेश के बावजूद रास्ता नहीं खोला गया। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार, कटनी कलेक्टर और ठेकेदार तिलकराज ग्रोवर को नोटिस जारी किया और 10 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर जवाब देने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा — “अगर कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं हुआ है, तो यह गंभीर अवमानना का मामला है।” 🛣️ ग्रामीणों का एकमात्र रास्ता यह सड़क वर्षों से ग्रामीणों के लिए जीवन रेखा रही है। लोग इसी रास्ते से तहसील और शहर तक आते-जाते थे।लेकिन 1 जुलाई 2025 को कलेक्टर ने खनिज विभाग की रिपोर्ट पर ग्राम कन्नौर स्थित खसरा नंबर 861 की करीब 65 हेक्टेयर भूमि को ठेकेदार को लीज पर दे दी। महज 300 रुपये वार्षिक किराये में यह जमीन खनन डंपिंग साइट के रूप में दे दी गई। जबकि राजस्व रिकॉर्ड में यह भूमि “सार्वजनिक सड़क” के रूप में दर्ज है। 🧾 ग्रामीणों की याचिका बनी आधार कटनी निवासी संदीप जायसवाल ने 16 सितंबर को हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की।27 सितंबर और 13 अक्टूबर की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रशासन को सड़क खोलने का आदेश दिया था।लेकिन जब आदेश का पालन नहीं हुआ, तो 4 नवंबर को अवमानना याचिका दायर की गई। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अर्पण जे. पवार, अक्षत अरजरिया और चिरंजीवी शर्मा ने दलील दी कि प्रशासन ने “राजनीतिक दबाव” में आकर यह निर्णय लिया। ⚠️ कोर्ट की सख्त चेतावनी कोर्ट ने कहा कि जनता की सुविधा के लिए बनी सड़क को किसी निजी व्यक्ति या कंपनी के हित में नहीं दिया जा सकता।यदि अधिकारियों का जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो कोर्ट कड़ी कार्रवाई करेगी।फिलहाल, अदालत ने सड़क पर डंपिंग पर पूरी तरह रोक लगा दी है, जिससे ग्रामीणों को अस्थायी राहत मिली है। 📍 ग्रामीणों की एकजुटता और न्याय के प्रति भरोसे ने एक बार फिर दिखा दिया कि जनता की आवाज दबाई नहीं जा सकती। 👉 ऐसी और जनहित से जुड़ी खबरों के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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किरेन रिजिजू का आरोप- भारत में भी हिंसा भड़काने की रची गई थी साजिश, बोले- सत्ता परिवर्तन सिर्फ चुनाव से होगा

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने आरोप लगाया है कि फ्रांस और बांग्लादेश में हुई हिंसक घटनाओं जैसी साजिश भारत में भी रची गई थी। उन्होंने दावा किया कि कुछ नेताओं ने युवाओं को भड़काकर सड़कों पर हिंसा फैलाने की कोशिश की। रिजिजू ने कहा कि ऐसी साजिश रचने वाले यह भूल गए कि भारत न तो बांग्लादेश है और न ही फ्रांस। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत में सत्ता परिवर्तन लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव के जरिए ही हो सकता है, किसी बाहरी ताकत के माध्यम से नहीं। राहुल गांधी और नेहा बोरा का वीडियो किया शेयर किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करने के साथ एक वीडियो भी साझा किया। इस वीडियो में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और नेहा बोरा को दिखाया गया है। दरअसल, 14 अक्टूबर को नेहा बोरा का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वह बांग्लादेश में हुए हिंसक प्रदर्शनों के समर्थन में बोलती दिखाई दी थीं। रिजिजू ने इसी संदर्भ में वीडियो साझा करते हुए भारत में हिंसा भड़काने की कथित कोशिशों का आरोप लगाया। बोले- सत्ता परिवर्तन चुनाव से, सोरोस के जरिए नहीं रिजिजू ने अपने बयान में कहा कि भारत में सरकार बदलने का अधिकार जनता के पास है और यह प्रक्रिया चुनावों के माध्यम से पूरी होती है। उन्होंने कहा, “भारत में सत्ता परिवर्तन बिल्कुल हो सकता है, लेकिन केवल चुनावों के जरिए, सोरोस के जरिए नहीं।” केंद्रीय मंत्री के बयान में विदेशी प्रभाव और देश में कथित तौर पर युवाओं को भड़काने की कोशिशों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, भारत में ऐसी किसी साजिश के आरोपों के समर्थन में इस बयान के साथ कोई स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है।

ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास भीषण हादसा, ट्रक ने श्रद्धालुओं को कुचला; 15 की मौत, 26 घायल

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शनिवार देर रात शीतला माता मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं पर तेज रफ्तार ट्रक चढ़ गया। हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि दो पुलिसकर्मियों समेत 26 लोग घायल हुए हैं। दुर्घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घायलों को इलाज के लिए जयारोग्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ढलान पर बेकाबू हुआ धान से भरा ट्रक हादसा देर रात करीब 1:30 बजे चीनौर रोड पर ढलान के पास हुआ। श्रद्धालु मंदिर में दर्शन करने के लिए सड़क किनारे कतार में खड़े थे। इसी दौरान चीनौर की ओर से आ रहा धान से भरा ट्रक ढलान पर बेकाबू हो गया। बताया गया कि ट्रक करीब 90 डिग्री के तीखे ढलान से नीचे उतर रहा था। इस दौरान वह पुलिस चेकपोस्ट को तोड़ते हुए श्रद्धालुओं को कुचलता चला गया। इसके बाद ट्रक मंदिर की बाहरी दीवार और गेट से टकरा गया, जिससे दीवार ढह गई। हादसे में कई लोग मलबे में दब गए। ड्राइवर ने बताया- ब्रेक फेल हो गए थे प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, ट्रक चालक गूगल मैप की मदद से रास्ते पर आगे बढ़ रहा था। हादसे के बाद चालक ने पुलिस को बताया कि ट्रक के ब्रेक फेल हो गए थे। हालांकि, दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। परिजनों ने पुलिस पर लगाया लापरवाही का आरोप हादसे के बाद मृतकों के परिजनों और स्थानीय लोगों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। घटना में दो पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। पुलिस ने मामले में ट्रक चालक और ट्रक मालिक को गिरफ्तार कर लिया है। हादसे के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई की गई है। सिटी एसपी हटाए गए, 8 अफसर-पुलिसकर्मी सस्पेंड हादसे के बाद सरकार ने ग्वालियर के सिटी एसपी को हटा दिया है। इसके अलावा आठ अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है। निलंबित किए गए लोगों में चार थाना प्रभारी (टीआई) भी शामिल हैं। फिलहाल हादसे की जांच जारी है। दुर्घटना में जान गंवाने वाले श्रद्धालुओं के परिवारों में शोक का माहौल है, जबकि घायल अस्पताल में उपचार करा रहे हैं।
Breast Cancer Alert: 30 और 35 साल की महिलाओं ने गांठ को समझा सामान्य, इलाज के बाद मां बनने की उम्मीद

Breast Cancer Alert: 30 और 35 साल की महिलाओं ने गांठ को समझा सामान्य, इलाज के बाद मां बनने की उम्मीद

कम उम्र में ब्रेस्ट कैंसर का पता चलना कई महिलाओं के लिए बड़ा झटका हो सकता है। 30 और 35 साल की महिलाओं से जुड़ी इन घटनाओं में गांठ को सामान्य समझने की बात सामने आई है। हालांकि, इन दोनों महिलाओं की व्यक्तिगत मेडिकल जानकारी उपलब्ध नहीं है, इसलिए उनके इलाज और आगे की स्थिति के बारे में पक्के दावे करना सही नहीं होगा। डॉक्टरों के मुताबिक, स्तन में होने वाली हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन किसी भी नई गांठ या असामान्य बदलाव की जांच कराना जरूरी है। खासकर तब, जब गांठ बनी रहे या स्तन की त्वचा, आकार अथवा निप्पल में बदलाव दिखाई दे। Alcohol और Smoking से कैसे बढ़ सकता है खतरा? शराब का सेवन ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकता है। शोध में यह भी संकेत मिले हैं कि धूम्रपान कई प्रकार के कैंसर का कारण बनता है और ब्रेस्ट कैंसर के साथ इसके संबंध पर भी अध्ययन जारी हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति को कैंसर होने के पीछे केवल एक ही कारण हो, यह जरूरी नहीं है। उम्र, पारिवारिक इतिहास, आनुवंशिक बदलाव और दूसरे स्वास्थ्य संबंधी कारक भी भूमिका निभाते हैं। <Cite refs={[“turn391271search0″,”turn391271search1″,”turn687346search1”]}/> क्या ब्रेस्ट कैंसर के इलाज के बाद मां बन सकती हैं महिलाएं? ब्रेस्ट कैंसर का इलाज कराने के बाद भी कुछ महिलाओं के लिए गर्भधारण करना संभव होता है। हालांकि, यह कैंसर के प्रकार, उसकी अवस्था और इलाज में इस्तेमाल की गई दवाओं पर निर्भर करता है। कीमोथेरेपी और कुछ हार्मोनल उपचार प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए जिन महिलाओं को भविष्य में मां बनना है, उन्हें इलाज शुरू करने से पहले अपने कैंसर विशेषज्ञ और फर्टिलिटी विशेषज्ञ से विकल्पों पर चर्चा करनी चाहिए। जरूरत के अनुसार एग फ्रीजिंग या एम्ब्रियो फ्रीजिंग जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। <Cite refs={[“turn391271search2″,”turn687346search2”]}/> ब्रेस्ट कैंसर के लक्षणों को न करें नजरअंदाज स्तन में नई गांठ, बगल में सूजन, त्वचा में बदलाव, निप्पल का अंदर की ओर खिंचना या असामान्य स्राव जैसे लक्षण दिखने पर डॉक्टर से जांच कराएं। इन लक्षणों का मतलब हमेशा कैंसर नहीं होता, लेकिन जांच में देरी नहीं करनी चाहिए।
भोपाल में 12 साल की बच्ची की हत्या से आक्रोश:पिता बोले- बेटी को बचा नहीं सके, आरोपी को हमारे हवाले कर दो

भोपाल में 12 साल की बच्ची की हत्या से आक्रोश:पिता बोले- बेटी को बचा नहीं सके, आरोपी को हमारे हवाले कर दो

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बैरागढ़ इलाके में 12 साल की बच्ची की हत्या के बाद लोगों में भारी आक्रोश है। बेटी को खोने के गम में परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, स्थानीय लोगों ने पुलिस थाने के बाहर प्रदर्शन कर आरोपी को कड़ी सजा देने की मांग की। बच्ची के पिता का दर्द उनके शब्दों में साफ झलक रहा है। उन्होंने कहा कि वे अपनी बेटी को बचा नहीं सके। अब परिवार आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई चाहता है। खंडहर में मिला बच्ची का शव यह घटना भोपाल के बैरागढ़ इलाके की है। 15 अक्टूबर की रात बच्ची घर से निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। परिवार ने उसकी तलाश की और पुलिस को सूचना दी। 16 अक्टूबर की सुबह कृष्णा कॉम्प्लेक्स के पीछे एक पुराने खंडहरनुमा भवन में बच्ची का शव मिला। घटना की जानकारी सामने आने के बाद इलाके में शोक और गुस्से का माहौल बन गया। पुलिस ने घटनास्थल की जांच की और मामले से जुड़े साक्ष्य जुटाए। जांच के आधार पर एक 23 वर्षीय संदिग्ध को हिरासत में लिया गया, जिसके बाद आरोपी की गिरफ्तारी की खबर भी सामने आई। थाने के बाहर प्रदर्शन, आरोपी को सौंपने की मांग बच्ची की मौत की खबर फैलने के बाद परिजन और स्थानीय लोग बैरागढ़ थाने के बाहर जुट गए। लोगों ने आरोपी को उनके हवाले करने या उसे कड़ी सजा देने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने थाने में घुसने की कोशिश भी की। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने अतिरिक्त बल तैनात किया। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। परिवार और स्थानीय लोगों की मांग है कि मामले की गंभीरता से जांच हो और दोषी को कानून के तहत सख्त सजा मिले। पुलिस जांच में जुटी, कार्रवाई पर सबकी नजर पुलिस मामले की जांच कर रही है। घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों और अन्य जानकारियों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। बच्ची की मौत से जुड़े सभी पहलुओं की पुष्टि जांच और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर होना जरूरी है। इस घटना ने एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिवार के लिए यह अपूरणीय क्षति है। अब उनकी उम्मीद है कि जांच जल्द पूरी हो और उन्हें न्याय मिले। नोट: आरोपी के खिलाफ आरोपों और जांच के निष्कर्षों को अदालत के अंतिम फैसले से पहले सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।
Imran Khan News: भारत छोड़ने के नोटिस के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे एक्टर, OCI Card रद्द करने पर मांगा गया जवाब

Imran Khan News: भारत छोड़ने के नोटिस के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे एक्टर, OCI Card रद्द करने पर मांगा गया जवाब

नई दिल्ली: अभिनेता Imran Khan ने भारत छोड़ने के नोटिस को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया है। उन्होंने इस नोटिस को गैरकानूनी बताया है। यह मामला उनके Overseas Citizen of India (OCI) कार्ड को रद्द करने की प्रक्रिया से भी जुड़ा है। अधिकारियों की ओर से इस संबंध में अभिनेता से जवाब मांगा गया है। क्या है पूरा मामला? इमरान खान को भारत छोड़ने से संबंधित नोटिस जारी किया गया है। अभिनेता ने इस नोटिस पर आपत्ति जताते हुए इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उनका कहना है कि यह नोटिस गैरकानूनी है। इस मामले में उनके OCI कार्ड को रद्द करने को लेकर भी सवाल उठे हैं। संबंधित अधिकारियों ने इस संबंध में उनसे जवाब मांगा है। अब इस मामले में हाईकोर्ट की सुनवाई और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी। क्या होता है OCI Card? OCI यानी Overseas Citizen of India कार्ड भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों को भारत में रहने और कई सुविधाओं का लाभ लेने के लिए दिया जाता है। हालांकि, यह भारतीय नागरिकता नहीं है। कुछ कानूनी परिस्थितियों में OCI कार्ड रद्द भी किया जा सकता है। आगे क्या होगा? इमरान खान की याचिका पर हाईकोर्ट में होने वाली कार्यवाही से इस मामले की आगे की दिशा स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल, अभिनेता ने नोटिस को चुनौती दी है और OCI कार्ड रद्द करने से जुड़े मामले में जवाब मांगे जाने का मुद्दा भी सामने है। इस मामले में अदालत का रुख और संबंधित अधिकारियों की अगली कार्रवाई अहम होगी।

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