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Vrindavan के बांके बिहारी मंदिर में परंपरा टूटी, हलवाई का वेतन न मिलने से ठाकुर जी का भोग नहीं बन पाया

Vrindavan के बांके बिहारी मंदिर में परंपरा टूटी, हलवाई का वेतन न मिलने से ठाकुर जी का भोग नहीं बन पाया

Vrindavan के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर से जुड़ी एक भावनात्मक खबर सामने आई है। मंदिर में वर्षों से चली आ रही परंपरा पहली बार टूटी है। जानकारी के अनुसार, मंदिर के हलवाई का वेतन समय पर नहीं मिल पाने के कारण ठाकुर जी का नियमित भोग नहीं बन सका। बांके बिहारी मंदिर में भोग केवल एक रस्म नहीं, बल्कि भक्तों की आस्था से जुड़ा विषय है। रोज़ाना प्रेम और श्रद्धा के साथ तैयार किया जाने वाला भोग ठाकुर जी को अर्पित किया जाता है। लेकिन इस बार आर्थिक कारणों से यह परंपरा निभाई नहीं जा सकी, जिससे भक्तों में भी चिंता और दुख का माहौल देखा गया। मंदिर से जुड़े सेवायतों का कहना है कि हलवाई का वेतन लंबे समय से रुका हुआ है। इसी वजह से भोग बनाने की व्यवस्था प्रभावित हुई। यह घटना न सिर्फ व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी बताती है कि छोटी सी लापरवाही कैसे आस्था से जुड़ी परंपराओं को तोड़ सकती है। भक्तों को उम्मीद है कि मंदिर प्रशासन जल्द ही इस समस्या का समाधान करेगा और ठाकुर जी की सेवा में कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Mathura Yamuna Expressway पर भीषण हादसा: कोहरे में 8 बसें और 3 कारें टकराईं

Mathura Yamuna Expressway पर भीषण हादसा: कोहरे में 8 बसें और 3 कारें टकराईं

घने कोहरे के कारण Mathura Yamuna Expressway पर 8 बसें और 3 कारें आपस में टकरा गईं। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कई वाहनों में आग लग गई और 13 लोगों की मौके पर ही जलकर मौत हो गई। हादसे के बाद एक्सप्रेस-वे पर चीख-पुकार मच गई। जले हुए शवों की हालत इतनी खराब थी कि उन्हें 17 पॉलिथीन में भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजना पड़ा। इस दर्दनाक दुर्घटना में करीब 70 लोग घायल हुए हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस की टीमें मौके पर पहुंचीं। आग पर काबू पाने और घायलों को बाहर निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। घायलों को मथुरा और आगरा के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कोहरा इतना घना था कि आगे कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। एक वाहन के अचानक ब्रेक लगाने से पीछे से आ रहे वाहन आपस में भिड़ते चले गए और हादसा बड़ा रूप ले गया। प्रशासन ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं और मृतकों के परिजनों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। यह हादसा एक बार फिर कोहरे में तेज रफ्तार और लापरवाही से गाड़ी चलाने के खतरे की याद दिलाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IPL Auction 2025: ऑस्ट्रेलिया के कैमरन ग्रीन बने सबसे महंगे विदेशी खिलाड़ी, KKR ने 25.20 करोड़ में खरीदा

IPL Auction 2025: ऑस्ट्रेलिया के कैमरन ग्रीन बने सबसे महंगे विदेशी खिलाड़ी, KKR ने 25.20 करोड़ में खरीदा

IPL Auction 2025 में ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर कैमरन ग्रीन ने इतिहास रच दिया है। कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) ने उन्हें 25.20 करोड़ रुपये में खरीदकर IPL इतिहास का सबसे महंगा विदेशी खिलाड़ी बना दिया। हालांकि ऑक्शन में लगी भारी बोली के बावजूद कैमरन ग्रीन को इस सीजन में पूरी रकम नहीं मिलेगी। आईपीएल के नियमों के अनुसार उन्हें इस सीजन के लिए करीब 18 करोड़ रुपये ही सैलरी के रूप में मिलेंगे। बाकी रकम कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों और सीजन की अवधि पर निर्भर करेगी। ऑक्शन के दौरान ग्रीन के लिए कई फ्रेंचाइजियों के बीच जबरदस्त मुकाबला देखने को मिला। उनकी ऑलराउंड क्षमता, तेज गेंदबाजी और विस्फोटक बल्लेबाजी ने टीमों को आकर्षित किया। आखिरकार KKR ने सबसे ऊंची बोली लगाकर उन्हें अपनी टीम में शामिल कर लिया। KKR मैनेजमेंट का मानना है कि कैमरन ग्रीन टीम के मिडिल ऑर्डर और गेंदबाजी दोनों को मजबूती देंगे। फैंस को उम्मीद है कि ग्रीन आने वाले IPL सीजन में KKR के लिए मैच विनर साबित होंगे। IPL ऑक्शन में हर साल नए रिकॉर्ड बनते हैं, लेकिन इस बार कैमरन ग्रीन की बोली ने सभी को चौंका दिया है। अब सबकी नजरें इस बात पर होंगी कि वह मैदान पर इस कीमत को कितना सही साबित कर पाते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरे Dr Ram Vilas Vedanti का निधन

राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरे Dr Ram Vilas Vedanti का निधन

राम मंदिर आंदोलन से जुड़े वरिष्ठ संत और विचारक Dr Ram Vilas Vedanti  का निधन हो गया। उनके निधन से राम मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों और समर्थकों में शोक की लहर है। डॉ. वेदांती लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। बताया गया कि जब उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ी, तब उन्हें बेहतर इलाज के लिए एयर एंबुलेंस से रीवा लाने की तैयारी की गई। एयर एंबुलेंस रीवा तक तो पहुंच गई, लेकिन घने कोहरे के कारण लैंड नहीं कर पाई। इस वजह से समय पर इलाज संभव नहीं हो सका और उनका निधन हो गया। डॉ. रामविलास वेदांती राम मंदिर आंदोलन के दौरान एक मुखर और समर्पित संत के रूप में जाने जाते थे। उन्होंने जीवनभर राम मंदिर के पक्ष में आवाज बुलंद की और समाज में धार्मिक चेतना जगाने का कार्य किया। उनके निधन को राम मंदिर आंदोलन के एक युग का अंत माना जा रहा है। उनके समर्थक और अनुयायी उन्हें एक सरल, स्पष्ट वक्ता और रामभक्त संत के रूप में याद कर रहे हैं। देशभर से संत समाज और राजनीतिक-सामाजिक संगठनों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मोदी सरकार MGNREGA को खत्म करने की तैयारी में? ‘विकसित भारत–जी राम जी’ बिल को लेकर सियासी हलचल तेज

मोदी सरकार MGNREGA को खत्म करने की तैयारी में? ‘विकसित भारत–जी राम जी’ बिल को लेकर सियासी हलचल तेज

केंद्र की मोदी सरकार एक बार फिर मनरेगा (MGNREGA) को लेकर विपक्ष के निशाने पर है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार मनरेगा को धीरे-धीरे खत्म करने की तैयारी कर रही है। संसद में ‘विकसित भारत–जी राम जी’ नाम से एक नया बिल लाए जाने की चर्चा के बाद यह बहस और तेज हो गई है। विपक्षी सांसदों का कहना है कि इस बिल की कॉपी संसद में सांसदों को बांटी गई है, जिससे यह संकेत मिलते हैं कि सरकार मनरेगा की जगह कोई नई योजना लाने की सोच रही है। विपक्ष का दावा है कि अगर ऐसा हुआ तो इसका सीधा असर ग्रामीण गरीबों, मजदूरों और जरूरतमंद परिवारों पर पड़ेगा। मनरेगा की शुरुआत साल 2005 में हुई थी। इस योजना का मकसद गांवों में रहने वाले लोगों को साल में कम से कम 100 दिन का रोजगार देना था। करोड़ों परिवारों के लिए यह योजना मुश्किल समय में सहारा बनी है। खेतों में काम न मिलने पर मनरेगा मजदूरी कई परिवारों के लिए रोजी-रोटी का जरिया रही है। हालांकि सरकार की ओर से अब तक मनरेगा खत्म करने को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। सरकार पहले भी कह चुकी है कि वह योजनाओं को ज्यादा प्रभावी और परिणामकारी बनाने पर काम कर रही है। वहीं विपक्ष इसे गरीब विरोधी कदम बता रहा है। अब देखना यह होगा कि सरकार मनरेगा को लेकर क्या फैसला लेती है और ‘विकसित भारत–जी राम जी’ बिल का असली मकसद क्या है। फिलहाल यह मुद्दा संसद से लेकर सियासत तक चर्चा का केंद्र बना हुआ है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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7वें दिन भी 250+ flight रद्द, IndiGo पर लोगों की परेशानी

7वें दिन भी 250+ flight रद्द, IndiGo पर लोगों की परेशानी

IndiGo का संकट सातवें दिन भी थमा नहीं — आज देशभर में 250 से भी ज़्यादा उड़ानें रद्द कर दी गईं। लाखों यात्री अपने गंतव्य के लिए फंसे हुए हैं, सामान और रिफंड की स्थिति अभी तक अनिश्चित। Supreme Court of India ने सुनवाई से किया इनकार यात्रियों ने रद्द उड़ानों और देरी से हुए नुकसान के लिए चाही थी तुरंत न्याय — लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हम एयरलाइन नहीं चलाते, इसलिए सुनवाई नहीं करेंगे।” यह कहकर अदालत ने मामले को अस्वीकृत कर दिया, जिससे यात्रियों की उम्मीदें टूट गईं। यात्री परेशान — लंबा इंतजार, रिफंड का इंतज़ार, और भविष्य अनिश्चित इस संकट ने न सिर्फ यात्रियों को प्रभावित किया है, बल्कि उन परिवारों को भी परेशानी में डाला है, जो अचानक मिले या लौटने वाले थे। समस्या की जड़ — सिर्फ रद्द उड़ान नहीं, प्रणाली में खामियां विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या केवल एक-दो दिन की नहीं है। इंडिगो में पायलट और क्रू की कमी, नई ड्यूटी नियमों का जल्दबाजी में लागू होना, और शेड्यूलिंग में घबराहट — इन सब कारणों ने मिलकर आज का संकट खड़ा किया है। कई यात्रियों ने बताया कि देरी-रद्दीकरण और खराब व्यवस्था ने उनकी ज़िंदगियाँ प्रभावित कर दी हैं — ऐसा लग रहा है कि कोई भविष्य का भरोसा नहीं है। अब आगे क्या? — जवाबदेही, सुधार और यात्रियों की आवाज़ हमें उम्मीद है कि इंडिगो-संकट जितनी भी बड़ी हो — लेकिन न्याय, पारदर्शिता और सुधार की ज़रूरत पहले से कहीं ज़्यादा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gaurav Khanna बने Bigg Boss 19 के विजेता — 50 लाख रुपये का इनाम मिला

Gaurav Khanna बने Bigg Boss 19 के विजेता — 50 लाख रुपये का इनाम मिला

भारत के सबसे चर्चित रियलिटी-शो “Bigg Boss 19” का ग्रैंड फिनाले 7 दिसंबर 2025 को हुआ, और इस बार का खिताब Gaurav Khanna के नाम हुआ। उन्होंने ट्रॉफी के साथ ₹50 लाख नकद प्राइज और एक कार भी जीती। श्रम, संयम और सम्मान की जीत जीत का जज़्बा — जीत सिर्फ खिताब नहीं, भरोसा और प्यार का सम्मान भी फिनाले में भावुक हुए सलमान खान — याद आया धर्मेंद्र हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Barbi

West Bengal में Babri की नींव रखने की तैयारी 3 हजार सुरक्षाबल तैनात

मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में 6 दिसंबर 2025 को बाबरी मस्जिद (Babri Masjid) की तरह नई मस्जिद के foundation stone रखने का कार्यक्रम सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया। इस कार्यक्रम के मुख्य आयोजक हुमायूं कबीर हैं, जिन्हें हाल ही में तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निलंबित किया गया था। क्यों बन गया विवाद 6 दिसंबर की तारीख ऐतिहासिक रूप से संवेदनशील है, क्योंकि इसी दिन 1992 में बाबरी मस्जिद का विध्वंस हुआ था। उसी दिन बाबरी शैली की मस्जिद का शिलान्यास करना राजनीतिक और धार्मिक दृष्टि से विवादास्पद माना जा रहा है। टीएमसी ने कबीर के इस कदम को “सांप्रदायिक राजनीति” करार दिया और पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के कदम वोट बैंक और धार्मिक भावनाओं के माध्यम से लोकप्रियता बनाने का प्रयास माना जा सकता है। हुमायूं कबीर का बयान कबीर ने अपने कदम को purely धार्मिक बताया। उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक बयानबाजी नहीं है, बल्कि धार्मिक भावना का प्रतीक है। इस कार्यक्रम के लिए: कबीर ने यह संकेत भी दिया कि अगर ज़रूरत पड़ी तो वे 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव में नई राजनीतिक पार्टी के साथ भी सक्रिय होंगे। सुरक्षा और कानून-व्यवस्था स्थानीय प्रशासन ने पूरे इलाके में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है। पुलिस और केंद्रीय बलों को तैनात किया गया है ताकि किसी भी तरह की हिंसा या तनाव की संभावना को रोका जा सके। कलकत्ता हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति या समूह ऐसा कदम न उठाए जिससे साम्प्रदायिक अस्थिरता फैल सके। स्थानीय और राजनीतिक प्रतिक्रिया घटना ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। टीएमसी ने कहा कि कबीर का यह व्यक्तिगत फैसला है और पार्टी का इससे कोई लेना-देना नहीं है। वहीं, स्थानीय समुदायों और धार्मिक संगठनों में इस कार्यक्रम को लेकर चर्चा और चिंता जारी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Lok Sabha में Manickam Tagore का स्थगन प्रस्ताव, बीएलओ की मौत की राष्ट्रीय जांच की मांग

Lok Sabha में Manickam Tagore का स्थगन प्रस्ताव, बीएलओ की मौत की राष्ट्रीय जांच की मांग

कांग्रेस सांसद Manickam Tagore ने लोकसभा में एसआईआर (SIR) मुद्दे और बीएलओ (BLO) की संदिग्ध मौत को लेकर स्थगन प्रस्ताव पेश किया है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस पूरे मामले की राष्ट्रीय स्तर पर जांच कराने की मांग की। मणिकम टैगोर ने कहा कि बीएलओ की मौत सिर्फ एक हादसा नहीं है, बल्कि कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे कर्मचारियों की सुरक्षा और कामकाजी हालात पर सरकार को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। सांसद ने आरोप लगाया कि मामले को ठीक से नहीं देखा जा रहा है, इसलिए इसमें स्वतंत्र और पारदर्शी जांच जरूरी है। उन्होंने लोकसभा में कहा कि जब एक सरकारी कर्मचारी ड्यूटी के दौरान संदिग्ध हालात में जान गंवा देता है, तो यह पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी है। बीएलओ के परिवार को न्याय मिलना चाहिए और सच्चाई सामने आनी चाहिए। विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग की है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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LOK SABHA में जोरदार हंगामा: विपक्ष वेल में उतरा, खड़गे बोले— लोकतंत्र बचाना जरूरी

LOK SABHA में जोरदार हंगामा: विपक्ष वेल में उतरा, खड़गे बोले— लोकतंत्र बचाना जरूरी

Lok Sabha की कार्यवाही सोमवार को उस समय गरमा गई, जब विपक्षी सांसद विभिन्न मुद्दों को लेकर वेल में पहुंच गए। सांसदों ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कराना उनका हक है। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि “लोकतंत्र को बचाना आज सबसे जरूरी है। संसद में बहस हो, सवाल पूछे जाएं और जवाब भी मिले।” खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा से बच रही है। दूसरी ओर केंद्र सरकार ने कहा कि वह किसी भी मुद्दे पर बहस के लिए पूरी तरह तैयार है। लेकिन सरकार का कहना है कि विपक्ष बहस पर समय सीमा थोपने की कोशिश कर रहा है, जो संसद की परंपराओं के खिलाफ है। सरकार ने विपक्ष से शांतिपूर्ण चर्चा की अपील की। लोकसभा अध्यक्ष ने भी सांसदों से सदन की गरिमा बनाए रखने और व्यवधान न पैदा करने की अपील की। सदन में हंगामे के चलते कई बार कार्यवाही बाधित करनी पड़ी। अब सभी की नजर इस बात पर है कि अगली बैठक में क्या विपक्ष और सत्ता पक्ष किसी सहमति पर पहुंच पाते हैं या नहीं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Punjab Election 2027: हरमीत पठानमाजरा और चेतन जौड़ामाजरा ने AAP से दिया इस्तीफा

पंजाब की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के दो मौजूदा विधायकों ने इस्तीफा देकर अपनी राह अलग कर ली। सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा और समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने 1 नवंबर को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने का ऐलान किया। दोनों नेताओं के इस फैसले ने पंजाब में नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू कर दी हैं। दिलचस्प बात यह है कि AAP ने 31 अक्टूबर को ही पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए 40 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी। इसके अगले ही दिन दो विधायकों के इस्तीफे की खबर सामने आ गई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी के भीतर टिकट और संगठन में बदलाव को लेकर नाराजगी बढ़ रही है? AAP की Candidate List के बाद क्यों बढ़ी हलचल? आम आदमी पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। 31 अक्टूबर को जारी पहली उम्मीदवार सूची में 40 नाम शामिल किए गए। मुख्यमंत्री भगवंत मान को धूरी विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं, कई मौजूदा विधायकों को भी दोबारा चुनाव लड़ने का मौका मिला है। हालांकि, इस सूची में हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौड़ामाजरा का नाम नहीं था। इतना ही नहीं, पार्टी ने उनके विधानसभा क्षेत्रों में नए हलका इंचार्ज भी नियुक्त कर दिए थे। सनौर में रंजोध हदाना और समाना में पूर्व अकाली नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को जिम्मेदारी दी गई। इन फैसलों के बाद दोनों विधायकों की राजनीतिक भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे थे। Harmeet Singh Pathanmajra ने Kejriwal को भेजा इस्तीफा सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को भेजा। पठानमाजरा और पंजाब सरकार के बीच पिछले काफी समय से मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं। सितंबर 2025 में पंजाब में आई बाढ़ के दौरान उन्होंने राहत और बचाव कार्यों को लेकर सरकार की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए थे। इसके बाद पार्टी नेतृत्व के साथ उनके संबंधों में तनाव की चर्चा होने लगी थी। उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले ने भी उन्हें लगातार सुर्खियों में बनाए रखा। सितंबर 2025 में एक महिला की शिकायत पर उनके खिलाफ दुष्कर्म, धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी से संबंधित मामला दर्ज किया गया था। पठानमाजरा ने इन कार्रवाइयों को राजनीतिक प्रताड़ना बताते हुए आरोप लगाए थे। Chetan Singh Jouramajra ने भी छोड़ी पार्टी समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने भी AAP से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने फैसले की जानकारी दी। जौड़ामाजरा भगवंत मान सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं, लेकिन बाद में मंत्रिमंडल में फेरबदल के दौरान उन्हें पद से हटा दिया गया था। इसके बाद समाना विधानसभा क्षेत्र में उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं। पार्टी ने हाल ही में पूर्व अकाली नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को समाना का हलका इंचार्ज बनाया था। इसे भी जौड़ामाजरा की नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। इस्तीफे के बाद जौड़ामाजरा ने कहा कि अब उनका पार्टी में मन नहीं लग रहा है। उन्होंने पंजाब के मौजूदा हालात को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। क्या BJP में शामिल होंगे दोनों विधायक? दोनों विधायकों के AAP छोड़ने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर हो रही है। राजनीतिक गलियारों में अटकलें हैं कि दोनों नेता भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम सकते हैं। हालांकि, अभी तक BJP या दोनों विधायकों की ओर से पार्टी में शामिल होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल केवल राजनीतिक अटकल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। Punjab Election 2027 से पहले AAP के सामने चुनौती पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। AAP की पहली उम्मीदवार सूची के तुरंत बाद दो मौजूदा विधायकों का इस्तीफा पार्टी के लिए एक नई चुनौती बन गया है। दोनों विधायक पटियाला जिले की सनौर और समाना सीटों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में इन सीटों पर उम्मीदवारों का चयन और स्थानीय राजनीतिक समीकरण आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहेंगे। अब देखना होगा कि AAP इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में किसे जिम्मेदारी देती है और क्या दोनों पूर्व विधायक किसी दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं। फिलहाल पंजाब की राजनीति में 2027 चुनाव से पहले ही सियासी उठापटक शुरू हो गई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IND vs NZ 5th T20: न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से हराया, Team India ने 3-2 से जीती सीरीज

भारत और न्यूजीलैंड (IND vs NZ) के बीच पांच मैचों की T20 सीरीज का आखिरी मुकाबला रोमांचक रहा। हैमिल्टन के Seddon Park में खेले गए इस मैच में न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से हरा दिया। भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 191 रन बनाए थे, लेकिन Tim Seifert की शानदार पारी के सामने भारतीय गेंदबाज बेबस नजर आए। न्यूजीलैंड ने 18 ओवर में ही लक्ष्य हासिल कर लिया। हालांकि, इस हार से सीरीज का नतीजा नहीं बदला। टीम इंडिया ने शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर 3-0 की बढ़त बनाई थी। न्यूजीलैंड ने आखिरी दो मैच जीतकर वापसी जरूर की, लेकिन सीरीज भारत ने 3-2 से अपने नाम कर ली। ईशान किशन और श्रेयस अय्यर ने संभाली भारतीय पारी टॉस जीतकर न्यूजीलैंड ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। भारतीय टीम की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। अभिषेक शर्मा सिर्फ 1 रन और संजू सैमसन 4 रन बनाकर आउट हो गए। शुरुआती झटकों के बाद टीम को एक बड़ी साझेदारी की जरूरत थी। ऐसे समय में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर ने मोर्चा संभाला। दोनों ने तेजी से रन बनाते हुए न्यूजीलैंड के गेंदबाजों पर दबाव बनाया। ईशान किशन ने 32 गेंदों में 61 रन की शानदार पारी खेली, जबकि श्रेयस अय्यर ने सिर्फ 23 गेंदों में 50 रन बना दिए। दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए 93 रन की साझेदारी हुई। इस साझेदारी ने भारत को मैच में वापसी दिलाई। इसके बाद नमन धीर ने 33 रन और नीतीश कुमार रेड्डी ने 22 रन बनाकर टीम का स्कोर 191 तक पहुंचाया। न्यूजीलैंड की तरफ से Adam Milne ने सबसे ज्यादा 4 विकेट लिए। Nathan Smith और Blair Tickner को 2-2 सफलताएं मिलीं। Tim Seifert के 93 रन ने पलट दिया Match 192 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड की शुरुआत जरूर थोड़ी लड़खड़ाई। फिन एलन सिर्फ 2 रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन इसके बाद Tim Seifert ने भारतीय गेंदबाजों को कोई राहत नहीं दी। Seifert ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 50 गेंदों में 93 रन बनाए। उनकी पारी में 8 चौके और 6 छक्के शामिल रहे। वह शतक से महज 7 रन दूर रह गए, लेकिन तब तक न्यूजीलैंड जीत के काफी करीब पहुंच चुका था। उनका साथ Daryl Mitchell ने दिया। Mitchell ने 16 गेंदों में 29 रन बनाए। इसके बाद Glenn Phillips ने भी अपना दम दिखाया। उन्होंने 37 गेंदों में नाबाद 61 रन की पारी खेली। इन दोनों बल्लेबाजों की मदद से न्यूजीलैंड ने 18 ओवर में 3 विकेट खोकर 195 रन बना लिए और मुकाबला 7 विकेट से जीत लिया। भारतीय गेंदबाजों की नहीं चली, बल्लेबाजों की मेहनत गई बेकार भारत के लिए इस मुकाबले में सबसे बड़ी चुनौती न्यूजीलैंड की तेज रन गति रही। 191 रन बनाने के बाद टीम इंडिया को उम्मीद थी कि गेंदबाज मैच पर पकड़ बनाएंगे, लेकिन Tim Seifert और Glenn Phillips ने भारतीय गेंदबाजी को संभलने का मौका नहीं दिया। फिन एलन का विकेट जल्दी मिलने के बावजूद भारत लगातार विकेट नहीं निकाल सका। नतीजा यह रहा कि न्यूजीलैंड ने लक्ष्य को दो ओवर बाकी रहते हासिल कर लिया। 3-0 से आगे था भारत, फिर न्यूजीलैंड ने की वापसी इस T20 सीरीज की शुरुआत भारत के लिए काफी अच्छी रही थी। टीम इंडिया ने शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर 3-0 की बढ़त बना ली थी। ऐसा लग रहा था कि भारत सीरीज में क्लीन स्वीप कर सकता है। लेकिन चौथे मुकाबले में न्यूजीलैंड ने शानदार वापसी की। टीम ने बड़ा स्कोर खड़ा किया और भारत को 87 रन से हराया। इसके बाद पांचवें T20 में भी न्यूजीलैंड ने जीत दर्ज कर दी। लगातार दो जीत के बावजूद न्यूजीलैंड सीरीज अपने नाम नहीं कर सका। भारत ने शुरुआती बढ़त के दम पर पांच मैचों की सीरीज 3-2 से जीत ली। IND vs NZ 5th T20: मैच का पूरा Scorecard भारत – 191/8 (20 ओवर) न्यूजीलैंड – 195/3 (18 ओवर) मैच का नतीजा: न्यूजीलैंड ने 7 विकेट से जीत दर्ज की। सीरीज का नतीजा: भारत ने 3-2 से सीरीज जीती। सीरीज जीतकर भी आखिरी दो मैच हारा भारत टीम इंडिया के लिए यह सीरीज दो अलग-अलग तस्वीरें लेकर आई। शुरुआती तीन मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन आखिरी दो मैचों में न्यूजीलैंड ने अपनी रणनीति और बल्लेबाजी से मुकाबले का रुख बदल दिया। आखिरी मैच में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर की फिफ्टी के बावजूद भारत जीत हासिल नहीं कर पाया। वहीं Tim Seifert और Glenn Phillips की पारियों ने न्यूजीलैंड को शानदार जीत दिलाई। भारत के लिए राहत की बात यही रही कि शुरुआती तीन जीत के कारण T20 सीरीज की ट्रॉफी टीम इंडिया के पास ही रही। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
INDIA Bloc

Delhi Politics: INDIA Bloc की Rally के जवाब में BJP का मार्च, JP Nadda ने राहुल गांधी को घेरा

दिल्ली में 1 नवंबर को सियासी हलचल तेज रही। एक तरफ राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA Bloc के 19 विपक्षी दलों ने रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली की, तो दूसरी तरफ भाजपा ने 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर विरोध मार्च निकालकर कांग्रेस को घेरा। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी राजनीति में उन लोगों को भूल गई, जिन्होंने 1984 की हिंसा में अपनी जान गंवाई थी। दिल्ली में हुए इन दोनों प्रदर्शनों के केंद्र में अलग-अलग मुद्दे रहे। विपक्ष ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोला, जबकि भाजपा ने कांग्रेस को 1984 की हिंसा की याद दिलाते हुए पीड़ित परिवारों के लिए आवाज उठाई। INDIA Bloc की Rally में राहुल गांधी समेत 19 दलों के नेता शामिल रामलीला मैदान में आयोजित विपक्ष की रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और INDIA Bloc के कई अन्य नेता शामिल हुए। रैली का मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग की SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियां रहा। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं। इससे पात्र मतदाताओं के वोट देने के अधिकार पर असर पड़ सकता है। राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए और मतदाताओं के अधिकारों के साथ किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। BJP का जवाबी मार्च, सिख समुदाय और पीड़ित परिवारों ने लिया हिस्सा विपक्ष की रैली के बीच भाजपा ने भी दिल्ली में अपना विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी ने पश्चिमी दिल्ली में 1984 के सिख-विरोधी दंगों के पीड़ितों के समर्थन में मार्च निकाला। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा और मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा सहित कई नेता शामिल हुए। मार्च में सिख समुदाय के लोगों और 1984 की हिंसा से प्रभावित परिवारों ने भी हिस्सा लिया। भाजपा ने इस प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस से 1984 की हिंसा के लिए जवाबदेही तय करने और पीड़ित परिवारों से माफी मांगने की मांग की। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस ने इस संवेदनशील तारीख पर बड़ी राजनीतिक रैली आयोजित करके सिख समुदाय की भावनाओं का ध्यान नहीं रखा। JP Nadda का राहुल गांधी पर हमला, बोले- अपनी राजनीति में शहीदों को भूले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्ष की रैली को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर का दिन देश के इतिहास में बेहद दुखद है। 1984 में इसी दौरान सिख समुदाय के लोगों को हिंसा का सामना करना पड़ा था। नड्डा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अपनी राजनीतिक गतिविधियों में इतने व्यस्त हैं कि उन्हें 1984 की हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों और उनके परिवारों की पीड़ा याद नहीं रही। उन्होंने कहा कि देश उन घटनाओं को नहीं भूला है और सिख समुदाय के जख्म आज भी लोगों को याद हैं। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से इस मुद्दे पर जवाब देने की मांग की। राहुल गांधी ने BJP के कारोबार वाले आरोप पर दिया जवाब भाजपा ने विपक्ष की रैली को लेकर यह भी कहा कि इससे दिल्ली के बाजारों और छोटे कारोबारियों को नुकसान हो सकता है। दिवाली से पहले बाजारों में भीड़ और ट्रैफिक की समस्या बढ़ने की आशंका भी जताई गई। इस पर राहुल गांधी ने भाजपा के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि रैली में शामिल होने वाले लोगों से दिल्ली में खरीदारी करने की अपील की गई थी, ताकि स्थानीय व्यापारियों को फायदा मिले। राहुल गांधी ने कनॉट प्लेस में दुकानों के बंद होने का मुद्दा भी उठाया और सवाल किया कि व्यापारियों का कारोबार प्रभावित होने के लिए कौन जिम्मेदार है। खड़गे ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष का आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। खड़गे का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ियां हुई हैं और कई लोगों के नाम हटाए गए हैं। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बता रहा है। हालांकि, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में गड़बड़ी और राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। आयोग की ओर से मतदाता सूची के पुनरीक्षण को निर्धारित प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है। अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव ने भी उठाए सवाल विपक्ष की रैली में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से नाम हटने के मुद्दे को उठाते हुए चुनाव प्रक्रिया पर सवाल किए। वहीं, बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपने भाषण में वोट चोरी के आरोपों को लेकर सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता शशि थरूर समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर क्यों बढ़ा विवाद? 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा भड़क गई थी। 1 से 3 नवंबर के बीच दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और कई परिवारों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा। इस घटना को देश के इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में गिना जाता है। हिंसा के पीड़ित परिवारों के लिए न्याय और जवाबदेही का मुद्दा आज भी सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा है। भाजपा ने इसी घटना की बरसी को लेकर कांग्रेस की रैली पर सवाल उठाए हैं। वहीं, कांग्रेस और INDIA Bloc का कहना है कि उनकी रैली चुनावी प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए थी। Delhi Politics: एक दिन में दो प्रदर्शन, BJP और विपक्ष आमने-सामने दिल्ली में 1 नवंबर को हुए दोनों प्रदर्शनों ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। रामलीला मैदान में विपक्ष ने चुनाव आयोग...
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INDIA Bloc का बड़ा प्रदर्शन: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 19 पार्टियां एकजुट, खड़गे ने दी चेतावनी

दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर को विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक बड़ी रैली की। INDIA Bloc के बैनर तले हुई इस रैली में 19 विपक्षी पार्टियों के नेता एक मंच पर नजर आए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई बड़े नेताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। रैली का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला बयान ममता बनर्जी का रहा। उन्होंने पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी पार्टी बंगाल में हारी नहीं, बल्कि उसे हराया गया। वहीं, मल्लिकार्जुन खड़गे ने ज्ञानेश कुमार को लेकर कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर पीछे हटने वाला नहीं है। ममता बनर्जी ने बंगाल चुनाव को लेकर क्या कहा? रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती गई। ममता ने कहा कि बंगाल में उनकी पार्टी को हराया गया है। उन्होंने मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि लोकतंत्र में हर नागरिक का वोट महत्वपूर्ण है और किसी भी पात्र मतदाता को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। खड़गे का ज्ञानेश कुमार पर सीधा निशाना कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी मंच से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को इतनी आसानी से छोड़ने वाला नहीं है। खड़गे ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए विपक्ष को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी। विपक्षी दलों की मांग है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की समीक्षा हो और मतदाता सूची में हुए बदलावों की जानकारी सार्वजनिक की जाए। राहुल गांधी, प्रियंका और अखिलेश यादव समेत 19 पार्टियों की मौजूदगी दिल्ली की इस रैली में INDIA Bloc के कई प्रमुख नेता शामिल हुए। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, फारूक अब्दुल्ला, तेजस्वी यादव, अभिषेक बनर्जी और सुप्रिया सुले समेत कई नेताओं ने मंच साझा किया। सभी नेताओं ने अपने-अपने संबोधन में चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। SIR विवाद क्या है, जिस पर आमने-सामने हैं विपक्ष और चुनाव आयोग? इस पूरी राजनीतिक लड़ाई के केंद्र में Special Intensive Revision (SIR) है। यह चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची की गहन जांच और संशोधन की प्रक्रिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया में कई पात्र मतदाताओं के नाम भी प्रभावित हो सकते हैं। विपक्ष चाहता है कि नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची को सही और अपडेट रखने के लिए समय-समय पर समीक्षा जरूरी है। इस प्रक्रिया में डुप्लीकेट और अपात्र नामों की पहचान की जाती है। पात्र मतदाताओं को अपना नाम सूची में शामिल कराने का अवसर भी दिया जाता है। BJP ने भी निकाला मार्च, दिल्ली में बढ़ी राजनीतिक हलचल INDIA Bloc की रैली के बीच BJP ने भी 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के समर्थन में मार्च निकाला। इसको लेकर दोनों राजनीतिक पक्षों के बीच बयानबाजी भी देखने को मिली। दिल्ली में एक ही दिन दोनों पक्षों के कार्यक्रमों को देखते हुए सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए। रैली और मार्च के आसपास पुलिस बल की तैनाती की गई, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो। आगे क्या होगा? चुनाव आयोग पर विपक्ष का दबाव जारी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA Bloc की यह रैली चुनाव आयोग और SIR को लेकर चल रहे विवाद में एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम है। विपक्षी दलों ने संकेत दिए हैं कि वे मतदाता सूची में पारदर्शिता और चुनाव आयोग की जवाबदेही का मुद्दा आगे भी उठाते रहेंगे। अब देखना होगा कि विपक्ष की इन मांगों पर चुनाव आयोग क्या रुख अपनाता है और आने वाले दिनों में इस राजनीतिक टकराव की दिशा क्या रहती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump Iran Attack: नेतन्याहू से बात के बाद ट्रम्प का बड़ा बयान, 4 नवंबर को ईरान पर हमले की आशंका

मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव के बीच अमेरिकी Trump ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की है। इस बातचीत के बाद ट्रम्प के एक बयान ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। उन्होंने कहा कि ईरान के एक-दो ठिकानों पर कार्रवाई अभी बाकी है। इसी बीच मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका 4 नवंबर को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है। हालांकि, अभी तक अमेरिकी सरकार ने किसी नए हमले की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। दूसरी तरफ ईरान भी लगातार चेतावनी दे रहा है कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह चुप नहीं बैठेगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता बंद होने वाला है या फिर कोई नया समझौता हो सकता है? Trump-Netanyahu Talk: फोन पर क्या हुई बातचीत? रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच शनिवार को फोन पर बातचीत हुई। यह बातचीत ऐसे समय हुई है, जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को लेकर अमेरिका और इजरायल की चिंताएं बढ़ी हुई हैं। बताया जा रहा है कि ट्रम्प ने इससे पहले व्हाइट हाउस में वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों के साथ बैठक भी की थी। इस बैठक में ईरान को लेकर आगे की रणनीति और संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा हुई। ट्रम्प बोले- ईरान के 1-2 ठिकाने अभी बाकी नेतन्याहू से बातचीत के बाद ट्रम्प ने ईरान को लेकर सख्त बयान दिया। उन्होंने कहा कि ईरान के एक या दो ठिकानों पर अभी कार्रवाई की जानी बाकी है। इस दौरान उन्होंने पिकैक्स माउंटेन (Pickaxe Mountain) का भी जिक्र किया। पिकैक्स माउंटेन को ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा एक संभावित भूमिगत ठिकाना माना जाता है। पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि यहां परमाणु गतिविधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण सुविधाएं मौजूद हो सकती हैं। ट्रम्प के बयान के बाद एक बार फिर यह चर्चा शुरू हो गई है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सीमित सैन्य कार्रवाई कर सकता है। 4 नवंबर को Iran पर Attack की रिपोर्ट से बढ़ी चिंता ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले को लेकर 4 नवंबर की तारीख चर्चा में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र के कुछ सहयोगी देशों को संभावित सैन्य कार्रवाई और उसके बाद पैदा होने वाली स्थिति के लिए सतर्क रहने को कहा है। रिपोर्ट्स में 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद कार्रवाई की संभावना जताई गई है। इसी वजह से 4 नवंबर की तारीख को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि अभी तक ट्रम्प प्रशासन ने हमले की तारीख या समय की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसलिए इसे फिलहाल संभावित घटनाक्रम के तौर पर ही देखा जा रहा है। ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी अमेरिका की ओर से संभावित हमले की खबरों के बीच ईरान ने भी अपना रुख साफ कर दिया है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि अगर अमेरिका या इजरायल की ओर से दोबारा हमला किया गया तो उसका जवाब दिया जाएगा। ईरान के अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि किसी नए सैन्य टकराव की स्थिति में क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। इससे खाड़ी देशों में भी चिंता बढ़ गई है। ईरान का परमाणु कार्यक्रम इस विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपनी परमाणु गतिविधियों को लेकर उसकी चिंताओं का समाधान करे, जबकि तेहरान अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़े अधिकारों पर जोर दे रहा है। Qatar के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ हमले की चर्चाएं चल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बातचीत के रास्ते भी खुले हुए हैं। कतर दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी संकेत दिया है कि ईरान के साथ बातचीत पूरी तरह बंद नहीं हुई है। अमेरिका ऐसा समझौता चाहता है, जिससे उसके सुरक्षा संबंधी मुद्दों का समाधान निकल सके। ईरान की ओर से भी बातचीत को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। हालांकि, दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अभी सहमति बनना बाकी है। Strait of Hormuz पर भी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर भी स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद अहम है। यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या आवाजाही में रुकावट आने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और सप्लाई पर असर पड़ सकता है। भारत जैसे देशों के लिए भी यह मामला महत्वपूर्ण है, क्योंकि तेल आयात और ऊर्जा कीमतों में बदलाव का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। क्या अमेरिका और ईरान के बीच फिर शुरू होगी जंग? फिलहाल पूरी दुनिया की नजर ट्रम्प के अगले कदम पर है। नेतन्याहू से बातचीत, ईरान के ठिकानों को लेकर दिया गया बयान और 4 नवंबर को संभावित हमले की रिपोर्ट ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। एक तरफ अमेरिका सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है, तो दूसरी तरफ कतर के जरिए कूटनीतिक बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं। ईरान ने भी साफ कर दिया है कि किसी हमले की स्थिति में वह जवाब देगा। अब देखना होगा कि अमेरिका बातचीत के जरिए कोई रास्ता निकालता है या फिर मध्य पूर्व में एक बार फिर सैन्य टकराव की स्थिति बनती है। फिलहाल 4 नवंबर को हमले की संभावना मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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