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आवारा कुत्तों पर Supreme Court में सुनवाई, अदालत की तीखी टिप्पणी

आवारा कुत्तों पर Supreme Court में सुनवाई, अदालत की तीखी टिप्पणी

देश में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर Supreme Court में अहम सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत में दी गई एक दलील पर जजों ने तीखी और व्यंग्यात्मक टिप्पणी की, जो अब चर्चा का विषय बन गई है। सुनवाई के दौरान एक पक्ष ने तर्क दिया कि अगर सड़कों से आवारा कुत्तों को हटाया गया तो चूहों की संख्या बढ़ सकती है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “तो फिर क्या चूहे रोकने के लिए बिल्लियां ले आएं?” अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि ऐसी दलीलों से मूल समस्या का समाधान नहीं निकलता। कोर्ट ने यह भी जताया कि आम लोगों, खासकर बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा सर्वोपरि है। कई शहरों में कुत्तों के हमलों की बढ़ती घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय प्रशासन और नगर निगमों से जिम्मेदारी के साथ समाधान निकालने को कहा। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि केवल बहाने बनाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि ठोस और व्यावहारिक कदम उठाने होंगे। इस मामले में अगली सुनवाई में केंद्र और राज्यों से विस्तृत जवाब मांगा गया है। देशभर में आवारा कुत्तों को लेकर चल रही बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी काफी अहम मानी जा रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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INDORE मौतों पर हाईकोर्ट सख्त: सरकार के जवाब को बताया असंवेदनशील

INDORE मौतों पर हाईकोर्ट सख्त: सरकार के जवाब को बताया असंवेदनशील

Indore में हाल ही में हुई मौतों को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार पर कड़ी नाराज़गी जताई है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि सरकार का जवाब असंवेदनशील है और इस गंभीर घटना ने इंदौर जैसे प्रतिष्ठित शहर की छवि को पूरे देश में नुकसान पहुंचाया है। हाईकोर्ट ने कहा कि जिस तरह से प्रशासन ने मामले को संभाला, वह संतोषजनक नहीं है। कोर्ट ने यह भी माना कि समय रहते ठोस कदम उठाए जाते, तो हालात इतने गंभीर नहीं होते। इस बीच, इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में 38 नए मरीज मिलने से चिंता और बढ़ गई है। स्थानीय लोग डरे हुए हैं और प्रशासन से तुरंत सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें इलाके में निगरानी कर रही हैं, लेकिन लोगों का कहना है कि ज़मीनी स्तर पर व्यवस्थाएं अभी भी कमजोर हैं। हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह सिर्फ कागजी जवाब देने के बजाय संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ काम करे, ताकि आगे ऐसी घटनाएं दोबारा न हों और आम लोगों का भरोसा बना रहे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Venezuela के राष्ट्रपति Nicolas Maduro न्यूयॉर्क कोर्ट में पेश, बोले- मुझे जबरन उठाया गया

Venezuela के राष्ट्रपति Nicolas Maduro न्यूयॉर्क कोर्ट में पेश, बोले- मुझे जबरन उठाया गया

Venezuela के राष्ट्रपति Nicolas Maduro को न्यूयॉर्क की एक अदालत में पेश किया गया। इस दौरान मादुरो ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें किडनैप किया गया है। उन्होंने अपने खिलाफ लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए गिरफ्तारी को पूरी तरह अवैध बताया। कोर्ट में पेशी के दौरान मादुरो ने कहा कि यह मामला राजनीतिक साजिश का हिस्सा है और उनका किसी भी तरह के अपराध से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए उन्हें हिरासत में लिया गया है। मादुरो के मुताबिक, यह कार्रवाई वेनेजुएला की संप्रभुता पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि उनकी गिरफ्तारी से न सिर्फ वेनेजुएला, बल्कि दुनिया भर के लोकतांत्रिक मूल्यों को ठेस पहुंची है। इस पूरे मामले पर अंतरराष्ट्रीय राजनीति भी गरमा गई है। कई देशों ने इस कार्रवाई को लेकर चिंता जताई है, जबकि कुछ देशों ने इसे कानून के दायरे में बताया है। वहीं, वेनेजुएला में मादुरो के समर्थक सड़कों पर उतर आए हैं और उनकी रिहाई की मांग कर रहे हैं। फिलहाल न्यूयॉर्क कोर्ट में मामले की सुनवाई जारी है और पूरी दुनिया की नजर इस हाई-प्रोफाइल केस पर टिकी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Silver ने तोड़ा रिकॉर्ड, ₹2.45 लाख के ऑल-टाइम हाई पर पहुंची

Silver ने तोड़ा रिकॉर्ड, ₹2.45 लाख के ऑल-टाइम हाई पर पहुंची

देश में कीमती धातुओं की कीमतों ने एक बार फिर नया इतिहास रच दिया है। आज Silver की कीमतों में जोरदार उछाल देखने को मिला और यह ₹2.45 लाख प्रति किलो के ऑल-टाइम हाई स्तर पर पहुंच गई। सिर्फ एक दिन में चांदी ₹7,725 महंगी हो गई, जिससे निवेशकों और बाजार दोनों में हलचल मच गई है। वहीं सोने की कीमतों में भी मजबूती बनी हुई है। आज सोना ₹741 की बढ़त के साथ ₹1.37 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर के करीब पहुंच गया। लगातार बढ़ती कीमतों के कारण आम खरीदारों से लेकर निवेशकों तक सभी की नजर सर्राफा बाजार पर टिकी हुई है। क्यों बढ़ रही हैं सोना-चांदी की कीमतें? बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूती, डॉलर में उतार-चढ़ाव, भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग के चलते सोना और चांदी दोनों की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। इसके अलावा घरेलू बाजार में मांग बढ़ने से भी दाम ऊपर जा रहे हैं। निवेशकों के लिए क्या है संकेत? सोना और चांदी को हमेशा से सुरक्षित निवेश माना जाता रहा है। मौजूदा हालात में कीमतों का यह उछाल संकेत देता है कि आने वाले दिनों में भी सर्राफा बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे में निवेश से पहले बाजार की स्थिति को समझना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Donald Trump की Venezuela की अंतरिम राष्ट्रपति को खुली धमकी, बोले- बात नहीं मानी तो हालात और बिगड़ेंगे

Donald Trump की Venezuela की अंतरिम राष्ट्रपति को खुली धमकी, बोले- बात नहीं मानी तो हालात और बिगड़ेंगे

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर वेनेजुएला को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। ट्रम्प ने वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका की शर्तें नहीं मानी गईं तो हालात और ज्यादा खराब किए जा सकते हैं। ट्रम्प के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। वेनेजुएला पहले से ही आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और जनता की परेशानियों से जूझ रहा है। ऐसे में इस तरह की धमकी ने आम लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। UNSC में आज इमरजेंसी मीटिंग ट्रम्प के बयान के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने आज आपात बैठक बुलाई है। इस बैठक में वेनेजुएला की मौजूदा स्थिति, अमेरिका के रुख और इससे वैश्विक शांति पर पड़ने वाले असर पर चर्चा होगी। कई देशों ने अमेरिका के इस कड़े रवैये पर सवाल उठाए हैं, जबकि कुछ देश वेनेजुएला में लोकतंत्र बहाली की बात कर रहे हैं। आम जनता सबसे ज्यादा परेशान राजनीतिक टकराव का सीधा असर वेनेजुएला की जनता पर पड़ रहा है। खाने-पीने की कमी, महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहे लोग अब अंतरराष्ट्रीय तनाव से और डरे हुए हैं। लोगों को उम्मीद है कि UNSC की बैठक से कोई सकारात्मक समाधान निकलेगा। दुनिया भर की नजरें अब इस बैठक और आने वाले फैसलों पर टिकी हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Five State Assembly Elections : 3 राज्यों में BJP अब तक नहीं जीत पाई

Five State Assembly Elections : 3 राज्यों में BJP अब तक नहीं जीत पाई

इस साल भारत के Five State Assembly Elections होने हैं, जिनमें से 3 राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) अब तक सत्ता में नहीं आ सकी है। इन चुनावों के जरिए देश की करीब 17 प्रतिशत आबादी अपनी नई सरकार चुनेगी। किन राज्यों में होंगे चुनाव? इन राज्यों के चुनाव न सिर्फ क्षेत्रीय राजनीति बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की दिशा भी तय करेंगे। खास बात यह है कि कुछ राज्यों में BJP लगातार कोशिशों के बावजूद अब तक जीत दर्ज नहीं कर पाई है, ऐसे में इस बार मुकाबला और भी दिलचस्प माना जा रहा है। जनता के सामने बड़े सवाल महंगाई, रोजगार, कानून-व्यवस्था, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दे आम लोगों के लिए सबसे अहम हैं। हर राज्य में जनता यह तय करेगी कि वो बदलाव चाहती है या मौजूदा सरकार को एक और मौका। सिर्फ भारत ही नहीं, दुनिया में भी चुनावी साल साल 2026 सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए चुनावी साल है। दुनिया के 36 देशों में इस साल चुनाव होने हैं, जहां करोड़ों लोग अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इससे वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ना तय है। क्यों अहम हैं ये चुनाव? इन 5 राज्यों के नतीजे आने वाले लोकसभा चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल का संकेत देंगे। पार्टियों के लिए यह जनता का मूड समझने का बड़ा मौका है, वहीं आम लोगों के लिए अपने भविष्य की दिशा तय करने का। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Deva ने 20 नक्सलियों के साथ किया सरेंडर, सुकमा–Bijapur में 14 माओवादी ढेर

Deva ने 20 नक्सलियों के साथ किया सरेंडर, सुकमा–Bijapur में 14 माओवादी ढेर

कुख्यात नक्सली Deva ने अपने 20 साथियों के साथ आत्मसमर्पण (सरेंडर) कर दिया है। वहीं, अलग-अलग मुठभेड़ों में कुल 14 नक्सली मारे गए हैं। सुकमा में 12 नक्सली ढेर सुकमा जिले में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में 12 माओवादी मारे गए। मुठभेड़ के बाद इलाके से नक्सलियों के शव और हथियार बरामद किए गए हैं। बीजापुर में 2 नक्सली मारे गए इसी तरह बीजापुर जिले में हुई कार्रवाई में 2 नक्सली ढेर किए गए। सुरक्षाबलों ने दोनों के शवों के साथ हथियार भी जब्त किए हैं। लगातार चल रहा सर्च ऑपरेशन सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके में सर्चिंग ऑपरेशन तेज कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित करने तक अभियान जारी रहेगा। शांति की ओर एक बड़ा कदम देवा समेत 20 नक्सलियों का सरेंडर इस बात का संकेत है कि सरकार की नक्सल उन्मूलन नीति असर दिखा रही है। यह कदम न सिर्फ सुरक्षा के लिहाज से अहम है, बल्कि इलाके में शांति और विकास की उम्मीद भी बढ़ाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Amit Shah का ममता सरकार पर हमला: बोले- बंगाल में घुसपैठ रोकने में नाकाम

Amit Shah का ममता सरकार पर हमला: बोले- बंगाल में घुसपैठ रोकने में नाकाम

केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि ममता सरकार राज्य में अवैध घुसपैठ को रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। शाह ने दावा किया कि बंगाल की सीमाएं असुरक्षित हैं और इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। अमित शाह ने कहा, “अगर पश्चिम बंगाल में हमारी सरकार बनी तो हालात पूरी तरह बदल जाएंगे। उस समय न तो कोई घुसपैठिया घुस पाएगा और न ही परिंदा भी पर मार सकेगा।” उन्होंने साफ कहा कि BJP की सरकार बनने पर अवैध घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें चुन-चुनकर बाहर निकाला जाएगा। गृह मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस वोट बैंक की राजनीति के चलते घुसपैठ पर आंखें मूंदे हुए है। उन्होंने कहा कि इससे राज्य की सुरक्षा, संस्कृति और रोजगार पर सीधा असर पड़ रहा है। अमित शाह ने भरोसा दिलाया कि BJP की प्राथमिकता देश और राज्य की सुरक्षा है। उन्होंने कहा कि सीमाओं की सुरक्षा मजबूत की जाएगी और कानून-व्यवस्था से कोई समझौता नहीं होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Salman Khan का बर्थडे सेलिब्रेशन: धोनी समेत कई सितारे पहुंचे

Salman Khan का बर्थडे सेलिब्रेशन: धोनी समेत कई सितारे पहुंचे

बॉलीवुड सुपरस्टार Salman Khan ने इस बार भी अपना जन्मदिन खास अंदाज़ में मनाया। उनका बर्थडे सेलिब्रेशन पनवेल स्थित फार्महाउस में हुआ, जहां फिल्म और खेल जगत के कई बड़े चेहरे शामिल हुए। इस खास मौके पर पूर्व भारतीय कप्तान एमएस धोनी भी सलमान को बधाई देने पहुंचे। पैपराजी के साथ सादगी भरा जश्न सलमान खान ने फार्महाउस के बाहर मौजूद पैपराजी के साथ मिलकर केक काटा। इस दौरान वह हमेशा की तरह बेहद सादगी और मुस्कान के साथ नजर आए। पैपराजी के लिए यह पल बेहद खास रहा, क्योंकि सलमान ने उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं। धोनी समेत कई सेलिब्रिटीज की मौजूदगी सलमान के जन्मदिन पर एमएस धोनी, उनके परिवार और कई करीबी दोस्त पहुंचे। जैसे ही धोनी फार्महाउस पहुंचे, वहां मौजूद फैंस और मीडिया में उत्साह देखने को मिला। सोशल मीडिया पर इस सेलिब्रेशन की तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं। फैंस ने दी जन्मदिन की बधाइयां सलमान खान के फैंस ने सोशल मीडिया पर उन्हें जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं दीं। ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर #HappyBirthdaySalmanKhan ट्रेंड करता रहा। सलमान खान का यह सादा लेकिन दिल से जुड़ा जश्न एक बार फिर साबित करता है कि वह सिर्फ एक सुपरस्टार नहीं, बल्कि करोड़ों दिलों की धड़कन हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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31 दिसंबर से पहले निपटा लें aadhaar-pan-link, वरना हो सकता है नुकसान

31 दिसंबर से पहले निपटा लें aadhaar-pan-link, वरना हो सकता है नुकसान

अगर आप चाहते हैं कि नया साल बिना किसी झंझट के शुरू हो, तो 31 दिसंबर से पहले निपटा लें Aadhaar-PAN-link, गाड़ी खरीदने और छोटी बचत योजनाएं शुरू करने तक शामिल हैं। आधार-पैन लिंक कराना जरूरी आयकर विभाग ने आधार और पैन को लिंक करने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर तय की है। अगर आपने अब तक लिंक नहीं कराया है, तो आपके पास सिर्फ 5 दिन बचे हैं।अगर तय समय तक लिंक नहीं हुआ तो पैन निष्क्रिय हो सकता है, जिससे बैंकिंग और टैक्स से जुड़े काम अटक सकते हैं। गाड़ी खरीदने का सही मौका साल के आखिर में वाहन कंपनियां भारी छूट दे रही हैं। 31 दिसंबर से पहले गाड़ी खरीदने पर आपको स्मॉल सेविंग्स स्कीम में निवेश शुरू करें पोस्ट ऑफिस की छोटी बचत योजनाएं जैसे साल खत्म होने से पहले निवेश करने पर आपको टैक्स छूट का फायदा भी मिलेगा और भविष्य की सुरक्षा भी पक्की होगी। टैक्स प्लानिंग पूरी कर लें अगर आपने अभी तक टैक्स सेविंग निवेश नहीं किया है, तो 31 दिसंबर से पहले प्लान बना लें। इससे आपको मार्च में जल्दबाजी नहीं करनी पड़ेगी और पैसा भी बचेगा। नया साल खुशहाल और तनाव-मुक्त बनाना है, तो ये चारों काम 31 दिसंबर से पहले निपटा लें। थोड़ी सी समझदारी आपको आने वाले पूरे साल फायदा दे सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Punjab Election 2027: हरमीत पठानमाजरा और चेतन जौड़ामाजरा ने AAP से दिया इस्तीफा

पंजाब की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के दो मौजूदा विधायकों ने इस्तीफा देकर अपनी राह अलग कर ली। सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा और समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने 1 नवंबर को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने का ऐलान किया। दोनों नेताओं के इस फैसले ने पंजाब में नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू कर दी हैं। दिलचस्प बात यह है कि AAP ने 31 अक्टूबर को ही पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए 40 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी। इसके अगले ही दिन दो विधायकों के इस्तीफे की खबर सामने आ गई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी के भीतर टिकट और संगठन में बदलाव को लेकर नाराजगी बढ़ रही है? AAP की Candidate List के बाद क्यों बढ़ी हलचल? आम आदमी पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। 31 अक्टूबर को जारी पहली उम्मीदवार सूची में 40 नाम शामिल किए गए। मुख्यमंत्री भगवंत मान को धूरी विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं, कई मौजूदा विधायकों को भी दोबारा चुनाव लड़ने का मौका मिला है। हालांकि, इस सूची में हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौड़ामाजरा का नाम नहीं था। इतना ही नहीं, पार्टी ने उनके विधानसभा क्षेत्रों में नए हलका इंचार्ज भी नियुक्त कर दिए थे। सनौर में रंजोध हदाना और समाना में पूर्व अकाली नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को जिम्मेदारी दी गई। इन फैसलों के बाद दोनों विधायकों की राजनीतिक भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे थे। Harmeet Singh Pathanmajra ने Kejriwal को भेजा इस्तीफा सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को भेजा। पठानमाजरा और पंजाब सरकार के बीच पिछले काफी समय से मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं। सितंबर 2025 में पंजाब में आई बाढ़ के दौरान उन्होंने राहत और बचाव कार्यों को लेकर सरकार की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए थे। इसके बाद पार्टी नेतृत्व के साथ उनके संबंधों में तनाव की चर्चा होने लगी थी। उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले ने भी उन्हें लगातार सुर्खियों में बनाए रखा। सितंबर 2025 में एक महिला की शिकायत पर उनके खिलाफ दुष्कर्म, धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी से संबंधित मामला दर्ज किया गया था। पठानमाजरा ने इन कार्रवाइयों को राजनीतिक प्रताड़ना बताते हुए आरोप लगाए थे। Chetan Singh Jouramajra ने भी छोड़ी पार्टी समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने भी AAP से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने फैसले की जानकारी दी। जौड़ामाजरा भगवंत मान सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं, लेकिन बाद में मंत्रिमंडल में फेरबदल के दौरान उन्हें पद से हटा दिया गया था। इसके बाद समाना विधानसभा क्षेत्र में उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं। पार्टी ने हाल ही में पूर्व अकाली नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को समाना का हलका इंचार्ज बनाया था। इसे भी जौड़ामाजरा की नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। इस्तीफे के बाद जौड़ामाजरा ने कहा कि अब उनका पार्टी में मन नहीं लग रहा है। उन्होंने पंजाब के मौजूदा हालात को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। क्या BJP में शामिल होंगे दोनों विधायक? दोनों विधायकों के AAP छोड़ने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर हो रही है। राजनीतिक गलियारों में अटकलें हैं कि दोनों नेता भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम सकते हैं। हालांकि, अभी तक BJP या दोनों विधायकों की ओर से पार्टी में शामिल होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल केवल राजनीतिक अटकल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। Punjab Election 2027 से पहले AAP के सामने चुनौती पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। AAP की पहली उम्मीदवार सूची के तुरंत बाद दो मौजूदा विधायकों का इस्तीफा पार्टी के लिए एक नई चुनौती बन गया है। दोनों विधायक पटियाला जिले की सनौर और समाना सीटों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में इन सीटों पर उम्मीदवारों का चयन और स्थानीय राजनीतिक समीकरण आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहेंगे। अब देखना होगा कि AAP इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में किसे जिम्मेदारी देती है और क्या दोनों पूर्व विधायक किसी दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं। फिलहाल पंजाब की राजनीति में 2027 चुनाव से पहले ही सियासी उठापटक शुरू हो गई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IND vs NZ 5th T20: न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से हराया, Team India ने 3-2 से जीती सीरीज

भारत और न्यूजीलैंड (IND vs NZ) के बीच पांच मैचों की T20 सीरीज का आखिरी मुकाबला रोमांचक रहा। हैमिल्टन के Seddon Park में खेले गए इस मैच में न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से हरा दिया। भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 191 रन बनाए थे, लेकिन Tim Seifert की शानदार पारी के सामने भारतीय गेंदबाज बेबस नजर आए। न्यूजीलैंड ने 18 ओवर में ही लक्ष्य हासिल कर लिया। हालांकि, इस हार से सीरीज का नतीजा नहीं बदला। टीम इंडिया ने शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर 3-0 की बढ़त बनाई थी। न्यूजीलैंड ने आखिरी दो मैच जीतकर वापसी जरूर की, लेकिन सीरीज भारत ने 3-2 से अपने नाम कर ली। ईशान किशन और श्रेयस अय्यर ने संभाली भारतीय पारी टॉस जीतकर न्यूजीलैंड ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। भारतीय टीम की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। अभिषेक शर्मा सिर्फ 1 रन और संजू सैमसन 4 रन बनाकर आउट हो गए। शुरुआती झटकों के बाद टीम को एक बड़ी साझेदारी की जरूरत थी। ऐसे समय में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर ने मोर्चा संभाला। दोनों ने तेजी से रन बनाते हुए न्यूजीलैंड के गेंदबाजों पर दबाव बनाया। ईशान किशन ने 32 गेंदों में 61 रन की शानदार पारी खेली, जबकि श्रेयस अय्यर ने सिर्फ 23 गेंदों में 50 रन बना दिए। दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए 93 रन की साझेदारी हुई। इस साझेदारी ने भारत को मैच में वापसी दिलाई। इसके बाद नमन धीर ने 33 रन और नीतीश कुमार रेड्डी ने 22 रन बनाकर टीम का स्कोर 191 तक पहुंचाया। न्यूजीलैंड की तरफ से Adam Milne ने सबसे ज्यादा 4 विकेट लिए। Nathan Smith और Blair Tickner को 2-2 सफलताएं मिलीं। Tim Seifert के 93 रन ने पलट दिया Match 192 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड की शुरुआत जरूर थोड़ी लड़खड़ाई। फिन एलन सिर्फ 2 रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन इसके बाद Tim Seifert ने भारतीय गेंदबाजों को कोई राहत नहीं दी। Seifert ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 50 गेंदों में 93 रन बनाए। उनकी पारी में 8 चौके और 6 छक्के शामिल रहे। वह शतक से महज 7 रन दूर रह गए, लेकिन तब तक न्यूजीलैंड जीत के काफी करीब पहुंच चुका था। उनका साथ Daryl Mitchell ने दिया। Mitchell ने 16 गेंदों में 29 रन बनाए। इसके बाद Glenn Phillips ने भी अपना दम दिखाया। उन्होंने 37 गेंदों में नाबाद 61 रन की पारी खेली। इन दोनों बल्लेबाजों की मदद से न्यूजीलैंड ने 18 ओवर में 3 विकेट खोकर 195 रन बना लिए और मुकाबला 7 विकेट से जीत लिया। भारतीय गेंदबाजों की नहीं चली, बल्लेबाजों की मेहनत गई बेकार भारत के लिए इस मुकाबले में सबसे बड़ी चुनौती न्यूजीलैंड की तेज रन गति रही। 191 रन बनाने के बाद टीम इंडिया को उम्मीद थी कि गेंदबाज मैच पर पकड़ बनाएंगे, लेकिन Tim Seifert और Glenn Phillips ने भारतीय गेंदबाजी को संभलने का मौका नहीं दिया। फिन एलन का विकेट जल्दी मिलने के बावजूद भारत लगातार विकेट नहीं निकाल सका। नतीजा यह रहा कि न्यूजीलैंड ने लक्ष्य को दो ओवर बाकी रहते हासिल कर लिया। 3-0 से आगे था भारत, फिर न्यूजीलैंड ने की वापसी इस T20 सीरीज की शुरुआत भारत के लिए काफी अच्छी रही थी। टीम इंडिया ने शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर 3-0 की बढ़त बना ली थी। ऐसा लग रहा था कि भारत सीरीज में क्लीन स्वीप कर सकता है। लेकिन चौथे मुकाबले में न्यूजीलैंड ने शानदार वापसी की। टीम ने बड़ा स्कोर खड़ा किया और भारत को 87 रन से हराया। इसके बाद पांचवें T20 में भी न्यूजीलैंड ने जीत दर्ज कर दी। लगातार दो जीत के बावजूद न्यूजीलैंड सीरीज अपने नाम नहीं कर सका। भारत ने शुरुआती बढ़त के दम पर पांच मैचों की सीरीज 3-2 से जीत ली। IND vs NZ 5th T20: मैच का पूरा Scorecard भारत – 191/8 (20 ओवर) न्यूजीलैंड – 195/3 (18 ओवर) मैच का नतीजा: न्यूजीलैंड ने 7 विकेट से जीत दर्ज की। सीरीज का नतीजा: भारत ने 3-2 से सीरीज जीती। सीरीज जीतकर भी आखिरी दो मैच हारा भारत टीम इंडिया के लिए यह सीरीज दो अलग-अलग तस्वीरें लेकर आई। शुरुआती तीन मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन आखिरी दो मैचों में न्यूजीलैंड ने अपनी रणनीति और बल्लेबाजी से मुकाबले का रुख बदल दिया। आखिरी मैच में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर की फिफ्टी के बावजूद भारत जीत हासिल नहीं कर पाया। वहीं Tim Seifert और Glenn Phillips की पारियों ने न्यूजीलैंड को शानदार जीत दिलाई। भारत के लिए राहत की बात यही रही कि शुरुआती तीन जीत के कारण T20 सीरीज की ट्रॉफी टीम इंडिया के पास ही रही। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
INDIA Bloc

Delhi Politics: INDIA Bloc की Rally के जवाब में BJP का मार्च, JP Nadda ने राहुल गांधी को घेरा

दिल्ली में 1 नवंबर को सियासी हलचल तेज रही। एक तरफ राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA Bloc के 19 विपक्षी दलों ने रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली की, तो दूसरी तरफ भाजपा ने 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर विरोध मार्च निकालकर कांग्रेस को घेरा। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी राजनीति में उन लोगों को भूल गई, जिन्होंने 1984 की हिंसा में अपनी जान गंवाई थी। दिल्ली में हुए इन दोनों प्रदर्शनों के केंद्र में अलग-अलग मुद्दे रहे। विपक्ष ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोला, जबकि भाजपा ने कांग्रेस को 1984 की हिंसा की याद दिलाते हुए पीड़ित परिवारों के लिए आवाज उठाई। INDIA Bloc की Rally में राहुल गांधी समेत 19 दलों के नेता शामिल रामलीला मैदान में आयोजित विपक्ष की रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और INDIA Bloc के कई अन्य नेता शामिल हुए। रैली का मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग की SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियां रहा। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं। इससे पात्र मतदाताओं के वोट देने के अधिकार पर असर पड़ सकता है। राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए और मतदाताओं के अधिकारों के साथ किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। BJP का जवाबी मार्च, सिख समुदाय और पीड़ित परिवारों ने लिया हिस्सा विपक्ष की रैली के बीच भाजपा ने भी दिल्ली में अपना विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी ने पश्चिमी दिल्ली में 1984 के सिख-विरोधी दंगों के पीड़ितों के समर्थन में मार्च निकाला। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा और मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा सहित कई नेता शामिल हुए। मार्च में सिख समुदाय के लोगों और 1984 की हिंसा से प्रभावित परिवारों ने भी हिस्सा लिया। भाजपा ने इस प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस से 1984 की हिंसा के लिए जवाबदेही तय करने और पीड़ित परिवारों से माफी मांगने की मांग की। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस ने इस संवेदनशील तारीख पर बड़ी राजनीतिक रैली आयोजित करके सिख समुदाय की भावनाओं का ध्यान नहीं रखा। JP Nadda का राहुल गांधी पर हमला, बोले- अपनी राजनीति में शहीदों को भूले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्ष की रैली को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर का दिन देश के इतिहास में बेहद दुखद है। 1984 में इसी दौरान सिख समुदाय के लोगों को हिंसा का सामना करना पड़ा था। नड्डा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अपनी राजनीतिक गतिविधियों में इतने व्यस्त हैं कि उन्हें 1984 की हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों और उनके परिवारों की पीड़ा याद नहीं रही। उन्होंने कहा कि देश उन घटनाओं को नहीं भूला है और सिख समुदाय के जख्म आज भी लोगों को याद हैं। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से इस मुद्दे पर जवाब देने की मांग की। राहुल गांधी ने BJP के कारोबार वाले आरोप पर दिया जवाब भाजपा ने विपक्ष की रैली को लेकर यह भी कहा कि इससे दिल्ली के बाजारों और छोटे कारोबारियों को नुकसान हो सकता है। दिवाली से पहले बाजारों में भीड़ और ट्रैफिक की समस्या बढ़ने की आशंका भी जताई गई। इस पर राहुल गांधी ने भाजपा के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि रैली में शामिल होने वाले लोगों से दिल्ली में खरीदारी करने की अपील की गई थी, ताकि स्थानीय व्यापारियों को फायदा मिले। राहुल गांधी ने कनॉट प्लेस में दुकानों के बंद होने का मुद्दा भी उठाया और सवाल किया कि व्यापारियों का कारोबार प्रभावित होने के लिए कौन जिम्मेदार है। खड़गे ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष का आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। खड़गे का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ियां हुई हैं और कई लोगों के नाम हटाए गए हैं। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बता रहा है। हालांकि, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में गड़बड़ी और राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। आयोग की ओर से मतदाता सूची के पुनरीक्षण को निर्धारित प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है। अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव ने भी उठाए सवाल विपक्ष की रैली में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से नाम हटने के मुद्दे को उठाते हुए चुनाव प्रक्रिया पर सवाल किए। वहीं, बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपने भाषण में वोट चोरी के आरोपों को लेकर सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता शशि थरूर समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर क्यों बढ़ा विवाद? 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा भड़क गई थी। 1 से 3 नवंबर के बीच दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और कई परिवारों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा। इस घटना को देश के इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में गिना जाता है। हिंसा के पीड़ित परिवारों के लिए न्याय और जवाबदेही का मुद्दा आज भी सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा है। भाजपा ने इसी घटना की बरसी को लेकर कांग्रेस की रैली पर सवाल उठाए हैं। वहीं, कांग्रेस और INDIA Bloc का कहना है कि उनकी रैली चुनावी प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए थी। Delhi Politics: एक दिन में दो प्रदर्शन, BJP और विपक्ष आमने-सामने दिल्ली में 1 नवंबर को हुए दोनों प्रदर्शनों ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। रामलीला मैदान में विपक्ष ने चुनाव आयोग...
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INDIA Bloc का बड़ा प्रदर्शन: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 19 पार्टियां एकजुट, खड़गे ने दी चेतावनी

दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर को विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक बड़ी रैली की। INDIA Bloc के बैनर तले हुई इस रैली में 19 विपक्षी पार्टियों के नेता एक मंच पर नजर आए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई बड़े नेताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। रैली का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला बयान ममता बनर्जी का रहा। उन्होंने पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी पार्टी बंगाल में हारी नहीं, बल्कि उसे हराया गया। वहीं, मल्लिकार्जुन खड़गे ने ज्ञानेश कुमार को लेकर कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर पीछे हटने वाला नहीं है। ममता बनर्जी ने बंगाल चुनाव को लेकर क्या कहा? रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती गई। ममता ने कहा कि बंगाल में उनकी पार्टी को हराया गया है। उन्होंने मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि लोकतंत्र में हर नागरिक का वोट महत्वपूर्ण है और किसी भी पात्र मतदाता को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। खड़गे का ज्ञानेश कुमार पर सीधा निशाना कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी मंच से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को इतनी आसानी से छोड़ने वाला नहीं है। खड़गे ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए विपक्ष को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी। विपक्षी दलों की मांग है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की समीक्षा हो और मतदाता सूची में हुए बदलावों की जानकारी सार्वजनिक की जाए। राहुल गांधी, प्रियंका और अखिलेश यादव समेत 19 पार्टियों की मौजूदगी दिल्ली की इस रैली में INDIA Bloc के कई प्रमुख नेता शामिल हुए। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, फारूक अब्दुल्ला, तेजस्वी यादव, अभिषेक बनर्जी और सुप्रिया सुले समेत कई नेताओं ने मंच साझा किया। सभी नेताओं ने अपने-अपने संबोधन में चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। SIR विवाद क्या है, जिस पर आमने-सामने हैं विपक्ष और चुनाव आयोग? इस पूरी राजनीतिक लड़ाई के केंद्र में Special Intensive Revision (SIR) है। यह चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची की गहन जांच और संशोधन की प्रक्रिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया में कई पात्र मतदाताओं के नाम भी प्रभावित हो सकते हैं। विपक्ष चाहता है कि नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची को सही और अपडेट रखने के लिए समय-समय पर समीक्षा जरूरी है। इस प्रक्रिया में डुप्लीकेट और अपात्र नामों की पहचान की जाती है। पात्र मतदाताओं को अपना नाम सूची में शामिल कराने का अवसर भी दिया जाता है। BJP ने भी निकाला मार्च, दिल्ली में बढ़ी राजनीतिक हलचल INDIA Bloc की रैली के बीच BJP ने भी 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के समर्थन में मार्च निकाला। इसको लेकर दोनों राजनीतिक पक्षों के बीच बयानबाजी भी देखने को मिली। दिल्ली में एक ही दिन दोनों पक्षों के कार्यक्रमों को देखते हुए सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए। रैली और मार्च के आसपास पुलिस बल की तैनाती की गई, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो। आगे क्या होगा? चुनाव आयोग पर विपक्ष का दबाव जारी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA Bloc की यह रैली चुनाव आयोग और SIR को लेकर चल रहे विवाद में एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम है। विपक्षी दलों ने संकेत दिए हैं कि वे मतदाता सूची में पारदर्शिता और चुनाव आयोग की जवाबदेही का मुद्दा आगे भी उठाते रहेंगे। अब देखना होगा कि विपक्ष की इन मांगों पर चुनाव आयोग क्या रुख अपनाता है और आने वाले दिनों में इस राजनीतिक टकराव की दिशा क्या रहती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump Iran Attack: नेतन्याहू से बात के बाद ट्रम्प का बड़ा बयान, 4 नवंबर को ईरान पर हमले की आशंका

मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव के बीच अमेरिकी Trump ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की है। इस बातचीत के बाद ट्रम्प के एक बयान ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। उन्होंने कहा कि ईरान के एक-दो ठिकानों पर कार्रवाई अभी बाकी है। इसी बीच मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका 4 नवंबर को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है। हालांकि, अभी तक अमेरिकी सरकार ने किसी नए हमले की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। दूसरी तरफ ईरान भी लगातार चेतावनी दे रहा है कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह चुप नहीं बैठेगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता बंद होने वाला है या फिर कोई नया समझौता हो सकता है? Trump-Netanyahu Talk: फोन पर क्या हुई बातचीत? रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच शनिवार को फोन पर बातचीत हुई। यह बातचीत ऐसे समय हुई है, जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को लेकर अमेरिका और इजरायल की चिंताएं बढ़ी हुई हैं। बताया जा रहा है कि ट्रम्प ने इससे पहले व्हाइट हाउस में वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों के साथ बैठक भी की थी। इस बैठक में ईरान को लेकर आगे की रणनीति और संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा हुई। ट्रम्प बोले- ईरान के 1-2 ठिकाने अभी बाकी नेतन्याहू से बातचीत के बाद ट्रम्प ने ईरान को लेकर सख्त बयान दिया। उन्होंने कहा कि ईरान के एक या दो ठिकानों पर अभी कार्रवाई की जानी बाकी है। इस दौरान उन्होंने पिकैक्स माउंटेन (Pickaxe Mountain) का भी जिक्र किया। पिकैक्स माउंटेन को ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा एक संभावित भूमिगत ठिकाना माना जाता है। पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि यहां परमाणु गतिविधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण सुविधाएं मौजूद हो सकती हैं। ट्रम्प के बयान के बाद एक बार फिर यह चर्चा शुरू हो गई है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सीमित सैन्य कार्रवाई कर सकता है। 4 नवंबर को Iran पर Attack की रिपोर्ट से बढ़ी चिंता ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले को लेकर 4 नवंबर की तारीख चर्चा में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र के कुछ सहयोगी देशों को संभावित सैन्य कार्रवाई और उसके बाद पैदा होने वाली स्थिति के लिए सतर्क रहने को कहा है। रिपोर्ट्स में 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद कार्रवाई की संभावना जताई गई है। इसी वजह से 4 नवंबर की तारीख को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि अभी तक ट्रम्प प्रशासन ने हमले की तारीख या समय की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसलिए इसे फिलहाल संभावित घटनाक्रम के तौर पर ही देखा जा रहा है। ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी अमेरिका की ओर से संभावित हमले की खबरों के बीच ईरान ने भी अपना रुख साफ कर दिया है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि अगर अमेरिका या इजरायल की ओर से दोबारा हमला किया गया तो उसका जवाब दिया जाएगा। ईरान के अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि किसी नए सैन्य टकराव की स्थिति में क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। इससे खाड़ी देशों में भी चिंता बढ़ गई है। ईरान का परमाणु कार्यक्रम इस विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपनी परमाणु गतिविधियों को लेकर उसकी चिंताओं का समाधान करे, जबकि तेहरान अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़े अधिकारों पर जोर दे रहा है। Qatar के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ हमले की चर्चाएं चल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बातचीत के रास्ते भी खुले हुए हैं। कतर दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी संकेत दिया है कि ईरान के साथ बातचीत पूरी तरह बंद नहीं हुई है। अमेरिका ऐसा समझौता चाहता है, जिससे उसके सुरक्षा संबंधी मुद्दों का समाधान निकल सके। ईरान की ओर से भी बातचीत को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। हालांकि, दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अभी सहमति बनना बाकी है। Strait of Hormuz पर भी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर भी स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद अहम है। यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या आवाजाही में रुकावट आने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और सप्लाई पर असर पड़ सकता है। भारत जैसे देशों के लिए भी यह मामला महत्वपूर्ण है, क्योंकि तेल आयात और ऊर्जा कीमतों में बदलाव का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। क्या अमेरिका और ईरान के बीच फिर शुरू होगी जंग? फिलहाल पूरी दुनिया की नजर ट्रम्प के अगले कदम पर है। नेतन्याहू से बातचीत, ईरान के ठिकानों को लेकर दिया गया बयान और 4 नवंबर को संभावित हमले की रिपोर्ट ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। एक तरफ अमेरिका सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है, तो दूसरी तरफ कतर के जरिए कूटनीतिक बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं। ईरान ने भी साफ कर दिया है कि किसी हमले की स्थिति में वह जवाब देगा। अब देखना होगा कि अमेरिका बातचीत के जरिए कोई रास्ता निकालता है या फिर मध्य पूर्व में एक बार फिर सैन्य टकराव की स्थिति बनती है। फिलहाल 4 नवंबर को हमले की संभावना मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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