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Pakistan पर बॉयकॉट का असर: क्रिकेट और साख दोनों पर पड़ सकता है भारी संकट

Pakistan पर बॉयकॉट का असर: क्रिकेट और साख दोनों पर पड़ सकता है भारी संकट

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में Pakistan एक बार फिर मुश्किल दौर से गुजर रहा है। कई देशों द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ बॉयकॉट की चर्चा तेज हो गई है, जिसका सीधा असर उसकी टीम के प्रदर्शन, टूर्नामेंट में भविष्य और अंतरराष्ट्रीय छवि पर पड़ सकता है। अगर हालात नहीं सुधरे, तो पाकिस्तान को खेल के मैदान के साथ-साथ वैश्विक मंच पर भी बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है। बॉयकॉट की स्थिति में पाकिस्तान को पूरे मुकाबले खेलने का मौका नहीं मिल सकता। ऐसे में टीम का अभ्यास और तैयारी प्रभावित होगी। इससे ग्रुप स्टेज में ही बाहर होने का खतरा बढ़ सकता है। खिलाड़ी मानसिक दबाव में आ सकते हैं, जिसका असर उनके खेल पर साफ दिखेगा। अगर विवाद ज्यादा बढ़ता है और नियमों का उल्लंघन होता है, तो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) पाकिस्तान पर बैन लगाने पर भी विचार कर सकती है। इसका मतलब यह होगा कि पाकिस्तान की टीम कुछ समय तक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट से बाहर रह सकती है। पाकिस्तान पहले ही सुरक्षा कारणों से कई साल तक बड़े टूर्नामेंटों की मेजबानी से वंचित रहा है। अब अगर बॉयकॉट की स्थिति बनती है, तो भविष्य में किसी भी बड़े टूर्नामेंट की मेजबानी मिलना और कठिन हो जाएगा। इससे देश के क्रिकेट इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ेगा। पाकिस्तान में क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं, बल्कि जुनून है। ऐसे में फैंस को डर है कि इन हालातों का असर उनके पसंदीदा खिलाड़ियों के करियर और देश के क्रिकेट भविष्य पर पड़ेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Budget में 15% बढ़ोतरी, आम जनता को राहत और स्वास्थ्य-रेल सेक्टर को बड़ी सौगात

Budget में 15% बढ़ोतरी, आम जनता को राहत और स्वास्थ्य-रेल सेक्टर को बड़ी सौगात

केंद्र सरकार ने Budget में देश की सुरक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कई बड़े ऐलान किए हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद सरकार ने रक्षा बजट में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है, जिससे सेना को और ज्यादा आधुनिक संसाधन मिल सकेंगे। सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे मध्यम वर्ग को बड़ी राहत की उम्मीद पूरी नहीं हो सकी। हालांकि, स्वास्थ्य क्षेत्र में कई अहम फैसले लिए गए हैं। कैंसर मरीजों को राहत सरकार ने 17 जरूरी कैंसर दवाओं को ड्यूटी फ्री करने का फैसला किया है। इससे इन दवाओं की कीमत कम होगी और मरीजों को इलाज में बड़ी राहत मिलेगी। 3 नए आयुर्वेदिक एम्स की घोषणा देश में पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने के लिए तीन नए आयुर्वेदिक एम्स स्थापित किए जाएंगे। इससे आयुष सिस्टम को मजबूती मिलेगी और लोगों को बेहतर इलाज मिलेगा। देश को मिलेंगे 7 हाईस्पीड रेल कॉरिडोर बजट में 7 नए हाईस्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की घोषणा की गई है। इससे यात्रा का समय कम होगा और आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार मिलेगी। सरकार का कहना है कि यह बजट देश की सुरक्षा को मजबूत करने, आम नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने और विकास की गति तेज करने की दिशा में अहम कदम है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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सर्दी का कहर: Uttarakhand के कालापानी में पारा माइनस 35°, यूपी में कोहरे से बड़ा हादसा

सर्दी का कहर: Uttarakhand के कालापानी में पारा माइनस 35°, यूपी में कोहरे से बड़ा हादसा

Uttarakhand के सीमावर्ती इलाके कालापानी में तापमान माइनस 35 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया है। यहां हालात इतने कठिन हैं कि लोगों की आंखों में आंसू तक जम रहे हैं। भारी बर्फबारी और तेज हवाओं के चलते पहाड़ी इलाकों में सड़कें फिसलन भरी हो गई हैं। सेना और प्रशासन के जवान बेहद कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी निभा रहे हैं। स्थानीय लोगों को घरों में रहने की सलाह दी गई है और जरूरी सेवाओं को ही बाहर जाने की अनुमति दी जा रही है। वहीं उत्तर प्रदेश में घने कोहरे ने आफत मचा रखी है। दृश्यता बेहद कम होने के कारण एक ही स्थान पर 11 गाड़ियां आपस में टकरा गईं। हादसे में कई लोग घायल हुए हैं, जिन्हें नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी कड़ाके की ठंड और घने कोहरे की चेतावनी जारी की है। लोगों से अपील की गई है कि अनावश्यक यात्रा से बचें, गर्म कपड़े पहनें और सुरक्षित रहें। इस भीषण सर्दी ने एक बार फिर याद दिलाया है कि प्रकृति के आगे इंसान कितना असहाय है, लेकिन सावधानी और सतर्कता से बड़े नुकसान से बचा जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Budget से बड़ी उम्मीदें: 300 नई ट्रेनों का ऐलान संभव, 13 लाख तक की कमाई टैक्स फ्री हो सकती है

Budget से बड़ी उम्मीदें: 300 नई ट्रेनों का ऐलान संभव, 13 लाख तक की कमाई टैक्स फ्री हो सकती है

देश का आम आदमी, नौकरीपेशा वर्ग और किसान – सभी की नजरें आने वाले केंद्रीय budget पर टिकी हैं। हर किसी को उम्मीद है कि इस बार बजट में राहत भरे फैसले होंगे। सूत्रों के मुताबिक, सरकार 300 नई ट्रेनों की घोषणा कर सकती है और 13 लाख रुपए तक की सालाना आय को टैक्स फ्री करने पर भी विचार चल रहा है। इसके साथ ही बजट में 5 बड़े ऐलान संभव बताए जा रहे हैं। मुख्य बिंदु : अगर ये घोषणाएं बजट में शामिल होती हैं, तो आम जनता की जेब को सीधी राहत मिलेगी और देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। अब सभी को इंतजार है बजट के दिन का, जब पता चलेगा कि सरकार आम लोगों की उम्मीदों पर कितना खरी उतरती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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GOLD पहली बार ₹1.5 लाख के पार, आम लोगों की पहुंच से हुआ दूर

GOLD पहली बार ₹1.5 लाख के पार, आम लोगों की पहुंच से हुआ दूर

देश में GOLD की कीमतों ने नया इतिहास रच दिया है। पहली बार सोना ₹1.5 लाख के पार पहुंच गया है। बीते कुछ ही दिनों में सोने के दामों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। सोमवार को सोना एक ही दिन में ₹7,795 महंगा हो गया, जिससे आम लोगों की चिंता बढ़ गई है। पिछले 21 दिनों की बात करें तो सोना करीब ₹22,000 तक महंगा हो चुका है। शादी-ब्याह और निवेश के लिए सोना खरीदने वालों को अब ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ रही है। चांदी भी नहीं रही पीछे सिर्फ सोना ही नहीं, चांदी की कीमतों में भी भारी उछाल आया है। चांदी ₹10,000 बढ़कर ₹3.20 लाख प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई है। बाजार में चांदी के दामों ने भी निवेशकों को हैरान कर दिया है। क्यों बढ़ रहे हैं सोना-चांदी के दाम? जानकारों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूती, डॉलर में उतार-चढ़ाव और वैश्विक अनिश्चितताओं की वजह से लोग सुरक्षित निवेश के तौर पर सोना-चांदी की ओर ज्यादा रुख कर रहे हैं। इसी कारण इनके दाम लगातार बढ़ रहे हैं। आम आदमी पर असर तेजी से बढ़ती कीमतों का सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। शादी के लिए गहने खरीदने वाले परिवार परेशान हैं, वहीं छोटे निवेशकों के लिए सोना अब पहले से कहीं ज्यादा महंगा हो गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi में Sunita Williams बोलीं- भारत आना घर लौटने जैसा

Delhi में Sunita Williams बोलीं- भारत आना घर लौटने जैसा

Delhi दौरे पर आईं मशहूर अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री Sunita Williams ने भारत से अपने खास जुड़ाव को एक बार फिर खुले दिल से साझा किया। उन्होंने कहा कि भारत आना उन्हें घर लौटने जैसा महसूस होता है। उनकी बातों में अपनापन, सादगी और भावनाएं साफ झलक रही थीं। एक कार्यक्रम के दौरान सुनीता विलियम्स ने मुस्कुराते हुए कहा कि वह चांद पर जाना जरूर चाहेंगी, लेकिन इस बात पर उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में जोड़ा, “मेरे पति शायद मुझे इसकी इजाजत नहीं देंगे।” उनकी यह बात सुनकर वहां मौजूद लोग हंस पड़े और माहौल खुशनुमा हो गया। सुनीता विलियम्स ने बताया कि भारत से उनका रिश्ता केवल काम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिल से जुड़ा हुआ है। भारतीय संस्कृति, लोगों की गर्मजोशी और अपनापन उन्हें बार-बार भारत खींच लाता है। उन्होंने कहा कि भारत आने पर उन्हें हमेशा परिवार जैसा महसूस होता है। अंतरिक्ष की ऊंचाइयों तक पहुंचने वाली सुनीता विलियम्स आज भी जमीन से जुड़ी हुई नजर आती हैं। उनकी सादगी और सहजता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बड़ी उपलब्धियों के बावजूद इंसान अपने जड़ों से जुड़ा रह सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Virat Kohli ने तोड़ा सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड, न्यूजीलैंड के खिलाफ बनाये सबसे ज्यादा रन

Virat Kohli ने तोड़ा सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड, न्यूजीलैंड के खिलाफ बनाये सबसे ज्यादा रन

भारतीय क्रिकेट के स्टार बल्लेबाज Virat Kohli ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच में शानदार पारी खेलते हुए विराट ने महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का बड़ा रिकॉर्ड तोड़ दिया। अब विराट कोहली न्यूजीलैंड के खिलाफ सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीय बल्लेबाज बन गए हैं। इस खास मुकाबले में विराट जब बल्लेबाजी कर रहे थे, तब न्यूजीलैंड के खिलाड़ी प्रसिद्ध कृष्णा (या संबंधित खिलाड़ी) से उनका एक आसान कैच छूट गया। इसके बाद विराट ने मौके का पूरा फायदा उठाया और दमदार रन बटोरते चले गए। मैच के दौरान विराट का आत्मविश्वास, धैर्य और आक्रामक अंदाज देखने लायक था। हर चौके-छक्के के साथ दर्शकों का उत्साह बढ़ता गया। जैसे ही विराट ने सचिन का रिकॉर्ड तोड़ा, स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह पल बेहद खास रहा। सचिन तेंदुलकर के बाद विराट कोहली का इस मुकाम तक पहुंचना भारतीय क्रिकेट की मजबूती और निरंतरता को दर्शाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Jaipur की सड़कों पर सेना की ताकत का भव्य प्रदर्शन, शहीद की मां भावुक होकर हुईं बेहोश

Jaipur की सड़कों पर सेना की ताकत का भव्य प्रदर्शन, शहीद की मां भावुक होकर हुईं बेहोश

Jaipur में उस वक्त गर्व और भावनाओं का अनोखा संगम देखने को मिला, जब भारतीय सेना की ताकत सड़कों पर उतरी। शहर की मुख्य सड़कों पर ब्रह्मोस मिसाइल, पिनाका रॉकेट लॉन्चर और आधुनिक सैन्य वाहन लोगों के सामने लाए गए। वहीं आसमान में अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर की गर्जना ने हर देशवासी का सीना चौड़ा कर दिया। सेना की शक्ति देख उमड़ा जनसैलाब इस भव्य सैन्य प्रदर्शन को देखने के लिए जयपुर की सड़कों पर हजारों लोग जुटे। बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक, हर किसी की आंखों में गर्व साफ झलक रहा था। लोग मोबाइल में तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड करते नजर आए। सेना के जवानों का उत्साह और अनुशासन लोगों को भावुक कर गया। शहीद की मां को मिला सम्मान, भावनाओं पर नहीं रहा काबू कार्यक्रम के दौरान एक ऐसा पल भी आया, जिसने हर आंख नम कर दी। एक शहीद जवान की मां को जब सेना का मेडल दिया गया, तो वह भावनाओं पर काबू नहीं रख सकीं और मंच पर ही बेहोश हो गईं। मौके पर मौजूद अधिकारियों और डॉक्टरों ने तुरंत उनकी मदद की। यह दृश्य याद दिलाता है कि देश की सुरक्षा के पीछे कितनी माताओं का बलिदान और दर्द छिपा होता है। देशभक्ति और सम्मान का संदेश यह कार्यक्रम सिर्फ हथियारों की ताकत दिखाने तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका उद्देश्य युवाओं में देशभक्ति की भावना जगाना और शहीदों के परिवारों को सम्मान देना भी था। जयपुर की सड़कों पर यह नज़ारा लंबे समय तक लोगों की यादों में रहेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Blinkit ने हटाया ‘10 मिनट में डिलीवरी’ का दावा, कर्मचारियों की हड़ताल और सरकार के दखल के बाद फैसला

Blinkit ने हटाया ‘10 मिनट में डिलीवरी’ का दावा, कर्मचारियों की हड़ताल और सरकार के दखल के बाद फैसला

ऑनलाइन ग्रॉसरी डिलीवरी प्लेटफॉर्म Blinkit ने अपने मशहूर दावे ‘10 मिनट में डिलीवरी’ को हटा दिया है। यह फैसला कर्मचारियों की हड़ताल, बढ़ती शिकायतों और सरकार के हस्तक्षेप के बाद लिया गया है। माना जा रहा है कि जल्द ही Zepto, Swiggy Instamart और Zomato जैसी अन्य कंपनियां भी अपनी सख्त टाइम लिमिट हटाने की तैयारी में हैं। क्यों लिया गया यह फैसला? बीते कुछ समय से डिलीवरी पार्टनर्स लगातार यह आरोप लगा रहे थे कि कम समय में डिलीवरी का दबाव उनकी सुरक्षा और सेहत दोनों के लिए खतरा बनता जा रहा है। तेज रफ्तार, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी और बढ़ता मानसिक तनाव आम बात हो गई थी। कई जगह डिलीवरी कर्मचारियों ने हड़ताल भी की। सरकार की सख्ती का असर डिलीवरी सिस्टम में बढ़ते हादसों और श्रमिकों की शिकायतों को देखते हुए सरकारी एजेंसियों ने भी दखल दिया। कंपनियों को साफ संकेत दिया गया कि ग्राहकों की सुविधा के साथ-साथ कर्मचारियों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। बाकी कंपनियां भी बदलेंगी रणनीति सूत्रों के मुताबिक, Zepto, Swiggy और Zomato भी अब अपनी डिलीवरी पॉलिसी पर दोबारा विचार कर रही हैं। इन कंपनियों का फोकस अब “सेफ और रियलिस्टिक डिलीवरी टाइम” पर होगा, न कि बेहद कम समय के वादों पर। ग्राहकों के लिए क्या बदलेगा? ग्राहकों को शायद अब कुछ मिनट ज्यादा इंतजार करना पड़े, लेकिन बदले में: मानवता की ओर एक कदम तेज डिलीवरी की दौड़ में इंसानी जान की कीमत समझना जरूरी है। Blinkit का यह फैसला यह दिखाता है कि बिजनेस से ज्यादा जरूरी इंसान हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Supreme Court - कुत्तों में वायरस, बीमारी लाइलाज; बच्चों पर हमले का जिम्मेदार कौन?

Supreme Court – कुत्तों में वायरस, बीमारी लाइलाज; बच्चों पर हमले का जिम्मेदार कौन?

देश में बढ़ते आवारा कुत्तों के हमलों को लेकर Supreme Court ने गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने साफ कहा कि कई कुत्तों में खतरनाक वायरस पाए जा रहे हैं, जिनसे फैलने वाली बीमारियां इलाज से बाहर हो सकती हैं। खासतौर पर बच्चों पर हो रहे हमलों को लेकर कोर्ट ने सख्त सवाल पूछे हैं। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति सड़क पर रहने वाले कुत्तों को खाना खिला रहा है, तो उसे उनकी जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसे लोग कुत्तों को अपने घर ले जाएं या फिर उनकी सुरक्षा और निगरानी की पूरी व्यवस्था करें। अदालत ने पूछा,“जब कोई बच्चा आवारा कुत्तों के हमले में घायल होता है या जान गंवाता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?” कोर्ट ने यह भी कहा कि पशु प्रेम अपनी जगह सही है, लेकिन जन सुरक्षा उससे भी ज्यादा जरूरी है। सड़कें सिर्फ कुत्तों की नहीं, बल्कि आम लोगों—खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं—की भी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो इस मामले में सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं। साथ ही राज्य सरकारों और नगर निगमों से भी आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने को लेकर जवाब मांगा गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Punjab Election 2027: हरमीत पठानमाजरा और चेतन जौड़ामाजरा ने AAP से दिया इस्तीफा

पंजाब की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के दो मौजूदा विधायकों ने इस्तीफा देकर अपनी राह अलग कर ली। सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा और समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने 1 नवंबर को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने का ऐलान किया। दोनों नेताओं के इस फैसले ने पंजाब में नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू कर दी हैं। दिलचस्प बात यह है कि AAP ने 31 अक्टूबर को ही पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए 40 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी। इसके अगले ही दिन दो विधायकों के इस्तीफे की खबर सामने आ गई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी के भीतर टिकट और संगठन में बदलाव को लेकर नाराजगी बढ़ रही है? AAP की Candidate List के बाद क्यों बढ़ी हलचल? आम आदमी पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। 31 अक्टूबर को जारी पहली उम्मीदवार सूची में 40 नाम शामिल किए गए। मुख्यमंत्री भगवंत मान को धूरी विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं, कई मौजूदा विधायकों को भी दोबारा चुनाव लड़ने का मौका मिला है। हालांकि, इस सूची में हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौड़ामाजरा का नाम नहीं था। इतना ही नहीं, पार्टी ने उनके विधानसभा क्षेत्रों में नए हलका इंचार्ज भी नियुक्त कर दिए थे। सनौर में रंजोध हदाना और समाना में पूर्व अकाली नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को जिम्मेदारी दी गई। इन फैसलों के बाद दोनों विधायकों की राजनीतिक भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे थे। Harmeet Singh Pathanmajra ने Kejriwal को भेजा इस्तीफा सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को भेजा। पठानमाजरा और पंजाब सरकार के बीच पिछले काफी समय से मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं। सितंबर 2025 में पंजाब में आई बाढ़ के दौरान उन्होंने राहत और बचाव कार्यों को लेकर सरकार की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए थे। इसके बाद पार्टी नेतृत्व के साथ उनके संबंधों में तनाव की चर्चा होने लगी थी। उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले ने भी उन्हें लगातार सुर्खियों में बनाए रखा। सितंबर 2025 में एक महिला की शिकायत पर उनके खिलाफ दुष्कर्म, धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी से संबंधित मामला दर्ज किया गया था। पठानमाजरा ने इन कार्रवाइयों को राजनीतिक प्रताड़ना बताते हुए आरोप लगाए थे। Chetan Singh Jouramajra ने भी छोड़ी पार्टी समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने भी AAP से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने फैसले की जानकारी दी। जौड़ामाजरा भगवंत मान सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं, लेकिन बाद में मंत्रिमंडल में फेरबदल के दौरान उन्हें पद से हटा दिया गया था। इसके बाद समाना विधानसभा क्षेत्र में उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं। पार्टी ने हाल ही में पूर्व अकाली नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को समाना का हलका इंचार्ज बनाया था। इसे भी जौड़ामाजरा की नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। इस्तीफे के बाद जौड़ामाजरा ने कहा कि अब उनका पार्टी में मन नहीं लग रहा है। उन्होंने पंजाब के मौजूदा हालात को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। क्या BJP में शामिल होंगे दोनों विधायक? दोनों विधायकों के AAP छोड़ने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर हो रही है। राजनीतिक गलियारों में अटकलें हैं कि दोनों नेता भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम सकते हैं। हालांकि, अभी तक BJP या दोनों विधायकों की ओर से पार्टी में शामिल होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल केवल राजनीतिक अटकल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। Punjab Election 2027 से पहले AAP के सामने चुनौती पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। AAP की पहली उम्मीदवार सूची के तुरंत बाद दो मौजूदा विधायकों का इस्तीफा पार्टी के लिए एक नई चुनौती बन गया है। दोनों विधायक पटियाला जिले की सनौर और समाना सीटों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में इन सीटों पर उम्मीदवारों का चयन और स्थानीय राजनीतिक समीकरण आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहेंगे। अब देखना होगा कि AAP इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में किसे जिम्मेदारी देती है और क्या दोनों पूर्व विधायक किसी दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं। फिलहाल पंजाब की राजनीति में 2027 चुनाव से पहले ही सियासी उठापटक शुरू हो गई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IND vs NZ 5th T20: न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से हराया, Team India ने 3-2 से जीती सीरीज

भारत और न्यूजीलैंड (IND vs NZ) के बीच पांच मैचों की T20 सीरीज का आखिरी मुकाबला रोमांचक रहा। हैमिल्टन के Seddon Park में खेले गए इस मैच में न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से हरा दिया। भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 191 रन बनाए थे, लेकिन Tim Seifert की शानदार पारी के सामने भारतीय गेंदबाज बेबस नजर आए। न्यूजीलैंड ने 18 ओवर में ही लक्ष्य हासिल कर लिया। हालांकि, इस हार से सीरीज का नतीजा नहीं बदला। टीम इंडिया ने शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर 3-0 की बढ़त बनाई थी। न्यूजीलैंड ने आखिरी दो मैच जीतकर वापसी जरूर की, लेकिन सीरीज भारत ने 3-2 से अपने नाम कर ली। ईशान किशन और श्रेयस अय्यर ने संभाली भारतीय पारी टॉस जीतकर न्यूजीलैंड ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। भारतीय टीम की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। अभिषेक शर्मा सिर्फ 1 रन और संजू सैमसन 4 रन बनाकर आउट हो गए। शुरुआती झटकों के बाद टीम को एक बड़ी साझेदारी की जरूरत थी। ऐसे समय में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर ने मोर्चा संभाला। दोनों ने तेजी से रन बनाते हुए न्यूजीलैंड के गेंदबाजों पर दबाव बनाया। ईशान किशन ने 32 गेंदों में 61 रन की शानदार पारी खेली, जबकि श्रेयस अय्यर ने सिर्फ 23 गेंदों में 50 रन बना दिए। दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए 93 रन की साझेदारी हुई। इस साझेदारी ने भारत को मैच में वापसी दिलाई। इसके बाद नमन धीर ने 33 रन और नीतीश कुमार रेड्डी ने 22 रन बनाकर टीम का स्कोर 191 तक पहुंचाया। न्यूजीलैंड की तरफ से Adam Milne ने सबसे ज्यादा 4 विकेट लिए। Nathan Smith और Blair Tickner को 2-2 सफलताएं मिलीं। Tim Seifert के 93 रन ने पलट दिया Match 192 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड की शुरुआत जरूर थोड़ी लड़खड़ाई। फिन एलन सिर्फ 2 रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन इसके बाद Tim Seifert ने भारतीय गेंदबाजों को कोई राहत नहीं दी। Seifert ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 50 गेंदों में 93 रन बनाए। उनकी पारी में 8 चौके और 6 छक्के शामिल रहे। वह शतक से महज 7 रन दूर रह गए, लेकिन तब तक न्यूजीलैंड जीत के काफी करीब पहुंच चुका था। उनका साथ Daryl Mitchell ने दिया। Mitchell ने 16 गेंदों में 29 रन बनाए। इसके बाद Glenn Phillips ने भी अपना दम दिखाया। उन्होंने 37 गेंदों में नाबाद 61 रन की पारी खेली। इन दोनों बल्लेबाजों की मदद से न्यूजीलैंड ने 18 ओवर में 3 विकेट खोकर 195 रन बना लिए और मुकाबला 7 विकेट से जीत लिया। भारतीय गेंदबाजों की नहीं चली, बल्लेबाजों की मेहनत गई बेकार भारत के लिए इस मुकाबले में सबसे बड़ी चुनौती न्यूजीलैंड की तेज रन गति रही। 191 रन बनाने के बाद टीम इंडिया को उम्मीद थी कि गेंदबाज मैच पर पकड़ बनाएंगे, लेकिन Tim Seifert और Glenn Phillips ने भारतीय गेंदबाजी को संभलने का मौका नहीं दिया। फिन एलन का विकेट जल्दी मिलने के बावजूद भारत लगातार विकेट नहीं निकाल सका। नतीजा यह रहा कि न्यूजीलैंड ने लक्ष्य को दो ओवर बाकी रहते हासिल कर लिया। 3-0 से आगे था भारत, फिर न्यूजीलैंड ने की वापसी इस T20 सीरीज की शुरुआत भारत के लिए काफी अच्छी रही थी। टीम इंडिया ने शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर 3-0 की बढ़त बना ली थी। ऐसा लग रहा था कि भारत सीरीज में क्लीन स्वीप कर सकता है। लेकिन चौथे मुकाबले में न्यूजीलैंड ने शानदार वापसी की। टीम ने बड़ा स्कोर खड़ा किया और भारत को 87 रन से हराया। इसके बाद पांचवें T20 में भी न्यूजीलैंड ने जीत दर्ज कर दी। लगातार दो जीत के बावजूद न्यूजीलैंड सीरीज अपने नाम नहीं कर सका। भारत ने शुरुआती बढ़त के दम पर पांच मैचों की सीरीज 3-2 से जीत ली। IND vs NZ 5th T20: मैच का पूरा Scorecard भारत – 191/8 (20 ओवर) न्यूजीलैंड – 195/3 (18 ओवर) मैच का नतीजा: न्यूजीलैंड ने 7 विकेट से जीत दर्ज की। सीरीज का नतीजा: भारत ने 3-2 से सीरीज जीती। सीरीज जीतकर भी आखिरी दो मैच हारा भारत टीम इंडिया के लिए यह सीरीज दो अलग-अलग तस्वीरें लेकर आई। शुरुआती तीन मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन आखिरी दो मैचों में न्यूजीलैंड ने अपनी रणनीति और बल्लेबाजी से मुकाबले का रुख बदल दिया। आखिरी मैच में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर की फिफ्टी के बावजूद भारत जीत हासिल नहीं कर पाया। वहीं Tim Seifert और Glenn Phillips की पारियों ने न्यूजीलैंड को शानदार जीत दिलाई। भारत के लिए राहत की बात यही रही कि शुरुआती तीन जीत के कारण T20 सीरीज की ट्रॉफी टीम इंडिया के पास ही रही। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
INDIA Bloc

Delhi Politics: INDIA Bloc की Rally के जवाब में BJP का मार्च, JP Nadda ने राहुल गांधी को घेरा

दिल्ली में 1 नवंबर को सियासी हलचल तेज रही। एक तरफ राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA Bloc के 19 विपक्षी दलों ने रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली की, तो दूसरी तरफ भाजपा ने 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर विरोध मार्च निकालकर कांग्रेस को घेरा। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी राजनीति में उन लोगों को भूल गई, जिन्होंने 1984 की हिंसा में अपनी जान गंवाई थी। दिल्ली में हुए इन दोनों प्रदर्शनों के केंद्र में अलग-अलग मुद्दे रहे। विपक्ष ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोला, जबकि भाजपा ने कांग्रेस को 1984 की हिंसा की याद दिलाते हुए पीड़ित परिवारों के लिए आवाज उठाई। INDIA Bloc की Rally में राहुल गांधी समेत 19 दलों के नेता शामिल रामलीला मैदान में आयोजित विपक्ष की रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और INDIA Bloc के कई अन्य नेता शामिल हुए। रैली का मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग की SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियां रहा। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं। इससे पात्र मतदाताओं के वोट देने के अधिकार पर असर पड़ सकता है। राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए और मतदाताओं के अधिकारों के साथ किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। BJP का जवाबी मार्च, सिख समुदाय और पीड़ित परिवारों ने लिया हिस्सा विपक्ष की रैली के बीच भाजपा ने भी दिल्ली में अपना विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी ने पश्चिमी दिल्ली में 1984 के सिख-विरोधी दंगों के पीड़ितों के समर्थन में मार्च निकाला। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा और मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा सहित कई नेता शामिल हुए। मार्च में सिख समुदाय के लोगों और 1984 की हिंसा से प्रभावित परिवारों ने भी हिस्सा लिया। भाजपा ने इस प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस से 1984 की हिंसा के लिए जवाबदेही तय करने और पीड़ित परिवारों से माफी मांगने की मांग की। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस ने इस संवेदनशील तारीख पर बड़ी राजनीतिक रैली आयोजित करके सिख समुदाय की भावनाओं का ध्यान नहीं रखा। JP Nadda का राहुल गांधी पर हमला, बोले- अपनी राजनीति में शहीदों को भूले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्ष की रैली को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर का दिन देश के इतिहास में बेहद दुखद है। 1984 में इसी दौरान सिख समुदाय के लोगों को हिंसा का सामना करना पड़ा था। नड्डा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अपनी राजनीतिक गतिविधियों में इतने व्यस्त हैं कि उन्हें 1984 की हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों और उनके परिवारों की पीड़ा याद नहीं रही। उन्होंने कहा कि देश उन घटनाओं को नहीं भूला है और सिख समुदाय के जख्म आज भी लोगों को याद हैं। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से इस मुद्दे पर जवाब देने की मांग की। राहुल गांधी ने BJP के कारोबार वाले आरोप पर दिया जवाब भाजपा ने विपक्ष की रैली को लेकर यह भी कहा कि इससे दिल्ली के बाजारों और छोटे कारोबारियों को नुकसान हो सकता है। दिवाली से पहले बाजारों में भीड़ और ट्रैफिक की समस्या बढ़ने की आशंका भी जताई गई। इस पर राहुल गांधी ने भाजपा के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि रैली में शामिल होने वाले लोगों से दिल्ली में खरीदारी करने की अपील की गई थी, ताकि स्थानीय व्यापारियों को फायदा मिले। राहुल गांधी ने कनॉट प्लेस में दुकानों के बंद होने का मुद्दा भी उठाया और सवाल किया कि व्यापारियों का कारोबार प्रभावित होने के लिए कौन जिम्मेदार है। खड़गे ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष का आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। खड़गे का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ियां हुई हैं और कई लोगों के नाम हटाए गए हैं। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बता रहा है। हालांकि, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में गड़बड़ी और राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। आयोग की ओर से मतदाता सूची के पुनरीक्षण को निर्धारित प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है। अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव ने भी उठाए सवाल विपक्ष की रैली में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से नाम हटने के मुद्दे को उठाते हुए चुनाव प्रक्रिया पर सवाल किए। वहीं, बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपने भाषण में वोट चोरी के आरोपों को लेकर सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता शशि थरूर समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर क्यों बढ़ा विवाद? 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा भड़क गई थी। 1 से 3 नवंबर के बीच दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और कई परिवारों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा। इस घटना को देश के इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में गिना जाता है। हिंसा के पीड़ित परिवारों के लिए न्याय और जवाबदेही का मुद्दा आज भी सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा है। भाजपा ने इसी घटना की बरसी को लेकर कांग्रेस की रैली पर सवाल उठाए हैं। वहीं, कांग्रेस और INDIA Bloc का कहना है कि उनकी रैली चुनावी प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए थी। Delhi Politics: एक दिन में दो प्रदर्शन, BJP और विपक्ष आमने-सामने दिल्ली में 1 नवंबर को हुए दोनों प्रदर्शनों ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। रामलीला मैदान में विपक्ष ने चुनाव आयोग...
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INDIA Bloc का बड़ा प्रदर्शन: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 19 पार्टियां एकजुट, खड़गे ने दी चेतावनी

दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर को विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक बड़ी रैली की। INDIA Bloc के बैनर तले हुई इस रैली में 19 विपक्षी पार्टियों के नेता एक मंच पर नजर आए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई बड़े नेताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। रैली का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला बयान ममता बनर्जी का रहा। उन्होंने पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी पार्टी बंगाल में हारी नहीं, बल्कि उसे हराया गया। वहीं, मल्लिकार्जुन खड़गे ने ज्ञानेश कुमार को लेकर कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर पीछे हटने वाला नहीं है। ममता बनर्जी ने बंगाल चुनाव को लेकर क्या कहा? रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती गई। ममता ने कहा कि बंगाल में उनकी पार्टी को हराया गया है। उन्होंने मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि लोकतंत्र में हर नागरिक का वोट महत्वपूर्ण है और किसी भी पात्र मतदाता को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। खड़गे का ज्ञानेश कुमार पर सीधा निशाना कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी मंच से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को इतनी आसानी से छोड़ने वाला नहीं है। खड़गे ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए विपक्ष को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी। विपक्षी दलों की मांग है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की समीक्षा हो और मतदाता सूची में हुए बदलावों की जानकारी सार्वजनिक की जाए। राहुल गांधी, प्रियंका और अखिलेश यादव समेत 19 पार्टियों की मौजूदगी दिल्ली की इस रैली में INDIA Bloc के कई प्रमुख नेता शामिल हुए। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, फारूक अब्दुल्ला, तेजस्वी यादव, अभिषेक बनर्जी और सुप्रिया सुले समेत कई नेताओं ने मंच साझा किया। सभी नेताओं ने अपने-अपने संबोधन में चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। SIR विवाद क्या है, जिस पर आमने-सामने हैं विपक्ष और चुनाव आयोग? इस पूरी राजनीतिक लड़ाई के केंद्र में Special Intensive Revision (SIR) है। यह चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची की गहन जांच और संशोधन की प्रक्रिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया में कई पात्र मतदाताओं के नाम भी प्रभावित हो सकते हैं। विपक्ष चाहता है कि नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची को सही और अपडेट रखने के लिए समय-समय पर समीक्षा जरूरी है। इस प्रक्रिया में डुप्लीकेट और अपात्र नामों की पहचान की जाती है। पात्र मतदाताओं को अपना नाम सूची में शामिल कराने का अवसर भी दिया जाता है। BJP ने भी निकाला मार्च, दिल्ली में बढ़ी राजनीतिक हलचल INDIA Bloc की रैली के बीच BJP ने भी 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के समर्थन में मार्च निकाला। इसको लेकर दोनों राजनीतिक पक्षों के बीच बयानबाजी भी देखने को मिली। दिल्ली में एक ही दिन दोनों पक्षों के कार्यक्रमों को देखते हुए सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए। रैली और मार्च के आसपास पुलिस बल की तैनाती की गई, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो। आगे क्या होगा? चुनाव आयोग पर विपक्ष का दबाव जारी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA Bloc की यह रैली चुनाव आयोग और SIR को लेकर चल रहे विवाद में एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम है। विपक्षी दलों ने संकेत दिए हैं कि वे मतदाता सूची में पारदर्शिता और चुनाव आयोग की जवाबदेही का मुद्दा आगे भी उठाते रहेंगे। अब देखना होगा कि विपक्ष की इन मांगों पर चुनाव आयोग क्या रुख अपनाता है और आने वाले दिनों में इस राजनीतिक टकराव की दिशा क्या रहती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump Iran Attack: नेतन्याहू से बात के बाद ट्रम्प का बड़ा बयान, 4 नवंबर को ईरान पर हमले की आशंका

मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव के बीच अमेरिकी Trump ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की है। इस बातचीत के बाद ट्रम्प के एक बयान ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। उन्होंने कहा कि ईरान के एक-दो ठिकानों पर कार्रवाई अभी बाकी है। इसी बीच मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका 4 नवंबर को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है। हालांकि, अभी तक अमेरिकी सरकार ने किसी नए हमले की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। दूसरी तरफ ईरान भी लगातार चेतावनी दे रहा है कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह चुप नहीं बैठेगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता बंद होने वाला है या फिर कोई नया समझौता हो सकता है? Trump-Netanyahu Talk: फोन पर क्या हुई बातचीत? रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच शनिवार को फोन पर बातचीत हुई। यह बातचीत ऐसे समय हुई है, जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को लेकर अमेरिका और इजरायल की चिंताएं बढ़ी हुई हैं। बताया जा रहा है कि ट्रम्प ने इससे पहले व्हाइट हाउस में वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों के साथ बैठक भी की थी। इस बैठक में ईरान को लेकर आगे की रणनीति और संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा हुई। ट्रम्प बोले- ईरान के 1-2 ठिकाने अभी बाकी नेतन्याहू से बातचीत के बाद ट्रम्प ने ईरान को लेकर सख्त बयान दिया। उन्होंने कहा कि ईरान के एक या दो ठिकानों पर अभी कार्रवाई की जानी बाकी है। इस दौरान उन्होंने पिकैक्स माउंटेन (Pickaxe Mountain) का भी जिक्र किया। पिकैक्स माउंटेन को ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा एक संभावित भूमिगत ठिकाना माना जाता है। पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि यहां परमाणु गतिविधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण सुविधाएं मौजूद हो सकती हैं। ट्रम्प के बयान के बाद एक बार फिर यह चर्चा शुरू हो गई है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सीमित सैन्य कार्रवाई कर सकता है। 4 नवंबर को Iran पर Attack की रिपोर्ट से बढ़ी चिंता ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले को लेकर 4 नवंबर की तारीख चर्चा में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र के कुछ सहयोगी देशों को संभावित सैन्य कार्रवाई और उसके बाद पैदा होने वाली स्थिति के लिए सतर्क रहने को कहा है। रिपोर्ट्स में 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद कार्रवाई की संभावना जताई गई है। इसी वजह से 4 नवंबर की तारीख को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि अभी तक ट्रम्प प्रशासन ने हमले की तारीख या समय की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसलिए इसे फिलहाल संभावित घटनाक्रम के तौर पर ही देखा जा रहा है। ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी अमेरिका की ओर से संभावित हमले की खबरों के बीच ईरान ने भी अपना रुख साफ कर दिया है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि अगर अमेरिका या इजरायल की ओर से दोबारा हमला किया गया तो उसका जवाब दिया जाएगा। ईरान के अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि किसी नए सैन्य टकराव की स्थिति में क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। इससे खाड़ी देशों में भी चिंता बढ़ गई है। ईरान का परमाणु कार्यक्रम इस विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपनी परमाणु गतिविधियों को लेकर उसकी चिंताओं का समाधान करे, जबकि तेहरान अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़े अधिकारों पर जोर दे रहा है। Qatar के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ हमले की चर्चाएं चल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बातचीत के रास्ते भी खुले हुए हैं। कतर दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी संकेत दिया है कि ईरान के साथ बातचीत पूरी तरह बंद नहीं हुई है। अमेरिका ऐसा समझौता चाहता है, जिससे उसके सुरक्षा संबंधी मुद्दों का समाधान निकल सके। ईरान की ओर से भी बातचीत को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। हालांकि, दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अभी सहमति बनना बाकी है। Strait of Hormuz पर भी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर भी स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद अहम है। यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या आवाजाही में रुकावट आने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और सप्लाई पर असर पड़ सकता है। भारत जैसे देशों के लिए भी यह मामला महत्वपूर्ण है, क्योंकि तेल आयात और ऊर्जा कीमतों में बदलाव का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। क्या अमेरिका और ईरान के बीच फिर शुरू होगी जंग? फिलहाल पूरी दुनिया की नजर ट्रम्प के अगले कदम पर है। नेतन्याहू से बातचीत, ईरान के ठिकानों को लेकर दिया गया बयान और 4 नवंबर को संभावित हमले की रिपोर्ट ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। एक तरफ अमेरिका सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है, तो दूसरी तरफ कतर के जरिए कूटनीतिक बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं। ईरान ने भी साफ कर दिया है कि किसी हमले की स्थिति में वह जवाब देगा। अब देखना होगा कि अमेरिका बातचीत के जरिए कोई रास्ता निकालता है या फिर मध्य पूर्व में एक बार फिर सैन्य टकराव की स्थिति बनती है। फिलहाल 4 नवंबर को हमले की संभावना मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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