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Swati Maliwal

Swati Maliwal का बड़ा फैसला: BJP जॉइन कर PM Modi की तारीफ, Kejriwal को घेरा

दिल्ली की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। कभी आम आदमी पार्टी का अहम चेहरा रहीं Swati Maliwal अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गई हैं। इस फैसले ने न सिर्फ सियासी गलियारों में हलचल बढ़ाई है, बल्कि आम लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है। BJP में शामिल होते ही PM Modi की तारीफ BJP जॉइन करने के बाद स्वाति मालीवाल ने प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि देश में महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए केंद्र सरकार ने कई ठोस कदम उठाए हैं।उनके शब्दों में, “देश बदल रहा है और इस बदलाव का हिस्सा बनना जरूरी है।” Kejriwal पर तीखे हमले इस मौके पर मालीवाल ने आम आदमी पार्टी के प्रमुख Arvind Kejriwal पर बिना नाम लिए भी और सीधे तौर पर भी कई सवाल खड़े किए।उन्होंने कहा कि पार्टी अब अपने मूल एजेंडे से भटक चुकी है और पारदर्शिता की जगह राजनीति हावी हो गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सिर्फ बातें हुईं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर काम उतना नहीं दिखा। आखिर क्यों छोड़ी AAP? करीबी सूत्रों के मुताबिक, स्वाति मालीवाल पिछले कुछ समय से पार्टी के अंदर चल रही खींचतान और फैसलों से असंतुष्ट थीं।उनका मानना था कि जिन मुद्दों के लिए उन्होंने राजनीति में कदम रखा था, वे अब पीछे छूटते जा रहे हैं। यही वजह रही कि उन्होंने इतना बड़ा फैसला लिया। Delhi Politics पर क्या पड़ेगा असर? राजनीतिक जानकार मानते हैं कि स्वाति मालीवाल का BJP में शामिल होना आने वाले चुनावों से पहले एक बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है।इससे जहां BJP को मजबूती मिल सकती है, वहीं AAP के लिए यह एक झटका माना जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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केजरीवाल

Delhi CM House Row: केजरीवाल पर आलीशान घर के आरोप, AAP ने बताया साजिश

दिल्ली की सियासत में इन दिनों एक नया विवाद चर्चा का केंद्र बना हुआ है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अरविंद केजरीवाल के कथित नए आवास की कुछ तस्वीरें जारी कर बड़ा हमला बोला है। पार्टी का आरोप है कि आम आदमी की बात करने वाले केजरीवाल खुद “आलीशान जिंदगी” जी रहे हैं। वहीं आम आदमी पार्टी (AAP) ने इन तस्वीरों को पूरी तरह फर्जी बताते हुए इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है। क्या है पूरा मामला? BJP की ओर से शेयर की गई तस्वीरों में दावा किया गया कि केजरीवाल का नया घर किसी “शीशमहल” से कम नहीं है। तस्वीरों में महंगे इंटीरियर, साज-सज्जा और लग्ज़री सुविधाओं की बात कही जा रही है। नेताओं का कहना है कि यह सब जनता के पैसे से किया गया है, जो उनके “साधारण जीवन” के दावे के विपरीत है। BJP का सीधा आरोप पार्टी ने इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर जोर-शोर से उठाया, जिससे बहस और तेज हो गई। AAP का पलटवार: “तस्वीरें फर्जी हैं” AAP ने इन आरोपों को खारिज करते हुए साफ कहा कि: नेताओं ने कहा कि जरूरत पड़ने पर वे असली तथ्यों को सामने लाएंगे। राजनीति क्यों गरमाई? दिल्ली में पहले से ही राजनीतिक माहौल काफी गर्म है। ऐसे में यह विवाद और बड़ा मुद्दा बन गया है। एक तरफ BJP इसे भ्रष्टाचार और फिजूलखर्ची से जोड़ रही है, तो दूसरी तरफ AAP इसे राजनीतिक हमला बता रही है। आगे क्या? अब सबकी नजर इस बात पर है कि: फिलहाल, सच्चाई दोनों दावों के बीच कहीं छिपी हुई नजर आ रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bhopal में दूसरी रात भी लू का कहर, लोगों की बढ़ी परेशानी

Bhopal में दूसरी रात भी लू का कहर, लोगों की बढ़ी परेशानी

Bhopal में गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। लगातार दूसरे दिन रात में भी लू चलने से लोगों को राहत नहीं मिल रही। आमतौर पर रात में तापमान थोड़ा कम हो जाता है, लेकिन इस बार रात भी दिन जैसी तप रही है। लोग घरों में बंद रहने को मजबूर हैं और कूलर-पंखे भी ज्यादा राहत नहीं दे पा रहे। देश के कई शहरों में गर्मी अपने चरम पर है। प्रयागराज और अकोला में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों को बेहाल कर दिया है। दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा नजर आ रहा है, क्योंकि लोग जरूरी काम होने पर ही बाहर निकल रहे हैं। गर्मी से राहत देने के लिए कई शहरों में नगर निगम की टीमें सड़कों पर पानी का छिड़काव कर रही हैं, ताकि तापमान थोड़ा कम किया जा सके और लोगों को राहत मिले। इसके बावजूद गर्म हवाओं का असर कम नहीं हो रहा। वहीं, ओडिशा में हालात इतने खराब हो गए हैं कि बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए स्कूलों को बंद कर दिया गया है। प्रशासन ने लोगों को दोपहर में बाहर न निकलने और ज्यादा से ज्यादा पानी पीने की सलाह दी है। डॉक्टरों का कहना है कि इस भीषण गर्मी में लापरवाही खतरनाक हो सकती है। हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए सिर ढककर निकलें, हल्के कपड़े पहनें और शरीर को हाइड्रेट रखें। गर्मी का यह दौर फिलहाल जारी रहने की संभावना है, ऐसे में सावधानी ही बचाव है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Raghav Chadha news

AAP Crisis: “आप” की झाड़ू क्यों बिखरी? | केजरीवाल की राजनीति पर बड़ा सवाल

संपादकीय – निखिल सिद्धभट्टी भारतीय घरों में झाड़ू सिर्फ सफाई का साधन नहीं, एक प्रतीक भी है—संगठन का, संतुलन का और टिकाऊपन का। कोई भी गृहिणी आपको बताएगी कि अच्छी झाड़ू वही होती है जिसकी हर एक तिनकी मजबूती से एक-दूसरे से जुड़ी हो और बीच में एक मजबूत आधार हो। लेकिन अगर वही झाड़ू सिर्फ दिखावे के लिए किसी चमकदार पाइप में कसकर बंद कर दी जाए, तो वह ज़्यादा दिन नहीं चलती। यही रूपक आज आम आदमी पार्टी (AAP) की स्थिति पर सटीक बैठता है। AAP की स्थापना भ्रष्टाचार के खिलाफ एक जनांदोलन के रूप में हुई थी। इसमें समाज के वे लोग जुड़े थे जो पारंपरिक राजनीति से दूर रहकर देश को एक नई दिशा देना चाहते थे—शांति भूषण, योगेंद्र यादव, आशुतोष, कुमार विश्वास और आगे चलकर राघव चड्ढा जैसे नाम इस विचारधारा के स्तंभ बने। यह वह जमात थी जो सिर्फ सत्ता नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन की बात करती थी। लेकिन समय के साथ यह झाड़ू बिखरती चली गई। सवाल उठता है—क्या यह बिखराव सिर्फ “ऑपरेशन लोटस” जैसी राजनीतिक रणनीतियों का परिणाम है? या इसके पीछे कुछ और गहरी वजहें हैं? निस्संदेह, भारतीय राजनीति में विपक्षी दलों को तोड़ने के आरोप नई बात नहीं हैं। “ऑपरेशन लोटस” का नाम भी इसी संदर्भ में बार-बार सामने आता है। लेकिन अगर हम ईमानदारी से विश्लेषण करें, तो यह मानना मुश्किल है कि AAP से जुड़े इतने शिक्षित, वैचारिक और स्वतंत्र सोच वाले लोग सिर्फ बाहरी दबाव में पार्टी छोड़ते चले गए। असली कारण कहीं अधिक आंतरिक दिखाई देता है। AAP के भीतर समय के साथ एक “वन मैन शो” की छवि उभरती गई। अरविंद केजरीवाल का नेतृत्व शुरुआत में आंदोलनकारी ऊर्जा से भरा हुआ था, लेकिन धीरे-धीरे उसी नेतृत्व में केंद्रीकरण और कथित “सिंडिकेट संस्कृति” की झलक दिखने लगी। निर्णय लेने की प्रक्रिया सीमित होती गई, असहमति के लिए जगह सिकुड़ती गई, और नतीजा यह हुआ कि एक-एक कर पार्टी के संस्थापक चेहरे किनारे होते चले गए। विडंबना यह भी है कि जो पार्टी भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़ी हुई थी, उसके कई प्रमुख नेता खुद भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरकर जेल तक पहुंच गए। इससे न केवल पार्टी की नैतिक साख को झटका लगा, बल्कि उसके मूल विचार को भी कमजोर किया। राघव चड्ढा जैसे युवा और प्रभावशाली नेता का लंबे समय तक पार्टी की सक्रिय गतिविधियों से दूरी बनाना भी एक संकेत था—एक ऐसा संकेत जिसे शायद समय रहते समझा नहीं गया। आज भी पार्टी के भीतर ऐसे कई चेहरे हैं जो खुलकर सामने नहीं आ रहे, लेकिन “घुटन” महसूस कर रहे हैं। अब सवाल यह नहीं है कि दोष किस पर डाला जाए—BJP, मोदी या अमित शाह पर। सवाल यह है कि क्या AAP अपने भीतर झांकने को तैयार है? अरविंद केजरीवाल के सामने आज सबसे बड़ी चुनौती आत्ममंथन की है। उन्हें यह समझना होगा कि AAP कोई पारंपरिक पार्टी नहीं थी, बल्कि एक विचार था—और विचार को आदेशों से नहीं, संवाद से चलाया जाता है। उन्हें अपने पुराने और नए साथियों के साथ बैठकर एक नया रास्ता तैयार करना होगा, न कि “सुपर CM” की छवि में सिमट जाना होगा। अगर समय रहते यह झाड़ू फिर से नहीं गूंथी गई, तो वह दिन दूर नहीं जब इस झाड़ू में सिर्फ एक ही तिनका बचेगा—और तब सफाई नहीं, सिर्फ प्रतीक रह जाएगा। अब वक्त है—हर तिनके को फिर से जोड़ने का। वरना इतिहास गवाह है, बिखरी हुई झाड़ू न घर साफ कर पाती है, न राजनीति।
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AAP

AAP में भूचाल 7 सांसदों का इस्तीफा, ‘Operation Lotus’ का आरोप

आम आदमी पार्टी (AAP) में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक तूफान देखने को मिल रहा है। ताज़ा जानकारी के अनुसार पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद Raghav Chadha समेत कुल 7 सांसदों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इस खबर ने दिल्ली से लेकर पंजाब तक राजनीतिक हलचल तेज कर दी है और पार्टी के भीतर अस्थिरता की चर्चाएं बढ़ गई हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद AAP के वरिष्ठ नेता Sanjay Singh ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे महज इस्तीफा नहीं, बल्कि एक “सुनियोजित राजनीतिक साजिश” करार दिया है। संजय सिंह का कहना है कि पंजाब में आम आदमी पार्टी को कमजोर करने के लिए “Operation Lotus” जैसे प्रयास किए जा रहे हैं। अंदरूनी कलह या राजनीतिक रणनीति? 7 सांसदों के एक साथ इस्तीफे की खबर के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं—क्या यह पार्टी के भीतर बढ़ती असहमति का नतीजा है या फिर इसके पीछे कोई बड़ी राजनीतिक रणनीति काम कर रही है? हालांकि अभी तक पार्टी की ओर से इस पूरे मामले पर विस्तृत आधिकारिक सफाई नहीं आई है। कार्यकर्ताओं में चिंता, विपक्ष हमलावर इस घटनाक्रम के बाद आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं में चिंता का माहौल है। वहीं विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर AAP पर लगातार हमलावर हैं और इसे पार्टी की आंतरिक कमजोरी के रूप में पेश कर रहे हैं। पंजाब की राजनीति पर असर संभव राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह स्थिति आगे बढ़ती है तो इसका सीधा असर पंजाब की राजनीति पर पड़ सकता है, जहां AAP की सरकार पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रही है। संगठनात्मक स्तर पर भी पार्टी को झटका लग सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें AAP के आधिकारिक बयान पर टिकी हैं, जिससे यह साफ हो सके कि आखिर 7 सांसदों के इस्तीफे के पीछे असली वजह क्या है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Raghav Chadha

“आई एम द राइट मैन इन रॉन्ग पार्टी “:Raghav Chadha AAP से इस्तीफा और 7 सांसदों के साथ BJP में एंट्री

देश की राजनीति में इन दिनों आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा (Raghav Chadha) को लेकर बड़ी हलचल मची हुई है। सोशल मीडिया और कुछ राजनीतिक हलकों में यह दावा तेजी से फैल रहा है कि उन्होंने AAP से इस्तीफा दे दिया है और जल्द ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो सकते हैं। यहां तक कि यह भी कहा जा रहा है कि कुछ सांसद उनके साथ पार्टी बदल सकते हैं। हालांकि, अब तक इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। आखिर क्या है पूरा मामला? पिछले कुछ समय से AAP के भीतर संगठनात्मक बदलाव और नेतृत्व स्तर पर कुछ फैसलों के बाद राघव चड्ढा को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं। इसी बीच उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर तरह-तरह की अटकलें शुरू हो गईं। इन अटकलों ने तब और जोर पकड़ा जब सोशल मीडिया पर यह दावा वायरल हुआ कि Raghav Chadha AAP छोड़कर BJP में शामिल हो सकते हैं। कुछ पोस्ट्स में तो यह भी कहा गया कि उनके साथ कई सांसद भी पार्टी बदल सकते हैं। क्या राघव चड्ढा ने इस्तीफा दिया है? ताजा और उपलब्ध जानकारी के अनुसार: पहले भी उड़ चुकी हैं ऐसी खबरें यह पहली बार नहीं है जब राघव चड्ढा को लेकर ऐसी राजनीतिक चर्चाएं सामने आई हों। इससे पहले भी उनके पार्टी में स्थिति और भविष्य को लेकर कई तरह की अफवाहें फैल चुकी हैं, जिन्हें समय-समय पर खारिज किया गया है। राजनीतिक माहौल में बढ़ी अटकलें चुनावी माहौल और राजनीतिक सरगर्मियों के बीच इस तरह की खबरें अक्सर तेजी से फैलती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आता, तब तक इन दावों को केवल अटकल ही माना जाना चाहिए। राघव चड्ढा के AAP छोड़ने और BJP में जाने की खबरें फिलहाल अफवाह और अनकन्फर्म्ड रिपोर्ट्स हैं। किसी भी तरह के निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक बयान का इंतजार करना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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EPFO

PF Withdrawal New System EPFO 3.0 से बदल जाएगा पूरा प्रोसेस, होगा फास्ट और डिजिटल

कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) जल्द ही अपना नया सिस्टम EPFO 3.0 लागू करने जा रहा है, जिसके बाद PF (Provident Fund) निकालने की प्रक्रिया पहले से कहीं ज्यादा आसान, तेज और डिजिटल हो जाएगी। अब पैसे के लिए लंबा इंतजार और दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। UPI और ATM से सीधे PF Withdrawal नई व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब PF का पैसा सीधे UPI और ATM के जरिए निकाला जा सकेगा। यानी बैंक या ऑनलाइन क्लेम की लंबी प्रक्रिया खत्म होने की ओर है। यह बदलाव कर्मचारियों के लिए बड़ी सुविधा लेकर आएगा। मिनटों में PF का पैसा आपके अकाउंट में EPFO 3.0 में सिस्टम को पूरी तरह रियल-टाइम प्रोसेसिंग से जोड़ा जा रहा है। जैसे ही आपका क्लेम अप्रूव होगा, पैसा कुछ ही मिनटों में आपके बैंक अकाउंट या UPI में पहुंच जाएगा। इससे पहले जहां कई दिन लग जाते थे, अब इंतजार काफी कम हो जाएगा। आसान और सिंपल होंगे PF के नियम नए सिस्टम में PF निकासी के नियमों को भी सरल किया जा रहा है। अब अलग-अलग कैटेगरी की जटिलता को कम करके इसे कुछ ही मुख्य श्रेणियों में रखा जाएगा, जिससे प्रोसेसिंग तेज और आसान हो सके। Auto Settlement की सुविधा भी होगी EPFO 3.0 में कई मामलों में क्लेम अपने आप सेटल हो जाएगा। यानी बिना ज्यादा डॉक्यूमेंट और बिना देरी के आपका PF प्रोसेस हो जाएगा। यह सुविधा खासकर छोटे और सामान्य क्लेम्स के लिए फायदेमंद होगी। जरूरत पर तुरंत मिलेगा बड़ा हिस्सा नई व्यवस्था के तहत कर्मचारी अपने PF का लगभग 75% तक हिस्सा जरूरत पड़ने पर तुरंत निकाल सकेंगे, जबकि बाकी राशि सुरक्षित रहेगी ताकि रिटायरमेंट फंड पर असर न पड़े। EPFO 3.0 का मुख्य उद्देश्य क्या है? इस नए सिस्टम का मकसद PF प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और बैंकिंग जैसी आसान बनाना है, ताकि: कब तक लागू होगा EPFO 3.0? EPFO 3.0 को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा और आने वाले समय में यह पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा। इसके बाद PF निकालने का अनुभव बिल्कुल डिजिटल बैंकिंग जैसा हो जाएगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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पवन खेड़ा

Breaking कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को बड़ा झटका, कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज की

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा (Pawan Khera) को बड़ा कानूनी झटका लगा है। गुवाहाटी हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) की याचिका खारिज कर दी है। यह मामला असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma की पत्नी Riniki Bhuyan Sharma से जुड़ा है, जिन्होंने पवन खेड़ा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। क्यों दर्ज हुआ केस? कोर्ट ने क्या कहा? हाई कोर्ट ने कहा कि मामला गंभीर आरोपों से जुड़ा है, इसलिए अग्रिम राहत नहीं दी जा सकती कोर्ट के फैसले के बाद अब गिरफ्तारी का खतरा बढ़ गया है पहले क्या हुआ था? अब आगे क्या? यह मामला सिर्फ एक कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि राजनीतिक बयानबाज़ी बनाम कानून की बड़ी टक्कर बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह केस नेशनल पॉलिटिक्स में बड़ा मुद्दा बन सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Amrit Bharat

UP to Maharashtra Train Varanasi से 2 Amrit Bharat Trains लॉन्च, यात्रियों को बड़ी राहत

रेल यात्रियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। 28 अप्रैल को वाराणसी से दो नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों की शुरुआत होने जा रही है। इस पहल से उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच सफर पहले से ज्यादा आसान, तेज और किफायती हो जाएगा। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन ट्रेनों को हरी झंडी दिखा सकते हैं। खास बात यह है कि लंबे समय से यूपी से महाराष्ट्र तक सीधी ट्रेन की मांग कर रहे यात्रियों के लिए यह शुरुआत किसी राहत से कम नहीं है। कौन से रूट पर चलेंगी ट्रेनें? नई अमृत भारत ट्रेनों का मुख्य रूट वाराणसी से पुणे (हडपसर) तक माना जा रहा है। यह रूट उन यात्रियों के लिए बेहद अहम है, जो नौकरी, पढ़ाई या धार्मिक कारणों से इन दोनों राज्यों के बीच यात्रा करते हैं। संभावित स्टॉपेज (ठहराव) यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ट्रेन कई बड़े स्टेशनों पर रुकेगी, जिनमें शामिल हैं: (अंतिम सूची रेलवे की आधिकारिक घोषणा के बाद स्पष्ट होगी) यात्रियों को क्या मिलेगा फायदा? इन ट्रेनों के शुरू होने से: Amrit Bharat Express क्या है? अमृत भारत एक्सप्रेस भारतीय रेलवे की एक नई सुपरफास्ट नॉन-एसी ट्रेन श्रेणी है। इसमें आम यात्रियों को ध्यान में रखते हुए बेहतर सीटिंग, मोबाइल चार्जिंग पॉइंट, और CCTV जैसी सुविधाएं दी गई हैं, ताकि लंबा सफर भी आरामदायक बन सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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GST

Delhi GST 162 अधिकारियों का तबादला, अनियमितताओं पर सरकार का बड़ा Action

दिल्ली के जीएसटी (GST) विभाग में अचानक हुए बड़े प्रशासनिक फेरबदल ने हलचल मचा दी है। विभाग में कुल 162 अधिकारियों और कर्मचारियों का ट्रांसफर किया गया है। इस कदम को सिर्फ एक सामान्य तबादला नहीं, बल्कि सिस्टम को सुधारने की बड़ी पहल के तौर पर देखा जा रहा है। क्या है पूरा मामला? हाल ही में विभाग के निरीक्षण के दौरान कामकाज में कई खामियां सामने आईं। कुछ जगहों पर अनियमितताओं की शिकायतें भी मिलीं, जबकि कई अधिकारी लंबे समय से एक ही पद और स्थान पर तैनात थे। ऐसे में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए एक साथ इतने बड़े स्तर पर ट्रांसफर का फैसला लिया। किन-किन पदों पर हुआ बदलाव? इस फेरबदल में विभाग के लगभग हर स्तर को शामिल किया गया है: यह दिखाता है कि बदलाव सिर्फ ऊपरी स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम को रीसेट करने की कोशिश की जा रही है। क्यों जरूरी था यह फैसला? सूत्रों के मुताबिक, यह कदम कई कारणों से उठाया गया: इन सभी मुद्दों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने यह बड़ा फैसला लिया, ताकि विभाग की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाया जा सके। आम लोगों पर क्या होगा असर? इस फैसले का असर सिर्फ विभाग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम करदाताओं (taxpayers) को भी इसका फायदा मिल सकता है: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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रायपुर में 13 पुलिसकर्मियों का सम्मान, नवजात को बचाने से लेकर मोबाइल लुटेरे को पकड़ने तक की कार्रवाई

यातायात व्यवस्था संभालने के साथ अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने वाले 13 पुलिसकर्मियों को पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने सम्मानित किया। इन पुलिसकर्मियों ने ड्यूटी के दौरान लावारिस नवजात को अस्पताल पहुंचाया, मोबाइल छीनकर भागने वाले आरोपी को पकड़ा और चाकू लहराकर लोगों को डराने वाले ई-रिक्शा चालक को भी गिरफ्तार कराया। सम्मानित पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति पत्र और नकद पुरस्कार दिया गया। पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने कहा कि यातायात व्यवस्था संभालना पुलिस की जिम्मेदारी है। इसके साथ ही ड्यूटी के दौरान अपराध या संदिग्ध गतिविधि नजर आने पर तत्काल कार्रवाई करना भी जरूरी है। बिना नंबर की बाइक रोकी, मोबाइल छीनने का आरोपी पकड़ा 14 अक्टूबर को बंजारी मंदिर के पास यातायात पुलिस ने बिना नंबर प्लेट की बाइक को रोका। इस दौरान धनीराम चंद्रा ने बाइक चालक पर मोबाइल और 700 रुपये छीनने का आरोप लगाया। तलाशी के दौरान पुलिस को मोबाइल मिला, जिसके बाद आरोपी करण पाल को पकड़ लिया गया। इस कार्रवाई में प्रधान आरक्षक विजय मार्कण्डेय समेत पांच पुलिसकर्मी शामिल थे। उर्स मेले में चाकू लहराने वाला ई-रिक्शा चालक पकड़ा 8 अक्टूबर को एवरग्रीन चौक पर उर्स मेले के दौरान ड्यूटी कर रहे आरक्षक ललित कुमार साहू ने चाकू लहराकर लोगों को डराने वाले ई-रिक्शा चालक को पीछा कर पकड़ लिया। इसके बाद आरोपी को ई-रिक्शा समेत गोलबाजार पुलिस के हवाले कर दिया गया। नकली शराब की सूचना पर जांच, मिला चोरी का मोबाइल 14 अक्टूबर को पंडरी शराब दुकान के पास नकली शराब बेचने की सूचना मिलने पर यातायात पुलिस ने एक संदिग्ध को पकड़ा। तलाशी के दौरान उसके पास मोबाइल मिला। जांच में मोबाइल चोरी का होने की जानकारी सामने आई। इस कार्रवाई में निरीक्षक अमित पद्मशाली, प्रधान आरक्षक श्रीकांत मिश्रा और आरक्षक रमेंद्र वर्मा शामिल थे। नवजात को छोड़कर भाग रहे व्यक्ति को पकड़ा 13 अक्टूबर को राजेंद्र नगर अंडरब्रिज के पास मदर टेरेसा मिशनरीज के गेट पर एक नवजात को छोड़कर भाग रहे गोंदिया निवासी रफीक शेख को यातायात पुलिस ने पकड़ लिया। पुलिसकर्मियों ने नवजात को नवकार अस्पताल पहुंचाया और आरोपी को टिकरापारा थाने के सुपुर्द कर दिया। इस कार्रवाई में निरीक्षक गोविंद यादव, प्रधान आरक्षक कुलेश्वर राजपूत और आरक्षक सुनील क्षत्रीय, गोपाल सिंह राजपूत व विजय सेन शामिल थे। पुलिस कमिश्नर ने बढ़ाया पुलिसकर्मियों का उत्साह इन सभी मामलों में तत्परता दिखाने वाले कुल 13 पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति पत्र और नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने कहा कि पुलिसकर्मियों की सतर्कता और समय पर की गई कार्रवाई से लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।

SECL दीपका खदान प्रभावितों की मांगों पर बोर्ड लेगा फैसला, 500 रजिस्ट्री धारकों के मुआवजे का मामला अटका

छत्तीसगढ़ के हरदीबाजार में SECL की दीपका खदान विस्तार परियोजना से प्रभावित भू-विस्थापितों ने अधिग्रहित जमीन की खरीदी-बिक्री के बाद बने मकानों के मुआवजे में कटौती का मुद्दा उठाया है। प्रभावितों ने मांग की है कि 500 रजिस्ट्री धारकों को भी 100 प्रतिशत सोलेशियम के साथ मुआवजा दिया जाए। इस मामले में अंतिम निर्णय SECL कोल कंपनी का बोर्ड लेगा। एरिया प्रबंधन ने बोर्ड के अधिकारियों से चर्चा कराने का आश्वासन दिया है। मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने से 16 अक्टूबर को प्रस्तावित CMD कार्यालय के घेराव आंदोलन की तैयारी चल रही थी। हालांकि, SECL प्रबंधन के साथ करीब चार घंटे चली त्रिपक्षीय वार्ता में सकारात्मक चर्चा के बाद भू-विस्थापितों ने फिलहाल आंदोलन टाल दिया है। अन्य मांगों पर भी प्रबंधन ने निर्णय के लिए समय मांगा है। विधायक की मौजूदगी में हुई त्रिपक्षीय वार्ता खदान प्रभावितों और SECL प्रबंधन के बीच पाली SDM रोहित सिंह की मौजूदगी में बैठक हुई। इसकी अध्यक्षता कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल ने की। 16 अक्टूबर को प्रस्तावित CMD कार्यालय के घेराव की सूचना मिलने के बाद एरिया प्रबंधन ने वार्ता बुलाई थी। SECL दीपका सभागार में हुई बैठक में भू-विस्थापितों ने अपनी मांगें अधिकारियों के सामने रखीं। इससे पहले 21 सितंबर को CMD मुख्यालय में भी मांगों पर चर्चा हुई थी, लेकिन प्रभावितों के मुताबिक उस समय कोई ठोस जवाब नहीं मिला। इसके बाद आंदोलन की चेतावनी दिए जाने पर प्रबंधन दो बार समय मांग चुका था। बैठक में ग्राम पंचायत हरदीबाजार के सरपंच लोकेश्वर कंवर ने भू-विस्थापितों के हित से जुड़े छह बिंदु रखे। सभी मुद्दों पर क्रमवार चर्चा की गई। उपसरपंच रेखा जायसवाल ने बहू के नाम पर नापी किए गए मकानों के लिए भी 100 प्रतिशत सोलेशियम के साथ मुआवजा देने की मांग उठाई। प्रबंधन ने इस विषय पर चर्चा के बाद सकारात्मक निर्णय लेने का भरोसा दिलाया। 1800 मकानों को छह महीने में हटाने पर सहमति बैठक में हरदीबाजार के विस्थापन और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। जानकारी के मुताबिक, प्रभावितों ने बसाहट नहीं लेने पर सहमति जताई है। छह महीने के भीतर नापी किए गए करीब 1800 मकानों को तोड़कर दूसरी जगह बसने वाले प्रभावितों को बसाहट के एवज में 15 लाख रुपये अतिरिक्त देने की बात सामने आई है। वहीं, SECL में नियमित रोजगार के लिए 52 डिसमिल जमीन का कटऑफ तय किया गया है। यानी इससे कम जमीन के मालिकाना हक वाले प्रभावितों को कंपनी में नियमित रोजगार नहीं मिलेगा। इसके अलावा, हरदीबाजार की 212 एकड़ जमीन का अधिग्रहण SECL नहीं कर रही है। कंपनी ने इसकी वजह संबंधित जमीन पर कोयला उपलब्ध नहीं होना बताई है। 2004 और 2010 में दो चरणों में हुआ था अधिग्रहण दीपका खदान के विस्तार के लिए हरदीबाजार गांव की जमीन का अधिग्रहण वर्ष 2004 और 2010 में दो चरणों में किया गया था। आरोप है कि अधिग्रहण के बाद भी तहसील कार्यालय में रजिस्ट्री के जरिए जमीन की खरीदी-बिक्री होती रही और इसके बाद वहां मकान भी बनाए गए। SECL ने 26 अगस्त 2024 को अंतिम ड्रोन सर्वे कराया था। कंपनी के प्रावधानों के मुताबिक, इस सर्वे से पहले बने मकानों के लिए सोलेशियम सहित मुआवजा दिया जा रहा है, जबकि ड्रोन सर्वे के बाद बने मकानों के लिए 40 प्रतिशत सिंगल मुआवजे का प्रावधान बताया गया है। इसी अंतर के कारण अधिग्रहण के बाद जमीन खरीदने वाले रजिस्ट्री धारक 100 प्रतिशत सोलेशियम के साथ मुआवजे की मांग कर रहे हैं। प्रभावितों का कहना है कि 26 अगस्त 2024 के अंतिम ड्रोन सर्वे को मकानों के मुआवजे के लिए कटऑफ माना जाना चाहिए। अब SECL बोर्ड के फैसले पर टिकी नजर बैठक में SECL के जीएम शरद तिवारी, गेवरा जीएम अशोक कुमार और CMD मुख्यालय के लैंड एक्विजिशन एंड रिहैबिलिटेशन (L&R) विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा ग्राम पंचायत रेंकी के सरपंच तीजराम उर्रे, उपसरपंच शिव यादव, पूर्व जनपद सदस्य अनिल टंडन, जिला पंचायत उपाध्यक्ष प्रतिनिधि मुकेश जायसवाल और अन्य लोग शामिल हुए। फिलहाल 500 रजिस्ट्री धारकों के मुआवजे पर अंतिम फैसला SECL बोर्ड को लेना है। अन्य मांगों पर भी प्रबंधन ने समय मांगा है। ऐसे में भू-विस्थापितों को अब कंपनी के अगले निर्णय का इंतजार है।

WhatsApp का नया फीचर: बिना अकाउंट और ऐप के भी कर सकेंगे कॉल, जानें कैसे करेगा काम

WhatsApp ने यूजर्स के लिए ‘गेस्ट कॉलिंग’ फीचर पेश किया है। इसकी मदद से अब ऐसे लोगों को भी WhatsApp कॉल में शामिल किया जा सकेगा, जिनके पास न तो WhatsApp अकाउंट है और न ही उनके मोबाइल या कंप्यूटर में ऐप इंस्टॉल है। इसके लिए सिर्फ कॉल का लिंक शेयर करना होगा। गेस्ट यूजर वेब ब्राउजर के जरिए कॉल से जुड़ सकेंगे। इस फीचर से पर्सनल बातचीत के साथ ऑनलाइन मीटिंग करना भी आसान हो सकता है। आइए, सवाल-जवाब के जरिए जानते हैं WhatsApp के गेस्ट कॉलिंग फीचर से जुड़ी जरूरी बातें। सवाल 1. WhatsApp का गेस्ट कॉलिंग फीचर क्या है? जवाब: गेस्ट कॉलिंग फीचर की मदद से आप ऐसे व्यक्ति को भी WhatsApp कॉल में शामिल कर सकते हैं, जो इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं करता। इसके लिए सामने वाले व्यक्ति को न तो ऐप डाउनलोड करना होगा और न ही अकाउंट बनाना पड़ेगा। कॉल शुरू करने वाला यूजर लिंक शेयर करेगा और गेस्ट उस लिंक के जरिए कॉल में शामिल हो सकेगा। सवाल 2. बिना ऐप इंस्टॉल किए कॉल से कैसे जुड़ेंगे? जवाब: गेस्ट यूजर अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर Google Chrome या Safari जैसे वेब ब्राउजर में कॉल लिंक खोलकर जुड़ सकता है। इसके लिए डिवाइस में WhatsApp ऐप इंस्टॉल होना जरूरी नहीं होगा। हालांकि, कॉल से जुड़ने के लिए जरूरी ब्राउजर और डिवाइस सपोर्ट उपलब्ध होना चाहिए। सवाल 3. गेस्ट यूजर्स को कॉल के दौरान कौन-कौन से फीचर्स मिलेंगे? जवाब: गेस्ट यूजर्स को कॉल के दौरान कुछ प्रमुख सुविधाएं मिलेंगी। इनमें शामिल हैं: इन सुविधाओं से ऑनलाइन चर्चा और मीटिंग में हिस्सा लेना आसान हो सकता है। सवाल 4. क्या गेस्ट कॉलिंग फीचर सुरक्षित है? जवाब: WhatsApp के मुताबिक, गेस्ट कॉलिंग के जरिए होने वाली कॉल भी एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन से सुरक्षित रहेंगी। इसका उद्देश्य कॉल में शामिल लोगों के बीच बातचीत को निजी बनाए रखना है, ताकि कोई अनधिकृत तीसरा पक्ष उसे सुन या एक्सेस न कर सके। सवाल 5. क्या कोई भी व्यक्ति लिंक से सीधे कॉल में शामिल हो सकता है? जवाब: नहीं, गेस्ट यूजर को कॉल में शामिल करने के लिए होस्ट की मंजूरी जरूरी होगी। जब कोई व्यक्ति लिंक खोलकर कॉल से जुड़ने की कोशिश करेगा, तो उसे पहले वेटिंग रूम में रखा जाएगा। कॉल शुरू करने वाला होस्ट मंजूरी देने के बाद ही उसे कॉल में शामिल कर सकेगा। सवाल 6. गेस्ट यूजर्स पर क्या पाबंदियां होंगी? जवाब: कॉल की सुरक्षा और निजता बनाए रखने के लिए गेस्ट यूजर्स पर कुछ सीमाएं रहेंगी। वे: इसके अलावा, होस्ट किसी भी समय गेस्ट यूजर को कॉल से बाहर कर सकता है। सवाल 7. इस फीचर से यूजर्स को क्या फायदा होगा? जवाब: गेस्ट कॉलिंग फीचर से उन लोगों के साथ बातचीत करना आसान होगा, जो WhatsApp इस्तेमाल नहीं करते या अपने डिवाइस में नया ऐप इंस्टॉल नहीं करना चाहते। इसके प्रमुख फायदे हैं: सवाल 8. Google Calendar और Outlook के साथ क्या नया अपडेट आएगा? जवाब: दी गई जानकारी के मुताबिक, Meta ने Google Calendar और Outlook के साथ WhatsApp कॉल इंटीग्रेशन की योजना बताई है। इसके जरिए यूजर्स कैलेंडर इनवाइट के साथ WhatsApp कॉल का लिंक भी साझा कर सकेंगे। इस सुविधा के लिए WhatsApp प्लगइन इंस्टॉल करने और अकाउंट कनेक्ट करने की जरूरत हो सकती है। इसकी उपलब्धता और लॉन्च की तारीख से जुड़ी जानकारी आधिकारिक अपडेट के आधार पर देखनी चाहिए। क्या होता है एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन? एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन एक सुरक्षा तकनीक है, जिसमें बातचीत को इस तरह सुरक्षित किया जाता है कि उसे केवल अधिकृत प्रतिभागी ही समझ सकें। WhatsApp कॉल में इसका उद्देश्य कॉल करने वाले और कॉल रिसीव करने वाले लोगों की बातचीत को निजी रखना है। इससे सेवा देने वाली कंपनी समेत अन्य पक्षों के लिए बातचीत की सामग्री तक पहुंचना मुश्किल होता है। निष्कर्ष: WhatsApp का गेस्ट कॉलिंग फीचर उन लोगों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है, जिन्हें बिना अकाउंट बनाए किसी कॉल या ऑनलाइन मीटिंग में शामिल होना है। हालांकि, फीचर की उपलब्धता और इससे जुड़ी शर्तों की पुष्टि WhatsApp के आधिकारिक अपडेट से करना बेहतर होगा।

भारत पर 100% टैरिफ लगाने को लेकर 10 दिन में फैसला ले सकते हैं ट्रम्प, अमेरिकी दूत का दावा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत पर 100% टैरिफ लगाने को लेकर अगले करीब 10 दिनों में फैसला ले सकते हैं। अमेरिकी दूत सर्जियो गोर ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत को प्रतिबंधों से छूट मिलेगी या नहीं, इसका फैसला भी ट्रम्प ही करेंगे। रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर टैरिफ लगाने से जुड़े अमेरिकी कानून के बाद भारत पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है। हालांकि, अब तक भारत पर ऐसे प्रतिबंध लगाए जाने की घोषणा नहीं हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी संसद ने 16 सितंबर को रूस से तेल-गैस खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगाने से जुड़ा विधेयक पारित किया था। ट्रम्प ने 18 सितंबर को इसे मंजूरी दे दी, लेकिन किसी देश पर प्रतिबंध लगाने का फैसला नहीं किया। कानून के तहत 30 दिनों के भीतर इस संबंध में निर्णय लिया जाना जरूरी बताया गया है। कानून में प्रतिबंध लगाने के तीन आधार सर्जियो गोर ने कहा कि अमेरिकी संसद ने प्रतिबंधों के लिए तीन श्रेणियां तय की हैं। इनमें तेल खरीदना, गैस खरीदना और प्रतिबंधों से बचने में रूस की मदद करना शामिल है। उन्होंने कहा कि इन प्रतिबंधों का निशाना किसी एक देश को बनाना नहीं है। गोर के मुताबिक, संबंधित श्रेणियों में आने वाले देशों और पक्षों की पहचान आंकड़ों के आधार पर की जाती है। भारत भी कई अन्य देशों के साथ इनमें से एक श्रेणी में आता है। भारत को किसी तरह की छूट मिलेगी या नहीं, यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र में होगा। अमेरिका में डीजल महंगा, रूस से खरीद की तैयारी रिपोर्ट के अनुसार, ईरान युद्ध के बाद अमेरिका में डीजल की कीमत बढ़कर 6.28 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है। युद्ध से पहले इसकी कीमत करीब 3.70 डॉलर प्रति गैलन थी। ईंधन की बढ़ती कीमतें अमेरिकी प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई हैं। इसी बीच, ट्रम्प ने रूस से डीजल खरीदने पर लगी रोक को 7 अप्रैल 2027 तक हटाने का फैसला लिया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रूस पहले 3 लाख टन से ज्यादा डीजल भेजेगा। इसके बाद नवंबर में 5 लाख टन और फिर 10 लाख टन डीजल की आपूर्ति की जाएगी। आगे चलकर आपूर्ति की मात्रा 30 लाख टन तक पहुंचने की बात कही गई है। अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले ईंधन की कीमतें एक अहम मुद्दा बनी हुई हैं। ऐसे में रूस से डीजल खरीदने के फैसले को कीमतों पर दबाव कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बातचीत में प्रगति सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर कहा कि बातचीत में काफी प्रगति हुई है और बड़े मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। अब कुछ छोटे मुद्दों पर चर्चा बाकी है। दोनों देशों के बीच इस समझौते को लेकर करीब डेढ़ साल से बातचीत जारी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत के साथ रक्षा, आईटी, डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना चाहता है। गोर ने भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के विकास के लिए एक बड़ा केंद्र बनने की क्षमता वाला देश बताया। उनके मुताबिक, भारतीय और अमेरिकी टेक कंपनियों के बीच साझेदारी से दोनों देशों को लाभ मिल सकता है। भारत के लिए क्यों अहम है यह फैसला? अमेरिका की ओर से 100% टैरिफ लगाए जाने की स्थिति में भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर असर पड़ सकता है। इससे दोनों देशों के बीच चल रही ट्रेड डील की बातचीत भी महत्वपूर्ण हो जाएगी। फिलहाल भारत को छूट मिलेगी या नहीं, इस पर अंतिम निर्णय का इंतजार है। आने वाले दिनों में ट्रम्प का फैसला दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों और रूस से भारत की ऊर्जा खरीद को लेकर अहम साबित हो सकता है।

चेतन शर्मा बोले- गेंदबाजों को भी मिले मददगार पिचें, बोले- इतना मत मारिए कि मैदान पर लौटना ही न चाहें

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी और BCCI के पूर्व मुख्य चयनकर्ता चेतन शर्मा ने टी-20 क्रिकेट में बल्लेबाजों के अनुकूल पिचों को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) से ऐसी पिचें तैयार करने की अपील की, जिन पर गेंदबाजों को भी मदद मिल सके। उनका कहना है कि बल्लेबाजों के पक्ष में ज्यादा झुकी पिचों से बल्ले और गेंद के बीच संतुलन बिगड़ रहा है। नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान चेतन शर्मा ने कहा, “मैं मानता हूं कि गेंदबाज रन देने के लिए मैदान पर आते हैं, लेकिन उन्हें इतना मत मारिए कि वे दोबारा मैदान पर आना ही न चाहें।” उन्होंने जोर दिया कि इंटरनेशनल क्रिकेट में भी ऐसी पिचें होनी चाहिए, जहां गेंदबाज आक्रामक बल्लेबाजों का मुकाबला कर सकें। चेतन के मुताबिक, घरेलू क्रिकेट में गेंदबाजों को मदद देने वाली पिचें तैयार करने की तरह इंटरनेशनल मैचों में भी इस दिशा में ध्यान दिया जाना चाहिए। भारत-वेस्टइंडीज टी-20 सीरीज में चौकों-छक्कों की बरसात भारत और वेस्टइंडीज के बीच जारी टी-20 सीरीज में अब तक खेले गए चार मुकाबलों में बड़े स्कोर देखने को मिले हैं। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, सीरीज में अब तक 98 छक्के और 104 चौके लग चुके हैं। दोनों टीमों की आठ पारियों में छह बार 200 रन से ज्यादा का स्कोर बना है। सीरीज के दूसरे टी-20 मुकाबले में भारत ने 249 रन बनाए थे। इसके जवाब में वेस्टइंडीज ने नौ गेंद शेष रहते लक्ष्य हासिल कर लिया था। तीसरे टी-20 में भारतीय टीम ने 223 रन बनाए और वेस्टइंडीज को 209 रन पर रोक दिया। वहीं, चौथे मुकाबले में वेस्टइंडीज ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 247 रन बनाए, जबकि भारतीय टीम जवाब में 223 रन ही बना सकी। पहले मुकाबले में भी भारत ने 172 रन का लक्ष्य 14.4 ओवर में हासिल कर लिया था। लगातार बड़े स्कोर और आक्रामक बल्लेबाजी के बीच चेतन शर्मा की पिचों को लेकर यह टिप्पणी सामने आई है। रेड-बॉल क्रिकेट को भी जरूरी मानते हैं चेतन शर्मा चेतन शर्मा ने टी-20 क्रिकेट की बढ़ती लोकप्रियता को स्वीकार किया, लेकिन युवा खिलाड़ियों के विकास के लिए रेड-बॉल क्रिकेट को भी जरूरी बताया। उन्होंने कहा, “मैं पुराने विचारों वाला व्यक्ति हूं। मेरा मानना है कि रेड-बॉल क्रिकेट सभी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।” चेतन के अनुसार, युवा खिलाड़ियों को रेड-बॉल क्रिकेट में खेलने के पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए। उन्होंने बताया कि उनकी मुलाकात ऐसे कई कोचों से हुई है, जो इस फॉर्मेट पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने खिलाड़ियों को सलाह दी कि उन्हें जो भी अवसर मिलें, उनका पूरा उपयोग करना चाहिए। पिचों पर संतुलन और खिलाड़ियों के विकास पर जोर चेतन शर्मा की टिप्पणी टी-20 क्रिकेट में बल्लेबाजों के बढ़ते दबदबे और गेंदबाजों की भूमिका को लेकर बहस के बीच आई है। उनका मानना है कि ऐसी पिचें तैयार करना जरूरी है, जहां बल्लेबाजों को रन बनाने के अवसर मिलें, लेकिन गेंदबाजों के पास भी विकेट लेने और मुकाबले में बने रहने के मौके हों। इसके साथ ही उन्होंने रेड-बॉल क्रिकेट को युवा खिलाड़ियों के तकनीकी विकास के लिए अहम बताया।

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