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UGC

UGC New Rules विवाद शिक्षा नीति से सियासत तक, बीजेपी में असंतोष और विपक्ष की चुप्पी

University Grants Commission (UGC) के नए नियम इन दिनों सिर्फ शिक्षा जगत में ही नहीं, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का बड़ा विषय बने हुए हैं। दिलचस्प बात यह है कि जहां आमतौर पर ऐसे मुद्दों पर विपक्ष सबसे पहले मोर्चा खोलता है, इस बार तस्वीर उलटी है। सत्तारूढ़ बीजेपी के भीतर ही असहजता और विरोध के स्वर उभर रहे हैं, जबकि विपक्ष अपेक्षाकृत शांत दिखाई दे रहा है। यह पूरा विवाद अब केवल नियमों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संघीय ढांचे, राज्यों के अधिकार और आने वाले चुनावों की राजनीति से भी जुड़ गया है। UGC New Rules पर बीजेपी के अंदर विरोध क्यों? UGC के नए नियमों को लेकर सबसे बड़ा सवाल राज्यों की भूमिका पर उठ रहा है। शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची (Concurrent List) में आती है, यानी इसमें केंद्र और राज्य दोनों को अधिकार हैं। लेकिन नए प्रावधानों से यह धारणा बन रही है कि केंद्र सरकार का दखल राज्यों के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा व्यवस्था में बढ़ जाएगा। खास तौर पर कुलपतियों की नियुक्ति, प्रशासनिक ढांचे और अकादमिक स्वायत्तता जैसे मुद्दों पर कई राज्य सरकारें खुद को असहज महसूस कर रही हैं। यही वजह है कि बीजेपी-शासित राज्यों के कुछ नेता भी खुलकर या अंदरखाने इन नियमों पर सवाल उठा रहे हैं। उनकी चिंता सिर्फ सैद्धांतिक नहीं है। ज़मीनी हकीकत यह है कि विश्वविद्यालयों में अगर शिक्षक संगठनों या छात्र समूहों का विरोध तेज़ होता है, तो उसका सीधा असर राज्य सरकारों और स्थानीय नेतृत्व पर पड़ेगा। चुनावी सालों में कोई भी नेता ऐसा जोखिम नहीं लेना चाहता। पार्टी के भीतर एक और खींचतान भी साफ दिखती है। एक धड़ा मानता है कि उच्च शिक्षा में एकरूपता और तेज़ सुधार के लिए केंद्रीकरण ज़रूरी है। वहीं दूसरा धड़ा इसे “ओवर-रेगुलेशन” और संघीय ढांचे पर हमला बता रहा है। इसी टकराव ने बीजेपी के अंदर विरोध को हवा दी है। विपक्ष की चुप्पी के मायने क्या हैं? विपक्ष की चुप्पी पहली नज़र में अजीब लगती है, लेकिन इसके पीछे एक सोची-समझी रणनीति दिखती है। पहली बात, UGC के नियम आम जनता के लिए तकनीकी और जटिल हैं। यह ऐसा मुद्दा नहीं है जो तुरंत भावनात्मक प्रतिक्रिया पैदा करे। विपक्ष शायद इंतज़ार कर रहा है कि शिक्षक संगठन, छात्र संघ या राज्य सरकारें पहले खुलकर विरोध करें, ताकि इसे जन-आंदोलन का रूप दिया जा सके। दूसरी बात, विपक्ष बीजेपी के भीतर उभर रही दरार को अपने आप गहराने देना चाहता है। अगर सत्तारूढ़ पार्टी अपने ही फैसले पर बंटी हुई दिखती है, तो विपक्ष के लिए यह राजनीतिक रूप से फायदेमंद है। ऐसे में सीधे हमला करने के बजाय “वेट एंड वॉच” की नीति ज्यादा सुरक्षित मानी जा रही है। तीसरी वजह राज्यों की राजनीति से जुड़ी है। तमिलनाडु और केरल जैसे विपक्ष-शासित राज्यों में केंद्र के शिक्षा में हस्तक्षेप का विरोध पहले से ही होता रहा है। वहां यह मुद्दा नया नहीं है। राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष फिलहाल महंगाई, बेरोज़गारी, जाति जनगणना और किसानों जैसे हाई-वोल्टेज मुद्दों पर ज्यादा फोकस कर रहा है। राजनीति में इसके संकेत क्या हैं? इस पूरे विवाद से तीन बड़े संकेत मिलते हैं: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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India

India-EU Summit 2026 राजघाट विज़िट से लेकर Trade Deal तक, दिल्ली में सुरक्षा और ट्रैफिक अलर्ट

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के रिश्तों में आज का दिन खास बन गया। राजधानी दिल्ली में 16वां India-EU Summit आयोजित हो रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और EU के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी ने माहौल को बेहद महत्वपूर्ण बना दिया है। एक तरफ राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि, तो दूसरी ओर ट्रेड डील और रणनीतिक साझेदारी पर बड़ी बातचीत — आज का हर पल सुर्खियों में है। राजघाट दौरा: सुरक्षा के चलते ट्रैफिक पर असर सुबह EU नेताओं के राजघाट पहुंचने से पहले ही दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने कई इलाकों में ट्रैफिक कर्फ्यू और डायवर्जन लागू कर दिए थे।बहादुर शाह ज़फर मार्ग, ITO चौक, दिल्ली गेट, शांतिवन चौक, IP फ्लाईओवर और असफ अली रोड जैसे रास्तों पर कुछ घंटों तक गाड़ियों की आवाजाही सीमित रही। राजघाट में EU प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। यह पल सिर्फ औपचारिक नहीं था, बल्कि भारत-EU संबंधों में सम्मान और साझेदारी का प्रतीक भी माना गया। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने पहले ही यात्रियों से अपील की थी कि वे सुबह के समय इन मार्गों से बचें और वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करें। कई लोगों को दफ्तर और स्कूल पहुंचने में थोड़ी परेशानी हुई, लेकिन ज्यादातर लोगों ने इसे एक अहम अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के लिए जरूरी कदम बताया। Summit की बड़ी तस्वीर: रिश्तों में नया अध्याय राजघाट कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डर लेयेन से मुलाकात की। बातचीत में व्यापार, निवेश, क्लाइमेट चेंज, टेक्नोलॉजी, डिफेंस और ग्लोबल सिक्योरिटी जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। उर्सुला वॉन डर लेयेन ने कहा कि“एक मजबूत और सफल भारत पूरी दुनिया के लिए स्थिरता और समृद्धि लेकर आता है।”उनके इस बयान को दोनों पक्षों के बीच बढ़ते भरोसे का संकेत माना जा रहा है। Free Trade Agreement: दो दशकों बाद बड़ी उम्मीद इस शिखर सम्मेलन का सबसे बड़ा फोकस रहा India-EU Free Trade Agreement (FTA)। करीब 20 साल से अटका यह समझौता अब अंतिम दौर में पहुंचता दिख रहा है। सूत्रों के मुताबिक, अगर यह डील अगले कुछ महीनों में औपचारिक रूप से साइन हो जाती है, तो इससे भारत के मैन्युफैक्चरिंग, IT, फार्मा और टेक्सटाइल सेक्टर को बड़ा फायदा मिल सकता है। EU पहले से ही भारत का एक प्रमुख ट्रेड पार्टनर है, और यह समझौता रिश्तों को नई ऊंचाई दे सकता है। Republic Day से Summit तक: मजबूत होता भरोसा गौर करने वाली बात यह भी है कि EU नेताओं ने 26 जनवरी को भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर हिस्सा लिया था। परेड देखने के बाद ही यह साफ हो गया था कि इस बार का India-EU Summit सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि भविष्य की बड़ी साझेदारी की नींव रखने वाला है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Uttarakhand

Uttarakhand Temple बदरीनाथ-केदारनाथ में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक का प्लान

उत्तराखंड (Uttarakhand ) के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों बदरीनाथ धाम और केदारनाथ धाम को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आ सकता है। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने के लिए एक औपचारिक प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही है। यह प्रस्ताव समिति की आगामी बोर्ड बैठक में पेश किया जाएगा। BKTC के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के अनुसार, इस कदम का मकसद देवभूमि उत्तराखंड की धार्मिक परंपराओं और मंदिरों की पवित्रता को बनाए रखना है। उनका कहना है कि परंपरागत रूप से इन धामों में गैर-हिंदुओं का प्रवेश नहीं होता था, लेकिन समय के साथ यह नियम ढीला पड़ गया। अब समिति इसे फिर से सख्ती से लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। Gangotri Dham में पहले ही लागू हो चुका है बैन इस फैसले की पृष्ठभूमि में गंगोत्री धाम का उदाहरण भी अहम माना जा रहा है। वहां पहले ही गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक लगाई जा चुकी है। श्री गंगोत्री मंदिर समिति ने यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया था और इसका उद्देश्य मंदिर की धार्मिक गरिमा की रक्षा बताया गया था। अब गंगोत्री के बाद बदरीनाथ-केदारनाथ में भी इसी तरह के नियम लागू करने पर गंभीरता से विचार हो रहा है। इससे संकेत मिलते हैं कि चारधाम यात्रा से जुड़े प्रमुख स्थलों पर प्रवेश नियम और सख्त हो सकते हैं। अभी फैसला नहीं, सिर्फ प्रस्ताव महत्वपूर्ण बात यह है कि यह अभी सिर्फ एक प्रस्ताव है, कोई अंतिम निर्णय नहीं। BKTC की बोर्ड बैठक में इस पर चर्चा होगी और यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो आगे राज्य सरकार और प्रशासन के साथ समन्वय कर इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। समिति के अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तरह का नियम लागू करने से पहले कानूनी पहलुओं और सामाजिक प्रभावों पर भी विचार किया जाएगा। समर्थन और विरोध, दोनों तरफ प्रतिक्रियाएँ इस प्रस्ताव को लेकर प्रतिक्रियाएँ मिलीजुली हैं।समर्थकों का कहना है कि इससे मंदिरों की पवित्रता और परंपराएं सुरक्षित रहेंगी। उनका मानना है कि चारधाम जैसे तीर्थस्थलों को केवल श्रद्धा और आस्था के नजरिए से देखा जाना चाहिए। वहीं आलोचकों का तर्क है कि ऐसा कदम सामाजिक समावेशन और धार्मिक सौहार्द के खिलाफ जा सकता है। कुछ लोग इसे संवैधानिक दृष्टि से भी चुनौतीपूर्ण मान रहे हैं। आगे क्या हो सकता है? फिलहाल सबकी निगाहें BKTC की बोर्ड बैठक पर टिकी हैं।अगर प्रस्ताव पास होता है, तो बदरीनाथ और केदारनाथ मंदिर परिसर में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर औपचारिक रोक लग सकती है। यह फैसला न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी स्तर पर भी बड़ी बहस को जन्म दे सकता है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देशभर में चर्चा का केंद्र बन सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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शंकराचार्य

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उठाया संगम स्नान का मुद्दा Deputy CM Keshav Maurya का बयान

प्रयागराज माघ मेले (Prayagraj Magh Mela 2026) में इस बार धार्मिक और राजनीतिक तनाव (Religious & Political Tension) देखने को मिला। मामला तब गरमा गया जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (Swami Avimukteshwaranand) को संगम में स्नान करने से रोका गया और प्रशासन के साथ उनका विवाद तेज हो गया। इस घटना ने सिर्फ धार्मिक समुदाय ही नहीं बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी। विवाद की पृष्ठभूमि (Background of the Controversy) स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 18 जनवरी से मेला प्रशासन (Mela Administration) के खिलाफ विरोध करना शुरू किया। उनका कहना था कि बिना सम्मान और माफी के वह संगम में स्नान (Holy Dip in Sangam) नहीं करेंगे। इस बीच उनके शिविर के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई और प्रशासन ने सीसीटीवी कैमरे लगाए। स्वामी ने प्रशासन की चूक को सार्वजनिक रूप से उठाया और शांतिपूर्ण समाधान की मांग की। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का डिप्टी सीएम पर बयान इस विवाद के बीच स्वामी ने डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य (Deputy CM Keshav Maurya) की तारीफ की। उन्होंने कहा: “ऐसे समझदार नेता को दबाया नहीं जाना चाहिए। उन्हें उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री होना चाहिए।” यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया। स्वामी ने मौर्य को संयमित और समझदार नेतृत्व वाला नेता बताया और प्रशासन की गलतियों को सुधारने की क्षमता पर भी जोर दिया। डिप्टी CM केशव मौर्य का रुख (Deputy CM Keshav Maurya’s Response) केशव प्रसाद मौर्य ने स्पष्ट किया कि वे स्वामी से औपचारिक मुलाकात नहीं करेंगे, लेकिन उन्होंने सकारात्मक संवाद की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रशासन की गलती की जांच होगी और विवाद को शांति से सुलझाना चाहिए। मौर्य ने स्वामी को आग्रह किया कि वे संगम में स्नान कर लोगों को एक सकारात्मक संदेश (Positive Message) दें। सुरक्षा और प्रशासनिक पहलू (Security & Administrative Aspect) स्वामी के शिविर के बाहर सुरक्षा बढ़ाई गई और कुछ समूहों के तनावपूर्ण रुझान के चलते प्रशासन सतर्क है। यह विवाद अब केवल धार्मिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बन गया है। सियासी और सामाजिक प्रभाव (Political & Social Impact) प्रयागराज माघ मेले का यह विवाद केवल स्नान और धार्मिक अधिकार तक सीमित नहीं है। यह प्रशासनिक फैसलों, राजनीतिक संदेशों और धार्मिक भावनाओं के बीच संतुलन का जीवंत उदाहरण बन चुका है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Manali

Manali Snow Alert 2026 ट्रैफिक जाम और फंसे Tourist का हाल

हिमाचल प्रदेश का मनाली (Manali) और कुल्लू क्षेत्र इस समय भारी बर्फबारी और ट्रैफिक जाम की चपेट में है। 26 जनवरी के लॉन्ग वीकेंड पर बर्फ देखने आए tourists को यहां का नज़ारा बेहद रोमांचक तो लग रहा था, लेकिन असली चुनौती तब आई जब सड़कों पर लंबा जाम और फंसे वाहन सामने आए। Kullu-Manali Highway पर Traffic Jam का तांडव भारी हिमपात और वीकेंड ट्रैफिक के चलते राष्ट्रीय राजमार्ग 3 (NH3) पर 8 से 15 किलोमीटर तक लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। कई यात्रियों को सिर्फ 15 किलोमीटर की दूरी तय करने में 10-12 घंटे का समय लग गया। ट्रैफिक के बीच कई पर्यटक बर्फ में अपने सामान के साथ पैदल चलने को मजबूर हुए। Tourists की मुश्किलें स्थानीय लोगों ने भी आगे आकर बर्फ में फंसे पर्यटकों को गर्म चाय और मदद प्रदान की। प्रशासन की तैयारी और उपाय मौसम विभाग की चेतावनी मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और बर्फबारी/बारिश की संभावना के लिए चेतावनी जारी की है। पर्यटकों को सलाह दी जा रही है कि वे सड़कें खुलने और मौसम अनुकूल होने पर ही यात्रा करें। Social Media पर वायरल दृश्य सोशल मीडिया पर भी Manali की कई वीडियो और तस्वीरें वायरल हुई हैं, जिनमें ट्रैफिक जाम, बर्फ में फंसे लोग और हिमाचल की सर्दी का नज़ारा साफ दिखाई दे रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Republic Day

Republic Day परेड 2026 कर्तव्य पथ पर रचा गया इतिहास, New India की नई पहचान

कर्तव्य पथ पर आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस (Republic Day ) की परेड इस बार सिर्फ एक सरकारी समारोह नहीं, बल्कि बदलते भारत की कहानी बन गई। परंपरा के रंग, आधुनिक तकनीक की चमक और समावेशिता का संदेश — सब कुछ एक ही मंच पर दिखाई दिया। इस साल की परेड में कई ऐसे पल रहे, जो लंबे समय तक याद रखे जाएंगे। दो Chief Guest, एक मंच Republic Day के इतिहास में पहली बार दो मुख्य अतिथि आमंत्रित किए गए। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेन की मौजूदगी ने भारत-यूरोप रिश्तों की मजबूती को नए स्तर पर पहुंचाया। दर्शकों के बीच यह चर्चा का बड़ा विषय रहा कि एक साथ दो वैश्विक नेता भारत के लोकतंत्र के इस उत्सव में शामिल हुए। महिला कमांडेंट के पीछे पूरा पुरुष दस्ता CRPF की पुरुष टुकड़ी का नेतृत्व जब सहायक कमांडेंट सिमरन बाला ने किया, तो तालियों की गूंज खुद परेड से ज्यादा तेज़ थी। यह सिर्फ एक परेड मूव नहीं था, बल्कि उस बदलाव का संकेत था, जिसमें महिलाएं अब हर मोर्चे पर नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं। सेना का लाइव युद्ध प्रदर्शन इस बार परेड में सेना ने ‘बैटल एरे फॉर्मेशन’ के जरिए युद्ध जैसी स्थिति का लाइव डेमो दिखाया। आधुनिक हथियार, तेज़ मूवमेंट और रणनीतिक अभ्यास ने लोगों को रोमांचित कर दिया। कई दर्शकों के लिए यह पल परेड का सबसे दमदार हिस्सा साबित हुआ। ड्रोन से लेकर ब्रह्मोस तक AI आधारित सिस्टम, ड्रोन, रोबोटिक यूनिट्स, ब्रह्मोस और आकाश मिसाइल जैसी प्रणालियों की झलक ने यह साफ कर दिया कि भारत अब रक्षा तकनीक में भी आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। दो कूबड़ वाले ऊंट भी बने आकर्षण परेड में दो कूबड़ वाले बेक्ट्रियन ऊंटों की मौजूदगी ने सभी का ध्यान खींचा। यह नज़ारा जितना अनोखा था, उतना ही यह संदेश भी देता था कि कठिन इलाकों में तैनाती के लिए सेना किस तरह पारंपरिक और आधुनिक संसाधनों का संतुलन बना रही है। थीम: ‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष’ इस साल की थीम “वंदे मातरम् के 150 वर्ष” रही। झांकियों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के ज़रिए राष्ट्रीय गीत की ऐतिहासिक यात्रा, आज़ादी की लड़ाई में उसकी भूमिका और आज के भारत में उसकी अहमियत को खूबसूरती से दिखाया गया। झांकियां और कलाकारों की भव्य प्रस्तुति करीब 2500 कलाकारों ने मंच संभाला और 30 से ज्यादा झांकियों ने भारत की विविधता, संस्कृति और विकास की कहानी सुनाई। डिजिटल इंडिया, महिला सशक्तिकरण, हरित ऊर्जा और स्टार्टअप इंडिया जैसे विषयों पर आधारित झांकियां खास तौर पर चर्चा में रहीं। नई सैन्य इकाइयों की पहली झलक ‘भैरव बटालियन’ और ‘शक्तिबान रेजिमेंट’ जैसी नई इकाइयों को पहली बार परेड में शामिल किया गया। यह भारत की बदलती सुरक्षा रणनीति और नई पीढ़ी की सैन्य ताकत का संकेत माना जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Republic Day

Republic Day India 77वां गणतंत्र दिवस वायुसेना का ‘Sindoor Formation’ और नई मिसाइल की झलक

देश ने आज 77वां गणतंत्र दिवस (Republic Day) पूरे जोश, गर्व और भावनात्मक माहौल में मनाया। सुबह की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नेशनल वॉर मेमोरियल पर शहीदों को श्रद्धांजलि देने से हुई। इसके बाद कर्तव्य पथ पर भव्य परेड में भारत की सैन्य शक्ति, स्वदेशी तकनीक और सांस्कृतिक विविधता की शानदार झलक देखने को मिली। शहीदों को नमन से शुरू हुआ गणतंत्र दिवस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले नेशनल वॉर मेमोरियल पहुंचकर पुष्पचक्र अर्पित किया और देश के लिए बलिदान देने वाले वीरों को नमन किया। यह क्षण भावुक भी था और प्रेरणादायक भी, जिसने पूरे समारोह को गरिमा और गंभीरता प्रदान की। कर्तव्य पथ पर भव्य परेड, विदेशी मेहमान भी रहे मौजूद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की अध्यक्षता में आयोजित परेड में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। यह भारत और यूरोप के बीच मजबूत होते रिश्तों का संकेत माना गया। ‘Sindoor Formation’ में वायुसेना का दमदार फ्लायपास्ट भारतीय वायुसेना ने इस बार ‘सिंदूर फॉर्मेशन’ नाम से खास फ्लायपास्ट किया। राफेल, सुखोई-30, मिग-29 और जगुआर जैसे आधुनिक लड़ाकू विमानों ने जब आसमान में एक साथ उड़ान भरी, तो पूरा कर्तव्य पथ तालियों से गूंज उठा। कुल 29 विमानों और हेलीकॉप्टरों ने हिस्सा लिया, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। स्वदेशी Hypersonic Glide Missile का पहली बार सार्वजनिक प्रदर्शन परेड का सबसे चर्चित आकर्षण डीआरडीओ की स्वदेशी हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल का डेब्यू रहा। यह मिसाइल बेहद तेज रफ्तार से उड़ान भरने में सक्षम है और दुश्मन के रडार से बचना इसके लिए मुश्किल माना जाता है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, यह भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता की दिशा में एक बड़ा कदम है। त्रि-सेवा झांकियां और सैन्य शक्ति की झलक थलसेना, नौसेना और वायुसेना की संयुक्त झांकियों में ब्रह्मोस, आकाश और अन्य आधुनिक हथियार प्रणालियां प्रदर्शित की गईं। हर झांकी भारत की बढ़ती सैन्य ताकत और तकनीकी प्रगति की कहानी कह रही थी। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में दिखी भारत की विविधता करीब 2,500 कलाकारों ने देश के अलग-अलग राज्यों की लोकसंस्कृति, नृत्य और संगीत की प्रस्तुति दी। इस वर्ष की थीम ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति को समर्पित रही। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई इस रंगारंग कार्यक्रम में खोया नजर आया। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Indigo

DGCA ने Indigo को कहा Flights कम करें 717 Slots 16 हवाईअड्डों से रद्द

घरेलू एयरलाइन्स Indigo Airlines ने हाल ही में 16 प्रमुख Airports पर अपने 717 Flight Slots छोड़ दिए हैं। DGCA (Directorate General of Civil Aviation) के आदेश के तहत यह कदम एयरलाइन के Winter Schedule में 10% कटौती सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया। इस कदम का उद्देश्य ऑपरेशनल Challenges को कम करना और यात्रियों को बेहतर और समय पर Flight Services देना है। DGCA ने यह सुनिश्चित किया कि एयरलाइन अपने Slot Management और समयबद्ध उड़ानों के मामलों में सुधार करे। प्रमुख हवाईअड्डों में Flight कटौती इन Slots को अन्य एयरलाइन्स के लिए रीलोकेट किया जा सकता है। Indigo का कहना है कि यह कदम यात्री सुविधाओं में सुधार और Operational Stability के लिए जरूरी था। यात्रियों के लिए असर Flights की कटौती और Slots छोड़ने से यात्रियों को कुछ अस्थायी असुविधा हो सकती है, लेकिन एयरलाइन का दावा है कि यह कदम Flight Delays और Cancellation को भविष्य में रोकने में मदद करेगा। Indigo के प्रवक्ता ने कहा:“हम लगातार अपनी Operations को बेहतर बना रहे हैं ताकि यात्रियों को समय पर और सुरक्षित सेवाएं मिलती रहें।” हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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शंकराचार्य

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का कालनेमि बयान और राजनीतिक बहस

प्रयागराज, उत्तर प्रदेश – 2026 के माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का विवाद अब पूरे देश की चर्चा का विषय बन गया है। यह विवाद सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी तेज बहस को जन्म दे रहा है। “कालनेमि” बयान क्या है? शंकराचार्य ने हाल ही में कहा: “चोला तो साधु का और गोहत्या हो रही है। आप बताइए कालनेमि कौन?” इस बयान का मतलब गहरा है। रामायण के कालनेमि राक्षस की तरह, वे लोगों को धर्म के नाम पर भ्रमित करने वालों की ओर इशारा कर रहे हैं। यह सीधे तौर पर यह सवाल उठाता है कि धर्म और संस्कृति के संरक्षण में कौन वास्तव में बाधक है। स्नान विवाद और प्रशासन की भूमिका माघ मेले की मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य को संगम में स्नान करने से रोका गया। शिष्यों के साथ झड़प हुई और वीडियो वायरल हो गया। शंकराचार्य ने इसे अपमानजनक बताया और स्नान से इनकार कर दिया। संत समाज और साधु‑संप्रदायों में इस पर गहरी नाराजगी है। कई संतों ने प्रशासन से साधुओं के सम्मान की सुरक्षा की मांग की है। राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ इस तरह, विवाद धीरे‑धीरे धार्मिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। लोकप्रिय सवाल: कालनेमि कौन? शंकराचार्य का यह सवाल समाज में गहरी सोच पैदा कर रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि कौन हैं वे लोग जो धर्म और संस्कृति के नाम पर भ्रम फैला रहे हैं? यह बयान युवाओं और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ है और हर तरफ चर्चाएँ तेज हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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EU

भारत-EU Free Trade Agreement Mother of All Deal से बदलेगा कारोबार, तीन दिन बाद ऐलान

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ने वाला है। करीब दो दशकों से जिस मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement – FTA) पर बातचीत चल रही थी, वह अब अपने आखिरी मोड़ पर है। इसे ही दुनिया भर में “Mother of All Deal” कहा जा रहा है।सूत्रों के मुताबिक, इस ऐतिहासिक करार का औपचारिक ऐलान 27 जनवरी को किया जा सकता है — यानी अब से ठीक तीन दिन बाद। आज भारत पहुंचे EU के टॉप लीडर्स इसी बड़े ऐलान से पहले यूरोपीय संघ के शीर्ष नेता भारत पहुंच रहे हैं।यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत दौरे पर हैं।ये नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे और भारत-EU शिखर बैठक में हिस्सा लेंगे। खास बात यह है कि ये नेता 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह में भी शामिल होंगे। इसके अगले ही दिन यानी 27 जनवरी को FTA को लेकर बड़ा ऐलान होने की उम्मीद है। क्यों कहा जा रहा है इसे “Mother of All Deal”? इस समझौते को इतना बड़ा इसलिए माना जा रहा है क्योंकि: इस पर बातचीत साल 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन कई बार अटकने के बाद अब यह लगभग तय माना जा रहा है। भारत के लिए क्या बदलेगा? अगर यह FTA लागू होता है तो इसका सीधा फायदा भारत के कारोबार और आम लोगों तक पहुंचेगा। दूसरी ओर, यूरोपीय कंपनियों को भारत में कार, शराब और हाई-टेक मशीनरी जैसे सेक्टरों में आसान एंट्री मिलेगी। बदलती वैश्विक राजनीति में अहम कदम दुनिया के कई बड़े देश आज संरक्षणवादी नीतियों और ऊंचे टैरिफ की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे माहौल में भारत और EU के बीच यह समझौता रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भारत की वैश्विक सप्लाई चेन में भूमिका और मजबूत होगी। आगे क्या होगा? हालांकि, समझौते को जमीन पर लागू होने में अभी कुछ कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी, लेकिन संकेत साफ हैं —भारत और EU एक नए आर्थिक रिश्ते की दहलीज पर खड़े हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Mamata Banerjee को बड़ा झटका, वरिष्ठ नेता Manas Ranjan Bhunia ने छोड़ी TMC

Mamata Banerjee को बड़ा झटका, वरिष्ठ नेता Manas Ranjan Bhunia ने छोड़ी TMC

पश्चिम बंगाल की राजनीति में Mamata Banerjee तृणमूल कांग्रेस (TMC) को एक और बड़ा झटका लगा है। विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद पार्टी की मुश्किलें लगातार बढ़ती दिखाई दे रही हैं। इसी बीच ममता बनर्जी सरकार में मंत्री रह चुके वरिष्ठ नेता मानस रंजन भुंइया ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। मानस रंजन भुंइया ने शनिवार को पार्टी अध्यक्ष और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र भेजकर अपने सभी संगठनात्मक पदों और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की जानकारी दी। उनके इस फैसले को TMC के लिए बड़ा राजनीतिक नुकसान माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद पार्टी के अंदर असंतोष बढ़ता जा रहा है। ऐसे समय में वरिष्ठ नेताओं का पार्टी छोड़ना तृणमूल कांग्रेस की चिंता बढ़ा सकता है। हालांकि, अभी तक मानस रंजन भुंइया ने इस्तीफे के पीछे की विस्तृत वजह सार्वजनिक नहीं की है। वहीं TMC की ओर से भी इस मामले पर कोई बड़ा बयान सामने नहीं आया है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस इस्तीफे को आने वाले दिनों के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे पार्टी की अंदरूनी स्थिति पर भी सवाल उठने लगे हैं।
G7 Summit 2026: फ्रांस में Donald Trump से मिलेंगे पीएम मोदी, भारत-फ्रांस रिश्तों को बताया खास

G7 Summit 2026: फ्रांस में Donald Trump से मिलेंगे प्रधानमंत्री Narendra Modi, भारत-फ्रांस रिश्तों को बताया खास

व्हाइट हाउस ने शनिवार को पुष्टि की कि प्रधानमंत्री Narendra Modi अगले सप्ताह फ्रांस में होने वाले G7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump से मुलाकात करेंगे। इस बैठक को भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी फ्रांस और स्लोवाकिया की एक सप्ताह की विदेश यात्रा पर रवाना हो चुके हैं। रवाना होने से पहले जारी अपने बयान में पीएम मोदी ने कहा कि भारत की रणनीतिक सोच और विदेश नीति में France का विशेष स्थान है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, टेक्नोलॉजी और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। सूत्रों के अनुसार, G7 सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी कई वैश्विक नेताओं से मुलाकात करेंगे। हालांकि सबसे ज्यादा चर्चा उनकी Donald Trump के साथ होने वाली बैठक को लेकर हो रही है। माना जा रहा है कि इस दौरान दोनों नेता व्यापार, रक्षा सहयोग, इंडो-पैसिफिक रणनीति और वैश्विक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब दुनिया में भू-राजनीतिक हालात तेजी से बदल रहे हैं। भारत लगातार वैश्विक मंचों पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रहा है और कई बड़े देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में जुटा है।
IND vs AFG 1st ODI: भारत ने अफगानिस्तान को 7 विकेट से हराया, शुभमन गिल की शानदार पारी

IND vs AFG 1st ODI: भारत ने अफगानिस्तान को 7 विकेट से हराया, शुभमन गिल की शानदार पारी

IND vs AFG के खिलाफ खेले गए पहले वनडे मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए 7 विकेट से जीत दर्ज की। धर्मशाला में खेला गया यह मैच बारिश की वजह से 25-25 ओवर का कर दिया गया था, लेकिन टीम इंडिया ने लक्ष्य आसानी से हासिल कर सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली। अफगानिस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 24.5 ओवर में 194 रन बनाए। टीम के लिए रहमनुल्लाह गुरबाज ने तूफानी बल्लेबाजी करते हुए शानदार शतक जड़ा। गुरबाज ने सिर्फ 48 गेंदों में सेंचुरी लगाकर नया रिकॉर्ड भी बनाया। भारत की ओर से लक्ष्य का पीछा करते हुए कप्तान Shubman Gill ने बेहतरीन बल्लेबाजी की। गिल ने नाबाद 84 रन बनाए और टीम को जीत तक पहुंचाया। उनके अलावा KL Rahul ने भी तेज़ 39 रन की अहम पारी खेली। भारत ने 22.5 ओवर में 3 विकेट खोकर मुकाबला अपने नाम कर लिया। मैच में भारत की शुरुआत अच्छी रही, हालांकि एक समय कप्तान Rohit Sharma रन आउट होकर पवेलियन लौट गए। इसके बाद गिल और ईशान किशन ने पारी संभाली और टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया।
Noida International Airport से 15 जून से शुरू होंगी Commercial Flights, लखनऊ के लिए पहली उड़ान बनेगी खास

Noida International Airport से 15 जून से शुरू होंगी Commercial Flights, लखनऊ के लिए पहली उड़ान बनेगी खास

उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा में एक और बड़ा अध्याय जुड़ने जा रहा है। दिल्ली-एनसीआर के पास बने Noida International Airport से 15 जून, सोमवार से कमर्शियल उड़ानों का संचालन शुरू होने जा रहा है। यह एयरपोर्ट पश्चिम उत्तर प्रदेश और दिल्ली एनसीआर के लिए नया एविएशन हब माना जा रहा है। इस खास मौके पर केंद्रीय नागर विमानन मंत्री K. Rammohan Naidu भी मौजूद रहेंगे। बताया जा रहा है कि लखनऊ से आने वाली पहली फ्लाइट में कई वीवीआईपी मेहमान शामिल होंगे। वहीं नोएडा से लखनऊ जाने वाली पहली फ्लाइट में किसानों को विशेष तौर पर शामिल किया गया है, जिससे प्रदेश के विकास और ग्रामीण भागीदारी का संदेश दिया जा सके। सरकार का मानना है कि जेवर स्थित यह एयरपोर्ट आने वाले समय में उत्तर भारत के सबसे बड़े एविएशन सेंटर में से एक बनेगा। इससे न केवल हवाई यात्रा आसान होगी बल्कि व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। सूत्रों के मुताबिक, नोएडा के करीब 75 बड़े कारोबारी परिवार पहली फ्लाइट के यात्री बनेंगे। इससे एयरपोर्ट की शुरुआत को एक खास पहचान देने की तैयारी की गई है। माना जा रहा है कि एयरपोर्ट शुरू होने के बाद दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर दबाव भी कम होगा।
साथ, सहयोग और समर्थन के लिए आभार… सरकार के 12 साल पूरे होने पर PM Modi का पूरा संबोधन

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PM Modi ने केंद्र सरकार के 12 साल पूरे होने के मौके पर देशवासियों को संबोधित करते हुए जनता का आभार जताया। पीएम मोदी ने कहा कि देश के लोगों के साथ, सहयोग और भरोसे की वजह से सरकार लगातार विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने कई क्षेत्रों में नई उपलब्धियां हासिल की हैं और आने वाले समय में देश को और मजबूत बनाने के लिए सरकार लगातार काम करती रहेगी। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत आज दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है। इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल इंडिया, रेलवे, हाईवे, गरीब कल्याण योजनाएं और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर सरकार ने विशेष ध्यान दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल योजनाएं बनाना नहीं बल्कि उन्हें जमीन तक पहुंचाना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि गरीबों, किसानों, महिलाओं और युवाओं को सशक्त बनाने के लिए कई बड़ी योजनाएं शुरू की गईं। करोड़ों लोगों को घर, गैस कनेक्शन, मुफ्त राशन और स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिला है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत अभियान ने देश को नई दिशा दी है और भारतीय उत्पादों को वैश्विक पहचान मिली है।

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