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ट्रम्प-जिनपिंग की व्हाइट हाउस में द्विपक्षीय बैठक खत्म, बोले- अमेरिका और चीन दोस्त; जिनपिंग ने कहा- रेस हो, रेसलिंग नहीं

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच व्हाइट हाउस में द्विपक्षीय बैठक खत्म हो गई है। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने अमेरिका और चीन के बीच संबंधों और आपसी सहयोग पर बात की। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका और चीन दोस्त हैं और दोनों देशों के हित एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। वहीं, शी जिनपिंग ने कहा कि दोनों देशों के लिए मिलकर काम करना फायदेमंद है, जबकि टकराव से दोनों को नुकसान होगा। जिनपिंग बोले- अमेरिका और चीन में रेस हो, रेसलिंग नहीं चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दोनों देशों के संबंधों को लेकर कहा कि अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए, लेकिन इसे टकराव में नहीं बदलना चाहिए। उन्होंने कहा, “अमेरिका-चीन के बीच रेस हो, रेसलिंग नहीं। दोनों देशों की कोशिश एक-दूसरे से आगे निकलने की होनी चाहिए, न कि ऐसी लड़ाई जिसमें एक की जीत और दूसरे की हार हो।” जिनपिंग के मुताबिक, दोनों देशों के बीच सहयोग से दोनों पक्षों को फायदा हो सकता है, जबकि टकराव दोनों के लिए नुकसानदायक होगा। कोर्ट के आदेश के बाद पत्रकारों को व्हाइट हाउस में एंट्री CNN, पॉलिटिको और MS NOW के पत्रकारों को करीब 12 बजे अमेरिकी समय के मुताबिक व्हाइट हाउस में दोबारा प्रवेश की अनुमति मिली। इससे पहले ट्रम्प प्रशासन ने कोर्ट के आदेश के बावजूद इन पत्रकारों को अंदर जाने से रोक दिया था। रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने 23 सितंबर की रात करीब 1 बजे आदेश जारी कर इन पत्रकारों को व्हाइट हाउस में प्रवेश देने को कहा था। इसके बावजूद 24 सितंबर की सुबह पत्रकारों को अंदर जाने से रोका गया। इसके बाद तीनों मीडिया संस्थान कोर्ट पहुंचे और तत्काल सुनवाई की मांग की। कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन से दोपहर 12:30 बजे तक जवाब मांगा था। इस विवाद के बीच व्हाइट हाउस में ट्रम्प और जिनपिंग की मुलाकात का पत्रकारों ने बहिष्कार किया। अमेरिकी टीवी चैनलों पर बैठक का लाइव वीडियो भी नहीं दिखाया गया। बाद में दोपहर में पत्रकारों को व्हाइट हाउस में प्रवेश की अनुमति दे दी गई। प्रोटोकॉल तोड़कर जिनपिंग को रिसीव करने एयरपोर्ट पहुंचे ट्रम्प चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग गुरुवार सुबह अमेरिका पहुंचे। उनके स्वागत के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प खुद जॉइंट बेस एंड्रयूज एयरपोर्ट पहुंचे। इस दौरान ट्रम्प के साथ फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रम्प भी मौजूद थीं। शी जिनपिंग के साथ उनकी पत्नी पेंग लियुआन भी अमेरिका पहुंची हैं।
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गाजा में महिलाओं और लड़कियों पर हिंसा बढ़ी, 14 साल की बच्ची की 2 बोरी आटे के बदले शादी का दावा; UNFPA रिपोर्ट में चौंकाने वाले मामले

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) ने गाजा में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ बढ़ती लैंगिक हिंसा को लेकर रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में बाल विवाह, जबरन शादी, यौन हिंसा और घरेलू हिंसा के कई मामलों का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक पिता ने अपनी 14 साल की बेटी की शादी दो बोरी आटे के बदले कर दी। UNFPA ने गाजा में काम कर रही 10 संस्थाओं से जानकारी जुटाई। इसके अलावा गाजा सिटी और खान यूनिस के विस्थापन शिविरों में रहने वाली 230 महिलाओं से बातचीत की गई। रेप के बाद आरोपियों से शादी कराने के मामले रिपोर्ट के अनुसार, गाजा में रेप की पीड़िताओं की शादी आरोपियों या किसी दूसरे व्यक्ति से कराए जाने के मामले भी सामने आए हैं। परिवार और समाज में बदनामी से बचने तथा ‘इज्जत’ बनाए रखने के नाम पर कुछ पीड़िताओं की शादी करा दी गई। रिपोर्ट में बाल और जबरन शादियों के दर्ज मामलों में 123% बढ़ोतरी का भी उल्लेख किया गया है। स्कूल, टेंट और समुद्र किनारे तक यौन हिंसा गाजा सिटी और खान यूनिस के विस्थापन शिविरों में रहने वाली महिलाओं ने यौन हिंसा की कई घटनाओं की जानकारी दी। उनके मुताबिक, ऐसी घटनाएं टेंट, शरणस्थल के तौर पर इस्तेमाल किए जा रहे स्कूलों, गलियों और समुद्र किनारे तक में हुईं। कुछ मामलों में आरोपी पीड़िता को पहले से जानता था। ऐसे मामलों को छिपाने की कोशिश की गई और कुछ पीड़िताओं की शादी आरोपी या किसी दूसरे व्यक्ति से करा दी गई। एक महिला ने बताया कि स्कूल में रेप की घटना सामने आने के अगले दिन उसी स्कूल में शादी और जश्न मनाया गया। महिला के मुताबिक, युद्ध से पहले ऐसी घटनाओं की कल्पना करना भी मुश्किल था। दिव्यांग लड़कियों पर भी खतरा UNFPA की रिपोर्ट में दिव्यांग महिलाओं और लड़कियों को भी अधिक जोखिम में बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ आरोपी उनकी स्थिति का फायदा उठाते हैं। गाजा सिटी की एक महिला ने बताया कि एक दिव्यांग लड़की करीब सात घंटे तक गायब रही। वापस लौटने पर वह रो रही थी, लेकिन परिवार ने समझा कि वह डर गई है। करीब दो महीने बाद पता चला कि वह गर्भवती थी और उसके साथ रेप हुआ था। आरोपी का पता नहीं चल सका। एक अन्य मामले में 20 साल की ऐसी महिला का जिक्र है, जिसे बातें समझने में परेशानी होती थी। उसके मुताबिक, कई युवकों ने उसका उत्पीड़न किया और उनमें से एक ने उसके साथ रेप किया। माता-पिता की मौत के बाद 14-15 साल की लड़कियों की शादी युद्ध में माता-पिता खो चुकी लड़कियों के सामने भी कम उम्र में शादी का खतरा बढ़ गया है। गाजा सिटी की एक महिला ने बताया कि उसके परिवार की 14 और 15 साल की दो लड़कियों के माता-पिता युद्ध में मारे गए थे। इसके बाद उनके चाचाओं ने दोनों की शादी कर दी। महिला के मुताबिक, चाचा उनकी जिम्मेदारी और खर्च नहीं उठाना चाहते थे। दोनों लड़कियों की शादी उस उम्र में कर दी गई, जब वे शादी और जीवन की जिम्मेदारियों को ठीक से समझ भी नहीं पाती थीं। परिवार के भीतर भी यौन हिंसा रिपोर्ट में परिवार के भीतर यौन हिंसा का एक मामला भी दर्ज है। एक महिला ने बताया कि पति की मौत के बाद उसके देवर ने सोते समय उसके साथ रेप किया। बाद में वह गर्भवती हो गई। परिवार को घटना की जानकारी मिलने के बाद आरोपी के परिवार ने दोनों की शादी कराने की कोशिश की। मामला जज के सामने पहुंचा, लेकिन शादी नहीं हो सकी। रिपोर्ट के अनुसार, उस समय महिला पति की मौत के बाद धार्मिक नियमों के तहत निर्धारित प्रतीक्षा अवधि में थी और जज ने मामले को व्यभिचार माना। युद्ध के साथ घरेलू हिंसा में भी बढ़ोतरी रिपोर्ट में महिलाओं ने बताया कि युद्ध के बाद परिवारों के भीतर भी हिंसा बढ़ी है। पति, पिता, भाई और ससुराल वालों की ओर से मारपीट, गाली-गलौज और अन्य प्रकार की हिंसा के मामले सामने आए। एक महिला ने बताया कि युद्ध से पहले उसका पति उस पर गुस्सा नहीं करता था। लेकिन घर तबाह होने और सब कुछ खोने के बाद वह चिड़चिड़ा रहने लगा और अपना गुस्सा पत्नी और बच्चों पर निकालने लगा। एक अन्य महिला ने कहा कि मारपीट महिलाओं के खिलाफ होने वाली सबसे आम हिंसा में शामिल है। महिलाओं के मुताबिक, घर उजड़ना, बेरोजगारी, गरीबी, बार-बार विस्थापन और तनाव इसके पीछे प्रमुख कारणों में शामिल हैं। संबंध बनाने से इनकार करने पर पत्नी की पिटाई विस्थापन शिविरों में परिवारों के पास निजी जगह भी बेहद सीमित है। एक महिला ने बताया कि उसके पति ने उससे शारीरिक संबंध बनाने की मांग की। बच्चों के सामने ऐसा करने से इनकार करने पर पति ने उसे पीटा, उसका हाथ तोड़ दिया और आंख पर चोट पहुंचाई। महिला के मुताबिक, जिस टेंट में वे रहते थे, उसमें बच्चों समेत 12 लोग रहते थे। बाद में पति ने स्कूल के बाथरूम में भी उसके साथ जबरन संबंध बनाए। रिपोर्ट में कहा गया है कि भीड़भाड़ और निजता की कमी ने महिलाओं के खिलाफ हिंसा का खतरा बढ़ाया है। हालांकि, रिपोर्ट यह भी स्पष्ट करती है कि वैवाहिक रेप युद्ध के बाद शुरू हुई नई समस्या नहीं है। मानवीय मदद पर भी नियंत्रण भोजन और जरूरी सामान की कमी ने महिलाओं की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। कुछ महिलाओं ने बताया कि उनके पति मानवीय सहायता के तौर पर मिलने वाली चीजों पर भी नियंत्रण रखते हैं। गाजा सिटी की एक महिला ने बताया कि उसे अपने फोन से मदद से जुड़े संदेश मिटाने पड़ते हैं। उसे डर रहता है कि अगर पति को सहायता मिलने की जानकारी हो गई तो वह उसे और बच्चों को मिलने वाली मदद भी छीन सकता है। एक अन्य महिला ने बताया कि कुछ पति परिवार के लिए खाना खरीदने के बजाय पैसे नशे या सिगरेट पर खर्च कर देते हैं। विरोध करने पर पत्नियों के साथ हिंसा की जाती है। हिंसा के बावजूद पति के पास लौटने को मजबूर महिला रिपोर्ट में एक ऐसी महिला का मामला भी सामने आया जिसे पति पीटता था, गालियां देता था और यौन...
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Rahul Gandhi

Rahul Gandhi: SIR विवाद के बीच आज Press Conference, बोले- संविधान के दुश्मनों का पर्दाफाश

चुनाव आयोग की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को लेकर चल रहे विवाद के बीच कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी आज, 24 सितंबर को शाम 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। Rahul Gandhiने अपनी पोस्ट में कहा कि “संविधान के दुश्मनों का पर्दाफाश हो गया है” और न्याय होने की बात कही। उन्होंने अपनी पोस्ट के साथ #VoteChori हैशटैग का भी इस्तेमाल किया। SIR को लेकर क्या है पूरा विवाद? दरअसल, मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठ रहे हैं। एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयोग के दो सदस्यों, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी, ने पिछले करीब 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट के अनुसार, इन आपत्तियों में मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने, Form 6 और चुनावी डेटाबेस से जुड़े मुद्दे शामिल थे। रिपोर्ट में दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से कम से कम 14 मौकों पर आपत्ति दर्ज किए जाने का उल्लेख किया गया है। Election Commission ने क्या जवाब दिया? रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर सफाई दी। ECI ने कहा कि आयोग के भीतर सवाल, टिप्पणियां और अलग-अलग सुझाव देना निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है। चुनाव आयोग के मुताबिक, पिछले एक साल में लिए गए उसके सभी अंतिम फैसले पूरे आयोग की मंजूरी से लिए गए हैं। आयोग ने यह भी कहा कि SIR से जुड़े फैसलों में किसी औपचारिक असहमति के आधार पर उन्हें रोकने या अलग फैसला लेने की स्थिति नहीं बनी। Rahul Gandhi क्यों कर रहे हैं Press Conference? राहुल गांधी लंबे समय से मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। अब चुनाव आयोग से जुड़ी नई रिपोर्ट के बीच उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस की घोषणा की है। राहुल गांधी की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में वह कौन से नए दस्तावेज या तथ्य सामने रखेंगे। हालांकि, उनके X पोस्ट से संकेत मिलता है कि उनका फोकस SIR, Election Commission और ‘Vote Chori’ से जुड़े मुद्दों पर रहेगा। SIR पर पहले भी उठे हैं सवाल SIR को लेकर विवाद केवल राजनीतिक बयानों तक सीमित नहीं है। दिल्ली में SIR प्रक्रिया से जुड़े कुछ मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने भी चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है, खासकर ‘logical discrepancies’ के आधार पर जारी किए गए नोटिसों को लेकर। कोर्ट ने नोटिस जारी करने की प्रक्रिया और उसके आधार पर भी सवाल किए हैं। वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि पात्र मतदाता को उचित प्रक्रिया के बिना मतदाता सूची से हटाया नहीं जाएगा और SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को नियमों के अनुसार अपडेट करना है। अब राहुल गांधी के बयान पर नजर राहुल गांधी की शाम 4 बजे होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद SIR और चुनाव आयोग से जुड़े इस विवाद में कांग्रेस का पक्ष और स्पष्ट हो सकता है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग पहले ही रिपोर्ट में बताए गए कथित मतभेदों को अपनी नियमित deliberation process का हिस्सा बता चुका है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि राहुल गांधी प्रेस कॉन्फ्रेंस में SIR और Election Commission को लेकर कौन से नए तथ्य, दस्तावेज या आरोप सामने रखते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Noida Sleeper Bus Fire

Noida Sleeper Bus Fire: चलती बस में लगी भीषण आग, 9 लोगों की मौत; 19 Challan का रिकॉर्ड

Noida Sleeper Bus Fire नोएडा में चलती स्लीपर बस में अचानक आग लगने से बड़ा हादसा हो गया। इस दर्दनाक घटना में 9 लोगों की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि जिस बस में आग लगी, वह मध्य प्रदेश की एक ट्रैवल्स कंपनी की थी। हादसे के बाद बस की सुरक्षा और उसके पुराने ट्रैफिक रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। जानकारी के मुताबिक, बस सड़क पर चल रही थी, तभी उसमें आग लग गई। देखते ही देखते आग ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया। बस में सवार यात्रियों के बीच चीख-पुकार मच गई। आग इतनी तेजी से फैली कि कई यात्रियों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका। बस में आग लगने से 9 लोगों की मौत चलती स्लीपर बस में आग लगने की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और Fire Department की टीम मौके पर पहुंची। दमकल कर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। हादसे में 9 यात्रियों की जान चली गई। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। हादसे की असली वजह क्या थी, इसका पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा। बस पर पहले से 19 Challan, ₹1.75 लाख का जुर्माना इस हादसे के बाद बस के पुराने रिकॉर्ड की जानकारी भी सामने आई है। बताया गया है कि बस के खिलाफ पहले से 19 Challan किए जा चुके थे। इन चालानों में करीब ₹1.75 लाख का Fine लगाया गया था। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इतने चालान और जुर्माने के बावजूद बस सड़क पर कैसे चल रही थी। संबंधित विभाग बस के Fitness Certificate, Permit और अन्य जरूरी दस्तावेजों की भी जांच कर सकता है। Sleeper Bus की Safety पर फिर उठे सवाल इस हादसे ने Sleeper Bus में यात्रियों की Safety को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्लीपर बसों में यात्री अक्सर यात्रा के दौरान सो रहे होते हैं। ऐसे में अचानक आग लगने पर उन्हें बाहर निकलने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। बसों में Emergency Exit, Fire Extinguisher और अन्य Safety Equipment का सही तरीके से काम करना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही समय-समय पर बसों की Fitness और Fire Safety की जांच भी जरूरी है। जांच के बाद सामने आएगी हादसे की पूरी वजह फिलहाल पुलिस और संबंधित अधिकारी पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। बस में आग किस वजह से लगी, क्या बस में सभी Safety Rules का पालन किया गया था और पुराने चालानों के बावजूद बस का संचालन कैसे जारी रहा, इन सभी पहलुओं की जांच की जा सकती है। Noida Sleeper Bus Fire की इस घटना ने एक बार फिर Public Transport में Passenger Safety को लेकर चिंता बढ़ा दी है। जांच के बाद ही हादसे की पूरी तस्वीर और जिम्मेदारी स्पष्ट हो सकेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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SIR

Election Commission पर SIR विवाद, CJP ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की

चुनाव आयोग की ओर से चलाए जा रहे Special Intensive Revision (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने और चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों से जुड़ी एक रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी नेताओं और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए हैं। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। रिपोर्टों के मुताबिक CJP ने 48 घंटे के भीतर इस्तीफा नहीं देने पर देशभर में आंदोलन करने की बात कही है। दिपके ने सोशल मीडिया पोस्ट में CEC के खिलाफ बेहद तीखी भाषा का इस्तेमाल किया और SIR के तहत मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का मुद्दा उठाया। SIR में 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए जाने का दावा विवाद का बड़ा केंद्र SIR के दौरान मतदाता सूची में हुए बदलाव हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं। चुनाव आयोग के अनुसार SIR का उद्देश्य मृत, डुप्लीकेट, अपात्र या अन्य मानदंडों को पूरा नहीं करने वाले नामों की पहचान करना और पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करना है। वहीं विपक्षी दलों ने इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस समेत कई नेताओं ने SIR की प्रक्रिया की समीक्षा और पुराने मतदाता रिकॉर्ड को बहाल करने की मांग की है। Election Commission के अंदर मतभेद की रिपोर्ट मामला उस रिपोर्ट के बाद और गरमा गया, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के कुछ फैसलों पर आपत्ति दर्ज की। इन आपत्तियों में मतदाताओं के नाम जोड़ने और हटाने, Form 6 में बदलाव तथा चुनावी डेटा और सॉफ्टवेयर के प्रबंधन जैसे मुद्दे शामिल बताए गए हैं। Form 6 नए मतदाताओं के पंजीकरण से जुड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार दोनों चुनाव आयुक्तों ने इसके प्रावधानों में किए गए कुछ बदलावों को लेकर सवाल उठाए थे। विपक्ष ने भी उठाए सवाल इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद कई विपक्षी नेताओं ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने उनके पद पर बने रहने पर सवाल उठाते हुए इस्तीफे की मांग की। वहीं AAP नेता अरविंद केजरीवाल ने SIR की पूरी प्रक्रिया को रद्द करने और पुराने मतदाता रिकॉर्ड को बहाल करने की मांग रखी। TMC नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने से जुड़ी कार्रवाई आगे बढ़ाने की मांग की। रिपोर्टों के मुताबिक, अप्रैल में राज्यसभा में CEC को हटाने से जुड़ा प्रस्ताव लाने के लिए 70 से अधिक सांसदों का समर्थन होने का दावा किया गया था। चुनाव आयोग ने मतभेद की खबरों को खारिज किया विवाद के बीच चुनाव आयोग ने आयोग के भीतर औपचारिक मतभेद की खबरों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि SIR से जुड़े फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के साथ लिए गए हैं। आयोग ने यह भी कहा है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है और प्रक्रिया के तहत अपात्र नामों को हटाने के साथ पात्र मतदाताओं को शामिल किया जा रहा है। फिलहाल SIR को लेकर चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने और आयोग के भीतर कथित आपत्तियों से जुड़े दावों को लेकर आगे की कानूनी और राजनीतिक कार्रवाई पर सबकी नजर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Akhilesh Yadav

Akhilesh Yadav: रायबरेली से PDA Yatra का आगाज, SP ने 2027 के लिए शुरू किया Campaign

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने गुरुवार, 24 सितंबर को कांग्रेस के मजबूत माने जाने वाले रायबरेली से अपनी PDA रथ यात्रा की शुरुआत की। इस यात्रा के जरिए सपा पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक यानी PDA (Pichhda, Dalit, Alpsankhyak) सामाजिक समीकरण को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। अखिलेश यादव की यह यात्रा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि रायबरेली लोकसभा सीट से कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सांसद हैं। ऐसे में सपा प्रमुख का यहीं से अपनी यात्रा शुरू करना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, सपा नेताओं ने यात्रा को मुख्य रूप से पार्टी के संगठन और PDA अभियान से जोड़कर बताया है। रायबरेली से क्यों शुरू हुई PDA यात्रा? रायबरेली को यात्रा के शुरुआती केंद्र के तौर पर चुनने के पीछे कई राजनीतिक और संगठनात्मक पहलुओं की चर्चा है। जिले की पांच विधानसभा सीटों में से तीन पर समाजवादी पार्टी के विधायक हैं, जबकि रायबरेली और ऊंचाहार सीट बीजेपी के पास हैं। ऐसे में सपा के लिए यह इलाका पहले से ही संगठनात्मक रूप से महत्वपूर्ण है। अखिलेश यादव की यात्रा बछरावां क्षेत्र से शुरू होकर हरचंदपुर में सपा विधायक राहुल लोधी के आवास तक पहुंची। इसके बाद कार्यक्रम रायबरेली शहर की ओर बढ़ा। यात्रा के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने जगह-जगह उनका स्वागत किया और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता सड़क किनारे नजर आए। PDA समीकरण पर सपा का फोकस समाजवादी पार्टी लंबे समय से PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को अपने राजनीतिक अभियान के केंद्र में रख रही है। इस यात्रा के जरिए पार्टी इसी सामाजिक गठजोड़ को और मजबूत करने का संदेश दे रही है। PDA रथ पर डॉ. भीमराव आंबेडकर, राम मनोहर लोहिया, जनेश्वर मिश्र, मुलायम सिंह यादव और बेनी प्रसाद वर्मा जैसे नेताओं की तस्वीरें और सामाजिक न्याय से जुड़े संदेश लगाए गए हैं। छात्र विवाद के बाद बढ़ी राजनीतिक सक्रियता रायबरेली में हाल ही में फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज में समाजवादी छात्र सभा और ABVP कार्यकर्ताओं के बीच विवाद हुआ था। सपा नेताओं ने इस मामले में पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। अखिलेश यादव ने भी इस घटना को PDA से जुड़े मुद्दे के तौर पर उठाया है। अखिलेश के हरचंदपुर विधायक राहुल लोधी के घर जाने को भी इसी स्थानीय राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी का कहना है कि यात्रा के जरिए संगठन को सक्रिय करने और कार्यकर्ताओं के बीच संवाद बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। SP-कांग्रेस गठबंधन पर भी नजर अखिलेश यादव की रायबरेली से यात्रा शुरू होने के बीच सपा और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग का मुद्दा भी चर्चा में है। दोनों दल 2027 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन को लेकर आगे बातचीत कर सकते हैं। रायबरेली कांग्रेस के लिए खास महत्व रखता है, जबकि यहां सपा के पास कई विधानसभा सीटों पर मजबूत संगठन और मौजूदा विधायक हैं। यही वजह है कि अखिलेश यादव की रायबरेली यात्रा को केवल एक रथयात्रा के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इससे सपा का अपना संगठन मजबूत करने, PDA अभियान को आगे बढ़ाने और आगामी चुनाव की तैयारी का संदेश भी जाता है। 2027 चुनाव की तैयारी का आगाज उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपने संगठन और चुनावी रणनीति को मजबूत करने में जुटे हैं। अखिलेश यादव की PDA यात्रा भी इसी तैयारी का हिस्सा है। यात्रा के आगे बढ़ने के साथ यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सपा PDA अभियान को किस तरह राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों तक ले जाती है और कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर दोनों दलों की रणनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है। फिलहाल रायबरेली से शुरू हुई यह यात्रा उत्तर प्रदेश की राजनीति में सपा की चुनावी तैयारियों और उसके PDA फोकस को सामने रखती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Cyclone Arnab: बंगाल की खाड़ी में चक्रवात तेज, आंध्र-ओडिशा तट से टकराने की आशंका; MP-बिहार में बारिश का अलर्ट

बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवात अर्नब पिछले 6 घंटे में करीब 12 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिम दिशा की ओर बढ़ा है। बुधवार सुबह 5:30 बजे यह आंध्र प्रदेश के कलिंगपट्टनम से करीब 70 किलोमीटर दूर समुद्र में स्थित था। इसके रात तक तट से टकराने की संभावना जताई गई है। चक्रवात के प्रभाव के चलते कई राज्यों में बारिश और मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। मध्य प्रदेश और बिहार में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है, जबकि राजस्थान में बारिश थमने के बाद गर्मी बढ़ गई है। MP के छिंदवाड़ा, सिवनी और बालाघाट में भारी बारिश का अलर्ट मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा, सिवनी और बालाघाट जिलों में बुधवार को भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। चक्रवाती सिस्टम और मानसूनी गतिविधियों के प्रभाव से प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। बिहार के 38 जिलों में यलो अलर्ट बिहार में आज बारिश को लेकर मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है। राज्य के सभी 38 जिलों में यलो अलर्ट जारी किया गया है। कई इलाकों में बारिश और गरज-चमक के साथ मौसम बदलने की संभावना है। राजस्थान में बारिश थमी, तापमान 41 डिग्री तक पहुंचा राजस्थान में बारिश का दौर थमने के बाद तापमान में बढ़ोतरी हुई है। जैसलमेर में तापमान 41 डिग्री दर्ज किया गया, जबकि बीकानेर और बाड़मेर में तापमान 40 डिग्री से ऊपर रहा। सितंबर के महीने में भी कई इलाकों में मई जैसी गर्मी महसूस की जा रही है। बारिश के बाद मौसम साफ होने से दिन के तापमान में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। तय समय से दो दिन पहले दिल्ली से लौटा मानसून मानसून इस बार सामान्य समय से दो दिन पहले दिल्ली से लौट गया। आमतौर पर दिल्ली से मानसून की वापसी 25 सितंबर के आसपास होती है। इस साल राजधानी में सामान्य 629.7 मिमी के मुकाबले 728.6 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से करीब 16 फीसदी अधिक है। मौसम विभाग के अनुसार, मानसून पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के ज्यादातर हिस्सों के अलावा उत्तर प्रदेश और गुजरात के कुछ इलाकों से भी लौट चुका है।
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खटीमा के कंजाबाग चौराहे पर लगेगी महाराणा प्रताप की प्रतिमा, भूमि पूजन के साथ काम शुरू

उत्तराखंड के खटीमा में महाराणा प्रताप की प्रतिमा लगाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के बाद कंजाबाग चौराहे पर बुधवार, 23 सितंबर को प्रतिमा स्थापना के लिए भूमि पूजन किया गया। भूमि पूजन कार्यक्रम में सांसद प्रतिनिधि और ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि रविंद्र राणा समेत क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में ये लोग रहे मौजूद भूमि पूजन कार्यक्रम में थारू परिषद के अध्यक्ष दान सिंह राणा, राणा थारू युवा मंच के अध्यक्ष बयान सिंह राणा और 12 राणा स्मारक समिति के उपाध्यक्ष रामकिशोर राणा भी शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान मौजूद लोगों ने महाराणा प्रताप को त्याग, शौर्य और स्वाभिमान का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि प्रतिमा स्थापित होने से क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूती मिलेगी। जल्द दिखाई देगी महाराणा प्रताप की प्रतिमा भूमि पूजन के साथ ही प्रतिमा स्थापना का काम आगे बढ़ गया है। मुख्यमंत्री धामी की घोषणा के बाद कंजाबाग तिराहे पर महाराणा प्रताप की प्रतिमा स्थापित की जा रही है। प्रतिमा स्थापित होने के बाद कंजाबाग चौराहा महाराणा प्रताप चौक के रूप में जाना जाएगा और यहां उनकी प्रतिमा लोगों को दिखाई देगी।
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UN महासभा में ईरानी राष्ट्रपति पजशकियान ने खामेनेई की तस्वीर दिखाई, अमेरिकी हमलों का किया जिक्र

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण देने पहुंचे। इस दौरान वे ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की तस्वीर अपने साथ लेकर आए। भाषण के दौरान उन्होंने ईरान पर हुए अमेरिकी हमलों और मिनाब स्कूल पर हुए हमले का जिक्र किया। बोले- ईरान आतंक का शिकार है पजशकियान ने अपने संबोधन में कहा कि ईरान आतंक का शिकार रहा है। उन्होंने खामेनेई की तस्वीर दिखाते हुए कहा, “मैं उस ईरान से आया हूं, जहां हमारे सुप्रीम लीडर की बिना किसी वजह के हत्या कर दी गई।” उन्होंने अपने संबोधन में ईरान के मिनाब स्कूल पर हुए हमले का भी उल्लेख किया। स्कूल पर हमले का भी किया जिक्र ईरानी राष्ट्रपति ने कहा, “मैं उस ईरान से आया हूं, जहां एक स्कूल पर बम गिराया गया।” पजशकियान ने इस हमले में मारी गई बच्चियों की तस्वीरें भी महासभा में दिखाईं। उनके मुताबिक, इस हमले में 156 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 120 बच्चे शामिल थे। खामेनेई की तस्वीर लेकर पहुंचे राष्ट्रपति UN महासभा में पजशकियान के भाषण के दौरान खामेनेई की तस्वीर प्रदर्शित करना भी चर्चा में रहा। उन्होंने अपने संबोधन के जरिए ईरान पर हुए हमलों और उनमें हुई मौतों का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया।
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नंदीग्राम उपचुनाव: BJP प्रत्याशी हसीरानी रथ के हलफनामे पर विवाद, कांग्रेस ने कलकत्ता HC में दाखिल की याचिका

पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रत्याशी हसीरानी रथ के चुनावी हलफनामे को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने हलफनामे में उम्र और शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी कथित विसंगतियों का मुद्दा उठाते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया है।  कांग्रेस नेता और वकील रित्जू घोषाल ने बुधवार को जस्टिस कृष्ण राव के समक्ष यह मामला उठाया। कांग्रेस का कहना है कि हलफनामे में दर्ज जानकारी आपस में मेल नहीं खाती। 1965 में 10वीं पास करने के दावे पर कांग्रेस का सवाल कांग्रेस के मुताबिक, हसीरानी रथ ने हलफनामे में अपनी उम्र 60 वर्ष बताई है, जबकि शैक्षणिक योग्यता वाले कॉलम में 1965 में माध्यमिक यानी 10वीं परीक्षा पास करने की जानकारी दी गई है। कांग्रेस नेता रित्जू घोषाल ने सवाल उठाया कि अगर हलफनामे के अनुसार उनकी उम्र 60 वर्ष के आसपास है, तो 1965 में उन्होंने माध्यमिक परीक्षा कैसे पास की। कोर्ट में कांग्रेस ने इसी आधार पर हलफनामे की जानकारी की जांच की मांग की है।  स्कूल की मान्यता को लेकर भी सवाल कांग्रेस ने हसीरानी रथ के हलफनामे में बताए गए स्कूल के रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाया है। पार्टी का दावा है कि संबंधित स्कूल की शुरुआत के समय वहां केवल पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई होती थी और 10वीं तक पढ़ाने की सरकारी मंजूरी बाद में मिली थी। कांग्रेस का कहना है कि यदि शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी जानकारी गलत पाई जाती है तो उनकी उम्मीदवारी पर कार्रवाई की जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने कांग्रेस को याचिका दाखिल करने की अनुमति दी है और मामले पर आगे सुनवाई होनी है।  BJP ने आरोपों को बताया टाइपिंग की गलती BJP ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि हसीरानी रथ की उम्र को लेकर कोई विवाद नहीं है और हलफनामे में दर्ज जानकारी में सिर्फ टाइपिंग की गलती हुई है। हसीरानी रथ के कार्यालय की ओर से कहा गया है कि उनका जन्म 1965 में हुआ था और उन्होंने 1980 में 10वीं की पढ़ाई पूरी की थी। इसलिए विवादित वर्ष को गलत तरीके से दर्ज किया गया बताया गया है। अब कोर्ट के सामने यह स्पष्ट करना होगा कि हलफनामे में दर्ज जानकारी में वास्तविक गलती क्या है और संबंधित दस्तावेजों से उसका क्या मिलान होता है। हसीरानी रथ कौन हैं? हसीरानी रथ, शुभेंदु अधिकारी के दिवंगत सहयोगी और निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की मां हैं। चंद्रनाथ रथ की मई 2026 में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हसीरानी रथ को BJP ने नंदीग्राम उपचुनाव में उम्मीदवार बनाया है। 6 अक्टूबर को मतदान, 9 अक्टूबर को मतगणना नंदीग्राम विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए 6 अक्टूबर को मतदान होगा, जबकि 9 अक्टूबर को मतगणना होगी। हसीरानी रथ के हलफनामे को लेकर उठे विवाद पर कोर्ट की कार्यवाही अब चुनावी प्रक्रिया के बीच महत्वपूर्ण होगी।  TMC प्रत्याशी ने नाम वापस लिया, कांग्रेस को समर्थन नंदीग्राम उपचुनाव में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की प्रत्याशी संचिता प्रधान डे ने 18 सितंबर को अपना नामांकन वापस ले लिया था। इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की।  मिलन प्रधान से जुड़े एक पुराने मामले में गिरफ्तारी के बाद भी नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर कानूनी और राजनीतिक गतिविधियां जारी हैं। 
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मां कूष्मांडा

Navratri 2026: चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा, जानें कथा, भोग और मंत्र

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं में उन्हें सृष्टि की रचनात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है। माना जाता है कि उनकी आराधना से भक्तों को उत्साह, सकारात्मकता और नई शुरुआत की प्रेरणा मिलती है। मां कूष्मांडा की पौराणिक कथा पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब चारों ओर अंधकार था, तब मां कूष्मांडा ने अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की। इसी कारण उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति के रूप में पूजा जाता है। यह कथा सृजन और ऊर्जा के महत्त्व को दर्शाती है। मां का स्वरूप और महत्त्व पूजा विधि मंत्र: ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः। भोग: मां को मालपुआ या मीठे फल अर्पित करने की परंपरा कुछ क्षेत्रों में प्रचलित है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gandhinagar

Gandhinagar Municipal Election: भाजपा को बहुमत, कांग्रेस को फायदा; AAP को एक भी सीट नहीं

Gandhinagar Municipal Election गुजरात की राजधानी गांधीनगर के नगर निगम चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर अपना दबदबा कायम रखा है। 44 सीटों वाले नगर निगम में भाजपा ने 38 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया। वहीं, कांग्रेस 5 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर रही, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) इस बार अपना खाता भी नहीं खोल पाई। एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की। 13 अक्टूबर को सामने आए चुनाव परिणामों में भाजपा के लिए राहत की बात यह रही कि नगर निगम की सत्ता उसके पास बनी रही। हालांकि, पिछली बार के मुकाबले पार्टी की सीटें कम हुई हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस ने अपनी सीटों की संख्या बढ़ाकर स्थानीय राजनीति में अपनी मौजूदगी मजबूत की है। Gandhinagar Election Result: BJP को 38, कांग्रेस को मिलीं 5 सीटें गांधीनगर नगर निगम की 44 सीटों के लिए 11 अक्टूबर को मतदान हुआ था। चुनाव में अलग-अलग राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई। मतगणना के बाद भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई। पार्टीवार नतीजे इस प्रकार रहे: इन आंकड़ों से साफ है कि भाजपा ने नगर निगम में बहुमत बनाए रखा है। वहीं, कांग्रेस को मिली पांच सीटें और AAP का खाता नहीं खुलना इस चुनाव के प्रमुख नतीजे रहे। पिछली बार से BJP की सीटें घटीं, कांग्रेस ने बढ़ाई ताकत गांधीनगर नगर निगम के पिछले चुनाव अक्टूबर 2021 में हुए थे। उस समय भाजपा ने 44 में से 41 सीटों पर जीत दर्ज की थी। कांग्रेस को दो सीटें मिली थीं, जबकि आम आदमी पार्टी ने भी एक सीट हासिल की थी। इस बार तस्वीर में कुछ बदलाव देखने को मिला। भाजपा की सीटें 41 से घटकर 38 रह गईं, जबकि कांग्रेस दो से बढ़कर पांच सीटों तक पहुंच गई। AAP पिछले चुनाव में मिली अपनी एकमात्र सीट भी नहीं बचा सकी। यानी भाजपा ने अपनी सत्ता कायम रखी, लेकिन कांग्रेस ने पिछली बार के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया। इन नतीजों ने गांधीनगर की स्थानीय राजनीति में दोनों प्रमुख दलों की स्थिति को फिर चर्चा में ला दिया है। Ward No. 6 Result: कांग्रेस ने चारों सीटों पर दर्ज की जीत गांधीनगर नगर निगम चुनाव में वार्ड नंबर 6 का परिणाम भी खास रहा। यहां कांग्रेस ने सभी चार सीटों पर जीत दर्ज की। वार्ड नंबर 7 में भी कांग्रेस को एक सीट मिली, जबकि बाकी तीन सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार विजयी रहे। इसके अलावा, वार्ड नंबर 2 में निर्दलीय उम्मीदवार दीपिका वाघेला ने जीत हासिल की। यह परिणाम दिखाता है कि भाजपा को कुल मिलाकर स्पष्ट बहुमत मिलने के बावजूद कुछ वार्डों में मुकाबला अलग रहा। Gandhinagar Municipal Election: कितना रहा मतदान? गांधीनगर नगर निगम चुनाव में 59.25 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। चुनाव के लिए 11 वार्डों की 44 सीटों पर कुल 130 उम्मीदवार मैदान में थे। 11 अक्टूबर को मतदान के बाद 13 अक्टूबर को मतगणना हुई। नतीजे सामने आने के साथ ही यह स्पष्ट हो गया कि भाजपा नगर निगम में अपना बहुमत बरकरार रखने में सफल रही है। Gujarat Civic Polls: थारा और ओखा में भी BJP को बढ़त गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में गांधीनगर के अलावा थारा और ओखा नगरपालिका के नतीजे भी चर्चा में रहे। थारा नगरपालिका की 24 सीटों में भाजपा ने 19 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को पांच सीटें मिलीं। वहीं, ओखा नगरपालिका में मतदान वाली 32 सीटों में भाजपा ने 29 और कांग्रेस ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की। ओखा में चार अन्य सीटें भाजपा पहले ही निर्विरोध जीत चुकी थी। इस तरह गांधीनगर, थारा और ओखा के चुनाव परिणामों में भाजपा ने अपनी स्थिति बनाए रखी। हालांकि, गांधीनगर में कांग्रेस की सीटें बढ़ना भी इन नतीजों का एक अहम पहलू रहा। Gandhinagar Election Result 2026: आगे किस पर रहेगी नजर? चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद अब गांधीनगर नगर निगम में नई परिषद के गठन और महापौर के चयन की प्रक्रिया पर नजर रहेगी। महापौर पद को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल, चुनाव का सबसे बड़ा नतीजा यही है कि भाजपा ने 38 सीटों के साथ नगर निगम में अपना बहुमत बरकरार रखा है। कांग्रेस को पिछले चुनाव के मुकाबले तीन सीटों का फायदा हुआ, जबकि AAP इस बार एक भी सीट हासिल नहीं कर सकी। गांधीनगर के ये नतीजे स्थानीय निकाय की राजनीति में भाजपा की स्थिति और कांग्रेस की बढ़ी हुई सीटों, दोनों को सामने रखते हैं। आने वाले समय में नगर निगम के फैसलों और नई परिषद के कामकाज पर लोगों की नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
UPI

UPI Charges Update: ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर 0.4% फीस, दिवाली तक टला फैसला

UPI Transaction Charges में डिजिटल पेमेंट करने वाले दुकानदारों और कारोबारियों के लिए UPI चार्ज से जुड़ा अहम अपडेट सामने आया है। ₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% फीस लगाने की व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होनी थी, लेकिन त्योहारी सीजन को देखते हुए इसे दिवाली तक टालने की जानकारी सामने आई है। इससे त्योहारों के दौरान डिजिटल पेमेंट करने वाले कारोबारियों को फिलहाल राहत मिल सकती है। हालांकि, इस फैसले से जुड़ी नई तारीख और लागू होने वाली शर्तों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। इसलिए ग्राहकों और दुकानदारों को किसी भी बदलाव से पहले संबंधित दिशानिर्देशों पर ध्यान देना चाहिए। UPI Payment Charges: क्या है पूरा मामला? आज देश में छोटी दुकानों से लेकर बड़े शोरूम तक UPI के जरिए भुगतान किया जाता है। सब्जी खरीदने से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग और बड़े बिलों का भुगतान करने तक, QR कोड स्कैन करना लोगों की रोजमर्रा की आदत बन चुका है। इसी बीच ₹2,000 से ज्यादा के कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की चर्चा है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होने वाली थी, लेकिन दिवाली के दौरान बाजार में बढ़ने वाली खरीदारी और डिजिटल लेनदेन को देखते हुए इसे आगे बढ़ाने की बात कही गई है। यहां समझना जरूरी है कि MDR का संबंध कारोबारी भुगतान से है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर UPI यूजर को पैसे भेजने या प्राप्त करने पर अतिरिक्त फीस देनी होगी। क्या PhonePe और Google Pay से पेमेंट करना होगा महंगा? UPI चार्ज की खबर सामने आने के बाद कई लोगों के मन में सवाल है कि क्या PhonePe, Google Pay और दूसरे UPI ऐप से भुगतान करने पर अब अतिरिक्त पैसे देने होंगे। फिलहाल आम ग्राहकों को यह समझना चाहिए कि प्रस्तावित मर्चेंट चार्ज और व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले UPI ट्रांसफर अलग-अलग हैं। सामान्य P2P ट्रांजैक्शन पर इस तरह का MDR लागू नहीं होता। इसी तरह, निर्धारित नियमों के तहत आने वाले छोटे मूल्य के मर्चेंट ट्रांजैक्शन भी इस चार्ज से बाहर रह सकते हैं। इसलिए यह मान लेना सही नहीं होगा कि ₹2,000 से अधिक का हर UPI पेमेंट महंगा हो जाएगा। दुकानदारों को क्यों मिल सकती है राहत? दिवाली के समय बाजारों में ग्राहकों की भीड़ बढ़ जाती है। कपड़े, मिठाई, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल और घरेलू सामान की दुकानों पर डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ता है। ऐसे में ट्रांजैक्शन चार्ज से जुड़े फैसले को आगे बढ़ाने से कारोबारियों को त्योहार के दौरान भुगतान व्यवस्था में बदलाव के लिए अतिरिक्त समय मिल सकता है। खासकर छोटे दुकानदारों के लिए यह मुद्दा महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनके कारोबार में UPI पेमेंट की बड़ी भूमिका होती है। हालांकि, चार्ज किस पर और किन शर्तों के तहत लागू होगा, यह संबंधित आधिकारिक नियमों पर निर्भर करेगा। UPI Transaction Fee: कब लागू होगा नया नियम? ₹2,000 से अधिक के पात्र मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% फीस से जुड़े फैसले को दिवाली तक टालने की खबर सामने आई है। लेकिन नई लागू तारीख और अंतिम नियमों की पुष्टि आधिकारिक घोषणा से ही की जानी चाहिए। इसलिए ग्राहकों और कारोबारियों को फिलहाल किसी भी अपुष्ट जानकारी के आधार पर यह नहीं मानना चाहिए कि सभी UPI पेमेंट पर चार्ज लगने वाला है। UPI यूजर्स के लिए जरूरी सलाह UPI ने देश में डिजिटल भुगतान को आसान और तेज बनाया है। ऐसे में चार्ज से जुड़ी किसी भी नई व्यवस्था का असर समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि नियम किस प्रकार के ट्रांजैक्शन पर लागू होता है। आम यूजर्स को अपने सामान्य डिजिटल पेमेंट को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। वहीं, दुकानदारों को किसी भी संभावित चार्ज के बारे में अपने बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर से जानकारी लेनी चाहिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
SIR

Patna SIR Protest: पटना में छात्रों का हंगामा, बैरिकेडिंग तोड़ी; छात्राओं को खींचकर ले जाने का आरोप

बिहार की राजधानी पटना (Patna) में SIR (Special Intensive Revision) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के विरोध में सड़क पर उतरे छात्रों और प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की खबर सामने आई। वहीं, पुलिस की गाड़ी की चाबी लेकर भागने और प्रदर्शन कर रही छात्राओं को खींचकर ले जाने के आरोपों ने भी इस मामले को चर्चा में ला दिया है। प्रदर्शन की इन घटनाओं के बीच अब पुलिस की कार्रवाई और SIR की प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों पर सबकी नजर है। Patna में SIR के खिलाफ प्रदर्शन, सड़क पर उतरे छात्र पटना में SIR के विरोध में छात्रों और विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों की नाराजगी मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर है। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है, ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलती से मतदाता सूची से न हटे। SIR यानी Special Intensive Revision का उद्देश्य मतदाता सूची की विशेष जांच और उसे अपडेट करना है। हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों और कुछ संगठनों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। Protest के दौरान टूटी बैरिकेडिंग, पुलिस से टकराव प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी। इसके बाद मौके पर तनाव बढ़ गया और पुलिस के साथ टकराव की स्थिति बन गई। इसी दौरान पुलिस की गाड़ी की चाबी लेकर भागने की घटना भी सामने आई है। हालांकि, इस घटना की परिस्थितियों और इसमें शामिल लोगों के बारे में आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। छात्राओं को खींचकर ले जाने का आरोप पटना में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि प्रदर्शन कर रही कुछ छात्राओं को पुलिसकर्मी खींचकर वहां से ले गए। इस घटना को लेकर प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस के व्यवहार पर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, छात्राओं की संख्या, उन्हें हिरासत में लिए जाने की स्थिति और इस मामले में पुलिस का पक्ष स्पष्ट होने के बाद ही घटनाक्रम की पूरी जानकारी सामने आएगी। क्या है SIR और क्यों हो रहा है इसका विरोध? SIR का पूरा नाम Special Intensive Revision है। यह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है, जिसके तहत मतदाताओं के विवरण की जांच की जाती है और सूची को अपडेट किया जाता है। इस प्रक्रिया का विरोध कर रहे संगठनों की प्रमुख चिंता यह है कि जांच के दौरान किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से नहीं हटना चाहिए। उनका जोर पारदर्शिता, सही दस्तावेजों और मतदाताओं को अपनी शिकायत दर्ज कराने का उचित अवसर देने पर है। वहीं, मतदाता सूची को अपडेट करना चुनावी प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। ऐसे में इस मुद्दे पर स्पष्ट दिशा-निर्देश और शिकायतों का समय पर समाधान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Patna Protest के बाद पुलिस की कार्रवाई पर नजर पटना में SIR के खिलाफ हुए इस प्रदर्शन के बाद अब पुलिस की कार्रवाई और घटनास्थल से सामने आने वाले तथ्यों पर नजर रहेगी। बैरिकेडिंग तोड़ने, पुलिस की गाड़ी की चाबी लेकर भागने और छात्राओं को खींचकर ले जाने के आरोपों की पुष्टि के लिए आधिकारिक बयान और उपलब्ध वीडियो अहम होंगे। फिलहाल, इस घटना से जुड़ी सभी जानकारियों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष और हिरासत से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Stock Market

Stock Market Today: सेंसेक्स 600 अंक उछला, Nifty में 200 अंकों की तेजी; IT और Banking Stocks में खरीदारी

भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में मंगलवार, 13 अक्टूबर को कारोबार के दौरान अच्छी तेजी देखने को मिली। शुरुआती उतार-चढ़ाव के बाद सेंसेक्स ने जोरदार वापसी की और 600 अंकों से ज्यादा की बढ़त दर्ज की। वहीं, निफ्टी भी करीब 200 अंक चढ़ गया। IT और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी बढ़ने से बाजार को सहारा मिला। सुबह करीब 10 बजे BSE Sensex 72,500 के ऊपर कारोबार कर रहा था, जबकि NSE Nifty 50 भी 22,500 के पार पहुंच गया। बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों को राहत मिली। हालांकि, कई शेयरों में बिकवाली जारी रहने से बाजार की तस्वीर पूरी तरह एक जैसी नहीं रही। Sensex-Nifty में तेजी, निवेशकों को मिली राहत शेयर बाजार में मंगलवार को खरीदारी का माहौल मजबूत होता दिखाई दिया। सेंसेक्स करीब 660 अंक चढ़कर 72,585 के आसपास पहुंच गया। दूसरी ओर, निफ्टी में लगभग 202 अंकों की बढ़त दर्ज की गई और यह 22,565 के स्तर के करीब कारोबार करता नजर आया। पिछले सत्रों में बाजार पर दबाव देखने को मिला था। ऐसे में प्रमुख सूचकांकों में आई इस तेजी ने निवेशकों को कुछ राहत दी। हालांकि, बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। IT Stocks में सबसे ज्यादा हलचल मंगलवार को IT सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। HCL Technologies और Tata Consultancy Services (TCS) के शेयरों में मजबूत बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा Infosys और Tech Mahindra के शेयरों पर भी निवेशकों की नजर रही। IT कंपनियों के तिमाही नतीजों और कारोबार से जुड़े अपडेट का असर शेयरों पर दिखाई दिया। खासकर HCLTech के नतीजों से जुड़ी सकारात्मक खबरों ने सेक्टर में खरीदारी को बढ़ावा दिया। IT शेयरों में आई तेजी ने सेंसेक्स और निफ्टी को ऊपर ले जाने में अहम भूमिका निभाई। Banking Stocks ने भी दिया बाजार का साथ IT शेयरों के साथ बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में भी निवेशकों ने दिलचस्पी दिखाई। HDFC Bank, State Bank of India (SBI), Bajaj Finance और Bajaj Finserv जैसे शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। बैंकिंग शेयरों में बढ़त का असर बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर भी पड़ा। हालांकि, सभी सेक्टरों में एक जैसी तेजी नहीं रही। कुछ शेयरों में कमजोरी बनी रही, जिससे पता चलता है कि निवेशक चुनिंदा कंपनियों में ही पैसा लगा रहे थे। रुपये की मजबूती से बाजार को सहारा शेयर बाजार के अलावा मुद्रा बाजार में भी हलचल देखने को मिली। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती से निवेशकों की धारणा को कुछ समर्थन मिला। रुपये की चाल पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के कदमों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और डॉलर की वैश्विक स्थिति का असर पड़ता है। हालांकि, आने वाले दिनों में रुपये की दिशा काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक हालात पर निर्भर करेगी। महंगाई और कच्चे तेल पर भी रहेगी नजर बाजार में तेजी के बावजूद निवेशकों की चिंताएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। खुदरा महंगाई, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और अंतरराष्ट्रीय बाजारों का रुख आने वाले दिनों में शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे समय में कंपनियों के तिमाही नतीजे भी महत्वपूर्ण हैं। बेहतर नतीजे पेश करने वाली कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ सकती है, जबकि कमजोर प्रदर्शन करने वाले शेयरों पर दबाव बना रह सकता है। निवेशकों के लिए क्या है संकेत? सेंसेक्स और निफ्टी में आई तेजी बाजार के लिए राहत की खबर है, लेकिन इसे लगातार तेजी की गारंटी नहीं माना जा सकता। बाजार में निवेश करने से पहले कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, शेयर की कीमत और उससे जुड़े जोखिमों को समझना जरूरी है। कुल मिलाकर, 13 अक्टूबर को IT और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी के दम पर भारतीय शेयर बाजार ने मजबूती दिखाई। अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि बाजार अपनी बढ़त को कितना बरकरार रखता है और आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक संकेत किस तरह असर डालते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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