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स्वतंत्र India की Politics: बड़े फैसले, सियासी हलचल और बदलता राजनीतिक परिदृश्य

स्वतंत्र India की Politics: बड़े फैसले, सियासी हलचल और बदलता राजनीतिक परिदृश्य

स्वतंत्रता दिवस सिर्फ देश की आजादी का उत्सव नहीं है, बल्कि यह उस लोकतांत्रिक सफर को देखने का भी मौका है, जिसने India को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्रों में मजबूत पहचान दिलाई है। बीते समय में देश की राजनीति में कई ऐसे घटनाक्रम हुए, जिन्होंने राष्ट्रीय बहस और राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत, राष्ट्रीय सुरक्षा और युवाओं के रोजगार को अपनी प्राथमिकताओं में प्रमुखता से रखा। लाल किले से दिए गए स्वतंत्रता दिवस संबोधन में भी भारत को तकनीक, रक्षा, ऊर्जा और उद्योग के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प सामने आया। ऑपरेशन सिंदूर से मजबूत हुआ राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा आतंकवाद के खिलाफ भारत की कार्रवाई ऑपरेशन सिंदूर देश की राजनीति और राष्ट्रीय विमर्श का बड़ा मुद्दा बनी। सरकार ने इसे आतंकवाद के खिलाफ भारत की बदली हुई नीति का संदेश बताया। इस कार्रवाई के बाद देश में सुरक्षा, आतंकवाद और सेना की भूमिका को लेकर व्यापक चर्चा हुई। संसद में कई मुद्दों पर तीखी बहस संसद में वक्फ कानून, चुनाव सुधार, ऑनलाइन गेमिंग, रोजगार, ग्रामीण विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने नजर आए। कई महत्वपूर्ण विधेयकों को लेकर संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बहस देखने को मिली। चुनावों में जनता ने तय की राजनीतिक दिशा बिहार विधानसभा चुनाव में बड़ी संख्या में मतदाताओं की भागीदारी ने एक बार फिर भारतीय लोकतंत्र की ताकत दिखाई। इसके बाद असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों ने भी राष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ाई। इन चुनावों में स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ विकास, रोजगार, कल्याणकारी योजनाएं, कानून-व्यवस्था और नेतृत्व जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। अलग-अलग राज्यों के जनादेश ने यह भी दिखाया कि भारतीय मतदाता हर चुनाव में अपनी प्राथमिकताओं के आधार पर राजनीतिक फैसला करता है। युवाओं और विकास पर बढ़ा फोकस भारत की युवा आबादी को देखते हुए रोजगार और नई तकनीक राजनीति के अहम मुद्दे बने हुए हैं। सेमीकंडक्टर, स्टार्टअप, डिजिटल इंडिया, अंतरिक्ष, रक्षा उत्पादन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में भारत की बढ़ती भूमिका को सरकार देश के भविष्य से जोड़ रही है। जनता ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत भारतीय राजनीति में विचारधाराओं और राजनीतिक दलों की अपनी भूमिका है, लेकिन लोकतंत्र की असली ताकत जनता के हाथ में है। चुनाव दर चुनाव मतदाता अपने मुद्दों और उम्मीदों के आधार पर सरकारों को चुनता है और राजनीतिक दलों को जवाबदेह भी बनाता है। स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगे के नीचे खड़ा भारत सिर्फ अपनी आजादी का जश्न नहीं मनाता, बल्कि यह भी याद करता है कि लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने की जिम्मेदारी हर नागरिक की है। आज का भारत बदल रहा है—और इस बदलाव की दिशा तय करने में राजनीति के साथ-साथ आम भारतीय की भूमिका सबसे अहम है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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बालोतरा की HPCL रिफाइनरी में फिर लगी आग, ऑयल रिसाव के बाद भड़की लपटें; 15 मिनट में पाया काबू

बालोतरा: राजस्थान के बालोतरा स्थित हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) की पचपदरा रिफाइनरी में शुक्रवार शाम एक बार फिर आग लग गई। घटना करीब शाम 6 बजे क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (CDU) में हुई, जहां ऑयल रिसाव के बाद चिंगारी से आग भड़क गई। आग लगते ही रिफाइनरी का फायर सेफ्टी सिस्टम सक्रिय हो गया और सायरन बजने लगे। धुआं उठते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियां पहुंचीं और करीब 15 मिनट में आग पर काबू पा लिया गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, हादसे में किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। अप्रैल में भी लगी थी रिफाइनरी में आग इससे पहले 20 अप्रैल को भी रिफाइनरी की CDU और VDU यूनिट में आग लग गई थी। उस दौरान यूनिट से धुआं उठने के बाद फायर सेफ्टी सिस्टम सक्रिय किया गया था। फायर ब्रिगेड की टीम ने करीब 2 से 3 घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया था। यह हादसा रिफाइनरी के प्रस्तावित उद्घाटन से ठीक एक दिन पहले हुआ था। आग के चलते 21 अप्रैल को होने वाला उद्घाटन कार्यक्रम टाल दिया गया था। बाद में रिपेयरिंग का काम पूरा होने के बाद 4 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रिफाइनरी का उद्घाटन किया। 4,500 एकड़ में फैली है रिफाइनरी HPCL की यह रिफाइनरी राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा में करीब 4,500 एकड़ यानी 7,200 बीघा क्षेत्र में बनाई गई है। यहां विदेशों से आने वाले कच्चे तेल को प्रोसेस कर पेट्रोलियम और अन्य उत्पाद तैयार किए जाते हैं। रिफाइनरी की सालाना 9 मिलियन टन कच्चे तेल को प्रोसेस करने की क्षमता बताई गई है। देश की हाई-कन्वर्जन रिफाइनरी में शामिल पचपदरा रिफाइनरी HPCL और राजस्थान सरकार का संयुक्त उपक्रम है। इसमें HPCL की 74% और राजस्थान सरकार की 26% हिस्सेदारी है। रिफाइनरी की प्रमुख विशेषताओं में इसका नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स (NCI) करीब 17 होना बताया जाता है। इसका मतलब है कि यहां अपेक्षाकृत भारी और कम गुणवत्ता वाले कच्चे तेल को भी पेट्रोल, डीजल और पेट्रोकेमिकल जैसे मूल्यवान उत्पादों में बदला जा सकता है। परियोजना के निर्माण में कई अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। रिफाइनरी के बड़े रिएक्टर, कॉलम और टैंक का निर्माण भारत में किया गया, जबकि कंट्रोल सिस्टम और हाई-प्रेशर कंप्रेसर जैसी तकनीकों में अमेरिका, जापान और यूरोप की तकनीक का इस्तेमाल हुआ है।
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देवगढ़ किले में सेल्फी लेते समय 40 फीट गहरी खाई में गिरा युवक, गंभीर घायल

सीकर: सीकर स्थित देवगढ़ किले में शुक्रवार शाम सेल्फी लेना 20 वर्षीय युवक को भारी पड़ गया। किले की दीवार पर सेल्फी लेते समय पैर फिसलने से युवक करीब 40 फीट गहरी खाई में जा गिरा। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस और सिविल डिफेंस की टीम ने रेस्क्यू कर उसे खाई से बाहर निकाला, जिसके बाद सीकर के एसके अस्पताल में भर्ती कराया गया। गोकुलपुरा थाना पुलिस के ASI रामकुमार के मुताबिक, गोकुलपुरा निवासी भूमिक जांगिड़ (20) पुत्र सुभाष जांगिड़ शुक्रवार शाम दो दोस्तों के साथ बाइक से देवगढ़ किला घूमने पहुंचा था। तीनों ने बाइक नीचे खड़ी की और पहाड़ चढ़कर किले तक पहुंचे। भूमिक किले की दीवार पर चढ़कर सेल्फी ले रहा था। इसी दौरान अचानक उसका पैर फिसल गया और वह नीचे खाई में जा गिरा। उसके दोस्तों ने आसपास मौजूद लोगों को घटना की जानकारी दी, जिसके बाद 112 पर सूचना दी गई। कंधों पर लादकर खाई से बाहर निकाला सूचना मिलते ही पुलिस और सिविल डिफेंस की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद खाई में पहुंचे और गंभीर घायल भूमिक को कंधों पर लादकर पहाड़ से नीचे लेकर आए। इसके बाद एंबुलेंस से उसे एसके अस्पताल पहुंचाया गया। हादसे में भूमिक के एक पैर में फ्रैक्चर हुआ है। इसके अलावा सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में भी चोटें आई हैं। फिलहाल अस्पताल में उसका इलाज जारी है। देवगढ़ किले तक जाने का रास्ता नहीं बताया गया कि देवगढ़ किले तक पहुंचने के लिए कोई पक्का रास्ता नहीं है। लोगों को कच्ची पगडंडी या पहाड़ चढ़कर वहां जाना पड़ता है। किले के आसपास मोबाइल नेटवर्क भी उपलब्ध नहीं है। स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन से किले के आसपास पुलिस की तैनाती और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की मांग की है, ताकि शाम के समय लोग जोखिम उठाकर किले पर न जाएं और ऐसे हादसों को रोका जा सके।
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स्वतंत्रता दिवस 2026: सशस्त्र बलों के 78 जवानों को वीरता पुरस्कार, 13 मरणोपरांत

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वतंत्रता दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर सशस्त्र बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) के जवानों के लिए 78 वीरता पुरस्कारों को मंजूरी दी है। इनमें 13 पुरस्कार मरणोपरांत दिए जाएंगे। मेजर आदित्य प्रताप सिंह को शौर्य चक्र का बार राजपूताना राइफल्स के मेजर आदित्य प्रताप सिंह को दूसरी बार शौर्य चक्र से सम्मानित किया जाएगा। उन्हें इससे पहले जून 2026 में भारत-म्यांमार सीमा पर उग्रवादियों के खिलाफ एक साहसिक अभियान में अदम्य वीरता दिखाने के लिए शौर्य चक्र मिला था। मेजर सिंह फिलहाल 44 असम राइफल्स में तैनात हैं और उनके नाम के साथ सेना मेडल भी दर्ज है। 9 कीर्ति चक्र और 19 शौर्य चक्र राष्ट्रपति द्वारा मंजूर वीरता पुरस्कारों में शामिल हैं: ‘बार’ का क्या मतलब होता है? वीरता पुरस्कारों में ‘बार’ का मतलब है कि उसी व्यक्ति को वही वीरता पुरस्कार दोबारा दिया जा रहा है। उदाहरण के लिए, अगर किसी अधिकारी को पहले शौर्य चक्र मिल चुका है और बाद में वह फिर असाधारण वीरता दिखाता है, तो दूसरी बार अलग शौर्य चक्र देने के बजाय उसके मूल पदक के साथ ‘बार’ प्रदान किया जाता है। 89 जवानों को ‘मेंशन-इन-डिस्पैचेस’ राष्ट्रपति ने 89 ‘मेंशन-इन-डिस्पैचेस’ को भी मंजूरी दी है। इनमें: शामिल हैं। इनमें आर्मी डॉग टायसन का नाम भी है, जिसे ऑपरेशन रक्षक के तहत ‘मेंशन-इन-डिस्पैचेस’ दिया गया है। पुलिस और फायर सर्विस के 1,057 कर्मियों को सम्मान स्वतंत्रता दिवस 2026 के अवसर पर पुलिस, फायर सर्विस, होम गार्ड, सिविल डिफेंस और जेल सेवाओं के 1,057 कर्मियों को गैलेंट्री और सर्विस मेडल देने की घोषणा की गई है। इनमें: शामिल हैं। इसके अलावा CBI के 21 अधिकारियों और कर्मचारियों को भी उनकी सेवाओं के लिए राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया जाएगा।
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Masoud Pezeshkian

Masoud Pezeshkian India Visit: BRICS Summit में शामिल होंगे ईरानी राष्ट्रपति, India-Iran Relations पर फोकस

नई दिल्ली में सितंबर में होने वाला BRICS Summit 2026 इस बार सिर्फ आर्थिक सहयोग की बैठकों तक सीमित नहीं रहने वाला है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान (Masoud Pezeshkian) भी भारत पहुंचेंगे और शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है, ऐसे में पेजेशकियान की मौजूदगी को India-Iran Relations के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। पेजेशकियान का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब पश्चिम एशिया की स्थिति लगातार अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में है। यही वजह है कि नई दिल्ली में होने वाली BRICS बैठक के दौरान आर्थिक मुद्दों के साथ-साथ क्षेत्रीय हालात और वैश्विक कूटनीति पर भी नजर रहेगी। BRICS Summit में शामिल होंगे ईरानी राष्ट्रपति ईरान 2024 में BRICS का पूर्ण सदस्य बना था। संगठन में शामिल होने के बाद यह पहली बार है जब राष्ट्रपति पेजेशकियान भारत में BRICS के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। उनकी मौजूदगी से संगठन में ईरान की भूमिका और भारत के साथ उसके संबंधों पर चर्चा को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। भारत की अध्यक्षता में इस साल BRICS का फोकस Resilience, Innovation, Cooperation और Sustainability जैसे मुद्दों पर है। सम्मेलन में आर्थिक सहयोग, व्यापार, निवेश, विकास और बदलती वैश्विक व्यवस्था से जुड़े विषयों पर बातचीत हो सकती है। PM Modi से मुलाकात पर भी रहेंगी निगाहें पेजेशकियान के भारत दौरे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी संभावित मुलाकात भी अहम मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से व्यापार, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग जैसे मुद्दे बातचीत का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में BRICS Summit के दौरान दोनों नेताओं की बैठक होती है तो India-Iran Relations को लेकर कुछ महत्वपूर्ण संकेत सामने आ सकते हैं। खासकर ऐसे वक्त में जब पश्चिम एशिया की राजनीति तेजी से बदल रही है। Chabahar Port और Connectivity भी अहम मुद्दे भारत और ईरान के रिश्तों में Chabahar Port की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। यह बंदरगाह भारत के लिए मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक संपर्क बढ़ाने का एक अहम रास्ता माना जाता है। पेजेशकियान की यात्रा के दौरान कनेक्टिविटी, व्यापार और आर्थिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत की उम्मीद है। दोनों देशों के लिए यह दौरा पुराने संबंधों को नई दिशा देने का अवसर बन सकता है। West Asia Crisis के बीच क्यों खास है दौरा? पेजेशकियान ऐसे समय भारत आ रहे हैं जब West Asia में तनाव का असर वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। भारत लगातार बातचीत और कूटनीतिक समाधान के जरिए क्षेत्र में स्थिरता की जरूरत पर जोर देता रहा है। BRICS में बढ़ रहा ईरान का प्रभाव BRICS में ईरान की एंट्री के बाद संगठन का दायरा और व्यापक हुआ है। ईरान अब आर्थिक सहयोग के साथ-साथ वैश्विक दक्षिण से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी भूमिका मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। नई दिल्ली में होने वाला सम्मेलन भारत और ईरान दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। भारत जहां BRICS के जरिए वैश्विक मंच पर अपनी प्राथमिकताओं को सामने रखेगा, वहीं ईरान के लिए यह अपने आर्थिक और कूटनीतिक संपर्क बढ़ाने का अवसर होगा। भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है पेजेशकियान का दौरा? हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Monsoon

Monsoon Flood UP के 16 जिलों में बाढ़, नावों से आवाजाही; Bihar से Himachal तक बारिश का कहर

मानसून (Monsoon) की तेज बारिश ने उत्तर भारत के कई हिस्सों में लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उत्तर प्रदेश के 16 जिलों में बाढ़ और जलभराव से हालात परेशान करने वाले हैं। कई कॉलोनियों में सड़कें पानी में डूब गईं, जिसके बाद लोगों को आने-जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ा। बिहार के छपरा में भी बारिश और जलभराव ने कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। वहीं हिमाचल प्रदेश में बारिश के बीच हुए Landslide ने रेल ट्रैक और यातायात व्यवस्था को प्रभावित किया है। UP के 16 जिलों में Flood का असर उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश के बाद कई नदियों का जलस्तर बढ़ा है। इसका असर आसपास के गांवों और शहरों में साफ दिखाई दे रहा है। 16 जिलों में बाढ़ और जलभराव की स्थिति ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित किया है। कई इलाकों में सड़कें पानी में डूब गई हैं। कॉलोनियों में घरों के आसपास पानी जमा होने से लोगों को जरूरी काम के लिए भी बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। कुछ स्थानों पर राहत और बचाव के लिए नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है। कॉलोनियों में नाव बनी सहारा शहरों में जलभराव की स्थिति सबसे ज्यादा परेशान करने वाली है। जिन सड़कों पर आम दिनों में वाहन दौड़ते थे, वहां अब पानी जमा है। स्थानीय लोगों के लिए यह स्थिति किसी बड़ी परेशानी से कम नहीं है। प्रशासन और राहत टीमें प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर स्थिति का जायजा ले रही हैं। जरूरत वाले इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और जरूरी सामान उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। Chhapra में 100 दुकानों में घुसा पानी बिहार के छपरा में भी भारी बारिश के बाद बाजार प्रभावित हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 100 दुकानों में पानी घुस गया। व्यापारियों के सामने अब दुकानों में रखे सामान को बचाने की चुनौती है। दुकानदारों का कहना है कि जलभराव से कारोबार पर सीधा असर पड़ा है। बाजार में पानी जमा होने के कारण ग्राहक भी आसानी से नहीं पहुंच पा रहे हैं। अगर जलनिकासी में देरी होती है तो व्यापारियों की परेशानी और बढ़ सकती है। Himachal में Landslide से Rail Track पर संकट हिमाचल प्रदेश में बारिश के साथ पहाड़ी इलाकों में Landslide का खतरा बढ़ गया है। कई जगह पहाड़ों से मलबा गिरने के कारण सड़क और रेल यातायात प्रभावित हुआ है। रेल ट्रैक पर मलबा आने की स्थिति में ट्रेनों की आवाजाही रोकनी या सीमित करनी पड़ सकती है। रेलवे और प्रशासन की टीमें प्रभावित हिस्सों की जांच कर रही हैं और रास्ता साफ करने का काम किया जा रहा है। लोगों के लिए बढ़ी मुश्किल UP से Bihar और Himachal तक सामने आ रही तस्वीरें बताती हैं कि मानसून इस समय कई इलाकों में चुनौती बन गया है। मैदानी क्षेत्रों में बाढ़ और Waterlogging ने लोगों की परेशानी बढ़ाई है, जबकि पहाड़ी इलाकों में Landslide और अचानक बाढ़ का खतरा बना हुआ है। बारिश के बीच प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों पर नजर रखी जा रही है। लोगों से भी अपील की जा रही है कि वे पानी से भरी सड़कों, नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें। आगे भी सतर्क रहने की जरूरत मानसून के दौरान मौसम तेजी से बदल सकता है। ऐसे में प्रभावित जिलों में राहत और बचाव व्यवस्था को मजबूत रखना जरूरी है। प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित लोगों तक समय पर मदद पहुंचाना और जलभराव वाले इलाकों में सामान्य स्थिति बहाल करना है। फिलहाल UP, Bihar और Himachal में बारिश से पैदा हुए हालात पर नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में मौसम कैसा रहता है, इसी पर कई प्रभावित इलाकों की स्थिति निर्भर करेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi

Delhi Bomb Threat High Court समेत 6 जगहों को धमकी, जांच में जुटीं Agencies

स्वतंत्रता दिवस से ठीक एक दिन पहले दिल्ली (Delhi) में उस वक्त अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब राजधानी की करीब छह जगहों को बम से उड़ाने की धमकी वाले ईमेल मिले। खबर सामने आते ही सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गईं और संबंधित स्थानों पर जांच शुरू कर दी गई। धमकी ऐसे समय मिली है, जब 15 अगस्त को लेकर दिल्ली में पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी है। प्रमुख सरकारी इमारतों और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की निगरानी बढ़ाई गई है। Delhi High Court को भी मिला धमकी भरा Email मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, धमकी पाने वाली जगहों में Delhi High Court और इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGI Airport) भी शामिल हैं। ईमेल मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई और सुरक्षा टीमों ने परिसर की जांच की। Delhi हाई कोर्ट में धमकी की सूचना मिलने के बाद पुलिस और सुरक्षा अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लिया। हालांकि, शुरुआती जांच में किसी संदिग्ध विस्फोटक की पुष्टि नहीं हुई है। Independence Day से पहले क्यों बढ़ी चिंता? 15 अगस्त को दिल्ली में बड़े स्तर पर Independence Day समारोह आयोजित होते हैं। इस दौरान राजधानी में बड़ी संख्या में लोग भी अलग-अलग स्थानों पर मौजूद रहते हैं। ऐसे में धमकी भरा ईमेल मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं करना चाहतीं। पुलिस की टीमें ईमेल के स्रोत का पता लगाने में जुटी हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि संदेश किसने भेजा और इसके पीछे वास्तविक मंशा क्या थी। सुरक्षा व्यवस्था हुई और सख्त धमकी की खबर के बाद संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा जांच बढ़ा दी गई है। एयरपोर्ट, कोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर आने-जाने वालों की निगरानी की जा रही है। संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सुरक्षा टीमों को अलर्ट किया गया है। दिल्ली में Independence Day को देखते हुए पहले से ही कई स्तरों पर सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। ऐसे में ताजा धमकी ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता जरूर बढ़ा दी है। जांच जारी, लोगों से अफवाहों से बचने की अपील फिलहाल पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं। धमकी वाले ईमेल की सत्यता और उसके पीछे मौजूद व्यक्ति या समूह के बारे में जांच पूरी होने के बाद ही तस्वीर साफ होगी। सुरक्षा एजेंसियों के लिए फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता राजधानी में Independence Day समारोह को सुरक्षित तरीके से संपन्न कराना है। आम लोगों से भी अपील है कि वे किसी भी अपुष्ट खबर या अफवाह को सोशल मीडिया पर आगे न बढ़ाएं और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें। निष्कर्ष: स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले मिली इस धमकी ने दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता और बढ़ा दी है। जांच एजेंसियां ईमेल के स्रोत और उसकी गंभीरता का पता लगाने में जुटी हैं। फिलहाल किसी वास्तविक विस्फोटक की पुष्टि नहीं हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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CJI Surya Kant

CJI Surya Kant Controversy: NALSAR छात्रों के विरोध से मचा बवाल, BCI ने पलटा Enrolment Order

NALSAR University का विवाद अब सिर्फ एक Convocation तक सीमित नहीं रहा है। CJI Surya Kant को समारोह में Chief Guest बनाए जाने पर कुछ छात्रों की आपत्ति के बाद शुरू हुआ मामला पहले Bar Council of India (BCI) तक पहुंचा और फिर Supreme Court में भी चर्चा का विषय बन गया। सबसे ज्यादा चर्चा BCI के उस फैसले की हुई, जिसमें NALSAR के 2026 बैच के Law Graduates के Enrolment पर रोक लगाने की बात कही गई थी। हालांकि घटनाक्रम ज्यादा देर तक एक जैसा नहीं रहा। BCI ने बाद में अपना फैसला बदलते हुए छात्रों को Enrolment की अनुमति दे दी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में CJI सूर्यकांत ने भी इस पूरे मामले में BCI की भूमिका पर सवाल उठाए। CJI सूर्यकांत को Chief Guest बनाने पर क्यों हुआ विवाद? NALSAR के Convocation समारोह में CJI सूर्यकांत को Chief Guest के तौर पर आमंत्रित किया गया था। इसी को लेकर छात्रों के एक वर्ग ने आपत्ति जताई। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने अपनी चिंताएं रखीं और CJI को बुलाने के फैसले पर सवाल उठाए। मामला तब ज्यादा चर्चा में आया, जब छात्रों की आपत्ति को लेकर BCI ने भी संज्ञान लिया। इसके बाद विश्वविद्यालय से पूरे घटनाक्रम की जानकारी और तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी गई। BCI ने 2026 बैच के Enrolment पर लगाई रोक विवाद के बीच BCI की ओर से पहले ऐसा निर्देश जारी किया गया कि NALSAR के 2026 बैच के Law Graduates का Advocate के रूप में Enrolment अगले आदेश तक रोका जाए। इस फैसले से छात्रों के बीच चिंता बढ़ गई। वजह साफ थी—किसी विवाद में पूरे बैच के भविष्य पर असर पड़ने की आशंका पैदा हो गई थी। सवाल यह भी उठा कि अगर विरोध में केवल कुछ छात्र शामिल थे, तो उसका असर पूरे बैच पर क्यों पड़े? फिर BCI ने बदला अपना फैसला विवाद बढ़ने के बाद BCI ने अपने शुरुआती आदेश में बदलाव किया। परिषद ने साफ किया कि NALSAR के 2026 बैच के छात्रों को उनकी पसंद के State Bar Council में Enrolment कराने की अनुमति दी जाएगी। बाद में BCI ने 2026 बैच के खिलाफ कार्यवाही बंद करने की बात भी कही। परिषद का कहना था कि बड़ी संख्या में छात्र इस पूरे घटनाक्रम में शामिल नहीं थे और किसी छात्र को ऐसी कार्रवाई का सामना नहीं करना चाहिए, जिसमें उसकी कोई भूमिका न हो। इस फैसले से उन छात्रों को राहत मिली, जिनकी पढ़ाई पूरी होने के बाद अब Professional Career शुरू होने वाला था। Supreme Court में CJI ने BCI से पूछा- दखल क्यों? मामले की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने BCI की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि छात्रों और उनके बीच का मामला किस तरह BCI के हस्तक्षेप का विषय बन गया। CJI की टिप्पणी ने मामले का रुख ही बदल दिया। अब चर्चा सिर्फ इस बात पर नहीं थी कि Convocation में किसे Chief Guest बनाया जाए, बल्कि यह सवाल भी सामने आया कि छात्रों को असहमति जताने और अपनी बात रखने की कितनी स्वतंत्रता है। छात्रों के Career पर असर का मुद्दा भी अहम इस विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू छात्रों का भविष्य रहा। Law की पढ़ाई पूरी करने के बाद Advocate के रूप में Enrolment किसी भी Law Graduate के Career का अहम पड़ाव होता है। ऐसे में पूरे बैच के Enrolment पर रोक की खबर ने कई छात्रों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी थी। बाद में BCI के फैसले में बदलाव के बाद स्थिति सामान्य हुई। विवाद अभी पूरी तरह खत्म नहीं BCI ने 2026 बैच के खिलाफ अपनी कार्रवाई वापस ले ली है, लेकिन पूरे विवाद ने कई बड़े सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। एक तरफ छात्रों के विरोध और अभिव्यक्ति के अधिकार की बात है, तो दूसरी तरफ Professional Regulatory Body के अधिकार और उसकी भूमिका को लेकर बहस जारी है। NALSAR विवाद ने यह भी दिखाया कि विश्वविद्यालय परिसर में किसी मुद्दे पर छात्रों की असहमति कितनी जल्दी बड़े संस्थागत विवाद का रूप ले सकती है। NALSAR विवाद से क्या निकला? फिलहाल सबसे बड़ी राहत 2026 बैच के Law Graduates को मिली है। Enrolment पर लगी रोक हट चुकी है और उनके Advocate बनने का रास्ता साफ है। वहीं, Supreme Court में CJI सूर्यकांत की टिप्पणियों के बाद यह मामला छात्रों के अधिकार, विश्वविद्यालय की स्वतंत्रता और BCI के अधिकार क्षेत्र से जुड़े व्यापक सवालों के कारण सुर्खियों में बना हुआ है। यानी NALSAR का यह विवाद सिर्फ एक Convocation का मामला नहीं रह गया है। इसने छात्रों की आवाज, संस्थागत अधिकार और Professional Regulation के बीच संतुलन को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस जरूर शुरू कर दी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Census 2027

India Census 2027: इस बार पूछे जाएंगे 40 Questions, Caste से लेकर Education तक होगी जानकारी

देश में अगली जनगणना यानी Census 2027 को लेकर केंद्र सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। गृह मंत्रालय की ओर से Population Enumeration Phase के लिए सवालों की सूची अधिसूचित कर दी गई है। इस बार जनगणना में लोगों से कुल 40 सवाल पूछे जाएंगे। इनमें परिवार, शिक्षा, रोजगार, धर्म, जाति, भाषा और पहचान से जुड़ी जानकारियां शामिल हैं। आम लोगों के लिए यह प्रक्रिया इसलिए भी अहम है क्योंकि जनगणना का असर सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रहता। सरकार इन्हीं आंकड़ों के आधार पर कई योजनाओं, नीतियों और विकास कार्यक्रमों की दिशा तय करती है। Census 2027 में क्या-क्या पूछा जाएगा? जनगणना अधिकारी परिवार के सदस्यों से उनकी व्यक्तिगत और सामाजिक स्थिति से जुड़े सवाल पूछेंगे। इसमें व्यक्ति का नाम, परिवार के मुखिया से संबंध, लिंग, जन्मतिथि और उम्र जैसी सामान्य जानकारियां शामिल होंगी। इसके अलावा वैवाहिक स्थिति, विवाह की उम्र, पति या पत्नी का नाम और माता-पिता से संबंधित जानकारी भी दर्ज की जाएगी। Religion और Caste की भी होगी जानकारी इस बार Census 2027 में धर्म और जाति से जुड़े सवाल खास चर्चा में हैं। अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) से संबंधित जानकारी के साथ जाति का विवरण भी दर्ज किया जाएगा। इसके साथ ही व्यक्ति की मातृभाषा और दूसरी भाषाओं के बारे में भी जानकारी ली जाएगी। इससे देश की सामाजिक और भाषाई तस्वीर को समझने में मदद मिलेगी। Education और Job की स्थिति भी पूछी जाएगी जनगणना में लोगों की शिक्षा और रोजगार की स्थिति को भी दर्ज किया जाएगा। व्यक्ति ने कितनी पढ़ाई की है, वह पिछले वर्ष किसी आर्थिक गतिविधि में शामिल था या नहीं और उसका काम किस तरह का है—इनसे जुड़े सवाल पूछे जाएंगे। जो लोग नौकरी या व्यवसाय में नहीं हैं, उनकी स्थिति से जुड़ी जानकारी भी प्रश्नावली का हिस्सा होगी। महिलाओं से बच्चों को लेकर सवाल महिलाओं से उनके जीवन में जन्मे बच्चों और वर्तमान में जीवित बच्चों से संबंधित जानकारी भी ली जाएगी। पिछले एक साल में बच्चे के जन्म से जुड़ा सवाल भी पूछा जाएगा। इन आंकड़ों से देश में Birth Rate और Population Growth के बदलते रुझानों को समझने में मदद मिल सकती है। Aadhaar और अन्य ID की जानकारी भी शामिल Census 2027 की प्रश्नावली में पहचान से जुड़े दस्तावेजों के बारे में भी जानकारी मांगी जाएगी। इसमें Aadhaar, Voter ID, Passport और Driving Licence से संबंधित सवाल शामिल हैं। इसके अलावा मोबाइल नंबर और बैंक खातों से जुड़ी जानकारी भी प्रश्नावली में रखी गई है। COVID-19 vaccination से संबंधित सवाल भी शामिल किए गए हैं। दो चरणों में पूरी होगी जनगणना Census 2027 की पूरी प्रक्रिया को मुख्य रूप से दो चरणों में बांटा गया है। पहले चरण में Houselisting and Housing Census के जरिए घरों और आवास से जुड़ी जानकारी जुटाई जाती है। दूसरे चरण में Population Enumeration होगा, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति से संबंधित विस्तृत जानकारी दर्ज की जाएगी। सामान्य क्षेत्रों में Population Enumeration फरवरी 2027 में प्रस्तावित है। Digital होगी Census 2027 इस बार की जनगणना की एक बड़ी खासियत इसका Digital Format है। सरकार ने डिजिटल माध्यम से जानकारी जुटाने और Self-Enumeration की सुविधा पर भी जोर दिया है। यानी आने वाली जनगणना में तकनीक की भूमिका पहले के मुकाबले काफी ज्यादा रहने वाली है। क्यों महत्वपूर्ण है Census 2027? जनगणना से मिलने वाले आंकड़े देश की मौजूदा स्थिति की एक बड़ी तस्वीर सामने रखते हैं। कितने लोग पढ़े-लिखे हैं, कितने लोग रोजगार से जुड़े हैं, आबादी किस तरह के क्षेत्रों में रहती है और समाज में किस तरह के बदलाव हो रहे हैं—इन सवालों के जवाब जनगणना के आंकड़ों से मिलते हैं। इसलिए Census 2027 आम नागरिक के लिए सिर्फ सरकारी प्रक्रिया नहीं है। घर पर जब जनगणना अधिकारी पहुंचे, तो सही और सटीक जानकारी देना बेहद जरूरी होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sonam Wangchuk

Sonam Wangchuk का बड़ा बयान: 2047 तक विकसित देश बनने के लिए चाहिए सही Leadership

भारत के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य पर सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) ने एक बार फिर बहस छेड़ दी है। स्वतंत्रता दिवस से पहले जारी अपने वीडियो संदेश में उन्होंने देश के भविष्य, राजनीतिक नेतृत्व और मौजूदा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठाए। वांगचुक का कहना है कि भारत के पास आगे बढ़ने की पूरी क्षमता है, लेकिन केवल आर्थिक आंकड़ों से देश को विकसित राष्ट्र नहीं बनाया जा सकता। इसके लिए बेहतर नेतृत्व, मजबूत संस्थाएं और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। 2047 के लक्ष्य पर वांगचुक ने जताई चिंता सोनम वांगचुक ने सवाल उठाया कि क्या मौजूदा परिस्थितियों में भारत 2047 तक एक विकसित और सम्मानित राष्ट्र बन पाएगा। उन्होंने भारत की तुलना कुछ एशियाई देशों से करते हुए कहा कि कई छोटे देश भी अपने नागरिकों की आर्थिक स्थिति और जीवन स्तर सुधारने में तेजी से आगे बढ़े हैं। उन्होंने श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे देशों का उदाहरण देते हुए भारत को अपनी विकास यात्रा का ईमानदारी से आकलन करने की जरूरत बताई। वांगचुक का संदेश साफ था—भारत के पास संसाधन और प्रतिभा की कमी नहीं है, जरूरत उस दिशा और नेतृत्व की है जो इन क्षमताओं का सही इस्तेमाल कर सके। ‘Peaceful Revolution’ की जरूरत क्यों बता रहे हैं? वांगचुक ने देश में बदलाव के लिए ‘Peaceful Revolution’ यानी शांतिपूर्ण क्रांति की बात कही। हालांकि, उनके मुताबिक इसका मतलब हिंसा या टकराव नहीं है। वह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से व्यवस्था में सुधार की बात कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे ऐसे नेताओं और जनप्रतिनिधियों को आगे लाने पर विचार करें जो ईमानदार, निडर, जिम्मेदार और देशहित को प्राथमिकता देने वाले हों। उनका मानना है कि केवल सरकार बदलने से व्यवस्था नहीं बदलती। बदलाव तब आता है जब नागरिक भी अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को लेकर जागरूक होते हैं। Political Leadership पर उठाए सवाल वांगचुक ने राजनीतिक व्यवस्था में नेतृत्व के चयन को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि देश को ऐसे लोगों की जरूरत है जो व्यक्तिगत फायदे से ऊपर उठकर लंबे समय के लिए राष्ट्रहित में फैसले ले सकें। उन्होंने लोगों से ऐसे संभावित नेताओं के नाम सुझाने को कहा, जिन पर उन्हें भरोसा है। इसके जरिए वह देश के अलग-अलग हिस्सों से अच्छे नेतृत्व की तलाश और उस पर चर्चा शुरू करना चाहते हैं। ‘Second Independence Movement’ का दिया नाम वांगचुक ने अपनी पहल को ‘India’s Second Independence Movement’ का नाम दिया है। उनका उद्देश्य इसे किसी एक पार्टी या व्यक्ति के खिलाफ अभियान बनाने के बजाय व्यवस्था और नेतृत्व में सुधार की व्यापक पहल के रूप में पेश करना है। उन्होंने लोगों से अपने विचारों को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने और अलग-अलग भारतीय भाषाओं में चर्चा बढ़ाने की अपील की। सिर्फ Economy नहीं, लोगों की जिंदगी भी मायने रखती है विकसित देश बनने की चर्चा अक्सर GDP, निवेश और Infrastructure जैसे आंकड़ों के आसपास घूमती है। लेकिन वांगचुक के सवाल का दूसरा पहलू आम लोगों की जिंदगी से जुड़ा है। बेहतर शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाएं, पर्यावरण, पारदर्शी प्रशासन और मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाएं भी किसी देश के विकास की अहम पहचान होती हैं। यही वजह है कि उनका बयान सिर्फ 2047 के लक्ष्य पर सवाल नहीं है, बल्कि यह पूछता है कि उस लक्ष्य तक पहुंचने का रास्ता कैसा होना चाहिए। अब बहस सिर्फ 2047 की नहीं, रास्ते की भी है भारत के लिए 2047 एक बड़ा लक्ष्य है। लेकिन सोनम वांगचुक के बयान ने इस लक्ष्य के साथ एक अहम सवाल जोड़ दिया है—क्या केवल लक्ष्य तय करना काफी है या उसे हासिल करने के लिए व्यवस्था में भी बदलाव जरूरी है? उनकी ‘Peaceful Revolution’ की अपील पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अलग-अलग राय हो सकती है, लेकिन स्वतंत्रता दिवस से पहले उनका संदेश देश में नेतृत्व, विकास और नागरिक भागीदारी को लेकर एक नई चर्चा जरूर खड़ी करता है। आखिर 2047 का भारत कैसा होगा, यह सिर्फ सरकारों के फैसलों से तय नहीं होगा। इसमें देश के करोड़ों नागरिकों की सोच, भागीदारी और जिम्मेदारी की भी बड़ी भूमिका होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sugar

Sugar Rate Hike: त्योहारों से पहले चीनी के दाम बढ़े, Blinkit-Swiggy पर खरीदना हुआ Limited

चीनी (Sugar), जो हर घर की रसोई की रोजमर्रा की जरूरत है, इन दिनों लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। पिछले कुछ हफ्तों में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसी बीच Blinkit, Swiggy Instamart, BigBasket और D-Mart जैसे रिटेल और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर चीनी की खरीद को लेकर लिमिट लगाई गई है। कई जगहों पर ग्राहक एक बार में 3 से 5 किलो तक ही चीनी खरीद पा रहे हैं। यानी अगर घर में ज्यादा मात्रा में चीनी खरीदने की जरूरत है, तो एक साथ बड़ी खरीदारी करना अब आसान नहीं है। Sugar Price: एक महीने में तेजी से बढ़े दाम Sugar की कीमतों में हालिया तेजी ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹48 प्रति किलो के आसपास थी, जो अगस्त में बढ़कर ₹55 से ऊपर पहुंच गई। इसके बाद कुछ बाजारों में कीमतें और ऊपर गई हैं। शहर और बाजार के हिसाब से कीमतों में अंतर जरूर है, लेकिन जिस रफ्तार से दाम बढ़े हैं, उसका असर घर के मासिक बजट पर साफ दिखाई दे रहा है। Online Grocery पर क्यों लगाई गई खरीद Limit? Blinkit और Swiggy Instamart जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर खरीदारी की लिमिट लगाए जाने के पीछे मुख्य वजह उपलब्ध स्टॉक को संतुलित रखना मानी जा रही है। त्योहारी सीजन में चीनी की मांग अचानक बढ़ जाती है। मिठाइयों से लेकर घर में बनने वाले पकवानों तक, इस दौरान चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनियां ज्यादा मात्रा में खरीदारी को रोककर स्टॉक को ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, यह लिमिट हर जगह एक जैसी नहीं है। कुछ स्थानों पर 5 किलो तक की खरीद की अनुमति है, जबकि कुछ जगहों पर इससे कम मात्रा की सीमा दिखाई दे रही है। चीनी महंगी होने की क्या है वजह? चीनी के दाम बढ़ने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। घरेलू उत्पादन में कमी, मौसम से जुड़ी परेशानियां, बढ़ती मांग और बाजार में स्टॉक को लेकर गतिविधियां कीमतों पर दबाव बना रही हैं। त्योहारी सीजन भी इस समय एक बड़ा फैक्टर है। रक्षाबंधन के बाद अब आने वाले त्योहारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसका सीधा असर चीनी की खपत पर पड़ सकता है। सरकार ने Duty-Free Sugar Import को दी मंजूरी बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के Duty-Free Import की अनुमति दी है। सरकार का लक्ष्य बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है। इसके अलावा बड़े थोक खरीदारों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा में भी बदलाव किया गया है। इससे बाजार में जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करने की गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। आम लोगों के लिए क्या मतलब? फिलहाल इसका सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो महीने का राशन एक साथ खरीदते हैं। जहां दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीद सीमा लागू है, वहां लोगों को जरूरत के हिसाब से छोटी मात्रा में चीनी खरीदनी पड़ सकती है। दूसरी तरफ, सरकार की ओर से सप्लाई बढ़ाने के कदमों के बाद बाजार में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। अगर नई चीनी समय पर बाजार में पहुंचती है और त्योहारी मांग के मुताबिक स्टॉक उपलब्ध रहता है, तो कीमतों में आगे राहत मिल सकती है। Sugar Price पर आगे रहेगी नजर चीनी के बढ़ते दाम इस समय सिर्फ घरेलू बजट का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि आने वाले त्योहारी सीजन के लिए भी अहम हैं। सरकार, मिलों और रिटेल कंपनियों के फैसलों पर अब बाजार की नजर रहेगी। फिलहाल ग्राहकों के लिए बेहतर यही है कि जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी करें और अलग-अलग दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कीमतों की तुलना कर लें। आने वाले दिनों में सप्लाई की स्थिति साफ होने के साथ चीनी के दाम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
Gold-Silver

Gold-Silver Price: त्योहार से पहले मिली राहत, सोना-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट

Gold-Silver Price Today: रक्षाबंधन की खरीदारी के बीच सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए बाजार से राहत वाली खबर आई है। 27 अगस्त 2026 को सोने और चांदी दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर ₹1,58,477 पर आ गया। वहीं, 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 घटकर करीब ₹2,40,168 रह गया। त्योहार से ठीक पहले कीमतों में आई इस कमी से उन लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है, जो राखी के मौके पर बहन या परिवार के लिए सोने-चांदी की ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं। Gold Price Today: सोने के भाव में ₹2,860 की गिरावट 27 अगस्त को 24 कैरेट सोने की कीमत में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली। IBJA आधारित आंकड़ों के अनुसार, सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम टूटकर ₹1,58,477 पर पहुंच गया। वहीं, 23 कैरेट सोना करीब ₹1,57,842, 22 कैरेट सोना लगभग ₹1,45,165 और 18 कैरेट सोना करीब ₹1,18,858 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रहा। हालांकि, यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि शहर और ज्वेलर के हिसाब से Gold Rate थोड़ा अलग हो सकता है। ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और दूसरे शुल्क भी जुड़ते हैं। Silver Price Today: चांदी भी हुई ₹2,791 सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट आई है। 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 कम होकर करीब ₹2,40,168 पर आ गया। चांदी में पिछले दिनों तेजी देखने को मिली थी, इसलिए मौजूदा गिरावट के बावजूद इसका भाव काफी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में चांदी की मांग बढ़ने से इसकी कीमत पर भी असर पड़ सकता है। Raksha Bandhan से पहले क्यों खास है Gold-Silver Price? रक्षाबंधन के मौके पर लोग सिर्फ राखी और मिठाई ही नहीं खरीदते, बल्कि कई परिवार इस दिन सोने या चांदी की छोटी ज्वेलरी खरीदना भी पसंद करते हैं। ऐसे में त्योहार से एक दिन पहले Gold और Silver के दाम में आई गिरावट खरीदारों के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है। अगर आप भी खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं तो बाजार में जाने से पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर देख लें। ऑनलाइन दिखने वाला IBJA या बुलियन रेट और ज्वेलरी शॉप का अंतिम बिल एक जैसा होना जरूरी नहीं है। सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान सोने की ज्वेलरी खरीदते समय केवल Gold Rate देखना काफी नहीं है। बिल बनते समय मेकिंग चार्ज, GST और अन्य शुल्क जुड़ सकते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले ज्वेलर से पूरी कीमत का ब्रेकअप मांगना बेहतर रहेगा। साथ ही, सोने की शुद्धता के लिए BIS Hallmark जरूर जांचें। इससे आपको खरीदे जा रहे सोने की शुद्धता के बारे में भरोसा मिलता है। आगे क्या हो सकता है Gold और Silver का भाव? सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, ब्याज दरों की उम्मीद और निवेशकों की खरीदारी जैसे कई फैक्टर कीमती धातुओं के भाव को प्रभावित करते हैं। इसलिए आज आई गिरावट को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि आने वाले दिनों में कीमतें लगातार नीचे जाएंगी। बाजार की चाल बदलने में ज्यादा समय नहीं लगता। Gold-Silver Price Today का सीधा अपडेट रक्षाबंधन से पहले 24 कैरेट Gold करीब ₹2,860 सस्ता होकर ₹1,58,477 प्रति 10 ग्राम और Silver करीब ₹2,791 गिरकर ₹2,40,168 प्रति किलो पर आ गई है। अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने जा रहे हैं, तो अंतिम खरीदारी से पहले अपने स्थानीय बाजार का लेटेस्ट रेट जरूर जांचें।
Raksha Bandhan

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने से पहले जान लें Bhadra का समय, ये है शुभ Muhurat

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, अपनापन और थोड़ी-सी नोकझोंक हमेशा बनी रहती है। इन्हीं खूबसूरत रिश्तों को सेलिब्रेट करने वाला रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी को लेकर इस बार एक सवाल काफी लोगों के मन में है—27 अगस्त या 28 अगस्त, आखिर किस दिन भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ रहेगा? पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। Raksha Bandhan 2026 Date: 27 या 28 अगस्त? रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे के बाद शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन मनाने की परंपरा रहेगी। यानी बहनें 28 अगस्त को भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। Rakhi Shubh Muhurat 2026: इस समय बांधें राखी 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह का समय शुभ माना जा रहा है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार सुबह करीब 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताया गया है। हालांकि, शुभ मुहूर्त में शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप किसी खास शहर में हैं, तो वहां के पंचांग से समय जरूर मिला लें। Bhadra Kaal: इस बार नहीं होगी बड़ी परेशानी रक्षाबंधन पर भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। यही वजह है कि हर साल राखी बांधने से पहले लोग भद्रा समाप्त होने का इंतजार करते हैं। इस बार राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को राखी बांधने के प्रमुख समय में भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। Raksha Bandhan 2026: एक नजर में पूरी जानकारी जानकारी विवरण रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार पर्व सावन पूर्णिमा पूर्णिमा शुरुआत 27 अगस्त की सुबह पूर्णिमा समाप्त 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे राखी बांधने का शुभ समय सुबह करीब 5:57 से 9:48 बजे तक भद्रा 28 अगस्त के प्रमुख राखी मुहूर्त में नहीं Rakhi बांधने की पूजा विधि रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके भगवान का ध्यान करें और पूजा की तैयारी करें। राखी की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, फूल, मिठाई और राखी रखें। भाई को आसन पर बैठाकर पहले तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती करें और शुभ मुहूर्त में उसकी कलाई पर राखी बांधें। फिर मिठाई खिलाकर भाई के सुखी और खुशहाल जीवन की कामना करें। भाई भी बहन को प्यार और सम्मान के साथ उपहार देता है और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प करता है। Raksha Bandhan का असली मतलब क्या है? राखी का धागा देखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना बहुत बड़ी है। बचपन में एक-दूसरे से लड़ने वाले भाई-बहन जब बड़े होते हैं तो यही रिश्ता सबसे मजबूत सहारा बन जाता है। रक्षाबंधन इसी भरोसे और अपनापन को फिर से महसूस करने का दिन है। इसलिए इस बार राखी बांधते समय सिर्फ मुहूर्त ही नहीं, बल्कि उस रिश्ते की मिठास को भी याद रखें, जो जिंदगी के हर पड़ाव पर साथ चलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kanpur

Kanpur Plane Crash: अचानक नीचे गिरा Training Plane, दो पायलटों की मौत

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) से गुरुवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई। गंगा बैराज के पास नत्थूपुरवा गांव के नजदीक एक Twin-Engine Training Aircraft खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार इंस्ट्रक्टर पायलट और ट्रेनी पायलट की मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने इलाके को घेरकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। Training Flight के दौरान हुआ हादसा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विमान ट्रेनिंग उड़ान पर था और इसी दौरान हादसे का शिकार हो गया। यह चार सीटों वाला ट्विन-इंजन विमान था। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि विमान नीचे गिरने से पहले आसपास के लोगों ने तेज आवाज सुनी थी। हालांकि, उस आवाज की वजह क्या थी, इसे लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि विमान गंगा बैराज के करीब नत्थूपुरवा गांव के पास खुले खेत में गिरा। हादसा आबादी वाले इलाके से कुछ दूरी पर हुआ, जिसके बाद स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। हादसे के बाद मची अफरा-तफरी विमान के खेत में गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस और इमरजेंसी टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। दुर्घटनाग्रस्त विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और उसका मलबा खेत में बिखरा मिला। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित किया और दोनों पायलटों को मलबे से बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। शुरुआती रिपोर्टों में एक पायलट की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई थी। बाद में पुलिस अधिकारियों के हवाले से दोनों पायलटों की मौत की पुष्टि हुई। Crash की असली वजह अभी सामने नहीं आई कानपुर Plane Crash की वजह फिलहाल साफ नहीं है। शुरुआती स्तर पर विमान के अचानक नियंत्रण खोने और नीचे गिरने की बात सामने आई है, लेकिन तकनीकी खराबी, इंजन से जुड़ी समस्या या किसी अन्य कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अधिकारियों की ओर से दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। विमान के मलबे, उड़ान से जुड़ी जानकारी और घटनास्थल से मिले सबूतों की जांच के बाद ही Crash की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। Aviation Safety पर फिर उठे सवाल कानपुर में हुआ यह हादसा Flight Training के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि, अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसा किस वजह से हुआ और क्या इसके पीछे कोई तकनीकी या संचालन संबंधी कारण था। फिलहाल प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। कानपुर विमान हादसे से जुड़ी नई जानकारी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी। Kanpur Plane Crash Latest Update: गंगा बैराज के पास Training Aircraft के क्रैश होने से दो पायलटों की मौत ने इलाके में शोक का माहौल पैदा कर दिया है। हादसे की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी।
Share Market

Share Market Today: Sensex 77,250 के करीब, Nifty भी टूटा; जानें बाजार में क्यों आई गिरावट

भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) में गुरुवार, 27 अगस्त को कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty बढ़त के साथ खुले, लेकिन कुछ ही देर बाद बाजार की चाल बदल गई। बिकवाली बढ़ने से दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में पहुंच गए। सुबह 10:30 बजे Sensex 123.89 अंक की गिरावट के साथ 77,349.05 पर था, जबकि Nifty 24.60 अंक टूटकर 24,183.15 पर कारोबार कर रहा था। Sensex-Nifty पर बढ़ा दबाव गुरुवार की शुरुआत बाजार के लिए सकारात्मक रही। Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों को कुछ राहत मिली, लेकिन यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं पाई। Nifty 24,200 के स्तर के नीचे चला गया, वहीं Sensex भी शुरुआती बढ़त गंवाकर कमजोर हो गया। इससे पहले सुबह 10:13 बजे Reuters के आंकड़ों में Sensex 77,379.50 और Nifty 24,191.85 पर था। यानी उस समय दोनों इंडेक्स में हल्की गिरावट दर्ज की जा रही थी। FMCG और Media Shares में बिकवाली सेक्टोरल कारोबार की बात करें तो FMCG शेयरों पर दबाव नजर आया। शुरुआती कारोबार में Nifty FMCG इंडेक्स भी लाल निशान में था। इसके साथ ही Media शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। सुबह 10:30 बजे Nifty Media करीब 0.60 फीसदी नीचे 1,601.30 पर कारोबार कर रहा था। Media इंडेक्स इससे पहले लगातार दो कारोबारी सत्रों में बढ़त दर्ज कर चुका था। ऐसे में आज की गिरावट को कुछ हद तक मुनाफावसूली से भी जोड़कर देखा जा रहा है। HDFC Bank बना बाजार पर दबाव का बड़ा कारण आज बाजार में HDFC Bank का प्रदर्शन भी निवेशकों के रडार पर रहा। शेयर में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। Reuters के मुताबिक, अमेरिका में बैंक और उसके दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दायर एक securities lawsuit की खबर के बाद शेयर पर दबाव बढ़ा। Upstox के अनुसार, HDFC Bank में बिकवाली के चलते Sensex दिन के ऊपरी स्तर से करीब 300 अंक नीचे आया, जबकि Nifty 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसल गया। Global Market से मिले-जुले संकेत भारतीय बाजार को एक तरफ Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से सहारा मिला। Brent crude करीब 87.4 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया था। ईरान और ओमान के बीच Strait of Hormuz को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की खबरों से तेल आपूर्ति को लेकर चिंता कुछ कम हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों को लेकर बनी चिंता ने निवेशकों को थोड़ा सतर्क रखा। यही वजह रही कि एशियाई बाजारों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार में तेजी टिक नहीं सकी। निवेशकों की नजर अब बाजार की अगली चाल पर फिलहाल घरेलू बाजार में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। एक तरफ कच्चे तेल में नरमी और मजबूत ग्लोबल टेक्नोलॉजी संकेत सकारात्मक हैं, तो दूसरी तरफ HDFC Bank जैसे बड़े शेयरों में कमजोरी और सेक्टोरल बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है। ऐसे माहौल में Sensex और Nifty की आगे की दिशा, 24,200 के आसपास Nifty की चाल और प्रमुख सेक्टर्स में खरीदारी-बिकवाली पर निवेशकों की नजर रहेगी। बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय लेना बेहतर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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