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Virat Kohli

Virat Kohli का बड़ा खुलासा प्रेमानंद जी के दर्शन के लिए 5 करोड़ लेने की बात झूठी, बोले- श्रद्धा से जाता हूं

भारतीय क्रिकेट के स्टार Virat Kohli एक बार फिर प्रेमानंद जी महाराज के आश्रम जाने को लेकर चर्चा में हैं। इस बार मामला उनके आध्यात्मिक जुड़ाव से ज्यादा एक ऐसे दावे को लेकर है, जिसमें कहा गया था कि उन्होंने प्रेमानंद जी के दर्शन के लिए 5 करोड़ रुपये दिए थे। विराट कोहली ने इस बात को साफ तौर पर गलत बताया है। कोहली ने कहा कि वह प्रेमानंद जी महाराज के आश्रम पैसों के लिए नहीं, बल्कि श्रद्धा और सम्मान की वजह से जाते हैं। उनके मुताबिक, 5 करोड़ रुपये लेकर दर्शन करने की बात पूरी तरह झूठी है। 5 करोड़ रुपये देने का दावा कितना सही? विराट कोहली को लेकर यह दावा फलहारी महाराज की ओर से सामने आया था। इसमें कहा गया था कि कोहली ने प्रेमानंद जी महाराज के दर्शन के लिए 5 करोड़ रुपये दिए हैं। दावा सामने आने के बाद यह बात सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गई। हालांकि, अब विराट कोहली ने खुद इस दावे पर अपना पक्ष रखा है और इसे गलत बताया है। उन्होंने साफ किया कि आश्रम जाने के पीछे किसी तरह का आर्थिक लेन-देन नहीं है। प्रेमानंद जी महाराज से क्यों मिलते हैं Virat Kohli? विराट कोहली का प्रेमानंद जी महाराज से मिलना कोई नया मामला नहीं है। कोहली और उनका परिवार भी उनके आश्रम पहुंच चुका है। इन मुलाकातों की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद क्रिकेट फैंस के बीच भी काफी चर्चा हुई थी। कोहली के मुताबिक, प्रेमानंद जी महाराज के प्रति उनके मन में श्रद्धा और सम्मान है। यही वजह है कि वह समय मिलने पर आश्रम पहुंचते हैं और उनसे आशीर्वाद लेते हैं। Spiritual side को लेकर भी चर्चा में रहे हैं कोहली क्रिकेट के मैदान पर आक्रामक अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले विराट कोहली अपनी spiritual journey को लेकर भी कई बार सुर्खियों में रहे हैं। पिछले कुछ समय में उनका आध्यात्मिक स्थलों पर जाना और संतों से मुलाकात करना लोगों का ध्यान खींचता रहा है। प्रेमानंद जी महाराज से उनकी मुलाकात भी इसी कड़ी का हिस्सा मानी जाती है। ऐसे में 5 करोड़ रुपये वाले दावे ने इस मुलाकात को एक अलग वजह से चर्चा में ला दिया। कोहली की सफाई के बाद सामने आया उनका पक्ष पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि 5 करोड़ रुपये देने के दावे को विराट कोहली ने खुद खारिज किया है। उन्होंने आश्रम जाने की वजह बताते हुए कहा कि यह उनके लिए आस्था, श्रद्धा और सम्मान से जुड़ा विषय है। इस सफाई के बाद अब इस मामले में विराट कोहली का पक्ष भी सामने आ गया है। सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बीच कोहली ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रेमानंद जी महाराज के दर्शन को किसी आर्थिक सौदे से जोड़ना सही नहीं है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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बिलासपुर: बांग्लादेशी नागरिक होने के संदेह में पकड़े गए 23 लोगों में 18 भारतीय निकले, 15 दिन बाद रिहा

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के सिरगिट्टी इलाके से बांग्लादेशी नागरिक होने के संदेह में पकड़े गए 23 लोगों में से 18 भारतीय नागरिक पाए गए हैं। मुर्शिदाबाद और संबंधित थाना क्षेत्रों से दस्तावेजों व पहचान का सत्यापन होने के बाद इन सभी को रायपुर स्थित होल्डिंग/डिटेंशन सेंटर से 15 दिन के भीतर रिहा कर दिया गया। अब पुलिस बचे हुए 5 लोगों के दस्तावेजों की जांच कर रही है। इनके अतिरिक्त दस्तावेज भी मंगाए गए हैं। कुछ दस्तावेजों में कमियां सामने आई हैं, जबकि कुछ लोगों के नाम एसआईआर से हटाए जाने की जानकारी भी मिली है। पुलिस सत्यापन पूरा होने के बाद आगे की कार्रवाई करेगी। 4 सितंबर को 23 लोगों को रायपुर भेजा गया था दरअसल, बिलासपुर पुलिस ने स्पेशल टास्क फोर्स गठित कर सिरगिट्टी इलाके में अभियान चलाया था। इस दौरान 23 लोगों को संदिग्ध मानकर पकड़ा गया। पुलिस के अनुसार, करीब दो महीने तक चले अभियान में जिले में 1,162 लोगों की जांच की गई थी। इनमें 23 लोगों के दस्तावेज और पहचान संदिग्ध पाए गए थे। इसके बाद पुलिस टीम मुर्शिदाबाद, जंगीपुर और आसपास के संबंधित थाना क्षेत्रों में पहुंची। संदिग्धों द्वारा बताए गए पते और दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया। शुरुआती जांच के बाद 4 सितंबर को सभी 23 लोगों को पहचान और दस्तावेजों के अंतिम सत्यापन तक रायपुर के होल्डिंग/डिटेंशन सेंटर भेजा गया था। पिता की जगह ससुर का नाम मिलने से बढ़ा संदेह पुलिस की शुरुआती जांच में कुछ लोगों के दस्तावेजों को लेकर सवाल उठे थे। बताया गया कि कुछ दस्तावेजों में पिता की जगह ससुर का नाम दर्ज था। इसके अलावा मूल निवास और पहचान से जुड़े कागजात में भी कमियां मिली थीं। इन्हीं आधारों पर पुलिस ने इन लोगों को संदिग्ध मानकर जांच आगे बढ़ाई थी। हालांकि, सत्यापन के बाद 18 लोगों के भारतीय नागरिक होने की पुष्टि हुई है। बाल के बदले बर्तन और टेंट-पंडाल का करते थे काम जांच के दौरान पुलिस को पता चला था कि इनमें से अधिकांश लोग सिरगिट्टी क्षेत्र में रहकर अलग-अलग छोटे-मोटे काम करते थे। कुछ लोग बाल के बदले बर्तन देने का काम करते थे, जबकि कुछ टेंट-पंडाल लगाने सहित अन्य कार्यों से जुड़े थे। पुलिस ने इनके पश्चिम बंगाल स्थित बताए गए पते और स्थानीय दस्तावेजों से संबंधित जानकारी भी जुटाई थी। अब 5 लोगों के दस्तावेजों की जांच जारी 18 लोगों के सत्यापन के बाद पुलिस का फोकस अब बचे हुए 5 लोगों पर है। पुलिस इनके अतिरिक्त दस्तावेज और पहचान से जुड़े रिकॉर्ड मंगा रही है। जिन लोगों के दस्तावेज अधूरे या संदिग्ध पाए गए हैं, उनका सत्यापन संबंधित थानों और स्थानीय रिकॉर्ड के आधार पर कराया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद पुलिस आगे की कार्रवाई तय करेगी।
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Radha Ashtami 2026

Radha Ashtami 2026: राधा रानी के जन्मोत्सव पर जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और Vrat Vidhi

Radha Ashtami 2026 राधा रानी के भक्तों के लिए राधा अष्टमी का दिन बेहद खास होता है। हर साल भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी मनाई जाती है। इस बार तारीख को लेकर लोगों के मन में सवाल है कि आखिर राधा अष्टमी 18 सितंबर को है या 19 सितंबर को? अगर आपके मन में भी यही Confusion है, तो जान लीजिए कि इस साल राधा अष्टमी 19 सितंबर 2026, शनिवार को मनाई जाएगी। इस दिन राधा-कृष्ण की पूजा के साथ व्रत और विशेष आराधना करने की परंपरा है। Radha Ashtami 2026 Date: कब है राधा अष्टमी? हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 18 सितंबर 2026 को दोपहर के समय शुरू होगी और 19 सितंबर की दोपहर तक रहेगी। उदया तिथि के नियम के अनुसार राधा अष्टमी का पर्व 19 सितंबर को मनाया जाएगा। यानी अगर आप सोच रहे हैं कि पूजा आज करनी है या कल, तो मुख्य पूजा 19 सितंबर को करना उचित माना गया है। राधा अष्टमी 2026 का शुभ मुहूर्त राधा रानी की पूजा के लिए मध्याह्न का समय विशेष माना जाता है। नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार 19 सितंबर को पूजा का मध्याह्न मुहूर्त करीब सुबह 11:01 बजे से दोपहर 1:28 बजे तक रहेगा। हालांकि, शहर के अनुसार सूर्योदय और पंचांग के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए स्थानीय पंचांग के समय को भी जरूर देखें। राधा अष्टमी 2026 की जरूरी Details Radha Ashtami Puja Vidhi: ऐसे करें पूजा राधा अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थान की सफाई कर राधा-कृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। सबसे पहले दीपक जलाकर भगवान का ध्यान करें। राधा रानी को फूल, माला, फल, मिठाई और अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। इसके बाद राधा-कृष्ण के मंत्रों का जाप करें और आरती करें। कई जगहों पर इस दिन राधा रानी का विशेष अभिषेक भी किया जाता है। पूजा में सबसे जरूरी चीज दिखावा नहीं, बल्कि श्रद्धा और साफ मन माना जाता है। Radha Ashtami Vrat का क्या है महत्व? राधा अष्टमी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत रखते हैं। कुछ लोग पूरे दिन उपवास करते हैं, जबकि कुछ भक्त फलाहार करते हैं। व्रत रखने का तरीका अपनी क्षमता और परिवार की परंपरा के अनुसार रखा जा सकता है। धार्मिक मान्यता है कि राधा रानी की भक्ति करने से मन को शांति और सकारात्मकता मिलती है। इस दिन जरूरतमंदों को भोजन या अपनी क्षमता के अनुसार दान करने की परंपरा भी कई जगह देखने को मिलती है। बरसाना और वृंदावन में खास रहती है रौनक राधा अष्टमी का सबसे खास रंग ब्रज क्षेत्र में देखने को मिलता है। बरसाना और वृंदावन में इस अवसर पर मंदिरों को सजाया जाता है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु राधा रानी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। भक्तों के लिए यह सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि राधा-कृष्ण के प्रति अपनी आस्था और प्रेम व्यक्त करने का अवसर भी होता है। आज या कल? जान लें सही तारीख तारीख को लेकर चल रहे Confusion को अब दूर कर लें। Radha Ashtami 2026 का मुख्य पर्व 19 सितंबर, शनिवार को मनाया जाएगा। इस दिन राधा रानी की पूजा, व्रत और भक्ति कार्यक्रम किए जाएंगे। अगर आप भी राधा रानी के भक्त हैं, तो इस पावन दिन उनके चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करें और परिवार के साथ पूजा-अर्चना करें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ganesh Chaturthi 2026

Ganesh Chaturthi 2026 11 बजे वाला मुहूर्त छूटा? जानें अब कब करें Ganpati Sthapana

Ganesh Chaturthi 2026 आज 14 सितंबर को देशभर में गणपति बप्पा के स्वागत की धूम है। कहीं घरों में छोटी-बड़ी गणेश प्रतिमाएं सजाई जा रही हैं, तो कहीं बड़े पंडालों में बप्पा की स्थापना की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। भक्तों के बीच सबसे ज्यादा उत्सुकता इस बात को लेकर है कि Ganpati Sthapana का शुभ मुहूर्त कब है। गणपति स्थापना के लिए आज का मुख्य मध्याह्न मुहूर्त सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक बताया गया है। माना जाता है कि इस दौरान गणेश जी की पूजा और स्थापना करना विशेष शुभ रहता है। लेकिन अगर आपका यह मुहूर्त किसी वजह से निकल गया है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। दिन में कुछ और शुभ समय भी मिल सकते हैं, जिनमें स्थानीय पंचांग के अनुसार बप्पा की स्थापना की जा सकती है। पहला मुहूर्त निकल गया तो क्या करें? कई बार ऑफिस, यात्रा या घर के जरूरी कामों के चलते लोग तय समय पर गणपति स्थापना नहीं कर पाते। ऐसे में पूजा को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है। शुभ, लाभ और अमृत चौघड़िया को धार्मिक कार्यों के लिए शुभ माना जाता है। इसलिए मुख्य स्थापना मुहूर्त निकलने के बाद इन चौघड़ियों में अपने शहर के पंचांग के अनुसार गणपति स्थापना की जा सकती है। 1. शुभ चौघड़िया शुभ चौघड़िया में पूजा-पाठ और दूसरे मांगलिक कार्य किए जाते हैं। अगर मुख्य मुहूर्त निकल गया है तो स्थानीय पंचांग में शुभ चौघड़िया का समय देखकर बप्पा को घर में स्थापित कर सकते हैं। 2. लाभ चौघड़िया लाभ चौघड़िया को भी शुभ समय माना जाता है। गणपति स्थापना के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि सही समय शहर के अनुसार बदल सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग देखना बेहतर रहेगा। 3. अमृत चौघड़िया अमृत चौघड़िया को शुभ कार्यों के लिए खास माना जाता है। अगर दिन का मुख्य मुहूर्त छूट गया है तो इस समय में भी गणपति स्थापना का विकल्प रखा जा सकता है। Ganpati Sthapana के लिए मध्याह्न समय क्यों खास? गणेश चतुर्थी पर मध्याह्न काल का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न के समय हुआ था। यही वजह है कि इस दौरान गणपति की स्थापना और पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है। शहर के हिसाब से बदल सकता है शुभ समय गणपति स्थापना के मुहूर्त में स्थान के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में अंतर होने की वजह से चौघड़िया भी बदलते हैं। इसलिए अगर आप भोपाल, इंदौर, दिल्ली, मुंबई या किसी दूसरे शहर में रहते हैं तो अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार Ganpati Sthapana का समय जरूर जांच लें। घर में ऐसे करें बप्पा का स्वागत गणपति स्थापना से पहले पूजा की जगह को अच्छी तरह साफ कर लें। चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद गणपति बप्पा को फूल, दूर्वा और मोदक अर्पित करें। पूजा के दौरान गणेश मंत्र का जाप करें और अंत में आरती करें। परिवार के सभी सदस्य मिलकर पूजा करें तो त्योहार की खुशी और भी बढ़ जाती है। मुहूर्त निकल गया है तो घबराएं नहीं गणेश चतुर्थी सिर्फ शुभ समय देखने का पर्व नहीं, बल्कि बप्पा के स्वागत और आस्था का त्योहार भी है। अगर किसी कारण से मुख्य मुहूर्त निकल गया है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। अपने शहर के पंचांग में दिए गए शुभ समय के अनुसार गणपति स्थापना कर सकते हैं। गणपति बप्पा से घर में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना करें। गणपति बप्पा मोरया!
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Raksha Bandhan

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने से पहले जान लें Bhadra का समय, ये है शुभ Muhurat

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, अपनापन और थोड़ी-सी नोकझोंक हमेशा बनी रहती है। इन्हीं खूबसूरत रिश्तों को सेलिब्रेट करने वाला रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी को लेकर इस बार एक सवाल काफी लोगों के मन में है—27 अगस्त या 28 अगस्त, आखिर किस दिन भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ रहेगा? पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। Raksha Bandhan 2026 Date: 27 या 28 अगस्त? रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे के बाद शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन मनाने की परंपरा रहेगी। यानी बहनें 28 अगस्त को भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। Rakhi Shubh Muhurat 2026: इस समय बांधें राखी 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह का समय शुभ माना जा रहा है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार सुबह करीब 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताया गया है। हालांकि, शुभ मुहूर्त में शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप किसी खास शहर में हैं, तो वहां के पंचांग से समय जरूर मिला लें। Bhadra Kaal: इस बार नहीं होगी बड़ी परेशानी रक्षाबंधन पर भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। यही वजह है कि हर साल राखी बांधने से पहले लोग भद्रा समाप्त होने का इंतजार करते हैं। इस बार राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को राखी बांधने के प्रमुख समय में भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। Raksha Bandhan 2026: एक नजर में पूरी जानकारी जानकारी विवरण रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार पर्व सावन पूर्णिमा पूर्णिमा शुरुआत 27 अगस्त की सुबह पूर्णिमा समाप्त 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे राखी बांधने का शुभ समय सुबह करीब 5:57 से 9:48 बजे तक भद्रा 28 अगस्त के प्रमुख राखी मुहूर्त में नहीं Rakhi बांधने की पूजा विधि रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके भगवान का ध्यान करें और पूजा की तैयारी करें। राखी की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, फूल, मिठाई और राखी रखें। भाई को आसन पर बैठाकर पहले तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती करें और शुभ मुहूर्त में उसकी कलाई पर राखी बांधें। फिर मिठाई खिलाकर भाई के सुखी और खुशहाल जीवन की कामना करें। भाई भी बहन को प्यार और सम्मान के साथ उपहार देता है और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प करता है। Raksha Bandhan का असली मतलब क्या है? राखी का धागा देखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना बहुत बड़ी है। बचपन में एक-दूसरे से लड़ने वाले भाई-बहन जब बड़े होते हैं तो यही रिश्ता सबसे मजबूत सहारा बन जाता है। रक्षाबंधन इसी भरोसे और अपनापन को फिर से महसूस करने का दिन है। इसलिए इस बार राखी बांधते समय सिर्फ मुहूर्त ही नहीं, बल्कि उस रिश्ते की मिठास को भी याद रखें, जो जिंदगी के हर पड़ाव पर साथ चलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sawan

Sawan Somwar: उज्जैन से Devghar तक गूंजा हर-हर महादेव, Kanwar Yatra को लेकर खास इंतजाम

सावन (Sawan) के पहले सोमवार पर सोमवार की सुबह से ही देशभर के शिवालयों में हर-हर महादेव के जयकारे गूंज रहे हैं। भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों का रुख कर रहे हैं। मध्य प्रदेश के उज्जैन में बाबा महाकाल की सवारी को लेकर खास उत्साह है, तो झारखंड के देवघर में कांवड़ियों की लंबी कतार ने शहर की तस्वीर ही बदल दी है। वहीं उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में Kanwar Yatra को देखते हुए स्कूल-कॉलेज बंद रखने का फैसला लिया गया है। उज्जैन में Mahakal की सवारी को लेकर उत्साह सावन के पहले सोमवार पर उज्जैन का माहौल पूरी तरह शिवमय नजर आ रहा है। Mahakaleshwar Temple में बाबा महाकाल के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में सुबह से ही भक्तों की आवाजाही बनी हुई है। सोमवार को बाबा महाकाल की पारंपरिक सवारी निकाली जाएगी। इसे लेकर प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की तैयारियां की हैं। सवारी के रास्ते में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। बाबा महाकाल की सवारी उज्जैन की धार्मिक परंपरा का अहम हिस्सा है। सावन में इसे देखने और बाबा के दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग शहर पहुंचते हैं। Devghar में 5 KM तक पहुंची Kanwariyon की लाइन झारखंड के देवघर में सावन के पहले सोमवार पर भक्तों की भीड़ अपने चरम पर पहुंचती दिखाई दे रही है। Baba Baidyanath Dham में जल चढ़ाने के लिए बड़ी संख्या में कांवड़िए पहुंच रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कांवड़ियों की कतार करीब 5 किलोमीटर तक लंबी हो गई है। कई श्रद्धालु घंटों इंतजार करने के बाद बाबा बैद्यनाथ के दर्शन कर रहे हैं। सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर देवघर पहुंचने वाले कांवड़ियों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। कतार में खड़े श्रद्धालुओं के बीच थकान के बावजूद उत्साह नजर आ रहा है। हर तरफ बोल बम और हर-हर महादेव के जयकारे सुनाई दे रहे हैं। Muzaffarnagar में School-College बंद उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में Kanwar Yatra को देखते हुए स्कूल और कॉलेज बंद रखने का निर्णय लिया गया है। कांवड़ मार्ग पर श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने यह कदम उठाया है। कांवड़ यात्रा के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सड़कों पर श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ती है। ऐसे में कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव भी बढ़ जाता है। स्कूल-कॉलेज बंद रखने का उद्देश्य विद्यार्थियों की आवाजाही कम करना और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना है। शिव मंदिरों में सुबह से लंबी कतारें सावन के पहले सोमवार का असर सिर्फ उज्जैन, देवघर और मुजफ्फरनगर तक सीमित नहीं है। देश के अलग-अलग हिस्सों में शिव मंदिरों के बाहर सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें नजर आ रही हैं। श्रद्धालु बेलपत्र, फूल और जल लेकर भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। कई मंदिरों में विशेष पूजा और अभिषेक का आयोजन किया गया है। सावन के सोमवार को लेकर भक्तों में खास आस्था रहती है, इसलिए सुबह से ही मंदिरों में रौनक देखने को मिल रही है। आस्था के साथ प्रशासन की भी परीक्षा सावन और कांवड़ यात्रा के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए प्रशासन के सामने भीड़ संभालने, ट्रैफिक मैनेजमेंट और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती रहती है। उज्जैन और देवघर जैसे प्रमुख धार्मिक शहरों में श्रद्धालुओं की सुविधा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। फिलहाल सावन के पहले सोमवार पर देश के कई हिस्सों में एक ही तस्वीर दिखाई दे रही है—हाथों में कांवड़, जुबां पर भोलेनाथ का नाम और मंदिरों में दर्शन के लिए लंबी कतारें। आस्था के इस माहौल में महाकाल की सवारी और देवघर की कांवड़ यात्रा श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Champat Rai

Ram Mandir Donation Case: विवादों के बीच Champat Rai ने चुना भक्ति का रास्ता, Ayodhya में 4 महीने करेंगे साधना

अयोध्या के श्रीराम मंदिर से जुड़े चढ़ावा विवाद (Ram Mandir Donation Controversy) के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय (Champat Rai) ने एक बड़ा आध्यात्मिक कदम उठाया है। उन्होंने अयोध्या में चार महीने तक चलने वाली चातुर्मास साधना (Chaturmas Sadhna) शुरू कर दी है। इस दौरान वह भगवान श्रीराम की आराधना, मंत्र जाप और धार्मिक अनुष्ठानों के जरिए अपना समय आध्यात्मिक साधना में बिताएंगे। चंपत राय का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले चढ़ावे और दान से जुड़े मामले को लेकर देशभर में चर्चा हो रही है। विवाद के बीच उनका अयोध्या में रहकर साधना करने का निर्णय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। चंपत राय ने क्यों शुरू की Chaturmas Sadhna? धार्मिक परंपराओं में चातुर्मास का विशेष महत्व माना जाता है। यह अवधि भगवान की भक्ति, आत्मसंयम और आध्यात्मिक चिंतन के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी परंपरा के तहत चंपत राय ने चार महीने तक साधना करने का संकल्प लिया है। बताया जा रहा है कि इस दौरान वह राम नाम का जाप, रामचरितमानस पाठ और अन्य धार्मिक गतिविधियों में समय लगाएंगे। उनका उद्देश्य आध्यात्मिक अनुशासन और आत्ममंथन पर ध्यान केंद्रित करना है। Ram Mandir Donation Case को लेकर क्यों बढ़ी चर्चा? श्रीराम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे और दान की व्यवस्था को लेकर कथित गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद विवाद शुरू हुआ। मामले की जांच को लेकर सवाल उठे और जांच एजेंसियों ने कई पहलुओं की पड़ताल शुरू की। इस विवाद के बाद मंदिर प्रशासन की व्यवस्था, दान प्रबंधन और जिम्मेदार लोगों की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गईं। हालांकि, जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अयोध्या में चंपत राय की भूमिका रही है अहम चंपत राय लंबे समय से राम मंदिर आंदोलन से जुड़े प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के बाद मंदिर निर्माण से लेकर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में उनकी भूमिका रही है। राम मंदिर निर्माण और निधि संग्रह अभियान के दौरान भी वह लगातार सक्रिय रहे। यही वजह है कि उनसे जुड़ा कोई भी फैसला अयोध्या और देशभर में लोगों का ध्यान आकर्षित करता है। विवाद के बीच आध्यात्मिक रास्ता चुना राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच चंपत राय का चार महीने की साधना का फैसला कई मायनों में देखा जा रहा है। उनके समर्थक इसे भक्ति, संयम और आत्मचिंतन का कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे मौजूदा विवाद के संदर्भ में भी जोड़कर देख रहे हैं। फिलहाल, अयोध्या में चंपत राय की चातुर्मास साधना और राम मंदिर से जुड़े विवाद की जांच दोनों ही सुर्खियों में हैं। आने वाले समय में जांच की दिशा और मंदिर प्रशासन से जुड़े फैसले इस पूरे मामले की तस्वीर साफ करेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Virat

Virat-Anushka Vrindavan Visit: प्रेमानंदजी महाराज के आश्रम पहुंचे विराट-अनुष्का

भारतीय क्रिकेट के दिग्गज बल्लेबाज Virat Kohli और बॉलीवुड अभिनेत्री Anushka Sharma एक बार फिर अपनी सादगी और आध्यात्मिक जुड़ाव को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में दोनों वृंदावन पहुंचे, जहां उन्होंने Premanand Maharaj से मुलाकात कर आशीर्वाद लिया। इस दौरान उनका सरल अंदाज और श्रद्धा देखकर वहां मौजूद लोग भी प्रभावित हुए। बारिश के बीच बदला रास्ता, लेकिन नहीं बदली श्रद्धा Virat और Anushka जब प्रेमानंदजी महाराज के आश्रम पहुंचे तो मौसम की वजह से रास्ता आसान नहीं था। बारिश के कारण रास्ते में कीचड़ था, लेकिन दोनों ने किसी परेशानी की परवाह किए बिना नंगे पैर पैदल चलकर आश्रम तक पहुंचने का फैसला किया। उनकी यह तस्वीर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। फैंस ने विराट-अनुष्का की इस सादगी की जमकर तारीफ की और कहा कि प्रसिद्धि के बावजूद दोनों जमीन से जुड़े हुए नजर आते हैं। आश्रम में करीब एक घंटे तक रुके विराट-अनुष्का जानकारी के मुताबिक, विराट कोहली और अनुष्का शर्मा ने वृंदावन आश्रम में करीब एक घंटे का समय बिताया। इस दौरान दोनों ने प्रेमानंदजी महाराज से बातचीत की और जीवन से जुड़े कई विषयों पर मार्गदर्शन लिया। बताया जा रहा है कि दोनों ने परिवार, आध्यात्मिक शांति और जीवन में सकारात्मक सोच को लेकर चर्चा की। मुलाकात के दौरान विराट और अनुष्का बेहद शांत और सहज नजर आए। आध्यात्मिक यात्राओं को लेकर पहले भी चर्चा में रहे हैं दोनों विराट कोहली और अनुष्का शर्मा इससे पहले भी कई धार्मिक स्थलों पर दर्शन के लिए जा चुके हैं। दोनों अक्सर अपने व्यस्त शेड्यूल के बीच आध्यात्मिक यात्राओं के लिए समय निकालते हैं। अनुष्का और विराट का मानना है कि जीवन में सफलता के साथ-साथ मानसिक शांति भी जरूरी है। यही वजह है कि दोनों समय-समय पर धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों पर जाते दिखाई देते हैं। सोशल मीडिया पर फैंस ने की तारीफ विराट-अनुष्का की वृंदावन यात्रा के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से शेयर की जा रही हैं। फैंस ने उनके इस व्यवहार को विनम्रता और आस्था का उदाहरण बताया। कई लोगों ने कहा कि करोड़ों लोगों के पसंदीदा सितारे होने के बावजूद विराट और अनुष्का की सादगी उन्हें खास बनाती है। Virat-Anushka की यात्रा बनी चर्चा का विषय विराट कोहली और अनुष्का शर्मा की यह वृंदावन यात्रा सिर्फ एक धार्मिक दौरा नहीं बल्कि उनकी आस्था और जीवन के प्रति सोच को भी दर्शाती है। कीचड़ भरे रास्ते पर नंगे पैर चलकर आश्रम पहुंचने का उनका अंदाज लोगों के दिलों को छू गया। फिलहाल, विराट-अनुष्का की प्रेमानंदजी महाराज से मुलाकात सोशल मीडिया और खबरों में लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rath Yatra 2026

Rath Yatra 2026: अहमदाबाद में बदले सुरक्षा इंतजाम, हाथियों के पैर बांधकर निकाली यात्रा; Puri में निभेगी सदियों पुरानी रस्म

Rath Yatra 2026: भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा देशभर में आस्था और उत्साह के साथ मनाई जा रही है। गुजरात के अहमदाबाद और ओडिशा के पुरी में इस बार भी लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन के लिए उमड़े। हालांकि अहमदाबाद की रथयात्रा इस बार एक खास वजह से rerचर्चा में रही। पिछले साल हाथियों के बेकाबू होने की घटना के बाद प्रशासन ने सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यात्रा में शामिल हाथियों के पैरों को हल्के बंधन में रखा। दूसरी ओर पुरी में सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार गजपति महाराज सोने की झाड़ू से भगवान के रथों की सफाई करेंगे। पिछले साल की घटना के बाद बदली तैयारी अहमदाबाद की जगन्नाथ रथयात्रा देश की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक रथयात्राओं में से एक मानी जाती है। लेकिन वर्ष 2025 की यात्रा के दौरान तीन हाथी अचानक बेकाबू हो गए थे। भीड़ में अफरा-तफरी मच गई थी और कई श्रद्धालु घायल हुए थे। घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल उठे थे। इसी अनुभव से सीख लेते हुए इस बार प्रशासन, वन विभाग और पशु चिकित्सकों ने मिलकर विस्तृत सुरक्षा योजना तैयार की। हाथियों के आगे और पीछे के पैरों को हल्की रस्सियों से नियंत्रित रखा गया ताकि वे भीड़ में अचानक तेज़ी से न दौड़ सकें। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम केवल एहतियात के तौर पर उठाया गया है और इसमें पशुओं की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा गया। सुरक्षा व्यवस्था रही हाई अलर्ट पर रथयात्रा के पूरे मार्ग पर हजारों पुलिसकर्मी तैनात किए गए। ड्रोन कैमरों, सीसीटीवी, कंट्रोल रूम और क्विक रिस्पॉन्स टीम के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी गई। हाथियों के साथ अनुभवी महावत, वन विभाग की टीम और पशु चिकित्सक भी लगातार मौजूद रहे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जगह-जगह मेडिकल कैंप, एम्बुलेंस, पेयजल केंद्र और हेल्प डेस्क बनाए गए। ट्रैफिक को भी पहले से तय डायवर्जन प्लान के अनुसार संचालित किया गया ताकि यात्रा बिना किसी बाधा के संपन्न हो सके। Puri में निभेगी ‘छेरा पहंरा’ की अनोखी परंपरा ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सदियों पुरानी संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है। यहां रथयात्रा के दौरान गजपति महाराज ‘छेरा पहंरा’ नामक विशेष अनुष्ठान करते हैं। इस रस्म में वे सोने की झाड़ू से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथों की सफाई करते हैं और चंदन मिश्रित पवित्र जल का छिड़काव करते हैं। यह परंपरा इस बात का संदेश देती है कि भगवान के सामने हर व्यक्ति समान है। चाहे वह राजा हो या आम भक्त, सभी भगवान के सेवक हैं। लाखों श्रद्धालुओं ने लगाए जयकारे अहमदाबाद और पुरी दोनों शहरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। भगवान जगन्नाथ के जयघोष के बीच भक्तों ने रथों को खींचकर अपनी आस्था व्यक्त की। पूरे वातावरण में भक्ति, उत्साह और पारंपरिक संस्कृति की झलक साफ दिखाई दी। आस्था के साथ सुरक्षा का भी संदेश इस बार की रथयात्रा ने दो महत्वपूर्ण संदेश दिए। पहला, धार्मिक परंपराओं का सम्मान और दूसरा, श्रद्धालुओं की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं। अहमदाबाद में पिछले साल की घटना से सीख लेकर किए गए इंतजाम और पुरी में सदियों से चली आ रही परंपराओं का निर्वहन, दोनों ने इस आयोजन को और भी खास बना दिया। यही वजह है कि जगन्नाथ रथयात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का भी प्रतीक मानी जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Kalki Avatar

Kalki Avatar Mystery: क्या बदलते हालात दे रहे हैं भगवान कल्कि के आगमन के संकेत

दुनिया में बढ़ते तनाव, युद्ध की खबरों और बदलते हालात के बीच एक बार फिर भगवान कल्कि (Kalki Avatar) को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सोशल मीडिया से लेकर धार्मिक मंचों तक यह सवाल उठ रहा है कि क्या आने वाला समय कलियुग के अंत की ओर इशारा कर रहा है? क्या Third World War यानी तीसरा विश्व युद्ध भगवान विष्णु के दसवें अवतार कल्कि के आगमन से जुड़ा कोई संकेत हो सकता है? हालांकि, धार्मिक ग्रंथों में कल्कि अवतार का वर्णन जरूर मिलता है, लेकिन तीसरे विश्व युद्ध और कल्कि भगवान के आगमन के बीच सीधा संबंध बताने वाली कोई प्रमाणित भविष्यवाणी नहीं मिलती। आइए जानते हैं Hindu Dharma में Kalki Avatar की मान्यता और इससे जुड़े रहस्य। भगवान कल्कि कौन हैं? जानिए Kalki Avatar की कहानी हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु के दसवें और अंतिम अवतार को कल्कि अवतार कहा जाता है। पुराणों में बताया गया है कि जब धरती पर अधर्म, अन्याय और पाप बढ़ जाएंगे, तब भगवान विष्णु कल्कि रूप में प्रकट होकर धर्म की स्थापना करेंगे। विष्णु पुराण, श्रीमद्भागवत पुराण और कल्कि पुराण में कल्कि अवतार का उल्लेख मिलता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान कल्कि सफेद घोड़े पर सवार होकर आएंगे और अधर्म का अंत कर सत्य और धर्म की पुनर्स्थापना करेंगे। Third World War और Kalki Avatar को क्यों जोड़ा जा रहा है? वर्तमान समय में दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध, राजनीतिक तनाव और देशों के बीच बढ़ते विवाद देखने को मिल रहे हैं। रूस-यूक्रेन संघर्ष, मध्य पूर्व की स्थिति और वैश्विक तनाव के कारण लोगों में भविष्य को लेकर चिंता बढ़ी है। इन्हीं घटनाओं के बीच कुछ लोग इन्हें कलियुग के संकेतों से जोड़कर देख रहे हैं। उनका मानना है कि जब दुनिया में अशांति और अधर्म बढ़ता है, तब धार्मिक ग्रंथों में बताए गए बदलावों की शुरुआत हो सकती है। लेकिन विशेषज्ञों और धार्मिक विद्वानों के अनुसार, इन घटनाओं को सीधे भगवान कल्कि के आगमन से जोड़ना सही नहीं है। धार्मिक कथाओं को कई बार प्रतीकात्मक रूप में भी समझा जाता है। Kaliyuga Prediction: कलियुग के अंत को लेकर क्या कहते हैं ग्रंथ? हिंदू धर्म में समय को चार युगों में बांटा गया है — सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग। मान्यता है कि वर्तमान समय कलियुग का है। पुराणों में कलियुग के दौरान समाज में लालच, हिंसा, झूठ और अधर्म बढ़ने का वर्णन मिलता है। वहीं यह भी बताया गया है कि जब अधर्म अपनी सीमा पार करेगा, तब धर्म की रक्षा के लिए भगवान का अवतार होगा। क्या 2026 में आएंगे भगवान कल्कि? जानें सच्चाई समय-समय पर सोशल मीडिया और इंटरनेट पर भगवान कल्कि के आगमन को लेकर अलग-अलग दावे सामने आते रहते हैं। कुछ लोग निश्चित तारीखों और वर्षों का दावा करते हैं, लेकिन इन दावों का कोई ठोस धार्मिक या ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। हिंदू धर्म में भगवान के अवतार की अवधारणा विश्वास और आध्यात्मिक संदेश से जुड़ी है, न कि किसी निश्चित तारीख की घोषणा से। Kalki Avatar की मान्यता हमें क्या संदेश देती है? भगवान कल्कि की कथा केवल भविष्य की घटना के रूप में नहीं, बल्कि एक संदेश के रूप में भी देखी जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को सत्य, न्याय, ईमानदारी और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देना है। आज के समय में जब समाज कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब कल्कि अवतार की चर्चा लोगों को अपने कर्म और जिम्मेदारियों पर विचार करने का अवसर देती है। भगवान कल्कि के आगमन और तीसरे विश्व युद्ध के बीच संबंध को लेकर कई चर्चाएं जरूर हैं, लेकिन इसे प्रमाणित भविष्यवाणी नहीं माना जा सकता। हिंदू धर्म में कल्कि अवतार का अर्थ मुख्य रूप से अधर्म पर धर्म की जीत और सत्य की स्थापना से जुड़ा है। आस्था के साथ तथ्यों को समझना भी जरूरी है। भगवान कल्कि की मान्यता हमें यही संदेश देती है कि कठिन समय में भी धर्म, सत्य और मानवता का रास्ता नहीं छोड़ना चाहिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में सारंग हेलिकॉप्टर टीम दिखाएगी हवाई करतब, रायपुर पहुंचा वायुसेना का दल

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 में भारतीय वायुसेना की सारंग हेलिकॉप्टर डिस्प्ले टीम आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहेगी। टीम सोमवार को रायपुर पहुंच गई। राज्योत्सव के दौरान नवा रायपुर अटल नगर के सेंध लेक क्षेत्र के ऊपर हेलिकॉप्टरों से रोमांचक हवाई करतब दिखाए जाएंगे। तीन दिवसीय आयोजन में होने वाला यह प्रदर्शन दर्शकों के लिए खास आकर्षण रहेगा। स्वदेशी ध्रुव हेलिकॉप्टरों से दिखेगा वायुसेना का कौशल पब्लिक रिलेशन ऑफिसर विंग कमांडर देबर्थो धर ने बताया कि सारंग टीम स्वदेशी एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर (ALH) ध्रुव के जरिए प्रदर्शन करती है। टीम हवा में सटीक उड़ान, हेलिकॉप्टरों के बीच बेहतरीन तालमेल और एक साथ अलग-अलग आकृतियां बनाने के लिए जानी जाती है। प्रदर्शन के दौरान वायुसेना के जवान अपने कौशल, अनुशासन और टीमवर्क का प्रदर्शन करेंगे। इसके साथ ही स्वदेशी हेलिकॉप्टरों की क्षमताओं को भी प्रदर्शित किया जाएगा। मोर के रंगों से प्रेरित है सारंग टीम की पहचान सारंग हेलिकॉप्टर डिस्प्ले टीम के हेलिकॉप्टरों की रंग योजना भारत के राष्ट्रीय पक्षी मोर से प्रेरित है। टीम का ध्येय वाक्य ‘इंस्पायर थ्रू एक्सीलेंस’ है, जिसका अर्थ उत्कृष्टता के जरिए प्रेरित करना है। सारंग टीम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भारतीय वायुसेना का प्रतिनिधित्व करती है। अपने समन्वित हवाई प्रदर्शन के जरिए टीम भारतीय वायुसेना की पेशेवर क्षमता और स्वदेशी तकनीक को प्रदर्शित करती है। युवाओं को विमानन में करियर बनाने की मिलेगी प्रेरणा राज्योत्सव में सारंग टीम का प्रदर्शन आम लोगों के साथ विद्यार्थियों और युवाओं के लिए भी खास रहेगा। दर्शकों को हेलिकॉप्टरों की उड़ान और विमानन की दुनिया को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। इस प्रदर्शन के जरिए युवाओं को विमानन क्षेत्र में करियर बनाने और देश की सेवा के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया जाएगा। राज्योत्सव में सारंग टीम की मौजूदगी आयोजन के रोमांच और आकर्षण को और बढ़ाएगी।

ग्वालियर में पटवारी भर्ती के नाम पर 7 युवाओं से 50 लाख की ठगी, फर्जी सिलेक्शन लिस्ट और जॉइनिंग लेटर थमाए

ग्वालियर। मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का मामला सामने आया है। ग्वालियर में सात बेरोजगार युवाओं को पटवारी बनवाने का झांसा देकर करीब 50 लाख रुपए वसूलने का आरोप है। आरोपियों ने खुद को व्यापमं का कर्मचारी और STF का अधिकारी बताकर युवाओं को भरोसे में लिया। इसके बाद उन्हें फर्जी सिलेक्शन लिस्ट और जॉइनिंग लेटर दिए गए। नौकरी नहीं मिलने और पैसे वापस न लौटाने पर मामला पुलिस तक पहुंचा। पुलिस ने शिकायत के आधार पर अरविंद नरवरिया, गोवर्धन तोमर और प्रदीप गौतम के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें तलाश में जुटी हैं। जीवाजी यूनिवर्सिटी के कर्मचारी के जरिए हुई मुलाकात मामले के मुताबिक, जीवाजी यूनिवर्सिटी की लॉ शाखा से जुड़े कर्मचारी राजवीर सिंह तोमर निवासी महलगांव ने सात युवाओं को मुख्य आरोपी अरविंद नरवरिया से मिलवाया था। इनमें रवि शर्मा, शत्रुघ्न शर्मा, पवन कौरव, दिव्यांश शर्मा, जितेंद्र गुर्जर, नागेंद्र चौहान और सतेन्द्र सिंह शामिल हैं। आरोप है कि अरविंद युवाओं को भोपाल ले गया। वहां उसने प्रदीप गौतम का नाम बताते हुए उसे व्यापमं का कर्मचारी बताया और पटवारी की नौकरी लगवाने का भरोसा दिलाया। कुछ दिन बाद गोवर्धन सिंह तोमर का नाम सामने आया, जिसे STF का अधिकारी बताया गया। प्रति अभ्यर्थी 12 लाख रुपए में हुई थी डील युवाओं को पटवारी की सरकारी नौकरी दिलाने के लिए प्रति अभ्यर्थी 12 लाख रुपए में सौदा तय होने का आरोप है। इसके बाद किसी से दो लाख तो किसी से चार लाख रुपए एडवांस लिए गए। पीड़ितों के मुताबिक, अलग-अलग किस्तों में फोन-पे और बैंक खातों के जरिए रकम जमा कराई गई। कुल मिलाकर करीब 50 लाख रुपए लेने का आरोप है। आरोपियों ने युवाओं को जबलपुर और भोपाल ले जाकर परीक्षा कराने की बात कही। इससे युवाओं को लगा कि भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। फर्जी सिलेक्शन लिस्ट और जॉइनिंग लेटर दिए युवाओं को भरोसे में लेने के लिए आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी चयन सूची और जॉइनिंग लेटर भी दिए। वेरिफिकेशन के नाम पर उन्हें कभी भोपाल, कभी जबलपुर और कभी भिंड ले जाया गया। आरोप है कि भिंड कलेक्ट्रेट परिसर स्थित एक सेवा केंद्र पर युवाओं के दस्तावेजों का वेरिफिकेशन भी कराया गया और उनके हस्ताक्षर लिए गए। इस घटनाक्रम के बाद वहां किसी कर्मचारी की भूमिका को लेकर भी आशंका जताई गई है। हालांकि, इस संबंध में जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है। पैसे वापस मांगे तो नहीं मिली राहत पीड़ितों के मुताबिक, लंबे समय तक इंतजार करने के बाद भी उन्हें पटवारी की नौकरी नहीं मिली। जब उन्होंने आरोपियों से पैसे वापस मांगे, तो रकम लौटाने से इनकार कर दिया गया। युवाओं ने धमकियां मिलने का आरोप भी लगाया है। बताया गया है कि यह मामला 16 दिसंबर 2023 से अब तक की अवधि से जुड़ा है। ठगी का मामला सामने आने के बाद युवाओं ने जीवाजी यूनिवर्सिटी के कर्मचारी राजवीर सिंह तोमर से भी रकम वापस दिलाने की मांग की। तीन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज शिकायत के बाद ग्वालियर के थाटीपुर थाने में सोमवार को मामला दर्ज किया गया। पुलिस के अनुसार, केस में तीन आरोपियों के नाम सामने आए हैं: थाटीपुर थाना प्रभारी विपेन्द्र सिंह चौहान के मुताबिक, शिकायत के आधार पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच और साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

रूस में नौकरी की तलाश में गया बिलासपुर का युवक लापता, युद्ध में शामिल करने के लिए दबाव बनाने का आरोप

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले का रहने वाला विनीत कुमार दुबे रूस में लापता हो गया है। वह नौकरी की तलाश में रूस गया था, लेकिन परिवार के मुताबिक 7 अक्टूबर के बाद से उससे संपर्क नहीं हो पा रहा है। विनीत की बहन ने आरोप लगाया है कि उसे रूस में बंधक बनाकर रखा गया और युद्ध में शामिल होने से इनकार करने पर उसके साथ मारपीट की गई है। परिवार ने बिलासपुर कलेक्टर और एसएसपी से मुलाकात कर युवक की सुरक्षित वापसी के लिए मदद मांगी है। मामले में बिलासपुर पुलिस ने रूसी दूतावास और भारत के विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर विनीत की स्थिति का पता लगाने और उसकी सुरक्षित वापसी में सहयोग मांगा है। टेलीग्राम ग्रुप के जरिए मिली थी नौकरी की जानकारी विनीत कुमार दुबे बिल्हा का रहने वाला है और उसने दसवीं तक पढ़ाई की है। परिवार के मुताबिक, उसे टेलीग्राम के एक ग्रुप के जरिए रूस में नौकरी की जानकारी मिली थी। इसके बाद वह 1 अक्टूबर को मॉस्को पहुंचा था। परिजनों का आरोप है कि रूस पहुंचने के बाद विनीत की मुश्किलें बढ़ने लगीं। उसे भारतीय दूतावास जाने नहीं दिया गया और मॉस्को के एक होटल में रोककर रखा गया। इसके बाद उसे वोल्गोग्राद भेज दिया गया, जहां उसे एक अपार्टमेंट में रखा गया था। कार में बैठाकर ले गए, फिर टूट गया संपर्क विनीत की बहन आशी दुबे के मुताबिक, 7 अक्टूबर की सुबह करीब 7 बजे कुछ लोग उसके भाई को कार में बैठाकर किसी अज्ञात स्थान पर ले गए। इसके बाद से परिवार का उससे संपर्क टूट गया। बहन का आरोप है कि विनीत पर रेजिडेंसी हासिल करने और युद्ध में शामिल होने का दबाव बनाया जा रहा था। इनकार करने पर उसके साथ मारपीट की गई और उसे भूखा रखकर परेशान किया गया। परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि विनीत को ड्रग्स से जुड़े एक मामले में फंसाने की धमकी देकर स्थानीय लोगों की बात मानने के लिए मजबूर किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। व्हाट्सएप के जरिए परिवार को मिली जानकारी परिवार के मुताबिक, विनीत के साथ हुई घटनाओं की जानकारी उन्हें किशोर नाम के एक युवक के जरिए मिली। किशोर ने व्हाट्सएप पर परिवार से संपर्क किया था। इसके बाद से परिजन विनीत की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। परिवार ने बिलासपुर कलेक्टर और एसएसपी से मुलाकात कर पूरे मामले में हस्तक्षेप करने और विनीत को सुरक्षित भारत वापस लाने की मांग की है। परिजनों ने केंद्र सरकार और भारतीय दूतावास से भी मदद की अपील की है। रूसी दूतावास और विदेश मंत्रालय को पुलिस ने लिखा पत्र परिवार की शिकायत के बाद बिलासपुर पुलिस ने रूसी दूतावास और भारत के विदेश मंत्रालय को पत्र भेजा है। पुलिस संबंधित एजेंसियों से विनीत की स्थिति की जानकारी जुटाने और उसकी सुरक्षित वापसी में सहयोग की मांग कर रही है। फिलहाल विनीत कुमार दुबे कहां है और उसकी हालत कैसी है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। परिवार को उम्मीद है कि संबंधित एजेंसियों की मदद से जल्द उसका पता लगाया जा सकेगा और उसे सुरक्षित भारत लाया जाएगा।
MPWPCL

MPWPCL Achievement: 9,000 महिला एवं जनजातीय किसानों से जुड़े संगठन को मिली नई पहचान

मध्य प्रदेश महिला पोल्ट्री उत्पादक कंपनी लिमिटेड (MPWPCL) के लिए गर्व की बात है। कंपनी से जुड़े डॉ. मृदु पवन हजारिका ,MVSc, मुख्य तकनीकी सलाहकार (Chief Technical Advisor) प्रतिनिधि को जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय (NDVSU) डॉ. मृदु पवन हजारिका को सलाहकार MPWPCL में सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया है। इस उपलब्धि को ग्रामीण महिलाओं, जनजातीय किसानों और सहकारिता के जरिए रोजगार के नए अवसर तैयार करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की पहचान माना जा रहा है। यह मनोनयन ऐसे समय में सामने आया है, जब ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और उन्हें आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। उम्मीद है कि इस जिम्मेदारी के जरिए विश्वविद्यालय और जमीनी स्तर पर काम करने वाले किसान संगठनों के बीच सहयोग को और मजबूती मिलेगी। MPWPCL से जुड़ी हैं करीब 9,000 महिला एवं जनजातीय किसान मध्य प्रदेश महिला पोल्ट्री उत्पादक कंपनी लिमिटेड की शुरुआत ग्रामीण गरीब परिवारों को आजीविका के बेहतर अवसर देने के उद्देश्य से हुई थी। मध्य प्रदेश शासन की जिला गरीबी उन्मूलन पहल (DPIP) के तहत शुरू हुए इस प्रयास में महिला किसानों और जनजातीय समुदायों को खास तौर पर पोल्ट्री व्यवसाय से जोड़ने पर ध्यान दिया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, MPWPCL के नेटवर्क में 16 सदस्य सहकारी समितियों एवं उत्पादक कंपनियों सहित कुल 17 संगठन शामिल हैं। इस नेटवर्क से करीब 9,000 महिला एवं जनजातीय किसान जुड़े हुए हैं। इसके अलावा, यह व्यवस्था लगभग 1,000 लोगों को रोजगार देने में भी योगदान करती है। कंपनी का सालाना कारोबार ₹500 करोड़ से अधिक बताया गया है। यह आंकड़ा दिखाता है कि सही मार्गदर्शन, संगठित प्रयास और बाजार से जुड़ाव के जरिए ग्रामीण स्तर पर शुरू की गई पहल किस तरह बड़े व्यवसाय का रूप ले सकती है। NDVSU की Extension Council में क्यों अहम है यह जिम्मेदारी? नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर पशु चिकित्सा और पशुपालन से संबंधित शिक्षा, अनुसंधान तथा तकनीकी जानकारी के प्रसार के लिए जाना जाता है। विश्वविद्यालय की विस्तार परिषद में MPWPCL से जुड़े डॉ. मृदु पवन हजारिका का मनोनयन ग्रामीण किसानों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल बनाने का अवसर प्रदान कर सकता है। पोल्ट्री व्यवसाय में बेहतर उत्पादन, पशु स्वास्थ्य, वैज्ञानिक तरीके और व्यावसायिक प्रबंधन की जानकारी काफी मायने रखती है। ऐसी जानकारी समय पर मिलने से किसानों को अपने काम में सुधार करने और कारोबार को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने में मदद मिल सकती है। इसलिए विश्वविद्यालय और किसान संगठनों के बीच संवाद बढ़ाना केवल संस्थागत उपलब्धि नहीं, बल्कि ग्रामीण स्तर पर काम करने वाले लोगों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है। विद्यार्थियों को भी मिल रहा है Practical Experience MPWPCL से वर्ष 2004 से जुड़े रहे प्रतिनिधि के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी जानकारी और व्यावसायिक प्रबंधन को पहुंचाना इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। इसी दिशा में NDVSU के सहयोग से MPWPCL और केसला पोल्ट्री सहकारी समिति (KPS) में विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप कार्यक्रम शुरू किए जाने की जानकारी दी गई है। इस कार्यक्रम के जरिए विद्यार्थियों को पोल्ट्री व्यवसाय की वास्तविक कार्यप्रणाली, सहकारी संस्थाओं के प्रबंधन और किसानों के साथ सीधे काम करने का अनुभव मिल सकता है। कक्षा में पढ़ाई गई बातों को जमीन पर समझने का मौका विद्यार्थियों के लिए काफी उपयोगी होता है। वहीं, ग्रामीण संगठनों को भी नई पीढ़ी के साथ काम करने और तकनीकी जानकारी साझा करने का अवसर मिलता है। महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण रोजगार को मिलेगी नई दिशा ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता का मतलब सिर्फ कमाई करना नहीं, बल्कि अपने परिवार और व्यवसाय से जुड़े फैसलों में अधिक भागीदारी निभाना भी है। MPWPCL जैसे संगठन महिलाओं को सामूहिक रूप से व्यवसाय चलाने, बाजार से जुड़ने और अपनी आजीविका को मजबूत करने का अवसर देते हैं। विस्तार परिषद में मनोनयन से इस तरह के अनुभवों को शैक्षणिक और तकनीकी स्तर पर साझा करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। इससे ग्रामीण जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करने और किसानों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इस मनोनयन से जुड़ी उपलब्ध जानकारी में प्रतिनिधि का नाम और परिषद में उनकी विशिष्ट जिम्मेदारियों का पूरा विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए इन जानकारियों की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही उन्हें प्रकाशित करना उचित होगा। MPWPCL के लिए गर्व, ग्रामीण महिलाओं के लिए नई उम्मीद NDVSU की विस्तार परिषद में सदस्य के रूप में डॉ. मृदु पवन हजारिका मनोनयन MPWPCL से जुड़े किसानों, कर्मचारियों और सहकारी संगठनों के सामूहिक प्रयासों को पहचान दिलाने वाला कदम है। करीब 9,000 महिला एवं जनजातीय किसानों से जुड़ा नेटवर्क ग्रामीण आजीविका के क्षेत्र में संगठित प्रयासों की अहमियत को सामने लाता है। आने वाले समय में विश्वविद्यालय और किसान संगठनों के बीच सहयोग मजबूत होता है, तो वैज्ञानिक पशुपालन, कौशल विकास और ग्रामीण उद्यमिता को नई दिशा मिल सकती है। इसका सबसे बड़ा फायदा उन महिलाओं और परिवारों को मिल सकता है, जो पोल्ट्री व्यवसाय के जरिए अपनी आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
ODI

ODI Records: सचिन से गिल तक, एक साल में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले टॉप-5 भारतीय बल्लेबाज

क्रिकेट में हर खिलाड़ी का सपना होता है कि वह अपनी बल्लेबाजी से टीम को जीत दिलाए और ऐसा रिकॉर्ड बनाए, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाए। भारतीय क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर से लेकर विराट कोहली तक कई दिग्गज बल्लेबाजों ने अपने प्रदर्शन से फैंस का दिल जीता है। लेकिन जब बात एक कैलेंडर ईयर में सबसे ज्यादा ODI रन बनाने की आती है, तो कहानी थोड़ी दिलचस्प हो जाती है। इस रिकॉर्ड में सचिन तेंदुलकर सबसे आगे हैं। वहीं, सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ ने भी एक ही साल में शानदार रन बनाकर इतिहास रचा था। नई पीढ़ी के बल्लेबाज शुभमन गिल ने 2023 में अपने बल्ले से ऐसा कमाल किया कि वह भी इस खास सूची में शामिल हो गए। दिलचस्प बात यह है कि विराट कोहली का नाम इस रिकॉर्ड की टॉप-5 लिस्ट में नहीं आता। ODI Cricket: एक कैलेंडर ईयर में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले टॉप-5 भारतीय बल्लेबाज पुरुषों के ODI क्रिकेट में एक कैलेंडर ईयर के दौरान सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीय बल्लेबाजों की सूची में ये पांच प्रदर्शन शामिल हैं। रैंक भारतीय बल्लेबाज साल रन 1 सचिन तेंदुलकर 1998 1,894 2 सौरव गांगुली 1999 1,767 3 राहुल द्रविड़ 1999 1,761 4 सचिन तेंदुलकर 1996 1,611 5 शुभमन गिल 2023 1,584 यहां कैलेंडर ईयर का मतलब 1 जनवरी से 31 दिसंबर के बीच खेले गए ODI मैचों में बनाए गए रन हैं। इस सूची में सचिन तेंदुलकर का दो बार शामिल होना उनके शानदार करियर की एक बड़ी उपलब्धि है। 1. सचिन तेंदुलकर: 1998 में बनाए 1,894 रन इस सूची में सबसे ऊपर मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर का नाम है। उन्होंने 1998 में 34 ODI मैचों में 1,894 रन बनाए थे। इस दौरान उन्होंने नौ शतक और सात अर्धशतक लगाए। सचिन के लिए 1998 बेहद खास साल रहा। उनकी बल्लेबाजी का अंदाज ऐसा था कि विरोधी टीमों के गेंदबाजों के सामने लगातार चुनौती बनी रहती थी। आज भी एक कैलेंडर ईयर में बनाए गए उनके 1,894 रन ODI क्रिकेट के सबसे बड़े रिकॉर्ड्स में गिने जाते हैं। 2. सौरव गांगुली: 1999 में 1,767 रन भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने 1999 में 1,767 रन बनाए थे। उन्होंने उस साल चार शतक और दस अर्धशतक लगाए। गांगुली की बल्लेबाजी में आक्रामकता और आत्मविश्वास साफ नजर आता था। उन्होंने कई मौकों पर टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। एक ही साल में इतने रन बनाकर उन्होंने भारतीय ODI क्रिकेट में अपनी खास जगह बनाई। 3. राहुल द्रविड़: 1999 में 1,761 रन राहुल द्रविड़ ने भी 1999 में अपने बल्ले से शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 1,761 रन बनाए और इस सूची में तीसरा स्थान हासिल किया। द्रविड़ को उनकी तकनीक, धैर्य और मुश्किल परिस्थितियों में टिककर खेलने के लिए जाना जाता है। सौरव गांगुली के साथ उनका एक ही साल में इस सूची में शामिल होना भारतीय क्रिकेट के लिए यादगार उपलब्धि है। 4. सचिन तेंदुलकर: 1996 में भी दिखाया दम सचिन तेंदुलकर ने 1996 में भी शानदार बल्लेबाजी की थी। उस साल उनके बल्ले से 1,611 ODI रन निकले, जिसमें छह शतक और नौ अर्धशतक शामिल थे। एक बल्लेबाज का अलग-अलग वर्षों में इस सूची में जगह बनाना आसान नहीं होता। सचिन ने यह उपलब्धि हासिल करके दिखाया कि उनकी निरंतरता कितनी खास थी। 5. शुभमन गिल: 2023 में 1,584 रन नई पीढ़ी के बल्लेबाज शुभमन गिल ने 2023 में 1,584 ODI रन बनाए थे। उन्होंने उस साल पांच शतक और नौ अर्धशतक लगाए। उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 208 रन रहा, जो उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ बनाया था। गिल का 2023 का प्रदर्शन इसलिए भी खास था, क्योंकि उन्होंने बड़े स्कोर बनाने के साथ-साथ तेज गति से रन भी जुटाए। ICC के आंकड़ों के मुताबिक, उस साल उनका ODI औसत 63.36 रहा। <Cite refs={[“turn447195news5”]}/> Virat Kohli टॉप-5 में क्यों नहीं हैं? विराट कोहली का नाम इस सूची में टॉप-5 में नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि उनका प्रदर्शन कम रहा है। कोहली ने 2017 में 1,460 ODI रन बनाए थे और उस साल उनका बल्लेबाजी औसत 76.84 रहा था। <Cite refs={[“turn447195search2”]}/> विराट की सबसे बड़ी ताकत लगातार रन बनाना और दबाव वाले मुकाबलों में जिम्मेदारी संभालना रही है। 2023 के वनडे वर्ल्ड कप में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया था। टूर्नामेंट में उनके नाम 765 रन रहे, जो पुरुषों के ODI वर्ल्ड कप के एक संस्करण में किसी बल्लेबाज का सबसे बड़ा व्यक्तिगत रन-स्कोर है। <Cite refs={[“turn447195news5”]}/> यहां एक बात समझना जरूरी है: वर्ल्ड कप में बनाए गए रन और पूरे कैलेंडर ईयर में बनाए गए ODI रन अलग-अलग रिकॉर्ड हैं। इसी वजह से किसी बड़े टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करने के बावजूद बल्लेबाज इस सूची के टॉप-5 में शामिल न हो, ऐसा संभव है। सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड आज भी क्यों है खास? सचिन तेंदुलकर का 1998 में बनाया गया 1,894 रन का रिकॉर्ड लंबे समय से कायम है। एक पूरे साल में इतने रन बनाने के लिए न सिर्फ अच्छी फॉर्म, बल्कि फिटनेस, निरंतरता और लगातार अच्छा प्रदर्शन करने की जरूरत होती है। सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ ने 1999 में इस रिकॉर्ड के करीब पहुंचकर अपनी छाप छोड़ी। वहीं, शुभमन गिल ने 2023 में दिखाया कि नई पीढ़ी के बल्लेबाज भी इस स्तर का प्रदर्शन कर सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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