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भारत माला प्रोजेक्ट घोटाला: छत्तीसगढ़ में ED की बड़ी कार्रवाई, 9 ठिकानों पर रेड, जमीन मुआवजा गड़बड़ी की जांच तेज

भारत माला परियोजना से जुड़े बहुचर्चित भूमि अधिग्रहण घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छत्तीसगढ़ में बड़ी कार्रवाई की है। ईडी की टीम ने रायपुर और महासमुंद सहित कुल 9 ठिकानों पर छापेमारी की। रायपुर में हरमीत सिंह खनूजा और महासमुंद के मेघ बसंत इलाके में स्थित व्यवसायी जसबीर सिंह बग्गा के निवास पर ईडी ने रेड की है। इसके अलावा हरमीत खनूजा के ससुर ट्रांसपोर्टर हरमीत सिंह चावला और उनके एक करीबी के घर पर भी कार्रवाई जारी है। सूत्रों के मुताबिक, CRPF जवानों की सुरक्षा में ईडी की 10 सदस्यीय टीम चार गाड़ियों में सुबह पहुंची। टीम ने पंजाबीपारा स्थित हरमीत सिंह चावला के घर में प्रवेश कर दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच शुरू की। हरमीत सिंह चावला, मुख्य आरोपी हरमीत खनूजा के ससुर बताए जा रहे हैं। वहीं, महासमुंद में आर्यन होंडा एजेंसी के संचालक जसबीर सिंह बग्गा के मेघ बसंत कॉलोनी स्थित घर पर भी छापेमारी की गई। ED का दावा: मुआवजा भुगतान में बड़ी गड़बड़ी ईडी के अनुसार, भारत माला परियोजना के तहत रायपुर–विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण में मुआवजा भुगतान को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। फिलहाल आरोपियों के ठिकानों के बाहर सुरक्षा बल तैनात हैं और किसी भी व्यक्ति को घर के भीतर प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है। ईडी की टीमें डिजिटल सबूतों, बैंक लेनदेन और दस्तावेजों की गहन जांच कर रही हैं। क्या है पूरा मामला? जांच में सामने आया है कि हरमीत सिंह खनूजा इस घोटाले के मुख्य आरोपी और जमीन दलाल हैं। आरोप है कि उन्होंने फर्जी दस्तावेज, नकली बंटवारे और म्यूटेशन के जरिए भूमि मुआवजा हासिल किया और रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवाई। ईडी की जांच में उनके ससुर हरमीत सिंह चावला के पास भी घोटाले से जुड़े अहम लेनदेन और जानकारियां मिलने की बात कही जा रही है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। सरकारी अधिकारी भी जांच के घेरे में ईडी के मुताबिक, भूमि अधिग्रहण के दौरान मुआवजा राशि के निर्धारण और भुगतान में नियमों का उल्लंघन हुआ है। इस मामले में निजी व्यक्तियों के साथ-साथ कुछ सरकारी अधिकारी और जमीन मालिक भी जांच के दायरे में हैं। आरोप है कि बैकडेट में दस्तावेज तैयार कर जमीन को टुकड़ों में बांटा गया और मुआवजा राशि को कई गुना बढ़ा दिया गया। बताया जा रहा है कि भारत माला प्रोजेक्ट में करीब 43 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है। जमीन को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर NHAI को 78 करोड़ रुपये के भुगतान का दावा किया गया। इस केस में पहले भी कार्रवाई हो चुकी है, जिसमें कोरबा के डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे और जगदलपुर निगम कमिश्नर निर्भय साहू को सस्पेंड किया गया था। अभनपुर क्षेत्र में 9.38 किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए 324 करोड़ रुपये का मुआवजा तय किया गया था, जिसमें से 246 करोड़ रुपये का भुगतान हो चुका है, जबकि 78 करोड़ रुपये का भुगतान फिलहाल रोक दिया गया है। 👉 भारत माला प्रोजेक्ट घोटाले समेत छत्तीसगढ़ की हर बड़ी और ताज़ा खबर के लिए पढ़ते रहें: deshharpal.com
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बिलासपुर: ध्वनि प्रदूषण, रास्ता बंद और कचरा जलाने पर हाईकोर्ट सख्त, अफसरों से शपथपत्र तलब

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में ध्वनि प्रदूषण, रास्ता बंद करने और खुले में कचरा जलाने जैसी नागरिक समस्याओं पर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। जनहित याचिका के रूप में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण और गरिमापूर्ण वातावरण में जीने और सोने का मौलिक अधिकार देता है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने मामले में कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त से व्यक्तिगत शपथपत्र के साथ जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 17 दिसंबर को होगी। प्रकाशित खबरों पर HC का संज्ञान मीडिया रिपोर्ट्स में शहर और जिले से जुड़ी जनसमस्याएं सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने तीन मामलों को जनहित याचिका मानते हुए सुनवाई शुरू की। कोर्ट ने माना कि इन समस्याओं से आम नागरिकों के मौलिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। गर्डर लगाकर रास्ता बंद, स्कूली बच्चों को परेशानी सरकंडा क्षेत्र के शर्मा विहार और गीतांजलि सिटी कॉलोनी को जोड़ने वाली सड़क पर बिल्डर द्वारा गर्डर लगाकर रास्ता बंद करने का मामला सामने आया। इससे चारपहिया वाहनों की आवाजाही रुक गई और स्कूली बच्चों को लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है।हाईकोर्ट ने इसे गंभीर विषय बताते हुए नगर निगम आयुक्त को व्यक्तिगत शपथपत्र के साथ जवाब देने के निर्देश दिए हैं। धार्मिक आयोजनों के नाम पर देर रात तक लाउडस्पीकर सरकंडा के ओम विहार इलाके में देर रात से सुबह तक तेज आवाज में लाउडस्पीकर बजने से लोग परेशान हैं। शिकायतों के बावजूद राहत न मिलने पर कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अनुच्छेद 21 नागरिकों को शांत वातावरण में रहने और सोने का अधिकार देता है। इस मामले में कलेक्टर से शपथपत्र मांगा गया है। खुले में कचरा जलाने से बढ़ रहा प्रदूषण वार्ड नंबर 7, कालिका नगर में रोजाना कचरा जलाने से फैलने वाले धुएं से बच्चों और बुजुर्गों को परेशानी हो रही है। लोगों का कहना है कि समय पर कचरा न उठने के कारण यह स्थिति बन रही है। इस पर भी हाईकोर्ट ने कलेक्टर और निगम आयुक्त से जवाब तलब किया है। हाईकोर्ट ने साफ संकेत दिए हैं कि नागरिक सुविधाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी। 👉 ऐसी ही छत्तीसगढ़ और देशभर की ताज़ा, भरोसेमंद खबरों के लिए पढ़ते रहें — deshharpal.com
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Bilaspur Dhan Khareedi Scam: नियमों के खिलाफ वसूली, बिचौलियों का धान खपाने का आरोप, 3 लाख का अवैध धान जब्त

बिलासपुर जिले के धान खरीदी केंद्रों पर किसानों से नियमों के विपरीत वसूली और मनमानी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। आरोप है कि व्यापारी और बिचौलियों का धान खरीदी केंद्रों में खपाया जा रहा है, जबकि जरूरतमंद किसान टोकन मिलने के बाद भी धान बेचने के लिए भटकने को मजबूर हैं। इसी कड़ी में शुक्रवार को प्रशासन ने अवैध धान भंडारण के खिलाफ कार्रवाई करते हुए राइस मिल और किराना दुकान से करीब 3 लाख रुपए का धान जब्त किया है। समर्थन मूल्य की व्यवस्था पर सवाल राज्य सरकार ने किसानों को उनकी उपज का समर्थन मूल्य (MSP) दिलाने के लिए धान खरीदी की व्यवस्था की है, लेकिन जमीनी स्तर पर अफसरों और खरीदी केंद्र प्रभारियों की मिलीभगत से व्यवस्था प्रभावित होने का आरोप है। किसानों का कहना है कि उनका धान पीछे किया जा रहा है, जबकि बिचौलियों का धान आसानी से खरीदा जा रहा है। प्रति बोरी 1 किलो तक ज्यादा धान लेने का आरोप शासन के नियमों के अनुसार एक बोरी में 40 किलो 700 ग्राम धान लिया जाना चाहिए, लेकिन कई केंद्रों पर किसानों से 41 किलो 500 ग्राम से 41 किलो 700 ग्राम तक धान लिया जा रहा है। यानी प्रति बोरी करीब 1 किलो अतिरिक्त। किसानों ने इसकी शिकायतें भी कीं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। टोकन के बाद भी नहीं हो रही तौल किसानों का कहना है कि टोकन कटवाने के बाद भी उनकी तौल नहीं हो रही। शुक्रवार को पहुंचे किसानों की तौल नहीं हुई और शनिवार-रविवार केंद्र बंद रहने के कारण उन्हें सोमवार तक इंतजार करना पड़ेगा। किसानों को डर है कि सोमवार को भी नंबर आएगा या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं। प्रशासन की कार्रवाई, 3 लाख का धान जब्त जिला प्रशासन का दावा है कि अवैध धान भंडारण पर लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन केस दर्ज किया गया। यह कार्रवाई बेलगहना नायब तहसीलदार समर्थ थवाईत, कोटा मंडी उप निरीक्षक सीजी गोस्वामी और नीतिश नायक की टीम ने की। कुल मिलाकर करीब 3 लाख रुपए का धान जब्त किया गया और मंडी अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। 👉 इस मुद्दे से जुड़ी हर अपडेट, ग्राउंड रिपोर्ट और ब्रेकिंग न्यूज के लिए Deshharpal साइट विज़िट करें deshharpal.com
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बिलासपुर नगर निगम में स्टाफ की भारी कमी, विकास कार्य ठप—6 साल से नए सेटअप की मांग अधर में

बिलासपुर नगर निगम पिछले 6 साल से नए सेटअप की मांग कर रहा है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। हाल ही में महापौर पूजा विधानी ने उपमुख्यमंत्री और नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव से मुलाकात कर बताया कि लगातार रिटायर हो रहे कर्मचारियों के कारण स्टाफ बेहद कम हो गया है। इसका सीधा असर शहर के विकास कार्यों की गति पर पड़ रहा है। 2019 में वार्ड बढ़े, इलाके बढ़े… लेकिन स्टाफ वही का वही साल 2019 में बिलासपुर नगर निगम का क्षेत्र 30 से बढ़कर 133 वर्ग किलोमीटर हो गया।वार्डों की संख्या भी 56 से बढ़कर 70 हो गई। लेकिन इतने बड़े विस्तार के बावजूद— इसका नतीजा है कि आज निगम के कई दफ्तर स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहे हैं। जोन-1: छह वार्ड, पर सब इंजीनियर सिर्फ एक! जोन-1 की सहायक जोन कमिश्नर रंजना अग्रवाल ने बताया कि उनके जोन में 6 वार्ड हैं, लेकिन काम संभालने के लिए उन्होंने माना कि इंजीनियरों की कमी से विकास कार्यों पर सीधा असर पड़ रहा है। जोन-3: एक ही अधिकारी कई जिम्मेदारियों में उलझा जोन-3 के ईई प्रवीण शुक्ला पर एक साथ कई प्रभार हैं।वे— यह स्थिति साफ दिखाती है कि नगर निगम के लगभग हर जोन में इंजीनियरों की भारी कमी है। आने वाले महीनों में और खाली होंगे कई बड़े पद जोन क्रमांक 5 के जोन कमिश्नर प्रवेश कश्यप ने बताया— यानी आने वाले महीनों में इंजीनियरों की और कमी होने वाली है। निगम में इंजीनियरों के 50 से ज्यादा पद पहले से खाली बिलासपुर नगर निगम में अभी— निगम की मांग है कि बढ़े हुए वार्ड और एरिया के हिसाब से नया सेटअप तुरंत मंजूर किया जाए, ताकि पानी, सड़क, बिजली जैसी बुनियादी सेवाएं सुचारू रूप से चल सकें। जानिए—कितने पद खाली हैं? For more information, visit: www.deshharpal.com
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बिलासपुर: 10वीं का छात्र 12 दिनों से लापता, रेलवे स्टेशन में मिली स्कूटी—परिजन बेहाल, पुलिस पर लापरवाही का आरोप

बिलासपुर में कक्षा 10वीं का छात्र विनय नायक (17) पिछले 12 दिनों से लापता है। 15 नवंबर को वह सुबह घर से स्कूल जाने के लिए निकला था, लेकिन उसके बाद वह कभी घर नहीं लौटा। उसका मोबाइल भी उसी दिन से बंद है, जबकि उसकी स्कूटी रेलवे स्टेशन पार्किंग में खड़ी मिली। यह मामला तोरवा थाना क्षेत्र का है। बेटे के गायब होने से घबराए परिजन लगातार उसकी तलाश में भटक रहे हैं। कई दिनों तक इंतज़ार के बाद जब कोई सुराग नहीं मिला, तो वे SP ऑफिस पहुंचे और एसएसपी रजनेश सिंह से गुहार लगाई। परिजनों का आरोप है कि पुलिस खोजबीन में लापरवाही कर रही है। स्कूल में उसी दिन पैरेंट्स-टीचर मीटिंग थी विनय के पिता महेश नायक, जो बारदाना खरीदी-बिक्री का काम करते हैं, बताते हैं कि 15 नवंबर को स्कूल में पैरेंट्स-टीचर मीटिंग थी। वे मीटिंग के लिए स्कूल गए थे, जबकि उनका बेटा सुबह 9 बजे स्कूल के लिए निकला था—लेकिन वह स्कूल पहुंचा ही नहीं। आखिरी बार पिता से हुई थी बात सुबह 9:45 बजे महेश ने विनय को फोन किया था, और उसी समय आखिरी बार उससे बात हुई। इसके बाद मोबाइल बंद हो गया और तब से विनय का कोई पता नहीं चला। परिवार खुद ही खोजबीन करता रहा, लेकिन कुछ सुराग हाथ नहीं लगा। रेलवे स्टेशन की पार्किंग में मिली स्कूटी तलाश करते हुए जब परिवार रेलवे स्टेशन पहुंचा, तो वहाँ विनय की स्कूटी पार्किंग में मिली। इससे आशंका है कि वह कहीं ट्रेन से गया हो, या उसे कोई बहला-फुसला कर अपने साथ ले गया हो। लेकिन उसका कोई निशान नहीं मिल पाया। परिजन बोले—पुलिस गंभीर नहीं है परिवार ने 16 नवंबर को ही घटना की सूचना पुलिस को दे दी थी, लेकिन उनका कहना है कि पुलिस पूरी गंभीरता से खोजबीन नहीं कर रही। इसी वजह से 12 दिन बीत जाने के बाद भी विनय का कोई पता नहीं चल सका। पोस्टर, सोशल मीडिया—हर जगह ढूंढ रहे हैं बेटा बेटे को खोजने के लिए परिजन पोस्टर बांट रहे हैं, सोशल मीडिया पर लगातार पोस्ट कर रहे हैं। 12 दिनों की बेचैनी के बाद अब परिवार को अनहोनी का डर सताने लगा है। परिजनों ने आखिरकार एसएसपी से शिकायत की है। एसएसपी रजनेश सिंह ने आश्वासन दिया है कि छात्र की तलाश के लिए हरसंभव कोशिश की जाएगी। For more information, visit: www.deshharpal.com
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वन मंत्री केदार कश्यप का कांग्रेस पर प्रहार: “दीपक बैज की लड़ाई अपनी ही पार्टी से”

छत्तीसगढ़ के वन मंत्री केदार कश्यप ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज की असली लड़ाई पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और टी.एस. सिंहदेव से है, क्योंकि कांग्रेस के नेता अपने ही अध्यक्ष को लीडर नहीं मान रहे हैं। कश्यप ने तंज कसा कि इसी वजह से दीपक बैज को अपना कद बढ़ाने के लिए बाइक रैली निकालनी पड़ रही है। “कांग्रेस में फूट साफ दिखाई दे रही है” – कश्यप बिलासपुर में 20 नवंबर को आयोजित स्वदेशी मेले के समापन समारोह में पहुंचे मंत्री केदार कश्यप ने मीडिया से बातचीत में कहा: कश्यप ने आरोप लगाया कि कांग्रेस को यह पसंद नहीं कि देश का नेतृत्व एक “चाय बेचने वाले नरेंद्र मोदी” के हाथ में है। इसलिए वे अराजकता फैलाने की कोशिश में लगे हैं। धान खरीदी को लेकर बड़ा दावा धान खरीदी में अव्यवस्था के कांग्रेस के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कश्यप ने कहा— 200 यूनिट बिजली रियायत और ‘सूर्य घर योजना’ से राहत मंत्री कश्यप ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 200 यूनिट तक बिजली बिल में रियायत की घोषणा की है।इसके साथ ही प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत लोग: स्वदेशी मेले में अपील – “देश को मजबूत बनाना है, तो स्वदेशी अपनाएँ” साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित 7 दिवसीय स्वदेशी मेले के समापन पर केदार कश्यप ने कहा कि: बृजमोहन अग्रवाल बोले— “गांव के उत्पाद अपनाओ, देश को ताकतवर बनाओ” सांसद व पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ी में कहा— बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने भी “स्व” के भाव के साथ आत्मनिर्भरता पर जोर दिया। अचार, पापड़ से लेकर गौशाला की धूपबत्ती— स्वदेशी मेले में खूब बिकीं घरेलू चीजें सात दिन चले मेले में लोगों ने भारी उत्साह दिखाया।खास लोकप्रिय चीजें रहीं: 20 नवंबर को समापन पर भारी भीड़ और जाम ने साबित किया कि लोगों का भरोसा स्वदेशी पर लगातार बढ़ रहा है। केश सज्जा प्रतियोगिता में बच्चों और महिलाओं ने दिखाई प्रतिभा स्वदेशी मेले में गुरुवार को केश सज्जा प्रतियोगिता हुई।महिलाओं, युवतियों और मूक-बधिर बच्चों ने विभिन्न हेयर स्टाइल बनाकर अपनी प्रतिभा से सभी को प्रभावित किया। सभी स्टाइल को फूलों, पिन, मोतियों और रंग-बिरंगे फीते से खूबसूरती से सजाया गया। इस कार्यक्रम में रुपसाय सलाम, लखन लाल साहू, आशीष जायसवाल, बबलू खंडेलवाल, मनोज भंडारी, गुलशन ऋषि, डॉ. देवेंद्र कौशिक सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। For More Info:www.deshharpal.com
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बिलासपुर: धान खरीदी तेज, लक्ष्य से अधिक आवक की संभावना; कस्टम मिलिंग की तैयारियाँ शुरू

बिलासपुर जिले में इस बार धान खरीदी में तेजी देखने को मिल रही है। किसानों द्वारा लगातार धान लाए जाने से अनुमान है कि लक्ष्य से अधिक धान खरीदी हो सकती है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने कस्टम मिलिंग की तैयारियाँ भी शुरू कर दी हैं। मंगलवार को कलेक्टर संजय अग्रवाल ने राइस मिलर्स की बैठक ली और जरूरी दिशा–निर्देश दिए। कलेक्टर ने पात्र राइस मिलर्स को निर्देश दिया कि वे अगले तीन दिनों के अंदर कस्टम मिलिंग के लिए पंजीयन कराएं। जिले में कुल 170 राइस मिलें हैं, जिनमें से 121 मिलें कस्टम मिलिंग के लिए पात्र हैं। राज्य शासन के अनुसार वही मिलें पंजीयन करा सकती हैं, जिन्होंने पिछले वर्ष की 70% या उससे अधिक चावल जमा कर दिया है। पिछले साल का बकाया चावल जल्द जमा करने के निर्देश बैठक में कलेक्टर ने निर्देश दिया कि पिछले वर्ष का करीब 13 हजार मीट्रिक टन बकाया चावल इस महीने के अंत तक जमा किया जाए।इसके अलावा एफसीआई से मिले स्टेक को भी 15 दिनों के भीतर पूरा करने की बात कही गई। खरीदी केंद्रों में धान जमा, मिलर्स को जल्द उठाव करने के निर्देश कलेक्टर ने बताया कि जिले में धान खरीदी शुरू हो चुकी है और फड़ों में धान तेजी से जमा हो रहा है। इसलिए मिलर्स को निर्देश दिए गए कि वे इस धान को जल्द से जल्द उठाकर कस्टम मिलिंग प्रक्रिया आगे बढ़ाएं। उन्होंने राइस मिलर्स को धान खरीदी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। समस्याओं के समाधान का आश्वासन कलेक्टर ने मिलर्स से कहा कि वे शासन के नियमों के अनुसार समय सीमा में अपना काम पूरा करें। बैठक में मिलर्स की समस्याएँ भी सुनी गईं और उनके समाधान का आश्वासन दिया गया।इस बैठक में खाद्य नियंत्रक अमृत कुजूर, डीएमओ अमित चंद्राकर, राइस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष ललित अग्रवाल सहित कई राइस मिलर्स उपस्थित रहे। More updates and latest agriculture news on:www.deshharpal.com
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गृहमंत्री अमित शाह ने दी थी Hidma को खत्म करने की डेडलाइन, 12 दिन पहले ही ढेर

गृहमंत्री अमित शाह ने दी थी Hidma को खत्म करने की डेडलाइन, 12 दिन पहले ही ढेर

भारत सरकार की कड़ी कार्रवाई और मजबूत इंटेलिजेंस ऑपरेशन के बाद देश के सबसे खतरनाक नक्सली कमांडर Hidma को आखिरकार सुरक्षा बलों ने मार गिराया। कहा जाता है कि गृहमंत्री अमित शाह ने हिड़मा को खत्म करने की एक समयसीमा (Deadline) तय की थी, और उससे 12 दिन पहले ही यह बड़ी सफलता मिल गई। हिड़मा वही नाम है, जिसके नाम से जंगल का बच्चा-बच्चा डरता था। वह 2010 में दांतेवाड़ा में हुए हमले का मुख्य आरोपी था, जिसमें 76 CRPF जवान शहीद हो गए थे। इस हमले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था और सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हुए थे। यही वजह थी कि हिड़मा नक्सली दुनिया का सबसे वांछित चेहरा बन गया। सरकार, सुरक्षा एजेंसियां और स्पेशल फोर्सेज लगातार हिड़मा का पीछा कर रही थीं। कई सालों तक वह घने जंगलों, पहाड़ी इलाकों और स्थानीय नेटवर्क की मदद से बचता रहा। लेकिन इस बार केंद्रीय एजेंसियों ने सटीक जानकारी जुटाई और संयुक्त ऑपरेशन में उसे ढेर कर दिया। इस सफलता के बाद सुरक्षा बलों का मनोबल और भी मजबूत हुआ है और नक्सल समस्या पर एक ऐतिहासिक प्रहार माना जा रहा है। अब सरकार का लक्ष्य बचे हुए नेटवर्क को भी पूरी तरह खत्म करना है ताकि बस्तर, छत्तीसगढ़ और आस-पास के इलाकों में शांति और विकास का रास्ता तेज हो सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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छत्तीसगढ़ में पहली बार देशभर के डीजीपी-आईजीपी का सबसे बड़ा सम्मेलन, नवा रायपुर में होगी रणनीति तय

छत्तीसगढ़ में पहली बार देशभर के पुलिस महानिदेशक (DGP) और महानिरीक्षक (IGP) का सबसे बड़ा मंच आयोजित होने जा रहा है। 28 से 30 नवंबर तक नवा रायपुर स्थित IIM परिसर में 60वां अखिल भारतीय DGP-IGP सम्मेलन होगा। यह राज्य के लिए बेहद गर्व का मौका माना जा रहा है। तीन दिन चलेगा मंथन, शाह और मोदी रहेंगे मौजूद सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह हिस्सा लेंगे, जबकि समापन सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद रहेंगे। छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय मिश्रा ने इसकी आधिकारिक पुष्टि की है। इन अहम मुद्दों पर होगी चर्चा इस राष्ट्रीय स्तर की बैठक में आंतरिक सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी— इस बार खास फोकस नक्सल प्रभावित क्षेत्रों, विशेषकर बस्तर पर रहेगा। हाल के महीनों में राज्य पुलिस और केंद्रीय बलों की संयुक्त कार्रवाई ने कई बड़ी सफलताएं दी हैं। इसी “बस्तर मॉडल” को राष्ट्रीय स्तर पर अपनाने पर भी बात होगी। बस्तर मॉडल को और मजबूत करने पर जोर अधिकारियों के अनुसार, हाल ही के ऑपरेशनों में सफल होने के पीछे बेहतर ग्राउंड इंटेलिजेंस, आधुनिक हथियार और संयुक्त ऑपरेशन मुख्य वजह रहे हैं। सम्मेलन में आगे की रणनीति का ब्लूप्रिंट तैयार किए जाने की संभावना है। भुवनेश्वर के बाद अब छत्तीसगढ़ को मिली मेजबानी साल 2024 में यह सम्मेलन भुवनेश्वर में हुआ था। इस बार पहली बार इसकी मेजबानी छत्तीसगढ़ कर रहा है, जो राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। एक महीने में पीएम का दूसरा दौरा प्रधानमंत्री मोदी नवंबर में दूसरी बार छत्तीसगढ़ आएंगे। इससे पहले 1 नवंबर को वे राज्य स्थापना दिवस के कार्यक्रमों में शामिल हुए थे। अब वे 28-30 नवंबर को होने वाले इस बड़े सुरक्षा सम्मेलन का हिस्सा बनेंगे नवा रायपुर में बनेगा अस्थायी पीएमओ सम्मेलन के दौरान नवा रायपुर में बंगला M-01 को अस्थायी मिनी PMO में बदल दिया जाएगा। यह बंगला विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का आवास है। 500 से ज्यादा शीर्ष अधिकारी होंगे शामिल इस बड़े आयोजन में प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, NSA अजित डोभाल, 70 DG, पैरामिलिट्री चीफ और कुल 500 शीर्ष अधिकारी शामिल होंगे। सुरक्षा के लिए NSG कमांडो तैनात किए जाएंगे और VVVIP मूवमेंट के लिए 400 वाहनों का बेड़ा तैयार रहेगा। छत्तीसगढ़ में होने वाला यह सम्मेलन न सिर्फ सुरक्षा रणनीतियों को मजबूत करेगा, बल्कि राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान भी देगा। और खबरों के लिए विजिट करें –www.deshharpal.com
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बिलासपुर रेल हादसा: एक और छात्रा की मौत, अब तक 12 लोगों की जान गई

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेल हादसे में घायल कॉलेज छात्रा महविश परवीन (19) ने एक सप्ताह तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद दम तोड़ दिया। इसके साथ ही इस दर्दनाक हादसे में मृतकों की संख्या 12 पहुंच गई है। हादसे में गंभीर रूप से घायल थी छात्रा महविश बिलासपुर के डीपी विप्र कॉलेज में बीएससी गणित की नियमित छात्रा थी। वह जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा की रहने वाली थी और बिलासपुर में रहकर पढ़ाई करती थी।4 नवंबर को वह रिश्तेदार की शादी में शामिल होकर घर से कोरबा-बिलासपुर मेमू ट्रेन से लौट रही थी। लालखदान स्टेशन के पास यह ट्रेन मालगाड़ी से टकरा गई। महविश ट्रेन के महिला कोच में सवार थी। टक्कर इतनी तेज थी कि उसके दोनों पैर लोहे के एंगल के नीचे दब गए और कई जगह फ्रैक्चर हो गए। झटके के कारण उसकी कॉलर बोन और पसलियों की चार हड्डियां भी टूट गईं। घटना के तुरंत बाद उसे सिम्स लाया गया, जहां से हालत गंभीर होने पर अपोलो अस्पताल रेफर किया गया। एक सप्ताह तक जिंदगी से लड़ती रही, फिर मौत ने छीन ली जिंदगी अपोलो अस्पताल में डॉक्टर लगातार उसका इलाज कर रहे थे, लेकिन उसकी हालत बिगड़ती गई।मंगलवार रात इलाज के दौरान महविश ने अंतिम सांस ली। बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया, जो उसे लेकर अकलतरा रवाना हो गए। दिल की मरीज रह चुकी थी महविश, भाई की शादी में गई थी घर महविश के चाचा मोहम्मद रहमान ने बताया कि बचपन में उसे हृदय संबंधी बीमारी थी और रायपुर के एस्कॉर्ट अस्पताल में उसकी ओपन हार्ट सर्जरी हुई थी। इलाज के बाद वह पूरी तरह स्वस्थ हो चुकी थी।12वीं के बाद उसे बिलासपुर के डीपी विप्र कॉलेज में दाखिला दिलाया गया था।वह अपने चचेरे भाई की शादी के लिए घर गई थी — शादी 2 नवंबर को हुई थी और 4 नवंबर को वह बिलासपुर लौट रही थी, तभी यह हादसा हो गया। मुआवजे के लिए फर्जी दावा करने की कोशिश का खुलासा इस बीच, सोमवार को एक अन्य व्यक्ति पवन गढ़ेवाल को मृत अवस्था में सिम्स लाया गया।साथ आए लोगों ने दावा किया कि वह भी इसी रेल हादसे में घायल था। लेकिन पुलिस जांच में पता चला कि पवन की कोई मेडिकल हिस्ट्री या इलाज का रिकॉर्ड नहीं मिला।सीएसपी गगन कुमार ने बताया कि मुआवजे के लिए उसकी मौत को रेल हादसे से जोड़ने की कोशिश की जा रही थी। रेल हादसे की जांच अब भी जारी है, जबकि मृतकों के परिजनों को मुआवजा और घायलों के इलाज की जिम्मेदारी रेलवे प्रशासन ने ली है। 🔗 अधिक जानकारी और अपडेट के लिए देखें: www.deshharpal.com — सच्ची खबरें, संवेदनशील अंदाज में
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BRICS

BRICS में Digital Payment का बड़ा प्लान, MSME कारोबारियों को मिलेगा Global Market का फायदा

दुनिया की बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के समूह BRICS में कारोबार और भुगतान व्यवस्था को लेकर एक नई पहल पर काम चल रहा है। सदस्य देशों के बीच Digital Currency यानी CBDC और Fast Payment Systems को आपस में जोड़ने की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं। अगर यह व्यवस्था आगे बढ़ती है तो भारत समेत BRICS देशों के कारोबारियों के लिए दूसरे देशों में पैसा भेजना और प्राप्त करना पहले से आसान हो सकता है। सबसे ज्यादा उम्मीद छोटे कारोबारियों और MSME Exporters को लेकर है। सीमा पार व्यापार में भुगतान की जटिल प्रक्रिया और Finance की कमी छोटे कारोबारियों के लिए लंबे समय से बड़ी चुनौती रही है। नई व्यवस्था का मकसद इन्हीं अड़चनों को कम करना है। BRICS में Digital Payment को लेकर क्या तैयारी है? BRICS देशों के बीच फिलहाल किसी एक साझा Digital Currency को लॉन्च करने का फैसला नहीं हुआ है। इसके बजाय अलग-अलग देशों की Central Bank Digital Currencies (CBDCs) और उनके Fast Payment Networks को आपस में जोड़ने की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के मुताबिक BRICS के सदस्य देशों के बीच Cross-Border Payments को सस्ता और तेज बनाने के विकल्पों पर काम किया जा रहा है। इसके लिए Payment Systems की Interoperability को लेकर भी चर्चा चल रही है। भारत के लिए इस पूरी व्यवस्था में UPI और Digital Rupee अहम भूमिका निभा सकते हैं। छोटे कारोबारियों को क्यों होगा फायदा? अंतरराष्ट्रीय कारोबार सिर्फ बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं है। देश के हजारों छोटे कारोबारी भी Export के जरिए दूसरे देशों में अपना सामान बेचते हैं। लेकिन छोटे कारोबारियों के सामने सबसे बड़ी मुश्किल अक्सर Finance की होती है। कई बार बैंक से Loan लेने के लिए पर्याप्त संपत्ति या Collateral उपलब्ध नहीं होता। BRICS के Trade Agenda में MSME के लिए Credit Assessment को ज्यादा व्यावहारिक बनाने पर जोर दिया गया है। इसमें कारोबारी की सिर्फ संपत्ति देखने के बजाय उसके Cash Flow, कारोबार की क्षमता और भुगतान रिकॉर्ड जैसे पहलुओं को भी महत्व देने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि हर कारोबारी को बिना किसी जांच के Loan मिल जाएगा। लेकिन अच्छी बात यह है कि छोटे कारोबार की वास्तविक क्षमता को Credit Assessment में ज्यादा महत्व देने की कोशिश हो रही है। Invoice के बदले मिल सकता है Working Capital छोटे Exporters के लिए Invoice Discounting भी एक उपयोगी विकल्प बन सकता है। इसमें कारोबारी अपने बकाया Invoice के आधार पर Working Capital जुटा सकता है। मसलन, किसी छोटे Exporter ने विदेशी ग्राहक को माल भेज दिया लेकिन भुगतान 30 या 60 दिन बाद मिलना है। इस दौरान कारोबार चलाने के लिए पैसों की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे मामलों में Invoice आधारित Finance कारोबार के Cash Flow को बनाए रखने में मदद कर सकता है। UPI और Digital Rupee पर रहेंगी नजरें भारत ने Digital Payments के क्षेत्र में UPI के जरिए पहले ही मजबूत पहचान बनाई है। अब Digital Rupee (e₹) को भी धीरे-धीरे विकसित किया जा रहा है। ऐसे में अगर BRICS देशों के Fast Payment Systems और CBDCs के बीच बेहतर Connectivity बनती है, तो भविष्य में Cross-Border Transactions में मौजूदा जटिलताओं को कम किया जा सकता है। कारोबारियों के लिए इसका सीधा मतलब होगा—कम समय, कम लागत और भुगतान की बेहतर सुविधा। हालांकि यह बदलाव एक दिन में नहीं होगा। अलग-अलग देशों के Banking Rules, Currency Regulations, Data Protection और Cybersecurity Standards में काफी अंतर है। इन्हें एक-दूसरे के साथ जोड़ना बड़ी चुनौती होगी। Local Currency में Trade को भी बढ़ावा BRICS देशों में केवल Digital Payment ही चर्चा का विषय नहीं है। सदस्य देश Local Currency Settlement के विकल्पों को भी बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। भारत और रूस के बीच रुपये और रूबल में व्यापारिक भुगतान बढ़ना इसी दिशा में एक उदाहरण है। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय कारोबार में किसी एक प्रमुख मुद्रा पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम करना और सीधे भुगतान के विकल्प बढ़ाना है। हालांकि BRICS की अपनी कोई Common Currency अभी अस्तित्व में नहीं है। क्या BRICS की Common Digital Currency आएगी? यह सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर BRICS की कोई एक साझा Digital Currency लागू नहीं हुई है। मौजूदा कोशिश ज्यादा व्यावहारिक नजर आती है—अलग-अलग देशों की CBDC और Fast Payment Systems को जोड़ना, ताकि Cross-Border Payments आसान हो सकें। अगर यह मॉडल सफल होता है तो भविष्य में एक भारतीय कारोबारी BRICS के किसी दूसरे सदस्य देश के ग्राहक से भुगतान ज्यादा तेजी से हासिल कर सकता है। इससे छोटे Exporters के लिए नए बाजारों तक पहुंच बनाना आसान हो सकता है। MSME के लिए बदल सकता है कारोबार का तरीका BRICS देशों के Trade Agenda में MSME Finance और Global Value Chains को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। भारत के लिए यह खास तौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि छोटे और मध्यम कारोबारी देश की Export Economy में बड़ी भूमिका निभाते हैं। बेहतर Credit Access, Invoice Finance और आसान Digital Payments अगर एक साथ आगे बढ़ते हैं तो छोटे कारोबारियों के सामने खड़ी कई वित्तीय बाधाएं कम हो सकती हैं। यानी आने वाले समय में किसी छोटे कारोबारी के लिए विदेश में कारोबार करने का मतलब सिर्फ बड़ा Investment या भारी संपत्ति दिखाना नहीं रह जाएगा। उसकी कमाई, Cash Flow और वास्तविक कारोबारी क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो सकती है। अभी इंतजार बाकी है BRICS की Digital Payment पहल निश्चित रूप से छोटे कारोबारियों के लिए उम्मीद जगाती है, लेकिन इसे लेकर अभी कई चरण पूरे होने बाकी हैं। तकनीकी ढांचे से लेकर देशों के नियमों तक कई मुद्दों पर सहमति जरूरी होगी। फिलहाल इतना साफ है कि BRICS देश Cross-Border Payments को आसान बनाने, Local Currency Trade बढ़ाने और MSME को बेहतर Financial Access देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। अगर इन योजनाओं को जमीन पर सही तरीके से लागू किया जाता है, तो आने वाले वर्षों में छोटे भारतीय कारोबारियों के लिए BRICS देशों का बाजार पहले से कहीं ज्यादा सुलभ हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gondia

Maharashtra के Gondia में बड़ा Road Accident, गैस कटर से निकाले गए शव

महाराष्ट्र के गोंदिया (Gondia) जिले से मंगलवार को एक बेहद दर्दनाक Road Accident की खबर सामने आई है। गोंदिया-बालाघाट नेशनल हाईवे पर नागरा के पास तेज रफ्तार ट्रक और बोलेरो की जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बोलेरो बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। हादसे में 6 लोगों की मौत हो गई, जबकि 7 लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। आमने-सामने हुई ट्रक और बोलेरो की टक्कर प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक ट्रक गोंदिया से बालाघाट की तरफ जा रहा था। इसी दौरान अमोरा के पास सामने से आ रही बोलेरो से उसकी जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और आसपास मौजूद लोग मदद के लिए घटनास्थल पर पहुंच गए। हादसे की तस्वीरें देखकर टक्कर की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। बोलेरो का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। वाहन में फंसे लोगों को निकालने के लिए राहत-बचाव दल को काफी मशक्कत करनी पड़ी। गैस कटर की मदद से निकाले गए शव और घायल हादसे के बाद क्षतिग्रस्त बोलेरो में लोग फंस गए थे। उन्हें बाहर निकालने के लिए गैस कटर की मदद ली गई। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से घायलों को वाहन से बाहर निकाला गया और अस्पताल पहुंचाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक हादसे में छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि सात घायलों का इलाज अस्पताल में चल रहा है। मृतकों में बालाघाट के लोग शामिल प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसे में जान गंवाने वाले सभी छह लोग मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के रहने वाले बताए जा रहे हैं। इस खबर के सामने आने के बाद मृतकों के परिवारों में मातम पसरा है। हालांकि मृतकों की विस्तृत पहचान और अन्य जानकारी पुलिस की ओर से जांच के बाद स्पष्ट की जाएगी। Police ने शुरू की जांच घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू कराया। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर दोनों वाहनों की भिड़ंत किन परिस्थितियों में हुई। फिलहाल शुरुआती जानकारी में तेज रफ्तार को हादसे की एक वजह माना जा रहा है, लेकिन दुर्घटना का वास्तविक कारण पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। हादसे ने फिर उठाए Road Safety पर सवाल गोंदिया-बालाघाट मार्ग पर हुआ यह हादसा एक बार फिर हाईवे पर Road Safety को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने का खामियाजा कई बार सड़क पर मौजूद लोगों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ता है। इस हादसे में भी कई परिवारों ने अपनों को खो दिया, जबकि घायल लोग अस्पताल में जिंदगी के लिए जूझ रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kota

Kota में 40 फीट ऊंचे पेड़ पर Leopard का Drama, 5 फायर के बाद हुआ सफल Rescue

राजस्थान के कोटा (Kota) में उस वक्त लोगों की नजरें एक पेड़ पर टिक गईं, जब करीब 40 फीट ऊंचे पेड़ पर Leopard (तेंदुआ) जा फंसा। तेंदुए को देखने के लिए मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची और उसे सुरक्षित नीचे उतारने के लिए Rescue Operation शुरू किया। 40 फीट की ऊंचाई पर था तेंदुआ तेंदुआ काफी ऊंचाई पर पेड़ की शाखाओं के बीच बैठा था। ऐसे में उसे सामान्य तरीके से नीचे उतारना मुश्किल था। किसी अनहोनी से बचने के लिए वन विभाग की टीम ने पूरे इलाके को निगरानी में लिया और तेंदुए को सुरक्षित तरीके से काबू करने की तैयारी शुरू की। ट्रैंकुलाइज करने के लिए किए गए 5 प्रयास तेंदुए को शांत करने और सुरक्षित रेस्क्यू के लिए टीम ने Tranquilizer Gun का इस्तेमाल किया। नीचे से कुल 5 फायर किए गए। शुरुआती प्रयासों के बाद आखिरकार एक फायर तेंदुए को लग गया और उसका असर शुरू हुआ। इसके बाद रेस्क्यू टीम ने बेहद सावधानी के साथ आगे की कार्रवाई की। तेंदुए को नियंत्रित करने के बाद उसे पेड़ से सुरक्षित नीचे उतारा गया। करीब 4 घंटे चला Rescue Operation तेंदुए को रेस्क्यू करने की पूरी प्रक्रिया में लगभग चार घंटे लगे। इस दौरान वन विभाग की टीम लगातार मौके पर मौजूद रही। ऑपरेशन के दौरान लोगों को भी सुरक्षित दूरी पर रखा गया, ताकि तेंदुआ घबराकर कोई अप्रत्याशित हरकत न करे। काफी इंतजार और मशक्कत के बाद आखिरकार रेस्क्यू टीम को सफलता मिली। तेंदुए को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। इसके साथ ही इलाके के लोगों ने भी राहत की सांस ली। लोगों में बना रहा कौतूहल 40 फीट ऊंचे पेड़ पर तेंदुए को देखने के लिए आसपास के लोग काफी देर तक मौके पर मौजूद रहे। वन विभाग की टीम के लिए सबसे बड़ी चुनौती तेंदुए को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित रेस्क्यू करना था। करीब चार घंटे की मेहनत के बाद टीम ने यह ऑपरेशन पूरा किया। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
PM Modi

PM Modi in Vadodara: Gen-Z के बीच पहुंचे पीएम मोदी, 6 हजार Young Professionals की मौजूदगी

PM Modi मंगलवार को गुजरात के वडोदरा पहुंचे, जहां उनका कार्यक्रम इस बार सामान्य राजनीतिक सभा से कुछ अलग नजर आया। यहां प्रधानमंत्री ने बड़ी संख्या में युवाओं और Young Professionals के साथ सीधा संवाद किया। कार्यक्रम में करीब 6 हजार युवा प्रोफेशनल्स और अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लोग शामिल हुए। ‘NaMo for Viksit Bharat’ कार्यक्रम का केंद्र युवा रहे। Gen-Z से सीधे जुड़ने की कोशिश के साथ प्रधानमंत्री ने देश के विकास, नए अवसरों और युवाओं की भागीदारी जैसे मुद्दों पर बातचीत की। Youth के बीच PM Modi का अलग अंदाज वडोदरा के कार्यक्रम में युवाओं की मौजूदगी सबसे ज्यादा चर्चा में रही। यहां छात्र, स्टार्टअप से जुड़े युवा, प्रोफेशनल्स, उद्यमी, डॉक्टर, शिक्षक और दूसरे क्षेत्रों के लोग शामिल हुए। कार्यक्रम का माहौल किसी पारंपरिक रैली जैसा नहीं रखा गया। मंच और बैठने की व्यवस्था से लेकर प्रवेश तक में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया। युवाओं को ध्यान में रखते हुए पूरा आयोजन ज्यादा इंटरैक्टिव रखने की कोशिश की गई। Digital Registration से लेकर QR Entry तक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था की गई थी। प्रवेश को व्यवस्थित बनाने के लिए QR Code आधारित सिस्टम का इस्तेमाल किया गया। रजिस्ट्रेशन को लेकर युवाओं में काफी उत्साह देखने को मिला। रिपोर्टों के मुताबिक, सीटें तेजी से भर गईं और बड़ी संख्या में लोगों को वेटिंग लिस्ट में जगह मिली। Viksit Bharat@2047 में Youth की भूमिका पर जोर प्रधानमंत्री मोदी के इस कार्यक्रम का एक बड़ा संदेश Viksit Bharat@2047 के लक्ष्य से जुड़ा है। देश को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में युवाओं की भूमिका को अहम माना जा रहा है। Gen-Z के साथ संवाद के दौरान टेक्नोलॉजी, Innovation, Startups, रोजगार और आत्मनिर्भरता जैसे विषयों को प्रमुखता मिलने की उम्मीद है। सरकार की योजनाओं और भविष्य की चुनौतियों के बीच युवा किस तरह अपनी भूमिका निभा सकते हैं, यह भी कार्यक्रम के केंद्र में रहा। ₹35 हजार करोड़ से ज्यादा के Projects भी अहम प्रधानमंत्री मोदी का गुजरात दौरा केवल युवा संवाद तक सीमित नहीं है। वडोदरा में कार्यक्रम के साथ गुजरात में ₹35 हजार करोड़ से ज्यादा की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, लोकार्पण और शिलान्यास भी प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं में रेलवे, हाईवे और Western Dedicated Freight Corridor से जुड़े काम शामिल हैं। इनसे गुजरात में कनेक्टिविटी और माल ढुलाई के नेटवर्क को मजबूती मिलने की उम्मीद है। High-Tech अंदाज में तैयार हुआ कार्यक्रम कार्यक्रम को हाई-टेक बनाने पर भी खास ध्यान दिया गया। 4K कैमरों, लाइव प्रोडक्शन और आधुनिक विजुअल सिस्टम का इस्तेमाल किया गया। मंच की डिजाइन और कार्यक्रम की प्रस्तुति में भी युवाओं को ध्यान में रखा गया। यही वजह है कि वडोदरा का यह आयोजन सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम न होकर Youth Connect और Development Vision को साथ रखने वाली पहल के तौर पर देखा जा रहा है। वडोदरा के बाद नवसारी और मुंबई का दौरा प्रधानमंत्री के गुजरात दौरे में वडोदरा के अलावा नवसारी का कार्यक्रम भी शामिल है। इसके बाद वह मुंबई जाएंगे, जहां Global Fintech Fest 2026 में हिस्सा लेने का कार्यक्रम है। यानी प्रधानमंत्री का यह दौरा एक तरफ बड़े Infrastructure Projects से जुड़ा है, तो दूसरी तरफ युवाओं और नई अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों पर भी फोकस करता है। क्यों खास है Vadodara का ये कार्यक्रम? वडोदरा में Gen-Z और Young Professionals के साथ प्रधानमंत्री मोदी का सीधा संवाद इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि देश की युवा आबादी को विकास की अगली कहानी से जोड़ने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। अब सबसे ज्यादा नजर इस बात पर है कि प्रधानमंत्री युवाओं से बातचीत में किन मुद्दों को उठाते हैं और Viksit Bharat के लक्ष्य में Gen-Z के लिए किस तरह की भूमिका और अवसरों का खाका सामने रखते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Delhi

Delhi PG Collapse के बाद सख्ती, 28 लाख Buildings के Survey पर उठे सवाल; MCD ने मांगी नई Report

दिल्ली (Delhi) के सत्य निकेतन में PG इमारत गिरने से हुए हादसे ने एक बार फिर राजधानी में रहने वाले लोगों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। हादसे में 7 लोगों की मौत के बाद अब दिल्ली नगर निगम (MCD) ने शहर की इमारतों की Safety को लेकर सख्त कदम उठाने का फैसला किया है। राजधानी में इमारतों की जांच कराई जाएगी और अधिकारियों से महज तीन दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है। इस फैसले के बाद दिल्ली के उन इलाकों पर खास नजर रहेगी, जहां बड़ी संख्या में PG, हॉस्टल और किराये के मकानों में लोग रहते हैं। प्रशासन का मकसद ऐसी इमारतों की पहचान करना है, जिनमें निर्माण या संरचना से जुड़ी कोई गंभीर समस्या हो सकती है। MCD ने अधिकारियों को दिए जांच के निर्देश सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने अपने सभी जोन के अधिकारियों को भवनों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र की इमारतों की स्थिति की जानकारी जुटाकर तीन दिन के अंदर रिपोर्ट सौंपनी होगी। जांच के दौरान पुराने भवनों, अतिरिक्त निर्माण और ऐसी इमारतों पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है, जहां बड़ी संख्या में लोग रह रहे हैं। अगर किसी भवन में गंभीर खामी मिलती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। 28 लाख Buildings के Survey पर उठे सवाल दिल्ली में पहले किए गए Building Survey के आंकड़े भी इस मामले को और गंभीर बनाते हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 28 लाख इमारतों का सर्वे किया गया था, लेकिन इनमें केवल 19 Buildings को खतरनाक घोषित किया गया था। अब सत्य निकेतन हादसे के बाद इस सर्वे की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। आखिर इतनी बड़ी संख्या में इमारतों की जांच के बावजूद जोखिम वाली इमारतों की पहचान कितनी प्रभावी तरीके से हुई? यही सवाल अब लोगों के बीच चर्चा का विषय है। हालांकि, सामान्य भवन सर्वे और विस्तृत Structural Audit अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। किसी इमारत की मजबूती का सही आकलन करने के लिए कई मामलों में तकनीकी और विस्तृत जांच की जरूरत होती है। PG और Hostel Buildings भी रहेंगी Focus में दिल्ली में हजारों छात्र और नौकरीपेशा लोग PG और हॉस्टल में रहते हैं। ऐसे में इन इमारतों की Safety सबसे अहम मुद्दों में शामिल हो गई है। नई जांच में यह भी देखा जा सकता है कि भवन का निर्माण नियमों के मुताबिक हुआ है या नहीं, उसमें बाद में कोई अनधिकृत बदलाव तो नहीं किया गया और रहने वाले लोगों के लिए जरूरी सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है या नहीं। Delhi High Court में भी मामला पहुंचा सत्य निकेतन हादसे को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में भी सुनवाई हुई है। कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों और एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। PG में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और भवनों की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी जवाब मांगा गया है। हादसे के बाद यह बहस तेज हो गई है कि प्रशासन को किसी इमारत के कमजोर होने का इंतजार करने के बजाय पहले ही उसकी खामियों को पहचानकर जरूरी कदम उठाने चाहिए। नई Report से सामने आएगी असली तस्वीर MCD की ओर से कराई जा रही नई जांच की रिपोर्ट अब बेहद अहम मानी जा रही है। तीन दिन में मिलने वाली रिपोर्ट से यह पता चल सकता है कि राजधानी में कितनी इमारतों को लेकर अतिरिक्त जांच या कार्रवाई की जरूरत है। सत्य निकेतन हादसे ने दिल्ली को एक जरूरी सवाल के सामने खड़ा कर दिया है—क्या शहर की लाखों इमारतों की Safety जांच सिर्फ कागजों तक सीमित है, या जमीन पर भी उसकी सही निगरानी हो रही है? अब लोगों की नजर MCD की नई रिपोर्ट पर है। उम्मीद यही है कि इस बार जांच केवल आंकड़ों तक सीमित न रहे, बल्कि जिन इमारतों में वास्तविक खतरा है, वहां समय रहते जरूरी कदम उठाए जाएं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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