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इवनिंग वॉक पर निकले बुजुर्ग के हाथ से मोबाइल छीना:पुलिस ने दो दिन बाद दर्ज की FIR, आरोपी फरार

भोपाल में बुज़ुर्ग से मोबाइल झपट कर भागे बाइक सवार बदमाश, सीसीटीवी में तलाश रही पुलिस भोपाल के पिपलानी इलाके से एक और चौंकाने वाला झपटमारी का मामला सामने आया है। इवनिंग वॉक पर निकले 71 वर्षीय बुज़ुर्ग सुदर्शन शर्मा का मोबाइल बाइक सवार तीन बदमाश झपटकर फरार हो गए। यह घटना 20 अप्रैल की शाम करीब 6:30 बजे छत्रसाल नगर के पास की है, लेकिन एफआईआर मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात दर्ज की गई। बुज़ुर्ग का दर्द — “चलते-चलते झपट लिया और भाग निकले” सुदर्शन शर्मा, जो भवानी धाम कॉलोनी के निवासी हैं, हर दिन की तरह उस शाम भी टहलने निकले थे। तभी अचानक एक बाइक पर तीन युवक उनके करीब आए और उनके हाथ से मोबाइल छीनकर भाग निकले। बुज़ुर्ग कुछ समझ पाते, उससे पहले आरोपी गायब हो चुके थे। झपटमार अब भी फ़रार, पुलिस खंगाल रही सीसीटीवी फुटेज पिपलानी थाना पुलिस बुज़ुर्ग ने मोबाइल की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और आस-पास के सीसीटीवी कैमरों की मदद से बदमाशों की तलाश की जा रही है। पुलिस का कहना है कि क्षेत्र में सक्रिय पुराने अपराधियों से पूछताछ की जा रही है ताकि कोई सुराग हाथ लगे। थानेदार बोले: “हम लगातार निगरानी कर रहे हैं। जल्द ही आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ़्तार किया जाएगा।” DeshHarpal की अपील भोपालवासियों से अनुरोध है कि बाहर निकलते वक्त सतर्क रहें, खासकर बुज़ुर्गों के साथ। झपटमार बेखौफ घूम रहे हैं और अब आम जनता की सुरक्षा सवालों के घेरे में है।
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पहलगाम के आतंकी हमले के खिलाफ भोपाल में प्रदर्शन:पाकिस्तान का पूतला फूंका, सीएम बोले- आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब मिलेगा

जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमला: 27 मासूम सैलानियों की जान गई, पूरे देश में गुस्सा—भोपाल में हुआ आतंकवाद का पुतला दहन जम्मू-कश्मीर के खूबसूरत पहलगाम में मंगलवार को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहाँ आतंकियों ने 27 निर्दोष पर्यटकों की जान ले ली। इस हमले के बाद पूरे देश में आक्रोश की लहर है। हर गली, हर नुक्कड़ से एक ही आवाज़ आ रही है—”आतंकवाद मुर्दाबाद!” भोपाल के चार बत्ती चौराहे पर कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के नेतृत्व में आतंकवाद के खिलाफ ज़बरदस्त विरोध प्रदर्शन हुआ। आतंकवाद का पुतला फूंका गया, और नारे लगे— “मोदी जी, अब 56 इंच का सीना दिखाना होगा!”“आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब चाहिए!” प्रदर्शन में बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाओं और बच्चियों ने भी हिस्सा लिया, यह दिखाते हुए कि आतंकवाद का कोई मज़हब नहीं होता, और देश का हर नागरिक इसके खिलाफ एकजुट है। सीएम का सख्त संदेश: आतंकियों को मिलेगा करारा जवाब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा: “पहलागाम में हुआ आतंकी हमला एक कायराना और अमानवीय कृत्य है। मैं शहीद हुए सभी लोगों को श्रद्धांजलि देता हूँ और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूँ। आतंकियों को मुँह तोड़ जवाब मिलेगा।” वहीं, कांग्रेस नेता और मप्र के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा: “अब वक़्त है कि सरकार अपने खोखले दावों को छोड़कर जवाबदेही ले। ताकि आगे ऐसी घटनाएं न हों और बेगुनाहों की जान न जाए।” आरिफ मसूद बोले—‘370 के बाद भी क्यों नहीं थमा आतंक?’ विधायक आरिफ मसूद ने बड़ा बयान देते हुए कहा: “देश आज बहुत दुखद मोड़ पर खड़ा है। आतंकवाद का कोई मज़हब नहीं होता। पूरा देश इस समय शहीदों के साथ है। पुलवामा हमले का सच आज तक सामने नहीं आया, और 370 हटने के बावजूद आतंक क्यों जारी है—इसका जवाब चाहिए।” जब मसूद से पूछा गया कि क्या यह पाकिस्तान प्रायोजित हमला है?उन्होंने कहा: “जो भी इस हमले के पीछे है, अब सरकार को पूरे देश की ताक़त के साथ इसका जड़ से सफाया करना चाहिए। हम सब सरकार के साथ हैं।” अमरनाथ यात्रा को लेकर उन्होंने कहा: “अमरनाथ यात्रा शांतिपूर्ण रहेगी। कश्मीर के हमारे मुस्लिम भाई हर साल इसे सम्मान के साथ सम्पन्न कराते हैं। देश को चिंता करने की जरूरत नहीं, देश एक है।” देश एक सुर में बोला: “अब और नहीं!” अब वक़्त है कि सिर्फ निंदा नहीं, एक्शन चाहिए। जो भी इन मासूमों की जान के पीछे है, उसे हर हाल में सज़ा मिलनी चाहिए। देश की आवाज़ साफ़ है — “आतंक के खिलाफ अब आर-पार की लड़ाई चाहिए!”
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Pahalgam terror attack

मंडीदीप में गेल प्लांट से गैस लीक:10 घंटे की मशक्कत के बाद रोका जा सका रिसाव; जयपुर से सेफ्टी टीम जांच करने पहुंची

भोपाल के पास मंडीदीप में गेल प्लांट से गैस लीक, रातभर अफरा-तफरी, सुबह जाकर काबू पाया गया भोपाल से सटे मंडीदीप में मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात तकरीबन 12 बजे गेल के गैस प्रोसेसिंग प्लांट में गैस लीक हो गई। जैसे ही इसकी जानकारी मिली, फायर सेफ्टी टीम तुरंत मौके पर पहुंची और घंटों की मशक्कत के बाद बुधवार सुबह करीब 10 बजे जाकर रिसाव को कंट्रोल किया जा सका। इस दौरान प्लांट के अंदर हड़कंप मच गया। सेफ्टी के लिए अलर्ट मोड पर प्रशासन सावधानी बरतते हुए एनडीआरएफ और एसडीईआरएफ की टीमें भी मौके पर पहुंची। प्लांट के एक किलोमीटर के दायरे में बैरिकेड्स लगाकर आम लोगों की आवाजाही बंद कर दी गई। नगर पालिका मंडीदीप के फायर फाइटर्स को भी बुलाया गया और एरिया को खाली कराया गया। सतलापुर और मंडीदीप की पुलिस, होमगार्ड्स की टीम ने मौके की कमान संभाली। जयपुर से पहुंची स्पेशल सेफ्टी टीम गंभीरता को देखते हुए गेल की सेफ्टी टीम जयपुर से रवाना होकर तुरंत प्लांट का सेफ्टी ऑडिट करने पहुंच गई है। गेल प्रोजेक्ट मैनेजर का बयान – “स्थिति नियंत्रण में है” गेल के प्रोजेक्ट मैनेजर डी. डोंगरे ने कहा, “गैस लीक को कंट्रोल कर लिया गया है। किसी भी तरह की जनहानि या खतरे की फिलहाल कोई आशंका नहीं है। स्कूल बंद करने या इलाके को खाली कराने जैसी कोई जरूरत नहीं है।” कलेक्टर से लेकर एसपी तक ने लिया जायजा कलेक्टर अरुण विश्वकर्मा, एसडीएम चंद्रशेखर श्रीवास्तव, एसडीपीओ शीला सुराणा और नायब तहसीलदार नीलेश सरवटे ने खुद मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। कलेक्टर ने बताया कि गैस लीक की जानकारी उन्हें सुबह 5 बजे मिली थी। अब रिसाव पूरी तरह से बंद है और पूरे एरिया को सैनिटाइज किया जा चुका है। भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए सेफ्टी एसओपी तैयार किया जाएगा। एसपी बोले – सेफ्टी जांच के बाद कारणों का पता चलेगा एसपी पंकज पांडे ने बताया कि फिलहाल प्लांट की सेफ्टी जांच की जा रही है। इसके बाद गैस लीक के पीछे के कारणों की विस्तृत जांच की जाएगी। क्या करता है ये गेल प्लांट? गेल का ये प्लांट मंडीदीप के सिविल अस्पताल के पास स्थित है। यहां एलएनजी को पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) में बदलकर घरेलू, कॉमर्शियल और इंडस्ट्रियल इस्तेमाल के लिए सप्लाई किया जाता है। इस प्लांट की घरेलू गैस स्टोरेज क्षमता 750 एससीएम, कॉमर्शियल 1600 एससीएम और इंडस्ट्रियल 7500 एससीएम है। पहले भी हो चुकी है ऐसी घटना गौरतलब है कि करीब दो साल पहले भी इसी प्लांट में गैस रिसाव की घटना हुई थी, जब मरकैप्टन लिक्विड के कुछ बूंदें पाइप से नीचे गिर गई थीं। उस दौरान भी इलाके में तेज गंध फैलने से लोगों को आंखों में जलन, उल्टी और चक्कर की शिकायत हुई थी। 👉 देशहरपाल के साथ बने रहें, हम लाएंगे आपको हर अपडेट!
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CM Mohan Yadav

Madhya Pradesh Cabinet Decisions CM Mohan Yadav की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए

CM Mohan Yadav की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार 22 अप्रैल 2025 को मंत्रालय में हुई। Madhya Pradesh Cabinet द्वारा मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये संशोधनों को मंजूरी दी गई। योजना अंतर्गत कन्या तथा कन्या के अभिभावक गरीबी रेखा के नीचे जीवन निर्वाह करते हों, साथ ही इनका बी.पी.एल. पोर्टल पर सत्यापन अनिवार्य होगा। कन्या विवाह तथा निकाह सम्मेलन के लिये संभागवार वार्षिक चक्रीय रूप से कैलेण्डर जारी कर सामुहिक विवाह/निकाह कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा। संभागवार जिलों मे आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में सम्मिलित विवाह जोड़ों की न्यूनतम संख्या 11 एवं अधिकतम 200 जोड़ों की निर्धारित की गयी है। योजना में सामूहिक विवाह/निकाह सम्मेलनों में प्राप्त आवेदनों की स्क्रूटनी पूर्व अनुसार निकाय स्तर पर की जायेगीं। पात्र/अपात्र एवं समग्र पोर्टल पर वर-वधू की आधार ई-केवायसी अनिवार्य होगा। सामूहिक विवाह कार्यक्रमों के लिये शासन की ओर से मिलने वाले आर्थिक लाभ को सार्थक बनाने का प्रयास करते हुये आयोजन में जन-प्रतिनिधियों एवं अन्य सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित कर समाज के संपन्न और सक्षम व्यक्तियों का सहयोग प्राप्त किया जायेगा। मुख्यमंत्री कन्या विवाह एवं निकाह योजना में प्रति कन्या राशि 55 हजार रूपये में से वधू को राशि रूपये 49 हजार का एकाउन्ट पेयी चेक और शेष 6 हजार रुपये सामूहिक विवाह समारोह आयोजन के लिए संबंधित निकाय को प्रदाय किया जायेगा। सहायता राशि रुपये 49 हजार डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डी.बी.टी.) के माध्यम से वधू के खाते में एवं शेष 6 हजार रूपये आयोजन की व्यवस्थाओं पर व्यय के लिए प्रदाय की जायेगी। टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्रों के विकास के लिए 145 करोड़ रूपये की सैद्धांतिक स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2027-28 के लिए नवीन योजना “टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्रों के विकास” के लिए 145 करोड़ रूपये की सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गयी। इस योजना में बफर क्षेत्रों में संवेदनशील क्षेत्रों में विभिन्न कार्य किए जाएंगे। इस नवीन योजना में बफर क्षेत्रो में संवेदनशील क्षेत्रों में चेनलिंक फेसिंग का निर्माण किया जाएगा। वन्य प्राणियों की सुरक्षा एवं अग्नि सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। चारागाहों एवं जल स्त्रोतों का विकास किया जाएगा। वन्य प्राणियों का उपचार और स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। नागरिकों के कौशल उन्नयन के लिए प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
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Civil Services Day 2025

Civil Services Day 2025: MP CM मोहन यादव ने दिए Chief Minister’s Excellence Awards, जानिए किसे मिला सम्मान

भोपाल, 22 अप्रैल 2025 मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सोमवार को ‘Civil Services Day 2025’ के मौके पर एक खास समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार’ (Chief Minister’s Excellence Awards) प्रदान किए। यह सम्मान राज्य के उन अधिकारियों और कर्मचारियों को दिया जाता है, जिन्होंने प्रशासनिक सेवाओं में असाधारण कार्य कर समाज में बदलाव लाने में योगदान दिया है। Civil Services Day 2025 कार्यक्रम की शुरुआत: प्रेरणास्पद उदाहरण और इतिहास से जुड़ाव कार्यक्रम का उद्घाटन भोपाल स्थित प्रशासन अकादमी (Academy of Administration) में हुआ, जहां मुख्य सचिव अनुराग जैन ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने संबोधन में प्रेरणा के दो ऐतिहासिक उदाहरण साझा किए। उन्होंने कहा, “पहला उदाहरण चाणक्य का है, जिन्होंने 2200 साल पहले चंद्रगुप्त मौर्य को खोजा, उन्हें प्रशिक्षित किया और एक महान प्रशासक बनाया। दूसरा उदाहरण सरदार वल्लभभाई पटेल का है, जिनके आदर्श आज भी सिविल सेवकों के लिए प्रेरणा हैं।” मुख्य सचिव अनुराग जैन ने भी सरदार पटेल के 1947 के ऐतिहासिक भाषण का उल्लेख किया और कहा कि “एक सिविल सर्वेंट को तीन मूल्यों को हमेशा अपनाना चाहिए – गरिमा, ईमानदारी और समर्पण।” उन्होंने आगे कहा, “नेता विजन देते हैं, लेकिन उसे ज़मीन पर उतारने का काम सिविल सेवक करते हैं।” मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार: इन अधिकारियों को मिला सम्मान मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार विभिन्न श्रेणियों में असाधारण प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रदान किया जाता है। एक चयन समिति द्वारा पिछले दो वर्षों के कार्यों के आधार पर अधिकारियों का चयन किया गया। इस वर्ष 18 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। पुरस्कृत अधिकारियों की सूची:
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Madhya Pradesh Weather Update

Madhya Pradesh Weather Update: 24 अप्रैल तक चलेगी हीटवेव! IMD ने जारी किया अलर्ट – जानें कहां-कहां लू के आसार

Deshharpal | भोपाल, 21 अप्रैल 2025 Madhya Pradesh Weather Update : गर्मी ने अपना कहर दिखाना शुरू कर दिया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने प्रदेश के कई जिलों में 21 से 24 अप्रैल तक हीटवेव (लू) को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है। तापमान 43 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की आशंका है, खासतौर पर उत्तर और पश्चिमी जिलों में। Madhya Pradesh Weather Update 22 से 24 अप्रैल तक लू का तांडव – जानें किन जिलों में रहेगा असर पश्चिमी विक्षोभ के गुजरने और बंगाल की खाड़ी में बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम के चलते मध्य प्रदेश के कई इलाकों में भीषण गर्मी देखने को मिलेगी। आइए जानें दिन-वार मौसम का हाल: 📅 21 अप्रैल: 📅 22 अप्रैल: 📅 23 अप्रैल: 📅 24 अप्रैल: अप्रैल के अंत तक बढ़ेगी गर्मी, मई में भी राहत नहीं IMD के अनुसार, अप्रैल के अंतिम सप्ताह में उत्तर-पश्चिमी हवाओं के कारण गर्म हवाएं चलेंगी और दिन के साथ-साथ रातें भी गर्म रहेंगी। सावधान रहें! लू से बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय IMD का अलर्ट साफ है – हीटवेव से बचाव जरूरी है। Deshharpal आपको आगाह करता है: सतर्क रहें और खुद का ख्याल रखें।
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Truck Accident & Oil Looting" – भोपाल में सरसों तेल से भरे ट्रक के पलटते ही शुरू हुई लूट, घायल क्लीनर की मौत पर किसी ने ध्यान नहीं दिया

“Truck Accident & Oil Looting” –भोपाल में सरसों तेल से भरे ट्रक के पलटते ही शुरू हुई लूट, घायल क्लीनर की मौत पर किसी ने ध्यान नहीं दिया

– Truck Accident ,Oil Looting ,Bhopal News ,Humanity Lost , Desh Harpal(Desh Harpal News | 20 अप्रैल 2025 | भोपाल) मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक shocking and heartbreaking incident सामने आई है, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। शहर के बिलखिरिया थाना क्षेत्र में शनिवार देर रात एक सरसों के तेल से भरा ट्रक पलट गया। हादसे में ट्रक का क्लीनर गंभीर रूप से घायल हो गया, लेकिन हैरानी की बात ये रही कि मौके पर मौजूद लोगों ने मदद करने की बजाय mustard oil की पेटियां लूटनी शुरू कर दीं। जानकारी के मुताबिक, यह ट्रक राजस्थान से नागपुर की ओर जा रहा था। ड्राइवर को झपकी लगने के चलते ट्रक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पलट गया। ट्रक में mustard oil cartons भरी हुई थीं, जो पलटने के बाद सड़क पर बिखर गईं। हादसे में ड्राइवर और क्लीनर दोनों बुरी तरह घायल हो गए। ड्राइवर ने जैसे-तैसे मदद की गुहार लगाई, लेकिन वहां मौजूद भीड़ ने घायलों की तरफ ध्यान देने की बजाय सारा फोकस तेल की बोतलें और पेटियां उठाने में लगा दिया। कुछ लोगों ने तो अपने स्कूटर, बाइक और ऑटो तक में oil cartons भर लिए और मौके से निकल गए। यह सब उस वक्त हो रहा था जब क्लीनर सड़क पर तड़प रहा था। कई लोगों ने मोबाइल से वीडियो बनाना जरूरी समझा, लेकिन किसी ने एंबुलेंस बुलाना जरूरी नहीं समझा। समय पर इलाज न मिलने की वजह से क्लीनर की मौके पर ही मौत हो गई। इस अमानवीय घटना ने एक बार फिर समाज की संवेदनहीनता को उजागर कर दिया है। सवाल यह उठता है कि क्या किसी की जान से ज्यादा जरूरी पेटियों में भरा सरसों का तेल हो गया है? प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और CCTV फुटेज के आधार पर लूटपाट करने वालों की पहचान की जा रही है। Desh Harpal की राय:ये सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि समाज के नैतिक पतन की तस्वीर है। जरूरत है हम सभी को अपने भीतर झांकने की, सोचने की कि अगर यही हादसा हमारे किसी अपने के साथ होता तो क्या तब भी हम पेटियां उठाने में लगे रहते? 👉 अगर आपके पास इस घटना से जुड़ी कोई जानकारी या वीडियो है, तो कृपया Desh Harpal को भेजें। आपकी पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
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भोपाल

भोपाल के वीवीआईपी इलाके में सरकारी आवास के आंगन में बनी मजार, ‘लैंड जिहाद’ का आरोप

भोपाल, 18 अप्रैल 2025 — मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के सबसे हाई-सिक्योरिटी और वीवीआईपी इलाके में बने एक सरकारी आवास के आंगन में मजार का निर्माण अब विवाद का कारण बन गया है। हिंदू संगठनों ने इसे ‘लैंड जिहाद’ करार दिया है और प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। कहां और कैसे हुआ मामला? भोपाल के 1250 क्वार्टर क्षेत्र, जहां राज्य के मंत्रियों, वरिष्ठ IAS अधिकारियों, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और अन्य वीवीआईपी का निवास है, वहीं एक सरकारी क्वार्टर के प्रांगण में मजार बनाई गई। इस इलाके की सुरक्षा और प्रशासनिक संवेदनशीलता को देखते हुए यह मामला तुरंत सियासी और धार्मिक बहस में बदल गया। किसने उठाया मुद्दा? प्रशासन की क्या है प्रतिक्रिया? भोपाल जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। प्रशासन का बयान: “अगर यह मजार बिना अनुमति के बनाई गई है, तो इसे हटाने और संबंधित लोगों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।” इस बीच यह भी सवाल उठ रहे हैं कि इतने सेंसिटिव इलाके में यह निर्माण कैसे हुआ, और क्या किसी अफसर की मिलीभगत इसमें शामिल थी। क्या है ‘लैंड जिहाद’ का मतलब? ‘लैंड जिहाद’ एक राजनीतिक और धार्मिक रूप से संवेदनशील शब्द है, जिसका इस्तेमाल तब किया जाता है जब किसी धर्म विशेष पर भूमि कब्जा करने या धार्मिक स्थल बनाकर अतिक्रमण करने का आरोप लगाया जाता है।
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भोपाल स्थित केरवा गिद्ध प्रजनन केन्द्र से 6 गिद्धों को कल पहली बार प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा गया

Vulture Conservation Mission: केरवा गिद्ध प्रजनन केन्द्र से 6 गिद्ध हुए Natural Habitat में Release, GPS Tracking से होगी 24×7 Monitoring भोपाल के नजदीक स्थित Kerwa Vulture Breeding Centre से पहली बार 6 दुर्लभ गिद्धों को natural habitat में release किया गया है। यह कदम मध्य प्रदेश में vulture conservation mission की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक प्रयास माना जा रहा है। इन सभी गिद्धों को अत्याधुनिक GPS trackers से लैस किया गया है, जिससे उनके मूवमेंट, व्यवहार और सुरक्षा की real-time monitoring की जा सकेगी। गिद्ध केवल एक पक्षी नहीं, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अत्यंत आवश्यक natural scavengers हैं। ये मृत जीवों को खाकर वातावरण को साफ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे zoonotic diseases के फैलने का खतरा भी कम होता है। उनके बिना पर्यावरणीय संतुलन गड़बड़ा सकता है, इसलिए उनका संरक्षण हमारी biodiversity security के लिए अनिवार्य है। गौरतलब है कि गत कुछ वर्षों में भारत में गिद्धों की संख्या में भारी गिरावट देखी गई, जिसका मुख्य कारण रहा एक पशु-औषधि Diclofenac, जो गिद्धों के लिए ज़हर साबित हुई। इसके बाद भारत सरकार और राज्य सरकारों ने इस दवा पर प्रतिबंध लगाते हुए vulture protection programmes पर विशेष ध्यान देना शुरू किया। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा केरवा स्थित इस गिद्ध प्रजनन केंद्र की स्थापना Indian Vulture Conservation Action Plan के अंतर्गत की गई थी। यहां वैज्ञानिक तरीके से गिद्धों को संरक्षित कर उनकी संख्या बढ़ाने का कार्य चल रहा है। अब जब 6 स्वस्थ गिद्धों को प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा गया है, तो यह संकेत है कि संरक्षण के प्रयास अब परिणाम देने लगे हैं। इस अभियान की विशेषता यह है कि इन गिद्धों की गतिविधियों को satellite-based tracking system के जरिए लगातार ट्रैक किया जाएगा। इससे न सिर्फ इनके जीवन के बारे में नए वैज्ञानिक तथ्य मिलेंगे, बल्कि अगर किसी भी प्रकार की खतरे की स्थिति उत्पन्न होती है, तो तुरंत सहायता पहुंचाई जा सकेगी। Desh Harpal इस पहल का स्वागत करता है और सरकार, वन विभाग, वाइल्डलाइफ विशेषज्ञों और सभी सहयोगियों को इस दिशा में निरंतर प्रयास करते रहने के लिए साधुवाद देता है। ऐसे कदम न केवल गिद्धों की वापसी का रास्ता खोलते हैं, बल्कि यह भी साबित करते हैं कि यदि इच्छाशक्ति और वैज्ञानिक दृष्टिकोण साथ हो, तो wildlife conservation सिर्फ एक सपना नहीं, बल्कि सच्चाई बन सकता है। भोपाल स्थित केरवा गिद्ध प्रजनन केन्द्र से 6 गिद्धों को कल पहली बार प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा गया
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नवविवाहिता ने की आत्महत्या

भोपाल में नवविवाहिता ने की आत्महत्या, पति के अफेयर और घरेलू हिंसा से परेशान थी 23 वर्षीय भारती

भोपाल (मध्य प्रदेश) – राजधानी के छोला इलाके में एक दर्दनाक घटना सामने आई है जहां एक 23 वर्षीय नवविवाहिता ने की आत्महत्या। बताया जा रहा है कि शादी के महज दो महीने बाद ही महिला मानसिक प्रताड़ना और पति के अवैध संबंधों से परेशान चल रही थी। दो महीने पहले हुई थी शादी, अब हो गई मातम में तब्दील मृतका की पहचान भारती कुचबंदिया के रूप में हुई है, जिनकी शादी 3 फरवरी 2025 को विशाल कुचबंदिया से हुई थी। परिवार का आरोप है कि शादी के बाद से ही विशाल का व्यवहार ठीक नहीं था। भारती के भाई राहुल ने बताया कि विशाल अक्सर कई दिनों तक घर नहीं लौटता था, और जब आता तो मारपीट करता था। इसके साथ ही उसका किसी और महिला के साथ रिश्ता भी था। इस कारण भारती मानसिक रूप से बहुत परेशान रहने लगी थी। अंतिम कॉल बना आखिरी लड़ाई का गवाह घटना से एक दिन पहले, यानि मंगलवार को, एक बार फिर ससुराल में झगड़ा हुआ। इसके बाद भारती को उसके मायके लाया गया। बुधवार रात को जब उसकी मां किसी काम से बाहर गई थी और घर पर कोई नहीं था, तब भारती ने दुपट्टे से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिवार की एक बच्ची, जो घर में थी, ने बताया कि उसने भारती को उसके पति से फोन पर तेज आवाज़ में बहस करते सुना। थोड़ी ही देर में जब वह कमरे में गई, तो भारती को फंदे पर लटका पाया और तुरंत पड़ोसियों व परिवार को सूचना दी। पुलिस जांच में जुटी, सुसाइड नोट नहीं मिला पुलिस का कहना है कि मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। फिलहाल मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि क्या ससुरालवालों की भूमिका इस घटना में थी। एक मासूम ज़िंदगी की दुखद विदाई भारती की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि शादी जैसे पवित्र बंधन में जब धोखा, अत्याचार और हिंसा शामिल हो जाए तो उसका अंत कितना भयावह हो सकता है। इस घटना ने इलाके में शोक की लहर फैला दी है।
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Bittu Tabahi

Bittu Tabahi ने बदली सोच, अकेले शुरू किया नदी सफाई अभियान; नगरपालिका भी हुई प्रभावित

नदी में गंदगी देखकर ज्यादातर लोग शिकायत करते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के एक युवक ने शिकायत करने के बजाय खुद कुछ करने की ठानी। स्थानीय स्तर पर ‘बिट्टू तबाही’ (Bittu Tabahi) के नाम से पहचाने जाने वाले इस युवक ने अकेले ही नदी की सफाई का जिम्मा उठा लिया। उनका यह जज्बा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बिट्टू ने नदी में जमा कचरे और गंदगी को देखकर सफाई अभियान शुरू किया। शुरुआत किसी बड़े इंतजाम या टीम के साथ नहीं हुई। उन्होंने अपने स्तर पर सफाई करना शुरू किया और लगातार इस काम में जुटे रहे। नदी को साफ रखने का लिया संकल्प बिट्टू का मानना है कि नदी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि आसपास के लोगों और पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने नदी में जमा कचरे को हटाने की पहल की। उनका यह प्रयास धीरे-धीरे स्थानीय लोगों का ध्यान खींचने लगा। लोगों ने देखा कि बिना किसी दबाव या दिखावे के बिट्टू लगातार नदी की सफाई में लगे हुए हैं। नगरपालिका ने भी की पहल की सराहना बिट्टू के लगातार सफाई अभियान की जानकारी नगरपालिका तक पहुंची तो उनके प्रयास की सराहना की गई। एक युवक द्वारा अपने स्तर पर नदी को साफ रखने की कोशिश को अधिकारियों ने सकारात्मक कदम माना। इस पहल ने यह भी दिखाया कि अगर कोई व्यक्ति अपने आसपास के पर्यावरण को लेकर जिम्मेदारी महसूस करे, तो छोटी शुरुआत भी बड़ा संदेश दे सकती है। सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आया अभियान बिट्टू का नदी सफाई अभियान अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। उनके प्रयास को देखकर दूसरे लोगों में भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद है। आज नदियों में बढ़ता कचरा और प्रदूषण बड़ी चुनौती है। ऐसे में बिट्टू की पहल लोगों को यह संदेश देती है कि नदी को साफ रखना सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। ‘बिट्टू तबाही’ ने दी एक अलग मिसाल बिट्टू की कहानी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने बदलाव का इंतजार नहीं किया, बल्कि खुद बदलाव की शुरुआत करने का फैसला लिया। अकेले शुरू किया गया उनका यह सफाई अभियान अब दूसरों के लिए प्रेरणा बनता दिखाई दे रहा है। कई बार किसी बड़े बदलाव की शुरुआत बड़े अभियान से नहीं, बल्कि एक छोटे से कदम से होती है। बिट्टू का यह प्रयास उसी सोच की मिसाल है—अगर इरादा मजबूत हो, तो एक इंसान भी बदलाव की शुरुआत कर सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
UN

World Map में बड़ा बदलाव! UN ने Africa के असली Size को दिखाने का रास्ता साफ किया

दुनिया का नक्शा (World Map) देखते हुए शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इसमें दिखाई देने वाले देशों और महाद्वीपों का आकार असलियत से अलग भी हो सकता है। लेकिन अब इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र में एक अहम पहल हुई है। UN महासभा ने ऐसे World Map को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें धरती के अलग-अलग हिस्सों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाने की कोशिश की गई है। इस बदलाव के बाद नक्शे पर Africa पहले से काफी बड़ा दिखाई देगा, जबकि Europe और North America, खासकर US का आकार पुराने नक्शे की तुलना में छोटा नजर आ सकता है। प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला, लेकिन अमेरिका ने इसका विरोध किया। पुराने World Map में आखिर समस्या क्या है? दुनिया के स्कूलों और कई नक्शों में लंबे समय से Mercator Projection का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे 16वीं सदी में Gerardus Mercator ने तैयार किया था। उस समय इसका सबसे बड़ा फायदा समुद्री यात्राओं और Navigation में था। लेकिन Mercator Projection की एक खासियत ही इसकी सबसे बड़ी कमी भी बन गई। इसमें जैसे-जैसे कोई क्षेत्र Equator से दूर जाता है, उसका आकार नक्शे पर ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि Greenland जैसे इलाके नक्शे पर अपनी वास्तविकता से बहुत बड़े नजर आते हैं। दूसरी तरफ Africa, जो दुनिया के सबसे बड़े महाद्वीपों में से एक है, अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देता है। मसलन, सामान्य Mercator Map में Greenland और Africa का आकार देखकर किसी को लग सकता है कि दोनों लगभग बराबर हैं। असल में Africa का क्षेत्रफल Greenland से करीब 14 गुना ज्यादा है। Equal Earth Projection क्यों चर्चा में है? UN के प्रस्ताव में Equal Earth Projection जैसे नक्शों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इस Projection की खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग महाद्वीपों के क्षेत्रफल को ज्यादा सही अनुपात में दिखाया जाता है। यानी नक्शे को देखकर Africa का वास्तविक विशाल आकार ज्यादा साफ समझ में आता है। Europe और North America भी Mercator Map की तुलना में छोटे दिखाई देते हैं। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है—न तो Africa बड़ा हुआ है और न ही Europe या America छोटा। बदलाव सिर्फ उस तरीके में है, जिससे उन्हें नक्शे पर दिखाया जाता है। America ने UN के प्रस्ताव का विरोध क्यों किया? इस प्रस्ताव पर अमेरिका का रुख बाकी देशों से अलग रहा। मतदान के दौरान अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया। अमेरिकी पक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया कि संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक स्तर की बड़ी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। वहीं प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि नक्शा सिर्फ रास्ता या देश की लोकेशन बताने वाला साधन नहीं है। यह लोगों के मन में दुनिया की एक तस्वीर भी बनाता है। अफ्रीकी देशों की तरफ से लंबे समय से यह बात उठती रही है कि पुराने नक्शों में Africa का वास्तविक आकार सही तरीके से सामने नहीं आता। इसी सोच के साथ “Correct the Map” अभियान को आगे बढ़ाया गया। UN के फैसले से क्या सभी Maps बदल जाएंगे? यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब अचानक हर जगह नया नक्शा दिखाई देने लगेगा। UN महासभा का यह फैसला कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। यानी Google Maps, स्कूल की किताबों, सरकारी दस्तावेजों या दूसरे Digital Platforms को तुरंत अपना नक्शा बदलना जरूरी नहीं है। इसका मकसद देशों, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया और दूसरे संगठनों को ऐसे Map Projections अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो दुनिया के क्षेत्रफल को ज्यादा सही तरीके से दिखाते हों। इसके बावजूद Mercator Projection पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है। Navigation और समुद्री यात्राओं जैसी जरूरतों में इसका इस्तेमाल आज भी उपयोगी माना जाता है। India पर क्या असर पड़ेगा? भारत को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस नए World Map से देश का आकार या सीमा बदल जाएगी? इसका जवाब है—नहीं। भारत की जमीन, क्षेत्रफल और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इस प्रस्ताव का कोई असर नहीं पड़ेगा। सिर्फ नक्शे पर भारत और बाकी देशों को दिखाने का अनुपात बदल सकता है। अगर Equal Earth या इसी तरह की Projection का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ता है तो आने वाले समय में School Geography Books, Educational Charts, News Graphics और Digital Maps में दुनिया की तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे सकती है। भारत के लिए इसका असर मुख्य रूप से शिक्षा और Geography की समझ के स्तर पर होगा। बच्चों और आम लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि नक्शे पर दिखाई देने वाला आकार हमेशा किसी देश या महाद्वीप के वास्तविक क्षेत्रफल के बराबर नहीं होता। Africa के लिए इसे बड़ी उपलब्धि क्यों माना जा रहा है? इस पूरे विवाद में Africa सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में है। समर्थकों का कहना है कि सदियों से इस्तेमाल हो रहे नक्शों ने अनजाने में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की एक असंतुलित तस्वीर बना दी है। Africa दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है और इसके बावजूद Mercator Map में इसका आकार उसकी वास्तविक विशालता के मुकाबले कम नजर आता है। यही वजह है कि African countries और African Union की ओर से इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। उनके लिए यह केवल Map Projection का मामला नहीं, बल्कि दुनिया के सामने Africa की वास्तविक तस्वीर रखने का भी सवाल है। क्या दुनिया सच में बदल गई? नहीं। दुनिया का भूगोल बिल्कुल नहीं बदला है। न कोई नया देश बना है, न किसी देश की सीमा बदली है और न ही Africa का क्षेत्रफल अचानक बढ़ गया है। बदलाव सिर्फ इतना है कि दुनिया को कागज या स्क्रीन पर किस तरह दिखाया जाए, इस पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा सामने आई है। एक तरह से देखें तो यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि नक्शा हमेशा पूरी तरह निष्पक्ष तस्वीर नहीं होता। उसे बनाने का तरीका तय करता है कि हमें दुनिया का कौन-सा हिस्सा कितना बड़ा या छोटा दिखाई देगा। आने वाले वर्षों में अगर Equal Earth जैसी projections को ज्यादा अपनाया जाता है, तो संभव है कि नई पीढ़ी के लिए World Map की तस्वीर वही न हो,...
Swatantra Bhardwaj

Swatantra Bhardwaj Detained: CJP Protest के बाद स्वतंत्र भारद्वाज हिरासत में

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP Protest के दौरान एक छात्रा के पिता के साथ कथित मारपीट का मामला अब फिर चर्चा में है। मामले में आरोपी बताए जा रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज (Swatantra Bhardwaj) को दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थकों के प्रदर्शन और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग के कुछ घंटे बाद हुई। Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर CJP के प्रतिनिधि और समर्थक शुक्रवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से मामले में जल्द कार्रवाई करने और आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ राजनीतिक नेता भी वहां पहुंचे। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बातचीत हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया और इसके बाद भारद्वाज को ट्रेस करने के लिए टीमें सक्रिय की गईं। क्या है पूरा मामला? यह विवाद जंतर-मंतर पर CJP के एक प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी। इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार के नाम FIR में शामिल किए गए थे। मामला उस समय और गरमा गया, जब स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े एक Podcast Video की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वीडियो में भारद्वाज ने घटना को लेकर आपत्तिजनक दावे किए थे। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई। Viral Video ने बढ़ाया विवाद वायरल वीडियो सामने आने के बाद CJP ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। संगठन का कहना था कि वीडियो में कथित तौर पर घटना को लेकर किए गए दावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वहीं दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही थी और मेडिकल रिपोर्ट में चोट को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए कुछ दावों की पुष्टि नहीं हुई थी। Bulandshahr में पुलिस ने पकड़ा पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की टीमों ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में ट्रेस किया। रिपोर्टों में बताया गया कि पुलिस की कार्रवाई से पहले वह वहां से निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थक स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इससे मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर चल रहा विवाद भी फिलहाल एक नए चरण में पहुंच गया है। FIR में SC/ST Act की धाराएं जोड़ने की जानकारी प्रदर्शन के बाद पुलिस की ओर से मामले में SC/ST Act से संबंधित धाराएं जोड़ने की बात सामने आई। पीड़ित की दोबारा मेडिकल जांच कराए जाने की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई है। हालांकि, मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच और आगे की पुलिस कार्रवाई पर निर्भर करेगी। आरोपों की पुष्टि अदालत की प्रक्रिया में ही होगी। पुलिस के सामने अब आगे की जांच बड़ी चुनौती स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने के बाद अब पुलिस के सामने वायरल वीडियो, FIR में दर्ज आरोपों, मेडिकल रिपोर्ट और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच अहम होगी। फिलहाल इस मामले ने CJP Protest, Delhi Police और Social Media Influencer को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस की ओर से क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Saharanpur

UP Bulldozer Action: Saharanpur कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर चला बुलडोजर, मायावती-इकरा हसन ने उठाए सवाल

Saharanpur उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने शनिवार को मस्जिद के खिलाफ Bulldozer Action शुरू कर दिया। कार्रवाई की खबर फैलते ही इलाके में हलचल बढ़ गई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई। किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन का एक्शन कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर जमीन के स्वामित्व और निर्माण की वैधता पर काफी समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन का दावा है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है और निर्माण को अवैध माना गया है। मामला पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा। जुलाई में अदालत ने मस्जिद को हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही संबंधित पक्ष पर करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति लगाए जाने की बात भी सामने आई थी। इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी गई थी। 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोका मस्जिद पर कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इकरा हसन और पुलिस अधिकारियों के बीच इस दौरान तीखी बहस भी हुई। इसका वीडियो सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। बाद में उनके आवास के बाहर पुलिस बल तैनात किए जाने की भी खबर सामने आई। इकरा हसन ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोका जा रहा है। उनका कहना था कि वह मौके पर जाकर हालात देखना चाहती थीं। मायावती ने सरकार से कार्रवाई रोकने को कहा सहारनपुर मस्जिद विवाद पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार से कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की और मामले को संवेदनशील बताते हुए सावधानी से कदम उठाने की बात कही। मायावती ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह का तनाव बढ़ने से रोकना जरूरी है। उन्होंने लोगों से भी शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। इमरान मसूद बोले- हाईकोर्ट जाएंगे सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया है। उनका कहना है कि मस्जिद की जमीन और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर उनका पक्ष अलग है। जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद मसूद ने मामले को हाईकोर्ट ले जाने की बात कही है। उनका कहना है कि आगे की कानूनी लड़ाई अदालत में लड़ी जाएगी और उपलब्ध दस्तावेजों को वहां रखा जाएगा। प्रशासन और विपक्ष के दावे अलग-अलग पूरे विवाद में प्रशासन और मस्जिद पक्ष के दावे अलग हैं। प्रशासन जहां निर्माण को सरकारी जमीन पर हुआ अवैध निर्माण बता रहा है, वहीं मस्जिद से जुड़े लोग और कुछ विपक्षी नेता इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं। यही वजह है कि मामला सिर्फ बुलडोजर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। अब इसकी गूंज राजनीतिक मंच से लेकर अदालत तक सुनाई दे रही है। आगे क्या होगा? सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर हुई कार्रवाई के बाद अब सबकी नजर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर है। इमरान मसूद की ओर से हाईकोर्ट जाने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में अदालत में इस मामले को लेकर क्या रुख सामने आता है, यह महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई के बाद सहारनपुर में राजनीतिक माहौल गर्म है। एक तरफ अधिकारी कोर्ट के आदेश के पालन की बात कह रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nepal

Nepal Flood: दार्चुला में Landslide का खतरा बढ़ा, Trishuli से भारतीय परिवार का Rescue; हजारों Missing

नेपाल (Nepal) में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बाद हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नदियों का जलस्तर बढ़ने, मलबा आने और पहाड़ी इलाकों में Landslide के खतरे ने राहत और बचाव अभियान को और मुश्किल बना दिया है। सबसे चिंता की बात यह है कि हादसे के कई दिन बाद भी हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि, इसी बीच Trishuli क्षेत्र से दो लोगों को नौ दिन बाद जिंदा निकालना राहत और उम्मीद की बड़ी खबर बनकर सामने आया है। दार्चुला में Landslide का खतरा, निचले इलाकों पर नजर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। दार्चुला समेत संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से निचले इलाकों को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। पहाड़ों से मलबा आने और नदियों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका के बीच लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ से कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है। Trishuli से भारतीय नागरिकों का Rescue इस बीच त्रिशूली इलाके से तीन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की खबर सामने आई है। इनमें एक परिवार शामिल है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, रेस्क्यू किए गए लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और उनके भारत लौटने की प्रक्रिया में मदद की जा रही है। भारत सरकार नेपाल में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए लगातार नेपाली प्रशासन के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को Rescue किया गया है, जबकि 275 भारतीयों के लापता होने की जानकारी दी गई है। भारत ने राहत अभियान के लिए करीब 95 टन राहत सामग्री भी भेजी है। 9 दिन बाद Trishuli Tunnel से जिंदा निकले 2 मजदूर नेपाल में चल रहे Rescue Operation की सबसे बड़ी खबर Trishuli-3A Hydropower Project से आई। यहां सुरंग में फंसे संजय साह और कबीर महारजन को करीब नौ दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। दोनों को सुरंग के अंदर काफी गहराई से निकाला गया। बचाव दल ने पहले अंदर से आवाजें सुनीं और फिर संपर्क स्थापित होने के बाद ऑपरेशन तेज किया। आखिरकार दोनों को बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने उन परिवारों में भी उम्मीद जगाई है जिनके अपने लोग अभी तक लापता हैं। राहत दल अब अन्य संभावित Survivors तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं। 1300 के करीब मौतें, 5 हजार से ज्यादा लोग Missing इस प्राकृतिक आपदा का असर कितना बड़ा है, इसका अंदाजा मृतकों और लापता लोगों की संख्या से लगाया जा सकता है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार 1,294 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी और 5,053 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में बदलाव देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और Hydropower Projects को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और राहत शिविरों में रह रहे हैं। Rescue Operation अभी भी जारी Trishuli Tunnel से दो लोगों को जिंदा निकाले जाने के बाद Rescue Teams का हौसला बढ़ा है। नेपाल सेना, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ लगातार प्रभावित इलाकों में Search Operation चला रहे हैं। Hydropower Projects के आसपास अभी भी बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका है। मलबा, पानी और क्षतिग्रस्त सुरंगें बचाव अभियान में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। इसके बावजूद टीमें लगातार नए रास्ते तलाश रही हैं। भारत ने नेपाल की मदद बढ़ाई नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में भारत ने भी राहत और बचाव अभियान में सहयोग बढ़ाया है। भारतीय विशेषज्ञों और राहत सामग्री को नेपाल भेजा गया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की टीमें Rescue, Medical और अन्य जरूरी सेवाओं में सहायता कर रही हैं। फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और पहाड़ी इलाकों में नए Landslide और Flood के खतरे से निपटना है। Trishuli Tunnel से नौ दिन बाद दो लोगों का जिंदा निकलना इस त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण जरूर लेकर आया है। अब Rescue Teams की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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