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जबलपुर में बड़ा घोड़ा कांड: 57 में से 19 घोड़ों की मौत, 14 घोड़े गायब — हाईकोर्ट में मामला पेंडिंग, कलेक्टर ने जांच और FIR के संकेत दिए

हैदराबाद से जबलपुर लाए गए 57 घोड़ों के मामले में नया खुलासा सामने आया है। इनमें से 19 घोड़ों की मौत हो चुकी है, जबकि 14 घोड़े रहस्यमयी तरीके से गायब हैं। पशुपालन विभाग की गिनती में गुरुवार को यह बड़ा अंतर सामने आया। यह पूरा मामला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में भी पेंडिंग है। कैसे शुरू हुआ मामला? मई 2025 में रायपुर निवासी सचिन तिवारी 57 घोड़ों को ट्रकों से हैदराबाद से जबलपुर लेकर आए। इन्हें पनागर के रैपुरा स्थित फॉर्म हाउस में रखा गया।धीरे-धीरे 19 घोड़ों की मौत हो गई। उस समय कलेक्टर रहे दीपक सक्सेना ने जांच करवाई, लेकिन यह साफ नहीं हो पाया कि इतने घोड़े क्यों लाए गए और किस उद्देश्य से रखे गए। 14 घोड़े कहां गए? विभाग भी परेशान पशु चिकित्सा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. प्रफुल्ल मून ने बताया कि: डॉ. मून के अनुसार, सचिन तिवारी घोड़ों को किसी दूसरे स्थान पर ले गया है, लेकिन वह इसकी जानकारी देने से बच रहा है। कलेक्टर ने कहा — “FIR भी होगी” कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।उन्होंने कहा: घातक बीमारी ने भी बढ़ाया संकट सूत्रों के अनुसार, एक घोड़े में गैलेंडर नामक घातक बीमारी की पुष्टि हुई थी।यह बीमारी: उच्च नस्ल के, लाखों रुपये कीमत वाले घोड़े लाए गए घोड़ों में शामिल थे: कुल: 41 फीमेल और 16 मेल घोड़ेये नस्लें रेस में उपयोग होती हैं और इनकी कीमत लाखों तक होती है। PETA का गंभीर आरोप — मामला ऑनलाइन सट्टे से जुड़ा PETA की कार्यकर्ता सिमरन ईशर ने बड़ा दावा किया है: फिलीपींस सरकार के अलर्ट के बाद तेलंगाना सरकार ने यह रेस बंद करवा दी।गिरफ्तारी से बचने के लिए सुरेश पलादुगू ने 154 घोड़ों को देशभर में इधर-उधर भेज दिया, जिनमें से 57 घोड़े जबलपुर पहुंचे। यह मामला लगातार गहराता जा रहा है और अब प्रशासन, हाईकोर्ट और पशुपालन विभाग तीनों की नजरें इस पर हैं। आने वाले दिनों में घोड़ों के गायब होने की सच्चाई सामने आ सकती है। For more info visit: www.deshharpal.com
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भोपाल मेट्रो की बड़ी खबर: CMRS टीम ट्रैक पर उतरी, 4 बजे तक चलेगा निरीक्षण — नवंबर में शुरू हो सकता है कॉमर्शियल रन

भोपाल मेट्रो को शुरू करने की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ गया है। कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम अब सीधे मेट्रो ट्रैक पर निरीक्षण कर रही है। शुक्रवार सुबह 10 बजे से टीम का निरीक्षण शुरू हुआ, जो शाम 4 बजे तक चलेगा। इस दौरान टीम खुद मेट्रो में सफर कर सारे तकनीकी और सुरक्षा मानकों की जांच कर रही है तीन दिन के भोपाल दौरे पर CMRS टीम नई दिल्ली से आई टीम ने गुरुवार को डिपो, एम्स स्टेशन तक के ट्रैक, सिग्नलिंग सिस्टम और सुरक्षा उपायों की जांच की। आरकेएमपी स्टेशन पर रेल ट्रैक की ढाल और पानी निकासी की जांच के लिए ट्रैक पर पानी छोड़ा गया। पहले दिन टीम लगभग 8 घंटे मेट्रो प्रोजेक्ट की हर डिटेल जांचती रही। सुभाषनगर डिपो में पूरे प्रोजेक्ट का प्रेजेंटेशन भी देखा गया। दूसरे दिन भी भारी निरीक्षण, मेट्रो में सफर कर होगी जांच शुक्रवार को फिर सुबह 10 बजे से निरीक्षण शुरू हुआ। टीम मेट्रो में बैठकर ट्रैक पर जा रही है ताकि मेट्रो के अंदर से ही हर तकनीकी बिंदु की सटीक जांच की जा सके। CMRS क्या करता है? किसी भी मेट्रो को यात्रियों के लिए शुरू करने से पहले अंतिम सुरक्षा स्वीकृति CMRS ही देता है।टीम इन बिंदुओं पर जांच कर रही है: अगर कोई कमी मिलती है तो उसे ठीक किए बिना मेट्रो को चलाने की अनुमति नहीं मिलती। पिछले दौरे में जो खामियां मिली थीं, उन्हें अब तक ठीक किया जा चुका है। इसलिए इस बार टीम से “ओके रिपोर्ट” मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। पहली बार भोपाल पहुंचे मेट्रो कमिश्नर नए मेट्रो कमिश्नर नीलाभ्र सेनगुप्ता पहली बार भोपाल आए हैं। टीम वही पुरानी है, इसलिए कॉमर्शियल रन में रुकावट की संभावना कम मानी जा रही है। अक्टूबर में नहीं मिली अनुमति, अब नवंबर में दौड़ने की उम्मीद सरकार ने पहले अक्टूबर में मेट्रो चलाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन बिहार चुनाव की वजह से निरीक्षण में देरी हुई।अब माना जा रहा है कि नवंबर में भोपाल मेट्रो यात्रियों के लिए ट्रैक पर दौड़ सकती है। सीएमआरएस की रिपोर्ट सीधे राज्य सरकार को सौंपी जाएगी, और मंजूरी मिलते ही कॉमर्शियल रन की फाइनल डेट घोषित होगी।संभावना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भोपाल मेट्रो के पहले यात्री बनें। पहले ही मिल चुकी है RDSO की ओके रिपोर्ट रिसर्च डिज़ाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गेनाइजेशन (RDSO) पहले ही मेट्रो की टेस्टिंग कर अपनी ओके रिपोर्ट दे चुका है। वहीं से दस्तावेज CMRS को भेजे गए, जिसके बाद निरीक्षण तय हुआ। 2018 में शुरू हुआ था मेट्रो प्रोजेक्ट 3 अक्टूबर 2023 को पहला ट्रायल हुआ था, जब तब के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मेट्रो में सफर किया था। अब CMRS की रिपोर्ट का इंतजार है — और उसके बाद भोपाल मेट्रो आम लोगों के लिए कभी भी शुरू हो सकती है। For more info visit: deshharpal.com भोपाल मेट्रो को शुरू करने की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ गया है। कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम अब सीधे मेट्रो ट्रैक पर निरीक्षण कर रही है। शुक्रवार सुबह 10 बजे से टीम का निरीक्षण शुरू हुआ, जो शाम 4 बजे तक चलेगा। इस दौरान टीम खुद मेट्रो में सफर कर सारे तकनीकी और सुरक्षा मानकों की जांच कर रही है। तीन दिन के भोपाल दौरे पर CMRS टीम नई दिल्ली से आई टीम ने गुरुवार को डिपो, एम्स स्टेशन तक के ट्रैक, सिग्नलिंग सिस्टम और सुरक्षा उपायों की जांच की। आरकेएमपी स्टेशन पर रेल ट्रैक की ढाल और पानी निकासी की जांच के लिए ट्रैक पर पानी छोड़ा गया। पहले दिन टीम लगभग 8 घंटे मेट्रो प्रोजेक्ट की हर डिटेल जांचती रही। सुभाषनगर डिपो में पूरे प्रोजेक्ट का प्रेजेंटेशन भी देखा गया। दूसरे दिन भी भारी निरीक्षण, मेट्रो में सफर कर होगी जांच शुक्रवार को फिर सुबह 10 बजे से निरीक्षण शुरू हुआ। टीम मेट्रो में बैठकर ट्रैक पर जा रही है ताकि मेट्रो के अंदर से ही हर तकनीकी बिंदु की सटीक जांच की जा सके। CMRS क्या करता है? किसी भी मेट्रो को यात्रियों के लिए शुरू करने से पहले अंतिम सुरक्षा स्वीकृति CMRS ही देता है।टीम इन बिंदुओं पर जांच कर रही है: अगर कोई कमी मिलती है तो उसे ठीक किए बिना मेट्रो को चलाने की अनुमति नहीं मिलती। पिछले दौरे में जो खामियां मिली थीं, उन्हें अब तक ठीक किया जा चुका है। इसलिए इस बार टीम से “ओके रिपोर्ट” मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। पहली बार भोपाल पहुंचे मेट्रो कमिश्नर नए मेट्रो कमिश्नर नीलाभ्र सेनगुप्ता पहली बार भोपाल आए हैं। टीम वही पुरानी है, इसलिए कॉमर्शियल रन में रुकावट की संभावना कम मानी जा रही है। अक्टूबर में नहीं मिली अनुमति, अब नवंबर में दौड़ने की उम्मीद सरकार ने पहले अक्टूबर में मेट्रो चलाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन बिहार चुनाव की वजह से निरीक्षण में देरी हुई।अब माना जा रहा है कि नवंबर में भोपाल मेट्रो यात्रियों के लिए ट्रैक पर दौड़ सकती है। सीएमआरएस की रिपोर्ट सीधे राज्य सरकार को सौंपी जाएगी, और मंजूरी मिलते ही कॉमर्शियल रन की फाइनल डेट घोषित होगी।संभावना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भोपाल मेट्रो के पहले यात्री बनें। पहले ही मिल चुकी है RDSO की ओके रिपोर्ट रिसर्च डिज़ाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गेनाइजेशन (RDSO) पहले ही मेट्रो की टेस्टिंग कर अपनी ओके रिपोर्ट दे चुका है। वहीं से दस्तावेज CMRS को भेजे गए, जिसके बाद निरीक्षण तय हुआ। 2018 में शुरू हुआ था मेट्रो प्रोजेक्ट 3 अक्टूबर 2023 को पहला ट्रायल हुआ था, जब तब के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मेट्रो में सफर किया था। अब CMRS की रिपोर्ट का इंतजार है — और उसके बाद भोपाल मेट्रो आम लोगों के लिए कभी भी शुरू हो सकती है। For more info visit: www.deshharpal.com
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अन्नपूर्णा मंदिर ट्रस्ट की जमीन से अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम पर हंगामा, आत्मदाह और सुसाइड की धमकी देकर रोका कार्रवाई

इंदौर के अन्नपूर्णा मंदिर ट्रस्ट की जमीन पर चल रहा कब्जे का विवाद शुक्रवार को उस समय तनावपूर्ण हो गया, जब कलेक्टर के निर्देश पर पुलिस, नगर निगम और प्रशासन की संयुक्त टीम अतिक्रमण हटाने पहुंची। टीम के पहुंचते ही वहां मौजूद कई परिवारों ने जमकर विरोध शुरू कर दिया। परिवारों का हंगामा, खुद को आग लगाने की कोशिश जैसे ही कार्रवाई शुरू हुई, एक महिला सहित दो युवकों ने खुद पर घासलेट उड़ेलकर आग लगाने की कोशिश की। पुलिस ने तत्‍काल पानी डालकर उन्हें काबू में किया और हिरासत में ले लिया। इसी दौरान एक युवती घर की चद्दर पर चढ़कर सुसाइड की धमकी देने लगी। महिला पुलिसकर्मी ने जोखिम उठाकर उसे नीचे उतारा, इस दौरान युवती घायल भी हो गई। चार परिवार कर रहे थे कब्जा पुलिस के अनुसार, कुल चार परिवारों ने अन्नपूर्णा मंदिर ट्रस्ट की जमीन पर अवैध कब्जा किया हुआ था। ट्रस्ट ने इस संबंध में लंबे समय से शिकायतें दी थीं। कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर एसडीएम और तहसीलदार ने जांच की, जिसमें जमीन मंदिर की ही पाई गई। इसके बाद गुरुवार को कब्जा हटाने का आदेश जारी किया गया। बिजली पोल पर चढ़कर धमकी हंगामे के दौरान एक युवक मंदिर परिसर की दीवार और फिर बिजली के पोल पर चढ़ गया। उसने तार पकड़कर आत्महत्या की धमकी दी, ताकि कार्रवाई रुक सके। हालांकि प्रशासन पहले ही एहतियातन बिजली सप्लाई बंद करवा चुका था। पुलिस ने काफी प्रयास के बाद युवक को नीचे उतारा। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जारी तनाव और विरोध के बावजूद नगर निगम की टीम अतिक्रमण हटाने में जुटी रही। पूरे मामले में प्रशासन ने स्थिति पर नियंत्रण पा लिया है और आगे की कार्रवाई जारी है। For more info visit: www.deshharpal.com
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इंदौर में चूहों का कहर: एमवाय अस्पताल के बाद अब शास्त्री ब्रिज और गांधी प्रतिमा के नीचे हजारों बिल, निगम ने शुरू की कार्रवाई

इंदौर में चूहों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। सितंबर में एमवाय अस्पताल में दो मासूमों की उंगलियां चूहों ने कुतर दी थीं, और अब शहर के शास्त्री ब्रिज व रीगल तिराहा स्थित गांधी प्रतिमा के नीचे चूहों के बिलों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। शास्त्री ब्रिज की सड़क चूहों के कारण धंसी 2 नवंबर को शास्त्री मार्केट की तरफ जाने वाले शास्त्री ब्रिज की सड़क अचानक धंस गई, जिससे लगभग 5 फीट गहरा और 6 फीट लंबा गड्ढा बन गया था।जांच में पाया गया कि सड़क के नीचे चूहों के बिल होने से मिट्टी कमजोर हो गई थी। निगम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर रोड बंद कराई और ट्रैफिक डायवर्ट किया। नगर निगम के जनकार्य प्रभारी राजेंद्र राठौर ने बताया कि गड्ढे के अंदर अब चूहों के लिए ट्रीटमेंट कराया जाएगा, ताकि वे दोबारा वहां बिल न बना सकें।उन्होंने कहा, “गड्ढे के अंदर दीवार बनाकर उसे प्लास्टर किया जा रहा है। ट्रीटमेंट के बाद ब्लॉक लगाकर सड़क को पूरी तरह दुरुस्त किया जाएगा।” गांधी प्रतिमा परिसर में भी हजारों चूहे मिले इसी बीच, रीगल तिराहा स्थित गांधी प्रतिमा परिसर में भी चूहों की भरमार देखने को मिली है।राठौर ने बताया कि प्रतिमा के नीचे और आसपास हजारों चूहों के बिल बने हुए हैं। उन्होंने कहा, “हमें कई शिकायतें मिली थीं कि यहां पक्षियों को दाना डालने से चूहों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हमने स्थल का निरीक्षण किया है और विशेषज्ञों की टीम से परीक्षण कराया जाएगा।” बड़ा हादसा होने की आशंका राठौर ने चेतावनी दी कि अगर चूहों की समस्या को समय रहते नहीं सुलझाया गया तो भविष्य में किसी बड़े हादसे की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।नगर निगम जल्द ही एक एक्शन प्लान तैयार कर इन दोनों स्थलों पर स्थायी समाधान की दिशा में काम करेगा। 👉 ऐसी ही स्थानीय और सटीक खबरों के लिए पढ़ें:www.deshharpal.com
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खेत से लौट रहे किसान को बाइक सवार ने मारी टक्कर, मौके पर मौत — गांव में छाया मातम

खंडवा जिले के पंधाना क्षेत्र के ग्राम निहालवाड़ी में बुधवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। हादसे में 48 वर्षीय किसान लक्ष्मीनारायण पिता हीरालाल पटेल की मौके पर ही मौत हो गई। वह रात में अपने खेत से पैदल घर लौट रहे थे, तभी पीछे से आ रहे एक बाइक सवार ने जोरदार टक्कर मार दी। आरोपी भी उसी गांव का, हादसे के बाद बेहोश हुआ हादसे में बाइक सवार युवक भी गंभीर रूप से घायल हो गया। बताया जा रहा है कि वह भी निहालवाड़ी गांव का ही रहने वाला है। टक्कर के बाद वह सड़क पर गिरकर बेहोश हो गया था। ग्रामीणों की मदद से उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है। परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ लक्ष्मीनारायण की मौत से उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उनके पीछे एक बेटा और दो बेटियां हैं। पिता की मौत की खबर मिलते ही परिवार और पूरे गांव में मातम छा गया। ग्रामीणों ने बताया कि लक्ष्मीनारायण मेहनती और शांत स्वभाव के व्यक्ति थे, जो रोज की तरह उस दिन भी खेत से घर लौट रहे थे। पुलिस ने मर्ग कायम कर शुरू की जांच घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा। गुरुवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।गांव के संगमेश्वर मुक्तिधाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। 👉 ऐसी ही और खबरों के लिए पढ़ें: www.deshharpal.com
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भोपाल में आलमी तब्लीगी इज्तिमा के दौरान ट्रैफिक में बदलाव, पुलिस ने जारी किया विशेष प्लान

भोपाल के घासीपुरा ईंटखेड़ी में 14 से 17 नवंबर तक आयोजित होने वाले आलमी तब्लीगी इज्तिमा के दौरान शहर की यातायात व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ेगा। लाखों धर्मावलंबियों के आने की संभावना को देखते हुए भोपाल ट्रैफिक पुलिस ने विशेष ट्रैफिक प्लान जारी किया है। 17 नवंबर को सबसे अधिक दबाव रहेगा आयोजन के अंतिम दिन 17 नवंबर की सुबह दुआ की नमाज के दौरान पुराने शहर से इज्तिमा स्थल की ओर जाने वाले रास्तों पर भारी भीड़ और जाम की स्थिति रहेगी।सुबह 6 बजे से ही मुबारकपुर, पटेल नगर नया बायपास, गांधी नगर, अयोध्या नगर बायपास, रत्नागिरी, लांबाखेड़ा, करोंद, भोपाल टॉकीज, पीरगेट, मोती मस्जिद, रॉयल मार्केट, लालघाटी, नादरा बस स्टैंड और भारत टॉकीज इलाकों में ट्रैफिक का दबाव रहेगा।पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें और अनावश्यक यात्रा से बचें। एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन जाने वालों के लिए वैकल्पिक मार्ग भारी वाहनों पर रोक और डायवर्जन 15 नवंबर की सुबह 7 बजे से बैरसिया रोड से करोंद चौक तक भारी वाहनों, डंपर और मिक्सर पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। वहीं, 17 नवंबर की सुबह 4 बजे से भोपाल की सीमाओं में सभी भारी मालवाहक वाहनों का प्रवेश पूरी तरह बंद रहेगा। पार्किंग व्यवस्था 120 एकड़ में पंडाल, 300 एकड़ में पार्किंग आयोजन समिति के मीडिया कोऑर्डिनेटर डॉ. उमर हफीज ने बताया कि इस बार पंडाल का क्षेत्रफल 100 एकड़ से बढ़ाकर 120 एकड़ कर दिया गया है, जबकि पार्किंग एरिया को 300 एकड़ तक फैला दिया गया है।कुल 70 पार्किंग जोन बनाए जा रहे हैं ताकि ट्रैफिक मैनेजमेंट सुचारू रहे। ट्रैफिक हेल्पलाइन अगर किसी नागरिक को असुविधा होती है, तो वे संपर्क कर सकते हैं: पुलिस ने अपील की है कि सभी लोग यातायात नियमों का पालन करें और प्रशासन का सहयोग करें, ताकि आयोजन के दौरान व्यवस्था बनी रहे। 👉 और अधिक जानकारी के लिए पढ़ें:www.deshharpal.com
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Bhopal

Bhopal Metro CMRS Inspection के बाद जल्द मिलेगी Green Signal

भोपाल की जनता का इंतज़ार अब खत्म होने वाला है। राजधानी की पहली Bhopal Metro अब लॉन्च के एक कदम पहले है।Commissioner of Metro Rail Safety (CMRS) की टीम फिलहाल शहर में है और Subhash Nagar Depot से AIIMS Bhopal तक के 7 किलोमीटर लंबे Priority Corridor का निरीक्षण कर रही है। 98% Construction Complete – अब सिर्फ Final Approval बाकी मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) के अधिकारियों ने बताया कि इस रूट का करीब 98% काम पूरा हो चुका है।इस रूट में कुल 8 स्टेशन हैं — Subhash Nagar Depot, DB Mall, Board Office, MP Nagar, Habibganj, DRM Office और AIIMS Bhopal जैसे महत्वपूर्ण पॉइंट शामिल हैं। इससे पहले RDSO (Research Designs & Standards Organisation) ने मेट्रो के ट्रैक और टेक्निकल सिस्टम को मंजूरी दे दी थी। अब CMRS द्वारा सुरक्षा और संचालन मानकों की जांच की जा रही है। CMRS Report के बाद मिलेगी ‘OK’ Signal – Launch Possible Soon सूत्रों के अनुसार, CMRS Inspection Report अगर पॉजिटिव आती है तो भोपाल मेट्रो को जल्द ही संचालन की मंजूरी मिल जाएगी। Bhopal Metro Route & Benefits पहले चरण में यह रूट राजधानी के उत्तर और दक्षिण हिस्सों को जोड़ेगा। आने वाले चरणों में पूरे शहर को नेटवर्क से कवर किया जाएगा।मेट्रो शुरू होने के बाद — अभी बाकी हैं ये काम भले ही Trial Runs सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं, लेकिन अभी कुछ स्टेशन पर फिनिशिंग टच, साइनबोर्ड, सुरक्षा और सिग्नलिंग सिस्टम का अंतिम निरीक्षण जारी है।अगर सब कुछ ठीक रहा, तो भोपाल मेट्रो नवंबर के अंत तक जनता के लिए शुरू हो सकती है। Modern Features of Bhopal Metro हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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बिलासपुर रेल हादसा: एक और छात्रा की मौत, अब तक 12 लोगों की जान गई

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेल हादसे में घायल कॉलेज छात्रा महविश परवीन (19) ने एक सप्ताह तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद दम तोड़ दिया। इसके साथ ही इस दर्दनाक हादसे में मृतकों की संख्या 12 पहुंच गई है। हादसे में गंभीर रूप से घायल थी छात्रा महविश बिलासपुर के डीपी विप्र कॉलेज में बीएससी गणित की नियमित छात्रा थी। वह जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा की रहने वाली थी और बिलासपुर में रहकर पढ़ाई करती थी।4 नवंबर को वह रिश्तेदार की शादी में शामिल होकर घर से कोरबा-बिलासपुर मेमू ट्रेन से लौट रही थी। लालखदान स्टेशन के पास यह ट्रेन मालगाड़ी से टकरा गई। महविश ट्रेन के महिला कोच में सवार थी। टक्कर इतनी तेज थी कि उसके दोनों पैर लोहे के एंगल के नीचे दब गए और कई जगह फ्रैक्चर हो गए। झटके के कारण उसकी कॉलर बोन और पसलियों की चार हड्डियां भी टूट गईं। घटना के तुरंत बाद उसे सिम्स लाया गया, जहां से हालत गंभीर होने पर अपोलो अस्पताल रेफर किया गया। एक सप्ताह तक जिंदगी से लड़ती रही, फिर मौत ने छीन ली जिंदगी अपोलो अस्पताल में डॉक्टर लगातार उसका इलाज कर रहे थे, लेकिन उसकी हालत बिगड़ती गई।मंगलवार रात इलाज के दौरान महविश ने अंतिम सांस ली। बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया, जो उसे लेकर अकलतरा रवाना हो गए। दिल की मरीज रह चुकी थी महविश, भाई की शादी में गई थी घर महविश के चाचा मोहम्मद रहमान ने बताया कि बचपन में उसे हृदय संबंधी बीमारी थी और रायपुर के एस्कॉर्ट अस्पताल में उसकी ओपन हार्ट सर्जरी हुई थी। इलाज के बाद वह पूरी तरह स्वस्थ हो चुकी थी।12वीं के बाद उसे बिलासपुर के डीपी विप्र कॉलेज में दाखिला दिलाया गया था।वह अपने चचेरे भाई की शादी के लिए घर गई थी — शादी 2 नवंबर को हुई थी और 4 नवंबर को वह बिलासपुर लौट रही थी, तभी यह हादसा हो गया। मुआवजे के लिए फर्जी दावा करने की कोशिश का खुलासा इस बीच, सोमवार को एक अन्य व्यक्ति पवन गढ़ेवाल को मृत अवस्था में सिम्स लाया गया।साथ आए लोगों ने दावा किया कि वह भी इसी रेल हादसे में घायल था। लेकिन पुलिस जांच में पता चला कि पवन की कोई मेडिकल हिस्ट्री या इलाज का रिकॉर्ड नहीं मिला।सीएसपी गगन कुमार ने बताया कि मुआवजे के लिए उसकी मौत को रेल हादसे से जोड़ने की कोशिश की जा रही थी। रेल हादसे की जांच अब भी जारी है, जबकि मृतकों के परिजनों को मुआवजा और घायलों के इलाज की जिम्मेदारी रेलवे प्रशासन ने ली है। 🔗 अधिक जानकारी और अपडेट के लिए देखें: www.deshharpal.com — सच्ची खबरें, संवेदनशील अंदाज में
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शादी के 9 साल बाद महिला ने की आत्महत्या, मायके वालों का आरोप — “ससुराल वालों ने किया प्रताड़ित

सागर जिले के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के पथरिया जाट गांव में मंगलवार को एक महिला ने अपने ही घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। जब परिजन घर पहुंचे तो महिला का शव फंदे पर झूलता मिला। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची, पंचनामा तैयार कर पोस्टमॉर्टम कराया गया और फिर शव परिजनों को सौंप दिया गया। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मायके वालों का आरोप — ससुराल वालों ने किया अत्याचार घटना की खबर मिलते ही मृतका के मायके पक्ष के लोग पथरिया पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला को लंबे समय से ससुराल पक्ष द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा था।परिजनों ने कंट्रोल रूम पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। 9 साल पहले हुई थी शादी मृतका के पिता ने बताया कि उनकी बेटी की शादी करीब 9 साल पहले हुई थी और उसके दो बच्चे हैं।उन्होंने कहा कि दामाद आए दिन बेटी से मारपीट करता था और बुलेट गाड़ी मायके से लाने की मांग करता था।दहेज और अत्याचार से परेशान होकर बेटी कुछ महीने पहले मायके आ गई थी। पिता ने बताया कि बाद में दामाद के बड़े भाई आए और भरोसा दिलाया कि अब ऐसा कुछ नहीं होगा। इस भरोसे के बाद बेटी को वापस ससुराल भेज दिया गया।लेकिन मंगलवार को पुलिस से सूचना मिली कि बेटी ने फांसी लगाकर जान दे दी है। परिजनों का दावा — “मारपीट कर हत्या की गई” परिजनों ने कहा कि यह आत्महत्या नहीं, हत्या का मामला है।उनका कहना है कि बेटी को मारपीट कर फंदे पर लटकाया गया।ससुराल पक्ष के लोग लगातार उसे प्रताड़ित करते थे। उन्होंने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और कहा है कि सभी पहलुओं पर जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। 🔗 अधिक जानकारी और अपडेट के लिए देखें: www.deshharpal.com— सच्ची खबरें, संवेदनशील अंदाज में
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हॉस्टल से 15 वर्षीय छात्रा की मौत — परिजन कहते हैं — “हादसा नहीं, हत्या”

हत्या जूर गांव के माता शबरी कन्या शिक्षा परिसर में 15 साल की छात्रा पूजा किरेड़े की मौत ने परिवार और इलाके में गहरा सदमा पैदा कर दिया है। परिजनों का आरोप है कि पूजा हॉस्टल की चौथी मंजिल से धक्का देकर गिराई गई थी, जबकि हॉस्टल वार्डन और उसकी बेटी पर पहले से ही प्रताड़ना के आरोप लगे हुए हैं। क्या हुआ: पूजा का एग्जाम था और एक दिन पहले ही उसे हॉस्टल से घर छोड़ा गया था। अगले दिन खबर मिली कि वह हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरी मिली। इलाज के दौरान जब पूजा होश में आई तो उसने परिजनों को बताया — “मुझे किसी ने धक्का दिया है।”आठ दिन इंदौर के इंडेक्स अस्पताल में इलाज के बाद 9 नवंबर को पूजा की मौत हो गई। परिजनों की मांग — हत्या का केस दर्ज किया जाए परिजन कलेक्टर, एसपी और सहायक आयुक्त आदिम जाति कल्याण को ज्ञापन देकर मांग कर चुके हैं कि घटना की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कर हत्या का मामला दर्ज किया जाए।पिता सुंदर सिंह और रिश्तेदारों का कहना है कि पूजा के शरीर पर चोट के भी निशान मिले हैं और वह खुद नहीं मर सकती थी। उनका पूरा संदेह हॉस्टल वार्डन और उसकी बेटी प्राची पर है — जिन्होंने कथित रूप से पूजा को लगातार प्रताड़ित किया था। वार्डन की दलील और जांच वार्डन कोकिला बौरासी का कहना है कि पूजा पर “भूत-प्रेत” का साया था और वह अक्सर बीमार रहती थी। परिजन इस दावे को खारिज करते हैं।कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है।कमेटी का नेतृत्व संयुक्त कलेक्टर निकिता मंडलोई कर रही हैं; उसमें मिट्टी परीक्षण अधिकारी कविता गवली और पिछड़ा वर्ग व अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की इंस्पेक्टर सुनीता मुवेल शामिल हैं।जांच टीम ने हॉस्टल का निरीक्षण किया, स्टाफ व छात्राओं के बयान लिए और परिजनों से भी तफ्तीश की। चौंकाने वाले तथ्य जांच में यह भी पता चला कि वार्डन कोकिला के पास 60% दिव्यांगता का प्रमाण-पत्र है, बावजूद इसके उन्हें वार्डन का पद दिया गया था — जो नियमों के विपरीत बताया जा रहा है।और सबसे बड़ी बात यह कि वार्डन का अधिकांश काम उसकी बेटी प्राची ही संभालती थी, जिसे पीटीआई (स्पोर्ट्स टीचर) के रूप में नियोजित किया गया था।परिजन और छात्राएं बताती हैं कि प्राची अक्सर छात्राओं से मारपीट और मानसिक प्रताड़ना करती थी, और पूजा तथा प्राची के बीच कई बार विवाद हो चुका था। निलंबन और स्थानीय प्रतिक्रिया जनजातीय कार्य आयुक्त ने जांच की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद वार्डन को निलंबित कर इंदौर संभागीय कार्यालय में अटैच कर दिया है।आदिवासी संगठनों ने आरोप लगाया है कि आदिवासी हॉस्टलों में बच्चों के साथ प्रताड़ना की घटनाएं सामान्य हैं और संदिग्ध मौतों को अक्सर हादसा बताकर दबा दिया जाता है।टंट्या मामा आदिवासी संगठन की महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष ममता मोरे ने भी इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। परिजन अब न्याय की उम्मीद में हैं — वे चाहते हैं कि निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो और भविष्य में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपाय किए जाएं। अधिकारिक जांच रिपोर्ट और आगे के कदमों पर हम नजर बनाए रखेंगे। 🔗 अधिक जानकारी और अपडेट के लिए देखें: deshharpal.com— सच्ची खबरें, संवेदनशील अंदाज में
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Monsoon

Monsoon Update: बिहार में Flood से 27 लाख लोग प्रभावित, Maharashtra के Amboli में मूसलाधार बारिश

देश में मानसून (Monsoon) का असर अब भी अलग-अलग इलाकों में अलग तस्वीर दिखा रहा है। कहीं आसमान साफ हो रहा है तो कहीं लगातार बारिश ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य के 13 जिलों में करीब 27 लाख लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं। दूसरी ओर, महाराष्ट्र के Amboli में तेज बारिश ने पश्चिमी घाट के इस इलाके को फिर चर्चा में ला दिया है। बिहार में गंगा समेत कई प्रमुख नदियों का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई जगह पानी घरों और सड़कों तक पहुंच गया है। प्रशासन की ओर से राहत और बचाव का काम लगातार जारी है। Bihar Flood: 13 जिलों में लाखों लोग प्रभावित बिहार में बाढ़ का असर लगातार बढ़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के 13 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं और करीब 27 लाख लोगों पर इसका असर पड़ा है। गंगा के साथ गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और बागमती जैसी नदियों के जलस्तर पर प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है। कई स्थानों पर नदियां खतरे के निशान के आस बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों तक भोजन और जरूरी सामान पहुंचाने के लिए प्रशासन ने राहत व्यवस्था बढ़ाई है। सामुदायिक रसोई के जरिए लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि नावों की मदद से प्रभावित क्षेत्रों में आवाजाही और राहत कार्य चलाए जा रहे हैं। Ganga के बढ़ते जलस्तर ने बढ़ाई चिंता गंगा का बढ़ता जलस्तर खास तौर पर चिंता का विषय बना हुआ है। नदी किनारे बसे इलाकों में प्रशासन की निगरानी बढ़ाई गई है। निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ का असर सिर्फ घरों तक सीमित नहीं है। कई ग्रामीण इलाकों में सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है और रोजमर्रा की जिंदगी भी मुश्किल हुई है। किसानों के लिए भी यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। Maharashtra के Amboli में भारी बारिश बिहार से हजारों किलोमीटर दूर महाराष्ट्र में मानसून ने अलग रंग दिखाया है। सिंधुदुर्ग जिले का Amboli पश्चिमी घाट में स्थित है और अपनी भारी बारिश के लिए जाना जाता है। मानसून के दौरान अंबोली में लगातार बारिश, धुंध और तेज जलप्रवाह आम बात है। यहां के जंगल और पहाड़ी इलाकों में बारिश का असर साफ दिखाई देता है। इस दौरान कई झरने भी तेज बहाव के साथ नजर आते हैं। अंबोली को महाराष्ट्र के सबसे अधिक बारिश वाले इलाकों में गिना जाता है और इसे कई बार महाराष्ट्र की ‘चेरापूंजी’ भी कहा जाता है। Satellite तस्वीरों में बदलती दिखी मौसम की तस्वीर मानसून के बीच देशभर के मौसम में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। Satellite images में कई हिस्सों में बादलों की स्थिति बदलती दिखाई दे रही है। कुछ क्षेत्रों में बादल छंट रहे हैं, जबकि पूर्वी भारत और अन्य हिस्सों में बारिश का असर अभी बना हुआ है। यही वजह है कि एक ही समय पर देश के अलग-अलग राज्यों में मौसम की तस्वीर बिल्कुल अलग नजर आ रही है। कहीं बाढ़ से लोग परेशान हैं तो कहीं बारिश के बाद मौसम सुहावना बना हुआ है। आगे भी मौसम पर रहेगी नजर बिहार में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए आने वाले दिनों में नदियों के जलस्तर और बारिश पर नजर रखना जरूरी होगा। प्रशासन राहत और बचाव अभियान को लगातार आगे बढ़ा रहा है। वहीं महाराष्ट्र के अंबोली में भी बारिश का दौर इलाके की प्राकृतिक खूबसूरती के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए चुनौतियां लेकर आता है। फिलहाल मानसून पूरी तरह थमा नहीं है। ऐसे में Bihar Flood, Heavy Rainfall और Monsoon Update से जुड़ी स्थिति पर प्रशासन और मौसम विभाग की नजर बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Tibet-Nepal

Tibet-Nepal Border पर भारी तबाही, 11 दिन बाद Foreign Journalists ने देखा Ground Reality

Tibet-Nepal की सीमा पर 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और मलबे की तबाही के 11 दिन बाद आखिरकार विदेशी मीडिया को तिब्बत के प्रभावित इलाके तक पहुंच मिली। चीन के विदेश मंत्रालय की व्यवस्था के तहत चुनिंदा International Journalists को Gyirong County ले जाया गया, जहां आपदा के बाद की तस्वीरें पहली बार दुनिया के सामने ज्यादा साफ तौर पर आई हैं। यह आपदा इतनी भयावह थी कि चीन-नेपाल सीमा पर मौजूद कभी व्यस्त रहने वाला Gyirong Border Crossing मलबे और कीचड़ में बदल गया। पांच मंजिला कस्टम बिल्डिंग समेत कई ढांचे बाढ़ की चपेट में आ गए। मौके पर पहुंचे पत्रकारों ने बड़े पैमाने पर तबाही देखी, जबकि Rescue Teams अब भी मलबे के बीच लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं। Nepal में 5,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता इस प्राकृतिक आपदा का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि नेपाल और तिब्बत में मिलाकर 5,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। मृतकों की संख्या भी 1,300 के पार पहुंच चुकी है। नेपाल में बड़ी संख्या में लापता लोग Hydropower Projects से जुड़े कर्मचारी हैं। नेपाल के अधिकारियों के मुताबिक करीब 900 हाइड्रोपावर कर्मचारी लापता हैं। इनमें 121 लोगों के सुरंगों के भीतर फंसे होने की आशंका जताई गई है। मलबे से घिरी सुरंगों तक पहुंचना Rescue Teams के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। तबाही के बीच जिंदा बचने की उम्मीद इतनी बड़ी त्रासदी के बीच कुछ घटनाओं ने उम्मीद भी जगाई है। नेपाल में दो हाइड्रोपावर कर्मचारियों को करीब नौ दिन बाद सुरंग से जिंदा बाहर निकाला गया। उनके बचने की कहानी ने उन परिवारों में भी उम्मीद पैदा की है, जिनके अपने लोग अभी तक लापता हैं। बचाव अभियान में नेपाल के साथ भारत, चीन, दक्षिण कोरिया और अमेरिका समेत कई देशों की टीमें मदद कर रही हैं। मुश्किल पहाड़ी इलाका, भारी मलबा, क्षतिग्रस्त सड़कें और सुरंगों में जमा पानी Rescue Operation को लगातार कठिन बना रहे हैं। Tibet में 43 मौतें, 519 लोग Missing चीन की ओर से सामने आए आंकड़ों के मुताबिक तिब्बत के Gyirong इलाके में अब तक 43 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और 519 लोग लापता हैं। इनमें 23 देशों के 261 विदेशी नागरिक भी शामिल बताए गए हैं। यही वजह है कि लापता लोगों के परिवार लगातार जानकारी का इंतजार कर रहे हैं। कुछ विदेशी राजनयिकों और परिवारों ने चीन से राहत अभियान और Missing Persons को लेकर ज्यादा जानकारी साझा करने की मांग की है। Foreign Media की पहुंच पर क्यों उठे सवाल? आपदा के शुरुआती दिनों में तिब्बत के प्रभावित हिस्से तक विदेशी पत्रकारों की पहुंच सीमित रही। नेपाल की तरफ से आपदा की तस्वीरें और जमीनी रिपोर्ट लगातार सामने आती रहीं, लेकिन चीनी हिस्से की स्थिति को लेकर जानकारी अपेक्षाकृत कम उपलब्ध थी। अब 11 दिन बाद चीन की ओर से चुनिंदा विदेशी पत्रकारों को Gyirong ले जाने के बाद सीमा क्षेत्र में हुई तबाही की तस्वीरें सामने आई हैं। इससे वहां चल रहे Search and Rescue Operation और नुकसान के वास्तविक स्तर को समझने में मदद मिली है। भारत के नागरिक भी प्रभावित इस आपदा में भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार 275 भारतीय नागरिक अब भी लापता बताए गए हैं, जबकि 166 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। भारत ने नेपाल के राहत अभियान में करीब 95 टन राहत सामग्री और विशेषज्ञों की टीम भेजी है। भारतीय टीमों में Tunnel Rescue, Forensic और Medical Experts भी शामिल हैं। इन टीमों की मदद से मलबे और सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश का अभियान आगे बढ़ाया जा रहा है। सिर्फ बाढ़ नहीं, Himalayan Disaster का बड़ा संकेत इस पूरी घटना ने हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते ग्लेशियर और Glacial Lake से जुड़े जोखिमों पर भी चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों के लिए यह हादसा केवल एक स्थानीय प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि पहाड़ी इलाकों में Infrastructure और Disaster Preparedness को लेकर बड़ी चेतावनी भी है। फिलहाल Nepal और Tibet में हजारों परिवार अपने लापता परिजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं। राहत और बचाव दल मलबे, सुरंगों और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में लगातार Search Operation चला रहे हैं। कुछ लोगों के कई दिनों बाद जिंदा मिलने से उम्मीद जरूर बनी है, लेकिन 5,500 से ज्यादा लोगों का अब भी लापता होना इस आपदा की भयावहता को बयां करता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Vishwas Sarang

Vishwas Sarang को बहनों का बेशुमार प्यार, Narela Rakshabandhan Mahotsav में बना नया उत्साह

नरेला विधानसभा क्षेत्र में चल रहे Rakshabandhan Mahotsav 2026 में रविवार को भाई-बहन के रिश्ते की खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली। वार्ड नंबर 36, 37 और 70 में आयोजित कार्यक्रम के पांचवें दिन 24 हजार 604 बहनों ने मंत्री Vishwas Sarang को रक्षासूत्र बांधा। बहनों ने राखी बांधकर उनके प्रति स्नेह और आशीर्वाद जताया। कार्यक्रम में पहुंचते ही मंत्री विश्वास सारंग का स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। ढोल-ताशों और DJ की गूंज के बीच उन्हें बग्गी से मुख्य कार्यक्रम स्थल तक ले जाया गया। इस दौरान आतिशबाजी भी हुई। मंच पर पहुंचने के बाद सारंग ने बहनों पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। बहनों के प्यार को बताया अपनी ताकत रक्षाबंधन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वास सारंग ने कहा कि रक्षाबंधन केवल राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच विश्वास, स्नेह और अपनत्व का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हर साल बड़ी संख्या में बहनों का प्यार और आशीर्वाद मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। कार्यक्रम में पहुंचीं बहनों से उन्होंने राखी बंधवाई और उनका आशीर्वाद लिया। सारंग ने कहा कि लाखों बहनों का स्नेह और विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। चौथे दिन भी उमड़ा था बहनों का सैलाब नरेला रक्षाबंधन महोत्सव के चौथे दिन भी बड़ी संख्या में बहनें कार्यक्रम में पहुंची थीं। उस दिन 31,117 बहनों ने मंत्री विश्वास सारंग को रक्षासूत्र बांधा था। आयोजकों के अनुसार, पिछले साल के महोत्सव में कुल 1 लाख 84 हजार 632 बहनों ने रक्षासूत्र बांधा था। इस बार भी लगातार बढ़ रही भागीदारी को देखते हुए पिछले साल का आंकड़ा पार होने की उम्मीद जताई जा रही है। 7 सितंबर को इन दो वार्डों में होगा आयोजन नरेला रक्षाबंधन महोत्सव का अगला चरण 7 सितंबर 2026 को होगा। इस दिन दो वार्डों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में भी बड़ी संख्या में बहनों के शामिल होने की उम्मीद है। महोत्सव के जरिए रक्षाबंधन के पारंपरिक रिश्ते को सामाजिक जुड़ाव और भाईचारे के भाव से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। नरेला क्षेत्र में लगातार कई दिनों से चल रहे इस आयोजन में बहनों की बड़ी भागीदारी देखने को मिल रही है। पांचवें दिन 24,604 रक्षासूत्र बांधे जाने के साथ महोत्सव का उत्साह और बढ़ गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CM रेखा गुप्ता

Satya Niketan हादसे पर CM रेखा गुप्ता का बड़ा फैसला, Deputy Commissioner समेत 5 Suspend

दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक बिल्डिंग हादसे ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। पांच मंजिला इमारत के अचानक गिरने से अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। हादसे के बाद CM रेखा गुप्ता ने जिम्मेदारी तय करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। MCD के साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर समेत 5 अधिकारियों को Suspend कर दिया गया है। सरकार के इस एक्शन के बाद नगर निगम के कामकाज और इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों को लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। हादसे के बाद MCD में बड़ा Action सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद MCD ने पांच अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है। इनमें साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर सहित इंजीनियरिंग विभाग से जुड़े अधिकारी शामिल हैं। जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि इमारत की हालत को लेकर पहले कोई शिकायत या नोटिस जारी हुआ था या नहीं और निर्माण या मरम्मत के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं। PG के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी इमारत बताया जा रहा है कि जिस बिल्डिंग का हिस्सा ढहा, उसका इस्तेमाल PG accommodation के तौर पर किया जा रहा था। हादसे के समय वहां कई लोग मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इमारत गिरते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई। धूल का गुबार उठ गया और लोग मदद के लिए मौके पर पहुंचने लगे। इसके बाद दिल्ली फायर सर्विस, NDRF और अन्य बचाव दलों ने मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू किया। 7 लोगों की मौत, कई घायल रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मलबे से कई लोगों को बाहर निकाला गया। हादसे में अब तक 7 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हादसे के बाद आसपास के लोगों में भी डर का माहौल है। स्थानीय स्तर पर दूसरी पुरानी और कमजोर इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। Building Owner भी पुलिस की गिरफ्त में मामले में पुलिस ने बिल्डिंग के मालिक हरिराम के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस ने उसकी तलाश के लिए कई टीमें लगाई थीं। बाद में उसे भिवाड़ी से गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई। पुलिस अब हादसे से जुड़े दस्तावेज, बिल्डिंग की स्थिति और निर्माण या मरम्मत से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। जांच के आधार पर आगे और लोगों पर कार्रवाई हो सकती है। आसपास की इमारतों की भी जांच सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने आसपास की इमारतों की स्थिति को लेकर भी जांच शुरू की है। अधिकारियों की नजर खास तौर पर उन भवनों पर है जो पुराने हैं या जिनमें निर्माण और मरम्मत का काम चल रहा है। इस घटना ने दिल्ली में old buildings, PG और construction safety को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर इमारत में पहले से कोई खामी थी, तो उसे समय रहते क्यों नहीं रोका गया? सरकार के Action से उठे कई सवाल MCD के पांच अधिकारियों का निलंबन सरकार की ओर से उठाया गया बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि, असली तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी। सत्य निकेतन की इस घटना ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि जांच में हादसे की असली वजह क्या सामने आती है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CM House

CM House March पर Police का पहरा, Hamidia में Intern Doctors से धक्का-मुक्की

अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टर सोमवार को मुख्यमंत्री आवास (CM House) की ओर बढ़ रहे थे। लेकिन हमीदिया अस्पताल के पास पुलिस ने उनका रास्ता रोक दिया। डॉक्टरों को आगे जाने से रोकने के लिए पुलिस ने आसपास के रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी। इस दौरान डॉक्टरों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। प्रदर्शन को देखते हुए हमीदिया अस्पताल परिसर और आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। हालात बिगड़ने की आशंका को देखते हुए मौके पर Water Cannon भी तैयार रखा गया। CM House की तरफ मार्च करना चाहते थे डॉक्टर इंटर्न डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। इसी सिलसिले में डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री आवास तक मार्च करने का फैसला किया। डॉक्टरों का समूह हमीदिया अस्पताल से आगे बढ़ने लगा तो पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। पुलिस की Barricading के बाद डॉक्टरों ने मौके पर नारेबाजी शुरू कर दी। आगे बढ़ने की कोशिश के दौरान दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। पुलिस लगातार प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थान से आगे नहीं जाने के लिए समझाती रही। चारों तरफ से रास्ते किए गए बंद प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने हमीदिया के आसपास कई रास्तों को बंद कर दिया। बैरिकेड लगाकर आवाजाही को नियंत्रित किया गया। मौके पर अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की भी तैनाती की गई, ताकि भीड़ को संभाला जा सके। Water Cannon की मौजूदगी से साफ था कि प्रशासन किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी में था। हालांकि, डॉक्टरों का प्रदर्शन अपनी मांगों को लेकर जारी रहा। मांगों पर सरकार से जवाब चाहते हैं Intern Doctors प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि वे अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। CM House तक मार्च के जरिए उनका उद्देश्य सीधे सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर खींचना था। फिलहाल पुलिस ने डॉक्टरों को मुख्यमंत्री आवास की ओर जाने से रोक दिया है। हमीदिया अस्पताल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है और स्थिति पर पुलिस लगातार नजर बनाए हुए है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे ज्यादा चर्चा डॉक्टरों की मांगों और सरकार की ओर से संभावित बातचीत को लेकर है। अब देखना होगा कि प्रदर्शन के बाद प्रशासन और इंटर्न डॉक्टरों के बीच क्या समाधान निकलता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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