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Census 2027

Census 2027 India 33 सवालों के साथ शुरू होगा First Phase Live-in Couple भी होंगे Married Count

भारत में जनगणना 2027 (Census 2027) को लेकर तैयारियां अब जमीन पर दिखने लगी हैं। लंबे इंतजार के बाद सरकार ने पहले चरण यानी House Listing and Housing Census के लिए 33 अहम सवालों की सूची जारी कर दी है। Online Self-Enumeration Portal: घर बैठे भरें जानकारी इस बार की सबसे बड़ी खासियत यह है कि लोग Online Self-Enumeration Portal के जरिए खुद जानकारी दर्ज कर सकेंगे। अब सिर्फ गणनाकर्मी पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी। परिवार का जिम्मेदार सदस्य मोबाइल नंबर और OTP के जरिए पोर्टल पर लॉगिन करके अपने घर की जानकारी पहले से भर सकता है। बाद में जब census enumerator घर आएगा, तो वह सिर्फ जानकारी का सत्यापन करेगा। इससे लोगों का समय बचेगा और डेटा की accuracy भी बढ़ेगी। पहले चरण के 33 सवाल: घर और जीवन स्तर की पूरी जानकारी पहले चरण में पूछे जाने वाले सवाल सीधे घर और जीवन स्तर से जुड़े हैं। इनमें शामिल हैं: सरकार का उद्देश्य यह है कि इन आंकड़ों से देश की सामाजिक और आर्थिक स्थिति की सही तस्वीर सामने आए और welfare schemes को ground reality के अनुसार डिजाइन किया जा सके। Stable Live-in Couples भी होंगे Married Count में इस बार का सबसे चर्चित बदलाव है stable live-in couples को married category में गिनना। यदि कोई जोड़ा लंबे समय से साथ रह रहा है और उसका रिश्ता स्थिर पारिवारिक इकाई की तरह है, तो जनगणना में उन्हें “married” के रूप में दर्ज किया जाएगा। ध्यान रहे, यह सिर्फ census classification के लिए है और इसका कानूनी विवाह से कोई संबंध नहीं है। क्यों महत्वपूर्ण है Census 2027 का डेटा मानवीय नजरिए से देखें तो यह बदलाव भारत के बदलते सामाजिक ढांचे को भी दर्शाता है। बड़े शहरों में live-in relationships, nuclear families और डिजिटल भागीदारी अब आम होती जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि Census 2027 data आने वाले वर्षों में housing, sanitation, internet access, urban planning और welfare schemes के लिए निर्णायक साबित होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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बंगाल

BJP vs TMC बंगाल में Election Hijack का दावा, Assam में Congress-AIUDF Clash से बढ़ा तनाव

चुनाव से पहले बंगाल में सियासी पारा हाई पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मी के बीच सियासी माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि राज्य के कई इलाकों में मतदाताओं पर दबाव बनाया जा रहा है और उन्हें खुले तौर पर धमकाने की कोशिश हो रही है। इसी मुद्दे को लेकर BJP ने चुनाव आयोग से शिकायत दर्ज कर निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने की मांग की है। BJP का आरोप: वोटर्स को डराया जा रहा BJP नेताओं का आरोप है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में TMC कार्यकर्ता बूथ स्तर पर माहौल अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी का दावा है कि कुछ संवेदनशील इलाकों में वोटर्स को डराने की वजह से लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि इस बार बंगाल का चुनाव सिर्फ राजनीतिक मुकाबला नहीं, बल्कि free and fair election की बड़ी परीक्षा भी माना जा रहा है। TMC का पलटवार और बढ़ता राजनीतिक तनाव दूसरी तरफ, TMC लगातार BJP पर पलटवार करते हुए चुनावी एजेंसियों और प्रशासनिक फैसलों के जरिए दबाव बनाने का आरोप लगा रही है। मतदाता सूची, अधिकारियों के तबादले और बूथ प्रबंधन को लेकर दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। जमीनी स्तर पर यह तनाव कई जगह कार्यकर्ताओं की झड़पों के रूप में भी दिखाई दे रहा है, जिससे चुनावी हिंसा की आशंका बढ़ गई है। Assam में Congress-AIUDF कार्यकर्ताओं के बीच झड़प इसी बीच असम से भी राजनीतिक तनाव की खबर सामने आई है। यहां कांग्रेस और AIUDF कार्यकर्ताओं के बीच झड़प होने की सूचना है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक विवाद स्थानीय स्तर पर समर्थकों की मौजूदगी और बूथ प्रभाव को लेकर शुरू हुआ, जो देखते ही देखते टकराव में बदल गया। हालांकि प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर हालात को संभाल लिया, लेकिन इस घटना ने राज्य की चुनावी गर्मी को और बढ़ा दिया है। क्या कहते हैं चुनावी संकेत? बंगाल और असम की इन घटनाओं से साफ है कि चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, राजनीतिक दलों के बीच संघर्ष और आक्रामक होता जा रहा है। मतदाताओं की नजर अब चुनाव आयोग और सुरक्षा एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी है। आने वाले दिनों में दोनों राज्यों का चुनावी माहौल और भी हाई-वोल्टेज होने के संकेत दे रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Nitish Kumar

Bihar Politics Nitish Kumar ने छोड़ा पद बोले अशोक चौधरी- दूसरा नीतीश नहीं

बिहार की राजनीति में सोमवार का दिन बेहद अहम साबित हुआ। मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने बिहार विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से इस्तीफा देकर एक नई राजनीतिक पारी की शुरुआत कर दी। इसी के साथ भाजपा नेता Nitin Nabin ने भी अपने विधायक (MLA) पद से त्यागपत्र दे दिया। दोनों नेताओं के इस कदम ने राज्य की सियासत में हलचल तेज कर दी है। हाल ही में दोनों नेताओं के Rajya Sabha के लिए चुने जाने के बाद यह इस्तीफा लगभग तय माना जा रहा था, लेकिन जैसे ही इसकी औपचारिक घोषणा हुई, बिहार के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर और तेज हो गया। Ashok Choudhary Emotional: “देश में दूसरा नीतीश नहीं हो सकता” इस पूरे घटनाक्रम के बीच बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री Ashok Choudhary भावुक नजर आए। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा,“देश में दूसरा नीतीश नहीं हो सकता।” यह कहते हुए उनकी आंखें नम हो गईं। उनके इस बयान ने साफ कर दिया कि Nitish Kumar सिर्फ एक राजनीतिक चेहरा नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति की एक ऐसी धुरी हैं, जिनके आसपास पिछले कई वर्षों से सत्ता की दिशा तय होती रही है। उनकी भावुक प्रतिक्रिया ने जेडीयू कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच भी एक अलग भावनात्मक माहौल बना दिया। Rajya Sabha में नई पारी, Bihar Politics में नई चर्चा Nitish Kumar के राज्यसभा जाने को सिर्फ एक संसदीय बदलाव नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे Bihar Politics 2026 का बड़ा turning point भी कहा जा रहा है। विधानसभा, लोकसभा और विधान परिषद के बाद अब राज्यसभा में उनकी एंट्री उन्हें उन चुनिंदा नेताओं में शामिल करती है, जिन्हें भारतीय लोकतंत्र के लगभग हर बड़े सदन का अनुभव है। यही वजह है कि उनके इस फैसले को राजनीतिक रणनीति के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Nitin Nabin Resignation से Bankipur सीट पर बढ़ी हलचल वहीं भाजपा नेता Nitin Nabin के MLA पद छोड़ने के बाद Bankipur Assembly Seat पर उपचुनाव की संभावना तेज हो गई है। पटना की इस अहम सीट पर अब सभी दलों की नजर टिक गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सीट आने वाले समय में NDA और विपक्ष, दोनों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन सकती है। क्या Bihar को मिलेगा नया CM? Nitish Kumar के इस कदम के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या बिहार को जल्द नया मुख्यमंत्री मिल सकता है? हालांकि अभी आधिकारिक तौर पर कुछ साफ नहीं है, लेकिन सत्ता के गलियारों में नए नेतृत्व को लेकर चर्चा शुरू हो चुकी है। कई नामों पर अटकलें लगाई जा रही हैं और आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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ईरान

Middle East Crisis ईरान जंग, Oil Prices और Global Tension की पूरी कहानी

मध्य पूर्व में जारी Iran War 2026 अब सिर्फ एक क्षेत्रीय टकराव नहीं रहा, बल्कि यह पूरी दुनिया की राजनीति, तेल बाज़ार और आम लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी को प्रभावित करने वाला बड़ा संकट बन चुका है। दुनिया भर में लोग एक ही सवाल पूछ रहे हैं—क्या ईरान जंग जल्द खत्म होगी, या यह और बड़ा रूप ले सकती है? हाल की घटनाओं को एक साथ देखें तो तस्वीर दो हिस्सों में बंटी दिखती है। एक तरफ सैन्य तनाव कम होने के संकेत नहीं मिल रहे, वहीं दूसरी तरफ बैक-चैनल diplomacy तेज़ हो गई है। यही वजह है कि इस संघर्ष ने लोगों के मन में डर के साथ उम्मीद भी जगा दी है। क्या शांति की शुरुआत हो चुकी है? सूत्रों के अनुसार अमेरिका की तरफ से ईरान को एक विस्तृत ceasefire proposal दिया गया है। इसमें sanctions relief, missile limits, nuclear monitoring और Gulf shipping routes को सुरक्षित करने जैसे अहम बिंदु शामिल हैं। ईरान ने आधिकारिक तौर पर सीधे संवाद से दूरी बनाई है, लेकिन प्रस्ताव को पूरी तरह नकारा भी नहीं है। यही वह बिंदु है जहां दुनिया को राहत की उम्मीद दिखाई देती है। आम लोगों के लिए इसका मतलब सिर्फ राजनीतिक समझौता नहीं, बल्कि तेल की कीमतों में राहत, शेयर बाजार में स्थिरता और वैश्विक तनाव में कमी भी है। जमीनी हालात अब भी तनावपूर्ण हालांकि बातचीत की खबरें उम्मीद देती हैं, लेकिन जमीन पर हालात अभी भी नाजुक हैं। खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं, अमेरिकी और सहयोगी बल हाई अलर्ट पर हैं, जबकि ईरान समर्थित समूहों की सक्रियता ने पूरे इलाके को संवेदनशील बना दिया है। इसी वजह से विशेषज्ञ मानते हैं कि diplomacy और military pressure दोनों साथ-साथ चल रहे हैं। यह रणनीति अक्सर तब अपनाई जाती है जब दोनों पक्ष बिना पूरी तरह झुके बेहतर शर्तों पर समझौता चाहते हों। Oil Crisis और India पर असर इस संघर्ष का सबसे बड़ा असर global oil supply पर देखा जा रहा है। होरमुज़ जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते खतरे ने crude oil और LNG supply chain को प्रभावित किया है। भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए यह चिंता का विषय है, क्योंकि तेल महंगा होने का सीधा असर पेट्रोल, डीज़ल, ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा के सामान की कीमतों पर पड़ता है। एक आम परिवार के नजरिए से देखें तो यह सिर्फ विदेश नीति की खबर नहीं है। इसका असर रसोई गैस, यात्रा खर्च, ऑनलाइन डिलीवरी फीस और महंगाई तक महसूस हो सकता है। यही human side इस युद्ध को दुनिया के हर घर तक पहुंचाती है। युद्ध सिर्फ सीमाओं पर नहीं होता हर जंग की सबसे बड़ी कीमत आम लोग चुकाते हैं। ईरान, खाड़ी देशों और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले परिवार लगातार अनिश्चितता में जी रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई, कारोबार, रोज़गार और सामान्य जीवन सबसे पहले प्रभावित होता है। दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी लोग तेल और बाजार की मार झेलते हैं। यही कारण है कि लोग सिर्फ यह नहीं जानना चाहते कि कौन जीतेगा, बल्कि यह जानना चाहते हैं कि शांति कब लौटेगी। अगले 7–14 दिन क्यों अहम हैं? अगर मौजूदा ceasefire talks सकारात्मक दिशा में बढ़ती हैं, तो आने वाले 7–14 दिन इस Iran conflict के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं। सीमित युद्धविराम, strategic deal या temporary truce की संभावना बनी हुई है। लेकिन अगर किसी बड़े oil facility, military base या shipping route पर हमला होता है, तो यह संघर्ष लंबा खिंच सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Nitin Naveen

BJP अध्यक्ष Nitin Naveen ने MLA पद छोड़ा इस्तीफे के बाद Bihar Politics में हलचल तेज

पटना की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम पटना की राजनीति में सोमवार को एक अहम मोड़ देखने को मिला, जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन (Nitin Naveen) ने बांकीपुर विधानसभा सीट से विधायक पद से इस्तीफा दे दिया। लंबे समय से इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे नितिन नवीन के इस फैसले ने बिहार की राजनीतिक हलचल को तेज कर दिया है। अब उनका फोकस राज्यसभा और पार्टी संगठन में नई जिम्मेदारियों पर रहेगा। राज्यसभा की नई जिम्मेदारी बनी वजह नितिन नवीन हाल ही में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। ऐसे में विधायक पद से उनका इस्तीफा राजनीतिक रूप से अपेक्षित माना जा रहा था। पार्टी के राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते दायित्वों को देखते हुए यह कदम उनके नए राजनीतिक सफर की शुरुआत माना जा रहा है। जनता के नाम भावुक संदेश इस्तीफे के बाद उन्होंने बांकीपुर की जनता, कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए एक भावुक संदेश साझा किया, जिसने लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि बांकीपुर की जनता ने उन्हें हमेशा प्यार, भरोसा और अपार समर्थन दिया, जिसे वे जीवनभर नहीं भूल पाएंगे। उन्होंने बेहद आत्मीय शब्दों में लिखा कि “विधायक पद छोड़ सकता हूं, लेकिन बांकीपुर की जनता से मेरा रिश्ता कभी खत्म नहीं होगा।” यही लाइन उनके संदेश को खास बनाती है और यही वजह है कि यह खबर लोगों के बीच तेजी से चर्चा में है। बांकीपुर से रहा गहरा जुड़ाव नितिन नवीन का बांकीपुर से जुड़ाव सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह रिश्ता वर्षों के भरोसे, विकास कार्यों और जनता के साथ सीधे संवाद से बना है। कई बार विधायक चुने जाने के बाद उन्होंने इस सीट को भाजपा के मजबूत गढ़ के रूप में स्थापित किया। उपचुनाव की चर्चा तेज उनके इस्तीफे के बाद यहां उपचुनाव (by-election) की चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सीट भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन सकती है और संभावित उम्मीदवारों के नामों पर जल्द चर्चा शुरू होगी। राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ेगी भूमिका अब माना जा रहा है कि नितिन नवीन की भूमिका बिहार से आगे बढ़कर राष्ट्रीय राजनीति में और प्रभावशाली होगी। भाजपा संगठन में उनकी सक्रियता पहले से मजबूत रही है, और राज्यसभा पहुंचने के बाद उनकी जिम्मेदारियां और बढ़ना तय माना जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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ममता बनर्जी पर Amit Shah का हमला: बोले- चुनाव आते ही ‘विक्टिम कार्ड’ खेलती हैं

ममता बनर्जी पर Amit Shah का हमला: बोले- चुनाव आते ही ‘विक्टिम कार्ड’ खेलती हैं

पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला है। शाह ने कहा कि ममता बनर्जी हर चुनाव में खुद को पीड़ित दिखाने की कोशिश करती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कभी वह चोट का बहाना बनाती हैं, कभी सिर पर पट्टी बांधकर लोगों की सहानुभूति लेने की कोशिश करती हैं। अमित शाह यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि यह सब सिर्फ जनता को भावनात्मक रूप से प्रभावित करने के लिए किया जाता है, ताकि वोट हासिल किए जा सकें। इसी के साथ BJP ने TMC सरकार के खिलाफ एक ‘चार्जशीट’ भी जारी की है। इस चार्जशीट में राज्य सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जैसे भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति और विकास कार्यों में कमी। BJP का कहना है कि बंगाल की जनता अब सब समझ चुकी है और इस बार बदलाव चाहती है। वहीं, TMC की ओर से इन आरोपों को पूरी तरह से बेबुनियाद बताया गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होगा। ऐसी ही और अपडेट्स के लिए विजिट करें: DeshHarPal News Portal
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JEE

Breaking News JEE Main 2026 Kuwait और Dubai के उम्मीदवारों के लिए बड़ी अपडेट

NTA ने JEE Main 2026 अप्रैल सेशन के लिए Kuwait और Dubai के उम्मीदवारों की city intimation slip जारी कर दी है। जानें कैसे करें चेक और admit card कब आएगा। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने JEE Main 2026 (April Session) के लिए एक अहम अपडेट जारी किया है। एजेंसी ने Kuwait और Dubai में परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों के लिए City Intimation Slip रिलीज कर दी है। इस स्लिप के जरिए उम्मीदवार यह जान सकते हैं कि उनकी परीक्षा किस शहर में आयोजित होगी, ताकि वे पहले से अपनी यात्रा और तैयारी की योजना बना सकें। कैसे करें City Intimation Slip डाउनलोड? उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करके अपनी स्लिप डाउनलोड कर सकते हैं: Admit Card कब आएगा? City Intimation Slip जारी होने के बाद अब उम्मीदवारों को Admit Card का इंतजार है।माना जा रहा है कि NTA जल्द ही अप्रैल सेशन के लिए एडमिट कार्ड भी जारी करेगा। ध्यान दें: City Slip और Admit Card अलग-अलग होते हैं। परीक्षा कब होगी? JEE Main 2026 का अप्रैल सेशन जल्द ही निर्धारित तारीखों पर आयोजित किया जाएगा। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे नियमित रूप से आधिकारिक वेबसाइट चेक करते रहें। छात्रों के लिए जरूरी सलाह Important Links हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Noida

Noida International Airport PM Modi ने किया उद्घाटन Asia के सबसे बड़े Airport में शामिल होने की तैयारी

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने आज Noida International Airport के पहले चरण का उद्घाटन किया। लंबे समय से इंतज़ार किया जा रहा यह प्रोजेक्ट अब हकीकत बन चुका है और इससे दिल्ली-एनसीआर के यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलने की उम्मीद है। सुबह से ही कार्यक्रम को लेकर उत्साह देखने को मिला। स्थानीय लोगों से लेकर उद्योग जगत तक, हर किसी की नजर इस एयरपोर्ट पर टिकी रही। उद्घाटन के साथ ही यह साफ हो गया कि आने वाले समय में यह एयरपोर्ट देश की एविएशन इंडस्ट्री की तस्वीर बदल सकता है। क्यों खास है Noida International Airport? यह सिर्फ एक एयरपोर्ट नहीं, बल्कि एक बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है। इसे कई चरणों में विकसित किया जा रहा है और पूरा होने के बाद यह एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में गिना जाएगा। पहले चरण के बाद भी इसकी क्षमता काफी बड़ी है, जबकि भविष्य में इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि हर साल करोड़ों यात्री यहां से सफर कर सकें। Delhi-NCR के लिए Game Changer अभी ज्यादातर उड़ानें Indira Gandhi International Airport से संचालित होती हैं, जहां अक्सर भीड़ और दबाव देखा जाता है। नया एयरपोर्ट इस दबाव को कम करेगा और खासकर नोएडा, ग्रेटर नोएडा, आगरा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए सफर आसान बनाएगा। इससे समय की बचत होगी और कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी। Fast Boarding का अनुभव इस एयरपोर्ट की सबसे दिलचस्प बात है इसकी “फास्ट प्रोसेसिंग” व्यवस्था।यहां कोशिश की गई है कि यात्री एयरपोर्ट में प्रवेश से लेकर बोर्डिंग गेट तक कम समय में पहुंच सकें। अगर सब कुछ योजना के अनुसार चलता है, तो आने वाले समय में यात्रियों को लंबी लाइनों और इंतज़ार से काफी हद तक राहत मिल सकती है। कब शुरू होंगी फ्लाइट्स? उद्घाटन के बाद भी यात्रियों को थोड़ा इंतज़ार करना होगा।अभी यहां से नियमित उड़ानें शुरू नहीं हुई हैं, लेकिन उम्मीद है कि जल्द ही कमर्शियल फ्लाइट्स शुरू कर दी जाएंगी। स्थानीय लोगों में खुशी जेवर और आसपास के इलाकों में इस प्रोजेक्ट को लेकर खास उत्साह है। लोगों का मानना है कि इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और इलाके का तेजी से विकास होगा। छोटे व्यापारियों से लेकर बड़े निवेशकों तक, सभी को इस एयरपोर्ट से नई संभावनाएं नजर आ रही हैं। ट्रैफिक और सुरक्षा इंतजाम प्रधानमंत्री के दौरे को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए। कई जगहों पर ट्रैफिक डायवर्जन भी लागू किए गए ताकि कार्यक्रम बिना किसी बाधा के पूरा हो सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Assam

Assam Politics हिमंता सरमा के बयान से सियासत गरम, शिवराज बोले– जनता को BJP पर भरोसा

Assam की राजनीति में तेज हुई बयानबाजी Assam की राजनीति में इन दिनों बयानबाजी तेज हो गई है। चुनावी माहौल के बीच नेताओं के तीखे बयान सुर्खियां बना रहे हैं। इसी कड़ी में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस में मौजूद बड़ी संख्या में हिंदू नेता और कार्यकर्ता पार्टी से असंतुष्ट हैं और आने वाले समय में वे पार्टी छोड़ सकते हैं। कांग्रेस को लेकर हिमंता सरमा का बड़ा दावा हिमंता सरमा ने कहा कि यदि यही स्थिति बनी रही तो भविष्य में कांग्रेस का स्वरूप बदल सकता है। उनके मुताबिक कई कार्यकर्ता पार्टी की मौजूदा राजनीति से खुद को जुड़ा हुआ महसूस नहीं कर पा रहे हैं। इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में चर्चा और तेज हो गई है। असम में बीजेपी के समर्थन का दावा दूसरी ओर, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता शिवराज सिंह चौहान ने भी असम में चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने राज्य में विकास और स्थिरता पर काम किया है, जिसका असर जमीन पर दिखाई दे रहा है। विकास और योजनाओं का जिक्र शिवराज सिंह चौहान के अनुसार सड़क, बुनियादी ढांचा और जनकल्याण से जुड़ी कई योजनाओं का फायदा आम लोगों तक पहुंचा है। यही वजह है कि असम में बड़ी संख्या में लोग बीजेपी के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। चुनावी माहौल में बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव नजदीक आते ही ऐसे बयान आम हो जाते हैं। हर दल अपने तरीके से मतदाताओं तक संदेश पहुंचाने की कोशिश करता है। असम में भी यही तस्वीर देखने को मिल रही है, जहां आरोप-प्रत्यारोप के बीच सियासी माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। आने वाले दिनों में चुनावी गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता किसे अपना समर्थन देती है और असम की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Nepal

Gen-Z Protest Case Nepal में बड़ा एक्शन, Balen Shah सरकार ने पूर्व PM Oli को किया गिरफ्तार

Nepal की राजनीति में इन दिनों बड़ा भूचाल देखने को मिल रहा है। नए प्रधानमंत्री Balendra Shah के पद संभालते ही पूर्व प्रधानमंत्री K. P. Sharma Oli को गिरफ्तार कर लिया गया है। यह कार्रवाई 2025 में हुए चर्चित Gen-Z Protest के दौरान हुई हिंसा और मौतों से जुड़े मामले में की गई है। सरकारी जांच रिपोर्ट के अनुसार, उस आंदोलन के दौरान हुई झड़पों और अव्यवस्था में करीब 77 लोगों की मौत हुई थी। अब इसी मामले में लापरवाही और प्रशासनिक विफलता के आरोपों की जांच चल रही है। Gen-Z Protest: कैसे शुरू हुआ नेपाल का बड़ा आंदोलन साल 2025 में नेपाल के कई शहरों में युवाओं ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू किए। सोशल मीडिया के जरिए संगठित हुए इन प्रदर्शनों को धीरे-धीरे “Gen-Z Protest” के नाम से पहचान मिली। प्रदर्शन करने वाले युवाओं की मुख्य मांगें थीं: शुरुआत शांतिपूर्ण थी, लेकिन कुछ ही दिनों में हालात बिगड़ गए। कई जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ, जिससे हिंसा भड़क गई। सरकारी इमारतों को नुकसान पहुंचा और कई शहरों में कर्फ्यू तक लगाना पड़ा। इन झड़पों के दौरान दर्जनों लोग घायल हुए और 77 लोगों की मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। जांच रिपोर्ट में क्या सामने आया घटनाओं के बाद सरकार ने एक जांच आयोग बनाया था। आयोग की रिपोर्ट में कहा गया कि उस समय की सरकार हालात को संभालने में पूरी तरह सफल नहीं रही। रिपोर्ट के अनुसार: इसी आधार पर तत्कालीन प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली और उस समय के गृह मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की जांच की सिफारिश की गई। बालेन शाह सरकार की कार्रवाई नए प्रधानमंत्री बालेन शाह के नेतृत्व में बनी सरकार ने सत्ता संभालने के बाद इस मामले की फाइलें फिर से खोलीं। जांच एजेंसियों को निर्देश दिए गए कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए। इसके बाद पुलिस ने पूर्व प्रधानमंत्री ओली को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया और बाद में उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया। सरकार का कहना है कि यह कदम किसी राजनीतिक बदले की भावना से नहीं बल्कि जवाबदेही तय करने के लिए उठाया गया है। विपक्ष ने उठाए सवाल हालांकि ओली की पार्टी और समर्थकों ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह गिरफ्तारी राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश हो सकती है। नेपाल में पहले भी कई बार राजनीतिक टकराव देखने को मिला है, इसलिए इस मामले को लेकर बहस तेज हो गई है। Nepal की राजनीति पर असर विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले समय में Nepal की राजनीति को गहराई से प्रभावित कर सकता है। अगर अदालत में आरोप साबित होते हैं तो यह देश की राजनीति में एक ऐतिहासिक घटना मानी जाएगी। फिलहाल पूरा मामला अदालत में जाएगा और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही साफ हो पाएगा कि उस समय की घटनाओं के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाएगा। लेकिन इतना तय है कि Gen-Z Protest और उससे जुड़ी यह कार्रवाई नेपाल की राजनीति में लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sugar Rate Hike: त्योहारों से पहले चीनी के दाम बढ़े, Blinkit-Swiggy पर खरीदना हुआ Limited

चीनी (Sugar), जो हर घर की रसोई की रोजमर्रा की जरूरत है, इन दिनों लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। पिछले कुछ हफ्तों में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसी बीच Blinkit, Swiggy Instamart, BigBasket और D-Mart जैसे रिटेल और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर चीनी की खरीद को लेकर लिमिट लगाई गई है। कई जगहों पर ग्राहक एक बार में 3 से 5 किलो तक ही चीनी खरीद पा रहे हैं। यानी अगर घर में ज्यादा मात्रा में चीनी खरीदने की जरूरत है, तो एक साथ बड़ी खरीदारी करना अब आसान नहीं है। Sugar Price: एक महीने में तेजी से बढ़े दाम Sugar की कीमतों में हालिया तेजी ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹48 प्रति किलो के आसपास थी, जो अगस्त में बढ़कर ₹55 से ऊपर पहुंच गई। इसके बाद कुछ बाजारों में कीमतें और ऊपर गई हैं। शहर और बाजार के हिसाब से कीमतों में अंतर जरूर है, लेकिन जिस रफ्तार से दाम बढ़े हैं, उसका असर घर के मासिक बजट पर साफ दिखाई दे रहा है। Online Grocery पर क्यों लगाई गई खरीद Limit? Blinkit और Swiggy Instamart जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर खरीदारी की लिमिट लगाए जाने के पीछे मुख्य वजह उपलब्ध स्टॉक को संतुलित रखना मानी जा रही है। त्योहारी सीजन में चीनी की मांग अचानक बढ़ जाती है। मिठाइयों से लेकर घर में बनने वाले पकवानों तक, इस दौरान चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनियां ज्यादा मात्रा में खरीदारी को रोककर स्टॉक को ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, यह लिमिट हर जगह एक जैसी नहीं है। कुछ स्थानों पर 5 किलो तक की खरीद की अनुमति है, जबकि कुछ जगहों पर इससे कम मात्रा की सीमा दिखाई दे रही है। चीनी महंगी होने की क्या है वजह? चीनी के दाम बढ़ने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। घरेलू उत्पादन में कमी, मौसम से जुड़ी परेशानियां, बढ़ती मांग और बाजार में स्टॉक को लेकर गतिविधियां कीमतों पर दबाव बना रही हैं। त्योहारी सीजन भी इस समय एक बड़ा फैक्टर है। रक्षाबंधन के बाद अब आने वाले त्योहारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसका सीधा असर चीनी की खपत पर पड़ सकता है। सरकार ने Duty-Free Sugar Import को दी मंजूरी बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के Duty-Free Import की अनुमति दी है। सरकार का लक्ष्य बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है। इसके अलावा बड़े थोक खरीदारों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा में भी बदलाव किया गया है। इससे बाजार में जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करने की गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। आम लोगों के लिए क्या मतलब? फिलहाल इसका सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो महीने का राशन एक साथ खरीदते हैं। जहां दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीद सीमा लागू है, वहां लोगों को जरूरत के हिसाब से छोटी मात्रा में चीनी खरीदनी पड़ सकती है। दूसरी तरफ, सरकार की ओर से सप्लाई बढ़ाने के कदमों के बाद बाजार में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। अगर नई चीनी समय पर बाजार में पहुंचती है और त्योहारी मांग के मुताबिक स्टॉक उपलब्ध रहता है, तो कीमतों में आगे राहत मिल सकती है। Sugar Price पर आगे रहेगी नजर चीनी के बढ़ते दाम इस समय सिर्फ घरेलू बजट का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि आने वाले त्योहारी सीजन के लिए भी अहम हैं। सरकार, मिलों और रिटेल कंपनियों के फैसलों पर अब बाजार की नजर रहेगी। फिलहाल ग्राहकों के लिए बेहतर यही है कि जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी करें और अलग-अलग दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कीमतों की तुलना कर लें। आने वाले दिनों में सप्लाई की स्थिति साफ होने के साथ चीनी के दाम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
Gold-Silver

Gold-Silver Price: त्योहार से पहले मिली राहत, सोना-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट

Gold-Silver Price Today: रक्षाबंधन की खरीदारी के बीच सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए बाजार से राहत वाली खबर आई है। 27 अगस्त 2026 को सोने और चांदी दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर ₹1,58,477 पर आ गया। वहीं, 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 घटकर करीब ₹2,40,168 रह गया। त्योहार से ठीक पहले कीमतों में आई इस कमी से उन लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है, जो राखी के मौके पर बहन या परिवार के लिए सोने-चांदी की ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं। Gold Price Today: सोने के भाव में ₹2,860 की गिरावट 27 अगस्त को 24 कैरेट सोने की कीमत में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली। IBJA आधारित आंकड़ों के अनुसार, सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम टूटकर ₹1,58,477 पर पहुंच गया। वहीं, 23 कैरेट सोना करीब ₹1,57,842, 22 कैरेट सोना लगभग ₹1,45,165 और 18 कैरेट सोना करीब ₹1,18,858 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रहा। हालांकि, यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि शहर और ज्वेलर के हिसाब से Gold Rate थोड़ा अलग हो सकता है। ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और दूसरे शुल्क भी जुड़ते हैं। Silver Price Today: चांदी भी हुई ₹2,791 सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट आई है। 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 कम होकर करीब ₹2,40,168 पर आ गया। चांदी में पिछले दिनों तेजी देखने को मिली थी, इसलिए मौजूदा गिरावट के बावजूद इसका भाव काफी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में चांदी की मांग बढ़ने से इसकी कीमत पर भी असर पड़ सकता है। Raksha Bandhan से पहले क्यों खास है Gold-Silver Price? रक्षाबंधन के मौके पर लोग सिर्फ राखी और मिठाई ही नहीं खरीदते, बल्कि कई परिवार इस दिन सोने या चांदी की छोटी ज्वेलरी खरीदना भी पसंद करते हैं। ऐसे में त्योहार से एक दिन पहले Gold और Silver के दाम में आई गिरावट खरीदारों के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है। अगर आप भी खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं तो बाजार में जाने से पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर देख लें। ऑनलाइन दिखने वाला IBJA या बुलियन रेट और ज्वेलरी शॉप का अंतिम बिल एक जैसा होना जरूरी नहीं है। सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान सोने की ज्वेलरी खरीदते समय केवल Gold Rate देखना काफी नहीं है। बिल बनते समय मेकिंग चार्ज, GST और अन्य शुल्क जुड़ सकते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले ज्वेलर से पूरी कीमत का ब्रेकअप मांगना बेहतर रहेगा। साथ ही, सोने की शुद्धता के लिए BIS Hallmark जरूर जांचें। इससे आपको खरीदे जा रहे सोने की शुद्धता के बारे में भरोसा मिलता है। आगे क्या हो सकता है Gold और Silver का भाव? सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, ब्याज दरों की उम्मीद और निवेशकों की खरीदारी जैसे कई फैक्टर कीमती धातुओं के भाव को प्रभावित करते हैं। इसलिए आज आई गिरावट को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि आने वाले दिनों में कीमतें लगातार नीचे जाएंगी। बाजार की चाल बदलने में ज्यादा समय नहीं लगता। Gold-Silver Price Today का सीधा अपडेट रक्षाबंधन से पहले 24 कैरेट Gold करीब ₹2,860 सस्ता होकर ₹1,58,477 प्रति 10 ग्राम और Silver करीब ₹2,791 गिरकर ₹2,40,168 प्रति किलो पर आ गई है। अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने जा रहे हैं, तो अंतिम खरीदारी से पहले अपने स्थानीय बाजार का लेटेस्ट रेट जरूर जांचें।
Raksha Bandhan

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने से पहले जान लें Bhadra का समय, ये है शुभ Muhurat

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, अपनापन और थोड़ी-सी नोकझोंक हमेशा बनी रहती है। इन्हीं खूबसूरत रिश्तों को सेलिब्रेट करने वाला रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी को लेकर इस बार एक सवाल काफी लोगों के मन में है—27 अगस्त या 28 अगस्त, आखिर किस दिन भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ रहेगा? पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। Raksha Bandhan 2026 Date: 27 या 28 अगस्त? रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे के बाद शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन मनाने की परंपरा रहेगी। यानी बहनें 28 अगस्त को भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। Rakhi Shubh Muhurat 2026: इस समय बांधें राखी 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह का समय शुभ माना जा रहा है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार सुबह करीब 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताया गया है। हालांकि, शुभ मुहूर्त में शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप किसी खास शहर में हैं, तो वहां के पंचांग से समय जरूर मिला लें। Bhadra Kaal: इस बार नहीं होगी बड़ी परेशानी रक्षाबंधन पर भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। यही वजह है कि हर साल राखी बांधने से पहले लोग भद्रा समाप्त होने का इंतजार करते हैं। इस बार राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को राखी बांधने के प्रमुख समय में भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। Raksha Bandhan 2026: एक नजर में पूरी जानकारी जानकारी विवरण रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार पर्व सावन पूर्णिमा पूर्णिमा शुरुआत 27 अगस्त की सुबह पूर्णिमा समाप्त 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे राखी बांधने का शुभ समय सुबह करीब 5:57 से 9:48 बजे तक भद्रा 28 अगस्त के प्रमुख राखी मुहूर्त में नहीं Rakhi बांधने की पूजा विधि रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके भगवान का ध्यान करें और पूजा की तैयारी करें। राखी की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, फूल, मिठाई और राखी रखें। भाई को आसन पर बैठाकर पहले तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती करें और शुभ मुहूर्त में उसकी कलाई पर राखी बांधें। फिर मिठाई खिलाकर भाई के सुखी और खुशहाल जीवन की कामना करें। भाई भी बहन को प्यार और सम्मान के साथ उपहार देता है और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प करता है। Raksha Bandhan का असली मतलब क्या है? राखी का धागा देखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना बहुत बड़ी है। बचपन में एक-दूसरे से लड़ने वाले भाई-बहन जब बड़े होते हैं तो यही रिश्ता सबसे मजबूत सहारा बन जाता है। रक्षाबंधन इसी भरोसे और अपनापन को फिर से महसूस करने का दिन है। इसलिए इस बार राखी बांधते समय सिर्फ मुहूर्त ही नहीं, बल्कि उस रिश्ते की मिठास को भी याद रखें, जो जिंदगी के हर पड़ाव पर साथ चलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kanpur

Kanpur Plane Crash: अचानक नीचे गिरा Training Plane, दो पायलटों की मौत

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) से गुरुवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई। गंगा बैराज के पास नत्थूपुरवा गांव के नजदीक एक Twin-Engine Training Aircraft खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार इंस्ट्रक्टर पायलट और ट्रेनी पायलट की मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने इलाके को घेरकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। Training Flight के दौरान हुआ हादसा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विमान ट्रेनिंग उड़ान पर था और इसी दौरान हादसे का शिकार हो गया। यह चार सीटों वाला ट्विन-इंजन विमान था। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि विमान नीचे गिरने से पहले आसपास के लोगों ने तेज आवाज सुनी थी। हालांकि, उस आवाज की वजह क्या थी, इसे लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि विमान गंगा बैराज के करीब नत्थूपुरवा गांव के पास खुले खेत में गिरा। हादसा आबादी वाले इलाके से कुछ दूरी पर हुआ, जिसके बाद स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। हादसे के बाद मची अफरा-तफरी विमान के खेत में गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस और इमरजेंसी टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। दुर्घटनाग्रस्त विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और उसका मलबा खेत में बिखरा मिला। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित किया और दोनों पायलटों को मलबे से बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। शुरुआती रिपोर्टों में एक पायलट की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई थी। बाद में पुलिस अधिकारियों के हवाले से दोनों पायलटों की मौत की पुष्टि हुई। Crash की असली वजह अभी सामने नहीं आई कानपुर Plane Crash की वजह फिलहाल साफ नहीं है। शुरुआती स्तर पर विमान के अचानक नियंत्रण खोने और नीचे गिरने की बात सामने आई है, लेकिन तकनीकी खराबी, इंजन से जुड़ी समस्या या किसी अन्य कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अधिकारियों की ओर से दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। विमान के मलबे, उड़ान से जुड़ी जानकारी और घटनास्थल से मिले सबूतों की जांच के बाद ही Crash की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। Aviation Safety पर फिर उठे सवाल कानपुर में हुआ यह हादसा Flight Training के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि, अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसा किस वजह से हुआ और क्या इसके पीछे कोई तकनीकी या संचालन संबंधी कारण था। फिलहाल प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। कानपुर विमान हादसे से जुड़ी नई जानकारी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी। Kanpur Plane Crash Latest Update: गंगा बैराज के पास Training Aircraft के क्रैश होने से दो पायलटों की मौत ने इलाके में शोक का माहौल पैदा कर दिया है। हादसे की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी।
Share Market

Share Market Today: Sensex 77,250 के करीब, Nifty भी टूटा; जानें बाजार में क्यों आई गिरावट

भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) में गुरुवार, 27 अगस्त को कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty बढ़त के साथ खुले, लेकिन कुछ ही देर बाद बाजार की चाल बदल गई। बिकवाली बढ़ने से दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में पहुंच गए। सुबह 10:30 बजे Sensex 123.89 अंक की गिरावट के साथ 77,349.05 पर था, जबकि Nifty 24.60 अंक टूटकर 24,183.15 पर कारोबार कर रहा था। Sensex-Nifty पर बढ़ा दबाव गुरुवार की शुरुआत बाजार के लिए सकारात्मक रही। Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों को कुछ राहत मिली, लेकिन यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं पाई। Nifty 24,200 के स्तर के नीचे चला गया, वहीं Sensex भी शुरुआती बढ़त गंवाकर कमजोर हो गया। इससे पहले सुबह 10:13 बजे Reuters के आंकड़ों में Sensex 77,379.50 और Nifty 24,191.85 पर था। यानी उस समय दोनों इंडेक्स में हल्की गिरावट दर्ज की जा रही थी। FMCG और Media Shares में बिकवाली सेक्टोरल कारोबार की बात करें तो FMCG शेयरों पर दबाव नजर आया। शुरुआती कारोबार में Nifty FMCG इंडेक्स भी लाल निशान में था। इसके साथ ही Media शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। सुबह 10:30 बजे Nifty Media करीब 0.60 फीसदी नीचे 1,601.30 पर कारोबार कर रहा था। Media इंडेक्स इससे पहले लगातार दो कारोबारी सत्रों में बढ़त दर्ज कर चुका था। ऐसे में आज की गिरावट को कुछ हद तक मुनाफावसूली से भी जोड़कर देखा जा रहा है। HDFC Bank बना बाजार पर दबाव का बड़ा कारण आज बाजार में HDFC Bank का प्रदर्शन भी निवेशकों के रडार पर रहा। शेयर में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। Reuters के मुताबिक, अमेरिका में बैंक और उसके दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दायर एक securities lawsuit की खबर के बाद शेयर पर दबाव बढ़ा। Upstox के अनुसार, HDFC Bank में बिकवाली के चलते Sensex दिन के ऊपरी स्तर से करीब 300 अंक नीचे आया, जबकि Nifty 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसल गया। Global Market से मिले-जुले संकेत भारतीय बाजार को एक तरफ Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से सहारा मिला। Brent crude करीब 87.4 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया था। ईरान और ओमान के बीच Strait of Hormuz को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की खबरों से तेल आपूर्ति को लेकर चिंता कुछ कम हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों को लेकर बनी चिंता ने निवेशकों को थोड़ा सतर्क रखा। यही वजह रही कि एशियाई बाजारों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार में तेजी टिक नहीं सकी। निवेशकों की नजर अब बाजार की अगली चाल पर फिलहाल घरेलू बाजार में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। एक तरफ कच्चे तेल में नरमी और मजबूत ग्लोबल टेक्नोलॉजी संकेत सकारात्मक हैं, तो दूसरी तरफ HDFC Bank जैसे बड़े शेयरों में कमजोरी और सेक्टोरल बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है। ऐसे माहौल में Sensex और Nifty की आगे की दिशा, 24,200 के आसपास Nifty की चाल और प्रमुख सेक्टर्स में खरीदारी-बिकवाली पर निवेशकों की नजर रहेगी। बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय लेना बेहतर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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