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Apache Helicopter Joins Indian Army

अब भारत के दुश्मनों पर कहर बनकर टूटेगा ‘ब्लैक डेथ’

Apache Helicopter Joins Indian Army: अब दुश्मनों पर कहर बनकर टूटेगा ‘ब्लैक डेथ’ देश हरपल डेस्क | 22 जुलाई 202515 महीने की देरी के बाद आखिरकार इंडियन आर्मी को उसका पहला Apache AH-64E Attack Helicopter मिल गया है। 22 जुलाई को इसकी पहली खेप में तीन एडवांस्ड अटैक हेलीकॉप्टर आर्मी एविएशन कोर (AAC) को सौंपे गए। इंडियन आर्मी ने इसकी जानकारी अपने X (Twitter) हैंडल पर दी। मार्च 2024 में ही AAC ने एक स्क्वाड्रन गठित कर दी थी, और पायलट्स की ट्रेनिंग भी पूरी हो चुकी थी। अब अपाचे की तैनाती के साथ भारतीय सेना को युद्धक्षेत्र में एक नई धार मिलने जा रही है। पहले वायुसेना, अब थलसेना में एंट्री पहली बार 1984 में अमेरिका की सेना में शामिल हुआ Apache अब दुनिया के 17 से ज़्यादा देशों की सैन्य ताकत का हिस्सा है, जिनमें भारत भी शामिल है। इंडियन एयरफोर्स में 2015 से 22 अपाचे पहले से सेवा में हैं। उनकी शानदार ऑपरेशनल परफॉर्मेंस को देखते हुए 2020 में थलसेना के लिए 6 अपाचे की डील की गई थी। इस डील की कुल कीमत 600 मिलियन डॉलर (लगभग 5000 करोड़ रुपये) थी। अपाचे की ताकत: घातक हथियारों से लैस Apache AH-64E Guardian को दुनिया का सबसे खतरनाक अटैक हेलीकॉप्टर माना जाता है। इसमें अत्याधुनिक हथियारों और तकनीकों का संगम देखने को मिलता है। Hellfire Missiles 11 किलोमीटर की रेंज वाली ये मिसाइल टैंक, बंकर और हेलीकॉप्टर्स को पलभर में तबाह कर सकती है। ये laser-guided और radar-guided दोनों मोड में काम करती है। Hydra Rockets हर साइड में 19-19 रॉकेट्स वाले लॉन्चर लगे होते हैं। इनके फोल्डिंग फिन्स इन्हें अपने लक्ष्य पर सटीक वार करने में सक्षम बनाते हैं। Chain Gun नीचे की ओर लगी 30 mm की M230 Chain Gun एक मिनट में 600–650 राउंड तक फायर कर सकती है। इसकी मैगजीन में 1200 राउंड्स होते हैं। Ultra-Advanced Sensors इसके रोटर के ऊपर लगा Longbow Radar, सामने Night Vision Sensors और Laser Target Designator इसे रात में भी अचूक बनाते हैं। Radar & IR Jammer दुश्मन की मिसाइल को कंफ्यूज करने के लिए इसमें Radar Jammer और Infrared Jammer भी मौजूद हैं। टेक्निकल फीचर्स: एक नज़र में फीचर डिटेल क्रू 2 (पायलट + गनर) लंबाई 48.16 फीट ऊंचाई 15.49 फीट रोटर डायमीटर 48 फीट वजन (अधिकतम) 10,432 किलोग्राम अधिकतम स्पीड 280 किमी/घंटा क्लाइंब रेट 2,800 फीट/सेकंड ऑपरेशनल ऊंचाई 20,000 फीट शानदार इतिहास: ‘ब्लैक डेथ’ का कहर ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म (1991) में जब इराक की सेना पर अमेरिका ने धावा बोला, तो अपाचे ने अकेले ही 500 से ज्यादा टैंकों और सैकड़ों वाहनों को तबाह किया। इराकी सैनिकों ने इसे ‘Black Death’ नाम दिया था। उसके बाद पानामा (Operation Just Cause), गल्फ वॉर (2003) और अफगानिस्तान में भी अपाचे ने अपने जलवे दिखाए। भारत के लिए क्यों है खास? सबसे अहम बात ये है कि अपाचे का Fuselage भारत में बनता है, वह भी Tata Advanced Systems द्वारा। इससे इसकी मेंटेनेंस सस्ती और आसान हो जाती है। अब आर्मी को अगले तीन हेलीकॉप्टर की डिलीवरी का इंतजार है, जिससे पूरी स्क्वाड्रन ऑपरेशनल हो सकेगी।
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Vice President Jagdeep Dhankhar resignation, जगदीप धनखड़ इस्तीफा,

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे से सियासी गलियारों में हलचल

Breaking Resignation: देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार, 21 जुलाई की रात अचानक इस्तीफा देकर पूरे राजनीतिक माहौल को चौंका दिया। ये इस्तीफा तब आया जब उसी दिन संसद का मानसून सत्र शुरू हुआ था। उन्होंने अपने स्वास्थ्य कारणों को इस्तीफे की वजह बताया, लेकिन राजनीतिक हलकों में यह फैसला किसी गहरी हलचल की ओर इशारा कर रहा है। विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने उपराष्ट्रपति के इस्तीफे को “चौंकाने वाला” बताया। उन्होंने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा: “इसमें कोई शक नहीं कि उपराष्ट्रपति धनखड़ को अपने स्वास्थ्य को सबसे ज्यादा तरजीह देनी होगी। लेकिन उनके चौंकाने वाले इस्तीफे के पीछे जो दिख रहा है, वो उससे कहीं ज्यादा है। हालांकि, यह अटकलों का समय नहीं है… हम उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना करते हैं और उनसे फैसले पर पुनर्विचार का अनुरोध करते हैं।” “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देशहित में उन्हें मनाने की कोशिश करनी चाहिए। खासकर किसानों के हितों के लिए यह जरूरी है।” जयराम रमेश ने यह भी बताया कि 21 जुलाई की शाम 5 बजे तक वे अन्य सांसदों के साथ धनखड़ से मिले थे और शाम 7:30 बजे उन्होंने उपराष्ट्रपति से फोन पर भी बात की थी। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा, “उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा चौंकाने वाला और आश्चर्यजनक है,उपराष्ट्रपति ने कल सदन की अध्यक्षता की,उपराष्ट्रपति ने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया है,.ईश्वर उन्हें स्वस्थ रखे” कपिल सिब्बल की भावुक प्रतिक्रिया राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने उपराष्ट्रपति के इस्तीफे पर व्यक्तिगत दुख जताया। उन्होंने कहा: “मैं व्यक्तिगत रूप से उनके इस्तीफे से खुश नहीं हूं क्योंकि मैं अब जब संसद जाऊंगा तो उनसे नहीं मिलूंगा। हमारे वर्षों से पारिवारिक संबंध रहे हैं।” “वे हमेशा सत्ता और विपक्ष के सामंजस्य की बात करते थे। हमारी विचारधाराएं अलग थीं लेकिन आपसी सम्मान बना रहा।” सिब्बल ने आगे बताया कि जब भी उन्हें सदन में बोलने के लिए समय की जरूरत होती थी, वे उपराष्ट्रपति के चैंबर में जाकर मिलते थे, और उन्हें कभी मना नहीं किया गया। अटकलों का दौर हालांकि जगदीप धनखड़ ने अपने इस्तीफे की वजह स्वास्थ्य कारण बताए हैं, लेकिन सोशल मीडिया और सियासी गलियारों में इस फैसले को लेकर कई राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं। क्या यह कोई आंतरिक असहमति का संकेत है? या कोई रणनीतिक फैसला? इसका खुलासा अभी नहीं हुआ है
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Vice President Resigns: स्वास्थ्य कारणों से जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति पद से दिया इस्तीफा

BREAKING NEWS: स्वास्थ्य कारणों से जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति पद से दिया इस्तीफा

नई दिल्ली:भारत के 14वें उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके अचानक उठाए गए इस कदम ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। धनखड़ ने राष्ट्रपति कोविंद के कार्यकाल के दौरान 6 अगस्त 2022 को हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को हराया था। उन्हें कुल 725 में से 528 वोट मिले थे, जबकि अल्वा को मात्र 182 वोट। झुंझुनू से उपराष्ट्रपति भवन तक का सफर 18 मई 1951 को राजस्थान के झुंझुनू जिले में एक साधारण किसान परिवार में जन्मे जगदीप धनखड़ की शिक्षा एकदम साधारण पृष्ठभूमि में हुई। इसके बाद उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन और LLB की पढ़ाई पूरी की। जयपुर में वकालत की शुरुआत की और जल्द ही राजनीति में सक्रिय हो गए। राजनीतिक सफर और उपलब्धियाँ स्वास्थ्य बना वजह या कोई और संकेत? धनखड़ के इस्तीफे की आधिकारिक वजह भले ही स्वास्थ्य बताई गई हो, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि कहीं इसके पीछे कोई आंतरिक मतभेद या रणनीतिक बदलाव तो नहीं? आने वाले दिनों में इस पर और स्पष्टता आ सकती है। क्या कहते हैं जानकार? वरिष्ठ पत्रकारों और राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि धनखड़ का कार्यकाल अपेक्षाकृत शांत और गरिमामय रहा, लेकिन बंगाल से जुड़े उनके बयान हमेशा चर्चा में रहे। निष्कर्ष: जगदीप धनखड़ का इस्तीफा एक संवेदनशील समय पर आया है जब देश 2026 के आम चुनाव की तैयारियों में जुटा है। अब सबकी निगाहें इस पर होंगी कि उनकी जगह अगला उपराष्ट्रपति कौन बनता है, और क्या इससे सत्ता समीकरणों में कोई बड़ा बदलाव आता है।
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Shashi Tharoor latest news, Congress vs Tharoor

थरूर ने की राष्ट्र की बात, कांग्रेस ने कहा – चलो भाई निकलो!

Shashi Tharoor ने एक बार फिर पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाया है, जिस पर कांग्रेस नेता के मुरलीधरन ने उन्हें पार्टी से अलग मानने का बयान दिया। जानिए पूरा मामला विस्तार से।Shashi Tharoor Vs Congress: के मुरलीधरन बोले – अब वह हमारे साथ नहीं हैं देश हरपल डिजिटल डेस्क | राजनीतिकांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर (Shashi Tharoor) एक बार फिर अपनी ही पार्टी की लाइन से अलग खड़े नजर आ रहे हैं। इस बार मामला इतना गंभीर हो गया कि पार्टी के ही वरिष्ठ नेता के मुरलीधरन (K Muraleedharan) ने उन्हें सार्वजनिक रूप से पार्टी से ‘अलग’ मान लिया है।क्या बोले के मुरलीधरन? 20 जुलाई को मीडिया से बात करते हुए के मुरलीधरन ने साफ कहा कि थरूर अब कांग्रेस के कार्यक्रमों में आमंत्रित नहीं होंगे, खासकर केरल के तिरुवनंतपुरम में। “वो CWC में जरूर हैं, लेकिन अब उन्हें ‘हम में से एक’ नहीं माना जाता। उनके हालिया बयानों से पार्टी की एकता पर असर पड़ा है,” मुरलीधरन ने कहा। मुरलीधरन के अनुसार, जब तक थरूर राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर अपनी स्थिति नहीं बदलते, तब तक पार्टी उन्हें मंच नहीं देगी। क्या है विवाद की जड़? दरअसल, कोच्चि में एक कार्यक्रम के दौरान शशि थरूर ने कहा था: “राष्ट्र सर्वोपरि है, पार्टियां तो देश को बेहतर बनाने का माध्यम हैं। जब कोई देशहित में केंद्र सरकार या सशस्त्र बलों का समर्थन करता है, तो पार्टी को वह विश्वासघात जैसा लगता है।” थरूर ने यह भी जोड़ा कि वे इस रुख पर कायम रहेंगे क्योंकि यह राष्ट्रहित में है। पहले भी टकराव हो चुका है यह कोई पहला मौका नहीं है जब थरूर की लाइन पार्टी से अलग पड़ी हो। 25 जून को इमरजेंसी की 50वीं वर्षगांठ पर शशि थरूर ने एक अखबार में लेख लिखकर इंदिरा गांधी की निंदा की थी, जिसे लेकर भी मुरलीधरन हमलावर हो गए थे। उन्होंने थरूर से “क्लियर स्टैंड” लेने की बात कही थी—या तो कांग्रेस में रहें या एक नया रास्ता चुनें। पार्टी के भीतर बढ़ती दूरी शशि थरूर कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के सदस्य हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक शैली और बयानबाज़ी अक्सर पार्टी की असहजता का कारण बनती रही है।यह घटनाक्रम न केवल कांग्रेस के लिए चिंता का विषय है, बल्कि यह विपक्ष की आंतरिक दरारों को भी उजागर करता है। शशि थरूर बनाम कांग्रेस की यह लड़ाई सिर्फ विचारों की नहीं, बल्कि नेतृत्व और दिशा की भी है।क्या थरूर पार्टी के भीतर बने रहेंगे या नया मोर्चा खोलेंगे?यह आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन इतना तय है कि 2025 की राजनीतिक गर्मी और भी तेज़ होने वाली है।
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Bangladesh

Bangladesh F-7 Jet Crash ढाका में स्कूल बिल्डिंग पर गिरा Fighter Plane, 1 की मौत, कई घायल

स्कूल पर गिरा Fighter Plane बांग्लादेश की राजधानी ढाका (Dhaka) में सोमवार को एक बड़ा विमान हादसा हुआ, जब Bangladesh Air Force का एक F-7 BGI ट्रेनर फाइटर जेट स्कूल की इमारत पर क्रैश कर गया। यह हादसा उत्तरा (Uttara) क्षेत्र स्थित Milestone School and College के परिसर में हुआ, जिसमें कम से कम 1 व्यक्ति की मौत हो गई और 13 से ज्यादा लोग घायल हो गए। F-7 Jet Crash in Dhaka: क्या हुआ हादसे में? Air Force का यह चीनी निर्मित F-7 BGI ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट दोपहर 1:06 बजे उड़ान भरते ही नियंत्रण खो बैठा और सीधे स्कूल की बिल्डिंग (हैदर हॉल) पर गिर गया। टकराते ही तेज धमाका हुआ और चारों ओर आग की लपटें और धुआं फैल गया। स्थानीय लोग और छात्र जान बचाकर भागे, जबकि आसपास मौजूद कई लोग झुलस गए या घायल हो गए। हादसे की भयावहता का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कितनी मौतें और घायल? Rescue Operation और फायर ब्रिगेड की तैनाती जांच और पायलट की जानकारी हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Voter Fraud Alert

बिहार में 11 हजार ‘अज्ञात वोटर्स’ और 41 लाख संदिग्ध नामों का खुलासा

बिहार में मतदाता सूची के रिविजन के दौरान 11 हजार अज्ञात और 41 लाख संदिग्ध वोटर्स पाए गए। इसमें मृत, स्थानांतरित और फर्जी नाम शामिल हैं, जिससे फर्जी वोटिंग का खतरा गहराया है। ✍️ देश हरपल न्यूज़ डेस्क | पटना21 जुलाई 2025 चुनाव आयोग की ओर से बिहार में वोटर लिस्ट रिविजन (Special Summary Revision – SSR) के दौरान जो आंकड़े सामने आए हैं, वे लोकतंत्र की नींव को हिलाने वाले हैं। आयोग ने खुलासा किया है कि जांच के दौरान 11 हजार ऐसे मतदाताओं की पहचान हुई है जो ‘अज्ञात’ हैं — यानी उनके पते पर कोई भी व्यक्ति नहीं मिला और न ही पड़ोसियों को उनके बारे में कोई जानकारी है। सूत्रों के मुताबिक, इन संदिग्ध मतदाताओं के नाम बिहार के बाहर रहने वाले अवैध प्रवासियों से जुड़े हो सकते हैं। अधिकारियों ने इस बात की आशंका जताई है कि ये बांग्लादेशी या रोहिंग्या प्रवासी हो सकते हैं जो पड़ोसी राज्यों से बिहार में फर्जी पहचान के जरिए वोटर ID बनवाने में कामयाब हो गए। “जब BLO इन मतदाताओं द्वारा दर्ज किए गए पते पर पहुंचे तो न तो वे लोग वहां पाए गए और न ही उनके बारे में किसी को जानकारी थी,” – TOI को एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया। 41.6 लाख वोटर्स भी संदिग्ध चुनाव आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में लगभग 41.6 लाख वोटर ऐसे पाए गए जो अपने पते पर मौजूद नहीं थे, जिनमें शामिल हैं: सवाल यह है कि यदि ये सभी नाम अब तक मतदाता सूची में मौजूद थे, तो क्या इनकी आड़ में चुनावों में फर्जी वोटिंग हो रही थी? रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 24 जून 2025 तक इन मृत मतदाताओं के नाम बिहार की वोटर लिस्ट में बने हुए थे। यह न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाता है। क्या भ्रष्टाचार है इसकी जड़ में? एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “बहुत संभव है कि जांच के दौरान पारदर्शिता की कमी, और कहीं न कहीं स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार ने इस स्थिति को जन्म दिया हो।” यह पहली बार नहीं है जब इस तरह के फर्जी वोटिंग के मामले सामने आए हैं। इससे पहले भी कई राज्यों में इस प्रकार के फर्जी नामांकन और डुप्लीकेट वोटर कार्ड की शिकायतें सामने आती रही हैं।
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Lok Sabha

Monsoon Session 2025 Lok Sabha में हंगामा, Operation Sindoor पर विपक्ष की मांग से कार्यवाही स्थगित

संसद का Monsoon Session 2025 सोमवार को शुरू होते ही विपक्ष के जोरदार हंगामे की भेंट चढ़ गया। Lok Sabha में जैसे ही प्रश्नकाल शुरू हुआ, विपक्षी सांसदों ने Operation Sindoor और Pahalgam Terror Attack पर बहस की मांग करते हुए नारेबाज़ी शुरू कर दी। हालात को देखते हुए स्पीकर ओम बिरला ने कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दिया। क्या है Operation Sindoor विवाद? Operation Sindoor भारत द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के बाद की गई एक सीमा पार सर्जिकल स्ट्राइक है। इस हमले में 26 नागरिकों की मौत के बाद भारत ने कड़ा सैन्य जवाब दिया। विपक्ष का कहना है कि इस पूरे मामले में संसद को विश्वास में लिया जाना चाहिए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस पर स्पष्टीकरण देना चाहिए। विपक्ष की तीन बड़ी मांगें: Lok Sabha की कार्यवाही क्यों हुई स्थगित? जब लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई तो विपक्षी दलों — विशेष रूप से INDIA गठबंधन — ने प्रश्नकाल में व्यवधान डालते हुए नारेबाज़ी शुरू कर दी। स्पीकर ओम बिरला ने सभी दलों से शांति बनाए रखने की अपील की और कहा कि प्रश्नकाल के बाद इस मुद्दे पर चर्चा हो सकती है। लेकिन विपक्ष के अड़े रहने पर उन्होंने कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दिया। Rajya Sabha में भी विरोध राज्यसभा में भी नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने Operation Sindoor और सुरक्षा मामलों पर तत्काल चर्चा की मांग की। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है। Monsoon Session 2025 का शेड्यूल हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bombay High Court

Bombay High Court Verdict 2006 Mumbai Train Blast केस में सभी 12 आरोपी बरी, 19 साल बाद मिला इंसाफ

Mumbai Train Blast 2006 Verdict: 11 जुलाई 2006 को हुए मुंबई लोकल ट्रेन बम धमाकों में बॉम्बे हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सभी 12 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में पूरी तरह विफल रहा। इस फैसले के साथ 19 साल पुराने इस केस ने एक नया मोड़ ले लिया है। Mumbai Local Train Blast 2006 – क्या हुआ था उस दिन? 11 जुलाई 2006 की शाम को मुंबई की वेस्टर्न रेलवे लाइन पर चल रही 7 लोकल ट्रेनों में सात बम धमाके हुए थे। यह धमाके पीक ऑवर (6.24 से 6.35 बजे के बीच) में हुए, जिनमें 209 लोगों की मौत और 700 से ज्यादा घायल हुए थे। बमों को प्रेशर कूकर में रखा गया था और यह एक आतंकी साजिश बताई गई थी। Bombay High Court का फैसला क्या कहता है? बॉम्बे हाईकोर्ट की बेंच (जस्टिस अनील कीलोर और श्याम चंदक) ने कहा: अब तक की कोर्ट प्रक्रिया 2006 Mumbai Blast Case का क्या है मतलब? यह फैसला यह दर्शाता है कि भारत में न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत और निष्पक्ष बनाना बेहद जरूरी है।19 साल बाद निर्दोष साबित होना, न्याय मिलने का संकेत जरूर है, लेकिन इतनी देरी से न्याय भी एक प्रकार की अन्याय माना जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Donald Trump का फिर विवादित दावा: ‘भारत-पाकिस्तान के झगड़े में 5 फाइटर जेट गिरे, सीजफायर मैंने करवाया’

Donald Trump का फिर विवादित दावा: ‘India-Pakistan के झगड़े में 5 फाइटर जेट गिरे, सीजफायर मैंने करवाया’

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच हुए तनाव को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच जब हालात बहुत बिगड़ गए थे, तब उन्होंने दखल देकर सीजफायर करवाया था। ट्रंप ने यह भी कहा कि उस संघर्ष में 5 फाइटर जेट गिराए गए थे, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि वे किस देश के थे। यह ट्रंप का 24वीं बार ऐसा दावा है जिसमें उन्होंने खुद को भारत-पाक विवाद में शांति का नायक बताया है। ट्रंप ने कहा – “मैंने भारत और पाकिस्तान के बीच बड़ा झगड़ा शांत कराया था। दोनों देश युद्ध के करीब थे, 5 विमान गिराए गए थे। अगर मैंने फोन न किया होता, तो न जाने क्या होता।” हालांकि ट्रंप ने जो दावा किया, उसकी कभी किसी भी आधिकारिक स्रोत से पुष्टि नहीं हुई। भारत या पाकिस्तान, दोनों में से किसी ने भी 5 जेट गिरने की पुष्टि नहीं की है। 2019 में पुलवामा हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया था। भारतीय एयरफोर्स ने बालाकोट में एयरस्ट्राइक की थी, जिसके बाद पाकिस्तान की तरफ से भी जवाबी कार्रवाई हुई। ऐसे समय में अमेरिका की भूमिका पर सवाल उठे थे, और ट्रंप ने कई बार कहा कि उन्होंने सीजफायर करवाया। विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप अपने चुनाव प्रचार के दौरान ऐसे बयान देकर खुद को “संकट मोचक” दिखाना चाहते हैं। लेकिन भारत जैसे संवेदनशील मामलों में बिना पुष्टि के ऐसे दावे राजनीतिक और कूटनीतिक रूप से गंभीर माने जाते हैं। डोनाल्ड ट्रंप का यह दावा फिर से सुर्खियों में है कि उन्होंने भारत-पाक युद्ध को रोका और 5 जेट गिरने की बात भी बताई, लेकिन इस पर न तो कोई सबूत हैं और न ही दोनों देशों ने इसकी पुष्टि की है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Odisha स्टूडेंट डेथ केस: सस्पेंशन से पहले 71 छात्रों ने की थी शिकायत

Odisha स्टूडेंट डेथ केस: सस्पेंशन से पहले 71 छात्रों ने की थी शिकायत

Odisha के एक कॉलेज में छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले ने अब राजनीतिक मोड़ ले लिया है। कॉलेज प्रशासन ने जिस छात्रा को सस्पेंड किया था, उसके खिलाफ 71 छात्रों ने प्रबंधन को लिखित शिकायत दी थी। इन छात्रों ने आरोप लगाया था कि वह क्लास में माहौल खराब कर रही थी। लेकिन जब छात्रा की मौत के बाद मामला गरमाया, तो BJD और कांग्रेस नेताओं पर परिजनों ने दबाव बनाने का आरोप लगाया। परिवार का कहना है कि राजनीतिक दलों ने FIR वापस लेने के लिए कहा, जिससे उन्हें न्याय की उम्मीद टूटती नजर आ रही है। क्या है मामला? यह घटना ओडिशा के भुवनेश्वर के एक प्रतिष्ठित कॉलेज की है। मृतक छात्रा कुछ दिनों पहले ही सस्पेंड हुई थी। सस्पेंशन से पहले 71 छात्रों ने एकजुट होकर कॉलेज प्रबंधन को शिकायत दी थी, जिसमें लिखा गया था कि वह अन्य छात्रों को डिस्टर्ब कर रही है और अनुशासनहीन व्यवहार कर रही है। छात्रा के परिजनों ने साफ कहा है कि उनकी बेटी मानसिक दबाव में थी, और सस्पेंशन ने उसे तोड़ दिया। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ स्थानीय राजनीतिक नेताओं ने FIR वापस लेने का दबाव डाला, ताकि कॉलेज और अन्य जिम्मेदार लोग बच सकें। इस मामले ने राज्य की राजनीति में भी हलचल मचा दी है। सोशल मीडिया पर भी लोग “Justice for Student” हैशटैग के साथ आवाज उठा रहे हैं। लोग जानना चाहते हैं – अगर 71 छात्रों ने शिकायत की थी, तो छात्रा को सपोर्ट क्यों नहीं मिला? और FIR वापस क्यों ली गई? हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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TMC

TMC में अंदरूनी बगावत? 20 MPs की लिस्ट आई सामने, Shatrughan Sinha-Yusuf Pathan के नाम चर्चा में

तृणमूल कांग्रेस (TMC) में अंदरूनी राजनीति को लेकर बड़ी हलचल सामने आ रही है। सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि पार्टी के कुछ सांसदों के बीच असंतोष बढ़ा है और करीब 20 सांसदों का एक अलग रुख या गुट बनाने जैसी चर्चा ने राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है। हालांकि, अभी तक किसी भी स्तर पर इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, और मामला पूरी तरह से बयानबाजी और अटकलों के बीच घूम रहा है। क्या है पूरा मामला? रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ TMC सांसदों ने लोकसभा में अलग पहचान या ग्रुपिंग को लेकर संकेत दिए हैं। कहा जा रहा है कि इस कथित गुट में कई सांसद शामिल हैं, और चर्चा यह भी है कि कुछ सांसद NDA के साथ बैठने या सहयोग की दिशा में जा सकते हैं। लेकिन दूसरी तरफ पार्टी के कई नेताओं ने इन खबरों को सिरे से खारिज करते हुए इसे “बेबुनियाद और भ्रामक” बताया है। किन नामों की चर्चा सबसे ज्यादा? इस पूरे विवाद में जिन नामों की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वे हैं: ध्यान देने वाली बात यह है कि इन नामों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं, लेकिन किसी भी सांसद ने खुलकर बगावत की पुष्टि नहीं की है। शत्रुघ्न सिन्हा और यूसुफ पठान की स्थिति TMC का रिएक्शन TMC नेतृत्व ने इन खबरों को अफवाह बताते हुए कहा है कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और किसी भी प्रकार की टूट या गुटबाजी नहीं हुई है। पार्टी का कहना है कि इस तरह की खबरें राजनीतिक माहौल को प्रभावित करने के लिए फैलाई जा रही हैं। वहीं राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर सांसदों में असंतोष की खबरें सही साबित होती हैं तो इसका असर संसद में TMC की रणनीति पर पड़ सकता है। राजनीतिक असर और सियासी मायने अगर यह विवाद आगे बढ़ता है तो: लेकिन फिलहाल यह पूरा मामला अफवाहों, रिपोर्ट्स और राजनीतिक बयानबाजी तक ही सीमित है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Bharat Mandapam

NDA Meeting in Bharat Mandapam: PM Modi का ‘Jhalmuri Moment’ Viral, नेताओं के साथ दिखा अनोखा अंदाज़

नई दिल्ली के Bharat Mandapam में हुई National Democratic Alliance की अहम बैठक के बाद एक ऐसा पल सामने आया, जिसने पूरे सोशल मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। बैठक खत्म होने के बाद प्रधानमंत्री Narendra Modi का एक सहज और अनौपचारिक अंदाज़ लोगों को देखने को मिला, जब वे नेताओं को अपने हाथ से झालमुरी परोसते नजर आए। मीटिंग के बाद दिखा हल्का-फुल्का और अपनापन भरा माहौल राजनीति की गंभीर चर्चाओं के बीच जब बैठक समाप्त हुई, तो माहौल अचानक काफी सहज और दोस्ताना हो गया। पीएम मोदी नेताओं के बीच खुद पहुंचे और मुस्कुराते हुए सभी को झालमुरी ऑफर की। यह छोटा सा पल कैमरे में कैद हो गया और देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में नेताओं के बीच बातचीत और हंसी-मजाक का माहौल साफ नजर आता है, जो आमतौर पर औपचारिक बैठकों में कम ही देखने को मिलता है। Bharat Mandapam बना बड़े राजनीतिक आयोजनों का केंद्र Bharat Mandapam हाल के वर्षों में देश के बड़े राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों का प्रमुख केंद्र बन चुका है। इस बार भी यहां हुई NDA की बैठक में कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए और संगठन की भविष्य की रणनीति पर चर्चा की गई। National Democratic Alliance की इस बैठक को राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर आने वाले चुनावी समीकरणों और रणनीतियों के संदर्भ में। सोशल मीडिया पर चर्चा में आया ‘PM Modi Jhalmuri Video’ जैसे ही यह वीडियो सामने आया, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यह तेजी से फैल गया। लोगों ने इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कई लोगों ने इसे प्रधानमंत्री की “सादगी और सहजता” बताया, जबकि कुछ ने इसे एक हल्के-फुल्के और मानवीय पल के रूप में देखा। वीडियो ने एक बार फिर यह दिखाया कि राजनीतिक बैठकों के बीच भी छोटे-छोटे इंसानी पल लोगों के दिलों को छू लेते हैं और तेजी से वायरल हो जाते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Social Media

Social Media Controversy: Biryani वाले बयान पर बड़ा एक्शन, नौकरी खत्म

Social Media पर दिया गया एक हल्का-फुल्का बयान एक शख्स के लिए भारी पड़ गया। “बिरयानी के 370 वसूलूंगा” कहने के बाद शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि उसकी नौकरी चली गई और मामला पूरी तरह सुर्खियों में आ गया। वायरल पोस्ट से बढ़ा मामला जानकारी के अनुसार, यह पूरा विवाद एक वायरल पोस्ट या वीडियो से जुड़ा है, जिसमें व्यक्ति ने मजाकिया अंदाज में यह टिप्पणी की थी। लेकिन कुछ ही समय में यह बयान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से फैल गया और लोगों ने इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं। कुछ यूजर्स ने इसे मजाक माना, तो कई लोगों ने इसे गैर-जिम्मेदाराना और गलत बताया। कंपनी ने लिया सख्त एक्शन मामला बढ़ता देख संबंधित कंपनी ने भी सख्त रुख अपनाया। आंतरिक जांच के बाद कंपनी ने फैसला लेते हुए उस व्यक्ति को नौकरी से हटा दिया। कंपनी का मानना है कि कर्मचारियों का सोशल मीडिया व्यवहार भी संस्थान की छवि को प्रभावित करता है, इसलिए इस तरह के मामलों में कार्रवाई जरूरी हो जाती है। इंस्टाग्राम अकाउंट भी डिलीट विवाद और बढ़ते ऑनलाइन ट्रोलिंग के बीच उस शख्स ने अपना इंस्टाग्राम अकाउंट भी डिलीट कर दिया, जिससे यह मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया है। सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी जरूरी यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया पर कही गई छोटी-सी बात भी तेजी से वायरल होकर बड़ा विवाद बन सकती है। एक मजाकिया कमेंट भी कभी-कभी करियर और निजी जिंदगी पर गहरा असर डाल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
सोशल मीडिया

3 Lakh का Birthday Gift लेकर अगले दिन Breakup! Viral Story से सोशल मीडिया हैरान

सोशल मीडिया पर एक ऐसी कहानी तेजी से वायरल हो रही है जिसने लोगों को हैरान भी किया है और रिश्तों को लेकर सोचने पर मजबूर भी कर दिया है। मामला एक कपल से जुड़ा है, जहां बॉयफ्रेंड ने अपनी गर्लफ्रेंड के बर्थडे को खास बनाने के लिए करीब 3 लाख रुपये का महंगा गिफ्ट दिया, लेकिन अगले ही दिन रिश्ता टूट गया। जानकारी के अनुसार, युवक ने पूरी तैयारी के साथ अपनी पार्टनर का जन्मदिन सेलिब्रेट किया था। उसने प्यार और उम्मीदों के साथ महंगा तोहफा दिया ताकि यह दिन यादगार बन जाए। पार्टी और गिफ्ट के समय सब कुछ सामान्य और खुशहाल दिख रहा था। लेकिन कहानी ने अचानक मोड़ ले लिया जब अगले दिन लड़की ने ब्रेकअप का फैसला ले लिया और युवक को मैसेज के जरिए रिश्ते को खत्म करने की जानकारी दी। इस फैसले से युवक पूरी तरह शॉक में आ गया और उसे समझ नहीं आया कि आखिर इतनी जल्दी क्या बदल गया। Social Media Viral Story: लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया यह मामला वायरल होते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। कुछ लोग इसे “emotional manipulation” बता रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि रिश्तों में भरोसा और communication की कमी ऐसी situations को जन्म देती है। कई यूजर्स ने इसे “gift culture pressure” से भी जोड़कर देखा है, जहां रिश्तों में महंगे गिफ्ट्स उम्मीदों और emotional imbalance को बढ़ा देते हैं। Relationship Trust पर उठे सवाल इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आज के रिश्तों में trust और understanding कमजोर हो रही है? या फिर सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली stories हमेशा पूरी सच्चाई नहीं दिखातीं? फिलहाल इस मामले में किसी भी पक्ष की ओर से कोई official statement सामने नहीं आया है, लेकिन यह कहानी लगातार चर्चा में बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
West Bengal

West Bengal Politics: CM का बड़ा फैसला, Home Ministry अपने पास, नए मंत्रियों को मिले अहम विभाग

पश्चिम बंगाल (West Bengal) की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। हाल ही में हुए कैबिनेट विस्तार (Cabinet Expansion 2026) के बाद राज्य सरकार ने मंत्रियों के बीच विभागों का औपचारिक बंटवारा शुरू कर दिया है। इस फैसले के साथ ही सरकार ने प्रशासनिक ढांचे को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। 35 मंत्रियों की नई टीम, सरकार ने दिया बड़ा संदेश नई सरकार में कुल 35 विधायकों को मंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें कैबिनेट मंत्री और राज्य मंत्री दोनों शामिल हैं। इस बड़े विस्तार को राजनीतिक जानकार सरकार की “नए सिरे से टीम स्ट्रक्चर” की रणनीति के रूप में देख रहे हैं। सरकार का दावा है कि नई टीम में: CM ने रखा Home Ministry अपने पास, मजबूत नियंत्रण का संकेत सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री ने सबसे अहम विभागों में से एक गृह मंत्रालय (Home Ministry) अपने पास ही रखा है। यह फैसला राज्य की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर सीधा नियंत्रण बनाए रखने के उद्देश्य से देखा जा रहा है। इसके अलावा प्रशासनिक और समन्वय से जुड़े कई महत्वपूर्ण विभाग भी मुख्यमंत्री के पास ही रहेंगे। Swapan Dasgupta को मिली Finance Ministry की जिम्मेदारी वरिष्ठ नेता स्वपन दासगुप्ता (Swapan Dasgupta) को राज्य का वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) सौंपा गया है। उनके पास अब राज्य की आर्थिक नीति, बजट तैयार करना और वित्तीय सुधारों की बड़ी जिम्मेदारी होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नियुक्ति आर्थिक प्रबंधन को मजबूत करने और नई वित्तीय रणनीति लागू करने की दिशा में अहम कदम है। कैबिनेट विस्तार के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल कैबिनेट विस्तार और विभागों के बंटवारे के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष लगातार सरकार के फैसलों और मंत्री चयन पर सवाल उठा रहा है। हालांकि सरकार का कहना है कि यह बदलाव प्रशासन को तेज और प्रभावी बनाने के लिए किया गया है। क्या बदल सकता है आगे? विशेषज्ञों के अनुसार यह नया कैबिनेट ढांचा आने वाले समय में: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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