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Waqf Amendment

Waqf Amendment पर Jagdambika Pal का बड़ा बयान: Report असंवैधानिक निकली तो दे दूंगा इस्तीफा

वक्फ संशोधन ( Waqf Amendment) विधेयक को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। एक ओर जहां इस बिल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है, वहीं दूसरी ओर बीजेपी सांसद Jagdambika Pal ने बड़ा बयान देकर सभी का ध्यान खींचा है। उन्होंने कहा है कि यदि वक्फ समिति की रिपोर्ट असंवैधानिक पाई जाती है, तो वह तत्काल अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। क्या है Waqf Amendment विधेयक? वक्फ अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाना और अवैध कब्जों को रोकना है। सरकार का दावा है कि यह विधेयक खासकर पासमांदा मुस्लिम समुदाय के हितों की रक्षा करेगा। लेकिन विपक्ष इसे मुस्लिम समुदाय पर हमला बता रहा है। जगदंबिका पाल का पक्ष संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के अध्यक्ष और बीजेपी के वरिष्ठ नेता जगदंबिका पाल ने साफ कहा कि वक्फ अधिनियम कोई धार्मिक कानून नहीं, बल्कि एक वैधानिक व्यवस्था है। इसका मकसद वक्फ संपत्तियों का न्यायसंगत और पारदर्शी प्रबंधन सुनिश्चित करना है। “अगर मेरी अध्यक्षता में बनी रिपोर्ट को अदालत असंवैधानिक मानेगी, तो मैं बिना किसी देरी के इस्तीफा दे दूंगा। हम किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं हैं,” — जगदंबिका पाल ओवैसी का विरोध और प्रतिक्रिया इस बिल का सबसे तीखा विरोध AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने किया है। उन्होंने संसद में इस बिल की प्रति फाड़ दी और इसे “मुसलमानों पर सीधा हमला” बताया। ओवैसी का आरोप है कि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का उल्लंघन करता है, जो धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है। विपक्ष पर पलटवार पाल ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल जनता को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह बिल वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रशासन और उनकी रक्षा के लिए लाया गया है, ना कि किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ। अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट में इस विधेयक की वैधता को लेकर सुनवाई जारी है। अदालत का फैसला यह तय करेगा कि यह कानून संवैधानिक मानकों पर खरा उतरता है या नहीं। जगदंबिका पाल का इस्तीफे की पेशकश करना इस पूरे मामले को और गंभीर बना देता है।
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Jagdeep Dhankhar, Vice President of India

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति की शक्तियों पर खींची ‘संवैधानिक लक्ष्मण रेखा’, उपराष्ट्रपति ने जताई नाराज़गी

Supreme Court vs President Powers Desh Harpal | 17 अप्रैल 2025By Digital Desk Supreme Court Judgement on Governor and President Powers के तहत सुप्रीम कोर्ट ने 8 अप्रैल को ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसमें राष्ट्रपति और राज्यपाल द्वारा विधेयकों (Bills) को मंजूरी देने की समयसीमा (Time Limit) तय की गई। अदालत ने साफ किया कि राज्य विधानसभा से पास होकर आए बिल को यदि राज्यपाल राष्ट्रपति के पास विचार के लिए भेजते हैं, तो राष्ट्रपति को Article 201 के तहत 3 महीने के भीतर निर्णय लेना अनिवार्य होगा। क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने? Judicial Review, No Pocket Veto, Mandatory Timeline और No Repeated Returns – इन चार बिंदुओं में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति की शक्तियों की स्पष्ट व्याख्या की: राज्यपालों के लिए भी बनी समय सीमा तमिलनाडु मामले में Supreme Court vs Governor Power की बहस में सुप्रीम कोर्ट ने 8 अप्रैल को स्पष्ट कर दिया था कि राज्यपाल के पास भी कोई Absolute Veto Power नहीं है। उन्हें विधानसभा के पास किए गए किसी भी बिल पर अधिकतम एक महीने के भीतर निर्णय देना होगा। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा, “राज्यपाल सिर्फ प्रतीकात्मक पद नहीं हैं, लेकिन वे राज्य सरकार की सलाह से ही निर्णय ले सकते हैं।” उपराष्ट्रपति की नाराज़गी इस फैसले के बाद Vice President Jagdeep Dhankhar ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा: “हम ऐसा सिस्टम नहीं बना सकते जहां अदालतें राष्ट्रपति को निर्देश दें। Article 142 के तहत मिला विशेष अधिकार न्यायपालिका के पास 24×7 available nuclear missile जैसा बन गया है।” उपराष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि अगर संस्थाएं अपनी सीमाएं लांघने लगें तो संविधान के संतुलन को खतरा हो सकता है। “कोई भी संस्था संविधान से ऊपर नहीं है। लोकतंत्र में चुनी हुई सरकार सर्वोच्च होती है,” उन्होंने कहा। क्या है Article 201 और Article 142? कपिल सिब्बल ने की तारीफ पूर्व कानून मंत्री Kapil Sibal ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले की सराहना की। उन्होंने कहा कि अब केंद्र सरकार जानबूझकर राज्य सरकारों के महत्वपूर्ण बिलों को रोके नहीं रख सकेगी। सुप्रीम कोर्ट का ये रुख federal structure और cooperative federalism को मजबूत करता है। तमिलनाडु केस का बैकग्राउंड सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में तमिलनाडु सरकार ने आरोप लगाया कि राज्यपाल R.N. Ravi ने 10 जरूरी बिलों को रोक रखा है। इनमें से कई बिल विधानसभा ने दोबारा पास किए थे, लेकिन राज्यपाल ने उन पर कोई कार्रवाई नहीं की। R.N. Ravi पूर्व IPS अधिकारी रहे हैं और 2021 से तमिलनाडु के राज्यपाल हैं। निष्कर्ष: Supreme Court ने राष्ट्रपति और राज्यपाल की शक्तियों पर ऐतिहासिक टिप्पणी की है, जो संविधान की व्याख्या और लोकतंत्र के संतुलन की दिशा में एक निर्णायक कदम है। हालांकि यह फैसला केंद्र-राज्य संबंधों को नई बहस में डाल सकता है, परंतु इससे transparency, accountability और timely governance को बल मिलेगा।
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SupremeCourtHearingControversy; Supreme Court

वक्फ कानून पर SC से स्टे नहीं, सरकार को 7 दिन का समय , डिनोटिफाई करने और नई नियुक्तियों पर रहेगी रोक

Waqf Act Hearing | Supreme Court Latest Update | Centre Seeks Time नई दिल्लीl देश हरपल रिपोर्ट — Waqf Act को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन अहम सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार ने Supreme Court से जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। Chief Justice of India (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक अगला आदेश नहीं आता, तब तक status quo यानी वर्तमान स्थिति बनी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि केंद्र सरकार जब तक अपना जवाब दाखिल नहीं करती, तब तक Waqf Board में किसी भी प्रकार की नियुक्ति नहीं की जाएगी। साथ ही यह भी साफ किया कि waqf properties को लेकर किसी भी Collector द्वारा कोई नया आदेश पारित नहीं होगा। Chief Justice ने कहा, “जब तक अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक बोर्ड या काउंसिल में कोई नई नियुक्ति नहीं हो सकती। और अगर किसी संपत्ति का पंजीकरण 1995 Waqf Act के तहत हुआ है, तो उन संपत्तियों को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।” CJI ने यह भी कहा कि कार्यपालिका को प्रशासनिक निर्णय लेने का अधिकार है जबकि न्यायपालिका न्यायिक फैसले लेती है। इसी संदर्भ में उन्होंने 2013 Waqf Amendment Act को चुनौती देने वाली याचिका पर कुछ विशेष पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने की अनुमति दी है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारें और संबंधित वक्फ बोर्ड को 7 दिनों के भीतर अपना official response दाखिल करना होगा। इसके बाद याचिकाकर्ताओं को केवल 5 याचिकाएं दाखिल करने की अनुमति होगी। इस पूरे मामले को कोर्ट ने “विशेष प्रकृति” का बताते हुए कहा है कि सुनवाई निष्पक्ष और त्वरित होगी। फिलहाल, वक्फ संपत्तियों की मौजूदा स्थिति यथावत बनी रहेगी और किसी भी तरह का नया प्रशासनिक या कानूनी हस्तक्षेप रोक दिया गया है। Desh Harpal की विशेष रिपोर्ट में हम आने वाले दिनों में केंद्र सरकार और वक्फ बोर्ड के जवाबों की विस्तृत जानकारी भी देंगे। यह मामला न सिर्फ कानूनी बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण बनता जा रहा है।
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SupremeCourtHearingControversy; Supreme Court

Waqf Act SC Hearing LIVE: संसद ने हिंदुओं पर भी कानून बनाया है… सिब्बल की दलीलों पर सुप्रीम कोर्ट की तीखी प्रतिक्रिया

Desh Harpal Special Report| नई दिल्ली | 16 अप्रैल 2025 Waqf Act SC Hearing LIVE – सुप्रीम कोर्ट में आज Waqf Act को लेकर एक बेहद अहम सुनवाई हुई, जिसमें वकील कपिल सिब्बल ने केंद्र सरकार के हालिया Waqf Act Amendment पर सवाल उठाए। उन्होंने इसे एकतरफा और धर्म विशेष को लक्षित करने वाला बताया। लेकिन कोर्ट ने सिब्बल की दलीलों पर तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा, “Parliament ने केवल मुसलमानों के लिए नहीं, हिंदुओं के लिए भी कानून बनाए हैं।“ क्या है Waqf Act Amendment? केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में Waqf Act 1995 में संशोधन किया गया है। यह संशोधन 5 अप्रैल 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हस्ताक्षर के बाद कानून बना और तुरंत प्रभाव से लागू भी हो गया। संशोधित कानून के तहत Waqf properties के रिकॉर्ड, उनके उपयोग और प्रबंधन को लेकर सख्त प्रावधान किए गए हैं। सरकार का कहना है कि यह बदलाव पारदर्शिता और accountability सुनिश्चित करने के लिए जरूरी था। विरोध और विवाद Waqf Act में बदलाव के बाद देश के कुछ हिस्सों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए। कई जगहों पर violent clashes की खबरें भी आईं। मुस्लिम समुदाय के कुछ संगठनों ने आरोप लगाया कि यह कानून उनकी संपत्ति और धार्मिक अधिकारों को सीमित करता है। कोर्ट में क्या हुआ? आज की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा कि क्या इस कानून से किसी खास धर्म को निशाना बनाया गया है? जब सिब्बल ने इसे “धर्म विशेष को नियंत्रित करने वाला कानून” कहा, तो कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा: “Parliament ने हिंदू धर्म के लिए भी कानून बनाए हैं जैसे Hindu Religious and Charitable Endowments Act। इसलिए यह कहना गलत है कि केवल एक धर्म के खिलाफ कानून बनाया जा रहा है।“ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने कहा कि कानून की वैधता को धर्म के चश्मे से नहीं देखा जा सकता। सरकार का पक्ष केंद्र सरकार की ओर से Solicitor General Tushar Mehta ने कहा कि संशोधन का मकसद किसी धर्म को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि Waqf Boards की जवाबदेही तय करना है। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार Waqf properties के दुरुपयोग की शिकायतें आई हैं, जिन्हें रोकना आवश्यक है। आगे की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को दो सप्ताह के भीतर अपने विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है और मामले की अगली सुनवाई के लिए 2 मई 2025 की तारीख तय की है। Desh Harpal इस संवेदनशील मामले की हर अपडेट आपको LIVE और निष्पक्ष रूप में पहुंचाता रहेगा। Waqf Act से जुड़े सामाजिक, कानूनी और धार्मिक प्रभावों पर हम जल्द ही एक विशेष रिपोर्ट भी लेकर आएंगे।
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National Herald Case ED

National Herald Case: ED ने सोनिया-राहुल गांधी पर चार्जशीट दायर, कांग्रेस बोली – ‘ये बदले की राजनीति है’

16 अप्रैल 2025 – प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत सात लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। कांग्रेस ने इस कार्रवाई को “राजनीतिक बदले और डराने की कोशिश” बताया है और बुधवार को देशभर में ED दफ्तरों के बाहर प्रदर्शन की घोषणा की है। चार्जशीट में कौन-कौन? ED ने 9 अप्रैल को विशेष PMLA अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें जिन लोगों के नाम शामिल हैं, वे हैं: अदालत ने चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए मामले की अगली सुनवाई 25 अप्रैल को तय की है।क्या है नेशनल हेराल्ड केस? यह मामला एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की संपत्तियों को लेकर है, जो National Herald अखबार का प्रकाशन करती है। ED का आरोप है कि कांग्रेस ने AJL को ₹50 लाख में यंग इंडियन नाम की कंपनी के ज़रिए अधिग्रहित किया, जबकि उसकी संपत्ति की कीमत ₹2,000 करोड़ से ज्यादा थी। सोनिया गांधी और राहुल गांधी यंग इंडियन में बहुमत हिस्सेदारी रखते हैं। ED ने हाल ही में ₹661 करोड़ की संपत्ति दिल्ली, मुंबई और लखनऊ में जब्त करने के नोटिस भी दिए हैं। जांच की शुरुआत कैसे हुई? ये जांच भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की 2013 में दाखिल याचिका के आधार पर शुरू हुई थी। इसके बाद दिल्ली की एक अदालत ने इनकम टैक्स विभाग को जांच की अनुमति दी थी। ED ने कहा कि जांच के दौरान उन्हें ₹18 करोड़ के फर्जी डोनेशन, ₹38 करोड़ के फर्जी किराया और ₹29 करोड़ के फर्जी विज्ञापन की जानकारी मिली।कांग्रेस ने क्या कहा? कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, “यह पूरा मामला फर्जी है। ना कोई पैसा ट्रांसफर हुआ, ना कोई संपत्ति बेची गई। फिर भी सरकार इसे मनी लॉन्ड्रिंग बता रही है।” केसी वेणुगोपाल ने कहा, “मोदी-शाह सरकार जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए विपक्ष को टारगेट कर रही है। ये केस राजनीति को दबाने का तरीका है।” जयराम रमेश ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “नेशनल हेराल्ड की संपत्तियों की जब्ती कानून की आड़ में किया गया अपराध है।” भाजपा का पलटवार भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा, “जो लोग भ्रष्टाचार और जनता की संपत्ति की लूट में शामिल रहे हैं, अब उन्हें जवाब देना होगा। ED का मतलब अब ‘एंटाइटलमेंट टू डकैती’ नहीं है।”कोर्ट की टिप्पणी विशेष अदालत ने कहा कि PMLA की कार्रवाई के साथ-साथ CBI की जांच से जुड़ा मामला भी इसी अदालत में स्थानांतरित किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए आदेश जिला जज को देना होगा। DeshHarpal पर पढ़ते रहिए देश-दुनिया की सबसे सटीक और सरल खबरें।
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Bihar Politics: Tejashwi Yadav ने Mahagathbandhan

Tejashwi Yadav CM Face , सीट शेयरिंग पर खोले पत्ते, Delhi में Congress-RJD की बैठक के बाद सियासत गरमाई

Bihar Politics: Tejashwi Yadav, Rahul gandhi Mahagathbandhan Bihar की राजनीति में एक बार फिर उबाल है। 2025 के विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, Mahagathbandhan के अंदर चल रही खींचतान और रणनीतियों की परतें खुलने लगी हैं। इसी सिलसिले में दिल्ली में Congress और RJD के बीच एक अहम बैठक हुई जिसमें Mallikarjun Kharge, Rahul Gandhi और Tejashwi Yadav जैसे बड़े नेता शामिल हुए। बैठक के बाद जब मीडिया ने Tejashwi Yadav से पूछा कि Mahagathbandhan का CM Face कौन होगा, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया— “बातचीत के बाद सारी चीज़ें सामने आ जाएंगी।” इसके साथ ही उन्होंने जोड़ा कि फॉर्मूला 70 पर चर्चा चल रही है और बहुत जल्द इसका खुलासा होगा। क्या है फॉर्मूला 70? बताया जा रहा है कि ‘फॉर्मूला 70’ का मतलब यह हो सकता है कि RJD 70 से ज़्यादा सीटें अपने पास रखेगा और बाकी सीटों पर Congress, Left पार्टियां, VIP और अन्य सहयोगी दलों के साथ समझौता होगा। लेकिन इसी फॉर्मूले को लेकर अभी भी महागठबंधन के भीतर seat sharing पर रस्साकशी बनी हुई है। Delhi में मंथन, Patna में समीकरण Patna में जहां पार्टी वर्कर्स और जमीनी स्तर पर संगठन एक्टिव हो चुका है, वहीं Delhi में मंथन जारी है। Congress चाहती है कि उसे पिछले चुनाव की तुलना में ज्यादा सीटें मिलें, वहीं RJD का दावा है कि वह सबसे बड़ी पार्टी है और उसी के पास नेतृत्व रहना चाहिए। कुर्बानी कौन देगा? बात सिर्फ सीटों की नहीं, बल्कि leadership की भी है। सूत्रों के मुताबिक Congress यह संकेत दे रही है कि अगर उसे ज़्यादा सीटें नहीं मिलतीं, तो वह campaign में अपने बड़े चेहरों को झोंकने से परहेज़ कर सकती है। वहीं RJD का फोकस Tejashwi Yadav को ही एकमात्र CM Face के तौर पर प्रोजेक्ट करने पर है। Left और VIP का रोल Mahagathbandhan में Left पार्टियां और VIP जैसे दल भी शामिल हैं। इनकी मांगें भी equation को complex बना रही हैं। Left पार्टियां जनाधार के आधार पर अधिक सीटें चाहती हैं, जबकि VIP जैसी छोटी पार्टियां symbolic सीटों से संतुष्ट नहीं हैं। Desh Harpal की Exclusive जानकारी के अनुसार, Mallikarjun Kharge और Rahul Gandhi ने Tejashwi Yadav को भरोसा दिलाया है कि सभी दलों की सहमति से एक common minimum programme और CM Face पर फैसला लिया जाएगा। लेकिन सीट शेयरिंग को लेकर आखिरी निर्णय मई के पहले हफ्ते तक आ सकता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या Bihar में Mahagathbandhan अपने अंदरुनी मतभेद सुलझाकर एक united front के रूप में सामने आएगा या फिर सीटों और leadership की ‘कुर्बानी’ की राजनीति उसे कमजोर कर देगी। Desh Harpal आपके लिए आगे भी इस developing political story पर नजर बनाए रखेगा।
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SP MLA Indrajeet Saroj:

SP MLA Indrajeet Saroj: ‘श्राप दे देते भगवान ताकि भस्म हो जाते मुसलमान…’

Controversial Statement Again by SP MLA Indrajeet Saroj: Desh Harpal | 15 अप्रैल 2025 | उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर विवाद की चिंगारी सुलग उठी है। Samajwadi Party के कद्दावर नेता और मौजूदा विधायक इंद्रजीत सरोज ने एक विवादित बयान देकर सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। पहले मंदिरों और हिंदू देवी-देवताओं को लेकर दिये गए उनके पुराने बयान ने खूब तूल पकड़ा था, और अब एक बार फिर उन्होंने अपने उसी बयान को दोहराते हुए कहा है – “अगर भगवान चाहते तो मुसलमानों को श्राप दे देते और वे भस्म हो जाते।” क्या है पूरा मामला? दरअसल, इंद्रजीत सरोज का ये बयान तब आया जब उनसे मीडिया ने उनके पुराने बयान पर प्रतिक्रिया मांगी, जिसमें उन्होंने कहा था कि “अगर भगवान वाकई होते तो वो मंदिरों को तोड़ने वालों को भस्म कर देते।” इस पर सफाई देने के बजाय इंद्रजीत सरोज ने और भी तीखा बयान दे डाला। उन्होंने कहा कि जब मुगलों ने मंदिर तोड़े, तब भगवान ने कुछ नहीं किया, इसका मतलब भगवान नहीं थे या फिर वो सिर्फ किताबों में हैं। उन्होंने ये भी कहा कि “अगर भगवान होते तो मस्जिदों में तो नहीं रहते, फिर मंदिरों में ही क्यों नहीं बचा पाए खुद को?” इस बयान ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है और अब BJP समेत कई हिन्दू संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। सियासी घमासान BJP नेताओं ने इस बयान को Hindu sentiments के खिलाफ बताया है और तुरंत माफी मांगने की मांग की है। वहीं, सोशल मीडिया पर भी इस बयान को लेकर ज़बरदस्त बवाल मचा है। कई users ने इंद्रजीत सरोज को “Hinduphobic” कहा है, तो कुछ ने उन्हें पार्टी से निकालने की मांग की है। Akhilesh Yadav की चुप्पी पर सवाल अब सवाल उठ रहा है कि क्या Samajwadi Party इस बयान से खुद को अलग करेगी या फिर Akhilesh Yadav इस पर चुप्पी साधे रहेंगे? क्योंकि पहले भी पार्टी के कुछ नेताओं के विवादित बयानों पर पार्टी ने कोई ठोस एक्शन नहीं लिया था। Desh Harpal का विश्लेषण ध्यान देने वाली बात यह है कि भारत जैसे विविधताओं वाले देश में धार्मिक भावनाएं बेहद संवेदनशील मुद्दा हैं। किसी भी राजनेता को ऐसा बयान देने से पहले यह सोचना चाहिए कि उसके शब्द समाज पर क्या असर डाल सकते हैं। इंद्रजीत सरोज का यह बयान सिर्फ राजनीतिक विवाद ही नहीं बल्कि समाज में वैमनस्य फैलाने वाला है। Desh Harpal यह मानता है कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी जरूरी है। खासतौर पर उन नेताओं के लिए जो लाखों लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
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“Coca-Cola ने मुसलमानों के लिए की पीली केप वाली कोल्ड ड्रिंक….?

Coca-Cola Special Coldrink Only For One Religion? Here’s The Truth | देश हरपल स्पेशल रिपोर्ट Coca-Cola की एक खास बोतल चर्चा में है — जिसकी कैप है पीले रंग की, और बताया जा रहा है कि यह केवल एक खास धर्म के लिए बनाई गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस दावे ने कई लोगों को चौंका दिया है। दावा ये भी किया जा रहा है कि यह “Special Coldrink” सिर्फ रमज़ान के महीने में बनाई जाती है और इसमें इस्तेमाल होने वाले Ingredients बाकी कोल्ड्रिंक्स से अलग हैं। लेकिन क्या यह सच है? चलिए देश हरपल पर जानते हैं इसकी पूरी सच्चाई। वायरल क्या हुआ? कुछ दिनों से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर Coca-Cola की एक बोतल की तस्वीर वायरल हो रही है जिसकी Yellow Cap है। दावा किया जा रहा है कि ये बोतल सिर्फ मुस्लिम समुदाय के लिए बनाई गई है और इसमें इस्तेमाल किए गए प्रोडक्ट्स को Halal Certified किया गया है। ये Yellow Cap आखिर है क्या? असल में, कोका-कोला कंपनी रमज़ान के मौके पर Middle East और कुछ अन्य मुस्लिम देशों में एक खास पैकेजिंग के साथ अपने प्रोडक्ट्स लॉन्च करती है। ये Yellow Cap उसी कस्टम पैकेजिंग का हिस्सा है। लेकिन इसका मतलब ये कतई नहीं है कि यह सिर्फ एक धर्म विशेष के लिए है। Coca-Cola का क्या कहना है? Coca-Cola Middle East की ओर से स्पष्ट किया गया है कि Yellow Cap Bottles में ऐसा कुछ भी नहीं है जो केवल किसी एक धर्म विशेष के लिए बनाया गया हो। बल्कि, यह Marketing Strategy है, ताकि रमज़ान के दौरान consumers को special feel दिया जा सके। इसके साथ ही ये Cap कुछ खास Instructions को Represent करता है जैसे कि “Halal Certified” होने की जानकारी। Halal Certification क्या होता है? Halal एक Arabic Word है जिसका मतलब होता है “वो जो अनुमति प्राप्त हो”। खाने-पीने के Products के लिए Halal Certification यह बताता है कि उसमें ऐसा कोई Ingredient नहीं है जो इस्लामिक कानून के विरुद्ध हो। भारत सहित कई देशों में Halal और Vegetarian दोनों तरह के Certification आम हैं। क्या भारत में भी यह Yellow Cap Bottle मिलती है? नहीं। यह पैकेजिंग केवल Middle East और कुछ चुनिंदा देशों में ही उपलब्ध है। भारत में फिलहाल ऐसी कोई Coca-Cola Bottle officially Launch नहीं की गई है। अफवाह क्यों फैली? Social Media पर आधी-अधूरी जानकारी के साथ Sensational Claims करना आजकल आम हो गया है। कुछ लोगों ने बिना पुख्ता जानकारी के सिर्फ Cap के रंग को देखकर यह मान लिया कि पूरी Drink एक धर्म विशेष के लिए बनाई गई है, जो कि ग़लत है। Coca-Cola की Yellow Cap वाली Bottle कोई धार्मिक पक्षपात नहीं बल्कि एक खास त्योहार के लिए मार्केटिंग रणनीति है। यह Drink सभी के लिए है, और इसमें ऐसा कुछ नहीं जो किसी एक धर्म के लिए Exclusively बनाया गया हो। Desh Harpal आपसे अपील करता है कि ऐसी अफवाहों से बचें और किसी भी खबर को आगे बढ़ाने से पहले उसकी सत्यता ज़रूर जांचें।
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Robert Vadra

Robert Vadra पहुंचें ED ऑफिस – बोले, “Parliament में Rahul की आवाज़ दबाई जाती है, यहां मेरी…”

दिल्ली: कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के पति और बिज़नेसमैन Robert Vadra आज एक बार फिर प्रवर्तन निदेशालय (ED) के समक्ष पेश हुए। यह पेशी गुरुग्राम के शिकोहपुर जमीन सौदे (Shikohpur Land Deal) को लेकर है, जिसमें Vadra की कंपनी Skylight Hospitality पर अवैध रूप से जमीन खरीदने और बेचने के आरोप हैं। यह मामला हरियाणा के NTC यानी National Tasking Committee की रिपोर्ट और शिकायत के आधार पर उभरा है। क्या है पूरा मामला? दरअसल, Skylight Hospitality ने गुरुग्राम के शिकोहपुर इलाके में 3.5 एकड़ जमीन खरीदी थी। आरोप है कि इस जमीन की कीमत बाज़ार मूल्य से बहुत कम दिखाई गई थी, और बाद में इसे भारी मुनाफे पर DLF जैसी बड़ी रियल एस्टेट कंपनी को बेच दिया गया। इस डील में सरकारी नियमों की अनदेखी और राजनीतिक प्रभाव के इस्तेमाल का आरोप है। ED की तरफ से Vadra को दूसरी बार समन भेजा गया, जिसके बाद आज वे दिल्ली स्थित कार्यालय पहुंचे। उनसे पूछताछ में प्रॉपर्टी डील के दस्तावेज़, लेन-देन की जानकारी, और संबंधित अधिकारियों से संपर्कों के बारे में सवाल किए गए। Vadra का पलटवार – सरकार पर लगाया बड़ा आरोप ED ऑफिस पहुंचने से पहले Robert Vadra ने मीडिया से बात करते हुए कहा – राजनीतिक रंग लेता मामला इस केस ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार selective targeting कर रही है, ताकि विपक्ष को दबाया जा सके। वहीं, भाजपा का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और no one is above the law। आगे क्या? ED इस मामले में दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई करेगी। अगर Vadra जांच में सहयोग नहीं करते हैं या आरोप साबित होते हैं, तो यह मामला लंबा खिंच सकता है और कानूनी पेंच और भी गहरे हो सकते हैं। Desh Harpal इस मामले से जुड़ी हर अपडेट आप तक पहुंचाता रहेगा। बने रहिए हमारे साथ।
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Aligarh Saas Damad Love Story

Aligarh Saas Damad Love Story: में हर दिन नया ड्रामा, Gujarat तक पहुंचा मामला!

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले की एक Aligarh Saas Damad Love Story ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। इस कहानी में किरदार हैं—एक होने वाला दामाद और उसकी होने वाली सास, जो शादी से ठीक पहले भाग निकले। अब यह सास-दामाद की unexpected प्रेम कहानी पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन चुकी है। भागे प्रेमियों की तलाश में जुटी पुलिस मडराक थाना क्षेत्र के मनोहरपुर कायस्त गांव की एक युवती की शादी 16 अप्रैल को दादों निवासी युवक से तय हुई थी। लेकिन इससे पहले ही युवती की मां अपने होने वाले दामाद संग फरार हो गई। फिलहाल दोनों का कुछ अता-पता नहीं है। पुलिस ने युवक के पिता, बहनोई और अन्य परिजनों से पूछताछ की है। शुरुआती लोकेशन उत्तराखंड मिलने पर टीम वहां भेजने की बात हुई थी, लेकिन अब नया अंदेशा है कि वे Gujarat में भी हो सकते हैं। युवक के कुछ दोस्तों पर इन्हें भगाने में मदद करने का शक है, इसलिए पुलिस अब उनसे कड़ी पूछताछ कर रही है। CO इगलास महेश कुमार ने बताया कि जानकारी मिलते ही टीमें संभावित ठिकानों पर भेजी जाएंगी। ताबीज से वशीकरण का आरोप युवक के पिता ने चौंकाने वाला आरोप लगाया है कि उसकी सास ने उसे ताबीज देकर वशीकरण कर लिया। उनके अनुसार, जब वह महिला बेटे की तबीयत खराब होने पर घर आई थी, तब वह दो ताबीज लेकर आई—एक गर्दन में और एक कमर में बांधने के लिए। इसके बाद से ही बेटे का व्यवहार पूरी तरह बदल गया। उन्होंने मीडिया से कहा, “अब यह साफ हो गया है कि हमारा बेटा किसी तंत्र-मंत्र के जाल में फंस गया है। वह महिला ही उसे बहका कर ले गई है। समाज में हमारी बहुत बदनामी हो गई है। इसलिए अब हम उसे घर नहीं लाएंगे और उसे संपत्ति से भी बेदखल किया जाएगा।” महिला के पति ने तोड़ी चुप्पी इस प्रेम-कांड में महिला के पति ने भी अब चुप्पी तोड़ी है। मिडिया से बातचीत में उन्होंने बताया कि रात करीब 10 बजे उन्होंने अपने होने वाले दामाद को कॉल किया था। पहले तो उसने बात टालनी चाही, लेकिन जब शक गहराया तो उसने धमकी देते हुए कहा, “तुमने 19 साल की शादी में अपनी पत्नी को बहुत परेशान किया है। अब उसे भूल जाओ, नहीं तो तुम्हारा घर वीरान कर दूंगा।” महिला के पति ने यह भी बताया कि उसी ने जिद करके अपने दामाद को मोबाइल दिलवाया था। जबकि वह अपनी होने वाली पत्नी से सिर्फ चंद मिनट बात करता था, लेकिन महिला से दिन भर बातें करता था। यह रिश्ता कब emotional affair बन गया, उन्हें अंदाज़ा नहीं हुआ। दोनों परिवारों ने तोड़ा रिश्ता अब इस लव स्टोरी का अंजाम यह है कि दोनों ही परिवारों ने महिला और युवक से रिश्ता खत्म कर दिया है। युवती व उसके पिता ने महिला को अपनाने से इनकार कर दिया है, वहीं युवक के परिवार ने भी साफ कह दिया है कि अब वह उनके लिए मरा हुआ है। अब दोनों परिवारों की सिर्फ एक ही मांग है—पुलिस जल्द से जल्द उन्हें ढूंढ़कर सामने लाए और जो जेवर-नकदी वे ले गए हैं, वह वापस करा दे। Aligarh की ये unconventional love story हर रोज़ नए मोड़ ले रही है—वशीकरण, भागना, धमकी, सामाजिक बदनामी और पारिवारिक टूटन सब कुछ इसमें है। पुलिस अपनी जांच में जुटी हुई है, लेकिन फिलहाल यह मामला और भी रहस्यमय होता जा रहा है। Desh Harpal इस अजीब प्रेम कहानी पर नज़र बनाए हुए है। आगे के अपडेट्स के लिए जुड़े रहिए।
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छत्तीसगढ़ विधानसभा में कांग्रेस लाएगी अविश्वास प्रस्ताव, 14 जुलाई को सरकार को घेरेगा विपक्ष

छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में कांग्रेस सरकार के खिलाफ बड़ा राजनीतिक कदम उठाने जा रही है। पार्टी ने तय किया है कि 14 जुलाई को विधानसभा में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा। रविवार को नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत के सरकारी निवास पर हुई कांग्रेस विधायक दल की बैठक में इस प्रस्ताव पर सहमति बनी। बैठक के बाद महंत ने कहा कि कांग्रेस को मौजूदा सरकार पर भरोसा नहीं है, इसलिए सदन में अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा। करीब दो घंटे चली कांग्रेस विधायक दल की बैठक नेता प्रतिपक्ष के सरकारी बंगले पर कांग्रेस विधायक दल की बैठक करीब दो घंटे तक चली। इससे पहले लगभग डेढ़ घंटे तक पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने विधानसभा सत्र की रणनीति पर अलग से चर्चा की। इसके बाद विधायक दल की बैठक में सरकार को घेरने की अंतिम रणनीति तय की गई। चरणदास महंत बोले- सरकार के वादे झूठे साबित हुए बैठक के बाद चरणदास महंत ने कहा कि कांग्रेस का सरकार पर से विश्वास उठ चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने वादे पूरे करने में विफल रही है। प्रदेश में भ्रष्टाचार बढ़ा है और आम जनता बिजली संकट, महंगाई, किसानों की समस्याओं तथा कानून-व्यवस्था जैसे कई मुद्दों से परेशान है। इन्हीं मुद्दों को लेकर कांग्रेस सदन में सरकार को घेरने की तैयारी कर रही है। नकटी गांव के मुद्दे पर भी होगा स्थगन प्रस्ताव कांग्रेस विधायक दल की बैठक में नकटी गांव का मामला भी प्रमुखता से उठा। पार्टी ने इस मुद्दे पर विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव लाने का फैसला किया है। चरणदास महंत ने कहा कि कांग्रेस इस मामले को पूरी मजबूती के साथ सदन में उठाएगी। जरूरत पड़ने पर सदन के भीतर विरोध प्रदर्शन भी किया जाएगा। सदन के साथ सड़क पर भी आंदोलन नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विधानसभा का मानसून सत्र भले ही केवल पांच दिनों का हो, लेकिन कांग्रेस सरकार को हर महत्वपूर्ण मुद्दे पर घेरने का प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी केवल सदन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जनता के मुद्दों को लेकर सड़क पर भी संघर्ष जारी रखेगी। सरकार देगी 1033 सवालों के जवाब इस बार विधानसभा सचिवालय में कुल 1033 प्रश्न लगाए गए हैं। इनमें 36 विधायकों ने नियमों के तहत अधिकतम 20-20 प्रश्न लगाए हैं। दिलचस्प बात यह है कि सवाल पूछने वालों में विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के विधायक भी शामिल हैं। ऐसे में मानसून सत्र के दौरान कई अहम मुद्दों पर सरकार को जवाब देना होगा। क्या होता है अविश्वास प्रस्ताव? अविश्वास प्रस्ताव किसी एक मंत्री के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरी सरकार के खिलाफ लाया जाता है। विपक्ष सरकार की नीतियों, फैसलों या जनहित के मुद्दों को आधार बनाकर यह प्रस्ताव पेश करता है। यदि प्रस्ताव स्वीकार होता है तो सदन में सरकार के कामकाज पर विस्तृत चर्चा होती है। इसके बाद मतदान कराया जाता है, जिससे यह तय होता है कि सरकार के पास सदन का बहुमत और विश्वास कायम है या नहीं। छत्तीसगढ़ और देशभर की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com

भोपाल में डेढ़ साल के मासूम का अपहरण, बोरे में भरकर ले जा रहा था पड़ोसी, लोगों ने बचाई जान

राजधानी भोपाल के बागसेवनिया थाना क्षेत्र में पुरानी रंजिश के चलते एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। पड़ोसी युवक ने बदला लेने की नीयत से डेढ़ साल के मासूम बच्चे का अपहरण कर उसे बोरे में भर लिया। हालांकि, बच्चे के रोने की आवाज सुनकर आसपास मौजूद लोगों ने समय रहते उसे बचा लिया। घटना के बाद लोगों ने आरोपी को पकड़कर उसकी पिटाई की और पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। घर के बाहर खेल रहे बच्चे को उठाया पुलिस के मुताबिक, बागमुगालिया निवासी रश्मि अहिरवार (27) अपने दो बच्चों और सास-ससुर के साथ रहती हैं। उनके पति का पहले ही निधन हो चुका है। शनिवार सुबह उनका डेढ़ वर्षीय बेटा घर के बाहर खेल रहा था। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाला अरुण वहां पहुंचा और बच्चे को उठाकर एक बोरे में भर लिया। इसके बाद वह मासूम को लेकर वहां से निकलने लगा। बच्चे के रोने से खुली साजिश रास्ते में बोरे के अंदर से बच्चे के रोने की आवाज सुनकर आसपास मौजूद लोगों को शक हुआ। लोगों ने आरोपी को रोककर बोरा खुलवाया तो उसके अंदर मासूम सुरक्षित मिला। यह देखते ही लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया और उसकी जमकर पिटाई कर दी। बाद में पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद आरोपी को हिरासत में ले लिया गया। पुरानी रंजिश के चलते रची थी साजिश पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसकी बच्चे की मां से पुरानी रंजिश थी। इसी दुश्मनी का बदला लेने के लिए उसने मासूम का अपहरण करने की योजना बनाई थी। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अपहरण सहित अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जांच जारी पुलिस का कहना है कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि वारदात में कोई और व्यक्ति शामिल था या नहीं। भोपाल समेत मध्य प्रदेश की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com

मध्यप्रदेश पुलिस में 168 अधिकारियों को मिला प्रमोशन, सूबेदार और कार्यवाहक RI बने रक्षित निरीक्षक

मध्यप्रदेश पुलिस विभाग में लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे अधिकारियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। पुलिस मुख्यालय ने प्रदेश के 168 सूबेदार और कार्यवाहक रक्षित निरीक्षकों (RI) को पदोन्नत कर नियमित रक्षित निरीक्षक (RI) बना दिया है। पुलिस महानिरीक्षक (प्रशासन) हरिनारायणाचारी मिश्र द्वारा जारी आदेश के बाद यह पदोन्नति लागू कर दी गई है। इससे प्रदेशभर के पुलिस अधिकारियों को बड़ी राहत मिली है। GAD के निर्देश के बाद शुरू हुई प्रक्रिया यह पदोन्नति प्रक्रिया 30 जून 2026 को मध्यप्रदेश के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा जारी पत्र और ‘मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025’ के तहत शुरू की गई। आदेश के अनुसार, सभी पदोन्नत अधिकारियों को फिलहाल रक्षित निरीक्षक के रिक्त पदों पर अगले आदेश तक अस्थायी रूप से पदस्थ किया गया है। मिलेगा लेवल-10 का वेतनमान प्रमोशन पाने वाले अधिकारियों को मध्यप्रदेश वेतन पुनरीक्षण नियम-2017 के तहत पे मैट्रिक्स लेवल-10 का लाभ मिलेगा। यह वेतनमान 9300-34800 रुपये + 4200 रुपये ग्रेड पे के अनुसार कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से प्रभावी होगा। इन मामलों में नहीं मिलेगी कार्यमुक्ति पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि यह सभी पदोन्नतियां सुप्रीम कोर्ट में लंबित विशेष अनुमति याचिका (SLP) क्रमांक 13954/2016 तथा भविष्य में न्यायालयों द्वारा दिए जाने वाले फैसलों के अधीन रहेंगी। साथ ही, पदोन्नत अधिकारियों को नियम-13 के तहत वेतन निर्धारण के लिए आदेश जारी होने के एक महीने के भीतर अपना विकल्प प्रस्तुत करना होगा। विभागीय जांच वाले अधिकारियों पर रोक पुलिस मुख्यालय ने सभी इकाई प्रमुखों को निर्देश दिए हैं कि यदि कोई अधिकारी निलंबित है, विभागीय जांच का सामना कर रहा है, किसी आपराधिक मामले में आरोप-पत्र (चार्जशीट) दाखिल हो चुका है या उसने अनिवार्य प्रशिक्षण पूरा नहीं किया है, तो उसे किसी भी स्थिति में कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा। मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों की रिलीविंग नियमों के अनुसार ही की जाएगी। मध्यप्रदेश और देशभर की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com

बिलासपुर में मछली चोरी का वीडियो बनाना पड़ा भारी, चौकीदार की पीट-पीटकर हत्या, 3 लोग हिरासत में

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के रतनपुर थाना क्षेत्र में मछली चोरी का वीडियो बनाने और उसका विरोध करने का मामला खूनी वारदात में बदल गया। शनिवार रात आरोपियों ने पहले चौकीदार की बाइक को स्कॉर्पियो से टक्कर मारी, फिर लाठी-डंडों से हमला कर उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने मामले में तीन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। स्कॉर्पियो से बाइक को मारी टक्कर पुलिस के अनुसार, घटना शनिवार रात करीब 9 बजे नवागांव कैंप जाने वाले रास्ते पर हुई। खूंटाघाट बांध में चौकीदारी करने वाले तिरिथराम यादव अपने साथी श्याम सिंह पोर्ते के साथ बाइक से ड्यूटी पर जा रहे थे। इसी दौरान स्कॉर्पियो में सवार आरोपी वहां पहुंचे और उनकी बाइक को टक्कर मार दी, जिससे दोनों सड़क पर गिर गए। खेत तक दौड़ाकर की बेरहमी से पिटाई बाइक से गिरने के बाद आरोपियों ने दोनों पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। जान बचाने के लिए तिरिथराम यादव खेत की ओर भागे, लेकिन आरोपी उनके पीछे दौड़ पड़े। आरोपियों ने उन्हें पकड़कर बेरहमी से पीटा। गंभीर चोटों के कारण तिरिथराम यादव की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, श्याम सिंह पोर्ते किसी तरह आरोपियों के चंगुल से बचकर भाग निकले और अपनी जान बचाई। मछली चोरी का विरोध बना हत्या की वजह पुलिस जांच में सामने आया है कि तिरिथराम यादव और श्याम सिंह पोर्ते खूंटाघाट बांध में चौकीदारी करते थे। आरोप है कि गोलू धीवर और अनिश धीवर लंबे समय से वहां अवैध रूप से मछली चोरी करते थे। तिरिथराम ने चोरी का विरोध किया था और आरोपियों का वीडियो भी बनाया था। इसी दौरान आरोपियों ने उनका मोबाइल फोन तोड़ दिया था। तभी से दोनों पक्षों के बीच रंजिश चली आ रही थी। पहले भी दर्ज हुई थी शिकायत रतनपुर थाना प्रभारी नीलेश पांडेय ने बताया कि मोबाइल तोड़ने की शिकायत पहले भी थाने में दर्ज कराई गई थी। उस समय आरोपियों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई थी। साथी ने बताई पूरी वारदात घटना के प्रत्यक्षदर्शी श्याम सिंह पोर्ते ने पुलिस को बताया कि शनिवार रात जब वे दोनों नवागांव कैंप की ओर जा रहे थे, तभी गोलू धीवर, अनिश धीवर और उनके अन्य साथी स्कॉर्पियो से पहुंचे। आरोपियों ने जान से मारने की नीयत से बाइक को टक्कर मारी। इसके बाद अनिश ने श्याम सिंह को पकड़ लिया, जबकि गोलू ने डंडे से दोनों पर हमला कर दिया। तिरिथराम जान बचाकर भागे, लेकिन आरोपी उन्हें पकड़कर पीटते रहे, जिससे उनकी मौत हो गई। हत्या का मामला दर्ज, आरोपियों की तलाश जारी पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। श्याम सिंह पोर्ते की शिकायत पर रतनपुर थाने में हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है। फिलहाल तीन संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि वारदात में शामिल अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। छत्तीसगढ़ और देशभर की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com

भोपाल: थार हटाने के विवाद में किसान को मारी गोली, लाइसेंसी रिवॉल्वर छीनकर किया फायर, 3 आरोपी गिरफ्तार

भोपाल के मिसरोद थाना क्षेत्र स्थित सागर रॉयल होम्स में शनिवार देर रात गेट पर खड़ी थार हटाने को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। रास्ता साफ करने के लिए हॉर्न बजाने पर तीन युवक भड़क गए। बाद में उन्होंने एक किसान के साथ मारपीट की, उसकी लाइसेंसी रिवॉल्वर छीन ली और दो राउंड फायर कर दिए। फायरिंग में एक गोली किसान के बाएं पैर में घुटने के नीचे लगी, जिससे हड्डी में फ्रैक्चर हो गया। दूसरी गोली निशाने से चूक गई। पुलिस ने हत्या के प्रयास समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। हॉर्न बजाने पर शुरू हुआ विवाद मिसरोद थाना प्रभारी विमलेश राय के अनुसार, सागर रॉयल होम्स निवासी 33 वर्षीय हरीश कुमार राय खेती-किसानी का काम करते हैं। शनिवार देर रात करीब 1 से 2 बजे के बीच वह अपनी स्कॉर्पियो से घर लौट रहे थे। मुख्य गेट पर हर्षित पटेल की थार खड़ी थी, जिसमें हर्षित, अनुभव चौबे और लोकेश रघुवंशी बैठे हुए थे। कई बार हॉर्न बजाने के बाद भी जब रास्ता खाली नहीं हुआ तो हरीश दूसरे गेट से होकर पार्किंग में चले गए। पार्किंग में की मारपीट, फिर छीन ली रिवॉल्वर पुलिस के मुताबिक, तीनों युवक भी थार लेकर पार्किंग में पहुंच गए। वहां गेट पर वाहन खड़ा करने को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर तीनों युवकों ने गाली-गलौज करते हुए डंडों से हरीश की पिटाई कर दी। इसी दौरान हर्षित ने हरीश की लाइसेंसी रिवॉल्वर छीन ली और दो गोलियां चला दीं। एक गोली हरीश के बाएं पैर में लगी, जबकि दूसरी गोली मिस हो गई। मौके से मिले दो खाली कारतूस घटना की सूचना मिलते ही मिसरोद पुलिस मौके पर पहुंची। एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैब) की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और वहां से दो खाली कारतूस बरामद किए। घायल हरीश कुमार राय को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। तीनों आरोपी गिरफ्तार, भेजे गए जेल पुलिस ने मामले में हर्षित पटेल (21), अनुभव चौबे (19) और लोकेश रघुवंशी (24) को गिरफ्तार कर लिया है। तीनों आरोपी निजी कंपनियों में कार्यरत बताए जा रहे हैं। आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है। भोपाल समेत मध्य प्रदेश की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com

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