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चीन का बड़ा फैसला: बोइंग जेट नहीं खरीदेगा, अमेरिका को दिया करारा जवाब

चीन का बड़ा फैसला: बोइंग जेट नहीं खरीदेगा, अमेरिका को दिया करारा जवाब

बीजिंग/वॉशिंगटन – अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनाव का असर अब विमान और धातुओं के व्यापार पर भी पड़ने लगा है। चीन ने साफ कर दिया है कि वह अब अमेरिकी विमान कंपनी बोइंग से नए जेट नहीं खरीदेगा। इसके साथ ही, चीन ने अमेरिका को कीमती मेटल्स (rare earth metals) की सप्लाई भी रोक दी है। क्यों लिया ये बड़ा फैसला? यह सब हुआ है अमेरिका द्वारा चीन पर लगाए गए नए टैक्स (टैरिफ) के बाद। अमेरिका ने हाल ही में कुछ चीनी सामानों पर भारी टैरिफ लगाए हैं। इसके जवाब में चीन ने बोइंग की डिलीवरी रोकने और कीमती मेटल्स की सप्लाई बंद करने का निर्णय लिया। बोइंग को लगेगा बड़ा झटका बोइंग के लिए चीन एक बड़ा ग्राहक रहा है। हर साल चीन दर्जनों बोइंग विमान खरीदता रहा है। लेकिन अब जब चीन ने मना कर दिया है, तो इसका सीधा असर अमेरिका की इकोनॉमी और बोइंग कंपनी पर पड़ेगा। टेक्नोलॉजी और मेटल की लड़ाई चीन के पास दुर्लभ मेटल्स का बड़ा भंडार है – जैसे लैन्थेनम, नियोडिमियम, डाइसप्रोसियम आदि। ये मेटल्स इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज़, गाड़ियाँ और रक्षा उपकरण बनाने में काम आते हैं। अगर चीन इनकी सप्लाई रोक देता है, तो अमेरिका और बाकी देशों की टेक इंडस्ट्री को बड़ी दिक्कत हो सकती है। आम लोगों पर भी असर? इस तरह की ट्रेड वॉर का असर आम लोगों पर भी पड़ता है। उड़ानों की कीमतें बढ़ सकती हैं, गैजेट्स महंगे हो सकते हैं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनिश्चितता बढ़ जाती है।
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US Visa New Rules 2025

US Visa New Rules 2025: ट्रंप प्रशासन के नए कानून से Non-Citizens रहें सावधान, हर समय साथ रखें ये दस्तावेज़

अगर आपका बेटा, दामाद या कोई जानने वाला अमेरिका (US) में रहता है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। अमेरिका में रहने वाले H-1B, F-1 या अन्य वीज़ा धारकों के लिए ट्रंप प्रशासन ने सख्त कानून लागू कर दिए हैं। अब यदि कोई भी गैर-अमेरिकी नागरिक अमेरिका में रह रहा है, तो उसे अपनी कानूनी स्थिति के प्रमाण हर समय साथ रखने होंगे। ये निर्देश 11 अप्रैल 2025 से लागू हो चुके हैं। क्यों जरूरी है ये कानून? यह नियम ट्रंप की कार्यकारी कार्रवाई ‘Protecting the American Public from Unauthorized Intrusions’ का हिस्सा है, जिसका मकसद अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे लोगों पर सख्त कार्रवाई करना है। यह कानून 1940 के Alien Registration Act पर आधारित है, लेकिन अब इसे कड़े दंड और नियमों के साथ लागू किया गया है। Alien Registration Requirement (ARR) के मुख्य बिंदु: भारतीयों पर इसका असर: अमेरिका में लगभग 54 लाख भारतीय रहते हैं, जिनमें करीब 2.2 लाख अवैध रूप से रह रहे हैं। H-1B वीजा और स्टूडेंट वीजा धारकों को दोबारा पंजीकरण की जरूरत नहीं है, लेकिन उन्हें अपने दस्तावेज़ हर समय साथ रखने होंगे। क्या करें भारतीय अप्रवासी? इमिग्रेशन वकीलों के सुझाव: अगर अधिकारी रोकें तो: गिरफ्तारी की स्थिति में: नागरिकों के लिए राहत: अमेरिकी नागरिकों को अपनी नागरिकता का प्रमाण साथ रखने की जरूरत नहीं है, लेकिन गैर-अमेरिकी नागरिकों को अब हर वक्त सतर्क रहना होगा। निष्कर्ष: अगर आपके परिवार या मित्र अमेरिका में रहते हैं, तो इस खबर को उनसे जरूर साझा करें। यह नया कानून अप्रवासियों के लिए बड़ी चेतावनी है। समय रहते दस्तावेज़ों को अपडेट करें और अपने अधिकारों की जानकारी रखें। पढ़ते रहिए DeshHarpal – आपकी खबर, आपकी भाषा में।
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Tariff Relief

US ने India को दी 90 दिन की Tariff Relief, PM Modi-Trump Deal से बढ़ेगा ₹500 Billion का Trade

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संबंधों को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने भारत पर लगाए गए अतिरिक्त आयात शुल्क (Tariffs) पर 90 दिनों की राहत देने का फैसला किया है। इस फैसले का स्वागत करते हुए भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने कहा कि भारत इस पूरे मामले को बेहद कुशलता से संभाल रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच फरवरी में ही इस दिशा में सहमति बन चुकी थी। PM Modi और Trump पहले ही कर चुके थे Trade Deal की Planning पीयूष गोयल ने ANI से बातचीत में कहा,“PM नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप ने फरवरी में ही यह तय कर लिया था कि दोनों देश एक Bilateral Trade Agreement पर साइन करेंगे, जिससे व्यापार 500 अरब डॉलर तक पहुंच सकेगा। इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि दोनों देशों के बीच बातचीत अच्छी प्रगति कर रही है और इस 90 दिनों की राहत से बातचीत को अंतिम रूप देने में मदद मिलेगी। Exporters को मिली राहत, अब समझौतों पर तेज़ी से होगा काम फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (FIEO) के अध्यक्ष एस.सी. रल्हान ने भी अमेरिकी प्रशासन के इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा:“यह हमारे निर्यातकों के लिए बहुत बड़ी राहत है। यह 90 दिन की राहत एक कूटनीतिक खिड़की की तरह है, जिसमें हम अहम व्यापार समझौतों को अंतिम रूप दे सकते हैं।” वाणिज्य मंत्रालय ने भी आश्वासन दिया है कि प्रस्तावित व्यापार समझौते को जल्द से जल्द फाइनल किया जाएगा। चीन पर टैरिफ बढ़ा, लेकिन India को मिली छूट ग्लोबल मार्केट में अस्थिरता के बीच अमेरिका ने चीन पर टैरिफ बढ़ाकर 125% कर दिया है, जबकि भारत सहित कई अन्य देशों को 90 दिनों की छूट दी गई है। हालांकि भारत पर अब भी 10% का बेसिक टैरिफ लागू है, जो 5 अप्रैल से प्रभावी हुआ है। अमेरिका ने भारत पर कुल मिलाकर 26% अतिरिक्त शुल्क लगाया था, जिसमें से अधिकतर पर अस्थायी राहत दी गई है। क्या है आगे की राह? इस अस्थायी राहत के चलते भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता को मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह वार्ता सफल रहती है, तो दोनों देशों के बीच $500 अरब डॉलर का व्यापार संभव है। इससे न केवल व्यापार संबंध बेहतर होंगे, बल्कि निवेश और रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे। निष्कर्ष:अमेरिका की तरफ से दी गई यह 90 दिनों की टैरिफ राहत भारत के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। यह न केवल एक्सपोर्टर्स को राहत देगा, बल्कि दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का रास्ता खोलता है।
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तहव्वुर राणा

26/11 का गुनहगार तहव्वुर राणा जल्द भारत में, US कोर्ट ने प्रत्यर्पण को दी मंज़ूरी

2008 के मुंबई आतंकी हमलों (26/11) के एक मुख्य साजिशकर्ता तहव्वुर हुसैन राणा को अमेरिका से भारत लाया जा रहा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उसकी प्रत्यर्पण याचिका खारिज कर दी, जिससे भारत आने का रास्ता साफ हो गया है। भारत की जांच एजेंसियों NIA (नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी) और RAW की टीमें पहले से ही अमेरिका में हैं और उसे जल्द भारत लाया जाएगा। कौन है तहव्वुर राणा? तहव्वुर राणा पाकिस्तानी मूल के कनाडाई नागरिक हैं, जिनका नाम 26/11 हमलों की साजिश में सामने आया था। वे डेविड कोलमैन हेडली के करीबी दोस्त हैं, जो पहले ही भारत की अदालत में हमलों की साजिश कबूल कर चुका है। हेडली ने भारत में रेकी की थी और आतंकियों को जानकारी दी थी – जिसमें तहव्वुर राणा की भूमिका सहयोगी की थी। राणा पर आरोप है कि उसने फर्जी बिजनेस वीज़ा और ट्रैवल एजेंसी के जरिए हेडली को भारत भेजा, ताकि वह मुंबई में हमले की तैयारी कर सके। कैसे हुआ प्रत्यर्पण का रास्ता साफ? राणा लंबे समय से अमेरिका में जेल में बंद था। भारत सरकार ने उसके प्रत्यर्पण की मांग की थी। हालांकि, राणा ने अदालत में कई बार याचिकाएं डालकर भारत भेजे जाने का विरोध किया। मगर आखिरकार, अमेरिका की अदालत ने साफ कर दिया कि उसे भारत भेजा जा सकता है। यह फैसला भारत की कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है। इससे यह भी संदेश गया है कि आतंक के खिलाफ भारत वैश्विक मंच पर गंभीरता से काम कर रहा है। 26/11 हमलों की पृष्ठभूमि 26 नवंबर 2008 को मुंबई पर आतंकी हमला हुआ था। पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकियों ने शहर के कई बड़े स्थानों जैसे ताज होटल, ओबेरॉय, सीएसटी स्टेशन, नरीमन हाउस आदि को निशाना बनाया था। इस हमले में 166 मासूम लोगों की जान गई, जिनमें कई विदेशी नागरिक और सुरक्षाकर्मी भी शामिल थे। भारत ने इस घटना को कभी नहीं भूला और लगातार दोषियों को सजा दिलाने की कोशिश की। भारत के लिए क्यों है यह महत्वपूर्ण? तहव्वुर राणा का भारत आना 26/11 के पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए न्याय की ओर एक बड़ा कदम है। इससे NIA को जांच को आगे बढ़ाने और नए सबूत जुटाने में मदद मिलेगी। इससे यह भी साबित होता है कि भारत अब केवल आतंकी हमलों को सहने वाला देश नहीं, बल्कि उनके खिलाफ कड़ा कदम उठाने वाला राष्ट्र बन चुका है।
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Mitra Vibhushan

PM Modi को मिला Sri Lanka का ‘Mitra Vibhushan’, कहा– पड़ोसी ही नहीं, सच्चा दोस्त है श्रीलंका

भारत और श्रीलंका के बीच गहरे और ऐतिहासिक संबंधों की एक और मिसाल उस वक्त सामने आई जब श्रीलंका सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सर्वोच्च विदेशी सम्मान “मित्र विभूषण” से नवाजा। इस सम्मान के जरिए श्रीलंका ने पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत द्वारा दिए गए सहयोग, विशेष रूप से आर्थिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक क्षेत्रों में किए गए योगदान की सराहना की। PM Modi बोले – श्रीलंका भारत का सिर्फ पड़ोसी नहीं, बल्कि भरोसेमंद मित्र है सम्मान प्राप्त करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “यह सिर्फ एक सम्मान नहीं बल्कि दोनों देशों के बीच गहरे विश्वास और मित्रता का प्रतीक है। श्रीलंका सिर्फ भारत का पड़ोसी नहीं, बल्कि एक ऐसा मित्र है जो हर परिस्थिति में साथ खड़ा रहता है।” क्या है ‘मित्र विभूषण’ सम्मान? ‘मित्र विभूषण’ श्रीलंका का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है जो किसी विदेशी नेता को दिया जाता है। अब तक यह सम्मान केवल तीन बार दिया गया है, जिससे इसकी विशेषता का अंदाजा लगाया जा सकता है। द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा पीएम मोदी की यह यात्रा श्रीलंका के नए राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के न्योते पर हुई। दोनों देशों ने कई प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को विस्तार देने पर सहमति जताई, जिनमें प्रमुख हैं: चीन के प्रभाव को संतुलित करने की रणनीति भारत और श्रीलंका के इस सहयोग को चीन के बढ़ते प्रभाव के मुकाबले में एक अहम रणनीतिक कदम माना जा रहा है। हंबनटोटा बंदरगाह पर चीन की उपस्थिति को देखते हुए भारत की यह साझेदारी श्रीलंका के लिए भी संतुलन का काम करेगी। सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों का ज़िक्र पीएम मोदी ने कहा कि भारत और श्रीलंका के संबंध केवल राजनीतिक या आर्थिक नहीं हैं, बल्कि ये सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत से गहराई से जुड़े हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में यह साझेदारी पूरे दक्षिण एशिया में शांति, स्थिरता और विकास का रास्ता खोलेगी।
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China ने USA पर 34% जवाबी टैरिफ लगाया, राष्ट्रपति ट्रम्प बोले – ‘वो डर गए हैं, ये कदम उन्हें भारी पड़ेगा’

“देश हरपल” विशेष रिपोर्ट 📅 दिनांक: 4 अप्रैल 2025✍🏻 देश हरपल ब्यूरो अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक जंग ने एक बार फिर तगड़ा मोड़ ले लिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, जो 2024 में दोबारा अमेरिका के राष्ट्रपति बने हैं, अब चीन को आर्थिक मोर्चे पर घेरने में पूरी आक्रामकता दिखा रहे हैं। अमेरिका ने लगाया 34% टैरिफ, चीन ने दिया जवाब हाल ही में राष्ट्रपति ट्रम्प ने 60 देशों पर नए टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जिसमें चीन पर 34% अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया। इससे पहले ट्रम्प प्रशासन ने एक महीने में दो बार चीन पर 10-10% टैरिफ लगाया था। अब चीन पर कुल मिलाकर 54% आयात शुल्क लागू हो चुका है।इसके जवाब में चीन ने भी अमेरिका पर 34% का जवाबी टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी है, जो 10 अप्रैल 2025 से लागू होगा। ट्रम्प ने इस मुद्दे पर ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए लिखा: “चीन ने गलत कदम उठाया है। वे घबरा गए हैं। यह एक ऐसी चीज है जिसे वे बर्दाश्त नहीं कर सकते। चीन का जवाबी टैरिफ उन्हें बहुत भारी पड़ेगा।” चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, “अमेरिका का यह कदम WTO नियमों का उल्लंघन है। इससे चीन के कानूनी व्यापारिक अधिकारों का हनन हो रहा है। हम अपने अधिकारों की रक्षा करेंगे।” ट्रम्प की नीति: ‘अमेरिका फर्स्ट’ 2.0 ट्रम्प के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद से ही उन्होंने व्यापारिक मोर्चे पर ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को और तेज़ कर दिया है। ट्रम्प का मानना है कि चीन वर्षों से अमेरिकी व्यापार और टेक्नोलॉजी का शोषण करता आया है और अब समय आ गया है कि अमेरिका मजबूत जवाब दे। ट्रम्प प्रशासन का दावा है कि नए टैरिफ से चीन की अर्थव्यवस्था पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा और अमेरिकी उद्योगों को फायदा होगा। वैश्विक बाजारों पर असर इस व्यापार युद्ध के कारण वैश्विक बाजारों में हलचल देखने को मिल रही है। एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट आई है, वहीं डॉलर में मजबूती देखी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह टकराव लंबा चला, तो इससे वैश्विक सप्लाई चेन और आर्थिक स्थिरता पर बुरा असर पड़ सकता है। भारत के लिए अवसर या चुनौती? भारत के लिए यह परिस्थिति दोधारी तलवार की तरह है। एक ओर जहां अमेरिका-चीन के बीच बढ़ते तनाव से भारत को वैकल्पिक सप्लायर बनने का मौका मिल सकता है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता का असर भारत की निर्यात नीति पर भी पड़ सकता है। निष्कर्ष:डोनाल्ड ट्रम्प की चीन को लेकर आक्रामक नीति एक बार फिर वैश्विक व्यापार जगत को नई दिशा दे रही है। आने वाले हफ्तों में इस व्यापार युद्ध का असर न केवल अमेरिका और चीन, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखेगा। 👉 देश-विदेश से जुड़ी ऐसी ही बड़ी खबरों के लिए पढ़ते रहिए देश हरपल – हरपल आपके साथ।
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बैंकॉक में पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस की अहम मुलाकात: बांग्लादेश ने किया था बैठक का अनुरोध

रिपोर्ट: देश हरपल न्यूज | दिनांक: 4 अप्रैल 2025 बैंकॉक में पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस की अहम मुलाकात, बांग्लादेश ने खुद रखा था अनुरोध – दक्षिण एशिया में बदलते समीकरणों के बीच बड़ी कूटनीतिक बातचीत बैंकॉक में BIMSTEC सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश के नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के बीच एक विशेष मुलाकात हुई। यह मुलाकात अपने आप में कई राजनीतिक और कूटनीतिक संकेतों से भरी हुई मानी जा रही है, खासकर ऐसे समय में जब बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार सत्ता से बाहर हो चुकी है और देश में अल्पसंख्यकों पर हमलों की खबरें अंतरराष्ट्रीय मंच पर चिंता का विषय बनी हुई हैं। बांग्लादेश की तरफ से हुआ था मुलाकात का अनुरोधमीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बैठक की पहल बांग्लादेश की ओर से की गई थी। मोहम्मद यूनुस जो कि एक प्रसिद्ध सामाजिक उद्यमी और ‘ग्रामीण बैंक’ के संस्थापक हैं, उन्होंने खुद पीएम मोदी से भेंट करने की इच्छा जताई थी। बांग्लादेश की मौजूदा सत्ता परिवर्तन के बीच यह कदम कई मायनों में महत्वपूर्ण है। राजनीतिक संदेशों से भरी बातचीतमाना जा रहा है कि यह मुलाकात सिर्फ एक शिष्टाचार भेंट नहीं थी, बल्कि इसके जरिए बांग्लादेश की राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर भारत को एक भरोसा दिलाने की कोशिश की गई है। भारत, जो कि बांग्लादेश का सबसे करीबी और बड़ा पड़ोसी है, वहां के हालिया घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए है। मोहम्मद यूनुस की पीएम मोदी से मुलाकात को वहां की नई राजनीतिक व्यवस्था के संभावित संकेत के रूप में देखा जा रहा है। अल्पसंख्यकों पर हमलों की पृष्ठभूमि में मुलाकात पिछले कुछ महीनों में बांग्लादेश में हिंदू, बौद्ध और ईसाई समुदायों पर हुए हमलों की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे वहां की सामाजिक स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं। भारत इन मुद्दों को लेकर लगातार सतर्क रहा है। ऐसे में मोहम्मद यूनुस की यह मुलाकात यह संकेत भी देती है कि बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद, नई सरकार या उसके समर्थक भारत से रिश्तों को और बेहतर करना चाहते हैं। यूनुस को लेकर बांग्लादेश में भी उथल-पुथलयह भी ध्यान देने योग्य है कि मोहम्मद यूनुस खुद भी बांग्लादेश की राजनीति में एक विवादित शख्सियत रहे हैं। शेख हसीना की सरकार के कार्यकाल में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले भी दर्ज हुए थे। लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उनकी छवि एक विचारशील और परिवर्तनकारी नेता की रही है। भारत-बांग्लादेश रिश्तों में नया अध्याय?बैंकॉक में हुई इस मुलाकात को भारत और बांग्लादेश के रिश्तों के संभावित नए अध्याय की शुरुआत के तौर पर देखा जा सकता है। पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस की यह बातचीत केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि रणनीतिक भी हो सकती है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के संबंध किस दिशा में बढ़ते हैं, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा। देश और विदेश की ऐसी ही अहम खबरों के लिए जुड़े रहिए — देश हरपल न्यूज़ के साथ।
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Donald Trump के 26% टैरिफ

Donald Trump के 26% टैरिफ से भारत को नुकसान या फायदा? सरकार कर रही है असर का विश्लेषण

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में 26% अतिरिक्त टैरिफ (टैक्स) लगाने का ऐलान किया है। इस फैसले का असर भारत सहित कई देशों पर पड़ सकता है। भारत सरकार इस टैरिफ के प्रभाव का विश्लेषण कर रही है और इसका हल निकालने की कोशिश कर रही है। टैरिफ कब लागू होगा? टैरिफ दो चरणों में लागू होगा: भारत सरकार की रणनीति भारत सरकार ने पहले से ही इस स्थिति से निपटने की तैयारी कर रखी थी। वाणिज्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस पर नजर बनाए रखने के लिए एक कंट्रोल रूम बनाया था। सरकार का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह नुकसानदायक नहीं है, क्योंकि अभी बातचीत की गुंजाइश बाकी है। ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिया है कि अगर कोई देश अमेरिका की व्यापारिक चिंताओं को दूर करता है, तो टैरिफ में राहत मिल सकती है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की कोशिशें भारत ने इस टैरिफ से छूट पाने के लिए पहले ही अमेरिका से बातचीत शुरू कर दी थी। इसी सिलसिले में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल पिछले महीने अमेरिका गए थे। दोनों देशों के बीच एक व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही है, जिसका पहला चरण सितंबर-अक्टूबर तक पूरा करने की योजना है। इसके अलावा, भारत पहले ही कुछ कदम उठा चुका है: डोनाल्ड ट्रंप का बयान और भारत पर असर 2 अप्रैल को ट्रंप ने इस टैरिफ की घोषणा की और इसे “लिबरेशन डे” (मुक्ति दिवस) करार दिया। उन्होंने कहा कि यह अमेरिकी उद्योग को फिर से मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। ट्रंप ने भारत की व्यापार नीतियों की आलोचना करते हुए कहा, “भारत हमसे 52% टैक्स लेता है, जो बहुत ज्यादा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेरे अच्छे दोस्त हैं, लेकिन मैंने उनसे कहा कि यह सही नहीं है।” उन्होंने बताया कि अमेरिका ने भारत पर “डिस्काउंटेड” यानी रियायती टैरिफ लगाया है, जो 26% है। भारत पर क्या असर पड़ेगा? भारत सरकार इस टैरिफ के प्रभाव का विश्लेषण कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत और अमेरिका के व्यापारिक संबंधों को प्रभावित कर सकता है। क्या होगा आगे?
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Trump

ट्रंप का ‘डर्टी-15’ लिस्ट: किन देशों पर गिरेगी भारी टैरिफ की गाज?

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति और 2024 के चुनावी दौड़ में फिर से मैदान में उतरे डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संभावित आर्थिक एजेंडे का एक बड़ा खुलासा किया है। ट्रंप ने ‘डर्टी-15’ नाम से उन 15 देशों की सूची तैयार की है, जिन पर वह भारी टैरिफ लगाने की योजना बना रहे हैं। उनका कहना है कि ये देश अमेरिका के साथ व्यापार में “अनुचित लाभ” उठा रहे हैं और इसलिए इन्हें ‘रिसिप्रोकल टैरिफ’ (पारस्परिक शुल्क) देना होगा। क्या है ट्रंप की ‘डर्टी-15’ लिस्ट? ट्रंप ने अमेरिका के व्यापारिक हितों को ध्यान में रखते हुए उन देशों की पहचान की है, जिन पर नए टैरिफ लगाए जाएंगे। इनमें चीन, भारत, मैक्सिको, जर्मनी, वियतनाम, जापान, कनाडा और कई अन्य देश शामिल हैं। ट्रंप के मुताबिक, ये देश अमेरिका के बाजारों से फायदा उठाते हैं लेकिन बदले में समान अवसर नहीं देते। किन देशों को झेलनी पड़ेगी टैरिफ की मार? इस लिस्ट में प्रमुख रूप से वे देश हैं जो अमेरिका को बड़े पैमाने पर निर्यात करते हैं, लेकिन बदले में अमेरिकी सामान पर ऊंचे शुल्क लगाते हैं या व्यापार में असंतुलन बनाए रखते हैं। भारत और चीन खासतौर पर इस नीति से प्रभावित हो सकते हैं क्योंकि दोनों देश अमेरिका को बड़े पैमाने पर टेक्सटाइल, फार्मा, ऑटोमोबाइल और आईटी सेक्टर में सेवाएं और उत्पाद निर्यात करते हैं। ट्रंप की व्यापार नीति और प्रभाव ट्रंप का यह कदम उनकी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का हिस्सा माना जा रहा है। इससे अमेरिका में कुछ उद्योगों को फायदा हो सकता है, लेकिन कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों और निर्यात पर निर्भर देशों को बड़ा झटका लग सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ट्रंप 2024 का चुनाव जीतते हैं, तो उनकी टैरिफ नीति वैश्विक व्यापार को अस्थिर कर सकती है और चीन, भारत जैसे देशों के साथ आर्थिक संबंधों को प्रभावित कर सकती है। भारत पर असर? भारत, जो अमेरिका के लिए एक प्रमुख व्यापारिक भागीदार है, ट्रंप की इस नई नीति से प्रभावित हो सकता है। अगर ट्रंप भारी टैरिफ लगाते हैं, तो भारत के टेक्सटाइल, आईटी और फार्मास्युटिकल उद्योगों को नुकसान हो सकता है। क्या ट्रंप का यह फैसला वाकई अमेरिका के हित में होगा या वैश्विक व्यापार के लिए एक नई चुनौती खड़ी करेगा? यह आने वाले समय में साफ होगा।
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नेपाल में पूर्व राजा ज्ञानेन्द्र शाह नजरबंद, मुकदमा चलाने की तैयारी, राजा समर्थक बड़े नेता गिरफ्तार

नेपाल में हाल ही में पूर्व राजा ज्ञानेन्द्र शाह के समर्थकों द्वारा राजशाही की बहाली की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए हैं। इन प्रदर्शनों के बीच, प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और अन्य प्रमुख नेताओं ने स्पष्ट रूप से कहा है कि नेपाल में राजशाही की वापसी संभव नहीं है। प्रधानमंत्री ओली ने सुझाव दिया कि यदि पूर्व राजा को अपनी लोकप्रियता पर विश्वास है, तो उन्हें संविधान के अनुसार अपनी पार्टी बनाकर चुनाव लड़ना चाहिए नेपाल में राजशाही समर्थक गतिविधियों में वृद्धि देखी गई है, जिसमें पूर्व राजा ज्ञानेन्द्र शाह की सक्रिय भूमिका की चर्चा हो रही है। राजशाही समर्थक पार्टी ‘राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी’ भी देश के विभिन्न हिस्सों में राजशाही की बहाली के समर्थन में कार्यक्रम आयोजित कर रही है प्रधानमंत्री ओली ने इन गतिविधियों के पीछे भारत की भूमिका का आरोप लगाया है और संसद में इस मुद्दे को उठाने की बात कही है। उन्होंने पूर्व राजा ज्ञानेन्द्र शाह को गिरफ्तार कराने की भी कसम खाई है इन घटनाओं के बीच, नेपाल की राजनीतिक स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। पूर्व राजा के समर्थकों की बढ़ती सक्रियता और सरकार की सख्त प्रतिक्रिया से देश में अस्थिरता बढ़ने की आशंका है। आने वाले दिनों में नेपाल की राजनीति में और भी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है।
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Editor's Picks

China

अमेरिका नहीं China बना India से बड़ा खरीदार – Plan-B का बड़ा कमाल

वैश्विक व्यापार की तस्वीर तेजी से बदल रही है और इसका सीधा फायदा अब भारत को मिल रहा है। जहां पहले उम्मीद थी कि अमेरिका भारत से इस खास प्रोडक्ट का सबसे बड़ा खरीदार बनेगा, वहीं अब चीन (China) ने बाजी मार ली है। China ने भारत से इस प्रोडक्ट की बड़ी मात्रा में खरीद शुरू कर दी है, जिससे एक्सपोर्ट सेक्टर में नई जान आ गई है। सरकार की “Plan-B” रणनीति को इस पूरे बदलाव का अहम कारण माना जा रहा है। क्या है पूरा बदलाव? कुछ समय पहले तक भारत के एक्सपोर्ट में अमेरिका और कुछ यूरोपीय देश ही मुख्य खरीदार थे। लेकिन अब स्थिति बदल रही है। भारत ने अपनी व्यापार नीति को डायवर्सिफाई करते हुए नए बाजारों की ओर कदम बढ़ाया है। इसी बदलाव के तहत चीन के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत हुए हैं और अब वह भारत से बड़े पैमाने पर आयात कर रहा है। चीन की बढ़ती डिमांड क्यों अहम है? चीन जैसे बड़े बाजार का भारत से जुड़ना सिर्फ एक सामान्य व्यापारिक लेन-देन नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा आर्थिक संकेत है। इससे भारतीय कंपनियों को नए अवसर मिल रहे हैं और एक्सपोर्ट ग्रोथ में तेजी आई है। Government Plan-B कैसे बना गेमचेंजर? भारत सरकार की Plan-B रणनीति का मुख्य उद्देश्य था: इस रणनीति के चलते भारत ने चीन जैसे बड़े बाजारों में अपनी पकड़ बनानी शुरू की है। भारत को क्या फायदा हो रहा है? इस पूरे बदलाव का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर दिख रहा है: आगे की तस्वीर कैसी हो सकती है? विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही ट्रेंड जारी रहा तो भारत आने वाले समय में ग्लोबल सप्लाई चेन का एक बड़ा हिस्सा बन सकता है। चीन जैसे देशों से बढ़ता व्यापार भारत के लिए लंबे समय में बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Bada Mangal 2026: 19 Years बाद ज्येष्ठ में 8 बड़े मंगल, इन 4 राशियों पर Money की बरसेगी बारिश

Bada Mangal 2026: 19 Years बाद ज्येष्ठ में 8 बड़े मंगल, इन 4 राशियों पर Money की बरसेगी बारिश

नई दिल्ली: साल 2026 में ज्येष्ठ महीने में एक खास संयोग बन रहा है। करीब 19 years बाद इस बार 8 बड़े मंगल पड़ रहे हैं, जिसे बहुत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान Lord Hanuman की पूजा करने से विशेष फल मिलता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। क्या है बड़ा मंगल का महत्व? ज्येष्ठ महीने के हर मंगलवार को बड़ा मंगल कहा जाता है। इस दिन भक्त Lord Hanuman की पूजा, व्रत और भंडारा करते हैं। माना जाता है कि इससे संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। 19 साल बाद बन रहा खास योग इस बार ज्येष्ठ महीने में 8 मंगलवार पड़ रहे हैं, जो बहुत दुर्लभ माना जाता है। इससे धार्मिक महत्व और भी बढ़ गया है और लोग खास तैयारी कर रहे हैं। इन 4 राशियों को होगा बड़ा फायदा ज्योतिष के अनुसार इस बार 4 राशियों के लिए यह समय बेहद लाभदायक माना जा रहा है: कैसे करें पूजा? बड़े मंगल के दिन सुबह स्नान कर लाल वस्त्र पहनें और Lord Hanuman को सिंदूर, चमेली का तेल और बूंदी का प्रसाद चढ़ाएं। हनुमान चालीसा का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। मान्यता और आस्था यह पर्व सिर्फ पूजा का नहीं, बल्कि सेवा और भक्ति का भी प्रतीक है। कई जगहों पर भंडारे और प्रसाद वितरण किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं।
कॉन्सर्ट में ‘धुरंधर’ सिंगर पर फैंस भड़के, LipSync के आरोप के बाद सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग तेज

कॉन्सर्ट में ‘धुरंधर’ सिंगर पर फैंस भड़के, LipSync के आरोप के बाद सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग तेज

एक बड़े कॉन्सर्ट के दौरान मशहूर सिंगर धुरंधर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। फैंस ने आरोप लगाया कि सिंगर ने लाइव गाने की जगह LipSync किया, जिससे दर्शकों में नाराज़गी देखने को मिली। क्या हुआ कॉन्सर्ट में? कॉन्सर्ट के दौरान सिंगर ने मंच पर शानदार एंट्री की और परफॉर्मेंस शुरू की। लेकिन कुछ ही देर में दर्शकों को शक हुआ कि गाना लाइव नहीं गाया जा रहा। कई फैंस का कहना है कि सिंगर सिर्फ गाने के साथ होंठ हिला रही थीं। परफॉर्मेंस के दौरान अलग अंदाज़ परफॉर्मेंस के बीच सिंगर ने खुद पर पानी डालकर और जोश में झूमकर माहौल बनाने की कोशिश की। हालांकि, यह अंदाज़ कुछ लोगों को पसंद आया, लेकिन कई फैंस को लगा कि यह असली गायकी से ध्यान हटाने की कोशिश है। सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग कॉन्सर्ट के वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कई यूज़र्स ने सिंगर की आलोचना की और कहा कि फैंस टिकट खरीदकर लाइव सिंगिंग सुनने आते हैं, न कि लिप सिंक देखने। फैंस की मिली-जुली प्रतिक्रिया जहां कुछ फैंस ने सिंगर का समर्थन किया और इसे सिर्फ एक एंटरटेनमेंट शो बताया, वहीं कई लोगों ने इसे फैंस के साथ धोखा करार दिया। क्या कहती है इंडस्ट्री? म्यूजिक इंडस्ट्री में कभी-कभी लिप सिंक का इस्तेमाल होता है, खासकर बड़े शो में। लेकिन फैंस की उम्मीद हमेशा लाइव परफॉर्मेंस की ही रहती है।
‘दो साल में दूसरी Maternity Leave संभव’, इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

‘दो साल में दूसरी Maternity Leave संभव’, इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

महिलाओं के हक में एक अहम फैसले में Allahabad High Court ने कहा है कि अगर जरूरत हो, तो महिला कर्मचारी दो साल के अंदर दूसरी Maternity Leave भी ले सकती है। इस फैसले से कामकाजी महिलाओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। क्या है पूरा मामला? मामला एक महिला कर्मचारी की छुट्टी से जुड़ा था, जिसे दूसरी बार मातृत्व अवकाश लेने में दिक्कत आ रही थी। इस पर कोर्ट ने साफ किया कि कानून महिलाओं के स्वास्थ्य और बच्चे की देखभाल को प्राथमिकता देता है। कोर्ट ने क्या कहा? Allahabad High Court ने अपने आदेश में कहा कि मातृत्व अवकाश का उद्देश्य मां और बच्चे दोनों की भलाई है। ऐसे में इसे सीमित सोच के साथ नहीं देखा जाना चाहिए। महिलाओं के लिए क्यों है अहम? यह फैसला उन महिलाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जो कम समय के अंतर में दो बच्चों की प्लानिंग करती हैं। अब उन्हें छुट्टी को लेकर ज्यादा चिंता नहीं करनी पड़ेगी। काम और परिवार के बीच संतुलन कोर्ट का यह फैसला कामकाजी महिलाओं को अपने परिवार और करियर के बीच बेहतर संतुलन बनाने में मदद करेगा। साथ ही यह संदेश भी देता है कि महिलाओं के अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। समाज पर क्या असर पड़ेगा? विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह के फैसले महिलाओं को और सशक्त बनाते हैं और कार्यस्थल पर उनके अधिकारों को मजबूत करते हैं।
शांति वार्ता पर ब्रेक! JD Vance का पाकिस्तान दौरा टला, ईरान ने अमेरिका पर साधा निशाना

शांति वार्ता पर ब्रेक! JD Vance का पाकिस्तान दौरा टला, ईरान ने अमेरिका पर साधा निशाना

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही शांति कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। अमेरिका के नेता JD Vance का प्रस्तावित पाकिस्तान दौरा फिलहाल टाल दिया गया है। इस बीच ईरान ने अमेरिका पर तीखा हमला बोलते हुए उसे ‘समुद्री डकैत’ तक कह दिया है। क्यों टला वेंस का पाकिस्तान दौरा? सूत्रों के अनुसार, JD Vance का Pakistan दौरा शांति वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए अहम माना जा रहा था। लेकिन अचानक इसे स्थगित कर दिया गया। इससे दोनों देशों के बीच बातचीत की प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है। ईरान का अमेरिका पर बड़ा आरोप इस पूरे घटनाक्रम के बीच Iran ने United States पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ईरान का कहना है कि अमेरिका समुद्र में उसकी गतिविधियों में दखल दे रहा है, जिसे उसने ‘समुद्री डकैती’ जैसा बताया। बढ़ता तनाव, मुश्किल होती शांति एक तरफ जहां शांति वार्ता की उम्मीदें थीं, वहीं अब हालात और तनावपूर्ण होते नजर आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बातचीत जल्द शुरू नहीं हुई, तो इसका असर पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर पड़ सकता है। क्या है आगे का रास्ता? फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि क्या अमेरिका और पाकिस्तान के बीच वार्ता दोबारा शुरू होगी या नहीं। साथ ही ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता विवाद भी अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चुनौती बन सकता है।

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