पाकिस्तान पर बढ़ते संकट की आहट मध्य-पूर्व में चल रहे तनाव, खासकर Iran से जुड़े हालात, अब पाकिस्तान के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं। पहले से आर्थिक संकट से जूझ रहा देश अब बाहरी दबाव के कारण और कमजोर पड़ता दिख रहा है। PM Shehbaz Sharif ने क्या कहा? पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने हाल ही में माना कि क्षेत्रीय हालात का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। उनका कहना है कि ऊर्जा, व्यापार और निवेश जैसे अहम सेक्टर इस तनाव से प्रभावित हुए हैं, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ गया है। कैसे बढ़ रहा है आर्थिक दबाव? तेल की कीमतें बनी बड़ी वजहIran से जुड़े तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़े हैं। पाकिस्तान जैसे आयात-निर्भर देश के लिए यह बड़ा झटका है। व्यापार में सुस्तीमध्य-पूर्व के देशों के साथ व्यापारिक गतिविधियां धीमी पड़ने लगी हैं, जिससे कारोबार और राजस्व दोनों प्रभावित हो रहे हैं। डॉलर की किल्लतविदेशी मुद्रा भंडार पहले ही सीमित है। ऐसे में बढ़ता आयात और घटता निवेश स्थिति को और गंभीर बना रहा है। निवेशकों का भरोसा कमअस्थिर माहौल के कारण विदेशी निवेशक सतर्क हो गए हैं, जिससे नई निवेश संभावनाएं घट रही हैं। आम लोगों की जिंदगी पर असर इस पूरे घटनाक्रम का असर सीधे आम जनता पर पड़ रहा है। एक आम परिवार के लिए घर का बजट संभालना अब पहले से ज्यादा मुश्किल होता जा रहा है। आगे क्या हो सकता है? आर्थिक जानकारों का मानना है कि अगर क्षेत्रीय तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो पाकिस्तान को और बड़े आर्थिक झटके लग सकते हैं। सरकार को अंतरराष्ट्रीय मदद और सख्त फैसलों का सहारा लेना पड़ सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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