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भारतीय IT प्रोफेशनल्स को बड़ी राहत: H-1B वीजा की $1 लाख फीस पर ट्रंप का फैसला कोर्ट ने रद्द किया

भारतीय IT प्रोफेशनल्स को बड़ी राहत: H-1B वीजा की $1 लाख फीस पर ट्रंप का फैसला कोर्ट ने रद्द किया

अमेरिका में काम करने वाले भारतीय IT प्रोफेशनल्स और कंपनियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। एक अमेरिकी अदालत ने H-1B वीजा पर लगाई गई 1 लाख डॉलर की भारी फीस को रद्द कर दिया है। यह फैसला पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के उस नियम के खिलाफ आया है जिसमें वीजा प्रोसेसिंग को काफी महंगा कर दिया गया था। क्या था मामला? अमेरिका में H-1B वीजा उन विदेशी प्रोफेशनल्स के लिए होता है, जो खासकर IT, टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग सेक्टर में काम करने जाते हैं। ट्रंप प्रशासन ने इस वीजा पर लगभग 1 लाख डॉलर (करीब 83 लाख रुपये) की अतिरिक्त फीस लगाने का नियम बनाया था, जिससे कंपनियों और कर्मचारियों पर भारी आर्थिक बोझ बढ़ गया था। कोर्ट ने क्या कहा? अमेरिकी कोर्ट ने इस फैसले को गलत और अनुचित मानते हुए इसे रद्द कर दिया। कोर्ट का कहना था कि इस तरह की भारी फीस से योग्य विदेशी प्रोफेशनल्स के लिए अमेरिका में काम करना मुश्किल हो जाता और यह नियम कानूनी आधार पर सही नहीं था। भारतीय IT सेक्टर को फायदा इस फैसले का सीधा फायदा भारत के हजारों IT प्रोफेशनल्स और बड़ी टेक कंपनियों को मिलेगा। भारत से हर साल बड़ी संख्या में इंजीनियर और टेक एक्सपर्ट H-1B वीजा पर अमेरिका जाते हैं। अब वीजा प्रक्रिया पहले से ज्यादा आसान और सस्ती होने की उम्मीद है। क्यों अहम है यह फैसला?
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Bhutan में 5.8 तीव्रता का भूकंप, पूर्वोत्तर भारत में भी महसूस हुए झटके

Bhutan में 5.8 तीव्रता का भूकंप, पूर्वोत्तर भारत में भी महसूस हुए झटके

Bhutan में आज 5.8 तीव्रता का भूकंप आने से इलाके में हलचल मच गई। झटके इतने तेज थे कि आसपास के कई क्षेत्रों में लोग घबराकर अपने घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए। भूकंप के असर से पड़ोसी देश India के पूर्वोत्तर राज्यों में भी झटके महसूस किए गए। खासकर असम और आसपास के इलाकों में लोगों ने कंपन महसूस किया, जिससे कुछ देर के लिए दहशत का माहौल बन गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि अब तक किसी बड़े नुकसान या जनहानि की कोई सूचना सामने नहीं आई है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील है, इसलिए ऐसे झटकों का आना सामान्य माना जाता है, लेकिन सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। भूटान और भारत दोनों ही देशों में स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और सतर्क रहने की अपील की है।
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Ahemdabad विमान दुर्घटना ने देश को झकझोरा, एयर इंडिया हादसे पर जांच तेज

Ahemdabad विमान दुर्घटना ने देश को झकझोरा, एयर इंडिया हादसे पर जांच तेज

Ahemdabad में हुई विमान दुर्घटना ने पूरे देश को गहरा सदमा दिया है। एयर इंडिया से जुड़ा यह हादसा अचानक हुआ, जिससे यात्रियों और उनके परिवारों में चिंता और दुख का माहौल बन गया। घटना के बाद तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए गए। स्थानीय प्रशासन, एयरपोर्ट अथॉरिटी और आपदा प्रबंधन टीमों ने मिलकर मौके पर तेजी से कार्रवाई की। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है और कई यात्रियों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। सरकारी एजेंसियों ने हादसे की जांच शुरू कर दी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि दुर्घटना के पीछे असली कारण क्या था। विमान की तकनीकी खराबी, मौसम की स्थिति और अन्य सभी पहलुओं की गहराई से जांच की जा रही है। इस घटना के बाद विमान सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग भी तेज हो गई है।
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TMC

TMC vs BJP: दिल्ली में बड़ी सियासी मुलाकात, भूपेंद्र यादव से बागी TMC नेताओं की मीटिंग से बढ़ी टेंशन

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट बढ़ गई है। राजधानी दिल्ली में केंद्रीय मंत्री Bhupender Yadav से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कुछ बागी सांसदों और नेताओं की मुलाकात ने राजनीतिक माहौल को पूरी तरह से गरमा दिया है। इस मुलाकात को सिर्फ एक औपचारिक बातचीत नहीं, बल्कि आने वाले समय में बड़े सियासी बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष Suvendu Adhikari भी मौजूद रहे। शुभेंदु अधिकारी, जो पहले खुद TMC का हिस्सा थे, अब बीजेपी के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं और लगातार ममता सरकार पर हमलावर रहते हैं। TMC में अंदरूनी असंतोष की चर्चा तेज बताया जा रहा है कि बैठक में शामिल कुछ TMC नेताओं ने पार्टी नेतृत्व के प्रति अपनी नाराजगी भी जताई है। हालांकि अभी तक किसी तरह के आधिकारिक इस्तीफे या पार्टी टूट की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस मुलाकात ने अंदरूनी खींचतान की चर्चा को और हवा दे दी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मुलाकात आने वाले समय में बंगाल की राजनीति की दिशा बदल सकती है। क्या बदल रहे हैं बंगाल के सियासी समीकरण? क्या है आगे की तस्वीर? फिलहाल इस मुलाकात पर किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे बंगाल की सियासत में बड़े बदलाव की शुरुआती दस्तक माना जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sanjay Jha का बड़ा बयान, बोले- ममता बनर्जी और केजरीवाल ने कमजोर किया इंडिया गठबंधन

Sanjay Jha का बड़ा बयान, बोले- ममता बनर्जी और केजरीवाल ने कमजोर किया इंडिया गठबंधन

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के कार्यकारी अध्यक्ष Sanjay Jha ने इंडिया गठबंधन को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विपक्षी दलों को एकजुट कर एक मजबूत मंच बनाने की कोशिश की थी, लेकिन सहयोगी दलों के बीच एकजुटता और साझा सोच की कमी के कारण गठबंधन कमजोर पड़ गया। एक इंटरव्यू के दौरान संजय झा से पूछा गया कि वर्ष 2023 में इंडिया गठबंधन की पहली बैठक पटना में नीतीश कुमार के आवास पर हुई थी, फिर जेडीयू उससे अलग क्यों हो गई। इस पर उन्होंने कहा कि गठबंधन को मजबूत बनाए रखने के लिए सभी दलों का एक दिशा में काम करना जरूरी था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। संजय झा ने आरोप लगाते हुए कहा कि “दो लोगों ने इंडिया अलायंस को खत्म कर दिया। उनका नाम ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल है।” उनके अनुसार चुनाव के दौरान गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच बेहतर तालमेल और स्पष्ट रणनीति का अभाव दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि जब किसी गठबंधन में शामिल दलों के बीच साझा लक्ष्य और समन्वय नहीं होता, तो उसका असर चुनावी प्रदर्शन पर भी पड़ता है। यही वजह रही कि विपक्षी एकता की कोशिशें अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकीं। संजय झा के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू हो गई है। अब देखना होगा कि उनके इस आरोप पर इंडिया गठबंधन के अन्य दलों की क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
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CBI Raid in 661 Crore Fund Scam: हरियाणा-चंडीगढ़ में 6 ठिकानों पर छापेमारी

CBI Raid in 661 Crore Fund Scam: हरियाणा-चंडीगढ़ में 6 ठिकानों पर छापेमारी

हरियाणा और चंडीगढ़ में सामने आए 661 करोड़ रुपये के कथित सरकारी फंड घोटाले की जांच तेज हो गई है। मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 6 जून को चंडीगढ़, पंचकूला और दिल्ली-एनसीआर के 6 अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की। जांच एजेंसी के अनुसार यह मामला सरकारी फंड की कथित हेराफेरी से जुड़ा है, जिसमें IDFC First Bank और AU Finance Bank के माध्यम से वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। जांच के दौरान हरियाणा सरकार के 8 विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन के 2 विभागों के फंड में गड़बड़ी के संकेत मिले हैं। सीबीआई की जांच में चंडीगढ़ नगर निगम और CREST (चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसायटी) के खातों में भी कथित अनियमितताएं सामने आई हैं। इसके बाद एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। सूत्रों के अनुसार, हरियाणा कैडर के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के आवासों पर भी तलाशी ली गई। इसके अलावा मामले से जुड़े अधिकारियों और निजी कंपनियों के परिसरों की भी जांच की गई। जांच के दायरे में आई Vipam Consultancy Pvt. Ltd. और उसके निदेशक के ठिकानों पर भी सीबीआई की टीम ने दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच की। एजेंसी अब जुटाए गए सबूतों के आधार पर मामले की आगे की पड़ताल कर रही है। इस कार्रवाई के बाद सरकारी फंड के इस्तेमाल और निगरा
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Jaipur में 24 घंटे के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद, लोगों को हो सकती है परेशानी

Jaipur में 24 घंटे के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद, लोगों को हो सकती है परेशानी

Jaipur। राजस्थान की राजधानी जयपुर में प्रशासन ने एहतियात के तौर पर शहर के कई इलाकों में 24 घंटे के लिए इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद करने का आदेश जारी किया है। यह फैसला कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी तरह की अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए लिया गया है। इंटरनेट बंद होने का असर सबसे ज्यादा उन लोगों पर पड़ सकता है जो अपने रोजमर्रा के कामों के लिए ऑनलाइन सेवाओं पर निर्भर हैं। छात्रों की पढ़ाई, ऑनलाइन भुगतान, व्यापारिक गतिविधियां और डिजिटल सेवाएं कुछ समय के लिए प्रभावित हो सकती हैं। प्रशासन का कहना है कि यह कदम लोगों की सुरक्षा और शांति बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अपुष्ट जानकारी पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों से मिली जानकारी को ही सही मानें। स्थानीय लोगों का मानना है कि इंटरनेट बंद होने से असुविधा जरूर होगी, लेकिन यदि इससे शहर में शांति और सुरक्षा बनी रहती है तो सभी को प्रशासन का सहयोग करना चाहिए। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और आवश्यकता के अनुसार आगे के निर्णय लिए जाएंगे।
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Varanasi में शहर के बाहर शिफ्ट होंगी मीट और मछली की shops , नगर निगम ने लिया बड़ा फैसला

Varanasi में शहर के बाहर शिफ्ट होंगी मीट और मछली की shops , नगर निगम ने लिया बड़ा फैसला

Varanasi। धर्मनगरी काशी में मीट, मांस और मछली की shops को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। वाराणसी नगर निगम की बैठक में तय किया गया है कि शहर के भीतर संचालित होने वाली सभी मीट, मांस और मछली की दुकानों को शहर की सीमा के बाहर स्थानांतरित किया जाएगा। नगर निगम के इस फैसले के बाद अब शहर के अंदर कच्चा मीट और मछली की बिक्री नहीं होगी। प्रस्ताव के अनुसार मौजूदा दुकानों को रामनगर, सूजाबाद, गनेशपुर, अवलेशपुर और शिवपुर जैसे बाहरी क्षेत्रों में शिफ्ट किया जाएगा। इस मुद्दे को सबसे पहले नगर निगम सदन में पार्षद गुलशन अली ने उठाया था। उन्होंने पिछले वर्ष मांग की थी कि मीट और मछली की दुकानों को शहर के बाहर स्थानांतरित किया जाए। उनका कहना था कि सावन माह के दौरान मीट की दुकानें लंबे समय तक बंद रहती हैं, जिससे व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। नगर निगम का मानना है कि इस फैसले से शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने में मदद मिलेगी, वहीं व्यापारियों के लिए भी व्यवस्थित तरीके से कारोबार करने का विकल्प उपलब्ध होगा।
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Amit Shah से मिले कैप्टन अमरिंदर सिंह, कांग्रेस में वापसी की चर्चाओं के बीच बढ़ी सियासी हलचल

Amit Shah से मिले कैप्टन अमरिंदर सिंह, कांग्रेस में वापसी की चर्चाओं के बीच बढ़ी सियासी हलचल

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता Amarinder Singh ने दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah से मुलाकात की है। इस मुलाकात के बाद पंजाब की राजनीति में एक बार फिर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस में वापसी की अटकलें तेज पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा चल रही थी कि कैप्टन अमरिंदर सिंह जल्द ही दोबारा Indian National Congress में वापसी कर सकते हैं। हालांकि, अमित शाह से हुई मुलाकात के बाद अब इन अटकलों को लेकर नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। दिल्ली में अहम मुलाकात सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में हुई इस मुलाकात को पंजाब की आगामी राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। पंजाब की राजनीति पर नजर कैप्टन अमरिंदर सिंह लंबे समय तक कांग्रेस का बड़ा चेहरा रहे हैं। बाद में उन्होंने पार्टी छोड़कर बीजेपी का साथ लिया था। अब उनकी संभावित राजनीतिक दिशा को लेकर पंजाब की राजनीति में हलचल बढ़ गई है।
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IATA : एशिया-पैसिफिक में एविएशन बूम: 2044 तक 4.1 अरब यात्री, भारत निभा रहा अहम भूमिका

IATA : एशिया-पैसिफिक में एविएशन बूम: 2044 तक 4.1 अरब यात्री, भारत निभा रहा अहम भूमिका

इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन International Air Transport Association(IATA) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में हवाई यात्रा की मांग तेजी से बढ़ रही है, और इसमें भारत एक प्रमुख भूमिका निभा रहा है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि साल 2044 तक इस क्षेत्र में हवाई यात्रियों की संख्या 4.1 अरब तक पहुंच सकती है। कितनी तेजी से बढ़ेगा एयर ट्रैफिक? IATA के मुताबिक: यह आंकड़ा दर्शाता है कि आने वाले दो दशकों में एशिया-पैसिफिक दुनिया के सबसे बड़े एविएशन बाजारों में से एक बन जाएगा। भारत की भूमिका क्यों अहम है? IATA के एशिया-पैसिफिक रीजनल वाइस प्रेसिडेंट शेल्डन ही के अनुसार, भारत पिछले कई वर्षों से इस ग्रोथ स्टोरी का एक मजबूत हिस्सा रहा है। भारत को दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते घरेलू सिविल एविएशन बाजारों में से एक माना जा रहा है, जहां एयर ट्रैफिक लगातार बढ़ रहा है। क्या हैं बड़ी चुनौतियां? रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि तेज ग्रोथ के साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आ रही हैं, जैसे:
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Bittu Tabahi

Bittu Tabahi ने बदली सोच, अकेले शुरू किया नदी सफाई अभियान; नगरपालिका भी हुई प्रभावित

नदी में गंदगी देखकर ज्यादातर लोग शिकायत करते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के एक युवक ने शिकायत करने के बजाय खुद कुछ करने की ठानी। स्थानीय स्तर पर ‘बिट्टू तबाही’ (Bittu Tabahi) के नाम से पहचाने जाने वाले इस युवक ने अकेले ही नदी की सफाई का जिम्मा उठा लिया। उनका यह जज्बा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बिट्टू ने नदी में जमा कचरे और गंदगी को देखकर सफाई अभियान शुरू किया। शुरुआत किसी बड़े इंतजाम या टीम के साथ नहीं हुई। उन्होंने अपने स्तर पर सफाई करना शुरू किया और लगातार इस काम में जुटे रहे। नदी को साफ रखने का लिया संकल्प बिट्टू का मानना है कि नदी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि आसपास के लोगों और पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने नदी में जमा कचरे को हटाने की पहल की। उनका यह प्रयास धीरे-धीरे स्थानीय लोगों का ध्यान खींचने लगा। लोगों ने देखा कि बिना किसी दबाव या दिखावे के बिट्टू लगातार नदी की सफाई में लगे हुए हैं। नगरपालिका ने भी की पहल की सराहना बिट्टू के लगातार सफाई अभियान की जानकारी नगरपालिका तक पहुंची तो उनके प्रयास की सराहना की गई। एक युवक द्वारा अपने स्तर पर नदी को साफ रखने की कोशिश को अधिकारियों ने सकारात्मक कदम माना। इस पहल ने यह भी दिखाया कि अगर कोई व्यक्ति अपने आसपास के पर्यावरण को लेकर जिम्मेदारी महसूस करे, तो छोटी शुरुआत भी बड़ा संदेश दे सकती है। सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आया अभियान बिट्टू का नदी सफाई अभियान अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। उनके प्रयास को देखकर दूसरे लोगों में भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद है। आज नदियों में बढ़ता कचरा और प्रदूषण बड़ी चुनौती है। ऐसे में बिट्टू की पहल लोगों को यह संदेश देती है कि नदी को साफ रखना सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। ‘बिट्टू तबाही’ ने दी एक अलग मिसाल बिट्टू की कहानी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने बदलाव का इंतजार नहीं किया, बल्कि खुद बदलाव की शुरुआत करने का फैसला लिया। अकेले शुरू किया गया उनका यह सफाई अभियान अब दूसरों के लिए प्रेरणा बनता दिखाई दे रहा है। कई बार किसी बड़े बदलाव की शुरुआत बड़े अभियान से नहीं, बल्कि एक छोटे से कदम से होती है। बिट्टू का यह प्रयास उसी सोच की मिसाल है—अगर इरादा मजबूत हो, तो एक इंसान भी बदलाव की शुरुआत कर सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
UN

World Map में बड़ा बदलाव! UN ने Africa के असली Size को दिखाने का रास्ता साफ किया

दुनिया का नक्शा (World Map) देखते हुए शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इसमें दिखाई देने वाले देशों और महाद्वीपों का आकार असलियत से अलग भी हो सकता है। लेकिन अब इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र में एक अहम पहल हुई है। UN महासभा ने ऐसे World Map को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें धरती के अलग-अलग हिस्सों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाने की कोशिश की गई है। इस बदलाव के बाद नक्शे पर Africa पहले से काफी बड़ा दिखाई देगा, जबकि Europe और North America, खासकर US का आकार पुराने नक्शे की तुलना में छोटा नजर आ सकता है। प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला, लेकिन अमेरिका ने इसका विरोध किया। पुराने World Map में आखिर समस्या क्या है? दुनिया के स्कूलों और कई नक्शों में लंबे समय से Mercator Projection का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे 16वीं सदी में Gerardus Mercator ने तैयार किया था। उस समय इसका सबसे बड़ा फायदा समुद्री यात्राओं और Navigation में था। लेकिन Mercator Projection की एक खासियत ही इसकी सबसे बड़ी कमी भी बन गई। इसमें जैसे-जैसे कोई क्षेत्र Equator से दूर जाता है, उसका आकार नक्शे पर ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि Greenland जैसे इलाके नक्शे पर अपनी वास्तविकता से बहुत बड़े नजर आते हैं। दूसरी तरफ Africa, जो दुनिया के सबसे बड़े महाद्वीपों में से एक है, अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देता है। मसलन, सामान्य Mercator Map में Greenland और Africa का आकार देखकर किसी को लग सकता है कि दोनों लगभग बराबर हैं। असल में Africa का क्षेत्रफल Greenland से करीब 14 गुना ज्यादा है। Equal Earth Projection क्यों चर्चा में है? UN के प्रस्ताव में Equal Earth Projection जैसे नक्शों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इस Projection की खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग महाद्वीपों के क्षेत्रफल को ज्यादा सही अनुपात में दिखाया जाता है। यानी नक्शे को देखकर Africa का वास्तविक विशाल आकार ज्यादा साफ समझ में आता है। Europe और North America भी Mercator Map की तुलना में छोटे दिखाई देते हैं। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है—न तो Africa बड़ा हुआ है और न ही Europe या America छोटा। बदलाव सिर्फ उस तरीके में है, जिससे उन्हें नक्शे पर दिखाया जाता है। America ने UN के प्रस्ताव का विरोध क्यों किया? इस प्रस्ताव पर अमेरिका का रुख बाकी देशों से अलग रहा। मतदान के दौरान अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया। अमेरिकी पक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया कि संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक स्तर की बड़ी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। वहीं प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि नक्शा सिर्फ रास्ता या देश की लोकेशन बताने वाला साधन नहीं है। यह लोगों के मन में दुनिया की एक तस्वीर भी बनाता है। अफ्रीकी देशों की तरफ से लंबे समय से यह बात उठती रही है कि पुराने नक्शों में Africa का वास्तविक आकार सही तरीके से सामने नहीं आता। इसी सोच के साथ “Correct the Map” अभियान को आगे बढ़ाया गया। UN के फैसले से क्या सभी Maps बदल जाएंगे? यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब अचानक हर जगह नया नक्शा दिखाई देने लगेगा। UN महासभा का यह फैसला कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। यानी Google Maps, स्कूल की किताबों, सरकारी दस्तावेजों या दूसरे Digital Platforms को तुरंत अपना नक्शा बदलना जरूरी नहीं है। इसका मकसद देशों, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया और दूसरे संगठनों को ऐसे Map Projections अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो दुनिया के क्षेत्रफल को ज्यादा सही तरीके से दिखाते हों। इसके बावजूद Mercator Projection पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है। Navigation और समुद्री यात्राओं जैसी जरूरतों में इसका इस्तेमाल आज भी उपयोगी माना जाता है। India पर क्या असर पड़ेगा? भारत को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस नए World Map से देश का आकार या सीमा बदल जाएगी? इसका जवाब है—नहीं। भारत की जमीन, क्षेत्रफल और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इस प्रस्ताव का कोई असर नहीं पड़ेगा। सिर्फ नक्शे पर भारत और बाकी देशों को दिखाने का अनुपात बदल सकता है। अगर Equal Earth या इसी तरह की Projection का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ता है तो आने वाले समय में School Geography Books, Educational Charts, News Graphics और Digital Maps में दुनिया की तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे सकती है। भारत के लिए इसका असर मुख्य रूप से शिक्षा और Geography की समझ के स्तर पर होगा। बच्चों और आम लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि नक्शे पर दिखाई देने वाला आकार हमेशा किसी देश या महाद्वीप के वास्तविक क्षेत्रफल के बराबर नहीं होता। Africa के लिए इसे बड़ी उपलब्धि क्यों माना जा रहा है? इस पूरे विवाद में Africa सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में है। समर्थकों का कहना है कि सदियों से इस्तेमाल हो रहे नक्शों ने अनजाने में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की एक असंतुलित तस्वीर बना दी है। Africa दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है और इसके बावजूद Mercator Map में इसका आकार उसकी वास्तविक विशालता के मुकाबले कम नजर आता है। यही वजह है कि African countries और African Union की ओर से इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। उनके लिए यह केवल Map Projection का मामला नहीं, बल्कि दुनिया के सामने Africa की वास्तविक तस्वीर रखने का भी सवाल है। क्या दुनिया सच में बदल गई? नहीं। दुनिया का भूगोल बिल्कुल नहीं बदला है। न कोई नया देश बना है, न किसी देश की सीमा बदली है और न ही Africa का क्षेत्रफल अचानक बढ़ गया है। बदलाव सिर्फ इतना है कि दुनिया को कागज या स्क्रीन पर किस तरह दिखाया जाए, इस पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा सामने आई है। एक तरह से देखें तो यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि नक्शा हमेशा पूरी तरह निष्पक्ष तस्वीर नहीं होता। उसे बनाने का तरीका तय करता है कि हमें दुनिया का कौन-सा हिस्सा कितना बड़ा या छोटा दिखाई देगा। आने वाले वर्षों में अगर Equal Earth जैसी projections को ज्यादा अपनाया जाता है, तो संभव है कि नई पीढ़ी के लिए World Map की तस्वीर वही न हो,...
Swatantra Bhardwaj

Swatantra Bhardwaj Detained: CJP Protest के बाद स्वतंत्र भारद्वाज हिरासत में

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP Protest के दौरान एक छात्रा के पिता के साथ कथित मारपीट का मामला अब फिर चर्चा में है। मामले में आरोपी बताए जा रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज (Swatantra Bhardwaj) को दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थकों के प्रदर्शन और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग के कुछ घंटे बाद हुई। Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर CJP के प्रतिनिधि और समर्थक शुक्रवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से मामले में जल्द कार्रवाई करने और आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ राजनीतिक नेता भी वहां पहुंचे। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बातचीत हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया और इसके बाद भारद्वाज को ट्रेस करने के लिए टीमें सक्रिय की गईं। क्या है पूरा मामला? यह विवाद जंतर-मंतर पर CJP के एक प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी। इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार के नाम FIR में शामिल किए गए थे। मामला उस समय और गरमा गया, जब स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े एक Podcast Video की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वीडियो में भारद्वाज ने घटना को लेकर आपत्तिजनक दावे किए थे। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई। Viral Video ने बढ़ाया विवाद वायरल वीडियो सामने आने के बाद CJP ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। संगठन का कहना था कि वीडियो में कथित तौर पर घटना को लेकर किए गए दावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वहीं दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही थी और मेडिकल रिपोर्ट में चोट को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए कुछ दावों की पुष्टि नहीं हुई थी। Bulandshahr में पुलिस ने पकड़ा पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की टीमों ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में ट्रेस किया। रिपोर्टों में बताया गया कि पुलिस की कार्रवाई से पहले वह वहां से निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थक स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इससे मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर चल रहा विवाद भी फिलहाल एक नए चरण में पहुंच गया है। FIR में SC/ST Act की धाराएं जोड़ने की जानकारी प्रदर्शन के बाद पुलिस की ओर से मामले में SC/ST Act से संबंधित धाराएं जोड़ने की बात सामने आई। पीड़ित की दोबारा मेडिकल जांच कराए जाने की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई है। हालांकि, मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच और आगे की पुलिस कार्रवाई पर निर्भर करेगी। आरोपों की पुष्टि अदालत की प्रक्रिया में ही होगी। पुलिस के सामने अब आगे की जांच बड़ी चुनौती स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने के बाद अब पुलिस के सामने वायरल वीडियो, FIR में दर्ज आरोपों, मेडिकल रिपोर्ट और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच अहम होगी। फिलहाल इस मामले ने CJP Protest, Delhi Police और Social Media Influencer को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस की ओर से क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Saharanpur

UP Bulldozer Action: Saharanpur कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर चला बुलडोजर, मायावती-इकरा हसन ने उठाए सवाल

Saharanpur उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने शनिवार को मस्जिद के खिलाफ Bulldozer Action शुरू कर दिया। कार्रवाई की खबर फैलते ही इलाके में हलचल बढ़ गई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई। किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन का एक्शन कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर जमीन के स्वामित्व और निर्माण की वैधता पर काफी समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन का दावा है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है और निर्माण को अवैध माना गया है। मामला पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा। जुलाई में अदालत ने मस्जिद को हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही संबंधित पक्ष पर करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति लगाए जाने की बात भी सामने आई थी। इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी गई थी। 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोका मस्जिद पर कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इकरा हसन और पुलिस अधिकारियों के बीच इस दौरान तीखी बहस भी हुई। इसका वीडियो सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। बाद में उनके आवास के बाहर पुलिस बल तैनात किए जाने की भी खबर सामने आई। इकरा हसन ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोका जा रहा है। उनका कहना था कि वह मौके पर जाकर हालात देखना चाहती थीं। मायावती ने सरकार से कार्रवाई रोकने को कहा सहारनपुर मस्जिद विवाद पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार से कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की और मामले को संवेदनशील बताते हुए सावधानी से कदम उठाने की बात कही। मायावती ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह का तनाव बढ़ने से रोकना जरूरी है। उन्होंने लोगों से भी शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। इमरान मसूद बोले- हाईकोर्ट जाएंगे सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया है। उनका कहना है कि मस्जिद की जमीन और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर उनका पक्ष अलग है। जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद मसूद ने मामले को हाईकोर्ट ले जाने की बात कही है। उनका कहना है कि आगे की कानूनी लड़ाई अदालत में लड़ी जाएगी और उपलब्ध दस्तावेजों को वहां रखा जाएगा। प्रशासन और विपक्ष के दावे अलग-अलग पूरे विवाद में प्रशासन और मस्जिद पक्ष के दावे अलग हैं। प्रशासन जहां निर्माण को सरकारी जमीन पर हुआ अवैध निर्माण बता रहा है, वहीं मस्जिद से जुड़े लोग और कुछ विपक्षी नेता इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं। यही वजह है कि मामला सिर्फ बुलडोजर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। अब इसकी गूंज राजनीतिक मंच से लेकर अदालत तक सुनाई दे रही है। आगे क्या होगा? सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर हुई कार्रवाई के बाद अब सबकी नजर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर है। इमरान मसूद की ओर से हाईकोर्ट जाने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में अदालत में इस मामले को लेकर क्या रुख सामने आता है, यह महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई के बाद सहारनपुर में राजनीतिक माहौल गर्म है। एक तरफ अधिकारी कोर्ट के आदेश के पालन की बात कह रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nepal

Nepal Flood: दार्चुला में Landslide का खतरा बढ़ा, Trishuli से भारतीय परिवार का Rescue; हजारों Missing

नेपाल (Nepal) में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बाद हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नदियों का जलस्तर बढ़ने, मलबा आने और पहाड़ी इलाकों में Landslide के खतरे ने राहत और बचाव अभियान को और मुश्किल बना दिया है। सबसे चिंता की बात यह है कि हादसे के कई दिन बाद भी हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि, इसी बीच Trishuli क्षेत्र से दो लोगों को नौ दिन बाद जिंदा निकालना राहत और उम्मीद की बड़ी खबर बनकर सामने आया है। दार्चुला में Landslide का खतरा, निचले इलाकों पर नजर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। दार्चुला समेत संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से निचले इलाकों को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। पहाड़ों से मलबा आने और नदियों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका के बीच लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ से कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है। Trishuli से भारतीय नागरिकों का Rescue इस बीच त्रिशूली इलाके से तीन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की खबर सामने आई है। इनमें एक परिवार शामिल है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, रेस्क्यू किए गए लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और उनके भारत लौटने की प्रक्रिया में मदद की जा रही है। भारत सरकार नेपाल में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए लगातार नेपाली प्रशासन के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को Rescue किया गया है, जबकि 275 भारतीयों के लापता होने की जानकारी दी गई है। भारत ने राहत अभियान के लिए करीब 95 टन राहत सामग्री भी भेजी है। 9 दिन बाद Trishuli Tunnel से जिंदा निकले 2 मजदूर नेपाल में चल रहे Rescue Operation की सबसे बड़ी खबर Trishuli-3A Hydropower Project से आई। यहां सुरंग में फंसे संजय साह और कबीर महारजन को करीब नौ दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। दोनों को सुरंग के अंदर काफी गहराई से निकाला गया। बचाव दल ने पहले अंदर से आवाजें सुनीं और फिर संपर्क स्थापित होने के बाद ऑपरेशन तेज किया। आखिरकार दोनों को बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने उन परिवारों में भी उम्मीद जगाई है जिनके अपने लोग अभी तक लापता हैं। राहत दल अब अन्य संभावित Survivors तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं। 1300 के करीब मौतें, 5 हजार से ज्यादा लोग Missing इस प्राकृतिक आपदा का असर कितना बड़ा है, इसका अंदाजा मृतकों और लापता लोगों की संख्या से लगाया जा सकता है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार 1,294 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी और 5,053 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में बदलाव देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और Hydropower Projects को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और राहत शिविरों में रह रहे हैं। Rescue Operation अभी भी जारी Trishuli Tunnel से दो लोगों को जिंदा निकाले जाने के बाद Rescue Teams का हौसला बढ़ा है। नेपाल सेना, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ लगातार प्रभावित इलाकों में Search Operation चला रहे हैं। Hydropower Projects के आसपास अभी भी बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका है। मलबा, पानी और क्षतिग्रस्त सुरंगें बचाव अभियान में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। इसके बावजूद टीमें लगातार नए रास्ते तलाश रही हैं। भारत ने नेपाल की मदद बढ़ाई नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में भारत ने भी राहत और बचाव अभियान में सहयोग बढ़ाया है। भारतीय विशेषज्ञों और राहत सामग्री को नेपाल भेजा गया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की टीमें Rescue, Medical और अन्य जरूरी सेवाओं में सहायता कर रही हैं। फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और पहाड़ी इलाकों में नए Landslide और Flood के खतरे से निपटना है। Trishuli Tunnel से नौ दिन बाद दो लोगों का जिंदा निकलना इस त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण जरूर लेकर आया है। अब Rescue Teams की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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