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PM Modi की तारीफ में बोले नायडू, कहा- प्रेरणा देने वाले नेता हैं PM

PM Modi की तारीफ में बोले N. Chandrababu Naidu, कहा- प्रेरणा देने वाले नेता हैं PM

एनडीए संसदीय दल की बैठक में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री N. Chandrababu Naidu ने प्रधानमंत्री Narendra Modi की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री की ऊर्जा, नेतृत्व क्षमता और वैश्विक छवि की सराहना की। नायडू ने कहा कि उन्होंने इतने वर्षों के राजनीतिक अनुभव में कभी भी नरेंद्र मोदी को थका हुआ नहीं देखा। उनके अनुसार प्रधानमंत्री हमेशा ऊर्जा से भरपूर रहते हैं और अपने आसपास के लोगों में भी उत्साह और प्रेरणा का संचार करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि पीएम मोदी का नेतृत्व केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी पहचान एक वैश्विक नेता के रूप में भी बन चुकी है। नायडू ने यह भी उल्लेख किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले विभिन्न सर्वेक्षणों में मोदी को दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेताओं में शामिल किया जाता है, जो देश के लिए गर्व की बात है। नायडू के इस बयान को एनडीए बैठक में एक सकारात्मक राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जहां गठबंधन के भीतर एकजुटता और नेतृत्व पर भरोसे को प्रमुखता मिली।
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ज्यादा एथेनॉल वाले पेट्रोल पर अब नहीं लगेगी एक्साइज ड्यूटी, सरकार का बड़ा फैसला

ज्यादा Ethanol Blended Petrol पर अब नहीं लगेगी एक्साइज ड्यूटी, सरकार का बड़ा फैसला

सरकार ने देश में हरित ऊर्जा (Green Energy) को बढ़ावा देने के लिए एक अहम कदम उठाया है। अब ज्यादा एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (Ethanol Blended Petrol) पर एक्साइज ड्यूटी नहीं लगेगी। इस फैसले का मकसद साफ है—पर्यावरण को सुरक्षित रखना और पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता को कम करना। सरकार का कहना है कि एथेनॉल मिक्स फ्यूल न सिर्फ प्रदूषण घटाने में मदद करता है, बल्कि किसानों को भी फायदा पहुंचाता है क्योंकि एथेनॉल का उत्पादन कृषि उत्पादों से होता है। इस फैसले से आने वाले समय में एथेनॉल आधारित ईंधन को और बढ़ावा मिलेगा और पेट्रोल की खपत में भी कमी आने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता (Energy Independence) की दिशा में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।
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PoK से बलूचिस्तान तक बढ़ा असंतोष? पाकिस्तान आर्मी और आसिम मुनीर पर उठ रहे सवाल

PoK से बलूचिस्तान तक बढ़ा असंतोष? पाकिस्तान आर्मी और आसिम मुनीर पर उठ रहे सवाल

पाकिस्तान के कई संवेदनशील इलाकों — खासकर PoK, वजीरिस्तान और बलूचिस्तान — में हाल के दिनों में तनाव और विरोध की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। रिपोर्ट्स में पाकिस्तान सेना और सेना प्रमुख Asim Munir की नीतियों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और खुफिया दस्तावेजों में दावा किया गया है कि PoK में प्रदर्शन और सेना की कार्रवाई के दौरान कई नागरिक प्रभावित हुए हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, हालिया हिंसा में बच्चों और महिलाओं की मौत के आरोप भी लगाए गए हैं। वहीं बलूचिस्तान में भी लंबे समय से सुरक्षा अभियान और अलगाववादी हिंसा को लेकर तनाव बना हुआ है। पाकिस्तान सेना लगातार आतंकवाद विरोधी अभियानों की बात कर रही है, जबकि दूसरी तरफ मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय समूहों की ओर से कार्रवाई पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान इस समय आंतरिक सुरक्षा, आर्थिक संकट और राजनीतिक दबाव जैसी कई चुनौतियों से जूझ रहा है। इसी बीच सेना की भूमिका और सरकार की नीतियों को लेकर बहस और तेज हो गई है। हालांकि पाकिस्तान सरकार और सेना की ओर से इन आरोपों को लेकर अलग-अलग समय पर सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी कार्रवाई का पक्ष रखा गया है। फिलहाल पूरे मामले पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर बनी हुई है।
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AIADMK के दोनों गुटों में पैचअप! फ्लोर टेस्ट में विजय का सपोर्ट करने वाले 21 विधायकों को नहीं मिलेगी सजा

AIADMK के दोनों गुटों में पैचअप! फ्लोर टेस्ट में विजय का सपोर्ट करने वाले 21 विधायकों को नहीं मिलेगी सजा

तमिलनाडु की राजनीति में AIADMK को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। पार्टी के भीतर चल रहे विवाद के बीच अब सुलह की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। सूत्रों और रिपोर्ट्स के मुताबिक, फ्लोर टेस्ट के दौरान सरकार के पक्ष में समर्थन देने वाले 21 AIADMK विधायकों के खिलाफ अब किसी तरह की अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। ये विधायक पहले पार्टी लाइन से अलग जाकर दूसरी तरफ मतदान करने के कारण चर्चा में आ गए थे। लेकिन अब पार्टी नेतृत्व ने मामले को और आगे न बढ़ाते हुए अंदरूनी एकता बनाए रखने का फैसला किया है। हालांकि इस घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि AIADMK के भीतर मतभेद अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं, लेकिन फिलहाल पार्टी नेतृत्व स्थिति को संभालने और संगठन को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला पार्टी में टूट को रोकने और आने वाले समय में स्थिरता बनाए रखने की कोशिश का हिस्सा है।
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Shefali Jariwala के निधन के बाद भावुक हुए पति पराग त्यागी, श्मशान घाट को लेकर किए गए दावे पर चर्चा तेज

Shefali Jariwala के निधन के बाद भावुक हुए पति पराग त्यागी, श्मशान घाट को लेकर किए गए दावे पर चर्चा तेज

टीवी और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की मशहूर अभिनेत्री Shefali Jariwala के निधन के बाद उनके पति Parag Tyagi गहरे सदमे में हैं। 2025 में शेफाली के अचानक निधन ने उनके परिवार, फैंस और पूरी इंडस्ट्री को झकझोर दिया था। शेफाली जरीवाला सिर्फ 42 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गई थीं। उनके जाने के बाद पराग त्यागी लगातार उनकी यादों में जी रहे हैं और अक्सर सोशल मीडिया पर उनकी यादें साझा करते नजर आते हैं। इसी बीच हाल ही में पराग त्यागी से जुड़ी कुछ बातें सामने आई हैं, जिनमें बताया जा रहा है कि वे श्मशान घाट भी पहुंचे थे और वहां अपने भावनात्मक अनुभवों को लेकर कुछ दावे किए। सोशल मीडिया पर यह भी चर्चा है कि उन्होंने वहां कुछ अजीब अनुभव महसूस करने की बात कही, हालांकि ये बातें उनकी निजी भावनाओं और विश्वास से जुड़ी बताई जा रही हैं। फिलहाल पराग त्यागी पूरी तरह अपनी पत्नी की यादों में डूबे हुए हैं और इस मुश्किल समय में खुद को संभालने की कोशिश कर रहे हैं। फैंस भी लगातार उन्हें सोशल मीडिया पर सपोर्ट और हिम्मत दे रहे हैं।
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H-1B Visa Fee विवाद: अमेरिकी कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन का 1 लाख डॉलर शुल्क रद्द किया, राजनीति गरमाई

H-1B Visa Fee विवाद: अमेरिकी कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन का 1 लाख डॉलर शुल्क रद्द किया, राजनीति गरमाई

अमेरिका में H-1B Visa को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। एक संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए 1 लाख डॉलर यानी करीब 95 लाख रुपये के अतिरिक्त शुल्क को रद्द कर दिया है। इस फैसले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने अदालत के निर्णय की कड़ी आलोचना की। न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में NBA फाइनल देखने के बाद पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि ऐसे न्यायिक फैसले प्रशासन के कामकाज में बड़ी मुश्किलें पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ जजों के फैसले देश के लिए नुकसानदायक साबित हो रहे हैं और इससे अमेरिका को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। दरअसल, मैसाचुसेट्स की एक संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए इस भारी शुल्क को अवैध करार दिया। अदालत का कहना था कि बिना कांग्रेस की मंजूरी के इतना बड़ा शुल्क लागू नहीं किया जा सकता। यह मामला तब सामने आया जब कैलिफोर्निया समेत 19 राज्यों ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी थी। कोर्ट के आदेश के बाद अब अमेरिका में इमिग्रेशन नीति और न्यायपालिका की भूमिका को लेकर बहस और तेज हो गई है।
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दक्षिण-पश्चिम मानसून ने पकड़ी रफ्तार, कई राज्यों में बढ़ी बारिश की संभावना

South-West मानसून ने पकड़ी रफ्तार, कई राज्यों में बढ़ी बारिश की संभावना

South-West मानसून अब तेजी से आगे बढ़ रहा है और देश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने लगी हैं। मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में मानसून ने अच्छी प्रगति दिखाई है, जिससे आने वाले दिनों में कई राज्यों में बारिश की संभावना और मजबूत हो गई है। India Meteorological Department ने जानकारी दी है कि मानसून की यह चाल सामान्य से बेहतर मानी जा रही है। इसके चलते पूर्वोत्तर भारत, पूर्वी भारत और आसपास के क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश देखने को मिल सकती है। South-West Monsoon के सक्रिय होने से किसानों और आम लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, खासकर उन इलाकों में जहां गर्मी और उमस बढ़ गई थी। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में मानसून और आगे बढ़ सकता है, जिससे कई राज्यों में बारिश का दायरा और बढ़ेगा। हालांकि कुछ जगहों पर तेज हवाओं और भारी बारिश की संभावना को देखते हुए सतर्क रहने की सलाह भी दी गई है।
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'प्रधानमंत्री उज्ज्वला Yojana' वाले लाभार्थियों को बड़ा झटका

‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला Yojana’ वाले लाभार्थियों को बड़ा झटका

देश के करोड़ों गरीब परिवारों के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री उज्ज्वला Yojana से जुड़े लाभार्थियों को बड़ा झटका लगा है। सरकार ने अब सब्सिडी वाले गैस सिलेंडरों की संख्या को घटाकर 9 से 4 कर दिया है। इससे पहले भी सरकार ने सब्सिडी का दायरा कम करते हुए 12 सिलेंडरों से घटाकर 9 सिलेंडर कर दिए थे। अब एक बार फिर इस फैसले ने योजना के लाभार्थियों की चिंता बढ़ा दी है। क्या बदला है? आम लोगों पर असर इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर ग्रामीण और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर पड़ सकता है, जो खाना पकाने के लिए पूरी तरह एलपीजी गैस पर निर्भर हैं। सब्सिडी कम होने से घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ बढ़ने की संभावना है। पृष्ठभूमि Pradhan Mantri Ujjwala Yojana को गरीब परिवारों को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। योजना के तहत मुफ्त गैस कनेक्शन और सब्सिडी पर सिलेंडर दिए जाते हैं। हालांकि समय-समय पर सब्सिडी की मात्रा और नियमों में बदलाव होते रहे हैं, जिससे लाभार्थियों पर सीधा असर पड़ता है। आगे क्या? फिलहाल सरकार की ओर से इस बदलाव को लेकर आधिकारिक विस्तार से कोई नई समीक्षा सामने नहीं आई है, लेकिन यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा में आ सकता है।
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Delhi फ्लोरिश स्टे B&B अग्निकांड: फरार आरोपी ने किया सरेंडर, 22 मौतों के बाद जांच तेज

Delhi के मालवीय नगर इलाके में स्थित फ्लोरिश स्टे बीएंडबी में हुए भीषण अग्निकांड मामले में जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 22 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 13 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। फरार आरोपी ने किया सरेंडर इस केस में फरार चल रहा आरोपी Jay Mishra ने साकेत कोर्ट में सरेंडर कर दिया है। इससे पहले पुलिस ने होटल मालिक Lovkesh Bajaj और रसोइए केशव नेगी को गिरफ्तार कर लिया था। जांच में क्या सामने आया? पुलिस जांच में कई गंभीर लापरवाहियां सामने आई हैं: पुलिस का मानना है कि इन्हीं अनियमितताओं ने आग को और भी भयावह बना दिया। IIT दिल्ली की मदद से जांच अब इस पूरे मामले की तकनीकी जांच के लिए Indian Institute of Technology Delhi की मदद ली जा रही है। विशेषज्ञ आग लगने के कारण और उसके तेजी से फैलने की वजहों का वैज्ञानिक विश्लेषण करेंगे। जांच के अहम पहलू फिलहाल पुलिस कई एंगल से जांच कर रही है:
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Yusuf Pathan की बढ़ीं मुश्किलें: वडोदरा जमीन विवाद में गुजरात हाईकोर्ट ने लगाई फटकार

Yusuf Pathan की बढ़ीं मुश्किलें: वडोदरा जमीन विवाद में गुजरात हाईकोर्ट ने लगाई फटकार

पूर्व भारतीय क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस सांसद Yusuf Pathan एक विवादित जमीन मामले को लेकर कानूनी मुश्किलों में घिरते नजर आ रहे हैं। वडोदरा में चल रहे इस भूमि विवाद की सुनवाई के दौरान गुजरात हाईकोर्ट ने उन्हें कड़ी फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने क्या कहा? सुनवाई के दौरान अदालत ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर जमीन का औपचारिक आवंटन ही नहीं हुआ था, तो उस पर कब्जा कैसे किया गया? कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि अब तक इस जमीन के बदले कोई भुगतान भी नहीं किया गया है। मामला क्या है? यह मामला वडोदरा नगर निगम की एक जमीन से जुड़ा है, जिस पर यूसुफ पठान का दावा है। कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि भूमि देने का प्रस्ताव सिर्फ स्टैंडिंग कमिटी का था, लेकिन अंतिम आवंटन की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी। यूसुफ पठान का पक्ष याचिका में यूसुफ पठान की तरफ से दलील दी गई कि साल 1999 की राज्य नीति के अनुसार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों को जमीन आवंटित करने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि: उनकी ओर से यह भी कहा गया कि जमीन नगर निगम की है, इसलिए राज्य सरकार की मंजूरी जरूरी नहीं थी।
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Bittu Tabahi

Bittu Tabahi ने बदली सोच, अकेले शुरू किया नदी सफाई अभियान; नगरपालिका भी हुई प्रभावित

नदी में गंदगी देखकर ज्यादातर लोग शिकायत करते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के एक युवक ने शिकायत करने के बजाय खुद कुछ करने की ठानी। स्थानीय स्तर पर ‘बिट्टू तबाही’ (Bittu Tabahi) के नाम से पहचाने जाने वाले इस युवक ने अकेले ही नदी की सफाई का जिम्मा उठा लिया। उनका यह जज्बा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बिट्टू ने नदी में जमा कचरे और गंदगी को देखकर सफाई अभियान शुरू किया। शुरुआत किसी बड़े इंतजाम या टीम के साथ नहीं हुई। उन्होंने अपने स्तर पर सफाई करना शुरू किया और लगातार इस काम में जुटे रहे। नदी को साफ रखने का लिया संकल्प बिट्टू का मानना है कि नदी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि आसपास के लोगों और पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने नदी में जमा कचरे को हटाने की पहल की। उनका यह प्रयास धीरे-धीरे स्थानीय लोगों का ध्यान खींचने लगा। लोगों ने देखा कि बिना किसी दबाव या दिखावे के बिट्टू लगातार नदी की सफाई में लगे हुए हैं। नगरपालिका ने भी की पहल की सराहना बिट्टू के लगातार सफाई अभियान की जानकारी नगरपालिका तक पहुंची तो उनके प्रयास की सराहना की गई। एक युवक द्वारा अपने स्तर पर नदी को साफ रखने की कोशिश को अधिकारियों ने सकारात्मक कदम माना। इस पहल ने यह भी दिखाया कि अगर कोई व्यक्ति अपने आसपास के पर्यावरण को लेकर जिम्मेदारी महसूस करे, तो छोटी शुरुआत भी बड़ा संदेश दे सकती है। सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आया अभियान बिट्टू का नदी सफाई अभियान अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। उनके प्रयास को देखकर दूसरे लोगों में भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद है। आज नदियों में बढ़ता कचरा और प्रदूषण बड़ी चुनौती है। ऐसे में बिट्टू की पहल लोगों को यह संदेश देती है कि नदी को साफ रखना सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। ‘बिट्टू तबाही’ ने दी एक अलग मिसाल बिट्टू की कहानी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने बदलाव का इंतजार नहीं किया, बल्कि खुद बदलाव की शुरुआत करने का फैसला लिया। अकेले शुरू किया गया उनका यह सफाई अभियान अब दूसरों के लिए प्रेरणा बनता दिखाई दे रहा है। कई बार किसी बड़े बदलाव की शुरुआत बड़े अभियान से नहीं, बल्कि एक छोटे से कदम से होती है। बिट्टू का यह प्रयास उसी सोच की मिसाल है—अगर इरादा मजबूत हो, तो एक इंसान भी बदलाव की शुरुआत कर सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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World Map में बड़ा बदलाव! UN ने Africa के असली Size को दिखाने का रास्ता साफ किया

दुनिया का नक्शा (World Map) देखते हुए शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इसमें दिखाई देने वाले देशों और महाद्वीपों का आकार असलियत से अलग भी हो सकता है। लेकिन अब इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र में एक अहम पहल हुई है। UN महासभा ने ऐसे World Map को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें धरती के अलग-अलग हिस्सों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाने की कोशिश की गई है। इस बदलाव के बाद नक्शे पर Africa पहले से काफी बड़ा दिखाई देगा, जबकि Europe और North America, खासकर US का आकार पुराने नक्शे की तुलना में छोटा नजर आ सकता है। प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला, लेकिन अमेरिका ने इसका विरोध किया। पुराने World Map में आखिर समस्या क्या है? दुनिया के स्कूलों और कई नक्शों में लंबे समय से Mercator Projection का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे 16वीं सदी में Gerardus Mercator ने तैयार किया था। उस समय इसका सबसे बड़ा फायदा समुद्री यात्राओं और Navigation में था। लेकिन Mercator Projection की एक खासियत ही इसकी सबसे बड़ी कमी भी बन गई। इसमें जैसे-जैसे कोई क्षेत्र Equator से दूर जाता है, उसका आकार नक्शे पर ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि Greenland जैसे इलाके नक्शे पर अपनी वास्तविकता से बहुत बड़े नजर आते हैं। दूसरी तरफ Africa, जो दुनिया के सबसे बड़े महाद्वीपों में से एक है, अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देता है। मसलन, सामान्य Mercator Map में Greenland और Africa का आकार देखकर किसी को लग सकता है कि दोनों लगभग बराबर हैं। असल में Africa का क्षेत्रफल Greenland से करीब 14 गुना ज्यादा है। Equal Earth Projection क्यों चर्चा में है? UN के प्रस्ताव में Equal Earth Projection जैसे नक्शों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इस Projection की खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग महाद्वीपों के क्षेत्रफल को ज्यादा सही अनुपात में दिखाया जाता है। यानी नक्शे को देखकर Africa का वास्तविक विशाल आकार ज्यादा साफ समझ में आता है। Europe और North America भी Mercator Map की तुलना में छोटे दिखाई देते हैं। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है—न तो Africa बड़ा हुआ है और न ही Europe या America छोटा। बदलाव सिर्फ उस तरीके में है, जिससे उन्हें नक्शे पर दिखाया जाता है। America ने UN के प्रस्ताव का विरोध क्यों किया? इस प्रस्ताव पर अमेरिका का रुख बाकी देशों से अलग रहा। मतदान के दौरान अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया। अमेरिकी पक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया कि संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक स्तर की बड़ी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। वहीं प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि नक्शा सिर्फ रास्ता या देश की लोकेशन बताने वाला साधन नहीं है। यह लोगों के मन में दुनिया की एक तस्वीर भी बनाता है। अफ्रीकी देशों की तरफ से लंबे समय से यह बात उठती रही है कि पुराने नक्शों में Africa का वास्तविक आकार सही तरीके से सामने नहीं आता। इसी सोच के साथ “Correct the Map” अभियान को आगे बढ़ाया गया। UN के फैसले से क्या सभी Maps बदल जाएंगे? यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब अचानक हर जगह नया नक्शा दिखाई देने लगेगा। UN महासभा का यह फैसला कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। यानी Google Maps, स्कूल की किताबों, सरकारी दस्तावेजों या दूसरे Digital Platforms को तुरंत अपना नक्शा बदलना जरूरी नहीं है। इसका मकसद देशों, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया और दूसरे संगठनों को ऐसे Map Projections अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो दुनिया के क्षेत्रफल को ज्यादा सही तरीके से दिखाते हों। इसके बावजूद Mercator Projection पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है। Navigation और समुद्री यात्राओं जैसी जरूरतों में इसका इस्तेमाल आज भी उपयोगी माना जाता है। India पर क्या असर पड़ेगा? भारत को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस नए World Map से देश का आकार या सीमा बदल जाएगी? इसका जवाब है—नहीं। भारत की जमीन, क्षेत्रफल और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इस प्रस्ताव का कोई असर नहीं पड़ेगा। सिर्फ नक्शे पर भारत और बाकी देशों को दिखाने का अनुपात बदल सकता है। अगर Equal Earth या इसी तरह की Projection का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ता है तो आने वाले समय में School Geography Books, Educational Charts, News Graphics और Digital Maps में दुनिया की तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे सकती है। भारत के लिए इसका असर मुख्य रूप से शिक्षा और Geography की समझ के स्तर पर होगा। बच्चों और आम लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि नक्शे पर दिखाई देने वाला आकार हमेशा किसी देश या महाद्वीप के वास्तविक क्षेत्रफल के बराबर नहीं होता। Africa के लिए इसे बड़ी उपलब्धि क्यों माना जा रहा है? इस पूरे विवाद में Africa सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में है। समर्थकों का कहना है कि सदियों से इस्तेमाल हो रहे नक्शों ने अनजाने में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की एक असंतुलित तस्वीर बना दी है। Africa दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है और इसके बावजूद Mercator Map में इसका आकार उसकी वास्तविक विशालता के मुकाबले कम नजर आता है। यही वजह है कि African countries और African Union की ओर से इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। उनके लिए यह केवल Map Projection का मामला नहीं, बल्कि दुनिया के सामने Africa की वास्तविक तस्वीर रखने का भी सवाल है। क्या दुनिया सच में बदल गई? नहीं। दुनिया का भूगोल बिल्कुल नहीं बदला है। न कोई नया देश बना है, न किसी देश की सीमा बदली है और न ही Africa का क्षेत्रफल अचानक बढ़ गया है। बदलाव सिर्फ इतना है कि दुनिया को कागज या स्क्रीन पर किस तरह दिखाया जाए, इस पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा सामने आई है। एक तरह से देखें तो यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि नक्शा हमेशा पूरी तरह निष्पक्ष तस्वीर नहीं होता। उसे बनाने का तरीका तय करता है कि हमें दुनिया का कौन-सा हिस्सा कितना बड़ा या छोटा दिखाई देगा। आने वाले वर्षों में अगर Equal Earth जैसी projections को ज्यादा अपनाया जाता है, तो संभव है कि नई पीढ़ी के लिए World Map की तस्वीर वही न हो,...
Swatantra Bhardwaj

Swatantra Bhardwaj Detained: CJP Protest के बाद स्वतंत्र भारद्वाज हिरासत में

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP Protest के दौरान एक छात्रा के पिता के साथ कथित मारपीट का मामला अब फिर चर्चा में है। मामले में आरोपी बताए जा रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज (Swatantra Bhardwaj) को दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थकों के प्रदर्शन और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग के कुछ घंटे बाद हुई। Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर CJP के प्रतिनिधि और समर्थक शुक्रवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से मामले में जल्द कार्रवाई करने और आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ राजनीतिक नेता भी वहां पहुंचे। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बातचीत हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया और इसके बाद भारद्वाज को ट्रेस करने के लिए टीमें सक्रिय की गईं। क्या है पूरा मामला? यह विवाद जंतर-मंतर पर CJP के एक प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी। इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार के नाम FIR में शामिल किए गए थे। मामला उस समय और गरमा गया, जब स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े एक Podcast Video की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वीडियो में भारद्वाज ने घटना को लेकर आपत्तिजनक दावे किए थे। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई। Viral Video ने बढ़ाया विवाद वायरल वीडियो सामने आने के बाद CJP ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। संगठन का कहना था कि वीडियो में कथित तौर पर घटना को लेकर किए गए दावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वहीं दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही थी और मेडिकल रिपोर्ट में चोट को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए कुछ दावों की पुष्टि नहीं हुई थी। Bulandshahr में पुलिस ने पकड़ा पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की टीमों ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में ट्रेस किया। रिपोर्टों में बताया गया कि पुलिस की कार्रवाई से पहले वह वहां से निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थक स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इससे मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर चल रहा विवाद भी फिलहाल एक नए चरण में पहुंच गया है। FIR में SC/ST Act की धाराएं जोड़ने की जानकारी प्रदर्शन के बाद पुलिस की ओर से मामले में SC/ST Act से संबंधित धाराएं जोड़ने की बात सामने आई। पीड़ित की दोबारा मेडिकल जांच कराए जाने की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई है। हालांकि, मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच और आगे की पुलिस कार्रवाई पर निर्भर करेगी। आरोपों की पुष्टि अदालत की प्रक्रिया में ही होगी। पुलिस के सामने अब आगे की जांच बड़ी चुनौती स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने के बाद अब पुलिस के सामने वायरल वीडियो, FIR में दर्ज आरोपों, मेडिकल रिपोर्ट और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच अहम होगी। फिलहाल इस मामले ने CJP Protest, Delhi Police और Social Media Influencer को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस की ओर से क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Saharanpur

UP Bulldozer Action: Saharanpur कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर चला बुलडोजर, मायावती-इकरा हसन ने उठाए सवाल

Saharanpur उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने शनिवार को मस्जिद के खिलाफ Bulldozer Action शुरू कर दिया। कार्रवाई की खबर फैलते ही इलाके में हलचल बढ़ गई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई। किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन का एक्शन कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर जमीन के स्वामित्व और निर्माण की वैधता पर काफी समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन का दावा है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है और निर्माण को अवैध माना गया है। मामला पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा। जुलाई में अदालत ने मस्जिद को हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही संबंधित पक्ष पर करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति लगाए जाने की बात भी सामने आई थी। इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी गई थी। 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोका मस्जिद पर कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इकरा हसन और पुलिस अधिकारियों के बीच इस दौरान तीखी बहस भी हुई। इसका वीडियो सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। बाद में उनके आवास के बाहर पुलिस बल तैनात किए जाने की भी खबर सामने आई। इकरा हसन ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोका जा रहा है। उनका कहना था कि वह मौके पर जाकर हालात देखना चाहती थीं। मायावती ने सरकार से कार्रवाई रोकने को कहा सहारनपुर मस्जिद विवाद पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार से कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की और मामले को संवेदनशील बताते हुए सावधानी से कदम उठाने की बात कही। मायावती ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह का तनाव बढ़ने से रोकना जरूरी है। उन्होंने लोगों से भी शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। इमरान मसूद बोले- हाईकोर्ट जाएंगे सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया है। उनका कहना है कि मस्जिद की जमीन और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर उनका पक्ष अलग है। जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद मसूद ने मामले को हाईकोर्ट ले जाने की बात कही है। उनका कहना है कि आगे की कानूनी लड़ाई अदालत में लड़ी जाएगी और उपलब्ध दस्तावेजों को वहां रखा जाएगा। प्रशासन और विपक्ष के दावे अलग-अलग पूरे विवाद में प्रशासन और मस्जिद पक्ष के दावे अलग हैं। प्रशासन जहां निर्माण को सरकारी जमीन पर हुआ अवैध निर्माण बता रहा है, वहीं मस्जिद से जुड़े लोग और कुछ विपक्षी नेता इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं। यही वजह है कि मामला सिर्फ बुलडोजर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। अब इसकी गूंज राजनीतिक मंच से लेकर अदालत तक सुनाई दे रही है। आगे क्या होगा? सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर हुई कार्रवाई के बाद अब सबकी नजर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर है। इमरान मसूद की ओर से हाईकोर्ट जाने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में अदालत में इस मामले को लेकर क्या रुख सामने आता है, यह महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई के बाद सहारनपुर में राजनीतिक माहौल गर्म है। एक तरफ अधिकारी कोर्ट के आदेश के पालन की बात कह रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nepal

Nepal Flood: दार्चुला में Landslide का खतरा बढ़ा, Trishuli से भारतीय परिवार का Rescue; हजारों Missing

नेपाल (Nepal) में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बाद हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नदियों का जलस्तर बढ़ने, मलबा आने और पहाड़ी इलाकों में Landslide के खतरे ने राहत और बचाव अभियान को और मुश्किल बना दिया है। सबसे चिंता की बात यह है कि हादसे के कई दिन बाद भी हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि, इसी बीच Trishuli क्षेत्र से दो लोगों को नौ दिन बाद जिंदा निकालना राहत और उम्मीद की बड़ी खबर बनकर सामने आया है। दार्चुला में Landslide का खतरा, निचले इलाकों पर नजर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। दार्चुला समेत संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से निचले इलाकों को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। पहाड़ों से मलबा आने और नदियों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका के बीच लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ से कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है। Trishuli से भारतीय नागरिकों का Rescue इस बीच त्रिशूली इलाके से तीन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की खबर सामने आई है। इनमें एक परिवार शामिल है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, रेस्क्यू किए गए लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और उनके भारत लौटने की प्रक्रिया में मदद की जा रही है। भारत सरकार नेपाल में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए लगातार नेपाली प्रशासन के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को Rescue किया गया है, जबकि 275 भारतीयों के लापता होने की जानकारी दी गई है। भारत ने राहत अभियान के लिए करीब 95 टन राहत सामग्री भी भेजी है। 9 दिन बाद Trishuli Tunnel से जिंदा निकले 2 मजदूर नेपाल में चल रहे Rescue Operation की सबसे बड़ी खबर Trishuli-3A Hydropower Project से आई। यहां सुरंग में फंसे संजय साह और कबीर महारजन को करीब नौ दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। दोनों को सुरंग के अंदर काफी गहराई से निकाला गया। बचाव दल ने पहले अंदर से आवाजें सुनीं और फिर संपर्क स्थापित होने के बाद ऑपरेशन तेज किया। आखिरकार दोनों को बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने उन परिवारों में भी उम्मीद जगाई है जिनके अपने लोग अभी तक लापता हैं। राहत दल अब अन्य संभावित Survivors तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं। 1300 के करीब मौतें, 5 हजार से ज्यादा लोग Missing इस प्राकृतिक आपदा का असर कितना बड़ा है, इसका अंदाजा मृतकों और लापता लोगों की संख्या से लगाया जा सकता है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार 1,294 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी और 5,053 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में बदलाव देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और Hydropower Projects को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और राहत शिविरों में रह रहे हैं। Rescue Operation अभी भी जारी Trishuli Tunnel से दो लोगों को जिंदा निकाले जाने के बाद Rescue Teams का हौसला बढ़ा है। नेपाल सेना, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ लगातार प्रभावित इलाकों में Search Operation चला रहे हैं। Hydropower Projects के आसपास अभी भी बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका है। मलबा, पानी और क्षतिग्रस्त सुरंगें बचाव अभियान में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। इसके बावजूद टीमें लगातार नए रास्ते तलाश रही हैं। भारत ने नेपाल की मदद बढ़ाई नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में भारत ने भी राहत और बचाव अभियान में सहयोग बढ़ाया है। भारतीय विशेषज्ञों और राहत सामग्री को नेपाल भेजा गया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की टीमें Rescue, Medical और अन्य जरूरी सेवाओं में सहायता कर रही हैं। फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और पहाड़ी इलाकों में नए Landslide और Flood के खतरे से निपटना है। Trishuli Tunnel से नौ दिन बाद दो लोगों का जिंदा निकलना इस त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण जरूर लेकर आया है। अब Rescue Teams की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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