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Bhopal-रायसेन में तेज बारिश, सड़कों पर भरा पानी; शाजापुर में कम वर्षा, 37 जिलों में चेतावनी

Bhopal-रायसेन में तेज बारिश, सड़कों पर भरा पानी; शाजापुर में कम वर्षा, 37 जिलों में चेतावनी

Madhya Pradesh में मानसून इस बार करीब 6 दिन देरी से पहुंचा है, लेकिन कई जिलों में अचानक मौसम ने करवट ले ली है। राजधानी Bhopal और Raisen में तेज बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है। भोपाल-रायसेन में भारी बारिश से जलभराव तेज बारिश के चलते कई इलाकों की सड़कों पर करीब 2 फीट तक पानी भर गया है। इससे यातायात प्रभावित हुआ और लोगों को आने-जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। शाजापुर में कम बारिश Shajapur जिले में इस बार अपेक्षाकृत कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। 37 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट मौसम विभाग ने मध्य प्रदेश के 37 जिलों में आंधी और भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। आने वाले दिनों में कई जगहों पर तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग की चेतावनी विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की रफ्तार अब धीरे-धीरे बढ़ सकती है, जिससे आने वाले समय में बारिश का दायरा और बढ़ेगा।
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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर मध्य प्रदेश में उत्साह: Jabalpur में राष्ट्रपति-सीएम ने किया योग

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर मध्य प्रदेश में उत्साह: Jabalpur में राष्ट्रपति-सीएम ने किया योग

Jabalpur में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें देश की राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने एक साथ योगाभ्यास किया। पूरे आयोजन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और योग के महत्व का संदेश दिया गया। जबलपुर में दिखा योग का बड़ा आयोजन कार्यक्रम में योगासन, प्राणायाम और ध्यान के विभिन्न अभ्यास कराए गए। मंच पर मौजूद गणमान्य नेताओं ने लोगों को नियमित योग अपनाने का संदेश दिया। इंदौर में 3 मिनट से ज्यादा भ्रामरी प्राणायाम का रिकॉर्ड Indore में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने 3 मिनट से अधिक समय तक भ्रामरी प्राणायाम कर नया रिकॉर्ड बनाया। इस उपलब्धि को योग दिवस के खास क्षणों में शामिल किया गया। राजगढ़ में मंत्री की तबीयत बिगड़ी Rajgarh में योग कार्यक्रम के दौरान एक मंत्री की अचानक तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें तुरंत चिकित्सकीय सहायता दी गई। फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।
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Tamil nadu की सीफूड फैक्ट्री में गैस रिसाव हादसा: 2 की मौत, 65 से ज्यादा घायल

Tamil nadu की सीफूड फैक्ट्री में गैस रिसाव हादसा: 2 की मौत, 65 से ज्यादा घायल

Tamil nadu में एक सीफूड फैक्ट्री में हुए भीषण गैस रिसाव हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया है। इस दर्दनाक घटना में अब तक 2 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 65 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। कई मजदूरों की हालत गंभीर घायलों में से 9 लोगों की हालत बेहद गंभीर है और उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। अस्पतालों में डॉक्टरों की टीम लगातार इलाज में जुटी हुई है। मरने वालों में सभी महिलाएं रिपोर्ट के अनुसार, इस हादसे में जान गंवाने वाले दोनों लोग महिलाएं थीं। फैक्ट्री में काम करने वाली महिला कर्मचारियों की बड़ी संख्या इस हादसे से प्रभावित हुई है। कैसे हुआ हादसा? प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक फैक्ट्री में अचानक गैस रिसाव होने से वहां काम कर रहे कर्मचारियों को सांस लेने में दिक्कत होने लगी और कई लोग बेहोश हो गए। घटना के बाद अफरा-तफरी मच गई। राहत और बचाव कार्य जारी प्रशासन और राहत दल मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। फैक्ट्री को खाली करा लिया गया है और पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
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Ayodhya Ram Mandir चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा दावा: चंपत राय समेत 150 लोगों पर जांच तेज

Ayodhya Ram Mandir चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा दावा: चंपत राय समेत 150 लोगों पर जांच तेज

अयोध्या स्थित Ayodhya और Ram Mandir से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स और जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित गड़बड़ी और चोरी के आरोपों की जांच अब तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि इस मामले में चंपत राय समेत करीब 150 लोगों को जांच के दायरे में रखा गया है। साथ ही यह भी दावा किया जा रहा है कि कुछ लोगों को अयोध्या न छोड़ने की चेतावनी भी दी गई है। SIT की रिपोर्ट में क्या है? सूत्रों के अनुसार, विशेष जांच टीम (SIT) ने इस पूरे मामले में अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है, जिसे जल्द ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपा जा सकता है। रिपोर्ट में कथित तौर पर कई डिजिटल सबूत शामिल हैं, जो 7 पेन ड्राइव में सुरक्षित किए गए हैं। इनमें चढ़ावे के लेन-देन और प्रबंधन से जुड़ी जानकारी होने का दावा किया जा रहा है। जांच के घेरे में कई लोग रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ कुछ ही नहीं बल्कि लगभग 150 लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। हालांकि, अभी तक किसी भी आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और प्रशासन की ओर से विस्तृत बयान का इंतजार किया जा रहा है।
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Trump का Iran को सख्त संदेश: Hezbollah को रोको वरना फिर होगा हमला

Trump का Iran को सख्त संदेश: Hezbollah को रोको वरना फिर होगा हमला

अमेरिका और Iran के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ता दिख रहा है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि वह हिजबुल्लाह (Hezbollah) पर नियंत्रण लगाए, नहीं तो अमेरिका की ओर से फिर से सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच लगभग 82 मिनट तक बातचीत हुई, जिसमें कई अहम मुद्दों पर चर्चा की गई। 82 मिनट तक चली US–Iran बातचीत सूत्रों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच यह बातचीत करीब 1 घंटे 22 मिनट तक चली। इस बातचीत में दोनों देशों ने कई संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा की, जिसमें सबसे प्रमुख विषय फ्रीज की गई संपत्तियों (Frozen Assets) को लेकर रहा। ईरान की ओर से कहा गया कि इस बातचीत में उनकी जब्त की गई संपत्तियों को वापस करने के मुद्दे पर भी बात हुई है। ट्रम्प की चेतावनी से बढ़ा तनाव डोनाल्ड ट्रम्प ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि ईरान हिजबुल्लाह को नियंत्रित नहीं करता है, तो अमेरिका एक बार फिर कठोर कदम उठा सकता है। उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव और चर्चा दोनों तेज हो गई हैं। क्या है पूरा मामला? ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़े विवाद चल रहे हैं। हिजबुल्लाह को लेकर भी दोनों देशों के बीच मतभेद लगातार बने हुए हैं। हालिया बातचीत को इन तनावों को कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन ट्रम्प के बयान ने स्थिति को फिर से गरमा दिया है।
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IAS

54 Crore Deal Case: एक IAS की बर्खास्तगी तय, IAS-PCS समेत 12 अधिकारियों पर बड़ा एक्शन

सरकारी तंत्र में उस समय हलचल मच गई जब 54 करोड़ रुपये की एक विवादित डील से जुड़े मामले में कई अधिकारियों पर कार्रवाई की खबर सामने आई। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। सूत्रों के अनुसार, एक IAS अधिकारी के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है, जबकि दो अन्य IAS और PCS अधिकारियों समेत कुल 12 अधिकारियों पर गाज गिरी है। जांच में सामने आईं गंभीर अनियमितताएं मामले की जांच के दौरान कई स्तरों पर प्रक्रियागत खामियों और नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई है। जांच एजेंसियों ने संबंधित दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल की, जिसके बाद जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े हुए। अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ अन्य कानूनी विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि सरकारी धन और संसाधनों के उपयोग में किसी भी तरह की लापरवाही या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नौकरशाही में बढ़ी बेचैनी इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। कई विभागों में पुराने मामलों की फाइलें भी खंगाली जा रही हैं। माना जा रहा है कि जांच का दायरा बढ़ने पर कुछ और नाम भी सामने आ सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई सरकारी व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। वहीं कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच भी इस मामले को लेकर काफी चर्चा हो रही है। सरकार का सख्त संदेश सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि भ्रष्टाचार, नियमों की अनदेखी और वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में किसी भी अधिकारी को राहत नहीं दी जाएगी। प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। आगे क्या? फिलहाल सभी की नजरें जांच की अंतिम रिपोर्ट और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि आरोप पूरी तरह साबित होते हैं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ और भी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। आने वाले दिनों में यह मामला प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना रह सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Freelancers Money Management: कभी ₹30 हजार तो कभी ₹1 लाख कमाई? अनिश्चित इनकम में ऐसे करें Saving और Investment

Freelancers Money Management: कभी ₹30 हजार तो कभी ₹1 लाख कमाई? अनिश्चित इनकम में ऐसे करें Saving और Investment

Freelancers Money Management: फ्रीलांसिंग और डिजिटल प्रोफेशन में काम करने वाले लोगों की आय अक्सर हर महीने अलग-अलग होती है। कभी कमाई ₹30 हजार होती है तो कभी ₹1 लाख या उससे ज्यादा। ऐसे में सही वित्तीय योजना बनाना बेहद जरूरी हो जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, फ्रीलांसर्स को सबसे पहले 6 से 12 महीने के खर्च के बराबर Emergency Fund बनाना चाहिए। इसके अलावा, पिछले कुछ महीनों की औसत आय के आधार पर बजट तैयार करना बेहतर रहता है। अच्छी कमाई वाले महीनों में अतिरिक्त राशि को खर्च करने के बजाय बचत और निवेश में लगाना चाहिए। SIP जैसे विकल्प नियमित निवेश की आदत बनाने में मदद करते हैं। साथ ही, टैक्स भुगतान के लिए भी हर कमाई का एक हिस्सा अलग रखना जरूरी है। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि अनिश्चित आय के बावजूद अनुशासित बचत, समझदारी से निवेश और सही बजटिंग के जरिए मजबूत आर्थिक भविष्य बनाया जा सकता है।
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Kolkata Airport Clash: Abhishek Banerjee के पहुंचने से पहले TMC-BJP कार्यकर्ताओं में झड़प, TMC के 3 बैंक अकाउंट फ्रीज

Kolkata Airport Clash: Abhishek Banerjee के पहुंचने से पहले TMC-BJP कार्यकर्ताओं में झड़प, TMC के 3 बैंक अकाउंट फ्रीज

Kolkata Airport Clash: पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी के कोलकाता पहुंचने से पहले कोलकाता एयरपोर्ट पर TMC और BJP कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झड़प हो गई। दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच नारेबाजी से शुरू हुआ विवाद जल्द ही धक्का-मुक्की और मारपीट में बदल गया। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें दोनों दलों के कार्यकर्ता एक-दूसरे के खिलाफ नारे लगाते और भिड़ते नजर आ रहे हैं। एयरपोर्ट परिसर में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा कर्मियों और पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। एयरपोर्ट पर क्यों हुआ विवाद? जानकारी के अनुसार, अभिषेक बनर्जी के स्वागत के लिए बड़ी संख्या में TMC कार्यकर्ता एयरपोर्ट पहुंचे थे। इसी दौरान BJP समर्थक भी वहां मौजूद थे। दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक नारों को लेकर तनाव बढ़ गया और देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और दोनों समूहों को अलग किया। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है। TMC के तीन बैंक अकाउंट फ्रीज इस राजनीतिक विवाद के बीच TMC को एक और बड़ा झटका लगा है। पार्टी के तीन बैंक अकाउंट फ्रीज किए जाने की खबर सामने आई है। इन खातों में करीब 440 करोड़ रुपये जमा बताए जा रहे हैं। पार्टी का आरोप है कि यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव के तहत की गई है, जबकि संबंधित एजेंसियों का कहना है कि प्रक्रिया कानूनी और जांच से जुड़ी है। इस मुद्दे को लेकर TMC ने केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों पर निशाना साधा है। BJP और TMC आमने-सामने बैंक खातों के फ्रीज होने और एयरपोर्ट पर हुई झड़प के बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। TMC इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है, जबकि BJP का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और जांच एजेंसियां स्वतंत्र रूप से कार्रवाई कर रही हैं।
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Jio

Jio IPO Big रिलायंस Jio बनेगी अलग लिस्टेड कंपनी, अंबानी का ऐलान चर्चा में

रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने निवेशकों के लंबे इंतजार को खत्म करते हुए Jio IPO को लेकर बड़ा अपडेट दिया है। कंपनी की AGM में उन्होंने संकेत दिया कि Jio Platforms का IPO अब आधिकारिक प्रक्रिया में आगे बढ़ चुका है और DRHP आज ही SEBI में फाइल किया जा रहा है। यह खबर सामने आते ही शेयर बाजार और निवेशकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला है, क्योंकि Jio IPO को भारत के सबसे बड़े IPOs में से एक माना जा रहा है। Jio IPO पर क्या बड़ा अपडेट मिला? मुकेश अंबानी ने बताया कि Jio Platforms के बोर्ड ने IPO को मंजूरी दे दी है। अब कंपनी की तरफ से Draft Red Herring Prospectus (DRHP) तैयार कर SEBI को सौंपा जा रहा है। यह कदम Jio को एक अलग लिस्टेड कंपनी बनाने की दिशा में सबसे अहम माना जा रहा है। Jio IPO Details (संभावित जानकारी) बाजार में क्यों मचा है हलचल? Jio IPO सिर्फ एक पब्लिक इश्यू नहीं, बल्कि भारतीय शेयर बाजार के लिए एक बड़ा इवेंट माना जा रहा है। इसके पीछे वजहें साफ हैं: Jio IPO इतना खास क्यों है? Jio ने भारत में इंटरनेट की दुनिया को पूरी तरह बदल दिया है। सस्ते डेटा और तेज नेटवर्क के जरिए इसने डिजिटल क्रांति को नई दिशा दी। अब इसका IPO आम निवेशकों के लिए एक बड़ा मौका माना जा रहा है। लोगों की नजर सिर्फ आंकड़ों पर नहीं, बल्कि इस बात पर भी है कि Jio की ग्रोथ आगे कितनी तेज होती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ayodhya Ram Mandir Donation Case: चढ़ावा चोरी की जांच तेज, 100 कर्मचारियों से पूछताछ; CM योगी के दौरे से पहले बढ़ी गतिविधियां

Ayodhya Ram Mandir Donation Case: चढ़ावा चोरी की जांच तेज, 100 कर्मचारियों से पूछताछ; CM योगी के दौरे से पहले बढ़ी गतिविधियां

Ayodhya। राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित गड़बड़ी और चोरी के मामले की जांच लगातार तेज होती जा रही है। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) अब तक करीब 100 कर्मचारियों और संबंधित लोगों से पूछताछ कर चुकी है। जांच एजेंसियां पिछले 11 महीनों के दस्तावेजों, रिकॉर्ड और वित्तीय विवरणों की बारीकी से जांच कर रही हैं। 11 महीने के रिकॉर्ड की पड़ताल सूत्रों के अनुसार, SIT ने मंदिर प्रशासन से जुड़े विभिन्न दस्तावेज, लेखा-जोखा और चढ़ावे के रिकॉर्ड को खंगाला है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि चढ़ावे के प्रबंधन और रिकॉर्ड में कहीं कोई अनियमितता या गड़बड़ी तो नहीं हुई। कर्मचारियों से लगातार पूछताछ जांच टीम अब तक लगभग 100 कर्मचारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों से बातचीत कर चुकी है। पूछताछ के दौरान चढ़ावे की गिनती, रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सवाल पूछे गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर आगे बढ़ रही है। CM योगी का कल अयोध्या दौरा इस बीच Yogi Adityanath का अयोध्या दौरा भी चर्चा में है। मुख्यमंत्री कल अयोध्या पहुंचेंगे और विभिन्न विकास परियोजनाओं तथा व्यवस्थाओं की समीक्षा कर सकते हैं। उनके दौरे को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी गई हैं। चंपत राय रह सकते हैं दूर मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंदिर ट्रस्ट से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारी Champat Rai मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से दूरी बनाए रख सकते हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। जांच के नतीजों पर टिकी नजर राम मंदिर देश की आस्था से जुड़ा बड़ा केंद्र है, इसलिए इस मामले की जांच पर सभी की नजर बनी हुई है। प्रशासन का कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने
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Punjab Election 2027: हरमीत पठानमाजरा और चेतन जौड़ामाजरा ने AAP से दिया इस्तीफा

पंजाब की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के दो मौजूदा विधायकों ने इस्तीफा देकर अपनी राह अलग कर ली। सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा और समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने 1 नवंबर को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने का ऐलान किया। दोनों नेताओं के इस फैसले ने पंजाब में नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू कर दी हैं। दिलचस्प बात यह है कि AAP ने 31 अक्टूबर को ही पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए 40 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी। इसके अगले ही दिन दो विधायकों के इस्तीफे की खबर सामने आ गई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी के भीतर टिकट और संगठन में बदलाव को लेकर नाराजगी बढ़ रही है? AAP की Candidate List के बाद क्यों बढ़ी हलचल? आम आदमी पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। 31 अक्टूबर को जारी पहली उम्मीदवार सूची में 40 नाम शामिल किए गए। मुख्यमंत्री भगवंत मान को धूरी विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं, कई मौजूदा विधायकों को भी दोबारा चुनाव लड़ने का मौका मिला है। हालांकि, इस सूची में हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौड़ामाजरा का नाम नहीं था। इतना ही नहीं, पार्टी ने उनके विधानसभा क्षेत्रों में नए हलका इंचार्ज भी नियुक्त कर दिए थे। सनौर में रंजोध हदाना और समाना में पूर्व अकाली नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को जिम्मेदारी दी गई। इन फैसलों के बाद दोनों विधायकों की राजनीतिक भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे थे। Harmeet Singh Pathanmajra ने Kejriwal को भेजा इस्तीफा सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को भेजा। पठानमाजरा और पंजाब सरकार के बीच पिछले काफी समय से मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं। सितंबर 2025 में पंजाब में आई बाढ़ के दौरान उन्होंने राहत और बचाव कार्यों को लेकर सरकार की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए थे। इसके बाद पार्टी नेतृत्व के साथ उनके संबंधों में तनाव की चर्चा होने लगी थी। उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले ने भी उन्हें लगातार सुर्खियों में बनाए रखा। सितंबर 2025 में एक महिला की शिकायत पर उनके खिलाफ दुष्कर्म, धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी से संबंधित मामला दर्ज किया गया था। पठानमाजरा ने इन कार्रवाइयों को राजनीतिक प्रताड़ना बताते हुए आरोप लगाए थे। Chetan Singh Jouramajra ने भी छोड़ी पार्टी समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने भी AAP से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने फैसले की जानकारी दी। जौड़ामाजरा भगवंत मान सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं, लेकिन बाद में मंत्रिमंडल में फेरबदल के दौरान उन्हें पद से हटा दिया गया था। इसके बाद समाना विधानसभा क्षेत्र में उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं। पार्टी ने हाल ही में पूर्व अकाली नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को समाना का हलका इंचार्ज बनाया था। इसे भी जौड़ामाजरा की नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। इस्तीफे के बाद जौड़ामाजरा ने कहा कि अब उनका पार्टी में मन नहीं लग रहा है। उन्होंने पंजाब के मौजूदा हालात को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। क्या BJP में शामिल होंगे दोनों विधायक? दोनों विधायकों के AAP छोड़ने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर हो रही है। राजनीतिक गलियारों में अटकलें हैं कि दोनों नेता भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम सकते हैं। हालांकि, अभी तक BJP या दोनों विधायकों की ओर से पार्टी में शामिल होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल केवल राजनीतिक अटकल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। Punjab Election 2027 से पहले AAP के सामने चुनौती पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। AAP की पहली उम्मीदवार सूची के तुरंत बाद दो मौजूदा विधायकों का इस्तीफा पार्टी के लिए एक नई चुनौती बन गया है। दोनों विधायक पटियाला जिले की सनौर और समाना सीटों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में इन सीटों पर उम्मीदवारों का चयन और स्थानीय राजनीतिक समीकरण आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहेंगे। अब देखना होगा कि AAP इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में किसे जिम्मेदारी देती है और क्या दोनों पूर्व विधायक किसी दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं। फिलहाल पंजाब की राजनीति में 2027 चुनाव से पहले ही सियासी उठापटक शुरू हो गई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
IND vs NZ

IND vs NZ 5th T20: न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से हराया, Team India ने 3-2 से जीती सीरीज

भारत और न्यूजीलैंड (IND vs NZ) के बीच पांच मैचों की T20 सीरीज का आखिरी मुकाबला रोमांचक रहा। हैमिल्टन के Seddon Park में खेले गए इस मैच में न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से हरा दिया। भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 191 रन बनाए थे, लेकिन Tim Seifert की शानदार पारी के सामने भारतीय गेंदबाज बेबस नजर आए। न्यूजीलैंड ने 18 ओवर में ही लक्ष्य हासिल कर लिया। हालांकि, इस हार से सीरीज का नतीजा नहीं बदला। टीम इंडिया ने शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर 3-0 की बढ़त बनाई थी। न्यूजीलैंड ने आखिरी दो मैच जीतकर वापसी जरूर की, लेकिन सीरीज भारत ने 3-2 से अपने नाम कर ली। ईशान किशन और श्रेयस अय्यर ने संभाली भारतीय पारी टॉस जीतकर न्यूजीलैंड ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। भारतीय टीम की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। अभिषेक शर्मा सिर्फ 1 रन और संजू सैमसन 4 रन बनाकर आउट हो गए। शुरुआती झटकों के बाद टीम को एक बड़ी साझेदारी की जरूरत थी। ऐसे समय में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर ने मोर्चा संभाला। दोनों ने तेजी से रन बनाते हुए न्यूजीलैंड के गेंदबाजों पर दबाव बनाया। ईशान किशन ने 32 गेंदों में 61 रन की शानदार पारी खेली, जबकि श्रेयस अय्यर ने सिर्फ 23 गेंदों में 50 रन बना दिए। दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए 93 रन की साझेदारी हुई। इस साझेदारी ने भारत को मैच में वापसी दिलाई। इसके बाद नमन धीर ने 33 रन और नीतीश कुमार रेड्डी ने 22 रन बनाकर टीम का स्कोर 191 तक पहुंचाया। न्यूजीलैंड की तरफ से Adam Milne ने सबसे ज्यादा 4 विकेट लिए। Nathan Smith और Blair Tickner को 2-2 सफलताएं मिलीं। Tim Seifert के 93 रन ने पलट दिया Match 192 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड की शुरुआत जरूर थोड़ी लड़खड़ाई। फिन एलन सिर्फ 2 रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन इसके बाद Tim Seifert ने भारतीय गेंदबाजों को कोई राहत नहीं दी। Seifert ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 50 गेंदों में 93 रन बनाए। उनकी पारी में 8 चौके और 6 छक्के शामिल रहे। वह शतक से महज 7 रन दूर रह गए, लेकिन तब तक न्यूजीलैंड जीत के काफी करीब पहुंच चुका था। उनका साथ Daryl Mitchell ने दिया। Mitchell ने 16 गेंदों में 29 रन बनाए। इसके बाद Glenn Phillips ने भी अपना दम दिखाया। उन्होंने 37 गेंदों में नाबाद 61 रन की पारी खेली। इन दोनों बल्लेबाजों की मदद से न्यूजीलैंड ने 18 ओवर में 3 विकेट खोकर 195 रन बना लिए और मुकाबला 7 विकेट से जीत लिया। भारतीय गेंदबाजों की नहीं चली, बल्लेबाजों की मेहनत गई बेकार भारत के लिए इस मुकाबले में सबसे बड़ी चुनौती न्यूजीलैंड की तेज रन गति रही। 191 रन बनाने के बाद टीम इंडिया को उम्मीद थी कि गेंदबाज मैच पर पकड़ बनाएंगे, लेकिन Tim Seifert और Glenn Phillips ने भारतीय गेंदबाजी को संभलने का मौका नहीं दिया। फिन एलन का विकेट जल्दी मिलने के बावजूद भारत लगातार विकेट नहीं निकाल सका। नतीजा यह रहा कि न्यूजीलैंड ने लक्ष्य को दो ओवर बाकी रहते हासिल कर लिया। 3-0 से आगे था भारत, फिर न्यूजीलैंड ने की वापसी इस T20 सीरीज की शुरुआत भारत के लिए काफी अच्छी रही थी। टीम इंडिया ने शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर 3-0 की बढ़त बना ली थी। ऐसा लग रहा था कि भारत सीरीज में क्लीन स्वीप कर सकता है। लेकिन चौथे मुकाबले में न्यूजीलैंड ने शानदार वापसी की। टीम ने बड़ा स्कोर खड़ा किया और भारत को 87 रन से हराया। इसके बाद पांचवें T20 में भी न्यूजीलैंड ने जीत दर्ज कर दी। लगातार दो जीत के बावजूद न्यूजीलैंड सीरीज अपने नाम नहीं कर सका। भारत ने शुरुआती बढ़त के दम पर पांच मैचों की सीरीज 3-2 से जीत ली। IND vs NZ 5th T20: मैच का पूरा Scorecard भारत – 191/8 (20 ओवर) न्यूजीलैंड – 195/3 (18 ओवर) मैच का नतीजा: न्यूजीलैंड ने 7 विकेट से जीत दर्ज की। सीरीज का नतीजा: भारत ने 3-2 से सीरीज जीती। सीरीज जीतकर भी आखिरी दो मैच हारा भारत टीम इंडिया के लिए यह सीरीज दो अलग-अलग तस्वीरें लेकर आई। शुरुआती तीन मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन आखिरी दो मैचों में न्यूजीलैंड ने अपनी रणनीति और बल्लेबाजी से मुकाबले का रुख बदल दिया। आखिरी मैच में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर की फिफ्टी के बावजूद भारत जीत हासिल नहीं कर पाया। वहीं Tim Seifert और Glenn Phillips की पारियों ने न्यूजीलैंड को शानदार जीत दिलाई। भारत के लिए राहत की बात यही रही कि शुरुआती तीन जीत के कारण T20 सीरीज की ट्रॉफी टीम इंडिया के पास ही रही। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
INDIA Bloc

Delhi Politics: INDIA Bloc की Rally के जवाब में BJP का मार्च, JP Nadda ने राहुल गांधी को घेरा

दिल्ली में 1 नवंबर को सियासी हलचल तेज रही। एक तरफ राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA Bloc के 19 विपक्षी दलों ने रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली की, तो दूसरी तरफ भाजपा ने 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर विरोध मार्च निकालकर कांग्रेस को घेरा। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी राजनीति में उन लोगों को भूल गई, जिन्होंने 1984 की हिंसा में अपनी जान गंवाई थी। दिल्ली में हुए इन दोनों प्रदर्शनों के केंद्र में अलग-अलग मुद्दे रहे। विपक्ष ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोला, जबकि भाजपा ने कांग्रेस को 1984 की हिंसा की याद दिलाते हुए पीड़ित परिवारों के लिए आवाज उठाई। INDIA Bloc की Rally में राहुल गांधी समेत 19 दलों के नेता शामिल रामलीला मैदान में आयोजित विपक्ष की रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और INDIA Bloc के कई अन्य नेता शामिल हुए। रैली का मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग की SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियां रहा। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं। इससे पात्र मतदाताओं के वोट देने के अधिकार पर असर पड़ सकता है। राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए और मतदाताओं के अधिकारों के साथ किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। BJP का जवाबी मार्च, सिख समुदाय और पीड़ित परिवारों ने लिया हिस्सा विपक्ष की रैली के बीच भाजपा ने भी दिल्ली में अपना विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी ने पश्चिमी दिल्ली में 1984 के सिख-विरोधी दंगों के पीड़ितों के समर्थन में मार्च निकाला। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा और मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा सहित कई नेता शामिल हुए। मार्च में सिख समुदाय के लोगों और 1984 की हिंसा से प्रभावित परिवारों ने भी हिस्सा लिया। भाजपा ने इस प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस से 1984 की हिंसा के लिए जवाबदेही तय करने और पीड़ित परिवारों से माफी मांगने की मांग की। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस ने इस संवेदनशील तारीख पर बड़ी राजनीतिक रैली आयोजित करके सिख समुदाय की भावनाओं का ध्यान नहीं रखा। JP Nadda का राहुल गांधी पर हमला, बोले- अपनी राजनीति में शहीदों को भूले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्ष की रैली को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर का दिन देश के इतिहास में बेहद दुखद है। 1984 में इसी दौरान सिख समुदाय के लोगों को हिंसा का सामना करना पड़ा था। नड्डा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अपनी राजनीतिक गतिविधियों में इतने व्यस्त हैं कि उन्हें 1984 की हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों और उनके परिवारों की पीड़ा याद नहीं रही। उन्होंने कहा कि देश उन घटनाओं को नहीं भूला है और सिख समुदाय के जख्म आज भी लोगों को याद हैं। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से इस मुद्दे पर जवाब देने की मांग की। राहुल गांधी ने BJP के कारोबार वाले आरोप पर दिया जवाब भाजपा ने विपक्ष की रैली को लेकर यह भी कहा कि इससे दिल्ली के बाजारों और छोटे कारोबारियों को नुकसान हो सकता है। दिवाली से पहले बाजारों में भीड़ और ट्रैफिक की समस्या बढ़ने की आशंका भी जताई गई। इस पर राहुल गांधी ने भाजपा के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि रैली में शामिल होने वाले लोगों से दिल्ली में खरीदारी करने की अपील की गई थी, ताकि स्थानीय व्यापारियों को फायदा मिले। राहुल गांधी ने कनॉट प्लेस में दुकानों के बंद होने का मुद्दा भी उठाया और सवाल किया कि व्यापारियों का कारोबार प्रभावित होने के लिए कौन जिम्मेदार है। खड़गे ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष का आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। खड़गे का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ियां हुई हैं और कई लोगों के नाम हटाए गए हैं। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बता रहा है। हालांकि, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में गड़बड़ी और राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। आयोग की ओर से मतदाता सूची के पुनरीक्षण को निर्धारित प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है। अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव ने भी उठाए सवाल विपक्ष की रैली में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से नाम हटने के मुद्दे को उठाते हुए चुनाव प्रक्रिया पर सवाल किए। वहीं, बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपने भाषण में वोट चोरी के आरोपों को लेकर सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता शशि थरूर समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर क्यों बढ़ा विवाद? 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा भड़क गई थी। 1 से 3 नवंबर के बीच दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और कई परिवारों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा। इस घटना को देश के इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में गिना जाता है। हिंसा के पीड़ित परिवारों के लिए न्याय और जवाबदेही का मुद्दा आज भी सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा है। भाजपा ने इसी घटना की बरसी को लेकर कांग्रेस की रैली पर सवाल उठाए हैं। वहीं, कांग्रेस और INDIA Bloc का कहना है कि उनकी रैली चुनावी प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए थी। Delhi Politics: एक दिन में दो प्रदर्शन, BJP और विपक्ष आमने-सामने दिल्ली में 1 नवंबर को हुए दोनों प्रदर्शनों ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। रामलीला मैदान में विपक्ष ने चुनाव आयोग...
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INDIA Bloc का बड़ा प्रदर्शन: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 19 पार्टियां एकजुट, खड़गे ने दी चेतावनी

दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर को विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक बड़ी रैली की। INDIA Bloc के बैनर तले हुई इस रैली में 19 विपक्षी पार्टियों के नेता एक मंच पर नजर आए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई बड़े नेताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। रैली का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला बयान ममता बनर्जी का रहा। उन्होंने पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी पार्टी बंगाल में हारी नहीं, बल्कि उसे हराया गया। वहीं, मल्लिकार्जुन खड़गे ने ज्ञानेश कुमार को लेकर कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर पीछे हटने वाला नहीं है। ममता बनर्जी ने बंगाल चुनाव को लेकर क्या कहा? रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती गई। ममता ने कहा कि बंगाल में उनकी पार्टी को हराया गया है। उन्होंने मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि लोकतंत्र में हर नागरिक का वोट महत्वपूर्ण है और किसी भी पात्र मतदाता को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। खड़गे का ज्ञानेश कुमार पर सीधा निशाना कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी मंच से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को इतनी आसानी से छोड़ने वाला नहीं है। खड़गे ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए विपक्ष को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी। विपक्षी दलों की मांग है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की समीक्षा हो और मतदाता सूची में हुए बदलावों की जानकारी सार्वजनिक की जाए। राहुल गांधी, प्रियंका और अखिलेश यादव समेत 19 पार्टियों की मौजूदगी दिल्ली की इस रैली में INDIA Bloc के कई प्रमुख नेता शामिल हुए। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, फारूक अब्दुल्ला, तेजस्वी यादव, अभिषेक बनर्जी और सुप्रिया सुले समेत कई नेताओं ने मंच साझा किया। सभी नेताओं ने अपने-अपने संबोधन में चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। SIR विवाद क्या है, जिस पर आमने-सामने हैं विपक्ष और चुनाव आयोग? इस पूरी राजनीतिक लड़ाई के केंद्र में Special Intensive Revision (SIR) है। यह चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची की गहन जांच और संशोधन की प्रक्रिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया में कई पात्र मतदाताओं के नाम भी प्रभावित हो सकते हैं। विपक्ष चाहता है कि नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची को सही और अपडेट रखने के लिए समय-समय पर समीक्षा जरूरी है। इस प्रक्रिया में डुप्लीकेट और अपात्र नामों की पहचान की जाती है। पात्र मतदाताओं को अपना नाम सूची में शामिल कराने का अवसर भी दिया जाता है। BJP ने भी निकाला मार्च, दिल्ली में बढ़ी राजनीतिक हलचल INDIA Bloc की रैली के बीच BJP ने भी 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के समर्थन में मार्च निकाला। इसको लेकर दोनों राजनीतिक पक्षों के बीच बयानबाजी भी देखने को मिली। दिल्ली में एक ही दिन दोनों पक्षों के कार्यक्रमों को देखते हुए सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए। रैली और मार्च के आसपास पुलिस बल की तैनाती की गई, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो। आगे क्या होगा? चुनाव आयोग पर विपक्ष का दबाव जारी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA Bloc की यह रैली चुनाव आयोग और SIR को लेकर चल रहे विवाद में एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम है। विपक्षी दलों ने संकेत दिए हैं कि वे मतदाता सूची में पारदर्शिता और चुनाव आयोग की जवाबदेही का मुद्दा आगे भी उठाते रहेंगे। अब देखना होगा कि विपक्ष की इन मांगों पर चुनाव आयोग क्या रुख अपनाता है और आने वाले दिनों में इस राजनीतिक टकराव की दिशा क्या रहती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump Iran Attack: नेतन्याहू से बात के बाद ट्रम्प का बड़ा बयान, 4 नवंबर को ईरान पर हमले की आशंका

मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव के बीच अमेरिकी Trump ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की है। इस बातचीत के बाद ट्रम्प के एक बयान ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। उन्होंने कहा कि ईरान के एक-दो ठिकानों पर कार्रवाई अभी बाकी है। इसी बीच मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका 4 नवंबर को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है। हालांकि, अभी तक अमेरिकी सरकार ने किसी नए हमले की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। दूसरी तरफ ईरान भी लगातार चेतावनी दे रहा है कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह चुप नहीं बैठेगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता बंद होने वाला है या फिर कोई नया समझौता हो सकता है? Trump-Netanyahu Talk: फोन पर क्या हुई बातचीत? रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच शनिवार को फोन पर बातचीत हुई। यह बातचीत ऐसे समय हुई है, जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को लेकर अमेरिका और इजरायल की चिंताएं बढ़ी हुई हैं। बताया जा रहा है कि ट्रम्प ने इससे पहले व्हाइट हाउस में वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों के साथ बैठक भी की थी। इस बैठक में ईरान को लेकर आगे की रणनीति और संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा हुई। ट्रम्प बोले- ईरान के 1-2 ठिकाने अभी बाकी नेतन्याहू से बातचीत के बाद ट्रम्प ने ईरान को लेकर सख्त बयान दिया। उन्होंने कहा कि ईरान के एक या दो ठिकानों पर अभी कार्रवाई की जानी बाकी है। इस दौरान उन्होंने पिकैक्स माउंटेन (Pickaxe Mountain) का भी जिक्र किया। पिकैक्स माउंटेन को ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा एक संभावित भूमिगत ठिकाना माना जाता है। पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि यहां परमाणु गतिविधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण सुविधाएं मौजूद हो सकती हैं। ट्रम्प के बयान के बाद एक बार फिर यह चर्चा शुरू हो गई है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सीमित सैन्य कार्रवाई कर सकता है। 4 नवंबर को Iran पर Attack की रिपोर्ट से बढ़ी चिंता ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले को लेकर 4 नवंबर की तारीख चर्चा में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र के कुछ सहयोगी देशों को संभावित सैन्य कार्रवाई और उसके बाद पैदा होने वाली स्थिति के लिए सतर्क रहने को कहा है। रिपोर्ट्स में 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद कार्रवाई की संभावना जताई गई है। इसी वजह से 4 नवंबर की तारीख को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि अभी तक ट्रम्प प्रशासन ने हमले की तारीख या समय की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसलिए इसे फिलहाल संभावित घटनाक्रम के तौर पर ही देखा जा रहा है। ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी अमेरिका की ओर से संभावित हमले की खबरों के बीच ईरान ने भी अपना रुख साफ कर दिया है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि अगर अमेरिका या इजरायल की ओर से दोबारा हमला किया गया तो उसका जवाब दिया जाएगा। ईरान के अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि किसी नए सैन्य टकराव की स्थिति में क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। इससे खाड़ी देशों में भी चिंता बढ़ गई है। ईरान का परमाणु कार्यक्रम इस विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपनी परमाणु गतिविधियों को लेकर उसकी चिंताओं का समाधान करे, जबकि तेहरान अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़े अधिकारों पर जोर दे रहा है। Qatar के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ हमले की चर्चाएं चल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बातचीत के रास्ते भी खुले हुए हैं। कतर दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी संकेत दिया है कि ईरान के साथ बातचीत पूरी तरह बंद नहीं हुई है। अमेरिका ऐसा समझौता चाहता है, जिससे उसके सुरक्षा संबंधी मुद्दों का समाधान निकल सके। ईरान की ओर से भी बातचीत को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। हालांकि, दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अभी सहमति बनना बाकी है। Strait of Hormuz पर भी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर भी स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद अहम है। यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या आवाजाही में रुकावट आने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और सप्लाई पर असर पड़ सकता है। भारत जैसे देशों के लिए भी यह मामला महत्वपूर्ण है, क्योंकि तेल आयात और ऊर्जा कीमतों में बदलाव का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। क्या अमेरिका और ईरान के बीच फिर शुरू होगी जंग? फिलहाल पूरी दुनिया की नजर ट्रम्प के अगले कदम पर है। नेतन्याहू से बातचीत, ईरान के ठिकानों को लेकर दिया गया बयान और 4 नवंबर को संभावित हमले की रिपोर्ट ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। एक तरफ अमेरिका सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है, तो दूसरी तरफ कतर के जरिए कूटनीतिक बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं। ईरान ने भी साफ कर दिया है कि किसी हमले की स्थिति में वह जवाब देगा। अब देखना होगा कि अमेरिका बातचीत के जरिए कोई रास्ता निकालता है या फिर मध्य पूर्व में एक बार फिर सैन्य टकराव की स्थिति बनती है। फिलहाल 4 नवंबर को हमले की संभावना मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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