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Monsoon 2025

दक्षिण-पश्चिम Monsoon 2025 ने केरल में दी समय से पहले दस्तक Monsoon in Kerala

24 मई 2025: भारत में Monsoon 2025 ने इस साल समय से पहले दस्तक दी है। दक्षिण-पश्चिम Monsoon 2025 ने आज 24 मई को केरल में प्रवेश कर लिया, जो कि सामान्य तिथि 1 जून से 8 दिन पहले है। यह 2009 के बाद सबसे जल्दी मानसून की एंट्री है, जबकि सबसे जल्दी रिकॉर्डेड आगमन 1990 में 19 मई को हुआ था। IMD का अलर्ट: भारी बारिश की चेतावनी भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने केरल और माहे में अत्यधिक भारी वर्षा (Extreme Heavy Rainfall) की चेतावनी जारी की है। अगले 2–3 दिनों में कुछ स्थानों पर 24 घंटे में 205 मिमी से अधिक बारिश हो सकती है। कर्नाटक, तमिलनाडु और लक्षद्वीप में भी Monsoon Rain Alerts जारी किए गए हैं। कृषि के लिए वरदान है समय से पहले Monsoon समय से पहले मानसून का आगमन किसानों के लिए खुशखबरी लेकर आया है। धान, कपास, मक्का, गन्ना, सोयाबीन जैसी प्रमुख फसलों की समय पर बुवाई शुरू हो सकेगी। इससे फसलों की पैदावार और उत्पादकता में इज़ाफा होने की संभावना है। मानसून 2025: सामान्य से अधिक बारिश का पूर्वानुमान IMD के अनुसार, इस वर्ष भारत में औसत से अधिक बारिश (Above Normal Rainfall) होने की संभावना है। पूरे मौसम में 105% LPA (Long Period Average) वर्षा का अनुमान है, ±5% के उतार-चढ़ाव के साथ। राज्य सरकारें अलर्ट मोड पर केरल, कर्नाटक, और तमिलनाडु की सरकारों ने आपदा प्रबंधन बलों को तैयार कर लिया है। भूस्खलन, जलभराव और तेज हवाओं से निपटने के लिए हर जिले में आपातकालीन नियंत्रण कक्ष सक्रिय कर दिए गए हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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COVID-19 Surge

COVID-19 Surge: एशिया में फिर बढ़े कोरोना केस, हांगकांग-सिंगापुर में हालात चिंताजनक

19 मई 2025, देश हरपल डेस्क COVID-19 एक बार फिर एशिया में अपने पैर पसार रहा है। हांगकांग और सिंगापुर जैसे विकसित शहरों में संक्रमण के मामलों में तेज़ वृद्धि देखी जा रही है, जिससे स्वास्थ्य अधिकारियों और आम जनता में चिंता बढ़ गई है। हांगकांग में 10 हफ्तों में 30 गुना वृद्धि हांगकांग में मार्च 2025 से COVID-19 मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पिछले 10 हफ्तों में संक्रमण के मामलों में 30 गुना तक की बढ़ोतरी हुई है। Sewage surveillance और आउटपेशेंट क्लीनिकों में COVID-19 के मामलों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। सिंगापुर में भी संक्रमण में उछाल सिंगापुर में मई के पहले सप्ताह में COVID-19 के मामलों में 28% की वृद्धि हुई है, और अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या में भी 30% तक की बढ़ोतरी देखी गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने जनता से सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की है। नया वैरिएंट और लक्षणस्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, Omicron JN.1 वैरिएंट इस नए उछाल के पीछे हो सकता है। इस वैरिएंट के कारण मरीजों में खांसी, गले में खराश, मतली, उल्टी, ब्रेन फॉग और आंखों में जलन जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं। भारत में स्थिति और सतर्कता भारत में भी कुछ शहरों में COVID-19 के मामलों में हल्की वृद्धि देखी जा रही है। मुंबई में डॉक्टरों ने हाल ही में कुछ नए मामलों की पुष्टि की है, हालांकि अधिकांश मामले हल्के हैं और गंभीर चिंता की आवश्यकता नहीं है। स्वास्थ्य विभाग ने जनता से सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की है। बचाव के उपाय और सलाह स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सतर्कता और सावधानी बरतकर हम इस नए उछाल से बच सकते हैं। निष्कर्ष COVID-19 का यह नया उछाल हमें याद दिलाता है कि महामारी अभी समाप्त नहीं हुई है। हांगकांग और सिंगापुर जैसे देशों में मामलों की वृद्धि हमें सतर्क रहने की आवश्यकता का संकेत देती है। भारत में स्थिति अभी नियंत्रण में है, लेकिन हमें सतर्क रहना और आवश्यक सावधानियां बरतनी चाहिए।
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Indian Railways

Indian Railways New Rules for Train Ticket Booking: वेटिंग टिकट वालों को अब आरक्षित कोच में चढ़ने की अनुमति नहीं

Indian Railways ने 1 मई 2025 से एक अहम बदलाव लागू किया है, जो वेटिंग टिकट (प्रतीक्षा सूची) वाले यात्रियों के लिए बड़ा बदलाव है। अब, यदि आपकी ट्रेन टिकट वेटिंग लिस्ट में है, तो आपको आरक्षित कोच जैसे स्लीपर या एसी कोच में यात्रा करने की अनुमति नहीं होगी। इस लेख में हम आपको भारतीय रेलवे के नए नियमों के बारे में पूरी जानकारी देंगे। भारतीय रेलवे का नया नियम: वेटिंग टिकट वाले यात्रियों के लिए क्या है बदलाव? Indian Railways ने हाल ही में वेटिंग टिकट वाले यात्रियों के लिए एक नया नियम लागू किया है। अब, यदि आपकी टिकट वेटिंग लिस्ट में है और चार्ट बनने के बाद भी कन्फर्म नहीं होती, तो आपको केवल जनरल (अनारक्षित) कोच में यात्रा करने की अनुमति होगी। इसका मतलब है कि स्लीपर, एसी या अन्य आरक्षित कोच में यात्रा करना अब संभव नहीं होगा। अगर ऐसा किया जाता है, तो यह रेलवे के नियमों का उल्लंघन माना जाएगा और यात्री को जुर्माना या ट्रेन से उतारने का सामना करना पड़ सकता है। एक ही PNR पर बुकिंग होने पर क्या होता है? यदि आप और आपके साथ यात्रा करने वाले अन्य लोग एक ही PNR पर टिकट बुक करते हैं और उनमें से कुछ कन्फर्म होते हैं जबकि कुछ वेटिंग लिस्ट में होते हैं, तो रेलवे थोड़ी छूट देती है। उदाहरण के तौर पर, यदि चार यात्री एक PNR पर बुकिंग करते हैं और उनमें से केवल दो की सीट कन्फर्म होती है, तो सभी यात्री ट्रेन में चढ़ सकते हैं। हालांकि, वेटिंग टिकट वाले यात्रियों को कन्फर्म सीट वाले यात्रियों के साथ बैठने के लिए एडजस्ट करना होगा। यह नियम अस्थायी तौर पर लागू है, और यदि रेलवे अधिकारी चाहे तो वेटिंग टिकट वाले यात्रियों को ट्रेन से उतार भी सकते हैं। इसलिए यह नियम पूरी तरह से यात्रियों के लिए सुरक्षित नहीं है, और उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके पास कन्फर्म टिकट हो। यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण सलाह हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Women hear better than men

Women Hear Better Than Men: महिलाएं मर्दों से ज्यादा जल्दी और साफ़ सुन लेती हैं?

Women Hear Better Than Men: अब यह सिर्फ एक धारणा नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक तथ्य है। हाल ही में ब्रिटेन और फ्रांस के वैज्ञानिकों ने 13 देशों में की गई Hearing research study के आधार पर यह दावा किया है कि महिलाएं आम तौर पर पुरुषों की तुलना में बेहतर सुनने की क्षमता रखती हैं। 🔬 क्या कहती है स्टडी?यह स्टडी ब्रिटिश और फ्रेंच रिसर्चर्स की टीम द्वारा की गई, जिसमें अलग-अलग देशों के लोगों की ऑडिटरी क्षमता (hearing ability) का विश्लेषण किया गया। नतीजों में साफ़ देखा गया कि महिलाओं की सुनने की संवेदनशीलता (auditory sensitivity) अधिक थी, खासकर हाई-फ्रीक्वेंसी साउंड्स में। 🧠 इसके पीछे साइंटिफिक कारण क्या हैं?विशेषज्ञों का मानना है कि यह अंतर हॉर्मोनल स्ट्रक्चर और ब्रेन प्रोसेसिंग के कारण होता है। महिलाओं का दिमाग साउंड प्रोसेसिंग में ज्यादा एक्टिव रहता है। एस्ट्रोजन हार्मोन भी इसमें मददगार होता है, जिससे सुनने की क्षमता तेज़ बनी रहती है। 👩‍⚕️ इसका असर रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कैसे पड़ता है?इस अंतर के कारण महिलाएं न सिर्फ बच्चों की रोने की आवाज़ जल्दी पकड़ती हैं, बल्कि आपसी बातचीत में भी ज्यादा अलर्ट रहती हैं। यही वजह है कि कॉल सेंटर्स और नर्सिंग जैसे प्रोफेशन में महिलाएं ज्यादा प्रभावी साबित होती हैं। 📢 क्यों है ये रिसर्च ज़रूरी?यह स्टडी सिर्फ सुनने की क्षमता पर नहीं, बल्कि हेल्थकेयर, एजुकेशन और कम्युनिकेशन से जुड़े फैसलों पर भी असर डाल सकती है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि पुरुषों और महिलाओं के लिए हेल्थ डिवाइसेज़ और कम्युनिकेशन टूल्स अलग-अलग तरीके से डिज़ाइन किए जाने चाहिए। 📝 निष्कर्षअगर अगली बार कोई महिला बिना कहे आपकी बात पकड़ ले, तो हैरान मत होइए — यह साइंस का कमाल है!
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Heatwave Mental Impact

Heatwave Mental Impact: गर्मी सिर्फ शरीर नहीं, दिमाग को भी कर रही है बीमार

समाचार रिपोर्ट | देश हरपलगर्मी का असर अब सिर्फ डिहाइड्रेशन, सनबर्न या लू तक सीमित नहीं रहा। Heatwave Mental Impact अब एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य संकट की ओर इशारा कर रहा है। हाल के अध्ययनों और विशेषज्ञों की राय के अनुसार, जैसे सर्दियों में “SAD” यानी Seasonal Affective Disorder होता है, उसी तरह गर्मियों में भी डिप्रेशन और मूड डिसऑर्डर देखने को मिल रहे हैं। इसे Summer SAD या Reverse SAD भी कहा जाता है। गर्मी में बढ़ती धूप, ऊंचा तापमान और बिगड़ी नींद की वजह से ब्रेन के केमिकल्स जैसे सेरोटोनिन और मेलाटोनिन प्रभावित होते हैं। ये दो हार्मोन हमारे मूड और नींद को कंट्रोल करते हैं। जब इनमें गड़बड़ी आती है, तो मन उदास रहने लगता है, गुस्सा बढ़ जाता है और चिड़चिड़ापन हावी हो जाता है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, जब तापमान बहुत ज्यादा हो जाता है तो मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े इमरजेंसी केस 8% तक बढ़ जाते हैं। यानी सिर्फ शारीरिक नहीं, मानसिक स्तर पर भी हीटवेव का सीधा प्रभाव देखने को मिल रहा है। क्या होता है Summer SAD? Summer SAD एक प्रकार का मौसम-जनित मानसिक विकार है जो खासतौर पर गर्मियों में होता है। इसके लक्षण इस प्रकार हैं: यह स्थिति तब और भी गंभीर हो सकती है जब व्यक्ति पहले से मानसिक तनाव या डिप्रेशन से जूझ रहा हो। गर्मियों में मेंटल हेल्थ क्यों बिगड़ती है? गर्मी में हमारे शरीर और दिमाग को मौसम के अनुरूप ढलने में समय लगता है। कुछ प्रमुख कारण जो मानसिक स्थिति को प्रभावित करते हैं: क्या करें? कैसे बचें? निष्कर्ष:गर्मी का असर केवल त्वचा और शरीर तक सीमित नहीं है। हमारा दिमाग भी इस मौसम की मार झेलता है। अगर हर साल गर्मी में आपका मूड डाउन रहता है, गुस्सा आता है और सब कुछ उबाऊ लगता है, तो इसे हल्के में न लें। यह Summer SAD का संकेत हो सकता है। समय रहते पहचानें, सजग रहें और सही कदम उठाएं। देश हरपल पर ऐसे ही जरूरी और उपयोगी स्वास्थ्य समाचारों के लिए जुड़े रहें।
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Ramdev

शरबत जिहाद” टिप्पणी पर बवाल: Ramdev को Delhi High Court की फटकार, Rooh Afza पर दिए बयान से साम्प्रदायिक तनाव बढ़ने की आशंका

योग गुरु बाबा Ramdev एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने रूह अफ़ज़ा को लेकर उनकी विवादित टिप्पणी पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यह बयान “अंतरात्मा को झकझोर देता है” और समाज में सांप्रदायिक तनाव पैदा कर सकता है। Ramdev का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने दावा किया कि रूह अफ़ज़ा की बिक्री से मस्जिदें बनाई जा रही हैं और इसे उन्होंने “शरबत जिहाद” बताया। कोर्ट ने इस बयान को “गैरजिम्मेदाराना” और “गंभीर रूप से भड़काऊ” बताया। कोर्ट का कड़ा संदेश: जिम्मेदार लोग न फैलाएं नफरत हाई कोर्ट ने कहा कि बाबा रामदेव जैसे प्रभावशाली व्यक्तियों को बयान देने से पहले सामाजिक जिम्मेदारी समझनी चाहिए। इस तरह की टिप्पणियां भारत जैसे विविधता से भरे देश में सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकती हैं। पहले भी सुप्रीम कोर्ट से मिल चुकी है चेतावनी यह कोई पहला मामला नहीं है जब रामदेव या पतंजलि कोर्ट के निशाने पर आए हों। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि द्वारा भ्रामक विज्ञापन चलाने और एलोपैथी को बदनाम करने पर कड़ी आपत्ति जताई थी। Ramdev और उनके सहयोगियों को अदालत की अवमानना मामले में बिना शर्त माफी मांगनी पड़ी थी। कोविड को लेकर भ्रामक दावे पर भी फटकार दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अन्य मामले में पतंजलि और रामदेव को आदेश दिया था कि वे एलोपैथी को कोविड-19 मौतों के लिए जिम्मेदार ठहराने वाले अपने दावे हटाएं। अदालत ने कहा था कि इस तरह की गलत जानकारी सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है।
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Heart Attack While Studying for IIT: इंदौर में देर रात पढ़ाई करते वक्त छात्र को आया Silent Heart Attack, भाई के सामने तोड़ा दम

इंदौर (Desh Harpal News Desk):मध्य प्रदेश के इंदौर से एक बेहद दुखद और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। यहां IIT की तैयारी कर रहे एक 18 वर्षीय छात्र को अचानक Silent Heart Attack आया और उसने अपने बड़े भाई के सामने ही दम तोड़ दिया। इस हादसे ने न सिर्फ छात्र के परिवार को बल्कि पूरे छात्र समुदाय को गहरे सदमे में डाल दिया है। जानकारी के अनुसार, मृतक छात्र पीयूष मुरैना जिले का निवासी था और अपने बड़े भाई के साथ इंदौर के भंवरकुआं थाना क्षेत्र के चितावद इलाके में एक किराए के मकान में रहकर IIT entrance exam की तैयारी कर रहा था। हर दिन की तरह पीयूष देर रात पढ़ाई में व्यस्त था। तभी अचानक उसके सीने में तेज दर्द उठा। उसने तुरंत अपने बड़े भाई को इसकी जानकारी दी। भाई ने प्राथमिक इलाज के लिए घर पर रखी कुछ दवाइयाँ दीं, लेकिन आराम न मिलने पर उसे फौरन नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। दुर्भाग्यवश, अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने पीयूष को Dead on Arrival घोषित कर दिया। डॉक्टरों के मुताबिक यह मामला Silent Heart Attack का है। यानी ऐसा हार्ट अटैक जिसमें पहले से कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देते और अचानक स्थिति गंभीर हो जाती है। पुलिस ने इस घटना की सूचना मिलने के बाद जांच शुरू कर दी है। फिलहाल पुलिस परिजनों और भाई के बयानों के आधार पर आगे की पड़ताल कर रही है। प्रारंभिक जांच में हार्ट अटैक को ही मौत का संभावित कारण बताया गया है। पीयूष की मौत से उसके दोस्तों और आसपास के छात्रों में शोक की लहर फैल गई है। पढ़ाई के लिए अपने घर से दूर आए इस होनहार छात्र की असामयिक मृत्यु ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या युवा छात्रों में बढ़ता मानसिक तनाव और अनहेल्दी लाइफस्टाइल इस तरह की घटनाओं का कारण बन रहे हैं? Desh Harpal आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा करेगा। तब तक अपने बच्चों और छात्रों की सेहत पर ध्यान दें—Health is as important as Hard Work.
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Whooping cough: New research से कूकर खांसी के भविष्य के Vaccines में आ सकती है क्रांतिकारी सुधार

नई दिल्ली – एक समय था जब कूकर खांसी (जिसे हूपिंग कफ या पर्टुसिस भी कहा जाता है) बच्चों की मृत्यु का एक प्रमुख कारण हुआ करती थी, खासकर अमेरिका और दुनिया के अन्य हिस्सों में। लेकिन 1940 के दशक में जब इसका टीका अस्तित्व में आया, तब इस जानलेवा बीमारी पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सका। हालांकि, बीते कुछ दशकों में यह देखने को मिला है कि टीकाकरण के बावजूद whooping cough(हूपिंग कफ) के मामले दोबारा बढ़ रहे हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि मौजूदा टीकों की प्रभावशीलता समय के साथ घट जाती है, जिससे इस बीमारी के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। अब एक नई रिसर्च ने इस दिशा में आशा की किरण दिखाई है। इस शोध में यह समझने की कोशिश की गई है कि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) किस प्रकार हूपिंग कफ के बैक्टीरिया बोर्डेटेला पर्टुसिस पर प्रतिक्रिया करता है। वैज्ञानिकों ने पाया कि मौजूदा टीके शरीर में “मेमोरी टी-सेल्स” को उतनी मजबूती से सक्रिय नहीं करते, जो कि दीर्घकालिक प्रतिरक्षा के लिए जरूरी हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि हम इस प्रतिक्रिया को बेहतर ढंग से समझ पाएं, तो ऐसे नए टीके विकसित किए जा सकते हैं जो लंबे समय तक प्रभावी रहेंगे और बच्चों को दोबारा इस बीमारी के खतरे से बचा सकेंगे। अमेरिका में हुए इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने विशेष रूप से बच्चों और किशोरों में प्रतिरक्षा प्रणाली की गतिविधियों का विश्लेषण किया। इसके अलावा उन्होंने यह भी अध्ययन किया कि क्यों वर्तमान टीके समय के साथ कम प्रभावी हो जाते हैं। यह शोध आने वाले समय में टीका वैज्ञानिकों को ऐसे फार्मूले बनाने में मदद करेगा, जो न केवल लंबे समय तक प्रभावी होंगे, बल्कि महामारी जैसी स्थितियों में भी ज्यादा सुरक्षा प्रदान कर पाएंगे। निष्कर्षयह रिसर्च इस बात की ओर इशारा करती है कि केवल बीमारी से बचाव ही नहीं, बल्कि टीकों की गुणवत्ता और टिकाऊपन में सुधार करना अब समय की मांग है। यदि यह नई रिसर्च सफलतापूर्वक प्रैक्टिकल रूप में लागू होती है, तो हूपिंग कफ जैसी घातक बीमारी को पूरी तरह खत्म करने का सपना जल्द ही साकार हो सकता है।
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भाजपा का समर्थ भारत निर्माण में अतुलनीय योगदान

सत्येंद्र जैन ,स्तंभकार विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी भाजपा ने स्थापना के 46 वे वर्ष में प्रवेश किया है।भाजपा के संस्थापक अटल बिहारी वाजपेयी,लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी,कुशा भाऊ ठाकरे, राजमाता विजयाराजे सिंधिया,सुन्दरलाल पटवा,प्यारेलाल खण्डेलवाल आदि नेताओं ने 1980 में पार्टी स्थापना के समय यह कल्पना भी नहीं की होगी कि इतने कम समय में ही भाजपा विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी का गौरव अर्जित कर लेगी।1984 में भाजपा की यात्रा मात्र 2 लोकसभा सीट से प्रारम्भ होकर वर्ष 2019 में 303 सीट तक पहुँची है।वर्तमान में भाजपा के 240 सांसद हैं। भाजपा चार दशकों की यात्रा में ही भारतीय राजनीति में शून्य से चलकर शिखर पर आरोहित हो गई है।विश्व की सर्वोच्च राजनीतिक पार्टी बन गई है। वर्तमान में भाजपा के लगभग 13 करोड़ से अधिक सदस्य हैं। मध्यप्रदेश भाजपा ने पौने दो करोड़ सदस्य बना कर देश में अग्रणी भूमिका निभा कर कीर्तिमान स्थापित किया है।भाजपा का शिखर पर आरोहण सामान्य बात नहीं है ।यह अतुलनीय विलक्षण उपलब्धि है। यह उपलब्धि भाजपा की भारतीय मूल्यों ,पंच निष्ठाओं एवं एकात्म मानववाद के सिद्धांत को आत्मरूप आधार मानकर ही हुई है।भाजपा के संविधान में भी एकात्म मानववाद और पंच निष्ठाओं को आधारभूत तत्व माना गया है ।जो भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रीय मूल्यों को संवर्धित करते हैं।विचार परिवार राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से राष्ट्र निर्माण के मंत्र,दिशा निर्देश सतत प्राप्त होने से उत्कृष्टता के पथ पर अग्रसर है।भाजपा ने अनेक संकल्प भारतीय जनसंघ की स्थापना के समय से ही अपने संकल्प पत्र, घोषणापत्र में सम्मिलित किए हैं।जम्मू कश्मीर में धारा 370 को निष्प्रभावी करना,अयोध्या में दिव्य,भव्य,नव्य राम मंदिर का निर्माण करना,समान नागरिक संहिता को लागू करना जैसे संकल्पों को सदैव घोषणापत्र में सम्मिलित किया है।उत्तराखंड में यूनीफॉर्म सिविल कोड लागू कर दिया गया है।अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति,पिछड़े वर्ग के साथ सामान्य निर्धन वर्ग को भी अब आरक्षण मिल रहा है।नारी शक्ति वंदन अधिनियम द्वारा देश की महिलाओं को राजनैतिक क्षेत्र लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण कार्य भाजपा ने किया है।भाजपा ने गौरवशाली,वैभवशाली,समृद्धशाली, शक्तिशाली,समर्थ भारत निर्माण के रोड मेप को जनता के समक्ष प्रस्तुत किया है।शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, उद्योग, रक्षा,विनिर्माण आदि क्षेत्रों में स्व तत्व की प्रधानता को महत्व दिया है। मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि आगामी शताब्दी में भी भाजपा का भविष्य उज्जवल रहेगा। भाजपा की सतत उन्नति की यह यात्रा महा विजय की यात्रा सिद्ध होगी। वर्तमान भाजपा की सफलता चार पीढ़ियों के सतत,अथक परिश्रम से ही संभव हुई है।भाजपा को विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बनाने का कीर्तिमान केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री, तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को जाता है ।अमित शाह ने राष्ट्र व्यापी सदस्यता अभियान चला कर,चीन की कम्युनिस्ट पार्टी को सदस्य संख्या में पछाड़ दिया। 11 करोड़ सदस्य बनाकर संसार की सर्वोच्च पार्टी बनाया। राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के नेतृत्व में सदस्यता अभियान को गति दी गई है।आज विश्व के 60 से अधिक देशों के प्रतिनिधि भारतीय जनता पार्टी के संगठन विस्तार की सफलता का अध्ययन करने के लिए भारत आ चुके हैं।राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा से भेंट कर चुके हैं।मध्य प्रदेश में प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा से एवं अन्य राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष से भेंट कर चुके हैं।भाजपा की अप्रतिम सफलता से कार्यकर्ताओं, प्रतिनिधियों को गौरव बोध होता है।उनके दल की संरचना को समझने के लिए विश्व के देशों से प्रतिनिधि आ रहे हैं हैं ।दूसरे शब्दों में कहें कि भाजपा की संगठन रचना,भागीरथी परिश्रम की विपुल सफ़लता से हमारे राष्ट्र भारतवर्ष का विश्व में सम्मान बढ़ रहा है।यह हम सभी 140 करोड़ भारतीयों के लिए स्वाभिमान का विषय है। वर्तमान में राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने विश्व के 20 से अधिक देश जैसे अमेरिका,ऑस्ट्रेलिया जापान,जर्मनी,फ्रांस,ब्रिटेन आदि देशों के राजनीतिक दलों को भारतीय लोकतंत्र के उत्सव लोकसभा चुनाव 2024 को निकटता से देखने के लिए निमंत्रित भी किया था।यह अनूठी एवं सराहनीय पहल है। स्वतंत्रता के चौसठ वर्षों के बाद भाजपा की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की पूर्ण बहुमत की सरकार लगातार तीन बार से केंद्र में बनी है ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुयोग्य नेतृत्व में भारत का,भारत के लोगों का सर्वांगीण उत्थान हो रहा है।देश के 21 राज्यों – केंद्र शासित प्रदेशों में भाजपा एवं सहयोगी दलों की सरकारें हैं।देश भर में एक हजार तीन सौ से अधिक कार्यालयों का निर्माण हो रहा है।पाँच सौ से अधिक कार्यालय निर्मित होकर सुचारु रूप में प्रारंभ हो चुके हैं। मध्यप्रदेश में भाजपा की संरचना पर प्रकाश डालेंगे तो पाते हैं कि वर्तमान में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा एवं संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा की त्रिदेव रूपी त्रिवेणी, ट्रिनिटी के चमत्कारी नेतृत्व में प्रदेश भाजपा इकाई नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।लोकसभा चुनाव में सभी 29 सीट जीत कर कांग्रेस को शून्य पर ला दिया है।वोट शेयर भी लगभग 59 प्रतिशत अर्जित कर कीर्तिमान रचा है।वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में पाँचवीं बार भाजपा की सरकार बनी है।163 विधायक विजयी हुए हैं। वोट शेयर भी बढ़कर लगभग 49 प्रतिशत हुआ है।प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा पुनः शुभंकर सिद्ध हुए हैं ।लगभग 64000 से अधिक बूथ्स का डिजिटलाइजेशन एवं लाख कार्यकर्ताओं का कैलाश पर्वत बूथ स्तर पर अपना कार्य कर रहा है।बूथ विजय संकल्प को सार्थक कर रहा है।अनेक अवसर पर विष्णु दत्त शर्मा के भागीरथी परिश्रम, बूथ डिजिटलाइजेशन के कार्य की भूरी-भूरी प्रशंसा स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने मुक्त कंठ से की है।देश के समस्त राज्य की इकाइयों को मध्यप्रदेश के संगठन से सीखने का आह्वान किया गया है।सदस्यता अभियान के संगठन महापर्व में मध्य प्रदेश का भाजपा संगठन अग्रणी है।विगत चुनाव में अभूतपूर्व सफलता भाजपा के संगठन कौशल,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार और मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव की सरकार के द्वारा चलाई जा रही सैकड़ों योजनाओं के धरातलीय क्रियान्वयन के परिणाम स्वरुप ही संभव हो पायी है।भविष्य के गौरवशाली,वैभवशाली,समृद्धशाली, शक्तिशाली,समर्थ भारत निर्माण में भाजपा का अतुलनीय योगदान है।
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Conocarpus tree Harmful Effects-भोपाल स्मार्ट सिटी पार्क में लगा ‘खतरनाक’ कॉनोकर्पस पेड़! इंसानी सेहत और पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा, तीन राज्यों में पहले ही लग चुका है बैन

भोपाल, देश हरपल।राजधानी भोपाल के श्यामला हिल्स स्थित स्मार्ट सिटी पार्क में लगे पेड़ अब विवाद का कारण बनते जा रहे हैं। यहां बड़े पैमाने पर लगाए गए कॉनोकर्पस (Conocarpus) नामक पेड़ को लेकर विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता जताई है। बताया जा रहा है कि यह पेड़ मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण और जैव विविधता के लिए बेहद हानिकारक है। यही वजह है कि इस पेड़ को गुजरात, महाराष्ट्र और तेलंगाना जैसे राज्यों में प्रतिबंधित कर दिया गया है। लेकिन भोपाल जैसे शहर में इसे बड़े पैमाने पर लगाया जा रहा है, जो एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। क्या है कॉनोकर्पस? कॉनोकर्पस एक विदेशी प्रजाति का पेड़ है, जो मूल रूप से खाड़ी देशों और अमेरिका में पाया जाता है। इसे इसकी तेज़ बढ़त और कम समय में हरियाली देने की क्षमता के कारण भारत के कई हिस्सों में लगाया गया था। परंतु विशेषज्ञों के अनुसार यह केवल दिखावटी हरियाली है, इसकी जड़ें बेहद आक्रामक होती हैं और यह जमीन के नीचे की पाइपलाइनों, सीवरेज सिस्टम और यहां तक कि भवनों की नींव को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं। क्यों है खतरनाक? पर्यावरणविदों और विशेषज्ञों की चेतावनी पर्यावरणविदों का कहना है कि स्मार्ट सिटी जैसी परियोजनाओं में कॉनोकर्पस जैसे पेड़ लगाना पूरी तरह गलत और खतरनाक फैसला है। भोपाल जैसे शहर, जो झीलों और प्राकृतिक विविधता के लिए जाना जाता है, वहां इस तरह की पेड़ लगाने से भविष्य में गंभीर पारिस्थितिक संकट खड़ा हो सकता है। सरकार और नगर निगम की चुप्पी सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जब यह पेड़ पहले से ही तीन राज्यों में प्रतिबंधित हो चुका है, तब भी भोपाल में इसका बड़े पैमाने पर रोपण किया जा रहा है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या नगर निगम और स्मार्ट सिटी मिशन के अधिकारी इस प्रजाति के पेड़ के खतरों से अनजान हैं या जानबूझकर इसे नजरअंदाज कर रहे हैं? क्या हो अगला कदम? देश हरपल की अपील:भोपाल के नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों को चाहिए कि वे इस विषय में स्वर उठाएं और प्रशासन से जवाब मांगें। केवल दिखावटी हरियाली नहीं, बल्कि स्थायी और सुरक्षित हरियाली ही स्मार्ट सिटी की असली पहचान होनी चाहिए।
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Punjab Election 2027: हरमीत पठानमाजरा और चेतन जौड़ामाजरा ने AAP से दिया इस्तीफा

पंजाब की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के दो मौजूदा विधायकों ने इस्तीफा देकर अपनी राह अलग कर ली। सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा और समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने 1 नवंबर को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने का ऐलान किया। दोनों नेताओं के इस फैसले ने पंजाब में नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू कर दी हैं। दिलचस्प बात यह है कि AAP ने 31 अक्टूबर को ही पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए 40 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी। इसके अगले ही दिन दो विधायकों के इस्तीफे की खबर सामने आ गई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी के भीतर टिकट और संगठन में बदलाव को लेकर नाराजगी बढ़ रही है? AAP की Candidate List के बाद क्यों बढ़ी हलचल? आम आदमी पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। 31 अक्टूबर को जारी पहली उम्मीदवार सूची में 40 नाम शामिल किए गए। मुख्यमंत्री भगवंत मान को धूरी विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं, कई मौजूदा विधायकों को भी दोबारा चुनाव लड़ने का मौका मिला है। हालांकि, इस सूची में हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौड़ामाजरा का नाम नहीं था। इतना ही नहीं, पार्टी ने उनके विधानसभा क्षेत्रों में नए हलका इंचार्ज भी नियुक्त कर दिए थे। सनौर में रंजोध हदाना और समाना में पूर्व अकाली नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को जिम्मेदारी दी गई। इन फैसलों के बाद दोनों विधायकों की राजनीतिक भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे थे। Harmeet Singh Pathanmajra ने Kejriwal को भेजा इस्तीफा सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को भेजा। पठानमाजरा और पंजाब सरकार के बीच पिछले काफी समय से मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं। सितंबर 2025 में पंजाब में आई बाढ़ के दौरान उन्होंने राहत और बचाव कार्यों को लेकर सरकार की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए थे। इसके बाद पार्टी नेतृत्व के साथ उनके संबंधों में तनाव की चर्चा होने लगी थी। उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले ने भी उन्हें लगातार सुर्खियों में बनाए रखा। सितंबर 2025 में एक महिला की शिकायत पर उनके खिलाफ दुष्कर्म, धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी से संबंधित मामला दर्ज किया गया था। पठानमाजरा ने इन कार्रवाइयों को राजनीतिक प्रताड़ना बताते हुए आरोप लगाए थे। Chetan Singh Jouramajra ने भी छोड़ी पार्टी समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने भी AAP से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने फैसले की जानकारी दी। जौड़ामाजरा भगवंत मान सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं, लेकिन बाद में मंत्रिमंडल में फेरबदल के दौरान उन्हें पद से हटा दिया गया था। इसके बाद समाना विधानसभा क्षेत्र में उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं। पार्टी ने हाल ही में पूर्व अकाली नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को समाना का हलका इंचार्ज बनाया था। इसे भी जौड़ामाजरा की नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। इस्तीफे के बाद जौड़ामाजरा ने कहा कि अब उनका पार्टी में मन नहीं लग रहा है। उन्होंने पंजाब के मौजूदा हालात को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। क्या BJP में शामिल होंगे दोनों विधायक? दोनों विधायकों के AAP छोड़ने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर हो रही है। राजनीतिक गलियारों में अटकलें हैं कि दोनों नेता भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम सकते हैं। हालांकि, अभी तक BJP या दोनों विधायकों की ओर से पार्टी में शामिल होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल केवल राजनीतिक अटकल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। Punjab Election 2027 से पहले AAP के सामने चुनौती पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। AAP की पहली उम्मीदवार सूची के तुरंत बाद दो मौजूदा विधायकों का इस्तीफा पार्टी के लिए एक नई चुनौती बन गया है। दोनों विधायक पटियाला जिले की सनौर और समाना सीटों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में इन सीटों पर उम्मीदवारों का चयन और स्थानीय राजनीतिक समीकरण आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहेंगे। अब देखना होगा कि AAP इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में किसे जिम्मेदारी देती है और क्या दोनों पूर्व विधायक किसी दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं। फिलहाल पंजाब की राजनीति में 2027 चुनाव से पहले ही सियासी उठापटक शुरू हो गई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
IND vs NZ

IND vs NZ 5th T20: न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से हराया, Team India ने 3-2 से जीती सीरीज

भारत और न्यूजीलैंड (IND vs NZ) के बीच पांच मैचों की T20 सीरीज का आखिरी मुकाबला रोमांचक रहा। हैमिल्टन के Seddon Park में खेले गए इस मैच में न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से हरा दिया। भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 191 रन बनाए थे, लेकिन Tim Seifert की शानदार पारी के सामने भारतीय गेंदबाज बेबस नजर आए। न्यूजीलैंड ने 18 ओवर में ही लक्ष्य हासिल कर लिया। हालांकि, इस हार से सीरीज का नतीजा नहीं बदला। टीम इंडिया ने शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर 3-0 की बढ़त बनाई थी। न्यूजीलैंड ने आखिरी दो मैच जीतकर वापसी जरूर की, लेकिन सीरीज भारत ने 3-2 से अपने नाम कर ली। ईशान किशन और श्रेयस अय्यर ने संभाली भारतीय पारी टॉस जीतकर न्यूजीलैंड ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। भारतीय टीम की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। अभिषेक शर्मा सिर्फ 1 रन और संजू सैमसन 4 रन बनाकर आउट हो गए। शुरुआती झटकों के बाद टीम को एक बड़ी साझेदारी की जरूरत थी। ऐसे समय में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर ने मोर्चा संभाला। दोनों ने तेजी से रन बनाते हुए न्यूजीलैंड के गेंदबाजों पर दबाव बनाया। ईशान किशन ने 32 गेंदों में 61 रन की शानदार पारी खेली, जबकि श्रेयस अय्यर ने सिर्फ 23 गेंदों में 50 रन बना दिए। दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए 93 रन की साझेदारी हुई। इस साझेदारी ने भारत को मैच में वापसी दिलाई। इसके बाद नमन धीर ने 33 रन और नीतीश कुमार रेड्डी ने 22 रन बनाकर टीम का स्कोर 191 तक पहुंचाया। न्यूजीलैंड की तरफ से Adam Milne ने सबसे ज्यादा 4 विकेट लिए। Nathan Smith और Blair Tickner को 2-2 सफलताएं मिलीं। Tim Seifert के 93 रन ने पलट दिया Match 192 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड की शुरुआत जरूर थोड़ी लड़खड़ाई। फिन एलन सिर्फ 2 रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन इसके बाद Tim Seifert ने भारतीय गेंदबाजों को कोई राहत नहीं दी। Seifert ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 50 गेंदों में 93 रन बनाए। उनकी पारी में 8 चौके और 6 छक्के शामिल रहे। वह शतक से महज 7 रन दूर रह गए, लेकिन तब तक न्यूजीलैंड जीत के काफी करीब पहुंच चुका था। उनका साथ Daryl Mitchell ने दिया। Mitchell ने 16 गेंदों में 29 रन बनाए। इसके बाद Glenn Phillips ने भी अपना दम दिखाया। उन्होंने 37 गेंदों में नाबाद 61 रन की पारी खेली। इन दोनों बल्लेबाजों की मदद से न्यूजीलैंड ने 18 ओवर में 3 विकेट खोकर 195 रन बना लिए और मुकाबला 7 विकेट से जीत लिया। भारतीय गेंदबाजों की नहीं चली, बल्लेबाजों की मेहनत गई बेकार भारत के लिए इस मुकाबले में सबसे बड़ी चुनौती न्यूजीलैंड की तेज रन गति रही। 191 रन बनाने के बाद टीम इंडिया को उम्मीद थी कि गेंदबाज मैच पर पकड़ बनाएंगे, लेकिन Tim Seifert और Glenn Phillips ने भारतीय गेंदबाजी को संभलने का मौका नहीं दिया। फिन एलन का विकेट जल्दी मिलने के बावजूद भारत लगातार विकेट नहीं निकाल सका। नतीजा यह रहा कि न्यूजीलैंड ने लक्ष्य को दो ओवर बाकी रहते हासिल कर लिया। 3-0 से आगे था भारत, फिर न्यूजीलैंड ने की वापसी इस T20 सीरीज की शुरुआत भारत के लिए काफी अच्छी रही थी। टीम इंडिया ने शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर 3-0 की बढ़त बना ली थी। ऐसा लग रहा था कि भारत सीरीज में क्लीन स्वीप कर सकता है। लेकिन चौथे मुकाबले में न्यूजीलैंड ने शानदार वापसी की। टीम ने बड़ा स्कोर खड़ा किया और भारत को 87 रन से हराया। इसके बाद पांचवें T20 में भी न्यूजीलैंड ने जीत दर्ज कर दी। लगातार दो जीत के बावजूद न्यूजीलैंड सीरीज अपने नाम नहीं कर सका। भारत ने शुरुआती बढ़त के दम पर पांच मैचों की सीरीज 3-2 से जीत ली। IND vs NZ 5th T20: मैच का पूरा Scorecard भारत – 191/8 (20 ओवर) न्यूजीलैंड – 195/3 (18 ओवर) मैच का नतीजा: न्यूजीलैंड ने 7 विकेट से जीत दर्ज की। सीरीज का नतीजा: भारत ने 3-2 से सीरीज जीती। सीरीज जीतकर भी आखिरी दो मैच हारा भारत टीम इंडिया के लिए यह सीरीज दो अलग-अलग तस्वीरें लेकर आई। शुरुआती तीन मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन आखिरी दो मैचों में न्यूजीलैंड ने अपनी रणनीति और बल्लेबाजी से मुकाबले का रुख बदल दिया। आखिरी मैच में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर की फिफ्टी के बावजूद भारत जीत हासिल नहीं कर पाया। वहीं Tim Seifert और Glenn Phillips की पारियों ने न्यूजीलैंड को शानदार जीत दिलाई। भारत के लिए राहत की बात यही रही कि शुरुआती तीन जीत के कारण T20 सीरीज की ट्रॉफी टीम इंडिया के पास ही रही। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
INDIA Bloc

Delhi Politics: INDIA Bloc की Rally के जवाब में BJP का मार्च, JP Nadda ने राहुल गांधी को घेरा

दिल्ली में 1 नवंबर को सियासी हलचल तेज रही। एक तरफ राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA Bloc के 19 विपक्षी दलों ने रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली की, तो दूसरी तरफ भाजपा ने 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर विरोध मार्च निकालकर कांग्रेस को घेरा। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी राजनीति में उन लोगों को भूल गई, जिन्होंने 1984 की हिंसा में अपनी जान गंवाई थी। दिल्ली में हुए इन दोनों प्रदर्शनों के केंद्र में अलग-अलग मुद्दे रहे। विपक्ष ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोला, जबकि भाजपा ने कांग्रेस को 1984 की हिंसा की याद दिलाते हुए पीड़ित परिवारों के लिए आवाज उठाई। INDIA Bloc की Rally में राहुल गांधी समेत 19 दलों के नेता शामिल रामलीला मैदान में आयोजित विपक्ष की रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और INDIA Bloc के कई अन्य नेता शामिल हुए। रैली का मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग की SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियां रहा। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं। इससे पात्र मतदाताओं के वोट देने के अधिकार पर असर पड़ सकता है। राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए और मतदाताओं के अधिकारों के साथ किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। BJP का जवाबी मार्च, सिख समुदाय और पीड़ित परिवारों ने लिया हिस्सा विपक्ष की रैली के बीच भाजपा ने भी दिल्ली में अपना विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी ने पश्चिमी दिल्ली में 1984 के सिख-विरोधी दंगों के पीड़ितों के समर्थन में मार्च निकाला। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा और मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा सहित कई नेता शामिल हुए। मार्च में सिख समुदाय के लोगों और 1984 की हिंसा से प्रभावित परिवारों ने भी हिस्सा लिया। भाजपा ने इस प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस से 1984 की हिंसा के लिए जवाबदेही तय करने और पीड़ित परिवारों से माफी मांगने की मांग की। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस ने इस संवेदनशील तारीख पर बड़ी राजनीतिक रैली आयोजित करके सिख समुदाय की भावनाओं का ध्यान नहीं रखा। JP Nadda का राहुल गांधी पर हमला, बोले- अपनी राजनीति में शहीदों को भूले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्ष की रैली को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर का दिन देश के इतिहास में बेहद दुखद है। 1984 में इसी दौरान सिख समुदाय के लोगों को हिंसा का सामना करना पड़ा था। नड्डा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अपनी राजनीतिक गतिविधियों में इतने व्यस्त हैं कि उन्हें 1984 की हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों और उनके परिवारों की पीड़ा याद नहीं रही। उन्होंने कहा कि देश उन घटनाओं को नहीं भूला है और सिख समुदाय के जख्म आज भी लोगों को याद हैं। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से इस मुद्दे पर जवाब देने की मांग की। राहुल गांधी ने BJP के कारोबार वाले आरोप पर दिया जवाब भाजपा ने विपक्ष की रैली को लेकर यह भी कहा कि इससे दिल्ली के बाजारों और छोटे कारोबारियों को नुकसान हो सकता है। दिवाली से पहले बाजारों में भीड़ और ट्रैफिक की समस्या बढ़ने की आशंका भी जताई गई। इस पर राहुल गांधी ने भाजपा के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि रैली में शामिल होने वाले लोगों से दिल्ली में खरीदारी करने की अपील की गई थी, ताकि स्थानीय व्यापारियों को फायदा मिले। राहुल गांधी ने कनॉट प्लेस में दुकानों के बंद होने का मुद्दा भी उठाया और सवाल किया कि व्यापारियों का कारोबार प्रभावित होने के लिए कौन जिम्मेदार है। खड़गे ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष का आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। खड़गे का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ियां हुई हैं और कई लोगों के नाम हटाए गए हैं। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बता रहा है। हालांकि, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में गड़बड़ी और राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। आयोग की ओर से मतदाता सूची के पुनरीक्षण को निर्धारित प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है। अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव ने भी उठाए सवाल विपक्ष की रैली में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से नाम हटने के मुद्दे को उठाते हुए चुनाव प्रक्रिया पर सवाल किए। वहीं, बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपने भाषण में वोट चोरी के आरोपों को लेकर सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता शशि थरूर समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर क्यों बढ़ा विवाद? 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा भड़क गई थी। 1 से 3 नवंबर के बीच दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और कई परिवारों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा। इस घटना को देश के इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में गिना जाता है। हिंसा के पीड़ित परिवारों के लिए न्याय और जवाबदेही का मुद्दा आज भी सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा है। भाजपा ने इसी घटना की बरसी को लेकर कांग्रेस की रैली पर सवाल उठाए हैं। वहीं, कांग्रेस और INDIA Bloc का कहना है कि उनकी रैली चुनावी प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए थी। Delhi Politics: एक दिन में दो प्रदर्शन, BJP और विपक्ष आमने-सामने दिल्ली में 1 नवंबर को हुए दोनों प्रदर्शनों ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। रामलीला मैदान में विपक्ष ने चुनाव आयोग...
INDIA Bloc

INDIA Bloc का बड़ा प्रदर्शन: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 19 पार्टियां एकजुट, खड़गे ने दी चेतावनी

दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर को विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक बड़ी रैली की। INDIA Bloc के बैनर तले हुई इस रैली में 19 विपक्षी पार्टियों के नेता एक मंच पर नजर आए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई बड़े नेताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। रैली का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला बयान ममता बनर्जी का रहा। उन्होंने पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी पार्टी बंगाल में हारी नहीं, बल्कि उसे हराया गया। वहीं, मल्लिकार्जुन खड़गे ने ज्ञानेश कुमार को लेकर कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर पीछे हटने वाला नहीं है। ममता बनर्जी ने बंगाल चुनाव को लेकर क्या कहा? रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती गई। ममता ने कहा कि बंगाल में उनकी पार्टी को हराया गया है। उन्होंने मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि लोकतंत्र में हर नागरिक का वोट महत्वपूर्ण है और किसी भी पात्र मतदाता को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। खड़गे का ज्ञानेश कुमार पर सीधा निशाना कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी मंच से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को इतनी आसानी से छोड़ने वाला नहीं है। खड़गे ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए विपक्ष को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी। विपक्षी दलों की मांग है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की समीक्षा हो और मतदाता सूची में हुए बदलावों की जानकारी सार्वजनिक की जाए। राहुल गांधी, प्रियंका और अखिलेश यादव समेत 19 पार्टियों की मौजूदगी दिल्ली की इस रैली में INDIA Bloc के कई प्रमुख नेता शामिल हुए। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, फारूक अब्दुल्ला, तेजस्वी यादव, अभिषेक बनर्जी और सुप्रिया सुले समेत कई नेताओं ने मंच साझा किया। सभी नेताओं ने अपने-अपने संबोधन में चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। SIR विवाद क्या है, जिस पर आमने-सामने हैं विपक्ष और चुनाव आयोग? इस पूरी राजनीतिक लड़ाई के केंद्र में Special Intensive Revision (SIR) है। यह चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची की गहन जांच और संशोधन की प्रक्रिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया में कई पात्र मतदाताओं के नाम भी प्रभावित हो सकते हैं। विपक्ष चाहता है कि नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची को सही और अपडेट रखने के लिए समय-समय पर समीक्षा जरूरी है। इस प्रक्रिया में डुप्लीकेट और अपात्र नामों की पहचान की जाती है। पात्र मतदाताओं को अपना नाम सूची में शामिल कराने का अवसर भी दिया जाता है। BJP ने भी निकाला मार्च, दिल्ली में बढ़ी राजनीतिक हलचल INDIA Bloc की रैली के बीच BJP ने भी 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के समर्थन में मार्च निकाला। इसको लेकर दोनों राजनीतिक पक्षों के बीच बयानबाजी भी देखने को मिली। दिल्ली में एक ही दिन दोनों पक्षों के कार्यक्रमों को देखते हुए सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए। रैली और मार्च के आसपास पुलिस बल की तैनाती की गई, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो। आगे क्या होगा? चुनाव आयोग पर विपक्ष का दबाव जारी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA Bloc की यह रैली चुनाव आयोग और SIR को लेकर चल रहे विवाद में एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम है। विपक्षी दलों ने संकेत दिए हैं कि वे मतदाता सूची में पारदर्शिता और चुनाव आयोग की जवाबदेही का मुद्दा आगे भी उठाते रहेंगे। अब देखना होगा कि विपक्ष की इन मांगों पर चुनाव आयोग क्या रुख अपनाता है और आने वाले दिनों में इस राजनीतिक टकराव की दिशा क्या रहती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump Iran Attack: नेतन्याहू से बात के बाद ट्रम्प का बड़ा बयान, 4 नवंबर को ईरान पर हमले की आशंका

मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव के बीच अमेरिकी Trump ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की है। इस बातचीत के बाद ट्रम्प के एक बयान ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। उन्होंने कहा कि ईरान के एक-दो ठिकानों पर कार्रवाई अभी बाकी है। इसी बीच मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका 4 नवंबर को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है। हालांकि, अभी तक अमेरिकी सरकार ने किसी नए हमले की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। दूसरी तरफ ईरान भी लगातार चेतावनी दे रहा है कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह चुप नहीं बैठेगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता बंद होने वाला है या फिर कोई नया समझौता हो सकता है? Trump-Netanyahu Talk: फोन पर क्या हुई बातचीत? रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच शनिवार को फोन पर बातचीत हुई। यह बातचीत ऐसे समय हुई है, जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को लेकर अमेरिका और इजरायल की चिंताएं बढ़ी हुई हैं। बताया जा रहा है कि ट्रम्प ने इससे पहले व्हाइट हाउस में वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों के साथ बैठक भी की थी। इस बैठक में ईरान को लेकर आगे की रणनीति और संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा हुई। ट्रम्प बोले- ईरान के 1-2 ठिकाने अभी बाकी नेतन्याहू से बातचीत के बाद ट्रम्प ने ईरान को लेकर सख्त बयान दिया। उन्होंने कहा कि ईरान के एक या दो ठिकानों पर अभी कार्रवाई की जानी बाकी है। इस दौरान उन्होंने पिकैक्स माउंटेन (Pickaxe Mountain) का भी जिक्र किया। पिकैक्स माउंटेन को ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा एक संभावित भूमिगत ठिकाना माना जाता है। पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि यहां परमाणु गतिविधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण सुविधाएं मौजूद हो सकती हैं। ट्रम्प के बयान के बाद एक बार फिर यह चर्चा शुरू हो गई है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सीमित सैन्य कार्रवाई कर सकता है। 4 नवंबर को Iran पर Attack की रिपोर्ट से बढ़ी चिंता ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले को लेकर 4 नवंबर की तारीख चर्चा में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र के कुछ सहयोगी देशों को संभावित सैन्य कार्रवाई और उसके बाद पैदा होने वाली स्थिति के लिए सतर्क रहने को कहा है। रिपोर्ट्स में 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद कार्रवाई की संभावना जताई गई है। इसी वजह से 4 नवंबर की तारीख को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि अभी तक ट्रम्प प्रशासन ने हमले की तारीख या समय की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसलिए इसे फिलहाल संभावित घटनाक्रम के तौर पर ही देखा जा रहा है। ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी अमेरिका की ओर से संभावित हमले की खबरों के बीच ईरान ने भी अपना रुख साफ कर दिया है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि अगर अमेरिका या इजरायल की ओर से दोबारा हमला किया गया तो उसका जवाब दिया जाएगा। ईरान के अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि किसी नए सैन्य टकराव की स्थिति में क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। इससे खाड़ी देशों में भी चिंता बढ़ गई है। ईरान का परमाणु कार्यक्रम इस विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपनी परमाणु गतिविधियों को लेकर उसकी चिंताओं का समाधान करे, जबकि तेहरान अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़े अधिकारों पर जोर दे रहा है। Qatar के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ हमले की चर्चाएं चल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बातचीत के रास्ते भी खुले हुए हैं। कतर दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी संकेत दिया है कि ईरान के साथ बातचीत पूरी तरह बंद नहीं हुई है। अमेरिका ऐसा समझौता चाहता है, जिससे उसके सुरक्षा संबंधी मुद्दों का समाधान निकल सके। ईरान की ओर से भी बातचीत को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। हालांकि, दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अभी सहमति बनना बाकी है। Strait of Hormuz पर भी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर भी स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद अहम है। यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या आवाजाही में रुकावट आने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और सप्लाई पर असर पड़ सकता है। भारत जैसे देशों के लिए भी यह मामला महत्वपूर्ण है, क्योंकि तेल आयात और ऊर्जा कीमतों में बदलाव का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। क्या अमेरिका और ईरान के बीच फिर शुरू होगी जंग? फिलहाल पूरी दुनिया की नजर ट्रम्प के अगले कदम पर है। नेतन्याहू से बातचीत, ईरान के ठिकानों को लेकर दिया गया बयान और 4 नवंबर को संभावित हमले की रिपोर्ट ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। एक तरफ अमेरिका सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है, तो दूसरी तरफ कतर के जरिए कूटनीतिक बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं। ईरान ने भी साफ कर दिया है कि किसी हमले की स्थिति में वह जवाब देगा। अब देखना होगा कि अमेरिका बातचीत के जरिए कोई रास्ता निकालता है या फिर मध्य पूर्व में एक बार फिर सैन्य टकराव की स्थिति बनती है। फिलहाल 4 नवंबर को हमले की संभावना मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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