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Vaibhav सूर्यवंशी को टीम इंडिया की 3 नंबर जर्सी: आयरलैंड-इंग्लैंड दौरे पर रवाना, खुशी जताई

Vaibhav सूर्यवंशी को टीम इंडिया की 3 नंबर जर्सी: आयरलैंड-इंग्लैंड दौरे पर रवाना, खुशी जताई

भारतीय क्रिकेट में एक युवा खिलाड़ी के लिए बड़ा पल आया है। Vaibhav सूर्यवंशी को टीम इंडिया की नंबर 3 जर्सी सौंपी गई है, जिसे क्रिकेट में बेहद खास माना जाता है। खिलाड़ी ने इस मौके पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि इस भावना को शब्दों में बयां करना मुश्किल है। टीम में शामिल होकर वह अब आयरलैंड और इंग्लैंड के दौरे के लिए रवाना हो चुके हैं। यह दौरा उनके करियर के लिए एक अहम मौका माना जा रहा है, जहां उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित करने का अवसर मिलेगा। टीम मैनेजमेंट को भी उनसे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। युवा प्रतिभा को टीम इंडिया में जगह मिलना भारतीय क्रिकेट के भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
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लखनऊ अग्निकांड: 15 लोगों की मौत, बिल्डिंग ढहाने की तैयारी; यूपी में 48 कोचिंग सेंटर सील

Lucknow अग्निकांड: 15 लोगों की मौत, बिल्डिंग ढहाने की तैयारी; यूपी में 48 कोचिंग सेंटर सील

उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 15 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। जिस इमारत में आग लगी थी, उसे अब ढहाने की तैयारी की जा रही है क्योंकि वह पूरी तरह असुरक्षित हो चुकी है। इसी के साथ पूरे राज्य में कोचिंग सेंटरों की सुरक्षा जांच तेज कर दी गई है। शुरुआती कार्रवाई में यूपी के करीब 48 कोचिंग सेंटरों को सील कर दिया गया है, जहां सुरक्षा मानकों का पालन नहीं पाया गया। इस घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने मृतकों के परिजनों को 1 करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय पर सुरक्षा इंतजाम और निरीक्षण होता तो यह बड़ा हादसा टाला जा सकता था। फिलहाल प्रशासन मामले की जांच कर रहा है और जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं।
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Hockey pre league : भारत ने पाकिस्तान को 4-3 से हराया, रोमांचक मुकाबले में शानदार जीत

Hockey pro league : भारत ने पाकिस्तान को 4-3 से हराया, रोमांचक मुकाबले में शानदार जीत

Hockey pro league में भारत ने एक बार फिर अपने चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को रोमांचक मुकाबले में 4-3 से हराकर बड़ी जीत दर्ज की। यह मुकाबला बेहद कड़े संघर्ष वाला रहा, जिसमें दोनों टीमों ने आखिरी मिनट तक शानदार खेल दिखाया। भारत की ओर से अभिषेक, नीलकांत शर्मा, सुखजीत सिंह और राजिंदर ने एक-एक गोल दागकर टीम को जीत दिलाई। पूरे मैच में भारतीय खिलाड़ियों ने आक्रामक और संतुलित खेल का प्रदर्शन किया। इस जीत के साथ भारत का पाकिस्तान के खिलाफ दबदबा और मजबूत हो गया है। आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय टीम पिछले 10 सालों से पाकिस्तान से कोई भी मुकाबला नहीं हारी है, जो इस जीत को और खास बनाता है। मैच के दौरान दोनों टीमों के बीच तेज़ गति और आक्रामकता देखने को मिली, लेकिन भारत ने आखिरी क्षणों में बढ़त बनाए रखते हुए मुकाबला अपने नाम कर लिया। यह जीत भारतीय हॉकी के लिए मनोबल बढ़ाने वाली मानी जा रही है, खासकर बड़े टूर्नामेंट्स से पहले।
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ट्रम्प की धमकी से ईरान नाराज: अमेरिका से बातचीत रोकी, कहा- “दबाव में कोई वार्ता नहीं होगी”

Trump की धमकी से ईरान नाराज: अमेरिका से बातचीत रोकी, कहा- “दबाव में कोई वार्ता नहीं होगी”

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड Trump की कथित धमकी भरे बयान के बाद ईरान ने अमेरिका के साथ चल रही बातचीत को रोक दिया है। ईरान की ओर से साफ कहा गया है कि वह किसी भी तरह के दबाव या धमकी की स्थिति में बातचीत नहीं करेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में हुई कूटनीतिक मुलाकातों के दौरान ईरानी प्रतिनिधियों ने अमेरिकी अधिकारियों से हाथ मिलाने तक से इनकार कर दिया, जिससे तनाव और बढ़ गया। सूत्रों के अनुसार, ट्रम्प की सख्त बयानबाजी के बाद ईरान ने अपना रुख और कठोर कर लिया है और बातचीत की प्रक्रिया को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। दोनों देशों के बीच पहले से ही कई मुद्दों को लेकर मतभेद बने हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटनाक्रम से पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है, खासकर तब जब पहले से ही क्षेत्र में राजनीतिक और सुरक्षा स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। फिलहाल दोनों देशों की ओर से आगे की बातचीत को लेकर कोई नई तारीख तय नहीं की गई है।
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Indore में गैस पाइपलाइन ब्लास्ट: सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर समेत 4 लोग झुलसे, VIDEO वायरल

Indore में गैस पाइपलाइन ब्लास्ट: सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर समेत 4 लोग झुलसे, VIDEO वायरल

INDORE में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब गैस पाइपलाइन में अचानक जोरदार धमाका हो गया। इस हादसे में एक सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर समेत कुल 4 लोग झुलस गए। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसा उस समय हुआ जब नगर निगम की ओर से वाटर हार्वेस्टिंग का काम चल रहा था। इसी दौरान पाइपलाइन में ब्लास्ट हो गया और आसपास मौजूद लोग इसकी चपेट में आ गए। हादसे के समय कुछ लोग बाइक से गुजर रहे थे, जिन्होंने जान बचाने के लिए तुरंत कूदकर भागने की कोशिश की। घटना के बाद इलाके में दहशत फैल गई और लोग इधर-उधर भागते नजर आए। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार कुछ लोग गंभीर रूप से झुलसे हैं। फिलहाल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाया जा रहा है कि पाइपलाइन ब्लास्ट की असली वजह क्या थी—लापरवाही या तकनीकी खराबी।
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पॉलिटेक्निक कॉलेज, जहांगीराबाद क्षेत्र से हटाया गया कब्जा; नाले पर अतिक्रमण करने वालों को चेतावनी

Bhopal : पॉलिटेक्निक कॉलेज, जहांगीराबाद क्षेत्र से हटाया गया कब्जा; नाले पर अतिक्रमण करने वालों को चेतावनी

शहर में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। दिन में मेयर की बैठक के बाद ही शाम को नगर निगम की टीम ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी। इस अभियान के तहत पॉलिटेक्निक कॉलेज और जहांगीराबाद इलाके में अवैध कब्जों को हटाया गया। कार्रवाई के दौरान नाले के ऊपर किए गए अवैध निर्माण और कब्जों को भी हटाया गया। नगर निगम की टीम ने साफ कहा कि जल निकासी व्यवस्था को बाधित करने वाले किसी भी अतिक्रमण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों ने मौके पर मौजूद लोगों को सख्त चेतावनी दी कि अगर दोबारा नाले या सार्वजनिक जगहों पर कब्जा किया गया तो और भी बड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस अभियान से इलाके में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि अतिक्रमण की वजह से लंबे समय से जलभराव और यातायात की समस्या हो रही थी, जिससे अब राहत मिलने की उम्मीद है। नगर निगम ने साफ किया है कि आने वाले दिनों में भी यह अभियान लगातार जारी रहेगा ताकि शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाया जा सके।
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Oracle

Oracle Layoffs AI और Restructuring के बीच वायरल हुई 21,000 कर्मचारियों की छंटनी की खबर

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव के बीच दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों में बदलाव का दौर जारी है। इसी बीच टेक कंपनी Oracle को लेकर सोशल मीडिया पर एक खबर तेजी से वायरल हो रही है। दावा किया जा रहा है कि कंपनी ने 21,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है और आने वाले समय में छंटनी का यह सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है। हालांकि, जब इस दावे की पड़ताल की गई तो तस्वीर कुछ अलग नजर आई। आइए जानते हैं कि आखिर Oracle में क्या हो रहा है और कर्मचारियों के लिए इसका क्या मतलब है। क्या सच में Oracle ने 21,000 कर्मचारियों को निकाला? सोशल मीडिया पोस्ट और कुछ ऑनलाइन रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि Oracle ने एक साथ 21 हजार कर्मचारियों की छंटनी कर दी है। लेकिन अब तक कंपनी की ओर से इस आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। Oracle ने सार्वजनिक रूप से ऐसा कोई बयान जारी नहीं किया है, जिसमें 21,000 कर्मचारियों को निकालने की बात कही गई हो। इसलिए इस संख्या को फिलहाल पुष्टि की गई जानकारी नहीं माना जा सकता। फिर चर्चा क्यों हो रही है? दरअसल, Oracle पिछले कुछ समय से अपने बिजनेस मॉडल में बदलाव कर रही है। कंपनी का फोकस अब Cloud Services, Artificial Intelligence, Data Infrastructure और Enterprise Technology पर तेजी से बढ़ रहा है। इसी वजह से कई विभागों में संगठनात्मक बदलाव (Restructuring) किए जा रहे हैं। टेक इंडस्ट्री में यह एक सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है, जहां कंपनियां नई तकनीकों और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से अपने संसाधनों को व्यवस्थित करती हैं। AI की वजह से बढ़ी कर्मचारियों की चिंता AI के आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या मशीनें इंसानों की नौकरियां ले लेंगी। Oracle समेत कई बड़ी कंपनियां अब ऐसे AI टूल्स का इस्तेमाल कर रही हैं, जो पहले कर्मचारियों द्वारा किए जाने वाले कई काम तेजी से पूरा कर सकते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि AI केवल कुछ तरह के कामों को ऑटोमेट करेगा। इसके साथ ही AI, Machine Learning, Cloud Computing, Cyber Security और Data Analytics जैसे क्षेत्रों में नई नौकरियां भी पैदा होंगी। इसलिए केवल AI को ही हर छंटनी की वजह मानना सही नहीं होगा। Oracle का फोकस अब किस पर है? कंपनी लगातार अपने क्लाउड बिजनेस और AI इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा निवेश कर रही है। Oracle का उद्देश्य भविष्य की तकनीकों में अपनी स्थिति मजबूत करना है। यही कारण है कि कुछ पुराने विभागों में बदलाव किए जा रहे हैं, जबकि नई तकनीकों से जुड़े क्षेत्रों में निवेश बढ़ाया जा रहा है। क्या आगे भी हो सकती है Layoffs? विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में टेक सेक्टर में सीमित स्तर पर और छंटनी देखने को मिल सकती है। लेकिन इसके पीछे केवल AI नहीं, बल्कि लागत कम करना, बदलती बाजार स्थितियां, बिजनेस रणनीति और निवेश की प्राथमिकताएं भी अहम कारण हैं। इसलिए किसी भी कंपनी में होने वाली हर छंटनी को सीधे AI से जोड़ना पूरी तरह सही नहीं माना जा सकता। कर्मचारियों के लिए क्या है सीख? बदलते दौर में नई तकनीक सीखना सबसे बड़ा निवेश है। AI, Cloud Computing, Data Science और Cyber Security जैसी स्किल्स रखने वाले प्रोफेशनल्स की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में समय के साथ खुद को अपडेट रखना ही भविष्य में बेहतर करियर का सबसे मजबूत आधार बन सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ujjain Simhastha 2028: सिंहस्थ मेले के लिए बनेगा स्थायी कार्यालय, आज कैबिनेट लगा सकती है मुहर

Ujjain Simhastha 2028: सिंहस्थ मेले के लिए बनेगा स्थायी कार्यालय, आज कैबिनेट लगा सकती है मुहर

Ujjain। मध्य प्रदेश के धार्मिक शहर उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ मेले की तैयारियों को और बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य सरकार आज होने वाली कैबिनेट बैठक में सिंहस्थ मेला कार्यालय को स्थायी रूप देने के प्रस्ताव पर मुहर लगा सकती है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो उज्जैन में सिंहस्थ मेले के लिए एक स्थायी कार्यालय (Permanent Simhastha Office) बनाया जाएगा। इससे मेले की योजना, विकास कार्यों और व्यवस्थाओं की निगरानी पूरे साल नियमित रूप से हो सकेगी। तैयारियों में आएगी तेजी अब तक सिंहस्थ मेले की तैयारियों के लिए अस्थायी कार्यालय बनाए जाते थे। स्थायी कार्यालय बनने के बाद योजनाओं की निरंतर मॉनिटरिंग, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और विकास कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है। कैबिनेट बैठक में हो सकता है बड़ा फैसला सूत्रों के अनुसार, आज होने वाली मध्य प्रदेश कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल सकती है। सरकार का उद्देश्य आगामी सिंहस्थ मेले की तैयारियों को समय रहते व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना है। श्रद्धालुओं को मिलेगा बेहतर अनुभव स्थायी कार्यालय बनने से सिंहस्थ मेले से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर, यातायात, सुरक्षा, सफाई और अन्य सुविधाओं की योजना लंबे समय तक प्रभावी ढंग से बनाई जा सकेगी। इससे देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
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Monsoon 2026: 16 साल बाद इतना सुस्त मानसून, आने के बाद भी भारी बारिश के आसार कम

Monsoon 2026: 16 साल बाद इतना सुस्त मानसून, आने के बाद भी भारी बारिश के आसार कम

Monsoon 2026: देशभर में मानसून का इंतजार कर रहे लोगों के लिए यह मौसम कुछ अलग नजर आ रहा है। इस बार 16 साल बाद मानसून की रफ्तार सबसे धीमी बताई जा रही है। कई इलाकों में मानसून पहुंचने के बावजूद उम्मीद के मुताबिक बारिश नहीं हो रही है और फिलहाल भारी बारिश के संकेत भी कमजोर दिखाई दे रहे हैं। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून की धीमी गति का असर कई राज्यों में देखने को मिल रहा है। बारिश कम होने से गर्मी और उमस का असर अभी भी बना हुआ है। मानसून की रफ्तार क्यों हुई धीमी? विशेषज्ञों का कहना है कि मौसमीय परिस्थितियों में बदलाव और अनुकूल सिस्टम समय पर सक्रिय नहीं होने के कारण मानसून की गति प्रभावित हुई है। यही वजह है कि कई क्षेत्रों में मानसून पहुंचने के बाद भी अच्छी बारिश दर्ज नहीं हो पा रही है। कई राज्यों में बारिश का इंतजार देश के कई हिस्सों में लोग अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। किसानों की नजर भी मानसून पर टिकी हुई है, क्योंकि खरीफ फसलों की बुवाई काफी हद तक बारिश पर निर्भर करती है। हालांकि कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, लेकिन फिलहाल व्यापक और लगातार भारी बारिश की संभावना कम बताई जा रही है।
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खर्चों पर लगाम लगाने के लिए सरकार का नया आदेश: Delhi यात्रा पर अब अनुमति जरूरी

खर्चों पर लगाम लगाने के लिए सरकार का नया आदेश: Delhi यात्रा पर अब अनुमति जरूरी

Delhi : सरकार ने सरकारी खर्चों को नियंत्रित करने के लिए एक नया सख्त कदम उठाया है। नए निर्देशों के तहत अब दिल्ली यात्रा के लिए भी पहले से अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है। यह फैसला प्रशासनिक खर्चों में कटौती और वित्तीय अनुशासन बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है। दिल्ली यात्रा के लिए मंजूरी जरूरी नए नियमों के अनुसार, किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को दिल्ली या अन्य महत्वपूर्ण दौरों पर जाने से पहले उच्च स्तर की अनुमति लेनी होगी। बिना स्वीकृति के यात्रा करने पर कार्रवाई भी हो सकती है। खर्च में कटौती पर सरकार का फोकस सरकार का कहना है कि अनावश्यक यात्राओं और फिजूलखर्ची को रोकने के लिए यह कदम जरूरी है। सभी विभागों को अपने बजट का सही और सीमित उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। फूड ऑयल के कम उपयोग पर भी जोर इसके साथ ही सरकारी संस्थानों और कैंटीनों में फूड ऑयल के कम से कम उपयोग को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सुधार के साथ-साथ खर्च में भी कमी लाना बताया जा रहा है।
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Punjab Election 2027: हरमीत पठानमाजरा और चेतन जौड़ामाजरा ने AAP से दिया इस्तीफा

पंजाब की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के दो मौजूदा विधायकों ने इस्तीफा देकर अपनी राह अलग कर ली। सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा और समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने 1 नवंबर को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने का ऐलान किया। दोनों नेताओं के इस फैसले ने पंजाब में नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू कर दी हैं। दिलचस्प बात यह है कि AAP ने 31 अक्टूबर को ही पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए 40 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी। इसके अगले ही दिन दो विधायकों के इस्तीफे की खबर सामने आ गई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी के भीतर टिकट और संगठन में बदलाव को लेकर नाराजगी बढ़ रही है? AAP की Candidate List के बाद क्यों बढ़ी हलचल? आम आदमी पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। 31 अक्टूबर को जारी पहली उम्मीदवार सूची में 40 नाम शामिल किए गए। मुख्यमंत्री भगवंत मान को धूरी विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं, कई मौजूदा विधायकों को भी दोबारा चुनाव लड़ने का मौका मिला है। हालांकि, इस सूची में हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौड़ामाजरा का नाम नहीं था। इतना ही नहीं, पार्टी ने उनके विधानसभा क्षेत्रों में नए हलका इंचार्ज भी नियुक्त कर दिए थे। सनौर में रंजोध हदाना और समाना में पूर्व अकाली नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को जिम्मेदारी दी गई। इन फैसलों के बाद दोनों विधायकों की राजनीतिक भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे थे। Harmeet Singh Pathanmajra ने Kejriwal को भेजा इस्तीफा सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को भेजा। पठानमाजरा और पंजाब सरकार के बीच पिछले काफी समय से मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं। सितंबर 2025 में पंजाब में आई बाढ़ के दौरान उन्होंने राहत और बचाव कार्यों को लेकर सरकार की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए थे। इसके बाद पार्टी नेतृत्व के साथ उनके संबंधों में तनाव की चर्चा होने लगी थी। उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले ने भी उन्हें लगातार सुर्खियों में बनाए रखा। सितंबर 2025 में एक महिला की शिकायत पर उनके खिलाफ दुष्कर्म, धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी से संबंधित मामला दर्ज किया गया था। पठानमाजरा ने इन कार्रवाइयों को राजनीतिक प्रताड़ना बताते हुए आरोप लगाए थे। Chetan Singh Jouramajra ने भी छोड़ी पार्टी समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने भी AAP से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने फैसले की जानकारी दी। जौड़ामाजरा भगवंत मान सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं, लेकिन बाद में मंत्रिमंडल में फेरबदल के दौरान उन्हें पद से हटा दिया गया था। इसके बाद समाना विधानसभा क्षेत्र में उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं। पार्टी ने हाल ही में पूर्व अकाली नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को समाना का हलका इंचार्ज बनाया था। इसे भी जौड़ामाजरा की नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। इस्तीफे के बाद जौड़ामाजरा ने कहा कि अब उनका पार्टी में मन नहीं लग रहा है। उन्होंने पंजाब के मौजूदा हालात को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। क्या BJP में शामिल होंगे दोनों विधायक? दोनों विधायकों के AAP छोड़ने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर हो रही है। राजनीतिक गलियारों में अटकलें हैं कि दोनों नेता भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम सकते हैं। हालांकि, अभी तक BJP या दोनों विधायकों की ओर से पार्टी में शामिल होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल केवल राजनीतिक अटकल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। Punjab Election 2027 से पहले AAP के सामने चुनौती पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। AAP की पहली उम्मीदवार सूची के तुरंत बाद दो मौजूदा विधायकों का इस्तीफा पार्टी के लिए एक नई चुनौती बन गया है। दोनों विधायक पटियाला जिले की सनौर और समाना सीटों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में इन सीटों पर उम्मीदवारों का चयन और स्थानीय राजनीतिक समीकरण आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहेंगे। अब देखना होगा कि AAP इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में किसे जिम्मेदारी देती है और क्या दोनों पूर्व विधायक किसी दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं। फिलहाल पंजाब की राजनीति में 2027 चुनाव से पहले ही सियासी उठापटक शुरू हो गई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IND vs NZ 5th T20: न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से हराया, Team India ने 3-2 से जीती सीरीज

भारत और न्यूजीलैंड (IND vs NZ) के बीच पांच मैचों की T20 सीरीज का आखिरी मुकाबला रोमांचक रहा। हैमिल्टन के Seddon Park में खेले गए इस मैच में न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से हरा दिया। भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 191 रन बनाए थे, लेकिन Tim Seifert की शानदार पारी के सामने भारतीय गेंदबाज बेबस नजर आए। न्यूजीलैंड ने 18 ओवर में ही लक्ष्य हासिल कर लिया। हालांकि, इस हार से सीरीज का नतीजा नहीं बदला। टीम इंडिया ने शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर 3-0 की बढ़त बनाई थी। न्यूजीलैंड ने आखिरी दो मैच जीतकर वापसी जरूर की, लेकिन सीरीज भारत ने 3-2 से अपने नाम कर ली। ईशान किशन और श्रेयस अय्यर ने संभाली भारतीय पारी टॉस जीतकर न्यूजीलैंड ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। भारतीय टीम की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। अभिषेक शर्मा सिर्फ 1 रन और संजू सैमसन 4 रन बनाकर आउट हो गए। शुरुआती झटकों के बाद टीम को एक बड़ी साझेदारी की जरूरत थी। ऐसे समय में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर ने मोर्चा संभाला। दोनों ने तेजी से रन बनाते हुए न्यूजीलैंड के गेंदबाजों पर दबाव बनाया। ईशान किशन ने 32 गेंदों में 61 रन की शानदार पारी खेली, जबकि श्रेयस अय्यर ने सिर्फ 23 गेंदों में 50 रन बना दिए। दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए 93 रन की साझेदारी हुई। इस साझेदारी ने भारत को मैच में वापसी दिलाई। इसके बाद नमन धीर ने 33 रन और नीतीश कुमार रेड्डी ने 22 रन बनाकर टीम का स्कोर 191 तक पहुंचाया। न्यूजीलैंड की तरफ से Adam Milne ने सबसे ज्यादा 4 विकेट लिए। Nathan Smith और Blair Tickner को 2-2 सफलताएं मिलीं। Tim Seifert के 93 रन ने पलट दिया Match 192 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड की शुरुआत जरूर थोड़ी लड़खड़ाई। फिन एलन सिर्फ 2 रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन इसके बाद Tim Seifert ने भारतीय गेंदबाजों को कोई राहत नहीं दी। Seifert ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 50 गेंदों में 93 रन बनाए। उनकी पारी में 8 चौके और 6 छक्के शामिल रहे। वह शतक से महज 7 रन दूर रह गए, लेकिन तब तक न्यूजीलैंड जीत के काफी करीब पहुंच चुका था। उनका साथ Daryl Mitchell ने दिया। Mitchell ने 16 गेंदों में 29 रन बनाए। इसके बाद Glenn Phillips ने भी अपना दम दिखाया। उन्होंने 37 गेंदों में नाबाद 61 रन की पारी खेली। इन दोनों बल्लेबाजों की मदद से न्यूजीलैंड ने 18 ओवर में 3 विकेट खोकर 195 रन बना लिए और मुकाबला 7 विकेट से जीत लिया। भारतीय गेंदबाजों की नहीं चली, बल्लेबाजों की मेहनत गई बेकार भारत के लिए इस मुकाबले में सबसे बड़ी चुनौती न्यूजीलैंड की तेज रन गति रही। 191 रन बनाने के बाद टीम इंडिया को उम्मीद थी कि गेंदबाज मैच पर पकड़ बनाएंगे, लेकिन Tim Seifert और Glenn Phillips ने भारतीय गेंदबाजी को संभलने का मौका नहीं दिया। फिन एलन का विकेट जल्दी मिलने के बावजूद भारत लगातार विकेट नहीं निकाल सका। नतीजा यह रहा कि न्यूजीलैंड ने लक्ष्य को दो ओवर बाकी रहते हासिल कर लिया। 3-0 से आगे था भारत, फिर न्यूजीलैंड ने की वापसी इस T20 सीरीज की शुरुआत भारत के लिए काफी अच्छी रही थी। टीम इंडिया ने शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर 3-0 की बढ़त बना ली थी। ऐसा लग रहा था कि भारत सीरीज में क्लीन स्वीप कर सकता है। लेकिन चौथे मुकाबले में न्यूजीलैंड ने शानदार वापसी की। टीम ने बड़ा स्कोर खड़ा किया और भारत को 87 रन से हराया। इसके बाद पांचवें T20 में भी न्यूजीलैंड ने जीत दर्ज कर दी। लगातार दो जीत के बावजूद न्यूजीलैंड सीरीज अपने नाम नहीं कर सका। भारत ने शुरुआती बढ़त के दम पर पांच मैचों की सीरीज 3-2 से जीत ली। IND vs NZ 5th T20: मैच का पूरा Scorecard भारत – 191/8 (20 ओवर) न्यूजीलैंड – 195/3 (18 ओवर) मैच का नतीजा: न्यूजीलैंड ने 7 विकेट से जीत दर्ज की। सीरीज का नतीजा: भारत ने 3-2 से सीरीज जीती। सीरीज जीतकर भी आखिरी दो मैच हारा भारत टीम इंडिया के लिए यह सीरीज दो अलग-अलग तस्वीरें लेकर आई। शुरुआती तीन मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन आखिरी दो मैचों में न्यूजीलैंड ने अपनी रणनीति और बल्लेबाजी से मुकाबले का रुख बदल दिया। आखिरी मैच में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर की फिफ्टी के बावजूद भारत जीत हासिल नहीं कर पाया। वहीं Tim Seifert और Glenn Phillips की पारियों ने न्यूजीलैंड को शानदार जीत दिलाई। भारत के लिए राहत की बात यही रही कि शुरुआती तीन जीत के कारण T20 सीरीज की ट्रॉफी टीम इंडिया के पास ही रही। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
INDIA Bloc

Delhi Politics: INDIA Bloc की Rally के जवाब में BJP का मार्च, JP Nadda ने राहुल गांधी को घेरा

दिल्ली में 1 नवंबर को सियासी हलचल तेज रही। एक तरफ राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA Bloc के 19 विपक्षी दलों ने रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली की, तो दूसरी तरफ भाजपा ने 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर विरोध मार्च निकालकर कांग्रेस को घेरा। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी राजनीति में उन लोगों को भूल गई, जिन्होंने 1984 की हिंसा में अपनी जान गंवाई थी। दिल्ली में हुए इन दोनों प्रदर्शनों के केंद्र में अलग-अलग मुद्दे रहे। विपक्ष ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोला, जबकि भाजपा ने कांग्रेस को 1984 की हिंसा की याद दिलाते हुए पीड़ित परिवारों के लिए आवाज उठाई। INDIA Bloc की Rally में राहुल गांधी समेत 19 दलों के नेता शामिल रामलीला मैदान में आयोजित विपक्ष की रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और INDIA Bloc के कई अन्य नेता शामिल हुए। रैली का मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग की SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियां रहा। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं। इससे पात्र मतदाताओं के वोट देने के अधिकार पर असर पड़ सकता है। राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए और मतदाताओं के अधिकारों के साथ किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। BJP का जवाबी मार्च, सिख समुदाय और पीड़ित परिवारों ने लिया हिस्सा विपक्ष की रैली के बीच भाजपा ने भी दिल्ली में अपना विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी ने पश्चिमी दिल्ली में 1984 के सिख-विरोधी दंगों के पीड़ितों के समर्थन में मार्च निकाला। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा और मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा सहित कई नेता शामिल हुए। मार्च में सिख समुदाय के लोगों और 1984 की हिंसा से प्रभावित परिवारों ने भी हिस्सा लिया। भाजपा ने इस प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस से 1984 की हिंसा के लिए जवाबदेही तय करने और पीड़ित परिवारों से माफी मांगने की मांग की। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस ने इस संवेदनशील तारीख पर बड़ी राजनीतिक रैली आयोजित करके सिख समुदाय की भावनाओं का ध्यान नहीं रखा। JP Nadda का राहुल गांधी पर हमला, बोले- अपनी राजनीति में शहीदों को भूले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्ष की रैली को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर का दिन देश के इतिहास में बेहद दुखद है। 1984 में इसी दौरान सिख समुदाय के लोगों को हिंसा का सामना करना पड़ा था। नड्डा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अपनी राजनीतिक गतिविधियों में इतने व्यस्त हैं कि उन्हें 1984 की हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों और उनके परिवारों की पीड़ा याद नहीं रही। उन्होंने कहा कि देश उन घटनाओं को नहीं भूला है और सिख समुदाय के जख्म आज भी लोगों को याद हैं। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से इस मुद्दे पर जवाब देने की मांग की। राहुल गांधी ने BJP के कारोबार वाले आरोप पर दिया जवाब भाजपा ने विपक्ष की रैली को लेकर यह भी कहा कि इससे दिल्ली के बाजारों और छोटे कारोबारियों को नुकसान हो सकता है। दिवाली से पहले बाजारों में भीड़ और ट्रैफिक की समस्या बढ़ने की आशंका भी जताई गई। इस पर राहुल गांधी ने भाजपा के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि रैली में शामिल होने वाले लोगों से दिल्ली में खरीदारी करने की अपील की गई थी, ताकि स्थानीय व्यापारियों को फायदा मिले। राहुल गांधी ने कनॉट प्लेस में दुकानों के बंद होने का मुद्दा भी उठाया और सवाल किया कि व्यापारियों का कारोबार प्रभावित होने के लिए कौन जिम्मेदार है। खड़गे ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष का आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। खड़गे का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ियां हुई हैं और कई लोगों के नाम हटाए गए हैं। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बता रहा है। हालांकि, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में गड़बड़ी और राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। आयोग की ओर से मतदाता सूची के पुनरीक्षण को निर्धारित प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है। अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव ने भी उठाए सवाल विपक्ष की रैली में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से नाम हटने के मुद्दे को उठाते हुए चुनाव प्रक्रिया पर सवाल किए। वहीं, बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपने भाषण में वोट चोरी के आरोपों को लेकर सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता शशि थरूर समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर क्यों बढ़ा विवाद? 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा भड़क गई थी। 1 से 3 नवंबर के बीच दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और कई परिवारों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा। इस घटना को देश के इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में गिना जाता है। हिंसा के पीड़ित परिवारों के लिए न्याय और जवाबदेही का मुद्दा आज भी सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा है। भाजपा ने इसी घटना की बरसी को लेकर कांग्रेस की रैली पर सवाल उठाए हैं। वहीं, कांग्रेस और INDIA Bloc का कहना है कि उनकी रैली चुनावी प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए थी। Delhi Politics: एक दिन में दो प्रदर्शन, BJP और विपक्ष आमने-सामने दिल्ली में 1 नवंबर को हुए दोनों प्रदर्शनों ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। रामलीला मैदान में विपक्ष ने चुनाव आयोग...
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INDIA Bloc का बड़ा प्रदर्शन: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 19 पार्टियां एकजुट, खड़गे ने दी चेतावनी

दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर को विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक बड़ी रैली की। INDIA Bloc के बैनर तले हुई इस रैली में 19 विपक्षी पार्टियों के नेता एक मंच पर नजर आए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई बड़े नेताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। रैली का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला बयान ममता बनर्जी का रहा। उन्होंने पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी पार्टी बंगाल में हारी नहीं, बल्कि उसे हराया गया। वहीं, मल्लिकार्जुन खड़गे ने ज्ञानेश कुमार को लेकर कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर पीछे हटने वाला नहीं है। ममता बनर्जी ने बंगाल चुनाव को लेकर क्या कहा? रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती गई। ममता ने कहा कि बंगाल में उनकी पार्टी को हराया गया है। उन्होंने मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि लोकतंत्र में हर नागरिक का वोट महत्वपूर्ण है और किसी भी पात्र मतदाता को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। खड़गे का ज्ञानेश कुमार पर सीधा निशाना कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी मंच से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को इतनी आसानी से छोड़ने वाला नहीं है। खड़गे ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए विपक्ष को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी। विपक्षी दलों की मांग है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की समीक्षा हो और मतदाता सूची में हुए बदलावों की जानकारी सार्वजनिक की जाए। राहुल गांधी, प्रियंका और अखिलेश यादव समेत 19 पार्टियों की मौजूदगी दिल्ली की इस रैली में INDIA Bloc के कई प्रमुख नेता शामिल हुए। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, फारूक अब्दुल्ला, तेजस्वी यादव, अभिषेक बनर्जी और सुप्रिया सुले समेत कई नेताओं ने मंच साझा किया। सभी नेताओं ने अपने-अपने संबोधन में चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। SIR विवाद क्या है, जिस पर आमने-सामने हैं विपक्ष और चुनाव आयोग? इस पूरी राजनीतिक लड़ाई के केंद्र में Special Intensive Revision (SIR) है। यह चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची की गहन जांच और संशोधन की प्रक्रिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया में कई पात्र मतदाताओं के नाम भी प्रभावित हो सकते हैं। विपक्ष चाहता है कि नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची को सही और अपडेट रखने के लिए समय-समय पर समीक्षा जरूरी है। इस प्रक्रिया में डुप्लीकेट और अपात्र नामों की पहचान की जाती है। पात्र मतदाताओं को अपना नाम सूची में शामिल कराने का अवसर भी दिया जाता है। BJP ने भी निकाला मार्च, दिल्ली में बढ़ी राजनीतिक हलचल INDIA Bloc की रैली के बीच BJP ने भी 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के समर्थन में मार्च निकाला। इसको लेकर दोनों राजनीतिक पक्षों के बीच बयानबाजी भी देखने को मिली। दिल्ली में एक ही दिन दोनों पक्षों के कार्यक्रमों को देखते हुए सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए। रैली और मार्च के आसपास पुलिस बल की तैनाती की गई, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो। आगे क्या होगा? चुनाव आयोग पर विपक्ष का दबाव जारी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA Bloc की यह रैली चुनाव आयोग और SIR को लेकर चल रहे विवाद में एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम है। विपक्षी दलों ने संकेत दिए हैं कि वे मतदाता सूची में पारदर्शिता और चुनाव आयोग की जवाबदेही का मुद्दा आगे भी उठाते रहेंगे। अब देखना होगा कि विपक्ष की इन मांगों पर चुनाव आयोग क्या रुख अपनाता है और आने वाले दिनों में इस राजनीतिक टकराव की दिशा क्या रहती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump Iran Attack: नेतन्याहू से बात के बाद ट्रम्प का बड़ा बयान, 4 नवंबर को ईरान पर हमले की आशंका

मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव के बीच अमेरिकी Trump ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की है। इस बातचीत के बाद ट्रम्प के एक बयान ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। उन्होंने कहा कि ईरान के एक-दो ठिकानों पर कार्रवाई अभी बाकी है। इसी बीच मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका 4 नवंबर को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है। हालांकि, अभी तक अमेरिकी सरकार ने किसी नए हमले की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। दूसरी तरफ ईरान भी लगातार चेतावनी दे रहा है कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह चुप नहीं बैठेगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता बंद होने वाला है या फिर कोई नया समझौता हो सकता है? Trump-Netanyahu Talk: फोन पर क्या हुई बातचीत? रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच शनिवार को फोन पर बातचीत हुई। यह बातचीत ऐसे समय हुई है, जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को लेकर अमेरिका और इजरायल की चिंताएं बढ़ी हुई हैं। बताया जा रहा है कि ट्रम्प ने इससे पहले व्हाइट हाउस में वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों के साथ बैठक भी की थी। इस बैठक में ईरान को लेकर आगे की रणनीति और संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा हुई। ट्रम्प बोले- ईरान के 1-2 ठिकाने अभी बाकी नेतन्याहू से बातचीत के बाद ट्रम्प ने ईरान को लेकर सख्त बयान दिया। उन्होंने कहा कि ईरान के एक या दो ठिकानों पर अभी कार्रवाई की जानी बाकी है। इस दौरान उन्होंने पिकैक्स माउंटेन (Pickaxe Mountain) का भी जिक्र किया। पिकैक्स माउंटेन को ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा एक संभावित भूमिगत ठिकाना माना जाता है। पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि यहां परमाणु गतिविधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण सुविधाएं मौजूद हो सकती हैं। ट्रम्प के बयान के बाद एक बार फिर यह चर्चा शुरू हो गई है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सीमित सैन्य कार्रवाई कर सकता है। 4 नवंबर को Iran पर Attack की रिपोर्ट से बढ़ी चिंता ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले को लेकर 4 नवंबर की तारीख चर्चा में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र के कुछ सहयोगी देशों को संभावित सैन्य कार्रवाई और उसके बाद पैदा होने वाली स्थिति के लिए सतर्क रहने को कहा है। रिपोर्ट्स में 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद कार्रवाई की संभावना जताई गई है। इसी वजह से 4 नवंबर की तारीख को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि अभी तक ट्रम्प प्रशासन ने हमले की तारीख या समय की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसलिए इसे फिलहाल संभावित घटनाक्रम के तौर पर ही देखा जा रहा है। ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी अमेरिका की ओर से संभावित हमले की खबरों के बीच ईरान ने भी अपना रुख साफ कर दिया है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि अगर अमेरिका या इजरायल की ओर से दोबारा हमला किया गया तो उसका जवाब दिया जाएगा। ईरान के अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि किसी नए सैन्य टकराव की स्थिति में क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। इससे खाड़ी देशों में भी चिंता बढ़ गई है। ईरान का परमाणु कार्यक्रम इस विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपनी परमाणु गतिविधियों को लेकर उसकी चिंताओं का समाधान करे, जबकि तेहरान अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़े अधिकारों पर जोर दे रहा है। Qatar के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ हमले की चर्चाएं चल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बातचीत के रास्ते भी खुले हुए हैं। कतर दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी संकेत दिया है कि ईरान के साथ बातचीत पूरी तरह बंद नहीं हुई है। अमेरिका ऐसा समझौता चाहता है, जिससे उसके सुरक्षा संबंधी मुद्दों का समाधान निकल सके। ईरान की ओर से भी बातचीत को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। हालांकि, दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अभी सहमति बनना बाकी है। Strait of Hormuz पर भी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर भी स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद अहम है। यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या आवाजाही में रुकावट आने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और सप्लाई पर असर पड़ सकता है। भारत जैसे देशों के लिए भी यह मामला महत्वपूर्ण है, क्योंकि तेल आयात और ऊर्जा कीमतों में बदलाव का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। क्या अमेरिका और ईरान के बीच फिर शुरू होगी जंग? फिलहाल पूरी दुनिया की नजर ट्रम्प के अगले कदम पर है। नेतन्याहू से बातचीत, ईरान के ठिकानों को लेकर दिया गया बयान और 4 नवंबर को संभावित हमले की रिपोर्ट ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। एक तरफ अमेरिका सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है, तो दूसरी तरफ कतर के जरिए कूटनीतिक बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं। ईरान ने भी साफ कर दिया है कि किसी हमले की स्थिति में वह जवाब देगा। अब देखना होगा कि अमेरिका बातचीत के जरिए कोई रास्ता निकालता है या फिर मध्य पूर्व में एक बार फिर सैन्य टकराव की स्थिति बनती है। फिलहाल 4 नवंबर को हमले की संभावना मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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