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Freelancers Money Management: कभी ₹30 हजार तो कभी ₹1 लाख कमाई? अनिश्चित इनकम में ऐसे करें Saving और Investment

Freelancers Money Management: कभी ₹30 हजार तो कभी ₹1 लाख कमाई? अनिश्चित इनकम में ऐसे करें Saving और Investment

Freelancers Money Management: फ्रीलांसिंग और डिजिटल प्रोफेशन में काम करने वाले लोगों की आय अक्सर हर महीने अलग-अलग होती है। कभी कमाई ₹30 हजार होती है तो कभी ₹1 लाख या उससे ज्यादा। ऐसे में सही वित्तीय योजना बनाना बेहद जरूरी हो जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, फ्रीलांसर्स को सबसे पहले 6 से 12 महीने के खर्च के बराबर Emergency Fund बनाना चाहिए। इसके अलावा, पिछले कुछ महीनों की औसत आय के आधार पर बजट तैयार करना बेहतर रहता है। अच्छी कमाई वाले महीनों में अतिरिक्त राशि को खर्च करने के बजाय बचत और निवेश में लगाना चाहिए। SIP जैसे विकल्प नियमित निवेश की आदत बनाने में मदद करते हैं। साथ ही, टैक्स भुगतान के लिए भी हर कमाई का एक हिस्सा अलग रखना जरूरी है। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि अनिश्चित आय के बावजूद अनुशासित बचत, समझदारी से निवेश और सही बजटिंग के जरिए मजबूत आर्थिक भविष्य बनाया जा सकता है।
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Moji Riba

Moji Riba Arunachal Pradesh का अनकहा वीर नायक और भूला हुआ स्वतंत्रता सेनानी

मोजी रिबा (Moji Riba) अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) के इतिहास के उन वीर नेताओं में से एक हैं, जिनका नाम आज भी कई लोगों के लिए अज्ञात है। उन्होंने अपने साहस, नेतृत्व और अदम्य हिम्मत से ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ लड़ाई लड़ी और अपने लोगों की आज़ादी के लिए अनवरत संघर्ष किया। प्रारंभिक जीवन Moji Riba का जन्म अरुणाचल प्रदेश के लुहित जिले में हुआ था। बचपन से ही उनमें नेतृत्व और साहस के गुण दिखाई देते थे। स्थानीय समुदाय में उनका व्यक्तित्व अत्यंत सम्मानित था। उनके आसपास के लोग उन्हें साहसी, न्यायप्रिय और दूरदर्शी नेता के रूप में देखते थे। ब्रिटिश शासन के समय स्थानीय लोगों पर अत्याचार और अन्याय बढ़ते जा रहे थे। इन परिस्थितियों ने मोजी रिबा को अपने समुदाय को संगठित करने और उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया। ब्रिटिश राज के खिलाफ संघर्ष Moji Riba ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी (British East India Company) के खिलाफ कई रणनीतिक अभियानों का नेतृत्व किया। उन्होंने अपने साहस और बुद्धिमत्ता के कारण ब्रिटिश अधिकारियों को लगातार चकमा दिया। उनकी रणनीतियाँ केवल युद्ध कौशल तक सीमित नहीं थीं। मोजी रिबा ने स्थानीय लोगों में स्वतंत्रता की भावना जगाई और उन्हें ब्रिटिश दमन के खिलाफ एकजुट किया। उन्होंने यह सिद्ध किया कि नेतृत्व और वीरता का असली अर्थ केवल युद्ध में नहीं, बल्कि लोगों की सोच और सामूहिक शक्ति को वीरता और नेतृत्व Moji Riba की सबसे बड़ी ताकत उनका नेतृत्व और साहस था। उन्होंने न केवल हथियारों के माध्यम से, बल्कि अपनी सोच और संगठन क्षमता से लोगों को स्वतंत्रता की लड़ाई में सक्रिय किया। उनके नेतृत्व में स्थानीय समुदाय ने ब्रिटिश दमन के खिलाफ साहसिक कदम उठाए। उनकी कहानी यह भी दिखाती है कि स्वतंत्रता संग्राम में योगदान केवल बड़े नेताओं या शहरों तक सीमित नहीं था। छोटे-छोटे गांवों और पहाड़ी इलाकों के लोग भी अपने साहस, निष्ठा और दृढ़ निश्चय से स्वतंत्रता की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते थे।प्रेरित करने में है। आज Moji Riba की याद में अरुणाचल प्रदेश में स्मारक और कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। उनकी कहानी आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मोजी रिबा की वीरता और देशभक्ति को याद करना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमें यह सिखाती है कि स्वतंत्रता की लड़ाई में हर योगदान की कीमत है। मोजी रिबा की कहानी अरुणाचल प्रदेश और भारत के इतिहास में “अनकहा वीर नायक और भूला हुआ स्वतंत्रता सेनानी” के रूप में अमर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ashutosh Kuila

कम उम्र में अमर नाम Ashutosh Kuila की शहादत की कहानी

Ashutosh Kuila का परिचय भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में कई ऐसे युवा वीर हुए जिन्होंने अपनी कम उम्र में ही अद्भुत साहस और बलिदान का परिचय दिया। Ashutosh Kuila उन्हीं महान शहीदों में से एक थे, जिन्होंने मात्र 18 साल की उम्र में मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना जीवन न्यौछावर कर दिया। झारखंड (तत्कालीन बिहार) के इस युवा योद्धा की कहानी हमें याद दिलाती है कि सच्चा देशप्रेम उम्र का मोहताज नहीं होता। जन्म और प्रारंभिक जीवन स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका गिरफ्तारी और यातना 18 साल में शहादत Ashutosh Kuila की विरासत हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bishni Devi Shah

Bishni Devi Shah उत्तराखंड की First Woman Freedom Fighter और आज़ादी की वीरांगना

भारत की आज़ादी की लड़ाई में जहां महात्मा गांधी, भगत सिंह और रानी लक्ष्मीबाई जैसे बड़े नाम चर्चित रहे, वहीं कई ऐसे वीर-वीरांगनाएं भी थीं जिनका योगदान इतिहास के पन्नों में कम लिखा गया। Bishni Devi Shah इन्हीं में से एक हैं, जिन्हें Uttarakhand की पहली महिला स्वतंत्रता सेनानी (First Woman Freedom Fighter) के रूप में जाना जाता है। उन्होंने अपने साहस, त्याग और अदम्य इच्छाशक्ति से पहाड़ के कोने-कोने में आज़ादी की अलख जगाई। प्रारंभिक जीवन और संघर्ष की शुरुआत Bishni Devi Shah का जन्म उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में हुआ। बचपन से ही उनमें न्याय और देशभक्ति की भावना थी। पहाड़ी गांव में पली-बढ़ी होने के बावजूद उन्होंने समाज की रूढ़ियों को चुनौती दी और ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष का संकल्प लिया। स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका महिलाओं को आंदोलन में शामिल करने की प्रेरणा उस दौर में महिलाओं की स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी बेहद कम थी, लेकिन Bishni Devi Shah ने गांव-गांव जाकर उन्हें आंदोलन में जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने यह साबित किया कि आज़ादी की लड़ाई में महिला और पुरुष का योगदान समान है। त्याग और बलिदान विरासत और सम्मान आज Bishni Devi Shah को Uttarakhand की First Woman Freedom Fighter के रूप में सम्मानित किया जाता है। हालांकि उनका नाम मुख्यधारा के इतिहास में कम दर्ज है, लेकिन स्थानीय इतिहासकार और समाजसेवी उनके योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रयास कर रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tara Rani Srivastava

Tara Rani Srivastava तिरंगे के लिए गोली भी झेली भारतीय स्वतंत्रता सेनानी की अमर गाथा

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में कई ऐसे वीरांगनाएँ और योद्धा हुए हैं, जिनका नाम इतिहास की किताबों में कम लिखा गया, पर उनकी बहादुरी और त्याग अमर है। ऐसी ही एक शूरवीर नारी थीं Tara Rani Srivastava, जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए तिरंगे के सम्मान में गोली तक झेली। आइए जानते हैं उनके जीवन और संघर्ष की कहानी। Tara Rani Srivastava कौन थीं? Tara Rani Srivastava एक स्वतंत्रता सेनानी थीं, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ देश की आज़ादी के लिए बहादुरी से लड़ाई लड़ी। वह एक साधारण परिवार से थीं, लेकिन देशभक्ति उनके रक्त में बसी थी। उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर आज़ादी की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाई। तिरंगे के लिए उनकी बहादुरी Tara Rani Srivastava की बहादुरी का सबसे बड़ा उदाहरण तब सामने आया जब वे ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ तिरंगा झंडा फहराने निकलीं। उस समय ब्रिटिश पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अपने देश के तिरंगे की शान को बचाने के लिए उन्होंने गोली झेली, फिर भी झंडा नहीं छोड़ा। उनकी इस वीरता ने हर भारतीय के दिल में देशभक्ति की आग जगा दी। स्वतंत्रता संग्राम में योगदान Tara Rani Srivastava की विरासत तारा रानी की कहानी आज भी हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी बहादुरी और त्याग को याद करते हुए हमें अपने देश के लिए कुछ करने की प्रेरणा मिलती है। आज हम स्वतंत्रता का आनंद उनके जैसे वीरों के कारण ही ले पा रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gangu Baba

Gangu Baba की वीर गाथा: 1857 के क्रांतिकारी गंगादिन मेहतर का इतिहास

1857 की क्रांति में कानपुर के गंगादिन मेहतर उर्फ Gangu Baba ने अदम्य साहस दिखा कर लगभग 200 अंग्रेज सैनिकों को अकेले ही हराया। उनकी प्रेरक और भावनात्मक कहानी, जो आज भी हमें देशभक्ति का संदेश देती है। परिचय: निर्धन से वीर योद्धा तक गंगादिन मेहतर, जिन्हें प्यार से Gangu Baba कहा जाता था, का जन्म कानपुर के समीप वाल्मीकि (भंगी) समुदाय में हुआ था। समाज में व्याप्त ठगी और छुआछूत के कारण उनका परिवार ‘अकबरपुरा’ से ‘चुन्नीगंज’ आकर बस गया। बचपन से ही पहलवानी का शौक रहा और एक मुस्लिम गुरु से कुश्ती की कला सीखी। सामाजिक विषमताओं ने उन्हें कमजोर नहीं किया, बल्कि उन्हें दृढ़ता और आत्म-सम्मान सिखाया। क्रांतिकारी बनने की शुरुआत और Nana Saheb के साथ संबंध कहा जाता है कि एक बार वे जंगल से एक मृत बाघ कंधे पर लेकर लौटा करते थे, तभी नाना साहेब पेशवा ने उनका यह अद्भुत रण-वीर्य देखा। प्रभावित होकर उन्होंने गंगू बाबा को अपनी सेना में शामिल कर लिया। वहां वे सिर्फ नगारित नहीं बल्कि सूबेदार का पद प्राप्त कर गए—कुशल और वीर सैनिक के रूप में उनका नाम फैल गया। 1857 की क्रांति में अद्वितीय वीरता क्रांतिकारी संघर्ष में, गंगू बाबा ने अदम्य साहस का परिचय दिया। उनके हाथों तकरीबन 200 ब्रिटिश सैनिकों की मौत हुई, एक-एक करके उन्होंने अंग्रेजों में भय का संचार कर दिया। उनकी बहादुरी ने इलाके में विद्रोहियों का हौसला कई गुना बढ़ा दिया। अंतिम संघर्ष और बलिदान अंग्रेजों ने उन्हें पकड़ने के लिए आदेश भेजा और अंततः उसे बंदी बना लिया। निर्मम तरीके से—घोड़े से लटकाकर पूरे शहर में घसीटते हुए—उनका बदनाम किया गया। 8 सितंबर 1859 को कानपुर के चुन्नीगंज क्षेत्र में एक नीम के पेड़ से फांसी पर चढ़ा दिया गया। अपनी अंतिम सांस में उन्होंने कहा:“भारत की माटी में हमारे पूर्वजों का खून व कुर्बानी की गंध है, एक दिन यह मुल्क आज़ाद होगा।”घटना ने इतिहास में शहीद-मार्गदर्शक को अमर बना दिया। इतिहास में क्यों रहा कहीं छुपा? गंगू बाबा जैसे वीर योद्धा अक्सर मुख्यधारा के इतिहास से अनदेखे रह जाते हैं। लेकिन लोक-कथाओं, स्मरणशक्ति और मौखिक परंपराओं में वे आज भी जीवित हैं। उनके वंशज कानपुर में आज भी रहते हैं, और उनकी कहानी बुजुर्गों की जुबानी पीढ़ी दर पीढ़ी चल रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Kerala school rivalry news in Hindi

Kerala school rivalry news: 50 साल पुरानी रंजिश में दो बुजुर्गों ने पूर्व सहपाठी पर किया हमला

केरल के कासरगोड में 50 साल पुराना स्कूल विवाद बना हिंसा का कारण Kerala school rivalry news – केरल के कासरगोड जिले के मलोम कस्बे से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां स्कूल टाइम की 50 साल पुरानी रंजिश ने दो बुजुर्गों को हिंसा के रास्ते पर धकेल दिया। बालाल ग्राम पंचायत स्थित नटक्कल्लू एडेड स्कूल में साथ पढ़ने वाले तीन पूर्व सहपाठी—वी.जे. बाबू (62), मालोथु बालकृष्णन, और मैथ्यू वलियप्लक्कल—के बीच वर्षों पुराना विवाद फिर से उभर आया। होटल के बाहर हुआ हमला, टूटा दोस्ती का दिखावा घटना सोमवार को जनग्राम होटल के बाहर हुई, जब तीनों की आकस्मिक मुलाकात हो गई। बातचीत के दौरान पुरानी रंजिश फिर से भड़क उठी। रिपोर्ट के मुताबिक, बालकृष्णन ने बाबू को पकड़ लिया और मैथ्यू ने एक बड़ा पत्थर उठाकर बाबू के चेहरे और शरीर पर हमला कर दिया। इस हमले में बाबू के दो दांत टूट गए और उन्हें गंभीर हालत में परियारम स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज, कन्नूर में भर्ती कराया गया। गैर-जमानती धाराओं में केस दर्ज, हो सकती है जेल वेल्लरिकुंड पुलिस थाने के निरीक्षक टी.के. मुकुंदन के अनुसार, अगर मेडिकल रिपोर्ट में यह साबित हुआ कि बाबू के दांत हमले के कारण टूटे हैं, तो यह अपराध गैर-जमानती हो जाएगा। हमले के आरोप में बालकृष्णन और मैथ्यू पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्नलिखित धाराओं में केस दर्ज किया गया है: ₹1.5 लाख में सुलह की पेशकश, शराब की भी संभावना पुलिस को मिली जानकारी के अनुसार, घायल वी.जे. बाबू ने इस मामले को कोर्ट से बाहर सुलझाने की इच्छा जताई है, लेकिन बदले में ₹1.5 लाख की मांग की है। साथ ही उन्होंने यह भी बयान दिया कि हमले के समय हमलावरों द्वारा शराब का सेवन किया गया हो सकता है। 50 साल पुरानी दुश्मनी का मनोवैज्ञानिक पहलू Kerala school rivalry news- विशेषज्ञों के अनुसार, स्कूल में हुए छोटे-छोटे बुलींग या टकराव का असर लंबे समय तक मानसिक रूप से बना रह सकता है, खासकर अगर उसे सुलझाया न जाए। यह घटना बताती है कि बचपन की घटनाएं, अगर मन में बैठ जाएं, तो बुजुर्ग अवस्था में भी हिंसा का रूप ले सकती हैं।
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Ramdev

शरबत जिहाद” टिप्पणी पर बवाल: Ramdev को Delhi High Court की फटकार, Rooh Afza पर दिए बयान से साम्प्रदायिक तनाव बढ़ने की आशंका

योग गुरु बाबा Ramdev एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने रूह अफ़ज़ा को लेकर उनकी विवादित टिप्पणी पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यह बयान “अंतरात्मा को झकझोर देता है” और समाज में सांप्रदायिक तनाव पैदा कर सकता है। Ramdev का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने दावा किया कि रूह अफ़ज़ा की बिक्री से मस्जिदें बनाई जा रही हैं और इसे उन्होंने “शरबत जिहाद” बताया। कोर्ट ने इस बयान को “गैरजिम्मेदाराना” और “गंभीर रूप से भड़काऊ” बताया। कोर्ट का कड़ा संदेश: जिम्मेदार लोग न फैलाएं नफरत हाई कोर्ट ने कहा कि बाबा रामदेव जैसे प्रभावशाली व्यक्तियों को बयान देने से पहले सामाजिक जिम्मेदारी समझनी चाहिए। इस तरह की टिप्पणियां भारत जैसे विविधता से भरे देश में सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकती हैं। पहले भी सुप्रीम कोर्ट से मिल चुकी है चेतावनी यह कोई पहला मामला नहीं है जब रामदेव या पतंजलि कोर्ट के निशाने पर आए हों। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि द्वारा भ्रामक विज्ञापन चलाने और एलोपैथी को बदनाम करने पर कड़ी आपत्ति जताई थी। Ramdev और उनके सहयोगियों को अदालत की अवमानना मामले में बिना शर्त माफी मांगनी पड़ी थी। कोविड को लेकर भ्रामक दावे पर भी फटकार दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अन्य मामले में पतंजलि और रामदेव को आदेश दिया था कि वे एलोपैथी को कोविड-19 मौतों के लिए जिम्मेदार ठहराने वाले अपने दावे हटाएं। अदालत ने कहा था कि इस तरह की गलत जानकारी सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है।
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भाजपा का समर्थ भारत निर्माण में अतुलनीय योगदान

सत्येंद्र जैन ,स्तंभकार विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी भाजपा ने स्थापना के 46 वे वर्ष में प्रवेश किया है।भाजपा के संस्थापक अटल बिहारी वाजपेयी,लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी,कुशा भाऊ ठाकरे, राजमाता विजयाराजे सिंधिया,सुन्दरलाल पटवा,प्यारेलाल खण्डेलवाल आदि नेताओं ने 1980 में पार्टी स्थापना के समय यह कल्पना भी नहीं की होगी कि इतने कम समय में ही भाजपा विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी का गौरव अर्जित कर लेगी।1984 में भाजपा की यात्रा मात्र 2 लोकसभा सीट से प्रारम्भ होकर वर्ष 2019 में 303 सीट तक पहुँची है।वर्तमान में भाजपा के 240 सांसद हैं। भाजपा चार दशकों की यात्रा में ही भारतीय राजनीति में शून्य से चलकर शिखर पर आरोहित हो गई है।विश्व की सर्वोच्च राजनीतिक पार्टी बन गई है। वर्तमान में भाजपा के लगभग 13 करोड़ से अधिक सदस्य हैं। मध्यप्रदेश भाजपा ने पौने दो करोड़ सदस्य बना कर देश में अग्रणी भूमिका निभा कर कीर्तिमान स्थापित किया है।भाजपा का शिखर पर आरोहण सामान्य बात नहीं है ।यह अतुलनीय विलक्षण उपलब्धि है। यह उपलब्धि भाजपा की भारतीय मूल्यों ,पंच निष्ठाओं एवं एकात्म मानववाद के सिद्धांत को आत्मरूप आधार मानकर ही हुई है।भाजपा के संविधान में भी एकात्म मानववाद और पंच निष्ठाओं को आधारभूत तत्व माना गया है ।जो भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रीय मूल्यों को संवर्धित करते हैं।विचार परिवार राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से राष्ट्र निर्माण के मंत्र,दिशा निर्देश सतत प्राप्त होने से उत्कृष्टता के पथ पर अग्रसर है।भाजपा ने अनेक संकल्प भारतीय जनसंघ की स्थापना के समय से ही अपने संकल्प पत्र, घोषणापत्र में सम्मिलित किए हैं।जम्मू कश्मीर में धारा 370 को निष्प्रभावी करना,अयोध्या में दिव्य,भव्य,नव्य राम मंदिर का निर्माण करना,समान नागरिक संहिता को लागू करना जैसे संकल्पों को सदैव घोषणापत्र में सम्मिलित किया है।उत्तराखंड में यूनीफॉर्म सिविल कोड लागू कर दिया गया है।अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति,पिछड़े वर्ग के साथ सामान्य निर्धन वर्ग को भी अब आरक्षण मिल रहा है।नारी शक्ति वंदन अधिनियम द्वारा देश की महिलाओं को राजनैतिक क्षेत्र लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण कार्य भाजपा ने किया है।भाजपा ने गौरवशाली,वैभवशाली,समृद्धशाली, शक्तिशाली,समर्थ भारत निर्माण के रोड मेप को जनता के समक्ष प्रस्तुत किया है।शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, उद्योग, रक्षा,विनिर्माण आदि क्षेत्रों में स्व तत्व की प्रधानता को महत्व दिया है। मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि आगामी शताब्दी में भी भाजपा का भविष्य उज्जवल रहेगा। भाजपा की सतत उन्नति की यह यात्रा महा विजय की यात्रा सिद्ध होगी। वर्तमान भाजपा की सफलता चार पीढ़ियों के सतत,अथक परिश्रम से ही संभव हुई है।भाजपा को विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बनाने का कीर्तिमान केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री, तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को जाता है ।अमित शाह ने राष्ट्र व्यापी सदस्यता अभियान चला कर,चीन की कम्युनिस्ट पार्टी को सदस्य संख्या में पछाड़ दिया। 11 करोड़ सदस्य बनाकर संसार की सर्वोच्च पार्टी बनाया। राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के नेतृत्व में सदस्यता अभियान को गति दी गई है।आज विश्व के 60 से अधिक देशों के प्रतिनिधि भारतीय जनता पार्टी के संगठन विस्तार की सफलता का अध्ययन करने के लिए भारत आ चुके हैं।राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा से भेंट कर चुके हैं।मध्य प्रदेश में प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा से एवं अन्य राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष से भेंट कर चुके हैं।भाजपा की अप्रतिम सफलता से कार्यकर्ताओं, प्रतिनिधियों को गौरव बोध होता है।उनके दल की संरचना को समझने के लिए विश्व के देशों से प्रतिनिधि आ रहे हैं हैं ।दूसरे शब्दों में कहें कि भाजपा की संगठन रचना,भागीरथी परिश्रम की विपुल सफ़लता से हमारे राष्ट्र भारतवर्ष का विश्व में सम्मान बढ़ रहा है।यह हम सभी 140 करोड़ भारतीयों के लिए स्वाभिमान का विषय है। वर्तमान में राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने विश्व के 20 से अधिक देश जैसे अमेरिका,ऑस्ट्रेलिया जापान,जर्मनी,फ्रांस,ब्रिटेन आदि देशों के राजनीतिक दलों को भारतीय लोकतंत्र के उत्सव लोकसभा चुनाव 2024 को निकटता से देखने के लिए निमंत्रित भी किया था।यह अनूठी एवं सराहनीय पहल है। स्वतंत्रता के चौसठ वर्षों के बाद भाजपा की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की पूर्ण बहुमत की सरकार लगातार तीन बार से केंद्र में बनी है ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुयोग्य नेतृत्व में भारत का,भारत के लोगों का सर्वांगीण उत्थान हो रहा है।देश के 21 राज्यों – केंद्र शासित प्रदेशों में भाजपा एवं सहयोगी दलों की सरकारें हैं।देश भर में एक हजार तीन सौ से अधिक कार्यालयों का निर्माण हो रहा है।पाँच सौ से अधिक कार्यालय निर्मित होकर सुचारु रूप में प्रारंभ हो चुके हैं। मध्यप्रदेश में भाजपा की संरचना पर प्रकाश डालेंगे तो पाते हैं कि वर्तमान में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा एवं संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा की त्रिदेव रूपी त्रिवेणी, ट्रिनिटी के चमत्कारी नेतृत्व में प्रदेश भाजपा इकाई नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।लोकसभा चुनाव में सभी 29 सीट जीत कर कांग्रेस को शून्य पर ला दिया है।वोट शेयर भी लगभग 59 प्रतिशत अर्जित कर कीर्तिमान रचा है।वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में पाँचवीं बार भाजपा की सरकार बनी है।163 विधायक विजयी हुए हैं। वोट शेयर भी बढ़कर लगभग 49 प्रतिशत हुआ है।प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा पुनः शुभंकर सिद्ध हुए हैं ।लगभग 64000 से अधिक बूथ्स का डिजिटलाइजेशन एवं लाख कार्यकर्ताओं का कैलाश पर्वत बूथ स्तर पर अपना कार्य कर रहा है।बूथ विजय संकल्प को सार्थक कर रहा है।अनेक अवसर पर विष्णु दत्त शर्मा के भागीरथी परिश्रम, बूथ डिजिटलाइजेशन के कार्य की भूरी-भूरी प्रशंसा स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने मुक्त कंठ से की है।देश के समस्त राज्य की इकाइयों को मध्यप्रदेश के संगठन से सीखने का आह्वान किया गया है।सदस्यता अभियान के संगठन महापर्व में मध्य प्रदेश का भाजपा संगठन अग्रणी है।विगत चुनाव में अभूतपूर्व सफलता भाजपा के संगठन कौशल,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार और मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव की सरकार के द्वारा चलाई जा रही सैकड़ों योजनाओं के धरातलीय क्रियान्वयन के परिणाम स्वरुप ही संभव हो पायी है।भविष्य के गौरवशाली,वैभवशाली,समृद्धशाली, शक्तिशाली,समर्थ भारत निर्माण में भाजपा का अतुलनीय योगदान है।
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जोजरी नदी प्रदूषण मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, राजस्थान सरकार से मांगा जवाब

राजस्थान की जोजरी नदी में औद्योगिक प्रदूषण और जल स्रोतों की बिगड़ती स्थिति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार से पर्यावरणीय नुकसान पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा है। साथ ही मुख्य सचिव को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराते हुए अगली सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। प्रदूषित पानी से वन्यजीवों पर भी असर सुप्रीम कोर्ट में पेश हाई लेवल इको-सिस्टम ओवरसाइट कमेटी की रिपोर्ट में बताया गया कि जोधपुर के तनावड़ा स्थित एक तालाब का पानी गुलाबी हो गया है और वह मानव व पशुओं के उपयोग के लिए अनुपयुक्त है। रिपोर्ट के मुताबिक यदि यह स्थिति बनी रही तो भूजल, कृषि भूमि, वन्यजीव और जनस्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। कमेटी ने जोधपुर की मेलबा, धवा, झंवर और लूणी क्षेत्र में प्रदूषण के कारण चिंकारा, काला हिरण और नीलगाय जैसे वन्यजीवों की संख्या प्रभावित होने की बात भी कही है। वन क्षेत्र विकसित करने की सिफारिश कमेटी ने मेलबा और मोडाथली की कुछ भूमि वन विभाग को सौंपकर उसे वन और चारागाह के रूप में विकसित करने की सिफारिश की है। सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में राज्य सरकार को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। औद्योगिक अपशिष्ट के निस्तारण की बनेगी योजना कोर्ट ने सांगारिया स्थित कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) में जमा औद्योगिक अपशिष्टयुक्त पानी के सुरक्षित उपचार और वैज्ञानिक निस्तारण के लिए राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को तकनीकी कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया है। यह पूरी प्रक्रिया हाई लेवल कमेटी की निगरानी में होगी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल बंद औद्योगिक इकाइयों को दोबारा शुरू करने के लिए नहीं किया जा सकेगा। बिना ट्रीटमेंट के अपशिष्ट छोड़ने पर भी मांगा जवाब अदालत ने राज्य सरकार से यह भी पूछा है कि बिना उपचारित औद्योगिक अपशिष्ट जल स्रोतों में छोड़ने वाले मामलों में गंभीर आपराधिक धाराएं क्यों नहीं लगाई गईं। इस संबंध में भी विस्तृत जवाब मांगा गया है। 2025 में लिया था स्वतः संज्ञान सुप्रीम कोर्ट ने 16 सितंबर 2025 को इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया था। उस समय जोधपुर, पाली और बालोतरा क्षेत्र की नदियों में औद्योगिक कचरे और सीवरेज से बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताई गई थी। कोर्ट ने माना था कि लंबे समय से प्रशासनिक लापरवाही के कारण करीब 20 लाख लोगों, पशुधन और पर्यावरण पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है। मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी।

गुना में खिलौना व्यापारी के बेटे का 12 घंटे में रेस्क्यू, अपहरण के दो आरोपी गिरफ्तार

मध्य प्रदेश के गुना में खिलौना व्यापारी के बेटे के अपहरण के मामले में कोतवाली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महज 12 घंटे के भीतर युवक को सकुशल मुक्त करा लिया। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर वारदात में इस्तेमाल की गई अर्टिगा कार भी जब्त कर ली है। उधारी के बहाने बुलाकर किया अपहरण पुलिस के अनुसार महालक्ष्मी नगर निवासी वीर सिंह रजक ने 21 जुलाई को कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि उनका 24 वर्षीय बेटा नीतेश रजक खिलौनों का कारोबार करता है और राजस्थान के धौलपुर स्थित एक फैक्ट्री से माल मंगाता था। इसी सिलसिले में उसका धौलपुर निवासी शिवम शर्मा से पैसों का लेनदेन था। आरोप है कि 20 जुलाई की रात शिवम शर्मा ने उधारी का हिसाब चुकाने के बहाने नीतेश को जयस्तंभ चौराहे पर बुलाया। वहां शिवम और उसके साथी ने उसे जबरन कार में बैठाकर अपहरण कर लिया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने बीएनएस की धारा 140(3) के तहत मामला दर्ज किया। एसपी के निर्देश पर बनी विशेष टीम मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी हितिका वासल ने तत्काल विशेष टीम का गठन किया। कोतवाली थाना प्रभारी राजकुमार शर्मा के नेतृत्व में पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर तंत्र की मदद से तलाश शुरू की। सटीक सूचना मिलने पर पुलिस ने 21 जुलाई की रात ही कार्रवाई कर नीतेश रजक को सकुशल बरामद कर लिया। दो आरोपी गिरफ्तार, कार जब्त पुलिस ने मौके से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान धौलपुर (राजस्थान) निवासी शिवम शर्मा (28) और गंजबासौदा (विदिशा) निवासी यशवंत सिंह दांगी (35) के रूप में हुई है। आरोपियों के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल की गई अर्टिगा कार (एमपी-07-सीजे-6951) भी जब्त कर ली गई है। पुलिस मामले में आगे की पूछताछ कर रही है। इस कार्रवाई में थाना प्रभारी राजकुमार शर्मा, एएसआई हरिचरण मीना, प्रधान आरक्षक दिलीप सेन तथा आरक्षक अजय सिकरवार और हाकिम सिंह की अहम भूमिका रही।

डाक-पार्सल कंटेनर से 3.83 क्विंटल डोडा-चूरा बरामद, 200 रुपए प्रति किलो के लालच में ड्राइवर बना तस्कर

राजस्थान में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए डाक-पार्सल ले जा रहे एक कंटेनर से 3 क्विंटल 83 किलो डोडा-चूरा बरामद किया है। पुलिस ने कंटेनर चालक को गिरफ्तार कर लिया है। शुरुआती जांच में सामने आया कि आरोपी अतिरिक्त कमाई के लालच में पिछले कई महीनों से मादक पदार्थों की तस्करी कर रहा था। पुलिस को देखकर भागा, पीछा कर दबोचा आईजीपी विकास कुमार के अनुसार ANTF को सूचना मिली थी कि उदयपुर से भीलवाड़ा जा रहे एक डाक-पार्सल कंटेनर में मादक पदार्थ छिपाकर ले जाया जा रहा है। सूचना के आधार पर नाकाबंदी की गई। पुलिस ने कंटेनर को रोकने का प्रयास किया, लेकिन चालक वाहन लेकर भाग निकला। पीछा कर सदर थाना क्षेत्र में कंटेनर को रोक लिया गया। तलाशी के दौरान कंटेनर से 3.83 क्विंटल डोडा-चूरा बरामद हुआ। इसके बाद कंटेनर जब्त कर चालक लाल शंकर (29) को गिरफ्तार कर लिया गया। मजदूरी से ड्राइवर और फिर तस्कर बना गिरफ्तार आरोपी डूंगरपुर जिले के बिछीवाड़ा थाना क्षेत्र का रहने वाला है। उसने तीसरी कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। पहले मजदूरी की, फिर ट्रकों में खलासी का काम किया और बाद में ड्राइविंग सीखकर कंटेनर चालक बन गया। दिल्ली की एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में नौकरी के दौरान उसकी पहचान मादक पदार्थ तस्करों से हुई। पुलिस के मुताबिक, पिछले 7-8 महीनों से वह अहमदाबाद, दिल्ली और अन्य राज्यों के बीच कंटेनर चलाते हुए तस्करी के नेटवर्क का हिस्सा बन गया। प्रति किलो 200 रुपए के लालच में करता था तस्करी जांच में सामने आया कि एक तस्कर ने आरोपी को कंटेनर में डोडा-चूरा छिपाकर तय स्थान तक पहुंचाने के बदले प्रति किलो 200 रुपए अतिरिक्त देने का लालच दिया था। शुरुआत में उसने छोटी खेप पहुंचाई, लेकिन भरोसा बनने के बाद बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ भी उसी के जरिए भेजे जाने लगे। डाक-पार्सल कंटेनर इसलिए चुना पुलिस का कहना है कि तस्करों ने डाक-पार्सल और कूरियर कंटेनरों का इस्तेमाल इसलिए किया क्योंकि ऐसे वाहनों पर सामान्यतः कम संदेह किया जाता है। पार्सलों के बीच डोडा-चूरा छिपाकर एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचाया जाता था। फिलहाल पुलिस यह जांच कर रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हैं, मादक पदार्थ कहां से लोड किया गया था, इसे कहां पहुंचाया जाना था और कंटेनर मालिक की क्या भूमिका रही।

भोपाल के 30 इलाकों में आज 2 से 6 घंटे तक बिजली कटौती, मेंटेनेंस के चलते रहेगी सप्लाई बाधित

भोपाल के करीब 30 इलाकों में शुक्रवार को 2 से 6 घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रहेगी। मध्य प्रदेश बिजली वितरण कंपनी द्वारा निर्धारित मेंटेनेंस कार्य के चलते अलग-अलग क्षेत्रों में तय समय के अनुसार बिजली बंद रहेगी। ऐसे में लोगों से अपील की गई है कि वे बिजली से जुड़े जरूरी काम पहले ही निपटा लें। बिजली कटौती का असर राजीव नगर, वाल्मी, भवानी धाम, आकृति ईको सिटी, सागर एवेन्यू, टेक्नोलॉजी पार्क, झील नगर, वर्धमान ग्रीन सिटी समेत कई प्रमुख इलाकों पर पड़ेगा। इन इलाकों में रहेगी बिजली बंद बिजली कंपनी ने उपभोक्ताओं से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि मेंटेनेंस कार्य पूरा होने के बाद संबंधित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति सामान्य कर दी जाएगी।

इंदौर को मिला मध्यप्रदेश का पहला डबल लेयर फ्लाईओवर, CM मोहन यादव ने किया लोकार्पण

मध्यप्रदेश को गुरुवार को अपना पहला डबल लेयर फ्लाईओवर मिल गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर के लवकुश चौराहा स्थित 175 करोड़ रुपये की लागत से तैयार डबल लेयर फ्लाईओवर की पहली भुजा का लोकार्पण किया। इसके साथ ही अरविंदो क्षेत्र से बाणगंगा की ओर वाहनों का आवागमन शुरू हो गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना आधुनिक इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण है और विकसित मध्यप्रदेश की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया यह फ्लाईओवर इंदौर-उज्जैन मार्ग पर बढ़ते यातायात को सुचारु बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश में तेजी से अधोसंरचना का विकास हो रहा है। इस फ्लाईओवर से यात्रा का समय कम होगा, ईंधन की बचत होगी, ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी और लोगों को सुरक्षित व सुविधाजनक आवागमन की सुविधा मिलेगी। तीन स्तर की यातायात व्यवस्था इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसकी त्रिस्तरीय यातायात व्यवस्था है। पहले स्तर पर सामान्य सड़क यातायात, दूसरे स्तर पर मौजूदा फ्लाईओवर और मेट्रो कॉरिडोर, जबकि तीसरे स्तर पर नया डबल लेयर फ्लाईओवर बनाया गया है। इससे लवकुश चौराहे पर वाहनों का दबाव काफी कम होगा। 1450 मीटर लंबा फ्लाईओवर इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) द्वारा निर्मित यह फ्लाईओवर करीब 1450 मीटर लंबा है। इसके निर्माण में 22 मीटर की ऊंचाई पर 65 मीटर लंबे और 24 मीटर चौड़े स्पान पर दो-दो 400 टन वजनी स्टील बो-स्ट्रिंग गर्डर लगाए गए हैं। परियोजना में कुल 800 टन स्टील का उपयोग किया गया है, जो इसे प्रदेश की प्रमुख इंजीनियरिंग उपलब्धियों में शामिल करता है। दूसरी भुजा अंतिम चरण में फिलहाल फ्लाईओवर की एक भुजा यातायात के लिए खोल दी गई है। दूसरी भुजा का निर्माण अंतिम चरण में है और इसके पूरा होते ही दोनों दिशाओं में यातायात पूरी तरह सुचारु हो जाएगा। सिंहस्थ-2028 को मिलेगा लाभ मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फ्लाईओवर केवल वर्तमान ट्रैफिक की समस्या को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि भविष्य की जरूरतों के अनुसार बनाया गया है। सिंहस्थ-2028 के दौरान इंदौर और उज्जैन के बीच श्रद्धालुओं की बढ़ती आवाजाही को देखते हुए यह परियोजना बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। UCC पर भी बोले मुख्यमंत्री लोकार्पण के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समान नागरिक संहिता (UCC) पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि UCC लागू होने के बाद विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था होगी। इसका उद्देश्य संविधान की भावना के अनुरूप सभी को समान अधिकार और न्याय सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार ने UCC पर व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करते हुए करीब दो महीने तक अभियान चलाया, जिसमें साढ़े तीन करोड़ से अधिक लोगों से सुझाव लिए गए। Read More:deshharpal.com

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