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Magh Mela

Magh Mela Row शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस, अब 24 घंटे में देना होगा जवाब

प्रयागराज में चल रहे माघ मेला 2026 (Magh Mela 2026) के दौरान एक ऐसा विवाद सामने आया है, जिसने धार्मिक, प्रशासनिक और राजनीतिक तीनों हलकों में हलचल मचा दी है। मामला जुड़ा है शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से, जो बीते तीन दिनों से मेला क्षेत्र में धरने पर बैठे हैं और अब उन्हें मेला प्रशासन की ओर से एक औपचारिक नोटिस थमा दिया गया है। विवाद की शुरुआत कैसे हुई? मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पारंपरिक पालकी यात्रा के साथ संगम स्नान के लिए जा रहे थे। इसी दौरान प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण का हवाला देते हुए उनकी पालकी यात्रा को बीच में ही रोक दिया। यहीं से मामला गरमा गया। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे धार्मिक परंपराओं और संतों के सम्मान के खिलाफ बताते हुए संगम स्नान से इनकार कर दिया और धरने पर बैठ गए। उनके समर्थकों का कहना है कि यह केवल एक प्रशासनिक रोक नहीं थी, बल्कि संतों के साथ किए गए व्यवहार ने उन्हें आहत किया है। नोटिस में क्या कहा गया? माघ मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को जारी नोटिस में उनसे 24 घंटे के भीतर यह स्पष्ट करने को कहा है कि वे किस आधार पर स्वयं को “शंकराचार्य” कह रहे हैं। प्रशासन का तर्क है कि जब तक किसी पीठ पर शंकराचार्य की औपचारिक नियुक्ति (पट्टाभिषेक) नहीं होती और अदालत या परंपरागत संस्थाओं से मान्यता नहीं मिलती, तब तक किसी व्यक्ति द्वारा इस पदवी का उपयोग करना विवादित हो सकता है। यानी अब विवाद केवल संगम स्नान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीधे-सीधे शंकराचार्य पद की वैधता पर आ टिका है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का पक्ष धरने पर बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने साफ शब्दों में कहा है कि “हम शंकराचार्य हैं या नहीं, यह कोई प्रशासन या सरकार तय नहीं कर सकती।” उनका कहना है कि उनका पद धार्मिक परंपरा और गुरु-शिष्य परंपरा से जुड़ा है, न कि किसी सरकारी अनुमति से। वे यह भी कह चुके हैं कि जब तक उनके साथ हुए व्यवहार पर प्रशासन माफी नहीं मांगता और सम्मानपूर्वक व्यवहार नहीं करता, तब तक वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे। राजनीति भी कूदी मैदान में इस पूरे विवाद ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है।समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से फोन पर बात कर उनका समर्थन किया है। वहीं अन्य दलों के नेताओं और सामाजिक संगठनों ने भी प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। कुछ नेताओं ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़कर देखा है, तो कुछ ने इसे केवल सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा मामला बताया है। प्रशासन का क्या कहना है? प्रशासन का पक्ष है कि यह कार्रवाई पूरी तरह व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़ी थी, न कि किसी संत या धर्म विशेष के अपमान से। उनका कहना है कि मेला क्षेत्र में लाखों श्रद्धालु मौजूद होते हैं और किसी भी तरह की विशेष छूट कानून व्यवस्था के लिए खतरा बन सकती है। साथ ही, “शंकराचार्य” की उपाधि को लेकर नोटिस को वे एक कानूनी और प्रक्रियात्मक सवाल बता रहे हैं, न कि धार्मिक हस्तक्षेप। अब आगे क्या? अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद इस नोटिस का क्या जवाब देते हैं।उनका जवाब तय करेगा कि मामला शांत होगा या और ज्यादा तूल पकड़ेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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BMC

BMC Mayor Election 2026 मुंबई मेयर कुर्सी पर घमासान, Shiv Sena vs BJP के बीच बढ़ी तनातनी

मुंबई महानगरपालिका (BMC) के मेयर चुनाव ने एक बार फिर महाराष्ट्र की राजनीति को गरमा दिया है। Mumbai Mayor Election अब सिर्फ एक पद का चुनाव नहीं रह गया, बल्कि यह भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के बीच शक्ति संतुलन की असली परीक्षा बन चुका है। ताज़ा घटनाक्रम ने पूरे राजनीतिक माहौल में नया मोड़ ला दिया है। शिवसेना की 1 साल की मांग ने बढ़ाया तनाव महायुति गठबंधन में शामिल शिवसेना (शिंदे गुट) ने मेयर पद को लेकर बड़ा दावा ठोक दिया है। पार्टी ने साफ तौर पर कहा है कि मुंबई मेयर का पद कम से कम 1 साल के लिए शिवसेना को दिया जाए। इसके पीछे पार्टी का तर्क है कि सरकार में साझेदारी होने के बावजूद अगर बीएमसी जैसे अहम निकाय में प्रतिनिधित्व नहीं मिला, तो यह कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए निराशाजनक संदेश होगा। सूत्रों की मानें तो शिवसेना 50-50 या ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले पर भी बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन फिलहाल उसकी प्राथमिक मांग 1 साल का कार्यकाल है। BJP का सख्त रुख, पार्षदों को साफ निर्देश दूसरी तरफ, BJP इस पूरे घटनाक्रम को लेकर पूरी तरह अलर्ट मोड में है। पार्टी ने अपने सभी पार्षदों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे मुंबई में ही रहें और किसी भी तरह की अफवाह, दबाव या बाहरी संपर्क से दूर रहें। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राजनीतिक गलियारों में हॉर्स ट्रेडिंग की चर्चाएं तेज हो गई हैं। भाजपा का मानना है कि वह बीएमसी में सबसे बड़ी पार्टी है और मेयर पद पर उसका दावा स्वाभाविक है। हालांकि, संख्याबल के गणित में उसे शिवसेना (शिंदे गुट) के समर्थन की जरूरत भी है, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है। होटल पॉलिटिक्स और बढ़ती हलचल राजनीतिक सरगर्मी के बीच खबर है कि शिवसेना (शिंदे गुट) ने अपने पार्षदों को एक होटल में ठहराया है, ताकि किसी भी तरह की टूट-फूट या क्रॉस वोटिंग को रोका जा सके। विपक्ष इस कदम को लेकर सरकार पर निशाना साध रहा है और इसे “होटल पॉलिटिक्स” बता रहा है। आगे क्या? अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या भाजपा और शिवसेना के बीच कोई बीच का रास्ता निकलता है या फिर यह खींचतान किसी बड़े राजनीतिक फैसले की ओर जाती है। Mumbai Mayor Election 2026 न सिर्फ बीएमसी की दिशा तय करेगा, बल्कि यह भी बताएगा कि महायुति के भीतर तालमेल कितना मजबूत है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Vande Bharat

Indian Railways की बड़ी उपलब्धि PM Modi ने दिखाई First Vande Bharat Sleeper Train को हरी झंडी

भारतीय रेलवे ने एक और ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए देश की पहली Vande Bharat Sleeper Train को पटरी पर उतार दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने पश्चिम बंगाल के मालदा टाउन रेलवे स्टेशन से इस आधुनिक ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। यह ट्रेन हावड़ा (Howrah) से गुवाहाटी/कामाख्या (Guwahati/Kamakhya) के बीच चलेगी और लंबी दूरी की रात की यात्रा को पूरी तरह बदल देगी। अब तक Vande Bharat ट्रेनें डे-टाइम चेयर कार सर्विस के लिए जानी जाती थीं, लेकिन Sleeper Version के शुरू होने से यात्रियों को रात में तेज, सुरक्षित और आरामदायक सफर का नया अनुभव मिलेगा। Vande Bharat Sleeper Train की खास बातें यह ट्रेन खासतौर पर Long Distance Night Journey को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। Travel Time में बड़ी राहत Howrah से Guwahati के बीच करीब 950–960 किलोमीटर की दूरी यह ट्रेन लगभग 14 घंटे में पूरी करेगी। इससे यात्रियों का समय बचेगा और सफर ज्यादा आरामदायक होगा, खासकर उन लोगों के लिए जो रात में यात्रा करना पसंद करते हैं। Important Stations (Stoppages) यह ट्रेन रास्ते में कई प्रमुख स्टेशनों पर रुकेगी, जिनमें शामिल हैं:Bandel, Malda Town, New Jalpaiguri, New Bongaigaon, Rangiya आदि।इससे पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर राज्यों के बीच कनेक्टिविटी और मजबूत होगी। North East India के लिए Game Changer Vande Bharat Sleeper Train को Eastern India और North East के लिए एक बड़ा तोहफा माना जा रहा है। इससे न सिर्फ यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी, बल्कि व्यापार, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। रात की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यह ट्रेन होटल जैसी सुविधा का अनुभव देगी, जिससे लंबी दूरी का सफर थकाने वाला नहीं रहेगा। हजारों करोड़ की Development Projects भी हुए शुरू इस कार्यक्रम के दौरान PM Modi ने रेलवे और सड़क से जुड़ी कई बड़ी infrastructure projects का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया। इन परियोजनाओं से क्षेत्र में रोजगार, विकास और कनेक्टिविटी को नई गति मिलेगी। Indian Railways की Modern Journey Vande Bharat Sleeper Train, New India और Modern Indian Railways की सोच को दर्शाती है। आने वाले समय में ऐसी और स्लीपर वंदे भारत ट्रेनें देश के अन्य प्रमुख रूट्स पर भी शुरू की जाएंगी। यह ट्रेन सिर्फ एक नई सेवा नहीं, बल्कि भारत के रेल सफर को next level पर ले जाने की शुरुआत है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bangladesh

Hindu Community खतरे में Bangladesh में बढ़ती अल्पसंख्यक Violence

बांग्लादेश (Bangladesh) में हिंदू युवाओं और अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ हिंसा लगातार बढ़ती जा रही है। हाल के हफ्तों में हुई कई घटनाएँ इस बात का सबूत हैं कि यह सिर्फ दुर्घटना नहीं, बल्कि जानबूझकर की गई जानलेवा हिंसा है। Petrol Pump पर जानलेवा हमला राजबारी ज़िले में 30 वर्षीय रिपोन साहा की हत्या एक बेहद दुखद घटना के रूप में सामने आई। रिपोन, जो क़रीम पेट्रोल पंप में काम करते थे, ने वाहन चालक से ईंधन का बिल चुकाने की मांग की। इसके जवाब में चालक और उसके साथी ने कार से रिपोन को कुचलकर मार डाला। पुलिस ने आरोपी को सीसीटीवी फुटेज के आधार पर गिरफ्तार कर लिया। यह घटना दिखाती है कि हिंसा की यह कार्रवाई जानबूझकर की गई थी। भीड़ द्वारा हमले और डर का माहौल 18 दिसंबर 2025 को दीपू चंद्र दास नामक हिंदू युवक को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला। इसके कुछ दिन बाद, 31 दिसंबर 2025 को खोकन चंद्र दास पर हमला हुआ। उसे पीटा गया और चाकू से मारा गया, साथ ही आग लगाने की कोशिश भी की गई। वह अपनी जान बचाने में सफल रहा। बढ़ते मामलों की गंभीरता मानवाधिकार समूहों के अनुसार, पिछले 45 दिनों में कम से कम 15 हिंदुओं की हत्या के मामले दर्ज किए गए हैं। यह संख्या चिंताजनक रूप से बढ़ रही है और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। International Response और Human Touch संयुक्त राष्ट्र महासचिव और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन इस हिंसा पर चिंता जता चुके हैं। उनका कहना है कि बांग्लादेश सरकार को अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तुरंत कदम उठाने चाहिए। यह घटनाएँ सिर्फ संख्या या रिपोर्ट नहीं हैं — यह इंसानियत पर चोट हैं, जो यह दिखाती हैं कि समाज में धार्मिक और सामाजिक भेदभाव अभी भी कितनी गहरी जड़ें जमा चुका है। सोशल मीडिया और अफवाहों से सावधानी सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, लेकिन उनमें से कुछ तथ्यों से दूर या AI जनरेटेड पाए गए हैं। इसलिए, इन घटनाओं को समझने और साझा करने से पहले विश्वसनीय स्रोतों की पुष्टि करना जरूरी है। Bangladesh में हिंदू युवाओं पर बढ़ती हिंसा केवल स्थानीय समस्या नहीं है, बल्कि यह मानवाधिकार और सुरक्षा की गंभीर चुनौती बन चुकी है। समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है कि वे अल्पसंख्यकों को सुरक्षित रखने के लिए ठोस कदम उठाएँ और इंसानियत को जीवित रखें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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BMC

BMC Election 2026 Results मुंबई में BJP की बड़ी जीत, PM Modi और CM Fadnavis का धन्यवाद

महाराष्ट्र के 29 नगरपालिकाओं में हाल ही में हुए BMC Election 2026 और अन्य नगरपालिका चुनावों में BJP‑सहयोगी महायुति गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन किया। खासकर बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) में BJP सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और अब वह तय करेगी कि मुंबई का नया मेयर कौन होगा। चुनाव परिणाम (Election Results) नेताओं की प्रतिक्रिया (Leaders’ Reactions) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi, BJP):PM मोदी ने महाराष्ट्र के लोगों को धन्यवाद कहा और इसे “अच्छे शासन और विकास के लिए जनता का समर्थन” बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह जनता का विश्वास और BJP की नीति में भरोसा दर्शाता है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (CM Fadnavis, BJP):फडणवीस ने कहा कि जनता ने ईमानदारी, विकास और पारदर्शी प्रशासन के लिए मतदान किया। उन्होंने BJP और उसके सहयोगियों की नीतियों को समावेशी और विकासोन्मुख बताया और कहा कि यह जनता के भरोसे का प्रतीक है। कांग्रेस पार्टी (Opposition Congress):कांग्रेस ने चुनाव को “विचारधारा की लड़ाई” बताया और कहा कि उनका अभियान सिद्धांतों पर आधारित था, चाहे परिणाम बड़े न भी आए हों। व्यापक प्रभाव (Broader Impact) BMC Election 2026 और अन्य नगरपालिका चुनावों में BJP‑महायुति की शानदार जीत ने महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में नया मोड़ दिया है। PM Modi और CM Fadnavis ने जनता का आभार जताया, जबकि विपक्ष ने इसे विचारधारा आधारित मुकाबला बताया। अब नगर निगमों में प्रशासन और विकास की दिशा तय होगी, और यह जनता के लिए नए अवसर और चुनौतियां लेकर आएगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rahul Gandhi

Rahul Gandhi Indore Visit बॉम्बे हॉस्पिटल में मरीजों से मिले राहुल गांधी, पीड़ितों को देंगे 1 लाख की मदद

कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) अपने इंदौर दौरे के दौरान सबसे पहले बॉम्बे हॉस्पिटल पहुंचे। यहां उन्होंने इलाज करा रहे मरीजों और उनके परिजनों से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। राहुल गांधी ने मरीजों से बातचीत कर उन्हें बेहतर इलाज और सहयोग का भरोसा दिलाया। अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों से भी उन्होंने उपचार की स्थिति को लेकर चर्चा की। हॉस्पिटल गेट पर रोके गए कांग्रेस कार्यकर्ता Rahul Gandhi के आगमन की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता बॉम्बे हॉस्पिटल पहुंच गए। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था के चलते पुलिस ने कार्यकर्ताओं को गेट पर ही रोक दिया। केवल सीमित नेताओं और अधिकारियों को ही अस्पताल परिसर में प्रवेश की अनुमति दी गई, जिससे कुछ समय के लिए गेट पर हलचल का माहौल रहा। भागीरथपुरा में पीड़ित परिवारों से करेंगे मुलाकात बॉम्बे हॉस्पिटल के बाद Rahul Gandhi का अगला कार्यक्रम भागीरथपुरा क्षेत्र में तय है। यहां वे हालिया घटनाओं से प्रभावित पीड़ित परिवारों से सीधे मुलाकात करेंगे और उनकी समस्याएं सुनेंगे। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी पीड़ितों के घर जाकर हालात का जायजा लेंगे। पीड़ितों को 1-1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता कांग्रेस की ओर से जानकारी दी गई है कि राहुल गांधी पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता के रूप में 1-1 लाख रुपये का चेक सौंपेंगे। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह मदद पीड़ितों को तत्काल राहत देने के उद्देश्य से की जा रही है, ताकि वे इस कठिन समय से उबर सकें। मानवीय संवेदना के संदेश के साथ इंदौर दौरा कांग्रेस नेताओं का कहना है कि Rahul Gandhi का यह दौरा राजनीतिक से अधिक मानवीय संवेदना से जुड़ा हुआ है। उनका प्रयास है कि पीड़ित परिवार खुद को अकेला न समझें। राहुल गांधी के इंदौर दौरे को लेकर शहर में दिनभर राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं, वहीं प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़े इंतजाम किए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Maharashtra

Maharashtra Municipal Result 2026 BJP+ का शहरी स्ट्रॉन्गहोल्ड, Congress को Latur और Chandrapur में राहत

महाराष्ट्र (Maharashtra) नगर निगम चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की शहरी राजनीति की तस्वीर लगभग साफ कर दी है। 29 नगर निगमों में हुए चुनावों के रुझानों और नतीजों में बीजेपी के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन (BJP+) ने बड़ा दबदबा दिखाया है। शुरुआती और लगभग अंतिम रुझानों के मुताबिक 23 से 25 नगर निगमों में BJP+ को बढ़त या जीत मिली है, जबकि कुछ जगहों पर कांग्रेस और विपक्षी दलों ने भी मजबूत प्रदर्शन किया है। Mumbai, Pune, Nagpur में BJP+ का दमदार प्रदर्शन राज्य के तीन सबसे बड़े और अहम नगर निगम—मुंबई (BMC), पुणे और नागपुर—में बीजेपी और उसके सहयोगियों ने बढ़त बना ली है। इन नतीजों को शहरी मतदाताओं के बीच बीजेपी की पकड़ के रूप में देखा जा रहा है, खासकर विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर और स्थिर प्रशासन जैसे मुद्दों को लेकर। Latur और Chandrapur में Congress को राहत जहां एक तरफ BJP+ का दबदबा दिखा, वहीं लातूर और चंद्रपुर जैसे नगर निगमों में कांग्रेस ने बहुमत हासिल कर या मजबूत बढ़त बनाकर राहत की सांस ली है। इन इलाकों में स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवारों और संगठन की पकड़ ने कांग्रेस को फायदा पहुंचाया। अन्य नगर निगमों का हाल मतदाता रुझान और राजनीतिक संकेत इन चुनावों में शहरी मतदाताओं का रुझान साफ तौर पर स्थिरता और मजबूत नेतृत्व की ओर झुका दिखता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये नतीजे आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए भी संकेत देने वाले हो सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Yashwant Varma

Justice Yashwant Varma के खिलाफ Parliamentary Committee की जांच जारी Supreme Court ने रोक नहीं लगाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश Justice Yashwant Varma के लिए हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा झटका दिया है। अदालत ने उनके उस आवेदन को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ गठित Parliamentary Investigation Committee को चुनौती दी थी। इस फैसले के बाद अब उनके खिलाफ लगे corruption allegations की संसदीय जांच पूरी तरह से जारी रह सकेगी। मामला क्या है? जस्टिस यशवंत वर्मा तब विवादों में आए थे जब दिल्ली हाईकोर्ट में उनका official residence आग की घटना के बाद खुलासा हुआ कि वहां बड़ी मात्रा में unaccounted cash मिली। इसके बाद उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे और उन्हें बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया। संसदीय कार्रवाई की शुरुआत लोकसभा में उनके खिलाफ impeachment motion पेश किया गया। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने Judges (Inquiry) Act, 1968 के तहत तीन सदस्यीय संसदीय जांच समिति का गठन किया। इस समिति का काम है आरोपों की निष्पक्ष जांच करना। हालांकि, राज्यसभा में यह प्रस्ताव स्वीकृत नहीं हो सका क्योंकि उपसभापति ने इसे पहले ही रिजेक्ट कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस वर्मा की दलील जस्टिस वर्मा ने दलील दी कि जब तक दोनों सदनों में महाभियोग प्रस्ताव स्वीकार नहीं होता, तब तक संसदीय जांच समिति का गठन कानूनी रूप से सही नहीं है। उनका कहना था कि लोकसभा अध्यक्ष ने एकतरफा निर्णय लिया, जो कानून के खिलाफ है। कोर्ट का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि: इस निर्णय के बाद संसदीय जांच समिति को जस्टिस वर्मा के खिलाफ आरोपों की जांच जारी रखने का हक मिल गया। अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न्यायिक जवाबदेही और transparency की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। जस्टिस यशवंत वर्मा के लिए यह एक बड़ा झटका है, जबकि संसद को उनके खिलाफ गंभीर आरोपों की जांच जारी रखने का अधिकार मिल गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Maharashtra

Maharashtra Civic Polls 2026 मुंबई नगर निगम में कड़ा मुकाबला, Nagpur में BJP का दबदबा

महाराष्ट्र (Maharashtra) में नगर निगम चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की शहरी राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। मतगणना के रुझानों से साफ है कि इस बार BJP+ (महायुति) गठबंधन ने कई बड़े महानगरों में मजबूत बढ़त बना ली है। खास तौर पर मुंबई और नागपुर जैसे अहम शहरों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, जहां मुकाबला सिर्फ सीटों का नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रभाव का भी है। Mumbai BMC Result: कड़ा मुकाबला, लेकिन BJP+ आगे देश की आर्थिक राजधानी मुंबई नगर निगम (BMC) में इस बार चुनावी जंग बेहद दिलचस्प रही। अब तक सामने आए रुझानों के अनुसार BJP+ गठबंधन करीब 44 सीटों पर आगे चल रहा है। वहीं शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) और उसके सहयोगी लगभग 24 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं।कई वार्डों में मुकाबला इतना नजदीकी है कि हर राउंड के साथ समीकरण बदलते दिखे। फिर भी, मौजूदा रुझान यह संकेत दे रहे हैं कि मुंबई की नगर राजनीति में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। Nagpur Municipal Result: BJP का दबदबा बरकरार नागपुर नगर निगम में तस्वीर कहीं ज्यादा साफ नजर आ रही है। यहां BJP+ गठबंधन लगभग 63 सीटों पर आगे चल रहा है। यह शहर लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है और इस चुनाव में भी पार्टी ने अपनी पकड़ कायम रखी है। विपक्षी दल नागपुर में प्रभावी चुनौती देने में फिलहाल पीछे दिख रहे हैं। अन्य महानगरों में क्या रहा हाल मुंबई और नागपुर के अलावा पुणे, ठाणे, नवी मुंबई, वसई-विरार जैसे प्रमुख नगर निगमों में भी BJP+ को बढ़त मिलती दिख रही है। कुछ जगहों पर कांग्रेस, NCP और शिवसेना (UBT) ने टक्कर जरूर दी, लेकिन कुल मिलाकर रुझान महायुति के पक्ष में रहे हैं। राजनीतिक मायने क्या हैं इन नगर निगम चुनाव परिणामों को सिर्फ स्थानीय निकाय तक सीमित नहीं देखा जा रहा। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि शहरी इलाकों में BJP+ की बढ़त आने वाले समय में राज्य और राष्ट्रीय राजनीति पर असर डाल सकती है। वहीं शिवसेना (उद्धव गुट) के लिए यह चुनाव आत्ममंथन का मौका भी माना जा रहा है। फिलहाल ये सभी आंकड़े मतगणना के रुझानों पर आधारित हैं और अंतिम परिणाम आना अभी बाकी है। लेकिन इतना तय है कि Maharashtra Nagar Nigam Election Result 2026 ने यह साफ कर दिया है कि शहरी महाराष्ट्र में राजनीतिक हवा किस दिशा में बह रही है। आने वाले घंटों में जब अंतिम नतीजे सामने आएंगे, तब यह तस्वीर और भी स्पष्ट हो जाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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ED

ED vs I-PAC Case Supreme Court से Mamata Government को बड़ा झटका, FIR पर रोक

राजनीति और कानून के टकराव से निकला ED vs I-PAC मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत, सुप्रीम कोर्ट, के केंद्र में है। इस हाई-प्रोफाइल विवाद में अदालत ने पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा ईडी (Enforcement Directorate) के अधिकारियों पर दर्ज FIR पर रोक लगा दी है। इस फैसले को ममता बनर्जी सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। क्या है पूरा मामला? (What is ED vs I-PAC?) जनवरी की शुरुआत में ED ने कोलकाता में I-PAC (Indian Political Action Committee) से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की थी। यह कार्रवाई कथित कोयला घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जुड़ी बताई गई।I-PAC वही संस्था है जो तृणमूल कांग्रेस (TMC) को राजनीतिक रणनीति में सलाह देती रही है—यही वजह है कि मामला सीधे राजनीतिक बहस में बदल गया। छापेमारी के बाद बंगाल पुलिस ने ED अधिकारियों पर FIR दर्ज कर दी, आरोप लगाए गए कि छापे के दौरान अवैध तरीके अपनाए गए और डराने-धमकाने जैसी बातें हुईं। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? ED इस FIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यह मामला संवैधानिक और बेहद संवेदनशील है।अदालत ने: इसका सीधा मतलब है कि जब तक अगली सुनवाई नहीं होती, ED अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकती। ED के गंभीर आरोप ED ने कोर्ट में दावा किया कि: ED का कहना है कि अगर राज्य पुलिस केंद्रीय एजेंसी की जांच रोकने लगे, तो कानून-व्यवस्था और न्याय दोनों खतरे में पड़ेंगे। ममता बनर्जी सरकार का पक्ष ममता बनर्जी और उनकी सरकार ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया। उनका कहना है कि: TMC का दावा है कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीति के लिए किया जा रहा है। यह मामला इतना अहम क्यों है? क्योंकि यह सिर्फ एक छापेमारी नहीं, बल्कि केंद्र और राज्य सरकारों की शक्तियों की सीमा का सवाल बन चुका है।अगर राज्य पुलिस केंद्रीय एजेंसी पर केस दर्ज कर देती है, तो जांच का भविष्य क्या होगा—यही सवाल सुप्रीम कोर्ट के सामने है। ED vs I-PAC केस अब सिर्फ कानूनी लड़ाई नहीं रहा—यह संघीय ढांचे, चुनावी राजनीति और जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता से जुड़ा मुद्दा बन चुका है।सुप्रीम कोर्ट का FIR पर रोक लगाना बताता है कि मामले को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह केस बंगाल की राजनीति और देश की संस्थागत व्यवस्था—दोनों पर असर डाल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rahul Gandhi

Mallikarjun Kharge Shuddhikaran Row: मंच ‘शुद्ध’ कराने पर बवाल, Rahul Gandhi ने BJP-RSS को घेरा

 उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष Rahul Gandhi मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद कथित तौर पर मंच के ‘शुद्धिकरण’ को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इस मामले को लेकर Rahul Gandhi ने BJP और RSS पर जातिगत भेदभाव तथा ‘मनुवादी सोच’ को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। वहीं, BJP ने आरोपों से दूरी बनाते हुए मामले की जांच कराने की बात कही है। क्या है Haldwani Shuddhikaran विवाद? मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली को संबोधित किया था। रैली के कुछ दिन बाद कथित तौर पर कुछ लोगों ने मैदान में पूजा-पाठ और हवन कर ‘शुद्धिकरण’ किया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई खड़गे के दलित समुदाय से होने के कारण की गई। पार्टी ने इसे छुआछूत और जातिगत भेदभाव की मानसिकता का उदाहरण बताया है। हालांकि, BJP की ओर से कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया गया है। BJP नेताओं का कहना है कि रैली के दौरान लगाए गए कुछ नारों से धार्मिक भावनाएं आहत हुई थीं और इसी वजह से धार्मिक अनुष्ठान किया गया था। BJP ने इस कार्रवाई को खड़गे की जाति से जोड़ने पर भी सवाल उठाए हैं। Mallikarjun Kharge ने राज्यसभा में उठाया मुद्दा मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मामले को राज्यसभा में भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके भाषण के बाद उस मंच का ‘शुद्धिकरण’ किया गया, जिससे उन्हें बेहद अपमानित महसूस हुआ। खड़गे ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी व्यक्ति को उसकी जाति के आधार पर अपवित्र मानना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। उन्होंने इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ Untouchability Act के तहत कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग की। खड़गे का कहना है कि ऐसी घटनाएं केवल किसी एक व्यक्ति का अपमान नहीं हैं, बल्कि देश में सामाजिक समानता और संवैधानिक मूल्यों पर भी सवाल खड़े करती हैं। Rahul Gandhi का BJP-RSS पर हमला हल्द्वानी के इस विवाद पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कथित ‘शुद्धिकरण’ को दलितों के अपमान से जोड़ते हुए BJP और RSS पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस तरह की सोच BJP-RSS की कथित ‘मनुवादी मानसिकता’ को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और छुआछूत तथा जातिगत भेदभाव के लिए आधुनिक भारत में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। कांग्रेस ने इस मुद्दे को सामाजिक न्याय और दलित सम्मान से जोड़ते हुए सरकार से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। क्या Rahul Gandhi ने SC/ST Act के तहत FIR की मांग की? इस मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार SC/ST Act के तहत FIR दर्ज कराने की स्पष्ट मांग राहुल गांधी की ओर से नहीं बताई गई है। रिपोर्टों में मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा Untouchability Act के तहत मामला दर्ज करने और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग का उल्लेख है। वहीं, राहुल गांधी ने घटना को दलितों के अपमान, जातिगत भेदभाव और कथित मनुवादी सोच से जोड़कर BJP-RSS पर राजनीतिक हमला किया। इसलिए खबर को पेश करते समय राहुल गांधी के बयान और खड़गे की कानूनी कार्रवाई की मांग को अलग-अलग रखना जरूरी है। BJP ने क्या कहा? BJP ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है। पार्टी की ओर से कहा गया कि वह किसी भी तरह के भेदभावपूर्ण व्यवहार का समर्थन नहीं करती। केंद्रीय मंत्री और BJP के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा ने मामले की जांच का आश्वासन दिया। BJP नेताओं का कहना है कि घटना के पीछे धार्मिक कारण हो सकते हैं और इसे खड़गे की जाति से जोड़ना उचित नहीं है। अब इस मामले में जांच के परिणाम महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि इसी से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित ‘शुद्धिकरण’ किसने कराया और इसके पीछे वास्तविक कारण क्या था। कांग्रेस ने राज्यपाल से भी की शिकायत मामले को लेकर कांग्रेस नेताओं ने उत्तराखंड के राज्यपाल से मुलाकात कर कथित ‘शुद्धिकरण’ की निष्पक्ष जांच की मांग भी की है। कांग्रेस का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की जाति के आधार पर किसी सार्वजनिक स्थान या मंच को ‘अपवित्र’ माना गया है, तो यह गंभीर सामाजिक और संवैधानिक मुद्दा है। Haldwani Row बना Political मुद्दा हल्द्वानी का ‘शुद्धिकरण’ विवाद अब स्थानीय घटना से आगे बढ़कर राष्ट्रीय राजनीति का मुद्दा बन गया है। कांग्रेस इसे Dalit dignity, social equality और constitutional values से जोड़ रही है, जबकि BJP कांग्रेस पर घटना को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगा रही है। फिलहाल दोनों पक्षों के दावों के बीच इस मामले में जांच और संभावित कानूनी कार्रवाई पर सबकी नजर है। विवाद के आगे बढ़ने के साथ Rahul Gandhi, Mallikarjun Kharge, Haldwani Shuddhikaran Row, FIR और SC/ST Act जैसे मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में बने हुए हैं।
H-1B

H-1B Rules में बड़ा बदलाव: Trump हटाएंगे 60 Days Grace Period? Indian IT Professionals पर असर

अमेरिका में काम करने वाले भारतीय H-1B visa holders के लिए Donald Trump administration की immigration policies लगातार चिंता बढ़ा रही हैं। अब H-1B के तहत मिलने वाली 60 Days Grace Period को खत्म करने की तैयारी की खबरों ने भारतीय IT professionals के बीच नई चिंता पैदा कर दी है। अगर यह प्रस्ताव अंतिम रूप से लागू होता है, तो नौकरी जाने के बाद H-1B workers को अमेरिका में नई नौकरी तलाशने के लिए मिलने वाली मौजूदा 60 दिनों की राहत खत्म हो सकती है। इसके साथ ही H-1B visa से जुड़ी बढ़ी हुई लागत और दूसरे proposed immigration changes भी भारतीय professionals के लिए अमेरिका में नौकरी और long-term career planning को प्रभावित कर सकते हैं। क्या है H-1B 60 Days Grace Period? मौजूदा नियमों के तहत, अगर किसी H-1B worker की नौकरी समाप्त हो जाती है, तो कुछ परिस्थितियों में उसे अधिकतम 60 दिन या उसके authorized stay की समाप्ति तक, जो भी पहले हो, अमेरिका में रहने की अनुमति मिल सकती है। इस दौरान कर्मचारी: टेक्नोलॉजी सेक्टर में layoffs के दौरान यह grace period H-1B workers के लिए एक महत्वपूर्ण safety net बन गई है। Trump Administration क्यों बदलना चाहती है H-1B Rules? Trump administration लंबे समय से अमेरिकी workers को प्राथमिकता देने और foreign workers पर अमेरिकी कंपनियों की निर्भरता कम करने की नीति पर जोर देती रही है। प्रस्तावित बदलावों का व्यापक उद्देश्य H-1B program में ज्यादा सख्ती और oversight लाना है। हालांकि, 60-day grace period को खत्म करने का प्रस्ताव अभी अंतिम रूप से लागू नियम नहीं माना जा सकता। अंतिम regulatory process और effective date यह तय करेंगे कि बदलाव वास्तव में कब और किस रूप में लागू होगा। Indians पर सबसे बड़ा असर क्या होगा? H-1B program में भारतीय professionals की बड़ी हिस्सेदारी होने के कारण किसी भी बड़े बदलाव का असर भारतीयों पर विशेष रूप से पड़ सकता है। 1. Layoff के बाद बढ़ेगा Immigration Pressure अगर किसी भारतीय H-1B employee की नौकरी चली जाती है, तो मौजूदा 60 दिनों का buffer उपलब्ध नहीं होने पर उसे बहुत तेजी से नया employer या दूसरा वैध immigration option तलाशना पड़ सकता है। इससे layoffs का असर सिर्फ नौकरी खोने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अमेरिका में रहने की स्थिति भी तुरंत चिंता का विषय बन सकती है। 2. IT Professionals पर ज्यादा असर भारतीय H-1B workers की बड़ी संख्या technology और specialized professional roles में काम करती है। इसलिए software engineers, IT consultants, data professionals और दूसरे skilled workers के लिए नौकरी बदलने की समय-सीमा महत्वपूर्ण हो सकती है। नई व्यवस्था में companies के बीच job switch करने की प्रक्रिया को पहले से ज्यादा जल्दी पूरा करना जरूरी हो सकता है। 3. कम समय में Job Search का दबाव 60 दिन की grace period खत्म होने की स्थिति में कर्मचारी के पास नई नौकरी तलाशने के लिए कम flexibility होगी। ऐसे में कुछ workers को: H-1B Fee में भारी बढ़ोतरी से भी बढ़ी चिंता H-1B program में प्रस्तावित एक और बड़ा बदलाव इसकी लागत से जुड़ा है। Trump administration ने नए H-1B petitions से जुड़ी $103,265 की proposed fee को लेकर कदम उठाए हैं। यह समझना जरूरी है कि इसका अर्थ यह नहीं है कि हर H-1B employee को अपनी जेब से करीब $100,000 देना होगा। यह मुख्य रूप से employer-side cost से जुड़ा प्रस्ताव है। फिर भी इतनी बड़ी लागत कंपनियों के hiring decisions को प्रभावित कर सकती है। Indian IT Companies के लिए क्या बदल सकता है? H-1B rules में सख्ती और बढ़ी हुई लागत का असर भारतीय IT companies की US business strategy पर भी पड़ सकता है। कंपनियां संभावित रूप से: इसका मतलब यह हो सकता है कि आने वाले समय में भारतीय IT professionals के लिए US onsite opportunities की competition और बढ़ जाए। H-4 Visa पर रहने वाले परिवारों पर भी असर H-1B employee की immigration स्थिति का असर उसके परिवार पर भी पड़ सकता है। H-4 status पर अमेरिका में रहने वाले spouse और children के लिए भी primary H-1B holder की स्थिति महत्वपूर्ण होती है। अगर principal H-1B worker को नौकरी जाने के बाद जल्दी नया immigration solution नहीं मिलता, तो परिवार को भी relocation या दूसरे immigration options पर विचार करना पड़ सकता है। इसका असर बच्चों की schooling, spouse की employment और परिवार की financial planning पर भी पड़ सकता है। क्या हर H-1B worker को नौकरी जाते ही अमेरिका छोड़ना पड़ेगा? यह सबसे महत्वपूर्ण बात है। 60-day grace period खत्म करने का प्रस्ताव अगर लागू होता भी है, तो उसकी वास्तविक conditions अंतिम नियम में स्पष्ट होंगी। इसके अलावा H-1B worker की स्थिति उसके individual immigration circumstances, pending petitions, authorized stay और उपलब्ध दूसरे legal options पर निर्भर कर सकती है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि grace period हटते ही हर H-1B worker को नौकरी खत्म होने के अगले दिन अमेरिका छोड़ना पड़ेगा। क्या भारतीयों के लिए US में Jobs खत्म हो जाएंगी? ऐसा कहना भी सही नहीं होगा। अमेरिका की technology, healthcare, research, engineering और दूसरे specialized sectors में skilled professionals की मांग बनी हुई है। लेकिन नए नियमों से H-1B sponsorship की लागत और immigration uncertainty बढ़ सकती है। इसका सबसे बड़ा असर नए applicants और ऐसे professionals पर पड़ सकता है जिन्हें employer sponsorship की जरूरत है। H-1B Indians के लिए आगे क्या महत्वपूर्ण होगा? भारतीय H-1B professionals को आने वाले समय में immigration policy में होने वाले बदलावों पर नजर रखनी होगी। खासकर ये चार चीजें महत्वपूर्ण रहेंगी: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
PM Modi

PM Modi in Uzbekistan: SCO Summit से पहले पीएम मोदी का बड़ा बयान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) शनिवार को Uzbekistan और Kyrgyz Republic के चार दिवसीय दौरे के लिए रवाना हो गए। 29 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक चलने वाली इस यात्रा में पीएम मोदी पहले उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद जाएंगे। इसके बाद वह किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित होने वाले 26वें Shanghai Cooperation Organisation (SCO) Summit में हिस्सा लेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दौरे से पहले कहा कि भारत SCO के सदस्य देशों के साथ मिलकर ऐसा क्षेत्र बनाने की दिशा में काम करेगा, जो आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से मुक्त हो। उन्होंने SCO के लिए भारत की प्राथमिकताओं को Security, Connectivity और Opportunity से जोड़ा है। PM Modi Uzbekistan Visit: द्विपक्षीय संबंधों पर होगी अहम बातचीत उज्बेकिस्तान की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। दोनों नेताओं के बीच भारत और उज्बेकिस्तान के संबंधों को और मजबूत करने के लिए कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। इस दौरान Trade and Investment, Defence, Energy, Education और Digital Connectivity जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होगा। भारत के लिए उज्बेकिस्तान Central Asia का एक महत्वपूर्ण साझेदार है। ऐसे में पीएम मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच आर्थिक, सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। Tashkent में Shastri Memorial और Mahatma Gandhi Centre जाएंगे PM Modi ताशकंद में प्रधानमंत्री मोदी Lal Bahadur Shastri Memorial और Mahatma Gandhi Centre का दौरा भी करेंगे। इन कार्यक्रमों के जरिए भारत और उज्बेकिस्तान के बीच ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित किया जाएगा। भारत और Central Asia के बीच सदियों पुराने व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। मौजूदा दौर में दोनों पक्ष इन रिश्तों को आधुनिक आर्थिक और रणनीतिक सहयोग में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। SCO Summit 2026 में Terrorism पर भारत का सख्त रुख उज्बेकिस्तान दौरे के बाद पीएम मोदी 31 अगस्त और 1 सितंबर को बिश्केक में होने वाले 26वें SCO Summit में शामिल होंगे। यह सम्मेलन SCO की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। SCO Summit में regional security, terrorism, extremism, connectivity और economic cooperation जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। भारत लंबे समय से आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत कार्रवाई की वकालत करता रहा है। पीएम मोदी ने कहा है कि भारत SCO के माध्यम से ऐसे क्षेत्र के निर्माण के लिए काम करेगा, जो terrorism, separatism और extremism से मुक्त हो। उनका यह संदेश SCO Summit में भारत की सुरक्षा प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है। Security और Connectivity पर भी रहेगा फोकस SCO के मंच पर भारत के लिए Security, Connectivity और Opportunity प्रमुख प्राथमिकताएं हैं। मध्य एशिया के साथ बेहतर connectivity भारत के आर्थिक और रणनीतिक हितों के लिए महत्वपूर्ण है। व्यापार मार्गों, ऊर्जा सहयोग, डिजिटल कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा देने से भारत और Central Asian देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूती मिल सकती है। प्रधानमंत्री मोदी SCO Summit के दौरान अन्य सदस्य देशों के नेताओं के साथ Bilateral Meetings भी कर सकते हैं। इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर बातचीत की संभावना है। World Nomad Games के Opening Ceremony में शामिल होंगे PM Modi किर्गिस्तान दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी 6th World Nomad Games के Opening Ceremony में भी शामिल होंगे। यह आयोजन Central Asia की पारंपरिक संस्कृति, खेल और विरासत को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करता है। पीएम मोदी की इस कार्यक्रम में भागीदारी भारत और किर्गिस्तान के बीच people-to-people और cultural ties को और मजबूत करने का अवसर भी होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
RBI

EMI नहीं चुकाई तो क्या होगा? RBI Loan Recovery Rules में बदलाव, जानिए Bank क्या नहीं कर सकता

अगर आपने Personal Loan, Home Loan, Car Loan या किसी अन्य तरह का Loan लिया है और किसी वजह से EMI समय पर नहीं चुका पा रहे हैं, तो आपके लिए RBI के Loan Recovery Rules जानना बेहद जरूरी है। EMI डिफॉल्ट होने पर बैंक या NBFC बकाया रकम की Recovery कर सकता है, लेकिन इसके लिए उसे RBI के नियमों का पालन करना जरूरी है। कई लोग यह मान लेते हैं कि EMI मिस होने के बाद Recovery Agent घर आकर धमका सकता है या किसी भी समय फोन कर सकता है। ऐसा नहीं है। RBI ने Loan Recovery के दौरान ग्राहकों के सम्मान, Privacy और उचित व्यवहार को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं। EMI Miss होने पर सबसे पहले क्या होता है? अगर आपकी EMI तय तारीख पर जमा नहीं होती है, तो बैंक इसे Overdue Payment के रूप में दर्ज कर सकता है। Loan Agreement के मुताबिक बैंक बकाया रकम के साथ लागू ब्याज या अन्य वैध Charges की मांग कर सकता है। अगर EMI लगातार Miss होती रहती है, तो बैंक ग्राहक से संपर्क कर सकता है और बकाया रकम चुकाने के लिए कह सकता है। लंबे समय तक भुगतान न होने पर बैंक अपने नियमों और लागू कानून के अनुसार Recovery Process आगे बढ़ा सकता है। इसलिए RBI के नियमों का मतलब यह नहीं है कि EMI नहीं चुकाने पर बैंक पैसा नहीं मांग सकता। नियम मुख्य रूप से यह तय करते हैं कि Recovery किस तरीके से की जा सकती है। RBI Loan Recovery Rules: Bank आपको कब कॉल कर सकता है? RBI के निर्देशों के अनुसार Overdue Loan की Recovery के लिए ग्राहक से सुबह 8 बजे से पहले और शाम 7 बजे के बाद संपर्क नहीं किया जाना चाहिए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि Recovery Agent ग्राहकों को अनुचित समय पर फोन करके परेशान न करें। अगर कोई Recovery Agent लगातार देर रात या सुबह-सुबह कॉल करता है, तो ग्राहक इस मामले की शिकायत संबंधित Bank या NBFC से कर सकता है। Recovery Agent आपको धमका नहीं सकता Loan की Recovery के लिए Bank या NBFC Recovery Agent की मदद ले सकता है, लेकिन Agent को ग्राहक के साथ धमकी, गाली-गलौज, अपमानजनक व्यवहार या मानसिक दबाव बनाने की अनुमति नहीं है। Recovery का उद्देश्य बकाया रकम की वसूली करना है, ग्राहक को डराना या परेशान करना नहीं। RBI ने Regulated Entities को अपने Recovery Agents की गतिविधियों पर उचित निगरानी रखने की जिम्मेदारी भी दी है। परिवार और दोस्तों को भी परेशान नहीं कर सकता Bank अगर आपकी EMI बकाया है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि Recovery Agent आपके परिवार, दोस्तों या परिचितों को परेशान करके आप पर दबाव बनाए। ग्राहक की Privacy और सम्मान का ध्यान रखना जरूरी है। किसी व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करना या उसके कर्ज की जानकारी का अनुचित तरीके से इस्तेमाल करना Recovery का स्वीकार्य तरीका नहीं है। क्या Bank घर आकर Recovery कर सकता है? बकाया Loan की Recovery के लिए Bank या उसका अधिकृत Recovery Agent ग्राहक से संपर्क कर सकता है। हालांकि, Recovery करते समय निर्धारित नियमों और कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। अगर Loan के बदले कोई Asset जैसे Car, Property या अन्य Security रखी गई है, तो Default की स्थिति में Bank के पास कानून और Loan Agreement के तहत Recovery के अधिकार हो सकते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि Recovery Agent अपनी मर्जी से जबरन सामान या संपत्ति पर कब्जा कर सकता है। Loan Default होने पर Credit Score पर भी असर पड़ सकता है EMI का लगातार भुगतान न करने का असर केवल Bank Recovery तक सीमित नहीं रहता। Loan Repayment History आपके Credit Profile को प्रभावित कर सकती है। अगर Loan Account में लगातार Default होता है, तो भविष्य में Loan या Credit Card लेने में परेशानी हो सकती है। इसलिए आर्थिक परेशानी होने पर EMI को नजरअंदाज करने के बजाय Bank से समय रहते संपर्क करना बेहतर होता है। Recovery Agent परेशान करे तो क्या करें? अगर कोई Recovery Agent RBI के नियमों का उल्लंघन करता है, तो ग्राहक को सबसे पहले संबंधित Bank या NBFC के Grievance Redressal Mechanism में शिकायत करनी चाहिए। शिकायत करते समय कॉल रिकॉर्ड, SMS, WhatsApp Message, Email या अन्य उपलब्ध सबूत सुरक्षित रखना उपयोगी हो सकता है। अगर Bank या NBFC से शिकायत का समाधान नहीं होता है, तो पात्र मामलों में RBI की Ombudsman व्यवस्था के तहत शिकायत की जा सकती है। क्या EMI नहीं भरने पर Bank Loan माफ कर देगा? नहीं। RBI के Recovery Rules का उद्देश्य ग्राहकों को अनुचित Recovery Practices से सुरक्षा देना है। इसका मतलब यह नहीं है कि EMI नहीं भरने पर Loan अपने आप माफ हो जाएगा। Bank अपने Loan Agreement और लागू कानून के अनुसार बकाया रकम की Recovery कर सकता है। लंबे समय तक Default की स्थिति में कानूनी कार्रवाई भी संभव है। EMI भरने में परेशानी हो तो क्या करें? अगर आपको लगता है कि किसी महीने या आने वाले समय में EMI भरना मुश्किल हो सकता है, तो Bank या NBFC से जल्द संपर्क करें। अपनी Financial Situation के बारे में जानकारी देकर उपलब्ध विकल्पों के बारे में पूछें। सबसे जरूरी बात यह है कि Recovery Agent के दबाव में आकर किसी अनजान व्यक्ति के Personal Account में पैसा जमा न करें। Payment हमेशा Bank/NBFC के अधिकृत माध्यम से ही करें। RBI Loan Recovery Rules का सबसे जरूरी सार EMI समय पर नहीं चुकाने पर Bank आपसे बकाया रकम की मांग कर सकता है और नियमों के अनुसार Recovery Process शुरू कर सकता है। लेकिन Recovery के दौरान Bank या उसके Agent को ग्राहक की Privacy और सम्मान का ध्यान रखना होगा। याद रखें: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CNG Price

Delhi CNG Price: CNG के दाम में ₹3.89 की बढ़ोतरी, अब ₹86.98 प्रति किलो मिलेगा गैस

दिल्ली-NCR में CNG इस्तेमाल करने वाले वाहन चालकों को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। CNG Price Hike के तहत इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने CNG की कीमत में ₹3.89 प्रति किलो की बढ़ोतरी की है। नई कीमतें 29 अगस्त 2026 से लागू हो गई हैं। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में CNG का रेट ₹83.09 प्रति किलो से बढ़कर ₹86.98 प्रति किलो हो गया है। यह 2026 में दिल्ली-NCR में CNG की पांचवीं कीमत बढ़ोतरी है। लगातार हो रही बढ़ोतरी से CNG कार चलाने वाले लोगों के साथ-साथ ऑटो, टैक्सी, कैब और कमर्शियल वाहनों के ड्राइवरों पर भी ईंधन खर्च का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। Delhi CNG Price: अब कितना हुआ CNG का रेट? IGL की नई कीमतों के मुताबिक दिल्ली-NCR के अलग-अलग शहरों में CNG के दाम इस प्रकार हैं: दिल्ली में CNG की कीमत में सीधे ₹3.89 प्रति किलो की वृद्धि हुई है। इसका मतलब है कि जो वाहन रोजाना बड़ी मात्रा में CNG की खपत करते हैं, उनके लिए महीने का fuel budget पहले की तुलना में और बढ़ जाएगा। Why CNG Price Increased: क्यों बढ़े CNG के दाम? IGL के अनुसार, CNG की कीमत बढ़ाने की मुख्य वजह imported LNG की बढ़ी हुई लागत है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में LNG की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर गैस की supply और import cost पर पड़ा है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण LNG की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ी है। इसके चलते global energy market में कीमतों पर दबाव बना हुआ है। IGL ने इसी बढ़ी हुई input cost के एक हिस्से को CNG की कीमतों में शामिल किया है। 2026 में पांचवीं बार महंगी हुई CNG दिल्ली-NCR में वर्ष 2026 के दौरान CNG की कीमतों में यह पांचवीं बढ़ोतरी है। इससे पहले भी इस साल अलग-अलग चरणों में CNG के दाम बढ़ाए गए थे। बार-बार होने वाली price hike के कारण CNG को economical fuel मानकर इस्तेमाल करने वाले वाहन मालिकों की लागत लगातार बढ़ रही है। हालांकि पेट्रोल और डीजल की तुलना में CNG अभी भी कई वाहन चालकों के लिए एक महत्वपूर्ण alternative fuel बनी हुई है। CNG Price Hike का आम लोगों पर क्या असर होगा? CNG की कीमत बढ़ने का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो रोजाना लंबी दूरी तय करते हैं। निजी CNG कारों के अलावा auto-rickshaw, taxi, cab और commercial vehicles चलाने वालों की operating cost भी बढ़ेगी। ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए बढ़ती fuel cost का सीधा असर उनकी daily earnings पर पड़ सकता है। अगर CNG की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो भविष्य में इसका असर transportation charges और passenger fares पर भी देखने को मिल सकता है। CNG महंगी होने से बढ़ सकता है Monthly Fuel Budget उदाहरण के तौर पर, अगर कोई वाहन प्रतिदिन 5 किलो CNG की खपत करता है, तो ₹3.89 प्रति किलो की अतिरिक्त कीमत के कारण उसका खर्च करीब ₹19.45 प्रतिदिन बढ़ जाएगा। 30 दिनों में यह अतिरिक्त खर्च लगभग ₹584 हो सकता है। जिन commercial vehicles की रोजाना CNG consumption इससे कहीं अधिक है, उनके लिए अतिरिक्त मासिक खर्च भी काफी ज्यादा होगा। आगे CNG के दाम पर क्या रहेगा असर? CNG की कीमतों पर आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय LNG prices, global gas supply और पश्चिम एशिया की स्थिति का असर महत्वपूर्ण रहेगा। अगर imported gas की लागत ऊंची बनी रहती है, तो domestic CNG prices पर भी दबाव बना रह सकता है। फिलहाल दिल्ली-NCR के लोगों को 29 अगस्त से CNG के लिए ₹3.89 प्रति किलो ज्यादा भुगतान करना होगा। दिल्ली में नई CNG कीमत ₹86.98 प्रति किलो पहुंच गई है, जबकि नोएडा और गाजियाबाद में यह ₹95.59 प्रति किलो हो गई है। CNG Price Hike 2026 की यह पांचवीं बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब बढ़ती fuel और transportation costs पहले से ही आम लोगों के बजट को प्रभावित कर रही हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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