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Tenkasi

Tenkasi हादसा दो प्राइवेट बसों की टक्कर में 6 लोगों की मौत

टेन्कसी, तमिलनाडु: सोमवार को Tenkasi में एक भयंकर Bus Accident हुआ, जिसमें दो प्राइवेट बसें आमने-सामने टकरा गईं। इस हादसे में 6 लोगों की मौत हुई और करीब 30 लोग घायल हुए। हादसा इदाकल गांव के पास हुआ, जहां बसें अपने-अपने रूट पर जा रही थीं। जानकारी के अनुसार, एक बस मदुरै से सेनकोट्टई की ओर जा रही थी, जबकि दूसरी बस टेन्कसी से कोविलपट्टी जा रही थी। प्रारंभिक जांच में पता चला कि तेज रफ्तार और लापरवाह ड्राइविंग इस हादसे का मुख्य कारण हो सकता है। हादसे का विवरण: विशेषज्ञों की राय:विशेषज्ञों का कहना है कि यह हादसा तमिलनाडु की इंटरसिटी बस मार्गों पर road safety की गंभीर कमी को दर्शाता है। Driver training, bus maintenance, proper signage और speed control जैसी सावधानियां जरूरी हैं। सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया: Tenkasi Bus Accident ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि सड़क सुरक्षा पर ध्यान देना कितना जरूरी है। राज्य प्रशासन और बस ऑपरेटरों को मिलकर ऐसे हादसों को रोकने के लिए कदम उठाने होंगे हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Nitish

Nitish–Samrat गृह विभाग मिला, लेकिन असली ‘Command’ किसके पास?

बिहार की राजनीति एक बार फिर नए पावर बैलेंस के साथ सुर्खियों में है। मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने मंत्रिमंडल गठन के बाद गृह मंत्रालय का अहम विभाग भले ही बीजेपी नेता और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को सौंप दिया हो, लेकिन प्रशासनिक नियंत्रण अभी भी पूरी तरह उनके ही पास है।यानी Home Ministry BJP की, लेकिन असली Power Remote अभी भी CM Nitish के हाथ में। गृह मंत्री बने सम्राट चौधरी, पर असली कंट्रोल? एनडीए सरकार के शपथ ग्रहण के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की हुई कि क्या सम्राट चौधरी को पूरा अधिकार मिला है या सिर्फ विभाग?कागज़ों में गृह विभाग अब उनके पास है, लेकिन—✔ IAS–IPS की पोस्टिंग, ट्रांसफर✔ पुलिस प्रशासन के बड़े निर्णय✔ सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) —ये सब अभी भी मुख्यमंत्री के नियंत्रण में ही हैं। इसका मतलब साफ है कि बिहार की “Law & Order” मशीनरी पर अंतिम निर्णय अब भी नीतीश कुमार ही लेंगे। यह पावर शेयरिंग क्यों खास है? राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह फैसला भाजपा और जेडीयू के बीच पावर बैलेंस बनाए रखने की रणनीति है— एक तरह से यह power sharing with power control का मॉडल है। BJP के लिए बड़ा राजनीतिक संकेत गृह मंत्रालय जैसा बड़ा विभाग मिलना सम्राट चौधरी के लिए राजनीतिक तौर पर गेम-चेंजर साबित हो सकता है।यह माना जा रहा है कि— …तो वे बीजेपी के भविष्य के CM Face भी बन सकते हैं। हालाँकि अगर वे फेल होते हैं, तो समीकरण फिर बदल सकते हैं — बिहार की राजनीति में ये आम बात है। नीतीश कुमार का ‘silent control model’ जारी Nitish Kumar के बारे में कहा जाता है कि वे हमेशा प्रशासनिक कंट्रोल अपने पास रखते हैं — यही उनकी राजनीतिक पहचान का हिस्सा है।इस बार भी उन्होंने वही फॉर्मूला अपनाया—“दिखे कि शक्ति बंटी है, लेकिन असली शक्ति यहीं है।” हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Surya Kant

Justice Surya Kant शपथ समारोह भारत को मिला नया CJI, गांव से देश की सर्वोच्च अदालत तक का सफर

भारत के सुप्रीम कोर्ट को नया नेतृत्व मिल गया है। 24 नवंबर 2025 को जस्टिस सूर्य कांट (Justice Surya Kant) ने देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India – CJI) के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। इस ऐतिहासिक पल के साथ न सिर्फ न्यायपालिका में नया अध्याय शुरू हुआ है, बल्कि देश के लाखों कानून छात्रों और युवा वकीलों के लिए एक नई प्रेरणा भी सामने आई है। नई शुरुआत: लगभग 15 महीने का कार्यकाल Surya Kant अब फरवरी 2027 तक सर्वोच्च न्यायालय का संचालन करेंगे। उनका कार्यकाल करीब 15 महीने का होगा।वे जस्टिस बी.आर. गवई के स्थान पर आए हैं, जिन्होंने अपने उत्तराधिकारी के रूप में सूर्य कांट का नाम सुझाया था। यह बदलाव संविधान की स्थापित परंपरा के अनुरूप हुआ, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के सीनियर-मोस्ट जज को CJI नियुक्त किया जाता है। गाँव से Supreme Court तक: Surya Kant की प्रेरक कहानी Justice Surya Kant का सफर सचमुच Common Indian Family की एक प्रेरणादायक कहानी जैसा है। गाँव से निकलकर एक साधारण परिवार का बच्चा देश की सर्वोच्च अदालत का प्रमुख बने — यह सपना लाखों युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। कानूनी करियर: Young Advocate General से CJI तक उनका करियर बताता है कि निरंतर मेहनत और ईमानदारी का फल कितना ऊंचा हो सकता है। महत्वपूर्ण फैसले और कानूनी दृष्टिकोण Justice Surya Kant अपनी संवेदनशील सोच और balanced approach के लिए जाने जाते हैं। उनके कई बड़े निर्णय सुर्खियों में रहे: उनके फैसलों में एक बात साफ दिखती है — कानून सिर्फ नियम नहीं, बल्कि समाज को न्याय देने का माध्यम है। क्यों खास है Surya Kant का CJI बनना? मानवीय संदेश: सीखना कभी न छोड़ें Justice Surya Kant ने कई बार कहा है:“कानून सिर्फ करियर नहीं, समाज की सेवा का तरीका है। सीखने और जिज्ञासु रहने से ही वकील आगे बढ़ता है।” उनकी यह सोच बताती है कि वे सिर्फ कानून के विशेषज्ञ नहीं, बल्कि एक संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण वाले नेता हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Miss Universe 2025: मेक्सिको की फातिमा बोश बनीं विश्व सुंदरी, भारत की मणिका टॉप-30 तक

मेक्सिको की खूबसूरत और आत्मविश्वासी फातिमा बोश फर्नांडेज ने Miss Universe 2025 का ताज अपने नाम कर लिया है। 25 साल की फातिमा ने अपनी दमदार सोच, आत्मविश्वास और प्रेरणादायक जवाबों से दुनिया का दिल जीत लिया। भारत की ओर से गईं मणिका विश्वकर्मा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए टॉप-30 में जगह बनाई, लेकिन वह टॉप-12 में प्रवेश नहीं कर सकीं। ऐसे बनीं Miss Universe 2025 कॉन्टेस्ट के चार कठिन राउंड के बाद टॉप-5 में ये प्रतियोगी पहुंचीं— अंत में फातिमा बोश को विजेता घोषित किया गया। संघर्ष भरा रहा फातिमा का बचपन फातिमा ने एक इंटरव्यू में बताया कि उनका बचपन आसान नहीं था। वह डिस्लेक्सिया और ADHD से जूझ रही थीं, जिसके कारण स्कूल में उन्हें बुलिंग का सामना करना पड़ा। पढ़ने-लिखने में कठिनाई होने के बावजूद उन्होंने अपने अंदर के डर को ताकत बनाया और आज विश्व सुंदरी बनकर दुनिया के सामने एक मिसाल पेश की। Q&A राउंड में दिया दिल जीतने वाला जवाब फातिमा से पूछा गया—“2025 में एक महिला के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है और आप अपने खिताब का उपयोग महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल बनाने में कैसे करेंगी?” फातिमा ने जवाब दिया:“एक महिला और Miss Universe के रूप में मैं अपनी आवाज और शक्ति उन लोगों के लिए इस्तेमाल करूंगी जिन्हें इसकी जरूरत है। बहादुर महिलाएं इतिहास बनाती हैं और मैं भी बदलाव का हिस्सा बनना चाहती हूं।” सैश सेरेमनी में हुआ बड़ा विवाद 4 नवंबर 2025 को सैश सेरेमनी के दौरान विवाद हो गया।थाइलैंड के MU डायरेक्टर नवात इतसराग्रिसिल ने फातिमा को प्रमोशनल इवेंट में शामिल न होने पर ‘डंबहेड’ कह दिया।फातिमा के विरोध करने पर उन्हें सिक्योरिटी बुलाकर बाहर निकालने की कोशिश की गई। यह देखकर कई कंटेस्टेंट्स ने सैश सेरेमनी का बहिष्कार कर दिया, जिनमें Miss Universe 2024 विक्टोरिया थेलविग भी शामिल थीं। विवाद बढ़ा, वीडियो वायरल हुआ और बाद में Miss Universe के को-फाउंडर ने नवात ने बाद में माफी भी मांगी लेकिन मामला शांत होने में समय लगा। फातिमा ने इस दौरान कहा:“हमारी आवाज कोई नहीं दबा सकता। अगर कोई आपकी गरिमा पर सवाल उठाए, तो वहां से चले जाना ही सही है।” भारत की मणिका ने भी छोड़ी खास छाप फिनाले की शुरुआत सभी प्रतिभागियों के परिचय से हुई।भारत की मणिका विश्वकर्मा ने व्हाइट ड्रेस में आत्मविश्वास से भरी रैंप वॉक की और टॉप-30 में जगह बनाकर देश का नाम रोशन किया। For more updates, visit: www.deshharpal.com
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Karnataka

Karnataka सरकार का बड़ा फैसला डॉग अटैक पीड़ितों को मिलेगा ₹5 लाख मुआवजा

Karnataka में आवारा कुत्तों (Stray Dogs) के बढ़ते हमलों ने लोगों में डर और सरकार में अलर्ट दोनों बढ़ा दिए हैं। लगातार बढ़ते Dog Bite Cases, मौतों और जनता के गुस्से के बीच कर्नाटक सरकार ने राहत और नियंत्रण से जुड़े बड़े फैसलों की घोषणा की है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मुद्दे पर राज्य सरकारों को सख्त कदम उठाने का निर्देश दिया है। ₹5 Lakh का Compensation: डॉग अटैक में मौत पर बड़ी राहत Karnataka सरकार ने आदेश जारी किया है कि यदि किसी व्यक्ति की मौत आवारा कुत्तों के हमले में हो जाती है, तो उसके परिवार को ₹5 लाख का मुआवजा दिया जाएगा। यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि कर्नाटक में पिछले महीनों में कई गंभीर Dog Attack मामलों में देरी से मुआवजा मिलने पर परिवारों ने नाराज़गी जताई थी। Emergency Treatment फ्री: निजी अस्पताल भी तुरंत इलाज देंगे Karnataka सरकार ने KPME अधिनियम में बदलाव कर दिया है। अब: यह बदलाव उन मामलों के बाद किया गया, जिनमें निजी अस्पतालों द्वारा इलाज टालने की शिकायतें सामने आई थीं। कर्नाटक में Dog Bite मामलों की स्थिति ये आंकड़े साफ बताते हैं कि कर्नाटक में Stray Dog Crisis कितनी गंभीर है। Supreme Court के आदेश: “Public Places को Stray Dogs से सुरक्षित बनाओ” सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में राज्यों को Stray Dogs पर नियंत्रण के लिए सख्त निर्देश दिए: बेंगलुरु का मामला: परिवार को तीन महीने बाद मिला 5 लाख मुआवजा बेंगलुरु के कोडिगेहल्ली, येलहंका क्षेत्र में 68 साल के सीतप्पा की आवारा कुत्तों के झुंड ने हमला कर जान ले ली थी।तीन महीने तक कागज़ी प्रक्रियाओं में फंसे रहने के बाद अंतत: उनके परिजनों को ₹5 लाख का मुआवजा जारी हुआ।इस मामले ने प्रशासनिक लापरवाही और सिस्टम की धीमी प्रक्रिया को उजागर कर दिया। विवाद भी जारी: नेता का ‘2800 कुत्तों को दफनाने’ वाला बयान JD(S) के विधायक SL भूजगोड़ा ने दावा किया कि वे पहले 2,800 आवारा कुत्तों को ‘कंपोस्टिंग पिट’ में मारकर दफना चुके हैं।इस बयान पर Animal Rights Groups ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और इसे कानूनन गलत बताया।सरकार ने भी स्पष्ट कहा कि Stray Dogs पर क्रूरता का कानून सख्त है और किसी भी गैर-कानूनी कार्रवाई पर कार्रवाई होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rohini Acharya

Rohini Acharya किडनी Donor बेटी का Tejashwi पर सीधा वार, परिवार में तनाव बढ़ा

राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के परिवार में बीते दिनों से चल रहा विवाद अब बड़ा रूप ले चुका है। उनकी बेटी रोहिणी आचार्य (Rohini Acharya), जिन्होंने 2022 में अपने पिता को किडनी दान की थी, अब लगातार परिवार पर गंभीर आरोप लगा रही हैं। यह विवाद सिर्फ एक पारिवारिक तनाव नहीं, बल्कि राजनीति, भावनाओं और जेंडर संवेदनशीलता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है। किडनी Donation के बाद क्यों बढ़ी दूरियां? रोहिणी आचार्य ने दावा किया कि किडनी दान के बाद परिवार में उनके साथ गलत व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि: सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा कि यह सब उनके लिए मानसिक रूप से बेहद दर्दनाक रहा और उन्होंने परिवार से रिश्ते तोड़ने का फैसला कर लिया। Tejashwi Yadav पर निशाना—“क्यों नहीं दी किडनी?” रोहिणी ने अपने भाई तेजस्वी यादव और उनके सहयोगियों पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि: उन्होंने तेजस्वी के सलाहकारों को भी चुनौती दी कि अगर वे इतने नेक और दयालु हैं, तो अस्पताल जाकर जरूरतमंदों को किडनी दान करें। बड़ी दरार: तीन बहनों का घर छोड़ना कई रिपोर्ट्स के अनुसार, विवाद बढ़ने के बाद लालू यादव की तीन और बेटियाँ — रागिनी, चंदा, और राजलक्ष्मी — परिवार के घर से बाहर चली गई हैं। इससे स्पष्ट होता है कि तनाव केवल दो-तीन लोगों तक सीमित नहीं, बल्कि परिवार के व्यापक हिस्से में फैल चुका है। लालू और तेजस्वी की चुप्पी—RJD पर क्या असर? राजद नेतृत्व की ओर से इस विवाद पर अब तक कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है। इन सब ने मिलकर राजनीतिक रूप से राजद को नुकसान पहुँचाया है। महिलाओं पर ‘बलिदान’ का दबाव—रोहिणी की बड़ी बात रोहिणी आचार्य ने समाज में बेटियों पर पड़ने वाले भावनात्मक दबाव की बात भी उठाई। उनका कहना है: “माता-पिता का जीवन बचाना जरूरी है, लेकिन बेटियों को हमेशा बलिदान की प्रतीक समझना गलत है। परिवार में बेटा हो तो जिम्मेदारी पहले उसी की होनी चाहिए।” यह बयान सामाजिक और जेंडर बहस को भी जन्म देता है। कानूनी व मेडिकल पहलू: कौन दे सकता है किडनी? भारत के कानूनों के अनुसार: रोहिणी का कहना है कि उन्होंने यह दान स्वेच्छा से और भावनाओं से प्रेरित होकर किया था—लेकिन बाद में उन्हें बदले में अपमान मिला। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Supreme Court

Supreme Court का बड़ा फैसला बिल मंजूरी की समयसीमा नहीं राज्यपाल की देरी पर सीमित समीक्षा

Supreme Court ने राष्ट्रपति द्वारा भेजे गए महत्वपूर्ण Presidential Reference पर बड़ा फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि Governor और President के लिए Bill Assent की कोई Fixed Timeline संविधान में नहीं है, इसलिए कोर्ट भी ऐसी कोई Deadline तय नहीं कर सकती। साथ ही कोर्ट ने ‘Deemed Assent’ जैसे विचार को पूरी तरह असंवैधानिक बताते हुए खारिज कर दिया। यह फैसला राज्यों और केंद्र के बीच चल रही संवैधानिक बहस को लेकर बेहद अहम माना जा रहा है। क्या कहा Supreme Court ने? 1. Governor–President पर Timeline लागू नहीं कोर्ट ने कहा कि: इन दोनों में किसी ठोस समयसीमा का ज़िक्र नहीं है।संविधान ने जानबूझकर इन्हें Flexible रखा है, इसलिए कोर्ट इन्हें “Compulsory Deadline” में नहीं बदल सकती। ‘Deemed Assent’ Idea Unconstitutional Supreme Court ने स्पष्ट कहा कि: “अगर अदालत कोई Deadline बना दे और वह बीत जाए, तो बिल को स्वीकृत मान लेना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।” इसका मतलब: यानी Deemed Assent का कोई अस्तित्व नहीं है। लंबी Delay पर Court कर सकती है हस्तक्षेप कोर्ट ने यह भी माना कि: लेकिन: यह Judicial Review की सीमा है। Article 361 Governor को Personal Immunity देता है, लेकिन Office Review हो सकता है कोर्ट ने कहा कि Governor पर व्यक्तिगत केस नहीं चल सकता,लेकिन अगर: तो Court Governor Office पर समीक्षा कर सकती है। Governor के पास Bill पर क्या विकल्प हैं? जब Bill Governor के पास पहुँचता है, तो वह: कोर्ट ने कहा: “बिल रोककर बिना वापस भेजे बैठना संघीय संरचना (Federalism) के लिए हानिकारक है।” President को हर बार Supreme Court से सलाह लेने की जरूरत नहीं Supreme Court ने स्पष्ट किया कि: फैसले का Impact क्या है? राज्यों पर असर केंद्र–राज्य संबंधों पर प्रभाव न्यायपालिका की स्थिति हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Nitish Kumar

Bihar Nitish Kumar ने 10वीं बार ली CM की शपथ, बीजेपी को मिली बड़ी हिस्सेदारी

बिहार की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक दिन दर्ज हुआ, जब नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने पटना के गांधी मैदान में 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। यह उपलब्धि उन्हें भारत के सबसे लंबे समय तक नेतृत्व करने वाले मुख्यमंत्रियों की सूची में और भी मजबूती से स्थापित करती है। इस मौके पर पूरा NDA गठबंधन (BJP-JDU-LJP) एकजुट नजर आया और समारोह में राष्ट्रीय स्तर के बड़े नेताओं की मौजूदगी ने राजनीतिक संदेश भी साफ कर दिया। NDA की धमाकेदार जीत के बाद शपथ ग्रहण हाल ही में संपन्न हुए बिहार विधानसभा चुनाव में National Democratic Alliance (NDA) ने शानदार जीत हासिल की, जहां गठबंधन ने 243 में से 202 सीटें जीतीं। बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि जेडीयू ने भी मजबूत पकड़ बनाए रखी। नीतीश का इस्तीफा और फिर सरकार गठन शपथ ग्रहण से पहले Nitish Kumar ने परंपरानुसार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर नई सरकार गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।इसके बाद NDA विधायकों की बैठक में उन्हें सर्वसम्मति से गठबंधन का नेता चुना गया।राज्यपाल को समर्थन पत्र सौंपकर उन्होंने नई सरकार बनाने का दावा किया। गांधी मैदान में भव्य समारोह, PM Modi-Amir Shah रहे मौजूद दो Deputy CMs – Samrat Choudhary और Vijay Sinha की वापसी NDA ने स्थिरता और लगातार नेतृत्व के संदेश को मजबूत करते हुए इसके साथ ही बिहार कैबिनेट के करीब 20 मंत्रियों को भी शपथ दिलाई गई, जिसमें BJP, JDU, LJP (रामविलास), HAM और RLM जैसे सहयोगी दलों को भी हिस्सेदारी दी गई। 10वीं बार मुख्यमंत्री – रिकॉर्ड जोड़ा गया इतिहास में Nitish Kumar ने 2000 से अब तक कई बार सत्ता परिवर्तन, गठबंधन राजनीति और नए समीकरणों के बीच भी अपना नेतृत्व कायम रखा है।उनका 10वीं बार CM बनना बिहार की राजनीति में एक अद्वितीय रिकॉर्ड है। आगे की रणनीति – विकास, रोजगार और स्थिरता पर फोकस नई सरकार से लोगों की उम्मीदें— NDA ने संकेत दिए हैं कि उनकी प्राथमिकता “विकसित बिहार 2030” के विज़न को तेज़ी से लागू करना होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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नीतीश कुमार, बिहार NDA सरकार, बिहार शपथ ग्रहण समारोह, सम्राट चौधरी डिप्टी सीएम, विजय सिन्हा, बिहार राजनीति अपडेट, चिराग पासवान डिमांड, बिहार सरकार गठन

नीतीश कुमार चुने गए NDA विधायक दल के नेता, कल दोपहर लेंगे CM पद की शपथ

NDA ने नीतीश कुमार को विधायक दल का नेता चुना। वे कल 1.30 बजे गांधी मैदान में CM पद की शपथ लेंगे। सम्राट चौधरी व विजय सिन्हा डिप्टी CM बनेंगे। Bihar Politics Update: NDA विधायक दल ने नीतीश कुमार को नेता चुना, कल लेंगे CM पद की शपथ पटना। बिहार में चल रहे सियासी घटनाक्रम के बीच आज बड़ा फैसला सामने आया है। बिहार विधानसभा के सेंट्रल हॉल में आयोजित बैठक में NDA विधायक दल ने सर्वसम्मति से नीतीश कुमार को नेता चुन लिया है। इसके साथ ही राज्य में एक बार फिर सत्ता परिवर्तन की तस्वीर साफ हो गई है। सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार थोड़ी देर में राजभवन जाकर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे और नई NDA सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। कल 1.30 बजे गांधी मैदान में शपथ ग्रहण—दो मंच तैयार सरकारी सूत्रों ने पुष्टि की है कि गुरुवार दोपहर 1.30 बजे गांधी मैदान में नीतीश कुमार 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।शपथ ग्रहण समारोह के लिए दो बड़े मंच तैयार किए गए हैं, ताकि VIP मूवमेंट और सुरक्षा व्यवस्था बेहतर ढंग से संचालित हो सके। समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय नेतृत्व और 11 राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होने वाले हैं। इसके लिए लगभग 150 विशेष मेहमानों को निमंत्रण भेजा गया है। BJP विधायक दल की बैठक: सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा होंगे डिप्टी CM इससे पहले आज सुबह 11 बजे पटना स्थित बीजेपी ऑफिस में विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक हुई।इसमें इसका सीधा मतलब है कि सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा—दोनों को डिप्टी सीएम बनाया जाएगा।NDA संरचना के तहत यह एक संतुलित राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। JDU विधायक दल ने भी नीतीश कुमार के नाम पर मुहर लगाई बीजेपी की बैठक से पहले JDU विधायक दल की बैठक में भी नीतीश कुमार को एकमत से नेता चुना गया।केंद्रीय नेतृत्व ने राज्य में सरकार गठन की प्रक्रिया को सुचारु रूप से आगे बढ़ाने के लिए पहले ही केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिए थे। तीनों नेता मंगलवार रात ही पटना पहुंच चुके थे। अमित शाह आज पटना पहुंचेंगे, मंत्रियों की लिस्ट फाइनल होगी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज शाम पटना पहुंचेंगे।वे पहले नीतीश कुमार से मुलाकात करेंगे और फिर बीजेपी कोटे के मंत्रियों की अंतिम सूची को फाइनल करेंगे। नई सरकार के कैबिनेट में चेहरे बदलने की संभावना है और कई नए नेताओं की एंट्री भी देखी जा सकती है। चिराग पासवान की डिमांड—2 मंत्री पद + डिप्टी CM पद सूत्रों के मुताबिक, LJP(R) प्रमुख चिराग पासवान ने NDA की अंदरूनी बैठकों में अपनी पार्टी के लिए बड़ा दावा रखा है। चिराग अपने बहनोई अरुण भारती का नाम भी आगे बढ़ा सकते हैं।इस बार विधानसभा चुनाव में LJP(R) ने 19 सीटें जीतकर बड़ी मजबूती दिखाई है, जिसके चलते उनकी मांगों को लेकर NDA में चर्चा तेज है। बिहार की राजनीति में एक और बड़ा दिन NDA के पुनर्गठन, डिप्टी CM के नए चेहरों और चिराग पासवान की डिमांड के साथ बिहार की राजनीति एक नए अध्याय में प्रवेश कर रही है।कल का शपथ ग्रहण समारोह इस नई सत्ता संरचना की औपचारिक शुरुआत होगी
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Breaking Update: अमेरिका से भारत लाया गया कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का भाई अनमोल,

अमेरिका से प्रत्यर्पित कर भारत लाए गए गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के भाई अनमोल बिश्नोई को NIA ने दिल्ली में गिरफ्तार किया। बाबा सिद्दीकी मर्डर केस सहित कई मामलों में वांछित। देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है। खूंखार गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के भाई और उसके सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में से एक अनमोल बिश्नोई को अमेरिका से प्रत्यर्पित कर बुधवार को भारत लाया गया। यह कार्रवाई राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के नेतृत्व में कई एजेंसियों की संयुक्त मुहिम का परिणाम है। भारत लाए जाने के बाद अनमोल बिश्नोई को सख्त सुरक्षा व्यवस्था के बीच दिल्ली स्थित पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किए जाने की तैयारी है। जानकारी के मुताबिक 2022 से फरार अनमोल अमेरिका में बैठकर लगातार अपना गैंग चलाता था और कई मामलों की साजिश वहीं से रचता था। बाबा सिद्दीकी मर्डर केस का मुख्य आरोपी अनमोल बिश्नोई, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता और महाराष्ट्र सरकार के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी की हत्या का मुख्य आरोपी है।12 अक्टूबर 2024 की रात बांद्रा में जीशान सिद्दीकी के कार्यालय के बाहर अज्ञात हमलावरों ने बाबा सिद्दीकी को गोली मारकर हत्या कर दी थी।जांच में पता चला कि इस पूरी साजिश के पीछे लॉरेंस बिश्नोई गैंग का हाथ था, और इसकी कमान विदेश में बैठे अनमोल ने संभाल रखी थी। सलमान खान के घर फायरिंग केस में भी नाम अप्रैल 2024 में मुंबई में अभिनेता सलमान खान के घर के बाहर हुई फायरिंग की घटना में भी अनमोल बिश्नोई का नाम सामने आया था।मुंबई पुलिस ने अमेरिका और कनाडा को कई प्रस्ताव भेजकर उसके प्रत्यर्पण की मांग की थी। कई राज्यों में दर्ज हैं दर्जनों गंभीर मामले अनमोल पर पूरे देश में हत्या, रंगदारी, गैंग संचालन, अवैध हथियारों की खरीद और इंटरनेशनल नेटवर्क बनाने जैसे कई गंभीर मामले दर्ज हैं।केंद्र सरकार यह तय करेगी कि पहली हिरासत किस एजेंसी को दी जाएगी—NIA, मुंबई पुलिस या अन्य राज्य की एजेंसियां। कनाडा और अमेरिका के बीच घूमता था, जाली पासपोर्ट भी मिला सूत्रों के अनुसार— NIA ने उसके सिर पर 10 लाख रुपये का इनाम रखा था। सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में भी कनेक्शन 2022 में पंजाब के मशहूर गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या में भी अनमोल बिश्नोई का नाम सामने आया था।मूसेवाला मर्डर केस के दौरान गैंग की डिजिटल बातचीत में अनमोल के निर्देश मिलने के प्रमाण मिले थे। कई एजेंसियों की संयुक्त मुहिम का नतीजा एक सरकारी अधिकारी के अनुसार—“पिछले कई महीनों से इंटरनेशनल एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय चल रहा था। इसके बाद ही अनमोल को अमेरिका से भारत लाना संभव हो सका।” मुंबई पुलिस भी अपने मामलों में उसकी हिरासत की मांग करने की तैयारी कर रही है।
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Rahul Gandhi

Mallikarjun Kharge Shuddhikaran Row: मंच ‘शुद्ध’ कराने पर बवाल, Rahul Gandhi ने BJP-RSS को घेरा

 उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष Rahul Gandhi मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद कथित तौर पर मंच के ‘शुद्धिकरण’ को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इस मामले को लेकर Rahul Gandhi ने BJP और RSS पर जातिगत भेदभाव तथा ‘मनुवादी सोच’ को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। वहीं, BJP ने आरोपों से दूरी बनाते हुए मामले की जांच कराने की बात कही है। क्या है Haldwani Shuddhikaran विवाद? मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली को संबोधित किया था। रैली के कुछ दिन बाद कथित तौर पर कुछ लोगों ने मैदान में पूजा-पाठ और हवन कर ‘शुद्धिकरण’ किया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई खड़गे के दलित समुदाय से होने के कारण की गई। पार्टी ने इसे छुआछूत और जातिगत भेदभाव की मानसिकता का उदाहरण बताया है। हालांकि, BJP की ओर से कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया गया है। BJP नेताओं का कहना है कि रैली के दौरान लगाए गए कुछ नारों से धार्मिक भावनाएं आहत हुई थीं और इसी वजह से धार्मिक अनुष्ठान किया गया था। BJP ने इस कार्रवाई को खड़गे की जाति से जोड़ने पर भी सवाल उठाए हैं। Mallikarjun Kharge ने राज्यसभा में उठाया मुद्दा मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मामले को राज्यसभा में भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके भाषण के बाद उस मंच का ‘शुद्धिकरण’ किया गया, जिससे उन्हें बेहद अपमानित महसूस हुआ। खड़गे ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी व्यक्ति को उसकी जाति के आधार पर अपवित्र मानना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। उन्होंने इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ Untouchability Act के तहत कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग की। खड़गे का कहना है कि ऐसी घटनाएं केवल किसी एक व्यक्ति का अपमान नहीं हैं, बल्कि देश में सामाजिक समानता और संवैधानिक मूल्यों पर भी सवाल खड़े करती हैं। Rahul Gandhi का BJP-RSS पर हमला हल्द्वानी के इस विवाद पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कथित ‘शुद्धिकरण’ को दलितों के अपमान से जोड़ते हुए BJP और RSS पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस तरह की सोच BJP-RSS की कथित ‘मनुवादी मानसिकता’ को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और छुआछूत तथा जातिगत भेदभाव के लिए आधुनिक भारत में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। कांग्रेस ने इस मुद्दे को सामाजिक न्याय और दलित सम्मान से जोड़ते हुए सरकार से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। क्या Rahul Gandhi ने SC/ST Act के तहत FIR की मांग की? इस मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार SC/ST Act के तहत FIR दर्ज कराने की स्पष्ट मांग राहुल गांधी की ओर से नहीं बताई गई है। रिपोर्टों में मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा Untouchability Act के तहत मामला दर्ज करने और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग का उल्लेख है। वहीं, राहुल गांधी ने घटना को दलितों के अपमान, जातिगत भेदभाव और कथित मनुवादी सोच से जोड़कर BJP-RSS पर राजनीतिक हमला किया। इसलिए खबर को पेश करते समय राहुल गांधी के बयान और खड़गे की कानूनी कार्रवाई की मांग को अलग-अलग रखना जरूरी है। BJP ने क्या कहा? BJP ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है। पार्टी की ओर से कहा गया कि वह किसी भी तरह के भेदभावपूर्ण व्यवहार का समर्थन नहीं करती। केंद्रीय मंत्री और BJP के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा ने मामले की जांच का आश्वासन दिया। BJP नेताओं का कहना है कि घटना के पीछे धार्मिक कारण हो सकते हैं और इसे खड़गे की जाति से जोड़ना उचित नहीं है। अब इस मामले में जांच के परिणाम महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि इसी से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित ‘शुद्धिकरण’ किसने कराया और इसके पीछे वास्तविक कारण क्या था। कांग्रेस ने राज्यपाल से भी की शिकायत मामले को लेकर कांग्रेस नेताओं ने उत्तराखंड के राज्यपाल से मुलाकात कर कथित ‘शुद्धिकरण’ की निष्पक्ष जांच की मांग भी की है। कांग्रेस का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की जाति के आधार पर किसी सार्वजनिक स्थान या मंच को ‘अपवित्र’ माना गया है, तो यह गंभीर सामाजिक और संवैधानिक मुद्दा है। Haldwani Row बना Political मुद्दा हल्द्वानी का ‘शुद्धिकरण’ विवाद अब स्थानीय घटना से आगे बढ़कर राष्ट्रीय राजनीति का मुद्दा बन गया है। कांग्रेस इसे Dalit dignity, social equality और constitutional values से जोड़ रही है, जबकि BJP कांग्रेस पर घटना को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगा रही है। फिलहाल दोनों पक्षों के दावों के बीच इस मामले में जांच और संभावित कानूनी कार्रवाई पर सबकी नजर है। विवाद के आगे बढ़ने के साथ Rahul Gandhi, Mallikarjun Kharge, Haldwani Shuddhikaran Row, FIR और SC/ST Act जैसे मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में बने हुए हैं।
H-1B

H-1B Rules में बड़ा बदलाव: Trump हटाएंगे 60 Days Grace Period? Indian IT Professionals पर असर

अमेरिका में काम करने वाले भारतीय H-1B visa holders के लिए Donald Trump administration की immigration policies लगातार चिंता बढ़ा रही हैं। अब H-1B के तहत मिलने वाली 60 Days Grace Period को खत्म करने की तैयारी की खबरों ने भारतीय IT professionals के बीच नई चिंता पैदा कर दी है। अगर यह प्रस्ताव अंतिम रूप से लागू होता है, तो नौकरी जाने के बाद H-1B workers को अमेरिका में नई नौकरी तलाशने के लिए मिलने वाली मौजूदा 60 दिनों की राहत खत्म हो सकती है। इसके साथ ही H-1B visa से जुड़ी बढ़ी हुई लागत और दूसरे proposed immigration changes भी भारतीय professionals के लिए अमेरिका में नौकरी और long-term career planning को प्रभावित कर सकते हैं। क्या है H-1B 60 Days Grace Period? मौजूदा नियमों के तहत, अगर किसी H-1B worker की नौकरी समाप्त हो जाती है, तो कुछ परिस्थितियों में उसे अधिकतम 60 दिन या उसके authorized stay की समाप्ति तक, जो भी पहले हो, अमेरिका में रहने की अनुमति मिल सकती है। इस दौरान कर्मचारी: टेक्नोलॉजी सेक्टर में layoffs के दौरान यह grace period H-1B workers के लिए एक महत्वपूर्ण safety net बन गई है। Trump Administration क्यों बदलना चाहती है H-1B Rules? Trump administration लंबे समय से अमेरिकी workers को प्राथमिकता देने और foreign workers पर अमेरिकी कंपनियों की निर्भरता कम करने की नीति पर जोर देती रही है। प्रस्तावित बदलावों का व्यापक उद्देश्य H-1B program में ज्यादा सख्ती और oversight लाना है। हालांकि, 60-day grace period को खत्म करने का प्रस्ताव अभी अंतिम रूप से लागू नियम नहीं माना जा सकता। अंतिम regulatory process और effective date यह तय करेंगे कि बदलाव वास्तव में कब और किस रूप में लागू होगा। Indians पर सबसे बड़ा असर क्या होगा? H-1B program में भारतीय professionals की बड़ी हिस्सेदारी होने के कारण किसी भी बड़े बदलाव का असर भारतीयों पर विशेष रूप से पड़ सकता है। 1. Layoff के बाद बढ़ेगा Immigration Pressure अगर किसी भारतीय H-1B employee की नौकरी चली जाती है, तो मौजूदा 60 दिनों का buffer उपलब्ध नहीं होने पर उसे बहुत तेजी से नया employer या दूसरा वैध immigration option तलाशना पड़ सकता है। इससे layoffs का असर सिर्फ नौकरी खोने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अमेरिका में रहने की स्थिति भी तुरंत चिंता का विषय बन सकती है। 2. IT Professionals पर ज्यादा असर भारतीय H-1B workers की बड़ी संख्या technology और specialized professional roles में काम करती है। इसलिए software engineers, IT consultants, data professionals और दूसरे skilled workers के लिए नौकरी बदलने की समय-सीमा महत्वपूर्ण हो सकती है। नई व्यवस्था में companies के बीच job switch करने की प्रक्रिया को पहले से ज्यादा जल्दी पूरा करना जरूरी हो सकता है। 3. कम समय में Job Search का दबाव 60 दिन की grace period खत्म होने की स्थिति में कर्मचारी के पास नई नौकरी तलाशने के लिए कम flexibility होगी। ऐसे में कुछ workers को: H-1B Fee में भारी बढ़ोतरी से भी बढ़ी चिंता H-1B program में प्रस्तावित एक और बड़ा बदलाव इसकी लागत से जुड़ा है। Trump administration ने नए H-1B petitions से जुड़ी $103,265 की proposed fee को लेकर कदम उठाए हैं। यह समझना जरूरी है कि इसका अर्थ यह नहीं है कि हर H-1B employee को अपनी जेब से करीब $100,000 देना होगा। यह मुख्य रूप से employer-side cost से जुड़ा प्रस्ताव है। फिर भी इतनी बड़ी लागत कंपनियों के hiring decisions को प्रभावित कर सकती है। Indian IT Companies के लिए क्या बदल सकता है? H-1B rules में सख्ती और बढ़ी हुई लागत का असर भारतीय IT companies की US business strategy पर भी पड़ सकता है। कंपनियां संभावित रूप से: इसका मतलब यह हो सकता है कि आने वाले समय में भारतीय IT professionals के लिए US onsite opportunities की competition और बढ़ जाए। H-4 Visa पर रहने वाले परिवारों पर भी असर H-1B employee की immigration स्थिति का असर उसके परिवार पर भी पड़ सकता है। H-4 status पर अमेरिका में रहने वाले spouse और children के लिए भी primary H-1B holder की स्थिति महत्वपूर्ण होती है। अगर principal H-1B worker को नौकरी जाने के बाद जल्दी नया immigration solution नहीं मिलता, तो परिवार को भी relocation या दूसरे immigration options पर विचार करना पड़ सकता है। इसका असर बच्चों की schooling, spouse की employment और परिवार की financial planning पर भी पड़ सकता है। क्या हर H-1B worker को नौकरी जाते ही अमेरिका छोड़ना पड़ेगा? यह सबसे महत्वपूर्ण बात है। 60-day grace period खत्म करने का प्रस्ताव अगर लागू होता भी है, तो उसकी वास्तविक conditions अंतिम नियम में स्पष्ट होंगी। इसके अलावा H-1B worker की स्थिति उसके individual immigration circumstances, pending petitions, authorized stay और उपलब्ध दूसरे legal options पर निर्भर कर सकती है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि grace period हटते ही हर H-1B worker को नौकरी खत्म होने के अगले दिन अमेरिका छोड़ना पड़ेगा। क्या भारतीयों के लिए US में Jobs खत्म हो जाएंगी? ऐसा कहना भी सही नहीं होगा। अमेरिका की technology, healthcare, research, engineering और दूसरे specialized sectors में skilled professionals की मांग बनी हुई है। लेकिन नए नियमों से H-1B sponsorship की लागत और immigration uncertainty बढ़ सकती है। इसका सबसे बड़ा असर नए applicants और ऐसे professionals पर पड़ सकता है जिन्हें employer sponsorship की जरूरत है। H-1B Indians के लिए आगे क्या महत्वपूर्ण होगा? भारतीय H-1B professionals को आने वाले समय में immigration policy में होने वाले बदलावों पर नजर रखनी होगी। खासकर ये चार चीजें महत्वपूर्ण रहेंगी: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
PM Modi

PM Modi in Uzbekistan: SCO Summit से पहले पीएम मोदी का बड़ा बयान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) शनिवार को Uzbekistan और Kyrgyz Republic के चार दिवसीय दौरे के लिए रवाना हो गए। 29 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक चलने वाली इस यात्रा में पीएम मोदी पहले उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद जाएंगे। इसके बाद वह किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित होने वाले 26वें Shanghai Cooperation Organisation (SCO) Summit में हिस्सा लेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दौरे से पहले कहा कि भारत SCO के सदस्य देशों के साथ मिलकर ऐसा क्षेत्र बनाने की दिशा में काम करेगा, जो आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से मुक्त हो। उन्होंने SCO के लिए भारत की प्राथमिकताओं को Security, Connectivity और Opportunity से जोड़ा है। PM Modi Uzbekistan Visit: द्विपक्षीय संबंधों पर होगी अहम बातचीत उज्बेकिस्तान की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। दोनों नेताओं के बीच भारत और उज्बेकिस्तान के संबंधों को और मजबूत करने के लिए कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। इस दौरान Trade and Investment, Defence, Energy, Education और Digital Connectivity जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होगा। भारत के लिए उज्बेकिस्तान Central Asia का एक महत्वपूर्ण साझेदार है। ऐसे में पीएम मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच आर्थिक, सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। Tashkent में Shastri Memorial और Mahatma Gandhi Centre जाएंगे PM Modi ताशकंद में प्रधानमंत्री मोदी Lal Bahadur Shastri Memorial और Mahatma Gandhi Centre का दौरा भी करेंगे। इन कार्यक्रमों के जरिए भारत और उज्बेकिस्तान के बीच ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित किया जाएगा। भारत और Central Asia के बीच सदियों पुराने व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। मौजूदा दौर में दोनों पक्ष इन रिश्तों को आधुनिक आर्थिक और रणनीतिक सहयोग में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। SCO Summit 2026 में Terrorism पर भारत का सख्त रुख उज्बेकिस्तान दौरे के बाद पीएम मोदी 31 अगस्त और 1 सितंबर को बिश्केक में होने वाले 26वें SCO Summit में शामिल होंगे। यह सम्मेलन SCO की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। SCO Summit में regional security, terrorism, extremism, connectivity और economic cooperation जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। भारत लंबे समय से आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत कार्रवाई की वकालत करता रहा है। पीएम मोदी ने कहा है कि भारत SCO के माध्यम से ऐसे क्षेत्र के निर्माण के लिए काम करेगा, जो terrorism, separatism और extremism से मुक्त हो। उनका यह संदेश SCO Summit में भारत की सुरक्षा प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है। Security और Connectivity पर भी रहेगा फोकस SCO के मंच पर भारत के लिए Security, Connectivity और Opportunity प्रमुख प्राथमिकताएं हैं। मध्य एशिया के साथ बेहतर connectivity भारत के आर्थिक और रणनीतिक हितों के लिए महत्वपूर्ण है। व्यापार मार्गों, ऊर्जा सहयोग, डिजिटल कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा देने से भारत और Central Asian देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूती मिल सकती है। प्रधानमंत्री मोदी SCO Summit के दौरान अन्य सदस्य देशों के नेताओं के साथ Bilateral Meetings भी कर सकते हैं। इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर बातचीत की संभावना है। World Nomad Games के Opening Ceremony में शामिल होंगे PM Modi किर्गिस्तान दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी 6th World Nomad Games के Opening Ceremony में भी शामिल होंगे। यह आयोजन Central Asia की पारंपरिक संस्कृति, खेल और विरासत को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करता है। पीएम मोदी की इस कार्यक्रम में भागीदारी भारत और किर्गिस्तान के बीच people-to-people और cultural ties को और मजबूत करने का अवसर भी होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
RBI

EMI नहीं चुकाई तो क्या होगा? RBI Loan Recovery Rules में बदलाव, जानिए Bank क्या नहीं कर सकता

अगर आपने Personal Loan, Home Loan, Car Loan या किसी अन्य तरह का Loan लिया है और किसी वजह से EMI समय पर नहीं चुका पा रहे हैं, तो आपके लिए RBI के Loan Recovery Rules जानना बेहद जरूरी है। EMI डिफॉल्ट होने पर बैंक या NBFC बकाया रकम की Recovery कर सकता है, लेकिन इसके लिए उसे RBI के नियमों का पालन करना जरूरी है। कई लोग यह मान लेते हैं कि EMI मिस होने के बाद Recovery Agent घर आकर धमका सकता है या किसी भी समय फोन कर सकता है। ऐसा नहीं है। RBI ने Loan Recovery के दौरान ग्राहकों के सम्मान, Privacy और उचित व्यवहार को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं। EMI Miss होने पर सबसे पहले क्या होता है? अगर आपकी EMI तय तारीख पर जमा नहीं होती है, तो बैंक इसे Overdue Payment के रूप में दर्ज कर सकता है। Loan Agreement के मुताबिक बैंक बकाया रकम के साथ लागू ब्याज या अन्य वैध Charges की मांग कर सकता है। अगर EMI लगातार Miss होती रहती है, तो बैंक ग्राहक से संपर्क कर सकता है और बकाया रकम चुकाने के लिए कह सकता है। लंबे समय तक भुगतान न होने पर बैंक अपने नियमों और लागू कानून के अनुसार Recovery Process आगे बढ़ा सकता है। इसलिए RBI के नियमों का मतलब यह नहीं है कि EMI नहीं चुकाने पर बैंक पैसा नहीं मांग सकता। नियम मुख्य रूप से यह तय करते हैं कि Recovery किस तरीके से की जा सकती है। RBI Loan Recovery Rules: Bank आपको कब कॉल कर सकता है? RBI के निर्देशों के अनुसार Overdue Loan की Recovery के लिए ग्राहक से सुबह 8 बजे से पहले और शाम 7 बजे के बाद संपर्क नहीं किया जाना चाहिए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि Recovery Agent ग्राहकों को अनुचित समय पर फोन करके परेशान न करें। अगर कोई Recovery Agent लगातार देर रात या सुबह-सुबह कॉल करता है, तो ग्राहक इस मामले की शिकायत संबंधित Bank या NBFC से कर सकता है। Recovery Agent आपको धमका नहीं सकता Loan की Recovery के लिए Bank या NBFC Recovery Agent की मदद ले सकता है, लेकिन Agent को ग्राहक के साथ धमकी, गाली-गलौज, अपमानजनक व्यवहार या मानसिक दबाव बनाने की अनुमति नहीं है। Recovery का उद्देश्य बकाया रकम की वसूली करना है, ग्राहक को डराना या परेशान करना नहीं। RBI ने Regulated Entities को अपने Recovery Agents की गतिविधियों पर उचित निगरानी रखने की जिम्मेदारी भी दी है। परिवार और दोस्तों को भी परेशान नहीं कर सकता Bank अगर आपकी EMI बकाया है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि Recovery Agent आपके परिवार, दोस्तों या परिचितों को परेशान करके आप पर दबाव बनाए। ग्राहक की Privacy और सम्मान का ध्यान रखना जरूरी है। किसी व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करना या उसके कर्ज की जानकारी का अनुचित तरीके से इस्तेमाल करना Recovery का स्वीकार्य तरीका नहीं है। क्या Bank घर आकर Recovery कर सकता है? बकाया Loan की Recovery के लिए Bank या उसका अधिकृत Recovery Agent ग्राहक से संपर्क कर सकता है। हालांकि, Recovery करते समय निर्धारित नियमों और कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। अगर Loan के बदले कोई Asset जैसे Car, Property या अन्य Security रखी गई है, तो Default की स्थिति में Bank के पास कानून और Loan Agreement के तहत Recovery के अधिकार हो सकते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि Recovery Agent अपनी मर्जी से जबरन सामान या संपत्ति पर कब्जा कर सकता है। Loan Default होने पर Credit Score पर भी असर पड़ सकता है EMI का लगातार भुगतान न करने का असर केवल Bank Recovery तक सीमित नहीं रहता। Loan Repayment History आपके Credit Profile को प्रभावित कर सकती है। अगर Loan Account में लगातार Default होता है, तो भविष्य में Loan या Credit Card लेने में परेशानी हो सकती है। इसलिए आर्थिक परेशानी होने पर EMI को नजरअंदाज करने के बजाय Bank से समय रहते संपर्क करना बेहतर होता है। Recovery Agent परेशान करे तो क्या करें? अगर कोई Recovery Agent RBI के नियमों का उल्लंघन करता है, तो ग्राहक को सबसे पहले संबंधित Bank या NBFC के Grievance Redressal Mechanism में शिकायत करनी चाहिए। शिकायत करते समय कॉल रिकॉर्ड, SMS, WhatsApp Message, Email या अन्य उपलब्ध सबूत सुरक्षित रखना उपयोगी हो सकता है। अगर Bank या NBFC से शिकायत का समाधान नहीं होता है, तो पात्र मामलों में RBI की Ombudsman व्यवस्था के तहत शिकायत की जा सकती है। क्या EMI नहीं भरने पर Bank Loan माफ कर देगा? नहीं। RBI के Recovery Rules का उद्देश्य ग्राहकों को अनुचित Recovery Practices से सुरक्षा देना है। इसका मतलब यह नहीं है कि EMI नहीं भरने पर Loan अपने आप माफ हो जाएगा। Bank अपने Loan Agreement और लागू कानून के अनुसार बकाया रकम की Recovery कर सकता है। लंबे समय तक Default की स्थिति में कानूनी कार्रवाई भी संभव है। EMI भरने में परेशानी हो तो क्या करें? अगर आपको लगता है कि किसी महीने या आने वाले समय में EMI भरना मुश्किल हो सकता है, तो Bank या NBFC से जल्द संपर्क करें। अपनी Financial Situation के बारे में जानकारी देकर उपलब्ध विकल्पों के बारे में पूछें। सबसे जरूरी बात यह है कि Recovery Agent के दबाव में आकर किसी अनजान व्यक्ति के Personal Account में पैसा जमा न करें। Payment हमेशा Bank/NBFC के अधिकृत माध्यम से ही करें। RBI Loan Recovery Rules का सबसे जरूरी सार EMI समय पर नहीं चुकाने पर Bank आपसे बकाया रकम की मांग कर सकता है और नियमों के अनुसार Recovery Process शुरू कर सकता है। लेकिन Recovery के दौरान Bank या उसके Agent को ग्राहक की Privacy और सम्मान का ध्यान रखना होगा। याद रखें: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CNG Price

Delhi CNG Price: CNG के दाम में ₹3.89 की बढ़ोतरी, अब ₹86.98 प्रति किलो मिलेगा गैस

दिल्ली-NCR में CNG इस्तेमाल करने वाले वाहन चालकों को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। CNG Price Hike के तहत इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने CNG की कीमत में ₹3.89 प्रति किलो की बढ़ोतरी की है। नई कीमतें 29 अगस्त 2026 से लागू हो गई हैं। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में CNG का रेट ₹83.09 प्रति किलो से बढ़कर ₹86.98 प्रति किलो हो गया है। यह 2026 में दिल्ली-NCR में CNG की पांचवीं कीमत बढ़ोतरी है। लगातार हो रही बढ़ोतरी से CNG कार चलाने वाले लोगों के साथ-साथ ऑटो, टैक्सी, कैब और कमर्शियल वाहनों के ड्राइवरों पर भी ईंधन खर्च का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। Delhi CNG Price: अब कितना हुआ CNG का रेट? IGL की नई कीमतों के मुताबिक दिल्ली-NCR के अलग-अलग शहरों में CNG के दाम इस प्रकार हैं: दिल्ली में CNG की कीमत में सीधे ₹3.89 प्रति किलो की वृद्धि हुई है। इसका मतलब है कि जो वाहन रोजाना बड़ी मात्रा में CNG की खपत करते हैं, उनके लिए महीने का fuel budget पहले की तुलना में और बढ़ जाएगा। Why CNG Price Increased: क्यों बढ़े CNG के दाम? IGL के अनुसार, CNG की कीमत बढ़ाने की मुख्य वजह imported LNG की बढ़ी हुई लागत है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में LNG की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर गैस की supply और import cost पर पड़ा है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण LNG की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ी है। इसके चलते global energy market में कीमतों पर दबाव बना हुआ है। IGL ने इसी बढ़ी हुई input cost के एक हिस्से को CNG की कीमतों में शामिल किया है। 2026 में पांचवीं बार महंगी हुई CNG दिल्ली-NCR में वर्ष 2026 के दौरान CNG की कीमतों में यह पांचवीं बढ़ोतरी है। इससे पहले भी इस साल अलग-अलग चरणों में CNG के दाम बढ़ाए गए थे। बार-बार होने वाली price hike के कारण CNG को economical fuel मानकर इस्तेमाल करने वाले वाहन मालिकों की लागत लगातार बढ़ रही है। हालांकि पेट्रोल और डीजल की तुलना में CNG अभी भी कई वाहन चालकों के लिए एक महत्वपूर्ण alternative fuel बनी हुई है। CNG Price Hike का आम लोगों पर क्या असर होगा? CNG की कीमत बढ़ने का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो रोजाना लंबी दूरी तय करते हैं। निजी CNG कारों के अलावा auto-rickshaw, taxi, cab और commercial vehicles चलाने वालों की operating cost भी बढ़ेगी। ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए बढ़ती fuel cost का सीधा असर उनकी daily earnings पर पड़ सकता है। अगर CNG की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो भविष्य में इसका असर transportation charges और passenger fares पर भी देखने को मिल सकता है। CNG महंगी होने से बढ़ सकता है Monthly Fuel Budget उदाहरण के तौर पर, अगर कोई वाहन प्रतिदिन 5 किलो CNG की खपत करता है, तो ₹3.89 प्रति किलो की अतिरिक्त कीमत के कारण उसका खर्च करीब ₹19.45 प्रतिदिन बढ़ जाएगा। 30 दिनों में यह अतिरिक्त खर्च लगभग ₹584 हो सकता है। जिन commercial vehicles की रोजाना CNG consumption इससे कहीं अधिक है, उनके लिए अतिरिक्त मासिक खर्च भी काफी ज्यादा होगा। आगे CNG के दाम पर क्या रहेगा असर? CNG की कीमतों पर आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय LNG prices, global gas supply और पश्चिम एशिया की स्थिति का असर महत्वपूर्ण रहेगा। अगर imported gas की लागत ऊंची बनी रहती है, तो domestic CNG prices पर भी दबाव बना रह सकता है। फिलहाल दिल्ली-NCR के लोगों को 29 अगस्त से CNG के लिए ₹3.89 प्रति किलो ज्यादा भुगतान करना होगा। दिल्ली में नई CNG कीमत ₹86.98 प्रति किलो पहुंच गई है, जबकि नोएडा और गाजियाबाद में यह ₹95.59 प्रति किलो हो गई है। CNG Price Hike 2026 की यह पांचवीं बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब बढ़ती fuel और transportation costs पहले से ही आम लोगों के बजट को प्रभावित कर रही हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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