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Indigo

DGCA ने Indigo को कहा Flights कम करें 717 Slots 16 हवाईअड्डों से रद्द

घरेलू एयरलाइन्स Indigo Airlines ने हाल ही में 16 प्रमुख Airports पर अपने 717 Flight Slots छोड़ दिए हैं। DGCA (Directorate General of Civil Aviation) के आदेश के तहत यह कदम एयरलाइन के Winter Schedule में 10% कटौती सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया। इस कदम का उद्देश्य ऑपरेशनल Challenges को कम करना और यात्रियों को बेहतर और समय पर Flight Services देना है। DGCA ने यह सुनिश्चित किया कि एयरलाइन अपने Slot Management और समयबद्ध उड़ानों के मामलों में सुधार करे। प्रमुख हवाईअड्डों में Flight कटौती इन Slots को अन्य एयरलाइन्स के लिए रीलोकेट किया जा सकता है। Indigo का कहना है कि यह कदम यात्री सुविधाओं में सुधार और Operational Stability के लिए जरूरी था। यात्रियों के लिए असर Flights की कटौती और Slots छोड़ने से यात्रियों को कुछ अस्थायी असुविधा हो सकती है, लेकिन एयरलाइन का दावा है कि यह कदम Flight Delays और Cancellation को भविष्य में रोकने में मदद करेगा। Indigo के प्रवक्ता ने कहा:“हम लगातार अपनी Operations को बेहतर बना रहे हैं ताकि यात्रियों को समय पर और सुरक्षित सेवाएं मिलती रहें।” हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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शंकराचार्य

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का कालनेमि बयान और राजनीतिक बहस

प्रयागराज, उत्तर प्रदेश – 2026 के माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का विवाद अब पूरे देश की चर्चा का विषय बन गया है। यह विवाद सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी तेज बहस को जन्म दे रहा है। “कालनेमि” बयान क्या है? शंकराचार्य ने हाल ही में कहा: “चोला तो साधु का और गोहत्या हो रही है। आप बताइए कालनेमि कौन?” इस बयान का मतलब गहरा है। रामायण के कालनेमि राक्षस की तरह, वे लोगों को धर्म के नाम पर भ्रमित करने वालों की ओर इशारा कर रहे हैं। यह सीधे तौर पर यह सवाल उठाता है कि धर्म और संस्कृति के संरक्षण में कौन वास्तव में बाधक है। स्नान विवाद और प्रशासन की भूमिका माघ मेले की मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य को संगम में स्नान करने से रोका गया। शिष्यों के साथ झड़प हुई और वीडियो वायरल हो गया। शंकराचार्य ने इसे अपमानजनक बताया और स्नान से इनकार कर दिया। संत समाज और साधु‑संप्रदायों में इस पर गहरी नाराजगी है। कई संतों ने प्रशासन से साधुओं के सम्मान की सुरक्षा की मांग की है। राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ इस तरह, विवाद धीरे‑धीरे धार्मिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। लोकप्रिय सवाल: कालनेमि कौन? शंकराचार्य का यह सवाल समाज में गहरी सोच पैदा कर रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि कौन हैं वे लोग जो धर्म और संस्कृति के नाम पर भ्रम फैला रहे हैं? यह बयान युवाओं और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ है और हर तरफ चर्चाएँ तेज हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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EU

भारत-EU Free Trade Agreement Mother of All Deal से बदलेगा कारोबार, तीन दिन बाद ऐलान

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ने वाला है। करीब दो दशकों से जिस मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement – FTA) पर बातचीत चल रही थी, वह अब अपने आखिरी मोड़ पर है। इसे ही दुनिया भर में “Mother of All Deal” कहा जा रहा है।सूत्रों के मुताबिक, इस ऐतिहासिक करार का औपचारिक ऐलान 27 जनवरी को किया जा सकता है — यानी अब से ठीक तीन दिन बाद। आज भारत पहुंचे EU के टॉप लीडर्स इसी बड़े ऐलान से पहले यूरोपीय संघ के शीर्ष नेता भारत पहुंच रहे हैं।यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत दौरे पर हैं।ये नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे और भारत-EU शिखर बैठक में हिस्सा लेंगे। खास बात यह है कि ये नेता 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह में भी शामिल होंगे। इसके अगले ही दिन यानी 27 जनवरी को FTA को लेकर बड़ा ऐलान होने की उम्मीद है। क्यों कहा जा रहा है इसे “Mother of All Deal”? इस समझौते को इतना बड़ा इसलिए माना जा रहा है क्योंकि: इस पर बातचीत साल 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन कई बार अटकने के बाद अब यह लगभग तय माना जा रहा है। भारत के लिए क्या बदलेगा? अगर यह FTA लागू होता है तो इसका सीधा फायदा भारत के कारोबार और आम लोगों तक पहुंचेगा। दूसरी ओर, यूरोपीय कंपनियों को भारत में कार, शराब और हाई-टेक मशीनरी जैसे सेक्टरों में आसान एंट्री मिलेगी। बदलती वैश्विक राजनीति में अहम कदम दुनिया के कई बड़े देश आज संरक्षणवादी नीतियों और ऊंचे टैरिफ की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे माहौल में भारत और EU के बीच यह समझौता रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भारत की वैश्विक सप्लाई चेन में भूमिका और मजबूत होगी। आगे क्या होगा? हालांकि, समझौते को जमीन पर लागू होने में अभी कुछ कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी, लेकिन संकेत साफ हैं —भारत और EU एक नए आर्थिक रिश्ते की दहलीज पर खड़े हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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उज्जैन

Breaking News Tarana उज्जैन के तराना में उपद्रव, घरों पर पथराव, 10 से ज्यादा बसों को नुकसान

मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले के तराना कस्बे में एक बार फिर हिंसा ने लोगों की नींद उड़ा दी। गुरुवार शाम मामूली कहासुनी से शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते बड़े बवाल में बदल गया। गुस्साई भीड़ ने कई घरों पर पत्थर फेंके, दुकानों में तोड़फोड़ की और बस स्टैंड पर खड़ी बसों को निशाना बनाया। कुछ बसों में आग लगाए जाने की भी पुष्टि हुई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, विवाद की जड़ एक युवक पर हुआ हमला बताया जा रहा है। युवक गंभीर रूप से घायल हो गया और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसी घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया और कुछ ही देर में भीड़ उग्र हो गई। लोग अपने घरों में दुबक गए, बाजार बंद हो गए और सड़कों पर अफरा-तफरी मच गई। बस स्टैंड पर सबसे ज्यादा नुकसान हिंसा के दौरान तराना बस स्टैंड पर खड़ी करीब 10 से 11 बसों के शीशे तोड़ दिए गए। कुछ बसों में आग लगाने की कोशिश की गई और एक-दो बसों के अंदर आग भी भड़क गई। इसके अलावा आसपास खड़ी गाड़ियां और दुकानों को भी नुकसान पहुंचा। कई घरों पर पत्थर फेंके गए, जिससे लोगों में भारी दहशत फैल गई। पुलिस और प्रशासन हरकत में स्थिति बिगड़ने की खबर मिलते ही पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। भारी पुलिस बल तैनात किया गया और हालात काबू में करने के लिए इलाके में धारा 144 लागू कर दी गई। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा। रात भर पुलिस गश्त करती रही ताकि हालात दोबारा न बिगड़ें। प्रशासन ने उपद्रवियों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगालना शुरू कर दिया है और ड्रोन की मदद भी ली जा रही है। अब तक कई लोगों के खिलाफ केस दर्ज किए गए हैं और कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। लोग सहमे, बाजार बंद घटना के बाद तराना के कई इलाकों में सन्नाटा पसरा रहा। दुकानदारों ने एहतियात के तौर पर बाजार बंद रखे। जिन घरों और दुकानों को नुकसान पहुंचा है, उनके मालिक गहरे सदमे में हैं। लोगों का कहना है कि पहले भी यहां तनाव की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन इस बार हिंसा ने ज्यादा डर पैदा कर दिया है। प्रशासन की अपील प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन एहतियात के तौर पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहेगा। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और नुकसान का आकलन कर मुआवजे की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। तराना की यह घटना एक बार फिर सवाल खड़े करती है कि छोटे-से विवाद कैसे बड़ी हिंसा में बदल जाते हैं। स्थानीय लोग चाहते हैं कि हालात जल्द सामान्य हों और कस्बे में फिर से सुकून लौटे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Srinagar में बर्फबारी, 20 Flights Cancelled Vaishno Devi यात्रा रुकी

उत्तर भारत (North India) में मौसम (Weather) ने इस हफ्ते काफी हलचल मचा दी है। राजस्थान और उत्तर प्रदेश (Rajasthan-UP) के कई इलाकों में लगातार बारिश हो रही है, जिससे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को यात्रा और दैनिक जीवन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शिमला और मनाली में सीजन की पहली Snowfall वहीं हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के शिमला (Shimla) और मनाली (Manali) में मौसम ने अपना नया रूप दिखाया और यहाँ हुई सीजन की पहली बर्फबारी (First Snowfall of the Season)। बर्फबारी की वजह से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है और पहाड़ी रास्तों पर वाहन चलाना मुश्किल हो गया है। श्रीनगर में भारी बर्फबारी और यात्रा प्रभावित जम्मू-कश्मीर (Jammu & Kashmir) में भी मौसम की मार देखने को मिली। श्रीनगर एयरपोर्ट (Srinagar Airport) पर लगभग 4 इंच बर्फ गिरने से कई फ्लाइट्स प्रभावित हुईं और 20 से अधिक फ्लाइट्स कैंसिल करनी पड़ीं। इसके साथ ही, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए वैष्णो देवी (Vaishno Devi) यात्रा अस्थायी रूप से रोक दी गई है। मौसम विभाग की चेतावनी और सुरक्षा मौसम विभाग (Meteorological Department) ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ दिनों तक उत्तर भारत में बारिश और बर्फबारी जारी रह सकती है, इसलिए यात्रियों और स्थानीय लोगों को अपनी यात्रा योजनाओं में सावधानी और बदलाव करने की सलाह दी गई है। मौसम का अनुभव और सावधानी यह मौसम प्रेमियों और पर्यटकों के लिए एक यादगार अनुभव भी लेकर आया है, लेकिन सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PM Modi

PM Modi Kerala Visit केरल को 4 नई ट्रेनें, गरीबों के लिए क्रेडिट कार्ड और विकास की नई शुरुआत

तिरुवनंतपुरम, 23 जनवरी — PM Modi के केरल दौरे ने राज्य को एक साथ कई बड़ी सौगातें दीं। रेलवे कनेक्टिविटी से लेकर छोटे कारोबारियों के लिए आसान क्रेडिट और नवाचार को बढ़ावा देने तक, इस यात्रा का मकसद साफ दिखा — विकास को ज़मीनी स्तर तक पहुँचाना। 4 नई ट्रेनें, बेहतर कनेक्टिविटी प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi ) ने केरल से जुड़ी चार नई ट्रेन सेवाओं को हरी झंडी दिखाई। इनमें तीन अमृत भारत एक्सप्रेस और एक पैसेंजर ट्रेन शामिल हैं। इन ट्रेनों से केरल की कनेक्टिविटी तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों से और मजबूत होगी।रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इससे यात्रियों को सस्ती, सुरक्षित और तेज़ यात्रा मिलेगी और पर्यटन व व्यापार को भी नई गति मिलेगी। “अब गरीबों के पास भी क्रेडिट कार्ड” इस मौके पर PM Modi ने PM SVANidhi Credit Card लॉन्च किया, जो खास तौर पर रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे व्यापारियों के लिए तैयार किया गया है। यह UPI से जुड़ा, ब्याज-मुक्त रिवॉल्विंग क्रेडिट कार्ड है। अपने संबोधन में मोदी ने कहा, “पहले क्रेडिट कार्ड अमीरों तक सीमित थे। आज गरीबों और छोटे कारोबारियों के हाथ में भी ये सुविधा है। सरकार उनके लिए गारंटर बनी है।” उन्होंने बताया कि इस योजना से छोटे व्यापारियों को आसान कर्ज मिलेगा, डिजिटल लेन-देन बढ़ेगा और उनका क्रेडिट इतिहास मजबूत होगा। इनोवेशन हब और नई उम्मीदें प्रधानमंत्री ने CSIR-NIIST इनोवेशन हब की आधारशिला भी रखी। यह केंद्र विज्ञान, तकनीक और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देगा। सरकार का लक्ष्य केरल को रिसर्च और इनोवेशन का बड़ा केंद्र बनाना है, जिससे युवाओं को नए अवसर मिल सकें। अन्य विकास परियोजनाएँ दौरे के दौरान आधुनिक पोस्ट ऑफिस, स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी हुआ। इनसे आम लोगों की रोज़मर्रा की सुविधाएँ बेहतर होने और रोजगार के मौके बढ़ने की उम्मीद है। लोगों से जुड़ा संदेश PM Modi का यह दौरा सिर्फ घोषणाओं तक सीमित नहीं रहा। ट्रेन की सौगात हो या छोटे दुकानदारों के लिए क्रेडिट कार्ड, हर पहल में आम आदमी को केंद्र में रखा गया। सरकार का कहना है कि इन कदमों से केरल के विकास को नई रफ्तार मिलेगी और राज्य के युवाओं, व्यापारियों और यात्रियों को सीधे फायदे मिलेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bhojshala

Bhojshala Dhar 10 साल बाद एक ही दिन पूजा और नमाज, भारी सुरक्षा में ऐतिहासिक संयोग

धार (मध्य प्रदेश) की विवादित भोजशाला (Bhojshala)–कमाल मौला परिसर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। इस बार वजह कोई टकराव नहीं, बल्कि एक ऐसा दुर्लभ संयोग है, जो 10 साल बाद देखने को मिला है। बसंत पंचमी और शुक्रवार (जुमे) एक ही दिन पड़ने के कारण यहां मां वाग्देवी (सरस्वती) की पूजा और जुमे की नमाज एक ही तारीख को हो रही है। इस संवेदनशील मौके को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं, ताकि दोनों समुदाय अपने-अपने धार्मिक अनुष्ठान शांतिपूर्वक कर सकें। सुबह पूजा, दोपहर में नमाज सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार समय का साफ बंटवारा किया गया है। प्रशासन ने दोनों पक्षों के लिए अलग-अलग समय और रास्ते तय किए हैं, ताकि भीड़ न टकराए और किसी तरह का तनाव न बने। 8,000 जवान, ड्रोन और AI से निगरानी भोजशाला (Bhojshala) परिसर और पूरे धार शहर को हाई अलर्ट पर रखा गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हमारा मकसद सिर्फ इतना है कि दोनों समुदाय सम्मान और शांति के साथ अपने धार्मिक कर्तव्य निभा सकें।” सुप्रीम कोर्ट का संतुलित फैसला Bhojshala विवाद से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों समुदायों को अपने धार्मिक अधिकार निभाने की अनुमति दी है। कोर्ट ने साफ किया है कि पूजा और नमाज तय समय पर ही होंगी और कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी होगी। साथ ही दोनों पक्षों से संयम और सौहार्द बनाए रखने की अपील भी की गई है। प्रशासन और स्थानीय लोगों की अपील धार कलेक्टर और पुलिस अधिकारियों ने आम लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और सोशल मीडिया पर भड़काऊ सामग्री साझा न करने की अपील की है। स्थानीय नागरिकों और धार्मिक नेताओं ने भी शांति बनाए रखने की बात कही है। एक दुकानदार ने कहा, “हम रोज यहां आते-जाते हैं। बस यही चाहते हैं कि सब कुछ शांति से हो जाए और शहर का माहौल खराब न हो।” क्यों संवेदनशील है भोजशाला? Bhojshala एक ऐतिहासिक स्थल है, जिसे हिंदू समुदाय सरस्वती मंदिर और मुस्लिम समुदाय कमाल मौला मस्जिद मानता है। दशकों से यहां पूजा और नमाज अलग-अलग समय या दिनों में होती रही है। बसंत पंचमी और शुक्रवार का एक साथ आना इस जगह को और संवेदनशील बना देता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Doda

Doda Accident जम्मू-कश्मीर में Army Vehicle खाई में गिरी, 4 जवान शहीद, 9 घायल

आज 22 जनवरी 2026 को जम्मू-कश्मीर के डोडा (Doda) जिले से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई। भद्रवाह–चंबा इंटरस्टेट रोड पर स्थित खन्नी टॉप इलाके में भारतीय सेना का एक वाहन अनियंत्रित होकर सड़क से फिसल गया और करीब 200 फीट गहरी खाई में जा गिरा। यह वाहन एक उच्च-ऊंचाई वाली सेना चौकी की ओर जा रहा था। हादसे के वक्त गाड़ी में थे 17 सैनिक हादसे के समय वाहन में कुल 17 जवान सवार थे। इस दर्दनाक दुर्घटना में 4 बहादुर जवान शहीद हो गए, जबकि 9 अन्य जवान गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। बाकी सैनिकों को मामूली चोटें आई हैं। राहत-बचाव अभियान: घंटों चला रेस्क्यू ऑपरेशन घटना की सूचना मिलते ही सेना, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव अभियान शुरू किया गया। दुर्गम पहाड़ी इलाके और गहरी खाई के कारण बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन घंटों की मेहनत के बाद घायलों को बाहर निकाला गया। घायलों को पहले नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया और बाद में कुछ गंभीर रूप से घायलों को बेहतर इलाज के लिए उधमपुर के सैन्य अस्पताल में एयरलिफ्ट किया गया। हादसे की वजह क्या रही? जांच के आदेश प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसे की वजह सड़क की खराब स्थिति, तीखे मोड़ और फिसलन हो सकती है। हालांकि सेना और प्रशासन ने औपचारिक जांच के आदेश दे दिए हैं। जांच के बाद ही दुर्घटना के असली कारणों का पता चल सकेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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अविमुक्तेश्वरानंद

Prayagraj Magh Mela में हंगामा अविमुक्तेश्वरानंद को Ban की चेतावनी

प्रयागराज में बढ़ा विवाद प्रयागराज में चल रहे विश्वप्रसिद्ध माघ मेले (Magh Mela) को लेकर प्रशासन और संत अविमुक्तेश्वरानंद के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। जिला प्रशासन ने उन्हें दूसरा नोटिस जारी करते हुए साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर उनके किसी भी कृत्य से फिर से मेले की व्यवस्था प्रभावित हुई, तो उन्हें माघ मेले से बैन (Ban) किया जा सकता है। व्यवस्था बिगड़ने का आरोप प्रशासन का कहना है कि हाल ही में अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े एक कार्यक्रम के कारण भीड़ अचानक बढ़ गई, जिससे सुरक्षा व्यवस्था और यातायात व्यवस्था पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गई। अधिकारियों के मुताबिक, हालात इतने बिगड़ गए कि श्रद्धालुओं को काफी परेशानी झेलनी पड़ी और कानून-व्यवस्था पर भी असर पड़ा। पहले भी मिल चुका है नोटिस इससे पहले भी प्रशासन ने उन्हें नियमों के उल्लंघन को लेकर नोटिस भेजा था, लेकिन उसके बावजूद हालात में कोई खास सुधार नहीं हुआ। इसी को देखते हुए अब दूसरा नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन की सख्त चेतावनी नोटिस में स्पष्ट लिखा गया है कि माघ मेला एक संवेदनशील और विशाल धार्मिक आयोजन है, जहां हर दिन लाखों श्रद्धालु स्नान और पूजा के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में किसी भी व्यक्ति या संगठन की लापरवाही भारी पड़ सकती है।प्रशासन ने यह भी कहा है कि यदि अविमुक्तेश्वरानंद ने बिना अनुमति कोई कार्यक्रम किया या भीड़ को उकसाने वाली गतिविधियों में हिस्सा लिया, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ मेले में प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगाई जा सकती है। समर्थकों में नाराज़गी इस पूरे मामले पर अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थकों में नाराज़गी देखने को मिल रही है। उनका कहना है कि संत को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है, जबकि प्रशासन का तर्क है कि नियम सबके लिए बराबर हैं और किसी को भी विशेष छूट नहीं दी जा सकती। आगे क्या होगा? फिलहाल दूसरा नोटिस जारी होने के बाद माहौल और गंभीर हो गया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि अविमुक्तेश्वरानंद प्रशासन की चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेते हैं। अगर भविष्य में भी ऐसी स्थिति बनी रही, तो माघ मेले से उनका बैन होना लगभग तय माना जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Prayagraj

Prayagraj हवा में संतुलन खो बैठा Air Force विमान, तालाब में गिरा, बड़ा हादसा टला

प्रयागराज (Prayagraj) शहर बुधवार दोपहर अचानक दहशत और अफरा-तफरी में बदल गया, जब भारतीय वायुसेना का एक ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट (Trainer Aircraft) हवा में डगमगाते हुए शहर के बीचों-बीच तालाब में जा गिरा। यह हादसा केपी कॉलेज के पीछे हुआ, जो माघ मेला क्षेत्र से करीब 3 किलोमीटर दूर है। घटना के वक्त लोग रोज़मर्रा की ज़िंदगी में व्यस्त थे। तभी अचानक तेज आवाज़ के साथ विमान नीचे आता दिखा और कुछ ही सेकेंड में तालाब में समा गया। आसपास मौजूद लोगों ने मोबाइल से वीडियो भी रिकॉर्ड किया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। हवा में डगमगाया और तालाब में गिरा प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, विमान उड़ान भरते समय अचानक संतुलन खो बैठा। कुछ सेकेंड तक वह हवा में इधर-उधर झूलता रहा और फिर सीधा तालाब में गिर गया। जोरदार आवाज़ सुनते ही आसपास के लोग मौके की ओर दौड़े। शुरुआती जानकारी के अनुसार, विमान रूटीन ट्रेनिंग सॉर्टी पर था और उसमें दो पायलट सवार थे। दोनों पायलट सुरक्षित, बड़ा हादसा टला सबसे राहत की बात यह रही कि विमान में मौजूद दोनों पायलटों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। स्थानीय लोगों, पुलिस और रेस्क्यू टीम ने मिलकर तुरंत बचाव अभियान शुरू किया। दोनों पायलटों को मामूली चोटें आई हैं और उन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक, उनकी हालत स्थिर और खतरे से बाहर है। माघ मेला के पास हादसा, बढ़ी सतर्कता यह हादसा ऐसे समय हुआ है जब प्रयागराज में माघ मेला चल रहा है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शहर में मौजूद हैं। चूंकि दुर्घटना स्थल मेला क्षेत्र से ज्यादा दूर नहीं है, इसलिए प्रशासन ने पूरे इलाके में अतिरिक्त सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। अगर विमान रिहायशी इलाके में गिरता, तो नुकसान कहीं ज़्यादा बड़ा हो सकता था। इंजन फेल या तकनीकी खराबी? जांच शुरू प्रारंभिक रिपोर्ट में आशंका जताई जा रही है कि विमान के इंजन में तकनीकी खराबी आ गई थी, जिसके चलते पायलट नियंत्रण नहीं रख पाए। भारतीय वायुसेना और संबंधित तकनीकी एजेंसियों ने हादसे की औपचारिक जांच शुरू कर दी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि दुर्घटना की असली वजह क्या थी। वीडियो में दिखा खौफनाक मंजर घटना के वीडियो में साफ दिखाई देता है कि विमान अचानक नीचे की ओर झुकता है और तालाब में गिर जाता है। कुछ ही पल में लोग मौके पर पहुंचते हैं और तालाब के पानी में उतरकर पायलटों को बाहर निकालने की कोशिश करते हैं। प्रशासन और वायुसेना का बयान प्रशासन की ओर से कहा गया है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी आम नागरिक को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। वहीं, वायुसेना ने पुष्टि की है कि दोनों पायलट सुरक्षित हैं और हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। प्रयागराज (Prayagraj) में हुआ यह हादसा डरावना जरूर था, लेकिन समय पर हुए रेस्क्यू और पायलटों की सूझ-बूझ से एक बड़ा नुकसान टल गया। फिलहाल पूरा शहर राहत की सांस ले रहा है और सभी की नजरें अब जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Kamchatka में Earthquake: रूस में फिर कांपी धरती, पिछले साल सुनामी ने मचाई थी तबाही

रूस (Russia) के कामचटका (Kamchatka) प्रायद्वीप में 7.0 तीव्रता के भूकंप की खबर ने एक बार फिर इस क्षेत्र को चर्चा में ला दिया है। यह इलाका पहले भी बड़े भूकंप और सुनामी का सामना कर चुका है। साल 2025 में यहां के पास आए 8.8 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप के बाद समुद्र में उठी लहरों ने तटीय इलाकों को प्रभावित किया था। ऐसे में ताजा भूकंप के बाद लोगों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कहीं इसका असर समुद्र और आसपास के क्षेत्रों पर तो नहीं पड़ेगा। Kamchatka Earthquake: रूस में कहां आया भूकंप? 16 अक्टूबर 2026 को रूस के कामचटका क्षेत्र में 7.0 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, इसका केंद्र कामचटका के पूर्वी तट के पास था। भूकंप की गहराई करीब 140 से 148 किलोमीटर बताई गई है। भूकंप के बाद सबसे अहम सवाल सुनामी के खतरे को लेकर था। शुरुआती जानकारी के अनुसार, अमेरिकी सुनामी चेतावनी केंद्र ने इस भूकंप के कारण सुनामी का खतरा नहीं बताया। घटना से जुड़े नुकसान और अन्य प्रभावों की विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक अपडेट पर नजर रखना जरूरी है। 2025 में आए Earthquake ने मचाई थी तबाही कामचटका का नाम सामने आते ही पिछले साल की बड़ी प्राकृतिक आपदा याद आती है। 29 जुलाई 2025 को रूस के कामचटका तट के पास 8.8 तीव्रता का भूकंप आया था। यह दुनिया के सबसे शक्तिशाली दर्ज भूकंपों में से एक था। इस भूकंप के बाद प्रशांत महासागर में सुनामी की लहरें उठीं। रूस के तटीय इलाकों और उत्तरी कुरिल द्वीप समूह में समुद्र का पानी तेजी से आगे बढ़ा। कुछ जगहों पर लहरों ने तटीय बस्तियों और इमारतों को नुकसान पहुंचाया। इस घटना के बाद प्रशांत महासागर के कई हिस्सों में सुनामी अलर्ट जारी किए गए थे। सुनामी की लहरों ने तटीय इलाकों को किया था प्रभावित 2025 में आए भूकंप के बाद समुद्र में उठी ऊंची लहरों ने तटीय क्षेत्रों में चिंता बढ़ा दी थी। कुछ इलाकों में समुद्र का पानी बस्तियों तक पहुंच गया और संपत्ति को नुकसान हुआ। इस घटना ने दिखाया कि समुद्र के नीचे आने वाला शक्तिशाली भूकंप केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि हजारों किलोमीटर दूर स्थित तटों पर भी असर डाल सकता है। हालांकि, 2025 की सुनामी और अक्टूबर 2026 में आए ताजा भूकंप को अलग-अलग घटनाओं के रूप में समझना चाहिए। दोनों के बीच सीधे संबंध की पुष्टि करने वाली जानकारी उपलब्ध नहीं है। बार-बार भूकंप क्यों आते हैं कामचटका में? रूस का कामचटका प्रायद्वीप प्रशांत महासागर के चारों ओर फैले Ring of Fire का हिस्सा है। यह क्षेत्र दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां टेक्टोनिक प्लेटों की लगातार हलचल के कारण भूकंप और ज्वालामुखी गतिविधियां होती रहती हैं। प्रशांत प्लेट दूसरी प्लेट के नीचे खिसकती है। इस प्रक्रिया में जमीन के भीतर तनाव जमा होता है और जब यह तनाव अचानक निकलता है, तो भूकंप आता है। इसी भूगर्भीय गतिविधि के कारण कामचटका में शक्तिशाली भूकंप आने की आशंका बनी रहती है। क्या ताजा भूकंप से सुनामी का खतरा है? 16 अक्टूबर 2026 को आए 7.0 तीव्रता के भूकंप के संबंध में शुरुआती जानकारी में सुनामी का खतरा नहीं बताया गया। यह राहत की बात है, क्योंकि 2025 में इसी क्षेत्र के पास आए बड़े भूकंप के बाद समुद्र में उठी लहरों ने कई तटीय इलाकों को प्रभावित किया था। फिलहाल ताजा घटना से जुड़े नुकसान की पूरी तस्वीर सामने आने का इंतजार है। विशेषज्ञों के अनुसार, भूकंप के प्रभाव का आकलन उसकी तीव्रता के साथ-साथ गहराई, केंद्र की स्थिति और आसपास की भूगर्भीय परिस्थितियों के आधार पर किया जाता है। कामचटका में आए इस भूकंप ने एक बार फिर याद दिलाया है कि प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से यह क्षेत्र कितना संवेदनशील है। फिलहाल सुनामी का खतरा नहीं होना राहत की खबर है, लेकिन आगे की आधिकारिक जानकारी पर नजर रखना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CJP

CJP Tiranga March: दिल्ली में हाई अलर्ट, कनॉट प्लेस में धारा 163 लागू

राजधानी दिल्ली में 16 अक्टूबर को CJP के प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई है। वहीं, प्रशासन ने सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्टूबर को आम लोगों के लिए बंद रखने का फैसला लिया है। मार्च के मद्देनजर धारा 163 लागू होने और ट्रैफिक डायवर्जन की वजह से लोगों को आने-जाने में परेशानी हो सकती है। CJP के इस कार्यक्रम को लेकर दिल्ली में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज है। पार्टी की ओर से अपने नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में तिरंगा मार्च का ऐलान किया गया है। दूसरी ओर, पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए सतर्क है। CJP के ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को लेकर बढ़ी हलचल अभिजीत दीपके ने 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ कार्यक्रम आयोजित करने की अपील की थी। पार्टी इस कार्यक्रम के जरिए अपने नेताओं की गिरफ्तारी के खिलाफ विरोध दर्ज कराना चाहती है। आरोप है कि उसके नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका के खिलाफ कार्रवाई की गई। पार्टी ने इस मामले को लेकर विरोध जताया है। हालांकि, गिरफ्तारी से जुड़े आरोपों और प्रशासन के पक्ष को अलग-अलग समझना जरूरी है। Connaught Place में धारा 163 लागू, सुरक्षा बढ़ाई गई प्रस्तावित मार्च को देखते हुए कनॉट प्लेस और आसपास के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है। प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए हैं। इन आदेशों का उद्देश्य सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना और किसी संभावित तनाव को रोकना है। पुलिस लोगों से अपील कर रही है कि वे प्रतिबंधित क्षेत्रों में जाने से बचें और मौके पर तैनात अधिकारियों के निर्देशों का पालन करें। 16 और 17 अक्टूबर को बंद रहेगा Central Park कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्टूबर को आम लोगों के लिए बंद रखने का फैसला लिया गया है। यह वही स्थान है, जहां CJP ने तिरंगा मार्च आयोजित करने की अपील की थी। पार्क बंद रहने और आसपास सुरक्षा बढ़ने से कनॉट प्लेस आने वाले लोगों को अपनी योजना में बदलाव करना पड़ सकता है। खासकर बाजार, दफ्तरों और आसपास के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में जाने वाले लोगों को निकलने से पहले ताजा जानकारी देख लेनी चाहिए। Delhi Traffic Advisory: कई रास्तों पर डायवर्जन की तैयारी मार्च के कारण कनॉट प्लेस और मध्य दिल्ली के आसपास यातायात प्रभावित होने की आशंका है। ट्रैफिक पुलिस की एडवाइजरी के अनुसार, जरूरत पड़ने पर कई मार्गों पर डायवर्जन लागू किया जा सकता है। दफ्तर जाने वाले लोगों, यात्रियों और कनॉट प्लेस आने वाले ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे अतिरिक्त समय लेकर घर से निकलें। संभव हो तो वैकल्पिक मार्ग चुनें और यात्रा से पहले दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के आधिकारिक अपडेट जरूर देख लें। गिरफ्तारी के विरोध में प्रदर्शन, प्रशासन की कानून-व्यवस्था पर नजर CJP का यह मार्च अपने नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध से जुड़ा है। पार्टी तिरंगा लेकर प्रदर्शन करना चाहती है, जबकि प्रशासन का ध्यान सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने पर है। कनॉट प्लेस दिल्ली का प्रमुख कारोबारी और पर्यटन क्षेत्र है। ऐसे में सुरक्षा प्रतिबंधों और ट्रैफिक बदलावों का असर आम लोगों के साथ स्थानीय कारोबार पर भी पड़ सकता है। फिलहाल, मार्च को लेकर स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। लोगों के लिए बेहतर होगा कि वे अफवाहों पर भरोसा करने के बजाय पुलिस और प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक सूचनाओं के आधार पर ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Rajnath Singh

Rajnath Singh Statement: SIR विवाद पर विपक्ष को घेरा, Bangladesh मॉडल का जिक्र

देश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भारत में बांग्लादेश की तर्ज पर सत्ता परिवर्तन की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों का एजेंडा देश में अस्थिरता पैदा करना है। राजनाथ सिंह का यह बयान ऐसे समय आया है, जब Special Intensive Revision (SIR) यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। इस मुद्दे पर बीजेपी और विपक्ष आमने-सामने हैं। एक ओर बीजेपी विरोध प्रदर्शनों के पीछे राजनीतिक मंशा होने का आरोप लगा रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची से जुड़े सवालों को उठाने की बात कर रहा है। Rajnath Singh ने विपक्ष पर क्या कहा? रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह बांग्लादेश में हुए घटनाक्रम की तर्ज पर भारत में भी सत्ता परिवर्तन का माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस तरह की राजनीति से देश में तनाव और अस्थिरता बढ़ सकती है। राजनाथ सिंह के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। बीजेपी इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्थिरता और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जोड़कर देख रही है। हालांकि, विपक्ष के इरादों को लेकर लगाए गए ये आरोप राजनीतिक दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। SIR विवाद को लेकर क्यों आमने-सामने हैं BJP और Opposition? SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची की विशेष जांच और पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और उसमें मौजूद गलतियों को दूर करना है। लेकिन इस प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि चुनाव से जुड़े मामलों में निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए। दूसरी तरफ, बीजेपी का आरोप है कि विपक्ष SIR के मुद्दे को राजनीतिक आंदोलन का रूप देकर सरकार और चुनावी संस्थाओं पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। इसी खींचतान के कारण यह मामला अब संसद और चुनावी प्रक्रिया से आगे बढ़कर सड़क पर भी चर्चा का विषय बन गया है। Rahul Gandhi और विरोध प्रदर्शनों पर भी सियासत तेज SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की भूमिका भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बनी हुई है। बीजेपी लगातार विपक्ष के आंदोलन के उद्देश्य पर सवाल उठा रही है। वहीं, विपक्ष का तर्क है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाना लोकतंत्र का हिस्सा है। मतदाता सूची में किसी भी तरह की कथित अनियमितता को सामने लाना और उसका समाधान मांगना राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है। इस पूरे विवाद में सबसे अहम सवाल यही है कि चुनावी पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा किस तरह आगे बढ़ती है और राजनीतिक दल अपने आरोपों के समर्थन में क्या तथ्य सामने रखते हैं। ‘Regime Change’ बयान से बढ़ा विवाद राजनीतिक बहस में ‘Regime Change’ यानी सत्ता परिवर्तन का मुद्दा भी चर्चा में है। इस शब्द को लेकर बीजेपी और विपक्ष के बीच अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। बीजेपी नेताओं का आरोप है कि कुछ विपक्षी नेता सरकार बदलने के लिए देश में बड़े आंदोलन की जमीन तैयार करना चाहते हैं। दूसरी ओर, सरकार बदलने की मांग करना अपने आप में लोकतांत्रिक राजनीति का हिस्सा है। असली सवाल यह है कि विरोध किस उद्देश्य से किया जा रहा है और उसके समर्थन में क्या प्रमाण मौजूद हैं। इसी वजह से इस विवाद को केवल राजनीतिक बयानबाजी के आधार पर समझने के बजाय संबंधित नेताओं के बयानों, घटनाक्रम और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर देखना जरूरी है। आगे क्या होगा? Rajnath Singh के बयान ने SIR विवाद को एक नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बीजेपी और विपक्ष के बीच बयानबाजी और तेज हो सकती है। फिलहाल, मतदाता सूची की प्रक्रिया, चुनावी पारदर्शिता और विरोध प्रदर्शनों को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि संबंधित मुद्दों पर चुनाव आयोग और अदालतों में क्या कार्रवाई होती है तथा राजनीतिक दल अपने दावों को किस तरह सामने रखते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
मां कात्यायनी

Navratri 2026: छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा, जानें महिषासुर वध की कथा और मंत्र

नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। देवी दुर्गा का यह स्वरूप शक्ति, साहस और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में मां कात्यायनी को महिषासुर का वध करने वाली देवी के रूप में भी पूजा जाता है। मां कात्यायनी की पौराणिक कथा पौराणिक कथा के अनुसार, महर्षि कात्यायन ने देवी की कठोर आराधना की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके यहां पुत्री रूप में जन्म लिया और कात्यायनी कहलायीं। मान्यता है कि देवी ने महिषासुर का वध कर देवताओं को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई। मां का स्वरूप और महत्त्व पूजा विधि मंत्र: ॐ देवी कात्यायन्यै नमः। भोग: मां को शहद अर्पित करने की परंपरा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

लिव-इन पार्टनर की हत्या कर दर्ज कराई गुमशुदगी, पुलिस पूछताछ में खुला राज

मध्यप्रदेश के भिंड में लिव-इन पार्टनर की हत्या का मामला सामने आया है। आरोप है कि भिंड निवासी सत्यप्रकाश उर्फ बादशाह जाटव ने बिहार निवासी नर्सिंग ऑफिसर स्नेहलता की हत्या कर शव उत्तर प्रदेश के पचनदा में नदी में फेंक दिया। इसके बाद उसने पुलिस को गुमशुदगी का आवेदन देकर मामले को छिपाने की कोशिश की। पुलिस की पूछताछ में उसने हत्या की बात कबूल कर ली। फिलहाल पुलिस टीम नदी में शव की तलाश कर रही है। कॉलेज में हुई थी पहचान, लिव-इन में रहने लगे दोनों जानकारी के मुताबिक, सत्यप्रकाश पहले से शादीशुदा था और उसकी कोई संतान नहीं थी। कॉलेज में पढ़ाई के दौरान उसका संपर्क स्नेहलता से हुआ। बाद में दोनों लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगे। इस दौरान उनका एक बेटा भी हुआ। बताया जा रहा है कि सत्यप्रकाश का अपनी पत्नी से विवाद चल रहा था। इसी के चलते उसने स्नेहलता की हत्या की साजिश रची। 8 अक्टूबर को उसने अपने बेटे को पत्नी के हवाले कर दिया। कानपुर घुमाने के बहाने ले गया, रास्ते में हत्या का आरोप आरोप है कि बेटे को पत्नी को सौंपने के बाद सत्यप्रकाश स्नेहलता को कानपुर घुमाने के बहाने अपने साथ ले गया। इस दौरान एंबुलेंस चालक राजवीर खन्ना और एक अन्य साथी भी उसके साथ थे। पुलिस के मुताबिक, रास्ते में स्नेहलता की हत्या कर दी गई और शव उत्तर प्रदेश के पचनदा में नदी में फेंक दिया गया। गुमशुदगी का आवेदन देकर छिपाने की कोशिश हत्या के बाद सत्यप्रकाश ने सिटी कोतवाली पुलिस को लिखित आवेदन देकर स्नेहलता के लापता होने की सूचना दी। बताया गया है कि उसने गुमशुदगी को लेकर पर्चे भी छपवाए थे, ताकि किसी को उस पर शक न हो। हालांकि, पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और पूछताछ के दौरान सत्यप्रकाश ने हत्या की बात कबूल कर ली। अब पुलिस नदी में शव की तलाश कर रही है। मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका और घटना से जुड़े पहलुओं की जांच जारी है। पुलिस ने क्या कहा? सिटी कोतवाली थाना प्रभारी मुकेश शाक्य के मुताबिक, लापता युवती की हत्या किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस टीम शव की तलाश कर रही है और मामले में आगे की कार्रवाई जारी है।

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