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Rajpal Yadav

Rajpal Yadav Court Case: कोर्ट में Emotional हुए एक्टर, बोले- ‘मैं खुद Drama बन गया हूं’, 1.15 करोड़ देने को राजी

बॉलीवुड के जाने-माने कॉमेडियन और एक्टर राजपाल यादव (Rajpal Yadav) एक कानूनी मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट में भावुक नजर आए। सुनवाई के दौरान उन्होंने अपनी स्थिति पर बात करते हुए कहा, “मैं खुद ड्रामा बन गया हूं।” उनकी यह बात सुनकर कोर्ट का माहौल भी कुछ देर के लिए भावुक हो गया। मामले की सुनवाई के दौरान राजपाल यादव ने विवाद को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 1.15 करोड़ रुपये देने पर सहमति जताई। बताया जा रहा है कि यह रकम संबंधित मामले के निपटारे के लिए दी जानी है। कोर्ट में भावुक हुए राजपाल यादव राजपाल यादव अपनी कॉमिक टाइमिंग और मजेदार किरदारों के लिए जाने जाते हैं। लेकिन इस बार वह किसी फिल्मी सीन की वजह से नहीं, बल्कि एक कानूनी मामले को लेकर चर्चा में हैं। कोर्ट में अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि हालात ने उन्हें ऐसी स्थिति में ला खड़ा किया है, जहां “मैं खुद ड्रामा बन गया हूं।” उनकी इस टिप्पणी से यह साफ नजर आया कि लंबे समय से चल रहे विवाद का असर उन पर भी पड़ा है। 1.15 करोड़ रुपये देने को तैयार सुनवाई के दौरान राजपाल यादव ने मामले को सुलझाने के लिए 1.15 करोड़ रुपये की रकम देने की सहमति जताई। अब इस भुगतान और मामले के आगे के कानूनी पहलुओं को लेकर कोर्ट की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। यह कदम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि राजपाल यादव ने विवाद को आगे बढ़ाने के बजाय उसे बातचीत और भुगतान के जरिए खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। फिर चर्चा में आए राजपाल यादव राजपाल यादव ने अपने करियर में कॉमेडी से लेकर गंभीर भूमिकाओं तक दर्शकों का मनोरंजन किया है। ‘भूल भुलैया’, ‘ढोल’, ‘हंगामा’ और ‘फिर हेरा फेरी’ जैसी फिल्मों में उनके किरदार आज भी लोगों को याद हैं। ऐसे में कोर्ट से जुड़ी यह खबर सामने आने के बाद वह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। फिलहाल मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सबकी नजर रहेगी। 1.15 करोड़ रुपये के भुगतान को लेकर राजपाल यादव की सहमति के बाद अब यह देखना होगा कि विवाद का अंतिम समाधान किस तरह होता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Virat Kohli

Virat Kohli का बड़ा खुलासा प्रेमानंद जी के दर्शन के लिए 5 करोड़ लेने की बात झूठी, बोले- श्रद्धा से जाता हूं

भारतीय क्रिकेट के स्टार Virat Kohli एक बार फिर प्रेमानंद जी महाराज के आश्रम जाने को लेकर चर्चा में हैं। इस बार मामला उनके आध्यात्मिक जुड़ाव से ज्यादा एक ऐसे दावे को लेकर है, जिसमें कहा गया था कि उन्होंने प्रेमानंद जी के दर्शन के लिए 5 करोड़ रुपये दिए थे। विराट कोहली ने इस बात को साफ तौर पर गलत बताया है। कोहली ने कहा कि वह प्रेमानंद जी महाराज के आश्रम पैसों के लिए नहीं, बल्कि श्रद्धा और सम्मान की वजह से जाते हैं। उनके मुताबिक, 5 करोड़ रुपये लेकर दर्शन करने की बात पूरी तरह झूठी है। 5 करोड़ रुपये देने का दावा कितना सही? विराट कोहली को लेकर यह दावा फलहारी महाराज की ओर से सामने आया था। इसमें कहा गया था कि कोहली ने प्रेमानंद जी महाराज के दर्शन के लिए 5 करोड़ रुपये दिए हैं। दावा सामने आने के बाद यह बात सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गई। हालांकि, अब विराट कोहली ने खुद इस दावे पर अपना पक्ष रखा है और इसे गलत बताया है। उन्होंने साफ किया कि आश्रम जाने के पीछे किसी तरह का आर्थिक लेन-देन नहीं है। प्रेमानंद जी महाराज से क्यों मिलते हैं Virat Kohli? विराट कोहली का प्रेमानंद जी महाराज से मिलना कोई नया मामला नहीं है। कोहली और उनका परिवार भी उनके आश्रम पहुंच चुका है। इन मुलाकातों की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद क्रिकेट फैंस के बीच भी काफी चर्चा हुई थी। कोहली के मुताबिक, प्रेमानंद जी महाराज के प्रति उनके मन में श्रद्धा और सम्मान है। यही वजह है कि वह समय मिलने पर आश्रम पहुंचते हैं और उनसे आशीर्वाद लेते हैं। Spiritual side को लेकर भी चर्चा में रहे हैं कोहली क्रिकेट के मैदान पर आक्रामक अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले विराट कोहली अपनी spiritual journey को लेकर भी कई बार सुर्खियों में रहे हैं। पिछले कुछ समय में उनका आध्यात्मिक स्थलों पर जाना और संतों से मुलाकात करना लोगों का ध्यान खींचता रहा है। प्रेमानंद जी महाराज से उनकी मुलाकात भी इसी कड़ी का हिस्सा मानी जाती है। ऐसे में 5 करोड़ रुपये वाले दावे ने इस मुलाकात को एक अलग वजह से चर्चा में ला दिया। कोहली की सफाई के बाद सामने आया उनका पक्ष पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि 5 करोड़ रुपये देने के दावे को विराट कोहली ने खुद खारिज किया है। उन्होंने आश्रम जाने की वजह बताते हुए कहा कि यह उनके लिए आस्था, श्रद्धा और सम्मान से जुड़ा विषय है। इस सफाई के बाद अब इस मामले में विराट कोहली का पक्ष भी सामने आ गया है। सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बीच कोहली ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रेमानंद जी महाराज के दर्शन को किसी आर्थिक सौदे से जोड़ना सही नहीं है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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SIR

SIR Protest: राहुल-प्रियंका पर FIR, आकाशवाणी भवन में 8 घंटे धरना; खड़गे ने विपक्षी सांसदों को बुलाया

चुनाव आयोग और Special Intensive Revision (SIR) के मुद्दे पर विपक्ष का विरोध प्रदर्शन अब कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया है। दिल्ली के आकाशवाणी भवन परिसर में प्रवेश करने और वहां धरना देने के मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बिना अनुमति परिसर में प्रवेश किया था। मामला उस समय बढ़ा जब INDIA Bloc के सांसद चुनाव आयोग की ओर मार्च कर रहे थे। विपक्षी नेता SIR को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराने और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की मांग कर रहे थे। आकाशवाणी भवन में 8 घंटे तक चला धरना मार्च को पुलिस ने बैरिकेड लगाकर रोक दिया। इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कुछ अन्य विपक्षी नेता आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंच गए। यहां नेताओं ने धरना शुरू कर दिया। रिपोर्टों के मुताबिक, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत विपक्षी नेताओं ने करीब 8 घंटे तक परिसर में धरना दिया। इस दौरान उनकी ओर से चुनाव आयोग से मुलाकात और SIR से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की मांग की जाती रही। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों से परिसर खाली करने को कहा गया था। इसके बाद पुलिस ने कुछ नेताओं को हिरासत में लिया। बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। राहुल-प्रियंका समेत कई लोगों पर FIR आकाशवाणी भवन में प्रवेश को लेकर मिली शिकायत के आधार पर दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज किया है। FIR में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत अन्य नेताओं के नाम शामिल बताए गए हैं। पुलिस के अनुसार, शिकायत में बिना अनुमति परिसर में प्रवेश और प्रदर्शन से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। मामले की जांच अब आगे बढ़ाई जा रही है। हालांकि, विपक्ष की ओर से इस कार्रवाई को लेकर अलग रुख सामने आया है और नेताओं ने अपने प्रदर्शन को लोकतांत्रिक विरोध बताया है। SIR को लेकर विपक्ष लगातार उठा रहा सवाल विपक्षी दलों का विरोध Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में लोगों के नाम प्रभावित हो सकते हैं और इसको लेकर पर्याप्त स्पष्टता जरूरी है। वहीं, चुनाव आयोग लगातार यह कहता रहा है कि मतदाता सूची को अपडेट करना और पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करना चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा है। SIR को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस भी तेज है। खड़गे ने विपक्षी सांसदों को Lunch पर बुलाया इस घटनाक्रम के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्षी सांसदों को Lunch पर बुलाया है। बैठक में आकाशवाणी भवन में हुए प्रदर्शन, FIR और SIR के मुद्दे पर आगे की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। विपक्षी दल आगे भी चुनाव आयोग के सामने अपनी मांगें रखने की तैयारी में हैं। ऐसे में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ FIR ने इस पूरे विवाद को एक नया कानूनी और राजनीतिक मोड़ दे दिया है। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PM Modi

PM Modi ने याद किया 25 Years का सफर: बोले- पीछे देखता हूं तो बढ़ती है विनम्रता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने सार्वजनिक जीवन में अपने 25 साल के सफर को याद करते हुए कहा कि जब वह पीछे मुड़कर देखते हैं तो उनके अंदर विनम्रता का भाव और बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि इस लंबे सफर में कई मुश्किल दौर आए, लेकिन हर संकट अपने साथ एक नया अनुभव और सीख लेकर आया। प्रधानमंत्री मोदी के इस सफर में गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर देश के प्रधानमंत्री तक की जिम्मेदारी शामिल है। उन्होंने करीब 13 साल तक गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में काम किया और 2014 में देश की कमान संभाली। इसके बाद 2019 और 2024 में भी वह प्रधानमंत्री बने। हर मुश्किल ने कुछ नया सिखाया अपने अनुभव साझा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जिंदगी में आने वाली चुनौतियां केवल परेशानियां नहीं होतीं, बल्कि उनसे सीखने का मौका भी मिलता है। पिछले 25 वर्षों में उन्हें अलग-अलग परिस्थितियों में काम करने और देश के लोगों के साथ सीधे जुड़ने का अवसर मिला। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर को याद करते हुए कहा कि समय बीतने के साथ पीछे मुड़कर देखने पर कई घटनाएं और अनुभव सामने आते हैं। यही अनुभव व्यक्ति को जमीन से जुड़े रहने और लगातार सीखते रहने की प्रेरणा देते हैं। Gujarat CM से PM तक का सफर नरेंद्र मोदी ने अक्टूबर 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर जिम्मेदारी संभाली थी। करीब 13 साल तक गुजरात की राजनीति और प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बाद 2014 में उन्होंने प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। 2014 के बाद 2019 और फिर 2024 में लोकसभा चुनाव के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में अपना कार्यकाल जारी रखा। इस तरह मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के पद पर उनका सार्वजनिक जीवन करीब 25 साल के महत्वपूर्ण पड़ाव तक पहुंच गया है। पीछे देखने पर क्यों बढ़ती है विनम्रता? पीएम मोदी ने अपने सफर की बात करते हुए विनम्रता और सीखने की भावना को खास तौर पर सामने रखा। उनका कहना है कि लंबे सार्वजनिक जीवन में इंसान को अलग-अलग तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है और हर अनुभव कुछ नया सिखाता है। उनके मुताबिक, किसी भी सफर को केवल उपलब्धियों के नजरिए से नहीं देखना चाहिए। उसमें आई चुनौतियां, मुश्किल फैसले और उनसे मिली सीख भी उतनी ही अहम होती हैं। 25 साल के सफर में कई बड़े पड़ाव प्रधानमंत्री मोदी के 25 साल के राजनीतिक सफर के दौरान गुजरात से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक कई बड़े घटनाक्रम सामने आए। मुख्यमंत्री के रूप में गुजरात की जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्होंने केंद्र की राजनीति में कदम रखा और पिछले एक दशक से ज्यादा समय से देश के प्रधानमंत्री हैं। अपने इस सफर को याद करते हुए पीएम मोदी ने अनुभवों और सीख को महत्व दिया। उनका संदेश यही रहा कि सार्वजनिक जीवन में परिस्थितियां चाहे जैसी हों, उनसे सीखते हुए आगे बढ़ते रहना जरूरी है। PM Modi का 25 साल का राजनीतिक सफर अब एक ऐसे पड़ाव पर है, जहां पीछे मुड़कर देखने के साथ-साथ आगे की जिम्मेदारियों और चुनौतियों पर भी नजर बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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SIR Protest

SIR Protest: राहुल-प्रियंका आकाशवाणी भवन में डटे, INDIA Bloc के नेताओं को पुलिस ने रोका

चुनाव आयोग और Chief Election Commissioner (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच सियासी टकराव अब सड़क तक पहुंच गया है। मंगलवार को INDIA ब्लॉक के सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग के दफ्तर तक SIR Protest निकालने की कोशिश की। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने मार्च को संसद मार्ग पर ही रोक दिया। इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत विपक्षी नेताओं ने वहीं धरना शुरू कर दिया। आकाशवाणी भवन में डटे राहुल-प्रियंका मार्च रोके जाने के बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कुछ नेता आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंच गए। रिपोर्टों के मुताबिक, राहुल गांधी और उनके साथ मौजूद नेताओं ने परिसर में बैठकर विरोध जारी रखा। चुनाव आयोग का कार्यालय आकाशवाणी भवन से कुछ ही दूरी पर है। इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की। राहुल गांधी ने पुलिस बैरिकेड पर चढ़कर विरोध जताया, जबकि प्रियंका गांधी भी कुछ देर हिरासत में लिए जाने के बाद वापस आकाशवाणी भवन के पास पहुंचीं। कई विपक्षी नेता हिरासत में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। इनमें समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और TMC के नेताओं समेत कई सांसद शामिल बताए गए हैं। दिल्ली के सेंट्रल इलाके में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई थी और प्रदर्शन के कारण कई जगह ट्रैफिक प्रभावित हुआ। विपक्षी सांसदों ने प्रदर्शन के दौरान SIR यानी Special Intensive Revision को लेकर सवाल उठाए। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, चुनाव आयोग और सरकार इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं और SIR को मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया बताते हैं। CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग INDIA ब्लॉक के प्रदर्शन की सबसे बड़ी मांग Chief Election Commissioner ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की है। विपक्ष SIR प्रक्रिया को लेकर भी लगातार सवाल उठा रहा है। प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने नारे लगाए और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। राहुल गांधी ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। विपक्ष का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए Election Commission को इन सवालों का जवाब देना चाहिए। दिल्ली में बढ़ा सियासी तनाव SIR को लेकर पिछले कुछ समय से विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच विवाद लगातार बढ़ रहा है। अब INDIA ब्लॉक के सड़क पर उतरने के बाद मामला और गरमा गया है। मंगलवार के प्रदर्शन में बड़ी संख्या में विपक्षी सांसद शामिल हुए, जबकि पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए मार्च को आगे बढ़ने से रोक दिया। फिलहाल राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के आकाशवाणी भवन परिसर में धरने और विपक्षी नेताओं की हिरासत के चलते दिल्ली में राजनीतिक माहौल गर्म है। आने वाले दिनों में SIR और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर यह विवाद और तेज होने के आसार हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Weather

Weather Update: UP-Bihar में बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें, Lucknow में मंदिर डूबे; 9 राज्यों में Alert

देश के कई राज्यों में मौसम (Weather) ने एक बार फिर करवट ली है। उत्तर प्रदेश के तीन जिलों में बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई है, जबकि राजधानी लखनऊ में कई इलाकों में पानी भरने से हालात बिगड़ गए हैं। वहीं बिहार में बाढ़ का असर लगातार बढ़ रहा है और करीब 8 लाख लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं। इस बीच मौसम विभाग ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार समेत 9 राज्यों में बारिश और गरज-चमक का अनुमान जताया है। यूपी में बारिश के साथ गिरे ओले उत्तर प्रदेश में मौसम का मिजाज अचानक बदल गया है। कई इलाकों में तेज बारिश के साथ ओले गिरे हैं। तीन जिलों में ओलावृष्टि की सूचना सामने आई है। बारिश और ओले पड़ने से तापमान में गिरावट आई है, वहीं किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना जताई है। ऐसे में खेतों में खड़ी फसलों को लेकर किसानों की परेशानी बढ़ सकती है। लखनऊ में मंदिरों तक पहुंचा पानी राजधानी लखनऊ में बारिश और बढ़े जलस्तर के कारण कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। कुछ जगहों पर पानी मंदिर परिसरों तक पहुंच गया है। कई इलाकों में लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, गोमती नदी के जलग्रहण क्षेत्र में हुई बारिश और बढ़े जलस्तर का असर भी लखनऊ के निचले इलाकों पर पड़ा है। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव की व्यवस्था की जा रही है। बिहार में बाढ़ से 8 लाख लोग प्रभावित बिहार में भी बाढ़ की स्थिति चिंता बढ़ा रही है। कई जिलों में नदियों का जलस्तर बढ़ने के कारण गांवों और निचले इलाकों में पानी पहुंच गया है। बाढ़ से करीब 8 लाख लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान जारी है। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ जरूरत के मुताबिक भोजन और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों पर नजर रखी जा रही है। MP समेत 9 राज्यों में बारिश का अनुमान मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, उत्तर प्रदेश और बिहार के अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली समेत कुल 9 राज्यों में बारिश और गरज-चमक की स्थिति बन सकती है। कुछ इलाकों में तेज हवाओं के साथ बिजली गिरने की भी आशंका है। मौसम के इस बदलाव से तापमान में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। किसानों और आम लोगों को सतर्क रहने की जरूरत बारिश और ओलावृष्टि के चलते किसानों को फसलों को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है। वहीं शहरों में जलभराव और ट्रैफिक की समस्या बढ़ सकती है। मौसम खराब होने के दौरान लोगों को खुले स्थानों पर जाने से बचने और स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करने की सलाह दी गई है। फिलहाल यूपी में ओलावृष्टि, लखनऊ में जलभराव और बिहार में बाढ़ ने चिंता बढ़ा दी है। दूसरी ओर, कई राज्यों में बारिश का नया दौर शुरू होने की संभावना है। ऐसे में आने वाले कुछ दिन मौसम के लिहाज से महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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FlyDubai Flight Case

FlyDubai Flight Case Co-Pilot ने बताई पूरी कहानी, Israel जाने से पहले बनाया था Plan

FlyDubai Flight Case दुबई से इजरायल जा रही FlyDubai की फ्लाइट में हुई घटना की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई चौंकाने वाली बातें सामने आ रही हैं। मामले में आरोपी ओमानी को-पायलट से पूछताछ के दौरान उसके कथित मकसद और पहले से बनाई गई योजना को लेकर अहम जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, आरोपी ने जांच अधिकारियों के सामने दावा किया कि वह गाजा में इजरायली सैन्य कार्रवाई से नाराज था और बदला लेना चाहता था। उसने कथित तौर पर यह भी कहा कि वह ‘शहीद होकर मरना’ चाहता था। हालांकि, जांच एजेंसियां उसके बयानों की अलग-अलग पहलुओं से पुष्टि कर रही हैं। नौकरी मिलने से पहले ही बना लिया था Plan जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने FlyDubai में नौकरी मिलने से पहले ही इजरायल जाने वाली फ्लाइट को निशाना बनाने की योजना तैयार कर ली थी। बताया गया है कि वह पहले भी इजरायल की यात्रा कर चुका था। जांच एजेंसियां अब उसके पुराने यात्रा रिकॉर्ड और गतिविधियों को खंगाल रही हैं। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उसकी योजना कब बनी और क्या इस दौरान किसी अन्य व्यक्ति या संगठन से उसका संपर्क था। Flight में कैसे बिगड़ी स्थिति? रिपोर्टों के अनुसार, 30 सितंबर को FlyDubai की FZ1073 फ्लाइट दुबई से इजरायल के लिए रवाना हुई थी। उड़ान के दौरान को-पायलट और कैप्टन के बीच हुई घटना के बाद विमान में स्थिति तनावपूर्ण हो गई। हालात को देखते हुए विमान का रुख सऊदी अरब के तबुक की ओर किया गया, जहां उसे सुरक्षित उतारा गया। घटना के बाद यात्रियों और क्रू की मदद से स्थिति को नियंत्रित किया गया। पुराने Training Record की भी जांच मामले की जांच अब आरोपी की पुरानी गतिविधियों तक पहुंच गई है। न्यूजीलैंड पुलिस के अनुसार, आरोपी ने 2018-19 के दौरान वहां Flight Training का एक हिस्सा पूरा किया था। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की एजेंसियां उसके पुराने रिकॉर्ड, वहां रहने के दौरान की गतिविधियों और प्रशिक्षण से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही हैं। अकेले बनाई थी योजना या किसी का था साथ? जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आरोपी ने यह कदम अकेले उठाया या उसे किसी व्यक्ति अथवा संगठन से मदद मिली थी। इसी वजह से उसके संपर्कों, यात्रा इतिहास और दूसरी गतिविधियों की भी जांच की जा रही है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और आरोपी के कई दावों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि FlyDubai Flight में हुई इस घटना के पीछे पूरा मकसद क्या था और कथित योजना कितने समय पहले तैयार की गई थी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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SIR

SIR पर बढ़ा विवाद: Form 6 को लेकर BJP और Rahul Gandhi आमने-सामने, Election Commission ने दी सफाई

बिहार में Special Intensive Revision (SIR) को लेकर शुरू हुआ विवाद अब Form 6 तक पहुंच गया है। मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में बदलाव के आरोपों पर BJP और कांग्रेस आमने-सामने हैं। राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए हैं, वहीं BJP ने उनके दावों को गलत और भ्रामक बताया है। विवाद उस समय और बढ़ गया जब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि अदालत ने Form 6 के किसी बदले हुए प्रारूप को मंजूरी नहीं दी है। कोर्ट ने रिकॉर्ड देखने के बाद यह स्पष्ट करने की बात कही कि फॉर्म में कोई बदलाव हुआ है या नहीं। BJP ने क्या कहा? BJP का कहना है कि Form 6 के मूल फॉर्म में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पार्टी के मुताबिक बिहार में SIR की प्रक्रिया के दौरान Form 6 के साथ एक अतिरिक्त Declaration यानी घोषणा-पत्र लगाया गया था। नेता संबित पात्रा ने राहुल गांधी के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने Form 6 को गैरकानूनी नहीं बताया है। उनका कहना है कि अदालत ने रिकॉर्ड मंगाकर पूरे मामले को समझने की प्रक्रिया शुरू की है। Election Commission ने भी दी सफाई चुनाव आयोग ने भी Form 6 को लेकर अपना पक्ष रखा है। आयोग के मुताबिक मूल Form 6 में कॉमा या फुल स्टॉप तक कोई बदलाव नहीं किया गया। SIR के दौरान इसके साथ एक अतिरिक्त Declaration जोड़ा गया था। आयोग का कहना है कि यह Declaration बिहार में SIR की विशेष प्रक्रिया से जुड़ा था। सामान्य परिस्थितियों में मतदाता के नाम को जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाला Form 6 अपने निर्धारित प्रारूप में ही लागू है। Supreme Court में क्या हुआ? 5 अक्टूबर को CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने कहा कि Form 6 के किसी modified version को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी नहीं दी है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि वह चुनाव आयोग के रिकॉर्ड देखकर यह समझना चाहता है कि Form 6 में कथित बदलाव क्या था और अगर कोई बदलाव हुआ तो उसे किस प्रक्रिया के तहत किया गया। यही टिप्पणी अब राजनीतिक विवाद का बड़ा आधार बन गई है। Rahul Gandhi ने लगाए गंभीर आरोप सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने Form 6 में कथित तौर पर गैरकानूनी बदलाव किया और इससे चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं। राहुल गांधी के इन आरोपों को BJP और चुनाव आयोग ने खारिज किया है। चुनाव आयोग ने उनके दावे को भ्रामक बताते हुए कहा कि Form 6 में बदलाव किए जाने की बात सही नहीं है। विवाद की जड़ में क्या है Form 6 का Declaration? दरअसल, पूरा विवाद Form 6 और उसके साथ लगाए गए अतिरिक्त Declaration को लेकर है। SIR के दौरान मतदाताओं से अतिरिक्त जानकारी मांगी गई थी। इसी वजह से विपक्ष ने सवाल उठाया कि क्या Form 6 में नियमों के मुताबिक बदलाव किया गया था। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि यह Form 6 में संशोधन नहीं था, बल्कि SIR की प्रक्रिया के लिए उसके साथ लगाया गया अतिरिक्त Declaration था। अब आगे क्या होगा? फिलहाल इस मामले में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। एक तरफ BJP और Election Commission Form 6 में किसी बदलाव से इनकार कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ राहुल गांधी और विपक्ष इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। Supreme Court के सामने अब रिकॉर्ड आने के बाद तस्वीर और साफ हो सकती है। फिलहाल विवाद का सबसे अहम सवाल यही है कि क्या Form 6 के मूल प्रारूप में बदलाव हुआ था या सिर्फ SIR के लिए अतिरिक्त Declaration जोड़ा गया था। मतदाता सूची से जुड़े इस मुद्दे पर आगे होने वाली सुनवाई और चुनाव आयोग के रिकॉर्ड पर सभी की नजर बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Lucknow Airport

Lucknow Airport के पास बड़ा हादसा: लेबर कैंप में आग, 33 Plastic Rooms जले

लखनऊ एयरपोर्ट (Lucknow Airport) के पास बने लेबर कैंप में आग लगने से मंगलवार को अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते आग ने कैंप के प्लास्टिक से बने करीब 33 कमरों को अपनी चपेट में ले लिया। आग फैलने के बाद वहां रह रहे मजदूरों के बीच भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। हादसे के दौरान अपनी जान बचाने के लिए एक मजदूर ने दूसरी मंजिल से नीचे छलांग लगा दी। बताया जा रहा है कि इस घटना में मजदूर घायल हुआ है। आग की लपटें देखकर कैंप में मौजूद दूसरे लोग भी किसी तरह बाहर निकलने की कोशिश करने लगे। Plastic के कमरों में तेजी से फैली आग लेबर कैंप में कई कमरे प्लास्टिक और दूसरे ज्वलनशील सामान से बने हुए थे। यही वजह रही कि आग ने थोड़े ही समय में कई कमरों को अपनी चपेट में ले लिया। कुछ ही देर में कैंप का बड़ा हिस्सा धुएं और आग की लपटों से घिर गया। घटना की सूचना मिलते ही Fire Brigade की टीमें मौके पर पहुंचीं। दमकल कर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। आग बुझाने के दौरान आसपास के इलाके में भी लोगों की भीड़ जमा हो गई। आग लगने की वजह अभी साफ नहीं फिलहाल आग किस वजह से लगी, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। दमकल विभाग और प्रशासन की टीम मामले की जांच कर रही है। शुरुआती तौर पर यह पता लगाया जा रहा है कि आग की शुरुआत कैंप के किस हिस्से से हुई और देखते ही देखते यह इतने बड़े इलाके तक कैसे फैल गई। हादसे के बाद कैंप में रहने वाले मजदूरों के सामान को भी नुकसान पहुंचा है। प्रशासन की ओर से नुकसान और घायलों से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल लखनऊ एयरपोर्ट के पास लेबर कैंप में हुए इस हादसे ने वहां मौजूद Fire Safety इंतजामों पर भी सवाल खड़े किए हैं। प्लास्टिक से बने कमरों में बड़ी संख्या में मजदूरों का रहना आग की स्थिति में जोखिम बढ़ा सकता है। फिलहाल प्रशासन की जांच पूरी होने के बाद ही आग की असली वजह और कैंप में सुरक्षा इंतजामों की स्थिति को लेकर तस्वीर साफ होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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West Bengal

West Bengal Election: Nandigram में Congress का बड़ा आरोप, Rejinagar में Humayun Kabir हिरासत में

West Bengal Bypoll 2026 पश्चिम बंगाल समेत देश के कई हिस्सों में मंगलवार को उपचुनाव के लिए मतदान जारी है। बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर वोटिंग के दौरान राजनीतिक हलचल भी देखने को मिली। रेजीनगर में आम जनता उन्नयन पार्टी के नेता हुमायूं कबीर को पुलिस ने हिरासत में लिया, जबकि नंदीग्राम में कांग्रेस ने अपने पोलिंग एजेंट्स को जबरन हटाए जाने का आरोप लगाया है। इन घटनाओं के बीच चुनाव आयोग और स्थानीय प्रशासन की निगरानी में मतदान प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। पश्चिम बंगाल के अलावा तमिलनाडु, असम और पुडुचेरी में भी उपचुनाव के लिए वोट डाले जा रहे हैं। रेजीनगर में हुमायूं कबीर हिरासत में पश्चिम बंगाल की रेजीनगर सीट पर मतदान के दौरान हुमायूं कबीर को पुलिस ने हिरासत में लिया। रिपोर्ट के मुताबिक, मतदान करने के बाद वह अपने पार्टी कार्यालय पहुंचे थे। इसके बाद पुलिस उन्हें रेजीनगर थाने ले गई। हुमायूं कबीर ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर कुछ शिकायतें भी उठाई थीं। उनका आरोप था कि उनके समर्थकों और चुनाव से जुड़े लोगों को परेशान किया जा रहा है। हालांकि, उनकी हिरासत के पीछे पुलिस की ओर से बताए गए कारण को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट सामने आई हैं। रेजीनगर सीट इस उपचुनाव में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह सीट हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी, जिसके चलते यहां दोबारा मतदान कराया जा रहा है। Nandigram में Congress ने लगाए आरोप नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान ने मतदान के दौरान गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि पार्टी के पोलिंग एजेंट्स को मतदान केंद्रों से जबरन हटाया गया। कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया कि कुछ इलाकों में मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, एक मतदान केंद्र के पीठासीन अधिकारी ने मतदान को शांतिपूर्ण बताया। अधिकारी के मुताबिक बूथ पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम हैं और वेबकास्टिंग के जरिए भी निगरानी की जा रही है। इस तरह नंदीग्राम में राजनीतिक दलों के आरोपों और मतदान अधिकारियों के बयानों में अंतर दिखाई दे रहा है। अंतिम स्थिति प्रशासन और चुनाव आयोग की रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगी। Nandigram और Rejinagar में कितने Voters? नंदीग्राम में करीब 2.67 लाख मतदाता हैं और यहां 323 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। वहीं रेजीनगर में करीब 2.57 लाख मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। यहां 315 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। दोनों विधानसभा क्षेत्रों में मतदान केंद्रों की निगरानी के लिए वेबकास्टिंग की व्यवस्था भी की गई है। सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन की ओर से इंतजाम किए गए हैं। Tamil Nadu, Assam और Puducherry में भी Voting उपचुनाव सिर्फ पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं है। तमिलनाडु की मदुरंतकम और धारापुरम विधानसभा सीटों पर भी वोटिंग हो रही है। मतदान केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था के लिए राज्य पुलिस के साथ केंद्रीय बलों की तैनाती की गई है। वहीं असम की नगांव लोकसभा सीट पर भी उपचुनाव हो रहा है। यहां कई प्रमुख उम्मीदवारों ने सुबह मतदान किया। इसके अलावा पुडुचेरी की थट्टानचावडी विधानसभा सीट पर भी मतदाता अपने वोट डाल रहे हैं। 9 अक्टूबर को आएगा Result इन सभी सीटों पर मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद 9 अक्टूबर 2026 को वोटों की गिनती होगी। इसी दिन साफ होगा कि अलग-अलग सीटों पर मतदाताओं ने किस उम्मीदवार के पक्ष में फैसला दिया है। फिलहाल पश्चिम बंगाल में हुमायूं कबीर की हिरासत और नंदीग्राम में कांग्रेस के लगाए आरोपों ने उपचुनाव के बीच राजनीतिक गतिविधियां बढ़ा दी हैं। प्रशासन और चुनाव आयोग की निगरानी में मतदान जारी है और अब सभी की नजरें मतदान प्रतिशत के साथ 9 अक्टूबर को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मां चंद्रघंटा

Navratri 2026: तीसरे दिन करें मां चंद्रघंटा की पूजा, जानें महत्त्व, कथा और मंत्र

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित होता है, इसलिए उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। उनका स्वरूप साहस, शक्ति और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का प्रतीक माना जाता है। मां चंद्रघंटा की कथा पौराणिक मान्यताओं में मां चंद्रघंटा को देवी दुर्गा का युद्ध के लिए तत्पर स्वरूप बताया गया है। मान्यता है कि वे अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और दुष्ट शक्तियों का सामना करती हैं। उनका स्वरूप यह संदेश देता है कि शक्ति के साथ विवेक और साहस भी जरूरी हैं। मां का स्वरूप और महत्त्व पूजा विधि मंत्र: ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः। भोग: मां को दूध से बनी मिठाई या खीर अर्पित करने की परंपरा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Jantar Mantar

Jantar Mantar Ban: 1993 से विरोध की आवाज बना जंतर-मंतर, अब प्रदर्शन के नियमों में बदलाव

दिल्ली का जंतर-मंतर (Jantar Mantar) सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि देशभर के लोगों की आवाज उठाने का एक बड़ा मंच रहा है। जब भी किसी मुद्दे पर सरकार का ध्यान खींचना होता था, लोग यहां धरना देने पहुंच जाते थे। भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे का आंदोलन हो या भारतीय पहलवानों का प्रदर्शन, जंतर-मंतर ने कई बड़े आंदोलनों को करीब से देखा है। लेकिन अब यहां धरना-प्रदर्शन को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। दिल्ली पुलिस के ताजा फैसले के बाद जंतर-मंतर अब निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची में शामिल नहीं है। इसकी जगह दिल्ली में रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और CBD ग्राउंड को प्रदर्शन के लिए तय किया गया है। इस फैसले के बाद सवाल उठ रहा है कि आखिर जिस जगह पर पिछले करीब 33 साल से लोग अपनी मांगें उठाते रहे, वहां प्रदर्शन की व्यवस्था क्यों बदली गई? Jantar Mantar Protest Ban: क्या है पूरा मामला? Jantar Mantar पर प्रदर्शन की व्यवस्था में बदलाव को लेकर 12 अक्टूबर 2026 को चर्चा तेज हुई। दिल्ली पुलिस के आदेश के अनुसार, गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थलों में बदलाव किया गया है। अब प्रदर्शन के लिए तीन जगहों को तय किया गया है। इनमें सेंट्रल दिल्ली का रामलीला मैदान, नॉर्थ दिल्ली का बुराड़ी मैदान और ईस्ट दिल्ली का CBD ग्राउंड शामिल हैं। इस फैसले से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और दूसरे समूहों के लिए अपनी रणनीति बदलने की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का संवैधानिक अधिकार खत्म हो गया है। प्रदर्शन के लिए तय नियमों और अनुमति की प्रक्रिया का पालन करना जरूरी रहेगा। 1993 से विरोध-प्रदर्शन का प्रमुख केंद्र रहा जंतर-मंतर जंतर-मंतर को दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन की प्रमुख जगह के रूप में पहचान 1993 के आसपास मिली। इससे पहले दिल्ली के बोट क्लब इलाके में बड़े धरने और सभाएं हुआ करती थीं। अक्टूबर 1988 में किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान बोट क्लब पर जुटे थे। इसके बाद वहां प्रदर्शनों पर पाबंदियां लगने लगीं और दूसरे स्थान की जरूरत महसूस हुई। धीरे-धीरे जंतर-मंतर प्रदर्शनकारियों के लिए एक प्रमुख ठिकाना बन गया। संसद के नजदीक होने के कारण यहां होने वाले प्रदर्शनों पर मीडिया और राजनीतिक दलों का ध्यान भी आसानी से जाता था। यही वजह रही कि अगले कई दशकों तक यह जगह अलग-अलग आंदोलनों का गवाह बनी। Anna Hazare Movement: अन्ना आंदोलन से देशभर में चर्चा साल 2011 में अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन ने जंतर-मंतर को देशभर में सुर्खियों में ला दिया था। 5 अप्रैल 2011 को अन्ना हजारे ने लोकपाल कानून की मांग को लेकर अनशन शुरू किया। इस आंदोलन को बड़ी संख्या में लोगों का समर्थन मिला। अरविंद केजरीवाल समेत कई सामाजिक कार्यकर्ता भी इससे जुड़े थे। भ्रष्टाचार के खिलाफ उठी इस आवाज ने राष्ट्रीय राजनीति में एक नई बहस शुरू कर दी और आगे चलकर आम आदमी पार्टी के गठन का रास्ता भी बना। उस दौर में जंतर-मंतर पर जुटने वाली भीड़ ने दिखाया कि किसी मुद्दे को लेकर लोगों का शांतिपूर्ण विरोध किस तरह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन सकता है। Farmers Protest: तमिलनाडु के किसानों ने भी उठाई आवाज 2017 में तमिलनाडु के किसानों ने कर्ज, सूखे और आर्थिक परेशानियों को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन किया था। किसानों की मांगों में कर्ज राहत, सूखा राहत पैकेज और कावेरी जल विवाद से जुड़े मुद्दे शामिल थे। किसानों का यह प्रदर्शन लंबे समय तक चर्चा में रहा। जंतर-मंतर पर जुटे किसानों ने अपनी समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की कोशिश की। इस आंदोलन ने खेती-किसानी से जुड़े संकट और किसानों की मांगों पर एक बार फिर ध्यान खींचा। Wrestlers Protest: पहलवानों के धरने ने खींचा देश का ध्यान साल 2023 में जंतर-मंतर पर भारतीय कुश्ती जगत से जुड़े पहलवानों का प्रदर्शन भी काफी चर्चा में रहा। विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया समेत कई पहलवानों ने भारतीय कुश्ती महासंघ के तत्कालीन प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की थी। पहलवानों के इस धरने ने खेल जगत के साथ-साथ राजनीति में भी बहस छेड़ दी। प्रदर्शन के दौरान खिलाड़ियों ने अपनी शिकायतों की जांच और जवाबदेही की मांग उठाई। इस आंदोलन ने एक बार फिर जंतर-मंतर को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया। CJP Protest: कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन भी चर्चा में अक्टूबर 2026 में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर भी विवाद सामने आया। संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को प्रदर्शन करने की घोषणा की थी। दिल्ली पुलिस ने इस प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी। पुलिस के अनुसार, संगठन ने 7 अक्टूबर को अनुमति के लिए आवेदन किया था, जबकि निर्धारित प्रक्रिया के तहत सामान्य तौर पर कम से कम 10 दिन पहले आवेदन करना होता है। इसके बाद जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने का फैसला भी चर्चा का विषय बन गया। हालांकि, किसी भी प्रदर्शन की अनुमति उसके आवेदन, सुरक्षा व्यवस्था और लागू नियमों के आधार पर तय की जाती है। Jantar Mantar पर पहले भी लग चुकी हैं पाबंदियां जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन को लेकर विवाद पहले भी सामने आते रहे हैं। साल 2017 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने स्थानीय निवासियों की शिकायतों के बाद यहां प्रदर्शनों को लेकर प्रतिबंधात्मक निर्देश दिए थे। शिकायतों में शोर, गंदगी और आसपास के लोगों को होने वाली परेशानी जैसे मुद्दे शामिल थे। बाद में 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर और बोट क्लब क्षेत्र में प्रदर्शनों पर पूर्ण प्रतिबंध के मामले पर सुनवाई की। अदालत ने शांतिपूर्ण विरोध को नागरिकों के मौलिक अधिकारों से जुड़ा माना, साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए उचित नियम लागू किए जा सकते हैं। इससे साफ है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर बहस केवल किसी एक आंदोलन तक सीमित नहीं रही है। इसमें नागरिकों के अधिकार, स्थानीय लोगों की परेशानी और सुरक्षा व्यवस्था जैसे कई पहलू शामिल रहे हैं। अब कहां कर सकेंगे लोग धरना-प्रदर्शन? दिल्ली पुलिस के ताजा आदेश के...
Rahul Gandhi

Rahul Gandhi on CEC: राहुल गांधी बोले- ज्ञानेश कुमार के मैसेज आते हैं, इस्तीफा देकर हटें

कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर एक बार फिर सवाल उठाए हैं। राहुल गांधी ने कहा कि ज्ञानेश कुमार के मैसेज उन्हें आते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह ज्ञानेश कुमार को अपराधी नहीं मानते, बल्कि उनके मुताबिक उनसे गड़बड़ी कराई जा रही है। राहुल ने मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफा देकर रास्ते से हटने की मांग की है। राहुल गांधी का यह बयान चुनाव आयोग की भूमिका और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर चल रहे विवाद के बीच आया है। विपक्ष लगातार चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठा रहा है। CEC Gyanesh Kumar पर राहुल गांधी ने क्या कहा? राहुल गांधी के मुताबिक, ज्ञानेश कुमार के साथ उनके मैसेज के जरिए संपर्क होता है। उन्होंने कहा कि वह उन्हें अपराधी नहीं मानते, लेकिन आरोप लगाया कि उनसे गलत काम कराया जा रहा है। राहुल ने यह भी मांग की कि ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा दें और इस पूरे मामले में स्थिति स्पष्ट हो। हालांकि, राहुल गांधी के इन आरोपों को लेकर सभी तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि होना जरूरी है। उनके बयान और आरोपों को चुनाव आयोग की ओर से दिए गए आधिकारिक जवाब से अलग समझना चाहिए। SIR को लेकर क्यों बढ़ा विवाद? मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया SIR को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में कुछ मतदाताओं के नाम हटाए जाने और चुनावी निष्पक्षता को लेकर गंभीर चिंताएं हैं। वहीं, चुनाव आयोग मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया के लिए निर्धारित नियमों के तहत काम करता है। इस मुद्दे पर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच मतभेद ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। Supreme Court जाने की तैयारी में INDIA Bloc राहुल गांधी और विपक्षी दलों ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को कानूनी स्तर पर उठाने की बात कही है। INDIA Bloc का रुख है कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर स्पष्टता मिलनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने पर संबंधित पक्षों की दलीलें और उपलब्ध दस्तावेज इस विवाद के कानूनी पहलुओं को समझने में अहम होंगे। चुनाव आयोग पर बढ़ा राजनीतिक दबाव ज्ञानेश कुमार को लेकर राहुल गांधी का बयान ऐसे समय आया है, जब चुनाव आयोग की भूमिका विपक्ष के निशाने पर है। कांग्रेस इस मुद्दे को लोकतांत्रिक प्रक्रिया और निष्पक्ष चुनाव से जोड़कर उठा रही है। फिलहाल, इस विवाद में राहुल गांधी के आरोप, चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े तथ्य अलग-अलग देखना जरूरी है। आगे इस मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं और संबंधित पक्ष क्या प्रतिक्रिया देते हैं, इस पर सबकी नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gold Price

Gold Price Today: सोना ₹1,005 सस्ता, 10 ग्राम Gold ₹1.48 लाख पर

Gold Price की कीमतों में आज गिरावट दर्ज की गई है। सोना ₹1,005 सस्ता हो गया, जिसके बाद 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव करीब ₹1.48 लाख पर आ गया। सोने की कीमतों में आई इस कमी से उन लोगों को कुछ राहत मिल सकती है, जो शादी-ब्याह या त्योहारों के लिए गहने खरीदने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, सोने के भाव में रोजाना बदलाव होता है। ऐसे में खरीदारी करने से पहले अपने शहर में ताजा रेट की जानकारी लेना जरूरी है। Gold Rate Today: आज कितना सस्ता हुआ सोना? आज सोने की कीमत में ₹1,005 की गिरावट आई है। इसके बाद 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव करीब ₹1.48 लाख बताया जा रहा है। सोने की कीमतों पर नजर रखने वाले खरीदारों के लिए यह बदलाव अहम है, क्योंकि भाव में थोड़ी सी कमी भी बड़ी खरीदारी के दौरान कीमत पर असर डाल सकती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि 24 कैरेट सोना मुख्य रूप से निवेश के लिए खरीदा जाता है, जबकि गहने बनाने में आमतौर पर 22 कैरेट सोने का इस्तेमाल होता है। इसलिए ज्वेलरी खरीदते समय 22 कैरेट का भाव भी जरूर चेक करें। सितंबर में भी ₹8,000 तक गिरा था सोने का भाव सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव पिछले महीने भी देखने को मिला था। सितंबर में सोना करीब ₹8,000 तक सस्ता हुआ था। अब एक बार फिर कीमतों में गिरावट आने से बाजार में सोने के अगले रुख को लेकर चर्चा बढ़ गई है। सोने के भाव पर केवल घरेलू मांग का असर नहीं पड़ता। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों की चाल, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें और निवेशकों की खरीदारी जैसे कई कारण गोल्ड रेट को प्रभावित करते हैं। इसी वजह से कभी सोने की कीमत तेजी से बढ़ती है, तो कभी इसमें गिरावट देखने को मिलती है। क्या अभी Gold खरीदना सही रहेगा? अगर आप लंबे समय से सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो मौजूदा भाव पर नजर रख सकते हैं। हालांकि, सिर्फ एक दिन की गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसला लेना जरूरी नहीं है। आने वाले दिनों में कीमतें किस दिशा में जाएंगी, इसका निश्चित अनुमान लगाना मुश्किल है। खरीदारी से पहले अपने बजट और जरूरत को ध्यान में रखें। अगर गहने खरीद रहे हैं, तो सोने की कीमत के अलावा मेकिंग चार्ज और लागू GST को भी जोड़ें। साथ ही, हॉलमार्क वाला सोना खरीदना बेहतर रहता है। 22 और 24 कैरेट Gold Rate में क्या है अंतर? 24 कैरेट सोना अधिक शुद्ध होता है, जबकि 22 कैरेट सोने में अन्य धातुएं मिलाई जाती हैं, जिससे गहने बनाना आसान होता है। इसी कारण दोनों की कीमतों में अंतर रहता है। यह भी ध्यान रखें कि ₹1.48 लाख का भाव 10 ग्राम 24 कैरेट सोने के लिए बताया गया है। आपके शहर में वास्तविक कीमत अलग हो सकती है। खरीदारी से पहले स्थानीय ज्वेलर से ताजा रेट जरूर पता करें। Gold Price Today: आगे क्या रहेगा सोने का रुख? सोने की कीमत में आई आज की गिरावट ने खरीदारों का ध्यान खींचा है। सितंबर में भी करीब ₹8,000 की कमी दर्ज होने के बाद अब ₹1,005 की ताजा गिरावट बाजार के लिए चर्चा का विषय है। फिलहाल सोने की कीमतों में आगे तेजी आएगी या गिरावट जारी रहेगी, यह बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। इसलिए निवेश या खरीदारी का फैसला करने से पहले ताजा भाव और बाजार के रुझान को समझना जरूरी है। नोट: यह खबर उपलब्ध कराए गए सोने के भाव के आंकड़ों पर आधारित है। प्रकाशन से पहले ताजा रेट और सितंबर में हुई गिरावट की पुष्टि जरूर करें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Stock Market

Stock Market Today: सेंसेक्स 500 अंक टूटा, Nifty में 150 अंकों की गिरावट

भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में सोमवार, 12 अक्टूबर को कारोबार के दौरान गिरावट देखने को मिली। एक समय बाजार में तेजी की उम्मीद नजर आ रही थी, लेकिन कुछ ही देर में बिकवाली बढ़ गई। सेंसेक्स करीब 500 अंक टूटकर 71,900 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी में भी लगभग 150 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। खासतौर पर IT और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में दबाव देखने को मिला। बाजार में अचानक आई इस कमजोरी से निवेशकों की चिंता बढ़ी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार संभलता है या गिरावट का सिलसिला आगे भी जारी रहता है। Sensex Today: 71,900 के आसपास पहुंचा बाजार सोमवार को शेयर बाजार की शुरुआत सकारात्मक रुख के साथ हुई थी। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी में तेजी दिखाई दी, लेकिन बाद में बिकवाली हावी हो गई। सेंसेक्स 500 अंकों से ज्यादा गिरकर करीब 71,900 के स्तर पर कारोबार करने लगा। वहीं, निफ्टी भी लगभग 150 अंक नीचे आ गया। बाजार में इस उतार-चढ़ाव के बीच निवेशक सावधानी बरतते नजर आए। जिन निवेशकों को सुबह बाजार में तेजी की उम्मीद थी, उनके लिए अचानक आई गिरावट ने चिंता बढ़ा दी। IT और Banking Stocks में सबसे ज्यादा बिकवाली सोमवार के कारोबार में IT और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों पर दबाव देखने को मिला। टेक महिंद्रा समेत कुछ आईटी शेयरों में कमजोरी रही। वहीं, SBI, ICICI Bank और Axis Bank जैसे प्रमुख बैंकिंग शेयरों में भी बिकवाली का असर दिखाई दिया। इन सेक्टरों के बड़े शेयरों में गिरावट आने से प्रमुख बाजार सूचकांकों पर दबाव बढ़ा। हालांकि, सभी शेयरों में एक जैसी कमजोरी नहीं रही। ऑटो सेक्टर के कुछ शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन भी अलग-अलग रहा। Stock Market में गिरावट की क्या है वजह? Stock Market में गिरावट के पीछे कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारण हो सकते हैं। निवेशक इस समय वैश्विक आर्थिक हालात, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर खास नजर रख रहे हैं। विदेशी निवेशकों की बिकवाली: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की ओर से लगातार बिकवाली होने पर बाजार के प्रमुख शेयरों पर दबाव बढ़ सकता है। इससे सेंसेक्स और निफ्टी की चाल भी प्रभावित होती है। कच्चे तेल की कीमतें: भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में कच्चा तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ने और महंगाई पर दबाव पड़ने की आशंका रहती है। वैश्विक बाजारों का असर: अमेरिका में बॉन्ड यील्ड, ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें और पश्चिम एशिया में जारी तनाव जैसे कारक निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। बाजार में मुनाफावसूली: तेजी के बाद निवेशकों की ओर से शेयर बेचकर मुनाफा निकालना भी गिरावट की एक वजह हो सकता है। हालांकि, किसी एक कारोबारी सत्र की गिरावट को केवल एक कारण से जोड़ना सही नहीं होगा। रुपये और कच्चे तेल पर भी निवेशकों की नजर शेयर बाजार के साथ-साथ रुपये की चाल और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भी महत्वपूर्ण हैं। रुपये में कमजोरी आने से आयात महंगा हो सकता है, जिसका असर कंपनियों की लागत पर पड़ता है। वहीं, तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई को लेकर चिंता बढ़ सकती है। इसी वजह से निवेशक केवल शेयरों की कीमतों पर ही नहीं, बल्कि देश और दुनिया से जुड़े आर्थिक संकेतों पर भी नजर बनाए हुए हैं। निवेशकों को अब क्या करना चाहिए? सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट के बीच निवेशकों के लिए धैर्य रखना जरूरी है। बाजार में हर गिरावट का मतलब यह नहीं होता कि सभी शेयरों में लंबे समय तक कमजोरी बनी रहेगी। इसी तरह, थोड़ी तेजी आने पर यह मान लेना भी ठीक नहीं कि बाजार पूरी तरह संभल गया है। निवेश का फैसला लेते समय कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, शेयर की कीमत, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रखना चाहिए। केवल बाजार की गिरावट देखकर जल्दबाजी में शेयर खरीदने या बेचने से बचना बेहतर है। आगे कैसी रहेगी शेयर बाजार की चाल? आने वाले दिनों में बाजार की दिशा विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री, कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक संकेतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों से प्रभावित हो सकती है। निवेशकों को अब यह देखना होगा कि सेंसेक्स 71,900 के आसपास खुद को संभाल पाता है या बाजार में दबाव बना रहता है। कुल मिलाकर, सोमवार को सेंसेक्स में करीब 500 अंकों और निफ्टी में लगभग 150 अंकों की गिरावट ने बाजार के माहौल को कमजोर किया। IT और बैंकिंग शेयरों में बिकवाली इसका प्रमुख हिस्सा रही। फिलहाल निवेशकों के लिए बाजार की चाल पर नजर रखना और सोच-समझकर फैसले लेना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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