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Pralhad Joshi

New Education Minister B.A. पास हैं Pralhad Joshi, जानिए क्यों सौंपी गई Education Ministry की जिम्मेदारी

देश की शिक्षा व्यवस्था इन दिनों बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद, छात्रों के आंदोलन और शिक्षा सुधार को लेकर बढ़ती मांग के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। वरिष्ठ भाजपा नेता प्रह्लाद जोशी (Pralhad Joshi) को देश का नया केंद्रीय शिक्षा मंत्री (New Education Minister) बनाया गया है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद यह जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी को सौंपी गई है। ऐसे में लोगों के मन में कई सवाल हैं—आखिर नए शिक्षा मंत्री कितने पढ़े-लिखे हैं? उनका राजनीतिक अनुभव कितना है? और क्या वे शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल कर पाएंगे? आइए जानते हैं। कौन हैं Pralhad Joshi? Pralhad Joshi भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं। उनका राजनीतिक सफर संगठन से शुरू होकर संसद और केंद्र सरकार तक पहुंचा है। वे कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से लगातार कई बार सांसद चुने जा चुके हैं, जो उनकी मजबूत जनाधार और राजनीतिक स्वीकार्यता को दर्शाता है। केंद्र सरकार में वे पहले भी कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। संसदीय कार्य, कोयला, खान, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा जैसे मंत्रालयों में उनके काम को प्रशासनिक अनुभव का मजबूत आधार माना जाता है। Education Qualification: कितने पढ़े-लिखे हैं नए शिक्षा मंत्री? अगर उनकी पढ़ाई की बात करें तो प्रह्लाद जोशी ने कर्नाटक विश्वविद्यालय (Karnataka University), धारवाड़ से संबद्ध श्री कदासिद्धेश्वर आर्ट्स कॉलेज से Bachelor of Arts (B.A.) की डिग्री हासिल की है। कॉलेज शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन को चुना और राजनीति में सक्रिय हो गए। पिछले तीन दशकों में उन्होंने संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। ऐसे समय मिली शिक्षा मंत्रालय की कमान प्रह्लाद जोशी की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब देश में परीक्षा प्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद के बाद लाखों छात्रों और अभिभावकों ने पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की मांग की। कई शहरों में प्रदर्शन हुए और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई। इन्हीं परिस्थितियों के बीच सरकार ने शिक्षा मंत्रालय में बदलाव करते हुए अनुभवी नेतृत्व पर भरोसा जताया है। New Education Minister के सामने क्या होंगी सबसे बड़ी चुनौतियां? परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में सुरक्षा बढ़ाना और पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी। National Education Policy (NEP) को गति देना नई शिक्षा नीति को सभी राज्यों में प्रभावी ढंग से लागू करना और उसकी प्रगति की निगरानी करना भी बड़ी जिम्मेदारी होगी। छात्रों का भरोसा दोबारा जीतना हालिया घटनाओं के बाद छात्रों और अभिभावकों का विश्वास प्रभावित हुआ है। नई नीतियों और पारदर्शी व्यवस्था के जरिए इस भरोसे को मजबूत करना जरूरी होगा। डिजिटल और रोजगार आधारित शिक्षा उच्च शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट, रिसर्च और डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा देकर शिक्षा को रोजगार से जोड़ना भी मंत्रालय के प्रमुख लक्ष्यों में शामिल रहेगा। क्या बदल सकती है शिक्षा व्यवस्था? विशेषज्ञों का मानना है कि केवल मंत्री बदलने से बदलाव नहीं आएगा। असली परीक्षा नई टीम के फैसलों और उनके क्रियान्वयन की होगी। यदि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ती है, छात्रों की शिकायतों का समय पर समाधान होता है और शिक्षा नीति को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, तो इसका सीधा लाभ देश के करोड़ों विद्यार्थियों को मिलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Siwan

Siwan Student Protest Update: SP घायल, 30 पुलिसकर्मी जख्मी; Firing के आरोपों से बढ़ा तनाव

बिहार के सिवान (Siwan) में छात्रों का प्रदर्शन शनिवार को अचानक हिंसक हो गया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प में सिवान के पुलिस अधीक्षक (SP) सहित करीब 30 पुलिसकर्मी घायल हो गए। हालात बिगड़ते देख प्रशासन ने जिले में सुरक्षा बढ़ा दी और अफवाहों को रोकने के लिए शाम तक इंटरनेट सेवाएं बंद कर दीं। इस बीच प्रदर्शन के दौरान खुलेआम फायरिंग होने के आरोप भी सामने आए हैं, जिनकी जांच जारी है। छात्रों का प्रदर्शन कैसे बदला हिंसा में? जानकारी के मुताबिक, छात्र अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे थे। शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन कुछ समय बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच विवाद बढ़ गया। देखते ही देखते पथराव शुरू हो गया और माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। इसी दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटनास्थल पर कुछ देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। SP समेत 30 पुलिसकर्मी घायल हिंसा में सिवान के SP सहित लगभग 30 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। पुलिस के कई वाहन भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल मौके पर तैनात कर दिया गया है। Firing के आरोप, वीडियो की जांच शुरू घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो तेजी से वायरल हुए, जिनमें फायरिंग जैसी आवाजें सुनाई देने का दावा किया जा रहा है। कुछ लोगों ने प्रदर्शन के दौरान खुलेआम गोली चलने के आरोप लगाए हैं। हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इन दावों की सत्यता की जांच की जा रही है। पुलिस वायरल वीडियो, सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रही है। Internet Service बंद करने का फैसला तनावपूर्ण माहौल और सोशल मीडिया पर अफवाहों के प्रसार की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन ने शाम तक मोबाइल इंटरनेट सेवा अस्थायी रूप से बंद कर दी। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने और गलत सूचनाओं को फैलने से रोकने के लिए उठाया गया है। उपद्रवियों की पहचान में जुटी पुलिस पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की मदद से उपद्रवियों की पहचान की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि हिंसा फैलाने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सियासत भी हुई तेज सिवान की इस घटना के बाद बिहार की राजनीति में भी हलचल बढ़ गई है। विपक्ष ने कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार का कहना है कि स्थिति अब नियंत्रण में है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल क्या है स्थिति? प्रशासन के अनुसार, जिले में स्थिति पहले से बेहतर है, लेकिन एहतियात के तौर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई है। पुलिस लगातार गश्त कर रही है और लोगों से शांति बनाए रखने तथा किसी भी अपुष्ट खबर पर विश्वास न करने की अपील की गई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Abhijeet Dipke

Education Politics: Dharmendra Pradhan Resignation के बाद Abhijeet Dipke ने बताया आंदोलन का अगला कदम

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर छात्र आंदोलन और शिक्षा व्यवस्था पर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के संस्थापक अभिजीत दीपके (Abhijeet Dipke) ने इस पूरे घटनाक्रम को आंदोलन की पहली जीत बताया है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है और छात्रों के अधिकार, परीक्षा प्रणाली में सुधार और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग को लेकर संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। Abhijeet Dipke के इस बयान के बाद शिक्षा जगत और राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू हो गई है। छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर लंबे समय से उठ रही आवाज अब एक बड़े आंदोलन का रूप लेती नजर आ रही है। Dharmendra Pradhan Resignation पर Abhijeet Dipke का बड़ा बयान धर्मेंद्र प्रधान के पद छोड़ने के बाद Abhijeet Dipke ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य केवल किसी एक व्यक्ति के इस्तीफे तक सीमित नहीं था। उनका कहना है कि असली मुद्दा शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षाओं में पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करना है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि “अभी तो ये शुरुआत हुई है।” उनके अनुसार आने वाले समय में छात्रों से जुड़े कई अन्य मुद्दों को लेकर भी आवाज उठाई जाएगी। NEET Controversy और Student Protest बना बड़ा मुद्दा NEET परीक्षा और कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में छात्रों के बीच नाराजगी देखने को मिली थी। कई छात्र संगठनों और युवाओं ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद जरूरी है, क्योंकि लाखों छात्रों का भविष्य इन परीक्षाओं पर निर्भर करता है। Jantar Mantar Protest से तेज हुई थी मांग धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर सहित कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन किए गए। CJP और अन्य प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने और छात्रों की समस्याओं के समाधान की मांग रखी। आंदोलन के दौरान युवाओं ने परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने और भविष्य की परीक्षाओं को बेहतर तरीके से आयोजित करने की जरूरत पर जोर दिया। “लड़ाई अभी बाकी है” — युवाओं को लेकर दीपके का संदेश अभिजीत दीपके का कहना है कि शिक्षा से जुड़े मुद्दे किसी एक घटना तक सीमित नहीं हैं। उनका फोकस युवाओं की आवाज को मजबूत करना और शिक्षा क्षेत्र में स्थायी बदलाव की मांग करना है। उनके बयान से साफ है कि आंदोलनकारी अब आगे की रणनीति बनाने में जुटे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच किस तरह की बातचीत होती है। Education Reform को लेकर बढ़ी बहस धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद एक बार फिर देश में शिक्षा सुधार, परीक्षा सुरक्षा और छात्रों के अधिकारों को लेकर बहस तेज हो गई है। युवाओं का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बनाए रखने के लिए मजबूत नियम, पारदर्शी प्रक्रिया और समय पर समाधान जरूरी हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि आने वाले समय में शिक्षा क्षेत्र को लेकर क्या बड़े फैसले सामने आते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sonam Wangchuk

Youth Power & Education Debate: Sonam Wangchuk बोले- Gen Z की आवाज से शुरू होगा Accountability और सुधार का दौर

शिक्षा और राजनीति से जुड़े विवाद के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) के एक बयान ने नई चर्चा शुरू कर दी है। धर्मेंद्र प्रधान को लेकर चल रहे विवाद और इस्तीफे की मांग के बीच वांगचुक ने Gen Z युवाओं की सक्रियता की तारीफ की और कहा कि जवाबदेही (Accountability) किसी भी व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में पहला कदम होती है। उन्होंने युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि अब जरूरत सिर्फ सवाल उठाने की नहीं, बल्कि सुधार और समाधान की ओर बढ़ने की है। Sonam Wangchuk ने Gen Z की आवाज को बताया बदलाव की ताकत Sonam Wangchuk ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी अपने अधिकारों और भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक है। सोशल मीडिया और लोकतांत्रिक माध्यमों से Gen Z लगातार अपनी बात रख रही है। उनके अनुसार, जब युवा शिक्षा, परीक्षा व्यवस्था और पारदर्शिता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सवाल उठाते हैं, तो इससे संस्थानों को अपनी जिम्मेदारियों पर ध्यान देने का मौका मिलता है। Dharmendra Pradhan Controversy: शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवाल धर्मेंद्र प्रधान को लेकर विवाद की शुरुआत शिक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर उठे सवालों के बाद तेज हुई। विपक्ष और कई छात्र संगठनों ने सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की है। छात्रों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता, परीक्षा प्रणाली में सुधार और बेहतर व्यवस्था को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। वहीं सरकार की ओर से भी कई बार कहा गया है कि शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। Accountability से Reform तक का संदेश सोनम वांगचुक ने अपने बयान के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि किसी भी व्यवस्था में सुधार के लिए जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बदलाव केवल विरोध से नहीं, बल्कि संवाद और सकारात्मक प्रयासों से आता है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में युवाओं की भागीदारी और उनकी आवाज को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। Gen Z और Youth Movement क्यों बन रहा चर्चा का विषय? आज की युवा पीढ़ी शिक्षा, रोजगार, परीक्षा प्रक्रिया और भविष्य से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रख रही है। इंटरनेट और सोशल मीडिया ने युवाओं को अपनी बात बड़े स्तर तक पहुंचाने का मंच दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी लोकतंत्र को मजबूत बनाती है और नीतियों में सुधार की प्रक्रिया को गति दे सकती है। धर्मेंद्र प्रधान मामले पर आगे की नजर धर्मेंद्र प्रधान से जुड़े इस विवाद के बीच सोनम वांगचुक का बयान राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। जहां एक ओर इसे युवाओं की ताकत और जवाबदेही से जोड़ा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकार के अगले कदमों पर भी नजर बनी हुई है। फिलहाल, शिक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मुद्दे आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का बड़ा हिस्सा बने रह सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Dharmendra Pradhan

Education Politics: Dharmendra Pradhan के इस्तीफे की मांग पर सियासत गर्म

शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों के बीच अब उनके इस्तीफे को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। इसी बीच दीपक के बयान ने इस पूरे मामले को और ज्यादा सुर्खियों में ला दिया है। दीपक ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि एक समय कहा जाता था कि “इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते”, लेकिन जब जनता और विपक्ष की आवाज मजबूत होती है तो हालात बदल सकते हैं। उन्होंने कहा, “झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई है। Paper Leak और Education System को लेकर बढ़ा दबाव शिक्षा मंत्रालय लगातार कई मुद्दों को लेकर विपक्ष के निशाने पर रहा है। खासतौर पर प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों, पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार से जवाब मांगा जाता रहा है। विपक्ष का आरोप है कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय होनी चाहिए। वहीं सरकार का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। दीपक का बयान बना चर्चा का विषय दीपक के बयान ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक चर्चा बढ़ा दी है। उनके शब्दों को सरकार पर दबाव बनाने वाले राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने इशारों में कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज सबसे अहम होती है और जब किसी मुद्दे पर लगातार सवाल उठते हैं तो सरकारों को उसका जवाब देना पड़ता है। क्या धर्मेंद्र प्रधान देंगे इस्तीफा? फिलहाल शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। सरकार की ओर से भी इस मामले में कोई संकेत नहीं दिया गया है। हालांकि, विपक्ष लगातार शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेर रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन सकता है। राजनीतिक घमासान जारी Education Sector से जुड़े फैसले और परीक्षाओं की विश्वसनीयता इस समय देश में बड़ा मुद्दा बने हुए हैं। जहां विपक्ष सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहा है, वहीं सरकार अपने काम और सुधारों को लेकर अपना पक्ष रख रही है। धर्मेंद्र प्रधान को लेकर शुरू हुई यह Resignation Controversy फिलहाल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित है, लेकिन इसने एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था और सरकार की जिम्मेदारी पर बहस को तेज कर दिया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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CJP Protest

CJP Protest Controversy: Fake News पर Delhi Police सख्त, Social Media Accounts की जांच शुरू

दिल्ली में चल रहे CJP Protest के बीच दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर फैल रही गलत सूचनाओं को लेकर बड़ा बयान दिया है। पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि प्रदर्शन से जुड़े मामले में कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए भ्रामक और झूठे पोस्ट वायरल किए जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार, इनमें से कुछ अकाउंट्स को पाकिस्तान से संचालित किया जा रहा है और इनके जरिए माहौल को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। Delhi Police ने Social Media Campaign पर जताई चिंता दिल्ली पुलिस ने बताया कि वह प्रदर्शन से जुड़ी हर गतिविधि पर नजर रख रही है। अधिकारियों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे पोस्ट सामने आए हैं जिनमें तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया गया है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी वायरल मैसेज, वीडियो या पोस्ट को बिना पुष्टि किए शेयर न करें। अधिकारियों का कहना है कि अफवाहों से बचना बेहद जरूरी है, क्योंकि गलत जानकारी से स्थिति बिगड़ सकती है। Protest को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था सख्त CJP Protest को देखते हुए दिल्ली के कई इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। प्रदर्शन स्थलों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन कानून व्यवस्था बिगाड़ने वाली किसी भी गतिविधि पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। Fake News फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई पुलिस अधिकारियों ने कहा कि सोशल मीडिया पर फर्जी जानकारी फैलाने वाले अकाउंट्स की पहचान की जा रही है। जांच के दौरान संदिग्ध गतिविधियों वाले अकाउंट्स को ट्रैक किया जा रहा है। पुलिस ने साफ किया कि इंटरनेट प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल कर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। लोगों से जिम्मेदारी के साथ Social Media इस्तेमाल करने की अपील आज के समय में सोशल मीडिया खबरों का तेज माध्यम बन चुका है, लेकिन कई बार इसका गलत इस्तेमाल भी देखने को मिलता है। दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी जानकारी को आगे बढ़ाने से पहले उसकी सत्यता जरूर जांच लें। पुलिस के अनुसार, मामले की जांच अभी जारी है और जरूरत पड़ने पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी। CJP Protest Latest Update फिलहाल CJP Protest को लेकर दिल्ली पुलिस अलर्ट मोड में है। सोशल मीडिया गतिविधियों की निगरानी बढ़ा दी गई है और संदिग्ध पोस्ट करने वाले अकाउंट्स पर नजर रखी जा रही है। पुलिस का कहना है कि राजधानी में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखना उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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EPFO

PF Interest Update: EPFO खाते में आया ब्याज, Missed Call और SMS से ऐसे Check करें PF Balance

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से जुड़े लाखों कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। PF Account में जमा राशि पर मिलने वाला ब्याज (PF Interest) अब कई सदस्यों के खातों में दिखना शुरू हो गया है। अगर आप भी यह जानना चाहते हैं कि आपके PF खाते में ब्याज आया है या नहीं, तो इसे घर बैठे आसानी से चेक किया जा सकता है। EPFO ने कर्मचारियों के लिए PF Balance Check करने के कई आसान विकल्प उपलब्ध कराए हैं। अब न तो ऑफिस के चक्कर लगाने की जरूरत है और न ही लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। मोबाइल फोन से सिर्फ कुछ मिनटों में Missed Call, SMS, UMANG App और EPFO Portal के जरिए PF Account की जानकारी मिल सकती है। PF Interest Update: खाते में कैसे जुड़ता है ब्याज? EPFO हर वित्त वर्ष के लिए PF खाताधारकों को ब्याज देता है। कर्मचारी और कंपनी की ओर से जमा किए गए अंशदान पर यह ब्याज तय नियमों के अनुसार जोड़ा जाता है। ब्याज राशि अपडेट होने के बाद कर्मचारी अपनी EPF Passbook में जाकर देख सकते हैं कि उनके खाते में कितनी राशि जमा हुई है और कितना ब्याज मिला है। Missed Call से Check करें PF Balance अगर आपके पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है, तब भी आप आसानी से PF Balance पता कर सकते हैं। ऐसे करें PF Balance Check: ध्यान रखें कि यह सुविधा लेने के लिए आपका UAN Active होना और मोबाइल नंबर EPFO खाते से लिंक होना जरूरी है। SMS के जरिए जानें PF Account की पूरी जानकारी EPFO अपने सदस्यों को SMS Service की सुविधा भी देता है। Process: अगर आपको हिंदी में जानकारी चाहिए तो ENG की जगह HIN लिखकर भेज सकते हैं। UMANG App से घर बैठे देखें PF Balance सरकार का UMANG App भी PF Account की जानकारी देखने का आसान माध्यम है। Steps Follow करें: EPFO Website से Online Check करें PF Passbook जो कर्मचारी ऑनलाइन सुविधा का इस्तेमाल करना चाहते हैं, वे EPFO Portal के जरिए भी अपना PF Balance देख सकते हैं। कैसे देखें: PF Balance Check करने से पहले रखें इन बातों का ध्यान PF खाते की जानकारी देखने से पहले इन जरूरी बातों को जरूर जांच लें: कर्मचारियों के लिए क्यों खास है PF Interest Update? PF सिर्फ नौकरी के दौरान जमा होने वाली बचत नहीं है, बल्कि यह भविष्य की आर्थिक सुरक्षा का बड़ा साधन भी है। खाते में ब्याज जुड़ने से कर्मचारियों की कुल जमा राशि बढ़ती है और रिटायरमेंट के समय उन्हें इसका फायदा मिलता है। EPFO की डिजिटल सुविधाओं ने अब PF Account को Manage करना पहले से काफी आसान बना दिया है। कर्मचारी कभी भी अपने मोबाइल से यह पता कर सकते हैं कि उनके खाते में कितना Balance है और ब्याज की राशि अपडेट हुई है या नहीं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Mehbooba Mufti

Jantar Mantar Student Protest: पेपर लीक मुद्दे पर छात्रों का प्रदर्शन तेज, Mehbooba Mufti के बयान ने मचाई बहस

दिल्ली के जंतर-मंतर (Jantar Mantar) पर चल रहा छात्र आंदोलन अब केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहा है। पेपर लीक, परीक्षा में गड़बड़ी और भर्ती प्रक्रिया में देरी जैसे मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को अब कई सामाजिक संगठनों का समर्थन मिलने लगा है। इसी बीच मुस्लिम संगठनों के समर्थन और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) के बयान ने इस पूरे मामले को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। छात्रों के मुद्दों को लेकर Jantar Mantar पर प्रदर्शन राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र अपनी मांगों को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं। प्रदर्शन कर रहे युवाओं का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था में बार-बार सामने आ रही अनियमितताओं से मेहनत करने वाले छात्रों का भरोसा कमजोर हो रहा है। छात्रों की मुख्य मांग है कि पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए। युवाओं का कहना है कि शिक्षा और रोजगार उनके भविष्य से जुड़े सबसे बड़े मुद्दे हैं, इसलिए सरकार को इन समस्याओं को गंभीरता से सुनना चाहिए। Muslim Organizations ने दिया छात्र आंदोलन को समर्थन जंतर-मंतर पर चल रहे इस आंदोलन को अब कई मुस्लिम संगठनों का भी समर्थन मिला है। संगठनों का कहना है कि छात्रों से जुड़े मुद्दे किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह देश के हर युवा के भविष्य से जुड़ा सवाल है। समर्थन देने वाले संगठनों ने छात्रों की मांगों को जायज बताते हुए सरकार से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। Mehbooba Mufti के बयान से बढ़ा राजनीतिक विवाद इस पूरे मामले के बीच पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश में विरोध की आवाजों को जिस तरह देखा जा रहा है, उससे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। महबूबा मुफ्ती ने कहा कि “पूरा देश कश्मीर बन रहा है”, जिसके बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गईं। उनके बयान को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई है। जहां विपक्ष ने इसे सरकार की नीतियों पर सवाल बताया, वहीं भाजपा नेताओं ने इस बयान की आलोचना की। Education और Youth Issues बने बड़ा राजनीतिक मुद्दा देश में पिछले कुछ समय से परीक्षा व्यवस्था, भर्ती प्रक्रिया और युवाओं के रोजगार से जुड़े मुद्दे लगातार चर्चा में हैं। छात्र संगठनों का कहना है कि सरकार को युवाओं के भरोसे को बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। वहीं सरकार की ओर से कहा जाता रहा है कि परीक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने और अनियमितताओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। क्यों अहम है यह Student Protest? जंतर-मंतर का यह आंदोलन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें बड़ी संख्या में युवा अपनी समस्याओं को लेकर सड़क पर उतर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ एक परीक्षा या भर्ती की नहीं, बल्कि उनके भविष्य और अधिकारों की है। छात्रों की प्रमुख मांगें हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bihar

Bihar Protest बंद के बीच सीवान में हिंसा, Indore Alert; Prayagraj में 1000 छात्रों का प्रदर्शन

Bihar बंद के दौरान शनिवार को कई राज्यों में विरोध-प्रदर्शन देखने को मिले। बिहार में कुछ जगहों पर प्रदर्शन हिंसक हो गया, जहां पथराव और फायरिंग की घटनाएं सामने आईं। सीवान में हालात संभालने पहुंचे पुलिस अधीक्षक (SP) भी घायल हो गए। वहीं मध्य प्रदेश के इंदौर में प्रशासन ने सुरक्षा के लिए ड्रोन से निगरानी की, जबकि प्रयागराज में तेज बारिश के बावजूद करीब 1,000 छात्र अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर डटे रहे। पूरे दिन अलग-अलग राज्यों से प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था की तस्वीरें सामने आती रहीं। कई जिलों में बढ़ा तनाव पटना, सीवान और कई अन्य जिलों में देखने को मिला। प्रदर्शनकारियों ने कई स्थानों पर सड़क जाम कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कुछ इलाकों में हालात अचानक बिगड़ गए और पुलिस व प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प शुरू हो गई। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी। सीवान में पथराव और फायरिंग, SP हुए घायल सीवान जिले में प्रदर्शन सबसे अधिक तनावपूर्ण रहा। प्रदर्शन के दौरान पथराव और फायरिंग की घटनाएं हुईं। कानून-व्यवस्था संभालने पहुंचे जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) इस दौरान घायल हो गए। उन्हें तुरंत उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। घटना के बाद इलाके में पुलिस बल बढ़ा दिया गया और उपद्रवियों की पहचान कर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। Indore में Drone Surveillance से रखी गई नजर बिहार बंद और देशभर में हो रहे प्रदर्शनों को देखते हुए इंदौर प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। शहर के संवेदनशील इलाकों, प्रमुख बाजारों और चौराहों पर ड्रोन कैमरों से निगरानी की गई। पुलिस लगातार गश्त करती रही ताकि किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके। Prayagraj में बारिश भी नहीं रोक सकी छात्रों का प्रदर्शन उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में लगातार बारिश के बावजूद करीब 1,000 छात्र अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए। बारिश के बीच छात्रों ने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन किया और प्रशासन तक अपनी आवाज पहुंचाने की कोशिश की। पुलिस भी मौके पर मौजूद रही ताकि यातायात और कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो। कई राज्यों में प्रशासन हाई अलर्ट पर बिहार, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया, जबकि सोशल मीडिया पर भी नजर रखी गई ताकि किसी भी तरह की अफवाह फैलने से रोका जा सके। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने और कानून का पालन करने की अपील की है। देशभर में विरोध-प्रदर्शनों पर प्रशासन की नजर शनिवार को हुए इन प्रदर्शनों ने एक बार फिर यह दिखाया कि किसी भी आंदोलन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कितनी महत्वपूर्ण होती है। प्रशासन का कहना है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और हिंसा फैलाने या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Mohan Bhagwat

RSS Chief Mohan Bhagwat बोले- Youth को समझिए, सिर्फ आदेश देने से नहीं बनेगी बात

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने नई पीढ़ी, नेतृत्व और समाज की बदलती सोच को लेकर बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि आज के समय में युवाओं को सिर्फ आदेश देने से बात नहीं बनेगी। अगर समाज को मजबूत बनाना है तो नई पीढ़ी के साथ संवाद करना होगा, उनकी बात सुननी होगी और उन्हें समझना होगा। ‘युवाओं को समझना होगा, सिर्फ निर्देश देना काफी नहीं’ अपने संबोधन में मोहन भागवत ने कहा कि समय बदल रहा है और उसके साथ लोगों की सोच भी बदल रही है। ऐसे में पुरानी कार्यशैली से आगे बढ़ने के बजाय युवाओं के साथ भरोसे का रिश्ता बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी सवाल पूछती है, अपनी राय रखती है और उसे सम्मान के साथ सुना जाना चाहिए। यही किसी भी मजबूत समाज और संगठन की पहचान होती है। ‘शक्ति के बल पर सबके मालिक नहीं बन सकते’ उन्होंने शक्ति और अहंकार पर भी स्पष्ट टिप्पणी की। भागवत ने कहा, “यह नहीं हो सकता कि हम मनमानी करें और केवल शक्ति के बल पर सबके मालिक बन जाएं।” उनके अनुसार किसी भी व्यवस्था की सफलता दूसरों पर नियंत्रण स्थापित करने में नहीं, बल्कि सभी को साथ लेकर चलने में है। नेतृत्व का मतलब आदेश देना नहीं, लोगों को साथ लेकर चलना RSS प्रमुख ने कहा कि नेतृत्व का अर्थ केवल निर्देश देना नहीं होता। एक अच्छा नेतृत्व वही है जो लोगों की बात सुने, उन्हें साथ लेकर चले और हर वर्ग को आगे बढ़ने का अवसर दे। उन्होंने युवाओं को देश का भविष्य बताते हुए कहा कि उनके विचारों और ऊर्जा का सही उपयोग तभी होगा, जब उन्हें निर्णय प्रक्रिया में भी उचित स्थान मिलेगा। मतभेद हो सकते हैं, लेकिन संवाद नहीं रुकना चाहिए भागवत ने समाज में बढ़ती वैचारिक असहमतियों का जिक्र करते हुए कहा कि मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन संवाद बंद नहीं होना चाहिए। जब बातचीत रुक जाती है, तब गलतफहमियां बढ़ती हैं और समाज में दूरी पैदा होती है। इसलिए हर पीढ़ी और हर वर्ग के बीच निरंतर संवाद बनाए रखना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। समाज और परिवार की मजबूती का आधार है विश्वास उन्होंने यह भी कहा कि परिवार, समाज और संस्थाओं की मजबूती आपसी विश्वास, सहयोग और सम्मान से आती है। यदि नई पीढ़ी को केवल निर्देश दिए जाएंगे और उनकी बात नहीं सुनी जाएगी, तो उनके साथ जुड़ाव कमजोर पड़ सकता है। इसलिए संवाद और सहभागिता ही आगे बढ़ने का सबसे प्रभावी रास्ता है। क्यों अहम है मोहन भागवत का यह बयान? मोहन भागवत का यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश में युवाओं की भूमिका, नेतृत्व की शैली और सामाजिक समरसता पर लगातार चर्चा हो रही है। उनका संदेश केवल युवाओं के लिए नहीं, बल्कि समाज के हर उस व्यक्ति के लिए है जो आने वाली पीढ़ी के साथ बेहतर संबंध और मजबूत भविष्य बनाना चाहता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मेरठ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, पति सौरभ की हत्या के मामले में कोर्ट का फैसला

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। दोनों पर सौरभ की हत्या करने का आरोप साबित होने के बाद यह फैसला सुनाया गया। सजा सुनाते हुए जज ने वारदात को नृशंस हत्याकांड बताया और कहा कि इसमें माफी स्वीकार नहीं होगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश हुए मुस्कान और साहिल सजा सुनाए जाने से पहले जेल में बंद मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जोड़ा गया। इस दौरान दोनों रोने लगे। जज ने मुस्कान से पूछा कि पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वह क्या सजा चाहती है। इस पर मुस्कान ने कहा, “मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए।” इसके बाद वह खामोश हो गई। वहीं, साहिल से भी यही सवाल पूछा गया, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। सजा के ऐलान के बाद रो पड़ीं सौरभ की मां अदालत के फैसले के बाद सौरभ राजपूत की मां भावुक हो गईं और रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि उन्हें शांति से न्याय मिल गया। इस मामले में सजा का ऐलान सौरभ के परिवार के लिए लंबे इंतजार के बाद आया है। 3 मार्च 2025 को हुई थी सौरभ की हत्या सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को हुई थी। मामले में सामने आए विवरण के अनुसार, हत्या के बाद शव के पांच टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में भर दिया गया था। इस वारदात ने पूरे देश में व्यापक चर्चा बटोरी थी। अदालत ने मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

इंदौर में प्लॉट बेचने के नाम पर 7.80 लाख की ठगी का आरोप, ब्रोकर समेत दो पर FIR

शहर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में प्लॉट बेचने के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि प्लॉट का सौदा करने के बाद ब्रोकर और प्लॉट मालिक ने फरियादी से 7 लाख 80 हजार रुपये ले लिए, लेकिन न तो प्लॉट की रजिस्ट्री कराई और न ही कब्जा दिया। शिकायत की जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। 9.30 लाख में तय हुआ था प्लॉट का सौदा पुलिस के मुताबिक, नंदबाग कॉलोनी निवासी विजय चौहान ने शिकायत में बताया कि उन्होंने नंदबाग में एक प्लॉट का सौदा 9 लाख 30 हजार रुपये में तय किया था। इस संबंध में एग्रीमेंट भी किया गया था। फरियादी ने आरोप लगाया कि उन्होंने नकद और ऑनलाइन माध्यम से कुल 7 लाख 80 हजार रुपये का भुगतान कर दिया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें प्लॉट का कब्जा नहीं मिला और रजिस्ट्री भी नहीं कराई गई। ब्रोकर ने परिचित बताकर कराया था सौदा विजय चौहान के अनुसार, धर्मेंद्र ठाकुर ने उन्हें बताया था कि नंदकिशोर मनावत उसका परिचित है और वह अपना प्लॉट बेचना चाहता है। इसके बाद धर्मेंद्र ने सौदे में ब्रोकर की भूमिका निभाई और इसके बदले 10 हजार रुपये लिए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि भुगतान के बाद जब उन्होंने रजिस्ट्री कराने और प्लॉट का कब्जा देने की मांग की, तो उन्हें लगातार टालमटोल का सामना करना पड़ा। 25 से ज्यादा केस होने की धमकी देने का आरोप फरियादी ने आरोप लगाया कि रजिस्ट्री और कब्जे के लिए दबाव बनाने पर धर्मेंद्र ठाकुर ने धमकी दी। शिकायत के मुताबिक, उसने कहा कि उसके खिलाफ 25 से ज्यादा मामले चल रहे हैं। साथ ही, उसके या नंदकिशोर मनावत के पास दोबारा आने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी भी दी। 2.80 लाख रुपये लौटाए, 5 लाख बाकी होने का दावा विजय चौहान के मुताबिक, पुलिस में शिकायत करने की बात कहने के बाद नंदकिशोर मनावत ने 2 लाख 50 हजार रुपये नकद और 30 हजार रुपये ऑनलाइन वापस किए। हालांकि, फरियादी का आरोप है कि बाकी 5 लाख रुपये लौटाने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद विजय चौहान ने पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है।

SIR के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों से मिले राहुल गांधी, दिल्ली पुलिस पर मारपीट के आरोप

नई दिल्ली। SIR के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन करने वाले छात्रों ने बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। इसके बाद राहुल गांधी और छात्रों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस पर मारपीट और हिरासत के दौरान दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में NSUI के छात्रों, कार्यकर्ताओं और कंटेंट क्रिएटर्स ने अपने साथ हुई कथित घटनाओं की जानकारी दी। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। छात्रा ने कान पर चोट लगने का लगाया आरोप प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक छात्रा ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान पुलिसकर्मी ने उसके प्राइवेट पार्ट पर लात मारी। वहीं, दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा अदिरा ने दावा किया कि पुलिस की पिटाई के कारण उसके एक कान की सुनने की क्षमता चली गई। प्रदर्शनकारियों ने हिरासत के दौरान कथित ज्यादती और मारपीट से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है। RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर हिरासत का आरोप एक अन्य प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि पुलिस RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले रही थी। यह आरोप भी प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाया गया है। राहुल गांधी ने सबूत सुरक्षित रखने को कहा राहुल गांधी ने छात्रों से घटनाओं से जुड़े वीडियो और अन्य सबूत सुरक्षित रखने को कहा। उन्होंने कहा कि इन सबूतों के आधार पर पुलिसकर्मियों से लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त तक, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी। प्रदर्शनकारियों के आरोपों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।

बांग्लादेश टेस्ट सीरीज से बाहर हुए शाई होप और अल्जारी जोसेफ, केविन विकहम को पहली बार मिला मौका

क्रिकेट न्यूज। वेस्टइंडीज को बांग्लादेश के खिलाफ आगामी दो टेस्ट मैचों की सीरीज से पहले बड़ा झटका लगा है। टीम के बल्लेबाज शाई होप और तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ सीरीज से बाहर हो गए हैं। क्रिकेट वेस्टइंडीज (CWI) ने 23 वर्षीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया है। ऑलराउंडर कीमो पॉल को भी टीम में जगह मिली है। CWI के मुताबिक, मेडिकल जांच और विशेषज्ञों की सलाह के बाद अल्जारी जोसेफ को सीरीज से हटाने का फैसला लिया गया। बोर्ड उनके कार्यभार को नियंत्रित कर चोट के जोखिम को कम करना चाहता है। वहीं, तीनों फॉर्मेट में लगातार खेलने के बाद शाई होप को आराम दिया गया है। चोट के खतरे को देखते हुए जोसेफ को आराम क्रिकेट वेस्टइंडीज ने बताया कि अल्जारी जोसेफ को टीम से बाहर रखने का फैसला उनकी सहमति से लिया गया है। बोर्ड के अनुसार, टेस्ट क्रिकेट में तेज गेंदबाजों को लंबे स्पेल में लगातार गेंदबाजी करनी पड़ती है। इससे छोटे फॉर्मेट की तुलना में कार्यभार और चोट का जोखिम बढ़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए जोसेफ के वर्कलोड को कम करने का फैसला किया गया है, ताकि उनके स्वास्थ्य और फिटनेस का ध्यान रखा जा सके। शाई होप को भी दिया गया आराम CWI ने कहा कि शाई होप तीनों फॉर्मेट में लगातार खेल रहे थे। ऐसे में उनके कार्यभार और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें टेस्ट सीरीज से आराम दिया गया है। बोर्ड का यह फैसला फरवरी 2027 में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप क्वालिफायर्स को ध्यान में रखकर भी लिया गया है। टीम प्रबंधन चाहता है कि खिलाड़ी आगामी महत्वपूर्ण मुकाबलों के लिए फिट रहें। केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में मौका शाई होप की गैरमौजूदगी में 23 वर्षीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया गया है। इसके अलावा ऑलराउंडर कीमो पॉल को भी टीम में जगह मिली है। अब देखना होगा कि बांग्लादेश की घरेलू परिस्थितियों में वेस्टइंडीज की टीम नए संयोजन के साथ कैसा प्रदर्शन करती है। कोच डैरेन सैमी ने सीरीज जीत को बताया अहम वेस्टइंडीज के मुख्य कोच डैरेन सैमी ने कहा कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के मौजूदा चक्र की शुरुआत में टीम ने कुछ लक्ष्य तय किए थे। इनमें टेस्ट रैंकिंग के ऊपरी आधे हिस्से में जगह बनाना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज जीतने से टीम अपने लक्ष्य के करीब पहुंच सकती है। सैमी के मुताबिक, बांग्लादेश को उसकी घरेलू परिस्थितियों में हराना चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन टीम इसके लिए तैयार है। 28 अक्टूबर से शुरू होगा पहला टेस्ट बांग्लादेश और वेस्टइंडीज के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जाएगी। पहला टेस्ट 28 अक्टूबर से ढाका में शुरू होगा, जबकि दूसरा टेस्ट 5 नवंबर से सिलहट में खेला जाएगा।

IMF ने बढ़ाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, 2026 और 2027 में 7% विकास दर रहने की उम्मीद

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने साल 2026 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7% कर दिया है। वैश्विक तनाव, आर्थिक सुस्ती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का ध्यान खींचा है। मजबूत घरेलू मांग और सर्विसेज सेक्टर के बेहतर प्रदर्शन को भारत की तेज विकास दर की प्रमुख वजह माना गया है। IMF ने अक्टूबर 2026 की अपनी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में भारत की विकास संभावनाओं को सकारात्मक बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा आयात पर निर्भर कई उभरती अर्थव्यवस्थाएं जहां दबाव का सामना कर रही हैं, वहीं भारत की आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है। 2027 में भी 7% ग्रोथ का अनुमान IMF ने 2026 के लिए भारत की विकास दर के अनुमान में जुलाई के मुकाबले 0.6 प्रतिशत अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की है। वहीं, 2027 के लिए भी विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7% कर दिया गया है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2027 का अनुमान जुलाई के मुकाबले 0.3 प्रतिशत अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भी भारत में विकास की संभावनाओं को लेकर उम्मीद बनी हुई है। IMF से पहले विश्व बैंक और आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी भारत की विकास दर के अनुमान में बढ़ोतरी कर चुकी हैं। चीन की सुस्ती के बीच भारत पर नजर रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया की अर्थव्यवस्थाओं में मजबूती देखने को मिल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी गतिविधियों में तेजी ने भी वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को प्रभावित किया है। भारत और चीन एशिया की आर्थिक गतिविधियों में अहम भूमिका निभा रहे हैं, हालांकि दोनों देशों की विकास संभावनाओं में अंतर दिखाई दे रहा है। IMF के अनुमान के अनुसार, चीन की विकास दर 2026 में 4.5% और 2027 में 4% रह सकती है। वैश्विक तनाव और ऊर्जा की ऊंची कीमतों को चीन की आर्थिक वृद्धि के सामने चुनौतियों में शामिल किया गया है। दुनिया की आर्थिक विकास दर पर दबाव IMF के मुताबिक, 2028 से 2031 के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था औसतन 3.2% की दर से बढ़ सकती है। यह 2000 से 2019 के बीच महामारी से पहले दर्ज औसत 3.7% की विकास दर से कम है। रिपोर्ट में वैश्विक तनाव, ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और ऊर्जा आयात पर निर्भर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने वाले दबाव को आर्थिक विकास के लिए चुनौती बताया गया है। ऐसे माहौल में भारत की अनुमानित विकास दर अपेक्षाकृत मजबूत दिखाई देती है। मजबूत घरेलू मांग और जनसांख्यिकी से मिल रहा सहारा भारत की आर्थिक मजबूती के पीछे बढ़ता घरेलू बाजार, मजबूत मांग, अनुकूल जनसांख्यिकी और सुधारों को अहम कारक माना गया है। सर्विसेज सेक्टर का बेहतर प्रदर्शन भी विकास दर को सहारा दे रहा है। हालांकि, बेहतर अनुमान के बावजूद चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव डाल सकती हैं। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय तनाव और वैश्विक मांग में कमजोरी का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

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