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TMC

TMC Protest ममता की पार्टी के प्रदर्शन में कम दिखी भीड़

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस (TMC) को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। राज्य की सत्ता हाथ से निकलने के बाद अब पार्टी के अंदर हलचल और असंतोष की खबरें सामने आने लगी हैं। हाल ही में हुए एक बड़े विरोध प्रदर्शन ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी, क्योंकि इस कार्यक्रम में पार्टी के केवल 35 विधायक ही नजर आए। शक्ति प्रदर्शन में क्यों कम दिखे विधायक? यह प्रदर्शन TMC के लिए सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि ताकत दिखाने का मौका माना जा रहा था। पार्टी नेतृत्व को उम्मीद थी कि बड़ी संख्या में विधायक और कार्यकर्ता सड़क पर उतरेंगे, लेकिन तस्वीर उम्मीद से बिल्कुल अलग दिखाई दी। कम मौजूदगी ने विपक्ष को हमला बोलने का मौका दे दिया। विपक्ष ने क्या लगाए आरोप? विपक्षी दलों ने दावा किया कि सत्ता जाने के बाद पार्टी के भीतर एकजुटता कमजोर पड़ती दिख रही है। कई नेताओं ने इसे TMC के अंदर बढ़ती नाराजगी और गुटबाजी से जोड़कर देखा। राजनीतिक जानकार भी मानते हैं कि लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली किसी पार्टी के लिए हार के बाद संगठन को संभालना आसान नहीं होता। TMC ने क्या दी सफाई? हालांकि, TMC नेताओं ने इन अटकलों को खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि कई विधायक अपने क्षेत्रों में पहले से तय कार्यक्रमों में व्यस्त थे, इसलिए वे प्रदर्शन में शामिल नहीं हो सके। लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस सफाई से ज्यादा चर्चा विधायकों की कम मौजूदगी की हो रही है। आगे TMC के सामने क्या चुनौती? Mamata Banerjee की अगुवाई वाली TMC अब ऐसे दौर में खड़ी है, जहां उसे सिर्फ विपक्ष से ही नहीं बल्कि संगठन को मजबूत बनाए रखने की चुनौती से भी जूझना पड़ रहा है। आने वाले दिनों में पार्टी किस तरह खुद को संभालती है, इस पर बंगाल की राजनीति की नजरें टिकी रहेंगी।
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24 साल बाद कानून के शिकंजे में आया उम्रकैद का पैरोल Jumper

24 साल बाद कानून के शिकंजे में आया उम्रकैद का पैरोल Jumper

करीब 24 साल तक पुलिस और कानून की आंखों में धूल झोंककर फरार चल रहा उम्रकैद का पैरोल Jumper आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया। आरोपी को प्रयागराज से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के वक्त उसने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन जब सख्ती से पूछताछ हुई तो वह टूट गया और रोने लगा। पुलिस के मुताबिक आरोपी हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा था। साल 2001 में उसे पैरोल पर जेल से बाहर आने की अनुमति मिली थी, लेकिन वह वापस नहीं लौटा। इसके बाद से पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। लंबे समय तक फरार रहने के दौरान उसने अपनी पहचान बदल ली और अलग-अलग जगहों पर रहकर खुद को बचाता रहा। हाल ही में पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी प्रयागराज में छिपकर रह रहा है। इसके बाद पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए उसे पकड़ लिया। गिरफ्तारी के समय आरोपी ने पहले अपना नाम और पहचान छिपाने की कोशिश की, लेकिन जांच में सच सामने आ गया। पूछताछ के दौरान आरोपी भावुक हो गया और रोने लगा। उसने माना कि वह कई सालों से लगातार डर और तनाव में जिंदगी जी रहा था। पुलिस अब उससे फरारी के दौरान मदद करने वाले लोगों और उसकी गतिविधियों के बारे में पूछताछ कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इतने सालों बाद आरोपी की गिरफ्तारी बड़ी सफलता है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। Deshharpal के साथ जुड़े रहें और पढ़ते रहें देश-दुनिया की हर बड़ी खबर। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Kejriwal

Kejriwal-Sisodia Election Ban PIL Dismissed: दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

दिल्ली की राजनीति से जुड़ा एक अहम मामला आज फिर सुर्खियों में रहा, जब Arvind Kejriwal, Manish Sisodia और Durgesh Pathak के खिलाफ दायर चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की जनहित याचिका (PIL) को Delhi High Court ने खारिज कर दिया। इस फैसले के बाद तीनों नेताओं को बड़ी राहत मिली है, क्योंकि याचिका में मांग की गई थी कि उन्हें कथित मामलों और आरोपों के आधार पर चुनावी प्रक्रिया से बाहर किया जाए। कोर्ट ने क्या कहा? सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने साफ संकेत दिया कि किसी भी व्यक्ति को चुनाव लड़ने से रोकना या अयोग्य घोषित करना केवल संविधान और कानून के दायरे में ही संभव है।याचिका में लगाए गए तर्कों को अदालत ने पर्याप्त आधार नहीं माना, जिसके बाद इसे खारिज कर दिया गया। मामला क्यों था चर्चा में? यह PIL काफी समय से राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि जिन नेताओं पर गंभीर आरोप हैं, उन्हें चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। हालांकि अदालत के इस फैसले ने साफ कर दिया कि सिर्फ आरोपों के आधार पर किसी भी जनप्रतिनिधि को चुनाव लड़ने से नहीं रोका जा सकता। राजनीतिक प्रतिक्रिया फैसले के बाद आम आदमी पार्टी से जुड़े नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था और न्यायपालिका की जीत बताया है। वहीं राजनीतिक गलियारों में इस पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। दिल्ली की राजनीति में यह मामला भले ही लंबे समय से चर्चा में रहा हो, लेकिन हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद फिलहाल इस बहस पर विराम लगता दिख रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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अखिलेश यादव

UP Politics: अखिलेश यादव का हमला—आरक्षण कोई भिक्षा नहीं, अधिकार है

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने एक बार फिर आरक्षण और सामाजिक न्याय को लेकर सियासी माहौल गर्म कर दिया है। उन्होंने साफ कहा कि “आरक्षण कोई भिक्षा नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकार है” और साथ ही PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समुदाय की आवाज को दबाने का आरोप भी लगाया। उनके इस बयान ने न सिर्फ उत्तर प्रदेश की राजनीति बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा को तेज कर दिया है। आरक्षण पर अखिलेश यादव का सख्त संदेश अखिलेश यादव ने कहा कि भारत का संविधान हर नागरिक को बराबरी का मौका देने की गारंटी देता है। उनके अनुसार आरक्षण किसी तरह की कृपा नहीं, बल्कि वर्षों से सामाजिक असमानता को ठीक करने का एक जरूरी माध्यम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक समाज के कमजोर और पिछड़े वर्गों को समान अवसर नहीं मिलेगा, तब तक लोकतंत्र की आत्मा अधूरी रहेगी। PDA Politics: फिर चर्चा में पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक एजेंडा अखिलेश यादव ने PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इन वर्गों की आवाज को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। उनके मुताबिक, राजनीतिक और सामाजिक प्रतिनिधित्व में इन समुदायों की भागीदारी कम होना चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि PDA को मजबूत करना ही असली सामाजिक न्याय है। UP Politics में बढ़ी हलचल राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान केवल सामाजिक संदेश नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरणों को साधने की रणनीति भी है। PDA फोकस के जरिए समाजवादी पार्टी अपने पारंपरिक वोट बैंक को फिर से मजबूत करने की कोशिश में दिखाई दे रही है। Oppn vs Govt: बिना नाम लिए साधा निशाना हालांकि अखिलेश यादव ने किसी पार्टी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को मौजूदा सत्ता व्यवस्था पर अप्रत्यक्ष हमला माना जा रहा है। उन्होंने संविधान और आरक्षण व्यवस्था की रक्षा को लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी बताया। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Kerala

Kerala Politics Update: सत्ता बदलते ही क्यों रद्द हो रही है SilverLine Rail Project?

Kerala में हाल ही में हुए राजनीतिक बदलाव के बाद नई सरकार ने एक बड़ा और चर्चित कदम उठाया है। राज्य की बहुचर्चित SilverLine High-Speed Rail Project (K-Rail) को अब रद्द करने की दिशा में सरकार आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने कैबिनेट बैठक के बाद इस फैसले की जानकारी दी। यह फैसला राज्य की विकास योजनाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर नीति पर बड़ा असर डाल सकता है। क्या थी SilverLine High-Speed Rail Project? सिल्वरलाइन परियोजना केरल सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना थी, जिसका उद्देश्य राज्य में तेज़ गति की रेल सेवा शुरू करना था। यह प्रोजेक्ट यात्रा समय कम करने और आधुनिक परिवहन सुविधा देने के लिए तैयार किया गया था। हालांकि शुरुआत से ही यह योजना विवादों में रही। नई सरकार का बड़ा फैसला क्या है? सत्ता बदलते ही नई सरकार ने इस प्रोजेक्ट को आगे न बढ़ाने का संकेत दिया है। सरकार के अनुसार: क्यों हुआ यह बड़ा फैसला? इस परियोजना को लेकर लंबे समय से विरोध और सवाल उठते रहे हैं: इन कारणों ने इस योजना को लगातार विवादों में बनाए रखा। Kerala Politics Impact: राजनीतिक बदलाव का असर यह फैसला सिर्फ एक परियोजना का रद्द होना नहीं है, बल्कि केरल की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। नई सरकार पिछली सरकार की प्राथमिकताओं से अलग दिशा में आगे बढ़ती दिख रही है। अब आगे क्या होगा? सरकार अब उन योजनाओं पर फोकस करने की बात कर रही है जो: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rahul Gandhi

Rahul Gandhi Viral Statement: देश की राजनीति में नई हलचल

भारतीय राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी ने माहौल गरमा दिया है। कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने प्रधानमंत्री Narendra Modi को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक हलचल मचा दी है। क्या कहा राहुल गांधी ने? राहुल गांधी ने एक जनसभा के दौरान दावा करते हुए कहा कि “आने वाले एक महीने के अंदर नरेंद्र मोदी टीवी पर आकर हाथ जोड़ेंगे।” इस बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। उनके इस कथन को लेकर समर्थकों और विरोधियों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे चुनावी बयानबाज़ी बता रहे हैं, तो कुछ इसे गंभीर राजनीतिक हमला मान रहे हैं। Politics Heat Up: BJP vs Congress टकराव बढ़ा इस बयान के बाद देश की राजनीति में एक बार फिर Narendra Modi और राहुल गांधी के बीच सियासी जुबानी जंग तेज होने की संभावना है। फिलहाल भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर तीखी बयानबाज़ी देखने को मिल सकती है। Ground Reality: बयान या राजनीतिक रणनीति? चुनावी माहौल में ऐसे बयान अक्सर चर्चा का विषय बन जाते हैं और जनता के बीच तेजी से फैलते हैं। सोशल मीडिया पर भी यह बयान वायरल हो चुका है, जहां लोग इसे लेकर अपनी-अपनी राय दे रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PM Modi

PM Modi in Italy: Giorgia Meloni को दिया Melody Toffee, Social Media पर छाया Video

इटली दौरे के दौरान भारत के PM Modi और इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni के बीच एक बेहद हल्का-फुल्का और यादगार पल सामने आया, जिसने सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियाँ बटोरीं। इस मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने एक अनोखा और देसी अंदाज़ दिखाते हुए मेलोनी को भारत की मशहूर “Melody Toffee” गिफ्ट की। यह छोटा सा गिफ्ट देखते ही दोनों नेताओं के चेहरे पर मुस्कान आ गई और माहौल काफी सहज और दोस्ताना हो गया। “Melody Toffee” वाला खास पल हुआ वायरल इस खास पल का वीडियो खुद इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया। वीडियो सामने आते ही यह तेजी से वायरल हो गया और लोगों ने इसे खूब पसंद किया। भारत में लोकप्रिय इस टॉफी को देखकर कई लोगों को उसका पुराना विज्ञापन और स्लोगन “Melody itni chocolaty kyun hai?” भी याद आ गया, जिसने इस पल को और भी दिलचस्प बना दिया। सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स ने इस मुलाकात को “simple yet powerful diplomatic moment” बताया। कई लोगों ने कहा कि ऐसे छोटे-छोटे gestures देशों के रिश्तों को और मजबूत बनाते हैं। कुछ यूजर्स ने पीएम मोदी के इस सहज और भारतीय टच वाले अंदाज़ की तारीफ की, जबकि कई लोगों ने इसे India-Italy संबंधों की बढ़ती नज़दीकियों का प्रतीक माना। India-Italy रिश्तों में नई गर्माहट यह मुलाकात सिर्फ एक औपचारिक बैठक नहीं थी, बल्कि भारत और इटली के बीच मजबूत हो रहे रिश्तों का संकेत भी देती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हल्के-फुल्के और दोस्ताना पल अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में सकारात्मक ऊर्जा जोड़ते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मायावती

Opposition Unity पर झटका: Congress की पहल, लेकिन मायावती का साफ इनकार

देश की राजनीति में एक बार फिर विपक्षी एकता को लेकर हलचल तेज हो गई है। जहां एक तरफ Indian National Congress की ओर से बहुजन समाज पार्टी से बातचीत की कोशिश की खबरें सामने आईं, वहीं दूसरी तरफ Bahujan Samaj Party प्रमुख मायावती ने किसी भी तरह की मुलाकात से साफ इनकार कर दिया है। इस घटनाक्रम ने सियासी गलियारों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। कांग्रेस की कोशिश: विपक्ष को एकजुट करने की रणनीति सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस लंबे समय से विपक्षी दलों को एक साथ लाकर एक मजबूत गठबंधन बनाने की कोशिश कर रही है। पार्टी चाहती है कि आने वाले चुनावों में विपक्षी वोटों का बिखराव न हो और एक साझा रणनीति के तहत चुनाव लड़ा जाए। इसी रणनीति के तहत बसपा से संपर्क साधने की कोशिश भी की गई थी, ताकि भविष्य में किसी संभावित सहयोग की जमीन तैयार हो सके। मायावती का साफ रुख: “अभी कोई मुलाकात नहीं” लेकिन बसपा सुप्रीमो मायावती का रुख एक बार फिर साफ और सख्त नजर आया। उन्होंने कांग्रेस से किसी भी तरह की मुलाकात या बातचीत से दूरी बना ली है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि मायावती फिलहाल पार्टी संगठन को मजबूत करने और स्वतंत्र राजनीतिक पहचान को बनाए रखने पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। यही वजह है कि वह किसी बड़े गठबंधन की बजाय अपनी रणनीति पर आगे बढ़ना चाहती हैं। सियासी असर: विपक्षी एकता पर सवाल इस इनकार के बाद विपक्षी एकता की कोशिशों पर सवाल उठने लगे हैं। खासकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में, जहां कांग्रेस और बसपा दोनों का अलग-अलग आधार रहा है, वहां यह घटनाक्रम राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि राजनीति के जानकार यह भी मानते हैं कि भारतीय राजनीति में रिश्ते और समीकरण स्थायी नहीं होते। परिस्थितियों के हिसाब से आगे बातचीत या बदलाव की संभावनाएं हमेशा बनी रहती हैं। लोगों की नजर में क्या संदेश गया? आम राजनीतिक माहौल में यह खबर इस बात की ओर इशारा करती है कि विपक्ष अभी भी एक साझा मंच पर पूरी तरह सहमत नहीं है। वहीं जनता के बीच भी यह चर्चा है कि क्या आने वाले समय में बड़े गठबंधन बन पाएंगे या फिर सभी दल अलग-अलग राह पर ही चलेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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‘पूरा Vande Mataram गाना गलत’, CPM नेता के बयान पर सियासी बवाल

‘पूरा Vande Mataram गाना गलत’, CPM नेता के बयान पर सियासी बवाल

देशभर में एक बार फिर ‘Vande Mataram’ को लेकर सियासी विवाद छिड़ गया है। CPM नेता के एक बयान ने राजनीतिक माहौल गर्मा दिया है। बयान में कहा गया कि “पूरा वंदे मातरम गाना गलत है”, जिसके बाद BJP ने इसे राष्ट्रगान और देशभक्ति का अपमान बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। BJP नेताओं ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि देश की आजादी की लड़ाई की पहचान रहा है। पार्टी का आरोप है कि इस तरह के बयान देश की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले हैं। कई BJP नेताओं ने सोशल मीडिया पर भी CPM पर निशाना साधा और कहा कि देश विरोधी सोच को जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी। वहीं CPM की ओर से सफाई देते हुए कहा गया कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि उन्होंने किसी की भावनाओं को आहत करने की मंशा से बात नहीं कही थी। इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कुछ लोग CPM के बयान का विरोध कर रहे हैं, तो कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनावी माहौल में ऐसे मुद्दे अक्सर राजनीतिक बहस का केंद्र बन जाते हैं। फिलहाल ‘वंदे मातरम’ को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब राष्ट्रीय राजनीति में नया मुद्दा बनता दिख रहा है। अधिक खबरों और अपडेट्स के लिए विजिट करें Deshharpal News हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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ट्विशा शर्मा

कोर्ट में ट्विशा शर्मा केस की सुनवाई, Postmortem Report पर उठे सवाल

ट्विशा शर्मा केस एक बार फिर चर्चा में है। आज अदालत में इस मामले को लेकर महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है, जिसमें यह तय किया जाएगा कि क्या मृतका का पोस्टमार्टम दोबारा कराया जाएगा या नहीं। इस फैसले पर पूरे मामले की दिशा निर्भर करेगी और जांच को लेकर नया मोड़ आ सकता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर क्यों उठे सवाल? मामले में मृतका के परिजनों ने पहले किए गए पोस्टमार्टम पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि रिपोर्ट में कई जरूरी पहलुओं को स्पष्ट नहीं किया गया, जिससे मौत के असली कारणों को लेकर संशय बना हुआ है। परिजनों का आरोप है कि जांच प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता नहीं रखी गई और कुछ अहम बिंदुओं को नजरअंदाज किया गया, जिससे सच्चाई अधूरी रह गई। परिवार की अदालत से क्या मांग? परिजनों ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर साफ तौर पर ये मांगें रखी हैं: परिवार का कहना है कि जब तक पूरी सच्चाई सामने नहीं आती, तब तक वे किसी नतीजे को स्वीकार नहीं कर सकते। आज की कोर्ट सुनवाई में क्या हो सकता है फैसला? आज की सुनवाई में अदालत यह तय कर सकती है कि: इस सुनवाई के बाद केस की दिशा पूरी तरह बदल सकती है और कई नए पहलुओं पर रोशनी पड़ सकती है। क्यों बना यह केस चर्चा का विषय? यह मामला लगातार लोगों के बीच सुर्खियों में बना हुआ है। सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय स्तर तक लोग इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि अदालत क्या निर्णय देती है। परिजनों की भावनाएं और न्याय की उम्मीद इस केस को और संवेदनशील बना रही हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sugar

Sugar Rate Hike: त्योहारों से पहले चीनी के दाम बढ़े, Blinkit-Swiggy पर खरीदना हुआ Limited

चीनी (Sugar), जो हर घर की रसोई की रोजमर्रा की जरूरत है, इन दिनों लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। पिछले कुछ हफ्तों में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसी बीच Blinkit, Swiggy Instamart, BigBasket और D-Mart जैसे रिटेल और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर चीनी की खरीद को लेकर लिमिट लगाई गई है। कई जगहों पर ग्राहक एक बार में 3 से 5 किलो तक ही चीनी खरीद पा रहे हैं। यानी अगर घर में ज्यादा मात्रा में चीनी खरीदने की जरूरत है, तो एक साथ बड़ी खरीदारी करना अब आसान नहीं है। Sugar Price: एक महीने में तेजी से बढ़े दाम Sugar की कीमतों में हालिया तेजी ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹48 प्रति किलो के आसपास थी, जो अगस्त में बढ़कर ₹55 से ऊपर पहुंच गई। इसके बाद कुछ बाजारों में कीमतें और ऊपर गई हैं। शहर और बाजार के हिसाब से कीमतों में अंतर जरूर है, लेकिन जिस रफ्तार से दाम बढ़े हैं, उसका असर घर के मासिक बजट पर साफ दिखाई दे रहा है। Online Grocery पर क्यों लगाई गई खरीद Limit? Blinkit और Swiggy Instamart जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर खरीदारी की लिमिट लगाए जाने के पीछे मुख्य वजह उपलब्ध स्टॉक को संतुलित रखना मानी जा रही है। त्योहारी सीजन में चीनी की मांग अचानक बढ़ जाती है। मिठाइयों से लेकर घर में बनने वाले पकवानों तक, इस दौरान चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनियां ज्यादा मात्रा में खरीदारी को रोककर स्टॉक को ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, यह लिमिट हर जगह एक जैसी नहीं है। कुछ स्थानों पर 5 किलो तक की खरीद की अनुमति है, जबकि कुछ जगहों पर इससे कम मात्रा की सीमा दिखाई दे रही है। चीनी महंगी होने की क्या है वजह? चीनी के दाम बढ़ने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। घरेलू उत्पादन में कमी, मौसम से जुड़ी परेशानियां, बढ़ती मांग और बाजार में स्टॉक को लेकर गतिविधियां कीमतों पर दबाव बना रही हैं। त्योहारी सीजन भी इस समय एक बड़ा फैक्टर है। रक्षाबंधन के बाद अब आने वाले त्योहारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसका सीधा असर चीनी की खपत पर पड़ सकता है। सरकार ने Duty-Free Sugar Import को दी मंजूरी बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के Duty-Free Import की अनुमति दी है। सरकार का लक्ष्य बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है। इसके अलावा बड़े थोक खरीदारों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा में भी बदलाव किया गया है। इससे बाजार में जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करने की गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। आम लोगों के लिए क्या मतलब? फिलहाल इसका सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो महीने का राशन एक साथ खरीदते हैं। जहां दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीद सीमा लागू है, वहां लोगों को जरूरत के हिसाब से छोटी मात्रा में चीनी खरीदनी पड़ सकती है। दूसरी तरफ, सरकार की ओर से सप्लाई बढ़ाने के कदमों के बाद बाजार में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। अगर नई चीनी समय पर बाजार में पहुंचती है और त्योहारी मांग के मुताबिक स्टॉक उपलब्ध रहता है, तो कीमतों में आगे राहत मिल सकती है। Sugar Price पर आगे रहेगी नजर चीनी के बढ़ते दाम इस समय सिर्फ घरेलू बजट का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि आने वाले त्योहारी सीजन के लिए भी अहम हैं। सरकार, मिलों और रिटेल कंपनियों के फैसलों पर अब बाजार की नजर रहेगी। फिलहाल ग्राहकों के लिए बेहतर यही है कि जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी करें और अलग-अलग दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कीमतों की तुलना कर लें। आने वाले दिनों में सप्लाई की स्थिति साफ होने के साथ चीनी के दाम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
Gold-Silver

Gold-Silver Price: त्योहार से पहले मिली राहत, सोना-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट

Gold-Silver Price Today: रक्षाबंधन की खरीदारी के बीच सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए बाजार से राहत वाली खबर आई है। 27 अगस्त 2026 को सोने और चांदी दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर ₹1,58,477 पर आ गया। वहीं, 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 घटकर करीब ₹2,40,168 रह गया। त्योहार से ठीक पहले कीमतों में आई इस कमी से उन लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है, जो राखी के मौके पर बहन या परिवार के लिए सोने-चांदी की ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं। Gold Price Today: सोने के भाव में ₹2,860 की गिरावट 27 अगस्त को 24 कैरेट सोने की कीमत में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली। IBJA आधारित आंकड़ों के अनुसार, सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम टूटकर ₹1,58,477 पर पहुंच गया। वहीं, 23 कैरेट सोना करीब ₹1,57,842, 22 कैरेट सोना लगभग ₹1,45,165 और 18 कैरेट सोना करीब ₹1,18,858 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रहा। हालांकि, यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि शहर और ज्वेलर के हिसाब से Gold Rate थोड़ा अलग हो सकता है। ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और दूसरे शुल्क भी जुड़ते हैं। Silver Price Today: चांदी भी हुई ₹2,791 सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट आई है। 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 कम होकर करीब ₹2,40,168 पर आ गया। चांदी में पिछले दिनों तेजी देखने को मिली थी, इसलिए मौजूदा गिरावट के बावजूद इसका भाव काफी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में चांदी की मांग बढ़ने से इसकी कीमत पर भी असर पड़ सकता है। Raksha Bandhan से पहले क्यों खास है Gold-Silver Price? रक्षाबंधन के मौके पर लोग सिर्फ राखी और मिठाई ही नहीं खरीदते, बल्कि कई परिवार इस दिन सोने या चांदी की छोटी ज्वेलरी खरीदना भी पसंद करते हैं। ऐसे में त्योहार से एक दिन पहले Gold और Silver के दाम में आई गिरावट खरीदारों के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है। अगर आप भी खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं तो बाजार में जाने से पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर देख लें। ऑनलाइन दिखने वाला IBJA या बुलियन रेट और ज्वेलरी शॉप का अंतिम बिल एक जैसा होना जरूरी नहीं है। सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान सोने की ज्वेलरी खरीदते समय केवल Gold Rate देखना काफी नहीं है। बिल बनते समय मेकिंग चार्ज, GST और अन्य शुल्क जुड़ सकते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले ज्वेलर से पूरी कीमत का ब्रेकअप मांगना बेहतर रहेगा। साथ ही, सोने की शुद्धता के लिए BIS Hallmark जरूर जांचें। इससे आपको खरीदे जा रहे सोने की शुद्धता के बारे में भरोसा मिलता है। आगे क्या हो सकता है Gold और Silver का भाव? सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, ब्याज दरों की उम्मीद और निवेशकों की खरीदारी जैसे कई फैक्टर कीमती धातुओं के भाव को प्रभावित करते हैं। इसलिए आज आई गिरावट को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि आने वाले दिनों में कीमतें लगातार नीचे जाएंगी। बाजार की चाल बदलने में ज्यादा समय नहीं लगता। Gold-Silver Price Today का सीधा अपडेट रक्षाबंधन से पहले 24 कैरेट Gold करीब ₹2,860 सस्ता होकर ₹1,58,477 प्रति 10 ग्राम और Silver करीब ₹2,791 गिरकर ₹2,40,168 प्रति किलो पर आ गई है। अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने जा रहे हैं, तो अंतिम खरीदारी से पहले अपने स्थानीय बाजार का लेटेस्ट रेट जरूर जांचें।
Raksha Bandhan

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने से पहले जान लें Bhadra का समय, ये है शुभ Muhurat

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, अपनापन और थोड़ी-सी नोकझोंक हमेशा बनी रहती है। इन्हीं खूबसूरत रिश्तों को सेलिब्रेट करने वाला रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी को लेकर इस बार एक सवाल काफी लोगों के मन में है—27 अगस्त या 28 अगस्त, आखिर किस दिन भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ रहेगा? पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। Raksha Bandhan 2026 Date: 27 या 28 अगस्त? रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे के बाद शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन मनाने की परंपरा रहेगी। यानी बहनें 28 अगस्त को भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। Rakhi Shubh Muhurat 2026: इस समय बांधें राखी 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह का समय शुभ माना जा रहा है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार सुबह करीब 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताया गया है। हालांकि, शुभ मुहूर्त में शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप किसी खास शहर में हैं, तो वहां के पंचांग से समय जरूर मिला लें। Bhadra Kaal: इस बार नहीं होगी बड़ी परेशानी रक्षाबंधन पर भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। यही वजह है कि हर साल राखी बांधने से पहले लोग भद्रा समाप्त होने का इंतजार करते हैं। इस बार राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को राखी बांधने के प्रमुख समय में भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। Raksha Bandhan 2026: एक नजर में पूरी जानकारी जानकारी विवरण रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार पर्व सावन पूर्णिमा पूर्णिमा शुरुआत 27 अगस्त की सुबह पूर्णिमा समाप्त 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे राखी बांधने का शुभ समय सुबह करीब 5:57 से 9:48 बजे तक भद्रा 28 अगस्त के प्रमुख राखी मुहूर्त में नहीं Rakhi बांधने की पूजा विधि रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके भगवान का ध्यान करें और पूजा की तैयारी करें। राखी की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, फूल, मिठाई और राखी रखें। भाई को आसन पर बैठाकर पहले तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती करें और शुभ मुहूर्त में उसकी कलाई पर राखी बांधें। फिर मिठाई खिलाकर भाई के सुखी और खुशहाल जीवन की कामना करें। भाई भी बहन को प्यार और सम्मान के साथ उपहार देता है और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प करता है। Raksha Bandhan का असली मतलब क्या है? राखी का धागा देखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना बहुत बड़ी है। बचपन में एक-दूसरे से लड़ने वाले भाई-बहन जब बड़े होते हैं तो यही रिश्ता सबसे मजबूत सहारा बन जाता है। रक्षाबंधन इसी भरोसे और अपनापन को फिर से महसूस करने का दिन है। इसलिए इस बार राखी बांधते समय सिर्फ मुहूर्त ही नहीं, बल्कि उस रिश्ते की मिठास को भी याद रखें, जो जिंदगी के हर पड़ाव पर साथ चलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kanpur

Kanpur Plane Crash: अचानक नीचे गिरा Training Plane, दो पायलटों की मौत

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) से गुरुवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई। गंगा बैराज के पास नत्थूपुरवा गांव के नजदीक एक Twin-Engine Training Aircraft खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार इंस्ट्रक्टर पायलट और ट्रेनी पायलट की मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने इलाके को घेरकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। Training Flight के दौरान हुआ हादसा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विमान ट्रेनिंग उड़ान पर था और इसी दौरान हादसे का शिकार हो गया। यह चार सीटों वाला ट्विन-इंजन विमान था। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि विमान नीचे गिरने से पहले आसपास के लोगों ने तेज आवाज सुनी थी। हालांकि, उस आवाज की वजह क्या थी, इसे लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि विमान गंगा बैराज के करीब नत्थूपुरवा गांव के पास खुले खेत में गिरा। हादसा आबादी वाले इलाके से कुछ दूरी पर हुआ, जिसके बाद स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। हादसे के बाद मची अफरा-तफरी विमान के खेत में गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस और इमरजेंसी टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। दुर्घटनाग्रस्त विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और उसका मलबा खेत में बिखरा मिला। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित किया और दोनों पायलटों को मलबे से बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। शुरुआती रिपोर्टों में एक पायलट की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई थी। बाद में पुलिस अधिकारियों के हवाले से दोनों पायलटों की मौत की पुष्टि हुई। Crash की असली वजह अभी सामने नहीं आई कानपुर Plane Crash की वजह फिलहाल साफ नहीं है। शुरुआती स्तर पर विमान के अचानक नियंत्रण खोने और नीचे गिरने की बात सामने आई है, लेकिन तकनीकी खराबी, इंजन से जुड़ी समस्या या किसी अन्य कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अधिकारियों की ओर से दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। विमान के मलबे, उड़ान से जुड़ी जानकारी और घटनास्थल से मिले सबूतों की जांच के बाद ही Crash की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। Aviation Safety पर फिर उठे सवाल कानपुर में हुआ यह हादसा Flight Training के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि, अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसा किस वजह से हुआ और क्या इसके पीछे कोई तकनीकी या संचालन संबंधी कारण था। फिलहाल प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। कानपुर विमान हादसे से जुड़ी नई जानकारी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी। Kanpur Plane Crash Latest Update: गंगा बैराज के पास Training Aircraft के क्रैश होने से दो पायलटों की मौत ने इलाके में शोक का माहौल पैदा कर दिया है। हादसे की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी।
Share Market

Share Market Today: Sensex 77,250 के करीब, Nifty भी टूटा; जानें बाजार में क्यों आई गिरावट

भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) में गुरुवार, 27 अगस्त को कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty बढ़त के साथ खुले, लेकिन कुछ ही देर बाद बाजार की चाल बदल गई। बिकवाली बढ़ने से दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में पहुंच गए। सुबह 10:30 बजे Sensex 123.89 अंक की गिरावट के साथ 77,349.05 पर था, जबकि Nifty 24.60 अंक टूटकर 24,183.15 पर कारोबार कर रहा था। Sensex-Nifty पर बढ़ा दबाव गुरुवार की शुरुआत बाजार के लिए सकारात्मक रही। Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों को कुछ राहत मिली, लेकिन यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं पाई। Nifty 24,200 के स्तर के नीचे चला गया, वहीं Sensex भी शुरुआती बढ़त गंवाकर कमजोर हो गया। इससे पहले सुबह 10:13 बजे Reuters के आंकड़ों में Sensex 77,379.50 और Nifty 24,191.85 पर था। यानी उस समय दोनों इंडेक्स में हल्की गिरावट दर्ज की जा रही थी। FMCG और Media Shares में बिकवाली सेक्टोरल कारोबार की बात करें तो FMCG शेयरों पर दबाव नजर आया। शुरुआती कारोबार में Nifty FMCG इंडेक्स भी लाल निशान में था। इसके साथ ही Media शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। सुबह 10:30 बजे Nifty Media करीब 0.60 फीसदी नीचे 1,601.30 पर कारोबार कर रहा था। Media इंडेक्स इससे पहले लगातार दो कारोबारी सत्रों में बढ़त दर्ज कर चुका था। ऐसे में आज की गिरावट को कुछ हद तक मुनाफावसूली से भी जोड़कर देखा जा रहा है। HDFC Bank बना बाजार पर दबाव का बड़ा कारण आज बाजार में HDFC Bank का प्रदर्शन भी निवेशकों के रडार पर रहा। शेयर में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। Reuters के मुताबिक, अमेरिका में बैंक और उसके दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दायर एक securities lawsuit की खबर के बाद शेयर पर दबाव बढ़ा। Upstox के अनुसार, HDFC Bank में बिकवाली के चलते Sensex दिन के ऊपरी स्तर से करीब 300 अंक नीचे आया, जबकि Nifty 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसल गया। Global Market से मिले-जुले संकेत भारतीय बाजार को एक तरफ Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से सहारा मिला। Brent crude करीब 87.4 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया था। ईरान और ओमान के बीच Strait of Hormuz को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की खबरों से तेल आपूर्ति को लेकर चिंता कुछ कम हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों को लेकर बनी चिंता ने निवेशकों को थोड़ा सतर्क रखा। यही वजह रही कि एशियाई बाजारों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार में तेजी टिक नहीं सकी। निवेशकों की नजर अब बाजार की अगली चाल पर फिलहाल घरेलू बाजार में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। एक तरफ कच्चे तेल में नरमी और मजबूत ग्लोबल टेक्नोलॉजी संकेत सकारात्मक हैं, तो दूसरी तरफ HDFC Bank जैसे बड़े शेयरों में कमजोरी और सेक्टोरल बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है। ऐसे माहौल में Sensex और Nifty की आगे की दिशा, 24,200 के आसपास Nifty की चाल और प्रमुख सेक्टर्स में खरीदारी-बिकवाली पर निवेशकों की नजर रहेगी। बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय लेना बेहतर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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