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Diesel

Diesel Rule Changed: अब 200 Litre से ज्यादा Fuel नहीं, Commercial Users की बढ़ी मुश्किलें

देश में डीजल (Diesel) खरीदने को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब पेट्रोल पंप से एक ग्राहक को 200 लीटर से ज्यादा डीजल नहीं दिया जाएगा। इस नए नियम का सबसे ज्यादा असर उन लोगों और कंपनियों पर पड़ेगा जो रोजाना बड़ी मात्रा में ईंधन इस्तेमाल करते हैं। सरकार और ऑयल कंपनियों की नई व्यवस्था के मुताबिक, बड़े Commercial Users अब सामान्य रिटेल पेट्रोल पंप से पहले की तरह डीजल नहीं खरीद पाएंगे। उन्हें Bulk Fuel Supply System का सहारा लेना होगा, जहां डीजल की कीमत रिटेल रेट से करीब ₹35 से ₹40 प्रति लीटर ज्यादा बताई जा रही है। आखिर क्यों लिया गया ये फैसला? बताया जा रहा है कि सरकार Retail और Bulk Fuel System को अलग करना चाहती है ताकि ईंधन वितरण को बेहतर तरीके से कंट्रोल किया जा सके। इससे बड़े पैमाने पर होने वाली डीजल खरीद की निगरानी भी आसान होगी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद पेट्रोल पंपों पर बड़े टैंकरों और भारी खरीदारी पर रोक जैसी स्थिति बन सकती है। किन लोगों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर? इस फैसले से सबसे ज्यादा परेशानी ट्रांसपोर्ट और इंडस्ट्री सेक्टर को हो सकती है। खासतौर पर: इन सेक्टर्स में रोजाना हजारों लीटर डीजल की जरूरत होती है। ऐसे में Bulk System से महंगा डीजल खरीदना उनके खर्च को काफी बढ़ा सकता है। क्या महंगा हो जाएगा सामान? विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ट्रांसपोर्ट कंपनियों की लागत बढ़ती है, तो उसका असर बाजार पर भी दिखाई देगा। माल ढुलाई महंगी होने से रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं। यानी डीजल का असर सिर्फ ट्रकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम आदमी की जेब पर भी धीरे-धीरे असर दिख सकता है। आम लोगों को घबराने की जरूरत है? फिलहाल नहीं। बाइक, कार और छोटे वाहन इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए पेट्रोल पंपों पर कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। आम ग्राहकों को पहले की तरह ईंधन मिलता रहेगा। यह नियम मुख्य रूप से उन Commercial Users के लिए लाया गया है जो बड़ी मात्रा में डीजल खरीदते हैं। Transport Sector ने जताई चिंता ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि पहले ही बढ़ती लागत से इंडस्ट्री दबाव में है। ऐसे में अगर डीजल ₹40 प्रति लीटर तक महंगा हुआ, तो ट्रांसपोर्टेशन खर्च संभालना मुश्किल हो जाएगा। उनका मानना है कि इसका असर आने वाले महीनों में बाजार की कीमतों पर भी साफ दिखाई दे सकता है। क्या कहती हैं ऑयल कंपनियां? ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का कहना है कि यह कदम सप्लाई सिस्टम को ज्यादा व्यवस्थित बनाने के लिए उठाया गया है। इससे ईंधन की अनियमित बिक्री पर रोक लगाने और वितरण प्रक्रिया को बेहतर करने में मदद मिलेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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West Bengal

West Bengal Politics: चुनावी हार के बाद TMC में बगावत, स्पीकर को भेजा गया पत्र वायरल

West Bengal की राजनीति में इस समय बड़ा सियासी तूफान देखने को मिल रहा है। लोकसभा चुनाव में उम्मीद से कमजोर प्रदर्शन के बाद अब सत्ताधारी TMC यानी Trinamool Congress के भीतर ही बगावत की खबरें सामने आने लगी हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि चुनावी हार के सिर्फ 14 दिन बाद पार्टी के 19 सांसदों के हस्ताक्षर वाला एक कथित लेटर सामने आया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। स्पीकर को भेजे गए लेटर में क्या है? जानकारी के मुताबिक, यह पत्र 18 मई को लोकसभा स्पीकर को भेजा गया था। इसमें पार्टी नेतृत्व और संगठन के कामकाज को लेकर नाराजगी जताई गई है। सूत्रों का दावा है कि कई सांसद लंबे समय से पार्टी के अंदर फैसले लेने के तरीके से खुश नहीं थे और चुनावी नतीजों के बाद उनका असंतोष खुलकर सामने आ गया। ममता बनर्जी के लिए क्यों बढ़ी चिंता? मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि TMC हमेशा से मजबूत संगठन और एकजुट नेतृत्व की बात करती रही है। लेकिन अब पार्टी के अंदर से ही उठ रही आवाजें विपक्ष को बड़ा मुद्दा दे रही हैं। बीजेपी और कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने इसे TMC की अंदरूनी कमजोरी करार दिया है। पार्टी की तरफ से क्या आया जवाब? हालांकि, पार्टी की तरफ से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। कुछ नेताओं ने इस लेटर को फर्जी बताया है, जबकि कई नेताओं का कहना है कि पार्टी के भीतर बातचीत से मामला सुलझाया जाएगा। इसके बावजूद बंगाल की राजनीति में इस खबर ने नई बहस छेड़ दी है। आगे क्या हो सकता है? राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर 19 सांसदों के हस्ताक्षर वाला यह पत्र सही साबित होता है, तो आने वाले दिनों में TMC को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसका असर सिर्फ पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति और विपक्षी गठबंधन की रणनीति पर भी पड़ सकता है। फिलहाल सबकी नजर ममता बनर्जी के अगले कदम पर टिकी है। अब देखना होगा कि वह इस संकट को संभाल पाती हैं या TMC के भीतर की दरार आने वाले समय में और गहरी होती जाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Weather

Weather Alert: Delhi में आधी रात तूफानी आंधी-बारिश, 22 राज्यों में Orange Alert

देशभर में मौसम (Weather) ने अचानक ऐसा रुख बदला कि लोगों को गर्मी से राहत तो मिली, लेकिन कई राज्यों में डर और परेशानी भी बढ़ गई। राजधानी Delhi में गुरुवार आधी रात तेज धूलभरी आंधी और बारिश ने लोगों को चौंका दिया। वहीं बिहार में आकाशीय बिजली गिरने से 10 लोगों की मौत हो गई। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली समेत 22 राज्यों में Orange Alert जारी किया है। Delhi-NCR में आधी रात बदला मौसम दिल्ली-एनसीआर में देर रात अचानक तेज हवाएं चलने लगीं। कई इलाकों में 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चली, जिसके बाद बारिश शुरू हो गई। रात में सड़कों पर पेड़ गिरने और बिजली कटने जैसी घटनाएं भी सामने आईं। दिनभर उमस और गर्मी से परेशान लोगों को बारिश से राहत जरूर मिली, लेकिन तेज तूफान ने लोगों की चिंता बढ़ा दी। कई जगह लोग रात में घरों की खिड़कियां और बालकनी संभालते नजर आए। 22 राज्यों में भारी बारिश और आंधी का Alert IMD के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ और अरब सागर से आ रही नमी की वजह से उत्तर और मध्य भारत का मौसम तेजी से बदल रहा है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, झारखंड, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत 22 राज्यों में अगले 48 घंटों तक तेज बारिश, आंधी और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है। कुछ इलाकों में ओलावृष्टि और तेज हवाओं की भी चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने किसानों को खेतों में सावधानी बरतने और लोगों को खराब मौसम के दौरान घरों में रहने की सलाह दी है। Bihar में बिजली गिरने से 10 लोगों की दर्दनाक मौत बिहार में खराब मौसम सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हुआ। अलग-अलग जिलों में बिजली गिरने की घटनाओं में 10 लोगों की जान चली गई। कई लोग खेतों और खुले इलाकों में काम कर रहे थे, तभी अचानक मौसम बिगड़ गया। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और राहत टीमें प्रभावित इलाकों में पहुंचीं। सरकार की ओर से मृतकों के परिवारों को सहायता देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अगले कुछ दिन और मुश्किल बढ़ा सकता है मौसम मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में कई राज्यों में मौसम इसी तरह अस्थिर बना रह सकता है। अचानक तेज बारिश, आंधी और बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की सक्रियता धीरे-धीरे बढ़ रही है, जिसकी वजह से मौसम में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। लोगों को सलाह दी गई है कि मौसम विभाग की अपडेट्स पर नजर रखें और खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों में जाने से बचें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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कॉकरोच जनता पार्टी

कॉकरोच जनता पार्टी का Education Manifesto आने वाला, Pune से शुरू हुआ देशव्यापी आंदोलन

Pune से एक अनोखा और चर्चा में आया राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है, जहां “कॉकरोच जनता पार्टी” ने अपने देशव्यापी आंदोलन की शुरुआत कर दी है। इस आंदोलन के साथ ही पार्टी ने शिक्षा क्षेत्र में सुधार को लेकर अपना “शिक्षा घोषणापत्र” जारी करने की भी घोषणा की है। AI Photo Controversy: Abhijeet का बड़ा बयान इस पूरे मामले के बीच पार्टी प्रमुख अभिजीत ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक तस्वीर पर सफाई दी है, जिसमें उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दिखाया गया था। अभिजीत ने स्पष्ट कहा कि यह तस्वीर वास्तविक नहीं है, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बनाई गई एक जनरेटेड इमेज है। उन्होंने लोगों से अपील की कि सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर भरोसा न करें और किसी भी कंटेंट को शेयर करने से पहले उसकी जांच जरूर करें। Education Manifesto की तैयारी, बड़ा फोकस शिक्षा सुधार पर कॉकरोच जनता पार्टी ने बताया कि उनका मुख्य एजेंडा शिक्षा व्यवस्था में सुधार करना है। पार्टी जल्द ही अपना “Education Manifesto” जारी करेगी, जिसमें डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने, छात्रों के लिए नए अवसर और आधुनिक शिक्षा प्रणाली पर जोर दिया जाएगा। पार्टी का कहना है कि उनका उद्देश्य मौजूदा सिस्टम से अलग एक वैकल्पिक सोच और नई दिशा देना है। Social Media Reaction: मिली-जुली प्रतिक्रिया इस पूरे घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे एक राजनीतिक व्यंग्य मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे एक नए वैचारिक आंदोलन की शुरुआत बता रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ayodhya Ram Mandir

Ayodhya Ram Mandir Controversy: ₹7 करोड़ डोनेशन घोटाले और हटाने के आरोप

Ayodhya Ram Mandir एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। मंदिर ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय मामलों को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं, जिससे धार्मिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है। पूर्व अकाउंट इंचार्ज के आरोप मंदिर के पूर्व अकाउंट इंचार्ज ने दावा किया है कि चढ़ावे के रूप में आए करीब ₹7 करोड़ रुपये के हिसाब-किताब में अनियमितता हुई है। उनका कहना है कि जब उन्होंने इस मामले को लेकर ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी चंपत राय से शिकायत की, तो इसके बाद उन्हें उनके पद से हटा दिया गया। पूर्व अधिकारी ने यह भी आरोप लगाया है कि इस पूरे मामले से जुड़े CCTV फुटेज को कथित रूप से डिलीट कराया गया, जिससे पारदर्शिता और रिकॉर्डिंग सिस्टम पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ट्रस्ट की ओर से प्रतिक्रिया नहीं फिलहाल इस पूरे मामले पर Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust या संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। आरोपों की सत्यता की भी अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। सोशल मीडिया और राजनीतिक हलचल इन आरोपों के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। कई यूजर्स ने मामले की निष्पक्ष जांच और पूरी पारदर्शिता की मांग की है। वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि इतने बड़े धार्मिक प्रोजेक्ट में वित्तीय मामलों की उच्च स्तरीय जांच जरूरी है। जांच की मांग तेज विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोपों में थोड़ी भी सच्चाई पाई जाती है, तो यह मंदिर प्रशासन के लिए गंभीर सवाल खड़े कर सकता है। फिलहाल सभी की नजरें आधिकारिक जांच और ट्रस्ट की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rajya Sabha

MP Rajya Sabha Result 2026: मध्य प्रदेश में BJP की क्लीन स्वीप जीत, तीनों सीटों पर कब्जा

मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा (Rajya Sabha)चुनाव को लेकर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। 3 सीटों पर हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए तीनों ही सीटें अपने नाम कर ली हैं, जिससे राज्य में विपक्षी दल कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। इस चुनाव को लेकर शुरुआत से ही राजनीतिक हलचल तेज थी, क्योंकि बीजेपी के पास विधानसभा में मजबूत बहुमत होने के कारण दो सीटों पर जीत लगभग तय मानी जा रही थी, लेकिन पार्टी ने रणनीतिक रूप से तीसरी सीट पर भी पूरा जोर लगाया और सफलता हासिल की। बीजेपी के विजेता उम्मीदवार मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए विजयी घोषित बीजेपी उम्मीदवार हैं: इन तीनों नेताओं की जीत के साथ बीजेपी ने राज्यसभा में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है। क्या रहा चुनाव का पूरा राजनीतिक गणित? कांग्रेस ने तीसरी सीट पर मुकाबला करने की कोशिश की, लेकिन राजनीतिक समीकरण उसके पक्ष में नहीं रहे। राजनीतिक रणनीति और असर वहीं कांग्रेस को इस चुनाव में अपेक्षित सफलता नहीं मिली, जिससे पार्टी के भीतर मंथन तेज हो गया है। क्यों है यह चुनाव खास? हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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TMC

TMC में भूचाल: कल्याण बनर्जी बोले– मुझे चुनो या अभिषेक को, बढ़ा सियासी संकट

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर इन दिनों राजनीतिक तनाव चरम पर है। पार्टी में नेतृत्व को लेकर चल रही खींचतान, लगातार इस्तीफे और गुटबाजी के दावे ने संगठन की एकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा, यह बात अब खुलकर सामने आने लगी है। कल्याण बनर्जी का बड़ा बयान: “मुझे या अभिषेक को चुनिए” वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी ने पार्टी नेतृत्व को सीधे तौर पर अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि अब समय आ गया है जब नेतृत्व को स्पष्ट फैसला लेना होगा—या तो उन्हें या फिर अभिषेक बनर्जी को आगे रखा जाए। उनके इस बयान को पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रहे असंतोष का सबसे बड़ा संकेत माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इसे TMC के अंदरूनी शक्ति संघर्ष के खुलकर सामने आने के रूप में देखा जा रहा है। लगातार इस्तीफों से बढ़ी टेंशन TMC को पिछले कुछ समय में एक के बाद एक बड़े झटके लगे हैं: इन घटनाओं ने पार्टी के संगठनात्मक ढांचे पर सवाल खड़े कर दिए हैं और नेतृत्व के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लोकसभा और विधानसभा में गुटबाजी के दावे सूत्रों और राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार: ममता बनाम अभिषेक: अंदरूनी शक्ति संघर्ष चर्चा में पार्टी के भीतर सबसे बड़ा सवाल अब नेतृत्व को लेकर उठ रहा है। इसी कथित शक्ति संघर्ष को मौजूदा अस्थिरता की मुख्य वजह माना जा रहा है। कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच भी इसे लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। TMC के सामने बड़ी राजनीतिक चुनौती लगातार बढ़ते विवादों और बगावत जैसे हालात ने पार्टी के सामने कई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Twisha

Twisha Case Update: जेल में सास के पास मिली ‘The Pregnant King’ किताब, CBI रिपोर्ट से बढ़ा सस्पेंस

Twisha Case एक बार फिर सुर्खियों में है, जहां हर दिन नए खुलासे सामने आ रहे हैं और मामला और उलझता जा रहा है। जेल से लेकर जांच एजेंसियों तक इस केस में कई अहम अपडेट सामने आए हैं, जिसने लोगों की दिलचस्पी और सवाल दोनों बढ़ा दिए हैं। जेल में किताब मिलने का दावा, सोशल मीडिया में चर्चा तेज जेल में बंद Twisha की सास से जुड़ा एक दावा सामने आया है, जिसमें कहा जा रहा है कि निरीक्षण के दौरान उनके पास से ‘The Pregnant King’ नाम की किताब मिली। इस खबर के बाद मामला सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गया है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है। NCW के सामने पेश हुईं सास, दिया बयान इस बीच, ट्विशा की सास ने National Commission for Women के सामने पेश होकर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि उन्हें जेल में किसी तरह की कोई परेशानी नहीं है और उनके साथ सभी सुविधाएं सामान्य रूप से मिल रही हैं। आयोग ने उनका बयान दर्ज कर आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी है। CBI को मिली दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, जांच में बड़ा मोड़ दूसरी ओर, जांच एजेंसी CBI को इस केस से जुड़ी दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भी मिल गई है। इसे जांच के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि अब इसे पहले की रिपोर्ट से मिलाकर देखा जाएगा जिससे मौत के कारणों और परिस्थितियों पर और स्पष्टता मिल सकेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ethanol Petrol

Ethanol Petrol सरकार का बड़ा फैसला, E20 Fuel पर Tax खत्म लेकिन जनता परेशान

भारत सरकार ने स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) को बढ़ावा देने के लिए पेट्रोलियम नीति में एक बड़ा बदलाव किया है। नए फैसले के अनुसार 20% से अधिक Ethanol Petrol (E20 और उससे ऊपर) पर एक्साइज ड्यूटी को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। सरकार का दावा है कि यह कदम देश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता (Energy Independence) की ओर तेजी से ले जाएगा। हालांकि, जमीनी हकीकत थोड़ी अलग नजर आ रही है। पेट्रोल पंपों पर E20 फ्यूल की कीमतों में किसी तरह की बड़ी गिरावट नहीं दिखी है, जिससे आम उपभोक्ताओं के बीच सवाल उठ रहे हैं कि आखिर टैक्स खत्म होने का फायदा उन्हें क्यों नहीं मिल रहा। पेट्रोल पंप पर असर नहीं, जनता की उम्मीदें अधूरी सरकार के इस फैसले के बाद उम्मीद की जा रही थी कि पेट्रोल के दामों में कुछ राहत मिलेगी, लेकिन फिलहाल E20 पेट्रोल की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। कई वाहन चालकों का कहना है कि वे राहत की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन फिलहाल स्थिति पहले जैसी ही है। सरकार का तर्क: पर्यावरण और किसानों दोनों को फायदा सरकारी पक्ष का कहना है कि यह नीति केवल कीमत कम करने के लिए नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सुधार के लिए है। एथेनॉल उत्पादन बढ़ने से किसानों को गन्ना और अन्य फसलों का बेहतर बाजार मिलेगा। साथ ही, इससे प्रदूषण कम करने और क्लीन एनर्जी को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। एक्सपर्ट्स की राय: असर दिखने में लगेगा समय ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारत की ईंधन नीति में बड़ा बदलाव है, लेकिन इसका सीधा फायदा आम जनता को तुरंत नहीं मिलेगा। इसका असर धीरे-धीरे आने वाले वर्षों में दिखेगा, जब एथेनॉल सप्लाई चेन और फ्यूल सिस्टम पूरी तरह स्थिर हो जाएगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Prakash Chik Baraik

Mamata Banerjee को बड़ा झटका! TMC सांसद Prakash Chik Baraik ने छोड़ी पार्टी

पश्चिम बंगाल की राजनीति इन दिनों काफी गरमाई हुई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर लगातार बढ़ रही नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है। राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक (Prakash Chik Baraik) के इस्तीफे ने पार्टी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। माना जा रहा है कि यह सिर्फ एक इस्तीफा नहीं, बल्कि TMC के अंदर चल रही बड़ी राजनीतिक खींचतान का संकेत है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी के कई नेता मौजूदा नेतृत्व से खुश नहीं हैं। यही वजह है कि पिछले कुछ दिनों में कई बड़े नाम TMC से दूरी बनाते नजर आए हैं। प्रकाश चिक बराइक के इस्तीफे के बाद अब ममता बनर्जी पर विपक्ष के साथ-साथ अपनी ही पार्टी के भीतर से दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। राज्यसभा से इस्तीफा, लेकिन वजह पर सस्पेंस प्रकाश चिक बराइक ने राज्यसभा सभापति को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। हालांकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से किसी बड़ी वजह का खुलासा नहीं किया, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के अंदर चल रही खींचतान और असंतोष इसके पीछे बड़ी वजह हो सकती है। सूत्रों की मानें तो TMC के कई सांसद और नेता पार्टी की रणनीति और फैसलों से नाराज बताए जा रहे हैं। यही कारण है कि बंगाल की राजनीति में बगावत की चर्चाएं तेज हो गई हैं। पहले भी सामने आ चुके हैं बागी सुर प्रकाश चिक बराइक से पहले भी कई नेता पार्टी लाइन से अलग राय रखते दिखाई दिए थे। सुष्मिता देव और सुखेंदु शेखर रॉय जैसे नेताओं के नाम पहले ही चर्चाओं में आ चुके हैं। इसके अलावा कुछ सांसदों के दूसरे दलों के नेताओं से संपर्क में होने की खबरों ने TMC की चिंता बढ़ा दी है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अगर आने वाले दिनों में और नेता पार्टी छोड़ते हैं, तो इसका असर संसद से लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति तक दिखाई दे सकता है। BJP ने साधा निशाना बीजेपी ने इस पूरे मामले को लेकर ममता बनर्जी सरकार और TMC नेतृत्व पर हमला बोला है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि पार्टी के भीतर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा और लगातार हो रहे इस्तीफे उसी का परिणाम हैं। वहीं दूसरी तरफ TMC अभी भी इस संकट को संभालने की कोशिश में लगी हुई है। पार्टी की ओर से फिलहाल आधिकारिक तौर पर ज्यादा बयान नहीं दिया गया है, लेकिन अंदरखाने बैठकों का दौर लगातार जारी बताया जा रहा है। बंगाल की राजनीति में बढ़ सकती है हलचल राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। अगर असंतुष्ट नेताओं की संख्या बढ़ती है, तो TMC के लिए यह बड़ा राजनीतिक संकट बन सकता है। फिलहाल सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि ममता बनर्जी इस चुनौती से कैसे निपटती हैं और पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी को किस तरह संभालती हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi Protest Case: इंटरनेट बंदी पर केंद्र ने मांगी माफी, आज Supreme Court में सुनवाई

Delhi में CJP (Cockroach Janta Party) के प्रदर्शन के दौरान इंटरनेट सेवाएं बंद करने और मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदियां लगाने का मामला लगातार चर्चा में है। 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के बाद केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) को सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखना पड़ा। तीनों की ओर से अदालत में बिना शर्त माफी मांगी गई है। अब गुरुवार, 15 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं। इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने करीब 7,000 लोगों को हिरासत में लिए जाने का दावा किया है। वहीं, अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम उठाए गए थे। अब अदालत यह देखेगी कि इन कदमों से उसके पहले के निर्देशों का उल्लंघन हुआ या नहीं। Internet Shutdown: केंद्र सरकार ने क्या सफाई दी? केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बिना शर्त माफी मांगी है। सरकार ने कहा कि अदालत के आदेश की जानबूझकर अवहेलना करने का कोई इरादा नहीं था। केंद्र के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के अनुरोध पर रायसीना हिल्स के चार किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं 9 अक्टूबर की रात 10 बजे से 10 अक्टूबर की रात 10 बजे तक बंद की गई थीं। सरकार ने इसके पीछे संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला दिया। केंद्र ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि प्रतिबंध सीमित इलाके और तय समय के लिए लगाया गया था। साथ ही, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अवमानना नोटिस वापस लेने का अनुरोध किया है। Delhi Metro के 45 स्टेशनों पर क्यों लगी पाबंदी? प्रदर्शन के दिन दिल्ली मेट्रो के कुछ स्टेशनों पर यात्रियों के प्रवेश और निकास को सीमित कर दिया गया था। इस फैसले के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा और मेट्रो सेवाओं पर लगे प्रतिबंधों को लेकर सवाल उठने लगे। DMRC ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि दिल्ली के कुल 303 मेट्रो स्टेशनों में से 45 पर पाबंदियां लगाई गई थीं। कॉर्पोरेशन के मुताबिक, उस दिन 271 ट्रेनों ने कुल 4,157 चक्कर लगाए। DMRC ने अपने हलफनामे में कहा कि संबंधित पाबंदियां दिल्ली पुलिस के निर्देशों के बाद लागू की गई थीं। मेट्रो प्रबंधन ने भी बिना शर्त माफी मांगते हुए कहा कि उसका उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। CJP Protest में 7 हजार लोगों को हिरासत में लेने का दावा इस पूरे विवाद में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने का मुद्दा भी अहम है। याचिकाकर्ताओं की ओर से करीब 7,000 लोगों को हिरासत में लिए जाने का दावा किया गया है। उन्होंने कार्रवाई के तरीके और उसकी वैधता पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान संभावित अव्यवस्था को देखते हुए एहतियाती कदम उठाए गए थे। पुलिस के मुताबिक, लोगों को अस्थायी केंद्रों में ले जाया गया और कुछ घंटों के भीतर रिहा कर दिया गया। हालांकि, हिरासत में लिए गए लोगों की सटीक संख्या और कार्रवाई की वैधता को लेकर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष सामने आना बाकी है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले क्या कहा था? प्रदर्शन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को आम लोगों की आवाजाही और सार्वजनिक परिवहन को बाधित नहीं करने के निर्देश दिए थे। अदालत ने मेट्रो और रेल सेवाओं को सामान्य रूप से संचालित करने तथा इंटरनेट सेवाओं को बाधित न करने पर भी जोर दिया था। इसके बाद अदालत ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगते हुए अवमानना नोटिस जारी किए। अब केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और DMRC ने अपने हलफनामे दाखिल कर माफी मांगी है और अपने फैसलों के पीछे की परिस्थितियों को स्पष्ट किया है। CJP प्रदर्शन की वजह क्या थी? CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन का आह्वान किया था। प्रदर्शन से जुड़ी मांगों में SIR यानी Special Intensive Revision के तहत मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया का विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग शामिल थी। प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई और कुछ मेट्रो स्टेशनों पर आवाजाही सीमित कर दी गई। इंटरनेट बंद होने के बाद यह मामला और गंभीर हो गया, क्योंकि इससे आम लोगों के संचार और रोजमर्रा के कामकाज पर असर पड़ने को लेकर सवाल उठे। आज की Supreme Court Hearing में क्या होगा? 15 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में अदालत केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और DMRC के जवाबों पर विचार करेगी। इस दौरान इंटरनेट बंद करने, मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदी लगाने और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने से जुड़े मुद्दे अहम रहेंगे। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सुप्रीम कोर्ट अधिकारियों की माफी स्वीकार करेगा या कथित अवमानना के मामले में आगे की कार्रवाई करेगा। अदालत भविष्य में ऐसी परिस्थितियों में इंटरनेट सेवाओं और सार्वजनिक परिवहन पर प्रतिबंध लगाने से जुड़े निर्देशों पर भी विचार कर सकती है। फिलहाल, अधिकारियों ने अपना पक्ष रख दिया है। अब अदालत के फैसले से साफ होगा कि सुरक्षा के नाम पर लगाए गए प्रतिबंधों और आम नागरिकों की सुविधाओं के बीच संतुलन को लेकर आगे क्या दिशा तय होती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
मां स्कंदमाता

Navratri 2026: पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा, जानें महत्त्व, कथा और मंत्र

नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। भगवान कार्तिकेय को स्कंद भी कहा जाता है। उन्हें गोद में धारण करने के कारण देवी पार्वती के इस स्वरूप का नाम स्कंदमाता पड़ा। मां का यह रूप मातृत्व, प्रेम और करुणा का प्रतीक है। मां स्कंदमाता की कथा पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान स्कंद यानी कार्तिकेय को जन्म दिया, जो देवताओं की सेना के सेनापति बने। स्कंदमाता का स्वरूप एक मां की शक्ति और अपने संतान के प्रति अटूट स्नेह को दर्शाता है। मां का स्वरूप और महत्त्व पूजा विधि मंत्र: ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः। भोग: मां को केला अर्पित करने की परंपरा प्रचलित है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

मेरठ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, पति सौरभ की हत्या के मामले में कोर्ट का फैसला

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। दोनों पर सौरभ की हत्या करने का आरोप साबित होने के बाद यह फैसला सुनाया गया। सजा सुनाते हुए जज ने वारदात को नृशंस हत्याकांड बताया और कहा कि इसमें माफी स्वीकार नहीं होगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश हुए मुस्कान और साहिल सजा सुनाए जाने से पहले जेल में बंद मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जोड़ा गया। इस दौरान दोनों रोने लगे। जज ने मुस्कान से पूछा कि पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वह क्या सजा चाहती है। इस पर मुस्कान ने कहा, “मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए।” इसके बाद वह खामोश हो गई। वहीं, साहिल से भी यही सवाल पूछा गया, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। सजा के ऐलान के बाद रो पड़ीं सौरभ की मां अदालत के फैसले के बाद सौरभ राजपूत की मां भावुक हो गईं और रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि उन्हें शांति से न्याय मिल गया। इस मामले में सजा का ऐलान सौरभ के परिवार के लिए लंबे इंतजार के बाद आया है। 3 मार्च 2025 को हुई थी सौरभ की हत्या सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को हुई थी। मामले में सामने आए विवरण के अनुसार, हत्या के बाद शव के पांच टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में भर दिया गया था। इस वारदात ने पूरे देश में व्यापक चर्चा बटोरी थी। अदालत ने मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

इंदौर में प्लॉट बेचने के नाम पर 7.80 लाख की ठगी का आरोप, ब्रोकर समेत दो पर FIR

शहर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में प्लॉट बेचने के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि प्लॉट का सौदा करने के बाद ब्रोकर और प्लॉट मालिक ने फरियादी से 7 लाख 80 हजार रुपये ले लिए, लेकिन न तो प्लॉट की रजिस्ट्री कराई और न ही कब्जा दिया। शिकायत की जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। 9.30 लाख में तय हुआ था प्लॉट का सौदा पुलिस के मुताबिक, नंदबाग कॉलोनी निवासी विजय चौहान ने शिकायत में बताया कि उन्होंने नंदबाग में एक प्लॉट का सौदा 9 लाख 30 हजार रुपये में तय किया था। इस संबंध में एग्रीमेंट भी किया गया था। फरियादी ने आरोप लगाया कि उन्होंने नकद और ऑनलाइन माध्यम से कुल 7 लाख 80 हजार रुपये का भुगतान कर दिया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें प्लॉट का कब्जा नहीं मिला और रजिस्ट्री भी नहीं कराई गई। ब्रोकर ने परिचित बताकर कराया था सौदा विजय चौहान के अनुसार, धर्मेंद्र ठाकुर ने उन्हें बताया था कि नंदकिशोर मनावत उसका परिचित है और वह अपना प्लॉट बेचना चाहता है। इसके बाद धर्मेंद्र ने सौदे में ब्रोकर की भूमिका निभाई और इसके बदले 10 हजार रुपये लिए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि भुगतान के बाद जब उन्होंने रजिस्ट्री कराने और प्लॉट का कब्जा देने की मांग की, तो उन्हें लगातार टालमटोल का सामना करना पड़ा। 25 से ज्यादा केस होने की धमकी देने का आरोप फरियादी ने आरोप लगाया कि रजिस्ट्री और कब्जे के लिए दबाव बनाने पर धर्मेंद्र ठाकुर ने धमकी दी। शिकायत के मुताबिक, उसने कहा कि उसके खिलाफ 25 से ज्यादा मामले चल रहे हैं। साथ ही, उसके या नंदकिशोर मनावत के पास दोबारा आने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी भी दी। 2.80 लाख रुपये लौटाए, 5 लाख बाकी होने का दावा विजय चौहान के मुताबिक, पुलिस में शिकायत करने की बात कहने के बाद नंदकिशोर मनावत ने 2 लाख 50 हजार रुपये नकद और 30 हजार रुपये ऑनलाइन वापस किए। हालांकि, फरियादी का आरोप है कि बाकी 5 लाख रुपये लौटाने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद विजय चौहान ने पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है।

SIR के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों से मिले राहुल गांधी, दिल्ली पुलिस पर मारपीट के आरोप

नई दिल्ली। SIR के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन करने वाले छात्रों ने बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। इसके बाद राहुल गांधी और छात्रों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस पर मारपीट और हिरासत के दौरान दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में NSUI के छात्रों, कार्यकर्ताओं और कंटेंट क्रिएटर्स ने अपने साथ हुई कथित घटनाओं की जानकारी दी। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। छात्रा ने कान पर चोट लगने का लगाया आरोप प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक छात्रा ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान पुलिसकर्मी ने उसके प्राइवेट पार्ट पर लात मारी। वहीं, दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा अदिरा ने दावा किया कि पुलिस की पिटाई के कारण उसके एक कान की सुनने की क्षमता चली गई। प्रदर्शनकारियों ने हिरासत के दौरान कथित ज्यादती और मारपीट से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है। RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर हिरासत का आरोप एक अन्य प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि पुलिस RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले रही थी। यह आरोप भी प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाया गया है। राहुल गांधी ने सबूत सुरक्षित रखने को कहा राहुल गांधी ने छात्रों से घटनाओं से जुड़े वीडियो और अन्य सबूत सुरक्षित रखने को कहा। उन्होंने कहा कि इन सबूतों के आधार पर पुलिसकर्मियों से लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त तक, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी। प्रदर्शनकारियों के आरोपों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।

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