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भोपाल में कल बिजली कटौती: 35 से ज्यादा इलाकों में असर, लोगों को परेशानी की संभावना

Bhopal में कल बिजली कटौती: 35 से ज्यादा इलाकों में असर, लोगों को परेशानी की संभावना

Bhopal शहर के कई इलाकों में कल बिजली सप्लाई बाधित रहेगी। बिजली विभाग ने मेंटेनेंस और जरूरी कामों के चलते यह कटौती तय की है। इसका असर शहर के करीब 35 इलाकों में देखने को मिलेगा। जानकारी के अनुसार शाहपुरा, चूना भट्टी और दानिशकुंज जैसे इलाकों में बिजली कुछ घंटों के लिए बंद रहेगी। इसके अलावा होशंगाबाद रोड और जाटखेड़ी क्षेत्र में भी बिजली आपूर्ति प्रभावित रहेगी। बिजली कटौती के कारण स्थानीय लोगों को पानी की सप्लाई, कामकाज और दैनिक गतिविधियों में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे पहले से जरूरी तैयारी कर लें ताकि परेशानी कम हो सके। बिजली विभाग का कहना है कि यह काम जरूरी मेंटेनेंस के लिए किया जा रहा है, जिससे भविष्य में सप्लाई और बेहतर हो सके।
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अस्पताल में 4 दिन तक मर्चुरी में पड़ा रहा नवजात का शव, पिता बोला- कर्ज के कारण बंधक बना रखा था

Sehore जिला अस्पताल से गुरुवार को एक दर्दनाक तस्वीर सामने आई। एक पिता अपनी नवजात बेटी का शव गोद में लेकर अस्पताल से बाहर निकला। बच्ची का शव पिछले चार दिनों से अस्पताल की मर्चुरी में रखा हुआ था। पिता रवि रघुवंशी का आरोप है कि 70 हजार रुपए के कर्ज के कारण एक किसान ने उसे बंधक बनाकर रखा था। इसी वजह से वह बेटी की मौत के बाद भी अस्पताल नहीं पहुंच सका। जुड़वां बहनों में से एक थी बच्ची जानकारी के मुताबिक 24 मार्च को रवि और अंजलि रघुवंशी के यहां जुड़वां बच्चियों का जन्म हुआ था। जन्म के दौरान एक बच्ची की मौत हो गई थी। दूसरी बच्ची बेहद कमजोर हालत में पैदा हुई थी। उसका वजन सिर्फ 1.4 किलो था। बच्ची प्रीमैच्योर थी, इसलिए उसे जिला अस्पताल के ICU में भर्ती किया गया था। करीब 40 दिनों तक डॉक्टरों ने उसका इलाज किया, लेकिन 3 मई को उसकी मौत हो गई। चार दिन तक नहीं पहुंचे परिजन बच्ची की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों से कई बार संपर्क करने की कोशिश की। हालांकि, परिवार की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। चार दिन तक कोई शव लेने नहीं पहुंचा, जिसके बाद अस्पताल ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ढूंढकर लाई माता-पिता को पुलिस पहले आष्टा तहसील के हकीमाबाद गांव पहुंची, जहां परिवार का घर है। वहां पता चला कि दंपती मजदूरी करने देवास जिले के जालेरिया गांव गए हैं। इसके बाद पुलिस टीम वहां पहुंची और दोनों को सीहोर लेकर आई। बाद में बच्ची का शव परिजनों को सौंप दिया गया। पिता ने लगाया बंधक बनाने का आरोप पूछताछ में पिता रवि रघुवंशी ने बताया कि वह किसान मनोज जाट के यहां मजदूरी करता था। उस पर करीब 70 हजार रुपए का कर्ज था। रवि का आरोप है कि किसान ने कर्ज के बदले उसे और उसके साथी को जबरन रोक रखा था। उसने कहा कि उसे अस्पताल जाने नहीं दिया गया। रवि ने दावा किया कि अगर वह समय पर अस्पताल पहुंच जाता, तो शायद उसकी बच्ची की जान बच सकती थी। पुलिस कर रही मामले की जांच पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि मजदूर को जबरन बंधक बनाकर रखा गया था या नहीं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अधिक जानकारी और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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सीहोर जिला अस्पताल की मर्चुरी में 4 दिन से रखा नवजात बच्ची का शव, माता-पिता लेने नहीं पहुंचे

Sehore जिला अस्पताल की मर्चुरी में एक नवजात बच्ची का शव पिछले चार दिनों से रखा हुआ है। बच्ची की 3 मई को इलाज के दौरान मौत हो गई थी, लेकिन अब तक उसके माता-पिता शव लेने अस्पताल नहीं पहुंचे हैं। अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक बच्ची करीब 40 दिनों तक ICU में भर्ती रही। डॉक्टरों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उसकी हालत लगातार गंभीर बनी रही। जन्म के समय वजन था सिर्फ 1.4 किलो सिविल सर्जन डॉ. यू.के. श्रीवास्तव ने बताया कि हकीमाबाद निवासी अंजली और रवि के यहां 24 मार्च को जुड़वां बच्चों का जन्म हुआ था। प्रसव के दौरान एक बच्चे की मौत हो गई थी। वहीं दूसरी बच्ची बेहद कमजोर थी। जन्म के समय उसका वजन केवल 1.4 किलोग्राम था। इसी वजह से उसे तुरंत गहन चिकित्सा इकाई (ICU) में भर्ती किया गया था। बच्ची की मौत के बाद बंद कर दिया संपर्क डॉक्टरों के अनुसार इलाज के दौरान बच्ची के पिता सिर्फ एक-दो बार ही अस्पताल पहुंचे थे। 3 मई को बच्ची की मौत होने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों से कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने फोन उठाना बंद कर दिया। अस्पताल की ओर से उनके काम करने की जगह पर भी सूचना भेजी गई, फिर भी कोई शव लेने नहीं पहुंचा। पुलिस टीम हकीमाबाद रवाना चार दिन तक कोई नहीं आने पर अस्पताल प्रशासन ने मामले की जानकारी पुलिस को दी। अब पुलिस और अस्पताल प्रबंधन नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई कर रहे हैं। पुलिस की एक टीम हकीमाबाद रवाना हुई है। पुलिस परिजनों को अस्पताल बुलाकर बच्ची का शव सौंपने और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कराने की कोशिश
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खंडवा में 32 साल के युवक की हार्ट अटैक से मौत, दोस्तों के साथ कार्यक्रम से लौट रहे थे घर

Khandwa के रामनगर क्षेत्र निवासी 32 वर्षीय सौरभ मालवीय की बुधवार देर शाम हार्ट अटैक से मौत हो गई। वे दोस्तों के साथ ग्राम सिंगोट में एक कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। लौटते समय अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। जानकारी के अनुसार, रास्ते में सौरभ ने सीने में तेज दर्द की शिकायत की। उनके दोस्त ने तुरंत कार रोकी, लेकिन कुछ ही देर में उनकी हालत और गंभीर हो गई। इसके बाद दोस्त उन्हें तुरंत शहर के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। हालांकि, डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के मुताबिक अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उनकी मौत हो चुकी थी। “मां वैष्णो जल” नाम से चलाते थे RO प्लांट सौरभ मालवीय रामनगर क्षेत्र में “मां वैष्णो जल” नाम से RO वाटर प्लांट संचालित करते थे। वे अपने मिलनसार और शांत स्वभाव के कारण इलाके में अच्छी पहचान रखते थे। उनके परिवार में मां, पत्नी और सात साल की बेटी है। सौरभ के अचानक निधन की खबर से परिवार और परिचित गहरे सदमे में हैं। 7 दिन पहले मनाई थी शादी की सालगिरह परिजनों ने बताया कि सौरभ की शादी की सालगिरह सिर्फ सात दिन पहले ही मनाई गई थी। वहीं उनकी मां पिछले एक साल से बीमार चल रही हैं। उनका इलाज मुंबई में चल रहा था और इसी महीने उन्हें वापस घर लाया गया था। ऐसे में सौरभ की अचानक मौत ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है। घटना के बाद रामनगर क्षेत्र में शोक का माहौल है। अधिक जानकारी और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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भोपाल में 1.40 लाख के नकली नोटों के साथ युवक गिरफ्तार, खुद को बताता था MBBS डॉक्टर

Bhopal की कोहेफिजा पुलिस ने पश्चिम बंगाल के एक युवक को नकली नोटों के साथ गिरफ्तार किया है। आरोपी के पास से 500 रुपए के 280 नकली नोट बरामद हुए हैं। इनकी कुल कीमत करीब 1.40 लाख रुपए बताई जा रही है। पुलिस के मुताबिक आरोपी खुद को MBBS डॉक्टर बताता था। उसके पास से एक आईफोन, पेन ड्राइव और विदेशी सीरीज (+44) का मोबाइल नंबर भी मिला है। शुरुआती जांच में पुलिस को कुछ संदिग्ध गतिविधियों के संकेत मिले हैं। इसी वजह से आरोपी को कोर्ट में पेश कर 7 दिन की रिमांड पर लिया गया है। सैफिया कॉलेज ग्राउंड के पास हुई गिरफ्तारी कोहेफिजा थाना प्रभारी केजी शुक्ला ने बताया कि बुधवार दोपहर पुलिस को सूचना मिली थी कि एक युवक सैफिया कॉलेज ग्राउंड के पास कम कीमत में नकली नोट बेचने की कोशिश कर रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने घेराबंदी कर आरोपी को पकड़ लिया। पूछताछ में उसने अपना नाम सैफुल इस्लाम (27) निवासी पश्चिम बंगाल बताया। 2024 से कर रहा था नकली नोटों का कारोबार पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह साल 2024 से नकली नोटों के कारोबार में शामिल है। वह पहले भी दो बार भोपाल आकर नकली नोट चला चुका है। मई 2025 से वह भोपाल की गुलमोहर कॉलोनी में किराए से रह रहा था। इसी दौरान उसने शादी भी की थी। 300 रुपए लेकर देता था 500 का नकली नोट आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह 2 लाख रुपए की नकली करेंसी करीब 60 हजार रुपए में खरीदकर लाया था। पिछले 10 दिनों में वह करीब 60 हजार रुपए के नकली नोट बाजार में चला चुका है। वह लोगों से 300 रुपए असली लेकर बदले में 500 रुपए का नकली नोट देता था। जल्दी अमीर बनने की चाह में उसने यह काम शुरू किया था। नेपाल और पाकिस्तान जैसे पेपर पर छपे नोट पुलिस के अनुसार जब्त किए गए नोट नेपाल और पाकिस्तान में इस्तेमाल होने वाले कागज जैसे पेपर पर छपे हैं। इसी वजह से पुलिस अब मामले की जांच अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय एंगल से भी कर रही है। साइबर ठगी से भी जुड़ सकते हैं तार जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी विदेशी नंबरों पर बातचीत करता था। पुलिस को शक है कि उसका संबंध साइबर ठगी गिरोह से भी हो सकता है। पुलिस के मुताबिक आरोपी फर्जी बैंक खाते उपलब्ध कराने का काम भी करता था। फिलहाल उससे पूछताछ जारी है और उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है। अधिक जानकारी और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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भोपाल नगर निगम को मिला नया मुख्यालय, ‘अटल भवन’ का CM मोहन यादव ने किया लोकार्पण

Bhopal के तुलसी नगर सेकंड स्टॉप पर भोपाल नगर निगम का नया मुख्यालय बनकर तैयार हो गया है। 43 करोड़ रुपए की लागत से बने इस भवन का नाम ‘अटल भवन’ रखा गया है। गुरुवार को मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने इसका लोकार्पण किया। अब शहरवासियों को नगर निगम के अलग-अलग कामों के लिए कई जगह भटकना नहीं पड़ेगा। निगम के ज्यादातर विभाग एक ही बिल्डिंग में काम करेंगे। प्रदेश की पहली जियोथर्मल तकनीक वाली नगरीय बिल्डिंग नगर निगम का यह नया मुख्यालय प्रदेश की पहली ऐसी नगरीय निकाय बिल्डिंग है, जिसमें जियोथर्मल तकनीक का उपयोग किया गया है। परिसर में लगाए गए सोलर पैनलों से करीब 300 किलोवाट बिजली तैयार होगी। लोकार्पण के साथ ही नीमच जिले में भोपाल निगम द्वारा स्थापित 10.5 मेगावॉट सोलर प्रोजेक्ट का भी शुभारंभ किया गया। एक जगह मिलेंगी सभी सुविधाएं नई बिल्डिंग में जनसुविधा केंद्र बनाया गया है, जहां नागरिकों को सभी विभागों से जुड़ी जानकारी और सेवाएं एक ही स्थान पर मिलेंगी। यहां बिल्डिंग परमिशन, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, विवाह पंजीयन, जल कार्य, सीवेज, राजस्व, स्वच्छ भारत मिशन, स्वास्थ्य, आईटी और स्मार्ट सिटी समेत कई विभाग संचालित होंगे। अभी अलग-अलग जगह चल रहे थे ऑफिस अब तक नगर निगम की कई शाखाएं शहर के अलग-अलग इलाकों में संचालित हो रही थीं। आईएसबीटी, माता मंदिर, शाहपुरा और फतेहगढ़ समेत कई जगहों पर विभागों के ऑफिस थे। नए मुख्यालय के शुरू होने से कामकाज आसान होने की उम्मीद है। नई बिल्डिंग में सामने आईं कुछ खामियां करीब 5 एकड़ जमीन पर बनी इस बिल्डिंग में कुछ कमियां भी सामने आई हैं। सबसे बड़ी कमी मीटिंग हॉल को लेकर बताई जा रही है। करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद मीटिंग हॉल नहीं बनाया गया। अब इसके लिए पास की 0.25 एकड़ जमीन मांगी गई है, जिस पर करीब 10 करोड़ रुपए खर्च होंगे। ग्रीन कॉन्सेप्ट पर तैयार हुआ भवन ‘अटल भवन’ को ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट पर तैयार किया गया है। परिसर में सोलर पैनल लगाए गए हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि पैनलों की दिशा उत्तर-दक्षिण होने से बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है। किस फ्लोर पर कौन-सा विभाग? अधिक जानकारी और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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सागर में गर्भवती की मौत पर हंगामा: परिजनों ने डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाया

मध्य प्रदेश के सागर के मकरोनिया इलाके स्थित सेवा हॉस्पिटल में सोमवार रात एक गर्भवती महिला की मौत के बाद जमकर हंगामा हो गया। परिजनों ने डॉक्टर पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया और विरोध प्रदर्शन किया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और समझाइश देकर स्थिति को नियंत्रित किया। क्या है पूरा मामला? जानकारी के अनुसार, रहली निवासी 25 वर्षीय विद्या राय करीब 1.5 माह की गर्भवती थीं। इसके बाद उनके पेट में दर्द शुरू हुआ, जिसके चलते उन्होंने रहली और सागर में इलाज कराया। इलाज के दौरान बिगड़ी हालत सोमवार को परिजन उन्हें सागर लेकर आए, जहां सोनोग्राफी के बाद सफाई (अबॉर्शन) की सलाह दी गई।इसके बाद उन्हें सेवा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान अचानक उनकी हालत बिगड़ गई।डॉक्टरों ने उन्हें दूसरे अस्पताल रेफर करने की तैयारी की, लेकिन इससे पहले ही उनकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप—इलाज में लापरवाही मृतका के परिजनों का कहना है कि: परिजनों ने डॉक्टर की लापरवाही को मौत की वजह बताया और सख्त कार्रवाई की मांग की है। डॉक्टर का पक्ष भी सामने आया अस्पताल की डॉक्टर निधि मिश्रा ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि: उन्होंने कहा कि मरीज को बचाने की पूरी कोशिश की गई, लेकिन सफल नहीं हो सके। पुलिस ने शुरू की जांच हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामला शांत कराया।पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। 👉 ऐसी ही ग्राउंड रिपोर्ट और अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें: www.deshharpal.com
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उज्जैन यूनिवर्सिटी में सॉल्वर कांड पर बवाल: NSUI का प्रदर्शन, कुलगुरु का पुतला जलाने की कोशिश

मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में बीकॉम 6वें सेमेस्टर की परीक्षा में डमी कैंडिडेट बैठाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। आरोपियों पर केस दर्ज होने के बावजूद यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से कार्रवाई नहीं होने पर छात्र संगठन NSUI ने मंगलवार को जोरदार प्रदर्शन किया। कुलगुरु का पुतला जलाने की कोशिश प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने कुलगुरु के खिलाफ नारेबाजी की और पुतला दहन करने की कोशिश की।हालांकि, मौके पर मौजूद पुलिस ने पुतला छीनकर जलने से पहले ही रोक दिया। क्या है पूरा मामला? घटना 4 मई की है, जब वाग्देवी भवन में बीकॉम परीक्षा चल रही थी। इसकी जानकारी छात्र नेता तरुण परिहार ने दी, जिसके बाद युवती को परीक्षा से रोक दिया गया। पुलिस ने दर्ज किया केस मामला सामने आने के बाद पुलिस ने: NSUI का आरोप—प्रशासन चुप NSUI का आरोप है कि: इसी के विरोध में छात्रों ने यूनिवर्सिटी परिसर में प्रदर्शन किया। छात्रों की मांग क्या है? प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने मांग की: छात्र नेता तरुण परिहार ने कहा कि दोषियों पर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। अब क्या आगे? यह मामला यूनिवर्सिटी की परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मुद्दा और बड़ा रूप ले सकता है। 👉 ऐसी ही अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें: www.deshharpal.com
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खंडवा में तबादला घोटाला: सस्पेंड अधीक्षक हेमंत सिन्हा पर शिकंजा, 2 दिन में रिपोर्ट के आदेश

मध्य प्रदेश के खंडवा में जनजातीय कार्य विभाग में कथित तबादला घोटाले और अवैध वसूली के मामले में सस्पेंड अधीक्षक हेमंत सिन्हा पर अब शिकंजा कसता जा रहा है। मामले के सामने आने के बाद इंदौर कमिश्नर ने सख्त जांच के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने बनाई 2 सदस्यीय जांच टीम कमिश्नर के आदेश पर कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने दो सदस्यीय जांच दल गठित किया है।इस टीम को 2 दिन के भीतर तथ्यात्मक रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। जांच टीम में शामिल हैं: क्या हैं आरोप? मामला जिले के 125 छात्रावासों से जुड़े अधीक्षकों से अवैध वसूली का है।आरोप है कि हर महीने 1500 से 2000 रुपए तक वसूले जाते थे। इसके अलावा: बैंक डिटेल और UPI रिकॉर्ड मांगे गए जांच को निष्पक्ष रखने के लिए प्रशासन ने निर्देश दिए हैं कि: 61 ट्रांसफर आदेश रद्द, पहले ही हुआ सस्पेंशन मामले के उजागर होने के बाद: जयस ने भी उठाए सवाल जय आदिवासी युवा संगठन (जयस) ने भी इस मामले में शिकायत की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि: पहले भी विवादों में रह चुके अधिकारी रिटायर सहायक आयुक्त संतोष शुक्ला पर पहले भी कार्रवाई हो चुकी है।लोकायुक्त छापे में उनके पास करीब 6.5 करोड़ की संपत्ति सामने आई थी। इसके अलावा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भी एक मामले में उन्हें फटकार लगाई थी। अब आगे क्या? जांच रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में बड़ी कार्रवाई हो सकती है।प्रशासन फिलहाल पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहा है। 👉 ऐसी ही एक्सक्लूसिव और ग्राउंड रिपोर्ट के लिए पढ़ते रहें: www.deshharpal.com
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जबलपुर में बड़ा सड़क हादसा: बस-ट्रैक्टर टक्कर में 50 से ज्यादा घायल, 6 की हालत गंभीर

मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में मंगलवार सुबह एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। कटनी से जबलपुर आ रही तेज रफ्तार यात्री बस गोसलपुर के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हादसे में 50 से अधिक यात्री घायल हो गए, जिनमें 6 की हालत गंभीर बताई जा रही है। कैसे हुआ हादसा? घटना सुबह करीब 10:30 बजे एनएच 30 पर हुई।बताया जा रहा है कि बस ने आगे चल रहे गेहूं से भरे ट्रैक्टर को ओवरटेक करने की कोशिश की, लेकिन पीछे से टक्कर मार दी। स्थानीय लोगों ने बचाई जानें हादसे के तुरंत बाद आसपास के लोगों ने राहत कार्य शुरू किया। घायलों का इलाज जारी घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है: ड्राइवर की लापरवाही आई सामने पुलिस के अनुसार हादसे की मुख्य वजह बस चालक की लापरवाही है।ओवरटेक के दौरान बस ट्रैक्टर से टकरा गई। पुलिस ने: परिजनों को दी गई सूचना घटना की जानकारी घायलों के परिजनों को भी दे दी गई है। प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। 👉 ऐसी ही ताजा और विश्वसनीय खबरों के लिए पढ़ते रहें: www.deshharpal.com
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Bittu Tabahi

Bittu Tabahi ने बदली सोच, अकेले शुरू किया नदी सफाई अभियान; नगरपालिका भी हुई प्रभावित

नदी में गंदगी देखकर ज्यादातर लोग शिकायत करते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के एक युवक ने शिकायत करने के बजाय खुद कुछ करने की ठानी। स्थानीय स्तर पर ‘बिट्टू तबाही’ (Bittu Tabahi) के नाम से पहचाने जाने वाले इस युवक ने अकेले ही नदी की सफाई का जिम्मा उठा लिया। उनका यह जज्बा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बिट्टू ने नदी में जमा कचरे और गंदगी को देखकर सफाई अभियान शुरू किया। शुरुआत किसी बड़े इंतजाम या टीम के साथ नहीं हुई। उन्होंने अपने स्तर पर सफाई करना शुरू किया और लगातार इस काम में जुटे रहे। नदी को साफ रखने का लिया संकल्प बिट्टू का मानना है कि नदी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि आसपास के लोगों और पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने नदी में जमा कचरे को हटाने की पहल की। उनका यह प्रयास धीरे-धीरे स्थानीय लोगों का ध्यान खींचने लगा। लोगों ने देखा कि बिना किसी दबाव या दिखावे के बिट्टू लगातार नदी की सफाई में लगे हुए हैं। नगरपालिका ने भी की पहल की सराहना बिट्टू के लगातार सफाई अभियान की जानकारी नगरपालिका तक पहुंची तो उनके प्रयास की सराहना की गई। एक युवक द्वारा अपने स्तर पर नदी को साफ रखने की कोशिश को अधिकारियों ने सकारात्मक कदम माना। इस पहल ने यह भी दिखाया कि अगर कोई व्यक्ति अपने आसपास के पर्यावरण को लेकर जिम्मेदारी महसूस करे, तो छोटी शुरुआत भी बड़ा संदेश दे सकती है। सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आया अभियान बिट्टू का नदी सफाई अभियान अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। उनके प्रयास को देखकर दूसरे लोगों में भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद है। आज नदियों में बढ़ता कचरा और प्रदूषण बड़ी चुनौती है। ऐसे में बिट्टू की पहल लोगों को यह संदेश देती है कि नदी को साफ रखना सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। ‘बिट्टू तबाही’ ने दी एक अलग मिसाल बिट्टू की कहानी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने बदलाव का इंतजार नहीं किया, बल्कि खुद बदलाव की शुरुआत करने का फैसला लिया। अकेले शुरू किया गया उनका यह सफाई अभियान अब दूसरों के लिए प्रेरणा बनता दिखाई दे रहा है। कई बार किसी बड़े बदलाव की शुरुआत बड़े अभियान से नहीं, बल्कि एक छोटे से कदम से होती है। बिट्टू का यह प्रयास उसी सोच की मिसाल है—अगर इरादा मजबूत हो, तो एक इंसान भी बदलाव की शुरुआत कर सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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World Map में बड़ा बदलाव! UN ने Africa के असली Size को दिखाने का रास्ता साफ किया

दुनिया का नक्शा (World Map) देखते हुए शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इसमें दिखाई देने वाले देशों और महाद्वीपों का आकार असलियत से अलग भी हो सकता है। लेकिन अब इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र में एक अहम पहल हुई है। UN महासभा ने ऐसे World Map को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें धरती के अलग-अलग हिस्सों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाने की कोशिश की गई है। इस बदलाव के बाद नक्शे पर Africa पहले से काफी बड़ा दिखाई देगा, जबकि Europe और North America, खासकर US का आकार पुराने नक्शे की तुलना में छोटा नजर आ सकता है। प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला, लेकिन अमेरिका ने इसका विरोध किया। पुराने World Map में आखिर समस्या क्या है? दुनिया के स्कूलों और कई नक्शों में लंबे समय से Mercator Projection का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे 16वीं सदी में Gerardus Mercator ने तैयार किया था। उस समय इसका सबसे बड़ा फायदा समुद्री यात्राओं और Navigation में था। लेकिन Mercator Projection की एक खासियत ही इसकी सबसे बड़ी कमी भी बन गई। इसमें जैसे-जैसे कोई क्षेत्र Equator से दूर जाता है, उसका आकार नक्शे पर ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि Greenland जैसे इलाके नक्शे पर अपनी वास्तविकता से बहुत बड़े नजर आते हैं। दूसरी तरफ Africa, जो दुनिया के सबसे बड़े महाद्वीपों में से एक है, अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देता है। मसलन, सामान्य Mercator Map में Greenland और Africa का आकार देखकर किसी को लग सकता है कि दोनों लगभग बराबर हैं। असल में Africa का क्षेत्रफल Greenland से करीब 14 गुना ज्यादा है। Equal Earth Projection क्यों चर्चा में है? UN के प्रस्ताव में Equal Earth Projection जैसे नक्शों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इस Projection की खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग महाद्वीपों के क्षेत्रफल को ज्यादा सही अनुपात में दिखाया जाता है। यानी नक्शे को देखकर Africa का वास्तविक विशाल आकार ज्यादा साफ समझ में आता है। Europe और North America भी Mercator Map की तुलना में छोटे दिखाई देते हैं। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है—न तो Africa बड़ा हुआ है और न ही Europe या America छोटा। बदलाव सिर्फ उस तरीके में है, जिससे उन्हें नक्शे पर दिखाया जाता है। America ने UN के प्रस्ताव का विरोध क्यों किया? इस प्रस्ताव पर अमेरिका का रुख बाकी देशों से अलग रहा। मतदान के दौरान अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया। अमेरिकी पक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया कि संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक स्तर की बड़ी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। वहीं प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि नक्शा सिर्फ रास्ता या देश की लोकेशन बताने वाला साधन नहीं है। यह लोगों के मन में दुनिया की एक तस्वीर भी बनाता है। अफ्रीकी देशों की तरफ से लंबे समय से यह बात उठती रही है कि पुराने नक्शों में Africa का वास्तविक आकार सही तरीके से सामने नहीं आता। इसी सोच के साथ “Correct the Map” अभियान को आगे बढ़ाया गया। UN के फैसले से क्या सभी Maps बदल जाएंगे? यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब अचानक हर जगह नया नक्शा दिखाई देने लगेगा। UN महासभा का यह फैसला कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। यानी Google Maps, स्कूल की किताबों, सरकारी दस्तावेजों या दूसरे Digital Platforms को तुरंत अपना नक्शा बदलना जरूरी नहीं है। इसका मकसद देशों, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया और दूसरे संगठनों को ऐसे Map Projections अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो दुनिया के क्षेत्रफल को ज्यादा सही तरीके से दिखाते हों। इसके बावजूद Mercator Projection पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है। Navigation और समुद्री यात्राओं जैसी जरूरतों में इसका इस्तेमाल आज भी उपयोगी माना जाता है। India पर क्या असर पड़ेगा? भारत को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस नए World Map से देश का आकार या सीमा बदल जाएगी? इसका जवाब है—नहीं। भारत की जमीन, क्षेत्रफल और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इस प्रस्ताव का कोई असर नहीं पड़ेगा। सिर्फ नक्शे पर भारत और बाकी देशों को दिखाने का अनुपात बदल सकता है। अगर Equal Earth या इसी तरह की Projection का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ता है तो आने वाले समय में School Geography Books, Educational Charts, News Graphics और Digital Maps में दुनिया की तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे सकती है। भारत के लिए इसका असर मुख्य रूप से शिक्षा और Geography की समझ के स्तर पर होगा। बच्चों और आम लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि नक्शे पर दिखाई देने वाला आकार हमेशा किसी देश या महाद्वीप के वास्तविक क्षेत्रफल के बराबर नहीं होता। Africa के लिए इसे बड़ी उपलब्धि क्यों माना जा रहा है? इस पूरे विवाद में Africa सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में है। समर्थकों का कहना है कि सदियों से इस्तेमाल हो रहे नक्शों ने अनजाने में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की एक असंतुलित तस्वीर बना दी है। Africa दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है और इसके बावजूद Mercator Map में इसका आकार उसकी वास्तविक विशालता के मुकाबले कम नजर आता है। यही वजह है कि African countries और African Union की ओर से इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। उनके लिए यह केवल Map Projection का मामला नहीं, बल्कि दुनिया के सामने Africa की वास्तविक तस्वीर रखने का भी सवाल है। क्या दुनिया सच में बदल गई? नहीं। दुनिया का भूगोल बिल्कुल नहीं बदला है। न कोई नया देश बना है, न किसी देश की सीमा बदली है और न ही Africa का क्षेत्रफल अचानक बढ़ गया है। बदलाव सिर्फ इतना है कि दुनिया को कागज या स्क्रीन पर किस तरह दिखाया जाए, इस पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा सामने आई है। एक तरह से देखें तो यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि नक्शा हमेशा पूरी तरह निष्पक्ष तस्वीर नहीं होता। उसे बनाने का तरीका तय करता है कि हमें दुनिया का कौन-सा हिस्सा कितना बड़ा या छोटा दिखाई देगा। आने वाले वर्षों में अगर Equal Earth जैसी projections को ज्यादा अपनाया जाता है, तो संभव है कि नई पीढ़ी के लिए World Map की तस्वीर वही न हो,...
Swatantra Bhardwaj

Swatantra Bhardwaj Detained: CJP Protest के बाद स्वतंत्र भारद्वाज हिरासत में

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP Protest के दौरान एक छात्रा के पिता के साथ कथित मारपीट का मामला अब फिर चर्चा में है। मामले में आरोपी बताए जा रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज (Swatantra Bhardwaj) को दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थकों के प्रदर्शन और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग के कुछ घंटे बाद हुई। Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर CJP के प्रतिनिधि और समर्थक शुक्रवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से मामले में जल्द कार्रवाई करने और आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ राजनीतिक नेता भी वहां पहुंचे। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बातचीत हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया और इसके बाद भारद्वाज को ट्रेस करने के लिए टीमें सक्रिय की गईं। क्या है पूरा मामला? यह विवाद जंतर-मंतर पर CJP के एक प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी। इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार के नाम FIR में शामिल किए गए थे। मामला उस समय और गरमा गया, जब स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े एक Podcast Video की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वीडियो में भारद्वाज ने घटना को लेकर आपत्तिजनक दावे किए थे। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई। Viral Video ने बढ़ाया विवाद वायरल वीडियो सामने आने के बाद CJP ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। संगठन का कहना था कि वीडियो में कथित तौर पर घटना को लेकर किए गए दावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वहीं दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही थी और मेडिकल रिपोर्ट में चोट को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए कुछ दावों की पुष्टि नहीं हुई थी। Bulandshahr में पुलिस ने पकड़ा पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की टीमों ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में ट्रेस किया। रिपोर्टों में बताया गया कि पुलिस की कार्रवाई से पहले वह वहां से निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थक स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इससे मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर चल रहा विवाद भी फिलहाल एक नए चरण में पहुंच गया है। FIR में SC/ST Act की धाराएं जोड़ने की जानकारी प्रदर्शन के बाद पुलिस की ओर से मामले में SC/ST Act से संबंधित धाराएं जोड़ने की बात सामने आई। पीड़ित की दोबारा मेडिकल जांच कराए जाने की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई है। हालांकि, मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच और आगे की पुलिस कार्रवाई पर निर्भर करेगी। आरोपों की पुष्टि अदालत की प्रक्रिया में ही होगी। पुलिस के सामने अब आगे की जांच बड़ी चुनौती स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने के बाद अब पुलिस के सामने वायरल वीडियो, FIR में दर्ज आरोपों, मेडिकल रिपोर्ट और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच अहम होगी। फिलहाल इस मामले ने CJP Protest, Delhi Police और Social Media Influencer को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस की ओर से क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Saharanpur

UP Bulldozer Action: Saharanpur कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर चला बुलडोजर, मायावती-इकरा हसन ने उठाए सवाल

Saharanpur उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने शनिवार को मस्जिद के खिलाफ Bulldozer Action शुरू कर दिया। कार्रवाई की खबर फैलते ही इलाके में हलचल बढ़ गई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई। किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन का एक्शन कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर जमीन के स्वामित्व और निर्माण की वैधता पर काफी समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन का दावा है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है और निर्माण को अवैध माना गया है। मामला पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा। जुलाई में अदालत ने मस्जिद को हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही संबंधित पक्ष पर करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति लगाए जाने की बात भी सामने आई थी। इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी गई थी। 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोका मस्जिद पर कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इकरा हसन और पुलिस अधिकारियों के बीच इस दौरान तीखी बहस भी हुई। इसका वीडियो सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। बाद में उनके आवास के बाहर पुलिस बल तैनात किए जाने की भी खबर सामने आई। इकरा हसन ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोका जा रहा है। उनका कहना था कि वह मौके पर जाकर हालात देखना चाहती थीं। मायावती ने सरकार से कार्रवाई रोकने को कहा सहारनपुर मस्जिद विवाद पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार से कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की और मामले को संवेदनशील बताते हुए सावधानी से कदम उठाने की बात कही। मायावती ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह का तनाव बढ़ने से रोकना जरूरी है। उन्होंने लोगों से भी शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। इमरान मसूद बोले- हाईकोर्ट जाएंगे सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया है। उनका कहना है कि मस्जिद की जमीन और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर उनका पक्ष अलग है। जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद मसूद ने मामले को हाईकोर्ट ले जाने की बात कही है। उनका कहना है कि आगे की कानूनी लड़ाई अदालत में लड़ी जाएगी और उपलब्ध दस्तावेजों को वहां रखा जाएगा। प्रशासन और विपक्ष के दावे अलग-अलग पूरे विवाद में प्रशासन और मस्जिद पक्ष के दावे अलग हैं। प्रशासन जहां निर्माण को सरकारी जमीन पर हुआ अवैध निर्माण बता रहा है, वहीं मस्जिद से जुड़े लोग और कुछ विपक्षी नेता इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं। यही वजह है कि मामला सिर्फ बुलडोजर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। अब इसकी गूंज राजनीतिक मंच से लेकर अदालत तक सुनाई दे रही है। आगे क्या होगा? सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर हुई कार्रवाई के बाद अब सबकी नजर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर है। इमरान मसूद की ओर से हाईकोर्ट जाने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में अदालत में इस मामले को लेकर क्या रुख सामने आता है, यह महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई के बाद सहारनपुर में राजनीतिक माहौल गर्म है। एक तरफ अधिकारी कोर्ट के आदेश के पालन की बात कह रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nepal

Nepal Flood: दार्चुला में Landslide का खतरा बढ़ा, Trishuli से भारतीय परिवार का Rescue; हजारों Missing

नेपाल (Nepal) में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बाद हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नदियों का जलस्तर बढ़ने, मलबा आने और पहाड़ी इलाकों में Landslide के खतरे ने राहत और बचाव अभियान को और मुश्किल बना दिया है। सबसे चिंता की बात यह है कि हादसे के कई दिन बाद भी हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि, इसी बीच Trishuli क्षेत्र से दो लोगों को नौ दिन बाद जिंदा निकालना राहत और उम्मीद की बड़ी खबर बनकर सामने आया है। दार्चुला में Landslide का खतरा, निचले इलाकों पर नजर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। दार्चुला समेत संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से निचले इलाकों को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। पहाड़ों से मलबा आने और नदियों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका के बीच लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ से कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है। Trishuli से भारतीय नागरिकों का Rescue इस बीच त्रिशूली इलाके से तीन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की खबर सामने आई है। इनमें एक परिवार शामिल है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, रेस्क्यू किए गए लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और उनके भारत लौटने की प्रक्रिया में मदद की जा रही है। भारत सरकार नेपाल में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए लगातार नेपाली प्रशासन के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को Rescue किया गया है, जबकि 275 भारतीयों के लापता होने की जानकारी दी गई है। भारत ने राहत अभियान के लिए करीब 95 टन राहत सामग्री भी भेजी है। 9 दिन बाद Trishuli Tunnel से जिंदा निकले 2 मजदूर नेपाल में चल रहे Rescue Operation की सबसे बड़ी खबर Trishuli-3A Hydropower Project से आई। यहां सुरंग में फंसे संजय साह और कबीर महारजन को करीब नौ दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। दोनों को सुरंग के अंदर काफी गहराई से निकाला गया। बचाव दल ने पहले अंदर से आवाजें सुनीं और फिर संपर्क स्थापित होने के बाद ऑपरेशन तेज किया। आखिरकार दोनों को बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने उन परिवारों में भी उम्मीद जगाई है जिनके अपने लोग अभी तक लापता हैं। राहत दल अब अन्य संभावित Survivors तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं। 1300 के करीब मौतें, 5 हजार से ज्यादा लोग Missing इस प्राकृतिक आपदा का असर कितना बड़ा है, इसका अंदाजा मृतकों और लापता लोगों की संख्या से लगाया जा सकता है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार 1,294 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी और 5,053 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में बदलाव देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और Hydropower Projects को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और राहत शिविरों में रह रहे हैं। Rescue Operation अभी भी जारी Trishuli Tunnel से दो लोगों को जिंदा निकाले जाने के बाद Rescue Teams का हौसला बढ़ा है। नेपाल सेना, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ लगातार प्रभावित इलाकों में Search Operation चला रहे हैं। Hydropower Projects के आसपास अभी भी बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका है। मलबा, पानी और क्षतिग्रस्त सुरंगें बचाव अभियान में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। इसके बावजूद टीमें लगातार नए रास्ते तलाश रही हैं। भारत ने नेपाल की मदद बढ़ाई नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में भारत ने भी राहत और बचाव अभियान में सहयोग बढ़ाया है। भारतीय विशेषज्ञों और राहत सामग्री को नेपाल भेजा गया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की टीमें Rescue, Medical और अन्य जरूरी सेवाओं में सहायता कर रही हैं। फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और पहाड़ी इलाकों में नए Landslide और Flood के खतरे से निपटना है। Trishuli Tunnel से नौ दिन बाद दो लोगों का जिंदा निकलना इस त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण जरूर लेकर आया है। अब Rescue Teams की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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