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ग्वालियर में नवविवाहिता की संदिग्ध मौत: मरने से 30 मिनट पहले भाई को किया कॉल, बोली- ‘मुझे बचा लो, ये मार डालेंगे’

ग्वालियर के मुरार इलाके में एक नवविवाहिता की संदिग्ध मौत का मामला सामने आया है। सुरैयापुरा निवासी 22 वर्षीय पलक रजक की मौत को लेकर मायके और ससुराल पक्ष के दावे अलग-अलग हैं। ससुराल वाले इसे आत्महत्या बता रहे हैं, जबकि मायके पक्ष ने हत्या का आरोप लगाया है। मौत से पहले भाई को किया था फोन मृतका के भाई प्रिंस ने बताया कि मंगलवार शाम 6:14 बजे पलक का फोन आया था। वह फोन पर बेहद डरी हुई और रो रही थी। प्रिंस के मुताबिक, पलक ने कहा, “भैया, मुझे जल्दी यहां से ले जाओ, नहीं तो ये लोग मुझे मार डालेंगे।” बहन की हालत देखकर वह तुरंत उसके ससुराल के लिए निकल गया। लेकिन जब वह करीब 6:45 बजे वहां पहुंचा, तभी ससुराल वालों का फोन आया कि पलक अस्पताल में भर्ती है। अस्पताल पहुंचा तो स्ट्रेचर पर मिली बहन की लाश प्रिंस जब जिला अस्पताल पहुंचा तो पलक की मौत हो चुकी थी। उसने आरोप लगाया कि बहन के शरीर पर गर्दन से लेकर पैर तक चोट के निशान थे। परिवार का कहना है कि चोटों के निशान मारपीट और संघर्ष की ओर इशारा करते हैं। अप्रैल 2025 में हुई थी शादी पलक की शादी अप्रैल 2025 में अमित रजक से हुई थी, जो एयरफोर्स में आउटसोर्स कर्मचारी बताया जा रहा है। मायके पक्ष का आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद से ही सास और देवर दहेज में कार की मांग को लेकर पलक को प्रताड़ित करने लगे थे। परिजनों का यह भी आरोप है कि शादी में दी गई एफडीआर भी ससुराल वालों ने तुड़वाकर पैसे ले लिए थे। परिजनों ने रखीं तीन बड़ी मांगें मृतका के परिवार ने मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए तीन प्रमुख मांगें रखी हैं— पुलिस कर रही जांच मुरार थाना पुलिस ने फिलहाल मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। शादी को अभी एक साल भी पूरा नहीं हुआ था, इसलिए कार्यकारी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। एएसपी जयराज कुबेर ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी। यदि हत्या के प्रमाण मिलते हैं तो FIR दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी। 👉 मध्यप्रदेश और देश-दुनिया की ताजा खबरों के लिए विजिट करें: www.deshharpal.com
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CBSE 12वीं रिजल्ट जारी: भोपाल रीजन राष्ट्रीय औसत से पीछे, 79.43% छात्र हुए पास

CBSE ने बुधवार को 12वीं बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया। इस बार मध्यप्रदेश से 80 हजार 454 छात्र परीक्षा में शामिल हुए थे। हालांकि, इस साल भोपाल रीजन का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से कमजोर रहा। भोपाल रीजन में कुल 79.43% विद्यार्थी पास हुए, जबकि देशभर का औसत पास प्रतिशत 85.20% दर्ज किया गया। यानी भोपाल रीजन राष्ट्रीय औसत से 5.77% पीछे रहा। बता दें कि भोपाल रीजन में पूरा मध्यप्रदेश शामिल होता है। 90% से ज्यादा अंक लाने वाले छात्रों के लिए खास पहल कई छात्रों ने इस बार 12वीं परीक्षा में 90% से अधिक अंक हासिल किए हैं। ऐसे मेधावी छात्रों के लिए दैनिक भास्कर ने विशेष पहल शुरू की है। छात्रों के फोटो एप पर प्रकाशित किए जा रहे हैं। अगर किसी छात्र के 90% से ज्यादा अंक आए हैं, तो वह इस फॉर्म के जरिए अपनी जानकारी भेज सकता है: CBSE Topper Submission Form इन प्लेटफॉर्म्स पर देख सकते हैं रिजल्ट छात्र अपना रिजल्ट CBSE की आधिकारिक वेबसाइट, डिजिलॉकर और उमंग ऐप पर देख सकते हैं। रिजल्ट देखने के लिए रोल नंबर, स्कूल नंबर, एडमिट कार्ड आईडी और जन्मतिथि की जरूरत होगी। CBSE ने वेबसाइट पर ज्यादा ट्रैफिक को देखते हुए DigiLocker और UMANG ऐप का विकल्प भी उपलब्ध कराया है। 👉 शिक्षा और देश-दुनिया की ताजा खबरों के लिए विजिट करें: www.deshharpal.com
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खंडवा विधायक कंचन तनवे साइकिल से पहुंचीं दादा दरबार, PM मोदी की अपील से ली प्रेरणा

खंडवा में बुधवार सुबह एक अलग और खास तस्वीर देखने को मिली। रोजाना स्कॉर्पियो कार से दादा दरबार पहुंचने वाली भाजपा विधायक कंचन तनवे इस बार साइकिल चलाकर दर्शन करने पहुंचीं। विधायक को साइकिल से आते देख श्रद्धालु और स्थानीय लोग भी हैरान रह गए। कई लोगों ने उनके साथ सेल्फी ली और उनकी इस पहल की जमकर तारीफ की। पीएम मोदी की अपील से प्रेरित हुईं विधायक दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने और ईंधन बचाने की अपील की थी। इसी से प्रेरित होकर विधायक कंचन तनवे ने अपनी दिनचर्या में बदलाव करने का फैसला लिया। बुधवार सुबह वे अपने घर से साइकिल चलाकर दादा दरबार पहुंचीं और दर्शन किए। खास बात यह रही कि उन्होंने अपने पीएसओ को भी साइकिल दिलवाई। पीछे-पीछे बाइक से चले समर्थक दिलचस्प बात यह रही कि विधायक जहां साइकिल से चल रही थीं, वहीं उनके समर्थक बाइक पर पीछे-पीछे चलते नजर आए। इस दौरान रास्ते में लोगों ने उनका स्वागत भी किया। सप्ताह में एक दिन साइकिल चलाने का फैसला विधायक कंचन तनवे ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को सिर्फ संदेश देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि खुद भी उदाहरण पेश करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब वे सप्ताह में एक दिन साइकिल या इलेक्ट्रिक बाइक से ही दादा दरबार जाएंगी। इससे ईंधन की बचत होगी और पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा। फिटनेस के लिए भी जरूरी है साइकिल विधायक ने कहा कि भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों को व्यायाम का समय नहीं मिल पाता। ऐसे में साइकिल चलाना फिट रहने का आसान और प्रभावी तरीका है। 👉 मध्यप्रदेश की ताजा और भरोसेमंद खबरों के लिए विजिट करें: www.deshharpal.com
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भोपाल में गर्भवती महिला की संदिग्ध मौत: रिटायर्ड महिला जज की बहू ने लगाई फांसी, मायके पक्ष ने लगाए प्रताड़ना के आरोप

भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में एक गर्भवती महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। रिटायर्ड महिला जज की बहू ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद मायके पक्ष ने पति और ससुराल वालों पर मानसिक प्रताड़ना और दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। एक साल पहले हुई थी शादी मृतका की पहचान 31 वर्षीय ट्विशा शर्मा के रूप में हुई है। ट्विशा मूल रूप से नोएडा की रहने वाली थी। उसकी शादी करीब एक साल पहले भोपाल निवासी और पेशे से वकील सामर्थ शर्मा से हुई थी। परिवार के मुताबिक, ट्विशा का भाई भारतीय सेना में मेजर है। भाई को फोन कर बताई थी परेशानी मृतका के भाई मेजर हर्षित शर्मा ने बताया कि मंगलवार रात ट्विशा ने उन्हें फोन किया था। फोन पर वह काफी परेशान लग रही थी। उसने बताया कि पिछले 8 दिनों से उसका पति उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था। छोटी-छोटी बातों पर उसका अपमान किया जाता था। भाई के अनुसार, ट्विशा भोपाल छोड़कर वापस मायके आना चाहती थी। उसने नोएडा आने के लिए रिजर्वेशन भी करा लिया था, लेकिन इससे पहले उसकी मौत की खबर आ गई। परिजनों का आरोप है कि फोन पर बात होने के कुछ समय बाद ट्विशा की सास का कॉल आया। उन्होंने बताया कि ट्विशा ने घर में फांसी लगा ली है। इसके बाद परिवार तुरंत भोपाल पहुंचा। नौकरी छोड़ने के बाद बदल गया व्यवहार मेजर हर्षित का आरोप है कि शादी के शुरुआती दिनों में सब सामान्य था, लेकिन नौकरी छोड़ने के बाद ट्विशा के साथ व्यवहार बदल गया। उसे “नाकारा” कहकर ताने दिए जाते थे। परिवार और उसकी परवरिश को लेकर भी अपमानित किया जाता था। परिवार का कहना है कि लगातार मानसिक दबाव और अपमान की वजह से ट्विशा डिप्रेशन में चली गई थी। प्रेग्नेंसी को लेकर भी था तनाव परिजनों के मुताबिक, मार्च में ट्विशा की अनप्लांड प्रेग्नेंसी हुई थी। परिवार का दावा है कि वह उस समय बच्चे के लिए तैयार नहीं थी, लेकिन ससुराल पक्ष उस पर बच्चा पैदा करने का दबाव बना रहा था। भाई का आरोप है कि पति इस बात को लेकर भी ताने देता था और यहां तक कहता था कि “बच्चा मेरा नहीं है, इसलिए तुम उसे गिराना चाहती हो।” परिवार का कहना है कि ऐसी बातें ट्विशा को अंदर से तोड़ रही थीं। पुलिस को नहीं मिला सुसाइड नोट पुलिस को घर से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। घटना के बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के बाद मौत के सही कारण स्पष्ट हो सकेंगे। पुलिस कर रही जांच कटारा हिल्स थाना पुलिस का कहना है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है। परिवार के बयान, घटनास्थल से मिले साक्ष्य और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। 👉 भोपाल सहित देश-दुनिया की ताजा खबरों के लिए विजिट करें: www.deshharpal.com
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रतलाम में दर्दनाक हादसा: ओवरलोड ऑटो पलटा, 15 साल की किशोरी की मौत; 6 लोग घायल

रतलाम जिले के सैलाना क्षेत्र में बुधवार सुबह एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। सकरावदा गांव में मजदूरों से भरा एक ओवरलोड ऑटो पलट गया। हादसे में 15 साल की एक किशोरी की मौत हो गई, जबकि 6 लोग घायल हो गए। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है। 25 से 30 मजदूरों को लेकर जा रहा था ऑटो जानकारी के मुताबिक ऑटो रिक्शा (MP 43 K 2267) ग्राम फूफीरुंडी से मजदूरों को लेकर सैलाना जा रहा था। ऑटो में क्षमता से कहीं ज्यादा, करीब 25 से 30 मजदूर सवार थे। सुबह करीब 7:30 बजे ऑटो सकरावदा के इमली चौक के पास एक मोड़ पर पहुंचा। तेज रफ्तार और ओवरलोड होने के कारण चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख पाया और ऑटो पलट गया। ऑटो के नीचे दबने से किशोरी की मौत हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। आसपास के ग्रामीण तुरंत मदद के लिए पहुंचे और ऑटो में फंसे लोगों को बाहर निकाला। इस हादसे में फूफीरुंडी निवासी 15 वर्षीय कविता खराड़ी की ऑटो के नीचे दबने से मौके पर ही मौत हो गई। सूचना मिलने पर एंबुलेंस मौके पर पहुंची और घायलों को अस्पताल भेजा गया। 3 घायलों की हालत गंभीर दुर्घटना में कुल 6 लोग घायल हुए हैं। इनमें से कुछ को मामूली चोटें आई हैं, जबकि गंभीर रूप से घायल कालीबाई मईड़ा (40) और रेखा खराड़ी (35) का इलाज सैलाना स्वास्थ्य केंद्र में चल रहा है। कुछ घायलों को निजी अस्पताल में प्राथमिक उपचार दिया गया। दो दिन पहले ही कटा था 15 हजार का चालान सैलाना थाना प्रभारी पिंकी आकाश ने बताया कि इसी ऑटो पर दो दिन पहले ओवरलोडिंग को लेकर 15 हजार रुपए का चालान किया गया था। इसके बावजूद चालक नियमों की अनदेखी कर क्षमता से ज्यादा लोगों को बैठाकर वाहन चला रहा था। पुलिस ने ऑटो चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। क्षेत्र में लगातार हो रहे ओवरलोड हादसे क्षेत्र में ओवरलोड वाहनों के कारण हादसे लगातार बढ़ रहे हैं। इससे पहले 2 मई को भी करीब 50 मजदूरों से भरी बोलेरो खाई में गिर गई थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन हादसों के बाद कुछ दिन कार्रवाई करता है, लेकिन बाद में फिर से ओवरलोड वाहनों की आवाजाही शुरू हो जाती है। 👉 मध्यप्रदेश और देश-दुनिया की ताजा खबरों के लिए विजिट करें: www.deshharpal.com
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भोपाल में युवक से मारपीट के बाद तनाव: ताजुल मस्जिद के बाहर देर रात हंगामा, पुलिस ने संभाला मोर्चा

Bhopal में युवक से मारपीट के बाद तनाव: ताजुल मस्जिद के बाहर देर रात हंगामा, पुलिस ने संभाला मोर्चा

मध्य प्रदेश की राजधानी Bhopal में एक मुस्लिम युवक के साथ मारपीट की घटना के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। देर रात करीब 1 बजे बड़ी संख्या में लोग ताजुल मस्जिद के बाहर इकट्ठा हो गए। देखते ही देखते भीड़ ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया और कुछ लोगों ने पथराव भी किया। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस को मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभालना पड़ा। जानकारी के मुताबिक, युवक के साथ हुई मारपीट से स्थानीय लोगों में नाराजगी थी। जैसे-जैसे घटना की खबर फैली, लोगों की भीड़ बढ़ती चली गई। लोगों ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। इस दौरान माहौल इतना गर्म हो गया कि पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। घटना के बाद पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हालात अब नियंत्रण में हैं और मामले की जांच की जा रही है। साथ ही, लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि छोटी घटनाएं भी किस तरह बड़े तनाव का रूप ले लेती हैं। स्थानीय लोग चाहते हैं कि दोषियों पर जल्द और सख्त कार्रवाई हो ताकि शहर का माहौल खराब न हो और लोगों का भरोसा बना रहे। फिलहाल पुलिस आसपास लगे CCTV कैमरों की जांच कर रही है और घटना में शामिल लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। प्रशासन ने साफ कहा है कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
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PM Modi Appeal

PM मोदी की अपील के बाद मंत्री विश्वास सारंग का बड़ा फैसला, अब नहीं चलेगा गाड़ियों का लंबा काफिला

देश में बढ़ती वैश्विक आर्थिक चुनौतियों, तेल संकट और ईंधन बचत को लेकर प्रधानमंत्री Narendra Modi की अपील का असर अब राज्यों में भी दिखाई देने लगा है। मध्यप्रदेश सरकार में सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री Vishvas Kailash Sarang ने बड़ा फैसला लेते हुए अपने सरकारी दौरे और कार्यक्रमों में गाड़ियों के लंबे काफिले को बंद करने का ऐलान किया है। भोपाल में मीडिया से बातचीत के दौरान मंत्री सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का आवाहन केवल पेट्रोल-डीजल बचाने के लिए नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए है। उन्होंने कहा कि यदि हम देश के लिए कुछ करना चाहते हैं, तो प्रधानमंत्री की सलाह को अपनाना हम सभी का दायित्व है। मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि अब उनके साथ जरूरत से ज्यादा वाहन नहीं चलेंगे और वे खुद भी ईंधन की बचत को प्राथमिकता देंगे। उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों से भी अपील की कि वे अनावश्यक रूप से पेट्रोल और डीजल का उपयोग कम करें। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री मोदी का “नया राष्ट्र निर्माण अभियान” है, जो आने वाली पीढ़ियों को विकसित और स्वावलंबी हिंदुस्तान देने की दिशा में उठाया गया कदम है। सारंग ने कोरोना काल का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने दुनिया के सबसे बड़े महामारी संकट से मजबूती के साथ लड़ाई लड़ी और जीत हासिल की। अब देश आर्थिक चुनौतियों और वैश्विक संकटों के बीच आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राजनीतिक गलियारों में मंत्री सारंग के इस फैसले को प्रतीकात्मक लेकिन बड़ा संदेश माना जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में मध्यप्रदेश के अन्य मंत्री और जनप्रतिनिधि भी इस तरह के कदम उठा सकते हैं।
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Bhopal

Bhopal Railway Update: पुणे जाने वाली कई ट्रेनें रद्द, बदले गए कई ट्रेनों के Route

Bhopal से पुणे, मुंबई और दक्षिण भारत की ओर सफर करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। मध्य रेलवे के दौंड-मनमाड रेलखंड पर चल रहे मेगा ब्लॉक की वजह से भोपाल मंडल से गुजरने वाली कई ट्रेनों का संचालन प्रभावित हो गया है। रेलवे ने 8 ट्रेनों को पूरी तरह रद्द कर दिया है, जबकि कई एक्सप्रेस ट्रेनों के रूट बदल दिए गए हैं। यह मेगा ब्लॉक 16 से 18 मई 2026 तक रहेगा, लेकिन इसका असर करीब 5 दिनों तक देखने को मिलेगा। गर्मी की छुट्टियों के बीच अचानक ट्रेनों के रद्द होने से हजारों यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। कई लोगों को अब अपनी यात्रा की नई प्लानिंग करनी पड़ रही है। क्यों लगाया गया Mega Block? रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, दौंड-मनमाड सेक्शन में डबल लाइन, सिग्नल अपग्रेड और नॉन-इंटरलॉकिंग का काम किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद ट्रेनों की स्पीड बढ़ेगी और संचालन पहले से ज्यादा सुरक्षित होगा। हालांकि, फिलहाल इस काम की वजह से कई ट्रेनों को कैंसिल और डायवर्ट करना पड़ा है। ये 8 ट्रेनें पूरी तरह रहेंगी Cancel रेलवे ने अलग-अलग तारीखों में चलने वाली कई स्पेशल ट्रेनों को निरस्त किया है। इनमें पुणे, गोरखपुर, दानापुर, झांसी और जबलपुर रूट की ट्रेनें शामिल हैं। कई एक्सप्रेस ट्रेनों का बदला Route मेगा ब्लॉक के चलते कई लंबी दूरी की ट्रेनों को दूसरे रास्ते से चलाया जाएगा। इनमें दिल्ली, बेंगलुरु, बनारस और जम्मू रूट की ट्रेनें शामिल हैं। डायवर्ट होकर चलने वाली प्रमुख ट्रेनें: इन ट्रेनों को मनमाड, नाशिक, कल्याण और पनवेल रूट से निकाला जाएगा। ऐसे में कई ट्रेनों के लेट होने की संभावना भी जताई गई है। करीब 50 हजार यात्री होंगे प्रभावित रेलवे के मुताबिक, इस मेगा ब्लॉक से लगभग 50 हजार यात्रियों पर असर पड़ सकता है। गर्मी की छुट्टियों की वजह से पहले ही ट्रेनों में लंबी वेटिंग चल रही है। अब ट्रेनें रद्द होने और रूट बदलने से यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। भोपाल रेलवे स्टेशन पर भी कई यात्री जानकारी लेने पहुंच रहे हैं। कुछ यात्रियों का कहना है कि अचानक मिली इस सूचना से उनकी पूरी ट्रिप प्रभावित हो गई है। यात्रा से पहले जरूर करें ये काम रेलवे का कहना है कि यात्रियों की सुविधा के लिए लगातार अपडेट जारी किए जा रहे हैं। ऐसे में सफर से पहले सही जानकारी लेना बेहद जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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खंडवा में नगर परिषद पर भ्रष्टाचार के आरोप, कांग्रेस पार्षद ने शुरू किया आमरण अनशन

मध्यप्रदेश के खंडवा जिले की नगर परिषद छनेरा-नया हरसूद में कथित भ्रष्टाचार और आर्थिक अनियमितताओं को लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया है। कांग्रेस समर्थित वार्ड-10 के पार्षद Arjun Singh Rajput ने अपनी ही पार्टी के नगर परिषद अध्यक्ष Mukesh Sundarlal Verma के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्षद अर्जुन सिंह राजपूत ने मंगलवार से एसडीएम कार्यालय हरसूद के सामने आमरण अनशन शुरू कर दिया है। डेढ़ साल में 24 से ज्यादा शिकायतें पार्षद का आरोप है कि नगर परिषद में निर्माण कार्य, खरीदी, भुगतान और शासकीय राशि के उपयोग में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने बताया कि पिछले डेढ़ साल में इस मामले को लेकर वे सीएमओ छनेरा, एसडीएम हरसूद, कलेक्टर खंडवा, नगरीय प्रशासन विभाग इंदौर, मंत्री Vijay Shah, प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन और मुख्यमंत्री Mohan Yadav तक 24 से ज्यादा शिकायतें कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। फर्जी बिल और घटिया सामग्री के आरोप शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सौर ऊर्जा पोल की खरीदी बाजार भाव से कई गुना अधिक कीमत पर की गई। साथ ही पहले से लगे अच्छे बिजली पोल हटाकर घटिया पोल लगाए गए। इसके अलावा वेल्डिंग, रिपेयरिंग, पानी सप्लाई मोटरों की मरम्मत, मुरूम-चूरी सप्लाई और जेसीबी मशीन के उपयोग के नाम पर फर्जी बिल लगाकर लाखों रुपए निकालने का आरोप भी लगाया गया है। पार्षद का कहना है कि मच्छरनाशक छिड़काव और धुआं करने के नाम पर भी भुगतान हुआ, जबकि जमीन पर ऐसा कोई काम नहीं हुआ। निजी कॉलोनियों में सरकारी पैसे से विकास कार्य कराने का आरोप अर्जुन सिंह राजपूत ने आरोप लगाया कि नगर परिषद अध्यक्ष ने अपनी और परिवार से जुड़ी निजी कॉलोनियों में परिषद निधि से सड़क, बिजली और पानी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराईं। जबकि नियमानुसार यह खर्च कॉलोनाइजर को खुद उठाना चाहिए था। दबाव बनाने की कोशिश का आरोप पार्षद ने कहा कि जब उन्होंने भ्रष्टाचार के मुद्दे उठाए तो परिषद बैठकों में उन्हें पद से हटाने का प्रस्ताव लाकर दबाव बनाने की कोशिश की गई। उनका आरोप है कि अध्यक्ष को प्रशासनिक संरक्षण मिलने के कारण शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हो रही। “अनशन अंतिम लोकतांत्रिक विकल्प” अर्जुन सिंह राजपूत ने कहा कि जनता के हित में आवाज उठाना उनका कर्तव्य है। जब सभी स्तरों पर शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई, तब आमरण अनशन ही अंतिम लोकतांत्रिक विकल्प बचा। उन्होंने चेतावनी दी कि अनशन के दौरान किसी भी प्रकार की अनहोनी होती है तो इसकी जिम्मेदारी नगर परिषद अध्यक्ष और प्रशासन की होगी। 👉 ऐसी ही ताजा और भरोसेमंद खबरों के लिए जुड़े रहें www.deshharpal.com Portal के साथ।
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उज्जैन में सामाजिक बहिष्कार से परेशान युवक ने दी धर्म परिवर्तन की चेतावनी

मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले की बड़नगर तहसील के ग्राम बंगरेड में यादव (अहीर) समाज के एक युवक ने समाज के पंचों पर सामाजिक बहिष्कार, अपमान और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित नरेंद्र यादव मंगलवार को जिला मुख्यालय पहुंचे और जनसुनवाई में कलेक्टर को शिकायत सौंपकर न्याय की मांग की। न्याय नहीं मिला तो धर्म परिवर्तन की चेतावनी नरेंद्र यादव ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला और समाज में सम्मानजनक स्थान वापस नहीं मिला, तो वे परिवार सहित धर्म परिवर्तन करने को मजबूर होंगे। व्हाट्सऐप ग्रुप से शुरू हुआ विवाद पीड़ित के अनुसार, विवाद की शुरुआत डॉक्टर विष्णु प्रसाद यादव के यहां आयोजित एक शादी समारोह से हुई। समारोह में समाज की ओर से ₹5100 की जगह ₹11 हजार चंदा और धर्मशाला किराए को लेकर समाज के व्हाट्सऐप ग्रुप में चर्चा चल रही थी। इसी दौरान नरेंद्र यादव ने ग्रुप में टिप्पणी करते हुए कहा था कि यदि किसी से गलती हुई है तो उसे स्वीकार कर राशि वापस कर देनी चाहिए। आरोप है कि इस टिप्पणी के बाद विवाद बढ़ गया। फोन पर गाली-गलौज और धमकी के आरोप नरेंद्र यादव का आरोप है कि समाज के एक पंच के भाई ईश्वरलाल यादव ने उन्हें व्हाट्सऐप कॉल कर अपशब्द कहे और समाज छोड़ने तक की बात कही। उन्होंने बताया कि इस घटना की जानकारी उन्होंने समाज के ग्रुप में भी दी, लेकिन किसी ने विरोध नहीं किया। इसके बाद अन्य पदाधिकारियों द्वारा भी फोन पर गाली-गलौज और धमकी दिए जाने के आरोप लगाए गए हैं। परिवार को समाज से किया निष्कासित पीड़ित का कहना है कि बिना उनका पक्ष सुने समाज के व्हाट्सऐप ग्रुप में उनके परिवार को समाज से निष्कासित करने का संदेश जारी कर दिया गया। साथ ही गांव के सामाजिक कार्यक्रमों और गतिविधियों में शामिल होने पर भी रोक लगा दी गई। एसपी कार्यालय में भी की थी शिकायत नरेंद्र यादव ने बताया कि उन्होंने पहले एसपी कार्यालय में भी शिकायत की थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बाद में समाज की बैठक हुई, लेकिन उसमें उन्हें बुलाया तक नहीं गया। उनका आरोप है कि समाज की धर्मशाला के किराए और चंदे में कथित वित्तीय अनियमितताओं का विरोध करने के कारण कुछ प्रभावशाली लोग उनसे नाराज हो गए थे। प्रशासन ने जांच का दिया भरोसा लगातार मानसिक प्रताड़ना और सामाजिक बहिष्कार से परेशान नरेंद्र यादव ने प्रशासन से दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल जिला प्रशासन ने शिकायत की जांच कर उचित वैधानिक कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। 👉 ऐसी ही ताजा और भरोसेमंद खबरों के लिए जुड़े रहें www.deshharpal.com Portal के साथ।
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Bittu Tabahi

Bittu Tabahi ने बदली सोच, अकेले शुरू किया नदी सफाई अभियान; नगरपालिका भी हुई प्रभावित

नदी में गंदगी देखकर ज्यादातर लोग शिकायत करते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के एक युवक ने शिकायत करने के बजाय खुद कुछ करने की ठानी। स्थानीय स्तर पर ‘बिट्टू तबाही’ (Bittu Tabahi) के नाम से पहचाने जाने वाले इस युवक ने अकेले ही नदी की सफाई का जिम्मा उठा लिया। उनका यह जज्बा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बिट्टू ने नदी में जमा कचरे और गंदगी को देखकर सफाई अभियान शुरू किया। शुरुआत किसी बड़े इंतजाम या टीम के साथ नहीं हुई। उन्होंने अपने स्तर पर सफाई करना शुरू किया और लगातार इस काम में जुटे रहे। नदी को साफ रखने का लिया संकल्प बिट्टू का मानना है कि नदी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि आसपास के लोगों और पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने नदी में जमा कचरे को हटाने की पहल की। उनका यह प्रयास धीरे-धीरे स्थानीय लोगों का ध्यान खींचने लगा। लोगों ने देखा कि बिना किसी दबाव या दिखावे के बिट्टू लगातार नदी की सफाई में लगे हुए हैं। नगरपालिका ने भी की पहल की सराहना बिट्टू के लगातार सफाई अभियान की जानकारी नगरपालिका तक पहुंची तो उनके प्रयास की सराहना की गई। एक युवक द्वारा अपने स्तर पर नदी को साफ रखने की कोशिश को अधिकारियों ने सकारात्मक कदम माना। इस पहल ने यह भी दिखाया कि अगर कोई व्यक्ति अपने आसपास के पर्यावरण को लेकर जिम्मेदारी महसूस करे, तो छोटी शुरुआत भी बड़ा संदेश दे सकती है। सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आया अभियान बिट्टू का नदी सफाई अभियान अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। उनके प्रयास को देखकर दूसरे लोगों में भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद है। आज नदियों में बढ़ता कचरा और प्रदूषण बड़ी चुनौती है। ऐसे में बिट्टू की पहल लोगों को यह संदेश देती है कि नदी को साफ रखना सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। ‘बिट्टू तबाही’ ने दी एक अलग मिसाल बिट्टू की कहानी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने बदलाव का इंतजार नहीं किया, बल्कि खुद बदलाव की शुरुआत करने का फैसला लिया। अकेले शुरू किया गया उनका यह सफाई अभियान अब दूसरों के लिए प्रेरणा बनता दिखाई दे रहा है। कई बार किसी बड़े बदलाव की शुरुआत बड़े अभियान से नहीं, बल्कि एक छोटे से कदम से होती है। बिट्टू का यह प्रयास उसी सोच की मिसाल है—अगर इरादा मजबूत हो, तो एक इंसान भी बदलाव की शुरुआत कर सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
UN

World Map में बड़ा बदलाव! UN ने Africa के असली Size को दिखाने का रास्ता साफ किया

दुनिया का नक्शा (World Map) देखते हुए शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इसमें दिखाई देने वाले देशों और महाद्वीपों का आकार असलियत से अलग भी हो सकता है। लेकिन अब इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र में एक अहम पहल हुई है। UN महासभा ने ऐसे World Map को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें धरती के अलग-अलग हिस्सों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाने की कोशिश की गई है। इस बदलाव के बाद नक्शे पर Africa पहले से काफी बड़ा दिखाई देगा, जबकि Europe और North America, खासकर US का आकार पुराने नक्शे की तुलना में छोटा नजर आ सकता है। प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला, लेकिन अमेरिका ने इसका विरोध किया। पुराने World Map में आखिर समस्या क्या है? दुनिया के स्कूलों और कई नक्शों में लंबे समय से Mercator Projection का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे 16वीं सदी में Gerardus Mercator ने तैयार किया था। उस समय इसका सबसे बड़ा फायदा समुद्री यात्राओं और Navigation में था। लेकिन Mercator Projection की एक खासियत ही इसकी सबसे बड़ी कमी भी बन गई। इसमें जैसे-जैसे कोई क्षेत्र Equator से दूर जाता है, उसका आकार नक्शे पर ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि Greenland जैसे इलाके नक्शे पर अपनी वास्तविकता से बहुत बड़े नजर आते हैं। दूसरी तरफ Africa, जो दुनिया के सबसे बड़े महाद्वीपों में से एक है, अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देता है। मसलन, सामान्य Mercator Map में Greenland और Africa का आकार देखकर किसी को लग सकता है कि दोनों लगभग बराबर हैं। असल में Africa का क्षेत्रफल Greenland से करीब 14 गुना ज्यादा है। Equal Earth Projection क्यों चर्चा में है? UN के प्रस्ताव में Equal Earth Projection जैसे नक्शों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इस Projection की खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग महाद्वीपों के क्षेत्रफल को ज्यादा सही अनुपात में दिखाया जाता है। यानी नक्शे को देखकर Africa का वास्तविक विशाल आकार ज्यादा साफ समझ में आता है। Europe और North America भी Mercator Map की तुलना में छोटे दिखाई देते हैं। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है—न तो Africa बड़ा हुआ है और न ही Europe या America छोटा। बदलाव सिर्फ उस तरीके में है, जिससे उन्हें नक्शे पर दिखाया जाता है। America ने UN के प्रस्ताव का विरोध क्यों किया? इस प्रस्ताव पर अमेरिका का रुख बाकी देशों से अलग रहा। मतदान के दौरान अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया। अमेरिकी पक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया कि संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक स्तर की बड़ी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। वहीं प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि नक्शा सिर्फ रास्ता या देश की लोकेशन बताने वाला साधन नहीं है। यह लोगों के मन में दुनिया की एक तस्वीर भी बनाता है। अफ्रीकी देशों की तरफ से लंबे समय से यह बात उठती रही है कि पुराने नक्शों में Africa का वास्तविक आकार सही तरीके से सामने नहीं आता। इसी सोच के साथ “Correct the Map” अभियान को आगे बढ़ाया गया। UN के फैसले से क्या सभी Maps बदल जाएंगे? यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब अचानक हर जगह नया नक्शा दिखाई देने लगेगा। UN महासभा का यह फैसला कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। यानी Google Maps, स्कूल की किताबों, सरकारी दस्तावेजों या दूसरे Digital Platforms को तुरंत अपना नक्शा बदलना जरूरी नहीं है। इसका मकसद देशों, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया और दूसरे संगठनों को ऐसे Map Projections अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो दुनिया के क्षेत्रफल को ज्यादा सही तरीके से दिखाते हों। इसके बावजूद Mercator Projection पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है। Navigation और समुद्री यात्राओं जैसी जरूरतों में इसका इस्तेमाल आज भी उपयोगी माना जाता है। India पर क्या असर पड़ेगा? भारत को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस नए World Map से देश का आकार या सीमा बदल जाएगी? इसका जवाब है—नहीं। भारत की जमीन, क्षेत्रफल और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इस प्रस्ताव का कोई असर नहीं पड़ेगा। सिर्फ नक्शे पर भारत और बाकी देशों को दिखाने का अनुपात बदल सकता है। अगर Equal Earth या इसी तरह की Projection का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ता है तो आने वाले समय में School Geography Books, Educational Charts, News Graphics और Digital Maps में दुनिया की तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे सकती है। भारत के लिए इसका असर मुख्य रूप से शिक्षा और Geography की समझ के स्तर पर होगा। बच्चों और आम लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि नक्शे पर दिखाई देने वाला आकार हमेशा किसी देश या महाद्वीप के वास्तविक क्षेत्रफल के बराबर नहीं होता। Africa के लिए इसे बड़ी उपलब्धि क्यों माना जा रहा है? इस पूरे विवाद में Africa सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में है। समर्थकों का कहना है कि सदियों से इस्तेमाल हो रहे नक्शों ने अनजाने में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की एक असंतुलित तस्वीर बना दी है। Africa दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है और इसके बावजूद Mercator Map में इसका आकार उसकी वास्तविक विशालता के मुकाबले कम नजर आता है। यही वजह है कि African countries और African Union की ओर से इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। उनके लिए यह केवल Map Projection का मामला नहीं, बल्कि दुनिया के सामने Africa की वास्तविक तस्वीर रखने का भी सवाल है। क्या दुनिया सच में बदल गई? नहीं। दुनिया का भूगोल बिल्कुल नहीं बदला है। न कोई नया देश बना है, न किसी देश की सीमा बदली है और न ही Africa का क्षेत्रफल अचानक बढ़ गया है। बदलाव सिर्फ इतना है कि दुनिया को कागज या स्क्रीन पर किस तरह दिखाया जाए, इस पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा सामने आई है। एक तरह से देखें तो यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि नक्शा हमेशा पूरी तरह निष्पक्ष तस्वीर नहीं होता। उसे बनाने का तरीका तय करता है कि हमें दुनिया का कौन-सा हिस्सा कितना बड़ा या छोटा दिखाई देगा। आने वाले वर्षों में अगर Equal Earth जैसी projections को ज्यादा अपनाया जाता है, तो संभव है कि नई पीढ़ी के लिए World Map की तस्वीर वही न हो,...
Swatantra Bhardwaj

Swatantra Bhardwaj Detained: CJP Protest के बाद स्वतंत्र भारद्वाज हिरासत में

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP Protest के दौरान एक छात्रा के पिता के साथ कथित मारपीट का मामला अब फिर चर्चा में है। मामले में आरोपी बताए जा रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज (Swatantra Bhardwaj) को दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थकों के प्रदर्शन और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग के कुछ घंटे बाद हुई। Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर CJP के प्रतिनिधि और समर्थक शुक्रवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से मामले में जल्द कार्रवाई करने और आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ राजनीतिक नेता भी वहां पहुंचे। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बातचीत हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया और इसके बाद भारद्वाज को ट्रेस करने के लिए टीमें सक्रिय की गईं। क्या है पूरा मामला? यह विवाद जंतर-मंतर पर CJP के एक प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी। इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार के नाम FIR में शामिल किए गए थे। मामला उस समय और गरमा गया, जब स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े एक Podcast Video की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वीडियो में भारद्वाज ने घटना को लेकर आपत्तिजनक दावे किए थे। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई। Viral Video ने बढ़ाया विवाद वायरल वीडियो सामने आने के बाद CJP ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। संगठन का कहना था कि वीडियो में कथित तौर पर घटना को लेकर किए गए दावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वहीं दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही थी और मेडिकल रिपोर्ट में चोट को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए कुछ दावों की पुष्टि नहीं हुई थी। Bulandshahr में पुलिस ने पकड़ा पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की टीमों ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में ट्रेस किया। रिपोर्टों में बताया गया कि पुलिस की कार्रवाई से पहले वह वहां से निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थक स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इससे मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर चल रहा विवाद भी फिलहाल एक नए चरण में पहुंच गया है। FIR में SC/ST Act की धाराएं जोड़ने की जानकारी प्रदर्शन के बाद पुलिस की ओर से मामले में SC/ST Act से संबंधित धाराएं जोड़ने की बात सामने आई। पीड़ित की दोबारा मेडिकल जांच कराए जाने की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई है। हालांकि, मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच और आगे की पुलिस कार्रवाई पर निर्भर करेगी। आरोपों की पुष्टि अदालत की प्रक्रिया में ही होगी। पुलिस के सामने अब आगे की जांच बड़ी चुनौती स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने के बाद अब पुलिस के सामने वायरल वीडियो, FIR में दर्ज आरोपों, मेडिकल रिपोर्ट और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच अहम होगी। फिलहाल इस मामले ने CJP Protest, Delhi Police और Social Media Influencer को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस की ओर से क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Saharanpur

UP Bulldozer Action: Saharanpur कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर चला बुलडोजर, मायावती-इकरा हसन ने उठाए सवाल

Saharanpur उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने शनिवार को मस्जिद के खिलाफ Bulldozer Action शुरू कर दिया। कार्रवाई की खबर फैलते ही इलाके में हलचल बढ़ गई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई। किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन का एक्शन कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर जमीन के स्वामित्व और निर्माण की वैधता पर काफी समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन का दावा है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है और निर्माण को अवैध माना गया है। मामला पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा। जुलाई में अदालत ने मस्जिद को हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही संबंधित पक्ष पर करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति लगाए जाने की बात भी सामने आई थी। इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी गई थी। 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोका मस्जिद पर कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इकरा हसन और पुलिस अधिकारियों के बीच इस दौरान तीखी बहस भी हुई। इसका वीडियो सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। बाद में उनके आवास के बाहर पुलिस बल तैनात किए जाने की भी खबर सामने आई। इकरा हसन ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोका जा रहा है। उनका कहना था कि वह मौके पर जाकर हालात देखना चाहती थीं। मायावती ने सरकार से कार्रवाई रोकने को कहा सहारनपुर मस्जिद विवाद पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार से कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की और मामले को संवेदनशील बताते हुए सावधानी से कदम उठाने की बात कही। मायावती ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह का तनाव बढ़ने से रोकना जरूरी है। उन्होंने लोगों से भी शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। इमरान मसूद बोले- हाईकोर्ट जाएंगे सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया है। उनका कहना है कि मस्जिद की जमीन और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर उनका पक्ष अलग है। जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद मसूद ने मामले को हाईकोर्ट ले जाने की बात कही है। उनका कहना है कि आगे की कानूनी लड़ाई अदालत में लड़ी जाएगी और उपलब्ध दस्तावेजों को वहां रखा जाएगा। प्रशासन और विपक्ष के दावे अलग-अलग पूरे विवाद में प्रशासन और मस्जिद पक्ष के दावे अलग हैं। प्रशासन जहां निर्माण को सरकारी जमीन पर हुआ अवैध निर्माण बता रहा है, वहीं मस्जिद से जुड़े लोग और कुछ विपक्षी नेता इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं। यही वजह है कि मामला सिर्फ बुलडोजर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। अब इसकी गूंज राजनीतिक मंच से लेकर अदालत तक सुनाई दे रही है। आगे क्या होगा? सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर हुई कार्रवाई के बाद अब सबकी नजर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर है। इमरान मसूद की ओर से हाईकोर्ट जाने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में अदालत में इस मामले को लेकर क्या रुख सामने आता है, यह महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई के बाद सहारनपुर में राजनीतिक माहौल गर्म है। एक तरफ अधिकारी कोर्ट के आदेश के पालन की बात कह रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nepal

Nepal Flood: दार्चुला में Landslide का खतरा बढ़ा, Trishuli से भारतीय परिवार का Rescue; हजारों Missing

नेपाल (Nepal) में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बाद हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नदियों का जलस्तर बढ़ने, मलबा आने और पहाड़ी इलाकों में Landslide के खतरे ने राहत और बचाव अभियान को और मुश्किल बना दिया है। सबसे चिंता की बात यह है कि हादसे के कई दिन बाद भी हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि, इसी बीच Trishuli क्षेत्र से दो लोगों को नौ दिन बाद जिंदा निकालना राहत और उम्मीद की बड़ी खबर बनकर सामने आया है। दार्चुला में Landslide का खतरा, निचले इलाकों पर नजर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। दार्चुला समेत संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से निचले इलाकों को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। पहाड़ों से मलबा आने और नदियों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका के बीच लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ से कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है। Trishuli से भारतीय नागरिकों का Rescue इस बीच त्रिशूली इलाके से तीन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की खबर सामने आई है। इनमें एक परिवार शामिल है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, रेस्क्यू किए गए लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और उनके भारत लौटने की प्रक्रिया में मदद की जा रही है। भारत सरकार नेपाल में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए लगातार नेपाली प्रशासन के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को Rescue किया गया है, जबकि 275 भारतीयों के लापता होने की जानकारी दी गई है। भारत ने राहत अभियान के लिए करीब 95 टन राहत सामग्री भी भेजी है। 9 दिन बाद Trishuli Tunnel से जिंदा निकले 2 मजदूर नेपाल में चल रहे Rescue Operation की सबसे बड़ी खबर Trishuli-3A Hydropower Project से आई। यहां सुरंग में फंसे संजय साह और कबीर महारजन को करीब नौ दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। दोनों को सुरंग के अंदर काफी गहराई से निकाला गया। बचाव दल ने पहले अंदर से आवाजें सुनीं और फिर संपर्क स्थापित होने के बाद ऑपरेशन तेज किया। आखिरकार दोनों को बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने उन परिवारों में भी उम्मीद जगाई है जिनके अपने लोग अभी तक लापता हैं। राहत दल अब अन्य संभावित Survivors तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं। 1300 के करीब मौतें, 5 हजार से ज्यादा लोग Missing इस प्राकृतिक आपदा का असर कितना बड़ा है, इसका अंदाजा मृतकों और लापता लोगों की संख्या से लगाया जा सकता है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार 1,294 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी और 5,053 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में बदलाव देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और Hydropower Projects को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और राहत शिविरों में रह रहे हैं। Rescue Operation अभी भी जारी Trishuli Tunnel से दो लोगों को जिंदा निकाले जाने के बाद Rescue Teams का हौसला बढ़ा है। नेपाल सेना, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ लगातार प्रभावित इलाकों में Search Operation चला रहे हैं। Hydropower Projects के आसपास अभी भी बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका है। मलबा, पानी और क्षतिग्रस्त सुरंगें बचाव अभियान में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। इसके बावजूद टीमें लगातार नए रास्ते तलाश रही हैं। भारत ने नेपाल की मदद बढ़ाई नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में भारत ने भी राहत और बचाव अभियान में सहयोग बढ़ाया है। भारतीय विशेषज्ञों और राहत सामग्री को नेपाल भेजा गया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की टीमें Rescue, Medical और अन्य जरूरी सेवाओं में सहायता कर रही हैं। फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और पहाड़ी इलाकों में नए Landslide और Flood के खतरे से निपटना है। Trishuli Tunnel से नौ दिन बाद दो लोगों का जिंदा निकलना इस त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण जरूर लेकर आया है। अब Rescue Teams की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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