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Bhopal में ट्रैफिक डायवर्जन: नारी सशक्तिकरण सम्मेलन के चलते कई रास्ते बदलेंगे

Bhopal में ट्रैफिक डायवर्जन: नारी सशक्तिकरण सम्मेलन के चलते कई रास्ते बदलेंगे

Bhopal में कल ट्रैफिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। शहर में आयोजित होने वाले Nari Sashaktikaran Sammelan के चलते कई प्रमुख सड़कों पर यातायात डायवर्ट किया जाएगा। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे घर से निकलने से पहले तय रूट की जानकारी जरूर ले लें, ताकि रास्ते में परेशानी से बचा जा सके। खासकर ऑफिस जाने वाले और स्कूल-कॉलेज के छात्रों को थोड़ा पहले निकलने की सलाह दी गई है। ट्रैफिक पुलिस ने वैकल्पिक रास्तों की सूची भी जारी की है, जिससे लोग आसानी से अपनी मंजिल तक पहुंच सकें। जिन इलाकों में कार्यक्रम होगा, वहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और कुछ समय के लिए वाहनों की आवाजाही सीमित रहेगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे आयोजनों के दौरान ट्रैफिक की समस्या बढ़ जाती है, इसलिए पहले से योजना बनाकर निकलना बेहतर रहेगा। अगर आप भी कल शहर में यात्रा करने वाले हैं, तो अपडेट्स पर नजर रखें और बताए गए वैकल्पिक रास्तों का ही इस्तेमाल करें।
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Bhopal से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। यहां एक बीटेक छात्र की मौत हो गई, जिससे उसके परिवार और दोस्तों में गहरा सदमा है। बताया जा रहा है कि छात्र ने आखिरी बार अपने एक दोस्त को फोन किया था। बातचीत के दौरान उसने बताया कि उसने जहर खा लिया है और कुछ ही समय में घर पहुंचने की बात कही। इसके बाद स्थिति बिगड़ती चली गई। परिवार के लोग जब तक उसे संभाल पाते, तब तक काफी देर हो चुकी थी। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके। इस घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह जानने की कोशिश की जा रही है कि आखिर ऐसी नौबत क्यों आई। यह घटना एक गंभीर याद दिलाती है कि किसी भी परेशानी में अकेले रहने के बजाय अपने करीबी लोगों से बात करना कितना जरूरी होता है।

Bhopal में बीटेक छात्र की मौत, जहर खाने की बात दोस्त को बताई

Bhopal से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। यहां एक बीटेक छात्र की मौत हो गई, जिससे उसके परिवार और दोस्तों में गहरा सदमा है। बताया जा रहा है कि छात्र ने आखिरी बार अपने एक दोस्त को फोन किया था। बातचीत के दौरान उसने बताया कि उसने जहर खा लिया है और कुछ ही समय में घर पहुंचने की बात कही। इसके बाद स्थिति बिगड़ती चली गई। परिवार के लोग जब तक उसे संभाल पाते, तब तक काफी देर हो चुकी थी। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके। इस घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह जानने की कोशिश की जा रही है कि आखिर ऐसी नौबत क्यों आई। यह घटना एक गंभीर याद दिलाती है कि किसी भी परेशानी में अकेले रहने के बजाय अपने करीबी लोगों से बात करना कितना जरूरी होता है।
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घर में घुसा LPG टैंकर, मासूम की मौत; चार घायल, ड्राइवर फरार

घर में घुसा LPG टैंकर, मासूम की मौत; चार घायल, ड्राइवर फरार

एक दर्दनाक हादसे में तेज रफ्तार LPG tanker ने घर की दीवार तोड़ दी और अंदर घुस गया। इस हादसे में एक मासूम बच्चे की मौत हो गई, जिससे पूरे इलाके में शोक का माहौल है। घटना के वक्त परिवार के लोग घर के अंदर ही मौजूद थे। टैंकर के अचानक घुसने से अफरा-तफरी मच गई। हादसे में परिवार के चार लोग घायल हो गए, जिन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनकी हालत पर डॉक्टर नजर बनाए हुए हैं। इस दुर्घटना में आसपास के दो और मकान भी क्षतिग्रस्त हो गए। स्थानीय लोगों ने बताया कि टक्कर इतनी जोरदार थी कि दीवारें टूट गईं और घरों को काफी नुकसान पहुंचा। हादसे के बाद टैंकर चालक मौके से फरार हो गया। पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर गुस्सा भी देखा जा रहा है। यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और लापरवाही से गाड़ी चलाने के खतरों की याद दिलाता है।
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Akshaya Tritiya पर बड़ी कार्रवाई: इंदौर-जबलपुर में 4 बाल विवाह रोके गए, कई बेटियों की ज़िंदगी बची

Akshaya Tritiya पर बड़ी कार्रवाई: इंदौर-जबलपुर में 4 बाल विवाह रोके गए, कई बेटियों की ज़िंदगी बची

Akshaya Tritiya के मौके पर जहां एक ओर लोग शुभ कामों में लगे थे, वहीं प्रशासन ने एक सराहनीय कदम उठाते हुए चार बाल विवाह होने से रोक दिए। यह कार्रवाई इंदौर और जबलपुर में की गई। सबसे चौंकाने वाला मामला उस समय सामने आया जब 17 साल की एक नाबालिग लड़की की बारात उज्जैन से आ रही थी। सूचना मिलते ही प्रशासन और बाल संरक्षण टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बारात को बीच रास्ते में ही रुकवा दिया और विवाह होने से बचा लिया। इसके अलावा, 15-16 साल की अन्य नाबालिग लड़कियों के विवाह भी समझाइश देकर टाल दिए गए। अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने परिवारों को बाल विवाह के नुकसान और कानूनी पहलुओं के बारे में समझाया, जिसके बाद उन्होंने अपने फैसले को रोक दिया। इन घटनाओं ने यह दिखाया कि समय पर की गई कार्रवाई और जागरूकता कितनी महत्वपूर्ण है। कई बेटियों की ज़िंदगी एक गलत फैसले से बच गई और उन्हें अब अपने सपनों को पूरा करने का मौका मिलेगा। स्थानीय लोगों ने प्रशासन के इस कदम की सराहना की है। यह पहल समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश भी है कि परंपराओं से ऊपर उठकर बच्चों के भविष्य को प्राथमिकता देना जरूरी है।
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उज्जैन में 40°C के पार तापमान: भीषण गर्मी से इंसान ही नहीं, पुलिस के घोड़े और डॉग भी बेहाल

मध्यप्रदेश के उज्जैन में गर्मी ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। दिन का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है, जिससे आम लोग ही नहीं, जानवर भी परेशान हैं। हालात ऐसे हैं कि दोपहर में घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है। पुलिस लाइन में जानवरों के लिए खास इंतजाम गर्मी को देखते हुए उज्जैन पुलिस लाइन में तैनात घोड़े और डॉग स्क्वाड की विशेष देखभाल की जा रही है। देवास रोड स्थित पुलिस लाइन में 14 घोड़ों और 4 डॉग के लिए कूलर, पंखे और स्प्रिंकलर लगाए गए हैं। उनके रहने की जगह को ठंडा रखने के लिए लगातार पानी का छिड़काव किया जा रहा है। AC गाड़ियों में भेजे जा रहे डॉग महाकाल मंदिर और रेलवे स्टेशन जैसी संवेदनशील जगहों पर चेकिंग के लिए जाने वाले डॉग्स को अब केवल एसी गाड़ियों में ही भेजा जा रहा है, ताकि उन्हें गर्मी से राहत मिल सके। खान-पान में भी किया बदलाव भीषण गर्मी को देखते हुए जानवरों की डाइट में भी बदलाव किया गया है। 12 सदस्यीय टीम रख रही खास निगरानी इन जानवरों की देखभाल के लिए 12 लोगों की टीम तैनात की गई है, जो उनकी सफाई, खाना, दवाइयों और नियमित मेडिकल चेकअप का ध्यान रख रही है। पुलिस लाइन के आरआई रंजीत सिंह के अनुसार, गर्मी से बचाव के लिए हर जरूरी इंतजाम किया गया है। रात में थोड़ी राहत, दिन में मुश्किल हालांकि, रात के तापमान में थोड़ी गिरावट आई है। दो दिन पहले जहां न्यूनतम तापमान 23 डिग्री था, वहीं अब यह घटकर 19 डिग्री हो गया है। इससे रात में थोड़ी राहत मिल रही है, लेकिन दिन की तपिश अभी भी लोगों को बेहाल कर रही है। 👉 ऐसी ही ताजा और भरोसेमंद खबरों के लिए जुड़े रहें www.deshharpal.com Portal के साथ।
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ग्वालियर किला: रशियन महिला के साथ इन्फ्लुएंसर की अशोभनीय हरकत, वीडियो वायरल

ग्वालियर के ऐतिहासिक किले में घूमने आई एक रशियन महिला पर्यटक के साथ हुई एक शर्मनाक घटना सामने आई है। एक स्थानीय इन्फ्लुएंसर ने “मजाक” के नाम पर महिला के साथ अश्लील टिप्पणी करते हुए वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया। बताया जा रहा है कि रूस से आए पर्यटकों का एक दल आगरा से ग्वालियर घूमने पहुंचा था। दोपहर के समय जब वे किले का दौरा कर रहे थे, तभी एक इन्फ्लुएंसर उनसे बातचीत करने लगा। उसने एक विदेशी महिला को रील बनाने के लिए तैयार किया, लेकिन हिंदी भाषा से अनजान होने का फायदा उठाते हुए उसके साथ आपत्तिजनक बातें कही और वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। वीडियो में महिला को इस बात का अंदाजा नहीं था कि उसके साथ क्या कहा जा रहा है। वह मुस्कुराते हुए “यस-यस” कहती नजर आई, जबकि इन्फ्लुएंसर कैमरे पर अश्लील टिप्पणी कर रहा था। सोशल मीडिया पर भड़का गुस्सा वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने कड़ी नाराजगी जताई। यूजर्स का कहना है कि इस तरह की हरकतें न सिर्फ ग्वालियर बल्कि पूरे देश की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं और विदेशी पर्यटकों के बीच गलत संदेश देती हैं। पहले भी विवादों में रहा इन्फ्लुएंसर जानकारी के मुताबिक, यह वही इन्फ्लुएंसर है जो पहले भी ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन और हाइवे पर हवाई फायरिंग जैसे मामलों को लेकर चर्चा में रह चुका है। अब यह नया वीडियो पुलिस तक पहुंच गया है और मामले की जांच की जा रही है। पर्यटन पर पड़ सकता है असर स्थानीय लोगों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं से ग्वालियर की पर्यटन छवि प्रभावित होती है। कई पर्यटक आगरा के बाद सीधे झांसी या ओरछा चले जाते हैं और ग्वालियर में रुकने से बचते हैं। 👉 ऐसी ही ताजा और भरोसेमंद खबरों के लिए जुड़े रहें www.deshharpal.com Portal के साथ।
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मंगुभाई पटेल

MP Tribal Fund राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने उठाए बड़े सवाल, आदिवासी विकास पर चिंता

मध्यप्रदेश में आदिवासी विकास के लिए जारी होने वाले फंड (Tribal Welfare Fund) के उपयोग को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने इस पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर चिंता जताते हुए साफ कहा है कि योजनाओं का लाभ अगर जमीनी स्तर तक नहीं पहुंच रहा है, तो इसका मतलब कहीं न कहीं व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। राज्यपाल की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब राज्य में आदिवासी विकास योजनाओं के बजट खर्च और उसके असर को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं। आदिवासी विकास फंड पर क्यों उठे सवाल? मध्यप्रदेश सरकार हर साल आदिवासी समुदाय के शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और रोजगार के लिए बड़ा बजट जारी करती है। इसका मकसद यह है कि दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों तक विकास की रोशनी पहुंच सके। लेकिन समीक्षा के दौरान यह सवाल सामने आए हैं कि: इन्हीं चिंताओं के बीच राज्यपाल ने प्रशासन को अधिक जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ काम करने के निर्देश दिए हैं। राज्यपाल मंगुभाई पटेल की सख्त टिप्पणी राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने अधिकारियों को साफ संदेश दिया कि आदिवासी विकास के लिए जारी बजट केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका असर जमीन पर दिखना चाहिए। उन्होंने कहा कि: उनकी इस टिप्पणी को प्रशासनिक स्तर पर एक गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। क्यों अहम है यह मुद्दा मध्यप्रदेश के लिए? मध्यप्रदेश में आदिवासी आबादी एक बड़ा हिस्सा है और कई जिले पूरी तरह ग्रामीण और वन क्षेत्रों से जुड़े हुए हैं। ऐसे में विकास योजनाओं की सफलता सीधे लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित करती है। अगर योजनाएं सही तरीके से लागू नहीं होतीं, तो इसका असर: आगे क्या उम्मीद की जा रही है? राज्यपाल की इस सख्त टिप्पणी के बाद उम्मीद की जा रही है कि: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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गांव की बेटी योजना

MP Education छूटी स्कॉलरशिप का अब मिलेगा फायदा प्रतिभा किरण और गांव की बेटी योजना फिर से शुरू

मध्य प्रदेश की बेटियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने “गांव की बेटी” (Gaon Ki Beti) और “प्रतिभा किरण” (Pratibha Kiran) योजना का लाभ न ले पाने वाली छात्राओं को एक और अवसर देने का फैसला किया है। अब वे छात्राएं, जो किसी वजह से पहले आवेदन नहीं कर पाईं या प्रक्रिया अधूरी रह गई थी, फिर से आवेदन कर सकती हैं। फिर शुरू हुआ Scholarship Portal, न छूटे यह मौका सरकार ने स्कॉलरशिप पोर्टल को दोबारा एक्टिव कर दिया है। इस बार छात्राओं को Fresh Application के साथ-साथ Renewal का विकल्प भी दिया गया है। कई बार छोटी-छोटी गलतियों या दस्तावेजों की कमी की वजह से आवेदन रिजेक्ट हो जाते हैं—ऐसी बेटियों के लिए यह फैसला किसी दूसरी उम्मीद से कम नहीं है। Last Date याद रखें गांव की बेटी योजना” (Gaon Ki Beti) और “प्रतिभा किरण” (Pratibha Kiran) योजना आवेदन की अंतिम तारीख 15 मई 2026 तय की गई है। ऐसे में जरूरी है कि छात्राएं जल्द से जल्द अपने दस्तावेज तैयार करके आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें, ताकि इस बार मौका हाथ से न निकल जाए। कौन उठा सकता है फायदा? सिर्फ स्कॉलरशिप नहीं, सपनों का सहारा गांव की बेटी योजना” (Gaon Ki Beti) और “प्रतिभा किरण” (Pratibha Kiran) योजना का मकसद सिर्फ आर्थिक मदद देना नहीं है, बल्कि बेटियों को आगे बढ़ने का हौसला देना भी है। कई परिवारों में आर्थिक तंगी के कारण लड़कियों की पढ़ाई रुक जाती है, लेकिन ऐसी स्कीम्स उनके सपनों को फिर से उड़ान देने का काम करती हैं। क्यों अहम है यह फैसला? मध्य प्रदेश में हर साल बड़ी संख्या में छात्राएं स्कॉलरशिप से वंचित रह जाती हैं। ऐसे में सरकार का यह कदम न सिर्फ शिक्षा को बढ़ावा देगा, बल्कि बेटियों को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी मजबूत करेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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MP Board 10th Result 2026: 73.42% छात्र पास, पन्ना की प्रतिभा सिंह बनी टॉपर

मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) ने बुधवार को 10वीं बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया। इस साल रिजल्ट में 73.42% रेगुलर छात्र पास हुए हैं। मेरिट लिस्ट में इस बार बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए हैं, जिससे छात्रों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। प्रतिभा सिंह सोलंकी ने किया टॉप पन्ना जिले की प्रतिभा सिंह सोलंकी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 500 में से 499 अंक हासिल कर पूरे प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया।दूसरे स्थान पर 498 अंक के साथ दो छात्र रहे—बालाघाट की अक्षरा घोडेश्वर और सीधी के अभय गुप्ता।तीसरे स्थान पर 497 अंक हासिल करने वाले 7 छात्र शामिल हैं। टॉप-10 में 378 छात्र इस साल टॉप-10 मेरिट लिस्ट में कुल 378 छात्र शामिल हुए हैं, जिन्होंने 490 से 499 अंक प्राप्त किए हैं।वहीं, टॉप-5 में ही 39 छात्रों ने अपनी जगह बनाई है। विदिशा की छात्राओं का शानदार प्रदर्शन विदिशा जिले के गंजबासौदा की उपासना जाट ने 492 अंक हासिल कर राज्य में 8वां स्थान पाया।उनके साथ मनन सुमन और भाविका राठौर ने भी 492 अंक लाकर क्रमशः 8वां और 10वां स्थान हासिल किया। तीनों छात्राएं डॉल्फिल स्कूल की हैं। CBSE में भी चमके भोपाल के छात्र भोपाल में CBSE 10वीं के रिजल्ट में भी छात्रों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया।आरोही वर्मा ने 499 अंक (99.8%) हासिल कर टॉप किया, जबकि अकुल नारंग ने 494 अंक (98.8%) प्राप्त किए। दोनों छात्र सेंट जोसेफ को-एड स्कूल के हैं। ऐसे चेक करें अपना रिजल्ट छात्र अपना रिजल्ट ऑनलाइन आसानी से देख सकते हैं। इसके लिए वे👉 mpbse.mponline.gov.in👉 DigiLocker App👉 MPBSE Mobile App👉 MP Mobile Appका उपयोग कर सकते हैं। रिजल्ट देखने के लिए “Know Your Result” विकल्प चुनकर रोल नंबर और एप्लीकेशन नंबर दर्ज करना होगा। छात्रों के लिए जरूरी सलाह मध्य प्रदेश सरकार और शिक्षा मंडल ने छात्रों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक वेबसाइट और ऐप का ही उपयोग करें। किसी भी अफवाह या अनधिकृत वेबसाइट पर भरोसा न करें। 👉 शिक्षा और करियर से जुड़ी ऐसी ही जरूरी खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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इंदौर में जमीन NOC का बड़ा घोटाला: IDA के अंदर ही चल रहा था फर्जी साइन का रैकेट, कर्मचारी गायब

इंदौर में जमीन की NOC (No Objection Certificate) को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) के अंदर ही फर्जीवाड़े का एक संगठित रैकेट चलने की बात सामने आई है। हैरानी की बात यह है कि इसमें प्राधिकरण के कर्मचारी ही अधिकारियों के नकली साइन कर NOC जारी कर रहे थे और फिर इन्हें नक्शा पास कराने के लिए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNCP) भेजा जा रहा था। जांच में खुला खेल इस पूरे मामले का खुलासा TNCP अधिकारियों की जांच में हुआ। IDA अधिकारियों को शक है कि विधि विभाग का कर्मचारी शुभम श्रीवास्तव इस रैकेट से जुड़ा हो सकता है। मामला सामने आने के बाद से ही वह बिना सूचना के गायब है। उसका फोन बंद है और घर से भी कोई जानकारी नहीं मिल रही। साइन में गड़बड़ी से खुला राज मामला योजना 97 पार्ट-4, बिजलपुर की करीब 20 हजार वर्गफुट जमीन से जुड़ा है। जमीन मालिक ने नक्शा मंजूरी के लिए आवेदन किया था। जब दस्तावेजों की जांच हुई, तो NOC और अन्य दस्तावेजों में साइन अलग-अलग पाए गए। TNCP अधिकारियों को शक हुआ तो उन्होंने IDA से संपर्क किया। तब पता चला कि ऐसी कोई NOC जारी ही नहीं की गई थी। इसके बाद फाइल को तुरंत रद्द कर दिया गया। पहले भी भेजी गई थी फर्जी NOC TNCP अधिकारी शुभाशीष बनर्जी के मुताबिक, करीब डेढ़ महीने पहले भी इसी जमीन से जुड़ी फाइल आई थी। उस समय भी NOC पर लगे साइन संदिग्ध लगे थे। IDA से पुष्टि करने पर पता चला कि NOC फर्जी है, जिसके बाद उसे निरस्त कर दिया गया। हाल ही में फिर वही फाइल दोबारा आई, जिससे अधिकारियों का शक और गहरा गया। अधिकारियों के नकली साइन भू-अर्जन अधिकारी सुदीप मीणा ने बताया कि उनके और अन्य अधिकारियों के नकली साइन कर फर्जी NOC तैयार की गई। इससे साफ है कि यह कोई अकेले व्यक्ति का काम नहीं, बल्कि संगठित रैकेट हो सकता है। अब ऑनलाइन होगी पूरी प्रक्रिया IDA के CEO परीक्षित झाड़े ने कहा कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। साथ ही, भविष्य में ऐसे फर्जीवाड़े को रोकने के लिए NOC की पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जाएगा। बढ़ सकती है जांच इस खुलासे के बाद अब पुराने मामलों की भी जांच की तैयारी है। आशंका है कि पिछले एक साल से यह रैकेट सक्रिय था और कई जमीनों के मामलों में फर्जी NOC जारी कर सरकार को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया गया। 100 करोड़ से ज्यादा की जमीन जिस जमीन को लेकर यह फर्जी NOC जारी की गई, उसकी कीमत 100 करोड़ रुपए से ज्यादा बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, इस मामले में दो और कर्मचारियों की संलिप्तता का शक है, हालांकि उनके नाम अभी सामने नहीं आए हैं। फिलहाल, मुख्य संदिग्ध कर्मचारी पिछले 10 दिनों से ऑफिस नहीं आया है, जिसके चलते उसे कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। 👉 ऐसी ही ताजा और भरोसेमंद खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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Bittu Tabahi

Bittu Tabahi ने बदली सोच, अकेले शुरू किया नदी सफाई अभियान; नगरपालिका भी हुई प्रभावित

नदी में गंदगी देखकर ज्यादातर लोग शिकायत करते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के एक युवक ने शिकायत करने के बजाय खुद कुछ करने की ठानी। स्थानीय स्तर पर ‘बिट्टू तबाही’ (Bittu Tabahi) के नाम से पहचाने जाने वाले इस युवक ने अकेले ही नदी की सफाई का जिम्मा उठा लिया। उनका यह जज्बा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बिट्टू ने नदी में जमा कचरे और गंदगी को देखकर सफाई अभियान शुरू किया। शुरुआत किसी बड़े इंतजाम या टीम के साथ नहीं हुई। उन्होंने अपने स्तर पर सफाई करना शुरू किया और लगातार इस काम में जुटे रहे। नदी को साफ रखने का लिया संकल्प बिट्टू का मानना है कि नदी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि आसपास के लोगों और पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने नदी में जमा कचरे को हटाने की पहल की। उनका यह प्रयास धीरे-धीरे स्थानीय लोगों का ध्यान खींचने लगा। लोगों ने देखा कि बिना किसी दबाव या दिखावे के बिट्टू लगातार नदी की सफाई में लगे हुए हैं। नगरपालिका ने भी की पहल की सराहना बिट्टू के लगातार सफाई अभियान की जानकारी नगरपालिका तक पहुंची तो उनके प्रयास की सराहना की गई। एक युवक द्वारा अपने स्तर पर नदी को साफ रखने की कोशिश को अधिकारियों ने सकारात्मक कदम माना। इस पहल ने यह भी दिखाया कि अगर कोई व्यक्ति अपने आसपास के पर्यावरण को लेकर जिम्मेदारी महसूस करे, तो छोटी शुरुआत भी बड़ा संदेश दे सकती है। सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आया अभियान बिट्टू का नदी सफाई अभियान अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। उनके प्रयास को देखकर दूसरे लोगों में भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद है। आज नदियों में बढ़ता कचरा और प्रदूषण बड़ी चुनौती है। ऐसे में बिट्टू की पहल लोगों को यह संदेश देती है कि नदी को साफ रखना सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। ‘बिट्टू तबाही’ ने दी एक अलग मिसाल बिट्टू की कहानी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने बदलाव का इंतजार नहीं किया, बल्कि खुद बदलाव की शुरुआत करने का फैसला लिया। अकेले शुरू किया गया उनका यह सफाई अभियान अब दूसरों के लिए प्रेरणा बनता दिखाई दे रहा है। कई बार किसी बड़े बदलाव की शुरुआत बड़े अभियान से नहीं, बल्कि एक छोटे से कदम से होती है। बिट्टू का यह प्रयास उसी सोच की मिसाल है—अगर इरादा मजबूत हो, तो एक इंसान भी बदलाव की शुरुआत कर सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
UN

World Map में बड़ा बदलाव! UN ने Africa के असली Size को दिखाने का रास्ता साफ किया

दुनिया का नक्शा (World Map) देखते हुए शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इसमें दिखाई देने वाले देशों और महाद्वीपों का आकार असलियत से अलग भी हो सकता है। लेकिन अब इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र में एक अहम पहल हुई है। UN महासभा ने ऐसे World Map को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें धरती के अलग-अलग हिस्सों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाने की कोशिश की गई है। इस बदलाव के बाद नक्शे पर Africa पहले से काफी बड़ा दिखाई देगा, जबकि Europe और North America, खासकर US का आकार पुराने नक्शे की तुलना में छोटा नजर आ सकता है। प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला, लेकिन अमेरिका ने इसका विरोध किया। पुराने World Map में आखिर समस्या क्या है? दुनिया के स्कूलों और कई नक्शों में लंबे समय से Mercator Projection का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे 16वीं सदी में Gerardus Mercator ने तैयार किया था। उस समय इसका सबसे बड़ा फायदा समुद्री यात्राओं और Navigation में था। लेकिन Mercator Projection की एक खासियत ही इसकी सबसे बड़ी कमी भी बन गई। इसमें जैसे-जैसे कोई क्षेत्र Equator से दूर जाता है, उसका आकार नक्शे पर ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि Greenland जैसे इलाके नक्शे पर अपनी वास्तविकता से बहुत बड़े नजर आते हैं। दूसरी तरफ Africa, जो दुनिया के सबसे बड़े महाद्वीपों में से एक है, अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देता है। मसलन, सामान्य Mercator Map में Greenland और Africa का आकार देखकर किसी को लग सकता है कि दोनों लगभग बराबर हैं। असल में Africa का क्षेत्रफल Greenland से करीब 14 गुना ज्यादा है। Equal Earth Projection क्यों चर्चा में है? UN के प्रस्ताव में Equal Earth Projection जैसे नक्शों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इस Projection की खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग महाद्वीपों के क्षेत्रफल को ज्यादा सही अनुपात में दिखाया जाता है। यानी नक्शे को देखकर Africa का वास्तविक विशाल आकार ज्यादा साफ समझ में आता है। Europe और North America भी Mercator Map की तुलना में छोटे दिखाई देते हैं। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है—न तो Africa बड़ा हुआ है और न ही Europe या America छोटा। बदलाव सिर्फ उस तरीके में है, जिससे उन्हें नक्शे पर दिखाया जाता है। America ने UN के प्रस्ताव का विरोध क्यों किया? इस प्रस्ताव पर अमेरिका का रुख बाकी देशों से अलग रहा। मतदान के दौरान अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया। अमेरिकी पक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया कि संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक स्तर की बड़ी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। वहीं प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि नक्शा सिर्फ रास्ता या देश की लोकेशन बताने वाला साधन नहीं है। यह लोगों के मन में दुनिया की एक तस्वीर भी बनाता है। अफ्रीकी देशों की तरफ से लंबे समय से यह बात उठती रही है कि पुराने नक्शों में Africa का वास्तविक आकार सही तरीके से सामने नहीं आता। इसी सोच के साथ “Correct the Map” अभियान को आगे बढ़ाया गया। UN के फैसले से क्या सभी Maps बदल जाएंगे? यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब अचानक हर जगह नया नक्शा दिखाई देने लगेगा। UN महासभा का यह फैसला कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। यानी Google Maps, स्कूल की किताबों, सरकारी दस्तावेजों या दूसरे Digital Platforms को तुरंत अपना नक्शा बदलना जरूरी नहीं है। इसका मकसद देशों, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया और दूसरे संगठनों को ऐसे Map Projections अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो दुनिया के क्षेत्रफल को ज्यादा सही तरीके से दिखाते हों। इसके बावजूद Mercator Projection पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है। Navigation और समुद्री यात्राओं जैसी जरूरतों में इसका इस्तेमाल आज भी उपयोगी माना जाता है। India पर क्या असर पड़ेगा? भारत को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस नए World Map से देश का आकार या सीमा बदल जाएगी? इसका जवाब है—नहीं। भारत की जमीन, क्षेत्रफल और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इस प्रस्ताव का कोई असर नहीं पड़ेगा। सिर्फ नक्शे पर भारत और बाकी देशों को दिखाने का अनुपात बदल सकता है। अगर Equal Earth या इसी तरह की Projection का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ता है तो आने वाले समय में School Geography Books, Educational Charts, News Graphics और Digital Maps में दुनिया की तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे सकती है। भारत के लिए इसका असर मुख्य रूप से शिक्षा और Geography की समझ के स्तर पर होगा। बच्चों और आम लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि नक्शे पर दिखाई देने वाला आकार हमेशा किसी देश या महाद्वीप के वास्तविक क्षेत्रफल के बराबर नहीं होता। Africa के लिए इसे बड़ी उपलब्धि क्यों माना जा रहा है? इस पूरे विवाद में Africa सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में है। समर्थकों का कहना है कि सदियों से इस्तेमाल हो रहे नक्शों ने अनजाने में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की एक असंतुलित तस्वीर बना दी है। Africa दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है और इसके बावजूद Mercator Map में इसका आकार उसकी वास्तविक विशालता के मुकाबले कम नजर आता है। यही वजह है कि African countries और African Union की ओर से इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। उनके लिए यह केवल Map Projection का मामला नहीं, बल्कि दुनिया के सामने Africa की वास्तविक तस्वीर रखने का भी सवाल है। क्या दुनिया सच में बदल गई? नहीं। दुनिया का भूगोल बिल्कुल नहीं बदला है। न कोई नया देश बना है, न किसी देश की सीमा बदली है और न ही Africa का क्षेत्रफल अचानक बढ़ गया है। बदलाव सिर्फ इतना है कि दुनिया को कागज या स्क्रीन पर किस तरह दिखाया जाए, इस पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा सामने आई है। एक तरह से देखें तो यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि नक्शा हमेशा पूरी तरह निष्पक्ष तस्वीर नहीं होता। उसे बनाने का तरीका तय करता है कि हमें दुनिया का कौन-सा हिस्सा कितना बड़ा या छोटा दिखाई देगा। आने वाले वर्षों में अगर Equal Earth जैसी projections को ज्यादा अपनाया जाता है, तो संभव है कि नई पीढ़ी के लिए World Map की तस्वीर वही न हो,...
Swatantra Bhardwaj

Swatantra Bhardwaj Detained: CJP Protest के बाद स्वतंत्र भारद्वाज हिरासत में

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP Protest के दौरान एक छात्रा के पिता के साथ कथित मारपीट का मामला अब फिर चर्चा में है। मामले में आरोपी बताए जा रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज (Swatantra Bhardwaj) को दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थकों के प्रदर्शन और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग के कुछ घंटे बाद हुई। Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर CJP के प्रतिनिधि और समर्थक शुक्रवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से मामले में जल्द कार्रवाई करने और आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ राजनीतिक नेता भी वहां पहुंचे। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बातचीत हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया और इसके बाद भारद्वाज को ट्रेस करने के लिए टीमें सक्रिय की गईं। क्या है पूरा मामला? यह विवाद जंतर-मंतर पर CJP के एक प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी। इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार के नाम FIR में शामिल किए गए थे। मामला उस समय और गरमा गया, जब स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े एक Podcast Video की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वीडियो में भारद्वाज ने घटना को लेकर आपत्तिजनक दावे किए थे। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई। Viral Video ने बढ़ाया विवाद वायरल वीडियो सामने आने के बाद CJP ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। संगठन का कहना था कि वीडियो में कथित तौर पर घटना को लेकर किए गए दावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वहीं दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही थी और मेडिकल रिपोर्ट में चोट को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए कुछ दावों की पुष्टि नहीं हुई थी। Bulandshahr में पुलिस ने पकड़ा पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की टीमों ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में ट्रेस किया। रिपोर्टों में बताया गया कि पुलिस की कार्रवाई से पहले वह वहां से निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थक स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इससे मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर चल रहा विवाद भी फिलहाल एक नए चरण में पहुंच गया है। FIR में SC/ST Act की धाराएं जोड़ने की जानकारी प्रदर्शन के बाद पुलिस की ओर से मामले में SC/ST Act से संबंधित धाराएं जोड़ने की बात सामने आई। पीड़ित की दोबारा मेडिकल जांच कराए जाने की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई है। हालांकि, मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच और आगे की पुलिस कार्रवाई पर निर्भर करेगी। आरोपों की पुष्टि अदालत की प्रक्रिया में ही होगी। पुलिस के सामने अब आगे की जांच बड़ी चुनौती स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने के बाद अब पुलिस के सामने वायरल वीडियो, FIR में दर्ज आरोपों, मेडिकल रिपोर्ट और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच अहम होगी। फिलहाल इस मामले ने CJP Protest, Delhi Police और Social Media Influencer को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस की ओर से क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Saharanpur

UP Bulldozer Action: Saharanpur कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर चला बुलडोजर, मायावती-इकरा हसन ने उठाए सवाल

Saharanpur उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने शनिवार को मस्जिद के खिलाफ Bulldozer Action शुरू कर दिया। कार्रवाई की खबर फैलते ही इलाके में हलचल बढ़ गई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई। किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन का एक्शन कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर जमीन के स्वामित्व और निर्माण की वैधता पर काफी समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन का दावा है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है और निर्माण को अवैध माना गया है। मामला पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा। जुलाई में अदालत ने मस्जिद को हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही संबंधित पक्ष पर करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति लगाए जाने की बात भी सामने आई थी। इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी गई थी। 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोका मस्जिद पर कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इकरा हसन और पुलिस अधिकारियों के बीच इस दौरान तीखी बहस भी हुई। इसका वीडियो सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। बाद में उनके आवास के बाहर पुलिस बल तैनात किए जाने की भी खबर सामने आई। इकरा हसन ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोका जा रहा है। उनका कहना था कि वह मौके पर जाकर हालात देखना चाहती थीं। मायावती ने सरकार से कार्रवाई रोकने को कहा सहारनपुर मस्जिद विवाद पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार से कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की और मामले को संवेदनशील बताते हुए सावधानी से कदम उठाने की बात कही। मायावती ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह का तनाव बढ़ने से रोकना जरूरी है। उन्होंने लोगों से भी शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। इमरान मसूद बोले- हाईकोर्ट जाएंगे सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया है। उनका कहना है कि मस्जिद की जमीन और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर उनका पक्ष अलग है। जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद मसूद ने मामले को हाईकोर्ट ले जाने की बात कही है। उनका कहना है कि आगे की कानूनी लड़ाई अदालत में लड़ी जाएगी और उपलब्ध दस्तावेजों को वहां रखा जाएगा। प्रशासन और विपक्ष के दावे अलग-अलग पूरे विवाद में प्रशासन और मस्जिद पक्ष के दावे अलग हैं। प्रशासन जहां निर्माण को सरकारी जमीन पर हुआ अवैध निर्माण बता रहा है, वहीं मस्जिद से जुड़े लोग और कुछ विपक्षी नेता इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं। यही वजह है कि मामला सिर्फ बुलडोजर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। अब इसकी गूंज राजनीतिक मंच से लेकर अदालत तक सुनाई दे रही है। आगे क्या होगा? सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर हुई कार्रवाई के बाद अब सबकी नजर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर है। इमरान मसूद की ओर से हाईकोर्ट जाने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में अदालत में इस मामले को लेकर क्या रुख सामने आता है, यह महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई के बाद सहारनपुर में राजनीतिक माहौल गर्म है। एक तरफ अधिकारी कोर्ट के आदेश के पालन की बात कह रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nepal

Nepal Flood: दार्चुला में Landslide का खतरा बढ़ा, Trishuli से भारतीय परिवार का Rescue; हजारों Missing

नेपाल (Nepal) में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बाद हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नदियों का जलस्तर बढ़ने, मलबा आने और पहाड़ी इलाकों में Landslide के खतरे ने राहत और बचाव अभियान को और मुश्किल बना दिया है। सबसे चिंता की बात यह है कि हादसे के कई दिन बाद भी हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि, इसी बीच Trishuli क्षेत्र से दो लोगों को नौ दिन बाद जिंदा निकालना राहत और उम्मीद की बड़ी खबर बनकर सामने आया है। दार्चुला में Landslide का खतरा, निचले इलाकों पर नजर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। दार्चुला समेत संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से निचले इलाकों को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। पहाड़ों से मलबा आने और नदियों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका के बीच लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ से कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है। Trishuli से भारतीय नागरिकों का Rescue इस बीच त्रिशूली इलाके से तीन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की खबर सामने आई है। इनमें एक परिवार शामिल है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, रेस्क्यू किए गए लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और उनके भारत लौटने की प्रक्रिया में मदद की जा रही है। भारत सरकार नेपाल में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए लगातार नेपाली प्रशासन के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को Rescue किया गया है, जबकि 275 भारतीयों के लापता होने की जानकारी दी गई है। भारत ने राहत अभियान के लिए करीब 95 टन राहत सामग्री भी भेजी है। 9 दिन बाद Trishuli Tunnel से जिंदा निकले 2 मजदूर नेपाल में चल रहे Rescue Operation की सबसे बड़ी खबर Trishuli-3A Hydropower Project से आई। यहां सुरंग में फंसे संजय साह और कबीर महारजन को करीब नौ दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। दोनों को सुरंग के अंदर काफी गहराई से निकाला गया। बचाव दल ने पहले अंदर से आवाजें सुनीं और फिर संपर्क स्थापित होने के बाद ऑपरेशन तेज किया। आखिरकार दोनों को बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने उन परिवारों में भी उम्मीद जगाई है जिनके अपने लोग अभी तक लापता हैं। राहत दल अब अन्य संभावित Survivors तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं। 1300 के करीब मौतें, 5 हजार से ज्यादा लोग Missing इस प्राकृतिक आपदा का असर कितना बड़ा है, इसका अंदाजा मृतकों और लापता लोगों की संख्या से लगाया जा सकता है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार 1,294 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी और 5,053 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में बदलाव देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और Hydropower Projects को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और राहत शिविरों में रह रहे हैं। Rescue Operation अभी भी जारी Trishuli Tunnel से दो लोगों को जिंदा निकाले जाने के बाद Rescue Teams का हौसला बढ़ा है। नेपाल सेना, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ लगातार प्रभावित इलाकों में Search Operation चला रहे हैं। Hydropower Projects के आसपास अभी भी बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका है। मलबा, पानी और क्षतिग्रस्त सुरंगें बचाव अभियान में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। इसके बावजूद टीमें लगातार नए रास्ते तलाश रही हैं। भारत ने नेपाल की मदद बढ़ाई नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में भारत ने भी राहत और बचाव अभियान में सहयोग बढ़ाया है। भारतीय विशेषज्ञों और राहत सामग्री को नेपाल भेजा गया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की टीमें Rescue, Medical और अन्य जरूरी सेवाओं में सहायता कर रही हैं। फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और पहाड़ी इलाकों में नए Landslide और Flood के खतरे से निपटना है। Trishuli Tunnel से नौ दिन बाद दो लोगों का जिंदा निकलना इस त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण जरूर लेकर आया है। अब Rescue Teams की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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