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Bhopal में नया नियम: रात 12 बजे तक बंद होंगे पब-बार, नियम तोड़ने पर लाइसेंस होगा रद्द

Bhopal में नया नियम: रात 12 बजे तक बंद होंगे पब-बार, नियम तोड़ने पर लाइसेंस होगा रद्द

Bhopal में नाइट लाइफ और पब-बार संचालन को लेकर प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब शहर में सभी पब और बार रात 12 बजे तक बंद करने होंगे। इससे देर रात होने वाली अव्यवस्था और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर नियंत्रण रखने की कोशिश की जाएगी। यह आदेश भोपाल पुलिस कमिश्नर की ओर से जारी किया गया है। क्या है नया नियम? नए निर्देश के अनुसार: नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई पुलिस प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अगर कोई भी पब या बार इस आदेश का उल्लंघन करता है, तो उसका:लाइसेंस रद्द किया जा सकता हैकानूनी कार्रवाई भी हो सकती है क्यों लिया गया यह फैसला? प्रशासन का मानना है कि देर रात तक चलने वाले पब-बार से कई बार: इन्हीं कारणों को देखते हुए यह समय सीमा तय की गई है . शहरवासियों के लिए संदेश यह फैसला शहर में सुरक्षा और शांति बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। प्रशासन चाहता है कि भोपाल में नाइट लाइफ भी नियंत्रित और सुरक्षित तरीके से चले।
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जबलपुर नहर हादसा: 3 बहनों की दर्दनाक मौत, 12 घंटे बाद मिला शीतल का शव; भोपाल में होने वाली थी शादी

मध्यप्रदेश के जबलपुर से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है। बरगी नहर में डूबने से तीन बहनों की मौत हो गई। इस हादसे ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है। 12 घंटे बाद मिला शीतल का शव तीनों में सबसे बड़ी शीतल पटेल (23) का शव घटना के करीब 12 घंटे बाद गुरुवार रात लगभग 11 बजे घटनास्थल से कुछ दूरी पर मिला। वहीं सानिया पटेल (14) और सृष्टि पटेल (17) के शव हादसे के चार घंटे के भीतर ही बरामद कर लिए गए थे। एक ही परिवार की थीं तीनों यह हादसा बरगी थाना क्षेत्र के सालीवाड़ा गांव में हुआ। तीनों लड़कियां रिश्ते में मामा-बुआ की बेटियां थीं और शादी समारोह में शामिल होने आई थीं। पोस्टमार्टम के बाद शुक्रवार दोपहर शहर के दो अलग-अलग श्मशान घाटों पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। चार महीने बाद थी शीतल की शादी शीतल के पिता संतोष पटेल, जो जबलपुर मेडिकल कॉलेज में गार्ड हैं, ने बताया कि शीतल ने फार्मेसी की पढ़ाई पूरी कर ली थी और चार महीने बाद उसकी शादी भोपाल में होने वाली थी।वहीं सृष्टि ने 12वीं अच्छे नंबरों से पास की थी और डॉक्टर बनने का सपना देख रही थी। रील बनाते समय हुआ हादसा गुरुवार सुबह करीब 11 बजे पांच लड़कियां—शीतल, सानिया, सृष्टि, तनु और निहारिका—नहर पर नहाने गई थीं।बताया जा रहा है कि सृष्टि पानी में थी, जबकि बाकी लड़कियां किनारे पर मोबाइल से रील बना रही थीं। इसी दौरान पैर फिसलने से चार लड़कियां तेज बहाव में बह गईं। मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन पानी का तेज बहाव इतना ज्यादा था कि तीन लड़कियां बहकर दूर चली गईं। एक लड़की को किसी तरह बचा लिया गया। गांव में पसरा मातम शादी की खुशियां मातम में बदल गईं। जिस घर में कुछ ही घंटों पहले हंसी-खुशी का माहौल था, वहां अब सिर्फ सन्नाटा और आंसू हैं। 👉 ऐसी ही ताजा और भरोसेमंद खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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खंडवा में किसानों का अनोखा विरोध: सरकार की निकाली ‘अर्थी’, सैटेलाइट सर्वे और खरीदी व्यवस्था पर उठाए सवाल

मध्यप्रदेश के खंडवा में किसानों का गुस्सा अब सड़कों पर खुलकर नजर आने लगा है। संयुक्त कृषक संगठन के बैनर तले किसानों ने सरकार के खिलाफ अनोखा विरोध प्रदर्शन करते हुए ‘सरकार की अर्थी’ निकाल दी। यह अर्थी यात्रा शहर की पुरानी अनाज मंडी से शुरू होकर राजा हरिश्चंद्र मुक्तिधाम तक पहुंची, जहां किसानों ने प्रतीकात्मक रूप से अर्थी फेंककर अपना विरोध जताया। इस प्रदर्शन में करीब 300 किसान शामिल हुए। सैटेलाइट सर्वे बना किसानों की परेशानी किसानों का कहना है कि सरकार द्वारा खेतों की सैटेलाइट से निगरानी में भारी गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। संगठन के प्रवक्ता जय पटेल के मुताबिक, “खेत में गेहूं खड़ा है, नरवाई भी दिख रही है, लेकिन सैटेलाइट रिपोर्ट में फसल ही नहीं दिखा रहा। ऐसे में किसानों का स्लॉट बुक नहीं हो पा रहा।” उन्होंने आरोप लगाया कि इस तकनीकी खामी के कारण किसान अपनी उपज समर्थन मूल्य पर बेचने से वंचित हो रहे हैं। खरीदी व्यवस्था पर भी सवाल किसानों ने सरकार के उस दावे पर भी सवाल उठाया, जिसमें कहा गया था कि गेहूं का एक-एक दाना खरीदा जाएगा। किसानों के अनुसार, जिले में अभी तक 5% खरीदी भी नहीं हो पाई है। स्लॉट बुकिंग न होने के कारण किसान मजबूरी में अपनी फसल कम दाम पर मंडी में बेचने को मजबूर हैं। गलत जुर्माने का आरोप किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि कई मामलों में खेत में आग शॉर्ट सर्किट से लगती है, लेकिन सैटेलाइट सर्वे इसे नरवाई जलाना बताकर भारी जुर्माना वसूल लिया जाता है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति और खराब हो रही है। 100 गांवों के किसान हुए शामिल इस विरोध प्रदर्शन में करीब 100 गांवों के 300 किसान शामिल हुए। कई किसान शादी-ब्याह जैसे पारिवारिक कार्यक्रम छोड़कर इस ‘अंतिम यात्रा’ में पहुंचे। करीब दो घंटे तक तेज धूप में किसानों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया और अपनी मांगों को जोरदार तरीके से उठाया। किसानों का कहना है कि जब तक सैटेलाइट सर्वे की खामियां दूर नहीं होतीं और खरीदी व्यवस्था सुधरती नहीं, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। ऐसी ही जमीनी और किसानों से जुड़ी हर खबर के लिए जुड़े रहें —www.deshharpal.com
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उज्जैन में बड़ा हादसा टला: WhatsApp स्टेटस लगाकर पति-पत्नी ने की आत्महत्या की कोशिश, पुलिस ने बचाई जान

मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में गुरुवार रात एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जहां एक दंपती ने व्हाट्सएप स्टेटस लगाकर आत्महत्या की कोशिश की। हालांकि, समय रहते पुलिस की तत्परता से दोनों की जान बचा ली गई। पारिवारिक विवाद से थे परेशान जानकारी के मुताबिक, घट्टिया थाना क्षेत्र के नजरपुर निवासी पति-पत्नी लंबे समय से पारिवारिक विवाद और मानसिक तनाव से जूझ रहे थे। परेशान होकर उन्होंने आत्महत्या जैसा खतरनाक कदम उठाने का फैसला किया। आत्महत्या से पहले पति ने व्हाट्सएप स्टेटस पर परिवार से परेशान होने की बात लिखी और इसमें मां-बाप समेत 12 लोगों के नाम का जिक्र किया। WhatsApp स्टेटस से अलर्ट हुई पुलिस स्टेटस की जानकारी मिलते ही थाना प्रभारी करण खोवाल तुरंत एक्शन में आए और पुलिस टीम को मौके पर भेजा। जब टीम नजरपुर स्थित घर पहुंची, तो दरवाजा अंदर से बंद मिला। खिड़की से देखने पर पता चला कि पति-पत्नी फंदे पर झूल रहे हैं। दरवाजा तोड़कर बचाई गई जान थाना प्रभारी ने बाहर से बातचीत कर दोनों का ध्यान भटकाया, जबकि टीम को दूसरे रास्ते से अंदर घुसने का इशारा किया गया। इसके बाद पुलिस ने दरवाजा तोड़कर दोनों को तुरंत फंदे से नीचे उतार लिया। उस समय दोनों की सांसें चल रही थीं, जिसके बाद उन्हें तुरंत शासकीय अस्पताल घट्टिया में भर्ती कराया गया। इलाज के बाद अब दोनों खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं। दूसरी शादी बना विवाद की वजह पुलिस जांच में सामने आया है कि युवक की दूसरी शादी को लेकर उसके पिता नाराज थे और उसे घर से बेदखल कर दिया था। इसी कारण लंबे समय से परिवार में विवाद चल रहा था। युवक को पहली पत्नी से दो बच्चे हैं, जबकि दूसरी पत्नी से कोई संतान नहीं है। पारिवारिक तनाव के चलते ही दंपती ने यह कदम उठाया। पुलिस की सूझबूझ से बचीं दो जिंदगियां थाना प्रभारी करण खोवाल ने दोनों को समझाइश दी और निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया। इस पूरी कार्रवाई में उपनिरीक्षक अलकेश डांगे और प्रधान आरक्षक राजेंद्र राठौर की अहम भूमिका रही। पुलिस की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से एक बड़ा हादसा टल गया और दो जिंदगियां बच सकीं। ऐसी ही जमीनी और भरोसेमंद खबरों के लिए जुड़े रहें —www.deshharpal.com
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MP में किसान ब्याज के जाल में फंसे: गेहूं नहीं बिका, लेकिन बढ़ता गया कर्ज का बोझ

मध्यप्रदेश में सहकारिता विभाग के नियम और गेहूं खरीदी की तारीखों के बीच फंसे किसान अब भारी आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि जो किसान समय पर अपना कर्ज चुकाने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें भी तकनीकी खामियों और नियमों के कारण अतिरिक्त ब्याज का बोझ उठाना पड़ रहा है। भोपाल में कांग्रेस सेवादल के सत्याग्रह में शामिल बैरसिया के ललोई गांव के किसान ओमप्रकाश शर्मा की कहानी इस समस्या की सच्चाई सामने लाती है। 15 दिन में 5 हजार से 12 हजार बना ब्याज ओमप्रकाश शर्मा ने बताया कि उन्होंने ललोई सहकारी समिति से 2 लाख रुपए का किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) लोन लिया था। उन्हें कुल 2 लाख 5 हजार रुपए चुकाने थे, जिसमें से 5 हजार रुपए पहले से ही सोसाइटी में जमा थे। उन्होंने 2 तारीख को 2 लाख 300 रुपए का चेक जमा किया, जो 24 तारीख को खाते में क्लियर भी हो गया। इसके बावजूद उन पर ब्याज लगा दिया गया। ओमप्रकाश के मुताबिक, “मेरी सिर्फ इतनी गलती थी कि मैं 5 हजार रुपए का वाउचर नहीं भर पाया, जबकि पैसे पहले से जमा थे। इसके बावजूद सोसाइटी ने उसी रकम पर 12,194 रुपए का ब्याज लगा दिया। सिर्फ 15 दिनों में इतना बड़ा ब्याज वसूल लिया गया।” गेहूं नहीं बिका, फिर कैसे चुकाएं कर्ज? ओमप्रकाश ने कहा कि किसानों की आय का मुख्य जरिया खेती है। जब तक फसल नहीं बिकती, तब तक कर्ज चुकाना संभव नहीं होता। उन्होंने सवाल उठाया, “सरकार ने 31 मार्च को कर्ज चुकाने की आखिरी तारीख तय कर दी, लेकिन गेहूं की खरीदी 9 अप्रैल से शुरू हुई। ऐसे में किसान पैसे कहां से लाएं?” आधे किसान बने डिफॉल्टर किसानों का कहना है कि मजबूरी में उन्होंने दूसरों से उधार लेकर कर्ज चुकाया, लेकिन समय पर गेहूं की खरीदी न होने के कारण प्रदेश के करीब 50% किसान डिफॉल्टर हो गए। एक तरफ फसल की खरीदी में देरी और दूसरी तरफ ब्याज का दबाव—इन दोनों के बीच किसान पूरी तरह पिसता नजर आ रहा है। अपडेट के लिए पढ़ते रहें —www.deshharpal.com
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Sabarimala

ओंकारेश्वर में श्रद्धालु से चोरी: होटल के कमरे से 2.82 लाख के सोने के कंगन गायब, 3 महीने बाद दर्ज हुई FIR

मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में एक चौंकाने वाली चोरी की घटना सामने आई है। यहां एमपी टूरिज्म के होटल टेंपल व्यू में ठहरी बेंगलुरु की महिला श्रद्धालु के कमरे से करीब 2.82 लाख रुपए कीमत के दो सोने के कंगन चोरी हो गए। मंदिर दर्शन के दौरान हुई चोरी जानकारी के मुताबिक, कर्नाटक के बेंगलुरु की रहने वाली अंजली रौत अपने परिवार के साथ 7 फरवरी को ओंकारेश्वर आई थीं। उन्होंने एमपी टूरिज्म के होटल में कमरा नंबर 206 लिया था।8 फरवरी की सुबह करीब 10 बजे वे परिवार के साथ कमरे को लॉक कर मंदिर दर्शन के लिए गईं। उन्होंने अपने दोनों सोने के कंगन पर्स में रख दिए थे। लेकिन जब दोपहर करीब 12 बजे वापस लौटीं, तो पर्स से दोनों कंगन गायब थे। मदद न मिलने पर बेंगलुरु में दर्ज कराई FIR चोरी की जानकारी मिलने के बाद महिला ने होटल प्रबंधन और स्थानीय पुलिस से शिकायत की, लेकिन आरोप है कि उन्हें कोई ठोस मदद नहीं मिली। इसके बाद अंजली रौत बेंगलुरु लौट गईं और वहां पुलिस में जीरो FIR दर्ज कराई। कोर्ट के आदेश पर MP में दर्ज हुआ मामला बेंगलुरु कोर्ट के निर्देश पर केस डायरी मध्यप्रदेश भेजी गई। इसके बाद करीब साढ़े तीन महीने बाद, 22 अप्रैल को मांधाता पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। पुलिस बोली- CCTV मिलना मुश्किल पुलिस का कहना है कि घटना को काफी समय बीत चुका है, इसलिए होटल के CCTV फुटेज मिलना मुश्किल हो सकता है। फिर भी पुलिस अब फुटेज और मुखबिर तंत्र की मदद से मामले को सुलझाने की कोशिश कर रही है। इस घटना ने धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। श्रद्धालु अब अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं। 👉 ऐसी ही महत्वपूर्ण और अपडेट खबरों के लिए जुड़े रहें DeshHarPal के साथ।अधिक जानकारी के लिए विजिट करें: www.deshharpal.com
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जबलपुर में दर्दनाक हादसा: नहर में डूबीं तीन नाबालिग लड़कियां, शादी की खुशियां मातम में बदली

जबलपुर से करीब 40 किलोमीटर दूर बरगी थाना क्षेत्र के सालीबाड़ा गांव में गुरुवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हो गया। सुबह करीब 11 बजे नहर में नहाने उतरी पांच लड़कियों में से तीन गहरे पानी में डूब गईं। इस घटना के बाद पूरे गांव में हड़कंप मच गया। मिली जानकारी के मुताबिक, सभी लड़कियां एक ही परिवार से जुड़ी थीं और गांव में चल रहे शादी समारोह में शामिल होने आई थीं। दो लड़कियां जबलपुर से आई थीं, जबकि बाकी पास के गांव की रहने वाली थीं। खुशियों के बीच ये हादसा परिवार के लिए बड़ी त्रासदी बन गया। घटना की सूचना मिलते ही बरगी थाना पुलिस और SDRF की टीम मौके पर पहुंच गई। करीब तीन घंटे से लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है, लेकिन खबर लिखे जाने तक तीनों लड़कियों का कोई पता नहीं चल सका है। लापता लड़कियों की पहचान शीतल पटेल (16) निवासी कटियाघाट, तनु पटेल (14) और सानिया पटेल (14) के रूप में हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नहर के पास मौजूद लोगों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन पानी ज्यादा गहरा होने और तेज बहाव के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका। इस घटना के बाद परिवार और गांव में शोक का माहौल है। शादी की खुशियां पल भर में मातम में बदल गईं। 👉 इस तरह की हर बड़ी और छोटी खबर के लिए जुड़े रहें DeshHarPal के साथ।अधिक जानकारी के लिए विजिट करें: www.deshharpal.com
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भोपाल में पॉलिटेक्निक चौराहा पर प्रदर्शन पर रोक, धरना-रैली और पुतला दहन की नहीं मिलेगी अनुमति

Bhopal में पॉलिटेक्निक चौराहा पर प्रदर्शन पर रोक, धरना-रैली और पुतला दहन की नहीं मिलेगी अनुमति

मध्य प्रदेश की राजधानी Bhopal से एक बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। शहर के संवेदनशील माने जाने वाले पॉलिटेक्निक चौराहा पर अब किसी भी तरह के प्रदर्शन, धरना, रैली या पुतला दहन की अनुमति नहीं दी जाएगी। पुलिस प्रशासन के इस फैसले के बाद अब यहां किसी भी प्रकार के विरोध-प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई है। पुलिस कमिश्नर ने क्या बताया? पुलिस कमिश्नर ने बताया कि यह निर्णय शहर में कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए लिया गया है। अक्सर इस इलाके में प्रदर्शन के कारण जाम और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। क्यों लिया गया यह फैसला? आगे क्या नियम रहेगा? अब इस क्षेत्र में किसी भी संगठन या समूह को प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि नियम तोड़ने पर कार्रवाई भी की जाएगी। लोगों की प्रतिक्रिया इस फैसले को लेकर शहर में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे सही कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थान दिया जाना चाहिए।
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सागर में दिल्ली नंबर कार से अवैध शराब बरामद: हादसे के बाद खुला राज, एक गिरफ्तार, 3 फरार

मध्यप्रदेश के सागर जिले में गढ़ाकोटा थाना पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली नंबर की कार से अवैध शराब बरामद की है। खास बात यह है कि यह पूरा मामला एक सड़क हादसे के बाद सामने आया। पुलिस के अनुसार, मंगलवार रात सूचना मिली थी कि चनौआ खुर्द के पास बरखेड़ा गौतम मार्ग पर एक क्षतिग्रस्त कार सड़क किनारे खड़ी है और उसका चालक अंदर फंसा हुआ है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और चालक को सुरक्षित बाहर निकाला। तलाशी में मिली 9 पेटी देशी शराब जब पुलिस ने कार की तलाशी ली, तो अंदर से 9 पेटी देशी शराब बरामद हुई। इसके बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कार और शराब को जब्त कर लिया। पकड़े गए चालक ने अपना नाम जोगेंद्र पिता वीरसिंह राजपूत बताया है। हादसे ने खोल दी तस्करी की पोल पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह अपने तीन साथियों के साथ सागर से गढ़ाकोटा की ओर शराब लेकर जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिससे पूरी साजिश सामने आ गई। एक गिरफ्तार, 3 आरोपी फरार गढ़ाकोटा थाना प्रभारी शुभम दुबे ने बताया कि आरोपी जोगेंद्र को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसके खिलाफ आबकारी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। वहीं, उसके तीन साथी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है। 👉 ऐसी ही ताजा और सटीक खबरों के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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जबलपुर में नौकरानी से मारपीट और ठगी: नशा देकर 6.30 लाख निकाले, CCTV में कैद हुई क्रूरता

मध्यप्रदेश के जबलपुर से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक नौकरानी के साथ न सिर्फ बेरहमी से मारपीट की गई, बल्कि साजिश रचकर उसके बैंक खाते से लाखों रुपये भी निकाल लिए गए। घटना आधारताल थाना क्षेत्र की है। पीड़िता पूनम बर्मन ने एएसपी सूर्यकांत शर्मा को शिकायत के साथ CCTV फुटेज भी सौंपे हैं। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि मालकिन अंजू पांडे उसे थप्पड़ मार रही है और बाल पकड़कर जमीन पर घसीट रही है। नशा देकर चेक पर साइन करवाए, खाते से निकाले पैसे जानकारी के मुताबिक पूनम, अंजू पांडे के घर काम करती थी। आरोप है कि उसे नशे की गोलियां खिलाकर जबरन चेक पर साइन करवाए गए। इसके बाद उसे कार में बैठाकर बैंक ले जाया गया और खाते से पैसे निकलवा लिए गए। जब पूनम को होश आया और उसने विरोध किया, तो उसके साथ मारपीट की गई। खाते में थे 6.30 लाख रुपए, सब निकाल लिए पीड़िता की बहन हीरा बाई ने बताया कि पूनम के बैंक खाते में करीब 6 लाख 30 हजार रुपए थे, जिन्हें आरोपी ने निकलवा लिया। इतना ही नहीं, उसकी पूरी कमाई और बैंक से जुड़े जरूरी दस्तावेज भी अपने पास रख लिए गए। “पैसे देने से मना किया तो पीटा” पूनम ने बताया कि वह कई महीनों से काम कर रही थी। अचानक उसकी मालकिन ने पैसों की मांग शुरू कर दी। जब उसने मना किया, तो उसके साथ मारपीट की गई और पूरी साजिश के तहत उसके खाते से पैसे निकलवा लिए गए। पुलिस को सौंपी शिकायत, जांच जारी बुधवार को पूनम अपनी बहनों के साथ एसपी कार्यालय पहुंची और पूरे मामले की शिकायत की। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि CCTV फुटेज और शिकायत के आधार पर जल्द कार्रवाई की जाएगी। शिवपुरी में भी शर्मनाक घटना इसी तरह का एक और मामला शिवपुरी से सामने आया है, जहां एक बस कंडक्टर ने महिला यात्री को सड़क पर फेंक दिया। महिला का कसूर सिर्फ इतना था कि उसने ज्यादा किराया देने से इनकार किया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कंडक्टर ने महिला के साथ मारपीट की और गालियां दीं। इस दौरान पास खड़ा उसका मासूम बच्चा अपनी मां को छोड़ने की गुहार लगाता रहा, लेकिन कंडक्टर का दिल नहीं पसीजा। 👉 ऐसी ही सच्ची और जमीनी खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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Bittu Tabahi

Bittu Tabahi ने बदली सोच, अकेले शुरू किया नदी सफाई अभियान; नगरपालिका भी हुई प्रभावित

नदी में गंदगी देखकर ज्यादातर लोग शिकायत करते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के एक युवक ने शिकायत करने के बजाय खुद कुछ करने की ठानी। स्थानीय स्तर पर ‘बिट्टू तबाही’ (Bittu Tabahi) के नाम से पहचाने जाने वाले इस युवक ने अकेले ही नदी की सफाई का जिम्मा उठा लिया। उनका यह जज्बा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बिट्टू ने नदी में जमा कचरे और गंदगी को देखकर सफाई अभियान शुरू किया। शुरुआत किसी बड़े इंतजाम या टीम के साथ नहीं हुई। उन्होंने अपने स्तर पर सफाई करना शुरू किया और लगातार इस काम में जुटे रहे। नदी को साफ रखने का लिया संकल्प बिट्टू का मानना है कि नदी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि आसपास के लोगों और पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने नदी में जमा कचरे को हटाने की पहल की। उनका यह प्रयास धीरे-धीरे स्थानीय लोगों का ध्यान खींचने लगा। लोगों ने देखा कि बिना किसी दबाव या दिखावे के बिट्टू लगातार नदी की सफाई में लगे हुए हैं। नगरपालिका ने भी की पहल की सराहना बिट्टू के लगातार सफाई अभियान की जानकारी नगरपालिका तक पहुंची तो उनके प्रयास की सराहना की गई। एक युवक द्वारा अपने स्तर पर नदी को साफ रखने की कोशिश को अधिकारियों ने सकारात्मक कदम माना। इस पहल ने यह भी दिखाया कि अगर कोई व्यक्ति अपने आसपास के पर्यावरण को लेकर जिम्मेदारी महसूस करे, तो छोटी शुरुआत भी बड़ा संदेश दे सकती है। सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आया अभियान बिट्टू का नदी सफाई अभियान अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। उनके प्रयास को देखकर दूसरे लोगों में भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद है। आज नदियों में बढ़ता कचरा और प्रदूषण बड़ी चुनौती है। ऐसे में बिट्टू की पहल लोगों को यह संदेश देती है कि नदी को साफ रखना सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। ‘बिट्टू तबाही’ ने दी एक अलग मिसाल बिट्टू की कहानी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने बदलाव का इंतजार नहीं किया, बल्कि खुद बदलाव की शुरुआत करने का फैसला लिया। अकेले शुरू किया गया उनका यह सफाई अभियान अब दूसरों के लिए प्रेरणा बनता दिखाई दे रहा है। कई बार किसी बड़े बदलाव की शुरुआत बड़े अभियान से नहीं, बल्कि एक छोटे से कदम से होती है। बिट्टू का यह प्रयास उसी सोच की मिसाल है—अगर इरादा मजबूत हो, तो एक इंसान भी बदलाव की शुरुआत कर सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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World Map में बड़ा बदलाव! UN ने Africa के असली Size को दिखाने का रास्ता साफ किया

दुनिया का नक्शा (World Map) देखते हुए शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इसमें दिखाई देने वाले देशों और महाद्वीपों का आकार असलियत से अलग भी हो सकता है। लेकिन अब इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र में एक अहम पहल हुई है। UN महासभा ने ऐसे World Map को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें धरती के अलग-अलग हिस्सों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाने की कोशिश की गई है। इस बदलाव के बाद नक्शे पर Africa पहले से काफी बड़ा दिखाई देगा, जबकि Europe और North America, खासकर US का आकार पुराने नक्शे की तुलना में छोटा नजर आ सकता है। प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला, लेकिन अमेरिका ने इसका विरोध किया। पुराने World Map में आखिर समस्या क्या है? दुनिया के स्कूलों और कई नक्शों में लंबे समय से Mercator Projection का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे 16वीं सदी में Gerardus Mercator ने तैयार किया था। उस समय इसका सबसे बड़ा फायदा समुद्री यात्राओं और Navigation में था। लेकिन Mercator Projection की एक खासियत ही इसकी सबसे बड़ी कमी भी बन गई। इसमें जैसे-जैसे कोई क्षेत्र Equator से दूर जाता है, उसका आकार नक्शे पर ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि Greenland जैसे इलाके नक्शे पर अपनी वास्तविकता से बहुत बड़े नजर आते हैं। दूसरी तरफ Africa, जो दुनिया के सबसे बड़े महाद्वीपों में से एक है, अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देता है। मसलन, सामान्य Mercator Map में Greenland और Africa का आकार देखकर किसी को लग सकता है कि दोनों लगभग बराबर हैं। असल में Africa का क्षेत्रफल Greenland से करीब 14 गुना ज्यादा है। Equal Earth Projection क्यों चर्चा में है? UN के प्रस्ताव में Equal Earth Projection जैसे नक्शों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इस Projection की खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग महाद्वीपों के क्षेत्रफल को ज्यादा सही अनुपात में दिखाया जाता है। यानी नक्शे को देखकर Africa का वास्तविक विशाल आकार ज्यादा साफ समझ में आता है। Europe और North America भी Mercator Map की तुलना में छोटे दिखाई देते हैं। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है—न तो Africa बड़ा हुआ है और न ही Europe या America छोटा। बदलाव सिर्फ उस तरीके में है, जिससे उन्हें नक्शे पर दिखाया जाता है। America ने UN के प्रस्ताव का विरोध क्यों किया? इस प्रस्ताव पर अमेरिका का रुख बाकी देशों से अलग रहा। मतदान के दौरान अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया। अमेरिकी पक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया कि संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक स्तर की बड़ी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। वहीं प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि नक्शा सिर्फ रास्ता या देश की लोकेशन बताने वाला साधन नहीं है। यह लोगों के मन में दुनिया की एक तस्वीर भी बनाता है। अफ्रीकी देशों की तरफ से लंबे समय से यह बात उठती रही है कि पुराने नक्शों में Africa का वास्तविक आकार सही तरीके से सामने नहीं आता। इसी सोच के साथ “Correct the Map” अभियान को आगे बढ़ाया गया। UN के फैसले से क्या सभी Maps बदल जाएंगे? यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब अचानक हर जगह नया नक्शा दिखाई देने लगेगा। UN महासभा का यह फैसला कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। यानी Google Maps, स्कूल की किताबों, सरकारी दस्तावेजों या दूसरे Digital Platforms को तुरंत अपना नक्शा बदलना जरूरी नहीं है। इसका मकसद देशों, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया और दूसरे संगठनों को ऐसे Map Projections अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो दुनिया के क्षेत्रफल को ज्यादा सही तरीके से दिखाते हों। इसके बावजूद Mercator Projection पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है। Navigation और समुद्री यात्राओं जैसी जरूरतों में इसका इस्तेमाल आज भी उपयोगी माना जाता है। India पर क्या असर पड़ेगा? भारत को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस नए World Map से देश का आकार या सीमा बदल जाएगी? इसका जवाब है—नहीं। भारत की जमीन, क्षेत्रफल और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इस प्रस्ताव का कोई असर नहीं पड़ेगा। सिर्फ नक्शे पर भारत और बाकी देशों को दिखाने का अनुपात बदल सकता है। अगर Equal Earth या इसी तरह की Projection का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ता है तो आने वाले समय में School Geography Books, Educational Charts, News Graphics और Digital Maps में दुनिया की तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे सकती है। भारत के लिए इसका असर मुख्य रूप से शिक्षा और Geography की समझ के स्तर पर होगा। बच्चों और आम लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि नक्शे पर दिखाई देने वाला आकार हमेशा किसी देश या महाद्वीप के वास्तविक क्षेत्रफल के बराबर नहीं होता। Africa के लिए इसे बड़ी उपलब्धि क्यों माना जा रहा है? इस पूरे विवाद में Africa सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में है। समर्थकों का कहना है कि सदियों से इस्तेमाल हो रहे नक्शों ने अनजाने में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की एक असंतुलित तस्वीर बना दी है। Africa दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है और इसके बावजूद Mercator Map में इसका आकार उसकी वास्तविक विशालता के मुकाबले कम नजर आता है। यही वजह है कि African countries और African Union की ओर से इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। उनके लिए यह केवल Map Projection का मामला नहीं, बल्कि दुनिया के सामने Africa की वास्तविक तस्वीर रखने का भी सवाल है। क्या दुनिया सच में बदल गई? नहीं। दुनिया का भूगोल बिल्कुल नहीं बदला है। न कोई नया देश बना है, न किसी देश की सीमा बदली है और न ही Africa का क्षेत्रफल अचानक बढ़ गया है। बदलाव सिर्फ इतना है कि दुनिया को कागज या स्क्रीन पर किस तरह दिखाया जाए, इस पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा सामने आई है। एक तरह से देखें तो यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि नक्शा हमेशा पूरी तरह निष्पक्ष तस्वीर नहीं होता। उसे बनाने का तरीका तय करता है कि हमें दुनिया का कौन-सा हिस्सा कितना बड़ा या छोटा दिखाई देगा। आने वाले वर्षों में अगर Equal Earth जैसी projections को ज्यादा अपनाया जाता है, तो संभव है कि नई पीढ़ी के लिए World Map की तस्वीर वही न हो,...
Swatantra Bhardwaj

Swatantra Bhardwaj Detained: CJP Protest के बाद स्वतंत्र भारद्वाज हिरासत में

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP Protest के दौरान एक छात्रा के पिता के साथ कथित मारपीट का मामला अब फिर चर्चा में है। मामले में आरोपी बताए जा रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज (Swatantra Bhardwaj) को दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थकों के प्रदर्शन और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग के कुछ घंटे बाद हुई। Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर CJP के प्रतिनिधि और समर्थक शुक्रवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से मामले में जल्द कार्रवाई करने और आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ राजनीतिक नेता भी वहां पहुंचे। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बातचीत हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया और इसके बाद भारद्वाज को ट्रेस करने के लिए टीमें सक्रिय की गईं। क्या है पूरा मामला? यह विवाद जंतर-मंतर पर CJP के एक प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी। इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार के नाम FIR में शामिल किए गए थे। मामला उस समय और गरमा गया, जब स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े एक Podcast Video की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वीडियो में भारद्वाज ने घटना को लेकर आपत्तिजनक दावे किए थे। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई। Viral Video ने बढ़ाया विवाद वायरल वीडियो सामने आने के बाद CJP ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। संगठन का कहना था कि वीडियो में कथित तौर पर घटना को लेकर किए गए दावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वहीं दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही थी और मेडिकल रिपोर्ट में चोट को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए कुछ दावों की पुष्टि नहीं हुई थी। Bulandshahr में पुलिस ने पकड़ा पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की टीमों ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में ट्रेस किया। रिपोर्टों में बताया गया कि पुलिस की कार्रवाई से पहले वह वहां से निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थक स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इससे मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर चल रहा विवाद भी फिलहाल एक नए चरण में पहुंच गया है। FIR में SC/ST Act की धाराएं जोड़ने की जानकारी प्रदर्शन के बाद पुलिस की ओर से मामले में SC/ST Act से संबंधित धाराएं जोड़ने की बात सामने आई। पीड़ित की दोबारा मेडिकल जांच कराए जाने की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई है। हालांकि, मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच और आगे की पुलिस कार्रवाई पर निर्भर करेगी। आरोपों की पुष्टि अदालत की प्रक्रिया में ही होगी। पुलिस के सामने अब आगे की जांच बड़ी चुनौती स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने के बाद अब पुलिस के सामने वायरल वीडियो, FIR में दर्ज आरोपों, मेडिकल रिपोर्ट और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच अहम होगी। फिलहाल इस मामले ने CJP Protest, Delhi Police और Social Media Influencer को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस की ओर से क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Saharanpur

UP Bulldozer Action: Saharanpur कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर चला बुलडोजर, मायावती-इकरा हसन ने उठाए सवाल

Saharanpur उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने शनिवार को मस्जिद के खिलाफ Bulldozer Action शुरू कर दिया। कार्रवाई की खबर फैलते ही इलाके में हलचल बढ़ गई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई। किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन का एक्शन कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर जमीन के स्वामित्व और निर्माण की वैधता पर काफी समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन का दावा है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है और निर्माण को अवैध माना गया है। मामला पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा। जुलाई में अदालत ने मस्जिद को हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही संबंधित पक्ष पर करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति लगाए जाने की बात भी सामने आई थी। इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी गई थी। 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोका मस्जिद पर कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इकरा हसन और पुलिस अधिकारियों के बीच इस दौरान तीखी बहस भी हुई। इसका वीडियो सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। बाद में उनके आवास के बाहर पुलिस बल तैनात किए जाने की भी खबर सामने आई। इकरा हसन ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोका जा रहा है। उनका कहना था कि वह मौके पर जाकर हालात देखना चाहती थीं। मायावती ने सरकार से कार्रवाई रोकने को कहा सहारनपुर मस्जिद विवाद पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार से कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की और मामले को संवेदनशील बताते हुए सावधानी से कदम उठाने की बात कही। मायावती ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह का तनाव बढ़ने से रोकना जरूरी है। उन्होंने लोगों से भी शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। इमरान मसूद बोले- हाईकोर्ट जाएंगे सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया है। उनका कहना है कि मस्जिद की जमीन और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर उनका पक्ष अलग है। जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद मसूद ने मामले को हाईकोर्ट ले जाने की बात कही है। उनका कहना है कि आगे की कानूनी लड़ाई अदालत में लड़ी जाएगी और उपलब्ध दस्तावेजों को वहां रखा जाएगा। प्रशासन और विपक्ष के दावे अलग-अलग पूरे विवाद में प्रशासन और मस्जिद पक्ष के दावे अलग हैं। प्रशासन जहां निर्माण को सरकारी जमीन पर हुआ अवैध निर्माण बता रहा है, वहीं मस्जिद से जुड़े लोग और कुछ विपक्षी नेता इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं। यही वजह है कि मामला सिर्फ बुलडोजर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। अब इसकी गूंज राजनीतिक मंच से लेकर अदालत तक सुनाई दे रही है। आगे क्या होगा? सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर हुई कार्रवाई के बाद अब सबकी नजर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर है। इमरान मसूद की ओर से हाईकोर्ट जाने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में अदालत में इस मामले को लेकर क्या रुख सामने आता है, यह महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई के बाद सहारनपुर में राजनीतिक माहौल गर्म है। एक तरफ अधिकारी कोर्ट के आदेश के पालन की बात कह रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nepal

Nepal Flood: दार्चुला में Landslide का खतरा बढ़ा, Trishuli से भारतीय परिवार का Rescue; हजारों Missing

नेपाल (Nepal) में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बाद हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नदियों का जलस्तर बढ़ने, मलबा आने और पहाड़ी इलाकों में Landslide के खतरे ने राहत और बचाव अभियान को और मुश्किल बना दिया है। सबसे चिंता की बात यह है कि हादसे के कई दिन बाद भी हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि, इसी बीच Trishuli क्षेत्र से दो लोगों को नौ दिन बाद जिंदा निकालना राहत और उम्मीद की बड़ी खबर बनकर सामने आया है। दार्चुला में Landslide का खतरा, निचले इलाकों पर नजर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। दार्चुला समेत संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से निचले इलाकों को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। पहाड़ों से मलबा आने और नदियों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका के बीच लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ से कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है। Trishuli से भारतीय नागरिकों का Rescue इस बीच त्रिशूली इलाके से तीन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की खबर सामने आई है। इनमें एक परिवार शामिल है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, रेस्क्यू किए गए लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और उनके भारत लौटने की प्रक्रिया में मदद की जा रही है। भारत सरकार नेपाल में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए लगातार नेपाली प्रशासन के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को Rescue किया गया है, जबकि 275 भारतीयों के लापता होने की जानकारी दी गई है। भारत ने राहत अभियान के लिए करीब 95 टन राहत सामग्री भी भेजी है। 9 दिन बाद Trishuli Tunnel से जिंदा निकले 2 मजदूर नेपाल में चल रहे Rescue Operation की सबसे बड़ी खबर Trishuli-3A Hydropower Project से आई। यहां सुरंग में फंसे संजय साह और कबीर महारजन को करीब नौ दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। दोनों को सुरंग के अंदर काफी गहराई से निकाला गया। बचाव दल ने पहले अंदर से आवाजें सुनीं और फिर संपर्क स्थापित होने के बाद ऑपरेशन तेज किया। आखिरकार दोनों को बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने उन परिवारों में भी उम्मीद जगाई है जिनके अपने लोग अभी तक लापता हैं। राहत दल अब अन्य संभावित Survivors तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं। 1300 के करीब मौतें, 5 हजार से ज्यादा लोग Missing इस प्राकृतिक आपदा का असर कितना बड़ा है, इसका अंदाजा मृतकों और लापता लोगों की संख्या से लगाया जा सकता है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार 1,294 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी और 5,053 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में बदलाव देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और Hydropower Projects को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और राहत शिविरों में रह रहे हैं। Rescue Operation अभी भी जारी Trishuli Tunnel से दो लोगों को जिंदा निकाले जाने के बाद Rescue Teams का हौसला बढ़ा है। नेपाल सेना, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ लगातार प्रभावित इलाकों में Search Operation चला रहे हैं। Hydropower Projects के आसपास अभी भी बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका है। मलबा, पानी और क्षतिग्रस्त सुरंगें बचाव अभियान में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। इसके बावजूद टीमें लगातार नए रास्ते तलाश रही हैं। भारत ने नेपाल की मदद बढ़ाई नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में भारत ने भी राहत और बचाव अभियान में सहयोग बढ़ाया है। भारतीय विशेषज्ञों और राहत सामग्री को नेपाल भेजा गया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की टीमें Rescue, Medical और अन्य जरूरी सेवाओं में सहायता कर रही हैं। फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और पहाड़ी इलाकों में नए Landslide और Flood के खतरे से निपटना है। Trishuli Tunnel से नौ दिन बाद दो लोगों का जिंदा निकलना इस त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण जरूर लेकर आया है। अब Rescue Teams की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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