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मारुति वैन में आग लगी, जिंदा जला ड्राइवर:खेत की फेंसिंग में फंसा था ड्राइविंग सीट का गेट; शव की पहचान भी मुश्किल

बीना में बुधवार दोपहर एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां चलते-चलते एक मारुति वैन में अचानक आग लग गई। आग इतनी भीषण थी कि ड्राइवर जिंदा जल गया और शव की हालत इतनी खराब है कि उसकी पहचान तक नहीं हो सकी है। खेत की फेंसिंग में फंसी वैन, बाहर नहीं निकल सका ड्राइवर यह हादसा आगासौद थाना क्षेत्र में देहरी और सेमरखेड़ी गांव के बीच दोपहर करीब 12 बजे हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, वैन सड़क किनारे एक खेत की फेंसिंग में फंस गई थी। ड्राइवर की ओर का दरवाजा फेंसिंग में अटक गया, जिससे वह बाहर नहीं निकल पाया और वैन में ही फंस गया। गैस किट की वजह से तेजी से भड़की आग! स्थानीय लोगों ने बताया कि वैन में शायद गैस किट लगी थी। आग लगते ही महज 10-15 मिनट में पूरी वैन जलकर खाक हो गई। लोगों ने बताया कि उन्होंने ड्राइवर की चीखें सुनीं, लेकिन आग की तेज़ी और हालात की वजह से कोई भी उसकी मदद नहीं कर सका। कौन था ड्राइवर, अब तक रहस्य पुलिस ने बताया कि जल चुकी वैन का रजिस्ट्रेशन नंबर MP04 CB 2153 है। ग्रामीणों के मुताबिक, यह वैन अक्सर इलाके में किराना का सामान बेचने आती थी, लेकिन वैन चलाने वाले शख्स का नाम या पता उन्हें नहीं मालूम। जिस खेत की फेंसिंग में वैन फंसी, वह देहरी गांव के किसान कैलाश पटेल का बताया जा रहा है। जांच जारी, आग लगने की वजह अभी स्पष्ट नहीं फिलहाल आग लगने की वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। आगासौद थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और वैन के रजिस्ट्रेशन से अब मृतक की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं। देशहरपाल(deshharpal.com)की संवेदना: ये हादसा एक दर्दनाक चेतावनी है कि वाहनों में गैस किट का इस्तेमाल सावधानीपूर्वक किया जाए और सुरक्षा उपायों की अनदेखी न की जाए। देशहरपाल मृतक के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करता है।
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जबलपुर के पूर्व शहर युवक कांग्रेस अध्यक्ष पर इनाम घोषित:कांग्रेसी नेता के साथ मिलकर किया था JDA की जमीन का फर्जीवाड़ा, एक माह से फरार

जबलपुर विकास प्राधिकरण (JDA) की जमीनों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए हड़पने वाले गिरोह के दो मुख्य आरोपियों—यूथ कांग्रेस के पूर्व नगर अध्यक्ष जतिन राज और उनके सहयोगी मनोज नामदेव—की गिरफ्तारी के लिए अब पुलिस ने कमर कस ली है। एसपी संपत उपाध्याय ने दोनों फरार आरोपियों पर 5-5 हजार रुपए का इनाम घोषित किया है। कांग्रेस से जुड़ा चेहरा, अब भगोड़ा जतिन राज पहले एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस में पदाधिकारी रह चुके हैं। वे पार्षद भी रह चुके हैं और कांग्रेस के कई चुनाव अभियानों में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। लेकिन अब वही चेहरा जमीन के गोरखधंधे में मुख्य साजिशकर्ता बन चुका है। मनोज नामदेव के साथ मिलकर जतिन राज ने JDA की एक योजना में शामिल जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसे लाखों में बेच डाला। पुलिस ने इस मामले में सैफ नगर निवासी कयाज उर्फ शुभम उर्फ शिवम को गिरफ्तार किया है, जिसने पूछताछ में कई बड़े खुलासे किए हैं। ऐसे हुआ खुलासा दरअसल, एक माह पहले कयाज उर्फ शुभम JDA दफ्तर पहुंचा और खुद को विजय नगर निवासी केपी लटोरिया का बेटा बताकर एक जमीन को अपने नाम करने की कोशिश की। उसने नकली आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज लगाए। लेकिन JDA के CEO दीपक वैद्य को शक हुआ। जब दस्तावेजों की जांच करवाई गई तो मालूम पड़ा कि जिनके नाम पर शुभम जमीन लेना चाहता था, वे दोनों पति-पत्नी पहले ही गुजर चुके हैं और उनकी कोई संतान भी नहीं थी। इसके बाद JDA ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और शुभम को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में शुभम ने कबूल किया कि वह जतिन राज और मनोज नामदेव के साथ मिलकर JDA की खाली पड़ी जमीनों की जानकारी निकालता था। फिर नकली वारिस तैयार कर जमीनों पर कब्जा किया जाता था और उन्हें लाखों में बेच दिया जाता था। पुलिस की दबिश, लेकिन अभी तक आरोपी लापता ओमती थाना पुलिस जतिन और मनोज को पकड़ने के लिए लगातार दबिश दे रही है, लेकिन अब तक दोनों फरार हैं। पुलिस ने उनके घरों पर भी छापे मारे, लेकिन वहां से कोई सुराग नहीं मिला। एसपी ने ओमती थाना प्रभारी को दोनों की जल्द गिरफ्तारी के निर्देश दिए हैं। साथ ही इनाम घोषित कर आम जनता से भी सूचना देने की अपील की है। देशहरपाल(deshharpal.com)की अपील: अगर आपके पास जतिन राज या मनोज नामदेव के संबंध में कोई भी जानकारी है, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन को सूचित करें। जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े और घोटाले रोकने के लिए नागरिकों की सतर्कता बेहद जरूरी है।
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ग्वालियर HC में अंबेडकर प्रतिमा विवाद राजस्थान-दिल्ली-हरियाणा पहुंचा:भीम सेना की जयपुर हाईकोर्ट से ऋषि मनु की मूर्ति हटाने की चेतावनी, दोनों पक्ष बना रहे रणनीति

ग्वालियर हाईकोर्ट में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापना को लेकर शुरू हुआ विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। यह मामला न सिर्फ मध्य प्रदेश बल्कि दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान तक पहुंच चुका है। खासकर जब से भीम सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष नवाब सतपाल तंवर इस मुद्दे में कूदे हैं, तब से हालात और ज्यादा संवेदनशील हो गए हैं। भीम सेना ने सरकारों को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर ग्वालियर हाईकोर्ट में डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा नहीं लगाई गई, तो जयपुर हाईकोर्ट में लगी मनु ऋषि की प्रतिमा को हटाने के लिए आंदोलन छेड़ा जाएगा। इस बयान के बाद दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और एमपी की इंटेलिजेंस एजेंसियां अलर्ट पर आ गई हैं। कैसे शुरू हुआ विवाद? पूरा मामला 19 फरवरी 2025 को शुरू हुआ था, जब ग्वालियर हाईकोर्ट में कुछ अधिवक्ताओं ने चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत को ज्ञापन सौंपा था। उन्होंने कोर्ट परिसर में अंबेडकर प्रतिमा लगाने की मांग की थी। मौखिक सहमति के बाद पीडब्ल्यूडी ने प्लेटफार्म भी तैयार करा दिया और वकीलों ने आपसी सहयोग से मूर्ति बनवाने का ऑर्डर दे दिया। लेकिन बाद में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने यह कहते हुए विरोध शुरू कर दिया कि उन्हें न तो सूचना दी गई, न ही बिल्डिंग कमेटी से इजाजत ली गई। इसके बाद विवाद बढ़ता गया और मामला जातिगत खेमों में बंट गया—एक ओर एससी-एसटी वर्ग के वकील, दूसरी ओर सनातन परंपरा से जुड़े अधिवक्ता। सोशल मीडिया पर पोस्टर वार, चेतावनी से खौफ भीम सेना ने इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्टर और वीडियो जारी कर सरकार को खुली चेतावनी दी है। अध्यक्ष सतपाल तंवर ने कहा कि “डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा को रोकना संविधान और दलित समाज का अपमान है। अगर मूर्ति नहीं लगी, तो हम जयपुर में मनु की प्रतिमा को नहीं रहने देंगे।” भीम सेना की इस खुली धमकी के बाद मध्य प्रदेश और राजस्थान सरकारों ने अलर्ट मोड पर सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। एमपी सरकार ने इस मामले पर बयानबाजी से बचने की हिदायत दी है, लेकिन सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। 14 मई को भड़का विवाद, अब सुप्रीम कोर्ट तक जाने की तैयारी 14 मई को मूर्ति स्थापना के दिन जब वकीलों का एक पक्ष कोर्ट परिसर में मूर्ति स्थापित करने पहुंचा, तो बार एसोसिएशन ने विरोध करते हुए विवाद को नया मोड़ दे दिया। देखते ही देखते यह मामला जातिगत टकराव में बदल गया। अब दोनों पक्ष लगातार बैठकें कर रहे हैं। 19 मई को दोनों पक्षों ने जबलपुर में चीफ जस्टिस से मुलाकात की थी, जिसमें उन्हें फिलहाल माहौल शांत रखने और समाज में सौहार्द बनाए रखने की सलाह दी गई है। हालांकि, वकीलों के बीच इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। क्या बोले सतपाल तंवर? गुरुग्राम में मीडिया से बातचीत करते हुए सतपाल तंवर ने कहा, “डॉ. अंबेडकर ने इस देश के संविधान को बनाया और करोड़ों शोषितों को सम्मान दिया। ऐसे में उनकी प्रतिमा को रोकना सरासर गलत है। अगर जरूरत पड़ी, तो हम सड़कों पर उतरेंगे। ये सिर्फ मूर्ति की बात नहीं, हमारे सम्मान और अधिकार की बात है।” 👉 देशहरपाल(deshharpal.com)की अपील: यह मामला संविधान, न्याय और सामाजिक समरसता से जुड़ा है। हम सभी नागरिकों से अपील करते हैं कि शांति बनाए रखें और विवाद को बातचीत से सुलझाएं।
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पूर्व विधायक के एटीएम का क्लोन बनाया, 6.83 लाख उड़ाए:भोपाल में 54 ट्रांजेक्शन कर जालसाजों ने निकाली रकम, जांच शुरू

भोपाल की पॉश अरेरा कॉलोनी में रहने वाले पूर्व विधायक रामकिशन चौहान साइबर ठगी का शिकार हो गए हैं। उनके पंजाब नेशनल बैंक खाते से एटीएम कार्ड का क्लोन बनाकर 6 लाख 83 हजार रुपए उड़ा लिए गए। यह मामला सामने आने के बाद साइबर क्राइम ब्रांच भोपाल ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। रामकिशन चौहान, जो कभी भोजपुर विधानसभा सीट से विधायक रह चुके हैं, को 5 मई को 92 रुपए की ट्रांजेक्शन का एसएमएस मिला। शक होने पर उन्होंने बैंक जाकर स्टेटमेंट निकाली, जिसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ। 2 फरवरी से 1 मई के बीच उनके खाते से 54 बार ट्रांजेक्शन कर कुल 6.83 लाख रुपए निकाल लिए गए थे। इस फर्जीवाड़े को लेकर उन्होंने तत्काल पुलिस को शिकायत दी, जिस पर कार्रवाई करते हुए बुधवार को केस दर्ज कर लिया गया। बूथ से क्लोनिंग कर रची गई साजिश(deshharpal.com) पुलिस जांच में पता चला है कि फरवरी में रामकिशन चौहान ने अरेरा कॉलोनी के एक एटीएम से पैसे निकाले थे। संभावना जताई जा रही है कि उसी दौरान उनका एटीएम कार्ड स्किमिंग डिवाइस के ज़रिए क्लोन कर लिया गया। इसके बाद फर्जी कार्ड से बार-बार ट्रांजेक्शन कर यह साइबर ठगी की गई। अब पुलिस एटीएम बूथ के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि आरोपियों की पहचान की जा सके। फिलहाल मामले की तफ्तीश जारी है और साइबर टीम इस हाई-प्रोफाइल ठगी के पीछे छिपे गिरोह का पता लगाने में जुटी है। 👉 आम जनता से अपील है कि एटीएम का इस्तेमाल करते वक्त सतर्क रहें और संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत बैंक और पुलिस को सूचित करें।
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एक्सीडेंट में घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले को मिलेंगे 25000:डॉ. मोहन कैबिनेट का बड़ा फैसला; मोदी करेंगे इंदौर मेट्रो, दतिया-सतना एयरपोर्ट का लोकार्पण

मध्यप्रदेश में सड़क हादसों में घायल लोगों की मदद करने वालों को अब सरकार इनाम देगी। यदि कोई व्यक्ति एक्सीडेंट के बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद करता है, तो उसे 25,000 रुपए का इनाम दिया जाएगा। इस योजना का नाम “राहवीर योजना” रखा गया है। इस फैसले की घोषणा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को इंदौर के ऐतिहासिक राजवाड़ा में हुई कैबिनेट बैठक में की गई। कैसे मिलेगा इनाम? बैठक से जुड़े अन्य बड़े फैसले कैबिनेट बैठक के बाद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 मई को भोपाल आएंगे। ऐतिहासिक माहौल में हुई बैठक(deshharpal.com) बैठक इंदौर के राजवाड़ा के गणेश हॉल में आयोजित हुई। खास बात ये रही कि हॉल में देवी अहिल्या की मूर्ति को मुख्यमंत्री से आगे रखा गया। सीएम ने मूर्ति के सामने पुष्प अर्पित कर नमन किया।मुख्यमंत्री और कुछ मंत्री धोती-कुर्ता और भगवा दुपट्टा पहनकर पहुंचे। सुरक्षा के चलते मंत्रियों के साथ आए OSD और अधिकारियों को कड़ी चेकिंग के बाद ही प्रवेश मिला। हालांकि, अपने विवादित बयान को लेकर चर्चा में आए मंत्री विजय शाह इस बैठक से अनुपस्थित रहे।
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निगम के रिटायर्ड इंजीनियर अंतरसिंह की मुश्किलें बढ़ी:EOW ने शुरू की जांच; बेटे को परमिशन फाइलों से फायदा देने का आरोप

खंडवा नगर निगम के रिटायर्ड कार्यपालन यंत्री (इंजीनियर) अंतरसिंह तंवर की मुश्किलें अब और बढ़ गई हैं। एक पुराने मामले में विभागीय जांच के बाद अब EOW (आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ) ने भी केस दर्ज कर लिया है। यह शिकायत पहले नगर निगम स्तर पर की गई थी, जिसकी जांच पूरी हो चुकी है। अब इसी आधार पर भोपाल EOW में केस दर्ज होने के बाद इंदौर ब्रांच ने जांच शुरू कर दी है। क्या है पूरा मामला? आरोप है कि नगर निगम में कार्यरत रहने के दौरान अंतरसिंह तंवर ने अपने बेटे साई चंद्र सिंह जो कि एक आर्किटेक्ट हैं, को भवन निर्माण की परमिशन दिलाने में पद का दुरुपयोग किया। इस मामले में EOW इंदौर के इंस्पेक्टर संजय शुक्ला ने खंडवा नगर निगम कमिश्नर को नोटिस भेजकर एक सप्ताह (यानी 26 मई तक) में पूरी जानकारी भेजने को कहा है। ईओडब्ल्यू ने इन पांच बिंदुओं पर मांगी जानकारी: पहले भी हुई थी शिकायत(deshharpal.com) चार महीने पहले इसी मामले की शिकायत इंदौर स्थित नगरीय प्रशासन विभाग के संभागीय कार्यालय में हुई थी। इसके बाद खंडवा नगर निगम कमिश्नर प्रियंका राजावत को जांच के निर्देश दिए गए थे। कमिश्नर के अनुसार, जांच पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
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Indore Sarafa Bazaar, CM Mohan Yadav Indore Visit,

CM Mohan Yadav Indore Visit: CM Mohan Yadav ने कैबिनेट के साथ उठाया इंदौर के स्वाद का लुत्फ

इंदौर (देश हरपल):CM Mohan Yadav Indore Visit- मध्यप्रदेश की व्यावसायिक राजधानी के रूप में प्रसिद्ध इंदौर का सर्राफा बाजार केवल गहनों के लिए ही नहीं, बल्कि यहां की रातों में जगमगाने वाली स्ट्रीट फूड गलियों के लिए भी देशभर में जाना जाता है। इसी स्वाद और संस्कार को करीब से महसूस करने पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपनी कैबिनेट टीम के साथ। मुख्यमंत्री का इंदौर दौरा प्रशासनिक था, लेकिन सर्राफा बाजार की ओर उनका रुख इस दौरे को खास बना गया। जैसे ही उन्होंने बाजार में प्रवेश किया, वहां की रात्रिकालीन चहल-पहल, तेज मसालों की खुशबू, और लोकप्रिय व्यंजन जैसे गराडू, जोशी डही बड़े, भुट्टे का किस, मालपुए, और रबड़ी का स्वाद सभी मंत्रियों ने बड़े चाव से लिया। सीएम मोहन यादव ने कहा, “इंदौर केवल सफाई के लिए ही नहीं, अपने विशिष्ट स्वाद और अतिथ्य परंपरा के लिए भी राष्ट्रीय पहचान रखता है। यहां आकर हर बार कुछ नया अनुभव होता है।” इस अवसर पर शहरवासियों और व्यापारियों ने भी मुख्यमंत्री और मंत्रियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। कई जगहों पर स्थानीय लोगों ने सेल्फी और बातचीत का अवसर भी पाया। सर्राफा के दुकानदारों ने बताया कि इससे न सिर्फ बाजार को बढ़ावा मिलता है, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश में स्थानीय खानपान संस्कृति को नई पहचान भी मिलती है। इंदौर की यह यात्रा न सिर्फ प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है , बल्कि Madhya Pradesh Cabinet के लिए इंदौर टूरिज्म, स्ट्रीट फूड कल्चर, और जनता से जुड़ाव की दिशा में एक सकारात्मक संकेत भी बनकर उभरी।
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ठेके पर पंचायत, एग्रीमेंट कराने वाले पंच पर FIR:गुना में विकास कार्यों की राशि का 5% कमीशन सरपंच को देना था; चुनावी कर्ज का दबाव

जिले की करोंद ग्राम पंचायत में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ पंचायत के पूरे कामकाज को एक पंच के हवाले कर दिया गया। हैरानी की बात ये है कि यह सौदा बाकायदा 100 रुपए के स्टांप पेपर पर एग्रीमेंट करके किया गया था। अब इस मामले में पंच रणवीर सिंह कुशवाह पर धोखाधड़ी की धाराओं में कैंट थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। सरपंच ने पंच को सौंपा पंचायत संचालन, 20 लाख के बदले हुआ एग्रीमेंट जनपद पंचायत गुना को शिकायत मिली थी कि करोंद पंचायत की सरपंच लक्ष्मीबाई ने अपना पूरा अधिकार एक पंच को सौंप दिया है। जांच में यह बात सच निकली कि सरपंच ने रणवीर सिंह कुशवाह नामक व्यक्ति के साथ एग्रीमेंट किया है, जिसके तहत पंचायत संचालन की जिम्मेदारी उसे सौंपी गई थी। एग्रीमेंट में यह भी लिखा गया है कि पंचायत चुनाव में सरपंच और उनके पति ने एक अन्य व्यक्ति हेमराज सिंह से 20 लाख रुपए नगद लिए थे। गारंटी के तौर पर उन्होंने अपने बैंक खातों के चेक दिए थे और पूरा काम पंच रणवीर सिंह को सौंप दिया था। एग्रीमेंट में साफ लिखा गया कि पंचायत के कार्यों की देखरेख, निर्माण की मंजूरी, और भुगतान की जिम्मेदारी रणवीर सिंह की होगी। क्या लिखा था विवादित एग्रीमेंट में? इस एग्रीमेंट में सरपंच लक्ष्मीबाई ने लिखा कि पंचायत कार्यों की जानकारी न होने की वजह से वह रणवीर सिंह को सरपंच प्रतिनिधि के तौर पर नियुक्त कर रही हैं। वह निर्माण कार्यों की प्रक्रिया पूरी करवाएंगे और पंचायत में फाइल जमा करेंगे। एग्रीमेंट के अनुसार: जनपद पंचायत की जांच के बाद दर्ज हुआ केस जांच पूरी होने के बाद जनपद पंचायत गुना के समन्वयक सुनील कुमार खालको ने इस पूरे मामले में कैंट थाने में शिकायत दर्ज कराई। जिसके आधार पर पुलिस ने रणवीर सिंह कुशवाह के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। 🔴 बड़ा सवाल:क्या एक चुनी हुई जनप्रतिनिधि इस तरह अपने संवैधानिक अधिकारों को किसी और को सौंप सकती है? क्या पंचायतें सौदेबाज़ी का अड्डा बनती जा रही हैं? 📌 Deshharpal (deshharpal.com) अपील करता है:लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों की ज़िम्मेदारी सबसे अहम होती है। ऐसे मामलों की पारदर्शी जांच और सख्त कार्रवाई ज़रूरी है ताकि ग्राम पंचायतों की गरिमा बनी रहे।
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खंडवा-इंदौर रोड़ पर जंगल में मिली सड़ी-गली लाश:कश्मीरी नाले के पास फांसी के फंदे से लटका मिला; पहचान में जुटी पुलिस

खंडवा-इंदौर फोरलेन पर एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। देशगांव के पास जंगल में एक अधेड़ व्यक्ति की सड़ी-गली लाश पेड़ से लटकी मिली है। शव की हालत देखकर अंदाजा लगाया जा रहा है कि मौत कई दिन पहले हो चुकी है। घटना रोशिया गांव के नजदीक कश्मीरी नाले के पास की है, जहां से फोरलेन करीब 500 मीटर दूर है। शव मिलने की सूचना जंगल में लकड़ी बीनने गए एक ग्रामीण ने दी। उसने पेड़ पर लटका शव देखा और तुरंत गांववालों को बताया। इसके बाद देशगांव चौकी पुलिस को सूचना दी गई। शिनाख्त में जुटी पुलिस, अब तक नहीं पता चला नाम मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को फंदे से नीचे उतारा और पोस्टमार्टम के लिए छैगांवमाखन अस्पताल भेजा। शव बुरी तरह सड़ चुका है, जिससे चेहरा पहचानना मुश्किल हो गया है। मृतक की उम्र करीब 50 से 55 साल बताई जा रही है। चौकी प्रभारी नंदराम वासुरे के अनुसार, मृतक ने सफेद रंग की शर्ट पहन रखी थी, जिस पर काले और नीले रंग के फूल बने हुए हैं। उसने ग्रे रंग की पैंट और काले रंग के प्लास्टिक के जूते पहने हैं। उसकी लंबाई करीब 5 फीट 8 इंच है। फिलहाल उसकी पहचान नहीं हो सकी है। आसपास के गांवों में सूचना भेजी गई है। पुलिस को आत्महत्या की आशंका, मगर जांच जारी प्राथमिक जांच में मामला आत्महत्या का लग रहा है, लेकिन पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है। शव की स्थिति देखकर अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह घटना कुछ दिन पुरानी है। पुलिस ने अज्ञात शव मिलने का मामला दर्ज कर लिया है और हर सुराग की तलाश जारी है। 🔴 अपील:deshharpal.comअगर किसी ने हाल में अपने परिजन को खोया है या कोई व्यक्ति लापता है, तो वे देशगांव चौकी पुलिस से संपर्क कर सकते हैं। शायद यह खबर किसी परिवार को उनके अपने से जोड़ने में मदद कर सके।
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सीएम-मंत्री आज शाम देखेंगे मां अहिल्या का जीवन मंचन:शाही अंदाज में पटिए पर बैठकर होगी केबिनेट की बैठक, मल्हालराव और देवी अहिल्या की तस्वीर भी लगाई

20 मई को इंदौर का ऐतिहासिक राजवाड़ा एक बार फिर इतिहास रचेगा, जब आज़ादी के बाद पहली बार यहां राज्य सरकार की कैबिनेट बैठक होगी। तैयारियाँ अपने अंतिम दौर में हैं और पूरा राजवाड़ा इलाका एक भव्य आयोजन के लिए सजाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके मंत्रीगण आज शाम इंदौर पहुंचेंगे। सीएम शाम 6:30 बजे शहर में कदम रखेंगे और राजेंद्र नगर स्थित लता मंगेशकर सभागृह में मां अहिल्या के जीवन पर आधारित नाट्य मंचन देखेंगे। इसके बाद वे मशहूर सराफा चौपाटी जाकर इंदौरी स्वाद का आनंद लेंगे। राजशाही अंदाज़ में होगी बैठक, पटिए-गद्दे पर बैठेंगे मंत्री कैबिनेट बैठक पारंपरिक शैली में होगी। गणेश हॉल में मंत्री पटिए और गद्दे पर बैठेंगे, जिन पर सिंह की आकृति वाला ‘लोट’ भी रखा जाएगा। हॉल में देवी अहिल्या बाई होलकर और मल्हार राव होलकर के कार्यों को दर्शाने वाले फ्लैक्स लगाए गए हैं। साथ ही, चार छोटी और एक बड़ी एलसीडी स्क्रीन भी लगाई गई है। बैठक की शुरुआत दीप प्रज्वलन से होगी और गणेश जी की प्रतिमा को सजाया जा रहा है। पहली मंजिल पर भोजन की व्यवस्था है, जहाँ बैठक के बाद मंत्रीगण सीढ़ियों के रास्ते पहुंचेंगे और कुर्सियों पर बैठकर भोजन करेंगे। गर्मी और बिजली बाधा से बचने के लिए 30 से अधिक AC और दो दर्जन जनरेटर लगाए गए हैं। पीएम-सीएम के कटआउट और मीडिया ब्रीफिंग की भी तैयारी राजवाड़ा के बाहर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के कटआउट लगाए गए हैं। यहीं मीडिया ब्रीफिंग के लिए विशेष केबिन बनाया गया है। सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए गए हैं — केवल चेकिंग के बाद ही लोगों को भीतर प्रवेश मिलेगा। इंदौरी स्वाद से मेहमानों का स्वागत सीएम और कैबिनेट के लिए सराफा चौपाटी में इंदौरी व्यंजन तैयार रहेंगे, साथ ही गोपाल मंदिर वाली गली में 25 पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल लगाए जा रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रहेगी। राजवाड़ा और अहिल्या उद्यान को नगर निगम द्वारा खूबसूरती से सजाया जा रहा है। मूर्तियों और पत्थरों पर पॉलिश की जा रही है, बारिश को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम भी किए गए हैं। होलकर परंपरा में होगी बैठक, महिला सशक्तिकरण पर होगा फोकस मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि यह बैठक सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक संदेश देने वाली भी होगी। इसमें महिला सशक्तिकरण, इंदौर और मालवा की परंपराएं और सांस्कृतिक गौरव उजागर किया जाएगा। मुख्यमंत्री से होलकर परंपरा के अनुसार बैठक आयोजित करने के लिए मार्गदर्शन लिया गया है। चिड़ियाघर भी होगा खास आकर्षण कैबिनेट के इंदौर दौरे में इंदौर के प्राणी संग्रहालय यानी चिड़ियाघर का भ्रमण भी शामिल है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने इसकी तैयारियों का निरीक्षण किया और बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का वन्यजीवों के प्रति गहरा प्रेम है। वे पूरी कैबिनेट के साथ चिड़ियाघर जाकर वहां की व्यवस्थाएं देखेंगे। 🔴 खास बात: deshharpal.com1945 में आखिरी बार होलकर राजाओं ने राजवाड़ा दरबार हॉल में दरबार सजाया था। अब, 20 मई 2025 को, वही स्थान लोकतंत्र के दरबार के रूप में जीवंत होगा।
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Bittu Tabahi

Bittu Tabahi ने बदली सोच, अकेले शुरू किया नदी सफाई अभियान; नगरपालिका भी हुई प्रभावित

नदी में गंदगी देखकर ज्यादातर लोग शिकायत करते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के एक युवक ने शिकायत करने के बजाय खुद कुछ करने की ठानी। स्थानीय स्तर पर ‘बिट्टू तबाही’ (Bittu Tabahi) के नाम से पहचाने जाने वाले इस युवक ने अकेले ही नदी की सफाई का जिम्मा उठा लिया। उनका यह जज्बा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बिट्टू ने नदी में जमा कचरे और गंदगी को देखकर सफाई अभियान शुरू किया। शुरुआत किसी बड़े इंतजाम या टीम के साथ नहीं हुई। उन्होंने अपने स्तर पर सफाई करना शुरू किया और लगातार इस काम में जुटे रहे। नदी को साफ रखने का लिया संकल्प बिट्टू का मानना है कि नदी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि आसपास के लोगों और पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने नदी में जमा कचरे को हटाने की पहल की। उनका यह प्रयास धीरे-धीरे स्थानीय लोगों का ध्यान खींचने लगा। लोगों ने देखा कि बिना किसी दबाव या दिखावे के बिट्टू लगातार नदी की सफाई में लगे हुए हैं। नगरपालिका ने भी की पहल की सराहना बिट्टू के लगातार सफाई अभियान की जानकारी नगरपालिका तक पहुंची तो उनके प्रयास की सराहना की गई। एक युवक द्वारा अपने स्तर पर नदी को साफ रखने की कोशिश को अधिकारियों ने सकारात्मक कदम माना। इस पहल ने यह भी दिखाया कि अगर कोई व्यक्ति अपने आसपास के पर्यावरण को लेकर जिम्मेदारी महसूस करे, तो छोटी शुरुआत भी बड़ा संदेश दे सकती है। सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आया अभियान बिट्टू का नदी सफाई अभियान अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। उनके प्रयास को देखकर दूसरे लोगों में भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद है। आज नदियों में बढ़ता कचरा और प्रदूषण बड़ी चुनौती है। ऐसे में बिट्टू की पहल लोगों को यह संदेश देती है कि नदी को साफ रखना सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। ‘बिट्टू तबाही’ ने दी एक अलग मिसाल बिट्टू की कहानी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने बदलाव का इंतजार नहीं किया, बल्कि खुद बदलाव की शुरुआत करने का फैसला लिया। अकेले शुरू किया गया उनका यह सफाई अभियान अब दूसरों के लिए प्रेरणा बनता दिखाई दे रहा है। कई बार किसी बड़े बदलाव की शुरुआत बड़े अभियान से नहीं, बल्कि एक छोटे से कदम से होती है। बिट्टू का यह प्रयास उसी सोच की मिसाल है—अगर इरादा मजबूत हो, तो एक इंसान भी बदलाव की शुरुआत कर सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
UN

World Map में बड़ा बदलाव! UN ने Africa के असली Size को दिखाने का रास्ता साफ किया

दुनिया का नक्शा (World Map) देखते हुए शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इसमें दिखाई देने वाले देशों और महाद्वीपों का आकार असलियत से अलग भी हो सकता है। लेकिन अब इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र में एक अहम पहल हुई है। UN महासभा ने ऐसे World Map को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें धरती के अलग-अलग हिस्सों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाने की कोशिश की गई है। इस बदलाव के बाद नक्शे पर Africa पहले से काफी बड़ा दिखाई देगा, जबकि Europe और North America, खासकर US का आकार पुराने नक्शे की तुलना में छोटा नजर आ सकता है। प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला, लेकिन अमेरिका ने इसका विरोध किया। पुराने World Map में आखिर समस्या क्या है? दुनिया के स्कूलों और कई नक्शों में लंबे समय से Mercator Projection का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे 16वीं सदी में Gerardus Mercator ने तैयार किया था। उस समय इसका सबसे बड़ा फायदा समुद्री यात्राओं और Navigation में था। लेकिन Mercator Projection की एक खासियत ही इसकी सबसे बड़ी कमी भी बन गई। इसमें जैसे-जैसे कोई क्षेत्र Equator से दूर जाता है, उसका आकार नक्शे पर ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि Greenland जैसे इलाके नक्शे पर अपनी वास्तविकता से बहुत बड़े नजर आते हैं। दूसरी तरफ Africa, जो दुनिया के सबसे बड़े महाद्वीपों में से एक है, अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देता है। मसलन, सामान्य Mercator Map में Greenland और Africa का आकार देखकर किसी को लग सकता है कि दोनों लगभग बराबर हैं। असल में Africa का क्षेत्रफल Greenland से करीब 14 गुना ज्यादा है। Equal Earth Projection क्यों चर्चा में है? UN के प्रस्ताव में Equal Earth Projection जैसे नक्शों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इस Projection की खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग महाद्वीपों के क्षेत्रफल को ज्यादा सही अनुपात में दिखाया जाता है। यानी नक्शे को देखकर Africa का वास्तविक विशाल आकार ज्यादा साफ समझ में आता है। Europe और North America भी Mercator Map की तुलना में छोटे दिखाई देते हैं। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है—न तो Africa बड़ा हुआ है और न ही Europe या America छोटा। बदलाव सिर्फ उस तरीके में है, जिससे उन्हें नक्शे पर दिखाया जाता है। America ने UN के प्रस्ताव का विरोध क्यों किया? इस प्रस्ताव पर अमेरिका का रुख बाकी देशों से अलग रहा। मतदान के दौरान अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया। अमेरिकी पक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया कि संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक स्तर की बड़ी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। वहीं प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि नक्शा सिर्फ रास्ता या देश की लोकेशन बताने वाला साधन नहीं है। यह लोगों के मन में दुनिया की एक तस्वीर भी बनाता है। अफ्रीकी देशों की तरफ से लंबे समय से यह बात उठती रही है कि पुराने नक्शों में Africa का वास्तविक आकार सही तरीके से सामने नहीं आता। इसी सोच के साथ “Correct the Map” अभियान को आगे बढ़ाया गया। UN के फैसले से क्या सभी Maps बदल जाएंगे? यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब अचानक हर जगह नया नक्शा दिखाई देने लगेगा। UN महासभा का यह फैसला कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। यानी Google Maps, स्कूल की किताबों, सरकारी दस्तावेजों या दूसरे Digital Platforms को तुरंत अपना नक्शा बदलना जरूरी नहीं है। इसका मकसद देशों, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया और दूसरे संगठनों को ऐसे Map Projections अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो दुनिया के क्षेत्रफल को ज्यादा सही तरीके से दिखाते हों। इसके बावजूद Mercator Projection पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है। Navigation और समुद्री यात्राओं जैसी जरूरतों में इसका इस्तेमाल आज भी उपयोगी माना जाता है। India पर क्या असर पड़ेगा? भारत को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस नए World Map से देश का आकार या सीमा बदल जाएगी? इसका जवाब है—नहीं। भारत की जमीन, क्षेत्रफल और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इस प्रस्ताव का कोई असर नहीं पड़ेगा। सिर्फ नक्शे पर भारत और बाकी देशों को दिखाने का अनुपात बदल सकता है। अगर Equal Earth या इसी तरह की Projection का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ता है तो आने वाले समय में School Geography Books, Educational Charts, News Graphics और Digital Maps में दुनिया की तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे सकती है। भारत के लिए इसका असर मुख्य रूप से शिक्षा और Geography की समझ के स्तर पर होगा। बच्चों और आम लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि नक्शे पर दिखाई देने वाला आकार हमेशा किसी देश या महाद्वीप के वास्तविक क्षेत्रफल के बराबर नहीं होता। Africa के लिए इसे बड़ी उपलब्धि क्यों माना जा रहा है? इस पूरे विवाद में Africa सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में है। समर्थकों का कहना है कि सदियों से इस्तेमाल हो रहे नक्शों ने अनजाने में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की एक असंतुलित तस्वीर बना दी है। Africa दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है और इसके बावजूद Mercator Map में इसका आकार उसकी वास्तविक विशालता के मुकाबले कम नजर आता है। यही वजह है कि African countries और African Union की ओर से इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। उनके लिए यह केवल Map Projection का मामला नहीं, बल्कि दुनिया के सामने Africa की वास्तविक तस्वीर रखने का भी सवाल है। क्या दुनिया सच में बदल गई? नहीं। दुनिया का भूगोल बिल्कुल नहीं बदला है। न कोई नया देश बना है, न किसी देश की सीमा बदली है और न ही Africa का क्षेत्रफल अचानक बढ़ गया है। बदलाव सिर्फ इतना है कि दुनिया को कागज या स्क्रीन पर किस तरह दिखाया जाए, इस पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा सामने आई है। एक तरह से देखें तो यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि नक्शा हमेशा पूरी तरह निष्पक्ष तस्वीर नहीं होता। उसे बनाने का तरीका तय करता है कि हमें दुनिया का कौन-सा हिस्सा कितना बड़ा या छोटा दिखाई देगा। आने वाले वर्षों में अगर Equal Earth जैसी projections को ज्यादा अपनाया जाता है, तो संभव है कि नई पीढ़ी के लिए World Map की तस्वीर वही न हो,...
Swatantra Bhardwaj

Swatantra Bhardwaj Detained: CJP Protest के बाद स्वतंत्र भारद्वाज हिरासत में

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP Protest के दौरान एक छात्रा के पिता के साथ कथित मारपीट का मामला अब फिर चर्चा में है। मामले में आरोपी बताए जा रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज (Swatantra Bhardwaj) को दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थकों के प्रदर्शन और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग के कुछ घंटे बाद हुई। Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर CJP के प्रतिनिधि और समर्थक शुक्रवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से मामले में जल्द कार्रवाई करने और आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ राजनीतिक नेता भी वहां पहुंचे। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बातचीत हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया और इसके बाद भारद्वाज को ट्रेस करने के लिए टीमें सक्रिय की गईं। क्या है पूरा मामला? यह विवाद जंतर-मंतर पर CJP के एक प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी। इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार के नाम FIR में शामिल किए गए थे। मामला उस समय और गरमा गया, जब स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े एक Podcast Video की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वीडियो में भारद्वाज ने घटना को लेकर आपत्तिजनक दावे किए थे। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई। Viral Video ने बढ़ाया विवाद वायरल वीडियो सामने आने के बाद CJP ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। संगठन का कहना था कि वीडियो में कथित तौर पर घटना को लेकर किए गए दावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वहीं दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही थी और मेडिकल रिपोर्ट में चोट को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए कुछ दावों की पुष्टि नहीं हुई थी। Bulandshahr में पुलिस ने पकड़ा पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की टीमों ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में ट्रेस किया। रिपोर्टों में बताया गया कि पुलिस की कार्रवाई से पहले वह वहां से निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थक स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इससे मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर चल रहा विवाद भी फिलहाल एक नए चरण में पहुंच गया है। FIR में SC/ST Act की धाराएं जोड़ने की जानकारी प्रदर्शन के बाद पुलिस की ओर से मामले में SC/ST Act से संबंधित धाराएं जोड़ने की बात सामने आई। पीड़ित की दोबारा मेडिकल जांच कराए जाने की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई है। हालांकि, मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच और आगे की पुलिस कार्रवाई पर निर्भर करेगी। आरोपों की पुष्टि अदालत की प्रक्रिया में ही होगी। पुलिस के सामने अब आगे की जांच बड़ी चुनौती स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने के बाद अब पुलिस के सामने वायरल वीडियो, FIR में दर्ज आरोपों, मेडिकल रिपोर्ट और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच अहम होगी। फिलहाल इस मामले ने CJP Protest, Delhi Police और Social Media Influencer को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस की ओर से क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Saharanpur

UP Bulldozer Action: Saharanpur कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर चला बुलडोजर, मायावती-इकरा हसन ने उठाए सवाल

Saharanpur उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने शनिवार को मस्जिद के खिलाफ Bulldozer Action शुरू कर दिया। कार्रवाई की खबर फैलते ही इलाके में हलचल बढ़ गई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई। किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन का एक्शन कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर जमीन के स्वामित्व और निर्माण की वैधता पर काफी समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन का दावा है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है और निर्माण को अवैध माना गया है। मामला पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा। जुलाई में अदालत ने मस्जिद को हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही संबंधित पक्ष पर करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति लगाए जाने की बात भी सामने आई थी। इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी गई थी। 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोका मस्जिद पर कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इकरा हसन और पुलिस अधिकारियों के बीच इस दौरान तीखी बहस भी हुई। इसका वीडियो सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। बाद में उनके आवास के बाहर पुलिस बल तैनात किए जाने की भी खबर सामने आई। इकरा हसन ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोका जा रहा है। उनका कहना था कि वह मौके पर जाकर हालात देखना चाहती थीं। मायावती ने सरकार से कार्रवाई रोकने को कहा सहारनपुर मस्जिद विवाद पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार से कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की और मामले को संवेदनशील बताते हुए सावधानी से कदम उठाने की बात कही। मायावती ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह का तनाव बढ़ने से रोकना जरूरी है। उन्होंने लोगों से भी शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। इमरान मसूद बोले- हाईकोर्ट जाएंगे सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया है। उनका कहना है कि मस्जिद की जमीन और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर उनका पक्ष अलग है। जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद मसूद ने मामले को हाईकोर्ट ले जाने की बात कही है। उनका कहना है कि आगे की कानूनी लड़ाई अदालत में लड़ी जाएगी और उपलब्ध दस्तावेजों को वहां रखा जाएगा। प्रशासन और विपक्ष के दावे अलग-अलग पूरे विवाद में प्रशासन और मस्जिद पक्ष के दावे अलग हैं। प्रशासन जहां निर्माण को सरकारी जमीन पर हुआ अवैध निर्माण बता रहा है, वहीं मस्जिद से जुड़े लोग और कुछ विपक्षी नेता इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं। यही वजह है कि मामला सिर्फ बुलडोजर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। अब इसकी गूंज राजनीतिक मंच से लेकर अदालत तक सुनाई दे रही है। आगे क्या होगा? सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर हुई कार्रवाई के बाद अब सबकी नजर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर है। इमरान मसूद की ओर से हाईकोर्ट जाने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में अदालत में इस मामले को लेकर क्या रुख सामने आता है, यह महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई के बाद सहारनपुर में राजनीतिक माहौल गर्म है। एक तरफ अधिकारी कोर्ट के आदेश के पालन की बात कह रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nepal

Nepal Flood: दार्चुला में Landslide का खतरा बढ़ा, Trishuli से भारतीय परिवार का Rescue; हजारों Missing

नेपाल (Nepal) में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बाद हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नदियों का जलस्तर बढ़ने, मलबा आने और पहाड़ी इलाकों में Landslide के खतरे ने राहत और बचाव अभियान को और मुश्किल बना दिया है। सबसे चिंता की बात यह है कि हादसे के कई दिन बाद भी हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि, इसी बीच Trishuli क्षेत्र से दो लोगों को नौ दिन बाद जिंदा निकालना राहत और उम्मीद की बड़ी खबर बनकर सामने आया है। दार्चुला में Landslide का खतरा, निचले इलाकों पर नजर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। दार्चुला समेत संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से निचले इलाकों को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। पहाड़ों से मलबा आने और नदियों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका के बीच लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ से कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है। Trishuli से भारतीय नागरिकों का Rescue इस बीच त्रिशूली इलाके से तीन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की खबर सामने आई है। इनमें एक परिवार शामिल है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, रेस्क्यू किए गए लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और उनके भारत लौटने की प्रक्रिया में मदद की जा रही है। भारत सरकार नेपाल में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए लगातार नेपाली प्रशासन के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को Rescue किया गया है, जबकि 275 भारतीयों के लापता होने की जानकारी दी गई है। भारत ने राहत अभियान के लिए करीब 95 टन राहत सामग्री भी भेजी है। 9 दिन बाद Trishuli Tunnel से जिंदा निकले 2 मजदूर नेपाल में चल रहे Rescue Operation की सबसे बड़ी खबर Trishuli-3A Hydropower Project से आई। यहां सुरंग में फंसे संजय साह और कबीर महारजन को करीब नौ दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। दोनों को सुरंग के अंदर काफी गहराई से निकाला गया। बचाव दल ने पहले अंदर से आवाजें सुनीं और फिर संपर्क स्थापित होने के बाद ऑपरेशन तेज किया। आखिरकार दोनों को बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने उन परिवारों में भी उम्मीद जगाई है जिनके अपने लोग अभी तक लापता हैं। राहत दल अब अन्य संभावित Survivors तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं। 1300 के करीब मौतें, 5 हजार से ज्यादा लोग Missing इस प्राकृतिक आपदा का असर कितना बड़ा है, इसका अंदाजा मृतकों और लापता लोगों की संख्या से लगाया जा सकता है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार 1,294 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी और 5,053 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में बदलाव देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और Hydropower Projects को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और राहत शिविरों में रह रहे हैं। Rescue Operation अभी भी जारी Trishuli Tunnel से दो लोगों को जिंदा निकाले जाने के बाद Rescue Teams का हौसला बढ़ा है। नेपाल सेना, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ लगातार प्रभावित इलाकों में Search Operation चला रहे हैं। Hydropower Projects के आसपास अभी भी बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका है। मलबा, पानी और क्षतिग्रस्त सुरंगें बचाव अभियान में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। इसके बावजूद टीमें लगातार नए रास्ते तलाश रही हैं। भारत ने नेपाल की मदद बढ़ाई नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में भारत ने भी राहत और बचाव अभियान में सहयोग बढ़ाया है। भारतीय विशेषज्ञों और राहत सामग्री को नेपाल भेजा गया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की टीमें Rescue, Medical और अन्य जरूरी सेवाओं में सहायता कर रही हैं। फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और पहाड़ी इलाकों में नए Landslide और Flood के खतरे से निपटना है। Trishuli Tunnel से नौ दिन बाद दो लोगों का जिंदा निकलना इस त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण जरूर लेकर आया है। अब Rescue Teams की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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