Delhi के जनकपुरी इलाके से सामने आया एक दर्दनाक हादसा न सिर्फ एक परिवार को उजाड़ गया, बल्कि राजधानी में चल रहे निर्माण कार्यों की हकीकत भी उजागर कर गया। खुले गड्ढे में गिरकर 25 वर्षीय युवक कमल ध्यानी की मौत के मामले में दिल्ली पुलिस ने ठेकेदार राजेश प्रजापति को गिरफ्तार कर लिया है।
Delhi Janakpuri Accident: क्या है पूरा मामला
मिली जानकारी के अनुसार, कमल ध्यानी बीती रात करीब 11:30 बजे बाइक से घर लौट रहे थे। जनकपुरी इलाके में दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के तहत सड़क पर पानी की पाइपलाइन से जुड़ा काम चल रहा था। इसी दौरान सड़क पर एक गहरा गड्ढा खोदा गया था, लेकिन न तो उसे ढका गया और न ही वहां कोई चेतावनी बोर्ड, बैरिकेड या स्ट्रीट लाइट लगाई गई।
अंधेरा होने की वजह से कमल को गड्ढा दिखाई नहीं दिया और वह सीधे उसमें गिर गए। पूरी रात वह लापता रहे। सुबह स्थानीय लोगों ने गड्ढे में शव देखा, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
Kamal Dhyani Death Case में ठेकेदार की भूमिका
पुलिस जांच में सामने आया कि इस काम का जिम्मा ठेकेदार राजेश प्रजापति के पास था। आरोप है कि उसे रात में हादसे की जानकारी मिल गई थी, इसके बावजूद उसने न तो मौके पर पहुंचकर मदद की और न ही सुरक्षा के कोई इंतजाम करवाए। इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
इस मामले में गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide Not Amounting to Murder) की धाराओं में केस दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि जांच के दायरे में और भी लोग आ सकते हैं।
Delhi Jal Board और प्रशासन पर उठे सवाल
हादसे के बाद दिल्ली जल बोर्ड और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। Delhi सरकार ने मामले की जांच के लिए समिति गठित की है। साथ ही DJB के कुछ अधिकारियों को निलंबित कर उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है।
परिवार का दर्द और गुस्सा
कमल ध्यानी के परिवार का कहना है कि यह एक हादसा नहीं बल्कि साफ तौर पर लापरवाही से हुई मौत है। परिवार ने आरोप लगाया कि अगर गड्ढे को ढका गया होता या चेतावनी के इंतजाम होते, तो आज उनका बेटा जिंदा होता। उन्होंने दोषियों को सख्त सजा और सरकार से मुआवजे की मांग की है।
Delhi Road Safety पर बड़ा सवाल
यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि Delhi में चल रहे निर्माण कार्य कितने असुरक्षित तरीके से किए जा रहे हैं। खुले गड्ढे, बिना बैरिकेडिंग और लाइट के काम आम लोगों की जान पर भारी पड़ रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर कब तक ऐसी लापरवाही की कीमत निर्दोष लोग अपनी जान देकर चुकाते रहेंगे?
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