सुप्रीम कोर्ट का आदेश
Delhi-NCR Stray Dogs Case पर सुप्रीम कोर्ट का हालिया आदेश पूरे देश में बहस और विवाद का विषय बन गया है। पहले, 11 अगस्त को जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने निर्देश दिया था कि दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और गाज़ियाबाद की सभी सड़कों से आवारा कुत्तों को 8 हफ्तों के भीतर पकड़कर शेल्टर होम में रखा जाए और उन्हें वापस सड़कों पर छोड़ने की इजाज़त न दी जाए।
इस आदेश में यह भी कहा गया था कि शेल्टर होम में कुत्तों का स्टरलाइजेशन (Sterilization), टीकाकरण (Vaccination), CCTV निगरानी, और डॉग-बाइट हेल्पलाइन शुरू की जाए, जिस पर शिकायत आने के 4 घंटे के भीतर कार्रवाई हो।
नई बेंच में सुनवाई और सरकार का रुख
देशभर में भारी विरोध और कानूनी चुनौतियों के बाद, 14 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की नई तीन-न्यायाधीशों की बेंच को सौंपा।
सुनवाई के दौरान Delhi सरकार के पक्ष से सॉलिसिटर जनरल ने कहा –
“आदेश के किस हिस्से पर आपत्ति है? बच्चे मर रहे हैं… सिर्फ Sterilization से समस्या खत्म नहीं हो रही।”
विरोध और चिंताएं
- पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने चेतावनी दी कि आवारा कुत्तों को बड़े पैमाने पर हटाना Ecological Imbalance पैदा कर सकता है, जैसे 1880s में पेरिस में हुआ था, जहां कुत्तों को हटाने से चूहों की आबादी और बीमारियां बढ़ गईं।
- एनजीओ और शेल्टर संचालकों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर कुत्तों को रखने के लिए Infrastructure और Resources पर्याप्त नहीं हैं।
- मुंबई और दिल्ली सहित कई शहरों में Animal Lovers और Activists ने आदेश को अमानवीय (Inhumane) और अव्यावहारिक (Impractical) बताते हुए प्रदर्शन किए।
मामले की पृष्ठभूमि
इस आदेश की पृष्ठभूमि Delhi में हाल ही में हुई 6 साल की बच्ची की रेबीज़ से मौत है। कोर्ट ने कहा कि Public Safety को भावनाओं से ऊपर रखा जाना चाहिए। जस्टिस पारदीवाला ने सुनवाई के दौरान “The Good, The Bad and The Ugly” फिल्म का उदाहरण देकर तुरंत और सख्त कार्रवाई की जरूरत बताई।
आगे क्या?
नई बेंच इस आदेश की समीक्षा कर रही है और संभव है कि मौजूदा निर्देशों में बदलाव हो। यह भी तय हो सकता है कि दिल्ली-NCR में आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए Mass Removal Policy जारी रहेगी या फिर TNR (Trap–Neuter–Release) और Vaccination जैसी मानवीय योजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
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