अमेरिका के राष्ट्रपति और रिपब्लिकन उम्मीदवार Donald Trump ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि अमेरिका के पास “काबिल और हाई-स्किल्ड” लोग कम हैं, इसलिए उसे बाहर से टैलेंट लाना पड़ेगा।
यह बयान तब आया है जब ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीज़ा (Skilled Workers Visa) पर नई सख्त शर्तें और $100,000 की भारी फीस लागू की है।
Trump बोले – “America में skilled लोग नहीं हैं, हमें bring this talent from outside”
एक इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा —
“आप सिर्फ बेरोजगार अमेरिकियों को उठाकर हाई-टेक जॉब्स नहीं दे सकते। हमारे पास वो स्किल नहीं है, हमें यह टैलेंट बाहर से लाना होगा।”
उनका यह बयान उनके पहले के सख्त रवैये से थोड़ा अलग दिखता है। पहले ट्रंप विदेशी कर्मचारियों पर निर्भरता कम करने की बात करते थे, लेकिन अब उन्होंने माना है कि अमेरिका को “foreign talent” की ज़रूरत है।
H-1B Visa पर नया नियम: $100,000 Fee और ‘National Interest’ की शर्त
सितंबर 2025 में ट्रंप प्रशासन ने एक नई नीति लागू की, जिसके तहत:
- किसी भी नई H-1B वीज़ा आवेदन के लिए कंपनी को $100,000 (लगभग ₹83 लाख) फीस देनी होगी।
- यह फीस तभी माफ होगी जब US Homeland Security Department तय करे कि विदेशी कर्मचारी की नियुक्ति “राष्ट्रीय हित (National Interest)” में है।
यानी अब सिर्फ टॉप-क्लास स्किल्स वाले विदेशी प्रोफेशनल्स को ही अमेरिका आने का मौका मिलेगा।
India पर बड़ा असर: IT और Tech सेक्टर के लिए झटका
भारत H-1B वीज़ा पाने वाले लोगों की लिस्ट में सबसे ऊपर है।
- हर साल लाखों भारतीय इंजीनियर, सॉफ्टवेयर डेवलपर और IT प्रोफेशनल्स इस वीज़ा के जरिए अमेरिका जाते हैं।
- लेकिन $100,000 फीस के बाद अब छोटी और मिड-साइज़ कंपनियों के लिए विदेशी कर्मचारियों को हायर करना मुश्किल हो जाएगा।
- इससे अमेरिकी कंपनियां अब India में ही रिमोट वर्क और ऑफशोरिंग को बढ़ावा दे सकती हैं।
Softening या Smart Strategy?
कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि ट्रंप का बयान सुनने में “नरम” है, लेकिन असल में यह सख्ती की नई परिभाषा है।
- पहले वे विदेशी वर्कर्स को रोकना चाहते थे,
- अब उन्होंने “National Interest” का दरवाज़ा खोलकर सिर्फ टॉप टैलेंट को आने की अनुमति दी है।
मतलब – ट्रंप का अमेरिका अब quantity नहीं, quality चाहता है।
कानूनी चुनौती और आगे की राह
अमेरिका की Chamber of Commerce ने इस नई फीस नीति के खिलाफ कोर्ट में केस दायर किया है।
अगर कोर्ट ने इसे अनुचित माना तो यह पॉलिसी रद्द हो सकती है,
वरना आने वाले समय में अमेरिका का इमिग्रेशन सिस्टम और भी कठोर हो जाएगा।
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