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NDA के गढ़ गोपालगंज में सबसे ज्यादा वोटों की कटौती, मुस्लिम बहुल किशनगंज दूसरे नंबर पर

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बिहार की राजनीति में एक चौंकाने वाला ट्रेंड सामने आया है। इस बार NDA का पारंपरिक गढ़ गोपालगंज उन इलाकों में शामिल रहा, जहाँ सबसे ज्यादा वोटों की कटौती हुई। यानी यहां बड़ी संख्या में वोट बंट गए और असर साफ नतीजों पर दिखा।

दूसरे नंबर पर रहा किशनगंज, जो मुस्लिम बहुल इलाका माना जाता है। यहां वोटों का बंटवारा कई दलों के बीच हुआ, जिससे मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया।

इसके अलावा पूर्णिया, भागलपुर और मधुबनी भी टॉप 5 जिलों में रहे जहाँ वोट शेयर में भारी कटौती देखी गई। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ये इलाक़े पहले किसी एक दल के मज़बूत गढ़ हुआ करते थे, लेकिन इस बार जनता ने नए समीकरण बना दिए।

लोगों के अनुसार, स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवारों की छवि और जातीय समीकरणों ने वोटिंग पैटर्न को बुरी तरह प्रभावित किया। खास बात यह है कि कई जगहों पर युवा और पहली बार वोट करने वालों ने भी पारंपरिक सोच से हटकर निर्णय लिया।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह ट्रेंड आने वाले चुनावों के लिए बड़ा संकेत है — अब कोई इलाका पूरी तरह किसी दल का “गढ़” नहीं कहा जा सकता।

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Neha Pandey

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MP में BJP विधायक बनाम IPS विवाद: प्रीतम लोधी के बयान पर बवाल, IPS एसोसिएशन ने की कार्रवाई की मांग

मध्यप्रदेश में बीजेपी विधायक Pritam Singh Lodhi के एक बयान को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उन्होंने करैरा के एसडीओपी Ayush Jakhad पर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिसके बाद Madhya Pradesh IPS Association ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। ‘भाषा अमर्यादित और निंदनीय’ आईपीएस एसोसिएशन ने प्रेस नोट जारी कर विधायक की भाषा को अमर्यादित और निंदनीय बताया। संगठन का कहना है कि किसी जनप्रतिनिधि द्वारा इस तरह की टिप्पणी न केवल अनुचित है, बल्कि इससे प्रशासनिक व्यवस्था और अधिकारियों के मनोबल पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। अध्यक्ष ने जताई नाराजगी एसोसिएशन के अध्यक्ष Chanchal Shekhar ने कहा कि वायरल वीडियो में जिस तरह की अभद्र और धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल किया गया है, वह सार्वजनिक जीवन की गरिमा के खिलाफ है। उन्होंने इसे बेहद गंभीर मामला बताया। अधिकारी और परिवार पर टिप्पणी एसोसिएशन के अनुसार, वीडियो में नए नियुक्त पुलिस अधिकारी और उनके परिवार के प्रति भी अपमानजनक टिप्पणियां की गईं। इसे जनप्रतिनिधि के पद की मर्यादा के विपरीत बताते हुए संगठन ने कहा कि ऐसे व्यवहार से पूरे प्रशासनिक तंत्र पर असर पड़ता है। ‘धमकीपूर्ण व्यवहार स्वीकार्य नहीं’ एसोसिएशन ने साफ कहा कि जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपनी भाषा और आचरण में संयम रखें। इस तरह की धमकीपूर्ण भाषा किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार नहीं की जा सकती। कार्रवाई की मांग Madhya Pradesh IPS Association ने विधायक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही यह भी कहा कि यह घटना ऐसे दिन सामने आई है, जब Civil Services Day मनाया जा रहा है, जो और भी दुर्भाग्यपूर्ण है। 👉 अधिक खबरों और अपडेट के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com

बिलासपुर में अनोखा विरोध:फाइलके लिए सालभर चक्कर काटने पर युवक बादाम लेकर पहुंचा ऑफिस, 2 अफसर अटैच

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में सरकारी लापरवाही के खिलाफ एक अनोखा विरोध सामने आया है। फ्लैट नामांतरण की फाइल एक साल तक पेंडिंग रहने से नाराज युवक बादाम लेकर ऑफिस पहुंच गया। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद विभाग ने कार्रवाई करते हुए 2 अधिकारियों को मुख्यालय अटैच कर दिया है। एक साल तक फाइल रही पेंडिंग जानकारी के मुताबिक, तरुण साहू ने 17 मार्च 2025 को फ्लैट नाम ट्रांसफर के लिए आवेदन किया था। 11 नवंबर 2025 को प्रक्रिया पूरी होने के बाद पत्र भी जारी कर दिया गया, लेकिन इसके बावजूद फाइल उन्हें नहीं दी गई।इस दौरान युवक को करीब एक साल तक बार-बार ऑफिस के चक्कर लगाने पड़े। बादाम देकर जताया विरोध फाइल नहीं मिलने से परेशान युवक शुक्रवार को हाउसिंग बोर्ड ऑफिस आधा किलो बादाम लेकर पहुंचा। उसने स्टेट मैनेजर की टेबल पर बादाम रखते हुए कहा—“इसे खाइए, याददाश्त बढ़ेगी। जब याद आ जाए कि मेरी फाइल कहां है, तो बता दीजिए।”इस अनोखे विरोध का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। 2 अधिकारियों पर कार्रवाई मामले को गंभीर मानते हुए गृह निर्माण मंडल ने जांच कराई। लापरवाही सामने आने पर संपदा अधिकारी-कार्यपालन अभियंता एलपी बंजारे और संपदा प्रबंधक पूनम बंजारे को तत्काल प्रभाव से नवा रायपुर मुख्यालय अटैच कर दिया गया है। विभाग के आयुक्त ने कहा है कि आम लोगों के काम में देरी और लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। महिला अधिकारी ने लगाए आरोप वीडियो वायरल होने के बाद हाउसिंग बोर्ड की एक महिला अधिकारी सहित अन्य कर्मचारी एसपी ऑफिस पहुंचे। उन्होंने युवक पर जातिगत गाली देने जैसे गंभीर आरोप लगाए और कार्रवाई की मांग की। हालांकि, अभी तक इस शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। सोशल मीडिया पर बढ़ा विवाद इस मामले को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने हैं। महिला अधिकारी का कहना है कि उन्हें बिना पक्ष सुने कार्रवाई की गई, जबकि युवक ने वीडियो जारी कर आरोपों को गलत बताया है। 👉 अधिक खबरों और अपडेट के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com

रायपुर नगर निगम में बड़ा घोटाला! 100 एकड़ जमीन की फाइल गायब, 4 अधिकारी सस्पेंड

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में नगर निगम से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। ज़ोन-10 अमलीडीह ऑफिस से करीब 100 एकड़ जमीन से जुड़ी अहम फाइल गायब हो गई है। इस मामले में निगम कमिश्नर विश्वदीप की जांच के बाद 4 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। बिना मंजूरी भेजा गया प्रस्ताव जांच में सामने आया कि सड़क निर्माण से जुड़ा प्रस्ताव बिना कमिश्नर की अनुमति के ही आगे भेज दिया गया। नियमों के मुताबिक, इस तरह की मंजूरी का अधिकार केवल आयुक्त के पास होता है, लेकिन जोन स्तर से ही फाइल टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNC) को भेज दी गई। नक्शे और जमीन में बड़ा फर्क 13 अप्रैल 2026 को जांच टीम ने मौके का निरीक्षण किया। इसमें पाया गया कि प्रस्तावित नक्शा और जमीन की वास्तविक स्थिति में बड़ा अंतर है। कई मकान नक्शे में नहीं दिखाए गए, जबकि सड़कों की चौड़ाई और प्लॉट के आकार भी गलत दर्शाए गए। अवैध प्लॉटिंग पर नहीं हुई कार्रवाई जांच में यह भी सामने आया कि इलाके में लंबे समय से अवैध प्लॉटिंग हो रही थी, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। उल्टा, उसी क्षेत्र को प्रस्ताव में शामिल कर मंजूरी के लिए भेज दिया गया। 69 जमीनों की फाइलें गायब सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस मामले से जुड़ी 69 जमीनों की फाइलें गायब हैं। इनमें रजिस्ट्री दस्तावेज और पुराने रिकॉर्ड शामिल हैं। अधिकारियों के हस्ताक्षर होने के बावजूद फाइलों का गायब होना जांच समिति ने संदिग्ध माना है। साजिश और कूटरचना की आशंका जांच रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि पहले गलत प्रस्ताव तैयार किया गया, फिर बिना अनुमति उसे आगे बढ़ाया गया और जब मामला खुला तो फाइलें गायब कर दी गईं। इसे योजनाबद्ध साजिश और कूटरचना का मामला माना जा रहा है। EOW जांच की मांग पूर्व मेयर एजाज ढेबर ने इस मामले को नगर निगम के इतिहास की सबसे बड़ी लापरवाही बताया है। उन्होंने कहा कि इसमें 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का खेल हो सकता है और इसकी जांच EOW (आर्थिक अपराध शाखा) से कराई जानी चाहिए। अधिकारियों पर गंभीर आरोप नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने भी आरोप लगाया कि अधिकारियों ने बिल्डर्स को फायदा पहुंचाने के लिए यह पूरा खेल किया है। उन्होंने स्वतंत्र जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। 👉 अधिक खबरों और अपडेट के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
CSK

CSK संकट में! Ayush Mhatre Out टीम में नए युवा खिलाड़ी की एंट्री लगभग फाइनल

IPL 2026 के बीच चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के लिए एक बहुत ही निराश करने वाली खबर सामने आई है। टीम के युवा बल्लेबाज आयुष म्हात्रे चोट के कारण पूरे सीजन से बाहर हो गए हैं। यह खबर न सिर्फ टीम मैनेजमेंट के लिए, बल्कि फैंस के लिए भी बड़ा झटका है, क्योंकि उनसे काफी उम्मीदें जुड़ी हुई थीं। सूत्रों के अनुसार, आयुष म्हात्रे की चोट गंभीर है और मेडिकल टीम ने साफ कर दिया है कि वह इस सीजन में वापसी नहीं कर पाएंगे। अचानक हुए इस फैसले ने CSK की रणनीति को भी झकझोर दिया है। CSK में अब किसकी होगी एंट्री? आयुष म्हात्रे के बाहर होने के बाद CSK अब तुरंत रिप्लेसमेंट की तलाश में है। टीम मैनेजमेंट के अंदर चर्चा तेज है और एक युवा अनकैप्ड भारतीय खिलाड़ी को मौका मिलने की पूरी संभावना है। बताया जा रहा है कि यह खिलाड़ी पहले से ही टीम के साथ जुड़ा हुआ है और नेट्स में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। इसी वजह से उसकी एंट्री लगभग फाइनल मानी जा रही है। टीम पर क्या पड़ेगा असर? CSK पहले ही इस सीजन में अपनी प्लेइंग XI को लेकर कई प्रयोग कर रही थी। अब आयुष म्हात्रे के बाहर होने से मिडिल ऑर्डर की मजबूती पर असर पड़ सकता है। कप्तान और कोचिंग स्टाफ के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती सही बैलेंस बनाए रखने की है, ताकि टीम प्लेऑफ की रेस में बनी रह सके। फैंस की उम्मीदें और आगे का सफर CSK के फैंस इस खबर से थोड़े निराश जरूर हैं, लेकिन टीम का इतिहास बताता है कि वह मुश्किल हालात में भी वापसी करना जानती है। अब सभी की नजरें इस बात पर होंगी कि नया खिलाड़ी इस मौके को कैसे भुनाता है। आने वाले मैच CSK के लिए बेहद अहम हैं और हर मुकाबला टीम के प्लेऑफ सपने को प्रभावित कर सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Sabarimala

Sabarimala Case “मूर्ति छूना ईश्वर का अपमान कैसे?” सुप्रीम कोर्ट में नई बहस

सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला (Sabarimala) मंदिर से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान एक बार फिर आस्था, परंपरा और कानून के बीच संतुलन को लेकर गहन बहस देखने को मिली। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सवाल उठाया कि आखिर “मूर्ति को छूना ईश्वर का अपमान कैसे माना जा सकता है?” इस टिप्पणी ने पूरे मामले को फिर से चर्चा में ला दिया है। क्या है पूरा Sabarimala Temple Case? Sabarimala मंदिर के नियमों को लेकर यह विवाद वर्षों से चला आ रहा है। परंपरा के अनुसार, 10 से 50 वर्ष की आयु की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर रोक रही है। इस नियम को लेकर पहले भी देशभर में विरोध प्रदर्शन और कानूनी लड़ाई हो चुकी है। अब एक बार फिर यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, जहां अदालत धार्मिक परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन तलाश रही है। “भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी” – मंदिर पक्ष की दलील सुनवाई के दौरान सबरीमाला मंदिर पक्ष के वकील ने अदालत में दलील दी कि भगवान अयप्पा को ब्रह्मचारी स्वरूप में पूजा जाता है। इसलिए उनकी पूजा पद्धति में विशेष नियम और शुद्धता का पालन किया जाता है। वकील ने कहा कि यह परंपरा कोई नई व्यवस्था नहीं है, बल्कि सदियों से चली आ रही आस्था और धार्मिक विश्वास का हिस्सा है, जिसे उसी संदर्भ में समझा जाना चाहिए। कोर्ट का सवाल और बड़ी बहस सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह महत्वपूर्ण सवाल उठाया कि यदि मूर्ति को छूना ईश्वर का अपमान नहीं माना जा सकता, तो फिर पूजा की परंपराओं में ऐसे नियम क्यों बनाए गए हैं? यह टिप्पणी मामले को केवल धार्मिक नहीं, बल्कि संवैधानिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण बना देती है। आस्था बनाम अधिकार – फिर सामने पुरानी बहस यह मामला एक बार फिर उसी पुराने सवाल को सामने लाता है जहां एक तरफ धार्मिक परंपराएं और आस्था है, तो दूसरी तरफ समानता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार। समाज के अलग-अलग वर्ग इस मुद्दे को अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं, जिससे यह मामला और भी संवेदनशील बन जाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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