मध्य प्रदेश में ज़हरीले कफ सिरप (Poisonous Cough Syrup) से हुई 24 बच्चों की दर्दनाक मौत के मामले ने पूरे देश को हिला दिया है। इस केस में अब बड़ी कार्रवाई करते हुए SIT टीम ने श्रीसन फार्मा (Sreeson Pharma) कंपनी के डायरेक्टर जी. रंगनाथन (G. Ranganathan) को चेन्नई से गिरफ्तार कर लिया है।
जांच में निकला “486 गुना ज़हर”
मध्य प्रदेश की SIT जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि इस Cough Syrup में डायएथिलीन ग्लाइकोल (DEG) और एथिलीन ग्लाइकोल (EG) जैसे जहरीले रसायन 486 गुना अधिक मात्रा में पाए गए। ये वही केमिकल हैं जो आमतौर पर एंटीफ्रीज़ या इंडस्ट्रियल सॉल्वेंट में इस्तेमाल किए जाते हैं और मानव शरीर के लिए बेहद खतरनाक होते हैं।
बिना टेस्ट और रिकॉर्ड के बनी दवा
जांच एजेंसियों ने पाया कि कंपनी ने Cough Syrup बनाने में इस्तेमाल किया गया प्रोपलीन ग्लाइकोल (Propylene Glycol) फार्मा ग्रेड का नहीं था। यानी कंपनी ने नॉन-फार्मास्यूटिकल मटेरियल का इस्तेमाल किया।
इसके अलावा, कच्चे माल की खरीद के कोई बिल, टेस्ट रिपोर्ट या दस्तावेज़ कंपनी के पास नहीं मिले। इसका मतलब है कि दवा बनाने के सभी सुरक्षा मानकों को जानबूझकर नज़रअंदाज़ किया गया।
SIT की कार्रवाई और आगे की दिशा
SIT ने कंपनी के कई कर्मचारियों और मैनेजरों से पूछताछ की है। अब डायरेक्टर जी. रंगनाथन की गिरफ्तारी के बाद मामले में कई नए खुलासे होने की उम्मीद है।
सरकार ने स्पष्ट कहा है कि बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाएगी।
सरकार की सख्त कार्रवाई
मध्य प्रदेश सरकार ने इस घटना को गंभीर मानवीय अपराध बताया है और राज्यभर में चल रही सभी फार्मा कंपनियों की जांच के आदेश दे दिए हैं।
वहीं, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी पूरे देश में फार्मा कंपनियों के रैंडम सैंपल टेस्ट कराने के निर्देश जारी किए हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
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