अमेरिका (US) और भारत (India) के बीच ट्रेड वॉर (Trade War) तेज हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने भारतीय सामानों पर 50% तक का टैरिफ (Tariff) लगा दिया है, जिसमें 25% अतिरिक्त शुल्क रूस से तेल आयात (Russian Oil Import) जारी रखने की वजह से जोड़ा गया है। यह कदम उस समय उठाया गया, जब भारत ने डेयरी (Dairy) और कृषि (Agriculture) सेक्टर में अमेरिकी उत्पादों को बाजार पहुंच देने से साफ इनकार कर दिया।
India, Canada समेत कई देशों का सख्त रुख
भारत के साथ कनाडा (Canada), स्विट्जरलैंड (Switzerland), आइसलैंड (Iceland) और दक्षिण कोरिया (South Korea) ने भी अमेरिकी डेयरी उत्पादों को अपने बाजार में प्रवेश नहीं दिया। वहीं, कई देशों ने अमेरिकी दबाव में सीमित पहुंच की अनुमति दे दी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने दो टूक कहा कि देश के किसानों (Farmers), डेयरी उत्पादकों (Dairy Producers) और मछुआरों (Fishermen) के हित किसी भी ट्रेड डील से ऊपर हैं। उन्होंने कहा, “हम भारी कीमत चुकाने को तैयार हैं, लेकिन कृषि और डेयरी सेक्टर में किसी भी तरह का समझौता नहीं करेंगे।”
पांच दौर की बातचीत बेनतीजा
पिछले महीनों में भारत और अमेरिका के बीच पांच दौर की वार्ता हुई। भारत ने औद्योगिक वस्तुओं (Industrial Goods) पर ज़ीरो टैरिफ देने का प्रस्ताव रखा, लेकिन कृषि और डेयरी पर अपने रुख से नहीं हटा। अमेरिकी पक्ष ने इसे ‘रेड लाइन’ मानते हुए डील से पीछे हटने का फैसला किया। सूत्रों के अनुसार, गलतफहमियां, अधिक आत्मविश्वास और समय की कमी भी डील टूटने की वजह बनीं।
Tariff के असर और India की रणनीति
ट्रंप सरकार के इस फैसले से भारतीय निर्यातकों (Exporters) पर असर पड़ सकता है, खासकर टेक्सटाइल (Textile), स्टील (Steel) और ऑटो पार्ट्स (Auto Parts) सेक्टर में। भारत सरकार अब निर्यातकों को राहत पैकेज देने, नए बाजार खोजने और घरेलू खपत बढ़ाने की रणनीति बना रही है। साथ ही, अमेरिका के साथ संवाद के दरवाजे अभी पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं, और आने वाले महीनों में नई बातचीत की संभावना है।
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